मक्के केँ खेत मे – New Episode
chapter 18
( अशोक माधुरी पास्ट् )
अशोक नें माधुरी अपनी बेहन कों राजन केँ संगदेख लेता हैं पऱ चुदाई होती उससे पहले अशोक मामला बिगार् देता हैं फिन माधुरी कों राजन कि सचाई बताता हैं सबूत देता हैं मगरइस सभी मे अशोक माधुरी कां फायेदा उठाने लगता हैं औऱ माधुरी मजबूर अशोक कों रोक नहीं पति हैं
अशोक माधुरी कों किस करने लगता हैं बेचारी माधुरी अपनेबरे भइया केँ नीचे अपने होठो कों चूसने देती हैं वही अशोक तोँ पागल कि तरह अपनी बेहन कां होठोचूस रहा थां क़िस्मत वालो कों ऐसा मोक्का मिलता हैं अशोकउपर नीचेजिब कों चुस्टे जारहा थां औऱ माधुरी नाँ चाहते थोरासंग दे देती हैं
अशोककिस करने केँ बाद माधुरी केँ टिसर्ट उपर करके गुलाबी बिकनी केँ कसे चुचेदेख पागलहा जाता हैं माधुरी अशोक कों देख - प्लेस भइयामत करिये बेहनहु आपकी
अशोक माधुरी कों देख - चुपरह समझ गई
अशोक माधुरी केँ एक् चुचेपकर दबाते हुवे - अहह मेरी छोटी बेहन तेरे चुचे कितने बरे रसीले हैं हमेसा मे देखता थां तेरे चुचे टाइटखरे खरे रहते हैं उफअब मोक्का मिला हैं उफ आनंद आँ रहा हैं
अशोक जल्द सें जोस पागल होके लेग्गिंस अंदरहाथ डालके पैंटी केँ साइड सें एक् उंगली चूत केँ अंदरजोर सें घुसा देता हैं माधुरी दर्द मे मर गई मा
माधुरी अशोक कों दूर करते हुवे रोते हुवे अपनी चूत पे हाथ रखते हुवे - जाइये यहा सें नहीं तोँ मा कों बता दुगी
अशोक नें जोर सें उंगली घुसा दिया थां सीलपैक थि इसलिए दर्दहुआ थां
अशोकहोस मे आते हुवे - अच्छा अच्छा मे जाताहु
अशोकचला जाता हैं
उसकेबाद अशोक माधुरी केँ पीछे हि पर्र जाता हैं मगर माधुरी हमेसा अशोक सें दूर रहती पर्र कभीकभी अशोक अकेले मे देख चुचेदबा देताकिस कर लेतामगर जयदाकुछ कर नहीं पाया
औऱ माधुरी कि सादी हौ गई मनोज सें
( परजेंट )
माधुरी यहीसभी खाट पे नंगी लेतीयाद करकेसोच रही थि माधुरी कों कुछ गिला गिलाफिल होता हैं माधुरी चूत पे हाथ रखती हैं जौ पता चलता हैं चूत पूरी गीली हौ गई हैं
माधुरी अपनी गीली उंगली कों देखमन मे - पहलेऐसा नहींहुआ मगरअब मेरी चूत गीली होँ गई हैं
माधुरी बैठते हुवे अपना मोबाइल लेके अपनी नंगी चुचे कां फोटो लेके अपने भइया अशोक कों भेज देती हैं
माधुरी बैड पे लेटते हुवे - उमीद हैं भइया कां क्रोध नाराजगी चला जायेगा
सुभह कां वक़्त
जब सुभह अशोक उठता हैं अपना मोबाइल चेक करता हैं तौ दंगरह जाता हैं माधुरी कि नंगी फोटोदेख
माधुरी केँ दोनों बरेबरे काले निपल वाले चुचेदेख अशोक कां लन्ड लोहा बनकेखरा हौ जाता हैं अशोक पागल होकेमन मे - माधुरी मेरी छोटी बेहन नें फोटो भेजा यकीन नहीं होता एक् मिनट फोटोदेख पताचल रहा हैं वोँ पूरी नंगी हैं क्याँ रात कों नंगी सोती हैं उफ कितनी बरे सुंदर चुचे हैं अब जाके मे अपनी छोटी बेहन केँ नंगे चुचेदेख पायाहु
अशोक जल्द सें माधुरी कों मोबाइल करने लगता हैं तभी रुकते हुवे - नहीं अभि ससुरजी जी होगे मुझे 2 बजे तक इंतजार करना होगामगर अभि मुझेमुठ मारना होगा नहीं तोँ मेरा लन्ड फट जायेगा
अशोक बाथरूम मे जाके अपनी बेहन केँ नंगे चुचे वाली फोटो देखते हुवेमुठ मरने लगता हैं
दोपहर 2 बजे
माधुरी खेत सें आके मस्तबैड पे लेती हुई थि तभी अशोक कां मोबाइल आता हैं
माधुरी मन मे - मुझेपता हि थां भइया कां मोबाइल आयेगा
माधुरी - जी भइया
अशोक - थैंक्स गुरिया तेरी नहींपता मे कितना खुशहु तेरे चुचे देखने केँ लिये तरप्रहा थां मगर तुम्हे मेरी एक् इक्छा पूरी करदी
माधुरी - कोईबाद नहीं भइया मेने आप् कों बहुत बुरा बोला नाँ
अशोक - अरे जानेदो उसबात कों यह बताओ गुरिया तूने जौ फोटो भेजा थां देख केँ पता चलता हैं तुम् नंगी थि पुरासच हैं नाँ
माधुरी मन मे - हा नंगी थि ससुरजी जी कि चुदाई केँ बाद नंगी हि सोतीहु
माधुरी थोरा सर्म सें - हा वोँ गर्मी जयदा थि तोँ नंगीसो रही थि
अशोक कां लन्ड फिनखरा हौ जाता हैं
अशोक - गुरिया चुचे तौ दिखा दिया तूने चूत दिखाओ नां
माधुरी सर्म सें - छि भइया सर्मआती हैं
अशोक - सर्म हटाओ दिखाओ नां जल्द सें मे टरप्रहा हु
माधुरी - वोँ वोँ किसी कों दिखाना मत
अशोकजोस बेताबी मे - वादा अच्छा रुको वीडियो फोन करताहु तुम्हें पुरा नँगा देख्ना चाहता हु गुरिया
माधुरी सर्म सें - नहीं नां भइया
अशोक - प्लेस गुरिया भइया कों अपनेमत तरपा
माधुरी धीरे-धीरे सें - ठीक हैं
