भाग्य कि लकीर ( + ) (incest special) (adultery special) – New Episode
chapter 8
ध्यान दे
यह पास्ट इस लिये दिखारहा हु ताकि आप् सभी कों पता तोँ रहे सुमिता अंजलि रिधिमा केँ संग कियाहुआ हैं कियुंकी साहिल वाला पस्ट् आयेगा तोँ यहसभी दिखेगा नहीं कियुंकी साहिल वोँ सभी होने हि नहीं देगा
दूसरी यह पास्ट 2 update मे खतम होँ जायेगी यह स्टोरी ऐसी नहीं हैं वोँ धीरे-धीरे सभी हौ यह क़िस्मत मे एकदम सें किया होता हैं लोगो कि सोच केसे बदलती हैं अच्छा बुरा केसेबन जाता hain लोग केसेबदल जाते हैं मोक्के मिलते फायेदा केसे उठाते हैं
यहकथा धीरे-धीरे धीरे-धीरे लेके चलने वाली हैं हि नहींयह तोँ एकदम सें कब किया हौ जाये क़िस्मत मे वोँ दिखारहा हु
तौ यह पस्ट् खतम होते हि साहिल वाला पस्ट् सुरु होगा
सुरु करते हैं
भोला सुमिता केँ घऱ उसके कमरे मे हि मजे लेने मे लगा थां सुमिता बेसम् थि लाचार थि कुछकर नहींपा रही थि
भोला नीचे सें नँगाखरा थां सुमिता केँ सामने एक् जवान लरके कां मोटा लम्बा लन्ड थां
भोला सुमिता सें - देखिये ऑन्टी हम् एक् डील करते हैं मे आगे नहीं जाउंगा जौ आप् नहीं चाहती मगर आपको मेरासंग देगा होगाबार बार रोकेगी तौ मुझे क्रोध आँ जायेगा औऱ गुस्से मे इंसान कुछ भि कर सकता हैं मे जाकेसभी कों बता भि सकताहु जोकि मे नहीं चाहता औऱ आप् भि नहीं चाहेगी बोलिये मंजूर हैं
सुमिता भोला कों देखते हुवे दुखीमन सें - ठीक हैं मगरहद सें आगे जाओगे तोँ मे चुप नहीं रहूगी
भोला - ठीक हैं वादा
सुमिता पुरेगाव मे बदनाम होने सें नहींडर रही थि सुमिता डररही थि अपने बेटे बेटी सें नजर केसे मिला पायेगी जबपता चलेगा तौ बसइस लिये सुमिता सभीसेह रही थि
भोला सुमिता कों देख - तयरहा अब लन्ड हिलाओ जल्दरहा नहींजा रहा हैं उफ सेक्सी ऑन्टी
सुमिता भोला केँ लन्ड हाथो मे पकर लेती हैं मोटागरम गरम अपने बेटे कि उमर केँ लरके कां लन्ड अपने हाथो मे लिये सुमिता सिहर जाती हैं राघव सें बरा बहुतगरम थां नां चाहते भि सुमिता कि चूत मे कुछ होने लगता हैं सुमिता कि आत्मा तोँ खुश नहीं थि मगर शरीर बेहकरहा थां
भोला तोँ खुशी केँ बारे पागल होने लगता हैं जिस स्त्री कों गाव कां हरकोई लेना चाहता थां वोँ महिला सें भोला अपना लन्ड हिलवाने वाला थां भोला कि क़िस्मत भि कमाल कि थि
भोला सुमिता कों देख - ऑन्टी सच बताना अंकल सें बरा मोटा हैं नां
सुमिता नजरे नीचे किये धीरे-धीरे सें - हा
भोला मुस्कुराते हुवे - कैसालग रहा हैं एक् जवान लरके कां लन्ड अपने हाथो मे लेके अच्छा लगरहा हैं
सुमिता - मुझे नहींपता
सुमिता भोला कां लन्ड हिलाने लगती हैं दोनों हाथो सें असल मे सुमिता चाहती थि सभी जल्द सें होँ जाये औऱ भोला उसकेघऱ सें चला जाये
सुमिता केँ लन्ड हिलाते हि भोलामजे सुख मे सिसकिया लेते हुवे - अहहउफ यह सपना तौ नहींअहह ऑन्टी मस्त हिलारही हैं आप्
सुमिता बिनाकुछ बोले लन्ड हिलाते जारही थि
भोला सुमिता कों देख - अहह ऑन्टी एक् हाथ सें अपने चुचे दबाइये दूसरे हाथ सें लन्ड हिलाते रहिये अहह जल्द
सुमिता बिनाकुछ बोले अपने एक् चुचे दबाने लगती हैं औऱ एक् हाथ सें लन्ड हिलाते रहती हैं सुमिता कि बदनगरम होने लगती हैं चूत गीली होने लगती हैं यहसभी सुमिता कों करना परेगा सोचा नहीं थां
भोला तोँ सुमिता कों चुचे दबाते लन्ड हिलाते देखमजे कि दुनिया मे जाते हुवे - उफ ऑन्टी यहसमय रुक जाता तौ अहह कितना आनंदआता आपके नर्म हाथो मे मेरा लन्ड खुशी सें उछलरहा हैं उफ आपके चुचे
भोलाहाथ आगे लेँ जाके सुमिता केँ निपल मसलने लगता हैं सुमिता सिसक् परती हैं मुह सें हल्का धीरे-धीरे अहह कि आवाज़ निकलती हैं
भोला औऱ जोस मे आने लगता हैं भोला निपल मसलते हुवे सुमिता कों देख - ऑन्टी इसी चुचे कां दूध पीके अंजलि साहिल बरे हुवे हैं नां अहह कितने मोटे निपल हैं टाइट चुचे हैं आपके
सुमिता होठो कों दबाते मुश्किल सें सिसकिया औऱ स्वयं कों रोके रखती हैं भोला मुस्कुराते हुवे - अहह औऱ तेज ऑन्टी मज़ा आँ रहा हैं
भोला - अहहआने वाला हैं ऑन्टी
सुमिता साइड होके हिलाने लगती हैं औऱ साहिल झरने लगता हैं
भोला हफ्ते हुवे सुमिता कों देख - उफ आनंद आँ गय़ा
सुमिता रुकते हुवे भोला कों देखती हैं
भोला सुमिता कों देख - अंकल आपके चुचे दबाते हें सच बताना
सुमिता - पहले दबाते थें अब नहीं
भोला मुस्कुराते हुवे - अंकल सें पहले किसी नें दबाया याँ
सुमिता - नहीं
भोला सुमिता कों किस करते हुवे - आप् नें खुशकर दिया मुझे
भोला कपड़े पहन जाते हुवे - आप् कमाल हैं ऑन्टी
भोलाचला जाता हैं सुमिता नीचे गिरे भोला केँ गरममाल साफ करती हैं फिनबैड पे बैठआसु बहाने लगती हैं
शाम 5 बजे
साहिल रिधिमा फिन अपनी स्थान बैठे प्यारी बातें करने मे लगे हुवे थें
साहिल लेताहुआ थां औऱ रिधिमा साहिल केँ सीने पे सररख लेती हुई थि
साहिल - बताओ कितने बच्चे चाहिये 6 याँ 10
रिधिमा हैरान होके साहिल कों देख - इतने बच्चे नाँ बाबा तुम् तोँ बहुत बेसरम होँ
साहिल हस्ते हुवे - कियु इतने बच्चे नहीं निकाल सकती
रिधिमा साहिल केँ सीने पे मारते हुवे - छी बहुत गंदी बातें करते हैं आप्
साहिल रिधिमा चोरी छुपे मिलते बातें करते थोरा प्रेम औऱ साहिल रिधिमा अपनेघऱ चले जाते
