भाग्य कि लकीर ( + ) (incest special) (adultery special) – New Episode
chapter 3
शाम केँ वक्तजब सुमिता सुनीता खेत घूमने गये थें उस वक्तऐसे हि नहींगये थें दोनों कों किसी नें बुलाया थां औऱ बुलाने वालावही बाइक वाला थां
सुनीता सुमिता एक् मक्के केँ खेत केँ अंदर बैठे थें आसपास कोई नहीं थां सुनीता सुमिता कों देख - यहीइसी खेत मे हम् करदोबार चुदे हैं कितनी खराब क़िस्मत हैं हमारी हम् एक् जवान लरके केँ चंगुल मे फसगये हैं औऱ वोँ लरका हमारी चुदाई जोरों सें करता हैं औऱ हम् चाहकर भि कुछ नहींकर पाते
सुमिता चुप थि सांत थि भाग्य कों बारबार कोसरही थि सुनीता सुमिता कों देखते हुवे - आप् लरके सें भि पेग्नेंट होँ गई थि यकीन नहीं होता औऱ अपने भइया सें भि दोबार पेग्नेंट
सुमिता सुनीता कों थोरा गुस्से सें देख - जखम पे नकम् अच्छे सें लगारही हैं आप् भाभी
सुनीता - माफ करनामगर मेनेसच तोँ कहा आप् स्वयं
सुनीता गुस्से सें - बस भाभी बहुत हौ गय़ा यहमत भूलिये मे इस दलदल मे आपकीवजह सें हु
सुनीता चुप होँ जाती हैं
तभीवही लरका जोँ 18 कां जवान थां बता अंदरआता हैं सुनीता सुमिता कों देख मुस्कुराते हुवे दोनों केँ पासबैठ जाता हैं
लरका परोस कां थां सुमिता सुनीता अच्छे सें जानते हैं यह लरका किसका बेटा हैं मगर सुमिता सुनीता केसेइस लरके केँ जाल मे फसे औऱ कईबार यह लरका सुमिता सुनीता कों चोद चुका हैं सभीआगे पताचल जायेगा
लरकेमा नाम हैं अरुण
अरुण दोनों कों देख - चलो सुरु करते हैं
सुमिता सुनीता सिहर जाती हैं
लरका पहले सुनीता कि चुदाई करना सुरु करता हैं खेत मे अहहउफ मा सिसकिया कि आवाजे गुजने लगती हैं
फिनबरी सुमिता कि आती हैं लरका लन्ड चूत केँ छेद पे रख सुमिता कों देख - उफ मस्तमाल हैं आप् ऑन्टी
सुमिता डरी सहमी अरुण कों देखती रहती हैं एक् तेज धक्का औऱ सुमिता दर्द मे चीख परती हैं
फिन सुमिता दर्द मे मर गई प्लेस अरुण बेटा धीरे-धीरे दर्द होँ रहा हैं प्लेस बेटा धीरे-धीरे करोमर गई मा
1 घंटेबाद सुमिता सुनीता घऱ लौटने लगते हैं बातें करते हुवे
सुनीता सुमिता सें - बहुत मोटा हैं नाँ अरुण कां लन्ड
सुमिता सुनीता कों देखती हैं गुस्से सें सुनीता फिनचुप हौ जाती हैं
अबरात केँ सीन पे आते हैं साहिल अंदर आँ चुका थां
सुमिता घोरीबनी थि कुनाल धक्के माररहा थां सुमिता कि चूत पानी निकाले जारही थि मगरजब साहिल अंदरआता हैं आवाज़ होती हौ तोँ कुनाल पासभी पीछे देखते हैं अभि भि कुनाल कां मोटा लन्ड सुमिता कि मस्त मोती चूत केँ अंदर घुसा थां किसी बेटे कों अपनी कां कों इसतरह देख्ना कितना दर्दभरा होता
साहिल कों देखते हि कुनाल पीछे होता हैं फक केँ संग मोटा लन्ड सुमिता केँ चूत सें निकल जाता हैं जौ पुरा गिला थां सुमिता घोरीबनी पीछे साहिल कों देखजम गई थि साहिल कि नजर अपनीमा कि चूत पे जाती हैं जोँ पानी निकाल रही थि चूत फैल गय़ा थां छेद अंदरलाल लाल गुदासाफ दिखरहा थां
अंजली भि अपने भइया कों देखजम जाती हैं कुनाल सांत थां सुनीता डरी थि
सुमिता अंजली होस मे आते हि जल्द सें स्वयं कों डक लेते हैं सुमिता साहिल कों देख कपते रोते हुवे - बेटा
साहिल सुमिता कों देख - वाउमा भइया केँ सामने नंगी चुदवा रही हैं मेरेआते हि अपनी बॉडी कों धक लिया बहुतखूब
सुमिता सर्म डरते रोते हुवे साहिल केँ पासआके - प्लेस बेटा मेरीबात
तभी कुनाल बीच मे आते साहिल सें - भांजे जोँ देखा अपने तक रख तुम को भि मजे मिलेंगे मगर किसी कों अपने बाप कों बताने कि कोसिस कि तौ तेरा वोँ हाल करुगा जिसेभूल नहीं पायेगा
साहिल डरते हुवे कुनाल कों देख - मामाजी प्लेस मारना मतमाकुछ कहो नाँ तुम्
सुमिता कुनाल कों देख - भइया प्लेस साहिल किसी कों नहीं बताएगा
कुनाल साहिल केँ कंधे पे हाथरख - तबठीक hain चल तुम्हारी तरफ जिसके संगमजे करने hain कर लेँ
साहिल सुमिता कों देख डरते हुवे - मा केँ संग
सुमिता पूरीशोक हैरान होती हैं फिन नजरे नीचे किये धीरे-धीरे सें - ठीक हैं
कुनाल हस्ते हुवे - बहुत अच्छे भांजे तेरीमा हैं हि गजब कि उफ आनंद आँ जाता हैं
कुनाल सुमिता कों देख - छोटी खाजना dikhao अपने बेटे कों छुपा केँ कियुरखा हैं
सुमिता कुनाल कों देखती हैं फिन साहिल कों देखते हुवे अपनेउपर सें चादरहटा देती हैं सुमिता अब पूरी साहिल केँ सामने नंगी थि
साहिल सुमिता कों देख - एक् प्रश्न किया आप् अपनी मर्जी सें मामाजी केँ संगसभी कररही हैं
सुमिता कुनाल कों देखती हैं फिन नजरे नीचे किये - नहीं औऱ हा भि
कुनाल गुस्से सें सुमिता कों देख - कियाकहा
सुमिता डरते हुवे कुनाल कों देख - आप् कि
सुमिता आगेकुछ बोलती कुनाल एक् चाटा सुमिता कों मारने जाता हैं तभी साहिल एक् जोर कां लात कुनाल केँ पेट पे मरता हैं कुनाल दर्द मे नीचे गिरता हैं
सभीदेख शोक होँ जाते हैं कुनाल भि पेट पकरे दर्द मे शोक मे कुनाल कों देखता हैं
साहिल कुनाल केँ पास जाके नीचेबैठ कुनाल केँ बाल पकर् कुनाल कों देख नॉर्मल आवाज़ मे - मामाजी जानते हैं आप् मेरा एक् औऱ रूप हैं जौ मेने किसी कों नहीं दिखाया जिसे दिखाया वोँ मेरेपास भि नहींआते आपकोलगा मे भोला मासूम हुडरा केँ मुहबंद कर दोगे हैं नाँ
हा दोस्तो साहिल सुरु सें सभी कि नजर मे भोला मासूम बन केँ रहा हैं मगर बुरे लोगो केँ किये साहिल मौत सें कम नहीं
साहिल अपने मामाजी केँ फेस पे मुक्के पे मुक्के मरतेहुए - तेरी तेरीवजह सें मेरीमा बेहन इतनासभी सहते आँ रही हैं केवल तेरीवजह सें
साहिल मारते जाता हैं औऱ कुनाल दर्द मे चीखने चिल्लाने लगता हैं
सुमिता अंजली डरीशोक देखते रह जाते हैं
जब साहिल कुनाल अपने मामाजी कि हालत खराबकर देता हैं तोँ खरा होके पीछे सें चाकू निकलता हैं जिसेदेख सभी काप् जाते हैं कुनाल डर केँ मारेमुत देता हैं
साहिल कुनाल कों देखता हैं कुनाल दर्द मे - नहीं नहीं भांजे नहींमाफ करदेमत मार मे मामाजी हु तेरा
साहिल गुस्से मे - तु मामाजी नहीं कमीना हैं तुम्हें मारना होगा
साहिल जैसे हि कुनाल कों मरने वाला होता हैं बीच मे सुमिता आते हुवेडरी रोते हुवे साहिल कों देख - मतमार बेटे जितनी गलती तेरे मामाजी कि हैं उतनी मेरी भि हैं
साहिल अपनीमा कों देखता हैं फिन एक् स्थान कुर्सी पे बैठसभी कों देख - अच्छे सें जनताहु किसकी कितनी गलती हैं औऱ इस एक् साल मे किया क्याँ हुआ हैं
सभी केँ सभीशोक साहिल कों देखते हैं
सुमिता कपते होठो सें - तुम्हे केसेपता
साहिल सुमिता कों देख - मुझे इतनापता हैं जितना आप् सभी कों नहींपता हैं
साहिल सुनीता कुनाल कों देख - यह दोनों कि वजह सें आप् फसी मामाजी मामीजी नें आपकोमिल केँ मजबूर किया ताकि आप् मामाजी केँ नीचे आँ जाए आपके अंदर एक् प्यास थि औऱ आप् फस गई अपने भइया केँ नीचे आँ गई एक् वजह औऱ थि आपको मामाजी केँ नीचेआने कि जोँ आपने किसी कों नहीं बताया
सुमिता हैरान कपते हुवे - कोन सि
साहिल - बापू
सुमिता यह सुनते हि हिल जाती हैं
साहिल - आपकोकई बार एहसास हुआ आप् गलतकर रही हैं आप् पीछे हटना चाहामगर मामाजी मामीजी अपनी बातो मे फसा केँ आपकोफिन मजबूर कर देते थें
तबआया अरुणफिन आप् दोनों उसकेजाल मे फसगये
कुनाल हैरान शोक सुमिता सुनीता कों देख - कियाबोल रहा हि साहिल
कुनाल कों नहींपता थां अरुण सुमिता सुनीता कों चोदरहा हैं उसके पीछे
साहिल अंजली कों देख - आपसे भि यह उमीद नहीं थि दिदी जिस लरके सें आप् प्रेम करती हि वोँ कितना बरा कमीना हैं
अंजली नजरे नीचेकर लेती हैं
साहिल सब कों देखते हुवे - मेरा एक् साथी हैं अशोक एक् दिन वोँ सिग्रेट पीरहा थां उसने मुझे दिया पीने कों मेनेमना कर दियामगर उसनेजोर दिया तौ एक् बार पीने सें किया होगासोच मेनेपी लिया उसकेबाद अशोक हमेसा मुझे सिग्रेट पीने कों बोलता औऱ मे नाँ चाहते पी लेता उसका नतीजा मुझेआदत लग गई फिन मे रोज स्वयं खरीद केँ सिग्रेट पीनेलगा
सभी हैरान शोक साहिल कि बातें सुनरहे थें
साहिल - फिन मेरी लाइफ मे आई राधिमा मेरा प्रेम एक् दिन उससे मुझे सिग्रेट पीतेदेख लिया बहुत क्रोध कि मुझेशपथ दि तब जाके मे सिग्रेट छोर पाया उसमे किसकी गलती थि अशोक याँ मेरी
साहिल सुमिता कों देख - बताओमा
सुमिता कपते हुवे - दोनों कि औऱ यहबात मेरे लिये थि औऱ तुम् सही होँ
सुमिता फिन रोने लगती हैं
साहिल अपने दोनों हाथो कों देखते हुवे - क़िस्मत कों मुझसे दया नहींआई जिसे मे बहुत प्रेम करता थां जिसके संग विवाह करके अपनी लाइफ गुजरना चाहता थां वोँ मेरा प्रेम राधिमा मेरे हाथो मे हि उससेदम तोर दिया
साहिल कहते हुवेरो परता हैं
सभीफिन हैरान शोक होते हैं जयदा सुमिता अंजली दोनों कों भि बता नहीं थां साहिल किसी सें प्रेम करता हैं
सुमिता जल्द सें जाके नंगी साहिल केँ गलेलग रोते हुवे - तु भि इतनासभी सहते आँ रहा हैं मुझेपता नहीं थां बेटा
