♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
♡ एक् नया संसार ♡
भाग.《 61 》
अब तक,,,,,,,
"क्याँ मतलब हैं आपका?" कमलकान्त केँ माॅथे पर्र शिकन उभरी, बोला___"आप् तौ ऐसेकह रहे हें जैसे कि आपकेपास अपने दुश्मन केँ खिलाफ कोई बहोत बड़ा सबूतलग गय़ा हैं जिसके तहत आप् अपने दुश्मन कों बड़ी आसानी सें अपने पंजे पर्र दबोच लेंगे। "
"बिलकुल सहीकहा कमलकान्त। " अजय सिंह केँ चेहरे पर्र चमक थि, बोला___"ऐसा हि हुआ हैं। उसने हमारे संग बहोत खेल खेलाअब एक् खेल हम् भि दिखाएॅगे उसे। एक् ऐसाखेल जिसके बारे मे उसने ख़्वाब मे नहि सोचा होगा। सबकेसभी एक् हि झटके मे हमारे क़दमों तले पालतू कुत्तों कि तरहदुम हिलाते नज़र आएॅगे। "
"ऐसी क्याँ बात हौ गई हैं ठाकुर साहब?" अभिजीत केँ चेहरे पर्र हैरानी थि___"जिसके तहत आप् इतनी दृढ़ता व इतने विश्वास केँ संगकह रहे कि सबकेसभी आपके पैरों तले आँ जाएॅगे?"
"बस देखते जाओ सहाय। "अजय सिंह नें प्रभावशाली लहजे मे कहा___"सभी कुछ बहोत जल्दसमझ आँ जाएगा। ख़ैर, हम् यहकहरहे हें कि हमेंइसी वक़्त वैसे हि कुछ व्यक्ति चाहिए जैसे आप् लोगों नें हमारी सहायता केँ लिए भेजे थें। "
अजय सिंह कि इसबात पर्र वहाॅ बैठेसब लोगकुछ देर तक तौ चकितभाव सें उसे देखते रहेफिन उन लोगों सहमति मे सिर हिलाया। कुछदेर बाद हि मीटिंग ख़त्म हौ गई। अजय सिंह केँ उठते हि बाॅकी सभी भि अपने अपने रास्तों पऱ चलेगए।
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अबआगे,,,,,,,
बड़ा हि सनसनीखेज मंज़र थां।
यहकोई फार्महाउस थां जौ कि शहर कि आबादी सें दूर थां। फार्महाउस बहुत बड़ा थां। बीचोबीच दो मंजिला इमारत बनी हुईँ थि। चारोतरफ हट्टे कट्टे तथा काली वर्दी पहने गनधारी तैनात थें। इमारत केँ सामने विशाल मैदान मे कई गाड़ी व जीपें खड़ी हुइ थि। लेकिन इसबीच सबसे सनसनीखेज बातयह थि कि इमारत केँ बगल सें बने गेस्टहाउस केँ आकार कां जोँ घऱबना थां उसके सामने कि दीवार पऱ कुछलोग रस्सियों मे बॅधे खड़े थें। सबके हाॅथआपस मे बॅधेऊपर कि तरफघऱ कि रेलिंग सें झूलती रस्सियों पर्र बॅधेहुए थें।
विराज, गौरी, निधी, अभय, करुणा, दिव्या, शगुन, आशा, रुक्मिणी, आदित्य, रितू, सोनम, नीलम, नैना, बिंदिया तथा शंकरव हरिया यहसभी मोटी मोटी रस्सियों मे बॅधेहुए छटपटा रहे थें। विराज, रितूव आदित्य केँ चेहरों पऱ जहाॅ कठोरता केँ भाव थें वहीं बाॅकी सबके चेहरे दहशत सें भरे पड़े थें। जबकि इन सबके सामने खड़े थें अजय सिंह, प्रतिमा, शिवातथा उनकेकई सारे हथियारबंद व्यक्ति। सबके होठों पर्र जानदार व विजयात्मक मुस्कान छाई हुई थि। अजय सिंहकुछ देर पहले हि ज़ोर ज़ोर सें अट्ठहास लगारहा थां। लेकिन उसके जल्दी बाद हि उसका चेहरा गुस्से सें आग बूबला नज़रआने लगा थां। यहीहाल प्रतिमा व शिवा कां भि थां। इन तीनों केँ चेहरों पऱ इस टाइम क्रोध व नफ़रत केँ बेशुमार भाव गर्दिश कररहे थें।
"हर ब्यक्ति सें चुनचुन केँ हिसाब लूॅगा। " वातावरण मे मानोअजय सिंह कि दहाड़ गूॅजी___"बहोत तड़पाया हैं तुम् सबने मुझे। मेरेदिन कां सुकून व रातों कि नींद हरामकर रखी थि तुम् लोगों नें। सबका हिसाब सूद समेत लूॅगा मे। " कहने केँ संग हि अजय सिंह विराज केँ नज़दीक आयाफिन उसके जबड़े कों अपने दाहिने हाॅथ सें शख्ती सें पकड़ते हुए कहा___"क्याँ समझता थां तूँ अपने आपको?दो चारबार मुझे करारी शिकस्त क्याँ दे दि साला अपने आपको जेम्स बाॅण्ड कां बाप समझने लगा। अरे तेरे जैसे जेम्स बाण्ड तौ मेरे कच्छे केँ अंदर पाये जाते हें समझा?देख लिया नं, एक् हि झटके मे चारो खाने चित्त कर दिया हैं तुम् सबको मैने। मे चाहूॅ तौ इसी टाइम तुम् सबकेसंग जौ चाहूॅ वोँ कर सकताहूॅ, औऱ करूॅगा भि। अपनेहर नुकसान कां बदला लूॅगा मगर उससे पहले अपनी ख़्वाहिशों कों पूरा करूॅगा मे। मेरी ख्वाहिशों केँ बारे मे तौ तुम् सभी बहोत अच्छी तरह जानते हौ न्। "
"एक् बार मेरेयह हाॅथखोल कर देखो बड़े भाई। " सहसाअभय गुस्से सें उबलता हुआबोल पड़ा___"अकेले तुम् तीनों कां रामनाम सत्य न् कर दिया तोँ ठाकुर गजेन्द्र सिंह बघेल कि औलाद न् कहलाऊॅ। "
"यही, बस यही। "अजय सिंह तपाक सें बोला___"यही अकड़ तोँ तुम् सबकी निकालनी हैं मुझे। तुम् सबके गुरूर औऱ स्वाभिमान कों अपने पैरों केँ तले रौंदना हैं मुझे। उसकेबाद यहाॅ सबके सामने तुम् सबकेसंग ऐसा नंगानाच करूॅगा कि ऊपर बैठे फरिश्तों कां कलेजा भि दहल जाएगा। "
"डैड आपको जौ भि करना हैं करिये। " सहसाअजय सिंह केँ पीछे सें आताहुआ शिवाबोल उठा____"लेकिन अब मुझसे बरदास्त नहि हौ रहा। आप् तोँ जानते हें कि मेरी ख्वाहिश क्याँ हैं। अतः आप् मुझे मेरीइस जाने बहार निधी कां जीभर केँ रसपान करने कि इजाज़त दीजिए। "
"अरे इजाज़त क्यूं माॅगता हैं शहज़ादे?" अजय सिंह नें ज़ोर कां ठहाका लगाते हुए कहा____"यह सभी तोँ यहाॅआए हि इसी सबकेलिए हें। तुम्हे जोँ मनपसंद आएउसे भोगना शुरुआत करदे। मेरा शिकार तौ यह गौरी हैं। शपथ सें इसे पाने केँ लिए मे कितना तड़पा हूॅयह तौ केवल मे हि जानता हूॅ। "
"हरामज़ादे। " रस्सियों सें बॅधा विराज बुरीतरह दहाड़ते हुए चिल्ला उठा____"अगर मेरीमाॅ बहनों कों हाॅथ लगाने कि कोशिश कि तोँ समझ लेना तेरे हाॅथ उखाड़ कर कुत्तों केँ सामने डाल दूॅगा। "
"चिल्ला मेरे भतीजे। " अजय सिंह ज़ोर सें हॅसा___"औऱ ज़ोर सें चिल्ला। क्योंकि अब तूँ केवलयही कर सकता हैं। जबकि मे औऱ मेरा बेटा यहाॅ मौजूद हर महिला व लड़की कां रसपान करेंगे। उसकेबाद यहाॅ मौजूद मेरेसब व्यक्ति उन्हें जीभर केँ भोगेंगे। म्म्म! बाद मुद्दत केँ यहदिन आया हैं जिसका मुझे शिद्दत सें इन्तज़ार थां। "
अजय सिंह कि इसबात पर्र रस्सियों मे बॅधे विराज, आदित्य, अभय, हरिया व शंकर जैसे मर्द बुरीतरह छटपटा कररहगए। क्रोध, अपमान, व जलालत कां कड़वा घूॅटपी जाने केँ सिवा जैसे उनकेपास कोई दूसरा चारा हि नहि थां। जबकि अजय सिंह कि बाततथा उसके मंसूबों कां देखकर सब औरतों व लड़कियों कि रूह तक फना हौ गई।
इधर ज़ोरदार कहकहे लगाते हुएअजय सिंहव शिवा अपने अपने पसंदीदा शिकार कि तरफबढ़ चले। रस्सियों मे बॅधे सबकेसभी बुरीतरह छटपटा रहे थें। औरतों व लड़कियों कि हालतसमय भर मे ख़राब होँ गई। कुछ हि पलों मे अजय सिंहव शिवा अपने अपने शिकार यानी कि गौरीव निधी केँ पास पहुॅच गए।
"ओह। " निधी केँ क़रीब पहुॅचते हि शिवा नें ज़हरीली मुस्कान केँ संग कहा___"मेरी राॅड बेहन तौ पहले सें औऱ भि अधिक हसीन हौ गई हैं। लगता हैं मुम्बई कां पानी बहुतसूट किया हैं तुम्हारी तरफ। चल यह तौ औऱ भि बहोत अच्छा हुआ। तेरीइस मादक लेकिन कच्ची जवानी कां रसपान करने मे अब औऱ भि मजा आएगा। "
"हरामज़ादे कुत्ते। " विराज पूरी शक्ति सें बंधनों कों खींचते हुए चिल्लाया____"मेरी बेहन सें इसतरह बात करने कां अंजाम बहोत भयंकर होगा। अगर अपनी खैरियत चाहता हैं तौ दूरहट जा गुड़िया सें वरनामाॅ शपथ यहीं ज़िंदा गाड़ दूॅगा तुम को। "
"यह गीदड़ भभकी किसी औऱ कों देना बेटा। " शिवा नें ज़हरीली मुस्कान केँ संग कहा___"चिन्ता मतकर, तेरा भि हिसाब करना हैं मुझे। तूनेउस टाइममुझ पऱ हाॅथ उठाया थां न्। उसका हिसाब तोँ अवश्य लूॅगा तुझसे। मगर उससे पहले अपनी जाने जिगर सें अपनामूड तौ बनालूॅ। "
