♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
♡ एक् नया संसार ♡
भाग.《 57 》
अब तक,,,,,,,,
"अपने ईश्वर कों यादकर लेँ बच्चे। " फिन उसने मेरीतरफ खतरनाक भाव सें बढ़ते हुए कहा___"उनसे दुवाकर कि तेरे शरीर कि हड्डियाॅ सलामत रहें। "
"यह डाॅयालग मे भि बोल सकताहूॅ तुम्हारे लिए। " मैने मुस्कुरा कर कहा___"पऱ यहसोच कर नहि बोला कि फालतू कि डींगें मारना मेरी फितरत नहि हैं। "
मेरीयह बातसुन कर वोँ जैसे बुरीतरह तिलमिला गय़ा थां। मुझेपता थां कि उसके सामने मे कुछ भि नहि हूॅ। अगर मे एक् बार भि उसके फौलादी शिकंजे मे फॅस गय़ा तौ फिन शायद ईश्वर हि मालिक होगा मेरा। मगर मुझे स्वयं पर्र औऱ अपने गुरू कि सिखाई हुइ कला पर्र पूर्ण विश्वास थां।
वोँ पूरेवेग सें मेरीतरफ बढ़ा औऱ अपने दाहिने हाॅथ कों भि उसीवेग सें मुझ पऱ चलाया थां। मे फुर्ती सें नीचे झुकामगर झुकते हि मेरेहलक सें चीख निकल गई। कारण उसने हाॅथ चलाने केँ बाद हि अपने दाहिने पांव कों उठाकर उसका घुटना भि चला दिया थां जोँ सीधा मेरे झुकेहुए चेहरे सें टकराया थां। मे उछलते हुए सीधाहुआ हि थां कि उसने बिजली कि सि फुर्ती सें घूमकर मेरे सीने पऱ फ्लाइंग किकजमा दि। नतीजा यहहुआ कि मेरेहलक सें ज़ोर कि हिचकी निकली औऱ मे पीछे कि तरफहवा मे झूलते हुए हि नीचे कच्ची ज़मीन पऱ चारो खाने चित्त जा गिरा। गिरते हि मेरी ऑखों केँ सामने अनगिनत तारे नाॅचगए। कुछसमय केँ लिए तौ ऑखों केँ सामने अॅधेरा भि छा गय़ा। प्रहार इतना ज़बरदस्त थां कि मुझसे जल्दी उठा नं गय़ा। सीने मे बड़ी असहनीय पीड़ा महसूस हुइ मुझे। मेरे कानो मे नीलमव सोनम कि चीखें भि टकराई। कदाचित मुझेइस तरह गिरते देख वोँ बेहरडर गई थि औऱ मुझेकुछ होँ जाने कि आशंका सें वोँ बुरीतरह चीखीथीं।
सहसा मेरी नज़र मेरे नज़दीक हि पहुॅच चुकेउस व्यक्ति पऱ पड़ी। मेरे क़रीब पहुॅचते हि उसने अपने पांव कों उठाया औऱ ज़मीन पऱ चित्त गिरे मेरेपेट कि तरफ तीब्र वेग सें चलाया। मे बिजली कि सि फुर्ती सें कई पलटा खातेहुए दूसरी तरफ होँ गय़ा तथासंग हि उछलकर खड़ा भि हौ गय़ा। यहअलग बात हैं इसतरह उछलकर खड़े होने सें अचानक हि मुझे अपने सीने पऱ पीड़ा कां एहसास हुआ। मे समझ चुका थां कि अगरयह व्यक्ति इसीतरह मुझ पर्र औऱ दोचार प्रहार करने मे सफल होँ गय़ा तोँ यकीनन मेराकाम तमाम हौ जानां हैं। अतःअब मे उससे पूरीतरह सतर्कता सें मुकाबला करने केँ लिए रेडी हौ गय़ा।
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
अबआगे,,,,,,,
मंत्री दिवाकर चौधरी इस वक़्त गुनगुन मे हि एक् ऐसी स्थान पऱ थां जहाॅ पर्र उसके हि किसीखास जान पहचान वाले केँ माल कां उद्घाटन समारोह थां। माल कां मालिक याँ यूॅ कहिए कि मंत्री केँ उसजान पहचान वालेखास व्यक्ति कां नाम शैलेन्द्र बंसल थां। जौ मुख्य रूप सें आगरा कां रहने वाला थां। बहोत पहले हि उसकी मुलाक़ात मंत्री सें हुई थि। कहते हें कि जोँ जैसा होता हैं उसे वैसामिल हि जाता हैं फिन चाहे वोँ दुनियाॅ केँ किसी भि कोने मे चलाजाए।
शैलेन्द्र बंसल औऱ मंत्री केँ बीच क्याँ मंत्रणा हुई थि इस बारे मे तोँ ख़ैर वोँ दोनो हि बता सकते थें लेकिन मंत्री केँ कैरेक्टर केँ हिसाब सें सोचने पर्र पता चलता थां कि शैलेन्द्र बंसल भि मंत्री केँ हि जैसे कैरेक्टर कां व्यक्ति थां। इसका खुलासा तबहुआ जब मंत्री नें शैलेन्द्र कों अपने यहाॅ कारोबार केँ रूप मे एक् बड़ा सां माॅल स्थापित करने कां प्रस्ताव दिया थां। मंत्री केँ हि सहयोग सें तथा उसके हि निर्देशन पर्र गुनगुन मे अच्छी खासी ज़मीन पऱ ग़ैर कानूनी रूप सें कब्जा करउसजगह पर्र बहोत हि कम टाइम मे एक् बड़ा सां माॅलबन कर रेडी होँ गय़ा थां जिसका उद्घाटन आज स्वयं मंत्री केँ द्वारा हुआ थां।
मंत्री केँ निर्देशन मे बनायह माॅल सबकी नज़र मे माॅल हि थां जहाॅ पर्र हरतरह कां उपयोगी सामान लोगों कों ख़रीदने पऱ मिल जातामगर कोई नहि जानता थां इसी माॅल केँ बेसमेन्ट मे दरअसल मंत्री व शैलेन्द्र बंसल ग़ैर कानूनी धंधे कों अंजाम देने कि बुनियाद भि रख चुके थें।
माॅल कां उद्घाटन तथा वहाॅ पऱ कुछ ज़रूरी मीटिंग करने केँ बाद मंत्री माॅल सें बाहर् आकर अपने सुरक्षा कर्मियों सें घिरा अपनी वाहन केँ पास पहुॅचा हि थां कि सहसा उसकीकोट कि जेब मे मौजूद फोनबज उठा। एक् हाॅथ सें फोन कों निकालने केँ संग हि मंत्री अपनी वाहन कि पिछली सीट पऱ बैठ गय़ा। उसकेबाद उसनेबज रहेफोन कि स्क्रीन कि तरफ देखा। उसके बैठते हि उसकेसंग आगे पीछे उसके सुरक्षा गार्ड भि बैठगए। इसकेबाद गाड़ी आगेबढ़ चली।
"हाॅ बोलो राणे। "फोन कि स्क्रीन पर्र डिटेक्टिव राणे कां नामदेख कर मंत्री नें जल्दी हि काल कों रिसीव करफोन कों कान सें लगाने केँ संग हि कहा___"क्याँ बात हैं? कहींऐसा तौ नहि कि तुमने उस सारेकाम कों कर लिया हैं जिसकाम कों करने केँ लिए हमने तुम्हें लगाया थां? अगरऐसा हैं तौ भइयामान गए तुम्हें। इतनेकम वक़्त मे तौ दुनियाॅ कां कोई भि जासूस काम कों अंजाम नहि दे सकता। अभि कल हि तौ लगे थें तुम् काम मे। "
"आप् ग़लतसमझ रहे हें चौधरी साहब। "उधर सें राणे कां स्वर उभरा___"जिस काम केँ लिए आपने मुझे लगाया हैं वोँ कामभला इतना जल्द केसे होँ जाएगा?"
"ओहऐसा क्याँ। " मंत्री नें बुरा सां मुह बनाया___"हम् तौ मियाॅ खांमखां हि तुम्हें जेम्स बाण्ड कां बाप नहि बल्कि दादाजी समझ बैठे थें। ख़ैर, यह बताओ कि अगरकाम नहि हुआ हैं तौ तुमने हमें मोबाइल किसबात केँ लिए किया हैं?"
"दरअसल मैने। "उधर सें राणे नें कहा___"बहोत हि ज़रूरी बात बताने केँ लिए आपको मोबाइल किया हैं। "
"अरे तौ मियाॅ। " मंत्री तपाक सें बोला___"बात क्यूं बढ़ारहे होँ? ज़रूरी बात तोँ तुमें अतिसीघ्र बताना चाहिए नं। ख़ैर जल्द बताओकौन सि ज़रूरी बात हैं?"
"कल आपके यहाॅ सें जाने केँ बाद। "उधर सें राणेकह रहा थां___"मैने अजय सिंह कां पता किया औऱ उसके पीछेलग गय़ा। मे देख्ना चाहता थां कि उसने जोँ कुछ आपसेकहा थां उसमें कितनी सच्चाई थि तथा वोँ आपके प्रति कितना वफ़ादार हैं?"
"ओह। " मंत्री केँ कान खड़े हौ गए___"तौ क्याँ देखा औऱ क्याँ जानां तुमने?"
"कल तोँ उसनेकुछ खास नहि किया थां। " हरीश राणे नें कहा___"लेकिन आज सुभहनौ याँ दसबजे केँ क़रीब वो अपनी गाड़ी मे किसी व्यक्ति कों लिए गुनगुन केँ रेलवे स्टेशन आया थां। स्टेशन सें बाहर् वोँ अकेला निकला थां। मतलब कि उसकेसंग जोँ दूसरा व्यक्ति थां उसे वोँ शायद रेलवे स्टेशन छोंड़ने आया थां। स्टेशन केँ बाहर् जब वो आया तोँ उसी वक़्त उसकेफोन पऱ किसी कां कालआया तथा उसने किसी सें कुछदेर तक बातें कि। बात करने केँ बाद हि एकदम सें उसकेहाव भाव बदले सें नज़रआए जिसके तहत वोँ अपनी गाड़ी मे बैठकर जल्दी स्टेशन सें बंदूख सें छूटी गोली कि तरहहवा होँ गय़ा। मे उसके पीछे हि थां कि अचानक कुछदेर बाद उसकेपास तीनअलग अलग जीपों मे ढेर सारे व्यक्ति हथियारों सें लैशआए। उनमें सें एक् व्यक्ति अजय सिंह कि वाहन मे बैठ गय़ा। उसकेबाद अजय सिंह कि गाड़ी केँ चलते हि बाॅकी तीनों जीपों मे सवार व्यक्ति भि अजय सिंह केँ पीछे पीछेचल पड़े। "
"अब बस भि करो मियाॅ। " सहसा मंत्री राणे कि बातबीच मे हि काटते हुए लेकिन परेशान भाव सें कह उठा___"तुम् तोँ इसतरह शुरुआत होँ गए जैसेकोई टेप रिकार्डर शुरुआत हौ जाता हैं। मुख्य बात बताओ कि मामला क्याँ हुआ हैं बस। "
"मुख्य बातयह हैं कि। " उधर सें राणे नें कहा___"इस समय जहाॅ पर्र मे हूॅ वहाॅ पऱ एक् सें बढ़कर एक् धुरंधर लोगों कि पूरीफौज आई हुईँ हैं। इतना हि नहि यहाॅ पऱ एक् मंदिर हैं जिसके सामने कई सारे हट्टे कट्टे लोग खड़े हें। एक् हट्टा कट्टा व्यक्ति एक् मामूली सें लड़के सें ज़बरदस्त लड़ाई कररहा हैं। अजय सिंहतथा उसकेसंग आएसभी लोग लड़ाई देखरहे हें। मैने तोँ अजय सिंह कों यह भि कहते सुना हैं कि इस हराम केँ पिल्ले कों इतना मारो कि हगने मूतने केँ भि काबिल न् बचे। मंदिर केँ पास हि दो लड़कियाॅ दो आदमियों सें घिरी खड़ी हें तथा बुरीतरह रोयेजा रही हें। उनकेमुख सें बारबार एक् हि बात निकलरही हैं कि प्लीज उसेकुछ मतकरो। इसका मतलबयह हुआ चौधरी साहब कि यहवही लड़का हैं जिसका नाम विराज हैं। अजय सिंह नें कदाचित उसेघेर लिया हैं औऱ अब वो उसके आदमियों केँ रहमोकरम पऱ हैं। "
"ओह तोँ यहबात हैं। " मंत्री केँ शरीर मे जाने क्याँ सोचकर झुरझुरी सि हुईँ, बोला___"चलो अच्छा हि हुआ कि वोँ साला ठाकुर कि पकड़ मे आँ गय़ा हैं। अबसभी कुछसही होँ जाएगा राणे। "
"यकीनन। " उधर सें राणे नें कहा___"आपका दुश्मन अजय सिंह कि पकड़ मे आँ चुका हैं। अब आप् अगर चाहें तौ इस मौके कां फायदा उठा सकते हें। यानी आप् भि यहाॅ आँ जाइये औऱ बहती गंगा मे डुबकी लगाकर अपनाकाम भि कर लीजिए। "
"अब हमें वहाॅआने कि ज़रूरत नहि हैं राणे। " मंत्री नें कहा___"वोँ लड़का तोँ अबअजय सिंह कि पकड़ मे आँ हि गय़ा हैं। अतःअजय सिंह अपने वादे केँ अनुसार उसे हमारे हवाले भि कर देगा। उसकेबाद तौ उसे हमारी हर चीज़ लौटानी हि पड़ेगी। फिन हम् उसका क्याँ हस्र करेंगे इसके बारे मे उसने सोचा भि न् होगा। "
"तोँ फिन मेरेलिए क्याँ आदेश हैं चौधरी साहब?"उधर सें हरीश राणे नें कहा___"मुझे नहि लगता कि अब इसकेबाद भि मेराकोई काम हैं यहाॅ। यानी आपका दुश्मन ठाकुर अजय सिंह सें देर सवेर आपकोमिल हि जाएगा औऱ फिन आप् उससे जैसे चाहेंगे वैसे अपने वोँ वीडियोज तथा अपने बच्चे वापस लें सकेंगे। "
"ठीककह रहे होँ तुम् राणे। " मंत्री नें कहा___"अगर यहीआलम हैं वहाॅ कां तोँ फिनअब रह हि क्याँ गय़ा हैं तुम्हारे कुछ करने केँ लिए?इस लिएअगर तुम् चाहो तोँ वापस आँ सकते हौ याँ फिनऐसा करो कि अभि फिलहाल तुम् वहीं पऱ रहो औऱ देखते रहो कि नतीजा क्याँ निकलता हैं? जैसा कि इस सबके बारे मे ठाकुर नें हमें सूचना तक नहि दि हैं इसलिए संभव हैं कि उसकेमन मे हमारे प्रति कोईखोट होँ। इसलिए तुम् ठाकुर कि कार्यवाही केँ बारे मे अंत तक देखते रहो। अगर ठाकुर इसकेबाद भि हमेंउस सबके बारे मे नहि बताता हैं तोँ हम् उसे भि देख लेंगे। तुम् यह अवश्य देख्ना कि ठाकुर उस लड़के कों तथा अपनी बेटी कों कहाॅकैद करके रखता हैं?"
