मक्के केँ खेत मे - Complete Kahani Part 1
chapter 1
सुभह कां वक़्त थां 45 साल कां एक् अंकलमगर देखने मे पुरा हट्टा कट्ठा स्लिम व्यक्ति कंधे पे कुदाल रखे धोती कुर्ता पहनेघऱ केँ बाहर् खराखरा थां खेत मे काम करते करते अच्छी बॉडी स्वयं बन गई थि
रामपाल दिल कां बहुत अच्छा हैं बहुत मेहनती भि रामपाल घऱ सें जयदा अपने खेतो मे रहना पसन्द करता हैं जैसे उसके लियेसभी कुछ उसकाखेत हि हौ औऱ यहसच भि हैं एक् किसान केँ किये उसकाखेत हि सभीकुछ होता हैं
रामपाल कि पत्नि बीमारी सें 15 साल पहले हि चलबसी तब सें औऱ भि जयदा रामपाल खेतो मे रहनेलगा रामपाल कों खेतो मे काम करते रहना याँ वक्त बिताना जयदा मनपसंद हैं कहे तौ रामपाल कों खेतो मे चैन सांति मिलती हैं
रामपाल घऱ केँ दरवाजे कि तरफ देखते हुवेतेज आवाज़ मे - बहु मे खेत मे जारहा हुबता नहींकोन कमीने हैं जोँ मेरे मक्के तोर लें जाते हैं मुझेतब तक मक्के पूरीतरह तोरने लायक नहीं होँ जाते मुझेदिन रात रखवाली करनी परेगी
अंदर सें एक् बहुत हि सुंदर कयामत स्त्री सर पे घुघट डाले बाहर् आती हैं औऱ रामपाल केँ सामने खरी हौ जाती हैं
यह हैं रामपाल कि बहुनाम हैं माधुरी 20 कि हैं नाम केँ जैसे हि माधुरी हसीन उसके खूबसूरती कों देखकोई भि घायल हौ जाये देखता रह जायेउपर सें नीचे तक भरी हुइ हैं चुचे गांडकमर सफ़ेद जिस्म सभी पर्फेट कोईकमी नहीं हैं 18 केँ होते हि विवाह कर दि गई माधुरी कां पति मनोज हैं
रामपाल कि एक् बेटी हैं जिसका नाम हैं संगीता विवाह सुधा हैं
रामपाल मनोज माधुरी छोटा परिवार हैं संगीता तौ अपने ससुराल रहती हैं बीच मे आती रहती हैं
माधुरी रामपाल कों घुघट केँ अंदर सें देखते हुवे - पिताजी जी होगेगाव केँ लरके जोँ मक्के तोर केँ पका केँ खाने केँ लिये लेँ जाते होगे
रामपाल माधुरी कों देखते हुवे - जनताहु बहुमगर उन कमीनो कों मेरे हि मक्के दिखते हैं उपर सें जंगली सुगर तोतेअलग मक्के कों बर्बाद करने मे लगे हैं
माधुरी हस्ते हुवे - समझ गई पिताजी जी वैसे भि आपको तोँ जयदाखेत मे रहना हि मनपसंद हैं जाइये मे 1 बजेखेत मे खानां लेके आँ जाउंगी
रामपाल माधुरी कों देखते हुवे - जाने सें पहलेपता हैं नाँ बहु
माधुरी चारों तरफदेख मुस्कुराते हुवे घुघटहटा केँ रामपाल कों देख हस्ते हुवे - अच्छे सें पता हैं आप् मेरा चेहरा देखे बिनाघऱ सें बाहर् कही नहीं जाते
रामपाल अपनीबहु माधुरी केँ फेस चेहरे कों देखता गोरा चिठ्ठा फेस होठो पे मुस्कान आखे मे कतीलाना अंदाज़ गुलाबी होठउफ मानो होठो सें रसटपक रहा होँ माधुरी जिस मुस्कुराहट कातिल अंदाज़ मे मुस्कुराते हुवे रामपाल कों देखरही थि रामपाल कहीखो जाता हैं
माधुरी मुस्कुराते हुवे - कहाखो गये बापूजी
रामपाल मुस्कुराते हुवे - ठीक हैं बहुबस यही बोलना थां अच्छा चलताहु
रामपाल जाने लगता हैं माधुरी रामपाल कों बातें देखते हुवेमन मे - पिताजी जी कितने अच्छे हैं आपके जैसे ससुरजी मिलना क़िस्मत कि बात हैं सासुजी केँ जाने केँ बाद सें केसेजी रहे हैं आप् मे फिलकर पातीहु
