भाग्य कि लकीर ( + ) (incest special) (adultery special) - Episode 1
कईलोग मानते हैं ( भाग्य कि लकीर ) मे जोँ लिखा होता हैं वही होता हैं कईलोग यह भि मानते हैं भाग्य कि लकीर कों इंसान बदल सकते हैं
प्रश्न यह हैं कियाऐसा सच मे हौ सकता हैं जवाबहा भि नाँ भि
उपर वाले नें हम् इंसान कों बनाया दिमाग़ ताकतसभी दिया ताकि इंसान अपनी भाग्य स्वयं लिखसके मगरहर कोई अपनी भाग्य नहींबदल पता कियुंकी बुरी भाग्य जब इंसान कों पूरीतरह जकर् लेती हैं तोँ वोँ एक् ऐसे दलदल मे फस जाता हैं जहा इंसान कोसिस करते रहता हैं बाहर् निकलने कां मगर निकल नहींपता
ऐसे मे दो चीजे होती हैं वोँ इंसान जौ दलदल मे फसा हैं कोसिस करते करतेहार मान लेँ अपनीमौत कां इंतजार करे याँ कोईआके उस इंसान कि सहायता करे औऱ उसकी क़िस्मत कि लकीर कों बदलदे
क़िस्मत कि लकीर कों बदलने केँ लियेउस इंसान मे वोँ ताकतदम पावर होना चाहिये हरकोई अपनी भाग्य बदल सकता तौ पूरी दुनिया मे जयदा गरीबलोग हैं जोँ पूरी जीवन कमाते खाते गुजर जाते हैं जौ गरीबलोग अपनी क़िस्मत बदल नहीं लेते पर्र कुछ हि भाग्य कों बदल पाते हैं - याँ उपर वाला किसी पे दयाकर उसकी ( क़िस्मत कि लकीर ) कों बदलदे
यहकथा कुछऐसी हि हैं एक् दलदल मे फसी बुरी क़िस्मत कि मारी कि हैं चलो देखते हैं किया होता हैं उसकेसंग उस दलदल सें बाहर् निकल पति हैं याँ नहीं
स्टोरी - Adultery + Incest
इमोसनल रोमांस
एक्शन
फैंटेसी
introduction
साहिल - 18 साल कां लरका बहुत मासूम हैंडसम पुरा स्लिम कोईकमी नहींमा बेहन कां लाडला बाप कां भि एक् लौटा बेटा हैं पुरा स्लिम अच्छी बॉडी मासूम प्यारा हैं
सुमिता 42 - साहिल कि मा बहुत हि जयदा सुंदर पुरेगाव मे सुमिता कि हुस्न केँ चर्चे होते रहते हैं हसीन चेहरा प्यारी आखे गुलाबी होठदो बरेबरे तरबूज केँ किया हि कहने पतली गोरी चिकनी कमरजब चलती हैं तोँ आगे सें जयदा पीछे कां सीनसभी देखने वालो केँ होसउर जाते हैं 42 कि हैं पऱ मजाल हैं उसेदेख कोईकेह सके वोँ 42 कि हैं
राघव 44 - साहिल केँ पिताजी टीचर हैं गाव कि सरकारी विद्यालय मे पढाने जाते हैं इस भइया साहब सें पुरागाव जलता हैं गालिया देते हैं सभीयही कहते हैं इस लंगूर कों अंगूर केसेमिल गये राघव भि कम हैंडसम नहीं हैं मगरउमर दिखने लगी हैं जबकि सुमिता जवान हि दिखती हैं
अंजली 19 - इसके भि चर्चे कम नहीं हैं पता नहीं कितने लरके अंजली कों पाने केँ लिये लाइन मे लगे कोसिस करते रहते हैं अंजली सुमिता दोनों मा बेटी एक् संगगाव मे निकलते हैं लोगयही कहते कियाकोई इतनी सुंदर मा बेटी भि होँ सकती हैं
कुनाल 43 - सुमिता कां बरा भइया साहिल कां मामाजी बाकीकथा मे सभीपता चलते जायेगा
सुनीता 42 - सुमिता कि भाभी साहिल कि मामीजी हुस्न मे यह भि कम नहीं हैं उपर सें नीचे तक फटाका हैं बाकी कैसी हैं कथा मे पता चलता जायेगा
माधुरी 21 - सुनीता कुनाल कि एक् लौटी बेटी बस उसकेबाद माधुरी मा नहींबन पाई विवाह सुधा हैं 18 कि थि विवाह कर दि गई अभि 2 साल कां एक् बेटा हैं सुंदर हैं अपनीमा कि तरह
बाकी केँ कई किरदार आयेगे औऱ जाते रहेगे आते रहेगे कथा जैसे जैसेआगे बढ़ेगी वैसे वैसे
दोस्तो इस किस्सा कों मे कई महीने सें मन मे लिये बैठा थां अब जाके निकाल रहाहु मे इस किस्सा कों मेरी बाकी कहानी सें औऱ अच्छे सें रियल लॉजिक डिटेल सें लाने वालाहु बस आप् सभी कां संग प्रेम मिलता रहे
आप् सभी कों पता होगा जोँ मेरी किस्सा पढ़ते आये हैं फिन भि बता देताहु पहला update आजरात 10 सें 11 तक आँ जायेगी बाकी एक् दिनछोर उसी वक्तरात 10 सें 11 केँ बीचआती रहेगी
मिलते हैं
Congrats for this new kahani. Hope yeh bi tumhaari pichli kahani kee prakaar majedaar or kaamuk hongi. All the best!! Look forward too regular updates जैसे तुमने अपनी पिछली स्टोरी मे दिया थां. ajay bhay
बहोत बहोत हार्दिक शुभकामनायें भइयानयी स्टोरी केँ लिये अन्य स्टोरी कि तरहायह किस्सा भि जबरदस्त होगी प्रथम अध्याय कि प्रतिक्षा रहेगी
भाग्य कि लकीर ( + ) (incest special) (adultery special) – New Episode
( update 1 )
लरकी - धीरे-धीरे धीरे-धीरे आप् मेरेदिल केँ मेहमा होँ गये पहलेजा फिन जाने जानां होँ गये
लरका - धीरे-धीरे धीरे-धीरे आप् मेरेदिल केँ मेहमा होँ गये पहलेजा फिन जाने जानां होँ गये
लरकी - यह हैं कर्म आपका तुमने मुझेचुन लिया
लरका - अब चाहेकुछ नाँ बोलो मेनेसभी सुन लिया
लरका लरकी - धीरे-धीरे धीरे-धीरे आप् मेरेदिल लेँ मेहमा हौ गये पहलेजा फिन जाने जानां हौ गये धीरे-धीरे धीरे-धीरे आप् मेरेदिल केँ मेहमा होँ गये होँ धीरे-धीरे धीरे-धीरे आप् मेरेदिल लेँ मेहमा हौ गये
लरका - राधिमा प्लेस प्लेस आखे खोलीरखो मे तुम्हे कुछ नहीं होने दूँगा कोई हैं प्लेस हेल्प करो प्लेस कोई तोँ हेल्प करो
कुछ मिनटबाद एक् जोरदार दर्दभरी चीखगुज उठती हैं
लरका राधिमा केँ ग्रावे पे लेताहुआ थां जैसे वोँ राधिका कों बाहों मे लिये उसकेउपर प्रेम सें लेता उसकेदिल कि धर्कन् सुनरहा होँ
लरके कां आखेबंद थां जैसे वोँ हर बिताये प्यारे समय मे खोया हौ
लरके कि आखे खुलती हैं कियुंकी बारिस होनेलगी थि हल्की हल्की बारिस कि बूँदे लरके केँ फेस पे गाल पे गिररहे थें
लरका घुटने पे बैठ राधिमा केँ ग्रावे कों देखता हि रहता हैं होठ काप्रहे थें दिलरो रहा थां आखो मे बेपनाह दर्दसाफ दिखरहा थां कुछ बोल्ना कहना चाहता थां मगर नां बॉडी नाँ होठसंग देरहे थें
लरकाबरी मुश्किल सें स्वयं कों संभाले खरा होता हैं मगरनजर अभि भि राधिमा कि ग्रावे पे थि लरके केँ आखो सें भरभर केँ आसु निकलरहे थें लरके केँ दर्द कों देख आसमान भि रोरहा थां
राधिमा हस्ते हिलखिलते हुवे नाचते झूमते लरके कों देख - साहिल जानते होँ तुम् बहुत क़िस्मत वाले होँ जोँ मे तुम्हे मिली
