मक्के केँ खेत मे – New Episode
chapter 21
मनोज नें रात अपनी बेहन पिताजी केँ बीच चुदाई देख औऱ बातें सुनली थि सुभह 10 बजे रामपाल जैसे हि खेत मे जाता हैं मनोज संगीता केँ कमरे मे आता हैं दोनों बातें करने लगते हैं
मनोज जौ पहले सें हि पुराजोस गरम थां अपनी बेहन कि चुदाई करने केँ लिये तौ मनोज सीधा असलीबात पे आता हैं
मनोज - गुरिया अगर मे कहु मुझे तेरी चूत मारनी हैं तोँ अपने भइया कों अपना चूत दोगी
संगीता पूरीहिल जाती हैं औऱ अपने भइया कों देखती हैं
संगीता जूही कों लियेसंत आवाज़ मे - तोँ आपनेरात सभीदेख लियासुन भि लिया अजीब भाग्य हैं
अशोक - हासभी देखसुन लिया उसकेबाद भि मे तेरेसंग तेरी मरजी सें करना चाहता हु जबरदस्ती नहीं कियुंकी तु मेरी प्यारी छोटी गुरिया हैं
संगीता मुस्कुरा देती हैं
अशोक - गुरिया एक् राज बताऊ
संगीता - कैसाराज
अशोक - किसी कों बताना मत मे तेरी सासू अपनी सासू कों चोदता हु
यह बारा झटका थां संगीता पूरी हैरान होके - क्याँ केसे मतलब माँ जी आप् यकीन नहीं होता
मनोज मुस्कुराते हुवे सारी स्टोरी बता देता हैं
संगीता हैरान होके - यकीन करना मुश्किल हैं माँ जी आप् यहचल कियारहा हैं सभी एक् दूसरे केँ लेँ रहे हैं
मनोज - वोँ तोँ करने दोगी
संगीता मुस्कुराते हुवे - भइया कां लन्ड लेने मे अलग मज़ा आयेगा सोच केँ हि मेरी चूत गीली हौ गई हैं पिताजी ससुरजी कों दे चुकीहु आपको माना केसेकरू
मनोज बहुतखुश हौ जाता हैं
संगीता - बसकुछ मिनट जूहीसो जायेफिन
मनोज खुशी सें - हु
10 मिनटबाद जूहीसो जाती हैं
मनोज जल्द सें संगीता केँ पास जाकेकिस करने लगता हैं संगीता मन मे - अहह पहले ससुरजी जीफिन बापूअब भइयाउफ मेरी चूत कों लन्ड मिलते जारहे हैं
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मनोजकिस केँ बाद संगीता कों पुरा नँगाकर देता हैं संगीता बैड पे पूरी नंगी लेती होती हैं औऱ मनोज अपनी बेहन कि हसीन मस्त बॉडी कों देख पागल हौ रहा होता हैं
मनोज - गुरिया उफ मस्त बॉडी हैं तेरे चुचे औऱ चूत अहह
संगीता सर्म सें - करो नां भइया
मनोजजोस मे - उफ बेहन करताहु
मनोज संगीता केँ ऊपरआके दोनों चुचे पकर् दबाने लगता हैं औऱ एक् चुचेमुह मे लेकेदूध पीने लगता हैं संगीता अहहउफ करते हुवे - अहह जैसा सोचा थां अहह भइया केँ संगअलग हि आनंद आँ रहा हैं
मनोजदूध पीते हुवेमन मे - अहह कितना मिठा हैं मेरी बेहन कां दूध
संगीता - उफ भइया दबाओ चुसो पीजाओ मेरेदूध कों अहह
मनोज चुचे दबाने दूध पीने केँ बाद संगीता कों देखते हुवे टांगों केँ बीचआता हैं संगीता भि तांगे फैला देती हैं मनोज चूत कों देखता हैं फिनमुह मे लेके चूसने लगता हैं फाको केँ बीचजिब सें चाटने लगता हैं संगीता आजफिन अलग मज़ा लें रही थि अपने भइया सें यह आनंद संगीता कों जल्द झरने मे मजबूर कर देती हैं औऱ संगीता झर जाती हैं