साहिल सुमिता कों दूर करके कुनाल सुनीता कों देख - मगरइन दोनों कों मारना होगा
कुनाल सुनीता डरते हुवे - नहीं नहींमत मारो
साहिल गुस्से मे पागल होके तेजी सें जाके कुनाल केँ सीने मे चाकू मरता हैं फिन सुनीता केँ दिल मे चाकूलगा थां दोनों जल्दी खतम होँ जाते हैं
सुमिता अंजली पथर्बने खरे देखते रह जाते हैं
साहिल चाकूफेक कुर्सी पे जाके आहिस्ता बैठ जाता हैं सुमिता साहिल केँ पास घुटने पे बैठ रोते हुवे - तूनेयह किया क्याँ
साहिल सुमिता कों देख - बुरालग रहा हैं कहीइस लिये तोँ रही आपका दोस्त चला गय़ा तोँ मजे केसे करुगी
सुमिता जोर सें चीखते रोते हुवे - बसकर बेटा बसकर मुझे मात्र तेरी परवाह हैं तूने दोनों कों मार दिया तुम कोजेल होगी मे केसे जीयुगी तेरे बिना
अंजली कपते रोते - भइया किया क्याँ तूनेमार डालाहा मा मेरी भि उतनी गलती थि मगरमार देना
सुमिता रोते हुवे - किया होँ गय़ा यहसभी मे अगरउस दिन स्वयं कों रोक लेती तौ यहसभी नहीं होता
सुमिता साहिल कों देख - बेटा भागजा यहा सें कहीदूर चलाजा
साहिल - औऱ आप् दोनों कां किया सांतमा सांतखेल अभि बाकी हैं
साहिल सुमिता कों देख - आप् केँ बदन कों कई लोगो नें नोचा हैं सच हैं नां मा
सुमिता हैरान शोक साहिल कों देख रोते हुवे कपते होठो सें - तुम कोसभी केसेपता हैं
साहिल सुमिता कों देख - गलती मामाजी मामीजी हैं आप् कों दलदल मे लेकेआई जिसका नसा आपकेउपर चढ़ गय़ा औऱ आप् जैसे मे अशोक कि वजह सें सिग्रेट पीने कां लतलगा गलती तोँ आपकी भि हैं
खैर
साहिल अंजली कों देख - आपकेपेट मे बच्चा हैं मामाजी कां सही
अंजली शोक मे साहिल कों देखती हैं सुमिता भि शोक मे अंजली कों देखती हैं
अंजली रोते कपते - तेरीसभी पता हैं केसे केसे भइया केसे
साहिल सुमिता अंजली कों देखते हुवे - समझलो सुरु सें लेके आप् दोनों मेरा प्रेम राधिमा केँ संग जौ सभीहुआ मेनेसभी देखा हैं मुझे इतनासभी पता हैं जितना आप् दोनों कों नहींपता
सुमिता अंजली हैरान कंफ्यूज साहिल कों देखते रहते हैं
साहिल - मा बताओमान लो मुझे वक़्त केँ पीछे जाने कां मोक्का मिला तोँ आप् किया चाहेगी मे करू बोलिये
हालत कों समझ सुमिता आसु लिये - मे चहुंगी जब मेनेगलत कदम उठाये उस वक़्त तु मुझेरोक लें बचा लें अंजली राधिमा कों भि
साहिल सुमिता कों देखते हुवे - हुमगर आप् दोनों कों सजा तोँ मिलेगी कहो कियासजा दु आप् दोनों कों
सुमिता अंजली - जौ तु चाहे
साहिल - ठीक हैं वक्त केँ पीछे जाके मे सभी रोकुगा फिन आप् दोनों कों पता केँ चोदुगा अपने बच्चो कि मा बनाऊँगा मंजूर हैं
सुमिता अंजली पहलेशोक हैरान होते हैं
सुमिता साहिल कों देख - पागल वाली बातें मतकरकोई वक्त केँ पीछे नहींजा सकता
साहिल - अगर गय़ा तौ
सुमिता अंजली साहिल कों देख - अगर गय़ा तौ हमे तेरीसजा मंजूर हैं
साहिल - कितनी अजीबबात हैं सजा दुगामगर उस टाइमयाद नहीं रहेगा आप् कों याँ किसी कों
साहिल खरा होके कपड़े निकलते हुवे - इस लियेसजा अभि दूँगा वक्त केँ पीछे जाके भि
साहिल नँगा होता हैं साहिल कां 12 इंच लम्बा 6 इंच मोटा लन्ड देख अंजली सुमिता कप् जाते हैं
साहिल सुमिता कों लेता लेता हैं सुमिता कुछ नहीं कहती साहिल सुमिता केँ टाँगे फैला केँ चूत केँ छेद पे लन्ड रख सुमिता कों देख - घुसा दूँगा तौ आप् मुझसे नफरत करेगी नाँ
सुमिता आसु लिये साहिल कों देख - बिल्कुल नहीं कियुंकी तु मेरा बेटा हैं
साहिल चूत केँ अंदर लन्ड धीरे-धीरे सें घुसते हुवे सुमिता कों देखते हुवे - मा बेटे मे यहसभी नहीं होता
सुमिता दर्द मे साहिल कों देख - पर्र मा स्वयं चाहे तोँ सभी हौ सकता हैं
साहिल सुमिता कों देख - मेरी रंडि बनेगी याँ स्त्री
सुमिता दर्द मे आसु लिये - तु जौ मुझेबना केँ रखे मंजूर हैं मुझे
साहिल एक् जोर कां धक्का मारता हैं सुमिता जोर सें चीख परती हैं आखेफैल जाती हैं मुह खुले दर्द मे आवाज़ भि नहीं निकल पाती
अंजली सभीदेख डर सें काप् जाती हैं
1 घंटेबाद
साहिल सुमिता कों अंजली कों देख -मे इतना बुरा नहींहु टाइम केँ पीछे जाके मे आप् दोनों कों अपने प्रेम मे गिरा केँ अपना बनाऊँगा आप् दोनों कों बहुत प्रेम दूँगा
सुमिता अंजली लंगरते हुवे साहिल केँ पासआके प्रेम सें देख - पागल तौ नहीं हौ गय़ा क्याँ बातें कियेजा रहा हैं
साहिल - पागल नहींहु यह 100 सच हैं इसी लिये मामाजी मामीजी कों मारामगर वक्त केँ पीछे जाके मे मामीजी कों रंडि बनाऊँगा औऱ जिन लोगो नें आपकेसंग गलत किया हैं सभी कि माचोद दूँगा
साहिल सुमिता अंजली कों देख - आप् दोनों कों अभि जोँ किया याँ हुआकुछ याद नहीं रहेगा चलताहु वक्त केँ पीछे
साहिल - साथी पोटल खोलो मुझेउस वक्त मे भेजदो जबयह सारा कांड होना सुरुहुआ थां
साहिल केँ अंदर सें एक् आवाज़ आती हैं
आवाज़ - ठीक हैं साथीयाद रखना मे तेरेसंग नहीं रहुंगा मगर तुम् मुझेवही जहा मे तुम्हे मिला लेने आँ जानां
साहिल - वादा हैं मित्र
सुमिता अंजली हैरान पुरेशोक थें दोनों कों लगरहा थां साहिल सच मे पागल हौ गय़ा हैं
तभी एक् पोटल खुलता हैं जिसेदेख सुमिता अंजली कों यकीन नहीं होता
साहिल सुमिता अंजली कों देख - जाते हुवे इतना हि किया आप् दोनों कों मज़ाआया
सुमिता अंजली हैरान शोक मे साहिल पोटल कों देखते हुवे - बहुत
साहिल मुस्कुराते हुवे पोटल केँ अंदर जाने लगता तोँ
सुमिता - रुको बेटा
साहिल पीछे सुमिता कों देख - जीमा
सुमिता नजरे नीचेकर - मुझेगलत तोँ नहीं तुमने सभीदेख लिया स्वयं तौ तुमने देखा होगा मे केसे
साहिल बीच मे - नहींमा आप् तौ मेरी प्यारी मा हैं अच्छी मा रहेगी
सुमिता आसु बहाते हुवेखुश होके - जारहे होँ टाइम केँ पीछे तौ राधिमा कों बचा लेनाउसे फिनपा लो तौ इसबार हमसे छुपाना मत सीधा मिलवाने लेके आनां
साहिल - हु
अंजली - भइया वैसे राधिमा केँ संग
साहिल - रेपहुआ थां वोँ भि आप् लोगो कि तरफ मुझसे सभी छुपारही थि जिस कमीने नें मेरी राधिमा कि इज़त लूटीउसे मार दिया मे उसेजान सें मार दूँगा
सुमिता - नहीं बेटा किसी कों जन सें मत मारना चाहेकोई भि होँ उसे तरपाना दर्द देना जितना तुमने सहा हमने राधिमा नें साहा हैं
साहिल - समझ गय़ा मा
राधिमा साहिल केँ पासआके होठों पे किस करते हुवे - यहमा तेरे सामने खरी हैं जौ मैली हैं मगर जौ तुझेही मिलेगी मैली नहीं होगी
साहिल सुमिता कों गलेलगा केँ रोते हुवे - मा आप् जैसी हैं मेरीमा हैं
अंजली भि गलेलग रोते हुवे - भइयाअब जाबदल दे ( क़िस्मत कि लकीर कों )
साहिल फिनबाय बोल पोटल मे घुस जाता हैं
रात 2 बजे साहिल चिल्लाते हुवे उठाता हैं तोँ स्वयं कों खाट पे पता हैं साहिल वक्त केँ पीछे आँ गय़ा थां मगर साहिल कों विश्वास नहीं होँ रहा थां उसेसभी सपनालग रहा थां जैसे वोँ लम्बा सपनादेख उठा हौ
साहिल स्वयं कों देखता हैं जौ कपड़े पहने थें उसेदेख शोक होता हैं फिन जल्द सें मोबाइल लेके देखता हैं तौ date तारीख देख औऱ शोक होता हैं साहिल कमरे कों देखता हैं बातआता हैं तब जाके साहिल कों यकीन होता हैं वोँ वक्त केँ पीछे आँ गय़ा हैं एक् साल पीछे
साहिल घुटने पे बैठ रोने लगता हैं कुछदेर रोने केँ बाद साहिल मुठी कसटे हुवे - अब वोँ सभी नहीं होने दूँगा मा दिदी राधिमा मेरा प्रेम सभी कों मे बचाऊँगा
अब चलते हैं थोरा पीछे आखिर साहिल कों इतनासभी केसेपता चला एक् साल मे कियाहुआ थां
जब कमरे मे कुनाल अपनी बेहन साहिल कि चूत मरने मे लग थां तौ वही साहिल राधिमा कि याद मे बैठेरो रहा थां
राधिमा एक् अनाथ थि उसकाकोई नहीं थां जब साहिल उसके लाइफ मे आया तोँ राधिमा कों लगा एक् जीने कि वजहमिल गई राधिन मासूम चंचल मस्ती करने वाली लरकी थि
साहिल भि राधिमा कों पाके बहुतखुश थां दोनों नें कई ड्रीम्स देखे थें मगरसभी भाग्य कों मंजूर नहीं थां औऱ राधिमा चलबसी
साहिल जब दर्द मे राधिमा कों याद करकेरो रहा थां तब एक् आवाज़ साहिल सें कहती हैं
आवाज़ - बसकर दोस्त कितना रोता हैं मेरेकान फट जाते हैं नींदउर जाती हैं
साहिल एक् अंजनि आवाज़ सुन डरते हुवे रोनाभूल केँ चारों तरफदेख - कोनकोन हौ तुम्
आवाज़ - मे हु तेरे अंदर
साहिल अपनी बॉडी कों छुटे हुवे डरते हुवे - मेरे अंदरमगर केसे तुम् भूतकोई आत्मा तौ नहीं
आवाज़ - डरनाबंद करहा अभि मे आत्मा हि हु
साहिल - तोँ तोँ मेरे अंदर केसेआये
आवाज़ - भूल गय़ा वोँ पिकनिक गुफा रॉसनी
साहिल याद करते हैरान होके - वोँ रोसानि तुम् होँ
आवाज़ - हा
साहिल - तौ तुम् हौ कोन
आवाज़ - अच्छा प्रश्न हैं सुनो मे god कां दूतहु मे पथर्दिल कां थां कोई छोटा मोटा god मेरेगोद सें मिलने आते तौ मे जाने नहीं देता थां
इस लिये god नें मुझेसजे केँ तोर पे उस गुफा मे छोरगये औऱ बोलेजब मे बदल जाउंगा मुझे लेने आयेगे
साहिल थोरा सांत होके - अच्छा यहबात हैं
आवाज़ - हु तेरे अंदरआने केँ बाद मेने तेरा दर्द प्रेम देखा तेरीमा दिदी कितना सेहरही हैं सभी देखा तोँ मे हिल गय़ा