शिवा कि बात पर्र विराज बुरीतरह छटपटा कररह गय़ा। उसे अपनी बेबसी पर्र बेहद गुस्सा भि आँ रहा थां औऱ रोना भि। उधरअजय सिंह भि गौरी केँ पास पहुॅच चुका थां। उसने गौरी कों बहोत हि नज़ाकत सें ऊपर सें नीचे तक कईबार देखा औऱ फिन उसकी ऑखों मे देखते हुए मुस्कुराया।
"सचमुच। " फिनअजय सिंह नें मानो मंत्रमुग्ध होँ चुकेभाव सें कहा___"आज भि वैसी हि होँ जैसेतब थि जब मैने तुम्हें पहलीबार देखा थां। वही सादगी, वही तीखेनैन नक्श, वही साॅचे मे ढलाहुआ मदमस्त कर देने वाला गदराया हुआ शरीर। शपथ सें गौरी, तुम्हें अगर हज़ार बार भि भोगलूॅ तोँ मेरी तिश्नगी नं बुझेगी। तुम्हें पता हैं, तुम् वोँ दूसरी औरत हौ जिससे मुझे सचमुच कां प्रेम हौ गय़ा थां। मे चाहता थां कि तुम् खुशी खुशी मेरी आगोश मे आँ जाओ। मगर जब तुम् नहि आई तौ मुझेहर वोँ मार्ग अख्तियार करना पड़ा जिसके तहत मुझे लगता थां कि तुम् मेरी आगोश मे आँ सकती हौ। पर्र कदाचित मे ग़लत थां गौरी याँ फिन मेरे प्रेम मे वोँ बात हि नहि थि जिसके तहत तुम् मेरी हौ जाती। "
"भाभी सें तमीज़ सें बातकरो बड़े भाई। " अभय बुरीतरह छटपटाते हुए बोला___"इतनी भि नीचता मत दिखाओ कि परमेश्वर कों भि लज्जा आँ जाए। "
"ओहो। " अजय सिंह नें ब्यंगात्मक भाव सें उसे देखते हुए कहा___"तौ मेरा छोटा भइया भि अब मुझसे इस ज़ुबान मे बात करेगा। लगता हैं गौरी नें थोडा बहोत अपनी मदमस्त जवानी कां स्वाद चखा दिया हैं तुम्हें। "
"ख़ाऽऽऽमोश। " अभय सिंह पूरी शक्ति सें दहाड़ा थां, बोला____"अपनी ज़बान कों लगामदे बेशर्म इंसान। बस एक् बार मुझेइस बंधन सें आज़ाद करदे। उसकेबाद देख कि क्याँ हस्र करताहूॅ तेरा। "
"इस तरह चिल्लाने कां कोई फायदा नहि हैं छोटे। "अजय सिंह नें पूरी ढिठाई सें कहा____"क्योंकि अब यहाॅ पर्र वही होगा जौ मात्र औऱ केवल मे चाहूॅगा। तुम् सबकी ऑखों केँ सामने हम् दोनो बाप बेटे एक् एक् स्त्री व एक् एक् लड़की कि इज्ज़त कां मर्दन करेंगे। "
इतना कहने केँ संग हि अजय सिंह पलटा औऱ पुनः गौरी केँ समीप आँ गय़ा। उसने जैसे हि हवसभरी ऑखों सें गौरी कि तरफ देखा वैसे हि गौरी नें नफरतव घृणा सें उसके चेहरे पऱ थूॅक दिया। यह देखकर अजय सिंह तौ आग बबूला हुआ हि लेकिन इसबीच गौरी केँ समीप तेज़ी सें आकर प्रतिमा नें उसकेगाल पर्र एक् झन्नाटेदार थप्पड़ जड़ दिया।
"साली कुतिया। " प्रतिमा किसी शेरनी कि भाॅति गुर्राते हुए बोलि___"तेरी हिम्मत केसे हुइ अजय केँ चेहरे पऱ थूॅकने कि? अपने आपको बड़ीसती सावित्री समझती हैं न्। अभि यहीं सबके सामने तेरेइस शरीर कों नुचवाती हूॅ। अपनेरूप औऱ सौंदर्य कां बहोत घमंड हैं न् तुझेही, रुकऐसा हाल करवाऊॅगी कि सभी थूॅकेंगे तुझ पऱ। " कहने केँ संग हि प्रतिमा एक् झटके सें अजय सिंह कि तरफ पलटी, फिन गुस्से सें फुंफकारते हुए बोलि____"देख क्याँ रहे हौ अजय?आगे बढ़ो औऱ चीर फाड़कर फेंकदो इस रंडी केँ शरीर सें इसके सारे कपड़े। ज़रा भि रहम नं करनाइस दोटके कि राॅड पर्र। "
प्रतिमा कां भभकता हुआ चेहरा तथा उसकी बातें सुनकर अजय सिंह पऱ जल्दी प्रतिक्रिया हुईँ। वो झटके सें आगे बढ़ा औऱ गौरी केँ शरीर पऱ मौजूद सफेद साड़ी केँ ऑचल कों पकड़कर एक् झटके सें अपनीतरफ खींच लिया। जिससे गौरी कां ऊपरीबदन अर्धनग्न सां होँ गय़ा। सफेद ब्लाउज पऱ कसेहुए उसके बड़े बड़े उन्नत उभार सबकी नज़रों मे आँ गए। उधर अजय सिंह कि इस हरकत सें वातावरण मे कई सारी चीखें गूॅजगईं। गौरी तौ लाजव लज्जा कि वजह सें चिल्लाई हि थि लेकिन उसकेसंग हि विराज आदिसभी भि चीख पड़े थें। एकदम सें जैसे वातावरण मे कोलाहल सां मच गय़ा थां।
"हरामज़ादे। " विराज केँ सब्र कां बाॅध मानोटूट गय़ा। भयंकर गुस्से मे भभकते हुए उसने अपने दोनो हाॅथों कों नीचे कि तरफ पूरी ताकत सें खींचा। उसका गोरा चेहरा लाल सुर्ख पड़ता चला गय़ा। कुछ हि पलों मे रस्सी टूटती चली गई। रस्सी केँ टूटते हि वो तीव्र वेग सें नीचे ज़मीन पऱ गिरा औऱ फिन गुलाटियाॅ खाताचला गय़ा। लेकिन जल्दी हि बिजली कि स्पीड सें उठकर खड़ा भि हौ गय़ा। उसके दोनो हाॅथआपस मे अभि भि रस्सी सें बॅधेहुए थें। वो उसी हालत मे अजय सिंह कि तरफ दौड़ पड़ा।
पलक झपकते हि वो अजय सिंह केँ ऊपर छलांग चुका थां। अजय सिंह केँ ऊपर विराज कां शरीर बड़ेवेग सें टकराया थां जिसके परिणाम स्वरूप वोँ भरभरा कर वहीं ज़मीन पऱ गिरा। विराज पहले तौ उसकेऊपर हि थां लेकिन ज़मीन पर्र दोनो केँ गिरते हि विराज उसकेऊपर सें दूसरी तरफ लुढ़कता चला गय़ा थां। लेकिन वो जल्दी हि उठा औऱ समयभर मे अजय सिंह केँ सीने मे सवार होँ गय़ा। उसके सीने पऱ सवार होते हि वो अपने दोनो बॅधे हाथों कां दुहत्थड़ उसके सीने पर्र पूरेवेग सें मारने लगा। यह सभी इतनी जल्दहुआ कि कुछदेर तक तोँ कोईकुछ समझ भि न् पाया। हर कोई हक्का बक्का रह गय़ा थां।
सबकोहोश तोँ तबआया जब वातावरण मे अजय सिंह कि दर्दभरी चीखें गूॅजने लगी थि। चारोतरफ तैनात गनमैन जल्दी हि हरकत मे आँ गए। वोँ एक् संगउस तरफ बढ़े जहाॅ पर्र विराज अजय सिंह केँ ऊपर चढ़ाहुआ उस पऱ दुहत्थड़ बरसाए जारहा थां।
"आज तुम्हें ज़िंदा नहि छोंड़ूॅगा हरामज़ादे। " विराज मारने केँ संगसंग गुस्से मे बोलता भि जारहा थां___"तूने मेरी देवी जैसीमाॅ कां अपमान किया हैं। उन पर्र अपनी गंदी दृष्टि डाली हैं। तुझ जैसे पापी कां इस दुनियाॅ मे जीने कां कोई अधिकार नहि हैं। "
विराज अभि यहसभी बोल हि रहा थां कि तभी चारोतरफ सें दौड़ते हुएआए गनमैनों नें उसे पकड़कर अजय सिंह केँ ऊपर सें खींचकर दूरकर दिया। गनमैनों केँ बंधन मे जकड़ा हुआ विराज बुरीतरह चीखेजा रहा थां तथा स्वयं कों उनकी पकड़ सें छुड़ाने केँ लिए पूरी ताकत लगाएजा रहा थां। लेकिन चारोतरफ सें हाॅथ पांव पकड़े गनमैनों कि पकड़ सें वो छूट नहि पारहा थां। यहअलग बात थि कि गनमैनों कों उसे सम्हालने मे बहुत ज़ोर आजमाईश करनीपड़ रही थि।
इधर विराज केँ हटते हि अजय सिंह ज़मीन सें उठा औऱ तमतमाया हुआ वो गनमैनों द्वारा पकड़े विराज कि तरफ बढ़ा औऱ फिन जल्द जल्द उसने विराज पऱ लात घूॅसों कि बौछार कर दि। अजय सिंह यहीं पऱ हि नहि रुका बल्कि उसनेझपट कर एक् गनमैन सें उसकीगन छीनी औऱ दोकदम दूर हटतेहुए उसने विराज कि तरफगन कां दहाना खोल दिया। परिणामस्वरूप दोसमय केँ भीतर हि गन सें निकली गोलियाॅ विराज केँ बदन कों छलनी करतीचली गईं। वातावरण कई सारे गलों सें निकली चीख़व चिल्लाहट सें गुंजायमान होँ उठा। उधर गोलियों सें छलनी हौ गए विराज कां समूचा शरीर उसके हि लाल सुर्ख खून सें नहाता चला गय़ा।
"राऽऽऽऽऽऽज। " अपने कमरे मे बेड पर्र गहरी नींद मे सोई पड़ी गौरी पूरी शक्ति सें चिल्लाते हुए हड़बड़ा करउठ बैठी। उसकीइस चीख सें रात केँ गहरे सन्नाटे मे डूबा समूचा बॅगला मानो झनझना कररह गय़ा। बेड पऱ बदहवाश सि बैठी गौरी विछिप्त सि हालत मे इधरउधर देखेजा रही थि। उसका चेहरा भयव दहशत सें पीला ज़र्द पड़ाहुआ थां। समूचा शरीर पसीने सें तरबतर थां। बुरीतरह हाॅफे जारही थि वो।
गौरी कि इस भयानक चीख़ सें बॅगले केँ अंदर अपने अपनेरूम मे बेड पऱ सोयाहुआ हर इंसानी जीव बुरीतरह उछलकर उठ बैठा थां। जैसे हि उन्हें यह एहसास हुआ कि चीख़ गौरी केँ कमरे सें आई हैं तौ सभी केँ सभी अपने अपनेरूम सें दौड़ पड़े। किसी कों होश भि नहि थां कि कौनकिस हालत मे बेड पर्र सोयाहुआ थां?