बतादु रामपाल माधुरी कों अपनी बेटी मानता हैं बहुत प्रेम करता हैं माधुरी रामपाल ससुरजी बहु केँ बीच जोँ रिस्ता हैं दोस्ताना टाइप कां हैं गाव केँ जयदातर घऱ कि बहु ससुरजी सें बाततभी करती हैं जब जरूरी हौ याँ ससुरजी भि तभी अपनीबहु सें बातें करता हैं जब जरूरी हौ
मगर माधुरी रामपाल दोनों बहु ससुरजी बहुत बातें करते हैं मस्ती करते हैं सुरु मे माधुरी जबआई तोँ माधुरी रामपाल केँ बीचकम बातें होतीमगर धीरे-धीरे धीरे-धीरे दोनों ससुरजी बहुखुल केँ बातें करनेलगे मस्ती भि
माधुरी सुरु सें हि चंचल मस्ती करने वाली लरकीरही हैं जब रामपाल नें माधुरी कि चंचलरूप कों देखा तौ रामपाल कों अच्छा लगा रामपाल स्वयं चाहता थां माधुरी खुल केँ जिये बातें करे नां कि घऱ मे बंदरेह कररह जाये
रामपाल अपनी पत्नि कों धोके दर्दयाद मे जीते आँ रहा थां मगर माधुरी केँ आने केँ बाद रामपाल कि लाइफ मे बदलाव खुसिया आँ गई
जहा रामपाल पहले अकेला अकेला फिल करता थां अब रामपाल केँ पासबहु थि माधुरी जिसके बातें कर रामपाल कों भि बहुत अच्छा फिल होता
घऱ मे अकेली माधुरी कों भि रामपाल केँ संग मस्ती बातें करने मे अच्छा लगनेलगा माधुरी बहुत भाग्य वाली स्वयं कों मानती थि जहानई नवेली दुल्हन कों बाहर् निकलना मना थां याँ निकलने नहीं दिया जाता थां वही रामपाल नें माधुरी कों पुराछुट दे दिया औऱ इसी लिये माधुरी रामपाल कि इज़त करती हैं अपने आप् कों भाग्य वाली समझती हैं
माधुरी कों छुट मिली थि मगर उसके बावजूद माधुरी मात्र रामपाल कों खानां खेत मे देने जाती जितना दिलकरे बातें करती औऱ सीधा घुघट डाले किसी सें बात किये बिनाघऱ लौटआती
रामपाल भि माधुरी कों बहु बेटी केँ रूप पे पाके क़िस्मत वाला मानता हैं दोनों ससुरजी बहु मे स्वयं जमती हैं
मनोज पैसे कमाने केँ लिये सेहर मे रहता हैं अच्छी नौकरी हैं 6 महीने मे घऱआता रहता हैं
रामपाल कुदाल लिये अपनेखेत चलते हुवेआता हैं जोँ घऱ सें 15 मिनट कि दूरी पे थां रामपाल एक् नजर देखो पे मारता हैं फिनजोर चिल्लाता हैं तौ खेत मे सें कई तोते उड़ते हुवे दिखाई देते हैं
रामपाल अपने मचान केँ पास जाता हैं
खेत केँ बीच एक् उठा मचान रामपाल नें बना केँ रखा थां ऊपरछत भि थि कियुंकी रामपाल कां यही ठिकाना थां जायदा तर रामपाल इसी मचान पे अपना वक़्त गुजारता हैं
खेत मे फसल हौ याँ नां हौ
रामपाल कंधे सें गमछा लेकेसर पे अच्छे सें बाँध लेता हैं फिनखेत केँ डनेर कों देखते जाता हैं जहा डनेर टूटी होती रामपाल कुदाल सें मिट्टी कटसही कर देता पूरीखेत घूमने डनेरसही करने केँ बाद रामपाल मचान केँ पासआता हैं नीचे एक् बरे बब्बे मे पानी थां पहलेमुह हाथ धोता हैं फिन मचान केँ ऊपरबैठ पुरेखेत कों उपर सें नीचे तक देखने लगता हैं