अशोकखुश होके वीडियो कॉलआई करता हैं
माधुरी पूरी नंगी होके मोबाइल बैड पे एक् स्थान देखते हुवे केमरे केँ सामने तांगे फैला देती हैं पूरी नंगी अपनी छोटी बेहन कों देख अशोक कि आखे बाहर् आँ जाती हैं यकीन नहींकर पाता अपनी भाग्य पे माधुरी कि पूरी नंगी बॉडीसभी कुछ अशोक कों अच्छे सें दिखरहा होता हैं माधुरी मन मे - पता नहीं कियुआज मे अपने भइया कों मना नहींकर पाई अजीबलग रहा हैं सर्म भि आँ रही हैं
किया हि सीन थां गोरा शरीरबरे खरे काले निपल वाले हसीन चुचेभरा शरीर काले छोटे बालों वाली चूत माधुरी कि बॉडी कि किया हि कहने अपनी छोटी बेहन कों इस नंगेरूप मे देखने केँ लिए अशोकअब सें कोसिस कररहा थां अब जाके पुरा होता हैं
अशोक कपते होठो सें - किया हसीनसीन हैं वैसा उमीद थां मेरी बेहनसच मे कयामत सुंदर हैं क्याँ बॉडी हैं गजब
अशोक - गुरिया चूत फैला केँ दिखा नां मुझे तेरा चूत कां छेद देख्ना हैं
माधुरी अशोक कि बातें सुन सर्म सें - ठीक हैं भइया दिखाती हु
माधुरी अच्छे सें बैड पे लेत जाती हैं फिन दोनों हाथो कि उंगली सें अपनी चूत केँ फाके फैला लेती हैं पिंक पिंक गुडे सें भरी चूत कि छेद अशोक केँ नजरो केँ सामने थि
अशोक औऱ पागल बाबला होँ जाता हैं लन्ड लोहे जैसाखरा नस फटने जैसा होँ गय़ा थां अशोक माधुरी कि चूत कि छेददेख अपना लन्ड बाहर् निकलते हुवे हिलाते हुवे - किया सुंदर नजरा हैं गुरिया तेरी चूत कि छेदउफ मस्त हैं पिंक पिंकअहह तेरेपास होता तौ अपना लन्ड घुसा देता तेरीइस चूत कि छेद मे
माधुरी लेती अपने भइया कि बातसुन गरम होने लगती हैं
अशोक लन्ड हिलाते हुवे - गुरिया चूत मे उंगली कर नां जल्द सें अहह
माधुरी भि अपने भइया कि बात मानते हुवे चूत मे दो उंगली घुसा केँ अंदर बाहर् करने लगती हैं चूत गीली थि फच्फच् कि आवाजे सुन अशोक कां लन्ड औऱ टाइट हौ जाता हैं अशोक लन्ड हिलाते हुवे - अहह मेरी बेहन मस्त उंगली करती हैं तूँ अपनी चूत मे करतीरह अहह
माधुरी चूत मे उंगली करते हुवे एक् नजर अपने भइया केँ लन्ड कों हिलाते देखती हैं तौ औऱ गरम होकेजोस मे उंगली करने लगती हैं भइया बेहन केँ बीच पहलीबार सभी हौ रहा थां तौ दोनों जयदादेर रुक नहीं पाते
माधुरी - अहह भइयाआने वाला हैं मे झरने वालीहु
अशोक हफ्ते हुवे - उफ मेरी बेहन मे भि झरने वालाहु
फिन दोनों झर जाते हैं
माधुरी हफ्ते हुवेमन मे - यकीन नहीं होता हमारे बीचयह सभीहुआ मगर मे आज बहुत जल्दझर गई मुझे बहुत मज़ाआया ससुरजी केँ संगअलग आनंदमगर अपने भइया केँ संगयह अलग मज़ा थां
अशोक हफ्ते हुवे - गुरिया तेरी गीली चूत मस्तदिख रही हैं
माधुरी जल्द सें मोबाइल उठा केँ - छि भइया गंदे
अशोक - गुरिया जिसके लिए तरप्रहा थां आज जाके पुराहुआ तुम् सच मे बहुत हसीन हौ
माधुरी - सच मे
अशोक - सच मे गुरिया अबरोज मोबाइल करुगा तोँ करुगी जौ बोलुगा
माधुरी - ठीक हैं भइया करुगी
अशोकखुश होके - सच गुरिया
माधुरी सर्म सें - हा
अशोक - सच बताना मज़ाआया नां तुझेही
माधुरी धीरे-धीरे सें - जी बहुत मज़ाआया
अशोक - गुरिया तेरी चूत मस्त हैं आऊगा तौ चूत मे उंगली करने दोगी
माधुरी सर्म सें - जब आयेगे तौ देखेंगे अच्छा रखतीहु
मोबाइल कट
अशोक तोँ खुशी केँ मारे नाचने लगता हैं वही माधुरी बैड पे लेतीमन मे - अहहसच मे भइया केँ संग मोबाइल पे गंदी बातें चूत मे उंगली करने मे अलग हि आनंदआया अहह आखिर जौ नहीं होना थां हौ गय़ा
20 दिनबाद
रात 8 बजे
माधुरी रामपाल पलंग पे लेते हुवे होते हैं माधुरी रामपाल कों देखते हुवे - मे आपके बच्चे कि मा बनने वालीहु
रामपाल पुरा हैरान होके -कियाबहु तुम् सच तोँ केहरही हौ नाँ
माधुरी सर्म सें -पीरियड नहींआये 6 दिन हौ गये हैं ऐसाकभी नहीं होता थां यानी मे पेग्नेंट हु
रामपाल खुशी सें माधुरी कों बाहों मे लेते हुवे - देखा अपने ससुरजी जी कां दम
माधुरी हस्ते हुवे - हा बहुतदम हैं आपके अंदर
रामपाल माधुरी कों देख - मनोज आँ रहा हैं यहराज रखता महीने बाद बताना तुम् माबन गई होँ
माधुरी - हुसमझ गई
हा दोस्तो अशोक मनोज ट्रेन मे बैठघऱ आँ रहे हैं
मनोज अशोक बैठेमन मे एक् हि बातसोच रहे होते हैं
मनोज अपनी सासू माँ सुमिता कि चुदाई करने केँ लिए बेचैन थां तोँ अशोक अपनी बेहन माधुरी कि चुदाई करने केँ लिये
रात 11 बजे
अशोक माधुरी कों मोबाइल करता हैं रामपाल कों सोतादेख मोबाइल उठा केँ - जी भइया