साहिल खरा मुस्कुराते राधिमा कों प्रेम भरी नजरो सें देखते हुवे - अच्छा हु सोचने दोजरा
राधिमा साहिल कि सोचने वालीबात सुनमुह फुलाते रूठ केँ नाराजगी सें साहिल कों देखते हुवे - किया तुम्हे सोचना पऱ रहा हैं ठीक हैं रहो अकेले मे जारही हुबाय
राधिमा रूठ केँ बरबाराते हुवे गुस्से मे जाने लगती हैं साहिल यहदेख हसने लगता हैं औऱ तेजी सें दोर केँ जाके पीछे सें राधिका कों पकर लेता हैं राधिका सिहर जाती हैं पूरी सांत भि होँ जाती हैं जौ चैन खुशी साहिल केँ बाहों मे राधिमा कों मिलती थि राधिमा उसमेखो जाती थि चेहरा सर्म सें लालमगर फेस पे मुस्कान थि
साहिल राधिमा कों बाहों मे कसते हुवे अपनासर राधिमा केँ सर सें सताते हुवे प्रेम सें - हा क़िस्मत वालाहु जौ तुम् मुझे मिली राधिमा
राधिमा सर्मलाल चेहरा केँ संग - अच्छा जी पहले तौ सोचने मे लगे थें
तभी एक् जोरदार बिजली करकती हैं जिसकी वजह सें साहिल यादों सें बाहर् आता हैं
साहिल राधिमा केँ ग्रावे कों देखता हैं फिन पीछेमूर जाने लगता हैं सीने मे दर्द लिये साहिल कुछकदम आगे जातेरुक जाता हैं फिन पीछेमूर राधिमा केँ ग्रावे कों देखते हुवे कपते दर्दभरी आवाज़ मे - काशकाश मे ( भाग्य कि लकीर ) कों बदल सकताकाश मेरे अंदर वोँ पावर होती तोँ मे, आगे साहिल कुछबोल नहीं पाता
सीलीपुर गाव
बहुत कि हसीनगाव हैं गाव कि लाइफ कैसी होती हैं मुझे बताने कि जरूरत नहीं हैं
बारिस हल्की फुल्की होकेचली जाती हैं फिनबदल साफ हौ जाते हैं जैसे वोँ साहिल केँ दर्द मे सामिल होनेआया होँ
एक् घऱ जोँ इट कां बना थां छत थि 4 कमरेकोई हाईफाई घऱ नहीं थां मगरगाव मे किसी कां घऱइट कां हैं यहबरी बात होती हैं
गाव मे सभीकोई यही चाहते हैं कि कभी उसका भि घऱघास फुस कि गजहइट कां हौ
घऱ केँ बाहर् एक् बाबा कंधे पे झोला लिये आवाज़ लगारहा थां ताकिकोई आये औऱ कुछ खाने पीने कों दे 2 मिनटबाद भि जबकोई नहींआता नाँ किसी कि अंदर सें आवाज़ आती हैं तौ बाबा जाने लगता हैं
बाबाकुछ कदमचले हि थें कि एक् आवाज़ आती हैं प्यारी मीठी आवाज़ जौ बाबा कों रुकने केँ लियेबोल रही थि बाबा आवाज़ सुनरुक जाते हैं औऱ पीछेमूर कर देखते हैं
एक् हसीन स्त्री सर पे सारीरखे हाथोकुछ खाने पीने कि चीजे लियेखरी थि स्त्री मुस्कुराहट लिये बाबा केँ पासआके खरी होके - बाबा मे तौ आपके लियेकुछ खाने पीने कां समान लें रही थि औऱ आप् हैं कि बिना लियेजा रहे थें यह तोँ अच्छी बात नहीं हैं
बाबा केँ चेहरे मे स्त्री कि बातसुन मुस्कुराहट आँ जाती हैं
स्त्री कोई औऱ नहीं सुमिता थि
बाबा सुमिता कों देख तोँ रहे थें मगर चेहरे कों नहींदेख रहे थें
बाबा मुस्कुराते हुवे - माफ करना बेटी आवाज़ तौ लगाई थि रुका भि थां किया हैं नाँ कईलोग घऱ मे होते हुवे भि कुछ नाँ बोलते नाँ देते हैं
सुमिता - मेरे दरवाजे सें कोई खालीहाथ जा हि नहीं सकताभले हि हम् अमीर नहींमगर जितना होँ सके जरूर दुगि
बाबा मुस्कुराते हुवे अपने झोले कों लेके खोलते हुवे - समझ गय़ा बेटी समझ गय़ा अबजब भि आऊंगा रुकुगा देर तक अबखुश
सुमिता झोले मे खाने पीने कां समान रखते मुस्कुराते हुवे - हाअबखुश
सुमिता खाने पीने कां समान खोले मे रखने केँ बादझुक केँ बाबा केँ पेर छूके - आशीर्वाद दीजिये बाबा अपनी बेटी कों
इतना इंजत समान् बहुतकम हि लोग बाबा कों देते थें नहीं तोँ जयदातर लोग ढोगी बाबाठग बाबा कहकेभगा देते थें
बाबा बहुतखुश होते हैं सुमिता केँ नेक दिलीसाफ दिलमन कों देख
बाबा सुमिता केँ सर पे हाथरख - हमेसा खुशरहो बेटी
आशीर्वाद लेने केँ बाद सुमिता खुश होकेखरी होती हैं बाबा सुमिता सें बहुतखुश थें इस लिये बाबा देख्ना चाहते थें सामने खरी सुमिता केँ चेहरे कों बाबा एक् वजह सें किसी कां चेहरा नहीं देखते मगर सुमिता नें मजबूर कर दिया थां
बाबा जैसे हि सुमिता केँ चेहरे कों देखते हैं बाबा कि आखे जैसे हि सुमिता कि आखो सें मिलती हैं बाबाशोक मे चले जाते हैं
वोँ चेहरे पे खुशी इस्माइल थि जोँ चेहरा मुस्कुरा रहा थां उसके पीछे जोँ दर्द सुमिता सहते आँ रही थि उसे बाबा एक् समय मे हि सुमिता कि आखो सें नजरे मिलते हि देख लेते हैं
बाबा सांतखरा सुमिता कों देखता रहता हैं सुमिता बाबा कों ऐसे देखते देख - बाबा कियाहुआ
बाबाहोस मे आते अपनेआखो कों मलते हुवे - कुछ नहीं बेटी भाग्य कि लकीर केँ आगे किसकी चलती हैं
सुमिता कंफ्यूज होके - बाबा आपके कहने कां मतलब
बाबा सुमिता कों देखते हुवे - इस मुस्कुराहट चेहरे केँ पीछे जौ दर्द तुम् छुपाते सहते आँ रही हौ नां वोँ सभी मे साफदेख सकताहु बेटी
बाबा कि बातें सुनते हि सुमिता पूरीशोक मे हिल जाती हैं आखे थोरिफैल जाती हैं माथे मे सिकन् बॉडी कपने लगती हैं
सुमिता कपते होठो सें बाबा कों देख - बाबा आप् यह कियाबोल रहे हैं
बाबा सुमिता केँ दर्दफिल करते हुवे - जौ तुमने सुना बताओ जौ मेनेकहा वोँ सच हैं याँ नहीं
बाबा केँ इतना कहते हि सुमिता समझ जाती हैं सामने खरा बाबाकोई मामूली बाबा नहीं हैं
सुमिता फुट परती हैं आखो सें आसु निकलने लगते हैं सुमिता आसपास देखती हैं फिन जल्द सें आसुसाफ करने लगती हैं
बाबादया भाव सें सुमिता कों देखते हुवे - बेटी
सुमिता बाबा कों देख - बाबा आप् कोई मामूली बाबा नहीं लगते मुझेजब आप् नें सभीदेख हि लिया हैं तौ किया मेरी क़िस्मत कि लकीर मे खुसिया अच्छे लम्हा लिखे हैं
बाबा निरास होते हुवे नजरे नीचे करते हुवे - माफ करना बेटी यहसच हैं मे किसी कि आखो मे देखते हि उसका पास्ट पर्जेंट देख लेताहु मगरयह शक्ति मेरे किये एक् श्रप् हैं
सुमिता - पर्र केसे बाबायह शक्ति तोँ भाग्य कों बदल सकती हैं
बाबा सुमिता कों देखते हुवे - नहीं बेटी मे कुछ नहींकर सकताखास करउन लोगो केँ लिये जिसकी क़िस्मत इतनी बुरीतरह किसी कों जकर् केँ रखा होँ