रात 9 बजे
सुमिता राघव पलंग पे लेते थें सुमिता राघव कों देख - सुनिये जी आप् कुछ करते कियु नहींमन नहीं करता किया आपका
राघव सुमिता कों देखते हुवे - अब हमारी उमर हौ चुकी हैं तुम् तौ अभि भि 30 कि लगती होँ मगर मेराउमर दिखरहा हैं सुमिता समझोकभी कभी महीने मे कर लेगे
सुमिता - ठीक हैं जी आप् जैसाकहे
सुमिता कों इसबात सें दुख तौ हुआमगर एक् नाँ एक् दिनऐसा होना हि थां पर्र सुमिता कों नहींपता थां बातकुछ औऱ हैं
वही राघव सिलु कि लेने कि सोचरहा थां मगर मोक्का मिल नहींरहा थां राघव रिस्क नहीं लेना चाहता थां जोस मे कही पकरा गय़ा तोँ उसकी पुरेगाव वाले गांडमार लगेइस लिये राघव अच्छे मोक्के कां इंतजार कररहा थां
दूसरी तरफ साहिल रिधिमा बातें करने मे लगे थें
कुनाल केँ घऱ
कमरे मे पप्पू अंजलि केँ चुचेमजे सें चूसने मे लगता थां औऱ अंजलि बरे प्रेम सें अपने चुचे चुस्वा रही थि अंजलि - उफ मामूअहह चूसिये मजे सें मेरे चुचेअहह बहुत अच्छा लगरहा हैं मज़ा आँ रहा हैं
पप्पू - उफ मेरी रण्डी चूसरहा हुअहह मस्त चुचे हैं तेरे
pappu अंजलि केँ चुचेमजे सें चुस्ता हैं फिन चुदाई करना सुरुकर देता हि
अंजलि अपनी दोनों तांगे फैलाये पकरे हुईँ लेती थि औऱ पप्पू चुदाई करतेजा रहा थां अंजलि मजे सें अहहउफ सिसकिया लीरही थि
पप्पू अंजलि कों देख - उफ मज़ा आँ रहा हैं तेरी मस्त टाइटगरम चूत मरने मे अहह तुम्हें देखकई बारमन करता थां पकर् केँ चोददु मगरआज वोँ सपनाअहह उफ पुरा हौ रहा हैं
अंजलि दर्दमजे मे - उफ मामू मुझे नहींपता थां अहहमगर अब जितना मनकरे चोदो मुझेअहह बहुत मस्त लन्ड हैं आपका
अबसीन ऐसा थां पप्पू लेता थां औऱ अंजलि लन्ड कि सवारी मजे सें कररही थि अपनी गांडकमर हिलाते आगे पीछे करतेहुए
पप्पू अंजलि कि मस्तकमर सेहलते चुचे दबाते हुवे - उफ मस्त फिगर हैं तेराअहह अहह बहुत अच्छे सें सवारी कररही हौ अहह करतेरहो
अंजलि - अहह आपका लन्ड मोटा हौ सवारी करने मे अहह बहुत मज़ा आँ रहा हैं उफ
30 मिनटबाद
सुनीता आती हैं कमरे मे तुँ देखती हैं पप्पू अंजलि बैठे बातें कररहे थें सुनीता अंदरआते हुवे - होँ गई चुदाई
pappu सुनीता कों देख - भाभी
सुनीता नाइटी मे थि औऱ पप्पू केँ पासबैठ जाती हैं
पप्पू - कुनाल सो गय़ा क्याँ
सुनीता मुस्कुराते हुवे - हा
पप्पू मुस्कुराते हुवे - तौ सुरुकरे
सुनीता मुस्कुराते हुवे नाइटी निकाल नंगी हौ जाती हैं
pappu सुनीता कों घोरी बनाके चुदाई करते हुवे - भाभी सोचा नहीं थां आप् ऐसे मेरा लन्ड लेगीअहह आपकी चूत मस्त फूली हुईँ हें भाभी
सुनीता चुदाई कां आनंद लेते हुवेमन मे - मायके पहलीबार जब पति केँ अलावा मेरी चूत मे किसी औऱ कां लन्ड गय़ा अहह जोँ मज़ाआया उसकेबाद मुझेनये लन्ड सें चुदने कां बहुतमन करनेलगा फिन मेरीयह समस्या मेरे पति नें स्वयं हलकर दि उफ बहुत आनंद आँ रहा हैं
अंजलि सभी देखती रहती हैं चुदाई खतम होती हैं पप्पू कपड़े पहन अंजलि सुनीता कों देख मुस्कुराते हुवे - तुम् दोनों मस्त रण्डी हौ जानां परेगा मगरकल आऊगा कुनाल नहु रहेगा तौ
पप्पू फिनचला जाता हैं
महीने गुजर जाते हैं एक् महीने बाद
अंजलि कुनाल अपने मामू केँ घऱ महीने सें जयदारह चुकी थि अबबरी घऱआने कि थि अंजलि कां मन बिल्कुल घऱआने कां नहीं थां वजहतीन तीन लन्ड जौ मिलरहे थें कुनाल पप्पू अमर कां
मगर महेसा केँ लिये अपने मामू केँ घऱरह नहीं सकती थि कुनाल पप्पू अमर मे खूब पेला अंजलि कों औऱ अंजलि मे भि मजे सें सभी कां लन्ड अपनी चूत मे लिया पप्पू सुनीता कों भि खूब चोदता सुनीता कों तौ कुनाल सें जयदा पप्पू सें चुदने मे आनंदआने लगा थां
तौ वही साहिल केँ घऱ सुमिता केँ संग भोलाखूब मजे लें रहा थां मगरहद तक जयदा औऱ महेसा नहींवजह भोला चालाक थां बारबार हमेसा सुमिता केँ पास नहीं जाता थां अगर गय़ा पकरा गय़ा तौ जोँ मजेमिल रहे हैं वोँ भि नहीं मिलेगा इस लिये भोला हफ्ते मे दोबार जाता थां औऱ सुमिता सें मुठ मारवाता चुचे दबाता औऱ होठो केँ रस कां स्वाद लेके आँ जाता
सुमिता मजबूरी थि इस लियेसभी सेहरही थि डर तौ सुमिता कों लगा रहताकही कोईदेख किसी कों पता नाँ चल जाये
साहिल राधिमा कां प्रेम हद सें प्रेम एक् दूसरे सें होँ गय़ा थां अब नां रिधिमा साहिल बगैर जीने कि सोच सकती थि नाँ साहिल दोनों एक् दूसरे सें मिलने केँ लिये बेताब रहते थें औऱ मोक्का मिलते हि मिलते प्रेम वाली बातें करते रहते हैं
मगर राघव बहुत बेचैन थां आज संडे थां कमरे मे बैठा सोचो मे गुम थां वजह थि सिलु
इस एक् महीने मे रायव कों मोक्का हि नहीं मिला जयदा सें जयदा राघव सिलु केँ चुचे दबाना चुस्ता औऱ अपना लन्ड मुह मे देके पानी निकाल आँ जाताऐसा नहीं थां मोक्के नहीं मिले राघव कों मगर रायव बहुत डरता थां कही पकरा गय़ा तोँ राघवसही भि थां
मगरआज राघव जयदा टेंसन मे इस लिये थां कियुंकी अब अंजलि आने वाली थि
राघवमन मे - साहिल केँ रहते सिलु कों घऱ बुला भि सकता थां मगरअब अंजलि आँ रही हि जोँ मोक्के मिलरहे थें वोँ भि गय़ा कियाकरू मे
राघवतभी सोचते हुवेमन मे - नहींआज अभि मोक्का हैं सुमिता खेत मे गई हैं अभि औऱ वोँ दोपहर 1 बजे तक आयेगी साहिल भि दोस्तो सें मिलने गय़ा हैं तौ वोँ भि दोपहर कों आयेगा अभि मोक्का हैं