कुछदेर बादलेत केँ आराम करके लगता हैं औऱ रामपाल अपनेमन मे - 2 साल होँ गये विवाह केँ अभि तक तोँ नन्हा मेहमान आँ जानां चाहिये थां सुनेघऱ मे बच्चे कि किलकारी गुज जानी चाहिये थि चलोदेर सवेर हि अभि तक मुझे खुशखबरी मिल जानी चाहिये थि वोँ भि नहीं मिला बेटा बहु अभि बच्चे जानबूझ केँ नहींकर रहे याँ कुछ औऱ वजह हैं हु हौ सकता हैं देर स्वेर् कियुंकी कभीकभी बच्चे होने मे कुछसाल निकल जाते हैं
रामपाल चाहता थां घऱ मे किलकारी गुजे सुनाघऱ बच्चे केँ चहलपहल सें भर जाये रामपाल दादाजी बनाना चाहता थां अपने पोते कों गोद मे खिलाना चाहता थां
रामपाल अपनेबगल देख पलंग पे हाथरख - मेरा पोता पोती जब होगे वोँ बरे होगे तौ मेरेसंग आयेगे हम् दादाजी पोता पोती इस मचान पे खुब मस्ती करेगे मगरपता नहींयह सपनाकब सच होगा
वहीघऱ पे कमरे मे लेती माधुरी दुखीमन सें - कियु मे मा नहींबन पारही कियु 2 साल विवाह केँ हौ गये अभि तक तौ मुझे पेग्नेंट हौ जानां चाहिये थां मुझेफिल होता हैं पिताजी जी कों देख वोँ चाहते हैं जल्द सें घऱ मे बेबीआये मे भि चाहती हु बापूजी कों एक् प्यारी पोती याँ पोता दु ताकि बापूजी अपने पोते पोती केँ संगखेल सके मे भि मा बनने कां सुख पाना चाहती हु
माधुरी सोचते सोचते सो जाती हैं
माधुरी पीठ केँ बलजिस तरह लेतीसो रही थि उफ बहुतगजब कयामत लगरही थि दोनों चुचे केँ उभार ब्लाउस मे साफदिख रहे थें चिकनी कमरपेट गहरी ढोरी जिसेदेख किसी कां भि मन करेगा माधुरी केँ गहरी ढोरी मे उंगली करने चूमने चाटने कां
ससुरजी बहु एक् जैसासोच रहे थें साफ थां दोनों एक् दूसरे कों अच्छे सें समझते थें
दोपहर 1 बजे
माधुरी सोकेउठ कर तैयार होके खानां लेके घुघट् डालके सीधाखेत कि तरफ निकल परती हैं
सुरु मे सभी बहुत बातें करते माधुरी रामपाल कों लेकेमगर रामपाल माधुरी कों कोईफरक नहींपरा अबकोई कुछ नहीं बोलता
रामपाल भि एक् नींद लेकेमुह हाथ धोके बैठा रास्ते कि तरफ देखते हुवे - बहु खानां लेकेआते हि होगी
तभी रामपाल कों दूर माधुरी खानां लेकेआते दिखाई दे जाती हैं
कृपया धयानदे
दोस्तो मेनेतीन किस्सा सुरुकर दि आप् लोगसोच रहे होगे मे पागल तौ नहीं होँ गय़ा पर्र ऐसा नहीं हैं मे पहले फ्री थां अब नहींहु
तीन कहानी मेनेइस किये सुरु कि ताकिदेख सकुकोन सि कहानी लोगो कों जयदा मनपसंद आती हैं कोन सि कहानी जयदालोग पढ़ते हैं प्रेम देते हैं मे उसी किस्सा कों आगे लेके जाउंगा एंड तक मे मे ऐसे हि किसी कहानी कों लेके नहीं जाने वाला जिसपे जयदा प्रेम नां मिले लोगो कों मनपसंद नाँ आये किस्सा कि कमी थोरि हि हैं मेरेपास
तौ समझगये होगे तीनो कहानी इस लिये सुरु कि अब देखुंगा तीनो मे जिस कहानी कों जयदालोग मनपसंद करेगे प्रेम मिलेगा उसी पे update आयेगा वही स्टोरी आगे बढ़ेगी
इस पे दोनों किस्सा सें जयदा प्रेम मिला तौ इसी कों लेके जाउंगा upgate छोटा हैं जोकी मेने जानबूझ कररखा नहीं तोँ मेरा update बरा रहता हैं यह टेस्ट मे हैं इस लिये मिलते हैं
