Meri Jung (Restart) – New Episode
Redhat bhay xp पर मेरी कोई id नहीं thi mai us said पर sirf दो ya ten kahani hi red krta thaa jisme first mai thi मेरी jung और एक pretam da की कोई too rok lo और एक zopin bhay की dill ❤️ kaa rista और teno hi adhuri rha gaye thi
thanks bro kahani mai suru say hi post karunga kyun kee me khud iss kahani ko rewise krna chahata hoon.pr jald hi lagbhag 5-10 din mai saare update dekar kahani aage bad dunga
Welcome bhay or is kahani ko phir say start karne ke liye bohot sukriya aapka jitni juldi hu sake purane updates ko deke new updates dena suru karo Dekhte h Ajju or Nisha kee mulakat kab or kese hotha h
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Meri Jung (Restart) – New Episode
भाग 002-
कोई बुरा सपना देखने केँ कराण अचानक सें अज्जू कि आंखखुल गई। इससमय उसकादिल बहोत जोरजोर सें धड़करहा थां औऱ पूराबदन पसीने सें भीगाहुआ थां। अज्जू कुछदेर आंखें बंद करकेयूँ हि बैठारहा औऱ अपने आप् कों नॉर्मल करने कि कोशिश करतारहा। तभी उसके कानों मे मनोज, यानी मोनू कि आवाज़ सुनाई दि, जौ सीधा अज्जू केँ कमरे मे घुसआया थां।
मोनूअसल मे अज्जू कां बेस्ट फ्रेंड हैं, औऱ उसकी उम्र लगभग 22 वर्ष हैं। मोनू केँ घऱ पऱ उसके पिता रमेश, मम्मी उमाएवं उसकी बेहन रीनू, उम्र 18 वर्ष हें। यहसबलोग अज्जू कों अपनेघऱ कां सदस्य हि मानते हें औऱ अज्जू भि उन्हें अपना परिवार मानता हैं। यहां तक कि अज्जू रीनू सें रक्षाबंधन पर्र राखी भि बंधवाता हैं। वहीं दूसरी तरफ रीनू अज्जू कों मनोज कि तरह अपनासगा भइया हि मानती हैं।
मोनू-अरे दोस्त अभि तक सोरहे होँ, जल्दचल कॉलेज नहि जानां क्याँ, अगले महिने हमारे फाइनल एग्जाम हें।
मनोज अपनीधुन मे बोलता हि जारहा थां, मगर जैसे हि उसकीनजर अज्जू कि हालत तौ वो बुरीतरह सें चौंकते हुए बोला
मोनू-अरे दोस्त क्याँ हुआ तुम को?
अज्जू- कुछ नहि, बसऐसे हि।
मोनू- क्याँ फिनवही सपनाआया थां?
अज्जू- हां दोस्त।
मोनू- दोस्त मुझे तौ लगता हैं कि तुझपर किसी भूत-प्रेत कां साया हैं, तुँ किसी तंत्रिक सें पूजा-बगैरह करवा लें।
अज्जू- अरे दोस्त मे नहि मानता इनसभी कों। नां तोँ मे भूत प्रेतों कों मानता हूं औऱ नाँ हि ईश्वर कों।
मोनू- क्याँ बातकर रहा हैं? तेरे पिताजी स्वयं इतने बड़े पंडित हें औऱ तूँ ईश्वर कों नहि मानता।
अज्जू- देख भइया, ये सभीकुछ नहि होता, बस प्रकृति कों संतुलित रखने केँ लिए पुराने लोगों नें येसभी बातें बनाई हुई हें। खैर छोड़इन सबको, तूँ नहि समझेगा।
मोनू- क्याँ नहि समझूंगा? औऱ तूँ किसबेस पऱ ऐसाबोल रहा हैं?
अज्जू- हमारे धर्म मे कईऐसी बातें हें, जिन्हें हमारी आस्था केँ संग जोड़ा गय़ा हैं, औऱ वोँ इसलिये ताकि हम् प्रकृति कां मिसयूज न् करें, बल्कि उसकी रक्षा करें, ताकि हमारा ये समाज संतुलित बनारहे।
अज्जू कि बात सुनकर मोनू अपनासिर खुजलाते हुए बोला
मोनू- वोँ केसे?
