mummy aur maira new rishte – New Episode
कुछदिन बीते हि थें। मैंने माँ कों मोबाइल लगाया.
मे: क्याँ मां आप् तोँ याद भि नहि करती.
माँ: ऐसीबात नहि हैं, ये तेरी किसने कहा.
मे: जब सें आया हूं करीब-करीब 6 दिनबीत चुके हें आप् तोँ मोबाइल भि नहि करती.
मां: मे तोँ मोबाइल करने वाली थि मगर मेरा मोबाइल हि बिगड़ गय़ा हैं। दूसरा मोबाइल तेरे बापू केँ पास हैं वो घऱरात कों देर सें आते हें तोँ मैंने सोचा क्यूं परेशान करूं इतनीरात कों तेरी.
मे: आपसे मुझे क्याँ तकलीफ़ होगी। मुझे तोँ आपकी बहोत यादआती हैं.
माँ: याद मुझे भि बहोत आती हैं राहुल। तुबस जल्द सें आजा यहां पर्र। ये सुनकर मेरा तौ मनहुआ कि मे बस जल्दी वहां पहुंच जाऊं.
मे: बसकुछ दिन औऱ.
मां: ठीक हैं मे प्रतीक्षा करूंगी.
मे: इसबार मे आऊंगा तौ क्याँ-क्याँ करेंगे (गलती सें बोल पड़ा).
माँ: क्याँ मतलब क्याँ करेंगे.
मे: (बात कों घुमाते हुए) मतलब कहीं घूमने चलें.
मां: ये अच्छा आईडिया हैं। पर्र तेरे बापू कों फुर्सत हि कहां हैं। कंपनी सें छुट्टी भि नहि मिलेगी नां ज़्यादा सें अधिक हम् कहींबस एक् दिन केँ लिएजा सकते हें.
मे: क्यूं नां हम् दोनों चले। संगीता कों भि लें चलेंगे। वो तौ चली सकती हैं.
माँ: सहीकह रहा हैं। क्यूं नाँ अपने देहात चले। जहां प्राकृतिक ताजीहवा हैं, हसीन नजारे औऱ बाग बगीचे हें। घूमना फिरना भि हौ जाएगा औऱ देहात कि वो लाइफ भि हम् एंजॉय कर सकेंगे वैसे भि बहोत दिन होँ गय़ा देहात गएहुए.
मे: ठीक हैं.
माँ: अभि मोबाइल रख मुझे थोडा साफ सफाई कां काम करना हैं, अपना ख्याल रखना.
मे बहोत रोमांचित होँ उठाये सभी सुनकर। हमारा देहात 400 किलोमीटर कि दूरी पर्र थां तोँ वहांबस सें भि आसानी सें जायाजा सकता थां। ऐसेदिन बीते बीते वो दिन आँ हि गय़ा जब मेरी पढ़ाई पूरी होँ गई औऱ मे अगले हि दिनघऱ जाने वाला थां सुभह। मेरे खुशी कां तोँ ठिकाना हि नहि थां।
तभी मैंने सोचा क्यूं न् जाकर माँ केँ लिए एक् साड़ी लें दूंउसे भि अच्छा लगेगा। साम कां वक़्त थां मे जल्दी मार्केट कि ओर गय़ा औऱ मां केँ लिए एक् हसीन सि आसमानी रंग कि साड़ी लिया।
सेल्स गर्ल: आप् मात्र साड़ी लें जाओगे।
मे: क्यूं औऱ क्याँ लेना होता हैं।
सेल्स गर्ल: इससे मैचिंग पेटिकोट भि तौ लेना होता हैं।
मे: ओहां! मे तौ भूल गय़ा थां। औऱ भि कुछ लेना होता हैं? (मे फिन सें हिचकते हुए पूछा)।
सेल्स गर्ल: नहि पऱ अगर आप् उपहार कररहे हौ तौ मैचिंग ब्रा औऱ पैंटी भि लें सकते होँ। अगर वो आपकी गर्लफ्रेंड हौ याँ फिन आपकी वाइफ।
मैंने सोचा कि बात तौ येसही कहरही हैं पऱ मां कां ब्रा साइज मुझे अभि भि पता नहि थां। मां कि पैंटी कां साइज मुझेपता थां क्योंकि मे बहोत बारउसे देखा थां।
सेल्स गर्ल: क्याँ हुआसर।
मे: मुझे ब्रा कां साइजपता नहि हैं।
सेल्स गर्ल: पैंटी कां पता हैं? (बोलते वक़्त मुस्कुरा रही थि).
मे: हां xl साइज हैं।
सेल्स गर्ल:समझ गई तोँ ब्रा 36 कां होगा।
मे: आपको केसेपता।
सेल्स गर्ल:अरे सर मेरा तोँ सुबह-शाम कां येकाम हैं।
क्योंकि संगीता कों बुरा नां लगे। इसीलिए मैंने उसकेलिए भि एक् जींस औऱ टॉप लेँ लिया.मगर उसके ब्रा पैंटी कां साइज मुझे बिल्कुल भि पता नहि थां इसीलिए मे रहने दिया औऱ पिताजी केँ लिए एक् घड़ी। मे वापस हॉस्टल जाकर अपना सामान पैक करनेलगा। माँ औऱ संगीता केँ लिए कपड़े जोँ लिए थें वो भि रखलिए। उसरात चैन सें सो गय़ा अगली सुभह केँ प्रतीक्षा मे।
अगलेदिन मे फटाफट रेडी होकरघऱ केँ लिए रवाना हौ गय़ा। सफर मे येसोच रहा थां कि मे किसतरह सें मिलूंगा माँ औऱ संगीता सें। जाते हि अपनी बाहों मे भर लूंगा याँ फिन नॉर्मल तरीके सें मुलाकात करूं.फिन सोचा देखा जाएगा। औऱ ख्याल आया, माँ केँ लिए जौ मैंने ब्रा औऱ पैंटी ली हैं। क्याँ उसे देनासही होगा? क्योंकि आज तक मैंने कभीइस तरह कि चीज तौ मां कों नहि दिया। एक् संकोच मेरेमन मे थां कहीं वो बुरा नां मानजाए। मैंने उसे ब्रा पेंटी नहि देने कां फैसला किया। क्योंकि मे जैसे तैसे उसका भरोसा जीता हैं। कुछदेर बाद मेराघऱ आँ गय़ा।
घऱ पहुंचते हि मैंने देखा मम्मी चौखट पऱ हि बैठी थि। मां मुझेदेख जल्दी खड़ी होँ गई। मे बताना भूल गय़ा। हमारा घऱ एक् शांत स्थान पर्र थां जहां बहोत कमघऱ थें। हमारे आसपास केँ घऱ थोड़ी-थोड़ी दूरी पऱ थें। फिन भि लोग तोँ होते हि थें दिन मे। औऱ यही मेरा पहला प्लान तोँ फेल होँ गय़ा। मगर जल्दी गले तोँ नहि लग सकता क्योंकि वो बाहर् बैठी थि औऱ लोग भि थें आसपास मे। इसवजह सें मे अचानक गले नहि लग सकता थां पूरीतरह सें जकड़कर। इसीलिए मे हल्के सें उसके कंधे केँ लगभग गय़ा औऱ फिनहट गय़ा।
घऱ केँ अंदर जाते हि मुझे संगीता मिली.उसे मे नहि छोड़ा अपने सीने सें लगाकर उसे चिपक गय़ा औऱ वो भि खुशि सें मेरासंग देरही थि। जैसा कि मे आपको बताया संगीता बिल्कुल भि गलत नहि सोचती थि। संगीता बहुत खुले विचारों वाली लड़की थि जोँ छोटे-मोटे बातों पर्र ध्यान नहि देती थि। इतने दिनों बादफिन सें मे किसी लड़की कों गले लगाया थां। मेरी मां सामान अंदर लेकर गई। मां नां सही, संगीता भि भरपूर आनंददे रही थि। उसकी बालों कि खुशबू मनमोहक थि। कुछ लम्हा बीते हि थें.
संगीता: चलो भैया अब जल्द सें खानां खालोफिन आराम करना.
मां: राहुल तुँ तौ थक गय़ा होगा नां। जल्द सें नहा लेँ औऱ फिन खानां खाकर आरामकर।
मे: आरामबाद मे मां मे आपकेलिए कुछ लेकरआया हूं। माँ: सच मे।
मे: औऱ संगीता केँ लिए भि।
मे कमरे मे गय़ा अपनाबैग खोला औऱ पहले संगीता कों उसके कपड़े दिए। जौ मैंने उसकेलिए लिए थें। वो बहोत खुश हुईँ। फिन मे साड़ी निकाला औऱ हिम्मत करके जोँ ब्रा पेंटी माँ केँ लिएली थि साड़ी केँ बीच मे डाल दिया औऱ माँ केँ पास जाकरउसे साड़ी दिखाई।
मां: अरेवाउ मेरेलिए हैं?