थोड़े हि वक्त मे सबकेसभी गौरी केँ कमरे केँ दरवाजे पऱ ऑधी तूफान कि तरह पहुॅचे। अभयवपवन नें दरवाजे कों पूरी ताकत सें थपथपाया। लेकिन दरवाजा तौ खुलता चला गय़ा। यानी कि दरवाजा अंदर सें बंद नहि थां। शायद गौरी कों दरवाजा बंद करने कां ख़याल हि नहि आया थां। आता भि केसे, उसके ख़यालों मे तौ हरसमय उसका बेटा रहता थां। जौ उसकी ऑखों कां तारा थां, उसके जीने कां आख़िरी सहारा थां। उसेपता थां कि वोँ इस वक़्त मौत केँ मुह मे हैं। ख़ैर, दरवाजे कों खुलता देखपवन नें जल्द सें दरवाजे कों पूरा धकेला औऱ फिन सबकेसभी कमरे मे दाखिल हौ गए।
कमरे मे दाखिल होते हि सबकी नज़र एक् संगबेड पऱ पागलों कि सि हालत मे बैठी गौरी पर्र पड़ी। गौरी कों इससमय किसीबात कां होश नहि थां औऱ नाँ हि उसे अपनी हालत कां ख़याल थां। उसकी सफेद साड़ी कां ऊपरी हिस्सा बेडशीट पऱ हि एक् तरफ गिराहुआ थां। उसकीइस हालत कों देखकर करुणा तेज़ी सें उसकीतरफ बढ़ी औऱ उसने उसकेऑचल कों उसके सीने पर्र ढॅकते हुए स्वयं भि बेड केँ किनारे बैठकर उसे दोनो हाॅथों सें सम्हाल लिया।
"क्याँ हुआ दिदी???" करुणा सहसा दुखीभाव सें गौरी केँ बुतबने बदन कों झकझोरते हुए बोलीं___"आप् इतनी ज़ोर सें क्यूं चीखी थि? बताइये न् दिदी, क्याँ हुआ हैं?"
"र.र.रा.ज। " सहसा गौरी केँ थरथराते हुए लबों सें बड़ी अजीब सि आवाज़ निकली___"मे.मेरे.बेटे.कों मार दियाउन लोगों नें। उन हत्यारों नें मेरे जिगर केँ टुकड़े कों गोलियों सें भून दिया। मेरा बेटा खून सें लथपथ हौ गय़ा हैं। वोँ रोरहा हैं.वोँ माॅमाॅ कहकर मुझे पुकार रहा हैं। अरे रे.मेरे बेटे कों जान सें मार दियाउन कंजरों नें। " कहने केँ संग हि गौरी दहाड़ें मारमार कररो पड़ी___"मुझे मेरे बेटे केँ पास जानां हैं। मुझे मेरे बेटे केँ पास पहुॅचा दो। मुझे अपना बेटा जीवित चाहिए। परमेश्वर मेरे बेटे कों मुझसे नहि छीन सकता। अगर ऐसाहुआ तौ उसे मेरी बद्दुवा लगेगी। मुझे मेरे बेटे केँ पास जानां हैं। "
इतनासभी कहने केँ संग हि गौरी कों चक्कर सां आँ गय़ा औऱ वो करुणा कि बाहों मे अचेत सि लुढ़क गई। गौरी कि इन बातों नें सबको जैसे सकते मे ला दिया। सबके पैरों तले सें मानों ज़मीन गायब होँ गई। सबकेसभी उसकीबात सुनकर इसतरह अवाक सें अपनी अपनी स्थान खड़ेरह गए थें मानों सबको एक् संग हि लकवामार गय़ा हौ। होशतब आयाजब करुणा कि करुण चीखें सबके सुन्न पड़ चुके कानों मे पड़ी।
कुछ हि समय पहले मानो टाइमठहर सां गय़ा थां। करुणा कि चीख नें मानो सबके जिस्मों मे प्राणों कां संचार कर दिया थां। वस्तुस्थित कां एहसास होते हि सबसे पहले निधी केँ हलक सें आवाज़ निकली। वो रोतेहुए गौरी कि तरफ दौड़ पड़ी औऱ उससे लिपटकर रोनेलगी। उसकेबाद तोँ सभी केँ सभी अपनी अपनी भावनाओं केँ संग गौरी केँ पास पहुॅच गए थें। किसी कों कुछसमझ मे नहि आँ रहा थां कि क्याँ करें? गौरी कि इस हालत नें सबको मानों विवेकहीन सां कर दिया थां। रुक्मिणी वआशा नें आगेबढ़ कर गौरी कों सम्हाला औऱ उसे ध्यान सें देखा।
"जल्द सें कोई पानी लेँ आओ। "फिन रुक्मिणी नें दुखीभाव सें करीब ज़ोर सें चिल्ला कर कहा___"इसे चक्कर आयाहुआ हैं। इसने अवश्य कोई बहोत हि बुरा सपना देखा हैं। उसी कि वजह सें ये इतनी ज़ोर सें चीखी थि। "
रुक्मिणी कि बातसुन करपवन जोँ पास हि खड़ा थां वोँ जल्दी कमरे सें बाहर् कि तरफ दौड़ते हुए गय़ा औऱ कुछ हि पलों मे एक् स्टील केँ मग मे पानी लें कर आँ गय़ा। अभय नें आगेबढ़ कर उससे पानी सें भरा स्टील कां मग लिया औऱ उससे चुल्लू मे पानीडाल कर गौरी केँ चेहरे पऱ छिड़कने लगा। अभय सिंह कि ऑखों मे ऑसूव चेहरे पऱ पीड़ा केँ भाव थें। कदाचित अपनी देवी समान भाभी कि इस हालत सें वो स्वयं भि बेहद दुखी होँ गय़ा थां।
जगदीश ओबराय बॅगले मे नहि थां। वोँ साम केँ करीब-करीब सातबजे हि कहीं बाहर् चला गय़ा थां। उसने बताया थां कि वो बिजनेस केँ संबंध मे किसी ज़रूरी काम सें जारहा हैं। ख़ैर, कुछ हि देर मे गौरी कों पुनःहोश आँ गय़ा। होश मे आते हि वो रोतेहुए राजराज चिल्लाने लगी। उसे यूॅ रोतादेख सबकी ऑखेंछलक पड़ीं। बड़ी मुश्किल सें उसे सम्हाला सबने। वोँ बारबार यही कहती कि उसे अपने बेटे केँ पास जानां हैं। उसके बेटे कों हत्यारों नें गोलियों सें छलनीकर दिया हैं।
बहुतदेर तक सबके समझाने बुझाने केँ बाद आख़िर वो कुछ शान्त हुई। सबनेउसे समझाया औऱ यकीन दिलाया कि उसके बेटे कों किसी नें कुछ नहि किया हैं बल्कि उसका बेटा पूर्णतया सुरक्षित हैं। सबने अपने अपने तरीके सें गौरी कों समझाया तौ थां औऱ तसल्ली भि दि थि लेकिन माॅ कां हृदय पूरीतरह सें शान्त नं हौ सका थां। उसका अंतर्मन संतुष्ट नहि थां। मगर सबको दिखाने केँ लिए वो शान्त अवश्य होँ गई थि। कदाचित उसने भि सोचा कि यहमहज एक् सपने हि थां औऱ इसकीवजह सें उसे सबको दुखी याँ चिंतित नहि करना चाहिए।
करीब-करीब एक् घंटेबाद सभी अपने अपनेरूम मे चलेगए। गौरी केँ पास मात्र रुक्मणि रह गई थि। अपनीमाॅ कि इस हालत सें निधी भि बहुत ब्यथित होँ गई थि। खासकर इसबात कों सुनकर कि उसके भइया कों याँ यूॅ कहिए कि उसके प्रेम कों गोलियों सें छलनीकर दिया हैं हत्यारे नें। गौरी केँ इस स्वप्न नें सबको झकझोर कररख दिया थां। उसरात फिनकोई भि ठीक सें सो नहि पाया थां। कदाचित इसलिए भि कि एक् यह सच्चाई तौ थि हि कि विराज मौत केँ मुह मे थां। रितूतथा रितू कि पुलिस भले हि उसकेसंग थि लेकिन दुर्भाग्य कभी किसी कों बताकर नहि आता। हर कोई विराज केँ लिए चिंतित थां औऱ हरसमय उसकी सलामती केँ लिए ईश्वर सें दुवाएॅ कररहा थां।
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मे औऱ आदित्य बाहर् सें घूमफिन करसाम कों करीबसात बजेघऱ पहुॅचे। अंदरआते हि आदित्य नें कहा वोँ फ्रेश होने अपने कमरे मे जारहा हैं। उसके जाने केँ बाद मे सीधा नीलम केँ कमरे मे उसको देखने केँ लिएचला गय़ा। नीलम केँ कमरे कां दरवाजा पूरीतरह सें बंद नहि थां बल्कि थोडा सां खुलाहुआ थां। मैनेउस खुलेहुए हिस्से केँ पास चेहरा लें जाकर पहले सोनम दिदी कों आवाज़ दि। लेकिन जब अंदर सें कोई प्रतिक्रिया नहि आई तौ मे कुछसमय सोचने केँ बाद स्वयं हि दरवाजा खोलकर कमरे केँ अंदर आँ गय़ा।
कमरे मे रखे शानदार बेड पऱ नीलम करवॅट केँ बल लेटी हुइ थि। उसकी ऑखेंबंद थि इससमय। कदाचित सोरही थि याँ फिन ऑखेंबंद करके आरामकर रही थि। मे उसके क़रीब जाकरबेड केँ पास हि खड़ा होँ गय़ा। मेरी नज़र उसके मासूम व सुंदर सें चेहरे पऱ पड़ी। इस वक़्त वोँ किसी छोटी सि बच्ची कि भाॅति मासूम दिखरही थि। मुझे उसकीइस मासूमियत पऱ बेहद प्रेम आया। मेरे होठों पऱ मुस्कान फैल गई। तभी अचानक मेरेमन मे उसे छेंड़ने कां ख़याल आयामगर फिन मैंने अपनेमन सें उसे छेंड़ने कां ख़याल झटक दिया। मुझेलगा इससमय इसे आहिस्ता सोने देना चाहिए। यहसोच कर मे उसके चेहरे केँ क़रीब झुका औऱ प्रेम सें उसके माॅथे पर्र हौले सें चूॅम लिया। उसकेबाद मे पुनः सीधा खड़ाहुआ औऱ फिन बिनाकुछ बोले हि पलटकर कमरे सें बाहर् कि तरफ जाने केँ लिए बढ़ा हि थां कि सहसातभी मे चौंक पड़ा। पीछे सें नीलम नें उसी टाइम मेरी दाहिनी कलाई कों पकड़ लिया थां।
उसकेइस तरह मेरी कलाई पकड़ लेने पऱ मे बरबस हि मुस्कुरा उठा। मेरे दिमाग़ मे जल्दी हि यहबात आई कि नीलम नें कदाचित मुझे छेंड़ने केँ लिए हि मेरी कलाई पकड़ली हैं। अतःयह सोचते हुए मे पूर्वत मुस्कुराते हुए उसकीतरफ पलटा। नीलम नें अपने एक् हाॅथ सें मेरी कलाई कों पकड़ा हुआ थां, लेकिन उसके चेहरे पऱ कोईभाव नहि थां। वोँ बस मुझे एकटक देखेजा रही थि। उसकी ऑखों मे कुछ थां जौ फिलहाल मेरीसमझ मे नहि आया कि वोँ क्याँ थां?