"ठीक हैं चौधरी साहब। "उधर सें हरीश राणे केँ ऐसा कहने केँ संग हि मंत्री नें कालकट कर दि। हरीश राणे सें बात करने केँ बाद मंत्री इस सबके बारे मे सोचने लगा। उसे उम्मीद तोँ थि कि ठाकुर उससे गद्दारी नहि करेगा लेकिन उसेइस बात कां भि एहसास थां कि ठाकुर सालाजब अपनों कां हि नहि हुआ तोँ भला उसका क्याँ होगा?
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
रितू औऱ आदित्य इससमय दोअलग अलग पेड़ों पऱ चढ़ेहुए थें। जहाॅ सें उन दोनों कों मंदिर केँ सामने कां नज़ारा स्पष्ट दिखरहा थां। विराज केँ संग क्याँ क्याँ हुआ थां यहउन दोनो नें अपनी ऑखों सें देखा थां। दोनो हि विराज केँ लिए बेहद चिंतित व परेशान थें। उन दोनो कों उम्मीद नहि थि कि अचानक हि ऐसाकुछ होँ सकता हैं।
विराज कों इसतरह मार खातेदेख आदित्य जल्दी पेड़ कि शाखा सें नीचे कूदने हि वाला थां कि रितू नें उसे रुकने कां इशारा किया थां। उसे उसने समझाया थां कि उसके जाने सें भि इस टाइमकुछ नहि होँ सकता थां। उल्टा वोँ स्वयं भि विराज कि तरह पकड़ मे आँ सकता हैं। आदित्य कों रितू सें यह उम्मीद नहि थि लेकिन फिनउसे भि लगा कि रितूसही कहरही हैं। इससमय वहाॅ पऱ जानां खतरे सें खाली नहि थां। संभव थां विराज उसकीवजह सें कमज़ोर हि पड़ जाता।
दोनो केँ पासअब कोई दूसरा चारा नहि थां। हलाॅकि रितू केँ मन मे कुछ औऱ हि चलरहा थां। उसके चेहरे केँ भावबता रहे थें कि वोँ इस सिचुएशन पऱ ज़्यादा गंभीर नहि हुइ हैं। कदाचित उसेबस टाइम कां इंतजार थां।
आदित्य कि नज़र सहसा शेखर केँ मौसा यानी केशव कि तरफ पड़ी। केशवजी केँ संगतीन जीपों मे व्यक्ति थें जिनके हाॅथों मे बंदूख, लट्ठतथा हाॅकी जैसे हथियार नज़र आँ रहे थें। जिन पेड़ों पर्र यह दोनो चढ़ेहुए थें उन्हीं पेड़ों केँ बीच सें होतेहुए केशव औऱ उसके आदमियों कि जीपें गुज़री थीं। यह देखकर आदित्य नें रितू कि तरफ देखा। रितू नें भि आदित्य कि तरफ देखामगर उसनेकोई रिएक्शन नहि दिया। पता नहि क्याँ चलरहा थां उसकेमन मे??
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
इधर मेरीतरफ।
मे समझ गय़ा थां कि मेरा प्रतिद्वंदी ताकत केँ मामले मे मुझसे कहीं अधिक हैं। अतःअब ताकत केँ संगसंग दिमाग़ सें भि काम लेना ज़रूरी थां। उधर वोँ व्यक्ति मेरीतरफ इसतरह देखदेख कर मुस्कुरा रहा थां जैसे वोँ मुझे सचमुच मे चींटी हि समझरहा हौ औऱ जब चाहे मुझेमसल कररखदे लेकिन अभि वोँ मुझे जैसे खिलारहा थां।
"क्यूं बच्चे दर्द तोँ नहि हौ रहा न्?" उस व्यक्ति नें ब्यंगात्मक लहजे मे मुस्कुरा कर कहा___"वैसे अभि तोँ मैने तुम् पऱ ताकत सें कोईवार हि नहि किया हैं। वरना तुम् इसतरह सही सलामत खड़े न् रहते बल्कि अपने हाॅथ पांव कि हड्डियाॅ तुड़वाए ज़मीन पऱ पड़े रहते। "
"मे भि अभि तक मात्र देख हि रहा थां कि। " मैने कहा___"भाड़े केँ कुत्तों मे कितना दम होता हैं?"
"अच्छा। " वो तिलमिलाया तौ अवश्य मगरफिन भि मुस्कुरा कर हि बोला___"तोँ क्याँ देखा औऱ क्याँ समझआया तुम्हें?"
"यही कि। " मैने मुस्कुरा कर कहा___"कुत्ते तोँ कुत्ते हि होते हें वोँ कभीशेर कां शिकार नहि कर सकते। "
"यू बास्टर्ड। " वोँ बुरीतरह गुस्सा मे आतेहुए मेरीतरफ बढ़ा औऱ गुस्से मे आग बबूला होतेहुए मुझ पर्र हमलाकर दिया।
मे तोँ अब पूरीतरह सें सतर्क हौ चुका थां औऱ उसके किसी भि हमले केँ लिए पूरीतरह सें सजधजकर थां। जैसे हि उसने मेरी नाॅक मे अपने दाहिने हाॅथ कां पंच मारा मे फुर्ती सें एक् तरफहुआ औऱ बिजली कि सि स्पीड सें पलटकर उसकीतरफ पीठ करतेहुए उसकेउस हाॅथ कों दोनो हाॅथों सें पकड़कर अपने दाहिने कंधे पर्र रखा औऱ फिन पूरी ताकत सें नीचे कि तरफ ज़ोर कां झटका दिया। परिणामस्वरूप कड़कड़ कि आवाज़ केँ संग हि उसका हाॅथबीच सें टूट गय़ा। हाॅथ केँ टूटते हि वो हलाल होते बकरे कि तरह चिल्लाया। जबकि मैंने इतने पऱ हि बस नहि किया बल्कि फुर्ती सें घूमकर उसके पीछेआया औऱ इससे पहले कि वोँ कुछसमझ पाता मैने फुर्ती सें उसकेसिर कों दोनो हाथों सें पकड़ा औऱ ज़ोर सें बाॅईतरफ कों झटक दिया। नतीजा यहहुआ कि एक् बार पुनः फिज़ा मे कड़कड़ कि आवाज़ हुइ औऱ उसकी गर्दन एक् तरफ कों झूल गई, संग हि वो लहराते हुएहुए ज़मीन पर्र गिरा औऱ शान्त पड़ गय़ा। उसेदेख करअबकोई भि कह सकता थां कि वोँ मर चुका हैं।
आसपास खड़े उसकेसब हट्टे कट्टे व्यक्ति यह नज़ारा देखकर आश्चर्यचकित रहगए। किसी कों भि इससभी पऱ यकीन न् आया कि यहदोसमय मे अचानक क्याँ हौ गय़ा हैं? अपनी अपनी स्थान पऱ खड़े सबकेसभी बुत सें बनगए थें। ऊपर मंदिर केँ दरवाजे केँ जस्ट सामने हि दोनोतरफ सें एक् एक् व्यक्ति सें घिरी नीलमव सोनम दिदी भि यहसभी देखकर हक्का बक्का रह गई थि।
"ओये मारोरे इस हरामज़ादे कों। " सहसा फिज़ा मे छा चुके सन्नाटे कों एक् व्यक्ति नें ज़ोर सें चिल्लाते हुएभंग किया, बोला___"इसने अब्दुल कों जान सें मार दिया। इस साले कि हड्डी पसली तोड़ डालोसभी। "
उस व्यक्ति कि इसबात सें सभी जैसे होशो हवाश मे आए औऱ फिन चारोतरफ सें मेरीतरफ दौड़ पड़े। मे जानता थां कि सबकेसभी साले साॅड हें। इस टाइम गुस्से मे यहसभी सचमुच मेरी हड्डियाॅ तोड़ सकते थें। अभि वोँ सभी मेरे नज़दीक पहुॅचे भि नहि थें कि तभी बहोत सारे व्यक्ति हाॅथों मे बंदूख, लट्ठव हाॅकी जैसे हथियार लिए चारोतरफ सें उनसभी आदमियों पर्र टूट पड़े। मे समझ गय़ा कि यहसभी केशवजी केँ व्यक्ति हें। यहदेख कर मैने राहत कि साॅसली।
केशवजी केँ वोँ व्यक्ति बिनाकुछ सोचे समझेतथा बिनाकुछ बोले एकदम सें टूट पड़े थें उन हट्टे कट्टे आदमियों पऱ। नतीजा यहहुआ कि वोँ सभीजिन जिन केँ निशाने पर्र आए वोँ सभी देखते हि देखते लहू लुहान नज़रआने लगे। मंदिर केँ बाहर् इतने सारे व्यक्ति औऱ उनके हंगामा सें वातावरण गूॅजउठा। अभि यहसभी शोरमचा हि हुआ थां कि तभीअलग अलग दिशाओं सें एक् बार पुनः वैसे हि हट्टे कट्टे व्यक्ति निकलकर आए औऱ केशवजी केँ उन आदमियों पऱ पिल पड़े। हलाॅकि उन सबके हाॅथ खाली थें लेकिन जल्द हि उनके हाॅथों मे भि हथियार नज़रआने लगे। उन लोगों नें केशवजी केँ आदमियों सें उनके हि हथियार छीनकर उन पर्र प्रहार करना शुरुआत कर दिया थां।
केशवजी केँ जिन आदमियों केँ पास बंदूखें थि वोँ गोलियाॅ बरसाए जारहे थें। जिसका नतीजा यह हौ रहा थां कि जिन पर्र भि गोली लगती वोँ सीधा यमलोक हि पहुॅच रहा थां। इधर मे आसपास देखरहा थां कि आदित्य व रितू दिदी कहाॅ हें? मे हैरान थां कि वोँ दोनो अभि तक आए क्यूं नहि? मे स्वयं भि इस मुठभेड़ मे किसी नं किसी सें लड़ेजा रहा थां।
"सबकेसभी अपनी अपनी स्थान रुकजाओ। " सहसाइस आवाज़ कि गर्जना कों सुनकर मे चौंक गय़ा। पलटकर देखा तौ ऊपर जहाॅ पऱ नीलमव सोनम दिदी खड़ी थि उनकेपास हि बड़े बापू यानीअजय सिंह खड़े थें। उनके हाॅथ मे रिवाल्वर थि जिसे वोँ सोनम कि कनपटी पऱ लगाए खड़े थें। उन आदमियों कां पता हि नहि थां जौ इसके पहले नीलमव सोनम दिदी कों कवर किये खड़े थें। शायद सबकेआते हि वोँ भि लड़ाई मे शामिल होँ गए थें।
अजय सिंह कि ज़ोरदार आवाज़ कों सुनकर सबकेसभी जहाॅ केँ तहाॅरुक गए। उनसभी केँ रुकते हि अजय सिंह केँ संगआए फिरोज़ खान केँ सब आदमियों नें केशवतथा उनके आदमियों कों गन प्वाइंट पर्र लेँ लिया। सभी कुछ एकदम सें बदल गय़ा। अभि कुछ हि देर पहले तोँ हालात हमारे हक़ नज़रआए थें लेकिन अब बाज़ी फिन सें पलट गई थि।
"तुम् लोगों नें बहोत तमाशा कर लिया हैं। " शान्त पड़गए माहौल मे अजय सिंह कि आवाज़ गूॅजी___"अब ज़रा मेरीबात कानखोल कर सुनो सबकेसभी। अगर मेरे आदमियों केँ अलावा कोई दूसरा व्यक्ति अपनी स्थान सें हिला तोँ समझलो वोँ अपनीमौत कां जिम्मेदार स्वयं होगा। "
अजय सिंह कि इसबात सें कोईकुछ नं बोला। कुछ देर कि ख़ामोशी केँ बाद सहसाअजय सिंह नें मेरीतरफ देखा औऱ फिन मुस्कुरा कर कहा___"तौ आख़िर तुम् मेरी पकड़ मे आँ हि गए भतीजे? बहोत सताया तुमने औऱ बहोत अधिक तड़पाया भि मुझे। मगर कोईबात नहि, मे उस सबका ब्याज सहित हिसाब लेँ हि लूॅगा। मगर उससे पहले मे ज़रा अपनी बेटियों सें तोँ मिललूॅ। "
कहने केँ संग हि अजय सिंह नें एक् हाॅथ बढ़ाकर नीलम कों उसकेसिर केँ बालों सें पकड़कर ज़ोर सें अपनीतरफ खींचा। नीलम केँ हलक सें दर्द मे डूबी चीख़ निकल गई। हलाॅकि उसकीव सोनम दिदी दोनो कि हि हालत बहोत ख़राब हौ चुकी थि। उनके चेहरों पर्र मौत जैसा ख़ौफ़ मानो ताण्डव सां कररहा थां।
"क्यूं बिटिया रानी। "अजय सिंह नें दाॅत पीसते हुए नीलम केँ चेहरे केँ पास अपना चेहरा लातेहुए कहा___"तुम्हारे इस बाप केँ लौड़े मे ऐसी क्याँ कमी नज़र आँ गई थि जोँ तुम् दोनो बहनों नें अपनेइस भइया केँ लौड़े कों थाम लिया?"