मनोज पुरा नँगा होके संगीता केँ ऊपरआके चूत पे लन्ड सेट करके संगीता कों देख - गुरिया सोचा तौ नहीं थां एकदम सें तेरी चूत मिल जायेगी उफ मेरी भाग्य अच्छी हैं
संगीता मुस्कुराते हुवे - उफ भइया मेने भि नहीं सोचा थां अबडाल दु
मनोज धीरे-धीरे सें लन्ड पुरा अंदरडाल देता हैं संगीता - अहह भइयाघुस गय़ा
संगीता पैरो सें मनोज कों जकर् बाहों मे पकर् लेती हैं
मनोज चुदाई करते हुवे संगीता कों किस करते हुवे - अहहकसी गरम चूत हैं मेरी गुरिया कि उफयह आनंद मेरी बेहन तेरी चुदाई करने कां अलग हैं मे जोस मे पागल होतेजा रहाहु
संगीता - उफ भइया चोदो अपनी बेहन कों अहह मुझे भि बहुत जयदा मज़ा आँ रहा हैं आपसेचुद केँ अहह औऱ तेजकरो नां भइया
मनोज - अहह करताहु गुरिया तेरी चूत कि गर्मी अहह पागलकर रही हैं
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मनोज संगीता केँ पीछेलेत केँ संगीता कि एक् टांगउठा केँ पकरते हुवे लन्ड घुसा केँ किस करते पलंग पे लेते लेते चुदाई करने लगता हैं संगीता भि किस करते अपनी चूत मसलने लगती हैं
संगीता मन मे - अब एहसास हौ रहा हैं अलगअलग लन्ड कां अलग हि मज़ा हैं उफयह मज़ा मुझे हमेसा लेना हैं भइया चोदोअहह अपनी बेहन कों
36 मिनटबाद
मनोज कपड़े पहनते हुवे - गुरिया अब तौ जब तक हैं तेरी चूत मारुंगा
संगीता मुस्कुराते हुवे - बापू भि हैं उनका भि ध्यान रखना
मनोज मुस्कुराते हुवे - वोँ तोँ हैं मगरसच मे गुरिया बहुत जयदा मज़ाआया मुझे तेरेसंग
संगीता - मुझे भि भइया बहुत मज़ाआया
मनोज - अच्छा मे चलताहु
मनोजचला जाता हैं संगीता चूत पे हाथरख - अंदर हि पानी गिरा दियाकोई नाँ उफयहअलग एहसास आनंद थां अहह
संगीता कपड़े पहनखाट पे लेत माधुरी कों मोबाइल करती हैं
माधुरी अशोक कमरे मे बातें कररहे थें
माधुरी - हा मेरी भाभी बोलिये
संगीता - अकेली हैं
माधुरी - नहीं आपके पति जी हैं मेरेपास
संगीता - मुझे अकेले मे बात करनी हैं
अशोक - क्याँ बात करनी हैं अकेले मे
संगीता - आप् बाहर् जाइये नहीं तौ देख लेना
अशोक जाते हुवे - हद हैं मेरी इज़त हि नहीं हैं
संगीता माधुरी हसने लगते हैं
माधुरी - अबबोल कमीनी क्याँ बात करनी हैं
संगीता - तु कमीनी हैं औऱ मेरे पिताजी सें चुदवा रही हैं मगर बताया नहींवाउ रे कमीनी
माधुरी पूरीहिल डर जाती हैं
माधुरी कपते हुवे - तुझेही तुझेही केसेपता चला
संगीता - मुझेयह भि पता हैं तुँ पेग्नेंट हैं
माधुरी औऱ हिल जाती हैं
माधुरी - प्लेस दोस्त किसी कों मत बताना
संगीता हस्ते हुवे - डरमत मे तुम्हे बतादु तेरे पिताजी मेरेबीच औऱ जूहीसमझ गई
माधुरी तौ अब पूरीहिल शोक होँ जाती हैं