मे: हां मां हम् देहात चलेंगे तोँ आप् यही पहनना।
मां: बहोत हसीन हैं। ठीक हैं।
माँ नें पैकेट कों जब अच्छे सें खोलना शुरुआत किया तौ मे थोडा घबरा गय़ा। माँ नें ब्रा पेंटी देखली तभी मैंने उसके चेहरे कों। देखा तौ उस पर्र लज्जा औऱ क्रोध एक् संगनजर आया।
माँ: ये क्याँ हैं।
मे: दुकान वाले नें दे दिया। बोलि साड़ी केँ संगये नीलेरंग कि हि ब्रा पेंटी मैच करेगा।
माँ: ये तुम्हें किसने कह दिया। तूँ झूठबोल रहा हैं। बोलरहा हैं नां?
मे: नहि माँ।
माँ: नहि तोँ इसका साइज तुम्हे केसेपता।
मे: सेल्स गर्ल नें बस पूछा थां आपकी माँ कैसी दिखती हैं जिसको देना हैं। तोँ मैंने उससेकहा कि मुझे नहि पता नां अधिक पतली नाँ ज़्यादा मोटी। उसने अपने हिसाब सें दे दिया.
मां: पागल कहीं कां। क्याँ-क्याँ करता रहता हैं।
मे: क्याँ मां इतने प्रेम सें तौ आपकेलिए साड़ी लाया औऱ आप् नाराज होँ रही होँ।
मां: बात साड़ी कि नहि हैं पऱ येसभी करने कि क्याँ जरूरत हैं।
मे: कोईबात नहि तौ येकाम हि आएगी नां। जिसदिन साड़ी पहनना उसे भि पहन लेना।
माँ कि आंखें बड़ी होँ गई।
मां: (अचानक हंसते हुए) मारूंगी तुम्हे मे।
मे: अच्छा सॉरी सॉरी।
माँ: चलअबनहा लें औऱ जल्द सें खानां खा लें।
मुझे शांति मिलीअब डर कि कोईबात नहि थि।
रातहुआ तोँ हम् सभी खानां खाने केँ लिए बैठे।
माँ: औऱ सभीखा कर जल्दसो जानां। कल हमें देहात जानां हैं।
मे: कितने बजे निकलेंगे यहां सें।
मां: सुभह 6:00 बजे.
खाने केँ बाद हम् अपने-अपने कमरे मे चलेगए औऱ मां बापूहाल मे सोने वाले थें। संगीता औऱ मे रात कों संग मे हि सोए थें.क्योंकि अगलेदिन देहात जानां थां, वो भि बहोत खुश थि।
मे: क्याँ हुआ संगीता जल्द केसेसो रही होँ?
संगीता: कल देहात जानां हैं नां। इसीलिए कोशिश कररही हूं कि जल्दसो जाऊं तौ हम् सुभह जल्दउठ सके। आप् भि सोजाओ।
मे: हांबस थोड़ी देर मे सोरहा हूं। औऱ मे मोबाइल चलाने लगा।
संगीता आहिस्ता नींद मे जा चुकी थि। मुझे वो रातयाद आँ गई जब बापू मां सेक्स कररहे थें। कहींफिन सें सेक्स तौ नहि कररहे। ये देखने केँ लिए मे उठा औऱ धीरे-धीरे सें कमरे केँ बाहर् गय़ा। मैंने देखा कि आजकोई पर्दा नहि थां औऱ नां तोँ वो सेक्स कररहे थें। दोनों गहरी नींद मे सोएहुए थें।
मे वापस कमरे मे आया औऱ संगीता सें लिपटकर सो गय़ा। उसकी वो मनमोह लेने वाली खुशबू। मुझे बेचैन कररही थि। मैंने उसकोफिन सें कसकर पकड़ अपनी बाहों मे उसकी होंठ मेरे होंठ केँ पास हि हैं। मैंने कोशिश कि उसे चूमने कि पऱ मात्र ऊपर सें हि चूम पाया। जैसे मां केँ होंठ रसीले औऱ जूसी थें। उस रसीलेपन कां एहसास मुझेआज नहि हुआ। क्योंकि संगीता होंठ नहि खोलरही थि। मे भि अपने जांघे उसकी जांघों केँ बीच फंसाकर सो गय़ा।
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अगली सुभह हम् तीनों सजधजकर होनेलगे। हम् देहात जारहे थें इसलिये संगीता नें कोई मॉडर्न कपड़ा नहि पहना थां। उसनेलाल रंग कि कुर्ती औऱ स्लैक्स पहनी थि। औऱ मां मेरा दियाहुआ साड़ी पहनी थि। माँ उस साड़ी मे बहोत जचरही थि। मगर मे सोचरहा थां। क्याँ मां नें मेरा दियाहुआ पैंटी औऱ ब्रा भि पहना होगा कि नहि ये केसेपता चलेगा। येचेक करने केँ लिए मे धीरे-धीरे सें माँ केँ पीछे गय़ा जब वो सामान पैककर रही थि औऱ उसे थोडा पकड़ने कां कोशिश किया। बातों बातों मे हि मे उसकी ब्रा देख्ना चाहता थां.
मां: ओहो क्याँ कररहा हैं.
मे: कुछ नहि हम् देहात जाने वाले हें नां इसलिये मे बहोत खुश हूं.
औऱ ये कहते-कहते मैंने ऊपर सें ब्लाउज थोडा सां कंधे सें सरका दिया। तोँ फिन मुझे नीलेरंग कि ब्रा कि स्ट्रिप दिखाई दिया औऱ येदेख बहोत खुशहुआ कि उसनेवही ब्रा पहना हैं जोँ मैंने दिया थां, पेंटी भि मेरा हि दियाहुआ पहनी होगी.
सजधजकर होने केँ बाद देहात कि तरफ निकल पड़े। हम् तीनों खुश थें मगर तीनों कि खुशी कि वजह अलग-अलग थि। माँ अपने पुराने रिश्तेदारों सें मिलने केँ लिएखुश थि, संगीता देहात घूमने केँ लिए औऱ मे इन दोनों केँ संगसमय गुजारने केँ लिए.
हम् बस मे बैठगए। संगीता विंडो कि तरफ मे बीच मे औऱ माँ मेरेबगल मे। जैसे-जैसे बस मे झटकालग रहा थां। दोनों केँ मम्मों मेरे मे टकरारहे थें। वो दोनों कि रसीले गोलगोल मम्मों। मेरे लन्ड मे तीव्र ऊर्जा पैदाकर दि। मेरा तोँ हालत खराब हौ गय़ा इन दोनों सुंदर हसीनाओं केँ बीच औऱ थोड़ी देरबाद हि मे सोने कां नाटक करतेहुए। अपनासर मां केँ कंधे पर्र रख दिया।
आहिस्ता हम् देहात पहुंच चुके थें। तभी माँ नें मुझे उठाया। फिनजब हम् घऱ पहुंचे, उधर मामीजी हमारा प्रतीक्षा कररही थि। मामीजी नें हमारा स्वागत किया.उस घऱ मे मात्र मामाजी औऱ मामीजी रहते थें। उनकेदो बेटे थें औऱ वो दोनों बाहर् जॉब करते थें औऱ उनकी बेटी प्रिया थि जोँ कि संगीता कि उम्र जितनी थि। हमेंदेख वो लोग भि बहुतखुश हुए.
वो एक् ट्रेडिशनल स्टाइल कां प्राचीन देहात कां घऱ थां। पहले मुख्य दरवाजा औऱ बीच मे आंगन, आंगन केँ चारों तरफघऱ। आंगन केँ पीछे बाथरूम। कुलचार कमरे थें। जिसमें सें एक् वो स्टोर रूम कि तरह इस्तेमाल करते थें। एक् मे मामाजी औऱ मामीजी रहते थें औऱ एक् रूम प्रिया केँ लिए थां औऱ अंतिम रूम गेस्ट केँ लिए थां। जिसमें हम् तीनों रुकने वाले थें.
तभी प्रिया नें कहा,
प्रिया: संगीता। तुम् मेरेसंग मेरे कमरे मे चलो। फूफी औऱ राहुल उस कमरे मे रह लेंगे.
मे तोँ बहोत खुशहुआ क्योंकि अब केवल मे औऱ मां रहने वाले थें एक् कमरे मे.
मामीजी: दिदी आप् लोग एडजस्ट तोँ कर लेंगे नां क्योंकि एक् हि बेड हैं उसे कमरे मे.
येबात मां भि जानती थि हम् दोनों एक् बेड पऱ पहले भि एडजस्ट कर चुके हें। तौ कोई दिक्कत नहि थां.
माँ: हांहां कोई दिक्कत नहि हैं.
मामीजी: ठीक हैं तोँ आप् लोग अभि आरामकर लीजिए। साम कों हम् चलते हें बगीचे कि तरफ घूमने। वहांइसी बहाने राहुल औऱ संगीता देख तोँ लेंगे देहात कितना हसीन होता हैं.
पिछली बार तोँ मेरा नसीब अच्छा थां कि कमरे केँ अंदर हि बाथरूम थां। जिससे मैंने मां कां हर एक् अंग देखा थां मगरइस बारऐसा नहि थां बाथरूम आंगन सें पीछे कि ओर थां। हम् आराम करने केँ बादसाम कों बगीचे कि तरफ घूमने गए। मामीजी नें हमें पूरा बगीचा घुमाया औऱ देहात केँ लोगों सें भि मिलवाया। क्योंकि हमारा आनां जानां बहोत कम थां। मां कों तोँ हरकोई जानता थां मगर मुझे नहि। साम कों हम् सभीजब वापसआए। औरतें मिलकर खानां बनाने लगेरात केँ लिए.