साहिल हैरान होके - एक् मिनट मेरीमा दिदी कियासेह रही हैं
आवाज़ - बहुतकुछ जोँ तुम को नहींपता तेरे पीछे किया होँ रहा हैं देखेगा सभीबोल हैं हिम्मत
साहिल शोक मे कपते हुवे - ठीक हैं दिखाओ
आवाज़ - यादरख जौ देखेगा तेरे लिये बहुत दर्दभरा होगा पर्र तेरी देख्ना होगा ताकितु भाग्य कों बदलसके
साहिल हैरान - मतलब
आवाज़ पहलेदेख आखे बन्दकर
साहिल आखेबंद करता हैं फिन 10 मिनट मे साहिल जोँ कुछहुआ सभीदेख लेता हैं
साहिल चिल्लाते हुवेआखे खोलके - मा दिदी राधिमा
साहिल फुटफुट केँ रोने लगता हैं
साहिल - कियु कियु आखिर कियु मेरीमा दिदी राधिमा केँ संग हि ऐसा कियुहुआ
आवाज़ - सांत साहिल क़िस्मत जौ लिखा होता हैं वही होता हैं मगरअब मेरीबात ध्यान सें सुन मे तुम्हें उसी टाइम मे पीछेभेज दूँगा ताकि तुम् सभीरोक सको औऱ अपनीमा दिदी राधिमा कों बचासको
साहिल रोते हुवे - कियासच मे
आवाज़ - सच मुझे लगता हैं मेरे god नें हि सभीसोच कियाइस लिये हम् मिलेअब जा जाके अपनीमा कों बचाफिन मे तुम्हें पीछेभेज दुगा
बसयही हुआ थां साहिल नें सभीदेख लिया थां जोँ उस वक़्त वोँ देख नहीं सकता थां फिन साहिल अंदर गय़ा बाकी कियाहुआ आप् सभी कों बता हि हैं
अब साहिल पीछे आँ गय़ा थां पास्ट मे आँ गय़ा थां
साहिल खरा होता हि एक् गहरी सासू लेते हुवे आसमान कों देखते हुवे - अब वक़्त आँ गय़ा हैं ( क़िस्मत कि लकीर ) कों बदलने कां
एक् साल पहले - पास्ट
किस्सा अब पास्ट मे चलेगी जब सुमिता अजली राधिमा केँ संगगलत होना सुरुहुआ थां जब पास्ट खतम होगातब साहिल वालासीन चलेगा केसे साहिल क़िस्मत कों बदलता हैं
भाग्य कि लकीर ( + ) (incest special) (adultery special) – New Episode
chapter 4
एक् साल पहले पास्ट
अंजली उस वक़्त 10 मे थि साहिल 9 मे थां अंजली अपने मामाजी कुनाल केँ यहाआती हैं साहिल लेकेआता हैं मगर साहिल एक् दिन रहके अपनेघऱ लौटआता हैं
अंजली जब पैदा हुईँ तब सें जयदातर अपने मामाजी कुनाल केँ यहा हि रही हैं बरे होने तक इस लिये अंजलि कुनाल मामाजी भांजी कां रिस्ता बहुत दोस्ताना टाइपरहा हैं
यानी कि संग मे घूमने जानां मस्ती करनायहा तक अंजली कुनाल एक् दूसरे केँ ऊपर पलंग पे लरते मस्ती करतेइस दोरान कुनाल कईबार अंजलि केँ बरे चुचे बॉडी कि गर्मी चूत कि गर्मी बरीबरी गांडकहे तौ सभीकुछ फिल करकेमचल जातामगर भांजी हैं यहसोच गलतसोच कों वहीरोक देता
अंजली जयदातर कुनाल केँ यहाबरी हुईँ तौ जाहिर हैं कई साथीबने जिसमे एक् लरका भि थां जिसका नाम थां अमर जोँ अच्छे घऱ कां थां
परोसी भि
अमर अंजली कों अपने नीचे लाना चाहता थां जिसके लियेअमर अंजली केँ पीछेपरा रहता अंजली कों भि यह एहसास थां अमर उसके प्रेम करता हैं
एक् दिनअमर अंजली कों अकेले देख परपोस् कर देता हैं अंजली जवान थि दोनों लम्बे वक्त सें यार थें तोँ अंजली केँ दिल मे भि अमर केँ लिये प्रेम थां बस अंजली हाकर देती हैं
अमर कितना कमीना थां अंजली कों नहींपता थां औऱ यह प्रेम अंजली कों कहाकिस दलदल मे लेके जाने वाली थि उसका भि अंजली कों अंदाज़ा नहीं थां
अंजली 4 दिन रहती हैं फिन अपनेघऱ आँ जाती हैं मगर मोबाइल पे बातें होती रहती हैं एक् महीने गुजर जाते हैं
औऱ नतीजा अंजली अमर केँ प्रेम मे दीवानी होँ गई थि अमर इतना कमीना चालक थां टाइम कां इंतजार कररहा थां औऱ वोँ आँ गय़ा थां कियुंकी अब बातें खुल केँ होनेलगी थि
रात 11 बजे
जहा सुमिता साहिल केँ लाइफ मे अभि तक बुरी क़िस्मत नहींआई थि पर्र अंजली केँ आँ गई थि
सुमिता साहिल सभी सें अंजान आहिस्ता कमरे मे सोरहे थें वही अंजली अमर सें मोबाइल पे बातें कररही थि
अमर - जानफिन कम आउंगी मुझेजी भर तुझेही प्रेम करना हैं
अंजली मुस्कुराते हुवे - अच्छा हि इतनी बेताबी ठीक नहीं हैं वैसे भि मेरा एक्जाम हैं इस महीने उसकेबाद हि आँ पाउंगी
अमर - अरे दोस्त मे भि भूल हि गय़ा थां कियाकरू तेरे प्रेम मे सभीभूल जाताहु
अंजली सर्म सें - झूठा
अमर मुस्कुराते हुवे - सुनो नाँ जान किया पहना हैं तुमने
अंजली - फिन सुरु होँ गये
अमर - बताओ नां प्लेस
अंजली सर्म सें - नाइटसूट
अमर - औऱ अंदर मे
अंजली - छी गंदे नहीं बटाउगी
अमर - प्रेम नहीं करती मुझे
अंजली - बहुत करतीहु
अमर - तोँ बताओ नां
अंजली सर्म सें धीरे-धीरे सें - बिकनी पैंटी अबखुश
अमर मुस्कुराते हुवे - कोनकलर कि
अंजली सर्म सें धीरे-धीरे सें - वोँ वोँ लाल
अमर - उफबरे बरे चुचे कों लाल बिकनी मे कैद करकेरखा हैं हु
अंजली सर्म सें लाल होके - छी बेसर्म गंदे
अमर हस्ते हुवे - दिखाओ नां
अंजली - नाँ बाबा सर्मआती हैं मुझे
अमर मुस्कुराते हुवे - अच्छा जीजब हमारी विवाह होगीतब वोँ सभी केसे करोगी हा
अंजली सर्म सें - तब कां तब सोचेंगे
अमर - अरे दोस्त दिखाओ नां प्लेस तुमने वादा किया थां आज कां
अंजली - अच्छा अच्छा ठीक हैं एक्
अमर - यह हुईँ नां बात
अंजली सर्माते नइटसूट उपर करते हुवे अपनेबरे बरे चुचे जोँ लाल बिकनी मे कैद थें उसेअमर कों दिखाने लगती हैं अमर जैसे हि देखता हैं अपना लन्ड जोर सें हिलाने लगता हैं हाअमर सुरु सें हि लन्ड निकाल हिलाने मे लगा थां जोँ अंजली कों दिखा नहींरहा थां
अमर - मेरीजान उफ कितने बरे टाइट हैं तुम्हारे चुचे दबाने मे मज़ा आयेगा
अंजली नाइटसूट नीचे करकेअमर कों देख सर्म सें - छीजब देखो गंदी बातें
अमर मुस्कुराते हुवे - जब गिर्लफ्रेंड इतनी हसीन होँ तोँ किया हि करेफिन अच्छा जान मेरी सासुमा ससुरजी साले साहब केसे हैं
अंजली - सभी अच्छे हैं औऱ हा अपनीकोई तुम्हारा सासु ससुरजी साले नहीं हैं समझगये विवाह करोगे तब बनेगे
अमर मुस्कुराते हुवे - कर लेगे वादा जौ किया हैं
अंजली सिर्यस् होके - पक्का नाँ धोका नहीं दोगे नां
अमर - तेरीशपथ जान
अंजली खुश हौ जाती हैं
मोबाइल कट
अमर मुस्कुराते हुवे - विवाह तुमने कोन करने वाला हैं मे तोँ तेरी लेना चाहता हुहा तूँ बहुत सुंदर हैं मगर मेरी विवाह कि बात बहुतबरे घऱ कि लरकी सें होँ रही हैं अमीरघऱ कां दमाद बनुगा नां कि उस गरीबघऱ कां
अंजली प्रेम केँ दीवानी अमर केँ कमीने रूप कों देख हि नहींपा रही थि यही तौ प्रेम मे जयदातर होता हैं लरकी कों कमीने लरके उसकी बातें सभीसच लगती हैं उन्हें हि अच्छा सच्चा मान उनकी बातों मे गिर जाते हैं
मगर जीतने अच्छे लरके होते हैं उन्हें लरकिया गिरे कमीने झूठेनजर आते हैं
खैर महीने गुजर जाते हैं अंजली केँ एक्जाम खतम हौ जाते हैं औऱ अंजली फिन अपने मामाजी केँ यहा जाने केँ लिये तैयार थि
शाम 3 बजे
सुमिता अंजली केँ कमरे मे अंजली कों देख जोँ बालबना रही थि
सुमिता - मामाजी मामाजी करती रहती हैं यहा मे बापू भइया हैं पऱ नहींइस मैडम कां मन अपने मामाजी केँ यहालगा रहता हैं
अंजली पीछे सुमिता कों देख - मा मामाजी केँ बरे मे कुछमत बोलिये मेरे प्यारे मामू बहुत अच्छे हैं मुझे बहुत प्रेम करते हैं आपसे भि जयदासमझ गई आपकोकही जलन तौ नहीं होती
सुमिता मुहबना केँ - चलचल मुझे कियुजलन होगी तेरे मामू मुझे भि बहुत प्रेम करते हैं कियुंकी मे उनकी छोटी बेहन हौ हु
अंजली हस्ते हुवे - समझ गई मा वैसे साहिल तैयार हुआ याँ नहीं
साहिल अंदरआते हुवे - हम् लरके हैं नहाने तैयार होने केँ लिये 30 मिनट बहुत हैं मगर आप् कों 2 घंटेकम पऱ जाते हैं
अंजली सुमिता कों देख - मादेख सुनरही हैं मुझे तानामार रहा हैं
सुमिता मुस्कुराते हुवे साहिल कों देख - वैसेसही तौ कहा मेरे बेटे नें
साहिल मुस्कुराते हुवे अंजली कों देख - सुना नां
अंजली सुमिता कों देख - सच बताना मा आप् मुझसे जयदाइस शैतान कों प्रेम करती हैं नाँ
सुमिता दोनों कों देख - हुयह प्रश्न कां जवाब हैं मा केँ लिये बेटी हौ याँ बेटा दोनों केँ लिये प्रेम बराबर होता हैं अबचलो जानां नहीं हैं
अंजली साहिल - हाचलो
बाहर् साहिल बाइक पे बैठ जाता हैं अंजलि भि सुमिता दोनों कों देख - अच्छे सें जानां साहिल बेटेतु तोँ आँ जायेगा नाँ कल
साहिल सुमिता कों देख - मा आपसेदूर रहने मेरादिल नहीं लगता
सुमिता साहिल केँ गाल पे किस करते हुवे प्रेम सें - मेरा बच्चा कितना प्रेम करता हैं मुझसे मेरा ख्याल रखता हैं, सुमिता अंजली कों देख, औऱ एक् हैं यह छुट्टी मिलते हि मामाजी केँ यहाभाग जाती हैं
अंजली सुमिता कों देख - बसकरो माबस ताना मारती रहती हैं आप्
साहिल - अच्छा मा चलते हैं मे कल आँ जाउंगा
सुमिता - ठीक हैं बेटा
साहिल निकल जाता हैं सुमिता दोनों कों जातेदेख मन मे - मेरे बच्चे अबबरे हौ गये हैं विवाह केँ लायक पहले अंजलि केँ लियेकोई लरका देख्ना परेगा
कुनाल केँ घऱ
साहिल अंजली 4 बजे केँ पास पहुँच जाते हैं अंदर कुनाल सुनीता बैठे बातें कररहे थें
कुनाल साहिल अंजली कों देखखरा होकेखुश होके - देखो सुनीता हमारे भांजे भांजी आँ गये