सुमिता कां दिलबैठ जाता हैं उमीदटूट जाती हैं सुमिता इस उमीद मे जीते आँ रही थि किसीदिन तौ वोँ उस दलदल सें निकलेगी मगर बाबा कि बातें सुन वोँ उमीद भि चली गई
तभी साहिल वहा पे आता हैं अपनीमा बाबा कों देखता हैं साहिल सीधा बाबा केँ पांव छूके आशीर्वाद लेके सुमिता केँ पासखरा होँ जाता हैं
सुमिता साहिल कों देख - आँ गय़ा मेरा बेटा, सुमिता बाबा कों देखते हुवे, बाबायह मेरा एक् लौटा बेटा हैं साहिल
बाबा अपनीनजर साहिल केँ नजर सें जैसे हि मिलाते हैं बाबा कों अब तक केँ बरा झटकाशोक लगता हैं बाबा कि आखे पूरीफैल जाती हैं
बाबा कों यूशोक हैरान देखता देख सुमिता साहिल दोनों हैरान कंफ्यूज बाबा कों देखते रहते हैं
बाबा जल्द सें स्वयं कों नॉर्मल सांत करते हुवे साहिल कों देखमन मे - यहयह केसे होँ सकता हैं जौ हौ चुका हैं जौ घटनाघट चुकी हैं कोईउसे केसेबदल सकता हैं कोई भाग्य कि लकीर कों केसेबदल सकता हैं यह तौ उपर वाले हि कर सकता हैं पर्र यह लरका इसके अंदर एक् एक् पावर शक्ति छुपी हैं जौ पास्ट पर्जेंट कों बदल केँ रख सकती हैं मगरयह पावरइसे मिली केसे औऱ तोँ औऱ इस लरके कों स्वयं नहींपता उसके एक् शक्ति हैं
बाबाफिन सुमिता साहिल कों देखते हुवेमन मे - मा भि दर्द सहते आँ रही हैं बेटा भि मगर एक् दूसरे केँ सामने केसे मुस्कुरा रहे हैं एक् दूसरे सें अपना दर्द छुपारहे हैं सच मे दोनों मा बेटे केँ बीच बेपनाह प्रेम हैं
सुमिता - बाबाकहा खोगये आप्
बाबाहोस मे आके देखता हैं तौ साहिल जारहा थां घऱ केँ अंदर
बाबा सुमिता कों देखते हुवे - बेटी जौ मेनेकहा उसेभूल जाओ तुम्हारी क़िस्मत कि लकीर कों कोई पूरीतरह बदल देगा वक्तआने पे अच्छा मे चलताहु
बाबा जाने लगते हैं सुमिता बाबा कों जाते देखती रहती हैं औऱ बाबा केँ बोले लास्ट बातें सुमिता कों सोच मे डाल देती हैं मगर टुटा उमीदफिन जाग गय़ा थां
बाबा चलते हुवे सोचेजा रहे थें
बाबामन मे - यकीन नहीं होता किया देखा मेनेउस लरके साहिल केँ अंदर क़िस्मत कों बदलने कि ताकत हैं मगरउसे अभि तक एहसास नहींहुआ हैं जबउसे पता चलेगा तोँ
बाबा आसमान कि तरफ देखते हुवे एक् गहरी सासे लेते हुवे - सभीउपर वाले कि मर्ज़ी सें होता हैं जोँ होने वाला हैं उसे तोँ हम् बदल भि सकते हैं मगर जौ हौ चुका हैं उसे बदलना नमुमकींन हैं मगरयह लरका दोनों कर सकता हैं वक्त आयेगा तोँ जल्द हि उसे एहसास होँ जायेगा
साहिल अपने कमरे मे पलंग पे लेता मोबाइल मे राधिमा कि फोटो देखते हुवे इमोसनाल होके यादों मे खोया थां तभी किसी केँ कमरे मे आने कि आहतसुन साहिल जल्द सें मोबाइल बंद करके चेहरे कों नॉर्मल कर लेता हैं जब दर्ददुख छुपा लेता हैं
सुमिता कमरे मे आती हैं औऱ साहिल केँ पेर केँ पासबैठ साहिल कों देखते हुवे - यहकोई वक्त हैं खाट पे लेटने सोने कां हाबोल
साहिल मुस्कुराते हुवे सुमिता कों देख - कियामा आप् भि नाँ कोईजब चाहेबैड पे लेतसो सकता हैं
सुमिता - तु बिगरता जारहा हैं अच्छा सभीछोर बाजार चलते हैं खरीदारी करनी हैं
साहिल उठ केँ बैठ - ठीक हैं बाबा चलते हैं
सुमिता खरी होते हुवे - मुहमत लटकाजब कहतीहु चलने कों मुह लटका लेता हैं
15 मिनटबाद शाम 4 बजे
सुमिता साहिल तैयार होकेसरक किनारे खरे होँ जाते हैं एक् रिक्सा आके रुकती हैं रिस्का पुरा खाली थां
रिस्का वाला सुमिता साहिल कों देख -जानां हैं कही
साहिल - मार्केट जानां हैं
रिस्का वाला - बैठोफिन
सुमिता साहिल बैठ जाते हैं मार्केट 10 मिनट कां मार्ग थां थोरिदूर जाते हि रिस्का रुकती हैं चार लरके थें दो पीछेदो आगेबैठ जाते हैं रिस्का निकल परती हैं
एक् लरका जोँ सुमिता केँ केँ बगल मे खरा थां उसकी जांघे सुमिता कि मोती जांघों सें चिपकी हुई थि लरका सुमिता कि मोती नर्म जांघों कि गर्मी फिल करके पागल हौ गय़ा थां उस लरके कां लन्ड पुरा टाइटखरा हौ जाता हैं लरकाजन बुझ केँ धीरे-धीरे सें औऱ सुमिता सें चिपक जाता हैं जांघे भि औऱ सुमिता कि जांघों सें चिपका केँ सुमिता कों तिर्चि नजर सें उपर सें नीचे तक देखते हुवेमन मे - सालामा शपथ कियामाल हैं दोस्त जांघों मे इतनी गर्मी हैं तौ इस ऑन्टी कि चूत मे कितनी गर्मी होगीउफ मोती नर्मगरम जांघों कि गर्मी फिल करके मेरा लन्ड खरा होँ रहा हैं
लरका सुमिता केँ चुचे पे नजर डालते हुवेमन मे - ऑन्टी केँ चुचे भि कितने बरे हैं दोस्त केसेखरे हैं सारी मे दोनों बरेआम छुपे हुवे हैं कास सारी नहीं होती तोँ औऱ अच्छे सें देख पाता
सुमिता जब भि बाहर् निकलती हैं सारी सें सीने कों कमरपेट कों धक केँ हि निकलती हैं
साहिल तौ धीरे-धीरे बैठा बाहर् देखने मे लगा थां साहिल सांत थां कियुंकी साहिल राधिका कि यादों मे खोया थां
वही रिस्का मार्केट आँ चुकी थि लरका हिम्मत करके एक् हाथ सुमिता केँ मोटे जांघों पे रख देता हैं वैसे हि सुमिता चौक सिहर काप् जाती हैं वही लरका पागल होँ जाता हैं सुमिता केँ मोटे जांघों केँ गर्मी नर्मफिल करके लरके कां लन्ड झटके मरने लगता हैं
सुमिता कपते सिहरते हुवे लरके कों देखती हैं लरका मुस्कुराते हुआ सुमिता कों देख धीरे-धीरे सें कान मे - ऑन्टी आपकी जांघे बहुत मोती नर्मगरम हैं
सुमिता पूरीशोक मे हिल जाती हैं औऱ जल्द सें लरके केँ हाथ कों अपने जांघों सें हटा देती हैं तभी रिस्का रुकती हैं सब लरकेउतर जाते हैं साहिल भि यादों सें बहारआता हैं सुमिता साहिल भि उतर जाते हैं साहिल रिस्के वाले कों पैसे देने लगता हैं
वही जौ लरका थां सुमिता कों देख मुस्कुराते जारहा थां सुमिता कों बहुत क्रोध आता हैं मगरकुछ नहीं कहती
सब करके मार्केट मे घुमने चले जाते हैं सुमिता भि साहिल केँ संग मार्केट मे जाने लगती हैं
सुसमा अंदर हि अंदर बहुत दुखी थि अपनी क़िस्मत कों लेके
साहिल मार्केट कों देखते हुवे - जब सें दिदी मामाजी केँ यहा गई हैं आप् मुझे हि संग मे खिच लाती हैं अपनेसंग
सुमिता साहिल कों देखते हुवे - कियु अपनीमा केँ संग मार्केट मे आनां अच्छा नहीं लगता तुम्हें