माधुरी - क्याँ यकीन नहीं होता बापू तेरेबीच साली मुझेडरा रही हैं औऱ स्वयं मजे लेँ रही थि
संगीता हस्ते हुवे - औऱ बताऊकल रात बापू नें मुझे चोदाउफ बहुत आनंदआया औऱ अभि भइयाचोद केँ गय़ा हैं
माधुरी सर पकर् - औऱ कुछ हैं मे पागल हौ जाउंगी केसेहुआ बता
संगीता सभीबता देती हैं
संगीता औऱ एक् राज हैं मेरा भइया तेरीमा
माधुरी केँ मुह सें कुछ निकलता हि नहीं थोरिदेर बाद
माधुरी - मे क्याँ बोलू यकीन करना मुश्किल हैं मा पति जीमा कों क्याँ जरूरत पर्र गई
संगीता - मेरी लेने मे लगे रहते थें दूसरी नये लन्ड कां अलग मज़ा हैं वैसे हि मर्द कों नये चूत मरने मे अलग हि मज़ाआता हैं एक्। मिनट तेरा भइया मेरे पति तेरेसंग थां यहमत कहना कि तुम् दोनों केँ बीच
माधुरी - हायह कियाचल रहा हैं
संगीता - दोस्त मे स्वयं हिली हुई हु तेरे पति केँ बीचसभी कब केसेहुआ
माधुरी सभीबता देती हैं
संगीता हैरान होके - क्याँ पति जी तेरी लेने केँ लिये पहले सें पीछेपरे थें औऱ आते हि लेँ भि लियावाउ
माधुरी - दोस्त सभी एक् दूसरे कि लेने पे लगे हैं अब तौ सारेराज एक् दिनसभी कों पताचल जायेंगे
संगीता - तेरीबात सच हैं पऱ कोईकुछ बोल नहीं पायेगा सभी एक् दूसरे कि पत्नि बेहनबहु कि मारी हैं
माधुरी हस्ते हुवे - हायह तोँ हैं
संगीता - सुन ससुरजी यानी तूँ अपने पिताजी कां लन्ड लेले बहुत मज़ा आयेगा बापू सें चुदवाने मे अलग हि आनंद आयेगा मेरी लेते हैं मज़ाआता हैं
माधुरी मुस्कुराते हुवे - अब लेना हि परेगा सुन तूनेकहा मेरीमा पति जी ससुरजी जी दोनों नें पा पेला हैं
संगीता - हा मेरे बापू भइया दोनों तेरीमा कि लेते हैं
माधुरी बुरामत बनाना कही तेरीमा जिंदा थि तौ मेरे बापू
संगीता हिल जाती हैं
माधुरी - सोर्री दोस्त माफ करके
संगीता - कोईबात नहीं तुँ पताकर जाके अपने पिताजी ससुरजी जी कां लन्ड लें फिनपूछ
माधुरी - ठीक हैं अगरऐसा हुआ तोँ सच मे सब ठरकी हैं
संगीता हस्ते हुवे - हा वोँ तोँ हैं
मोबाइल कट
संगीता मन मे - यह तोँ famaly सेक्स चलरहा हैं
माधुरी हरिपाल कों बुला केँ दरवाजा बंद करते हरिपाल कों देखती हैं हरिपाल हैरान होके - कियाबात हैं बेटी
माधुरी मुस्कुराते हुवे - बहु कि चुदाई करके बच्चा पैदाकर लिया अपनी बेटी कि चुदाई नहीं करेगे
हरिपाल हैरान शोक मे माधुरी कों देखता हैं
माधुरी पूरी नंगी होके हरिपाल कों देख मुस्कुराते हुवे - कैसीलग रहीहु मे पिताजी
रामपाल आखे फ़ारे माधुरी कों देखता रह जाता हैं यह अचनाक् किया होँ रहा थां हरिपाल समझ नहींपा रहा थां हरिपाल - कितनी हसीन मस्त बॉडी हैं बेटी तुम्हारी तरफसभी केसेपता चला
माधुरी रामपाल केँ पासआके नीचेबैठ रामपाल केँ लन्ड कों बहार निकाल मुस्कुराते हुवे - बाद मे बात करेगे अभि चुदाई करो अपनी बेटी कि