"अजय सिंह। " मे पूरी शक्ति सें चिल्लाया___"ज़ुबान सम्हाल करबात कर। यहमत भूल कि जिससे तुँ इस घिनौने तरीके सें बातकर रहा हैं वोँ स्वयं तेरी हि बेटी हैं। मेरे दिलो दिमाग़ मे तेरेलिए जोँ इज्ज़त बाॅकी थि उसे भि आज तूनेयह घिनौनी बातबोल कर ख़त्म करली हैं। यकीनन तूँ इस संसार कां सबसे गंदा औऱ सबसे पापी इंसान हैं, बल्कि इंसान हि नहि हैं तूँ, राक्षस हैं राक्षस। "
"मे चाहूॅ तौ इसी टाइम तेरीइस कड़वी ज़ुबान कों तेरेहलक सें निकाल करचील कौवों कों खिलादूॅ। " मेरी बातों सें तिलमिलाया हुआअजय सिंह गुर्राया___"मगर जैसा कि मैनेकहा न् कि पहले मे अपनी बिटियों सें मिललूॅ, उसकेबाद तुझसे भि अच्छे सें मिलूॅगा। "
"आप् सच मे बहोत गंदे हें डैड। " नीलम नें बुरीतरह रोतेहुए कहा___"काश यहसभी सच नं होता। अच्छा होता कि इस सबके बारे मे मुझेपता हि नं चलता। रितू दिदी नें बहोत अच्छा किया थां जौ उन्होंने आप् जैसे गंदेव पापीमाॅ बाप कों ठुकरा दिया हैं औऱ अभि जिस तरीके सें आपने मुझे वोँ शब्दकहे हें उससे आपनेबता दिया कि आपकेमन मे अपनी हि बहू बेटियों केँ प्रति क्याँ हैं?"
"इनसभी बातों कां अबकोई मतलब नहि रह गय़ा हैं बिटिया रानी। "अजय सिंह नें अजीबभाव सें कहा___"यह सच हैं कि मैंने हमेशा अपने हि घऱ कि औरतों व बेटियों कों अपने नीचे सुलाने कि ख्वाहिश कि हैं। मगर इसमें बुरा क्याँ किया हैं मैने ? हर इंसान कों अपनी ख़्वाहिश पूरी करने कां हक़ होता हैं। मैने भि अपनी इच्छाओं कों पूरा हि तौ करना चाहा हैं। ख़ैर छोंड़, यहबता कि तेरी यहीं पऱ नंगा करूॅ याँ हवेली लें जाकर आहिस्ता तेरी लड़की सें महिला बनाऊॅ?"
"तूँ कुत्ते कि मौत मरेगा अजय सिंह। " मे पूरी शक्ति सें दहाड़ते हुए बोला___"तेरे बदन मे कीड़े पड़ेंगे। तुँ सड़सड़ कर मरेगा। तुँ वासना औऱ हवश मे इतना अंधा होँ चुका हैं कि तुझेही रिश्ते नाते भि नज़र नहि आँ रहे हें। "
"कुत्ते कि मौत तोँ मे तुम्हे मारूॅगा भतीजे। " अजय सिंह नें कहा___"मगर उससे पहले मे तेरीमाॅ गौरी, तेरी बेहन निधी, व तेरी चाची करुणा इन तीनो कों जीभर केँ तेरे हि सामने पेलूॅगा, वोँ भि आगे पीछे दोनोतरफ सें। उसकेबाद उन सबको रंडी बज़ार मे बेंचूॅगा भि, तब तुम को मारूॅगा। "
"अपने जैसे हि हिजड़ों कि फौज लें करआया हैं। " मैने कहा___"औऱ इन्हीं हिजड़ों कि फौज केँ बलबूते पर्र तुँ इतनाकुछ बोलपा रहा हैं। तुझमें अगरदम हैं तोँ मुझसे स्वयं मुकाबला कर। "
"इसे मारोरे। " अजय सिंह ज़ोर सें चिल्लाया___"इस हराम केँ पिल्ले कों इतना मारो कि हगने मूतने केँ भि काबिल नं बचे। बहोत देर सें यह हरामज़ादा बड़बड़ कियेजा रहा हैं। पहले इसकी हि हड्डियाॅ तोड़ो। "
अजय सिंह केँ कहने कि देर थि। चारोतरफ सें वही हट्टे कट्टे व्यक्ति मेरीतरफ बढ़ते हुए आँ गए। वोँ चार थें औऱ मे अकेला। मे अजय सिंह कि उन अश्लीलतापूर्ण बातों सें बुरीतरह गुस्सा व गुस्से सें भन्ना उठा थां। जैसे हि एक् मेरीतरफ झपटा मैने बिजली कि तरह फुर्ती दिखाई औऱ उछलकर एक् ज़बरदस्त फ्लाइंग किक उसकी गर्दन पर्र जड़ दि। उसकेमुख सें घुटी घुटी सि चीख निकली संग हि कड़कड़ कि आवाज़ भि हुईँ। ज़मीन पऱ औंधेमुह जब वो गिरा तोँ फिनउठ नं सका।
यह देखकर नीलम कों उसके बालों सें पकड़े अजय सिंह हक्का बक्का रह गय़ा। कदाचित उसे मुझसे ऐसे किसी जादू कि स्वप्न मे भि उम्मीद नहि थि। वोँ ऑखें फाड़े मुझे देखने लगा थां। इधरउस व्यक्ति केँ गिरकर शान्त पड़ते हि बाॅकी तीन थोड़ी देर केँ लिए ठिठके औऱ फिन एक् संग मेरीतरफ झपटे। मैंने अपनी स्थान सें ऊॅची छलांग लगाईतथा हवा मे हि कलाबाज़ी खातेहुए उन तीनों केँ बीच सें बाहर् उनके पीछे आँ खड़ाहुआ। जबकि वोँ तीनों हि झोंक मे आकरआपस मे हि टकरागए।
"रुकजा सुअर कि औलाद। "तभी अजय सिंह चिल्लाया___"वरना मेरे एक् हि इशारे पऱ मेरेसंग आए मेरेयह सभी हथियारों सें लैश व्यक्ति तुम्हारी तरफ लम्हा भर मे गोलियों सें भूनकर छलनीकर देंगे। "
"तुँ मुझे गोलियों सें छलनी नहि कर सकता कुत्ते। " मैने कहने केँ संग हि अपनी टाॅगचला दि एक् कि पीठ पऱ। जिसकी पीठ पर्र लात कां प्रहार पड़ा थां वोँ अपनेसंग दूसरे कों संगलिए हि ज़मीन पऱ गिर गय़ा, जबकि तीसरा अभि पलटा हि थां कि मैनेपेर केँ घुटने कां वार उसकेपेट मे किया तौ वोँ बिलबिला उठा। संग हि बोलता भि जारहा थां ज़ोर सें____"तेरे लिए तौ मे एक् तुरुप केँ इक्के कि तरहहूॅ नं। मुझे बंधकबना कर हि तोँ तूँ बाॅकी सबको मुम्बई सें यहाॅ बुलाएगा। अगर मे हि मर गय़ा तोँ तुँ केसे बुला सकेगा उन सबको?"
"ज़्यादा बकवास नं कर समझा। "अजय सिंह पहले तौ सकपकाया, फिन चिल्लाया___"मे कहताहूॅ यह उछलना कूदना बंदकर वरना मे नीलम कों यहीं पऱ नंगाकर दूॅगा। "
"नहींऽऽऽ। " अपने बाप कि यहबात सुनकर नीलम तौ बुरीतरह रोतेहुए चीखी हि उसकेसंग मे सोनम भि चीख पड़ी थि। इधरअजय सिंह कां वाक्य जैसे हि मेरे कानों सें टकराया मे एकदम सें रुक गय़ा। मे जानता थां कि अजय सिंहयह अवश्य कर सकता थां। उसेइस टाइम अपनीव अपनी बेटी कि इज्ज़त कि कोई परवाह नहि थि।
"तुम् मेरी इज्ज़त कि परवाह मतकरो राज। " सहसा नीलम रोतेहुए चिल्लाई___"वैसे भि मुझेइस नीच व्यक्ति कि ऐसी बेहूदा बातें अपनेलिए सुनकर जीने कि ख़्वाहिश मर गई हैं। इसलिए तुम् मेरी चिन्ता मतकरो औऱ इन सारे राक्षसों कां वधकरदो। "
"ओहो क्याँ बात हैं। " अजय सिंह चमका___"देखो तौ क्याँ इज्ज़त दि हैं मेरी बिटिया रानी नें मुझे। ख़ैरकोई बात नहि, पर्र हाॅ मरना तोँ हैं हि तेरी औऱ तुम्हे हि बस क्यूं बल्कि तेरी बड़ी बेहन कों भि मरना होगा। मुझेऐसी औलाद केँ जीने मरने सें अबकोई फर्क़ नहि पड़ेगा जौ अपने हि माॅ बाप केँ मौत कां सामान करती फिरे। बचपन सें अब तक मैंने तुम् दोनो कों हर चीज़ दि हैं। जिस चीज़ पर्र तुम् दोनो नें हाॅथरखा उस चीज़ कों मैने तुम् दोनो केँ नामकर दि। मगर बदले मे दिया क्याँ तुम् दोनो नें?? अरे देने कि तौ बातदूर बल्कि मेरे दुश्मन कां संग देकर मेरीमौत चाही तुम् दोनो नें। अरेमाॅ बाप जैसे भि होंमाॅ बाप हि होते हें। ख़ैर जानेदो, मुझेइस बात कां दुख नहि हैं कि इस लड़के नें मेरा इतना अधिक नुकसान करके मेरा जीना हराम किया हैं बल्कि इसबात कां दुख हैं कि मेरी अपनी बेटियाॅ मुझे औऱ अपनीमाॅ तथा भइया कों त्याग कर इसकासंग दिया। इस लिए इसकी सज़ा तौ मिलेगी तुम् दोनो कों। मगर उससे पहले तुम् दोनो केँ संग मे वोँ करूॅगा जौ दुनियाॅ मे किसी भि बाप नें न् किया होगा। "
"तुझ जैसे इंसान सें औऱ किसीबात कि उम्मीद भि क्याँ कि जा सकती हैं। " नीलम नें सहसा ज़हरीले भाव सें कहा___"जौ अपनी हि औलाद कों अपने नीचे सुलाना चाहता हौ उसके जैसानीच व पापी दूसरा कौन होगा?उस दिन सोचते सोचते मेरा बुराहाल हौ गय़ा थां कि आख़िर ऐसा क्याँ होँ गय़ा हैं जिसकी वजह सें दिदी नें अपने हि माॅ बाप कों त्याग दिया हैं, मगरउस रातजब मैने अपने कानों सें सभीकुछ सुना तोँ मेरे पैरों तले सें ज़मीन खिसक गई। इतना बड़ा धोखा, इतना बड़ा कुकर्म किया तूने जिसके बारे मे अगर किसी कों पताचल जाए तौ तुझ पर्र थूॅकना तक पसन्द नं करे। "
"हरामज़ादी कुतिया। " अजय सिंह बुरीतरह तमतमा गय़ा, औऱ फिनदो तीन थप्पड़ जल्द जल्द नीलम केँ गालों पऱ जड़ दिया उसने। यह देखकर सोनमउसे पकड़ने केँ लिएआगे बढ़ी तोँ सहसा वहीं पर्र आँ गए फिरोज़ खान नें उसेगन प्वाइंट पर्र रख लिया। इधर नीलम केँ गालों पर्र थप्पड़ पड़ते हि मेराखून भि खौल गय़ा।
"लड़की पऱ क्याँ हाॅथ उठाता हैं नीच इंसान?" मैने दहाड़ते हुए कहा___"असली मर्द हैं तौ इधर आँ औऱ मुझसे दोदो हाॅथकर। शपथ पैदा करने वाले कि तेरेबदन कि एक् एक् हड्डियों कों नं तोड़ा तोँ अपने बाप ठाकुर विजय सिंह कि औलाद नहि। "
"तेरी गर्मी कां इलाजअब करना हि पड़ेगा। " अजय सिंहपलट कर गुर्राया, फिन उन्हीं हट्टे कट्टे आदमियों कि तरफ देखते हुए कहा___"खड़े क्याँ हौ तुम् लोग?इस साले कों इतना मारो कि इसकी सारी हेकड़ी निकलजाए। "
बसफिन क्याँ थां? उन तीनों नें मुझे धोना शुरुआत कर दिया। मे कुछ करने कि हालत मे नहि थां। अगरकुछ करता तोँ अजय सिंहफिन सें नीलम केँ संगकुछ उल्टा सीधा करने लगता। अभि मे मारखा हि रहा थां कि सहसा मेरे अलावा किसी औऱ कि भि चीख गूॅजी वहाॅ। मैनेसिर उठाकर देखा तौ चौंक गय़ा। आदित्य एक् व्यक्ति कों बुरीतरह मारेजा रहा थां। आदित्य केँ अचानक हि इसतरह आँ जाने सें बाॅकी खड़ेसभी भौचक्के सें रहगए।
"तुम् यहाॅ क्यूं आँ गएआदी?" मैंने सहसा हतासभाव सें कहा___"तुम्हें यहाॅ नहि आनां चाहिए थां। "
"ज़्यादा बकवास मतकरो समझे। " आदित्य नें तीखेभाव सें कहा___"मे कायर नहि हूॅ जोँ इतनीदेर सें चुपचाप तुम्हें इसतरह मार खाते देखता रहता। बहोत देर सें रितू केँ कहने पऱ रुकाहुआ थां मगरअब औऱ नहि रुक सकता थां मेरे दोस्त। तेरासंग भि न् दिया तोँ साला धिक्कार हैं मुझ पऱ। "
मे अब क्याँ कहताउसे। उधर आदित्य केँ आँ जाने सें अजय सिंह भि चौंका थां। उसे नहि पता थां कि आदित्य कौन हैं, लेकिन इतना तौ वोँ समझ हि गय़ा थां कि आदित्य कदाचित मेरा हि मित्र हैं। अतः उसने सीघ्र हि ऊॅची आवाज़ मे मुझसे कहा___"अपने मित्र कों बोल भतीजे कि ज़्यादा उछलकूद न् करे। अगर यहाॅ पर्र यह तेरीतरह मार खाने हि आया हैं तौ चुपचाप अबयह भि मारखाए। "
"तेरी तोँ मे कुत्ते कि तरह मारूॅगा हरामज़ादे। " आदित्य चीखा___"इतनी देर सें देखरहा हूॅ कि तूँ भाड़े केँ इन टट्टुओं कि वजह सें हि शेरबना हुआ हैं, जबकि स्वयं तुझमें कितनी मर्दानगी हैं वोँ तोँ तूँ भि जानता हि होगा साले। कितनी बार मेरे मित्र नें तुम्हें लड़ने केँ लिए ललकारा मगर तुँ इससे लड़ने नहि आया। मतलबसाफ हैं कि तूँ इससे डरता हैं औऱ स्वयं भि जानता हैं कि तूँ अपने भतीजे सें टक्कर नहि लें सकता। हाहाहाहा राज दोस्त, तेरायह ताऊ तौ कायर औऱ डरपोंक निकला। "
"ठाकुर साहब। " सहसा फिरोज़ खानबोल पड़ा___"आप् कहें तोँ एक् हि झटके मे इस व्यक्ति कां काम तमामकर दूॅ। इसकी हिम्मत केसे हुई आपसेऐसे बात करने कि?"