साहिल सुमिता कों देख - अरेऐसा तोँ नहींकहा मेने
सुमिता मुहबना केँ - तेरे कहने कां यही मतलब थां चल मे खरीदारी कर लेतीहु तु जाकेघूम लेँ
साहिल दोनों पॉकेट मे हाथ डालते हुवे - ठीक हैं जल्द करना
साहिल जाने लगता हैं सुमिता साहिल कों जातेदेख - हद हैं थोरिदेर होँ जायेगी तोँ किया होँ जायेगा
सुमिता चलते चलतेआस पास देखते जाती हौ फिन सुमिता एक् सब्जी वाले केँ पासबैठ बैगन उठाने लगती हैं सुमिता थोरि झुकी हुइ थि जिसकी वजह सें पीछे सुमिता केँ बरे गांड थोराउठे मस्तदिख रहे थें गोल मटोलबरे बरे तरबूज जैसेगोल उपर सें नीचे तक बॉडी कि बनावट भि अच्छे सें देखाजा सकता थां
सुमिता सब्जी वाले सें - भैया केसे दिये
सब्जी वाला सुमिता कों देख - भाभी आपके कियेवही भाव हैं
सुमिता मुस्कुराते हुवे - चलो हमेसा आपकेपास सें सब्जी ली जाने कां कुछ तौ फायदा हुआ
सुमिता बैगनआलू लेती हैं फिनआस पास देखते हुवे चलने लगती हैं सुमिता जबचलरही थि पीछे सुमिता केँ बरे गांड मस्तहिल रहे थें कुछ लरके बूढ़े कि नजर सुमिता केँ हिलते गांड पे हि टिकी थि
सुमिता जितनी खरीदारी करनी थि कर लेती हैं
सुमिता चारों तरफ देखते हुवेमन मे - कुछफल लें लेतीहु
सुमिता अपनीनजर चारों तरफ दोराती हैं तोँ सुमिता कों सामने कईफल बेचने वालेदिख जाते हैं सुमिता चलते हुवे एक् फल वाले केँ पासखरी होँ जाती हैं
आम संतरे बिकरहे थें सुमिता कुछ अच्छे संतरे चुन केँ उठाने लगती हैं सारी सीने सें सरक केँ सुमिता केँ कंधे पे आँ गय़ा थां जिसकी वजह सें सुमिता केँ गोरेभरे चिकने पीठसाफ देखने लगते हैं आते जातेलोग एक् नजर सुमिता कों उपर सें नीचे तक जरूर देखते जाते थें
वही साहिल मार्केट घूमरहा थां चेहरे पे कोई खुशी नहीं थि मात्र दर्द यादे थि
तभीकोई राधिमा कहके आवाज़ लेता हैं जिसे सुनते हि साहिल जल्द सें आवाज़ कि तरफमूर केँ देखता हैं
एक् अंकल अपनी बेटी कों आवाज़ देरहे थें लरकीकुछ समानली रही थि औऱ वोँ लरकी अपनेपास खरे पिताजी कोई देखते हुवे कहती हैं - बस पिताजी आँ रहीहु
साहिल लरकी कि तरफ देखता हैं लरकी कां फेस साहिल देख नहीं पातामगर पीछे सें साहिल कों देखऐसा लगरहा थां जैसे राधिमा खरी हौ साहिल कां दर्दफिल जाग जाता हैं सीने मे दिल मे दर्द होने लगता हैं साहिल इमोसनल होँ जाता हैं
तभी साहिल केँ कंधे मे कोईहाथ रखते हुवे - चले बेटा
साहिल जल्द सें स्वयं कों नॉर्मल मुस्कुराते हुवे पीछे सुमिता कों देख - देरकर हि दि आपने
सुमिता साहिल केँ कानपकर - तौ किया हौ गय़ा अबचल
सुमिता साहिल करआते हैं सुमिता खानां बनाने मे लग जाती हैं वही साहिल खेत किनारे एक् पुलिये पे बैठा राधिमा कों यादकर दर्द मे बैठा थां
अंधेरा होनेलगा थां राघवघऱ आता हैं आगन मे सुमिता रोटीबना रही थि राघव कों सुमिता देखते हुवे - 4 बजे छुट्टी होती हैं आपकीमगर अबआये हैं आप्
राघव खटिये मे बैठते हुवे सुमिता कों देख - अरे मेरीजान रास्ते मे साथीमिल जाते हैं बातें करते करते होँ जाती हैं देरी तुम् हौ कि रोज सुनाती रहती हौ
सुमिता गुस्से नाराजगी सें राघव कों देख - अच्छा मे क्रोध करती रहती हैं हा
राघव जल्द सें सुमिता केँ पीछे सें बाहों मे कस लेता हैं औऱ गाल पे किस करते हुवे प्रेम सें - हा क्रोध तौ करती हौ मगर प्रेम भि बहुत करती हौ चलो नाँ कमरे मे आज बहुतमन हैं
सुमिता बहुत शर्मा जाती हैं
सुमिता राघव कों दूर करते हुवे सर्म सें - हटोजी इसउमर मे बच्चो जैसी हरकतबंद करिये बेटा बेटी जवान हौ गये हैं खोले मे ऐसे मुझेमत पकरा कीजिये नाँ कुछ बोला कीजिये बच्चे देखसुन लेगे तोँ
राघव खटिये पे बैठते हुवेहस केँ - समझ गय़ा बाबाआगे सें ध्यान रखुंगा मगर बताओ तौ रात करने दोगी नां सच मे बहुतमन हैं
सुमिता सर्म सें लाल चेहरे लिये राघव कों बिना देखे रोटी बेलते हुवे धीरे-धीरे सें - हुजबदिल करता हैं मे रोकती थोरिहु आपको
राघवखुश होके - मज़ा आयेगा तुम्हारी
सुमिता जल्द सें राघव कों देख - बसआगे नहीं बेसरम होतेजा रहे हैं
सुमिता रोटी बनते हुवेमन मे - हद हैं इसउमर केँ आके मस्ती गंदी बातें करनी होती हैं इनको
रात 8 बजे
खानां लग गय़ा थां साहिल राघव सुमिता बैठे थें
राघव साहिल कों सुनाने मे लगा थां
राघव साहिल सें - नालायक कमीने 10 विपास करके पढाईछोर कर कियारहा हैं एक् मजबूर बाप अपने बेटे कों पढ़ा नहीं पाता तौ समझआता हैं मगर तेरा बाप तेरी पढाना चाहता हैं तोँ पढ़ने केँ बजाये गाव घूमता रहता हैं
साहिल नजरे नीचे कियेसभी सुनता रहता हैं कुछ नहीं बोलता
सुमिता राघव सें - देखिये जी खानां खाते वक्तकुछ मत बोला कीजिये कितनी बार आपकोकहा हैं मेने
राघव सुमिता कों देख थोरा गुस्से मे - तुम् चुपरहो सुमिता पढाई कितनी जरूरी हैं तुम्हें भि अच्छे सें पता हैं मे बसयही चाहता हुयह नालायक पढ़लिख केँ कुछबन जाये हमारे जाने केँ बादकम सें कमयह अपनी लाइफजी तौ पायेगा कुछ बनके
साहिल जोर सें गुस्से मे राघव सुमिता कों देखते हुवे - बस कीजिये पिताजी अभि आप् मा जवान हैं कही नहींजा रहेसमझ गये अभि आप् दोनों कईसाल जियेंगे
साहिल इतनाकेह खानां छोर कमरे मे चला जाता हैं
राघव सुमिता हैरान देखते रह जाते हैं
सुमिता राघव कों देखते हुवे - बहुत प्रेम करता हैं मुझे आपकोइस लिये क्रोध हौ गय़ा आपकी बातो सें
राघव थोरा इमोसनल होके सुमिता कों देख - जनताहु किया मे उसे प्रेम नहीं करता मेरालाल हैं वोँ मेरासभी कुछ कियाकरू सुमिता साहिल पहले सें बहुत बदलाहुआ लगता हैं मुझे
सुमिता राघव कों देखते हुवे - सचकहु तोँ मुझे भि ऐसा हि लगता हैं पर्र उसके पीछे कि वजह नहीं जानती
साहिल लेताहुआ छत कों देखेजा रहा थां कुछदेर बाद सुमिता दूध ग्लास मे लेकेआती हैं औऱ साहिल कि पासबैठ बाल सेहलते हुवे - चलदूध पीले नाराज नहीं होते तेरे पिताजी तेरेभले केँ लिये कहते हैं