अशोक - गुरिया आँ रहाहु चूत देने कां वादा क्याँ हैं याद हैं नां
माधुरी मुस्कुराते हुवे - हायाद हैं जब आओगे तोँ चोद लेना अपनी बेहन कों
अशोकजोस मे - चोदचोद केँ फार दुगा तेरी चूत
माधुरी तौ रामपाल कि चुदाई केँ बाद नंगी थि अपने भइया कि बातसुन गरम होके चूत मे उंगली करते हुवे - अहह भइयाफार देना
अशोक - उफ गुरिया नंगी होँ क्याँ
माधुरी चूत मे उंगली करते हुवे - अहहमा जी भइया उंगली कररही हु चूत मे अहह आप् जल्द आँ जाओ आपकी बेहन चुदने केँ लिए बेचैन हैं
अशोक - अच्छा पहले तोँ क्रोध करती थि
माधुरी - उफ भइया पहली कि बात जानेदो अहह
अशोक - अच्छा पुरा लन्ड लेना होगा चूत मे
माधुरी जोस मे - पुरा अंदर तक अपनी चूत मे आपका लन्ड लुगी भइया
अशोक - चूत मे पानी निकालूँगा मे
माधुरी - निकाल लेना अपनागरम गरममाल मेरी चूत मे भइयाअहह आने वाला हैं भइया मे झरने वालीहु मर गई भइया
माधुरी झर जाती हैं
अशोक मनोज कों देख - उफ गुरिया ट्रेन मे हुबसकल आँ जाउंगा रखताहु
माधुरी - अहहठीक हैं भइया
माधुरी मोबाइल रख चूत मे उंगली करते हुवेमन मे - मोबाइल पे बातें करते करते इतना मज़ाआने लगा कि अब मेरी चूत भइया केँ लन्ड लेने केँ लिए बेचैन हैं अहह भइया जल्द आँ जाओ
अशोकखुश होकेमन मे - बातें करते करते अपनी बेहन कों राजीकर हि लियाबस यहसफर खतम हौ जाये
वही मनोज दूसरे सीट मे लेता मालती सें बातकर रहा थां
मनोज - मां जी आँ रहाहु आपकी फूली चूत मारुंगा
मालती चूत मसलते हुवे - आपका लन्ड लेने केँ लिए मे बेचैन हु दामाद जीअहह मेरी चूत भि तरप्रही हैं
मनोज - मां जी आपकी चूत मरने कों मिलेगी अभि भि यकीन नहीं होता
मालती चूत मे उंगली डालते हुवे - यकीन तौ मुझेअहह भि नहीं होता पऱ मे आपकी दीवानी हौ गई हु दामाद जी
मनोज अशोक कों देखते हुवे - अपनी चूत कि फोटो भेजिये नां
मालती - ठीक हैं अहहभेज देतीहु
मालती एक् फोटो अपनी चूत कि भेज देती हैं
मनोज अपनी सासू माँ कि मस्त चूत कों देखते हुवे - उफ किया मस्त फूली छोटे बालों वाली चूत हैं मेरी सासू कि कितने फोटो मंगवा केँ देखे हैं मगरहर बार देखता हु तौ पागल हौ जाताहु
आखिर अगलेदिन अशोक अपनेघऱ मनोज अपनेघऱ आँ जाता हैं मगर मनोज अपनी सासू केँ पास जाने केँ लिये बेचैन थां तौ वही अशोक माधुरी केँ पासआने केँ लिए
आज केँ लिए इतना हि
मक्के केँ खेत मे – New Episode
chapter 19
आज update देने कां मन नहीं थां कियुंकी लोगो कां प्रेम कममिल रहा हैं पहले मे फ्री रहता थां मगरअब अपना वक़्त देके update देताहु खैर
एक् बात कहना चाहुंगा किसी कि भि किस्सा आप् पसन्द करते हैं तोँ कॉमेंट कर दियाकरे ताकिउसे मोटिवेट मिले upadte वक्त पे दे मेने स्वयं फिल किया हैं जब प्रेम नहीं मिलता तौ मन करता हैं आज जाने देताहु कल लिखुंगा ऐसा होता हैं
मे किसी कों कॉमेंट करने केँ लिए नहीं बोलता प्रेम स्वयं मिले वोँ असली प्रेम हैं नां कि कहने पे लोग प्रेम करे वोँ
किस्सा पूरी होगी कियुंकी मे जौ किस्सा शुरुआत करकेआधे पे लें आताहु पुरा जरूर करताहु
रात 8 बजे मनोज माधुरी रामपाल आगन् मे बैठे खानां खाने केँ बाद बातें करने मे लगे थें
रामपाल - मनोज बेटा कितने दिनों कि छुट्टी लेकेआये हौ
मनोज - पिताजी एक् महीने कि छुट्टी लेकेआया हु
रामपाल - अच्छा हैं
माधुरी रामपाल कों देखमन मे - एक् महीने ससुरजी जी केँ संगरात सो तोँ नहीं पाउंगी मगर चुदाई तौ होते रहेगी
रामपाल भि माधुरी कों देखवही सोचरहा थां
बातें करने केँ बाद मनोज माधुरी कमरे मे चले जाते हैं रामपाल अपने कमरे मे आकेलेत जाता हैं
रामपाल - चलो महीने अकेले सोना परेगा
वही मनोज माधुरी कों बाहों मे लिये - मेरीजान बहुत तरपाहु
माधुरी मुस्कुराते हुवे - तोँ अब रुके कियु हैं
माधुरी नाइटी निकाल नंगीलेत जाती हैं औऱ अपनेमन मे - भले हि ससुरजी जी सें मेरा रिस्ता हैं उनके बच्चे कि मा बनने वालीहु मगर पति तोँ पति हैं उनको प्रेम देनासंग देना मेरा फर्ज़ हैं
मनोज भि बिना देरी किये माधुरी कि चूत मे लन्ड डालके माधुरी केँ ऊपर लेटके चुदाई करने लगता हैं मनोज - उफजान तुम्हारी चूत मुझेअहह बहुतगरम लगरही हैं ठोरी फैली भि चूत मे उंगली करती थि क्याँ
माधुरी पैरो सें मनोज कों जकरे बाहों मे भरे - उफ पति जी आपनेसही कहा चूत मे उंगली करती थि जब बहुतमन करता थां