मामीजी: आज हम् सभी एक् काम करते हें छत पऱ खानां खा लेते हें। चांद कि रोशनी मे खाने कां आनंद हि कुछ औऱ हैं.
माँ: हांसही कहरही होँ.
हम् सभीछत पर्र खानां खाने केँ बाद मेरा ध्यान भटकने लगा। मामीजी कि हुस्न कुछकम नहि थि। उनकी भि करीब-करीब 46 साल केँ आसपास माँ जैसी थि। फिन मेरे दिमाग़ मे एक् हि चीजआया कि केसे भि करके नीचेचले जाएं सोने केँ लिए। क्योंकि मे मां केँ संगसमय बिताना चाहता थां। ढेर सारी बातें करने केँ बाद। हम् अपने कमरे मे चलेगए.
क्योंकि सोने कां वक़्त थां। मां नें कल कि साड़ी निकाल, हल्की साड़ी निकली जौ कि आरामदायक थि। उसे पहनने कां सोचा। मुझेलगा शायद वो बाथरूम मे जाकर चेंज करेगी.
मां: अरे राहुल तुम्हे चेंज नहि करना क्याँ?
मे: हां करना हैं नाँ.
मां: तोँ कर लेना.
मे: आप् चेककरो फिन मे जाता हूं.
मां: कहां जानां हैं?
मे: बाथरूम मे जानां हैं नां आपको.
माँ: अरे नहि यहीं पऱ होँ जाएगा.
ये सुनकर मे चौंक गय़ा। क्याँ सच मे मां यहीं पऱ कपड़े चेंज करेगी। औऱ बातों बातों मे उसने अपनी साड़ी कां पल्लू हटा दिया। वो मेरे सामने मात्र ब्लाउज मे थि। ऐसालग रहा थां उसे पहले कि कुछ भि बातें याद नहि हैं जौ हम् दोनों केँ बीचहुआ थां। वो अब मुझे बहोत हि शरीफ औऱ भरोसेमंद समझने लगी थि। औऱ ममता केँ कारण मे उसकी नजरों मे एक् अच्छा बेटा बन चुका थां.
उसकेदो बड़े-बड़े बूब्ज़ ऐसालग रहा थां जैसे ब्लाउज कों फाड़ केँ बाहर् आएंगे। औऱ उसने साड़ी कों जमीन पर्र गिरा दिया। मात्र ब्लाउज औऱ पेटीकोट मे मेरे सामने खड़ी थि। उसका पूराकमर औऱ गहरी नाभिसाफ झलकरहा थां। मुझेलगा शायद ब्लाउज भि चेंज करें.मगर उसनेऐसा नहि कियाबस हल्के साड़ी कों लेकर पहनने कि कोशिश कररही थि औऱ तभी उसकीनजर मुझ पर्र पड़ी जौ मे उसेदेख रहा थां.
मां: अरेदेख क्याँ रहा हैं तूँ फटाफट बदल लेना कपड़े.
मे: हांहां जारहा हूं.
तभी मैंने अपनीनजर हटा दि औऱ मे भि अपना पेंट उतार दिया। मां साड़ी लपेट हि रही थि औऱ मे केवल अंडरवियर मे खड़ा थां। मे भि देखा उसकी एक् नजरमुझ पऱ पड़ी। पऱ जल्दी चेहरा घूमा लिया दूसरी औऱ मे भि जल्द सें बॉक्सर पहन लिया औऱ हम् सोने केँ लिएबेड पर्र लेट हैं.
माँ तोँ सो चुकी थि। मगर मुझे नींद नहि आँ रही थि औऱ तभी पेशाब लग गय़ा। क्योंकि येनई स्थान थि औऱ बाथरूम भि दूर पीछे कि औऱ थां। मैंने सोचा कि माँ कों उठाकर लेँ जाओसंग मे। रात कां टाइम थां औऱ देहात कां माहौल। मैंने माँ कों उठाया.
मां: क्याँ हुआ.
मे: मुझे पेशाब लगा हैं.
मां: तोँ जानां जाकरकर लेँ.
मे: नहि आप् भि चलो नां संग मे.
मां: कैसीबात कररहा हैं। मे क्याँ करूंगी आके?
मे: डरलगरहा हैं.
माँ: हे ईश्वर इतना बड़ा हौ गय़ा तब भि डरता हैं। ठीक हैं चल.
हम् जब आंगन सें पीछेगए तोँ देखा वहांकोई लाइट नहि थां। अंधेरा थां बस चांद कि रोशनी थि.
मे: बाथरूम मे तोँ पूरा अंधेरा हैं.
मां: अच्छा कामकर थोडा आगे झाड़ियां कि तरफ खुले मे कर लें.
माँ: अच्छा हुआ तूने मुझेउठा दिया.सच मे डरावना हैं.
मे: आप् आओ नां थोडा इधर.
मुझेकुछ होना इसलिये वो भि थोडा आगेआई औऱ मेरे बहोत लगभग थि.
माँ: ठीक हैं यहांकर लें.
क्योंकि वो इतने लगभग सें हैं उसका ख्याल मेरेमन मे थां हि। इससे मेरे लन्ड मे थोडा तनाव थां। अपना लन्ड बाहर् निकाल पेशाब करनेलगा। एक् नजर माँ कि तरफ देखा। तोँ वो कहीं औऱ देखरही थि.
माँ: जल्दकर.
मे: हांबस होँ गय़ा.
मेराये सुनते हि उसेये लगा। शायद मे अपना लन्ड अंदरडाल चुका हूं। मेरा लैंड अभि भि बाहर् होने केँ कारण उसकी नजरों मे आँ गय़ा। पर्र कोई रिएक्ट नहि किया.
माँ: अच्छा सुन मे भि कर लेती हूं। तुउधर घूम लें। क्योंकि ऐसे अंधेरे मे तोँ मेरी भि हिम्मत नहि होगी अकेले आने कि.
मे कुछ भि मिस करना नहि चाहता थां। इस टाइम उसका ध्यान मुझ पर्र नहि थां ये मे जानता थां इसलिये मे थोडा सां दूरहट उसे देखने लगा। उसने अपनी साड़ी कों कमर तक उठाया औऱ पैंटी कों जैसे हि नीचे किया। मे हैरान हौ गय़ा, मेरी आंखों केँ सामने कि उसकी गोरी गोरी गांड थि औऱ मे उसेदेख निहार रहा थां। मेरे लन्ड मे पूरीतरह सें तनावबढ़ चुका थां। केसे कंट्रोल करता हैं येसभी.
वो इसबात सें बिलकुल बेखबर थि। उसेलगा शायद मे उसके आज्ञा कां पालन करूंगा। इतनी लगभग पर्र अपनी मां कि गांड कों इतनी लगभग सें देखने केँ बाद मेरे तौ रोंगटे खड़े होँ गए। उसकेमुत कि धार कि आवाज़ मेरेकान मे सुनाई देरही थि। औऱ तभी वो पूरा करनेबाद जल्दी खड़ी हुई औऱ अपने पैंटी कों उठा लिया औऱ साड़ी गिरा दिया.
फिन सें जब कमरे मे आए, थोड़ी देर प्रतीक्षा किया औऱ जब वो गहरी नींद मे चली गई। तोँ उसकी गांड कों याद करके। पीछे सें उसे जाकर चिपक गय़ा औऱ अपने खड़े लन्ड कों उसकी गांड मे टच करनेलगा। ऊपर साड़ी पर्र सें हि। धीरे धीरे थोडा सेक्स कि तरह धक्का देनेलगा। तभी थोड़ी हलचल हुइ। उसकी नींदखुल गई.
मां: क्याँ हुआ?
मे: कुछ नहि बस नींद नहि आँ रहा थां.
मां: सोने कि कोशिश कर आँ जाएगा.
मे तौ डर हि गय़ा थां कहींउसे पता नाँ चलजाए फिनसो गय़ा.
माँ: राहुल उठजा सुभह होँ गई.
मेरी नींद खुली, देखा माँ नें एक् हाथ मे अपने कपड़े लिएहुए थें.
मे: नहाने जारही हौ क्याँ.
मां: हां तुँ भि उठजा.
मे: तोँ आप् जाकरनहा लो नाँ मे तब तक सो लेता हूं.
माँ: ये लड़काकभी नहि सुधरेगा। आलसी होँ गय़ा हैं.
बोलकर वो चली गई वो शायद नहाने गई थि। 15:20 मिनट बीते हि थें। केँ अचानक सें फिन दरवाजा खुला औऱ माँ नें उसे अंदर सें बंदकर दिया। पर्र ये क्याँ वो सिर्फ़ पेटिकोट पहने हुईँ थि। अपने स्तनों कों ढकेहुए तरीके सें। जैसे आमतौर पऱ औरतें पहना करती हैं। नां ब्लाउज नां साड़ी नां कुछ। माँ मुझे आजकलकुछ अधिक हि शरीफसमझ रही थि। पऱ येसभी उसेअब नॉर्मल लगरहा थां कि मे कुछ भि ऐसी वैसी हरकतें नहि कररहा हूं। शायद इसलिये.