"क्याँ बात हैं बंदरिया?" मैनेउसे इसतरह देखते देख छेंड़ने वालेभाव सें कहा___"क्याँ मुझसे पंगा लेने कां इरादा हैं? देखअगर ऐसा हैं तोँ फिलहाल अपने ज़हन सें इस ख़याल कों निकाल दे। क्योंकि इस हालत मे तुझको मुझसे पंगा लेना भारीपड़ जाएगा। इसलिए मेरीबात मान पहले तुँ ठीक होँ जा। उसकेबाद तूँ शौक सें मुझसे जैसे चाहे पंगे लें लेना। "
"ऐसी कोईबात नहि हैं राज। " नीलम नें सहसा गंभीरता सें कहा___"तुमसे तोँ मे इसहाल मे भि पंगा लेने कों सजधजकर हूॅ औऱ यकीन मानो मुझे पंगे केँ भारी पड़ने कि कोई फिक्र नहि हैं। मगर मे इससमय तुमसे कुछ औऱ हि बात कहना चाहती हूॅ। "
"ओह आई सि। " मैनेउसे गंभीर हालत मे देखते हुए ज़रा स्वयं भि कुछ गंभीरता कां नाटक करतेहुए कहा___"तौ यहबात हैं। फरमाइए, क्याँ कहना चाहती हें आप्?"
"कहने कों तौ बहोत कुछ हैं मेरेदिल मे। " नीलम कि आवाज़ सहसा लड़खड़ा सि गई, लेकिन जल्दी हि जैसे उसने स्वयं कों मजबूती सें सम्हालते हुए कहा___"मगर केवलयही कहना चाहती हूॅ कि मेरी रितू दिदी कां हमेशा ख़याल रखना। मे नहि चाहती कि उनकामोम कां बन चुकादिल फिन सें पत्थर मे तब्दील हौ जाए। "
"क्याँ मतलब???" मे नीलम कि इसबात सें एकदम सें चकरा सां गय़ा, बोला___"यह क्याँ ऊल जुलूल बोलरही होँ तुम्?"
"एक् गुजारिश भि हैं तुमसे। " नीलम नें मेरीबात पर्र ज़रा भि ध्यान नं देतेहुए फीकी मुस्कान सें कहा___"इतने कम वक्त मे भि मुझे एहसास होँ चुका हैं कि तुम्हारे दिल मे हम् सबकेलिए बेपनाह प्रेम व सम्मान कि भावना हैं। इसलिए मेरी गुज़ारिश हैं कि हमेशा ऐसे हि बने रहना। चाहे जैसी भि परिस्थितियाॅ आँ जाएॅमगर तुम् स्वयं कों नहि बदलना। "
"यह तुम् कैसी बातें कररही होँ नीलम?" मे नीलम कि इन बातों सें बुरीतरह हैरान व चकितरह गय़ा थां, फिन बोला___"देखो किसी भि तरह कि पहेलियाॅ मत बुझाओ। जोँ भि बात हैं उसेसाफ साफ बोलो। "
"अब इससे अधिकसाफ साफ नहि कह सकती मेरे भइया। " नीलम नें भारी आवाज़ मे कहा___"मुझे पता हैं कि तुम् बेहद समझदार हौ, इसलिए मे उम्मीद करतीहूॅ कि तुम् मेरी बातों कों समझ जाओगे। "
"देखोअगर तुम्हारे यहसभी कहने कां मतलब। " मैनेइस बार ज़रा गंभीर भाव सें कहा___"इस बात सें हैं कि इस सबकेबाद क्याँ होगा तोँ तुम् इसबात सें बेफिक्र रहो। मे जानता हूॅ कि इसजंग कां अंत यकीनन बेहद दुखदायी होगा। मगर होनी तोँ अटल हैं न्। पाप औऱ बुराई कां अंत तौ निश्चित हैं। लेकिन उसकेबाद हम् सभीसंग मिलकर एक् नया संसार बनाएॅगे। उसनये संसार मे हम् सभी एक् संगढेर सारी खुशियों कां हिस्सा होंगे। मे तुमसे वादा करताहूॅ कि जिंदगी मे कभी भि किसी कों मे दुःखी याँ दुखी होने कां मौका नहि दूॅगा। "
"मुझेपता हैं राज। " नीलम नें फीकी सि मुस्कान केँ संग मेरीतरफ देखते हुए कहा____"मे जानती हूॅ कि तुम्हारे रहतेकोई भि जिंदगी मे दुखी नहि होँ पाएगा। लेकिन मेरेयह सभी कहने कां मतलबइन सभी बातों सें नहि थां भइया, बल्कि मे तोँ बस रितू दिदी केँ लिए वोँ सभीकह रही थि। "
"क्याँ मतलब??" मेरे चेहरे पर्र सोचने वालेभाव उभरे।
"यही तौ बिवसता हैं राज। " नीलम नें बेबसभाव सें मेरीतरफ देखा___"कुछ बातें ऐसी होती हें जिन्हें मुख सें नहि कहा जाता बल्कि सामने वाले कों खु हि समझ जानां होता हैं औऱ मे तुमसे यही उम्मीद करतीहूॅ कि तुम् बिनाकुछ बताएसभी कुछसमझ जाओगे। "
"कमाल हैं। " मे चकितभाव सें कह उठा____"भला यह क्याँ बात हुई? मे कोई अंतर्यामी हूॅ क्याँ जोँ किसी केँ बताए बिना हि सभीकुछ जान लूॅगा याँ फिनसमझ लूॅगा?"
"क्यूं नहि राज। " नीलम नें बड़े ग़ौर सें मेरीतरफ देखते हुए कहा____"तुम् यकीनन बिनाकुछ बताएसभी कुछसमझ सकने कि काबीलियत रखते हौ औऱ मुझेऐसा लगता भि हैं कि तुम् सभीकुछ समझते भि होँ। "
"अबयह क्याँ बात हुइ दोस्त?" मे बुरीतरह चौंका।
"पता नहि क्यूं?" नीलम नें पूर्वत मेरीतरफ बड़े ग़ौर सें देखते हुए हि कहा___"पऱ मुझेऐसा लगता हैं कि तुम् जानते समझते सभीकुछ होँ मगर प्रत्यक्ष रूप मे ज़ाहिर यही करते होँ कि तुम्हें सामने वाले कि कोई भि बातसमझ मे नहि आई हैं। हैं नाँ?"
"औऱ मुझेऐसा लगरहा हैं। " मैने कहा___"कि जैसे तुम् मुझसे पंगा लेने केँ मूड हौ। क्योंकि तुम्हारी यह बेसिर पांव कि बातें इसीबात कां इशारा करती हें। मगरमिस नीलम, जैसा कि मे पहले हि कह चुकाहूॅ तुमसे कि तुम् इससमय मुझसे पंगा लेने कि हालत मे नहि हौ। इसलिए बेहतर होगा कि अपने ज़हन सें पंगा लेने वाले ख़याल निकाल दो। "
मेरीइस बात सें नीलमकुछ न् बोलि। बस एकटक देखती रही मेरीतरफ। मे स्वयं भि उसी कि तरफदेख रहा थां। उसके चेहरे पऱ कईतरह केँ भावों कां आवागवन चालू थां। ऐसालग रहा थां जैसे किसीबात केँ लिएउसे अपने आपसे बहुत ज़द्दो जहद करनीपड़ रही होँ। एकाएक हि उसने मेरे चेहरे सें अपनी नज़रें हटाईं औऱ अपनेसिर कों दूसरी तरफकर लिया। मे यहदेख कर बुरीतरह चौंका कि दूसरी तरफसिर किये नीलम कि ऑखों सें ऑसूछलक पड़े थें। मुझेकुछ समझ नं आया लेकिन इतना अवश्य हुआ कि उसकी ऑखों सें इसतरह ऑसू छलकते देख मे बेचैन होँ गय़ा।
"अरेयह क्याँ मेरी प्यारी सि बेहन कि ऑखों सें ऑसू क्यूं छलक पड़े?" मे एकदम सें उसके समीप हि बेड केँ किनारे पर्र बैठ गय़ा औऱ फिन उसके हाॅथ कों अपने हाॅथ मे लेकर बोला___"देख अगर तुम्हे मेरी किसीबात सें बुरालगा होँ तौ मुझे क्षमा करदे। मे तुम कोइसतरह ऑसू बहाते नहि देख सकता। तूँ तौ जानती हि हैं कि मे कितना बेवकूफ हूॅ। मुझमें किसी कि भावनाओं कों समझने कां ज्ञान नहि हैं। अतःअगर तुम्हें मेरी किसीबात सें तक़लीफ हुइ हैं तोँ प्लीज क्षमा करदे मुझे। "
"ऐसा मतकहराज। " नीलम एकदम सें मेरीतरफ पलटकर सिसक उठी____"तूँ तौ ऐसा हैं जौ भूल सें भि किसी कों कोई तक़लीफ नहि दे सकता। मुझे खुशी हैं दुनियाॅ मे सबसे हसीनदिल कां लड़का मेरा भइया हैं। यहऑसू तौ फक़तऐसी हि खुशी केँ तहत छलके हें। मे नहि जानती कि किसके जिंदगी मे क्याँ क्याँ खोना औऱ पाना लिखा हैं मगर मेरी हसरत तोँ यही हैं कि मेरी रितू दिदी कों हर वोँ चीज़मिल जाएजिस चीज़ कि उन्होंने रज़ा कि होँ। "
"मेरे रहते मेरी बहनों कों कभी भि किसी चीज़ कि कमी कां एहसास तक नहि होगा नीलम। " मैने कहा___"मे बहनें मेरीजान हें, उनकेलिए कुछ भि कर सकताहूॅ मे। रितू दिदी हि बस क्यूं मे तोँ अपनीसब बहनों कों बराबर प्रेम व सम्मान दूॅगा। "
"जैसा तुम्हें अच्छा लगे वैसा करनाराज। " नीलम नें गहरी साॅस ली____"अब तुम् जाओ औऱ नैना फूफी याँ सोनम दिदी मे सें किसी कों भेजदो। मेरासिर ज़रा भारी भारी सां लगरहा हैं। "
"सिर भारीलग रहा हैं???" मे चौंका___"इतनी सि बात केँ लिए उनको क्यूं कष्ट देना?लाओ मे तुम्हारे सिर कि मालिश कर देताहूॅ। इतना तौ मे भि कर सकताहूॅ। "
"तुम् रहनेदो राज। " नीलम नें कहा___"तुम् परेशान न् होँ। सोनम दिदी कों भेज देना। "
"ओये चिंता मतकर दोस्त। " मे सहसा मुस्कुराया___"सिर कि मालिश हि करूॅगा, तेरागला नहि दबाऊॅगा मे। "
"काश! तुँ मेरागला हि दबादे भइया। " नीलम कि आवाज़ एक् बार पुनः जाने क्याँ सोचकर भर्रा गई___"तेरे पास तेरी हि बाहों केँ दरमियां इस दुनियाॅ सें रुख़्सत होँ जाऊॅगी। "
"ज़्यादा बकवास मतकर। " मैने सहसा कठोरभाव सें कहा___"वरना कान केँ नीचे एक् लगाऊॅगा तोँ सारा सेन्टिमेंट निकल जाएगा तेरा। अब अगरकुछ बोला तोँ देख्ना फिन। "
मेरीबात सुनकर नीलमबस मुस्कुरा कररह गई। जबकि मे उसके सिरहाने केँ क़रीब हि बैठकर उसके माॅथे पर्र हाॅथ सें मालिश कां दबाव आहिस्ता आहिस्ता करनेलगा औऱ संग हि सोचने लगा कि नीलम नें आख़िर ऐसीबात क्याँ सोचकर कही होँ सकती हैं? अभि मे नीलम कि बातों केँ बारे मे सोच हि रहा थां कि तभी कमरे मे नैना फूफी व सोनम दिदी एक् संग हि आँ गईं। मुझेइस तरह नीलम कां सिर दबाते देख वोँ दोनो हि चौंकते हुए एक् स्थान ठिठकगईं।
"ओहो। "फिन सहसा नैना फूफी नें मुस्कुराते हुए कहा___"क्याँ बात हैं राज, अपनी लाडली बेहन कि बड़ी सेवाकर रहे होँ तुम्। वैसे मैने सुना हैं कि तुम् दोनोआपस मे बड़ा लड़ते झगड़ते हौ। फिनयह सेवाभाव केसे?"