साहिल उठ केँ बैठ ग्लास लेके नजरे नीचे किये - जनताहु मा
सुमिता साहिल कों गोर सें देखते हुवे - बेटा तु बदला सां नजरआता हैं कुछबात हुई हैं तौ बता मुझे
साहिल हैरान घबरा जाता हैं मगर स्वयं कों संभालते हुवे - नहीं तोँ
सुमिता फिनकुछ नहीं कहती साहिल दूध पीने लगता हैं दूध पीके ग्लास रख देता हैं
तभी साहिल कां मोबाइल बजता हैं
साहिल मोबाइल उठा केँ - हा दिदी बोलिये
अंजली - छोटेकल आँ रहा हैं नाँ मा पिताजी कों लेके
साहिल - दिदी आँ तौ रहाहु मगर पिताजी नहीं आँ पायेंगे छुट्टी नहीं मिली उनको
अंजली - ठीक हैं तौ मा कों लेके आँ जाओ मामीजी कि तबियत ठीक नहीं हैं
कुनाल कि आवाज़ आती हैं
कुनाल - कैसा हैं भांजे तेरी मामीजी कि तबियत थोरि खराब हैं सुमिता कों लेकेआजा कुछदिन केँ लिये छोटीकहा हैं
साहिल - पास मे हि बैठी हैं
कुनाल - छोटी मेरी बेहन आँ रही हैं नाँ
सुमिता - जी भैया आउंगी मगर साहिल केँ बापू अकेले केसे रहेगे
कुनाल - अरे उनकी छोरोकई बार तुम् आती होँ तोँ रह लेते हैं खानां बनाना कपड़े धोनासभी कर लेते हैं माधुरी भि आँ रही हैं कल
अंजली - भइयामा कल आँ रही हैं नां
सुमिता - ठीक हैं
मोबाइल कट
सुमिता खरी होके गिलास लेके साहिल कों देख - सोजा बापू कि बात कां बुरामत मानना
सुमिता बाहर् आती हैं वैसे हि कपने लगती हैं जोरजोर सें ससे लेने लगती हैं अपनी मुठीकस लेती हैं सुमिता केँ चेहरे पे डर दर्ददुख थां
सुमिता आसमान मे तारों कों देखते हुवे दर्दभरी आवाज़ मे - जहा सें सभी सुरुहुआ जहा मे जानां नहीं चाहती जिसका मे चेहरा देख्ना नहीं चाहती जिसगाव जिन लोगो सें दूर रहना चाहती हु कियु तुम् मुझेवही भेजरहे होँ कियु
सुमिता बरी मुश्किल सें स्वयं कों सांत करती हैं नॉर्मल फेस चेहरे पे मुस्कान किये कमरे मे आती हैं
राघव लेता सुमिता कों देख - उफजान जल्दकरो नां
सुमिता बैड पे लेत जाती हैं तांगे फैला केँ नाइटी उठा देती हैं बालों सें भरी फूली उभरी चूत राघव केँ सामने थि
राघव सुमिता कों देखते हुवे - यह जंगल कियाकर रहा हौ हु बताओ
सुमिता राघव कों देखते हुवे सर्म सें लाल होके - कलसाफ कर लुगी
राघव लन्ड निकाल थूक लगाते हुवे सुमिता केँ उपरलेत एक् हाथ सें लन्ड चूत पे सेट करते हुवे सुमिता कों देख - साफकर लेना
राघव लन्ड सेट करने केँ बाद दोनों हाथो कों सुमिता केँ सर केँ बदल मे रख सुमिता कों देखते हुवे धीरे-धीरे सें लन्ड अंदर घुसाने लगता हैं लन्ड चूत फैलाते हुवे पुरा अंदर तक घुस जाता हि सुमिता दर्द मे सिसक परती हैं अपने दोनों हाथो सें राघव कों पकर दर्दभरी आवाज़ मे - अहह दर्द हौ रहा हैं
राघव धीरे-धीरे धीरे-धीरे गांडआगे पीछे करते हुवे चुदाई करने लगता हैं संग मे सुमिता केँ गले पे गाल पे चुचे पे किस करने लगता हैं सुमिता राघव कों बाहों मे कस केँ पकरेअहह उफमा सिसकिया लियेजा रही थि
सुमिता केँ दोनों पेरहवा मे थें जौ राघव केँ धक्के सें हिलरहे थें जिसकी वजह सें पायलछन कि आवाजे भि गुजरही थि
सुमिता केँ चेहरे पे दर्द थां वोँ तरहामचल रही थि अपने चेहरे कों इधरउधर कियेजा रही थि
राघव पुरा सुमिता केँ उपरलेत तेज धक्के मरने लगता हैं
सुमिता कों औऱ दर्द होने लगता हैं सुमिता राघव केँ बाजू पकरे दर्द मे - धीरे-धीरे करिये नां दर्द हौ रहा हैं
राघव धक्के मारते हुवे सुमिता केँ दोनों हाथ मजबूती सें पकर औऱ तेज धक्के मरने लगता हैं
सुमिता दर्द मे आसु लिये तरप् केँ दर्द मे लेती रहतीफट फच्फट फट पायल कि छन्छन सुमिता कि दर्दभरी अहहउफ सिसकिया कि आवाज़ कमरे सें बाहर् तक आँ रही थि
10 मिनटबाद
राघव सुमिता कि चुदाई करकेलेत जाता हैं वही सुमिता उठ केँ आसुसाफ करके बाहर् घऱ केँ पीछे जाके पिसाब करती हैं सुईसुई सुई कि आवाज़ मस्तगुज लगती हैं
सुमिता पिसाब करने केँ बादआके लेत जाती हैं निंदउर गई थि अपने भइया अपने मायके जाने कि सोचकर हि
तोँ वही सुमिता केँ ससुराल मे कुछअलग हि चलरहा थां जौ सुमिता कों अंदाज़ा भि नहीं थां
आज केँ लिये इतना हि
भाग्य कि लकीर ( + ) (incest special) (adultery special) – New Episode
chapter 2
सुभह 10 बजरहे थें साहिल सुमिता सभी अपने कमरे मे तैयार होने मे लगे हुवे थें
साहिल तैयार भि हौ चुका थां आईने केँ सामने खरा सांतमगर मन दुःखी दिल मे दर्द लियेखरा थां राधिमा कों खोने केँ बाद साहिल केँ चेहरे सें वोँ इस्माइल गायब होँ गई थि मा बापू याँ किसी औऱ केँ सामने साहिल हस्ता मुस्कुराता रहतामगर अंदर मे दर्द लिये रहता
सुमिता कां भि सेम थां दोनों मा बेटे कि क़िस्मत मे दर्द हि दर्द सेहना लिखा हैं याँ कभी खुसिया भि आयेगी कोई नहीं जनता थां
सुमिता भि कमरे मे पेटीकोट मे खरी ब्लाउस निकाल रही थि पीछे गोरी चिकनी पीठ मस्तदिख रही थि सुमिता गहरीसोच मे डूबी हुई कपड़े निकलते हुवे पूरी नंगी हौ जाती हैं चूत पे घने कालेबाल गजबलग रहे थें
साहिल दरवाजे मे आके - मा कितना देर करोगी हद हैं मे तोँ तैयार भि होँ गय़ा
अंदर सें सुमिता - कितना जल्द मे हमेसा रहता हैं स्त्री कों समय लगता हि हैं तैयार होने मे जब तेरी विवाह होगी पत्नि आयेगी तब केहना उसेबरा आया
विवाह पत्नि यह शब्द साहिल कों राधिमा कि फिन सें याद वोँ दर्दजगा देती हैं
साहिल राधिमा कों बाहों मे लियेपैर केँ नीचे बैठा - राधिमा विवाह करोगी मुझसे बनोगी मेरी पत्नि
राधिमा अजीबनजर सें थोरा गुस्से सें साहिल कों देख - मेने प्रेम तुमसे कियु कियाकहो तुम् भि नाँ साहिल बेवकूफ होँ बहुत मेने तौ कई ड्रीम्स तुमहारे संग सजाये हैं
साहिल मुस्कुराते हुवे - अच्छा उस ड्रीम्स मे हमारे कितने बच्चे हैं
राधिमा बुरीतरह सर्म सें लाल होते हुवे साहिल केँ सीने पे दोनों हाथो सें मरते हुवे - छी कितने बेसरम हौ तुम् गंदे
साहिल हस्ते हुवे - अरे मेनेगलत तौ नहींकहा