मे उठकरबैठ गय़ा.
मे: मां आप् कपड़े लें तौ गई थि.
माँ: हां केवल टॉवल औऱ पेटीकोट लेँ गई थि.
मे: साड़ी क्यूं नहि.
मां: अरे तुम्हें तोँ पता हैं यहां बाथरूम कितना छोटा हैं। उसमें चेंज करने मे बहोत दिक्कत होती हैं.
उसने ब्रा उठाया गुलाबी रंग कां औऱ उसे पहनने कि कोशिश करनेलगी। माँ नें ब्रा मे अपने दोनों हाथ डाले औऱ पीछेहुक बंद करने कि कोशिश कररही थि। तभी मैंने देखाउसे बहोत दिक्कत हौ रही हैं बंद करने मे.
मे: क्याँ हुआ माँ.
मां: कुछ नहि बसयेबंद नहि होँ रहा हैं.
मे: क्याँ बंद नहि हौ रहा हैं? (छेड़ते हुए).
माँ: कुछ भि नहि.
मे: ओ मां ठीक हैं। मे हेल्प करता हूं.
माँ: नहि रहनेद हौ जाएगा.
औऱ कोशिश कि फिन भि नहि लगा.
मे: मे हेल्प करता हूं.
मां: हिचकते हुए बोलि। हांठीक हैं.
मे क्याँ बताऊं मे उसकीआधी नंगी थि मुझसे इतनी लगभग पहलीबार थां। मे पहलीबार उसके ब्रा कि हुक कों पकड़ा। पऱ मेरामन मचलने लगा.ओ मेरे इतने लगभग थि मुझे विश्वास नहि थां। गीलेबाल अभि भि उसके कंधों पऱ थें, खुशबू सें गंधरही थि। तभी मे हुक लगने कां फैसला बदल दिया। मेरामन बारबार उसके दोनों स्तनों कों दबाने कां कररहा थां औऱ ऐसा मौकाफिन शायदकभी नहि मिलता.
मां: क्याँ हुआ राहुल लगाना जल्द.
मैंने धीरे-धीरे सें उसकेकान मे कहां.
मे: मां आपकोहर बार इतनी जल्द क्यूं रहती हैं.
मां: क्याँ बोलरहा हैं?
मे: आप् अपनी मम्मों दिखाओ नां, दबाने कां मनकररहा हैं। माँ: राहुल.(गुस्से सें मगर धीमी आवाज़ मे फुसफुसाते हुए)। बेशर्मी मतकर, बर्दाश्त नहि करूंगी येसभी.
मे: माँ छोड़ो क्रोध (अभि भि उसकेकान मे धीरे-धीरे सें)। मान भि जाओ.
औऱ पीछे सें उसे जकड़ने लगा। उसने छुड़ाने कि कोशिश कि.
मे: मां प्लीज एक् बारबस.
मां: क्याँ एक् बार?.
मे: अपना चूचि दिखादो।
माँ: मार दूंगी छोड़ मुझे.
पर्र मे इतनाआगे बढ़ चुका थां, वापस लौटना मुश्किल थां। पेटिकोट केँ ऊपर सें हि उसके मम्मों कों दबाने लगा.
माँ: राहुल सभी बाहर् हैं। मतकर मे तुझसे कभीबात नहि करूंगी। मार खाएगा छोड़.
मे: मां बस एक् बारमान जाओ।
स्तनों कों दोनों हाथ मे भरकर दबाते हुए। क्याँ रसीले मम्मों थें उसके। औऱ एक् हाथ सें ब्रा कों खोलकर हटा दिया पऱ अभि भि पेटीकोट सें बंधेहुए थें.
माँ: हे ईश्वर कोई देखेगा तोँ क्याँ कहेगा?
मे: आपको अच्छा नहि लगरहा हैं क्याँ?
औऱ मेरा लन्ड पीछे सें उसकी गांड मे टच हौ रहा थां पेटिकोट केँ ऊपर सें.
माँ: छोड़दे मे तेरे पिताजी कों बता दूंगी नहि तोँ.
मे: मुझे भि पता हैं आप् नहि बताओगी क्योंकि मैंने देखा हैं आपने पहले भि कुछ नहि किया। इसका मतलब हैं आपकोइस चीज सें कोई दिक्कत नहि हैं। फिन क्यूं फालतू मे इतना ड्रामा करना.
चेहरा मेरीतरफ करतेहुए औऱ बड़े हि मासूमियत सें.
माँ: देख मे तेरे सामने हाथ जोड़ती हूं। येसभी मम्मी बेटे केँ लिए अच्छी चीज नहि हैं। तेरीपता नहि क्याँ होँ गय़ा हैं मेरे पीछेपड़ गय़ा.
मे: ऐसीबात नहि हैं माँ। आप् स्वयं सोचो आप् मेरे इतने लगभगइस हालत मे हौ। मे केसे बर्दाश्त करूंगा.
माँ: येपाप हैं किसी कों पताचला। तोँ हम् मुंह दिखाने केँ लायक नहि रहेंगे.
मे: दरवाजा बंद हैं केसेपता चलेगा। एक् बारबस करनेदो नाँ। माँ: क्याँ क्याँ करनेदो?
मे: आपको अपनी बाहों मे भरकर आपसे प्रेम.
माँ: छोड़ पागलये सभी नहि।
मां नें नीचेकुछ भि नहि पहना। मे जल्दी उसका पेटिकोट ऊपर कि औऱ उठा दिया औऱ पागलों कि तरह उसके गांड कों देखेजा रहा थां अपने लन्ड कों चिपक केँ औऱ दूसरे हाथ सें उसकी बुर कों सहलाने लगा। उसकी बुर भि दिखाई नहि देरही थि क्योंकि मे पीछे कि तरफ थां.
औऱ उसके कंधे कों चूमने लगा। आरामसे अपनेहाथ कि रफ्तार उसकी बुर पर्र बढ़ाना शुरुआत कर दिया। मैंने सोचा एक् बारअगर येगरम होँ जाए तोँ फिनमान जाएगी। मेरी उंगलियां उसकी बुर कि रसीले छोटे-छोटे बालों कों महसूस कर सकती थि। वो एक् मखमली एहसास थां। औऱ तभी मेरी उंगलियां उसके बुर केँ बीच मे गई तोँ मैंने पाया एक् रसीले चमडी कां हिस्सा मेरी उंगलियों कों गर्माहट पहुंच रहा थां। वो एहसास करोड़ों मे एक् थां। आखिर हौ औऱ कोई नहि मेरी मम्मी कि बुर थि। मगर वो अभि नहि मानी.
तभी मैंने मां कों एक् झटका दिया औऱ बेड पर्र सुला दिया.ये देख वो एकदम स्तब्ध रह गई। अब मे पूरीतरह सें उसकेऊपर आँ चुका थां। उसके नीचे मेरीनजर अभि भि नहि गई थि क्योंकि मेरा चेहरा उसके चेहरे कि ठीक सामने थां। मैंने उसकी आंखों मे वो लज्जा देखी औऱ उसका चेहरा पानी पानी होँ चुका थां पसीने सें। तभी मैंने उसके होंठ कों चूमना शुरुआत कर दिया.
औऱ मैंने बहोत कोशिश कि पऱ उसने होठों कों दबारखा थां। उसकेकान कों चूसना शुरुआत कर दिया औऱ तभी देखाअहह भरतेहुए उसने होंठ कों खोल दिया.तभी मैंने जल्दी होंठ कों चूमना शुरुआत कर दिया। मैंने उसके दोनों हाथ पकड़रखे थें औऱ जैसे तैसे अपनाहाथ छुड़ाकर मेरे चेहरे पऱ हाथरख कर बोलि।
मां: ऐसामत कर कि हम् दोनों कहीं कि नहि रहे.चाहता क्याँ हैं?