अज्जू- अब मे तुझेही केसे समझाऊं। अच्छी ठीक हैं बाबा तुँ 5 मिनटरुक, मे अभि फ्रेश होकरआता हूं। फिन तुम को सारीबात डिटेल मे समझाऊंगा।
इतना बोलकर अज्जू कमरे सें बाहर् निकल गय़ा, जबकि मनोज टी.वी.ऑन करके लोकल न्यूज चैनल देखने लगा।
करीबआधे घंटेबाद अज्जू नहा-धोकर रेडी होँ गय़ा औऱ किचन मे जाकर मनोज केँ लिएगरम चाय बनाने लगा, चूँकि अज्जू केँ घऱ पऱ वोँ औऱ उसके पिता सिर्फ दोलोग हि रहते हें, इसलिये घऱ केँ अधिकतर काम अज्जू स्वयं हि करता हैं। जिस कारण मोनू केँ लिएगरम चाय बनाने केँ संगसंग वोँ अपने औऱ अपने पिता जी केँ लिए खानां बनाने कि तैयारी भि करनेलगा। तभी मनोज किचन मे आँ गय़ा औऱ बोला
मोनू-अब बता।
अज्जू- देख भइया हम् लोगकई चीजों कों धर्म सें जोड़ लेते हें, मगर उनका धर्म सें कोई संबंध नहि होता। जैसे तुलसी कि पूजा, पीपल कि पूजा बगैरह बगैरह
मोनू-हां दोस्त ये तौ सच मे अंधविश्वास हैं।
अज्जू- नहि मेरे भइया, अंधविश्वास नहि बल्कि शुद्ध विज्ञान हैं।
मोनू- मतलब?
अज्जू- अरे बाबा पहले बोलने तोँ दे, बीच-बीच मे क्यूं टोकरहा हैं, अबजब तक मेरीबात पूरी नहि होतीतब तक चुप हि रहना। देखो हमारे धर्म कां सारवेद औऱ पुराणों मे हैं, जिन्हें ऋषि-मुनियों नें लिखा हैं। वोँ लोग वास्तव मे वैज्ञानिक होते थें। जबउन लोगों नें तुलसी पर्र रिसर्च कि तोँ उन्हें पतालगा कि तुलसी मे कईऐसे तत्व हें, जिनसे कई अलग-अलग बीमारियों कां इलाज कियाजा सकता हैं, संग हि संग तुलसी मे तांबा यानि कॉपर भि पाया जाता हैं, जौ बिजली कि सुचालक होता हैं। इसीलिए जिसघऱ मे तुलसी होती हैं, उसघऱ पर्र कभी भि आकाशीय बिजली नहि गिरती हैं। उस वक़्त हमारे ऋषि-मुनियों नें सोचा होगा कि अगरये बात वोँ सीधे-सीधे आम इंसानों कों बताएंगे, तौ वोँ लोग नां तोँ इन बातों कों समझेंगे औऱ नाँ हि यकीन करेंगे। बल्कि कुछलोग तोँ ऐसे भि होंगे जौ उनका मजाक भि उड़ाएंगे। इसीलिए उन्होंने तुलसी केँ पौधे कों हमारी आस्था सें जोड़ दिया। मतलब कि उसे ईश्वर कां दर्जा दे दिया। जिसका नतीजा हम् सबके सामने हैं, आज करीब-करीब हरघऱ मे तुलसी कां पौधा होता हैं।
मोनू-बो तौ ठीक हैं मेरे भइया, पऱ पीपल
अज्जू- अरे मेरे भइया मे उसी पर्र आँ रहा हूं, जैसा कि तुँ भि जानता हैं कि पीपल एक् केवलऐसा पेड़ हैं, जौ रात मे भि ऑक्सीजन छोड़ता हैं, इसलिये हमारे ऋषि मुनियों नें पीपल कों भि हमारी आस्था सें जोड़ दिया थां। रहीबात हमारे ईश्वर यानिराम, कृष्ण कि, तोँ भइया उन्हें किसने देखा हैं, किसी नें भि नहि। वास्तव मे मेरा तोँ मानना ये हैं कि राम, कृष्ण बहोत पहलेआम इंसान रहे होंगे। पऱ उन्होंने हमारे समाज मे रहने केँ लिएकुछ नियम बनाए होंगे। चूँकि इंसान कि फितरत होती हैं कि अपने सें शक्तिशाली इँशान कि हि बात मानता हैं, औऱ अधिकतर कामडर कि वजह सें हि करता हैं। इसलिये ईश्वर शब्द कि रचना कि गई, जौ सर्व शक्तिमान हैं, सर्व व्यापी हैं, जोँ कुछ भि कर सकता। जिस कारण हम् इंशान ईश्वर सें डरनेलगे। हमारे ऋषि मुनियों नें यही ईश्वर शब्दराम, कृष्ण औऱ दूसरे देवी देवताओं पऱ लागूकर दिया। ताकि उनके बनाऐगए नियमों एवं सिद्धांतों कां पालन होँ सके, औऱ देखोआज वोँ लोग अपनेकाम मे सफल भि हें।
मोनू- मतलब कि तुँ मानता हैं कि ईश्वर नहि होते हें