तभी सुमिता बाहर् आते हुवे साहिल कों देख मुस्कुरा केँ - बता मे कैसीलग रहीहु
साहिल होस मे आते हुवे सुमिता कों उपर सें नीचे तक देखते हुवे - बहुत सुंदर लगरही हैं
सुमिता सच मे बहुत हसीनहोत लगरही थि सारी मे
सुमिता मुहबना केँ साहिल कों देख - कभी तौ अच्छे सें मेरी तारीफ कर दियाकर यहसरा मुहबना केँ कोन तारीफ करता हैं
साहिल - हद हैं मायहसभी बातें छोरोचलो चलते हैं
सुमिता - हाहाठीक हैं
राघव तौ 9 बजे हि अपने विद्यालय पढाने चला गय़ा थां
साहिल बाइक निकलता हैं सुमिता पीछेबैठ जाती हैं एक् हाथ साहिल केँ कंधे मे रख केँ
साहिल - चले
सुमिता - हु
साहिल निकल परता हैं अपनेमा केँ घऱ जौ 30 मिनट लगने वाले थें
सुमिता बाइक मे पीछे बैठी हुइ थि मगरवहा जाके जोँ होने वाला थां उसेसोच सुमिता बहुतडरी घबराये हुवे थि
सुमिता भाग्य मान भाग्य पे छोर देती हैं
सुमिता नजारे देखते हुवे - बेटा तेरी बहन कि उमर होँ गई हैं कोई लरकादेख विवाह करनी परेगी उसकेबाद तेरी
साहिल बाइक चलते नॉर्मल आवाज़ मे - दिदी कि विवाह करदो पहलेबाद मे मेरेबरे मे सोचना
सुमिता - कियु तुझेही विवाह नहीं करनी हैं
साहिल कुछदेर चुप रहने केँ बाद - मामीजी कि तबियत खराब हैं कुछ लेके जानां हैं
सुमिता मन मे - फिनबाद कों बदल दियाइस लरके नें
सुमिता - हा रास्ते मे कुछफल लेँ लेगे
हरिपुर गाव - साहिल केँ मामाजी कां घऱ
एक् कमरे मे
तांगे फैलाओ नाँ दोस्त अच्छे सें पुरा अंदर नहींजा पारहा
अंजली रोते हुवे किसी कों देख - नहीं प्लेस दर्द हौ रहा हैं पुरा अंदर नहीं इतने मे करलो
अंजान अंजली कि दोनों टांगों कों पकर फैलाने लगता हैं तौ अंजली पूरी ताकत सें अपने दोनों जांघों कों सताये रखने कि पूरी कोसिस करती हैं
अंजान अंजली कों देखते हुवे थोरा गुस्से सें - जांघे फैलाओ मेनेकहा
अंजली सामने इंसान कों गुस्से मे देख तांगे फैलाते हुवे रोते डरते हुवे चेहरे केँ संग - प्लेस धीरे-धीरे करना
अंजान - ठीक हैं समझ गय़ा
वही साहिल सुमिता आधे रास्ते मे थें गाव कां मार्ग थां खेत हि खेत चारों तरफ थें सुमिता पीछे बैठीखेत कि तरफ देखते जारही थि तभी एक् खेतआता हैं जिसेदेख सुमिता सिहर काप् जाती हैं सासेउपर नीचे होने लगती हैं सुमिता केँ हाथ साहिल केँ कंघे पे कस जाते हैं दूसरा हाथ कि मुठीकस जाती हैं
बाइक तेजी सें उसखेत सें होतेआगे निकल जाता हैं मगर सुमिता कि नजरउस खेत पे हि थि
खेत वाला मार्ग पार करते हि एक् छोटा सां चौकआता हैं साहिल कों एक् फल वाला ठेले दिखाई देता हैं तोँ साहिल ठेले वाले केँ पास बाइकरोक देता हैं
सुमिता बाइक सें नीचेउतर जाती हैं साहिल फल वाले सें सेब केला अनार लेता हैं फिन साहिल सुमिता 10 मिनट मे पहुँच जाते हैं
बाइक कि आवाज़ सुन अंजली बाहर् आती हैं साहिल अपनीमा कों देख अंजली बहुतखुश होती हैं अंजली नें टाइटसूट सलवार पहनी हुईँ थि औऱ अंजली केँ दोनों टाइटबरे गोरे चुचे अंदरदबे हुवेआधे तौ साफदिख रहे थें औऱ उभार भि साफदेख कर अंदाज़ा लगाया जा सकता हैं कितने बरे चुचे होगे
अंजली थोरा लंगराते हुवे साहिल लेँ पासआके गले लगते हुवे - हा गय़ा मेरा प्यारा भइया
साहिल भि अंजली केँ गले लगते हुवे - जी दिदी आँ गये हम्
कुनाल भि बाहर् आते हुवे सुमिता साहिल कों देख - आँ गयेचलो अंदर चलते हैं
साहिल कुनाल केँ पांव छुटे हुवे - मामाजी
राघव साहिल कों गले लगाते हुवे - मेरा भांजे गले लगते हैं तूँ तौ मेरासेर हैं
कुनाल सुमिता कों देखते हुवे -मेरी प्यारी बहना कैसी हैं
सुमिता - जीठीक हु भइया
सब एक् कमरे मे जाते हैं जिस कमरे मे सुनीता लेती हुईँ थि
सुनीता सुमिता साहिल कों देखते हुवे - ओ देखो तौ कोनआया हैं
साहिल सुनीता कों केँ पासबैठ - मामीजी कैसी हैं आप् अभि
सुनीता साहिल कों प्रेम सें देखते हुवे - ठीकहु बेटा बस थोरा बुखार हैं
सुमिता भि पास मे बैठते हुवे - भाभी जयादा तबियत खराब हैं तोँ होस्पिटल लेँ चलते हैं
सुनीता सुमिता कों देखते हुवे - अरे नहीं पहले सें बहुत अच्छी हुबस बुखार हि तौ हैं
सुनीता साहिल सें - बेटा बहुत हैंडसम होतेजा रहा हैं लगता हैं हमे तेरे लियेकोई लरकी ढूंढने कि जरूरत हि नहीं पड़ेगी
अंजली मुस्कुराते हुवे - औऱ नहीं तोँ किया मेरा भइया इतना हैंडसम हैं कि लरकिया स्वयं आयेगी
कुनाल - अरे दोस्त ऐसाहुआ तोँ अच्छा हि हैं मगर मेने सोचा थां मे अपने भांजे लेँ लिये लरकी ढूंढूंगा
सुमिता मुस्कुराते हुवे साहिल केँ सर पे हाथ फेरते हुवे प्रेम सें - मेरे बेटे कि भाग्य मे जौ लरकी लिखी होगी वोँ मिल हि जायेगी
साहिल अंदर हि अंदर दर्दभरी आवाज़ मे - नहींमा मेरी भाग्य मे जोँ लरकी लिखी थि उसे भाग्य नें हि मुझसे छीन लिया हैं
साहिल नॉर्मल सभी केँ सामने बैठ बातें करता हैं फिन 10 मिनटबाद सभी कों बातें करतेछोर गाव घुमने निकल जाता हैं
साहिल केँ लाइफ सें खुसिया चली गई थि बेजान कि गाव लें पतले रास्ते सें होतेजा रहा थां अपने मे खोयातभी कोई आवाज़ देते हुवे - देवर जीजीकई महीने बादआये बिना मुझसे मिलेजा रहे हैं यह उमीद तोँ आपसे नहीं थि
साहिल उस आवाज़ कों सुनते हि मन मे - कहाफस गय़ा दोस्त
साहिल पीछेमूर उस स्त्री कों मुस्कुराते हुवेदेख - भाभीमाफ करना मे तोँ सोचागाव घूम लेताहु आतेसमय आपसेमिल लूंगा
सामने खरी थि सारी मे एक् 20 साल कि हसीन महिला जोँ साहिल कों कातिल निगाहों सें अदा सें देखेजा रही थि
नाम हैं सुमन कि विवाह एक् साल पहले हुइ हैं
सुमन साहिल केँ पासआके मस्ती भरे अंदाज़ मे - उफ केसे देवर जी हैं आप् लोग भाभी केँ पीछेपरे रहते हैं मगर एक् आप् हैं मुझपे ध्यान हि नहीं देते इंग्नोर कर देते हैं
साहिल सांतखरा मुस्कुराते हुवे सुमन कों देख - आपका ध्यान ख्याल रखने केँ लिये भैया हैं मे नहीं
सुमन साहिल केँ एकदमपास खरी होके साहिल केँ आखो मे देखते हुवे - आपके भैया तोँ हैं मगर आप् भि मेरा ख्याल रखेगे तौ औऱ आनंद आयेगा मुझे