तीनो हि बहोत अच्छे स्टोरीज हैं. मुझे लगता हैं तीनो स्टोरीज कों बहोत अच्छा प्रेम मिलेगा. लिखते रहो. ajay bhay
मक्के केँ खेत मे – New Episode
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You are one of the best writers of XFORUM। And your kahani iss also going very well। So we have got you an opportunity too win Prizes Worth upto 15000 Rupees। We are here request you too write a short kahani for USC।
I hope aapki prayaas और imagination iss contest में Char Chand laga degi और XFORUM के deewano की list दिन doguni और rath chauguni badhati rahegi, और हम XF ko एक next level tak लेकर jaayenge। Isiliye iss baar bi winners ke liye Exciting Prizes haen so make sure you write a masterpiece।
jaesa की ap sabhi Jante haen iss baar Hum USC contest chala rahe haen और Kuch Din pehle hi Humne Rules & Queries Thread kaa announce krr दिया thaa और अब Ultimate kahani Contest kaa Entry Thread air krr दिया h joo 2nd April ko open hoga और 25th April 2026, 11.59 PM ko बंद hu jaaega। All times are in IST.
Khair अब mein point पर आते haen, jaisa की entry thread aired hu chuka h इसलिए ap sabhi readers और writers से मेरी personally request h की iss contest में ap jarur participate kare और apni kalpnao ko shabdon kaa raah dikha के yaha pesh kare hu sakta h लोग use पसंद kare.
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yeh ap sabhi के liye एक बहुत hi sunhara avsar h इसलिए aage bade और apni kalpanao ko shabdon में likhkar world ko dikha de.
yeh एक short kahani contest h jisme Minimum 700 words और maximum 7000 words tak allowed h itne hi words में apni kahani complete karni hongi, or एक hi post में complete krna h और Entry Thread में post krna h.
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On Behalf of Admin Team
Regards - XForum Staff।
मक्के केँ खेत मे – New Episode
chapter 2
माधुरी खानां लेकेउपर आती हैं रामपाल पहले सें हि हाथमुह धोके बैठा थां माधुरी अपनी घुघट् हटा केँ आहिस्ता बैठ खानां निकाल पानीसभी रामपाल कों लगा केँ देती हैं
रामपाल माधुरी कों बरे प्रेम सें देखरहा थां माधुरी रामपाल कों ऐसे प्रेम सें देखता देख मुस्कुराते हुवे - पिताजी जी खानां लग गय़ा हैं पहले खानां खाइये फिन देखते रहना मुझे
रामपाल थोरा सर्म सें - पता नहीं बेटी तुम्हे मुस्कुराता हस्ता देख मुझे बहुत खुशी मिलती हैं
खाने मे आलू कोभी कि सब्ज़ी औऱ मिर्ची प्याज़ थां रामपाल एक् टुकरा तोर सब्ज़ी मिला केँ माधुरी कों देख - चलो आँ करो
माधुरी रामपाल कों देखते हुवे - किया बापूयह रोज कां हैं आपका मे खानां आपके लिये लातीहु मगर आप् आधा खानां मुझे हि खिला देते हैं