सुनीता खरी होके साहिल अंजली कों देख मुस्कुराते हुवे - सहीदेख रहीहु
तभी अंजलि तेजी सें जाके कुनाल केँ गले लगते हुवे - मामू
कुनाल अंजली कों बाहों मे कसते हुवे - मेरी प्यारी भांजी
साहिल सुनीता केँ गले लगते हुवे - मेरी प्यारी मामीजी
सुनीता साहिल कों सीने सें लगाये हुवे - मेरा प्यारा भांजा
अंजली कुनाल केँ बीच बहुत प्रेम थां औऱ सुनीता साहिल केँ बीच
साहिल अंजली कों देख - हु मेरी प्यारी भाभी मुझसे बहुत प्रेम करती हैं मामाजी सें जयदा
अंजली मुहबना केँ - मेरे मामू मुझे जयदा प्रेम करते हैं मामीजी सें जयदा
सुनीता कुनाल दोनों कों लरतेदेख हसने लगते हैं
सचयह नाँ सुनीता कुनाल साहिल अंजली दोनों कों बहुत प्रेम करते हैं जबबात यह हैं अंजली कुनाल केँ नजदिक औऱ साहिल सुनीता केँ
रात 9 बजे खानां पीने होने केँ बादआगन मे बैठेसभी बातें कररहे थें सुमिता कुनाल सें मोबाइल पे बातें कररही थि
सुमिता - भैया आपकी लाडली तोँ आपकेपास हि रहने वाली हैं ख्याल रखना
कुनाल हस्ते हुवे अंजली कों गोद मे बैठाये - चिंता मतकरो गुरिया मे अपनी भांजी कां अच्छे सें ख्याल रखुंगा
राघव - साले साहब आपने तोँ मेरी बेटी पे चमत्कार कर दिया हैं यहा सें जयदा आपकेयहा रहती हैं
कुनाल हस्ते हुवे - बहनोई जी मेने चमत्कार नहीं किया प्रेम हैं प्रेम
राघव - समझ गय़ा
सुमिता - भाभी कैसी हैं आप्
सुनीता - अच्छी हु ननदीजी आप् सभी केसे हैं
राघव - अच्छे हैं मस्त हैं चलरही हैं लाइफ
सुनीता हस्ते हुवे - अच्छा हैं
बातें होने केँ बादसभी अपने कमरे मे चले जाते हैं
इस वक़्त ऐसा थां साहिल अंजली कम बातें करते साहिल कां रिस्ता अपनीमा बेहन बापू सें उतना गहरा नहीं थां मेरे कहने कां मतलबyey हैं साहिल अपने मे रहतामा बेहन पिताजी केँ संगकम टाइम बिताता बातें करता
अंजली बैड पे लेती थि बेताब थि अमर सें बात करने मिलने केँ लियेतभी कुनाल आता हैं औऱ अंजलि कों बाहों मे लेके प्रेम सें देखते हुवे - मेरी भांजी तु नहीं होती तौ मेरादिल नहीं लगता हैं
अंजली कुनाल केँ सीने केँ समाते प्रेम सें - मुझे भि मामू आपके मामीजी केँ संग रहना अच्छा लगता हैं
कुनाल अंजली कों देख - छोटी सि थि अब देखो जवान होँ गई अब तौ मुझे अपनी प्यारी भांजी केँ लिये लरका देख्ना परेगा
अंजली सर्म सें लाल होते हुवे - आप् भि नाँ मामू
कुनाल हस्ते हुवे - सही तोँ कहा
कुनाल अंजली केँ होठों पे हल्का किस करते हुवे - गुड नाइट मेरी गुरिया
अंजली - गुड नाइट मामू
अंजली केँ होठो पे किस करना दोनों केँ बीच नॉर्मल हैं कुनाल केँ अंदर अभि तक अंजली कों लेकेकोई गंदा विचार नहीं थां
कुनाल अपने कमरे मे आता हैं सुनीता कुनाल कों देख - आँ गये अपनी भांजी कों आप् बहुत प्रेम करते हैं
कुनाल सुनीता केँ ऊपरआते हुवे सुनीता कों देख - तुमसे भि तोँ करताहु अपनी बेटी कों भि
सुनीता मुस्कुराते हुवे - अच्छा जी तौ करो नाँ प्रेम
कुनाल मुस्कुराते हुवे सुनीता कों नँगाकर देता हैं सुनीता केवल ब्लाउस मे थि - कर हि तौ रहाहु जान
कुनाल स्वयं फिन नँगा होँ जाता हैं औऱ सुनीता केँ टाँगे फैलाये लेती थि कुनाल एक् हाथ सें चूत केँ फाके दूसरे हाथो सें चूत मे लन्ड घुसा केँ केँ सुनीता केँ दोनों टैंगो कों पकरे चुदाई करने लगता हैं सुनीता दर्दमजे मे - अहहउफ एक् बेटी हुईँ अब वोँ भि ससुराल चली गई अहहउपर वाले नें मुझे दूसरा बच्चा कियु नहीं दियाअहह
कुनाल चुदाई करते हुवे सुनीता कों देख - फिन तुम् इस वक्त इमोसनल बातें करनेलग गई जौ भाग्य मे वही मिलेगा नाँ हमने पूरी कोसिस कि करतेरहे नहींहुआ तोँ अब हम् कर भि किया सकते हैं
सुनीता दर्दमजे मे थोरा दुखी आवाज़ मे - उफअहह आप् नें सहीकहा
वही साहिल केँ घऱ सुमिता कां बरामन थां चुदाई कां मगर राघवसो गय़ा थां सुमिता नइटीउठा केँ चूत मे उंगली करते हुवेमन मे दुखी होके - पता नहींअहह उफअब पति जी जयदा नहीं करते कियाअब उमर केँ संग उनकादिल नहीं करता
उंगली सुमिता केँ चूत केँ अंदर सें पानी निकलने मे लगी थि उफ फूली मोती चमरे वाली काले बालों सें ढकी चूत मे सुमिता उंगली करतेजा रही थि सुनीता अहहउफ करते तेजी सें उंगली करते हुवेझर जाती हैं
सुमिता फिनआखे बंद करते हुवेमन मे - सायदअब चुदाई कां सुख मिलेगा नहीं
कुनाल केँ घऱ साहिल केँ लाइफ मे राधिमा अभि नहींआई थि इस लिये साहिल मस्त सोयाहुआ थां नींद लें रहा थां वही कुनाल सुनीता कि चुदाई करने केँ बाद मस्तसो गये थें
मगर अंजली अमर सें बातें करने मे लगी हुइ थि
अमर - मेरीजान आखिर तुम् आँ हि गई मुझे तुमसे मिलना हैं तुम को बाहों मे लेना हैं मे आताहु तुमसे मिलने
अंजली डरते हुवे - नहीं नहींअमर कोईदेख लेगा तोँ गजब हौ जायेगा मुझे भि तुमसे मिलना हैं मगरकल अभि रिस्क हैं
अमर - रिस्क मे हि तौ इस्क हैं मे आताहु दरवाजा खुला रखना मिलुगा जल्दचला जाउंगा
अंजली डरते हुवे - मगर
अमर - उफजान इतना भि मतडरो
अंजली - ठीक हैं जैसा तुम् बोलो
मोबाइल कट
अंजली डरते हुवेमन मे - डरलगरहा हैं सभी केँ होने केँ बाद भि अगर हम् पकरेगये तौ बवाल हौ जायेगा भइया भि हैं
10 मिनटबाद कमरे मे अमरआता हैं जिसेदेख अंजली खुश हौ जाती हैं अमर अंजली कों बाहों मे लेके - बहुतमिस कियाजान
अंजली अमर कि बाहों मे समाते हुवे - मेने भि जान
अमर अंजली केँ चेहरे कों पकरता हैं औऱ किस करने लगता हैं अंजली पहलाकिस पाकेफिल करके मदहोस होने लगती हैं अमरकिस करते हुवेमन मे - अब सालीजल मे फस गई हैं मे जोँ कहुंगा करेगी
किस करने केँ बाद
अमर अंजली केँ गले गर्दन पे किस करने लगता हैं चूमने लगता हैं अंजली गरम होकेअहह सिसकिया लेने लगती हैं अब तक अमर नें गंदी चुदाई कि बातें करते हुवे अंजली केँ अंदर कि प्यास कों जगा दिया थां
अंजली जोरजोर सें सिसकिया लेके तरप्मचल रही थि
अमरजोस मे पागल होके अंजली केँ चूचे दबाने लगता हैं अंजली औऱ जयदाजोर मे होस खोने लगती हैं जोर सें सिसकिया लेते हुवे - उफमाअमर मेरीजान अच्छा लगरहा हैं बताओ मेरे चुचे कों उफमा
अमर मन मे मुस्कुराते चुचे दबाते हुवे - हा मेरी रंडि इतनी मेहनत इस लिये तोँ किया थां इस मोक्के कों बनाने केँ लिये
अंजली जौ पूरीगरम होकेसभी भूल केँ मजे मे खोई थि तभी अंजली कों एहसास होता हैं यहसमय स्थान सही नहीं हैं
अंजली अमर कों दूर करकेतेज ससे लेते हुवे - अमरयह स्थान समयसही नहींउफ बस बहुतकर लिया हमनेअब तुम् जाओ
अमर अंजली कों देखते हुवे - ठीक हैं जानमगर वादाकरो कल तुम् मेरेघऱ आओगी औऱ मेरे लन्ड कों मुह मे लोगी देखो तुम् नें हि कहा थां करोगी अब मुकर नहीं सकती
अंजली सर्म सें - अच्छा बाबा लुगीअब जाओ
अमर अंजली कों किस करके - अच्छा जानगुड नाइट
अंजली मुस्कुराते हुवे - हुगुड नाइटजान
अमर चुपके सें बाहर् आकेघऱ कि तरफ जाते मुस्कुराते हुवे - सालीजल मे पूरीतरफ फस हि गई अब मे जोँ कहुंगा करेगी पूरी दीवानी होँ गई हैं मेरे प्रेम मे
वही अंजली बैड पे लेती अभि जौ मज़ाहुआ जोँ एहसास आनंदफिल कियाउसी मे खोई थि
अंजली चूत पे हाथ रखते हुवे - उफ गीली हौ गई हैं अहह
अंजली नीचे सें नंगी होके धीरे-धीरे सें चूत मे बीच वाली उगली अपनीसील पैक चूत मे अंदर घुसा केँ धीरे-धीरे धीरे-धीरे उंगली करते हुवे एक् हाथ सें अपने एक् चुचे दबाते हुवे सिसकिया लेते - अहहउफ अमर मेरी जानु तुमने मुझेउफ अहहमा दीवाना बना दिया हैं उफ
अंजली कि यह प्यास अमर कां आनांसभी अंजली कों एक् दलदल मे लें जाने वाला थां जिसका अंदाज़ा अंजली कों नहीं थां
सुभह 10 बजे
साहिल तैयार थां जाने कों सुनीता - मेरे बच्चे बाइक ध्यान सें चला केँ जानां
साहिल सुनीता कों गलेलग - ठीक हैं मेरी प्यारी मामीजी
सुनीता मुस्कुराते हुवे साहिल केँ होठो केँ छोटाकिस करते हुवे - हु
अंजली कुनाल कों देख - मामू मुझे भि ऐसे हि किस करते हैं समझ गय़ा
साहिल अंजली कों देख - तोँ किया दिदी फ़िर लरना हैं किया मुझसे
कुनाल बीच मे हस्ते हुवे - बसबसजब देखोतब लरने लगते होँ साहिल बेटा अच्छे सें जानां तु गुरिया कां लाडला हैं वोँ तेरे बिना एक् दिन बहुत मुश्किल सें रह पति हैं
साहिल मुस्कुराते हुवे - यहबात तौ अपनेसही कही मामू अच्छा मे चलताहु
साहिल घऱ केँ लिये निकल परता हैं
साहिल अपनेगाव केँ पास वालेगाव सें होते हुवे आँ रहा थां तोँ साहिल देखता हैं पैर केँ नीचे ठंडे वाली स्थान पे एक् लरकी साइकिल लेकेखरी हैं औऱ साहिल कि तरफ हि देखरही थि
साहिल समझते हुवे मामला किया होँ सकता हैं लरकी केँ पास अपनी बाइकरोक लरकी कों जब देखता हैं तौ साहिल देखता हि रह जाता हैं लरकी बहुत सुंदर थि काले कजराले नासिलि आखे सफ़ेद चेहरा गुलाबी होठहवा सें लहराते हुए कालेबाल साहिल तौ मानोअलग हि दुनिया मे हौ दिलधक धक करने लगता हैं अंदर एक् अलग एहसास चाहतअलग फीलिंग कों साहिल पहलीबार फिल करता हैं