अज्जू- नहि ऐसा नहि हैं। मे ईश्वर कों मानता हूं, पऱ मेरीनजर मे ये प्रकृति हि ईश्वर हैं। राम, कृष्ण कि पूजा कि स्थान अगर मे उनके सिद्धांतों पऱ चलता हूं, तौ ये उनकी पूजा सें भि बढ़कर होगा।
मोनू-बोल तोँ तुँ सहीरहा हैं। इसतरह सें तौ मैंने कभी सोचा हि नहि।
उन दोनों कि इन्हीं बातों केँ दौरान गरमचाय बनकर सजधजकर हौ चुकी थि। इसलिये अज्जू नें दोकप मे गरमचाय छानकर मनोज कों दे दि, चूँकि अज्जू गरमचाय, कप कॉफ़ी, सिगरेट इन सबकीकोई आदत नहि थि। इसलिये मनोज एक् कप उठाकर स्वयं पीनेलगा औऱ दूसरा कप अज्जू केँ पापा कों देनेचला गय़ा। इस दौरान अज्जू खानां बनाने लगा, तभी मनोज भागता हुआआया औऱ बोला
मोनू-अरे भइया तेरी बातों मे आकर मे ये बताना तौ भूल हि गय़ा कि जियाघऱ पऱ आई हुइ हैं।
जियाअसल मे मनोज कि फूफी जी कि लड़की हैं औऱ अज्जू औऱ मनोज कि हम् उम्र भि हैं। जिस कारण तीनों आपस मे अच्छे साथी भि हें।
अज्जू- अरे तेरी तौ। जोँ बात सबसे पहले बतानी थि, वोँ बात तूँ अबबता रहा हैं। लगता हैं आज पंगा होगा हि होगा।
मोनू- नहि होगा। मे उससे पहले हि बोलकर आया हूं कि हम् यहा सें सीधे कॉलेज जाऐंगे, औऱ वापसी मे तूँ मेरेघऱ पर्र आकर उससे मिलेगा, क्योंकि आज हमारा टेस्ट हैं, औऱ मे प्रिंसिपल कि डाँट नहि सुनना चाहता, समझा।
अज्जू- समझ गय़ा मेरे भइया। बैसे खानां तैयार हैं। तूँ खाएगा क्याँ
मोनू-हाँ क्यूं नहि। दोनों भइयासंग मिलकर खाएंगे।
मोनू कि बात सुनकर अज्जू नें जल्दी एक् प्लेट मे दोनों केँ लिए खानां निकाला औऱ फिन दोनों हॉल मे बैठकर खानां खानेलगे, खानां ख़त्म करने केँ बाद वोँ दोनों कॉलेज केँ लिए निकलगए।
स्टोरी जारी हैं.
i have special thanks too Siraj bhay and spritemathews for give mai my kahani backup. thanks too both of you bro. ab mere pass "Meri jung" kaa last update bi h. so dear jald hi ap sabhi ko new update milne lagenge. thanks too all of you dear dosto.
Meri Jung (Restart) – New Episode
भाग 003-
कॉलेज सें वापिस आते वक्त मोनू अज्जू सें इसबात कों लेकर झगड़ा कररहा थां कि
“अज्जू नें टेस्ट मे मोनू हेल्प क्यूं नहि कि”।
पऱ अज्जू तोँ पुरानी यादों मे खोयाहुआ खामोशी सें चलताहुआ मोनू कि घऱ कि तरफजा रहा थां। वोँ इस टाइम जिया केँ बारे मे सोचरहा थां। वैसे तौ जिया मनोज कि फूफी कि लड़की हैं, पऱ अज्जू जिया औऱ मोनूआपस मे अच्छे फ्रेंड हें। अज्जू जिया कों भि बेहन कि तरह हि मानता थां, जब तक कि जिया नें अज्जू कों प्रपोज़ नहि किया थां, औऱ अज्जू याद करनेलगा वोँ दिनजब पिछली बार जिया मोनू केँ घऱआई हुईँ थि। उस टाइम वोँ लोग मिलकर खूब मस्ती कररहे थें।
एक् दिनउन लोगों कां खेतों पर्र जाने कां प्रोग्राम बना, जिसके बाद औऱ अज्जू, मोनू, रीनू औऱ जिया मोनू केँ खेतों पऱ घूमने चलेगए। जहाँ पऱ वोँ लोग एक् पेड़ केँ नीचे बैठकर आपस मे बातें करतेहुए कच्चे चनेखा रहे थें, तभी रीनू कां मनबेर खाने कां करनेलगा। तौ मोनूउसे थोड़ी दूर लें गय़ा, जहाँबेर लगेहुए थें। मगर अज्जू औऱ जियाअब भि उसी स्थान अकेले बैठेआपस मे बातें कररहे थें।
जिया- अज्जू मुझे तुमसे कुछबात करनी हैं।
अज्जू- हुम्म बोलो
जिया-यहा नहि अकेले मे
अज्जू- अकेले हि तौ हें। कहो क्याँ बात हैं