मे: आपको चोदने कां बहोत मन हैं।
माँ: छि.छि!ये क्याँ कहरहा हैं। हायरे रे.हद होती हैं बेशर्मी।
माँ ख्वाब मे भि नहि समझ सकती थि। उसके बेटे केँ मन मे अपनी माँ केँ लिएइस तरह कि ख्याल होंगे। येसुन उसके चेहरे कां रंगउड़ गय़ा।
माँ: देख तेरी औऱ भि इसकाम केँ लिएमिल जाएगी मुझे तोँ छोड़दे। बेटा तूँ नहि जानता ये बहोत बड़ापाप हैं।
मे: जानता हूं पऱ आप् हि बताओ मे केसे बर्दाश्त करूं आपकोइस हालत मे देखकर औऱ मे तोँ आपकाकई बार पूराअंग अंग देखा हैं नंगी अवस्था मे। कलरात कों भि आपकी गांड देखी थि जब आप् पेशाब कररही थि।
माँ: क्याँ कहरहा हैं तूँ तुम्हे कितना अच्छा समझने लगी थि।
तभी मे फिन सें चुम्मा लेने कि कोशिश कि। मगर वो छुड़ाने कि कोशिश कररही थि। तभी मे थोडा उठकर बैठा, मेरीनजर नीचे उसकी बुर पऱ पड़ी। मानो मेरे पैरों तले जमीन खिसक गय़ा हौ ऐसा नजारा थां। उसकी गोरी गोरी चमड़ी पर्र छोटे-छोटे बालों सें खूबसूरत सजाहुआ औऱ बीच मे एक् भूरेरंग कि दरार।
हां माँ कि बुर कां रंगबीच मे सें भूरा थां। जिसेदेख फिन सें रोंगटे खड़े होँ गए। जिसे देखने कां प्रतीक्षा नं जानेकब सें थां इतनी कोशिश केँ बादआज वो पहलीबार इतने लगभग मेरे आंखों केँ आगे हि थां।
मे एक् सेकंड भि अपने आप् कों रोक नहि पाया औऱ अपनाजीभ कों उसके बुर पर्र रख दिया। पहलीबार हल्का नीचे सें ऊपर कि ओरजीभ कों उठाया। उसके नमकीन पानी कां स्वाद मुझे घायलकर गय़ा। क्याँ रसीले औऱ गर्म बुर थां। मैंने दोनों हाथों सें उसकी जांघों कों पकड़ लिया। अपनाजीभ चलनेलगा उसके बुर कि अलग-अलग आयाम पऱ। उसकी बुर केँ होंठ खुलते गए औऱ उसका रसीलापन मुझे महसूस हुआ।
जब मे उसे पहलीबार जीभ लगाया थां तोँ वो बिल्कुल सूखी हुइ थि। मगर मेरेजीभ चलाने केँ कारण उसके अंदर सें निकला पानी औऱ मेरेजीभ सें गिरती हुईँ लार केँ कारण वो पूरीतरह सें गीली हौ चुकी थि। मैंने एक् नजरऊपर देखा कि उसने अपना एक् हाथ अपने मुंह पऱ रखा थां जिससे वो किसी भि तरह कि आवाज़ होने नहि देरही थि। अपनेहाथ सें मेरेसर कों धक्का देकर हटाने कि कोशिश कररही थि औऱ आंखें बंद थि। ऐसालग रहा थां वो अभि भि इसचीज कों इनकार कररही हैं।
बिना रुके उसकी बुर कों चाटते जारहा थां। अचानक दरवाजे पर्र खटखटाहट हुई।
संगीता: माँ क्याँ कररही हौ तैयार हौ.विभा मौसी मिलने आई हैं।
मां: (जोर सें चिल्लाते हुए औऱ अपने आवाज़ कि थरथराहट कों काबू मे करते)हां बस 5 मिनट मे आई।
मां: देख जानेदे लोग मिलने आँ रहे हें।
मे: बस माँ 1 मिनट औऱ.
मां: हे ईश्वर छोड़दे अब तोँ हौ गय़ा नां।
जैसे हि मे दोबारा उसकी बुर चाटने लगातभी देखा माँ मचलने लगीफिन सें। उसकी बुर केँ होठों कों अपने मुंह मे भरकर चूसने लगा औऱ ऊपर छोटे सें दाने कों भि चूसरहा थां। ये सबसेउसे बंद कमरे मे मात्र हवस कि आगदहक रही थि।
तभी दोबारा दरवाजा खटखटाया किसी नें।
मामीजी: दिदी बाहर् आओ नां क्याँ कररही होँ।
मां: बस आँ रही हूं.जाने दे। नहि तौ सबकोपता चल जाएगा।
मैंने धीरे-धीरे सें उसकी दोनों जांघों कों छोड़ दि। उसने एक् सेकंड भि नहि लिया जल्दी उठकर खड़ा हुईँ। जल्द सें पेंटी पहनना औऱ पेटिकोट कों बराबर करतेहुए। ब्रा कों हटा दिया औऱ एक् वेलवेट कां ब्लाउज पहन लिया। सारी फटाफट लपेटकर बाहर् जानेलगी। मैंने उसकेहाथ कों एक् बार औऱ पकड़ लिया।
मे: रात कों फिन सें करेंगे नाँ।
अभि उसे बाहर् जाने कि जल्द थि केसे भि। वो मुझसे बहस नहि करना चाहती थि।
मां: हांठीक हैं।
औऱ जल्दी हाथ छुड़ाकर बाहर् भाग गई। केसे बताऊं उसकी बुर कां स्वाद अभि भि मेरे मुंह मे थां। मेरा लन्ड अभि भि पूरीतरह सें तूफान पऱ थां।
mummy aur maira new rishte – New Episode
आखिरकार मुझे जौ चाहिए थां वो मुझेमिल हि गय़ा मगर अभि भि बदन कि प्यास अधूरी थि। ये तौ केवलझलक थां अभि तोँ बहोत कुछ होना बाकी थां.
उसके बाहर् जाने केँ बाद मैंने अपने लन्ड कों हिलाकर शांत कियातब जाकर कहींचैन मिला.कुछ देरबाद मे नहाने केँ लिए बाहर् गय़ा तौ देखा माँ, मौसी औऱ औऱ बाकी औरतें बैठीबात कररही थि। मेरानजर जैसे माँ पऱ पड़ा उसका नंगा शरीर मेरे आंखों केँ आगे आँ रहा थां। उसने आंखों कों नीचेकर लिया औऱ करती भि क्याँ, उसका साराकुछ समझो मैंने देख लिया थां कुछ भि बाकी नहि थां बस बाकी थां तौ मात्र एक् चीज, लन्ड औऱ बुर कां मिलन। मे तोँ आजरात कां प्रतीक्षा कररहा थां.
मे जबनहा कर वापसआया.
मामीजी नें बुलाकर कहा.
मामीजी: अरे राहुल इधर आनां.
मे: क्याँ हुआ मामीजी.
मामीजी: तुँ कुछबोल नहि रहा हैं। सभीठीक तौ हैं नाँ?.
मे: सभीकुछ तोँ ठीक हैं.
मामीजी: आँ मेरेपास बैठ.
मे जैसे मामीजी केँ पास जाकर बैठा उन्होंने मेरे कंधे पऱ हाथ रखतेहुए कहा.
मामीजी: औऱ बता कॉलेज मे कोई लड़कीपटी कि नहि?
मे: क्याँ मामीजी आप् भि.
मामीजी: अरे शर्मा क्यूं रहा हैं? अच्छा तोँ अपने माँ-बेहन सें शर्मा रहा हैं.
मे वाकई मे शर्मा रहा थां। ये क्याँ पूछरही हैं?
मामीजी: अच्छा बता मे कैसी लगती हूं?
औऱ मामीजी नें अपने हाथों कों मेरी कंधे कि तरफ जकड़ लिया। उसके जकड़न सें उसका मम्मों मेरे सीने कों छूनेलगे। मैंने यहां तौलिया पहनरखा थां। कहींफिन सें लन्ड नाँ खड़ा हौ जाएइस डर सें जल्दी बात कों बदल दिया.
मामीजी: अरे तुझसे नहि तौ किस सें मजाक करूंगी?
औऱ ये तोँ मे भि जानता थां वो मजाककर रही हैं.
संगीता: भैया लगता हैं मामीजी कां दिल आप् पर्र आँ गय़ा हैं.
ये सुनकर सभी हंसने लगे.
मे: तुम् भि शुरुआत होँ गई.
मामीजी: क्यूं दिदी राहुल तौ बहोत शर्मीला हैं.
उसे क्याँ पता कि मे कितना शर्मीला हूं। बसकुछ हि देर पहले सारी लज्जा औऱ हया समाप्त हौ चुकी थि.
मामीजी: अच्छा जाअब सजधजकर हौ जा औऱ खानां खा लेँ। साम कों हम् लोग घूमने जाने वाले हें.
मे: कहां.
मामीजी: साम कों पास केँ देहात मे कथा होने वाला हैं वहां जाएंगे.
मे: क्याँ घऱ पऱ कोई नहि रहेगा?
मामीजी: क्यूं तुँ भि चलसंग मे.
पऱ पता नहि क्यूं मे इनसभी चीजों मे वक़्त बर्बाद करना नहि चाहता थां.
मे: आप् लोगचले जाओ मां यहीरह लेगी.
मां: नहि मे भि जारही हूं.
शायद माँ कों येबात मंजूर नहि थि। वो मेरेसंग अकेले रुकना नहि चाहती थि। उसेडर थां कि जौ अभि कुछदेर पहलेहुआ हैं औऱ हद सें आगे नाँ बढ़जाए.
मामीजी: अच्छा ठीक हैं वैसे भि हम् कुछ घंटे मे वापस आँ जाएंगे। तुम् चाहो तौ देहात घूमलो मोटरसाइकिल बाहर् रखी हैं.
मे: हांये ठीक हैं (बोलकर मे वहां सें चला गय़ा).
कमरे मे मे लेटाहुआ थां कि साम कों माँ कमरे मे आई औऱ उसने अपने कपड़े निकले चेंज करने केँ लिए.इस बार वो बाहर् बाथरूम कि तरफजा रही थि कपड़े बदलने कों.
मे: क्याँ हुआ यहीं पर्र चेंजकर लो नाँ.
बड़ी आंखें दिखाते हुए वो वहां सें चली गई औऱ कुछ बोलीं नहि। मे समझ गय़ा कि मां कां मूड अच्छा नहि हैं। साम कों जबसभी औरतें जानेलगी। मे बेचैन थां, फिनसभी कब लौटेगी फिन सें माँ कब मिलेगी.