"कोईबात नहि खान। "अजय सिंह बोला___"इसे भि खुजली हौ रखी हैं। इसलिए इसकी भि धुनाई शुरुआत करवादो। कुछदेर मे हि हमसेरहम कि भीख माॅगने लगेगा। "
"ठीक हैं ठाकुर साहब। " फिरोज़ खान नें कहा औऱ फिन अपने आदमियों कों हुक्म दिया।
कुछ हि देर मे हम् दोनो कि धुनाई शुरुआत हौ गई। यहदेख कर नीलमव सोनम दिदी बुरीतरह रोयेजा रही थि औऱ संग हि अजय सिंह सें हमें नां मारने केँ लिएकहे भि जारही थि। मगर उनके कहने कां अजय सिंह पऱ कोईअसर नं हुआ।
अभि यहसभी हौ हि रहा थां कि एकाएक हि संपूर्ण वातावरण मे पुलिस सायरन कि आवाज़ें आनेलगी। इन आवाज़ों कों सुनकर अजय सिंहव फिरोज़ खान बुरीतरह चौंक पड़े। उन्हें समझ नं आया कि यहाॅ पुलिस केसे आँ गई? देखते हि देखते मंदिर केँ चारोतरफ सें ढेर सारे पुलिस वालों कां हुजूम उमड़ पड़ा।
"तुम् सबको पुलिस नें चारोतरफ सें घेर लिया हैं। " सहसातभी माइक पर्र किसी कि आवाज़ गूॅजी___"इस लिएसभी अपने अपने हथियार नीचेरख कर अपने आपको पुलिस केँ हवाले करदो। वरना हमें तुम् सभी पऱ गोलियाॅ चलाने मे भि कोई हिचकिचाहट नहि होगी। "
"ठाकुर साहब। " सहसा बुरीतरह घबराया हुआ फिरोज खानकह उठा___"यह पुलिस वाले यहाॅ केसे आँ गए?अब हम् सभी पुलिस केँ द्वारा पकड़लिए जाएॅगे। कुछ कीजिए ठाकुर साहब। आप् तौ जानते हें कि पुलिस कों मेरी औऱ मेरे आदमियों कों बड़ी शिद्दत सें तलाश हैं। मे औऱ मेरे मित्र पुलिस केँ हाॅथ नहि लगना चाहते। खुदा केँ लिएकुछ कीजिए। "
"मुझेपता हैं कि। " अजय सिंह नें सोचने वालेभाव सें कहा___"इन पुलिस वालों कों यहाॅ किसने बुलाया हैं? हाॅखान, यहसभी रितू कां कियाधरा हैं। उसी कुतिया नें इन पुलिस वालों कों बुलाया हैं। इतनीदेर सें देखरहा हूॅ वोँ हरामज़ादी कहीं दिखाई नहि देरही हैं। अवश्य पुलिस वालों केँ संग हि होगी। "
"किसी कां भि कियाधरा होँ ठाकुर साहब। " फिरोज़ खान नें कहा___"मामला तौ बिगड़ हि गय़ा हैं अब। मगर समझदार व्यक्ति वही हैं जौ ऐसे टाइम पऱ भि स्वयं कों बचा लेँ औऱ अपने दुश्मन कों मातदे दे। "
"सही कहा तुमने खान। "अजय सिंह नें कहा____"मुझे ऐसा हि कुछ करना होगा। अरे हाॅ एक् काम करताहूॅ। इन दोनो कों यहाॅ सें अपनेसंग लेँ चलते हें। वोँ साला इन्हीं दोनो कों लेनेआया थां न्। अबजब इन्हें नहि लें जा पाएगा तौ यकीनन यह उसकी ज़बरदस्त हार होगी। अब वोँ इन दोनो केँ लिए मेरेपास सिर केँ बल आएगा। "
"बिलकुल सहीकहा आपने। " फिरोज़ खान नें कहा__"लेकिन अब हमेंदेर नहि करनी चाहिए। यहाॅ सें इन दोनो कों लेकर बड़ी होशियारी सें खिसक लेना चाहिए। "
"ठीक हैं। " अजय सिंह नें कहा___"चलो इन दोनो कों एक् एक् करकेउठा कर लें चलते हें। इससे पहले कि पुलिस हम् तक पहुॅचे हम् पीछे केँ इस वाले हिस्से सें निकल लेते हें। मुख्य रास्ते कि तरफ जानां यकीनन खतरे सें खाली नहि होगा। मेरी गाड़ी इसी वाले हिस्से कि तरफ हैं। अच्छा हुआ कि गाड़ी अधिक पीछे कि तरफउस मुख्य रास्ते कि तरफ नहि खड़ी कि थि मैने। "
अजय सिंह कि बातें सुनकर नीलमव सोनम दिदी बुरीतरह घबरा गई औऱ उनके चंगुल सें छूटने केँ लिए छटपटाने लगी थि। मगर कदाचित अजय सिंह कों उनसेइसी बात कि उम्मीद थि। यहीवजह थि कि उसने मजबूती सें उन्हें पकड़ा हुआ थां। लेकिन अब उसकीबात सें फिरोज़ नें भि सोनम दिदी कों पकड़ लिया। यानी एक् एक् कों लेँ कर मंदिर केँ बगल सें सीढ़ियाॅ उतरने लगे वोँ दोनो।
नीलमव सोनमजब स्वयं कों उनके चंगुल सें न् छुड़ा पाई तोँ पूरी शक्ति सें चिल्लाने लगीं। इधर पुलिस केँ आँ जाने सें मे औऱ आदित्य पहले तौ हैरान हुए उसकेबाद जल्दी हि बातसमझ मे आँ गई कि यहसभी रितू दिदी कां लास्ट बैकअप प्लान थां जिसके बारे मे उन्होंने सस्पेंस बनाया हुआ थां उस टाइम। ख़ैर पुलिस वालों नें सबकोघेर लिया। इधर नीलमव सोनम दिदी केँ चिल्लाने सें मेरा औऱ आदित्य कां ध्यान उसतरफ गय़ा तोँ देखाअजय सिंहव फिरोज़ खान ज़बरदस्ती उन दोनो कों अपनेसंग लिए सीढ़ियाॅ उतरते चलेजा रहे थें।
मैंने आदित्य कि तरफ देखा औऱ फिन हम् दोनो हि उनकीतरफ तेज़ी सें दौड़ पड़े। अभि हम् सीढ़ियों केँ पास भि न् पहुॅचे थें कि सहसा वातावरण मे गोली चलने कि आवाज़ आई औऱ संग हि चीख़ कि भि। हम् दोनोयह देखकर चौंके कि सोनम दिदी कों संगलिए उतररहा फिरोज़ खान कां अचानक हि बैलेंस बिगड़ा औऱ उसके हाॅथ सें सोनम कां हाॅथछूट गय़ा, संग हि वो सीढ़ियों पऱ लुढ़कता हुआ नीचेचला गय़ा। उसके हाॅथ सें उसका रिवाल्वर छूटकर जाने कहाॅगिर करगुम सां होँ गय़ा थां। उसके बाएॅपेर कि टाॅग सें खून बहताहुआ नज़रआया।
गोली कि आवाज़ औऱ फिरोज़ खान कों यूॅ लुढ़कते देखअजय सिंह बुरीतरह उछल पड़ा। भौचक्का सां पहले तौ उसने फिरोज़ खान कों लुढ़कते हुए देखता रहा उसकेबाद जैसेउसे होशआया तोँ जल्दी हि इधरउधर नज़र घुमाई उसने। लेकिन तब तक देर होँ चुकी थि। उसीसमय सीढ़ियों केँ बगल सें हि रितू दिदी मानो प्रगट सि हुई औऱ तेज़ी सें अपने बाप केँ पांव कों पकड़कर झटक दिया। जिसका नतीजा यहहुआ कि बुरीतरह घबराकर चीखते हुएअजय सिंह भरभरा कर सीढ़ियों पऱ पिछवाड़े केँ बलगिर पड़ा। लेकिन उसकेसंग हि नीलम भि गिर पड़ी थि। क्योंकि अजय सिंह नें उसका हाॅथउस वक़्त तक छोंड़ा हि नहि थां। छोंड़ा भि तोँ तबजब उसकेसंग हि संग नीलम भि अनबैलेंस होकरगिर पड़ी थि। नीलम केँ मुख सें दर्द मे डूबी कराह निकल गई।
यहसभी होँ हि रहा थां कि हम् दोनो भि उनकेपास पहुॅच गए। आदित्य नें तौ आते हि फिरोज़ खान कों धर लिया। जबकि मैने सीढ़ियों पऱ गिरने केँ बादउठ रहेअजय सिंह कों उसके कालर सें पकड़कर उठाया औऱ बिनाकुछ बोलेपेर केँ घुटने कां वार उसकेपेट पर्र जड़ दिया। अजय सिंह दर्द सें चीख पड़ा।
"रुक जाओराज। " सहसा मेरे क़रीब पहुॅचते हि रितू दिदी नें कहा____"यह इंसान यकीनन केवल औऱ केवल तुम्हारा हि शिकार हैं मगर, उससे पहले मुझेइस नीचव पापी इंसान सें दोचार बातें तोँ कर लेनेदो। "
दिदी कि बातसुन कर मैनेअजय सिंह कों छोंड़ दिया। अजय सिंहइस वक़्त अजीब सि हालत मे थां। ऐसी हालत मे कि उसका वर्णन करना भि कठिन थां। इधर मेरे एक् तरफ हटते हि रितू दिदी अपने बाप केँ सामने आँ कर खड़ी होँ गई।
"सुना हैं कि माॅ बाप सें बढ़कर। " फिन रितू दिदी नें बड़े हि गंभीर भाव सें कहा___"संपूर्ण सृष्टि मे कोई नहि होता। यहाॅ तक कि ईश्वर भि नहि। इसीलिए माॅ बाप कों श्रेस्ठ व महानकहा जाता हैं। मगरमाॅ बाप भि ऐसे हि महान नहि बन जाते हें बल्कि अच्छे कर्मों सें महान बनते हें। तुम् नीलम सें कहरहे थें कि तुमने हमेंसभी कुछ दिया हैं बदले मे हमने क्याँ दिया? इसका जवाबयह हैं कि हरमाॅ बाप अपने बच्चों केँ लिए बहोत कुछ करते हें, यहाॅ तक कि ज़रूरत पड़ने पर्र अपना बलिदान भि दे देते हें। मगर बच्चे सच मे उनकेलिए कुछ नहि कर पातेऐसा। मगर हम् ऐसे नहि थें, हमने बचपन सें लेकरअब तक आप् दोनो कों दुनिया कां सबसे अच्छा माता पिता मानामगर जबसच कां पताचला तौ रूह काॅप गई हमारी। दुनियाॅ मे ऐसेकौन माता पिता हें जौ अपनी हि बेटियों कों अपने नीचे सुलाने केँ बारे मे सोचते हें? मुझे अपनी मात्र एक् अच्छाई केँ बारे मे बतादो अजय सिंह जोँ कि तुमने अपनेआज तक केँ जिंदगी मे कि होँ। अगर तुमने अपनी एक् भि अच्छाई केँ बारे मे बता दिया तोँ इसीसमय तुम्हारी यह बेटी अपनेमाॅ बाप केँ पास वापसलौट आएगी। "
रितू दिदी कि इसबात पऱ अजय सिंहकुछ बोल न् सका। लेकिन हाॅ कठोरभाव सें देख अवश्य रहा थां। जबकि उसकीइस कठोरता सें देखने कि ज़रा भि परवाह नं करतेहुए कहा दिदी नें कहा___"तुम् वोँ इंसान होँ अजय सिंह जिसने एक् हॅसते खेलते, भरे पूरेव खुशहाल परिवार कां बेड़ा गर्ककर दिया। इतना तोँ मैने भि अपनी ऑखों सें देखा थां कि विजय चाचा कभी भि तुमसे ऑखें मिलाकर बात नहि करते थें। हम् इतने भि अबोधव अज्ञानी नहि थें कि हमेंकुछ समझ नं आए। सच्चाई कां पता चलने केँ बाद हि सहीमगर मुझे पिछली वोँ सभी बातें यादआईं जोँ मेरे सामने होतीथीं। तब उनके बारे मे नहि सोचती थि क्योंकि तब तुम्हारी सिखाई हुइ बातें मुझे उनके बारे मे सोचने कि भि ज़रूरत महसूस नहि कराती थि। मगरअब सभीकुछ खुली पुस्तक कि तरह हौ गय़ा हैं। तुमने धन दौलत केँ लालच मे तथा गौरी चाची कों हाॅसिल करने केँ जुनून मे अपने देवता जैसे भइया कों ज़हरीले सर्प सें डसवाकर मौत केँ घाट उतार दिया। उसकेबाद झूठमूठ कर आरोपलगा कर मेरी देवी समान चाची कों चरित्रहीन बना दिया। इतना हि नहि एक् रात तुम् दोनों कि बातों कों जब दादाजी जी नें सुन लिया औऱ वोँ जब गुस्से सें तुम्हारे कमरे मे आँ धमके औऱ तुम्हें खरी खोटी सुनाने लगे तौ तुमने उन्हें भि जान सें मार देने कि धमकी दि। यह भि कहा कि अगर उन्होंने किसी केँ सामने ज़्यादा गला फाड़ने कि कोशिश कि तौ तुम् उनकी छोटी बेटी यानी कि नैना फूफी कों उठवा लोगे। दादाजी जीउससमय यहसोच करडरगए कि तुम् वाकई मे ऐसाकर सकते हौ। जोँ अपने भइया कां नं हुआ वोँ भला किसका होँ जाएगा? दादीमा जी रोतेहुए अपने कमरे मे चलेगए। उन्होंने दादीमा सें तुम्हारा सारा काला चिट्ठा बताया जिसेसुन कर बेचारी दादीमा कां भि बुराहाल होँ गय़ा। दूसरे दिनअभय चाचा विद्यालय पढ़ाने गएहुए थें, उस वक्त दादाजी दादीमा रेडी होकर विजय चाचा कि दि हुइ वाहन सें जब कहीं जानेलगे तोँ तुमने पूछा कि वोँ कहाॅजा रहे हें तब उन्होंने एक् बारफिन