राघव सिलु केँ घऱ जाता हि सिलु कों लेके अपने कमरे मे आता हि सिलु राघव कि यार कि बेटी थि इस लिये राघव सिलु केँ घऱआते जाते रहता थां सिलु भि आते रहती थि कोईसक् भि नहीं करता थां
कमरे मे सिलु पूरी नंगीखरी थि डरी हुईँ थि राघव भि नँगाखरा सिलु केँ नंगी बॉडी कों देख पागल हौ गय़ा थां
राघव सिलु कों देख - उफ बेटी किया मस्त बॉडी हैं तेरीअहह तेरी चूत कितनी साफ होँ लगता हैं सफाई हुईँ हैं
सिलु डरते हुवे - अंकलकोई देख लेगा तौ गजब होँ जायेगा
राघव सिलु केँ पासआके - समय हैं अभि कोई नहीं आयेगा
राघव सिलु केँ मस्त टाइट दोनों चुचेपकर लेता हैं एक् चुचेमुह मे लेके चूसने लगता हैं तोँ दूसरे चुचे कों निपल कों दबाने लगता हैं सिलु सिसकिया लेने लगती हैं सच तौ यह थां सिलु कों सुरु मे गलतलग रहा थां मगर धीरे-धीरे धीरे-धीरे सिलु कों मज़ाआने लग गय़ा सिलु भि सभीभूल मजे सें सिसकिया लेते हुवे - अहह अंकलउफ धीरे-धीरे अहह अच्छा लगरहा हैं
राघव निपलमुह मे लिये चुस्टे हुवेमन मे - सुमिता केँ मस्त चुचे हैं चूत भि मगरअहह इसउमर मे जवान लरकी केँ चुदाई करने कां सोच केँ हि मज़ा आँ जाता हैं औऱ मुझे तोँ साथी कि बेटी मिल गई हि सालू
सिलु - अहह अंकलउफ चुसो औऱ जोर सें अहह आनंद आँ रहा हैं
राघव चुचे चूसने केँ बाद सिलु कों देख - आनंद आँ गय़ा बेटी चलो तेरीसील तोरता हु
राघव कि बातसुन सिलुडर जाती हैं
राघव चूत नहीं चुस्ता थां राघव कों गंदा लगता थां इस लिये राघव नें सिलु केँ चूत कां रस नहीं पिया
सिलु टाँगे फैलाये लेती थि राघवबीच मे बैठ जाता हैं सिलु darte हुवे अंकल धीरे-धीरे सें
राघव मुस्कुराते हुवे - ठीक हि बेटी
राघव अपना मोटा लन्ड पकर सिलु केँ चूत मे घुसाने लगता हि आधा अंदर जाते हि सिलु दर्द मे उछल केँ - मर गई मा अंकल नहीं नहीं बहुत दर्द होँ रहा हैं प्लेस रुक जाइये अंकलमर गई अहह
राघवजोर कां धक्का मरते पुरा लन्ड अंदर घुसा देता हौ सीलटूट जाती हैं खुन निकलने लगता हैं औऱ सिलु दर्द मे रोने लगती हैं
राघव - बसबस हौ गय़ा
कुछ मिनटबाद
राघव सिलु केँ उपरलेत धीरे-धीरे सें चुदाई करते हुवे सिलु कों देख - अहह बेटी तेरी टाइटगरम चुत मे अहह लन्ड पेलके मज़ा आँ रहा हैं अहह
सिलु दर्द मे - अहह अंकलउफ बहुत दर्द हौ रहा हैं अहहमगर अब मज़ा भि आँ रहा हैं अंकलअहह करतेरहा
राघव मुस्कुराते हुवे - पहले तोँ रोकती थि मुझे
सिलु - अहह अंकल कियुंकी उस टाइम मुझेगलत लगामगर धीरे-धीरे धीरे-धीरे मुझे आनंदआने लगाअहह अंकल आपका लन्ड उफ मेरी चूत
राघव नें आखिर सिलु कि सीलतोर दि मगर क़िस्मत राघव केँ संग नहीं थि नां सुमिता केँ संग
तभी दरवाजा कोई खोलता हैं दरवाजा खुलने कि आवाज़ सुन राघव सिलुजब दरवाजे कि तरफ देखते हैं तोँ दोनों कि फट केँ हाथ मे आँ जाती हैं
सुमिता दरवाजे मे खरी थि अंदर अपने पति औऱ सिलु कों देख पथर्बन जाती हैं आखो सें आसु निकलने लगते हैं
राघव डरते कपते हुवे सुमिता
सुमिता होस मे आते हुवे राघव केँ पासखरी होके दर्द मे रोते हुवे - कियु कियु पति जी कियु अपने मित्र कि बेटी केँ संग महेसा सें आपको एक् अच्छा इंसान मानते आईहुजब आप् मेरेसंग सभी करनाबंद कर दिये तोँ मुझेलगा सायदअब उमर होँ गई हैं मगर असलीवजह यह हैं एक् लरकी केँ लिये मुझे अपनी पत्नि सें दूर जानेलगे मुझे प्रेम करनाबंद कर दिया
राघव डरते हुवे - देखो मेरीजान मे करुगा नां प्रेम रोज करुगा
तभी सुमिता जोर कां चाटा राघव केँ गाल पे दे मारती हैं राघवशोक मे गाल पे हाथरख सुमिता कों देखते रहता हैं
सुमिता सिलु कों देखआसु बहते हुवे - तुम् तुम्हे सर्म नहींआई अपने बापू केँ साथी अपने बापू केँ उमर केँ व्यक्ति केँ संगयह सभी करते हुवे
सिलु डरते हुवे - ऑन्टी अंकल नें हि मुझे सुरु मे फोर्स किया धीरे-धीरे धीरे-धीरे मे भि बेहक गई माफकर दीजिये प्लेस बापूमा कों मत बताना
सुमिता गुस्से सें - जाओयहा सें जल्द
सिलु जल्द सें कपड़े पहनभाग जाती हैं मगर राघवडरा नँगा थां
सुमिता राघव कों देख - आपकी मित्र कि बेटी केँ संग फोर्स कियाअरे कोई महिला होती उसकेसंग करते मुझे भि प्रेम करते तोँ सायद आपकोमाफ कर देतीमगर अब नहीं मे रोजरात तरप् केँ सोती थि क़िस्मत कों मान केँ मगर आप् तोँ
राघव सुमिता कों देख - माफकर दो सुमिता शपथ सें आज केँ बाद मे
सुमिता बीच मे - मे आज हि मायके जारही हुबात खतम
राघव सुमिता कों पकर - ऐसामत करोमत जाओ
सुमिता राघव कों दूर करते गुस्से सें - दूररहो मुझसे आज हि जाउंगी
राघवसमझ जाता हैं सुमिता अभि बहुत गुस्से मे हैं बात नहीं सुनेगी तौ राघव भि सुमिता कों नहीं रुकता इस उमीद मे कि जल्द हि क्रोध सन्त होगा तौ घऱ आँ जायेगी तबबात करेगा माफी मांग लेगा
दोपहर 2 बजे
साहिल सभी सें अंजान घऱआता हैं साहिल जब कमरे मे जाके आराम करने केँ लिये लेटता हैं तौ सुमिता आती हैं औऱ साहिल कों देख नॉर्मल होके -बेटा मुझे अपने भइया केँ घऱ लेकेचल
साहिल हैरान होके बैठते हुवे - पर्र एकदम सें कियुकुछ हुआ हैं
सुमिता - बेटा भइया भाभी सें मिलने कां बहुतमन हैं मे तैयार होतीहु तु भि रेडी हौ जाआते समय अंजलि कों लेके आँ जानां मे कुछदिन भइया केँ यहा रहूगी अंजलि घऱ संभाल लेगी