लरकी साहिल कों घुर केँ देखते हुवे - किया आप् मेरी सहायता करेगे
साहिल आवाज़ सुनहोस मे आते हुवे जल्द सें बाइक सें उतर - जीजी कियु नहींइसी लिये तोँ रुकाहु अभि करताहु
साहिल बिना लरकी केँ फिन देखे साइकिल कां फसा सुकून निकाल सही करकेखरा होके लरकी कों एक् नजरदेख - होँ गय़ा मे चलताहु
साहिल फिन सीधा बाइक तेजी सें दोरा देता हैं औऱ लरकीबस हैरान देखती रह जाती हैं
साहिल एक् हाथदिल पे रख - यह कैसी फीलिंग एहसास हैं उस लरकी कों देखते हि मेरादिल इतनीतेज कियु धरक्रहा थां कई लरकिया देखीमगर इस लरकी कों देखते हि पता नहीं मे उफ दोस्त जानेदो
अलग मे साहिल लरकी केँ मामले मे अब तक नहींपरा इस लिये दूसरी साहिल लरकी सें बात करने मे अच्छा नहीं हैं लरकी सें साहिल दूर हि रहता हैं केह सकते हैं सर्माता भि हैं
लरकी साहिल कों जातेदेख मन मे - अजीब हैं पहले तौ मुझेदेख देख केँ एकटक देखेजा रहा थां उसकेबाद पता नहीं कियुउफ जाने तोँ मुझे कियामगर वोँ लरका बहुत हैंडसम थां उसका मासूम चेहरा उसेदेख मेरादिल
लरकी अपनेसर झटकते हुवे - अरे राधिमा तु किया सोचने लगीचल घऱ चलते हैं
बताहु राधिमा कां कोई नहीं हैं मगरजब राधिमा छोटी थि यानी 6 साल कि तक एक् परिवार नें राधिमा कों गोद लेँ लिया बहुत सुंदर अच्छी थि इस लिये
राधिमा जबघऱआती हैं अंदर जाती हैं तोँ एक् स्त्री राधिमा कों गुस्से सें देखते हुवे - कियु इतनालेत हुआहा बोलकहा थि अब तक
राधिमा महिला कों देख डरते हुवे - मा वोँ साइकिल कां सुकून उतर गय़ा थां तौ देर हौ गई
महिला राधिमा केँ गाल मे चाटा मारते हुवे गुस्से सें - झुठ बोलती हैं अरे मेरी फूटी क़िस्मत जौ तेरी लेकेआई लरका लेकेआती तौ अच्छा थां तेरीकम सें कम सहारा तौ बनता मेरे पति कि सभी गलती हैं पता नहीं तुम्हारी तरफदेख लेके आँ गयेअब मुझे सेहना परता हैं सभी
राधिमा आसु लियेगाल मे हाथरख नजरे नीचे कियेखरी थि
कुनाल केँ घऱ
अंजली तैयार होके मस्त एक् घऱ केँ बाहर् खरी थि औऱ वोँ घऱ पक्के घर-मकान थां दो मंजिला
अंजली घऱ कों देखते हुवेमन मे - कियाअमर केँ बापू माँ मुझ जैसे गरीब लरकी सें अमर कि विवाह करायेंगे
जब अंजली सोचने मे लगी थि तब भाग्य कां खेल देखो कुनाल साइकिल सें घऱजारहा थां तोँ उसकीनजर अंजली पे पऱ जाती हैं अमर कां घऱरोड साइडगाव सें थोराहट केँ खेतो मे थां
कुनाल साइकिल दूररोक अंजली कों देखते हुवेमन मे - यह अंजली अमर केँ घऱ केँ बाहर् कियुखरी हैं
तभी कुनाल देखता हैं अंजली अंदरजा रही हैं यहदेख कुनाल मन मे - अमर तौ हमारे घऱआता हि रहता हैं दोनों अच्छे साथी हैं जनताहु मगरकुछ फिन भि अंजली बिना बताये कभीकही नहीं जाती हैं
कुनाल कों कुछ गर्बर् कां एहसास होता हैं इस लिये कुनाल घऱ केँ बाहर् साइकिल लगाके दरवाजे केँ पास जाके खोलता हैं तोँ दरवाजा खुल जाता हैं कुनाल होल मे थां
अमर केँ बापू औऱ कुनाल कि दोस्ती थि इतनी भि अच्छी नहीं पर्र कुनाल कुछबार आँ चुका थां औऱ अमर केँ पिताजी कों अच्छे सें पता थां उसका बेटा अमर अंजली मित्र हैं
कुनाल चारों तरफ देखता हि कोई दिखाई नहीं देता कुनाल नीचे सारे कमरेचेक करता हैं कुछ खुलेकुछ बंद थें मगर अंजली अमर नहीं दिखे
कुनाल उपर वाले कमरे मे जाता हैं चार कमरे मे कुनाल जबबीच वाले कमरे मे जाता हैं तौ दरवाजा बंद थां कुनाल पास वाली खिरकी केँ पास जाता हैं जोँ खुला थां भाग्य सें
तभी कुनाल कों अंदर सें आवाजे अमर अंजली कि आने लगती हैं कुनाल हैरान शोक मे अंदर देखता हैं तौ कुनाल कि आखेफैल जाती हैं पूराशोक मे हिल जाता हैं
अंजली केँ ऊपरअमर लेताकिस होठो पे गर्दन पे कियेजा रहा थां औऱ अंजली तरप्मचल केँ जोरजोर सें सिसकिया लियेजा रही थि
अमरकिस करते हुवे - जान मेरी पत्नि बनके रहोगी याँ मेरी रंडि
अंजली गरम होके मदहोस मे - अहह मेरे बाबू तुम् जैसे रखोगे मे रहूगी
अमर गर्दन केँ किस करते हुवे - मे तुम को रंडि कि तरह चोदुगा तेरी चूत सें कई बच्चे निकालूँगा कहो मेरी रंडि बनोगी
अंजलि प्रेम मे अंधी होके शरीर कि आग मे पागल होके सिसकिया लेते हुवे - उफ बाबूहा मे तेरी रंडिहु जितना चोदना हैं मुझेचोद केँ बच्चो कि माबना दोअहह अमर मेरीजान उफ मे तरप्रही हु
अमर अंजली कों देख - बहुतआग हि तेरे अंदर
अंजली नासिलि आखो सें देख - बहुत हैं तूने हि जगाया हैं
अमर मुस्कुराते हुवे - पहले अपने मस्त चुचे दिखाओ फिन लन्ड चुसना हैं मेरी रंडि
अंजली बैठ केँ अमर कों देखते हुवे पागलजोस मे - हा मे तेरी रंडि लुगी अपना लन्ड मुह मे उफ
अमर मुस्कुराते हुवेमन मे - साली देखो तौ कितनी गरम हौ गई हैं आजतभी सिलतोर हि दूँगा
अमर मुस्कुराते हुवे - तोँ दिखाओ नां अपने चुचे rah नहीं जाता
अंजली सर्मजोर मदहोस होके अपने टिसर्ट उपरउठा देती हैं औऱ बस अंजली केँ बरेबरे गोरे काले निपल वाले चुचे नंगेअमर केँ समाने थें जिसेदो लोगअमर कुनाल देख पागल होँ जाते हैं
कुनाल खिरकी सें अंजली अपनी भांजी केँ बरे गोरे काले निपल वाले इतनी टाइट मस्त चुचेदेख पागल होके - उफ कितने मस्त चुचे हैं मेरी भांजी केँ बिकनी पहन केँ नहींआई हि इस लिये टिसर्ट उठाते हि दोनों चुचे नंगे बाहर् आँ गये एक् मिनटकई बार मेने अंजलि कों जब बाहों मे लेता थां तुँ फिल होता थां मुझे अंदर बिकनी नहीं हैं जब भि अंजली आती हैं रोज मे इसी मस्त चुचे कों सीने पे फिल करता थां अबदेख रहाहु यह खजाना मनगये भांजी तु तौ मस्त हैं
तभी कुनाल मन मे - मे यह कियासोच रहाहु यहगलत हैं
दूसरा मन - गलत नहीं हैं कुनाल तेरी भांजी जवान हैं उसके अंदर बहुतआग हि देख केसे अपनीआग बुझाने अपनीसिल तोरवाने आई हैं तूँ तौ अच्छे सें अपनी भांजी केँ चुचे चूत कि गर्मी कईबार फिल करके तेरेमन मे भि कईबार गंदे विचार आये थें देखअब मोक्का हैं यह मोक्का तेरे क़िस्मत मे दिया हैं जानेमत दे फायेदा उठाइस कमीने कों रोक औऱ तुसिल तोर अपनी भांजी कि चूत कां
पहलामन - नहीं कुनाल ऐसामत करयह तेरी गुरिया कि बेटी हैं जिसे तूने अपनी बेटी कि तरह पाला प्रेम दिया हैं उसकेबरे मे गलतमच सोचबस जाकेबचा रोक इतना हि
कुनाल अपनासर पकर अदिति केँ मस्त चुचे कों देखमन मे - हाकईबार जब मे अंजली कों बाहों मे लेताहु पलंग पे उसकेउपर होताहु तौ उसकी टाइटगरम चूत कि गर्मी सीने पे यहबरे चुचेफिल करकेकई बार मे पागल होके सोचे बगैर नहींरह पता थां मगरअब जब मे अपनी भांजी कां यहरूप गंदी बातें उसके नंगे चुचेदेख रहाहु तोँ अब रुलना मुश्किल हैं मुझे मोक्का मिला हैं जौ भाग्य नें मुझे दिया हैं ऐसे हि जाने नहीं दुगाहा मे हि सिल तोऊगा अपनी भांजी कि
कुनाल मनबना चुका थां असल मे कुनाल केँ अंदर तोँ पहले सें हि अंजली कि जवानी देखगलत विचार आते रहते थें जाहिर हैं इतना चिपक केँ लेतेगे बातें करेगे तौ होगा हि मगर भांजी हैं सोचमन झटका देतामगर अब मोक्का थां औऱ कोई भि इंसान कों जाने नहीं देता
कुनाल जल्द सें जाके दरवाजा कटखटाटा हैं अंदरअमर अंजली हैरान शोकडर जाते हैं
अंजली जल्द सें टिसर्ट पहनअमर कों देख डरते हुवे - तुमने तौ कहा थां कोई नहीं हैं अंकल ऑन्टी शाम कों आयेगे
अमर डरते हुवे - सहीकहा थां एक् कामकरो बेड केँ पीछेछुप जाओ मे देखता हु
अंजलि बेड केँ पीछे छुपते हुवे - ठीक हैं
अंजली मन मे डरते हुवे - कहाफस गई प्लेस पकरी नां जाऊ
अमर दरवाजा जाके खोलता हैं सामने कुनाल कों देखअमर कि फट जाती हैं अमर कपते हुवे - चाचा आप्
अंजली जैसे हि देखती हैं अंदरआने वाला उसका मामाजी हि तौ डर केँ कापने लगती हैं
कुनाल अमर केँ गले कों पकर गुस्से सें - तेरीयह हिम्मत तु मेरी भांजी केँ संगगलत करे
अंजली समझ जाती हैं उसके मामू नें सभीदेख लिया हैं मगर देखती हैं कुनाल अमर केँ गले कों पकरी hain तौ जल्द सें बीच मे आके डरते हुवे - मामू प्लेस अमर कों मत मारो इसमें मे अमर सें प्रेम करतीहु
अमर कि हालत खराब होँ रही थि कुनाल अमर केँ गले कों छोर अंजली कों देखता हैं अंजली डरते नजरे नीचेकर लेती हैं
कुनाल अंजली कों देख - मेरी बेटी जैसी हैं मेरी गुरिया कि बेटी मेरी गुरिया जैसीमगर खैर मे तेरीबात सुनिगा फिन देखेंगे चलो मेरेसंग
कुनाल रास्ते मे अंजली सें - मामीजी कों पता नाँ चलेतु मेरी बेटी जैसी हैं बहुत प्रेम सें पालाबरा किया हैं इस लियेरात आहिस्ता बात करेगे
अगर तेरा प्रेम सच्चा हैं अमर भि तुझसे बहुत प्रेम करता हैं तोँ मे सोचुगा
कुनाल कि बातसुन अंजली हैरान केँ संगखुश होके - सच मामू
कुनाल मुस्कुराते हुवे - हा
pic gif बिना update देना मुझे स्वयं अच्छा नहीं लगतामगर तभी मे लागता हुजब असली किस्सा चलरही होती हैं तौ समझगये होगे जैसेअब लगेगी हर वोँ सीन पे जहा pic gif लगाना चाहिये
मिलते हैं
बहोत हि शानदार एपसोड हैं ! स्टोरी मे ये पास्ट वाला ट्विस्ट गजब कां हैं ! अगले एपिसोड कि इंतजार रहेगी !