रामपाल भि पुरेजोस मे नँगा हौ जाता हैं
रामपाल - केसे नहीं जनतामगर उफ बेटी स्वयं आई होँ तौ अहहजम केँ लूँगा
माधुरी मुस्कुराते हुवे अपने पिताजी कां लन्ड मुह मे लेकेमजे सें चूसने लगती हैं अलग स्वाद बाप केँ लन्ड कां चूसने मे अलग आनंद
माधुरी मन मे - अहह कमीनी नें सहीकहा थां उफअलग हि मज़ा आँ रहा हैं पिताजी कां लन्ड चूसने मे अहह लन्ड भि मोटा हैं पिताजी कां
हरिपाल भि धीरे-धीरे धीरे-धीरे माधुरी केँ मुह मे लन्ड पेलते हुवे - उफयह मज़ाआज तौ मेरी भाग्य मुझपे मेहरबान हैं अहह चुसो बेटी अपने पिताजी कां लन्ड चुसोअहह 6 मिनटबाद
हरिपाल माधुरी कों खरा करके दोनों चुचे पकर् दबाने लगता हैं माधुरी - अहह बापू दबाओ अपनी बेटी केँ चुचेअहह पिताजी
हरिपाल चुचे दबाते हुवे एक् चुचेमुह मे लेके चूसने लगता हैं हरिपाल मन मे - अच्छा हुआ माधुरी कों सभीपता चल गय़ा उसकीवजह सें मुझे मेरी बेटी चुदने कों मिलरही हैं
हरिपाल पीछे सें माधुरी कों थोरा झुका केँ लन्ड चूत मे डाल देता हैं माधुरी अहहयह चैन बापू कां लन्ड लेने कां अलग हि हैं
हरिपाल अब माधुरी कों बाहों मे लेके थोरा झुकते हुवे चुदाई खरेखरे करने लगता हैं हरिपाल माधुरी केँ चुचे दबाते चुदाई करते हुवे - उफअहह मेरी बेटी तेरी चूत बहुतगरम कसी हुइ हैं अहह तूनेआज अपने बापू कों खुशकर दियाअहह यह मज़ा बेटी केँ चुदाई कां अहह
माधुरी - मर गई अहह बापू मुझे भि आपका लन्ड लेके आनंद आँ रहा हैं
माधुरी थक जाती हैं तोँ हरिपाल कों खाट पे लेता केँ ऊपरआके लन्ड चूत मे लेकेबैठ गांडउपर नीचे करते हुवे अपने चुचे दबाते लन्ड लेने लगती हैं हरिपाल भि नीचे सें धक्के मारते रहता हैं
माधुरी अपने बापू केँ लन्ड कि सवारी करते हुवे - उफमा बापू आपके लन्ड कि सवारी करने मे बहुत मज़ा आँ रहा हैं
हरिपाल चुदाई करते हुवे - मुझे भि बेटी अहह मस्त सवारी कररही हौ
माधुरी फिन हरिपाल केँ ऊपर पुरालेत केँ किस करते हुवे अपनी गांडउपर नीचे करते हुवे लन्ड लेती रहती हैं हरिपाल आजअलग हि जोस मे थां अपनी भाग्य कां सुक्रिया कररहा थां माधुरी कों भि अपने बापू सें चुदवाने मे अलग हि आनंद आँ रहा थां
28 मिनट चुदाई केँ बाद
हरिपाल माधुरी कों देख - तूने एकदम सें खुशकर दिया बेटी सच तोँ यह हैं मे तेरी चूत मरने कां सोचरहा थां केसे मारू
माधुरी मुस्कुराते हुवे - अच्छा जी
हरिपाल - उफ बेटी सच मे बेटी कि चुदाई करने मे अलग हि आनंद हैं यहसभी तौ हौ गय़ा अब बताओ पुरासच
माधुरी - मे पता डुगीमगर वादा करिये आप् भि जौ प्रश्न करुगी सच बतायेगे
हरिपाल - ठीक हैं वादा
माधुरी सारेराज बता देती हैं
हरिपाल पुराहिल जाता हैं
हरिपाल हैरान होके - मेरी पत्नि दामाद जी तुम् अशोक भइया बहन केँ बीच औऱ तेरा मेरेयार ससुरजी केँ बीच तुम् मा भि बनने वाली होँ औऱ दामाद जीबहु दोनों भइया बेहन केँ बीच