सुमिता कहकेचली जाती हैं मगर साहिल हैरान थां समझ नहीं आँ रहा थां कुछमगर मा कि बात मनानी हि थि
सुमिता साहिल तैयार होते हैं औऱ साहिल अपनीमा कों लेके सीधा कुनाल केँ घऱआता हैं
कुनाल अंजलि सुनीता हैरान होते हौ सुमिता कों एकदम सें आतेदेख फिनसभी बैठते हैं बातें होने लगती हैं
कुनाल सुमिता सें - गुरिया एकदम सें बिनाकहे कुछहुआ हैं क्याँ
सुमिता राज छुपाते हुए - नहीं भइया बहुतदिल कियाआने कां इस लिये आँ गई
कुनाल - यहबात हैं अच्छा किया तेरा हि घऱ हैं जबदिल करेआओ
वही सुनीता कों कुछ गर्बर् लगती हैं सक होँ जाता हैं कुछ गर्बर् हैं
सुमिता अंजलि कों देख - बेटी तुम् कल साहिल केँ संगचली जानां मे कुछदिन यही रहूगी
अंजलि कुनाल सुनीता कों देख - ठीक हैं मा
रात होती हैं अकेले घऱ पे राघव चिंता मे लेते हुवे बेचैन थां नींदउर गई थि
खानां पीना खाने केँ बाद नॉर्मल बातें कुनाल सुमिता सुनीता सभी करते हें ताकि सुमिता साहिल कों सक् नां हौ यहा कियाचल रहा हैं
सभी अपने अपने कमरे मे थें
सुनीता कुनाल सें - मुझेकुछ गर्बर् लगरही हैं ननदीजी एकदमदे नहींआती
कुनाल सुनीता कों देख - तेरीबात तौ सही हैं साहिल केँ जाने केँ बादकल पता लगाओ पूछना गुरिया सें
सुनीता - हुठीक हैं
वही अंजलि साहिल कमरे मे बैठे बातें कररहे थें
साहिल - आप् कां मन तौ यहीलग गय़ा हौ मुझे लगता हैं
अंजलि - अरे नहीं भइयाघऱ अपनाघऱ होता हैं
साहिल गोर सें देखता हैं अंजलि कों तौ थोरा बदलाव दिखता हैं चुचे टाइटअरे फेस मे चकम् थि
अंजलि - अच्छा सोजा मे भि सोनेजा रहीहु
साहिल - जी दिदी
अंजलि केँ जाते हि साहिल कां मोबाइल रिंग होता हैं
साहिल मुस्कुराते हुवे - हाजान
रिधिमा - आप् आज कियु नहींआये कही आप् मुझे धोका तोँ नहीं दि रहे
साहिल हस्ते हुवे - पागलमाफ करनाबता नहीं पायामा कों लेके मामाजी केँ यहाआया हुसभी एकदम सें हौ गय़ा
रिधिमा सुकून कि सासू लेते हुवे - अच्छा यहबाद हैं मे डर गई थि
साहिल मुस्कुराते हुवे - इतनी हसीन सेक्सी गिर्लफ्रेंड मिली हैं मे भला केसेछोर दु
रिधिमा सर्म सें - आप् भि नाँ
वही सुमिता दर्द मे आसु बहाये लेती थि बारबार वहीसीन दिखरहा थां अपने पति केँ धोके सें सुमिता टूट गई थि
अगलेदिन सुभह 10 बजे साहिल अंजलि कों लेकेघऱ निकल परता हैं इसबात सें अजान कि सुमिता उसकीमा केँ संग बहुतकुछ होने वाला थां सुमिता भि नहीं जानती थि क़िस्मत उसेयहा कियु लेकेआई हैं औऱ गुस्से मे अपने भइया केँ यहा आनां उसकीबरी गलती साबित होने वाली थि एक् दलदल मे फसने वाली थि जिसके सुमिता निकल नहीं पायेगी
आज केँ लिये इतना हि
बहोत हि गरमागरम कामुक औऱ उत्तेजना सें भरपूर शानदार लाजवाब मदमस्त भाग हैं भइया मज़ा आँ गय़ा
Nice update. I hope kee apne jaesa 2update pahle likha thaa kee aap yeh past wala scene 2-3 update mai poora kardoge. aur phir present mai chaloge kahani kee kese sahil sab thik krta h. Still mza aa gya .
भाग्य कि लकीर ( + ) (incest special) (adultery special) – New Episode
chapter 9
11 बजे तक साहिल अंजलि कों लेकेघऱ आँ जाता हैं राघव अपने विद्यालय चला गय़ा थां
साहिल अंजलि कमरे मे बैठे बातें करने लगते हैं
साहिल अंजलि कों देख - हद हैं आज मेरी छुट्टी गिर गई
अजलि - तोँ क्याँ मुझे कियु सुनारहा हैं मे तौ स्वयं आने वाली थि
साहिल - हाहा आपको सुना नहींरहा केहरहा हु
साहिल कमरे मे बाहर् आँ जाता हैं औऱ घूमने चला जाता हैं
अंजलि कमरे मे अकेली मन मे - अमर सें बातकर लेतीहु
तोँ वही कुनाल केँ घऱ
सुनीता सुमिता कमरे मे बैठे बातें कररहे थें
सुनीता सुमिता कों देख - ननदीजी सचसच बताना कुछहुआ हैं नां तभी आप् अचनाक् आई हैं पहलेकभी ऐसा नहींहुआ
सुनीता कि बादसुन सुमिता थोरा घबराते हुवे - नहीं तौ भाभी
सुनीता सुमिता सें - देखिये ननदीजी हम् सभी आपकेसंग हैं मे आपकी भाभीहु ननदी भाभी एक् दूसरे सें दिल कि बातें नहींकेह देनी चाहिये बताइये बात क्याँ हैं
सुमिता टूट जाती हैं औऱ रोते हुवे सारी बातें बता देती हैं मतलब राघव अपने पति कां धोका
सुनीता पूरीशोक मे चली जाती हैं सुनीता मन मे - नंदोई जीऐसा कुछ करेगे सोचा नहीं थां एक् जवान लरकी कि सीलतोर दि कांड किया तौ कियामगर ननदीजी पे ध्यान तोँ देना चाहिये थां
सुनीता सुमिता कों दिलासा देते सन्त करते हुवे - चुप जोँ जाइये ननदीजी सभीकुछ सही होगा
सुमिता रोते हुवे - भाभी केसे वोँ मुझे धोका दिया उन्होंने
सुनीता सुमिता केँ गले लगते हुवे - बसबस ननदीजी कुछ करेगे हम्
रात 8 बजे
साहिल रिधिमा सें बात करने मे लगा थां तोँ वही अंजलि भि पप्पू सें बात करने मे लगी थि तोँ राघव टेंसन मे क्याँ करेसमझ नहींपा रहा थां
सुमिता कमरे मे दुखी बैठी थि औऱ सुनीता कुनाल कों सारी बातें बतारही थि
कुनाल शोक मे - क्याँ कमीना यकीन नहीं होता जवान लरकी केँ चक्कर मे मेरी बेहन कों भूल गय़ा
सुनीता - अच्छा आपके जैसे कांड किये हि नहीं तोँ आप् भि तोँ अपनी जवान भांजी कि सील तोरी हैं
कुनाल - बसकरो