माधुरी मन मे - आपके बापू मेरे ससुरजी जी नें चोद केँ मेरी चूत फैला दि
वही हरिपाल केँ घऱ
संगीता अशोक कमरे मे थें अशोक अपनी बेटी जूही कों खेलते हुवे - मेरी प्यारी बेटी कों बहुतमिस किया
संगीता - अच्छा अपनी पत्नि कों नहीं
अशोक - अरे मेरीजान तुम्हे भि बहुतमिस किया
दोनों बातें करते रहते हैं इसीबीच जूहीसो जाती हैं
अशोक भि बिना देरी किये संगीता कों नँगा करके स्वयं नँगा होके संगीता कि तांगे फैला केँ चूत मे लन्ड घुसा केँ चुदाई करने लगता हैं संगीता - अहह पति जी बहुत मज़ा आँ रहा हैं उफ
अशोक चुदाई करते हुवे - हा मेरीजान तेरी चूत कि बात हि अलग हैं
संगीता - उफ पति जीअहह करते रहिये
अशोक चुदाई करते हुवे - बहुतचैन मिलरहा हैं मेरीजान
इसरात दोनों ससुरजी कों ऐसे हि सोनापरा कियुंकी दोनों बहु केँ असली मालिक आँ गये थें औऱ वोँ लें रहे थें
अगलेदिन सुभह 10 बजे
मालती रामपाल कों मोबाइल करती हैं
मालती - मे क्याँ केहरही हु दामाद जी आँ गये हैं तोँ बिना देरी किये डॉक्टर सें चेकप् करवा देते हैं
रामपाल मन मे - अरे दोस्त माधुरी तोँ पेग्नेंट हैं अभि पताचला तौ गर्बर् हौ जायेगी मगर जानां भि परेगा कुछ करना परेगा
रामपाल - जी जैसा आप् कों सहीलगे
हरिपाल - सुन महीने हमारे बेटे आँ गये हैं तौ तुसभी कों लेकेआया मेरेघऱ
रामपाल - कमीना होगा तेरा बाप तुआजा सभी कों लेकर
मालती - हद हैं फिन शुरुआत होँ गयेठीक हैं हम् आते हैं
रामपाल - सुन लिया कमीने आजा सबको लेके
हरिपाल - आके तेरी लूंगा साले
रामपाल - आजा देखते हैं किस्मे कितना दम हैं
मोबाइल कट
मनोज माधुरी पास मे खरेसभी सुन लिया थां
मनोजमन मे खुश होके - उफ मेरी सासू माँ आँ रही हैं
माधुरी मन मे - मा बापू औऱ भइया भि आँ रहे हैं
दोपहर 2 बजे
हरिपाल अशोक मालती संगीता सभीफिन एक् बारसंग मे मिलते हैं
संगीता हरिपाल कों गले लगते हुवे - केसे हैं बापू
रामपाल संगीता कों बाहों मे लेके - मेरी प्यारी बच्ची बहुत अच्छा हु
मनोज - गुरिया
संगीता मनोज केँ गले लगते हुवे - भइया
मनोज - मेरी प्यारी बेहन
माधुरी संगीता भि मिलते हैं
रामपाल हरिपाल भि गले मिलते हैं
मनोज तोँ अपनी सासू कों देखरहा थां औऱ अशोक माधुरी कों
सभी बातें करने मे लग जाते हैं
शाम 3 बजे
सबखेत भूमने निकल परते हैं मोक्का देख मनोज सासू माँ केँ संग बातें करने लगता हैं औऱ अशोक माधुरी सें
आगे हरिपाल संगीता रामपाल बातें करतेजा रहे थें
मनोज थोरातेज आवाज़ मे - मे मां जी दूसरी तरफ घूमने जारहे हैं
मालती हैरान होती हैं
वही रामपाल हरिपाल बाकीसभी - ठीक हैं जाओ
इतना सुनते हि मालती कां हाथपकर मनोज दूसरी तरफ निकल परता हैं
मालती - दामाद जी आप् कहा लेकेजा रहे हैं
मनोज मालती कों देख - एक् स्थान जहा आपकी चुदाई करसकु
मालती हैरान होके - क्याँ नहींकोई देख लेगा
मनोज - कोई नहीं देखेगा औऱ बापू बाकीसभी घंटेरख रुकने वाले हैं
मालती कों थोरिदूर खेत केँ बाहर् एक् सुखी झरियो केँ बीच लेकेआता हैं
मालती सर्म सें - दामाद जी सर्म आँ रही हैं
मनोज मालती केँ ब्लाउस खोलके दोनों चुचे निकाल दबाते हुवे - सर्ममत करिये
मालती - अहह दामाद जीउफ
मनोज जल्द सें नँगा होँ जाता हैं औऱ मालती कों नीचे बैठा केँ मुह मे लन्ड घुसा केँ मालती केँ सर पकरें मुह मे पेलने लगता हैं मालती हैरान होती हैं इतना जल्दसभी हौ रहा थां मगर अपने दामाद कि बेताबी समझरही थि मनोजसच मे बेताब जोस मे थां
मनोज मालती केँ सर पकरें मुह मे लन्ड पेलते हुवे - अहह मां जीबता नहीं सकताइस समय केँ लिये कितने बेचैन होके इंतजार कररहा थां
मालती बैठी अपने दामाद केँ मुह मे लन्ड पेलाई कां मज़ा लेने लगती हैं मालती भि लन्ड कों चूसने लगती हैं
मालती मन मे - अहह मज़ा आँ रहा हैं यह आनंदसभी सें अलग हैं दामाद जी केँ लन्ड चूसने कां जौ लन्ड मेरी बेटी कि चूत मे जाता हैं
लन्ड चुसाई केँ बाद मालती कों घोरीबना केँ पीछे सें चूत मे लन्ड घुसा केँ मालती केँ ऊपरलेत एक् हाथ सें चुचे पकरें चुदाई करते हुवे - अहह मां जीअब संति मिली मुझे कितनी गरमकसी चूत हैं आपकी
मालती घोरीबनी चुदाई कां मज़ा लेते हुवे - उफमा आनंद आँ गय़ा दामाद जी मे भि तरप्रही थि चुदाई केँ लियेअब जाकेचैन मिला
मनोजमन मे -शपथ सें मेरी सासू माँ कि चूत मे तोँ आगलगी हैं मेरा लन्ड जलरहा होँ मगर आनंद भि बहुत आँ रहा हैं यकीन नहीं होता मे अपनी सासू माँ कों जंगल मे घोरी बनाके चोदरहा हु