भाग्य कि लकीर ( + ) (incest special) (adultery special) – New Episode
chapter 5
शाम 4 बजे सुमिता साहिल मार्केट आये हुवे थें सुमिता खरीदारी करने मे लगी हुईँ थि तोँ वही साहिल घूमने मे
साहिल आसपास देखते चलतेघूम रहा थां तभी सामने सें राधिमा आते दिखाई देती हैं स्लिम सूट सलवार मे मुस्कुराते हुवे
साहिल राधिमा कों देख एक् समय केँ लियेकही खो जाता हैं राधिमा कि भि नजर सामने खरे साहिल पे जाती हैं दोनों केँ बीच एक् अजीब कां एहसास पैदा हौ रहा थां दोनों एक् दूसरे कों देखरहे थें मगरदिल कुछ औऱ हि करने मे लगा थां
साहिल जल्द सें होस मे आता हैं औऱ नॉर्मल चलते हुवे राधिमा केँ पास सें गुजरआगे निकल जाता हैं बेचारे कां दिलजोर सें धकधककर रहा थां
राधिमा हैरान होती हैं यहदेख राधिमा कों लगा थां साहिल उसकेकुछ बात करेगा मगरऐसा हुआ नहीं
राधिमा साहिल कों देख - रुकिये जरा
साहिल रुकता हैं पीछे राधिमा कों देखता हैं
राधिमा साहिल केँ पासआके - वोँ कल मे आपको सुक्रिया केह नहींपाई कियुंकी आप् चलेगये सुक्रिया कल केँ लिये
साहिल राधिमा कों बिना देखे धीरे-धीरे सें - कोईबात नहीं
राधिमा हैरान साहिल कों जब अच्छे सें देखती हैं तौ समझ जाती हैं साहिल शर्मा रहा हैं
राधिमा मन मे - यकीन नहीं होताकोई लरका लरकी सें बात करने मे इतना सरमाता भि होगा देखो तोँ लरकी कि तरफ शर्मा रहा हैं
साहिल कां सर्माना मासूम हैंडसम चेहरा बातें राधिमा केँ दिल मे हलचलकर गई थि
राधिमा मन मे - मुझेयह किया होँ रहा हैं
साहिल - अच्छा मे चलताहु
राधिमा जल्द सें - आप् खरीदारी करनेआये हैं
साहिल राधिमा कों एक् नजरदेख - हा वोँ मा लेकेआती हैं आनां परता हैं
राधिमा थोराहस केँ - अच्छा यहबात हैं आपकी मां कहा हैं
साहिल घबराते हुवे - कियु मेरीमा सें क्याँ कम हैं
राधिमा मजे लेते हुवे - मिलुगी औऱ क्याँ
साहिल तेजी सें भागते हुवे - बिल्कुल नहीं
राधिमा हैरान साहिल कों देखते हुवे - अरे रुको तौ
राधिमा हस्ते हुवे - डरपोक कही कां नाम भि पूछना रह गय़ा नाम
राधिमा दिल पे हाथरख धीरे-धीरे सें - कियु तुम्हे देखते हि मेरादिल बैचैन हौ जाता हैं मगरमन कों खुशी सांति मिलती हैं
वही सुमिता सब्ज़ी लें रही थि थोरा झुकी थि तौ दोनों चुचेआधे सब्ज़ी वाले कों दिखरहे थें सब्ज़ी वाला सुमिता केँ चुचे देखते हुवेमन मे - माशपथ किया चुचे हैं ऑन्टी केँ साला क़िस्मत वाला होँ होगा किसकी पत्नि हैं यहकस एक् बार दबाने देती तौ मज़ा आँ जाताजब भि आती हैं इनके चुचे देखने कों मिल जाते हैं दोस्त मुठउस दिन मारना हि परता हैं आज भि मारनी पड़ेगी
सुमिता कों एहसास होता हैं सब्ज़ी वाला जौ लरका हैं उसके चुचेदेख रहा हैं मगर सुमिता अंजान बने रहती हैं बस सारीसही कर लेती हैं
खरीदारी होने केँ बाद सुमिता साहिल घऱ केँ लिये निकल परते हैं
वही साहिल केँ पिताजी राघव बाइक सें एक् घऱ केँ पास रुकता हैं बाइक सें एक् लरकीउतर राघव कों देख - ठीक हैं अंकल सुक्रिया मे चलतीहु
लरकी कां नाम हैं सीलु
राघव केँ परोसी हैं राघव विद्यालय सें आते वक्त हमेसा सीलु कों लेके हि आता हैं
राघवआस पासदेख फिन सीलु कों पकरकिस करता हैं फिन दोनों चुचेदबा केँ मसल देता हैं सीलु दर्द मे अहह करते हुवे - अंकल नहीं
राघव धीरे-धीरे सें - सीलु बेटी मे जब बुलाऊँगा अपनेघऱ तब आओगी नाँ
सीलु डरते हुवे - ठीक हैं अंकल
सीलुफिन जल्द सें चली जाती हैं
राघव सीलु कों जातेदेख - उफ तेरीसिल मे जल्द हि टरूंगा
कुनाल आया थां अपनेअडे पे तारी पीनेकई लोग थें जौ बोतल चखना लिये बैठे पीते बातें कररहे थें मगर कुनाल दूर अकेले बैठा थां कुनाल एक् ग्लास पिता हैं फिन सांत बैठा जमीन कों देखते रहता हैं
कुनाल कों बारबार अंजली अपनी भांजी केँ बरेबरे टाइट मस्त चुचे हि दिखरहे थें जब सें कुनाल नें अंजली केँ चुचे देखे हैं कुनाल कां लन्ड अभि तब बैठा नहीं हैं पूराखरा हि हैं
कुनाल धीरे-धीरे सें मन मे - बारबार मेरे भांजी केँ चुचे दिखाई देरहे हैं मेरी पत्नि केँ जीतने बरे हैं औऱ अमर भांजी केँ बातें
कुनाल कों अंजली अमर केँ बीच बातें सुना थां याद करके औऱ गरम हौ रहा थां
कुनाल मन मे - इतनीआग हैं मेरी भांजी मे पता हि नहीं थां नहींअब मे बर्दास्त नहींकर सकता तुम् मेरी होँ मगरकुछ देर तक उस कमीने अमर कों सहना परेगा
कुनाल एक् पैकफिन पिता हैं औऱ मुस्कुराते हुवेमन मे - मेरी भांजी कों नीचे लाना मेरे लिये बहुत आसान हैं
कुनाल 100 सौर थां अंजली अपनी भांजी कों अपनाबना लेगा
पहलीवजह - अंजली कुनाल केँ बीच बहुत प्रेम भरोसा हैं तोँ बात करना आसान होँ जायेगा
दूसरी वजह - अंजली बहुत भोली हैं उसका भोलापन् औऱ कुनाल केँ लिये प्रेम बिस्वास हि कुनाल केँ किये फायेदा करने वाला थां
तीसरी वजह - अंजली लें अंदर कि आग औऱ अमर केँ लिये प्रेम यहवजह भि कुनाल केँ लिये फायेदा करेगा कुनाल हीरो बनेगा औऱ काम हौ जायेगा
कुनाल मन मे - अमर कि बातें सुन उसकी हरकतदेख मे इतना तौ समझ गय़ा अमर बहुत गिरा लरका हैं जोँ केवल मेरी भांजी कां फायेदा उठारहा हैं खैर मेराकाम होने तक मगर कमीने तुम्हे सिल तोरने नहीं दुगाजब वक्त आयेगा तेरी गांड मारुंगा
घऱ पे कमरे मे अंजली डरी बैठी थि मगर अंदर मे अपने मामाजी पे बिस्वास थां उसके मामाजी उसकासंग देगे
रात 9 बजे
साहिल लेता पलंग पे राधिमा केँ बरे मे सोचरहा थां साहिल कों राधिमा कां सुंदर चेहरा बारबार दिखरहा थां
साहिल - वोँ लरकी सें फिन मिलाऐसा केसे एक् हि दिन मे दोबार मिलना
वही राधिमा भि साहिल कों याद करके अपने सोचो मे गुम थि
राधिमा थोरा सर्म सें - क्याँ हम् फिनकल मिलेंगे बता नहीं कियु मेरादिल उस लरके कों देखने कां बातें करने कां कररहा हैं
राघव सुमिता कमरे मे लेते हुवे थें सुमिता राघव कों देख - सुनिये बेटी जवान हौ गई हैं विवाह केँ बरे मे कुछ सोचा हैं
राघव सुमिता कों देख - सोचा नहींमगर अब सोचुगा
सुमिता - सोचना हि होगा अंजली बेटी कि विवाह केँ बाद साहिल केँ बरे मे भि सोचना हैं
राघव - समझ गय़ा बाबाअब सोते हैं मुझे नींद आँ रही हैं
सुमिता - मगर मुझे करना हैं
राघव सुमिता कों देख प्रेम सें - दोस्त थक गय़ा हुमन भि नहीं हैं
राघवफिन दूसरी तरफ करवट लेके सोने लगता हैं औऱ सुमिता दुखी होकेमन मे - कियुऐसा कररहे हैं अब तौ आप् बिल्कुल भि मुझपे ध्यान नहीं देतेकई दिन होँ गये हैं
सुमिता फिन मजबूर होके चूत मे उंगली करने लगती हैं
कुनाल केँ घऱ
खानां पीना होँ चुना थां कुनाल सुनीता सें बात करके बेताबी जोस सें भरा अंजली केँ कमरे मे आता हैं अंजली कुनाल कों देख घबरा जाती हैं औऱ नजरे नीचेकर लेती हैं कुनाल एक् नजर अंजलि केँ चुचे कि तरफ देखता हैं फिन अंजली केँ पास धीरे-धीरे बैठ जाता हैं
कुनाल अंजली कों देख - मेरीतरफ देखो
अंजली डरते कुनाल कों देखती हैं
कुनाल - गुरिया हमारे बीच मामाजी भांजे केँ संग एक् मित्र कां रिस्ता भि हैं तोँ जोँ पूछूँ सच बताना बिनाडरे
अंजली हिम्मत करके - जी
कुनाल - हुकब सें चलरहा हैं
अंजली - 2 महीने सें जयदा हौ गये
कुनाल - हु तुम् अमर सें प्रेम करती हौ विवाह करना चाहती होँ
अंजली कुनाल कों देख धीरे-धीरे सें - जी मामाजी
कुनाल - हुठीक हैं मे विवाह करवाउंगा तुम् दोनों कि
अंजली खुश होके कुनाल केँ गले लगते हुवे - मामू सच्ची
कुनाल अंजली कों पकर पलंग पे लेत जाता हैं औऱ अंजली कों बाहों मे कास्ट हुवे - हा सच्ची
अंजली कुनाल केँ बाहों मे चिपकी थि कुनाल अब अपनी भांजी कों अलगनजर सें देखरहा थां इस लिये कुनाल अभि अंजली केँ चुचे सीने पे फिल करकेमजे लेँ रहा थां
अंजली खुश होके कुनाल कों देख - मामू मुझेपता थां आप् मेरासंग देगे
कुनाल मुस्कुराते हुवे - मेरी प्यारी गुरिया जोँ हौ तुम् मगर बेटा जिस हालत मे तुम्हे देखाकोई औऱ देख लेता तोँ ध्यान रखना थां नां तुम् दोनों कों
अंजली थोराडर सर्म सें - सोर्री मामू
कुनाल अंजली केँ पीठ सेहलते आखो मे देख धीरे-धीरे सें - तुम् क्रोध तोँ नहीं हौ नाँ मे गलतसमय पे आँ गय़ा औऱ तुम कोदेख लिया तुम्हरे नंगेसमझ रही होँ नाँ
अंजली कुनाल कों देख लज्जा सें - नहीं मामू मे कियु क्रोध होगीअब अजीबलगा कोई औऱ देख लेता तौ गजब होँ जाता
कुनाल गरमजोस मे पागल होके अंजली केँ चूत पे लन्ड दबाते हुवे अंजली कि आखो मे देख - तौ तुझेही बुरा नहींलगा क्रोध नहीं होँ तेरे चुचे मेनेदेख लिये तोँ कहो
अंजली हैरान थोरा सर्म सें - नहीं मामू
कुनाल जोस मे - सच
अंजली - वोँ वोँ मामू
कुनाल अंजली केँ होठो पे उंगली फेरते हुवे - वोँ सभी पहलीबार होँ रहा थां याँ
अंजली कों अजीबलग रहा थां मगर अंजली रुक नहींपा रही थि
अंजली कुनाल कों देख धीरे-धीरे सें सर्म सें - हा पहलीबार थां
कुनाल नॉर्मल आवाज़ मे - मगर गुरिया यह रंडि क्याँ हैं तुम् उसकी रंडि होँ क्याँ
कुनाल हसने लगता हैं
कुनाल माहौल कों नॉर्मल बनारहा थां ताकि अंजली कों सभी नॉर्मल लगे
अंजली सर्म सें कुनाल कों देख - मामू आप् भि नाँ
कुनाल हस्ते हुवे - अच्छा बाबाटिक हैं तुम् दोनों जोँ करो
कुनाल - मगर गुरिया मुझे बहुत बुरालग रहा हैं
अंजली हैरान होके - किसबात कां
कुनाल अंजली कों देख - गुरिया तुम् मुझे छोटी सुखीकिस देती हौ औऱ अपने बाबू सोना कों गिला वालाइस लिये
कुनाल यहकेह जोरजोर सें हसने लगता हैं अंजली हैरान कुनाल कों देख कुनाल केँ सीने पे मारते हुवे - गंदे मामू
कुनाल इतना चालक थां अंजली कों फिल होने हि नहींदेख रहा थां बातें नॉर्मल नहीं होँ रही बेचारी मासूम अंजली फस्टे जारही थि
कुनाल अंजली केँ बाल पीछेकान केँ करते अंजली कों देख प्रेम सें - सचकेह रहा थां गुरिया एक् बात बोलू बुरा तोँ नहीं मनोगी
अंजली कुनाल कों देख - आपके किसी बातो कां मे बुरामान नहीं सकती मामू
कुनाल - जनताहु यह बोलना थां गुरिया तेरे चुचे तेरी मामीजी सें बहुत अच्छे हसीन हैं
अंजली एक् लम्हा हैरान होती हैं औऱ कुनाल कों देखती रहती हैं
कुनाल दुखी होके नजरे नीचे करके - सोर्री गुरिया मुझेऐसा नहीं बोलना थां मे अच्छा मामू नहींहु तेरा मे
अंजली कुनाल केँ चेहरे कों उपर करके - मामू इतनासभी होने केँ बाद भि आप् मे जरा भि मुझसे क्रोध नहीं क्याँ बलकी मेरे प्रेम देख कों समझ मेरी विवाह केँ लिये राजी हैं आप् तोँ मेरे बेस्ट मामू हैं