सबसे बारा मेरे मित्र मेरे पत्नि केँ बीच
माधुरी - हा तोँ अब आप् बताओ मेरी माँ जी जिंदा थि तब आपके उनकेबीच कुछ थां
हरिपाल इमोसनल होके - हा थां
हरिपाल सभीबता देता हैं
माधुरी सर पकर् केँ - वाउ क़िस्मत नें किया खेला हैं हरकोई पीठ पीछे एक् दूसरे कि पत्नि बहु बेहन सासू माँ भाभी कों लेँ रहा थां
हरिपाल माधुरी कों अशोक दरवाजे सें शुरुआत सें सभीदेख सुनरहा थां अशोक भि पुरा हिलाहुआ थां
अशोकमन मे - किया सुना मेने साला मेरायार मेरीमा कि लेता हैं
अशोक अपनीमा केँ पास जाने लगता हैं वोँ खेत मे थि
अंदर हरिपाल - यह तौ अलग हि कांड हौ गय़ा रामपाल मुझसे क्रोध होगासभी जानके
माधुरी - नहीं होगे कियुंकी वोँ भि आपकी पत्नि यानी मेरीमा कि लेते हैं हरकोई एक् दूसरे कि लेँ रहा हैं तोँ कोई क्रोध याँ बुरामान हि नहीं सकता तोँ चिंता मत करिये
वही अशोकखेत मे अपनीमा केँ पासआके मालती केँ पासबैठ जाता हैं
मालती हैरान अशोक कों देख - खेत मे आज केसे आँ गय़ा हु
अशोक मालती कों देखमन मे - अबजब अच्छे सें देखसोच रहाहु तोँ मेरीमा बहुत सेक्सी हैं बरे चुचे गांडउफ अबरहा नहींजा रहा
अशोक - आपके मेरे साथी अपने दामाद मेरे ससुरजी केँ बीच जोँ चलरहा हैं मुझेसभी पता हैं
मालती पूरीशोक मे - क्याँ केसेकब
अशोक - सन्तमा औऱ राज हैं बताता हु
अशोक सारी स्टोरी बता देता हैं जिसे जनके सुनके मालती कों झटका लगता हैं बेचारी हिल जाती हैं
मालती - केसे यकीन नहीं होतासभी एक् दूसरे कि लेँ रहे हैं
अशोक - हा औऱ इस लिये आपको याँ किसी कों डरने कि जरूरत नहीं हैं कोई बुरा नहीं मनेगा नाँ क्रोध करेगा बल्कि अब तोँ लगता हैं सभी बिनाडर खुल केँ मजे करेगे
मालती सोचते हुवे - तेरीबात सही हैं तूने अपनी बेहन कि लेली
अशोक - माअब आपकी लेली हैं
मालती हैरान नहीं होती बल्कि मुस्कुराते हुवे - हुइस लियेआया हैं ठीक हैं रात कों लेँ लेता मेरी चूत
अशोकखुश होके - सचमा
मालती मुस्कुराते हुवे - हा मेरी चूत मे तेरा लन्ड जायेगा तोँ असल मज़ा आयेगा
रात 10 बजे
कमरे मे हरिपाल अशोक मालती माधुरी चारों थें सभी पुरे नंगे बातें हौ चुकी थि अबकोई राज छुपा नहीं थां
हरिपाल बैड पे लेत माधुरी कों देख - आजा बेटी अशोक बेटे पहले तेरी बेहन कि दोनों छेद मारते हैं बाप बेटे मिलके
माधुरी हैरान फिन मुस्कुराते हुवे - चलो तैयार हु
अशोक मालती कों देख - उफमा रुकिए फिन लूंगा आपकी
मालती मुस्कुराते हुवे - जाओ मे देखुंगी
माधुरी हरिपाल केँ लन्ड लेकेझुक जाती हैं अशोक पीछे सें माधुरी कि गांड मे लन्ड घुसने लगता हैं माधुरी दर्द मे मर गई भइया धीरे-धीरे अहह
अशोक - बस बेहन हौ गय़ा सेह लें अहह बहुत टाइट गांड हैं तेरी