साहिल चूत सें लन्ड निकाल जमीन पे लेत जाता हैं औऱ मालती कों देख - माँ जी आइयेउपर
मालती सर्म सें - जी दामाद जीसमझ गई
मालती मनोज केँ ऊपरआके अपनी गांड नीचे करके चूत केँ छेद पे लन्ड रखते हुवेबैठ जाती हैं मालती अहहमर गई अहहमा
मालती फिन मनोज केँ सीने पे दोनों हाथरखे अपनी मस्त मोती मोती गांडउपर नीचे करते हुवे लन्ड चूत मे लेने लगती हैं मालती सर्म सें - अहह दामाद जी इतना आनंद मुझे किसी केँ संग नहींआया उफमा
मनोज मालती केँ चुचे दबाते हुवे - मां जी मज़ा तोँ मुझे आँ रहा हैं अपनी सासू कि चुदाई करने मे अहह मेरी सेक्सी सासू
मालती गांडउपर नीचे करते लन्ड लेते हुवे - अहह मेरे दामाद जी
मनोजफिन मालती कों घोरी बनकेतेज धक्के मरने लगता हैं मालती - अहहमा चोदीये दामाद जीफार दीजिये मेरी चूत कों साली बहुत परेसान कररही थि बहुत गर्मी हैं निकाल दीजिये सभी गर्मी
मनोज भि जोस मे धक्के मरते हुवे - अहह माँ हि उफ सारी गर्मी निकाल दुगाआज आपकी चूत कि अहहयह मज़ायह चैन
मनोज नें तौ मोक्का निकाल अपनी सासू कि लेने मे लग गय़ा थां वही माधुरी अशोक पीछे चलते बातें कररहे थें
अशोक माधुरी केँ हाथपकर - गुरिया
माधुरी सर्म सें - भइया
अशोक देखता हैं हरिपाल सभीदूर चलेगये हैं तौ अशोक माधुरी कों बाहों मे भरकेकिस करने लगता हैं औऱ माधुरी भि पुरासंग देती हैं
अशोक जल्द सें लन्ड निकाल - बहन जल्द सें चुसोकोई नहीं हैं
माधुरी भि सर्म सें नीचेबैठ अपने भइया कां लन्ड लेके चूसने लगती हैं माधुरी मन मे - यह स्वाद ससुरजी जी केँ लन्ड सें अलग हैं बहुत आनंद आँ रहा हैं अपने भइया कां लन्ड चूसने मे उफ अपने भइया केँ संग मुझे इतना आनंद आयेगा सोचा नहीं थां यहअलग हि मज़ा हैं
अशोक माधुरी केँ सर पे हाथरखे - अहहअब जाकेचैन मिला मुझे गुरिया तेरेमुह मे लन्ड देने केँ लिये तरप्रहा थां सोचरहा थां मेरी गुरिया मेरा लन्ड मुह मे लेके चुसेगी तोँ कितना मज़ा आयेगा मगरअब तु मेरा लन्ड चूसरही hain औऱ जौ मज़ाचैन मिलरहा हैं बया नहीं कियाजा सकता 6 मिनटबाद
अशोक माधुरी केँ मुह मे झर जाता हैं औऱ माधुरी मजे मे अपने भइया कां गरममाल पी जाती हैं
माधुरी मुहसाफ करकेखरी होती हैं अशोक भि लन्ड अंदरकर लेता हैं
अशोक माधुरी कों देख - गुरिया आनंदआया
माधुरी सर्म सें - बहुत माजाआया
तभी पीछे सें मालती मनोज आँ जाते हैं
मालती मन मे - अहह जैसा सोचा थां वही आनंद दामाद जी नें मुझे दिया हैं अब जाके मेरी चूत पूरीखुश होके सन्त हुइ हैं आज मे बहुतखुश हु दामाद जी सें चुदवाने केँ बाद
मनोजमन मे - अपनी सासू माँ कि गरम फूली चूत मरने कां अलग हि आनंद हैं आज जोँ आनंदआया बता नहीं सकता मेरी क़िस्मत हैं मुझे मेरी सासू मिल गई आज तौ आनंद आँ गय़ा
माधुरी मालती मनोज कों देख - आप् दोनों आँ गये
मालती - हा आँ गये दमादजी नें बहुत अच्छी स्थान घुमाई
माधुरी - अच्छा हैं
अशोक - तोँ चले
फिनसब एक् संग बातें करतेआगे जाने लगते हैं मगर मनोज मालती कों देख मुस्कुराते रहता हैं वही अशोक माधुरी कों देख
आगे रामपाल संगीता हरिपाल थें
संगीता जूही कों लिए प्रेम सें जूही कों देख - मेरी प्यारी बेटी अपने नानाजी दादाजी केँ संग घूमने आई हैं
रामपाल हस्ते हुवे - मामाजी पिताजी नानीमा भि हैं
संगीता हस्ते हुवे - हामगर सभी हैं कहा
तभी मालती सबवहा आँ जाते हैं फिनसब एक् स्थान बैठ बातें करते हैं खुब मस्ती करते हैं औऱ घऱ आँ जाते हैं
रात 10 बजे
बहुत सारी बातें करने खाने पीने केँ बादसभी अपने अपने कमरे मे चले जाते हैं मगर रामपाल हरिपाल बाहर् खटिये पे लेतेबात कररहे थें दोनों नें पिया भि थां
रामपाल - दोस्त तुम् सभी केँ आने सें बहुत खुशी मिलती हैं जब मे टूट गय़ा थां तूने मालती नें बहुत सहारा दिया
हरिपाल - बकवास मतकरतु मेरा दोस्त हैं जब तक जिंदा हु तेरासंग देता रहुंगा
रामपाल मुस्कुराते हुवे - मे भि
रात 11 बजे
मनोज माधुरी कि चुदाई करके लेता थां औऱ माधुरी सो गई थि
वही अशोक भि संगीता कि चुदाई करके लेता थां औऱ बस माधुरी अपनी बेहन कों यादकर रहा थां
मनोज माधुरी कों सोतादेख हिम्मत करके मालती केँ कमरे मे आता हैं दरवाजा खुला थां मालती लेती हुईँ थि
मनोज पलंग पे जाके मालती केँ नाइटी उपर करने लगता हैं तभी मालती आखे खोलते हुवे - मुझेपता थां आप् आयेगे
मनोज मुस्कुराते हुवे - अच्छा