मे भि मोटरसाइकिल उठाया औऱ देहात घूमने चला गय़ा। बहोत हि सुंदरता थि देहात मे वाकई मे देखने लायक थि। इतना हि नहि वहां कि औरतें भि बहोत हसीन औऱ सिंपल तरीके सें रहती थि। कुछ तोँ ऐसेदेख रही थि जैसेकुछ कहना चाहती हैं। पर्र इसतरह कां देख्ना मात्र एक् अनजान व्यक्ति कों पहलीबार देखने जैसा थां। मगर मेरेमन मे पता नहि क्यूं तरह-तरह केँ ख्याल आँ जाते थें.
तभी मैंने मेरे साथीरवि कों मोबाइल लगाया.
रवि: औऱ भइया कैसा हैं तूँ?
मे: कुछ नहि दोस्त बसयही देहात घूमने आया थां.
रवि: अकेले.
मे: माँ औऱ बेहनसंग मे आई हैं.
रवि: अच्छा तोँ क्याँ सीनचल रहा हैं तेरे औऱ तेरे मां कां?
मे: मुझेलगा शायद तुँ भूल चुका होगाये सारी बातें.
रवि: नहि दोस्त.
मे: क्याँ करूंकुछ समझ मे नहि आँ रहा हैं.
रवि: क्यूं क्याँ हुआ मुझेबता.
मे: आज मैंने अपनी माँ कि बुर कों चाटा।। चाटते
रवि: क्याँ बोलरहा हैं सच मे! दोस्त मैंने सोचा नहि थां कि इतना सीरियस नहि होगा.
मे: बसकर साले। तेरी हि बात सुनकर सीरियस हुआ.
रवि: अच्छा फिन क्याँ हुआ.
मे: वो मुझसे बात भि नहि कररही.
रवि: मुझेसभी कुछ अच्छे सें बता.
मे रवि कों सारी बातें एक्-एक् करकेबता दिया.
रवि: दोस्त तेरी बातें सुनकर तोँ मेरामन कररहा हैं अपनी मम्मी कि बुर कों चाटने कां.
मे: दोस्त मे तौ चोदने केँ फिराक मे हूं.
रवि: अच्छा ठीक हैं सुन मेरीबात। उसे थोडा समय चाहिए, हरबार जल्दबाजी अच्छी नहि होती.उसे इनसभी चीजों कि आदत नहि हैं। तूँ कुछ भि करके उससे एक् बारबात कर औऱ समझाने कि कोशिश कर कि गलती हौ गई हैं अब दोबारा कभीये सभी नहि करेगा औऱ किसी भि तरह सें उसका भरोसा फिन सें एक् बारजीत.
मे: मगरफिन सें भरोसे कों जब तोडूंगा तोँ फिन तोँ वहीबात होँ जाएगी नां.
रवि: नहि इसबार कोशिश करना कि उसे पूरीतरह सें जीतने कि औऱ अपने मित्र कि तरह बनाने कि, तुँ उससेहर बात शेयरकर सके औऱ वो तुझसे.
मे: ठीक हैं, कोशिश करूंगा.
साम कों जबसभी वापस आँ गए.तभी मैंने देखा माँ मुझसे नज़रे चुरारही थि। रात हम् सभी मिलकर फिन सें ऐसे हि छत पर्र बैठकर खानां खारहे थें औऱ हंसी मजाककर रहे थें। फिनरात कों जब कमरे मे जाने कि बारीआई.
मां: संगीता तूँ भि चलनासंग मे सोएंगे.
संगीता: अरे माँ इतनी स्थान कहां हैं उसबेड पर्र.
मां अकेले मेरेसंग सोने सें कतरारही थि। मां कि समझ मे नहि आँ रहा थां आखिर वो करें तौ करें क्याँ औऱ मे उसे भरोसा जताना चाहता थां। उससेबात करके मामले कों शांत करना चाहता थां। पर्र फिन वो मानी औऱ नीचे सीढ़िओ सें नीचे उतरने लगी कमरे मे जाने केँ लिए औऱ मे उसके पीछे-पीछे.
कमरे मे आते हि वो दीवार केँ पास खड़ी हौ गई। येदेख मैंने रिक्वेस्ट किया औऱ उसे मनाने कि कोशिश कि.
मे: जोँ कुछ भि दिन मे हुआ उसकेलिए मुझेमाफ करदो (उसकाहाथ पकड़ते हुए).
उसने हाथों कों झटक दिया औऱ दीवार सें चिपकी हुई खड़ी थि। उसके चेहरे पऱ हाथरखा तोँ उसने मुंहफेर लिया औऱ आंखें हल्की नम थि.
मे: प्लीज मुझेमाफ कर दो.जिस वक़्त उस हालत मे आप् थि उस वक़्त कोई भि मर्द बर्दाश्त नहि कर पाता.
मां: जानती हूं। पऱ एक् मर्द मे औऱ मम्मी बेटे मे फर्क होता हैं.
उसका चेहरा गुस्से मे औऱ भि हसीनलग रहा हैं। खुलेबाल औऱ आंखों मे काजल जैसेकोई जवान औऱ सेक्सी 30 साल कि मॉडल.उसे देखकर लगता हि नहि थां कि वो 46 साल कि हैं। उसनेलाल साड़ी औऱ ब्लाउज पहना थां। अंदर ब्रा औऱ पेंटी केँ रंग कां पता नहि चलरहा थां औऱ मे जितना उसके लगभग थां उसकी खुशबू फिन सें मुझे मदहोश किएजा रही थि.
मे: मेरीबात सुनो हम् दोनों केँ बीच मे सभीकुछ हुआमगर किसी कों पता नहि चला.
मां: पऱ मेरे भरोसे कां क्याँ जौ तुझ पर्र इतना करती थि.
मे: आप् बहोत खूबसूरत हौ। मेरी स्थान कोई भि होता तौ बिल्कुल भि बर्दाश्त नहि कर पाता.
मां: तेरी इन्हीं सभी बेशर्म चीजों सें मे परेशान हूं। क्याँ तकलीफ़ हैं?
मे: मे आपसे बहोत प्रेम करता हूं.
माँ: उसकेलिए तेरे बापू हैं.
मे: ऐसा आप् सोचती होँ। पऱ पता नहि क्यूं मे चाहकर भि अब एक् बेटे कि तरह तोँ नहि रह पाऊंगा नाँ। मैंने आपके शरीर कि हर एक् हिस्से कों देखा हैं। आप् बताओये मेरेमन सें केसे बाहर् जाएगा.
माँ: बसभूल जायेसभी.
मे: केसेभूल जाऊं, भूल गई आज सुभह हमारे बीच क्याँ-क्याँ हुआ थां (औऱ मे आरामसे उसके औऱ लगभग जानेलगा).
मैंने देखा वो मुझसे अपने आप् कों दूर करने कि कोशिश करनेलगी.
माँ: मे इसीलिए तेरेसंग नहि सोना चाहती थि। ये मेरेलिए एक् बुरे ख्वाब जैसा हैं.
मे: चलो मां अबमान भि जाओ। देखोकुछ बुरा नहि हैं। हम् अभि इसतरह सें बातकर रहे हें क्याँ ये भि कोईसुन रहा हैं नहि नां औऱ हमारे बीच जोँ हुआ वो तौ कोईसोच भि नहि सकता तोँ डर कैसा.
ये बोलकर मैंने उसे ज़ोर सें अपनेगले लगा लिया.
मां: राहुल छोड़ मुझे। क्यूं गलतकर रहा हैं.
मे: कुछगलत नहि हैं मां। आपको आनंद आएगा औऱ आपने बोला भि तौ थां कि रात कों करेंगे.
मां: बसऐसे हि बोल दिया थां.
मे: अच्छा एक् बात बताओ। आपनेकौन सें कलर कि ब्रा औऱ पैंटी पहनी हैं?
माँ: हटजा कुत्ते, कोई अपनी माँ सें येसभी पूछता हैं?क्याँ करूं मे तेराकुछ समझ मे नहि आँ रहा। कहूं भि तौ किसे कहूं?
ये बात तौ साफ होँ चुकी थि कि मां येसभी किसी सें नहि कह सकती। मेरी हिम्मत औऱ बढ़ गई ये सुनकर.
मे: अच्छा एक् बारबस अपनी मम्मों दिखादो.
मे भि बेशर्मी पऱ उतर गय़ा। वो चुपचाप खड़ी थि। येदेख मैंने धीरे-धीरे सें अपनाहाथ उसके ब्लाउज केँ हुक पे रख दिया। उसने मेरी आंखों सें आंखें मिलाते हुए-
माँ: मत करना.
तभी मैंने अपना दूसरा हाथ उसके कंधे पऱ रखकर उसके ब्लाउस कों थोडा साइड मे किया। वो भि अपने कंधे कों छुपाने कि कोशिश कररही थि औऱ मैंने देखा उसने ब्लैक कलर कां ब्रा पहना थां जिसका स्ट्रैप दिखरहा थां। गोरे शरीर पऱ वोँ काली पट्टी बहोत सेक्सी लगरही थि औऱ वो जोर सें सांसभर रही थि। उसकीइस घबराहट सें उसका सीनाऊपर कि ओरफूल रहा थां। जिससे उसके स्तनों कां उभारसाफ दिखाई देरहा थां जैसे ब्लाउज कों फाड़कर बाहर् निकलआता.