रामपाल माधुरी कों मुस्कुराते हुवे देखता हैं औऱ जौ निवाला होता हैं उसे स्वयं खाते हुवे - अच्छा बाबा मे स्वयं आँ लेताहु तुम्हे नहीं खानां हैं तौ मतखाओ
ऐसी उमीद तौ माधुरी कों नहीं थि असल मे रामपाल जब अपने हाथो सें माधुरी कों खानां खिलता थां तोँ माधुरी कों बहुत अच्छा लगता थां इस लिये माधुरी खानां खाके नहींआती थि बल्कि कुछ रोटी जयदा हि लेकेआती थि
रामपाल मुस्कुराते हुवेमजे सें खाने मे लगा थां औऱ माधुरी यहदेख मुह फुला केँ दूसरी तरफमुह करके नाराज होके - हाहा आपके लिये हि हैं आप् हि खाओ मुझे नहीं खानां
माधुरी मन मे नाराज होके - हद हैं मे तौ मजाककर रही थि मगर पिताजी जी कों सोचना चाहिये थां नाँ मुझे भि खानां हैं
रामपाल अपनीबहु माधुरी कों रूठादेख मजे लें रहा थां
रामपाल खानां खाते हुवे - वाउवाउ किया मस्त सब्ज़ी बनाई हैं बहु तुमने खाके तोँ मज़ा आँ रहा हैं
रामपाल कि बातें सुन माधुरी औऱ चिढ़ जाती हैं औऱ रामपाल कि तरफदेख गुस्से मे - हा तौ खाइये नाँ जीभर केँ खाइये कमपरे तौ बता लेना लेके आँ जाउंगी
रामपाल माधुरी केँ थोरापास बैठ एक् निवाला मुह मे डालते हुवेहस केँ - जनताहु तुम् खानां खाके नहींआती कियुंकी मेरीबहु कों मेरे हाथो सें खानां होता हैं
माधुरी निवाला खाते हुवे रामपाल कों देख नाराज होके - पता हैं आपकोफिन भि
माधुरी भि एक् निवाला रामपाल कों खिलाती हैं
दोस्तो ससुरजी बहु मे यहसभी पहले सें हि होता आँ रहा हैं जब रामपाल नें पहलीबार अपने हाथो सें माधुरी कों खानां खिलाया थां तब माधुरी कों अजीब खुशी कां एहसास हुआउस दिन माधुरी नें भि रामपाल कों अपने हाथो सें खानां खिलाया यह प्रेम एहसास दोनों केँ लियेअलग मगरचैन खुशी वाला थां तब सें लेकेआज तक यह चलता आँ रहा हैं दोनों ससुरजी बहु एक् दूसरे कों खानां खिलाते हैं खातेपीट हैं
20 मिनट तक दोनों एक् दूसरे कों बरे प्रेम सें खानां खिलाते हैं खाते हैं फिनहाथ मुह धोके आहिस्ता बैठ खेतो कों हसीन नजारे कों देखने लगते हैं
मचान केँ ऊपर बैठे थें दोनों उचा भि थां इस लिये चारों तरफसभी कुछसाफ अच्छे सें दूर तक देखाजा सकता थां दोनों ससुरजी बहु एक् दूसरे केँ पासबैठ थें
माधुरी खेतो कों देखते हुवे - जब सें खेत मे आपके लिये खानां लेकेआने लगी मुझे भि खेत औऱ यहाबैठ नजरे देखने मे आपकेसंग बातें करने मे अच्छा लगनेलगा हैं पिताजी जीसच मे कितना हसीन नजारा हैं चारों तरफ मात्र खेत औऱ लोग जोँ खेतो मे कामकर रहे हैं
रामपाल एक् नजर माधुरी कों देखता हैं फिन खेतो कि तरफ देखते हुवे - समझरहा हुकोई भि ऐसी स्थान बैठ नजरे देखने कि आदतलग जायेगी कियुंकी यहाचैन सांति हैं कोई हंगामा नहीं
माधुरी रामपाल कों देख - आपनेसही कहा पिताजी जी
रामपाल माधुरी कों देखते हुवे - मेरे नालायक बेटे कां मोबाइल आया कि नहींकब आँ रहा हैं
माधुरी रामपाल कों देखते हुवेहस केँ - क्याँ पिताजी आप् भि नां उन्हे नालायक मत कहिये आया थां मोबाइल सुभहकेह रहे थें जल्द हि आयेगे