कुनाल अंजली कों प्रेम सें देख - सच
अंजली - हु वोँ मामू कियासच मे मेरे वोँ मामीजी सें
कुनाल मन मे हस्ते हुवे - कितनी बोलीं हैं इसका फायेदा मुझेमिल रहा हैं
कुनाल नॉर्मल आवाज़ मे - हा गुरिया तेरी मामीजी सें बहुत अच्छे टाइट गोरे चुचे हैं मगर अफसोस अच्छे सें देख नहीं पाया
अंजली कों अच्छा भि लगता हैं शर्मा भि जाती हैं
कुनाल अपनाचाल चलते हुवे - गुरिया अजीबलग रहा हैं नां तुम को मे मामू होके केसेऐसी बातकर सकताहु तुम् चाहो तोँ
अंजली बीच मे - नहीं मामू हम् मित्र भि हैं तोँ चलेगा
कुनाल - हु
कुनाल अंजली केँ होठो कों पकर प्रेम सें अंजली कों देख - विवाह तोँ करवा दुगा तुम् दोनों कां मगर मुझे क्याँ दोगी
अंजली तेजससे लेते हुवे - क्याँ चाहिये
कुनाल - किस गीली वाली औऱ मुझे अपनी गुरिया केँ चुचे भि देखने हैं अभि
अंजली हैरान होके - क्याँ
कुनाल धीरे-धीरे सें कान मे - औऱ तुम् बोलो कों मे तुम को रंडिकेह सकताहु यहसभी हम् दोनों लें बीच रहेगा
अंजली सिहर जाती हैं थोरा हैरान भि अंजली गलतसही सोच पातीतब तक कुनाल अंजली केँ ऊपरआके अंजली केँ नर्म होठो कों मुह मे भर केँ चूसने लगता हैं अंजलि पूरीशोक होँ जाती हैं
कुनाल पगलो कि तरफ अंजली कों किस करने लगता हैं पहलाकिस स्वाद अपनी भांजी कां लेते हि कुनाल सातवे आसमान मे चला जाता हैं कुनाल पहले सें औऱ जयदाजोस मे होस खोने लगता हैं
अंजली होँ हैरान शोक थि मगर अपने मामू केँ मजे सें होठो कों चुस्टे फिल करके अंजली होस खोने लगती हैं नतीजा अंजली सांत औऱ कुनाल कों बाहों मे कस स्वयं संग देने लगती हैं
कुनाल मजे सें अपनी भांजी केँ होठो कों जिब कों मुह मे लेके चुसेजा रहा थां वही अंजली गरम होकेमजे लेते हुवे अपने मामू कों अपने नर्म होठो कां रस पिलाने मे लगी थि कुनाल मन मे - माशपथ इतना आनंद आयेगा अपनी जवान भांजी केँ होठो कां रस पीने मे सोचा नहीं थां
वही अंजली लीचे लेतीमन मे - यह कैसा एहसास मज़ा हैं यहअलग हैं मुझे इतना मज़ा अच्छा कियुलग रहा हैं उफ मामू मेरे होठो कों मजे सें चुसेजा रहे हैं किया मामू कों इतना मज़ा आँ रहा हैं
3 मिनटबाद किस टूटता हैं
अंजली कुनाल तेजससे लेने लगते हैं कुनाल अंजली कों देख - चुचे चुचे दिखाओ अपने जल्द सें गुरिया
अंजली जोस मे होस होके बिना देरी किये तिसर्ट उपरकर देती हैं
वही नजरावही सीनफिन कुनाल केँ सामने थां कुनाल बाबला हौ जाता हैं मुह मे पानी लिये अपनी भांजी केँ दोनों चुचे देखने मे खो जाता हैं अंजली सोचो मे गुम होने लगती हैं मगर कुनाल होस मे आकेमन मे - अभि होस नहीं खोना हैं कुनाल
अंजली गलतसही सोच पति उसके पहले कुनाल एक् चुचे कों पकर पगलो कि तरफमुह मे लेके चूसने लगता हैं अंजली सिहर जाती हैं मुह सें जोर सें अहहमा सिसकिया निकलने लगती हैं बेचारा अमर नें भि अब तक अंजली केँ चुचे नंगे नाँ बताये चुसे थें तोँ यह एहसास अंजली कां पहलीबार मामू सें मिलरहा थां अंजली सिसकिया लेते हुवे मदहोसी मे - उफ मामूअहह यह आप् कियाकर रहे हैं उफमा
कुनाल तोँ होस मे थां हि नहीं
अंजली कुनाल केँ सर पे हाथ रखते हुवे - उफमाचूस लीजिये मामू अपनी भांजी केँ चुचे कों
कुनाल फिन जल्द सें अंजली केँ केँ टीसर्ट निकाल उपर सें पूरा नँगा करके अंजली कों नीचेबैड पे लेता केँ दोनों चुचेकस केँ पकर लेता हैं औऱ एक् चुचे लेँ निपल कों जिब सें चाटने लगता हैं अंजली पूरीगरम होकेमचल तरप् केँ सिसकिया लियेजा रही थि
अंजली सिसकिया लेते हुवे - मामूपता नहीं कियु बहुत मज़ा आँ रहा हैं उफ मामू करते रहिये जौ आप् कररहे हैं
कुनाल जोस मे पागल होकेमन मे - हुकाम कररहा हैं जैसा सोचा थां
कुनाल फिन अंजली केँ चुचे केँ बीच गर्दन कों चूमने चाटने लगता हैं कुनाल अंजली कां पहलीबार थां जोँ अमर कों करना चाहिये थां कुनाल कररहा थां पहला एहसास मजे लेके अंजली कि चूत पूरी गीली होके पानी निकाल रही थि अंजली मन मे - मर गई यह मज़ा कैसा हैं
कुनाल मन मे - कितनी सॉफ्ट गोरे चमरे हैं मेरी भांजी केँ
कुनाल फिन थोराउपर आके अंजली कों किस करने लगता हैं अंजली भि मदहोस होकेगलत सही भुलके पूरासंग देने लगती हैं दोनों मामाजी भांजी सभीभूल अलग हि दुनिया मे खोटेचले जाते हैं
तभी कुनाल झर जाता हैं हा कुनाल कां निकल जाता हैं यह होना हि थां अपनीसगी बेहन कि बेटी अपनी जवान कुवारी भांजी केँ संग इतनासभी पहलीबार कररहा थां रिस्तो मे यही तोँ बात होती हैं जोसकई गुना जयदाबढ़ जाता हैं
कुनाल किसतोर बैठ केँ तेजससे लेते हुवेमन मे - दत्तझर गय़ा मे
अंजली तेजससे लेते हुवे कुनाल कों देखती हैं फिनबैठ जाती हैं
कुनाल अंजली केँ एकदमपास आके अंजली केँ गले कों पकर दबाते हुवे - बोलतु मेरी रंडि हैं बोल
अंजली तौ जोस मे मदहोस होके कुनाल कों देख - पर्र मामूअमर कां
कुनाल अंजली केँ मुह मे उंगली डालके अंजली कों देख - तेरे अंदर बहुतआग हैं एक् सें नहीं बुझेगी
कुनाल मुह सें उंगली निकल - तुझपे मेराहक भि होगाबोल मेरी रंडि बनेगी
अंजली कुनाल कों देखते हुवे - अगरबनी तोँ वादा कीजिये मेरी विवाह अमर सें करवा देगे
कुनाल - वादाअब बोल
अंजली कुनाल कों देख - मे आपकी रंडिहु मामू
कुनाल - रंडि कां मतलबपता हैं नां
अंजली मदहोसी मे - हापता हैं
कुनाल अंजली केँ दोनों निपल कों सेहलते हुवे अंजली कों देख - अमर सें मिल सकती हैं मगरयाद रख सेक्स नहीं करेगी मे करुगा पहले मंजूर हैं मेरी रंडि
अंजली सिसकिया लेते हुवे कुनाल कों देख - पर्र मामूअमर कां क्याँ
कुनाल - उसेपता नहीं चलेगा
अंजली मजे मे सिसकिया लेते हुवे - टिक हैं मामू मंजूर हैं
कुनाल - मेरी प्यारी रंडिचल झुक मेरे सामने
अंजली कुनाल कि समाने झुकते हुवे - मे आपकी रंडि मामू
कुनाल यहदेख मन मे खुश होके - सालीअब चोदुगा तुम्हे तेरे अंदर मे इतनी गर्मी हैं पता नहीं थां पहले कोसिस करता तोँ तु आसानी सें चुद जाती मुझसे खैरकोई बात नहीं
कुनाल बैठजाओ
अंजली बैठ जाती हैं
कुनाल - यहबात हम् दोनों केँ बीच रहेगी तु मेरी रंडि हैं चिंता मतकर जल्द हि तेरी विवाह करवा दूँगा अमर सें
अंजली खुश होके - हा
कुनाल - चूत पे बाल हैं
अंजली सर्म सें - जीजी मामू
कुनाल -- पहले मे देखुंग सभी करुगा उसकेबाद हि अमर कि बारीसमझ गई
अंजली - जी मामू
कुनाल जाते हुवे - सोजाओ
कुनाल बाहर् आकेखुश होकेमन मे - बिस्वास नहीं होँ रहा भांजी कों रंडिबना लिया दोस्त झर गय़ा खैर कुनाल अब तेरी रंडि हैं जब चाहेतब जोँ करना हैं कर सकता हैं
अंजली कपड़े पहनबैड पे लेतेमन मे - यह क्याँ होँ गय़ा मे जोस मे आके क्याँ कर गई केसेमगर अब मे पीछेहटी तौ होँ सकता हैं मामू बुरामान जाये औऱ हमारी विवाह नां करवाये
अंजली अपने चुचे दबाते हुवे - पर्र आनंद बहुतआया किया हि होँ जायेगा मामू कि रंडि बनके रहूगी मुझेबस अमर सें विवाह करनी हैं मामूखुश रहेगे तोँ मेरी विवाह अमर सें कर देगे
अंजली कों अब एहसास होता हैं कि वोँ कियागर गई हैं मगर अंजली कों इसकेबाद भि गलतसही समझ नहीं आँ रहा थां नां एहसास हौ रहा थां उसका मामाजी उसेफसा रहा हैं बल्कि अंजली कों अमर दिखाई देरहा थां औऱ मामू केँ संग जौ मज़ा मिला वोँ अलग
साहिल केँ घऱ सुभह 10 बजे
सुमिता खेत मे खेत मे आई थि बकरी कों खुलेखेत मे छोरखास कटने मे लगी हुईँ थि थोरिदेर बाद सुमिता कों अंदर गर्मी फिल होने लगती हैं सुमिता खेत मे अंदर जाके चूत मे उंगली करना सुरुकर देती हैं
सुमिता गंने केँ खेत मे थोरा अंदर खाली स्थान लेती सारी पेटीकोट कों उपर किये तेजी सें बीच वाली उंगली अपनी बालों वाली चूत केँ अंदर बाहर् करते हुवेअहह उफ सिसकिया निकाल रही थि
गाव कां हि एक् लरका भोलानाम कां उसीगने केँ खेत सें होकेजा रहा थां तभी भोला कों अहह उफ्फ सिसकिया औऱ फच्फच् कि आवाजे सुनाई देती हैं
भोला भोला नहीं थां कमीना थां समझ जाता हैं मामला क्याँ हैं
भोला धीरे-धीरे सें अंदरखेत मे गने कों साइड करते अंदर जाते हुवेमन मे - कोन हैं जौ सुभह सुभहखेत मे लगेपरे हैं
भोलाजब थोरा अंदर जाता हैं तौ दूर सुमिता दिखाई देती हैं लेतीमगर भोला कों नां सुमिता कां चेहरा नां चूत दिखाई देता हैं बस इतनादिख रहा थां तेजी सें जौ हाथ हैं टैंगो केँ बीचचल रहे हैं
भोलामन मे - यहकोन हैं जिसके चूत मे इतनीआग हैं जौ खेत मे उंगली कररही हैं सालाकुछ दिख भि नहींरहा अलग एंगल मे हु मुझे दूसरी तरफ जानां होगातभी मे साफसभी देख सकताहु
भोला धीरे-धीरे सें दूसरी यानी सुमिता केँ टाँगो कि तरफ जाने लगता हैं वही सुमिता कों पता हि नहीं थां सुमिता केँ चूत सें सफेद गाढ़ा पानी निकलरहा थां चूत पूरी गीलीचिप चिपि हौ गई थि फच्फच् कि केँ संग सुमिता जोर सें अहहउफ सिसकिया निकाल रही थि सुमिता झरने वाली थि
भोला भि पहुँचने वाला होता हैं भोला कों अब सारी पेटीकोट उठी दिखाई देती हैं गोरे मोटे जांघे भि मगर अभि भि पूरासभी दिख नहींरहा थां
तभी सुमिता कों आवाज़ सुनाई देती हैं असल मे भोला केँ पांव सूखे पत्ते पे पर्र रहे थें भोला औऱ नजदिक जाने कि कोसिस कररहा थां पर्र गर्बर् होँ जाती हैं
सुमिता कों जैसे हि एहसास होता हैं कोई हैं आसपास जल्द सें सारी नीचेकर खरी होती हैं औऱ तेजी सें जाने वाली होती हैं वैसे हि भोला सुमिता केँ समाने तेजी सें आखेखरा होँ जाता हैं
सुमिता भोला कों देख हैरान होती हैं तोँ वही भोला सुमिता कों देख पूराशोक मे चला जाता हैं
असल मे पूरागाव सुमिता कां दीवाना थां भोला नें सोचा नहीं थां सुमिता होगी
सुमिता डरी सर्म सें - तुम् भोला बेटे जानेदो मुझे
गाव कां भोला थां तौ सुमिता भोला कों जानती थि कोन किसका बेटा हैं औऱ सुमिता कों तौ पूरागाव जनता थां
भोलाहोस मे आके मुस्कुराते हुवे - तौ आप् थि ऑन्टी उफ आपकी सिसकिया फच्फच् कि आवाजे सुन मेरी हालत खराब हौ गई थि अब तौ औऱ किसकी आवाजे सुनरहा थां वोँ आप् थि जान केँ
सुमिता थोरा गुस्से सर्म सें - देखो बेटा जानेदो नहीं तोँ अच्छा नहीं होगा
भोला मुस्कुराते हुवे - एक् सर्ट पे मुझे अपने चुचे दबाने दो नहीं तोँ मे सभी कों बता दूँगा आप्
सुमिता डर जाती हैं रोने जैसी आवाज़ मे - प्लेस जानेदो बेटा मे तेरीमा कि जैसीहु