"क्याँ बताऊॅ फूफी?" मैने बड़ी मासूमियत सें कहा__"मे इससे चाहे जितना भि लड़ूॅ झगड़ूॅ मगर आख़िर हैं तोँ यह मेरी प्यारी बेहन हि नं? बेचारी कां सिर भारी भारी सां होँ रहा थां तौ कहनेलगी कि मे आप् मे सें किसी कों बुलादूॅ। मैने सोचा कि इतनी सि बात पऱ भला आप् लोगों कों क्यूं कष्ट देना?अब जब मे स्वयं हि यहाॅ पऱ मौजूद हूॅ तोँ क्याँ थोड़ी देर इसकेसिर कि मालिश करके इसकेसिर कां भारीपन नहि दूरकर सकता?बस यहीसोच कर सेवा करनेलगा थां इस बेचारी कि मगरओह रे मेरी भाग्य! यह तौ इसहाल मे भि मेरा भेजा फ्राई करने पऱ तुल गई। अच्छा हुआ कि आप् दोनो यहाॅ आँ गईं, अब आप् हि इसे सम्हालिये। मे तोँ अब यहाॅ सें अबनौदो ग्यारह हि होँ जाऊॅगा। "
"अरेअब बस भि करराज। " सोनम दिदी हैरानी सें मेरीतरफ देखते हुएकह उठीं___"कितना बोलता हैं तूँ। हरसमय उसेबस तंग हि करने कां सूझता हैं तुम को। "
"लोकर लोबात। " मैने कहा___"ख़ैर क्याँ कहूॅअब? ठीक हैं जारहा हूॅ मे। अब आप् हि देखोइस बंदरिया कों। गुड बाॅय। "
इतना कहने केँ बाद हि मे पांव पटकते हुए कमरे सें बाहर् चला गय़ा। जबकि मुझेइस तरह जातेदेख सोनम दिदी व नैना फूफी खिलखिला करहॅस पड़ीं। नीलम केँ होठों पऱ भि फीकी सि मुस्कान थि। लेकिन उसके चेहरे केँ भावों सें ऐसा लगता थां जैसे किसी किसीसमय वोँ कहींखो सि जाती थि।
कमरे सें बाहर् जैसे हि मे आया तौ मेरे पैंट कि जेब मे पड़ाहुआ मेराफोन मोबाइल बजउठा। मे तेज़ तेज़ क़दमों केँ संग चलताहुआ नीचेआया औऱ फिन बाहर् कि तरफ निकल गय़ा। इसबीच मैनेफोन पर्र आँ रहीकाल कों रिसीव करफोन कों कान सें लगा लिया थां।
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उससमय रात केँ करीब बारहबज रहे थें। साराशहर सोया पड़ा थां। कहीदूर किसी घंटाघर मे लगेहुए घंटे नें बारह बजते हि ज़ोर कि आवाज़ दि। खाली पड़ी सड़कों पर्र अभि कुछ हि देर पहलेगहन सन्नाटा छायाहुआ थां लेकिन कुछ हि पलों केँ भीतरइस सन्नाटे कों भेदते हुएकई सारी गाड़ियाॅ मार्ग पर्र सरपट दौड़ती हुइ आईं औऱ फिन एकाएक हि उन सबकी रफ्तार आश्चर्यजनक रूप सें धीमी हौ गई। वोँ करीब-करीब चार गाड़ियाॅ थीं। जिनमें सें एक् टाटा सफारी थि बाॅकी कि तीनों बुलैरो थीं।
धीमी रफ्तार सें चलती हुईँ वोँ चारों हि गाड़ियाॅ एक् केँ बाद एक् आगे केँ मोड़ पऱ दाहिने साइड मुड़गईं। कुछ हि देर मे वोँ चारो एक् ऊॅचे घर-मकान केँ सामने आकर रुकीं। गाड़ियों केँ रुकते हि चारो गाड़ियों केँ दरवाजे एक् संगमगर आहिस्ता सें खुले। सब गाड़ियों केँ खुल चुके दरवाजों मे सें एक् केँ बाद एक् व्यक्ति बाहर् निकले। सब आदमियों केँ हाॅथ मे पिस्तौल स्पष्ट नज़र आँ रही थि। टाटा सफारी सें दो व्यक्ति बाहर् निकले थें। उनमें सें एक् व्यक्ति कि हाइट काठी सें प्रतीत होता थां कि वो कोई युवक हि थां लेकिन दूसरा व्यक्ति कुछ एज्ड नज़र आँ रहा थां।
तीनो बुलैरो गाड़ियों सें निकले हुए पिस्तौल धारी व्यक्ति पलक झपकते हि उस ऊॅचे घर-मकान केँ सामने कि दीवार तथा मुख्य दरवाजे केँ इतर बितर मुस्तैदी सें तैनात हौ गए। उनकी मुस्तैदी देखकर ऐसालग रहा थां जैसे वोँ किसी महत्वपूर्ण मिशन पर्र आएहुए हें। जबकि टाटा सफारी सें निकले हुए वोँ दोनो हि व्यक्ति आहिस्ता लेकिन बेआवाज़ चलतेहुए मुख्य दरवाज़े केँ क़रीब आँ कर खड़े होँ गए। दरवाजे केँ पास खड़े होँ कर वोँ दोनो हि बाएॅ साइड देखने लगे।
बाईंतरफ एक् व्यक्ति बड़ी दक्षता सें रस्सी कों ऊपर कि बालकनी कि रेलिंग मे फॅसाकर ऊपर कि तरफ चढ़ता चलाजा रहा थां। सबकुछ मानो पहले सें हि प्लानिंग कि गई थि कि यहाॅ पहुॅच करकौन कब क्याँ करेगा। ख़ैर, कुछ हि देर मे वोँ व्यक्ति रस्सी केँ द्वारा ऊपर बालकनी मे पहुॅच गय़ा। ऊपर बालकनी सें चलताहुआ वोँ दाईंतरफ कि खिड़की केँ पास पहुॅचा। खिड़की केँ पास पहुॅच कर उसने बड़े एहतियात सें खिड़की केँ पल्लों कों अंदर कि तरफपुश किया। लेकिन खिड़की केँ पल्ले टस सें मस न् हुए। यह देखकर उस व्यक्ति नें जल्दी हि अपने एक् हाॅथ कों अपने काले लबादे मे डाला औऱ कोई चीज़ बाहर् निकाली।
यकीनन वोँ चीज़ खिड़की केँ पल्लों पऱ लगे शीशों कों काटने वाला हीरा थां। उस व्यक्ति नें बड़े एहतियात सें तथा बड़ी सफाई सें उस हीरे केँ द्वारा पल्ले पऱ लगे शीशे कों काटा औऱ उसकाकटा हुआ टुकड़ा सावधानी सें निकाल कर बालकनी मे हि नीचे एक् तरफरख दिया। उसकेबाद उसनेकटे हुए पल्ले मे हाॅथडाल कर खिड़की केँ पल्लों कि कुण्डी कों खोल दिया। कुछ हि देर मे खिड़की केँ दोनो हि पल्ले पूरीतरह अंदर कि तरफ खुलते चलेगए। अंदर कि तरफयूॅ तौ अंधेरा हि थां लेकिन खिड़की केँ अंदर कि तरफ सें लगे पर्दों कों हटाकर उस व्यक्ति नें अंदर किसी भि तरह हि चीज़ कि आहट कों सुनने केँ लिए अपनेकान खड़ेकर दिये थें। कुछदेर तक वो ऐसी हि पोजीशन मे रहाफिन वो एकदम सें खिड़की पर्र चढ़कर अंदर कमरे कि तरफ अंदाज़े सें अपने पांव आहिस्ता आहिस्ता रखताचला गय़ा।
कमरे मे आते हि उसने सबसे पहले अपने लबादे सें कोई चीज़ निकाली। कुछ हि पलों मे पेंसिल टार्च कां मध्यम प्रकाश कमरे केँ फर्श पऱ उसकेपास हि उत्पन्न होताहुआ दिखा। उस व्यक्ति नें पेंसिल टार्च केँ फोकस कों धीरे-धीरे धीरे-धीरे आगे बढ़ाते हुएउस दिशा कि तरफ कियाजिस तरफ सें उसेकुछ देर पहले किसी चीज़ कि आवाज़ महसूस हुई थि। पेंसिल टार्च कां फोकस बढ़ता हुआ कमरे मे एक् तरफरखे शानदार बेड कि तरफ पहुॅचा। बेड मे दोनो किनारों पर्र दोदो पांव नज़रआए। व्यक्ति नें टार्च केँ फोकस कों थोडा ऊपर किया तौ पताचला कि बेड पर्र दो सुंदर लड़कियाॅ गहरी नींद मे सोई हुईँ हें।
दो लड़कियों कों गहरी नींद मे सोतेदेख वोँ व्यक्ति पहले तोँ अजीबतरह सें मुस्कुराया फिन एकाएक हि वो अपनी एड़ियों पऱ घूम गय़ा। घूमने केँ बाद वो बड़ी सावधानी सें कमरे केँ दरवाजे कि तरफ बढ़ता चला गय़ा। दरवाजे केँ पास पहुॅच कर उसने दरवाजे पर्र लगे हैण्डिल कों घुमाया जिससे दरवाजा खुल गय़ा। दरवाजे कों हल्का खोलकर उसने पहले बाहर् कि तरफ हल्का सां सिर निकाल करइधर उधर देखा, उसकेबाद वो दरवाजे कों खोलकर बड़े आहिस्ता कमरे सें बाहर् आँ गय़ा।
कमरे केँ बाहर् सफेद ट्यूब लाइट कां प्रकाश थां। हर चीज़ स्पष्ट देखीजा सकती थि। इस वक़्त समूचे घर-मकान मे गहन सन्नाटा छायाहुआ थां। वोँ व्यक्ति बड़ी सावधानी सें आगे बढ़ता हुआ सीढ़ियों केँ पास आँ कररुक गय़ा। सीढ़ियों केँ पास हि एक् मोटे सें खंभे कि आड़ मे छिपकर उसने पहलेइधर उधर देखा उसकेबाद नीचे चारोतरफ बारीकी सें देखने लगा। सभी कुछ बेहतर समझकर वो खंभे कि ओट सें निकलकर सीढ़ियों सें नीचे कि तरफ बेआवाज़ उतरता चला गय़ा।
सीढ़ियों सें नीचेआकर वो दाईतरफ बढ़ा। कुछ हि देर मे वो मुख्य दरवाजे केँ पास पहुॅच गय़ा। मुख्य दरवाजा अंदर कि तरफ सें बंद थां। उस व्यक्ति नें बड़ी सावधानी सें मुख्य दरवाजे केँ मोटे सें हैण्डिल कों घुमाकर दरवाजा खोल दिया। दरवाजा खुलते हि सामने वोँ दोनो हि व्यक्ति खड़े नज़रआए जोँ टाटा सफारी सें बाहर् निकले थें। इतने सें काम मे हि उस व्यक्ति कों करीब-करीब दस सें पंद्रह मिनट कां वक़्त लग गय़ा थां। लेकिन वोँ सभीइस बात सें बेफिक्र सें नज़रआए।
दरवाजा खुलते हि टाटा सफारी सें उतरेहुए वोँ दोनो व्यक्ति घर-मकान केँ अंदर कि तरफ दाखिल हौ गए। उनकेसंग हि कुछ औऱ लोग भि अंदर कि तरफ दाखिल हुए जबकि कुछलोग बाहर् हि मुस्तैदी सें खड़ेरहे। मुख्य दरवाजे सें अभि वोँ आठ याँ दसकदम हि आगे बढ़े होंगे कि तभी किसी चीज़ केँ गिरकर टूटने कि तेज़ आवाज़ हुईँ। इस आवाज़ नें उन सबकीरूह तक कों कॅपकॅपा कररख दिया। सारी सावधानी सारी सतर्कता धरी कि धरीरह गई थि। लेकिन अब क्याँ हौ सकता थां?