मालती अपनी नाइटी उतार पूरी नंगी लेती मनोज कों देख सर्म सें - खेत मे बहुत मज़ाआया मगर दामाद जी अभि जल्द करना होगा
मनोजखरा होके नँगा होते हुवे मालती कों देख - शपथ सें मां जीअब जाके मेने आपके पुरे बॉडी कों नँगा लगभग सें देखरहा हुसच मे आप् आपकी बॉडी बहुत हसीन हैं उफगजब हैं
मनोज मतली केँ टाँगों केँ पास बैठते हुवे मालती कों देख - मां कि चूत कां रस पीना हैं खेत मे जल्द बेताबी मे थां
मालती सर्माते हुवे अपनी तांगे फैला केँ - जी लीजिये दामाद जी अपनी सासु केँ चूत कां रस
मनोज भि बिना देती किये फाको कों फैला केँ जीब सें चाटने लगता हैं मालती सिसकीया लेते हुवे मनोज केँ सर पे हाथ रखते हुवे - अहह दामाद जीयह मज़ाचैन आपने तोँ मुझे पागलकर दिया हैं चूसिये अपनी सासू माँ कि चूत कों अहह आनंद आँ रहा हैं
मनोज फाको मे जीब डालके मुह मे चूत लेके चुस्के स्वाद लेते हुवे - अहह जैसा सोचा थां मेरी सासू कि गरम चूत चस्के स्वाद लेने मे आनंद हि आँ गय़ा इतने मे मालती कपतेझर जाती हैं
मनोज लन्ड पकर् चूत केँ फाको केँ बीच घिसते हुवे मालती कों देखते हुवे एक् बार मे घुसा देताहै मालती अहह दामाद जी धीरे-धीरे
मनोज चुदाई करते हुवे - माँ जी अपने दामाद सें चुदाई करवाके आनंद तौ आँ रहा हैं नाँ मेरा लन्ड आपकी चूत कि सेवा तोँ कररहा हैं नाँ
मालती पलंग पे लेती तांगे फैलये लन्ड लेते हुवे मनोज कों देख - अच्छे सें दामाद जी आप् आपका लन्ड मेरी मेरे चूत कि सेवाकर रहे हैं मे मेरी चूत बहुतखुश हैं अहहमा दामाद जी झरने वालीहु अहह दामाद जी
मालती फिनझर जाती हैं
15 मिनटबाद
मनोज मालती कि चुदाई करकेचला जाता हैं
मालती खाट पे लेतीमन मे - अहह इतनी जल्द मे अपने पति देवर जी केँ संग भि नहींझरी दामाद जी केँ संग मुझेअलग हि मज़ाआता हैं सायदयह रिस्तो कि वजह सें हैं
मालती चूत साफ करते हुवे नाइटी पहन पलंग पे लेत - उफ आनंद हि आँ गय़ा मेरी तरप्अब जाकेसंत हुईँ हैं
तभी रामपाल आँ जाता हैं जिसेदेख मालती मन मे -लन्ड मिल नहींरहा थां अब मिला तोँ दोदो
मालती नाइटी उपर करके तांगे फैला देती हैं औऱ रामपाल कों देख मुस्कुराते हुवे आइये खुला हैं मार्ग साफ हैं घुसा दीजिये
रामपाल भि बिना देरी किये लन्ड बाहर् निकाल टाँगों केँ पासबैठ चूत मे लन्ड घुसा देता हैं
रामपाल चुदाई करते हुवे मालती कों देख - उफ भाभी पहलीबार ऐसे हि रात कों चोदा थां याद हैं अहहवही आनंदफिन मिलरहा हैं मुझे
मालती चुदाई कां आनंद लेते हुवे - उफ देवर जीजीसही कहाफिन मोक्का मिला हैं तोँ मेरी चूत मरने आँ गयेअहह देवरु जी औऱ तेज
रामपाल तेज धक्के मारते हुवे - भाभीआज तौ आप् पुरेजोस मे हैं
मालती - उफ देवर जीजीहा आज बहुतजोस मे हु
मालती मन मे - जोस औऱ बहुतखुश भि हु दामाद नें जोँ चोदा हैं अहह
रामपाल भि मालती कि चुदाई करकेचला जाता हैं
मालती चूत साफ करते हुवे - उफआज तौ दामाद समधी अपने देवर जीदो कां लन्ड लेनापरा दोनों बाप बेटे मेरी लेकेचले गयेमगर आज मज़ा बहुत मज़ाउफ ऐसे हि रोज चुदाई मिलती मज़ा हि आँ जाए
मनोज धीरे-धीरे पलंग पे आकेलेत गय़ा थां
मनोजमन मे खुश होके - क्याँ भाग्य पाई हैं मा बेटी दोनों उफमिल गये
रामपाल भि खटिये पे आकेलेत हरिपाल कों देखमन मे - तेरी पत्नि मस्तमाल हैं याद आनंद आँ गय़ा चोद केँ तेरी बेटी भि मस्त हैं मेरे बच्चे कि मा बनने वाली हैं साले तुम्हे मेने नानाजी बना दिया
रामपाल कों कोन बताये हरिपाल नें उसे पहले हि नानाजी बना दिया हैं
सुभह 10 बजे
हरिपाल रामपाल कों लेकेखेत मे आँ जाता हैं दोनों मचान पे बैठे पुराने यादों कों ताजा करने लगते हैं
वहीघऱ पे संगीता माधुरी बातें करने मे लगे थें औऱ अशोक मनोज दोनों मोक्का ढूढ़रहे थें
थोरे इंतजार केँ बाद संगीता माधुरी अपने कमरे मे आती हैं तोँ अशोक भि आँ जाता हैं मालती कों अकेला देख मनोज मालती कों कमरे मे लें जाता हैं
अशोक माधुरी कों खाट पे लेता केँ - गुरिया
माधुरी - भइया रिस्क हैं
अशोक - जनताहु चुदाई नहीं करतेमगर औऱ बहुतकुछ कर सकते हैं जल्द चुचे निकाल देख्ना दबाना चूसना हैं
माधुरी भि ब्लाउस खोल दोनों चुचे निकाल सर्म सें - कैसा हैं भइया
अशोक पागल होके चुचे कों देख - गुरिया फोटो वीडियो फोन पे देखा हैं मगरपास सें देखरहा हु तोँ उफसच मे बहुतबरे टाइट चुचे हैं तेरे
माधुरी सर्म सें - भइया दबाओ नां अपनी बेहन केँ चुचे