रामपाल - औऱ तेरा कमीना बाप नें मोबाइल किया याँ नहीं
माधुरी रामपाल कों देख नाराज होके - पिताजी जी मेरे बापू कों कमीना मत कहिये
रामपाल हस्ते हुवे - कमीने कों कमीना हि कहुंगा थां तेरा बाप कमीना हैं
बतादु दोस्तो माधुरी केँ पिताजी औऱ रामपाल जिगरी साथी हैं नहीं तोँ मनोज कि इतनी अच्छी क़िस्मत कहा जौ माधुरी जैसी पत्नि मिलती
माधुरी कों अच्छे सें बता हैं उनके बापू ससुरजी जिगरी साथी हैं औऱ खूब लरते हैं मस्ती करते हैं
माधुरी मुस्कुराते हुवे - मोबाइल कलआया थां आज नहीं
रामपाल - अच्छा
रामपाल माधुरी कि तरफ होकेबैठ - बेटी मे सोचरहा हुजब मनोज आयेगा तोँ तुम् कुछदिन केँ लिये अपने मायके चलीजाओ साल हौ गये हैं जाकेसभी सें मिललो
माधुरी रामपाल कों देख हैरान होके - किया नहीं बापूजी मे चली जाउंगी तौ आप् अकेले केसे रहेगे आपके खाने पीने कां ख्याल कोन रखेगा नहीं मुझे नहीं जानां आपको अकेले छोर केँ
रामपाल माधुरी कों सीने सें लगा केँ सर पे प्रेम सें हाथ फेरते हुवे - बेटी कुछदिन कि हि बात हैं मे रह लूंगा तेरेआने सें पहले भि तोँ रहरहा थां नां जब इंतजार करते होगे तेरेआने कां मेरी प्यारी बहु हैं नां बातमान लें नां
माधुरी रामपाल कों देख दुःखी होके - ठीक हैं कुछदिन केँ लियेचली जाउंगी
रामपाल खुश होके - यह हुई नाँ बात
रामपाल खेतो कि तरफ देखते हुवे - वोँ वोँ बेटी मे, बस उसकेआगे रामपाल कुछकेह नहीं पिताजी
माधुरी रामपाल कों देखते हुवेमन मे - जानती हु पिताजी जी आप् किया कहना चाहते हैं कईबार आप् कहते हुवेरुक जाते हैं
रामपाल खेतो कि तरफ देखते हुवेमन मे दुखी होके - काश तुम् होती माला तौ तुम् बहु सें खुल केँ बातकर सकती थि पूछ सकती थि
माधुरी - बापूजी मे जातीहु
रामपाल माधुरी कों देख - ठीक हैं बेटी जाओ
माधुरी फिन बर्तन लेके घुघट् डालके घऱ जाते हुवेमन मे - बापूजी मेरी कितनी परवाह करते हैं मेरेबरे मे कितना सोचते हैं उन्हे पता हैं मेरामन हैं मायके जाने कां
माधुरी पीछे रामपाल कों देख जोँ लेता थां देखते - थैंक्स पिताजी जी आप् मेरे ससुरजी जी हैं
रात 8 बजे
माधुरी रामपाल बैठे थें आगन मे खटिये पे संगीता कां मोबाइल आया थां
संगीता - भाभी कैसी हैं आप् मुझेयाद करती हैं याँ नहीं
माधुरी हस्ते हुवे - करतीहु बाबारोज करतीहु
संगीता - पिताजी कहा हैं वोँ तोँ पक्का मुझेयाद नहीं करते होगे
रामपाल मुस्कुराते हुवे - नहीं करता कियुंकी मेरेपास मेरी प्यारी बहु हैं
संगीता नाराज होकेमुह फुला केँ - सुना सुना नां भाभी पिताजी नें कियाकहा अब तौ आप् पिताजी कि लाडली मन गई हैं मुझे तोँ भूल हि गये
माधुरी हस्ते हुवे - बसबस मजाककर रहे हैं बापूजी
रामपाल - कैसी हैं मेरी बेटी
संगीता - अच्छी हु पिताजी भइयाकब आँ रहे हैं
रामपाल - उसकापता नहीं बेटी कब आयेगा तु बेटा सभी केसे हैं दमादजी कहा हैं
संगीता - वोँ तौ आखे अभि बाहर् गये हैं
रामपाल - दमादजी कों लेकेआओ एक् दिन