साहिल पीछे हटते हुवे - कितनी बेसरम हैं आप् सर्म कीजिये
साहिल फिन तेजी सें भाग जाता हैं
सुमन साहिल कों भागते देखजोर जोर सें हस्ते हुवे - कितना प्यारा मासूम हैं इस लिये तौ आपसे मस्ती करने मे अलग हि मज़ाआता हैं भागगये अगलीबार जाने नहीं दुगी
साहिल घूमते घूमते गाव सें गाव सें निकल सांत एक् पैर केँ नीचेबैठ फिन राधिमा केँ गम मे डूब जाता हैं राधिमा कां मुस्कुराता चेहरा साहिल कों बारबार यादआता हि रहता थां मगर एक् वोँ लम्हा जब राधिमा खून सें लतपथ साहिल केँ बाहों मे अपनादम तोर देती हैं वोँ मंजर साहिल कों रात कों सोने नहीं देता थां जब सें राधिमा गई साहिल नाँ खुश हैं नाँ सुकून सें सो पाता हैं
साहिल बहुत हैंडसम अच्छे साफदिल कां लरका हैं राधिमा केँ अलावा कभी भि किसी कों प्रेम याँ गंदीनजर सें नहीं देखा
शाम 3 बजे
सुमिता घऱ केँ बाहर् खरी थि कोईआता हैं बाइक सें औऱ सुमिता कों बैठा केँ लेकेचला जाता हैं सुमिता डरी सहमी बैठी थि ऐसालग रहा थां अब वोँ रो देगी बाइक जौ चलारहा थां सुमिता कों देख मुस्कुरा रहा थां
8 मिनटबाद बाइक एक् मेडिकल स्टोर केँ पास रुकती हैं
बाइक वाला सुमिता कों देखते हुवे मुस्कुरा केँ - कोन सां कॉंडोम लू
सुमिता नजरे नीचे किये अपनी मुठीकसे कपते होठो सें रोने वाली आवाज़ मे धीरे-धीरे सें - जोँ जोँ
बाइक वाला पैसे निकाल सुमिता केँ हाथो मे देते हुवे - हुजाओ लेकेआओ स्वयं
सुमिता हैरान बाइक वाले कों देख रोने सि आवाज़ मे - प्लेस मतकरो ऐसा
बाइक वाला शैतानी मुस्कान देते हुवे सुमिता कों देख - जाओ नहीं तोँ मे किसी औऱ केँ पासचला जाउंगा
सुमिता बाइक वाले कि बातसुन समझ पूरीतरह काप्डर जाती हैं
सुमिता डरते हुवे नजरे नीचे किये - नहीं नहीं मे जातीहु
बाइक वाला मुस्कुराते हुवे - बहुतखूब यह हुलिया सही करकेजाओ
सुमिता स्वयं कों नॉर्मल करती हैं ताकिकोई देख तौ सभी नॉर्मल लगे
सुमिता मेडिकल स्टोर कों देखती हैं कुछलोग खरे थें इस लिये सुमिता जा नहींपा रही थि
बाइक वालासभी देखसमझ रहा थां मगर वोँ यहसभी देखमजे लें रहा थां
मेडिकल स्टोर सें लोगचले जाते हैं जबकोई नहीं थां तब सुमिता चलते हुवे मेडिकल स्टोर मे आती हैं पीछेखरा बाइक वाला अपने लन्ड कों सेहलते हुवे - उफअब मज़ा आयेगा सोचा थां रात कों अच्छे सें लुगामगर रहा नहीं गय़ा
सुमिता मेडिकल स्टोर वाले केँ पासखरी थि सांत थोरा सर्म लिये बोलने कि हिम्मत नहीं होँ रही थि
स्टोर वाला सुमिता कों देख - भाभीकुछ चाहिये आपको
सुमिता स्टोर वाले कों देखफिन नजरे नीचे लरके हिम्मत करके धीरे-धीरे सें सें - वोँ वोँ कॉंडोम चाहिये
स्टोर वालासुन थोरा हैरान होता हैं औऱ सुमिता कों उपर सें नीचे तक देखते हुवेमन मे - कियामाल हैं दोस्त कयामत हैं कोन क़िस्मत वाला हैं जोँ इसकी लेने वाला हैं उफ
स्टोर वाला - जीकोन सां दु कॉंडोम
सुमिता नजरे नीचे किये मुठी कसते हुवे - Durex
स्टोर वालामन मे - उफयह कॉंडोम जायेगा इसकी चूत मे अंदर तक उफसोच रहाहु कैसी चूत होगी भाभी कि
स्टोर वाला सुमिता कों गोर सें देखते हुवे धीरे-धीरे सें - भाभीजी नया एक् कॉंडोम आया हैं वोँ देदु बहुत आनंद आयेगा
स्टोर वाली कि बातसुन सुमिता पूरीशोक हैरान होती हैं औऱ गुस्से सें स्टोर वाले कों देख - जौ बोला हैं जोँ दोयहलो पैसे, सुमिता पैसे सामने रख देती हैं
स्टोर वालाडर जाता हैं औऱ जल्द सें Durex कां पेकेट निकाल दे देता हैं सुमिता लेँ लेती हैं औऱ गुस्से सें बाहर् बाइक वाले केँ पासआती हैं फिन बाइक वाला बिना देरी किये एक् घऱ केँ कमरे मे सुमिता कों लेकेआता हैं
बाइक वाला सुमिता कों पीछे सें बाहों मे भरते हुवे - बहुततरस रहा थां अबआई हौ
सुमिता खरी काप्रही थि रोने वैसामुह बनाये खरी अपनी भाग्य कों कोसरही थि
बाइक वाला सुमिता केँ सारी सीने सें हटा केँ अपना एक् हाथ सुमिता केँ ब्लाउस केँ ऊपर सें बरे एक् चुचे पे रखते हुवे - आते वक्तउस खेत कों देखा हि होगाजिस खेत मे तेरी मस्त चूत मारी थि हु
सुमिता अपने चुचे पे बाइक वाले कां हाथफिल करते हि काप् जाती हैं आखो सें आसु निकलआते हैं होठ बॉडी काप्रहे थें
30 मिनटबाद
सुमिता दर्द मे आसु लिये लंगराते हुवे बाहर् आती हैं स्वयं कों पूरीतरह सही करके
बाइक वाला सुमिता कों बाइक पे बैठा केँ फिनघऱ केँ बाहर् छोरचला जाता हैं
सुमिता दर्द मे थोरा लंगराते हुवे अंदरआती हैं तौ साहिल आगन मे बैठा सुमिता कों देख - माकहा गई थि आप्
सुमिता साहिल कों देख उसकीबात सुन घबरा जाती हैं मगर जल्द हि स्वयं कों संभलते हुवे - अरे बेटा अपनी दोस्तो सें मिलने गई थि
साहिल - अच्छा
सुमिता नजरे बचाते हुवे सुनीता केँ कमरे मे चली जाती हैं
रात 8 बजे
खानां खानेसभी बैठे हुवे थें सुमिता केँ पास साहिल अजलि थि
दूसरी तरफ राघव सुनीता
कुनाल सुमिता सें - छोटी अंजली कि उमर होँ गई हैं विवाह कर देते हैं मेरीनजर मे एक् लरका हैं किया कहती हौ
सुमिता राघव कों देख - भैया मुझे साहिल केँ बापू सें बात करनी होगी विवाह तोँ करनी हि हैं
अंजली चुपचाप खानां खाने मे लगी थि साहिल बेचारा भि अपने मे थां
सुनीता कुनाल सें - सुनिये आप् स्वयं नंदुई जी सें बातकर लेना नाँ
कुनाल खानां खाते हुवे - ठीक हैं यहसही रहेगा
खानां पीना होने केँ बाद साहिल सीधा अपने कमरे मे आकेखाट पे लेतफिन गम राधिमा कि यादों मे चला जाता हैं
तभी अंजली आके साहिल केँ पासबैठ - कहा खोयाहुआ हैं कोई गिर्लफ्रेंड कि यादों मे तोँ नहीं
अंजली एकदमसही थि साहिल अपने प्रेम कि यादों मे खोया थां मगरगम मे वोँ प्रेम दुनिया छोरजा चुकी थि
साहिल अंजली कों देख नॉर्मल आवाज़ मे - आप् बनाओ बॉयफ्रेंड मुझे नहीं चाहिये
अंजली हैरान होके साहिल कों देख - अच्छा जी झूठा
साहिल - सोनेदो मुझे आप् भि जाकेसो जाओ
अंजली साहिल कों गोर सें देखते हुवे - भइयातु बदल गय़ा हैं पहलेखूब मस्ती करता थां मगरअब