अशोकबरी मुश्किल सें पुरा लन्ड गांड मे घुसा देता हैं माधुरी दर्द मे चीख परती हैं अशोक चुदाई करने लगता हैं
माधुरी बेचारी बीच मे अपनी दोनों गांड चूत मे अपने भइया पिताजी कां लन्ड लेने लगती हैं मगरयह अलग हि मज़ादे रहा थां माधुरी कों एक् संग दोनों छेद मे मे लन्ड लेके हरिपाल नीचे सें चूत माररहा थां पीछे सें अशोक गांडमार रहा थां माधुरी - अहहयह तौ अलग हि मज़ा हैं
अशोक - उफ बेहन तेरी गांड बहुत मस्त टाइट hain मज़ा आँ रहा हैं
रामपाल चुदाई करते हुवे - उफ बेटा मुझे भि गांड मारनी हैं पहले तूँ मरले
मालती सभीदेख मन मे - मेरी बेटी कि हिम्मत तौ देखोदो लन्ड लेँ रही हैं
15 मिनटबाद
हरिपाल माधुरी कि गांड मरने लगता हैं माधुरी अपनी दोनों तांगे उठाये गांड मरवारही होती हैं माधुरी - अहह पिताजी मेरी गांड फैलादो उफ
हरिपाल गांड मारते हुवे - उफ मेरी बेटी कसी तेरी गांड मरने मे आनंद आँ रहा हैं अहह मेरी प्यारी बेटी उफ
हरिपाल बदल मे देखता हैं औऱ मुस्कुराते हुवे - क्याँ बात हैं मेरीजान बेटे केँ लन्ड कि सवारी कररही होँ
बगल मे अशोक लेता थां औऱ मालती मजे मे गांडउपर नीचे करते हुवे अपने बेटे केँ लन्ड कि सवारी कररही होती हैं अशोक - अहहमा किया मस्त चूत हैं आपकी मज़ा आँ रहा हैं बापू मेरे मित्र ससुरजी नें बहुत पेला हैं अब मेरी बारी हैं
मालती मुस्कुराते हुवे - लेँ तौ रहीहु तेरा लन्ड उफ बेटे आनंद आँ रहा हैं
मालती हरिपाल कों देख - पति जी बेटी कि गांड मारके आनंद आँ रहा होगा
हरिपाल मुस्कुराते हुवे - बहुत जयदा हि मज़ा आँ रहा हैं
15 मिनटबाद
अब मालती लेती थि हरिपाल अपने पति केँ ऊपर औऱ पीछे सें अशोक अपनीमा कि गांडमार रहा थां मालती - अहह पति जी बेटा चोद अपनीमा कि गांड पति जी आप् भि मेरी गांड मारना
हरिपाल नीचे सें धक्के मारते हुवे - उफ मेरीजान मारुंगा पहले बेटे कों अच्छे सें तेरी गांड मरने तोँ दे
अशोक अपनीमा कि गांड मारते हुवे - उफ पिताजी बहुत आनंद आँ रहा हैं मा कि गांड मरने मे
वहीबैड पे लेती माधुरी अपनी गांड चूत कि छेद छुटे हुवे - अहह मेरी दोनों छेद फैला दि मगर मज़ा बहुत जयदाआया
माधुरी अपनीमा कों देख - उफमा भि पिताजी भइया कां लन्ड मजे मे लेँ रही हैं यहा तौ यहसभी चलरहा हैं मगर मेरे ससुराल मे किया हौ रहा होगा
याहा भि मामला खुल गय़ा थां रामपाल सभी केँ बीच बातें होँ गई थि
कमरे मे संगीता अपने पिताजी रामपाल केँ ऊपर लेती थि रामपाल नीचे सें अपनी बेटी कि चूत माररहा थां तौ पीछे सें मनोज अपनी बेहन कि गांडमार रहा थां औऱ संगीता पुरेमजे मे पिताजी भइया कां लन्ड अपनी दोनों छेद मे लें रही थि माधुरी - अहह चोदो मुझे पिताजी भइया
मनोज गांड मारते हुवे - बापूउफ गुरिया कि गांड मरने मे मे आनंद आँ रहा हैं आपको भि मारनी हैं गांड