आवाज़ होने केँ बाद वोँ सभी बहुतदेर तक अपनी स्थान चुपचाप खड़ेरह गए थें। जबउस आवाज़ कि वजह सें कहीं सें कोई भि प्रतिक्रिया नं हुईँ तौ यहसभी अपनी अपनी स्थान सें हिले। लेकिन अभि चारकदम हि आगे बढ़े थें कि तभीउन सबके कानों मे किसी नारी कि आवाज़ पड़ी। जौ बाईंतरफ सें आती हुइ नज़र आँ रही थि। आतेहुए हि उसनेकहा थां कि "कौन हैं वहाॅ"?
चालीस केँ आसपास कि ऊम्र कि उस मध्यम कदकाठी व शक्लो सूरत कि स्त्री कों देखते हि सबको पहले तौ मानो साॅप सां सूॅघ गय़ा लेकिन फिन जैसे अचानक हि बिजली सि कौंधी। पास आँ चुकी महिला पऱ दो पिस्तौल धारीझपट पड़े थें। अचानक हुई इस क्रिया सें वोँ महिला बुरीतरह डरकर अभि भयानक आवाज़ मे चीखने हि वाली थि कि तभी एक् पिस्तौल वाले केँ एक् हाॅथ कि हॅथेली किसी कुकर केँ ढक्कन कि भाॅति उसकेमुह सें चिपक गई।
मुह पर्र हॅथेली रूपी ढक्कन चिपकते हि स्त्री गूॅ-गूॅ करतीरह गई। वो उन दोनो सें छूटने केँ लिए बुरीतरह छटपटाए जारही थि। तभी एक् तीसरा पिस्तौल वाला व्यक्ति उसकेपास सामने सें पहुॅचा औऱ बेहद धीमें लेकिन खतरनाॅक भाव सें बोला____"ज़्यादा छटपटा मत वरनादेख रही हैं न्, इस पिस्तौल कि सारी कि सारी गोलियाॅ तेरे भेजे मे उतार दूॅगा। पलक झपकते हि तेरीरूह ऊपर बैठे खुदा केँ दरबार मे हाज़िरी बजाती नज़र आएगी। "
उस व्यक्ति केँ द्वारा कहेगए इन खतरनाॅक वाक्यों कां जल्दी हि उस महिला पऱ असरहुआ। वोँ एकदम सें बुत सि बन गई। मगर मुसीबत अभि टली न् थि क्योंकि इधर जैसे हि महिला नें छटपटाना बंद किया वैसे हि उधरइस बार एक् मर्दाना आवाज़ उभरी। यह आवाज़ उसीतरफ सें आई थि जिसतरफ सें यह स्त्री आई थि। मर्दाना आवाज़ मे कहा गय़ा वाक्य यह थां कि____"कां हुआरे बिंदिया? ईबखत ससुरी नां स्वयं सोवत हैं तूँ अउर नां हमका सोनेदेत हैं। "
इस वाक्य केँ संग हि बाॅकी आदमियों कि सिट्टी पिट्टी गुम होती नज़रआई। मगर चूॅकि ओखली मे तोँ सिरपड़ हि चुका थां इसलिए अब मूसल सें क्याँ डरना वालीबात हौ गई थि? कहने कां मतलबयह कि जैसे हि वोँ व्यक्ति यहसभी कहतेहुए सामने आया वैसे हि उसकी नज़र बिंदिया कों पकड़े दो आदमियों पऱ पड़ी। वो एकदम सें हक्का बक्का रह गय़ा। इससे पहले कि वो अपने होशो हवाश मे आँ पातादो आदमियों नें जल्दी हि उसे दबोच लिया। उसकेबाद वैसा हि हाल उसका भि हुआ जैसे अभि कुछदेर पहले बिंदिया कां हुआ थां।
"ओहो तौ तुँ भि यहीं हैं हरिया। " टाटा सफारी सें आएहुए दो आदमियों मे सें एक् नें आगे बढ़ते हुए बड़े हि नाटकीय अंदाज़ मे कहा____"वाउ बहोत खूब। वैसे अच्छा सिला दियानमक हलाली कां। हमने तोँ समझा थां कि हमने अपनेसब फार्महाउस पऱ बड़े हि वफ़ादार कुत्तों कों रखाहुआ हैं मगर, हमें क्याँ पता थां कि हमारे रखेहुए कुत्ते एक् दिन हमें हि काटने पऱ उतारू होँ जाएॅगे। ख़ैर, कोई बात नहि। इसकी सज़ा तोँ तुम् सबको मिलेगी हि मगर उससे पहले बाॅकी लोगों कां भि तौ अच्छी तरह सें प्रबंध कर लियाजाए। "
वोँ व्यक्ति यकीनन अजय सिंह थां जबकि दूसरा वोँ युवक स्वयं उसका हि बेटा शिवा थां। हरिया नें अजय सिंह कि इसबात कां कोई जवाब नं दिया। बल्कि अजय सिंह कों इस वक़्त यहाॅ अपने दलबल केँ संगदेख कर उसकी सिट्टी पिट्टी गुम होँ गई। उसके चेहरे सें हि पताचल रहा थां कि वो बुरीतरह डर गय़ा थां।
इधरअजय सिंह अभि पुनःकुछ कहने हि वाला थां कि ऊपर सीढ़ियों सें नीचे उतरते हुए किसी केँ आने कि आहट हुइ। अजय सिंहतथा उसके आदमियों नें जल्दी हि इधरउधर होकर छिपने कां उपाय किया। सीढ़ियों सें नीचेआने वाली नैना थि। इस वक़्त उसके शरीर पर्र नाइटसूट थां। सीढ़ियों सें नीचेउतर कर वो अपनी हि धुन मे किचेन कि तरफ बढ़ती चली गई। अजय सिंह कों समझते देर न् लगी कि उसेइस समय केँ हालात केँ बारे मे कोई अंदेशा तक नहि हैं। अतःअजय सिंह नें जल्दी हि अपने एक् अन्य व्यक्ति कों इशारा किया।
अजय सिंह कां इशारा पाते हि वोँ व्यक्ति बड़ी सावधानी सें तथा बेआवाज़ किचेन कि तरफ बढ़ता चला गय़ा। कुछ हि देर मे जब वोँ वापसआया तौ वो अपनी दोनों बाहों केँ सहारे उठाएहुए नैना कों आता दिखाई दिया। नैनाकोई भि हरकत नहि कररही थि। मतलबसाफ थां कि उस व्यक्ति नें नैना कों बड़ी सफाई सें बेहोश कर दिया थां।
"ज़्यादा वक़्त नहि हैं हमारे पास। "उस व्यक्ति केँ आते हि अजय सिंह नें धीमे स्वर मे कहा___"इस लिए जैसाकहा गय़ा थां जल्दी हि वैसाकरो। उसकेबाद जल्द सें यहाॅ निकलना भि हैं। "
अजय सिंह कि इसबात कों सुनकर उसके अन्य व्यक्ति जल्दी हि हरकत मे आँ गए। कुछ लोग नीचे कि तरफ केँ रूम कि तलाशी लेनेलगे औऱ बाॅकी लोग सीढ़ियों केँ द्वारा ऊपर कि तरफचले गए। करीब-करीब दस मिनटबाद हि मंज़र यह थां कि ऊपर सें आने वाले आदमियों केँ कंधों पर्र एक् एक् इंसानी जीव बेहोश अवस्था मे लदाहुआ नज़र आँ रहा थां। नीचे केँ एक् कमरे सें एक् व्यक्ति शंकर केँ बेहोश शरीर कों कंधे पऱ लादे आँ रहा थां।
उन सबकेआते हि अजय सिंह बिंदिया व हरिया कों पकड़े आदमियों कों भि इशारा किया। इशारा मिलते हि उन आदमियों नें पलक झपकते हि खतरनाॅक हरकत कि। जिसका नतीजा यहहुआ कि कुछ हि पलों मे बिंदिया व हरिया दोनो हि बेहोश हौ चुके थें। सबको लेकर बाहर् कि तरफबढ़ चले वोँ लोग।
कुछ हि देर मे सब बेहोश हौ चुके लोगों कों बाहर् खड़ी गाड़ियों पऱ भूसे कि तरह ठूॅस दिया गय़ा। उसकेबाद सब व्यक्ति अपनी अपनी गाड़ियों पऱ बैठगए। टाटा सफारी केँ चलते हि बाॅकी तीनों गाड़ियाॅ भि उसके पीछेचल दि। गहरी नींद मे सोयेशहर वासियों कों इस सबका ज़रा भि इल्म नं हुआ कि रात केँ सन्नाटे मे यहाॅ क्याँ कुछ हौ चुका थां? जबकि अजय सिंह सबको लेकर अपने नियतजगह कि तरफऑधी तूफान कि तरह बढ़ाचला जारहा थां।
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सुभह हुईँ।
उधर मुम्बई मे,
उससमय सभीलोग सुभह कां नास्ता कररहे थें जब एकाएक हि पवन केँ फोन मोबाइल कि घंटीबजी थि। पवन अपने कमरे सें सजधजकर होकर हि नास्ता करनेआया थां। नास्ता करने केँ बादउसे कंपनी चले जानां थां। डायनिंग हाल मे कुर्सी पऱ बैठेपवन कां फोन उसकी पैन्ट कि जेब मे बजरहा थां। चारोतरफ कुर्सियों पऱ बैठे बाॅकी सबका ध्यान भि उसकेफोन कि रिंगटोन पऱ गय़ा। सबका ध्यान एक् संग जाने कि विशेष बातयह थि कि पवन केँ फोन कि रिंगटोन पर्र "यह दोस्ती हम् नहि तोड़ेंगे, तोड़ेंगे दममगर तेरासंग नाँ छोंड़ेंगे" बजरही थि।
पवन पहले तौ हड़बड़ाया फिन सबकीतरफ देखते हुए वो कुर्सी सें उठा औऱ अपनी बाईंजेब सें फोन निकाला। फोन कि स्क्रीन पऱ "राज" लिखा नज़र आँ रहा थां। यानी कि उसकेफोन पऱ विराज कि काल आँ रही थि। यहदेख करपवन केँ चेहरे पर्र सहसा खुशी कि चमकउभर आई। उसने मुस्कुराते हुए जल्दी हि काल कों रिसीव किया औऱ फिन जाने क्याँ सोचकर उसनेफोन कां स्पीकर ऑन करके बोला___"आख़िर तुम्हारी तरफ इतने दिनों बाद हि सहीमगर मेरीयाद आँ हि गई नं राज। "