जिया- नहि यहा नहि। एक् काम करते हें हम् लोगनहर केँ पास चलते हें, वहीं बैठकर बात करेंगे। येबात जिया नें थोडा सीरियस होकरकही थि।
अज्जू- ठीक हैं चलो।
अज्जू भि जिया कि बात सुनकर थोडा सीरियस हौ गय़ा थां औऱ मन हि मनसोच रहा थां कि "पता नहि क्याँ बात करनी हैं"। चूँकि अज्जू नें जिया कों कभी भि गलतनजर सें नहि देखा थां, येबात मोनू औऱ उसके परिवार वालों कों भि अच्छी तरह सें पता थि, इसलिये जब भि अज्जू औऱ जिया अकेले बैठकर बातें करते थें, तौ कोई भि उन दोनों पर्र शक नहि करता थां। वहां सें जाते वक़्त अज्जू ज़राजोर सें मोनू सें कहा
अज्जू- अरे दोस्त मोनू हम् लोगनहर पर्र जारहे हें, तुम् आँ रहे हौ क्याँ।
अज्जू कि बात सुनकर मोनूउसे मना करतेहुए बोला
मोनू- हम् लोग यहींठीक हें। तुम् लोगघूम आओ
मोनू कि बात सुनकर अज्जू औऱ जियानहर केँ पास घूमने चलेगए। नहर पऱ पहुँचकर दोनों अपनेपेर नहर केँ पानी मे डालकर बैठगए। नहर कां ठंडा-ठंडा पानी जैसे हि उनके पैरों मे लगा, तोँ उनकी पूरी थकानउतर गई। तभी अज्जू नें जिया सें कहा
अज्जू- कहो क्याँ बात हैं।
जिया- I love you
जिया कि बात सुनकर पहले तोँ अज्जू बुरीतरह सें चौंक गय़ा औऱ जिया कों गौर सें देखने लगा। मगर कुछ हि देरबाद वोँ जोरजोर सें हंसने लगता। अज्जू केँ यूँ हंसने सें जिया चिढते हुए बोलीं
जिया-हंस क्यूं रहे होँ
अज्जू- अरे छिपकली। जबऐसा मजाक करेगी तोँ हंसूंगा नहि तौ औऱ क्याँ करूँगा
जिया- अज्जू I am serious
इसबार जिया कि बात सुनकर अज्जू कों क्रोध आँ गय़ा औऱ वोँ गुस्से मे जिया सें बोला
अज्जू- ये क्याँ बकवास हैं जिया। आज कियासो कियामगर आज केँ बादऐसा मजाकफिन कभीमत करना
जिया- मे मजाक नहि कररही हूं। मे सच मे तुमसे प्रेम करनेलगी हूं। मैंने कईबार तुम्हें मोनू कि तरह हि भइया कि नजर सें देखने कि कोशिश कि, पर्र जितना मैंने स्वयं कों रोका, उतना हि तुम्हारे लिए मेरा प्रेम बढ़ता चला गय़ा।
जिया कि बात सुनकर अज्जू सीरियस होतेहुए बोला
अज्जू- मगर मैंने तौ तुम्हें हमेशा बेहन कि नजर सें हि देखा हैं।
जिया- तौ फिनअब मुझे प्रेम कि नज़र सें भि देखलो
अज्जू- नहि देख सकता
जिया- क्यूं? आखिर तुम् मुझे प्रेम कि नजर सें क्यूं नहि देख सकते। क्याँ मे हसीन नहि हूं।
जिया कि बात सुनकर अज्जू कों झटकालगा। वास्तव मे अज्जू नें कभी जिया कों गौर सें देखा हि नहि थां। क्योंकि उसकाकभी कोईगलत इरादा नहि रहा, मगर आज जिया कि बात सुनकर उसने पहलीबार जिया कों गौर सें देखा। जिया दूधिया सफेदरंग कि एक् बेहद हसीन लड़की थि, जिसका फिगर लगभग 32-28-34 कां होगा, जोँ आज पिंक टी-शर्ट औऱ डार्क ब्लू जीन्स मे अज्जू केँ एकदमपास मे बैठी हुईँ थि। जिया केँ बालइस वक़्त खुलेहुए थें, जौ हवा केँ संग लहरारहे थें। बालों कि एक् लट बार-बार उसके चेहरे पऱ आँ रही थि, जिसे वोँ बारबार चिढते हुए अपने हाथों सें हटारही थि। तभी अचानस केँ जिया दोबारा सें अज्जू सें सबाल किया
जिया- अज्जू बताओ नाँ। क्याँ मे हसीन नहि।
पऱ अज्जू कों कुछ सुनाई देतब नाँ। वोँ तोँ इस वक़्त बस जिया केँ गुलाबी होठों कों हिलते हुएदेख रहा थां। वक़्त जैसे उसकेलिए रुक गय़ा थां। तभी जियाउसे झंझोडते हुएफिन सें बोलि
जिया- बताओ नं क्याँ मे हसीन नहि हूं
इसबार अज्जू कों एक् झटकालगा औऱ वोँ हड़बड़ाते हुए बोला
अज्जू- हां नहि मेरा मतलबहां मेरा मतलब नहि उफ्फ्फ्फ्फ् दोस्त.