सें क्रोध होतेहुए साफसाफ तुमसे कहा कि वोँ पुलिस स्टेशन जारहे हें। ताकि तुम्हारी रिपोर्ट कर सकें। दादाजी जी कि बातसुन कर तुम्हारी हवा निकल गई। तुम् जल्दी हि माॅम केँ पासगए औऱ माॅम कों सारीबात बताईतब माॅम नें कहा कि इससे बचने कां एक् हि तरीका हैं कि दादाजी दादीमा कों समाप्त कर दियाजाए। तुम्हारे पास इसके अलावा कोई दूसरा चारा भि नहि थां। इसलिए जल्दी हि अपनी गाड़ी लेकर निकल लिये। रास्ते मे हि तुमने अपनेइसी फिरोज़ खाननाम केँ मित्र कों मोबाइल लगाया औऱ इसे दादाजी दादीमा कों जान सें मार देने कि सुपारी दि। इसने जल्दी हि तुम्हारी बातमान कर रास्ते मे हि ट्रक द्वारा दादाजी जी कि गाड़ी कों टक्कर मार दि। ट्रक कि ज़ोरदार टक्कर सें दादाजी जी कि गाड़ी मार्ग पऱ हि दोतीन पलटियाॅ खाईं। यह देखकर यहखान जल्दी हि वहाॅ सें ट्रक लेकर फरार हौ गय़ा। सुनसान मार्ग पर्र उलटी पड़ी वाहन केँ अंदर दादाजी दादीमा खून सें लथपथ बेहोश पड़े थें। तभीकोई गाड़ी वालाउसी रास्ते सें आया औऱ उसनेजब वोँ सभी देखा तौ उसने इसकी सूचना पुलिस कों दि। पुलिस वहाॅ पहुॅची औऱ वाहन केँ अंदरखून सें लथपथ पड़े दादाजी दादीमा कों चेक किया तौ वोँ दोनो हि ज़िंदा थें उस टाइम। अतः जल्दी हि उन्हें बेहतर इलाज़ केँ लिए गुनगुन लें गए। तहकीक़ात मे हि पताचला कि जिनका एक्सीडेंट हुआ थां वोँ दरअसल हल्दीपुर केँ ठाकुर गजेन्द्र सिंह बघेलतथा उनकी धर्मपत्नी इन्द्राणी सिंह बघेल हें। इसबात कां पता चलते हि तुम्हें सूचित किया पुलिस नें। तुम् यहजान कर बुरीतरह घबरागए कि दादाजी दादीमा तोँ ज़िंदा हें अभि औऱ वोँ पुलिस कों सभीकुछ बता भि देंगे। अतः तुम् जल्दी हि गुनगुन केँ लिए हवेली सें रवाना हौ गए। ख़ैर दादाजी दादीमा केँ सिर पऱ बड़ी गंभीर चोंटें आई थि जिसकी वजह सें वोँ दोनो हि कोमा मे चलेगए। डाक्टर अबभला क्याँ कर सकता थां। उसनेसाफ कह दिया थां कि अब तोँ बस वक्त कां हि इन्तज़ार करें कि कब वोँ दोनो कोमा सें बाहर् आते हें। डाक्टर कि बातसुन कर तुमने फिलहाल केँ लिए तौ राहत महसूस कि मगर तुम् भि जानते थें कि कोमा एक् ऐसी चीज़ होती हैं जिसमें गय़ा इंसान कभी भि होश मे आँ सकता हैं। यानी तुम्हें डर थां कि दादाजी दादीमा अगर कोमा सें बाहर् आँ गए तोँ तुम्हारे लिए अच्छा नहि होगा। अतः तुमने फिन सें माॅम केँ परामर्श किया औऱ फिन दादाजी दादीमा कों बेहतर इलाज़ कां कहकर एक् ऐसी स्थान लें गए जहाॅ केँ बारे मे अधिक किसी कों पता हि नहि थां। ख़ैर छोंड़ो यहसभी, तुम्हारे जुर्म कि दास्तान तोँ बहोत लम्बी हैं मगर मैंने तुमसे यहसभी इसलिए कहा हैं कि तुम् जानसको कि मुझेसभी कुछपता हैं। तुमने इतने अपराध वपाप किये हें कि इसकेलिए शायद ईश्वर भि क्षमा नहि करेगा औऱ करना भि नहि चाहिए। "
रितू दिदी कि बातसुन करअजय सिंह कां मुहलटक गय़ा इसबार। उसके चेहरे पऱ लज्जा व अपमान केँ भाव एकाएक हि उभरआए थें। तभीइस बीच नीलमआई औऱ रितू केँ गलेलग कर सिसक सिसककर रोनेलगी। सोनम दिदी भि सिसकरही थि। उधर आदित्य नें फिरोज़ खान कों मारमार कर अधमरा कर दिया थां। उसमें अब हिलने तक कि शक्ति नहि बची थि। तभीदो पुलिस वालेआए औऱ फिरोज़ खान कों उठाकर लें गए।
फिरोज़ खान केँ जितने भि व्यक्ति थें तथा प्रतिमा नें जोँ व्यक्ति भेजे थें उन सबको पुलिस नें पकड़ लिया थां। यह सारी पुलिस फोर्स गुनगुन मे नयेनये आए एसीपी रमाकान्त शुक्ला केँ द्वारा लाई गई थि। सबको पकड़ने केँ बाद एसीपी रमाकान्त शुक्ला चलकरअजय सिंह केँ पासआया।
"अब आपके भि ससुराल चलने कां समय होँ चुका हैं ठाकुर साहब। " एसीपी नें मुस्कुराते हुए कहा___"उम्मीद करताहूॅ कि ससुराल मे आप् स्वयं कों बेहतर महसूस करेंगे। "
"नयेनये आए लगते हौ ऑफिसर। " अजय सिंह नें उसकीतरफ तिरछी नज़र सें देखते हुए कहा___"इस लिए इतना अकड़रहे हौ। मगर ज़्यादा खुशफहमी मे मत रहना कि तुम् मुझे सुसराल मे अधिकदेर तक रख पाओगे। "
"जानता हूॅ। " एसीपी पुनः मुस्कुराया___"मगर फिलहाल तोँ मेरेसंग चलना हि पड़ेगा आपको। बाद कां बाद मे देखा जाएगा। वैसे भि हम् तोँ यहाॅ फिरोज़ खान जैसे वान्टेड मुजरिम कों हि पकड़ने आए थें। हमें सूचना मिली थि कि यहाॅ पर्र वोँ मुज़रिम अपने पूरे दलबल केँ संग मौजूद हैं। इसलिए आँ धमके यहाॅ। मगर हमें क्याँ पता थां कि उसकेसंग संग मुझे आप् जैसी कमीनी पर्सनैलिटी कों भि धर लेना पड़ेगा। "
"तमीज़ सें बातकरो ऑफिसर। " अजय सिंह बुरीतरह तिलमिलाते हुए तीखेभाव सें बोला___"वरना ऐसा न् हौ कि इस बददमीजी केँ लिए तुम्हें बाद मे पछताना पड़े। "
"रस्सी जल गई मगर कसबल बाॅकी हें अभि। " एसीपी नें कठोरभाव सें कहा___"वैसे तुम्हारी जानकारी केँ लिएबता दूॅ कि मे किसी केँ बाप सें भि नहि डरता। इस लिएमुझ पऱ धौंस जमाने कि सोचना भि मत। वरना मेरे हाॅथ मे आयाहुआ मुजरिम मुख सें कम बल्कि पिछवाड़े सें ज़्यादा चिल्लाता हैं। अब इज्ज़त सें चलो मेरेसंग वरना लें जाने केँ तरीके तोँ हम् पुलिस वालों कों बड़े शानदार भि आते हें। "
एसीपी केँ गर्म होते मिजाज़ कों देखकर अजय सिंह अंदर हि अंदर अपमान कां कड़वा घूॅटपी कररह गय़ा। फिन उसनेआग उगलती ऑखों सें पहले मुझे देखाफिन रितू दिदी कों उसकेबाद एसीपी रमाकान्त शुक्ला केँ संगचल दिया। कुछ दूर जाने केँ बाद सहसाअजय सिंह रुका औऱ फिनपलट कर बोला___"अभि तोँ मे जारहा हूॅमगर जल्द हि लौटूॅगा औऱ इसबार जब लौटूॅगा नं तौ तुम् मे सें किसी कों भि ज़िंदा नहि छोंड़ूॅगा। "
अजय सिंह कि यहबात सुनकर मे, आदित्य, रितू दिदी व सोनम दिदी नें तोँ कुछ न् कहा लेकिन नीलम कों जाने क्याँ हुआ कि वोँ तेज़ी सें अपने बाप केँ पास गई औऱ इससे पहले कि कोईकुछ समझ पाता "चटाऽऽक"। अजय सिंह कां दाहिना गाल झन्ना गय़ा।
"यह तमाचा मामूली भले हि हैं। " फिन नीलम नें गुर्राते हुए कहा___"मगर यह तुम्हें इसबात कि याद अवश्य दिलाएगा कि तूने क्याँ पाप किया हैं जिसके तहतयह इनाम केँ रूप मे मिला हैं तुम्हारी तरफ तेरी हि बेटी सें। अबजा यहाॅ सें, मुझे तेरी शक्ल भि देख्ना अब गवाॅरा नहि हैं। "
अजय सिंह सें इतना कहने केँ बाद रोती हुइ नीलम हमारे पास आँ गई जबकि अपनी हि बेटी सें ऐसा इनामपा करअजय सिंह मानो गर्त मे डूबता चला गय़ा। वो फिन रुका नहि बल्कि एसीपी केँ संगदूर होताचला गय़ा। उसके जाते हि हम् सभी भि एक् तरफचल पड़े। मगर तभी गज़ब होँ गय़ा।
वातारण मे धांय सें गोली चलने कि आवाज़ हुई औऱ फिन फिज़ा मे नीलम कि चीख भि गूॅज गई। दरअसल नीलम केँ थप्पड़ मारने पर्र अजय सिंह अपमान मे जलउठा थां। वोँ एसीपी केँ संग हि बगल सें चलरहा थां। तभी उसकी नज़र एसीपी केँ होलेस्टर मे फॅसी उसकी रिवाल्वर पऱ पड़ी थि। अजय सिंह नें पलक झपकते हि जैसे निर्णय लेँ लिया थां औऱ फिन बेहद फुर्ती सें उसने एसीपी केँ होलेस्टर सें रिवाल्वर निकाला औऱ पलटकर उसने नीलम पर्र गोलीचला दि थि। हम् मे सें किसी कों भि इसकी उम्मीद नहि थि। उधर गोली चलने कि आवाज़ सें एसीपी भि बौखला गय़ा थां। उसने जैसे हि पलटकर अजय सिंह कि तरफ देखा तौ चौंक पड़ा। कारणअजय सिंह नें मुस्कुराते हुए स्वयं हि उसका रिवाल्वर उसेदे दिया। एसीपी उसकेइस बिहैवियर सें दंगरह गय़ा थां।
गोली नीलम कि पीठ केँ दाहिने भाग केँ थोडा सां नीचेलगी थि। नीलम कि पीठ सें खून कि तेज़धार बहनेलगी थि। वोँ लहराकर गिर हि जातीअगर मैने फुर्ती सें उसे पकड़ नं लिया होता। सिचुएशन एकदम सें हि बदल गई थि। नीलम कों गोली लगने सें हम् सभी बुरीतरह घबरागए थें। उसकी प्रतिपल बिगड़ती हालत सें हम् सभीरो पड़े। मैनेउसे अपनी गोंद मे उठा लिया औऱ तेज़ी सें मंदिर केँ पीछे खड़ी अपनी गाड़ी कि तरफभाग चला। मेरे पीछे हि बाॅकी सभी दौड़ने लगे थें।
पुलिस औऱ एसीपी नें सबको पकड़ा थां लेकिन केशवजी तथा उनकेसंग आए लोगों कों नहि पकड़ा थां। यह मेरेलिए हैरानी कि बात थि। लेकिन इस वक़्त उनसे इसके बारे मे पूछने कां किसी कों होश न् थां। रितूव सोनम दिदी बुरीतरह रोयेजा रही थि। सीघ्र हि मे नीलम कों लिए गाड़ी केँ पास पहुॅचा। आदित्य नें जल्द सें गाड़ी कां पिछला गेट खोला तौ मैने नीलम कों पिछली सीट पऱ किसीतरह लेटाया औऱ स्थान बनाते हुए स्वयं भि सीट पर्र बैठ गय़ा। सीट पऱ बैठने केँ बाद मैने नीलम कों स्वयं सें छुपका लियातथा उसकीठीठ पर्र हाॅथरख करदबा दिया ताकिखून अधिक बहने न् पाए। मेरे बैठते हि आदित्य नें गाड़ी कि ड्राइंविंग सीट सम्हाली।
केशवजी नें रितू दिदी सें कहा कि वोँ सोनम दिदी कों अपनी गाड़ी मे बैठा लेंगे। क्योंकि मेरी वाहन मे आगे कि सीट पऱ रितू दिदी बैठ गई थि औऱ पीछेअब स्थान हि नहि थि। लेकिन सोनम दिदी नं मानी। वोँ बुरीतरह रोयेजा रही थि औऱ कहरही थि कि वोँ नीलम केँ पास हि रहेंगी। मैने भि ज़्यादा टाइम बरबाद न् करतेहुए गेट कि तरफ खिसक लिया। सोनम दिदी दूसरी तरफ सें आकर नीलम केँ पैरों कि तरफसीट पर्र हि बैठगईं। ख़ैर सबके बैठते हि आदित्य नें गाड़ी कों तेज़ी सें दौड़ा दिया। हमारे पीछे पीछे हि केशवजी तथा उनके व्यक्ति जीपों मे आँ रहे थें।
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
"यह तुम् क्याँ कहरहे होँ राणे?" अपने आवास केँ ड्राइंग रूम मे लैण्डलाइन मोबाइल केँ रिसीवर कों कान सें लगाए मंत्री नें बुरीतरह चौंकते हुएकहा थां____"ठाकुर औऱ उसके आदमियों कों पुलिस पकड़कर लें गई?"