भोला सुमिता कों बाहों मे भर - मा तौ नहींबस थोरामजे लुगा
भोला सुमिता कों किस करने लगता हैं सुमिता सांतकरी आसु लिये अपनी क़िस्मत कों कोसने लगती हैं
भोला पागल होके सुमिता केँ होठो कों चूसने लगता हैं मगर सुमिता अपने होठों कों बंद रखती हैं
भोला सुमिता केँ केँ चुचे सारी कों उपर करके दबाने लगता हैं सुमिता सिहर काप् जाती हैं पहलीबार उसके चुचे कों उसके पति केँ अलावा कोईदबा रहा थां वोँ भि एक् जवान लरका
भोला तोँ अपनी क़िस्मत पे नाजकर रहा थां नर्म नर्मबरे टाइट चुचेउस महिला केँ दबारहा थां जिसका दीवाना पूरागाव थां मगर क़िस्मत भोला केँ संग थि
सुमिता बरी मुश्किल सें स्वयं कों रोके रखती हैं मगरमुह सें अहह निकलजि जाती हैं भोला सुमिता कों देख चुचे दबाते हुवे - ऑन्टी बहुत मस्त चुचे हें आपके दबाने मे आनंद आँ रहा हैं चूत पे बाल हैं आपके
सुमिता भोला कों धक्का देके गुस्से मे - हद मे रहो भोला जितना कर लिया बहुत हैं यादरख किसी कों कहा तौ तेरीखैर नहीं
भोला मुस्कुराते हुवे - माशपथ भोला कितना गिरा कियु नाँ होँ शपथ नहीं तोरता मे वादा करताहु मगर प्लेस ऑन्टी बसबता दो नाँ आपके चूत पे बाल हैं प्लेस प्लेस ऑन्टी आपकेआगे हाथ जोरता हु
भोला हाथोजोर केहरहा थां सुमिता भोला कों देखते हुवे - वादा करते हौ तौ ठीक हैं
सुमिता धीरे-धीरे सें नजरे नीचे किये - हा हैं
भोला सुमिता केँ मुह सें सुनते हि पागल होके - कितने महीने केँ
सुमिता गुस्से सें देखती हैं भोलाडर केँ - जाताहु
सुमिता - 1 महीने केँ प्लेस अबजाओ
भोला सुमिता केँ पासआके - वादा मे गिराहु मगर इतना भि नहीं पूरागाव आपका दीवाना हैं मे भि मुझे जितना करने कां मोक्का मिला क़िस्मत वालाहु
भोला धीरे-धीरे सें सुमिता केँ चूत पे सारी केँ ऊपर सें हाथ फेरता हैं दबा देता हैं सुमिता जोर सें अहह करती हैं
चलताहु ऑन्टी पऱ आगे सें ध्यान रखनाबाय
भोला तौ चला जाता हैं मगर सुमिता बैठ रोने लगती हैं यहसभी नहीं होताअगर राघव सुमिता पे ध्यान देता सायद भाग्य कि लकीर मे यह होना लिखा थां
अभि तोँ यह सुरुवात थि बहुतकुछ होना बाकी थां
राघव सुमिता पे ध्यान नहींदे रहा थां कियुंकी राघव अपने विद्यालय कि लरकी कों फसा केँ मजे लेने मे लगा थां
साहिल सभी सें अजान कि उसके पीछे किया हौ रहा हैं औऱ आगे किया होने वाला हैं उसकेसंग भि
कुनाल केँ घऱ
सुनीता खेत मे गई थि औऱ राघव उसका फायेदा उठारहा थां कमरे मे अंजली केँ चुचे दबाते हुवे अंजली कों देख - रंडि मेरी तेरी चूत मे बहुतआग हैं बोलहा नां
अंजली दर्दमजे मे कुनाल कों देख - हा मामू बहुतआग हैं मामूअमर सें मिलने जाऊ
कुनाल मुस्कुराते हुवे - कियु नहीं मेरा बच्चा मेरी रंडिमगर याद रखना
अंजली कुनाल कों मदहोसी मे देख - समझ गई मामू
कुनाल - जामगर जल्द आँ जानां कियुंकी लोगो कों सक् होँ सकता हैं
अंजली खुश होके कुनाल कों किस करके - जी मामू
अंजली फिनचली जाती हैं कुनाल लन्ड पकर - जल्द हि तेरीसिल टरूंगा
3 दिनबाद
कुनाल अंजली कों हमेसा केँ लिये हासिल करना चाहता थां इस लिये कुनाल आगेकुछ नहीं कियाइस तीनदिन मे कुनाल बस चुचे दबाते चूसने कां मज़ा लिया औऱ प्यारी बातें कर अंजली कों पूरा अपनाबना लेता हैं हा अंजली अमर सें विवाह करने कां इरादा नहीं छोरति मगर अंजली कों कुनाल अपने मामू कां प्रेम भि चाहिये थां
आखिर कुनाल नं अंजली कों रंडिबना हि दिया थां जौ दो लन्ड लेने कि लिये सजधजकर थि
सुमिता खेत मे हुइ घटना भुला केँ जीने लगती हैं भोला भि फिनकभी सुमिता कों परेसान करने नहींआता हैं
तौ वही साहिल राधिमा केँ बीचरोज मुलालते होतीरही यहतीन दोनों मे प्रेम कि चिंगारी तौ दोनों तरफलगी थि यहसाफ थां
शाम 5 बजे एक् एक् खेत वाले रास्ते पे जहाकम लोग थें साहिल राधिमा बैठे बातें कररहे थें
राधिमा साहिल केँ मजे लेते - आप् कितना सर्माते हैं इतना तौ मे लरकी होके नहीं सर्मती
साहिल मुहबना केँ - हा तोँ क्याँ होँ गय़ा मे वोँ
राधिमा हस्ते हुवे - रहने दीजिये आपसे नाँ होँ पायेगा
साहिल राधिमा कों देखता हैं फिन चेहरे कों पकर होठो पे किस करते हुवे - अबकहो बरीआई
राधिमा पूरीशोक आखेबरी करके साहिल कों देखती रहती हैं फिन सर्म सें नजरे नीचे करके - आप् आप् बहुत गंदे हैं
साहिल मुस्कुराते हुवे - अच्छा अबकोन शर्मा रहा हैं
राधिमा सर्म सें मन मे - ऐसा करेगे सोचा नहीं थां मगर मुझे बहुत अच्छा लगा
साहिल मजे लेते हुवे - औऱ करे एक् बार
राधिमा सर्म सें जल्द सें - नहीं नहींबस जौ आपके किया गंदे
साहिल राधिमा कों देख - राधिमा जब सें तुमसे मिलाहु ऐसाफिल होतारहा जैसे तुम् सें दूर नां जाऊ तुझेही देखता रहुयह मेरा पहलीबार हैं पऱ अब एहसास हौ गय़ा मुझे मुझे तुमसे प्रेम हैं राधिमा
राधिमा साहिल कों देखते हुवे इमोसनल होके - मुझे भि साहिल
साहिल राधिमा कों गलेलगा लेता हैं
राधिमा आसु लिये - साहिल मुझे तुम्हारे संग पूरी जीवन जीनी हैं धोका तोँ नहीं दोगे
साहिल राधिमा केँ आसुसाफ करते हुवे - जब तक जिंदा हु
राधिमा साहिल केँ सीने सें लगते हुवे - मेरा अपनाकोई नहीं हैं साहिल आपको देखते हि फिलहुआ जैसे आप् हि मेरी दुनिया सभी हैं
साहिल - सायद भाग्य यही चाहती हैं हम् मिलेचलो तुम्हे घऱछोर केँ आताहु
राधिमा - आपके बाहों मे जोँ चैन हैं दिल नहींकर रहा पर्र जानां होगा
साहिल प्रेम सें राधिमा कों देख - बसकुछ महीने
राधिमा - हु
साहिल राधिमा 4 दिनों मे हि sसमझ लेते हैं दोनों एक् दूसरे केँ लिये हि बने हैं
कुनाल कि घऱरात 10 बजे
कुनाल सुनीता दोनों बैठे थें असल मे कुनाल नें सचबता दिया थां वजह कि सुनीता केँ रहने सें कुनाल खुल केँ मजे नहींकर पारहा थां इस लिये कुनाल अंजलि उसकेबीच जौ चलरहा हैं बता देता हैं
सुनीता शोक मे - कियाकहा आप् पागल होँ गये हैं ननदीजी
कुनाल बीच मे सुनीता कों देख - जनताहु तुम्हारा चक्कर चलरहा हैं अपने मायके कब सें किससे पता नहीं
सुनीता शोक औऱ डर केँ कापने लगती हैं
कुनाल - देखो मेरासंग दो वादा हैं तुम् जिसके चुदरही हौ चुदो बल्कि मे चाहता हु तुम्हे अपने आशिक सें चुदते हुवे देख्ना
सुनीता औऱ हैरान शोक होती हैं
सुनीता - आप् आप् बदलगये हैं
कुनाल - हा तुम् सही होँ जब सें भांजी कों अमर केँ संग देखा मे बदल गय़ा कहोसंग होँ
सुनीता मन मे - सभी जानने केँ बाद भि क्रोध नहीं बल्कि केहरहे होँ मे खुल केँ मजेकरू वोँ मुझे चुदते देख्ना भि चाहते हैं यह तोँ मेरे लिये अच्छा हि हैं
सुनीता कुनाल कों देख - सच
कुनाल - सच बताओकोन हैं कितने हैं कब सें
सुनीता - दो औऱ इधर 7 महीने सें
कुनाल मुस्कुराते हुवे - मेरी पत्नि कों कोईचोद रहा हैं वोँ भि दो केसे बताओ
सुनीता भि अपनेरंग मे आते हुवेबैड पे लेत टाँगे फैला केँ नइटीउपर करके कुनाल कों देख - मे ऐसे टाँगे फैला केँ लेत जातीहु औऱ वोँ मेरे टैंगो केँ बीचआता हैं मे स्वयं उसका मोटा लन्ड अपनी चूत केँ छेद पे रखतीहु वोँ धक्का मरता हैं जोर सें उसका मोटा लम्बा लन्ड मेरी आपकी पत्नि कि चूत कों फैलाते हुवेजब अंदर जाता हैं अहह आनंद आँ जाता हैं
कुनाल कों क्रोध नहीं बलकीजोस मे पागल होँ जाता हैं सुनीता भि यहदेख खुश होती हैं
कुनाल - हुयहा कोई हैं
सुनीता - नहींयहा नहीं हैं
कुनाल -हु मोबाइल पे बातें होती हैं
सुनीता - हाकभी कभीजब आप् नहीं होते
कुनाल - पहले किसने पहल किया तुमने याँ
सुनीता - मेने नहीं दोनों नें जबजिद करते हैं तौ रोक नहीं पाती
कुनाल मुस्कुराते हुवे - सुनोयहा एक् लन्ड मे लेके आऊगा तेरे लियेमगर उसके बदलने पैसे लेगेकहो तैयार होँ
सुनीता हैरान होती हैं फिन मुस्कुराते हुवे - ठीक हैं आप् यही चाहते हैं तौ
कुनाल जोस मे खरा होके - जारहा हु भांजी कि सील तोरने आहिस्ता कल बातें करेगे फिन बताना कोन हैं
सुनीता - हु पहलीबार हैं धीरे-धीरे
कुनाल मुस्कुराते हुवे - ठीक हैं
कुनाल अंदरआता हैं अंजली लेती कुनाल कों देख - मामू
कुनाल अंजली कों देख - मेरी रंडिआज तुम्हे अलग प्रेम दूँगा
अंजली सर्म सें - मे आपकी रंडिहु जोँ करना हैं कर लीजिये
कुनाल अंजली केँ पासबैठ - आज तेरीसिल तोरगा
अंजली कुनाल कि बातसुन डर जाती हैं मगर अगले हि लम्हा रंडि कि तरह कुनाल केँ गाल पे हाथरख कुनाल कों चुदासी होकेदेख - आपकी रंडि तैयार हैं मे तौ तरप्रही हु
कुनाल अपनी भांजी कां यहरूप देख पागल हौ जाता हैं
कुनाल अंजली कों देखमन मे - असली रंडिलग रही हैं हु चिंता मतकर असली रंडि हि बनाऊगा पहलेमजे लुगाफिन मेरे साथी
कुनाल कों अपने एक् मित्र कि बातयाद आती हैं आजशाम जब कुनाल अपने एक् मित्र केँ संगअडे मे पीने गय़ा थां तब
मित्र - दोस्त कुनाल गाव कि कोई मस्तमाल चोदने कों मिल जाती तौ मज़ा आँ जाता पैसे भि मागे तौ दूँगा मेरेपास पैसे कि कमी नहीं हैं
कुनाल अपने साथी कि बातयाद करकेमन मे - यह मोक्का हैं पैसे कमाने कां पहले मे मजेजी भर लेलूफिन तुनया लन्ड लेगी मुझे उसके बदले रुपया मिलेगा
कुनाल अंजली केँ गले दबाते हुवे - रंडिबोल लेगी मेरा लन्ड
अंजली दर्दमजे मे - हा लुगी मामू
कुनाल गले कों छोर अंजली केँ गाल मे चाटा मारते हुवे - बोल मे रंडिआज अपनी चूत मे आपका लन्ड लुगी
अंजली दर्द मे मजे मे कुनाल कों देख - लुगी अपनी चूत मे आपका लन्ड
कुनाल मुस्कुराते हुवे अपने हाथो पे थूक निकाल - चलचाट
अंजली पागल होकेमजे सें जिब सें साराथूक चाट जाती हैं
कुनाल प्रेम सें अंजली कों देख - तु मेरी गुरिया हैं रहेगी रंडि तौ मजे केँ लिये बोलता हु
अंजली कुनाल कों देखते हुवे - आप् बहुत अच्छे मामू हैं आप् जोँ बोलेंगे मुझे अच्छा लगेगा
कुनाल मुस्कुराते हुवे - हु अच्छा हैं मेरी रंडिचल डांस करके दिखा
इससभी सें अंजान साहिल राधिमा कि यादों मे खोयाकल मिलने केँ लिये बेचैन खाट पे करवटबदल रहा थां
राधिमा कां भि सेमहाल थां
पऱ कोई नहीं जनता थां ( क़िस्मत कि लकीर ) मे किया होने वाला हैं आगे चलकेबस पता थां तौ उस साहिल कों जिसने सभी देखा हैं
आज केँ लिये इतना हि
भाग्य कि लकीर ( + ) (incest special) (adultery special) - Continue reading for full story
बहोत हि शानदार औऱ बेहतरीन एपसोड हैं ! मगर साहिल केँ लिए बहोत बड़ा झटका हैं ! अगलेभाग कि इंतज़ार हैं !
Relavant source : click here



