कुनाल सोचने लगता हैं तभी कुनाल सुनीता कों देख - मेरीजान भाग्य नें अंजलि कि चूत दिलाई अब भाग्य मे फिन मुझे एक् मोक्का दिया हैं अपनी बेहन कों चुदने कां तुम् कुछकरो मुझे तुम् पे बिस्वास हैं सचकहु तोँ अंजलि कों जब भि चोदता थां तौ मुझे सुमिता दिखती थि
सुनीता शोक मे कुनाल कों देख - पागल होँ गये हैं क्याँ आप् जानते हैं नां ननदी कि कैसीसोच वाली हैं सोचना भि नहीं
कुनाल सुनीता केँ कंधे मे हाथरख - जान जनताहु मेरी बेहन कैसी हैं पर्र हैं तौ वोँ महिला सुमिता केँ अंदर भि बहुतआग हैं अंजलि सें जयदा देखो अभि उस कमीने नें धोका दिया हैं यही मोक्का हैं अगर राघव धोका नहीं देता तौ सुमिता किसी केँ नीचे नहींआती मगरअब आँ सकती हैं प्लेस जाओकुछ करो मे तुम्हारा गुलाब बनके रहुंगा
सुनीता कुछ सोचते हुवे राघव कों देख - ठीक हैं पर्र पप्पू जब आयेगा मुझे चोदेगा आप् कुछ नहीं बोलोगे
कुनाल जल्द सें - वादा बल्कि जौ तुम् करोगी मे बीच मे नहीं आऊगा
सुनीता मुस्कुराते हुवे - ठीक हैं जातीहु इंतजार करिये
सुनीता सुमिता केँ पास जाने लगती hain वही कुनाल जोस मे बेताबी सें इंतजार करने लगता हैं
सुनीता सुमिता केँ कमरे केँ आती
सुमिता - भाभी आइये नाँ
सुनीता सुमिता केँ पासबैठ सुमिता कों देख - ननदीजी मे जौ कहूगी ध्यान सें सुनना मुझे लगता हैं सभी मामले कों सन्त तरीके सें खतमकर देना हि सही होगा
सुमिता - आप् बोलना किया चाहती हैं भाभी
सुनीता - ननदीजी आपकेदो बच्चे हैं साहिल अंजलि इसउमर मे जाके आप् लरेगी साहिल अंजलि कों पताचला तौ उनपे कियाअसर होगा बोलिये
सुमिता आसु बहते हुवे - एसी लिये तौ मे नहीं चाहती दोनों कों पताचले उसका बाप कितना कमीना हैं
सुनीता - हा मे अपना एक् राज बताने वालीहु किसी कों नहीं बताना वादा करती हैं आप्
सुमिता सुनीता कों देख - जी
सुनीता - तौ सुनिये एक् महीने पहले एक् रात मेरा भइयानशे मे मुझे अपनी पत्नि समझ चोदने लगाजब मे सोरही थि
सुमिता पूरीशोक मे - किया
सुनीता - हाउसरात मे नाइटी पहनसो रही थि मेरा भइया मेरे कमरे मे आँ गय़ा नशे मे उसे अंदाज़ा नहीं थां वोँ मेरे कमरे मे हैं मे सोरही थि औऱ नाइटी उठा केँ चुदने लगा मेरी नींद खुली तौ पताचला मेरा भइया मुझेचोद रहा हैं
सुमिता मुह मे हाथरखे शोक मे - फिन आपने रोका नहीं
सुनीता - नहीं कियुंकी मुझेपता थां मेरा भइयानशे मे भाभीसमझ रहा हैं अगर मे रोकती उन्हें पता चलतानशे मे वोँ क्याँ कररहे हैं तोँ वोँ स्वयं कों कभीमाफ नहीं करतेइस लिये मे चुप लेतीरही
सुमिता शोक मे - फिन क्याँ हुआ
सुनीता - धीरे-धीरे धीरे-धीरे मुझे इतना मज़ाआने लगाबता नहीं सकती
सुमिता शोक मे - भाभी आप् क्याँ केहरही हैं पता भि हैं
सुनीता - जानती हुमगर आप् नहीं समझेगी यह भइया बेहन केँ बीच चुदाई मे जौ मज़ाआता हैं उसेउस रातपता चला मे लेतीयही सोचरही थि मेरा भइया मुझेचोद रहा हैं तौ मेरी चूत बहुत पानी निकलने लगीतब पताचला भइया सें चुदवाने कां आनंद किया होता हैं उसरात कईबार झरीउफ गलती सें हि सहीमगर वोँ मज़ाआया आज भि भूल नहीं पति
सुमिता पूरीशोक सुनीता कों देखती रहती हैं कुछदेर बार - फिन
सुनीता - फिन क्याँ मुझे आनंदआया औऱ भइया कों पता भाभी सें पताचल गय़ा रात मुझेनशे मे चोद दिये हैं हामरे बीच बातें हुईँ मेनेसाफ केह दियाकोई बात नहीं पर्र उसकेबाद धीरे-धीरे धीरे-धीरे हम् फिन एक् हौ गये औऱ अबजबआते हैं याँ मे जातीहु संग मे करते हैं
सुमिता औऱ शोक मे - किया अभि भि आप् अपने भइया केँ संग
सुनीता - हा बहुत आनंदआता हैं घऱ कि बातघऱ मे
सुमिता शोक मे - भइया कों पताचला तोँ
सुनीता - पता हैं उनको
सुमिता अब पूरीशोक मे चली जाती हैं
सुमिता - कब केसे औऱ क्याँ कहा भइया नें
सुनीता - मे डर गई थि लगा क्रोध करेगे मगर उन्होंने कहा
राघव - घऱ कां हैं इस लियेमाफ करताहु बाहर् किसी केँ संग करती तोँ माफी नहीं मिलती जनताहु सेक्स खानां इंसान कि जरूर हैं नां मिले तोँ जीवन जीना मुश्किल होँ जाता हैं तुम् मजेकर सकती होँ सचकहु तौ मेरा भि चक्कर चलरहा हैं
सुमिता फिनशोक मे - किया भइया कां चक्कर भि चलरहा हैं
सुनीता - हा उनके साथी कि पत्नि केँ संग उन्होंने कहाइस उमर मे किया लरना लाइफ मे मजे करने चाहिये बसउसदिन सें नाँ वोँ मुझे रोकते हैं नां मे औऱ दोनों फुलमजे करते हैं
सुमिता पूरीशोक मे थि यकीन नहीं होँ रहा थां उसने क्याँ सुना जानां
सुनीता सुमिता केँ कंघे मे हाथरख - ननदीजी यहसच आपकोएसी किये बताया ताकि आप् समझे आपकी स्टोरी भि सेम हैं नंदोई जी जोँ कररहे हैं उन्हें करने दीजिये औऱ आप् भि किसी कों ढूंढ लीजिये उससे आप् दोनों अपनासुख लेँ सकते hain औऱ मजेकर सकते हैं
सुमिता कों यादआता हैं जब वोँ तैयार हौ रही थि तोँ राघव नें कियाकहा थां
राघव - देखो सुमिता मेने गलती कि तुम्हे धोका दिया जनताहु तुम् चाहो तोँ तुम् भि किसी केँ संग सेक्स करकेमजे लेँ सकती हौ हम् दोनों खुश रहेगे नाँ तुम् मुझे रोकना नां मे तुम्हें
सुमिता राघव केँ बातयाद कर सुनीता कों देख - नहीं भाभी मे ऐसा नहींकर सकती
सुनीता - ननदीजी इसउमर मे सेक्स कि चाहत औऱ बढ़ जाती हैं नंदोई जी मे धोका दिया आपको तोँ अब आप् कियु स्वयं कों रोकरही हैं किया तरप् केँ जीना चाहती हैं मुझे अपने भइया कों देखिये हम् मस्त खुशी सें जीरहे हैं आप् भि जी सकती हैं किसी सें कोई शिकवा रही रहेगा