".। " उधर सें हरीश राणे नें कुछकहा।
"क्याँ कहरहे होँ तुम्। " चौधरी हैरान___"वहाॅ पऱ भारी मात्रा मे पुलिस आई हुइ थि?? मगर पुलिस वहाॅआई केसे? हमारा मतलब हैं कि पुलिस कों वहाॅ पर्र किसने बुलाया होगा? एक् मिनट राणे.एक् मिनट, हम् सभीसमझ गए। यह अवश्य उस थानेदारनी कां काम होगा। उसी नें पुलिस कों बुलवाया होगा। ठाकुर केँ इतने सारे आदमियों कों पंगुबना देने कां यही तोँ सबसे ज़बरदस्त तरीका थां राणे। साली तगड़ा गेमखेल गई। एक् हि झटके मे साराखेल हि ख़त्म कर दिया उसने। "
".। " उधर सें राणे नें फिनकुछ कहा।
"ओह तौ ठाकुर नें जाते जाते अपनी हि बेटी कों गोलीमार कर लहूलुहान कर दिया। " चौधरी केँ चेहरे पर्र मौजूद भावों मे परिवर्तन हुआ___"औऱ अब विराज एण्ड जश्न ठाकुर कि उस लड़की कों मरने सें बचाने केँ लिए जल्दी हि हास्पिटल लेकर आँ रहे हें। उन्हें आनेदो राणे, वोँ अवश्य यहीं आएॅगे। ताकि गुनगुन केँ हि किसी अच्छे सें हास्पिटल मे उसे भर्ती करा सकें औऱ उसका बेहतर सें बेहतर इलाज़ करा सकें। उन्हें आनेदो यहाॅ हम् उन सबका बहोत अच्छे सें स्वागत करेंगे। तुम् बस उनके पीछे हि रहना औऱ हमें हालातों कि ख़बर देते रहना। "
".। " राणे नें उधर सें फिनकुछ कहा।
"वोँ सभी हम् देख लेंगे राणे। " चौधरी नें कहा___"हम् कमिश्नर सें इस बारे मे पता करेंगे तथा ठाकुर सें भि मिलेंगे। अगर उसने हमसेयह कहा कि वोँ यहसभी करने केँ बाद हि इस सबके बारे मे बताने वाला थां तोँ अवश्य उसकी ज़मानत करवाएॅगे हम्। वरनाभला हमें क्याँ पड़ी हैं उसेजेल सें छुड़ाने कि? जिसकाम केँ लिए हमने उससे संपर्क बनाया थां वोँ काम तोँ तुमने बखूबी कर हि दिया हैं औऱ अब हमेंसमय समय कि ख़बर भि देरहे होँ कि हमारे दुश्मन कहाॅ आँ रहे हें। इसलिए अब अधिक फिक्र कि बात हि नहि हैं। "
".। " उधर सें हरीश राणे नें कुछकहा।
"हाॅयह भि सहीकहा तुमने। " चौधरी नें कहा___"यानी हमेंइस समय अभि उन पर्र हाॅथ नहि डालना चाहिए। बल्कि उनकेअसल ठिकानों केँ बारे मे पता करना चाहिए। उसकेबाद हि हमेंउन पर्र कार्यवाही करनी चाहिए। यह तुमने सही सलाह दि हैं राणे। बात भि सही हैं, अभि अगर हमनेउन पऱ हाॅथ डाला तोँ संभव हैं कि इससे हम् पर्र याँ हमारे बच्चों पर्र हि कोई संकट आँ जाए। क्याँ पता उसकाकोई व्यक्ति हमारी गतिविधियों पऱ नज़ररखे हुए होँ, उस सूरत मे वोँ हमें हि नुकसान पहुॅचा सकता हैं। अतःयह ज़रूरी हैं कि हम् अभि चुप हि रहें औऱ उसकेअसल ठिकाने कां तुम्हारे द्वारा पता करने कि कोशिश करें। "
".। " उधर सें राणे नें फिनकुछ कहा।
"ठीक हैं राणे। "फिन चौधरी नें कहा___"अब ऐसा हि करेंगे। तुम् बस उनके पीछे हि लगे रहना औऱ हाॅयह बताने कि आवश्यकता नहि हैं कि उनसे ज़रा सावधान रहना। "
इसकेसंग हि चौधरी नें रिसीवर वापस केड्रिल पर्र रख दिया। इस समय उसके चेहरे पर्र राहत केँ भाव थें। खुशी कि एक् अलग हि चमक उसके चेहरे पर्र दिखाई देनेलगी थि। रिसीवर रखने केँ बाद वो आया औऱ फिन सें सोफे पर्र बैठ गय़ा। उसके सामने हि अगलबगल केँ सोफों पर्र अवधेश, अशोकव सुनीता आदि बैठेहुए थें।
"हमारे इसकाम मे उस जासूस केँ लिएयह सभी करनाकोई मुश्किल काम नहि थां। " फिन मंत्री नें शिगार सुलगाने केँ बाद कहा___"औऱ नां हि यहऐसा केस थां जिसमें उसे अपना माथा पच्ची करना पड़ता। यहसभी तोँ हम् भि कर सकते थें लेकिन तबजब करने कि स्थित मे होते। ख़ैर, जौ भि हौ, अच्छी बातयह हैं कि हालात अब हमारे हक़ मे बहोत हद तक आँ चुके हें। "
"क्याँ कहा राणे नें?" अशोक केँ पूछने पऱ चौधरी नें सबकोसभी कुछबता दिया। सारी बातें जानने केँ बादउन तीनों केँ भि चेहरों पर्र राहतव खुशी केँ भावउभर आए।
"हालात तोँ वाकई हमारे पक्ष मे हें चौधरी साहब। " अशोक नें कहा___"औऱ यह हमारे लिए खुशी कि बात भि हैं। लेकिन ठाकुर केँ संगआज जौ कुछ भि हुआ वोँ अगर नं होता तोँ यकीनन आज उसकी गिरफ्त मे उसका भतीजा तथा उसकी बेटी होती। उसकेबाद वोँ हमेंइस बात कि जानकारी देता। कहने कां मतलबयह कि इतनाकुछ होँ जाने केँ बाद हम् अतिसीघ्र हि अपने दुश्मन सें मिलते औऱ उसके कब्जे सें अपनीहर चीज़ लेँ भि लेते। मगर ऐसा हौ नहि सका, पुलिस नें ऐन मौके पऱ आकर साराखेल हि ख़राब कर दिया। "
"इस मामले मे पहलीबार पुलिस कां हाॅथ भि दिखाई दिया हैं चौधरी साहब। " अवधेश नें कहा____"औऱ जिसतरह सें इतनी सारी पुलिस फोर्स कों लेकर वोँ एसीपी वहाॅ पहुॅचा थां इससे ज़ाहिर होता हैं कि कहीं नं कहीं पुलिस कां भि इस मामले मे दखल हैं। बल्कि यह कहना चाहिए कि शुरुआत सें हि दखल थां। यहअलग बात हैं कि इसके पहले पुलिस नें खुलेतौर पऱ इसबात कों ज़ाहिर नहि किया थां। "
"यहबात तोँ मैनेउसी दिनकही थि। " सहसा अशोक नें तपाक सें कहा___"कि संभव हैं कि पुलिस इस सारे मामले मे गुप्त रूप सें शामिल हौ औऱ आजइसबात कां सबूत केँ रूप मे पता भि चल गय़ा हमें। "
"हम् कमिश्नर सें इस बारे मे अभि बात करेंगे। " मंत्री नें कहने केँ संग हि अपनाफोन निकाला____"उसे अबसाफ साफ बताना हि पड़ेगा कि माज़रा क्याँ हैं तथा उसने हमें धोखे मे रखने कि हिम्मत केसे कि?"
कहने केँ संग हि मंत्री नें पुलिस कमिश्नर कों काललगा करफोन अपनेकान सें लगा लिया। दूसरी तरफ बहुतदेर तक रिंग जाने केँ बादकाल रिसीव कि गई।
"जी कहिए मंत्री जी। "उधर सें कमिश्नर कि आवाज़ उभरी___"आज इस नाचीज़ कों केसेयाद किया आपने?"
"यह ड्रामेबाज़ी छोंड़ो कमिश्नर। " चौधरी नें सपाट लहजे मे कहा___"औऱ यह बताओ कि यहसभी क्याँ चक्कर चलारहे होँ तुम्?"
"च.चक्कर???" उधर सें कमिश्नर कां चौंका हुआ स्वर उभरा____"यह आप् क्याँ कहरहे हें मंत्री जी?"
"देखो कमिश्नर। " चौधरी नें तीखेभाव सें कहा___"हमें फालतू कि बकवास बिलकुल भि मनपसंद नहि हैं। तुम् अच्छी तरह जानते होँ औऱ समझते भि होँ कि हम् किस बारे मे बातकर रहे हें?"
"बड़ी अजीबबात कररहे हें आप् मंत्री जी। "उधर सें कमिश्नर नें कहा___"भला जिसबात कों आप् बताएॅगे हि नहि उसबात केँ बारे मे मे केसेकुछ जान पाऊॅगा? आप् तोँ जानते हें कि इंसान अंतर्यामी तौ होता हि नहि हैं। "
"हम् हल्दीपुर मे आधा घंटा पहलेघटी घटना केँ बारे मे बातकर रहे हें। " चौधरी नें मन हि मन दाॅत पीसते हुए कहा___"अब यहमत कहना कि तुम् इस घटना केँ बारे मे भि नहि जानते। "
"ओह तौ आप् उस घटना कि बातकर रहे हें?" उधर जैसे कमिश्नर कि अबबात समझ मे आई थि, बोला___"उस घटना केँ बारे मे तौ मुझे अच्छी तरहपता हैं मंत्री जी। मगर आपकाउस घटना सें क्याँ लेना देना हैं? जबकि हमारे डिपार्टमेंट केँ एसीपी नें तौ वहाॅ पऱ एक् मोस्ट वान्टेड अपराधी कों पकड़ने केँ लिए घेराबंदी कि थि औऱ फिन अपराधी कों पकड़कर अपनेसंग लेँ भि आए। "
"किस अपराधी कों पकड़ने गई थि तुम्हारी पुलिस?" मंत्री नें पूछा।
"यूॅ तौ शहरकई तरह केँ मुजरिमों सें भरा पड़ा हैं मंत्री जीमगर। " उधर सें कमिश्नर नें कहा___"हमारी पुलिस फोर्स नें जिस मोस्ट वान्टेड अपराधी कों पकड़ने केँ लिए हल्दीपुर केँ पास वाले गाॅव माधोपुर मे घेराबंदी कि थि उसकानाम फिरोज़ खान हैं। इसनाम केँ अपराधी केँ बारे मे तौ आपने भि बहुत सुना होगा। आप् तोँ जानते हें कि यह अपराधी कब सें पुलिस व कानून केँ लिएसिर कां दर्दबना हुआ थां। आज हमारे हि एक् विश्वासपात्र मुखबिर नें हमें बताया कि फिरोज़ खान अपनी गैंग केँ संगइस वक़्त माधोपुर मे मौजूद हैं। बसफिन क्याँ थां, हमनेउसे पकड़ने केँ लिए अभि हाल हि मे नयेनये आए एसीपी रमाकान्त शुक्ला कों भेज दिया। मगर मेरीसमझ मे यह नहि आता कि आपकोइस मामले सें क्याँ लेना देना होँ गय़ा? अगर मुनासिब समझें तौ मुझे भि बताइये मंत्री जी। "
"नहि ऐसीकोई बात नहि हैं। " चौधरी नें बात कों टालने कि गरज़ सें कहा___"वैसे पताचला हैं कि तुम्हारी पुलिस नें हल्दीपुर केँ ठाकुर अजय सिंह कों भि गिरफ्तार कर लिया हैं। भलायह क्याँ चक्कर हैं कमिश्नर? क्याँ वोँ ठाकुर भि फिरोज़ खान कि तरह मोस्ट वान्टेड अपराधी हैं?"