मे: आईलवयू मां.आई लवयू.
कान मे धीरे-धीरे सें बोलते हुए उसकी कंधे सें लगीउस ब्रा केँ स्ट्रिप पऱ अपने होठों कों रख दिया औऱ चूमने लगा.
वो अभि भि कोई हरकत नहि कररही थि औऱ तभी उसकी धीमी आवाज़ औऱ गरम सांसे मेरेकान मे आई.
मां: क्याँ करना चाहता हैं?
मे: इसबार आपकी मम्मों कों चूसने कां मनकररहा हैं.
मां: इतने गंदे शब्द तूने कहां सें सीखे?
मे: येसब क्याँ सीखने कि जरूरत होती हैं!
कुछदेर चुपरही। दोनों हाथ सें मेरे सीने कों धक्का देने कि हल्की कोशिश केँ संग उसनेकहा-
मां: देखअगर मे तेरीबात मानलूं तोँ वादाकर कुछ औऱ नहि करेगा औऱ ये पहली औऱ आखरीबार होगा.
मे: ठीक हैं। जौ आप् कहो (मैंने जल्दी कहा).
मुझे यकीन नहि हौ रहा थां, माँ अपनी ख़्वाहिश सें मुझेये सभी करने देगी कि नहि.
माँ: पऱ मात्र देखने केँ लिए। तुँ इसे छूएगा नहि.
मे: ऐसामत करो माँ एक् बार तौ छूनेदो.
माँ: नहि.
मे: अच्छा ठीक हैं.
उसने धीरे-धीरे सें अपने पल्लू हटाए औऱ उसके दोनों स्तनों कों जौ ब्लाउज कि निगरानी मे थें देखकर मेरा तोँ अभि सें लन्ड खड़ा होँ गय़ा। उसने अपनी नज़रें झुकाकर रखा औऱ एक् हाथ सें अपने ब्लाउज कां हुकखोल रही थि.
मे: इधरलाओ मे खोल देता हूं.
माँ: कोई जरूरत नहि हैं। देख्ना हैं याँ नहि?
मे: हां देख्ना हैं.
माँ: तौ चुपचाप खड़ेरह.
औऱ आखिरकार अपने ब्लाउज केँ तीनों हुकखोल दिए। उसके अंदर गोरे-गोरे औऱ गोल खूबसूरत सें स्तनों कों काले ब्रा नें घेररखा थां। मेराहाथ फिन एक् बार उसके स्तनों कि तरफ। बढ़ने लगा.तभी उसने आवाज़ भारीकर इशारा किया कि इसे छूना नहि। मे फिन सें एक् बाररुक गय़ा.
मां: बस होँ गय़ा नाँ देख लिया.
मे: मां प्लीज दिखाओ नाँ ब्राखोल केँ.
मां: होँ तौ गय़ा.
मे: नहि आपने अच्छे सें बोला थां दिखाने कों.
तभी वो अपनेहाथ पीछे लें गई औऱ ब्रा केँ हुक कों खोल दिया। ब्रा ढीला होते हि मेरी उत्तेजना औऱ बढ़ गई मेरे लन्ड मे करंट तेजी सें दौड़ने लगा। इससे पहले कि मे कुछसोच पता, माँ नें अपनेहाथ कों अंदरडाल अपने बूब्ज़ कों पड़कर ब्रा सें बाहर् निकाल दिया.ये देख मे हैरान होँ गय़ा औऱ अपनाआपा खो बैठा। मे जल्दी उसके मम्मों कों मुंह मे भरकर चूसने लगा। शायद माँ कि मम्मों कों चूसने कि वजह सें उसे भि एक् मजा कां अनुभव होनेलगा। शुरुआत मे उसने थोडा सां विरोध तोँ कियाफिन धीरे धीरे उसकी भि सांसे तेज होनेलगा औऱ मे बारी-बारी सें दोनों चूचियों कों चूसने लगा.
मां: नहि बेटा रुकजा.
मे: आपने वादा किया थां.
उसकी आवाज़ भि आहिस्ता मध्यम होनेलगी तभीउसे अपने सीने सें औऱ जकड़ लिया.
मे: ब्लाउज पूराखोल दो नां (तेज सांस भरतेहुए).
मां: नहि ऐसे हि कर लेना हौ तौ गय़ा.
मे: चलो भि.
औऱ अपने हाथों सें उसके ब्लाउस कों खोलने लगा अच्छे सें। माँ रोकरही थि पऱ मे रुका नहि, मैंने गौर कियाइस बार उसका विरोध थोडा काम थां। हाथ केँ बगल सें सें उसकी बाजू कों निकाल करहटा दिया औऱ फिन ब्रा कों। उसकी गोल-गोल रसीली चूचियां मेरे सामने बिल्कुल नंगी थि। कोई रोक-टोक नहि। वो मात्र कमर सें नीचेढकी हुई थि साड़ी सें। औऱ मे उसके मम्मों कों सहलाता हुआ उसकी चूचियों कों चूसरहा थां। ये एहसास मे कभी नहि भूल पाऊंगा। जब मैंने देखा तोँ माँ कि आंखें बंद थि औऱ आहिस्ता सिसकियां भि लेँ रही थि।.
मे: क्याँ हुआ कैसालगा?
माँ: छोड़अब होँ गय़ा.
मे: आप् तोँ तारीफ भि नहि करती.
मां: अवार्ड जीता हैं क्याँ जौ तारीफ करूं.
औऱ अपने दोनों हाथ सें स्तनों कों छुपाने कि कोशिश करतेहुए ब्लाउज लेने केँ लिए नीचे झुकी। मैंने सोचा अपना लन्ड दिखाने दिखाने कां इससे अच्छा मौका नहि मिलेगा। दिखादूं इसेतब शायदकोई फर्कपड़ जाए। मे झट अपने बॉक्सर सें अपना खड़ा लन्ड जिसका सुपाड़ा फुलकर लाल हौ गय़ा थां, बाहर् निकाल दिया। मेरा लन्ड मोटा औऱ करीब 6.5 इंच कां थां जोँ किसी भि स्त्री कों संतुष्ट करने केँ लिए बहुत थां.
वो जैसेउठी उसकीनजर मेरे लन्ड पऱ पड़ी.ये देख वो दंगरह गई। मेरा लन्ड ठीक उसके मुंह केँ सामने थां। तभी उसके एक् हाथ कों पकड़कर अपने लन्ड पर्र रखनेलगा.
मां: क्याँ कररहा हैं? (कांपते हुए आवाज़ मे)।.
मे: एक् बार छूकर देखो नाँ.
माँ: मुझे नहि देख्ना हैं.
उसके हाथों कों अपने लन्ड पर्र रख लिया। मुट्ठी पूरीतरह सें बंदकर दि.
माँ: तूँ बहोत बदमाश हैं.छोड़.
मे: माँ आनंद लेना सीखो नाँ कोई नहि हैं तौ हम् दोनों जौ मर्जी कर सकते हें.
मेरे लन्ड कां गर्माहट औऱ कड़कपन वो महसूस कर सकती थि। उसने एक् बार भि नीचे नहि देखा.
मे: आप् स्वयं देखो क्याँ हालत हुइ हैं मेरे लन्ड कि, बताओ मे इसका क्याँ करूं?
माँ: जोँ करना हैं कर पऱ मुझे क्यूं परेशान कररहा हैं?
मे अभि उसकेहाथ कों अपने लन्ड सें आगे पीछेकर रहा थां। मेरे उससे निकलता पानी उसकेहाथ पर्र लग गय़ा। वो छुड़ाने कि कोशिश करनेलगी हैं.
मे: सेक्स करतेहुए इतनासोच कर देखो कि लन्ड आपकी बुर मे घुसेगा तौ कितना आनंद आएगा?
तभी उसने गुस्से सें हाथ खींच लिया। उसकेहाथ खींचने कि वजह सें उसकी चूड़ियों सें लन्ड पऱ इतनी जोरों सें चोटलगी। सें बहोत जोरों सें चोटलगी कि मे चिल्लाया-
मे: अहह.ये क्याँ किया आपने?
मां: क्याँ हुआ.क्याँ हुआ दिखा?.
वो नीचे झुकी बूब्ज़ अभि भि नंगा। मेरे लन्ड कों पकड़कर देखने लगी। उसका मुंह मेरे लन्ड केँ बहुत लगभग थां। उसकी चूड़ियों सें एक् हल्का खरोचपड़ गय़ा थां.
माँ: हल्का खरोच हैं अधिक दर्द तौ नहि होँ रहा नाँ?
उसके इतने लगभग मुंह होने केँ कारण मेरा तौ मनकररहा थां उसके मुंह मे अपना लन्ड डालदूं.
माँ: बहोत रात होँ चुकी हैं अबसोजा ठीक हौ जाएगा.
मे: माँ रुको नां (उसकाहाथ पकड़ते हुए)। थोड़ी रात औऱ बाकी हैं। एक् बारफिन सें चाटने दो नां.