इतना बोलकर अज्जू अपने हाथों कों अपनेसिर पर्र रखकरकुछ देरयूं हि शांत बैठारहा औऱ फिन सीरियस होकर बोला
अज्जू- जिया तुम् बहोत हसीन होँ, पऱ मे तुम्हारे लायक नहि हूं। प्लीज भूलजाओ येसभी
जिया- क्याँ कहा तुमने कि तुम् मेरे लायक नहि हौ? अरे बाबाकभी देखा हैं अपने आपको। तुम् अच्छे खासे हैंडसम हौ, स्टाइलिश भि होँ, तुम्हारी बॉडी भि एकदम माचोमैन कि तरह हैं, अच्छा खासागा लेते होँ, डांस भि अच्छा कर लेते होँ, संग हि संग पढ़ाई मे भि हमेशा टॉप करते हौ औऱ सबसेखास बात तुम्हारा दिल एकदमसाफ हैं। इसके अलावा किसी लड़की कों औऱ क्याँ चाहिए।
अज्जू- तुम् मेरीबात समझी नहि। असल मे मेरी हैसियत तुम्हारे लायक नहि हैं। तुम्हारे पिता ए क्लास गवर्मेंट आफिसर हें औऱ मे एक् साधारण परिवार सें हूं।
जिया- प्रेम हैसियत देखकर नहि होता औऱ जब काबिलियत होती हैं तोँ हैसियत अपने आप् हि बन जाती हैं।
अज्जू- नहि। मे अपनेयार केँ संग धोखा नहि कर सकता।
जिया- सीधे-सीधे मनाकर दो नां। इतने बहाने क्यूं बनारहे हौ।
अज्जू- देखो जिया मैंने कभी भि तुम्हारे बारे मे ऐसाकुछ सोचा हि नहि हैं औऱ नां हि मे कभी सोचना चाहता हूं। नां तोँ मे तुम्हारे लायक हूं औऱ न् हि मे अपनेयार केँ संग धोखाकर सकता हूं। अब तुम् जौ चाहोसोच सकती होँ मेरे बारे मे। पर्र मेरी तुमसे एक् रिक्वेस्ट कि येबात मोनू कों पता नहि चलनी चाहिए। एक् हि तौ यार हैं मेरा, जौ अपना भइया समझता हैं मुझे। मे नहि चाहता कि तुम्हारी बजह सें हमारे बीच दूरियां आँ जाएं।
ये बोलते समय अज्जू कि आंखें नम होँ गईं थि, जबकी दूसरी तरफ अज्जू कि बात सुनकर जिया कि आँखें भि झलकआईँ थीं, वोँ करीब रोतेहुए बोलि
जिया- क्याँ तुम् मुझे इतना गिराहुआ समझते हौ अज्जू।
मगर जैसे हि जिया नें अज्जू कि आंखों मे देखा तौ उसकेमन मे एक् टीसउठी, वोँ अपने आंसुओं कों पौछते हुएमन हि मन सोचने लगी
“मे भि देखती हूं कि तुम् कब तक मुझेमना करोगे”
पऱ पता नहि केसे अज्जू नें जिया कि आंखों मे उसकेमन कि बात कों पढ़ लिया, इसलिये वोँ बिनाकुछ कहेवहा सें उठकरचला गय़ा।
कथा जारी हैं.
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