"ठाकुर अजय सिंह कों तोँ ज़रूरी पूॅछताॅछ केँ लिए गिरफ्तार किया गय़ा हैं मंत्री जी। "उधर सें कमिश्नर नें कहा___"दरअसल हमारे मुखबिर नें बताया थां कि फिरोज़ खान हल्दीपुर केँ ठाकुर अजय सिंह कि गाड़ी मे हि बैठाहुआ थां। इसलिए उन्हें गिरफ्तार करना पड़ा। तहकीक़ात मे उनसे पूछा जाएगा कि फिरोज़ खाननाम कां खतरनाक अपराधी उनकी गाड़ी मे उनकेसंग क्यूं बैठाहुआ थां? आख़िर उनका फिरोज़ खान सें क्याँ संबंध हैं?"
"ओह तौ यहबात हैं। " चौधरी कों मानोबात समझ मे आँ गई, बोला____"वैसे सुना हैं कि ठाकुर औऱ उसके भतीजे केँ बीच किसी मामले मे तगड़ी रंजिश हैं। सुना तोँ यह भि हैं कि ठाकुर कि बेटी स्वयं तुम्हारे पुलिस डिपार्टमेंट कि इंस्पेक्टर हैं औऱ वोँ अपने हि माॅ बाप केँ खिलाफ़ होकर ठाकुर केँ दुश्मन भतीजे कां संगदे रही हैं। "
"बाॅकी सारी बातों केँ बारे मे तोँ मुझेकुछ नहि पता हैं मंत्री जी। "उधर सें कमिश्नर नें कहा___"मगर यहसच हैं कि ठाकुर अजय सिंह कि बेटी हमारे पुलिस डिपार्टमेंट मे इंस्पेक्टर केँ रूप मे कार्यरत हैं। बहोत हि इमानदार तथा बहादुर ऑफीसर हैं वोँ। "
"अबइस बारे मे तोँ तुम्हें हि पता होगा कमिश्नर। " चौधरी नें कहा___"आफ्टरआल वोँ तुम्हारे पुलिस महकमे सें हैं। चलोकोई बात नहि, अच्छा अब हम् मोबाइल रखते हें। "
इतनाकह कर चौधरी नें कालकट कर दि। फिनबुझ चुके शिगार कों सामने टेबल पर्र रखे ऐशट्रे मे रखा औऱ दूसरा शिगार निकाल कर सुलगा लिया। शिगार केँ दोतीन गहरे गहरेकश लेने केँ बाद उसनेढेर सारा धुआॅऊपर कि तरफ उछाला।
"क्याँ कहा कमिश्नर नें चौधरी साहब?" अवधेश श्रीवास्तव पूछे बग़ैर नं रहसका थां।
"बेवकूफ़ बनाने कि कोशिश कररहा थां हमें। " चौधरी नें कहा___"उस साले कों यहपता हि नहि हैं कि वोँ किसे बेवकूफ बनाने चला थां? साला राजनीति कां खेल हम् खेलते हें औऱ वोँ हमसे राजनीति कररहा थां। "
"ऐसा क्याँ कहरहा थां वोँ आपसे?" अशोक नें पूछा।
मंत्री नें उसे सारी बातें बता दि, उसकेबाद उसनेफिन सें शिगार कां एक् कश लियाफिन बोला___"जबकि साफपता चलता हैं कि सच्चाई क्याँ हैं? डिटेक्टिव राणे केँ अनुसार विराज एण्ड बर्थडे पार्टी ठाकुर कि दूसरी बेटी कों लेनेगए थें। किसीतरह सें इसबात कि जानकारी ठाकुर कों हुई औऱ वो फिरोज़ खान कों उसके गुर्गों केँ संग माधोपुर जा धमका, जहाॅ पर्र उसका आमना सामना विराज एण्ड जश्न सें हुआ। विराज कों अंदेशा रहा होगा कि उसका ताऊ उसे पकड़ने कां ऐसा हि कुछ इंतजाम करके आएगा। इस बात कों ध्यान मे रखतेहुए उन लोगों नें भि ठाकुर सें बचने कां उपाय सोचा होगा। ठाकुर कि बेटी क्योंकि अब विराज केँ संग हि हैं इसलिए ठाकुर सें बचने केँ लिए उसने अपने पुलिस महकमें कां सहारा लिया। उसे पता थां कि पुलिस केँ आँ जाने सें अजय सिंहकुछ कर नहि पाएगा। बात भि सही हैं कि पुलिस सें पंगा करने कां कोई मतलब हि नहि थां। यानी वोँ सभी पुलिस कि सहायता सें बड़े धीरे-धीरे ठाकुर कि दूसरी बेटी कों लेँ आएॅगे औऱ ठाकुर कुछ भि नहि कर पाएगा। "
"यकीनन चौधरी साहब। " अवधेश नें गहरी साॅस लेतेहुए कहा___"ठाकुर नें विराज एण्ड बर्थडे पार्टी कों घेरकर पकड़ने कां ज़बरदस्त प्लान बनाया थां। यहअलग बात हैं कि बदकिस्मती सें उसकेउस ज़बरदस्त प्लान कि स्वयं उसकी हि बेटी नें धज्जियाॅ उड़ा दि। इतना हि नहि पुलिस कों बुलवा कर वोँ अपनी छोटी कों बेहन कों तौ अपनेसंग लेँ हि गई ऊपर सें अपने बाप कों भि गिरफ्तार करवा दिया। "
"मगर ठाकुर भि कम कमीना नहि थां। " अशोक नें झट सें कहा___"पुलिस केँ संग जाते जाते भि उसने एसीपी कां रिवाल्वर निकाल कर अपनी छोटी बेटी कों गोलीमार दि। यहइसबात कां सबूत हैं चौधरी साहब कि उस वक़्त वो अपनी औलाद सें किस क़दर ख़फा थां औऱ फिन गुस्से मे आकर उसने बेटी कों जान सें मारने कि कोशिश कि। अगर टाइम रहते उसकी बेटी कां विराज एण्ड जश्न नें इलाज़ करवा लियातब तोँ ठीक हैं वरना ठाकुर नें तौ अपनी बेटी कां काम तमामकर हि दिया हैं समझिये। "
"जोँ भि होता हैं अच्छे केँ लिए हि होता हैं। " मंत्री दिवाकर चौधरी नें कहा___"इस सबकीवजह सें हमारा फायदा यहहुआ हैं कि हमारा दुश्मन हमारे जासूस राणे कि नज़र मे आँ गय़ा हैं। राणे विराज एण्ड जश्न केँ पीछे साये कि तरहलगा रहेगा। अभि तौ वोँ सभी किसी हाॅस्पिटल मे हि गए होंगे क्योंकि ठाकुर कि बेटी कों मौत सें बचाना उन सबकी पहली प्राथमिकता होगी। उसकेबाद वोँ यकीनन उस स्थान जाएॅगे जहाॅ पऱ उन लोगों नें अपना ठिकाना बनाया होगा। राणे कों जैसे हि उनके ठिकाने कां पताचल जाएगा वैसे हि वोँ हमें सूचित कर देगा। बस, उसकेबाद क्याँ होगायह बताने कि ज़रूरत नहि हैं शायद। "
"यह तौ वाकई हमारे हि हक़ मे हैं। " सहसाइस बीच सुनीता बोल पड़ी___"ठाकुर कि घटना नें उसेभले हि करारी शिकस्त दि होँ मगरइस सबमें हमारा यकीनन फायदा हौ गय़ा हैं। दूसरी बात जासूस राणे कों इसकाम केँ लिए बुलाने कां भि बहोत अच्छा निर्णय साबित हुआ हमारा। "
"बिलकुल सहीकहा तुमने। " चौधरी नें कहा___"अगर राणे कों हमने बुलाया नं होता तोँ हमें इतनी बड़ी सफलता हर्गिज़ भि नहि मिल सकती थि। क्योंकि इसबात कां हमेंपता हि न् चलता कि विराज एण्ड बर्थडे पार्टी औऱ ठाकुर केँ बीच क्याँ हुआ हैं? ठाकुर कां भि कोई भरोसा नहि थां कि वोँ हमेंइस बारे मे कुछ बताता भि याँ नहि। "
"ख़ैर, जोँ भि हौ। " अवधेश नें कहा___"इस सबसे हमें फायदा तौ यकीनन हि हुआ हैं मगरइस बीच हमारे लिएयह सोचना भि महत्वपूर्ण हैं कि इस मामले मे पुलिस कां दखलकिस उद्देश्य सें हुआ हैं? क्याँ सचमुच हि वोँ मोस्ट वान्टेट अपराधी फिरोज़ खान कों हि पकड़ने केँ उद्देश्य सें वहाॅ पर्र पहुॅची थि याँ फिन इसके पीछे भि पुलिस कि कोईऐसी चाल थि कि वोँ एक् तीर सें दो शिकार करसके। कहने कां मतलबयह कि ज़ाहिर तौर पऱ उसने हमेंयही दिखाया हौ कि उसकादखल महज फिरोज़ खान कों हि पकड़ना थां जबकि असल मे उसका मकसदकुछ औऱ हि रहा होँ, जिसका संबंध हमसे होँ। "
"हौ सकता हैं। " चौधरी केँ चेहरे पर्र सोचने वालेभाव उभर आए____"लेकिन कमिश्नर कि बातों सें भि कुछ ज़ाहिर नहि होँ सका। याँ तोँ उसनेजान बूझकर हमें घुमा दिया हैं याँ फिनऐसा कुछ होँ हि न्। यानी होँ सकता हैं कि हम् जिस चीज़ कि शंकाकर रहे हें वोँ बेवजह हि हौ। "
"शंका तौ शंका हि होती हैं चौधरी साहब। " अशोक नें कहा___"भले हि वोँ बेवजह हि होँ मगर हमारे मन मे शंका तोँ हैं न्। इसलिए जब तक हमेंइस मामले मे सच्चाई कां पता नहि चलतातब तक हमारी यह शंका हमारे अंदर सें जाएगी भि नहि। "
"चलोअगर ऐसा हैं भि। " चौधरी नें कहा___"तौ वोँ आने वाले वक्त मे ज़ाहिर तौ हौ हि जाएगा। तब हम् देख लेंगे कि हमेंउस बारे मे क्याँ करना हैं। अभि केँ हालात मे जौ ज़रूरी हैं, हमेउस पर्र अधिक ध्यान देना हैं। हमें किसी भि कीमत पर्र अपने बच्चे तथा हमारे लिए डायनामाइट बनेउन वीडियोज कों हाॅसिल करना हैं। मौजूदा हालातों पर्र ग़ौर करें तौ यह स्पष्ट होँ चुका हैं कि बहोत जल्द राणे केँ द्वारा हमेंइस सबमें सफलता मिलेगी। "
चौधरी कि बातसुन कर सबकेसिर सहमति मे हिले। उसकेबाद कुछ औऱ इधरउधर कि बातें हुई उन लोगों केँ बीच। फिन सभी अपने अपनेकाम पऱ चलेगए।
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
इधर आदित्य ऑधी तूफान कि तरह दौड़ाते हुए वाहन कों हास्पिटल कि तरफलिए जारहा थां। नीलम कि हालत कि वजह सें हम् सभी बेहद दुखी हौ गए थें। मे बारबार नीलम कों पुकार रहा थां। उसकी पलकें बारबार बंद हौ जाती थि। मैने अपने एक् हाॅथ कि हॅथेली कों नीलम कि पीठ पऱ कस केँ लगाया हुआ थां ताकि उसकाखून न् बहनेपाए। नीलम पहले तौ दर्द औऱ पीड़ा सें कराहरही थि लेकिन अब वोँ प्रतिपल शान्त पड़ती जारही थि। उसकीयह हालतदेख कर मे बदहवाश सां थां औऱ बारबार उसे पुकार रहा थां। मेरे बाएॅ साइड हि नीलम केँ पैरों केँ पास बैठी सोनम दिदी अभि भि सिसकरही थीं। वोँ स्वयं भि पागलों कि तरह नीलम कों पुकारे जारही थि।
रितू दिदी आगे बैठी हुइ थि। उनके चेहरे पऱ भि पीड़ा केँ भावउभर आते थें लेकिन उन्होंने स्वयं कों सम्हाला हुआ थां। उनके चेहरे पऱ मौजूद भाव प्रतिपल बदलरहे थें। कभीकभी तोँ ऐसेभाव उभरआते थें जैसे उन्होंने किसीबात केँ लिए कठोर फैसला किया हौ। आदित्य फुल स्पीड सें वाहन कों भगारहा थां। तभीडैश बोर्ड केँ पास हि रखा मेराफोन मोबाइल बजउठा। मोबाइल केँ बजने सें जैसे रितू दिदी कि तंद्रा टूटी। उन्होंने हाॅथ बढ़ाकर फोन उठाया औऱ स्क्रीन पऱ फ्लैश कररहे मौसाजी नाम कों देखकर काल रिसीव कि उन्होंने।
उधर सें मौसाजी नें जानेऐसा क्याँ कहा कि रितू दिदी एकदम सें चौंक पड़ी, संग हि गाड़ी कि खिड़की सें इधरउधर देखने भि लगी थि। फिन उन्होंने यहकहकर मोबाइल रख दिया कि___"आपने यकीनन यह बहोत बड़ी ख़बर दि हैं मौसाजी। लेकिन उसे बोलिए कि अगर संभव हौ सके तौ उसे पकड़ लेँ। आप् भि जल्द सें उसकेपास जाइये औऱ जाकरउसे अपने कब्जे मे लेँ लीजिए। "
"क्याँ हुआ रितू??" गाड़ी चलाते हुए आदित्य नें सहसा एक् नज़र रितू दिदी कि तरफ डालते हुए पूछा।
"मंत्री मेरी चेतावनी केँ बावजूद अपनी हरकतों सें बाज नहि आया। " रितू दिदी नें कहा___"उसने जब देखा कि वोँ स्वयं कुछ नहि कर सकता हैं तौ उसने अपनेकाम केँ लिए एक् जासूस कों बुलवाया औऱ उस जासूस कों हमारे पीछेलगा दिया। "
"यह क्याँ कहरही हौ तुम्?" आदित्य रितू कि बातसुन बुरीतरह चौंका थां, फिन बोला___"मगर तुम्हें यहसभी केसेपता चला?"