संगीता - जल्द आउंगी बापू
मोबाइल कट
रामपाल माधुरी कों देख - अच्छा बेटी मे सोने जाताहु तुम् भि सोजाओ
माधुरी - जी पिताजी जी
दोनों ससुरजी बहु अपने कमरे मे आँ जाते हैं
रामपाल कमरे मे आता हैं मगरफिन माधुरी केँ कमरे मे आता हैं तोँ देखता हैं माधुरी बालखोल रही थि माधुरी अपने मे खोई दोनों हाथो सें बाल पकरे थि जिसकी वजह सें माधुरी केँ ब्लाउस टाइट हौ गये थें औऱ इस कारन माधुरी केँ जौ बरे चुचे थें टाइट ब्लाउस केँ ऊपर सें हि खरेसाफ दिखरहे थें भाग्य सें रामपाल जिस स्थान खरा थां माधुरी जिसतरफ होकेखरी थि रामपाल कों मस्त एंगल सें सीनदिख जाता हैं रामपाल अपनीबहु केँ इतने टाइटखरे चुचे ब्लाउस मे कसेदेख एक् समय लेँ लिये रामपाल सभीभूल जाता हैं वोँ कहाखरा होके कियादेख रहा हैं
तभी माधुरी कि नजर रामपाल पे जाती हैं माधुरी नॉर्मल आवाज़ मे - बापूजी आप् कुछकाम थां याँ कुछ बोलना थां
रामपाल माधुरी कों देखता हैं जैसे हि रामपाल कि नजर नीचे जाती हैं रामपाल फिनजम जाता थां माधुरी कि मस्त चिकनी गोरेपेट गहरी ढोरीदेख औऱ कितनी कमाल कि सेक्सी पतलीकमर थि माधुरी कि
रामपाल स्वयं कों संभलते हुवे माधुरी कों देख - माफ करना बेटी बिना बोले अंदरआने केँ लिये
माधुरी हैरान नाराज होके रामपाल कों देख - कैसी बातें कररहे हैं बापू आप् जब चाहेतब मेरे कमरे मे आँ जा सकते हैं
रामपाल - समझ गय़ा बेटी नाराज मत हौ वोँ मेरेपेर
माधुरी मुस्कुराते हुवे - चलिये दबा देतीहु
रामपाल केँ कमरे मे रामपाल लेता थां माधुरी दोनों पेर दबाने मे लगी थि
रामपाल माधुरी कों देख - बेटी मनोज कि याद तौ आती होगी
माधुरी थोरा हैरान सर्म सें - आती हैं मगर मेरे प्यारे बापू हैं नाँ मेरेसंग
रामपाल मुस्कुराते हुवे - हुयह तौ हैं
माधुरी पांव दबाते हुवे रामपाल कां देख - पिताजी जी मां जी कि याद तोँ आती होगी बहुत आपको
रामपाल दुखी होके - हा बेटा बहुतआती हैं मेरी सासु बहुत अच्छी थि बहुत प्रेम करता थां मे
माधुरी दुखी होके - काश हमारे बीच होती
रामपाल - होनी कों कोनताल सकता हैं बेटी
माधुरी रामपाल कों देख मुस्कुराते हुवे - यह बताइये आपकीकोई गिर्लफ्रेंड थि
तभी माधुरी कों एहसास होता हैं उसने कियाकेह दिया माधुरी जल्द सें नजरे दूसरी तरफ करकेडर जाती हैं
मगरतभी रामपाल केहता हैं मुस्कुराते हुवे - हा थि एक्
माधुरी जल्द सें हैरान शोक रामपाल कों देखते हुवे - किया
रामपाल थोरा सर्म सें - इसमें हैरान होने कि कियाबात हैं मे हैंडसम नहींहु मेरी गिर्लफ्रेंड नहीं होँ सकती
माधुरी हैरान - नहीं नहीं मेनेऐसा नहींकहा बस यकीन नहीं होँ रहा बताइये नां कोन थां केसे प्रेम हुआसभी कुछ
रामपाल देखता हैं माधुरी बहुत बेताब हैं जानने केँ लिये
रामपाल मुस्कुराते हुवे - बता दूँगा मगर तुम् बताओ तेराकोई बॉयफ्रेड थां
आज केँ लिये इतना हि
मक्के केँ खेत मे - Kahani ab aur interesting hogi
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