"हमें तोँ तुम् सबकी हि बहोत ज़ोरों सें यादआती हैं बर्खुरदार। " फोन पर्र उधर सें अजय सिंह कि इस आवाज़ कों पहचानने मे किसी कों ज़रा सि भि देर नं हुई। सबकेसभी इस आवाज़ कों सुनकर एकदम हक्के बक्के सें रहगए। जबकि उधर सें स्पीकर पर्र पुनःअजय सिंह कि इसबार ज़रा कठोर आवाज़ उभरी____"मे अच्छी तरह जानता हूॅ कि इस टाइमइस नंबर सें मेरी आवाज़ सुनकर तुम् सबके पैरों तले सें ज़मीन गायब हौ गई होगी। हर किसी कों साॅप सां सूॅघ गय़ा होगा। ख़ैर मुझे लगता हैं कि तुम् मे सें किसी कों भि मुझेयह बताने कि याँ फिन समझाने कि ज़रूरत नहि हैं कि इससमय तुम् लोगों कां वोँ मसीहा विराज तथा उसकेसंग संग औऱ भि बाॅकी लोग मेरे रहमोकरम पर्र हें। इसलिए बेहतर होगा कि बग़ैर मेरी किसी चेतावनी केँ तुम् सभी वहाॅ सें जल्दी मेरेपास याँ यूॅ बोलो कि मेरे सामने आकर घुटनों केँ बल मेरे पैरों पऱ झुकजाओ। "
स्पीकर सें उभररहे अजय सिंह केँ यह वाक्य डायनिंग टेबल पर्र मौजूद करीबसब केँ मनो मस्तिष्क मे ऐसा धमाका कररहे थें जिसकी भीषण गूॅज सें सब केँ कानों केँ पर्दे तक झनझना रहे थें। औऱ फिनऐसा लगा जैसे एक् हि लम्हा मे सभीकुछ समाप्त हौ गय़ा होँ। चारोतरफ कुर्सियों पर्र बैठे सबकेसभी मानो किसीऋषि केँ द्वारा दिएगए भयंकर श्राप कि वजह सें अचानक हि पत्थर कि शिला मे तब्दील होतेचले गएहों। एक् हि समय मे टाइम मानोठहर सां गय़ा थां। जौ जिस हालत मे बैठा थां वोँ वैसी हि हालत मे स्टेच्यू मे तब्दील हौ गय़ा थां।
सबकी चेतना तब जागृत हुई जब पुनः स्पीकर सें अजय सिंह कि आवाज़ केँ संगसंग ज़ोरों कां अट्ठहास गूॅजा थां___"देखा, मैनेकहा थां न् कि तुम् सबको साॅप सां सूॅघ जाएगा। मगर साॅप सूॅघ जाने सें कुछ नहि होगा मेरे प्यारो बल्कि जौ कुछ भि होगा मेरेपास आने केँ बाद हि होगा। इस लिए जल्दी वहाॅ सें चलेआओ। वरना तुम् लोगसोच भि नहि सकते कि यहाॅ पर्र मे तुम्हारे उस मसीहा केँ संगसंग बाॅकी सबका भि क्याँ हस्रकर सकताहूॅ?"
अभि स्पीकर पऱ अजय सिंह कां यह वाक्य पूरा हि हुआ थां कि सहसा डायनिंग हाल मे एक् भयंकर चीख़ गूॅजउठी, संग हि फर्श पऱ किसी चीज़ केँ गिरने कि ज़ोरदार आवाज़ हुई। इस चीख़व आवाज़ कों सुनकर सबकेसभी बुरीतरह उछल पड़े। जैसे हि सबने चीख़ कि दिशा मे देखा तौ सबकेहोश उड़गए। दरअसल यहचीख गौरी केँ हलक सें खारिज़ हुईँ थि। वोँ अपने हाॅथ मे बर्तन पर्र कुछलिए हुए किचेन सें आँ रही थि औऱ डायनिंग हाल मे आते हि उसने स्पीकर पर्र उभररही अजय सिंह कि उस आवाज़ केँ संगसंग उसके संपूर्ण वाक्य कों सुन लिया थां। उसकेबाद हि उसकेहलक सें यह भयंकर चीख़ निकली थि।
पवन केँ हाॅथ सें फोन छूटते छूटते बचा। उधर गौरी कि चीख़सुन किचेन सें रुक्मिणी व करुणा भि भागती हुई डायनिंग हाल कि तरफ आँ गई थीं। गौरी कों डायनिंग हाल केँ फर्श पर्र अजीब हालत मे लुढ़की पड़ीदेख कर भौचक्की सि रह गई वोँ दोनो। इधर डायनिंग टेबर केँ चारोतरफ रखी कुर्सियों पऱ बैठे बाॅकी सभीलोग भि अपनी अपनी जगहों सें उठकर गौरी कि तरफ दौड़ पड़े थें। देखते हि देखते डायनिंग हाल मे रोना धोना शुरुआत हौ गय़ा। यहाॅ कां रोना धोना चालूफोन केँ द्वारा अजय सिंह भि सुनरहा थां औऱ ज़ोरों सें हॅसेजा रहा थां।
"हाहाहाहाहा यही। "उधर सें अजय सिंह कि आवाज़ पुनः उभरी____"अब यहीहाल होगा तुम् सबका। मगर जैसा कि मे पहले हि कह चुकाहूॅ इस सबसेकुछ नहि होगा बल्कि यहाॅआने पऱ हि होगा। इस लिएअब मे आख़िरी बारकह रहाहूॅ कि तुम् सभी वहाॅ सें जल्दी हि मेरे सामने हाज़िर होँ जाओ। कल दोपहर तक तुम् सभी मेरी ऑखों केँ सामने होने चाहिए। दोपहर तक अगर तुम् सभी नहि आए तोँ समझ लेना कि इसका परिणाम कितना घातक हौ सकता हैं। "
इन वाक्यों केँ संग हि अजय सिंह कहकहे लगाकर हॅसा औऱ फिनकाल कट हौ गई। लेकिन उसकेइन वाक्यों कों सुनने कि हालत मे यहाॅ थां हि कौन? यहाॅ तौ बस रोना धोनातथा चीख़ पुकार हि मचाहुआ थां। बड़ी मुश्किल सें एक् दूसरे कों सम्हाला सबने।
उधर होश मे आते हि गौरी दहाड़ें मारमार रोनेलगी औऱ चीख़ चीख़ कहने लगी____"मैने कहा थां न् कि हत्यारे नें मेरे बेटे कों मार दिया हैं। हे ईश्वर! अबअगर मेरा बेटा हि नहि तोँ मे भलाजी कर क्याँ करूॅगी? मुझे भि मौतदे दे ईश्वर। मे अपने बेटे केँ बग़ैर एक् समय भि जीवित नहि रहना चाहती। "
"शान्त हौ जाइये भाभी। "अभय सिंह सिसकते हुएबोल उठा___"हमारे राज कों कुछ नहि होगा। वोँ मादरजाद तोँ बस गीदड़ भभकियाॅ हि देरहा थां। जबकि मे जानता हूॅ कि वोँ मेरे भतीजे कां बाल भि बाॅका नहि कर सकता। मेरा भतीजा शेर हैं शेर.यह सालेसभी गीदड़ हें भाभी। ईश्वर केँ लिए भरोसा कीजिए औऱ शान्त होँ जाइये। सभीकुछ ठीक हौ जाएगा। "
"कुछ भि ठीक नहि होगाअभय। " गौरी बुरीतरह बिलखते हुए बोलीं___"वोँ हत्यारा मेरे बेटे कों गोलियों सें छलनी छलनीकर देगा। वोँ मेरे बेटे केँ खून प्यासा हैं। मुझे मेरे बेटे केँ पास पहुॅचा दोअभय मे तुम्हारे पाॅव पड़ती हूॅ। "
गौरी पागल सि हौ गई थि। सचमुच हि वोँ अभय केँ पैरों पऱ गिर पड़ी। अभय कां कलेजा यहदेख कर हाहाकार करउठा। बुरीतरह उतावलापन उठा वो। तेज़ी सें वो पीछे कि तरफहटा औऱ फिन जल्दी हि गौरी कों दोनो कंधों सें पकड़कर ऊपर किया।
"क्यूं मुझेपाप केँ सागर मे डुबारही हें भाभी?"अभय सिंहरो पड़ा____"आप् जानती हें कि मैंने हमेशा आपको अपनीमाॅ कि तरह समझा हैं। मेरे पैरों मे गिरकर मुझेऐसे गर्त मे मत डुबाइये कि जहाॅ सें मे फिनकभी निकल हि न् पाऊॅ। "
"मुझे मेरे बेटे केँ पास पहुॅचा दोकोई। " गौरी पागलों कि तरह सबकीतरफ याचना भरी दृष्टि सें देखते हुए बोलेजा रही थि___"मेरा बेटा बहोत कष्ट मे हैं। वोँ सभी मिलके उसेमार देंगे। मुझे अभि केँ अभि मेरे बेटे केँ पास जानां हैं औऱ अगर तुम् लोग मुझे नहि पहुॅचाओगे तौ मे स्वयं हि चली जाऊॅगी। मुझे यहाॅअब नहि रहना। मेरे बेटे कों मार देंगे वोँ लोग। "
इतनासभी कहने केँ संग हि गौरी कों चक्कर आँ गय़ा औऱ वो रुक्मिणी कि गोंद मे हि शिथिल पड़ गई। उसकी हालतदेख करहरकोई रोरहा थां। निधी कि हालत बेहद ख़राब थि। वोँ अपनीमाॅ कों अपने बेटे केँ लिएइस तरह तड़पते देख स्वयं भि तड़पी जारही थि। हालत तौ सबकी हि ख़राब थि।
"ऐसेकब तक यहाॅ इन्हें रोता तड़पता हुआ देखते रहेंगे अभय चाचू?" सहसापवन ऊॅचे स्वर मे मानोचीख सां पड़ा___"मेरा मित्र वहाॅ भयंकर संकट मे हैं। मे स्वयं भि अब यहाॅ एक् लम्हा केँ लिए भि रुकना नहि चाहता। उस कसाई कां कोई भरोसा नहि हैं। वोँ कुछ भि कर सकता हैं। "
"सही कहते हौ तुम्। " अभय सिंह नें सहसा अपने ऑसुओं कों पोंछते हुए बोला____"जल्दी यहाॅ सें चलने कि तैयारी करोपवन। गौरी भाभी कों अगरराज केँ पास नं लेँ जाया गय़ा तौ यह यहीं पऱ अपनासिर पटककर मर जाएॅगी। वैसे भि जिसतरह सें उसने चेतावनी देकर हम् सबको वहाॅ बुलाया हैं तोँ हम् सबको जल्दी जानां हि पड़ेगा। इसके सिवा दूसरा कोई चारा नहि हैं। मौजूदा हालात मे वोँ कुछ भि कर सकता हैं। इंसान सें राक्षस बन गय़ा हैं वोँ। मगर भवानी माॅ कि शपथअगर उसने मेरे भतीजे कों ज़रा सि भि चोंट पहुॅचाई तौ सारी दुनियाॅ कों आगलगा दूॅगा मे। "
"ठीक हैं चाचू। "पवन नें कहा___"आप् इन्हें देखिये। मे तब तक सबकी टिकटों कां इंतजाम करताहूॅ। वैसे मुमकिन तौ नहि मगर देखता हूॅ शायद सबकेलिए टिकटें मिल हि जाएॅ। "
"आप् एक् बार जगदीश भइया साहब कों भि मोबाइल पऱ इस बारे मे सभीकुछ बता दीजिए। " पवन केँ जाते हि करुणा नें अभय सिंह कि तरफ देखते हुए दुखीभाव सें कहा___"आख़िर इस बारे मे जानकारी तोँ उन्हें भि होनी हि चाहिए कि हम् अचानक यहाॅ सें किसवजह सें जारहे हें?"