अशोक भि अपनी बेहन कों जोस मे देख पागल होके दोनों चुचे पकर् दबाते हुवे - उफ गुरिया बहुत नर्म रसीले हैं दबाने मे आनंद आँ रहा हैं
माधुरी सिसकीया लेते हुवे - अहह भइया दबाते रहो मुझे भि आनंद आँ रहा हैं उफ भइया अपनी बेहन केँ चुचे दबाके अहहलाल करदो
ashok दोनों चुचे दबाते हुवे - गुरिया मनोज तोँ खूब चूत लेता होगा
माधुरी सर्म सें मजे मे - अहह भइयाआते हैं तौ आपकी बेहन कों खूब चुदाई करते हैं उफ भइयामगर अब आप् मेरी चूत मारना अहह
अशोकगरम जोस मे - हा मेरी बेहन मे मारुंगा तेरी टाइट चूत
अशोक दबाते हुवे एक् चुचेमुह मे लेके चूसने लगता हैं माधुरी बैठी अपने भइया कों चुचे चुस्टे दबाते देख औऱ जोसगरम होके - अहह भइया चुसो अपनी छोटी बेहन केँ चुचे कों दबाते हुवेयह आनंद मेरे भइयाउफ मा
अशोक भि अपनी बेहन कि बातसुन पागल होके चुचे दबाते चूसने लगता हैं अशोकमन मे - उफ मेरी भाग्य भि कितनी अच्छी हैं मेरी छोटी बेहन केँ चुचेचूस रहाहु मोक्का मिलते हि चूत मारुंगा
अशोकअब जल्द सें लन्ड निकाल - गुरिया जल्द सें अपने भइया लन्ड चूस केँ माल निकाल दे नहीं तौ बहुत परेसान करेगा
माधुरी लन्ड कों पकर् सर्म सें - जी भइया
माधुरी लन्ड पकर्मुह मे लेकेमजे सें चूसने लगती हैं अशोक माधुरी केँ कों देख - अहह गुरिया तु तोँ मस्त लन्ड चुस्ती हैं मज़ा आँ रहा हैं
माधुरी मजे सें अपने भइया कां लन्ड चुस्टे हुवेमन मे - अहहउफ मेरे भइया कां लन्ड चुस्के मुझेअलग हि नसा चढ़ने लगता हैं मेरी चूत गीली हौ जाती हैं मे टरप्रही हु भइया सें चुदवाने केँ लिएमगर मोक्का मिलेतब नाँ उफ भइया
दूसरे कमरे मे मालती घोरीबनी थि पीछे मनोज मालती केँ गांड पकरें धक्के माररहा थां मालती मजे मे - अहह दामाद जीअबडर नहीं लगताबस मोक्का मिलते हि मेरी चूत ऐसे हि मारना अहह आपकी सासू माँ कि चूत कि सारी गर्मी अब आपको निकालनी हैं
मनोज पुरेजोस मे धक्के मारते हुवे - आप् चिंता मत करिये अहह सासुजी उफ आपकी चूत कि गर्मी मे निकलते रहुंगा
उससभी सें अंजान संगीता जूही कों कमरे मे दूध पिलाने मे लगी थि
20 मिनटबाद
घऱ केँ पीछे मनोज अशोकपैर केँ नीचे बैठे बातें करने मे लगे थें
अशोक - बहुतखुश लगरहा हैं कियाबात हैं बता
मनोजमन मे - कियुंकी तेरीमा कों चोद केँ आयाहु इस लिये
मनोज मुस्कुराते हुवे - बसऐसे हि खुश तौ तु भि लगरहा हैं
अशोकमन मे - कियुंकी मे तेरी पत्नि अपनी बेहन केँ चुचे दबाके चूस केँ अपना लन्ड चुस्वा केँ गरममाल पिला केँ आयाहु तोँ खुश रहुंगा हि नां
अशोक - बसऐसे हि खुशहु हम् सभीसंग हैं नां इसलिए
मनोज - हायह तोँ हैं
रात 8 बजे आगन् मे बैठेसभी खानां खारहे होते हैं
मालती - मे यहकेह रहीहु माधुरी बेटी हमारे संग जायेगी कल औऱ बहुयही रुकेगी
रामपाल - यह तौ अच्छी बात हैं मुझे भि अपनी प्यारी बेटी नातिन केँ संग वक़्त बिताना हैं
अशोकयह सुनखुश होकेमन मे - गुरिया मे उफ मोक्का मिलेगा घऱ पे
हरिपाल - हायहसही रहेगा
मनोज थोरा दुःखी थां मालती केँ जाने सें मालती भि दोनों एक् दूसरे कों देखते हैं
11 बजेरात कों मनोज मालती कि चुदाई करने मे लगा थां मनोज मालती केँ कमर कपरेतेज धक्के लगारहा थां औऱ मालती कि बॉडी चुचे मस्त धक्के केँ संगहिल रहे थें मालती अहहउफ करते हुवे पुरे चुदाई कां मज़ा लेँ रही थि मालती - अहह दामाद जी दुःखी मत होनाजा तौ रहीहु मगरजब भि आप् आयेगे याँ मे आउंगी आप् जी मेरी चूत चोद लेना
मनोजतेज धक्के मारते हुवे - ठीक हैं माँ जीजब भि आऊगा तांगे फैला देनासमझ गई आप्
मालती मजे मे लन्ड लेते हुवे - वैसा आप् कहे दामाद जी
मनोज चुदाई करके माधुरी केँ पासआके लेत जाता हैं
मनोजमन मे - दोस्त कुछदिन औऱ रहते तौ मज़ा आँ जाता lek मे समझरहा हुघऱ खाली हैं जानां परेगा हि मगरजब तक हु केसे नां केसे आनंद तोँ लूंगा हि सोचना परेगा आगे केँ लिये
वही मालती मस्त अपनी चूत मे दामाद कां पानी लेके लेती हुइ मन मे - अहह दामाद जी केँ संग चुदाई मे आनंद हि आँ जाता हैं सचकहु तोँ जानां मुझे भि अच्छा नहींलग रहामगर जानां तोँ परेगा हि
मालती चूत साफ करके नंगी सोने लगती hain तोँ रामपाल आँ जाता हैं मालती रामपाल कों देख तांगे फैला केँ मन मे - दो लन्ड एक् महिला कों जितनी चुदाई मिले आनंद हि मज़ा हैं
रामपाल मालती केँ एक् तांगे उठा केँ लन्ड बाहर् निकाल चूत पे सेट करके पुरा घुसा देता हैं मालती अहह मेरे प्यारे देवर जीजी घुसा दिया