मां: हटजा बेशर्म.
मे: प्लीज.
औऱ उसे उठाकर फिन सें बेड पऱ लेटा दिया.ऊपर सें वो भि नंगी थि औऱ नीचे सें मे भि.
माँ: छोड़ मुझे क्याँ कररहा हैं। ऐसामत कर.
इसबार उसने साड़ी पहनरखा थां। मे जैसे तैसे उसकी साड़ी कमर तक उठा दिया औऱ देखा तौ उसने कालेरंग कि पैंटी पहनी थि। येसभी देख तोँ मे औऱ भि पागल हौ गय़ा। गोरी चमकते हुए जांघों पर्र वो कालेरंग कि पैंटी कि बातकुछ औऱ थि। उसने जल्दी अपने पैंटी कों पकड़ लिया। मे भि खोलने कि कोशिश कररहा थां.
मां: नहि राहुल। मतकरऐसा.
मे: मानजाओ नाँ मां, एक् बार तौ हौ हि चुका हैं फिन क्यूं शर्माती होँ.
मां: देख तुँ नहि समझरहा हैं येसभी चीज कितनी गलत हैं। मे: एक् बार औऱ करनेदो नां.
मां: नहि एक् बार एक् बार करके तूनेसभी कुछकर लिया.हट जा.
मे: अभि कहां कुछहुआ हैं माँ। अभि तौ आपको चोदना बाकी हैं.
तभी उसने गुस्से सें दूसरे हाथ सें एक् चांटा मारा.
मां: मुझे यकीन नहि होता तूनेये सभी केसेसीख लिया हैं। रात कां वक़्त हैं किसी नें अगरये सभीसुन भि लिया तौ क्याँ होगा?
मे: किसी कों क्याँ पताचल रहा हैं मे तोँ आपको कितना समझा चुका हूं.
उसने अपने पैंटी कों जोर सें पकड़रखा थां, वो मान नहि रही थि। मैंने देखाऐसे नहि छोड़ेगी, क्यूं नं पैंटी साइड मे करदूं? औऱ ये आसानी सें होँ सकता थां। मे अपनेहाथ कों उसकी पैंटी मे फंसा केँ साइड मे कर दिया औऱ उसकी बुर साफसाफ दिखने लगी.वही सुभह वालीयाद फिन सें ताजा होँ गई। सुभह तौ जल्दबाजी मे सभीकुछ हुआ थां.
मे उसकी बुर कों फिन सें अच्छे सें देख्ना चाहता थां। येदेख मां रुक गई। वो समझ गई कि मामला उसकेहाथ सें निकल चुका हैं। औऱ मे उसकी बुर कों उंगलियों सें सहलाना शुरुआत कर दिया। वो हाथ सें छुड़ाने कि कोशिश कररही थि औऱ बोलेजा रही थि-
मां: बसकर छोड़दे, अब हौ गय़ा, रहनेदे। (धीमी आवाज़ मे).
पर्र मे बिना रुके धीरे-धीरे सें नीचे गय़ा औऱ दोनों जांघों कों फिन सें पकड़ केँ। उसकी बुर कों चाटने लगा। करीबकुछ सेकंड बीते हि थि कि मैंने एक् ऊंगली उसकी बुर केँ अंदर घुसा दि औऱ औऱ बुर कि दीवारों केँ गीलेपन कों महसूस करनेलगा। उसकी वो नाजुक चमडी, ऐसा लगरहा थां जैसे किसी गरमा गर्म मलाई मे उंगली दे डाला होँ औऱ उससे निकलता पानी कां स्वाद हल्का नमकीन थां.
मेरेये सभी करने सें उसे भि थोड़ी बेचैनी हौ रही थि। अपने पैरों कों मोड़ने लगी औऱ अंगड़ाई लेनेलगी जोँ हाथ मुझे धकेलरहे थें अब वो भि बस मेरेसर पऱ रखेहुए थें। मैंने बिल्कुल भि जल्दबाजी नहि कि। मे जानता थां आज कि रात जोँ करलूं नहि तौ फिन मौका मिले नाँ मिले औऱ इससेआगे कां मार्ग भि साफ होँ जाता। मैंने धीरे-धीरे सें दूसरी उंगली घुसाई तोँ देखा मां केँ मुंह सें आवाज़ आई-
मां: आँ.आँ.अहह.मत कर.इशशश।
मे: क्याँ हुआ मेरीजान।
माँ: (अपनाहाथ मेरे मुंह पऱ रखतेहुए) ऐसेमत बोल। माँ हूं मे तेरी।
मे उसकी दोनों जांघों कों अपने पैरों सें चौड़ा करके धीरे-धीरे सें उसके मुंह केँ पास गय़ा औऱ उसके कानों मे जाकर।
मे: अब क्याँ बाकीरह गय़ा मम्मी बेटे मे.
मां: तुनेसभी ख़त्म कर दिया।
मे: तोँ अबमान जाओ।
मां: मे इसचीज कों मगरकभी नहि अपना सकती।
उसेजरा भि अंदाजा नहि थां। मुझेजरा भि अंदाजा नहि थां। कि मेरा लन्ड उसकी बुर कों निशाना बनारहा थां। इससे पहले कि वो कुछ औऱ बोलती। मैंने अपनेकमर कों धीरे-धीरे सें झूलते हुए। उसकी बुर मे घुसने कि कोशिश करनेलगा।
माँ: ओह नहि.नहि ये क्याँ हैं।
पर्र मे रुका नहि। थोड़ी औऱ कोशिश कि तोँ मे अपने आप् कों उसके अंदर पाया.इस घटना नें कहीं नां कहीं हम् दोनों कों हिलाकर रख दिया। क्योंकि ये पहलीबार थां जब मे भि अपनी मां कि बुर मे लन्ड घुसारहा थां। औऱ करीब-करीब 1 इंच अंदर गय़ा होगा, उसके होशो हवासउड़ गए औऱ मेरे भि।
औऱ जैसे-जैसे इंचदर इंच लन्ड अंदर जानेलगा। उसकी आंखें बड़ी हौ गई हैरानी सें। तभी मैंने अपनाहाथ उसके मुंह पर्र रखतेहुए उसकेकान मे धीरे-धीरे सें बोला।
मे: बस माँ हौ गय़ा शांत होँ जाओ.शांत होँ जाओ.कुछ नहि होगा किसी कों पता नहि चलेगा।
वो समय मानो हम् दोनों केँ लिएथम सां गय़ा थां। हम् दोनों केँ लिएये सभीकुछ एक् ख्वाब कि तरह थां। उसकी गुदादार रसीले रसीली बुर नें मेरे लन्ड कों चारों तरफ सें पकड़रखा थां। आज जाकर मुझे उसकी असली गर्माहट औऱ हुस्न कां पताचला.
मैंने धीरे धीरे झटका मारना शुरुआत किया औऱ अपने लन्ड कों अच्छे सें उसकी बुर मे डालकर चोदना शुरुआत किया।
उसके मुंह सें वो सेक्सी आवाज़-
माँ:हाय रे.ओ.कितना.करेगा.अहह.आहहा.अहह.कितना चोदेगा मुझे.
उसके मुंह सें "कितना चोदेगा मुझे" सुनने केँ बाद मे बेकाबू होकर चूदाई कि रफ्तार बढ़ा दिया.मगर येबात तौ साफ थां कि वो एक् परिपक्व स्त्री थि। सेक्स जैसी चीजों पर्र काबू करनाउसे आता थां। वो जानती थि ये मेरा पहलीबार हैं औऱ मुझे केसे शांत करना हैं। तभी मैंने महसूस किया कि मां नें हाथों कों मेरेपीठ पर्र रख दिया। मे उसकी बुर मे धक्का देतारहा थां पऱ क्योंकि ये मेरा पहलीबार थां। मे अधिकदेर ठीक नहि पाया उसके परिपक्वता औऱ बुर कि गर्मी केँ आगे, लन्ड मे तेज गुदगुदी केँ संग मेरा वीर्य उसकी बुर मे निकल गय़ा।
कुछ मिनट तक तोँ मे उसकेऊपर हि सोयारहा। उसके बालों कि भीनी खुशबू मेरेनाक मे आँ रही थि औऱ मे मदहोश उसकी बाहों मे पड़ारहा। बाद मे करवट लेकरउसी हालत मे मे उसे अपने बाहों मे भर केँ रखा।
मां: किसी सें मत कहनाये सभी औऱ पिताजी कों बिल्कुल पता नहि चलना चाहिए।
मे: नहि चलेगा। आपको कैसालगा आज मेरेसंग?
माँ: तूँ मेरी तकलीफ़ नहि समझरहा। कैसा लगेगा एक् बेटा अपनी मम्मी कि आंखों मे आंखें डालकर सेक्स करें तौ.
मे: इसका मतलब आप् मान गई होँ नाँ अब तौ।
मां: ऐसा नहि हैं। अच्छा सोजाबाद मे बात करेंगे.
औऱ उसरात कि नींद बड़ीचैन भरी थि। मेरा सपना जौ पूरा हौ गय़ा थां। मे भि उसके सीने सें चिपककर अपनाहाथ उसके गांड कों सहलाते हुएसो गय़ा।
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