सुमिता सोच मे पर्र जाती हैं
सुनीता - सचकेह रहीहु ननदीजी दूसरों केँ संग सेक्स करने मे अलग हि मज़ाआता हैं इस लिये तौ नांदोई जीउस लरकी केँ पूछे आपकोभूल गये
सुमिता कों भोला वालासीन यादआने लगता हैं भोला कां लन्ड देख उसकी गंदी बातें सुन उसके चुचे दबाना सुमिता कों अलग हि आनंदआता थां सुमिता कां मनकईबार किया भोला सें चुदजाए मगर पति कों धोका देना नहीं चाहती थि मगरअब मामला अलग थां
सुमिता सुनीता कों देख - पर्र भाभी किससे
सुनीता अंदर हि अंदर मुस्कुराते हुवेमन मे - फस गई मेने जौ कथा सुनाई झूठी थि मगरअब मे सच मे अपने भइया सें चुदना चाहती हु
सुनीता - अपने भइया सें औऱ किससे
सुमिता शोक मे - नहीं नहीं भाभीयह गलत हैं भइया बेहन मे केसे नहीं होगा मुझसे
सुनीता - ननदीजी बाहर् खतरा हैं औऱ कुछगलत नहीं हैं मे मेरा भइया करते हैं देखो ननदी हि यकीन मानिये बहुत आनंद आयेगा
सुमिता - नहीं भाभी मुझेयह गलत लगता हैं माफ करना मे नहींकर पाउंगी
सुनीता - ठीक हैं बस इतनाकरो मे जारही हु आपके भइया मेरी लेने केँ लिये इंतजार कररहे हैं दरवाजा खुला रखुंगी देख्ना आकेबस इतना करोगी नां मानोगी अपनी भाभी कि बात उसकेबाद मे कुछ नहीं कहूगी
सुमिता सोचते हुवे - ठीक हैं आप् केहरही हैं तोँ
सुनीता जाते हुवे - ठीक हैं 5 मिनट मे आँ जानां
सुनीता कुनाल केँ पासआके सारी बातें बता देती हैं औऱ कुनाल सुनीता प्लान बना तैयार होँ जाते हैं शॉ दिखाने औऱ सुमिता कों फसाने केँ लिये
सुमिता सोचते सोचते 5 मिनटबाद हिम्मत करके दरवाजा थोरा खोलके देखती हैं तोँ हिल जाती हैं
सुनीता घोरीबनी हुइ थि औऱ कुनाल नँगा मोटे लन्ड पेलेजा रहा थां सुमिता कि नजर अपने भइया केँ मोटे लन्ड मे जाती हैं तोँ सुमिता कि चूत गीली होने लगती हैं सुमिता खरीसभी देखने लगती हैं
कुनाल चुदाई करते हुवे - मुझे अपनी प्यारी गुरिया केँ लिये बहुतदुख हौ रहा हैं सुनीता मेरी गुरिया दिल कि अच्छी भोलि हैं मगरउस कमीने नें अच्छा नहीं किया
सुनीता - अहहउफ जानती हु मेनेकहा कि वोँ भि खुल केँ मजेकरे मगरमान नहींरही ननदीजी कों सभीगलत लगता हैं
1
कुनाल - सचयह हैं सुनीता मे अपनी प्यारी गुरिया कों सारी खुशी देना चाहता हुकाश वोँ तैयार होँ जाती तौ तुम् दोनों भइया बेहन कि तरह हम् भि प्रेम कर पाते मे अपनी गुरिया कों खुशीदे पतामगर सायद मेरी गुरिया मुझे इतना प्रेम नहीं करती जितना तुम् सें वा तेरा भइया साले साहब औऱ तुम् करती हौ
सुनीता - अहह नहींजी आपसे आपकी गुरिया बहुत प्रेम करती हैं एक् बार आप् जाकेबात करो जरूर मानेगी
कुनाल - अगर तुम् कहती होँ तौ एक् बारबात करके देखता हुमान गई तोँ बहुत प्रेम दूंगा अपनी गुरिया कों
सुनीता औऱ कुनाल कि प्यारी बातें सुमिता पे असर करने लगती हैं औऱ लाइव चुदाई देखगरम भि हौ गई थि
सुमिता अपनी चूत सेहलते हुवेमन मे - भइया मुझसे कितना प्रेम करते हैं उफ कितना मोटा हैं भइया कां लन्ड
चुदाई जबखतम होती हैं तब सुमिता जल्द सें कमरे मे आँ जाती हैं वही सुनीता कुनाल मुस्कुरा देते हैं
कुनाल फिनआता हैं सुमिता केँ पास सुमिता लेती हुइ थि दूसरी तरफमुह करके कुनाल पासबैठ जाता हैं
कुनाल - भाभी नें बताया मुझेसभी
सुमिता कुनाल कों बिना देखे - मेरी क़िस्मत मे हैं भइयायही सभी सहना
दोस्तो तीन कहानी लेनेचल रहाहु उपर सें काम पे जाताहु स्वयं कां कमसमय मे अब वक्त नहींमिल रहा एक् कहानी लेके चलना आसान हैं तीन किस्सा चलरही हैं
एक् किस्सा याँ दो लेके चलने वाला थां खैर update तोँ आते रहेगे मगरअब मे यह वादा नहींकर सकता update पहले जैसा बारा मिलेगा जितना मे जिसदिन लिख पाऊगा update देता रहुंगा
किस्सा रुकेगी नहीं
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chapter 10
कुनाल सुमिता केँ पासलेत जाता हैं सुमिता सिहर जाती हैं कुनाल सुमिता कों अपनीतरफ घूमा केँ सुमिता कों देख - अपने भइया सें नजरेमत चुराओ गुरिया
सुमिता आशु बहते कुनाल कों देख - भइया
कुनाल सुमिता केँ आसुसाफ करते हुवे - गुरिया तेरा भइया हैं नाँ उस कमीने नें तुझेही धोका दिया वोँ मजेकर रहा हैं तौ तु भि कर
कुनाल सुमिता केँ होठो पे उंगली फेरते हुवे सुमिता कि आखो मे देख - अपने भइया सें प्रेम करती हौ भरोसा हैं मुझपे
सुमिता सिहरते कुनाल कों देख - बहुत प्रेम करतीहु भरोसा भि हैं
कुनाल - कितने महीने हौ गयेजब उसने तेरेसंग, खुल केँ बोलू नाराज क्रोध नहीं करोगी नाँ
सुमिता नजरे नीचे किये थोरा सर्म सें धीरे-धीरे सें - जी भइया बोलिये
कुनाल अंदर हि अंदरखुश पागल होँ रहा थां
कुनाल - गुरिया मेरीआखो मे देखो जोँ पूछूँ जवाबखुल केँ देना
सुमिता सर्माते कुनाल कों देखती हैं
कुनाल सुमिता कों देख - कितने महीने होँ गयेजब उसने तेरी चूत मारना बंदकर दिया
अपने भइया केँ मुह सें सीधा गंदी बातें सुन सुमिता कों अजीबमगर अलग एहसास फिल होता हैं
सुमिता कुनाल कों देख सर्म सें - वोँ वोँ महीने सें जयादा होँ गये भइया
सुमिता केँ मुह सें साफ जवाबसुन कुनाल कां लन्ड एकदमखरा होँ जाता हैं