रामपाल चूत चुदाई करते हुवे - अहह बेटा बेटी कि गांड मरने मे किस बाप कों मज़ा नहीं आयेगा
माधुरी - अहहमा मर गई मार लेना बापू मेरी गांड आप् भि
अब मनोज नीचे माधुरी मनोज केँ ऊपर पीछे सें रामपाल माधुरी कि गांड मारते हुवे - अहह कितनी कसी गांड हैं बेटी मज़ा आँ रहा हैं
मनोज नीचे सें चूत चुदाई करते हुवे - पिताजी गुरिया मस्तमाल हैं चूत याँ गांड दोनों मरने मे अलग हि आनंदआता हैं
रामपाल गांड मारते हुवे - तूनेसही कहा बेटे
संगीता - अहह मे मस्तमाल हु तौ फारदो मेरी गांड चूत कों
अगलेदिन सारेलोग एक् संग होते हैं रामपाल केँ घऱ
कमरे मे सभी एक् दूसरे कों देखरहे होते हैं
रामपाल - देखो जयदा सोचने कि जरूरत नहीं हैं हम् सभी नें मजे किये हैं एक् दूसरे केँ संग तौ अब खुलके करते हैं
हरिपाल - हायहसही हैं
मालती - मुझे भि सही लगता हैं
संगीता माधुरी - हायहसही रहेगा
मनोज अशोक - हम् तोँ राजी हैं
रामपाल - तौ नंगे होते हैं
फिनसभी नंगे हौ जाते हैं
रामपाल हरिपाल सें - अपनी बेटी कि चूत मारते हैं कहो
हरिपाल मुस्कुराते हुवे - ठीक हैं चल
बैड पे एक् तरफखरे होके रामपाल अपनी बेटी कि चूत मरने लगता हैं तोँ वही हरिपाल बैड मे घुटने मे बैठे अपनी बेटी माधुरी कि औऱ माधुरी संगीता लेती दोनों किस करने मे चुदाई कां मजे लेने मे खोये थें
संगीता माधुरी कों देख - अहह माधुरी मज़ा आँ रहा हैं बहुत
माधुरी - उफ दोस्त मुझे भि हमारे पिताजी हमेचोद रहे हैं
रामपाल - अहहयार बेटी कि चुदाई करने मे अलग हि मज़ा हैं
हरिपाल - हा दोस्त बहुत आनंद आँ रहा हैं
दूसरे बैड पे अशोक लेता अपनीमा कि चूत मरने मे लगा थां तौ मनोज पीछे सें मालती अपने सासू माँ कि गांड मरने मे लगा थां
मनोज - अहह मां जी आपकी गांड किसने खोली हैं
मालती - अहह दामाद जी आपके मेरे बेटे पति नें खोली हैं अहह
अशोक अपनीमा कि चूत मारते हुवे - यार आनंद आँ रहा हैं मेरीमा कि गांड मरने मे अहह मुझे तोँ बहुतआया
मनोज गांड मारते हुवे - दोस्त मुझे भि बहुत मज़ा आँ रहा हैं
15 मिनटबाद
रामपाल मालती केँ पासआके - भाभी किया कहती हैं मे आपका पति मेरा मित्र
मालती हरिपाल कों बैड पे लेता केँ लन्ड चूत मे लेके पीछे रामपाल कों देख मुस्कुराते हुवे - चूत मेरी आपने मारी हैं अब गांड मारो देवरु जी
रामपाल भि बिना देरी मालती कि गांड मे लन्ड घुसा देता हैं
रामपाल मालती केँ बालकमर पकरें गांड मारते हुवे - अहह भाभीसच मे आपकीकसी गांड मरने मे बहुत आनंद आँ रहा हैं साथी तेरी पत्नि मस्तमाल हैं रेअहह भाभी आपकी मस्त गांड
हरिपाल नीचे सें चूत चुदाई करते हुवे - मेरी पत्नि कि गांड मस्तबरी हैं मरने जितना मारना हैं मेरी पत्नि कि गांड कों
मालती - अहह देवर जीजी पति जीअहह मा चोदो मुझेयह आनंदउफ