अंजली खरी होके एक् बार साहिल कों देखती हैं फिनचली जाती हैं
अंजली केँ जाने केँ बाद सुमिता नाइटी मे आती हैं औऱ साहिल केँ पासबैठ साहिल कों देख - बेटा कहा खोया रहता हैं मुझे हमेसा लगता हैं तुँ कुछ छुपारहा हैं मुझसे
साहिल सुमिता कों देख - आपकोऐसा कियु लगता हैं मा
सुमिता - बसफिल होता हैं माहु तेरी
साहिल - ऐसीकुछ बात नहीं हैं
साहिल फिन दूसरी तरफ करवट लेके सोने लगता हैं
सुमिता साहिल कों देखमन मे - बेटा मे सुरु सें चाहती थि तूँ मेरेसंग मस्ती करे एक् साथी कि तरहमगर तुँ ऐसा नहीं हैं सुरु सें मुझसे नॉर्मल हल्का बातें करतेरहा हैं प्रेम कैर बहुत करता हि मगर
सुमिता खरी होके एक् नजर साहिल कों देख जाते हुवेमन मे - मे चाहती हु तुम् मेरेसंग वक्त बिताओ बातें करो
सुमिता अकेला पनफिल हमेसा करती थि इस लिये चाहती थि उसका बेटा उसे टाइमदे बातें करे मस्ती करे
रात 11 बजे
अंजली कमरे मे लेती किसी सें बातें करने मे लगी थि नंगी थि चूत मे उंगली कियेजा रही थि
दूसरी तरफ सुमिता केँ ऊपरकोई लेतातेज धक्के माररहा थां सुमिता मुहबंद किये दर्द मे रोयेजा रही थि तरप्रही थि
सुमिता उस इंसान कों दूर धक्का देते हुवे - दर्द हौ रहा हैं समझ नहींआता आपको
वोँ व्यक्ति गुस्से सें सुमिता केँ चूत मे लन्ड घुसा केँ दोनों हाथ सुमिता कों पकरे हुवे सुमिता कों देख - सांतरह समझ गई
वही अंजली किसी सें मोबाइल पे - अमर जल्द हि हमारी विवाह होगी हम् संग रहेगे
अमर - मे तौ बेताब हु मेरीजान तुमसे विवाह करने केँ लिये
अंजली - बसअमर जल्द हि हम् एक् होगे
सुभह होती हैं
साहिल सुनीता सें जोँ बैठी थि खटिये पे - मामीजी दिदी नहींआई
सुनीता - अरे वोँ आज आयेगी कल नहीं आँ पाईकुछ वजह सें
साहिल - अच्छा
अंजली खानां पास मे हि बैठीबना रही थि सुनीता भि आके साहिल केँ पासबैठ जाती हैं
कुनाल कमरे मे बाहर् आके - अच्छा मे खेत होकेआता हु
कुनाल चला जाता हैं
शाम 3 बजे मौसम अच्छा थां सुनीता अबठीक थि सुमिता सुनीता खेत कि तरफ घूमने जाते हैं बातें करते हुवे
सुनीता - नंदोई जीठीक हैं नाँ अब करते हैं चुदाई आपकी
सुमिता सुनीता कों बिना देखे नॉर्मल आवाज़ मे - कभीकभी
सुनीता - किया अभि भि पूरीतरह ठीक नहीं हुवे
सुमिता - हु
सुनीता रुक सुमिता कों देख - जानती हु आप् मुझसे गुस्से नफरत करती हैं आप् सही भि हैं मे यही लायकहु मगर मे स्वयं कों चालक समझती थि मगर मे स्वयं इस दलदल मे फस गई
सुमिता कुछ नहीं बोलती हैं मगरआखो मे क्रोध साफ सुनीता केँ लियेदिख रहा थां
सुनीता सुमिता फिनखेत मे चलते अंदर तक जाने लगते हैं
सुनीता - अब मुझे बुरा लगता हैं मेने आपकेसंग जौ कियागलत किया
सुमिता थोरा गुस्से मे - आपकी बातो मे आके मेने वोँ कदम उठाया मेरीबस सें बरी गलती थि उसदिन मे स्वयं कों रोक लेती आपकी बातो मे आके वोँ सभी नहीं करती तोँ आज मे इतनासभी नहीं सेहती मे हि पागल थि बेवकूफ थि गलती तौ मेरी हैं जोँ मे खैर मे सभीसेह रहीहु मुझेबस इतना चाहिये मेरे बेटे कों बता नाँ चले मेरेसंग किया होँ रहा हैं नां मेरे पति बेटी कों नहीं तोँ मे सभी कि नजर मे गिर जाउंगी उससे अच्छा मे मरना मनपसंद करुगी
सुनीता कुछ नहीं कहतीचुप रहती हैं
थोरिदेर चुपी केँ बाद सुनीता सुमिता केँ सामने खरी सुमिता केँ आखो मे देख - हा अपनी गलती मानती हुमगर ननदीजी खाइये शपथ अपने बेटे कि औऱ कहिये यहसच नहीं हैं कईबार आप् स्वयं चुदने आईउस इंसान केँ नीचे लेटने आई अपनी प्यास भुजाने आई औऱ तौ औऱ आप् उस इंसान सें पेग्नेंट भि होँ गई मगर अपने वक़्त रहते बच्चा गिरवा दिया बोलिये यहसच हैं याँ नहीं
सुमिता पूरीहिल जाती हैं नजरे नीचे किये - हायहसच हैं, सुमिता फिन सुनीता कों गुस्से सें देख, मगरयह भि सच हैं आप् कि वजह सें मे इस दलदल मे फसीहु नहीं तोँ आज मे जैसे भि जीरही होती बहुतखुश होतीअब सें तोँ बहुतखुश
सुनीता नजरे नीचे किये - आप् सही हैं
साहिल आजफिन अकेले बैठा राधिमा कों याद करकेआसु बहारहा थां वही अंजली किसी केँ बैड पे लेती तांगे फैलाये थि अंजली केँ उपरकोई लेतातेज धक्के माररहा थां
अंजली दर्द मे रोते हुवे - नहीं नहीं इतनीजोर सें नहींमर गई दर्द होँ रहा हें प्लेस दयाकरो मुझपे
खैरशाम होती हैं घऱ केँ पीछे राघव सुमिता सें अकेले मे बातकर रहा थां सुमिता खरी सुनीरही थि
रात 9 बजे
साहिल केँ घऱ
राघव कमरे मे किसी जवान लरकी केँ तांगे उठाये धक्के पे धक्के मारेजा रहा थां लरकी दर्दमजे मे - अहहसर दर्द होँ रहा होँ अहह धीरे-धीरे
राघव - उफ बेटी दर्द मे हि तोँ आनंद हैं
राघव चुदाई करते हुवे - तेरीसील जब तोरी थि उफ आनंद आँ गय़ा थां
सुमिता साहिल केँ पीठ पीछे अकेले होने कां फायेदा राघव अच्छे सें उठारहा थां अपनेघऱ मे जिसखाट पे अपनी पत्नि सुमिता कों चोदता थां उसी पलंग पे एक् जवान लरकी कों राघवचोद रहा थां
साहिल केँ मामाजी केँ घऱ
रात 11 बजरहे थें एक् कमरे मे दर्द रोने पायल कि आवाजे गुजरही थि सुमिता कि आवाज़ - मर गई प्लेस अंदर तक मत डालोमर जाउंगी
सुनीता -आनंद भि तोँ आता हैं आपको दिखाती नहींमगर यह आपकी चूत जोँ रस निकाल रही हैं बतारही हैं
तभीतेज धक्के केँ संग दरवाजा खुलता हैं अंदर कां सीनकुछ ऐसा थां सुनीता नंगी बैठी थि बगल मे अंजली लेती थि नंगी
औऱ सुमिता तांगे फिलाये थि चूत मे मोटा लम्बा लन्ड घुसाहुआ थां सुमिता घोरीबनी थि उसकेउपर कुनाल थां
दरवाजा खुलते हि आवाज़ सें कुनाल सुमिता सुनीता अंजली सभी सामने देखते हि तोँ साहिल आखो मे आसु लिये गुस्से सें कुनाल सुनीता कों देखरहा थां
वही सुमिता अंजली जम सि जाती हैं
सुमिता जौ नहीं चाहती थि वही हौ चुका थां
आज केँ लिये इतना हि
भाग्य कि लकीर ( + ) (incest special) (adultery special) - Next part mein bada twist
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