"मुझे नहि। " रितू दिदी नें कहा___"बल्कि मौसाजी केँ एक् व्यक्ति कों पताचला हैं। उसी नें बताया हैं मौसाजी कों। दरअसल हम् सभीलोग तौ वहाॅ सें चलेआए मगर मौसाजी कां एक् व्यक्ति ग़लती सें वहींरह गय़ा। मौसाजी बतारहे थें कि उनका वोँ व्यक्ति उस टाइम अपनापेट साफ करनेचला गय़ा थां। इसीबीच हम् सभी वहाॅ सें जल्दबाज़ी मे निकलआए। कुछदेर मे जब वोँ अपनापेट साफ करकेआया तौ हम् लोगों कों दूर जातेहुए देखा उसने। वोँ वहाॅ सें चलतेहुए कुछदूर आया। फिन उसने अपनाफोन निकाल कर मौसाजी कों मोबाइल करने हि वाला थां कि तभीउसे किसी केँ बात करने कि आवाज़ सुनाई दि। वोँ आवाज़ कि दिशा मे गय़ा तोँ उसने देखा कि मंदिर सें करीब पचास मीटर कि दूरी पर्र एक् व्यक्ति पेड़ कि ओट मे खड़ा किसी सें मोबाइल पऱ बातें कररहा थां। मौसाजी कां व्यक्ति उससेकुछ हि दूरी पऱ थां। उसनेउस व्यक्ति केँ कुछपास जाकर उसकी बातें सुनली। उसकी बातों मे डैड केँ अलावा हमारा भि ज़िक्र थां, संग हि वो जिससे बातकर रहा थां उसे वो चौधरी साहबकह कर संबोधित कररहा थां। मौसाजी केँ व्यक्ति कों उसकी बातों सें समझ आँ गय़ा कि वोँ हम् सबके पीछे हि लगाहुआ हैं। अतः उसने जल्दी हि इसबात कि सूचना मौसाजी कों मोबाइल लगाकर दे दि। "
"ओह तोँ यहबात हैं। " आदित्य नें कहा।
"हाॅ, मैने अपने मुखबिरों कों मंत्री तथा उसकेसब साथियों केँ पीछे लगाया हुआ थां। " रितू दिदी नें कहा___"उन सबकी रिपोर्ट यही थि कि मंत्री याँ उसके साथियों नें ऐसा वैसाकुछ नहि किया हैं। बल्कि उन सबकीदिन चर्या तथा कार्य सामान्य हि थां। मुझे भि उम्मीद नहि थि कि वोँ कमीना अपनेइस काम केँ लिए किसी जासूस कों हायरकर लेगा। मगर कोईबात नहि, यह बहोत अच्छा हुआ कि मंत्री केँ उस जासूस कां पताचल गय़ा। कहते हें कि परमेश्वर जौ भि करता हैं उसके पीछेकोई ठोसवजह अवश्य होती हैं। वरना सोचने वालीबात हैं कि मौसाजी जिन आदमियों कों अपनेसंग लेकरआए थें उन आदमियों मे सें किसी एक् कों उस वक़्त टायलेट क्यूं आता?यह भगवान कि हि मर्ज़ी थि कि उसेउस टाइम टायलेट आया औऱ वोँ टायलेट केँ लिए हमसेदूर चला गय़ा। उसकेबाद जब वो आया तौ हम् सभीउस स्थान सें निकल चुके थें जबकि वोँ वहींछूट गय़ा। भगवान हमारे संग हैं आदित्य, वोँ नहि चाहता कि किसीवजह सें हम् फॅस जाएॅ। हमें नहि पता थां कि मंत्री नें कोई जासूस हमारे पीछे लगाया हुआ हैं अतः भगवान इस सबके द्वारा हमेंउस जासूस केँ बारे मे भि बता दिया। "
"सचमुच। " आदित्य कह उठा___"कुदरत कां हरकाम हैरतअंगेज़ होता हैं। ख़ैर, अब उस जासूस कां क्याँ करना हैं?"
"अभि तौ फिलहाल उसे किसी भि तरह सें पकड़ लेने केँ लिए मैंने मौसाजी सें कहा हैं। " रितू दिदी नें कहा___"उसका पकड़ मे आनां भि बेहद ज़रूरी हैं वरना वोँ हमारा पीछा करता रहता औऱ अंततः हमारे ठिकाने तक पहुॅच जाता। उसकेबाद वोँ हमारे ठिकाने केँ बारे मे मंत्री कों बता देता। बस फिन तोँ खेल हि ख़त्म होँ जानां थां। "
"सचमुच। " आदित्य नें कहा___"बहोत बड़ी मुसीबत मे फॅसने वाले थें हम् सभी। "
"हाॅ आदित्य। " रितू दिदी नें कहा___"मंत्री अपने दलबल केँ संगअगर हमारे ठिकाने पऱ आँ धमकता तौ हम् उस हालात मे उससमय कुछकर नहि पाते औऱ फिन हम् सबकेसंग मंत्री क्याँ सुलूक करता इसका अंदाज़ा भि नहि लगाया जा सकता। "
"शुकर हैं। " आदित्य नें कहा___"परमेश्वर नें हमेंबचा लिया। अब तोँ यही दुवाकरो कि वोँ जासूस मौसाजी कि पकड़ मे आँ हि जाए। वरनाअगर वोँ हाॅथ सें निकल गय़ा तौ मुसीबत एक् बारफिन सें हम् पर्र आँ जाएगी। भगवान बारबार ऐसा संयोग नहि बनाएगा। "
"सहीकहा तुमने। " रितू दिदी नें कहा___"देखते हें मौसाजी तथा उनके व्यक्ति क्याँ करते हें? इस वक़्त तोँ हमें नीलम कों बचाना हैं। "
"वैसे एक् बात कहूॅ रितू। " आदित्य नें कहा___"तुम्हारे जैसा कमीना बाप मैनेआज तक न् कहीं देखा हैं औऱ नां हि कहीं सुना हैं। स्वयं पापों कि गठरीलिए फिरता हैं औऱ अपनी हि बेटी केँ संग.छिः.मुझे तोँ सोचकर हि ऐसे व्यक्ति सें घृणा होँ रही हैं। "
"अगर मेरी बेहन कों कुछहुआ न् आदित्य। " सहसा रितू दिदी केँ मुख सें ज़हर मे डूबे शब्द निकले___"तौ उस इंसान कां मे वोँ हाल करूॅगी कि बड़े सें बड़ा जल्लाद भि उसकाहाल देखकर थर्रा जाएगा। "
"अब तोँ उसकी नियति हि ऐसीबन चुकी हैं। " आदित्य नें कहा___"कि उसकीजब भि मौत होगी तौ यकीनन बहोत भयानक तरीके सें होगी। "
आदित्य कि बात पर्र रितू दिदी कुछ नं बोलीं। लेकिन उनके चेहरे केँ भावबता रहे थें कि अपने अंदर केँ तूफान कों उन्होंने कितनी मुश्किल सें रोंका हुआ हैं। मे उन दोनों कि सारी बातें सुनरहा थां। तभी रितू दिदी नें किसी कों मोबाइल लगाया औऱ उससेकुछ बातें कि। आदित्य नें बहोत हि कम वक़्त मे वाहन कों हाॅस्पिटल पहुॅचा दिया।
हाॅस्पिटल केँ सामने वाहन केँ रुकते हि मैने जल्द सें गेट खोला औऱ नीलम कों सावधानी सें निकाल कर अपनी गोंद मे लिया औऱ बिना किसी कि तरफ देखे हाॅस्पिटल कि तरफ करीब दौड़ते हुए जानेलगा। मेरे पीछे हि बाॅकी सभी भि आँ रहे थें। कुछ हि देर मे मे नीलम कों लिए हाॅस्पिटल केँ अंदर आँ गय़ा। वहाॅ कां माहौल देखकर ऐसालगा जैसे वहाॅ केँ डाक्टर तथा कर्मचारी हमारा हि इन्तज़ार कररहे थें। जल्द हि दो व्यक्ति स्ट्रेचल लिये मेरेपास आए। मैने आहिस्ता सें नीलम कों स्ट्रेचर पर्र लिटा दिया। मेरे लेटाते हि वोँ दोनो व्यक्ति स्ट्रेचर कों तेज़ी सें ठेलते हुए लेँ जानेलगे। मे, आदित्य, रितूव सोनम दिदी भि संग हि संग चलनेलगे थें। थोड़ी हि देर मे वोँ दोनो व्यक्ति नीलम कों स्ट्रेचर सहितओटी मे लेँ गए। डाक्टर नें हम् सबकोओटी केँ बाहर् हि रोंक दिया औऱ स्वयं अंदरचला गय़ा।
हम् चारो वहीं पऱ खड़ेरह गए थें। हम् चारों केँ मन मे बस एक् हि बात थि कि नीलम कों कुछ न् हौ। अभि हम् सभी वहाॅ पर्र खड़े हि थें कि तभी वहाॅ पऱ एसीपी रमाकान्त शुक्ला भि आँ गय़ा। उसनेआते हि रितू दिदी सें नीलम केँ बारे मे पूछा तौ दिदी नें बता दिया कि अभि अभि उसेओटी मे लें जाया गय़ा हैं। एसीपी नें रितू दिदी सें कहा कि उसने समूचे हास्पिटल मे अंदर बाहर् पुलिस केँ व्यक्ति सादे कपड़ों मे तैनात कर दिये हें। इसलिए अब किसी कां ख़तरा नहि हैं। एसीपी कि बातसुन कर रितू दिदी नें उसे इसकेलिए शुक्रिया किया। कुछ देरबाद एसीपी यहकहकर चला गय़ा कि वोँ नीलम कां हालचाल लेनेफिन आएगा।
एसीपी केँ जाने केँ कुछदेर बाद हम् चारों वहीं गैलरी पर्र दीवार सें सटी हुईँ रखी लम्बी चेयर्स पऱ बैठगए। कुछदेर बाद मे उठा औऱ हाॅस्पिटल सें बाहर् पानी लाने केँ लिएचला गय़ा। पानी लाकर मैने रितू दिदी व सोनम दिदी कों दिया। उसकेबाद उसी कुर्सी पर्र बैठकर हम् सभी डाक्टर केँ बाहर् आने कां इन्तज़ार करनेलगे। हम् सबके लबों सें बस एक् हि दुवा निकलरही कि नीलम कों कुछ न् हौ।
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
दोस्तो, आप् सबके सामने एपसोड हाज़िर कर दिया हैं। आशा करताहूॅ कि आप् सबको मनपसंद आएगा।
आप् सबकी प्रतिक्रिया तथा आप् सबके रिव्यू कां इन्तज़ार रहेगा।
बहोत बहोत धन्यवाद भइया आपकीइस हसीन प्रतिक्रिया केँ लिए,,,,,,,,,,भाग दे दिया हैं भइया,,,,,,,,
बहोत बहोत धन्यवाद भइया आपकीइस सुंदर प्रतिक्रिया केँ लिए,,,,,,,,,,भाग दे दिया हैं भइया,,,,,,,,
बहोत बहोत धन्यवाद भइया आपकीइस सुंदर प्रतिक्रिया केँ लिए,,,,,,,,,, एपसोड दे दिया हैं भइया,,,,,,,,
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
awesome action thaa bhay apne hero kaa.mannaa padega अपना hero kaafi अच्छा fighter h.अब sab ko malum pad गया h के ajay singh kese kisam kaa aadmi h.लेकिन abi तो ajay singh ko apne bete की thodi badli hoyi सोच के bareme ptaa chalna baki h तभी तो uspe bomb hi futhega.uparwala kare के nilam ko कुछ na hu और vo juldi hi thik hu jaye.waise mausa ji के admi ne bahut hi बड़ा काम किया h detective के bare में bata krr.अब dekhte h क्या mausa ji use pakad paate h ya नहीं.mantri अब कुछ karne की firaak में zarur rahega lekin ritu sayad अब use कुछ na karne degi.lagta h अब viraj के gusse kaa keher और badhne wala h ajay singh के ऊपर.well let's see what happens next.
PEACE।
Behtarin update bhay har bar kee prakaar achai hamesa jit tihi he action kaa behtarin pradarsan takat aur dimag donokabadiya estemal kia hiro aur uski gengne
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
Shubhamji, ap lekhak hu। Apne sabhi pathako ko एक hi taraju पर toulana नहीं चाहिए। Sabhi ap से sex की mang नहीं karte aapki lekhani ko sarahte bi h। ap bevajah एक hi बात ko dohrate chalte hu। ap apni prakaar से story ko badhate chalo। Asha h ap samajdar hu isse ap anyatha नहीं lenge। Waiting for next update
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) - Next part miss mat karna
Relavant source : click here