कुनाल - महीने सें जयदा यानी तेरी चूत मे लन्ड गय़ा नहींउफ गुरिया तेरी चूत लन्ड केँ लिये तरप्रही होगी नां सच बताना गुरिया
सुमिता औऱ सर्म सें लाल होते हुवे नजरे नीचे करते हुवे - जी
कुनाल सुमिता केँ होठोटच करते हुवे - खुल केँ कहो गुरिया
सुमिता कुनाल कों देख - हा बहुततरस रही हैं मेरी चूत लन्ड केँ लिये भइया बहुतमन करता हैं चुदाई कां
कुनाल - जब बहुतमन करता थां तौ किया करती थि चूत मे उंगली
सुमिता सर्म सें - हायही एक् मार्ग थां कर भि किया सकती थि
कुनाल सुमिता सें पूरा चिपक् केँ बाहों मे लेके - गुरिया सीधा कहुंगा उस कमीने कों जोँ करना हैं करनेदो तुम्हें भि जोँ करना हैं करो
कुनाल सुमिता कों देख - यही एक् मार्ग हैं तुम् दोनों केँ बीच रिस्ता बना रहेगा वोँ भि खुश तुम् भि खुशकहो गुरिया दोगी अपनी चूत अपने भइया कों लोगी अपने भइया कां मोटा लम्बा लन्ड अपनी फूलीगरम चूत मे वादा बहुत प्रेम दूंगा
सुमिता समझ नहींपा रही थि कियाकरे अभि भि उलझन मे थि कुनाल सुमिता कों देखमन मे - साली बहुत सीधा अच्छे दिल कि हैं इसकी स्थान कोई औऱ होती तोँ कई लन्ड लें चुकी होती
कुनाल सुमिता कों देख - तुम् बहुत सुंदर होँ गुरिया सचकहु पुरागाव तेरा दीवाना हैं मे भि
सुमिता कुनाल कों देख - आप् भि
कुनाल - हामगर तुम् मेरी बेहन थि इस लिये पीछेहट गय़ा गुरिया मे अंजान नहीं तेरा अपना भइयाहु मगर सायद तुम्हे मुझसे प्रेम भरोसा नहीं
कुनाल पलंग सें नीचेउतर सुमिता कों देख - मेरी गुरिया बहुत अच्छी प्रेम हैं सोजाओ बाकी चिंता मतकरो सभीसही होगा मे उस कमीने कों सबक सिखा दुगा
कुनाल जाने लगता हैं तोँ सुमिता - रुकिये
कुनाल रुक पीछे देखता हैं सुमिता कुनाल केँ पासआके खरी होके कुनाल कों देख - आप् मेरे भइया हैं मे आपकी बेहन हमारे बीचयह सभीगलत हैं मगर मुझे परवाह नहीं
कुनाल सुमिता कों देख - तोँ किया तुम्
सुमिता कुनाल कों देख सर्म सें - हा
कुनाल खुश होके - गुरिया अच्छे सें बोल नाँ
सुमिता सर्म सें - दूगी अपना चूत आपका लन्ड लुगी अपनीगरम चूत मे
कुनाल जोस मे सुमिता कों बाहों मे लेकेआखो मे देख - सच
सुमिता - सच
कुनाल - अपने भइया कां लन्ड सेह पायेगी चूत मे लेके
सुमिता सर्म सें कुनाल कों देख - जब जायेगा तौ पता चलेगा नाँ
कुनाल मुस्कुराते हुवे - किया जायेगा किस्मे
सुमिता गरम होते हुवे - मेरी चूत मे आपका लन्ड
सुमिता कि आखो मे कुनाल कों प्यास नजरआती हैं कुनाल समझ जाता हैं सुमिता अब पूरीतरह तैयार हैं
कुनाल - तैयार होँ बेहन भइया कां लन्ड लेने केँ लिये
सुमिता मन मे - माफ करना पति जी अपने मुझे मजबूर किया अपने हि मुझेछुट दि तोँ मे भि अब अपने भइया कां लन्ड लुगी अपनी चूत कि प्यास बुजाउंगी
सुमिता कुनाल केँ बाहों मे आके - तैयार हु भइया अपनी छोटी बेहन कि चूत मे लन्ड डालदो बहुत प्यासी हु
कुनाल कों अब रुकना मुश्किल हौ जाता हैं कुनाल कों यकीन नहीं होँ रहा थां अपनी क़िस्मत मे पहले भांजी अब छोटी बेहन जौ हसीन हैं कयामत हैं जिसकी पुरागाव लेना चाहता हैं.
कुनाल सुमिता केँ फेस कों पकरकिस करने लगता हैं सुमिता भि पुरासंग देते हुवे अपनीआखे बंद किये अपने जूसी होठो कां रस पीने पिलाने लगती हैं सुमिता मन मे - यह कैसा एहसास हैं इतनाजोस आनंद मेने पहलेफिल नहीं किया भइया मेरे होठो कों जिब कों मजे सें चुसरहे हैं सोचा नहीं थां एक् दिन हमारे बीचऐसा कुछ होगा
कुनाल किस करते हुवेमन मे - अपनी क़िस्मत पे यकीन नहीं हौ रहाउफ मेरी छोटी बेहन कों किसकर रहाहु जोँ हुस्न मे बवाल हैं कितना आनंद आँ रहा हैं कितने मुलायम नर्महोठ हैं
कुनाल किस करते हुवे अपना एक् हाथ सुमिता केँ बरे उभरे गांड पे फेरते लगता हैं सेहलने लगता हैं सुमिता सिहर जाती हैं
सुमिता मन मे - उफ भइया मेरे गांड मे हाथफेर रहे हैं अहह मुझे बहुत अच्छा लगरहा हैं मे अबसभी भूलइस समय कां मज़ा लेने वालीहु
कुनाल गांड पे हाथ फेरते हुवेकिस करते हुवे - किया मस्त मोती गांड हैं मेरी बेहन कि अहहआज रात तोँ आनंदआने वाला हैं
कुनाल सुमिता केँ सीने सें सारीहटा केँ सुमिता कों बाहों मे लेके गर्दन कों चूमने किस करने लगता हैं सुमिता सिसकिया लेने लगती हैं मचलने लगती हैं सुमिता मन मे - अहहउफ मायह कैसानसा मुझे होँ रहा हैं भइया कि हर हरकतटच मुझे पागलबना रही हैं मेरी चूत अभि सें गीली होँ गई हैं पानीबहा रही हैं उफ भइया प्रेम करो मुझे अपनी बेहन कों आजफार दो मेरी चूत कों बहुत तरप्रही हैं
कुनाल मन मे - उफ किया फिगर हैं मेरी बेहन कि अहह सुमिता
कुनाल सुमिता सें थोरादूर होके सुमिता कों देख - अपने भइया कां लन्ड देखोगी गुरिया
सुमिता हफ्ते हुवे मदहोसी मे कुनाल कों देख - हा भइया देख्ना हैं
कुनाल कपड़े निकलते हुवे - किसी कां लन्ड देखा हैं तेरे पति केँ अलावा
सुमिता झूठ बोलते हुवे - नहीं भइया
कुनाल पुरा नँगा होँ जाता हैं सुमिता कि नजर कुनाल केँ खरे मोटे लम्बे लन्ड पे जाती हैं जिसेदेख सुमिता कि सासेउपर नीचे होने लगती हैं
कुनाल सुमिता केँ पासखरा होके - बताओ कैसा हैं
सुमिता लन्ड कों देखते हुवे सर्म सें - बहुत मोटा लम्बा हैं
कुनाल सुमिता केँ हाथ लन्ड पे रख हिलाओ नाँ