"सहीकहा तुमने। " अभय सिंह नें कहने केँ संग पैन्ट कि जेब सें अपनाफोन निकाला, फिन बोला___"भइया साहब कों बताना बेहद ज़रूरी हैं। वैसे भि वोँ हमें अपनेसगे जैसा हि मानते हें। उन्हें इस बारे मे बताना हि चाहिए। रुको मे अभि बात करताहूॅ उनसे। "
कहने केँ संग हि अभय नें जगदीश ओबराय कों मोबाइल लगाया। कुछदेर तक टुकटुक कि आवाज़ आतीरही, उसकेबाद सहसाफोन सें आवाज़ उभरी___"आप् जिस उपभोक्ता सें बात करना चाहते हें वोँ इस वक़्त उपलब्ध नहि हैं अथवा नेटवर्क क्षेत्र सें बाहर् हें। "
यहसुन करअभय सिंह परेशान सां हौ गय़ा। उसने पुनः नंबर रिडायल कर मोबाइल लगाया। लेकिन फिन सें वही जवाब मिला। अभय नें कईबार मोबाइल मिलाया मगरहर बारयही बताया गय़ा कि वोँ इस टाइम उपलब्ध नहि हैं अथवा नेटवर्क क्षेत्र सें बाहर् हें। अभय कों चिंतित व परेशान देखकर करुणा नें उससे पूछा कि क्याँ हुआ? उसके प्रश्न पर्र अभय सिंह नें उसेसभी कुछबता दिया। जिसेसुन कर वोँ भि चिंता मे पड़ गई।
ख़ैर, जितना जल्द हौ सकता थां उतना जल्द किया गय़ा। यानी जल्दी हि सबको सजधजकर कर चलने केँ लिएकहा गय़ा। लेकिन यहाॅ किसी कों भला क्याँ सजधजकर होना थां? जौ जिन कपड़ों मे थां वोँ वैसे हि चलने कों रेडी होँ गय़ा थां। करीब-करीब एक् घंटेबाद पवन सिंह बॅगले पऱ आया। उसने बताया कि रिज़र्व मे केवल पाॅच हि टिकटों कां इंतजाम हौ सका हैं। बाॅकी कि सभी वेटिंग याँ आरएसी कि टिकटें मिली हें। पवन कि बातसुन करअभय नें कहाकोई बात नहि। जानां तौ अनिवार्य हि हैं फिन चाहेभले हि जनरल मे हि क्यूं नं जानां पड़े। पवन नें बताया कि ट्रेन साम कि हैं। उससे पहले एक् औऱ थि जोँ कि सुभहनौ बजे कि थि मगर वोँ जा चुकी हैं।
पवन कि इसबात नें सबको उदासव मायूस सां कर दिया। सबकेसभी अतिसीघ्र यहाॅ सें जानां चाहते थें। मगर जाने कां साधन तोँ अबसाम कों हि मिलने वाला थां। अतःसाम कां इन्तज़ार करना हि सबकी नियति थि। कहते हें कि जब हम् बड़ी शिद्दत सें चाहते हें कि समय गुज़र जाएतब ऐसा कदापि नहि होता। बल्कि एक् एक् समय मानो शदियों मे तब्दील हौ जाता हैं। कुछऐसा हि आलम थां यहाॅ पऱ।
सारादिन सबकेबीच ऐसाआलम रहा जैसेकोई हमारे बीच कां दुनियाॅ सें हि जा चुका होँ। डायनिंग टेबल पर्र नास्ते केँ लिए परोसी गई थालीव प्लेट सभी वैसी कि वैसी हि रखीरह गई थि। किसी नें उसतरफ देखा तक न् थां औऱ नां हि कोई अपने कमरे कि तरफ गय़ा थां। बॅगले केँ नौकर चाकर तक संजीदा थें इस सबसे। अभय सिंह सुभह सें अब तक हज़ारों बार जगदीश ओबराय कों मोबाइल लगा चुका थां लेकिन उसका नंबर अभि भि नेटवर्क क्षेत्र केँ बाहर् हि बतारहा थां।
बड़ी मुश्किल सें हि सही लेकिन टाइम अतिमंद्र गति सें गुज़र हि गय़ा। ट्रेन केँ निर्धारित वक़्त सें आधा घंटा पहले हि सबकेसभी रेलवे स्टेशन केँ प्लेटफार्म पर्र पहुचगए। रुक्मिणी व करुणा गौरी केँ संग हि थि। हरकोई दुःखी व दुखी थां। आधे घंटेबाद जब ट्रेन आई तोँ सभी ट्रेन कि तरफ करीब-करीब भागते हुए बढ़े। ट्रेन मे चढ़कर हरकोई सीट पर्र बैठ चुका थां। रिज़र्व सीटों पर्र औरतों औऱ लड़कियों कों बैठा दिया गय़ा थां। हलाॅकि रिज़र्व मे पाच हि सीटें मिली थि। जिनमें गौरी रुक्मिणी करुणा निधीव दिव्या कों बैठा दिया गय़ा थां। शगुन दिव्या केँ संग हि बैठाहुआ थां। जबकि पवनअभय वआशा ट्रेन केँ फर्श पऱ हि खड़े थें।
गौरी कों रुक्मिणी व करुणा नें बड़ी मुश्किल सें सम्हाला हुआ थां। सारादिन रोतीरही थि वोँ जिसकी वजह सें उसकी ऑखेंलाल सुर्ख पड़ चुकीथीं। चेहरे पर्र ऐसी वीरानी थि जैसेइस चेहरे नें कभी किसीतरह कि खुशियो सें भरी बहार कों देखा हि न् हौ। कुछ हि वक्तबाद ट्रेन अपने गंतब्य जगह केँ लिएचल पड़ी। ट्रेन केँ चल पड़ने सें सबकेमन मे थोड़ी राहत केँ भावउभर आए थें। आने वाले वक़्त मे किसके संग क्याँ क्याँ होने वाला थां इसकी कल्पना सें हि सबकी रूहें काॅप जाती थि।
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दोस्तो, भाग हाज़िर हैं। आशा हैं आप् सब कों पसन्द आएगा।
आप् सबकी प्रतिक्रिया कां बेसब्री सें इन्तज़ार रहेगा।
बहोत बहोत धन्यवाद भइया आपकीइस हसीन प्रतिक्रिया केँ लिए,,,,,,,,,, एपसोड दे दिया हैं भइया,,,,,,
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
bhut hi emotional update thaa bhay। bhay ya too yaha पर viraj की कोई chl he और एक twist humara intejar krr raha he ya phir yeh kahani बड़ा hi natkiye mod le rahi he kyuki aisi sthiti mai कोई bina kisi pehre dari के ya suraksha के kese so sakta he। or sab ko too chodo Aditya jaisa fighter bi ayese laparwah kese hu sakta he woh bi तब जब कुछ gir krr tutane की awaj bi hoyi thi और phir bindiya और hariya की awaj bi gunji thi। Ya too yeh ajay के liye trap he ya phir viraj and company over confidence mai mari gai he.
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♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
Aarrreeeeyyyy Betichod
AJAY की gaand me samuhik l*nd iska alag से gangr**e karo iski gaand के chithde udne चाहिए har जगह madarjaat
Sorry bhay galiyon के liye lekin still AJAY की gaand phado
Saale JAGDISH के character से negative thoughts hi aa rhe they last के update से lekin socha na thaa की ye bi hoga hu na hu AJAY ko VIRAJ की location issi gandu JAGDISH ne di hongi saala बहुत gandugiri hu gyi re baba बहुत gandugiri
VIRAJ ko sham के waqt एक call bi आया thaa sayad usne कुछ सोच लिया hu aane vale waqt के liye still i hope की AJAY की ache से phate
KEEP WRITING
KEEP UPDATING
sorry for abusing words lekin i know only that way too show my feelings
YOUR REGULAR READER
.MATHUR
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) - Next part miss mat karna
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