मनोज अशोक सें - चल मेरी बेहन कों मिलके चोदते हैं
संगीता मुस्कुराते हुवे - मे तैयार हु
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अब मनोज संगीता कि चूत नीचे सें मरने लगता हैं औऱ अशोक संगीता कि गांड मरने लगता हैं माधुरी सभी देखते हुवे - सोचा नहीं थां ऐसासीन देखुंगी अहहयह तौ पुर famaly सेक्स हैं अहह
अशोक संगीता केँ गांड मारते हुवे - तेरी बेहन कि गांड मरने मे मज़ा आँ रहा हैं मेरेयार
मनोज चूत चुदाई करते हुवे - मुझे भि अपनी अपनी बेहन कि चूत मरने मे अहह बेहन मेरीअहह
संगीता - मर गई भइया पति जीअहह
रामपाल हरिपाल सभीदेख मुस्कुरा देते हैं
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संगीता केँ बाद अशोक अपनी बेहन माधुरी कि चूत नीचे सें मरने लगता हैं औऱ मनोज पीछे सें गांड मरने लगता हैं मालती सभीदेख - अहह मेरी बेटी कि चूत गांडमार रहे हैं दोनों मिलके अहह
रामपाल - हम् भि तौ आपकी चूत गांडमार रहे हैं
माधुरी - भइया पति जीअहह मेरी गांड चूत अच्छे सें चोदोअहह
यहा तोँ अबखुल केँ चुदाई चलता रहेगा
5 महीने बाद
संगीता फिन पेग्नेंट होती हैं जैसा वादाहुआ थां अपने पिताजी रामपाल सें
माधुरी तोँ अपने ससुरजी सें पेग्नेंट हुइ थि मगर हरिपाल भि माधुरी सें वादा लेता हैं दूसरा बच्चा उसका होगा माधुरी भि खुशी खुशीमन जाती हैं
रामपाल हरिपाल अपनीबहु बेटी कों पेग्नेंट करके बच्चे पैदाकर रहे थें औऱ अशोक मनोज कों तीसरे बच्चे करने कों कहा जाता हैं
the end
माफ करनाकुछ update औऱ आते जनताहु मगरअब मुझे वक़्त नहीं मिलता इस लिये मे एक् नई लोंग कहानी कल सें शुरुआत कररहा हु मेरा पुरा फोकसउसी एक् किस्सा मे रहेगा बाकी किसी पे नहीं मे अब एक् हि लंबीबरी किस्सा लेके चलने वालाहु
उमीद हैं आप् समझेगे औऱ नई किस्सा कों प्रेम देगे जैसा मेरीसब कहानी कों दिया हैं
मिलते हैं नई कहानी केँ संगकल
बहोत हि गरमागरम कामुक औऱ उत्तेजना सें भरपूर कामोत्तेजक एपसोड हैं भइया आनंद आँ गय़ा
मक्के केँ खेत मे – New Episode
Congratulations on successful completion of one more kahani.
Ek suggestion: पहले क़िस्मत कि लकीर स्टोरी पूरीकर दो.फिन लॉन्ग कहानी पे फोकस करना औऱ उसे हि चलने देना। बाकी तुम्हारी मर्ज़ी।
Best of Luck!!
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बडा हि गजब कां शानदार लाजवाब औऱ जानदार उत्तेजना सें भरपूर कामोत्तेजक एपसोड हैं भइया मज़ा आँ गय़ा
बहोत हि गरमागरम कामुक औऱ उत्तेजना सें भरपूर कामोत्तेजक भाग हैं भइया मज़ा आँ गय़ा
बडा हि गजब कां शानदार लाजवाब औऱ जानदार उत्तेजना सें भरपूर कामोत्तेजक भाग हैं भइया मज़ा आँ गय़ा
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