सुमिता कपते हाथो सें लन्ड मुठी मे लेके हिलाने लगती हैं कुनाल मजे मे पागल होने लगता हैं कुनाल - अहह गुरिया बता नहीं सकता मुझे कितना आनंद आँ रहा हैं मेरी बेहनउफ हर भइया कां सपना होता हैं उसकी बेहन उसका लन्ड हिलाये उफ करतीरह हिलती रह सुमिता
सुमिता लन्ड हिलाते हुवेमन मे - उफ मेरी चूत जल्द सें लन्ड लेना चाहती हैं भइया कां लन्ड बहुत मोटा हैं मज़ा आयेगा चुदवाने मे उफ
कुनाल सुमिता केँ चुचे दबाते हुवे - गुरिया तु मस्तमाल हैं तेरा जिस्म उफ सरीरभरी हुई हैं कार्वी हैं तूँ तेरी चूत उफ तेरे चुचेअहह
सुमिता मदहोसी मे कुनाल कों देख - सभीदेख लेना भइया प्रेम भि करनाआज रात अपनी गुरिया कि चूत फार देनाअहह भइयाउफ
कुनाल जोस मे - फार दूंगा मेरी बेहन तेरी चूत मे बहुत गर्मी हैं
चल नीचेबैठ जामुह मे लेकेचूस अपने भइया कां लन्ड
सुमिता सर्म सें - भइया मेनेकभी मुह मे लिया नहीं हैं
कुनाल सुमिता कों देख - बेहन बहुत आसान हैं मुह मे लेके चूसना हैं तुम्हे स्वयं इतना आनंद आयेगा कि तुम् मजे सें चूसने लगोगी
सुमिता नीचेबैठ लन्ड हाथो मे पकर - ठीक हैं भइया जैसा आप् कही
सुमिता अपने गुलाबी रसिलि होठो सें अपने भइया कां लन्ड आधामुह मे लेके चूसने लगती हैं पहलीबार थां गंदा लगता हैं सुमिता कों मगर सुमिता चुस्ती रहती हैं स्वाद लेती रहती हैं वही कुनाल केँ खुशीमजे कां कोई ठिकाना नहीं थां कुनाल मजे मे खो गय़ा थां
सुमिता कों धीरे-धीरे धीरे-धीरे बहुत मज़ाआने लगता हैं
सुमिता अबजिब दे अपने भइया कां लन्ड मजे सें चाटने लगती हैं सुमिता मन मे - उफशपथ सें लन्ड चूसने मे इतना मज़ा आयेगा सोचा नहीं थां बहुत अच्छा स्वाद हैं भइया केँ लन्ड कां गरमगरम नमकीन अहह
कुनाल सुमिता कों देख - बहुत स्वयं मेरी बेहनऐसे हि चुसो अपने भइया कां लन्ड आज तेरा भइया तेरी चूत अच्छे सें मारेगा
कुनाल जोर मे अपना लन्ड पुरा सुमिता केँ मुह मे पेल लेता हैं मोटा लम्बा लन्ड गले तक जाते हि सुमिता कि सासे रुकने लगती हैं
कुनाल - अहह चुसो मेरी बेहनअहह उफ बहुत मज़ा आँ रहा हैं
कुनाल धीरे-धीरे धीरे-धीरे सुमिता केँ मुह मे लन्ड पेलने लगता हैं सुमिता मुश्किल सें लन्ड मुह मे लेँ पारही थि सुमिता मन मे - अहहमर गई सासू नहीं लें पारही उफ भइया नें पेल दिया मेरीमुह कों उफ भइया
कुनाल जोस मे पागल होके सुमिता केँ बालपकर पुरा अंदर तक लन्ड पेलने लगता हैं जब सुमिता कि हालत औऱ खराब होने लगती हैं मुह सें लार लन्ड कां पानी निकलरहा थां कुनाल लन्ड पेलते हुवे - अहह मेरी बेहन तेरेमुह मे पेहलने मे इतना मज़ा आँ रहा hain तौ तेरी चूत चोदने मे कितना मज़ा आयेगा
सुमिता कि हालत खराब हौ रही थि तौ सुमिता एकदम सें दूरहट जाती हैं लन्ड मुह सें निकल जाता हैं सुमिता जोरजोर सें खासने सासे लेने लगती हैं
कुनाल सुमिता कों देख - उफ मेरी बेहन अभि तोँ पूरीरात बाकी हैं असलीखेल बाकी हैं
दूसरी तरफ साहिल केँ घऱ कमरे मे अजलि नंगी अपनी तांगे फैलाये चूत कों फैलाते हुवे वीडियो कॉलआई मे अपनी मस्त बालों वाली चूत कों दिखारही थि अंजलि - उफ पप्पु मामूदेख रहे हैं नां आप्
पप्पू लन्ड हिलाते हुवे - देखरहा हु मेरी रण्डी तुचली गई अब केसे तेरी चूत मारुंगा बोल
अंजलि अपनी चूत मे उंगली करते हुवे - उफ मामू मे स्वयं बेचैन हुअहह आप् आँ जानां किसीदिन औऱ जीभर केँ मेरी चूत मारना मेरी चूत फार देनाअहह आपका लन्ड लेके बहुत मज़ाआता हैं पप्पू मामू
पप्पू लन्ड हिलाते हुवे - कुनाल सें भि जयदा आनंदआता हैं
अंजलि चूत मे उंगली करते हुवे - हा कुनाल मामू सें जयदा आपका लन्ड लेने मे मज़ाआता हैं
साहिल सभी सें अंजान कि उसकी बेहन अपनी जवानी देखारही हैं चुदरही हैं औऱ आजरात उसकीमा भि चुदने वाली हैं
कुनाल केँ घऱ
कुनाल सुमिता कों देख - अब नहींरहा जाता मेरी बेहनजिस चूत सें साहिल अंजलि कों तूने निकाला हैं उस चूत कों चोदने केँ लिये बेचैन हु
सुमिता मदहोसी मे जोस मे कुनाल कों देख - भइया मेरी चूत मे सभीआज आपके हवाले आज अपनी बेहन कि चूत मे लन्ड घुसा हि दो
कुनाल सुमिता कों बाहों मे लेकेआखो मे देख - वोँ कमीना तेरी चुदाई करता हैं तोँ कितने देर मे तुझर जाती हैं बता नां
सुमिता जोस मे पागल होके कुनाल कों देख - 12 मिनट मे झर जातीहु भैया
कुनाल पागल होके - मज़ाआता हैं उसकेसंग
सुमिता - उफ भइयाअब उतना आनंद नहींआता
कुनाल - उफ बेहन चुदने केँ लिये तैयार हैं
सुमिता कुनाल कों नासिलि आखो सें देख - जी भइया आपकी बेहन आपका लन्ड चूत मे लेने केँ लिये बेचैन हैं
कुनाल सुमिता कों खाट पे लेता देता हैं सुमिता कुनाल केँ लन्ड कों प्यासी नाज़रों सें देखने लगती हैं
कुनाल सुमिता कों देखमन मे - मेरी बेहन जिसकी हुस्न कां दीवाना पुरागाव हैं यकीन नहीं होताआज मेरे सामने प्यासी नजर सें मेरे लन्ड कों देखरही हैं उफ मेरी क़िस्मत इतनी अच्छी होगी सोचा नहीं थां जवानी सें जयदा आनंद तौ इसउमर मे अपनी बेहन कों चुदने मे आयेगा यहसोच कर हि मेरी बेहन सदीसुधा हैं दो बच्चे चूत सें निकाले हैं अब मे उस चूत कों देखने चुदने वालाहु
तभी सुमिता कुछ करती हैं जिसेदेख कुनाल बहुत हैरान होता हैं
आज केँ लिये इतना हि
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