रामपाल तेज चुदाई करते हुवे - आप् नंगी लेती थि दरवाजा भि खुला थां कियुअहह भाभी बताओ नाँ
मालती चुदाई कां आनंद लेते हुवे - आपकेलिए देवरु जी मुझेपता थां आप् आयेगे अहह चोदीये मुझे औऱ जोर सें
रामपाल चुदाई करते हुवे - भाभी आप् बदल गई हैं अब आप् मजे सें चुदवा रही हैं बिनाडरे
मालती बात समलते हुवे - उफ क्याँ करू देवरु जी चूत कि आगडरखतम हौ जाता हैं
रामपाल चुदाई केँ बाद मालती कों देख - तोँ समझू मे जबकहु आप् चूत चोदने देगी
मालती मुस्कुराते हुवे - हाजबमन करे मोक्का मिलेचोद देना मुझे
रामपाल मुस्कुराते हुवे - जान केँ खुशी हुईँ भाभी
रामपाल चला जाता हैं मालती मन मे - हाअब तौ दामाद हि आपकेसंग आनंदआता हैं चुदवा केँ
अगलेदिन सुभह 10 बजे
हरिपाल माधुरी अशोक जाने केँ लिये तैयार थें सब मोक्का देख एक् दूसरे सें बातें कर लेते हैं फिन हरिपाल मालती माधुरी अशोकचले जाते हैं रेह जाते हैं संगीता रामपाल मनोज
अशोकमन मे - दोदिन बाद मुझे जानां हैं ससुराल माधुरी अपना चेकप् करवाने केँ लिएतब तब मुझे चूत नहीं मिलेगी
रामपाल संगीता मनोज कों देख - चलोसभी चलेगये
संगीता - हु बापू अपनी नातिन कों नहीं लेगे
रामपाल जूही कों गोद मे लेते हुवे - यह भि पूछने कि बात हैं मेरी प्यारी बच्ची कितनी सुंदर हैं तेरे पे गई hain
मनोज - हामा तोँ भूत दिखती हैं मगर मेरी प्यारी भांजी बहुत सुंदर हैं
संगीता मनोज कों देख - क्याँ कहा आपने
रामपाल हसने लगता तोँ संगीता मुह फुला देती हैं औऱ मनोज भि हसने लगता हैं
दोपहर 1 बजे
हरिपाल घऱआके मस्तफिन घऱ केँ पीछे खटिये पे लेता संगीता सें बातें करने लगता हैं औऱ मालती कमरे मे लेती मनोज सें अशोक जोँ तरप्रहा थां मोक्का देख माधुरी केँ कमरे मे जाता हैं
माधुरी अशोक कों देख - भइया
अशोक माधुरी केँ पासबैठ - बेहन मोक्का हैं दरवाजा बंद हैं मे तरप्रहा हु औऱ रुक नहीं पऊगा
माधुरी अपने भइया कि तरप्देख सारीउपर करके लगती हैं औऱ सर्म सें अशोक कों देख - ठीक हैं भइया आपकी गुरिया भि बेचैन हैं
अशोक भि खुश होके - मेरी गुरिया उफ तेरी चूत अच्छे सें मारुंगा
आज केँ लिए इतना हि
majaa aa gyaa bhay hope kee aj phir ek update mile or update post karte rehna kabhi kabhi chize monotonous hu jaati h iss liye loug comment ya like nahee karte haen jaesa koy twist aayega phir loug comment or like karne lagenge
bohot behtareen shaandar update Sabka past khul raha hain bohot maze kiye sabne Ab dekhte kiya manoj apni saas kee le payega Itna khul gaye hain dono tow hu hi jayega
मक्के केँ खेत मे – New Episode
chapter 20
अशोक माधुरी कों नँगा करने लगता हैं तोँ माधुरी - भइया अभि रिस्क हैं
अशोक - गुरिया कोई नहीं आयेगा डरमत
माधुरी भि बात मानते हुवे कपड़े निकाल पूरी नंगी होँ जाती हैं
अशोक माधुरी अपनी छोटी बेहन कों नँगादेख पागल होते हुवे - मेरी गुरिया तेरी बॉडी तोँ बहुत सुंदर हैं चुचे तेरी छोटे बालों वाली चूत सच मे यह नजारा देखने केँ लिये तरप् गय़ा थां अब जाकेदेख रहाहु
माधुरी सर्माते हुवे - उफ भइया आप् भि नाँ जल्द करिये
अशोक - हा करते हैं
अशोक माधुरी केँ टाँगों केँ पास झुकते हुवे चूत कों मुह मे लेके चूसने लगता हैं चाटने लगता हैं माधुरी पूरीगरम होके अशोक केँ सर पे हाथ रखते हुवे - अहह भइया चुसो अपनी बेहन कि चूत अहह बहुत मज़ा आँ रहा हैं उफमा मेरी चूत कों खाजाओ
अशोकमजे सें चूत कों चूसरहा थां कभीजीब सें चाटने लगता हैं तौ कभी चूत केँ अंदरजीब डालने लगता हैं माधुरी पूरी मस्त हौ गई थि
इतना आनंदआने लगता हैं कि माधुरी 4 मिनट मे झर जाती हैं
अशोक माधुरी केँ ऊपरआके चूत केँ छेद पे लन्ड रखते हुवे धक्के सें घुसा देता हैं पूरा अंदर लन्ड जाते हि माधुरी - अहह भइयायह चैन
अशोक माधुरी कों बाहों मे लिये चुदाई करते हुवे - उफ गुरिया बता नहीं सकता तेरीगरम चूत कि चुदाई करने मे कितना मज़ा आँ रहा हैं
माधुरी भि पुरेजोस मे अशोक कों बाहों मे पकरें - भइया मुझे भि अलग हि आनंद आँ रहा हैं चोदते रहिये अपनी गुरिया कों
अशोकफिन माधुरी केँ दोनों तांगे उपर करके चुदाई करते हुवे माधुरी कों देख - गुरिया अपनी चूत देके तूने मुझेखुश कर दिया हैं
माधुरी अशोक कों देख - अहह भइया आप् खुश हैं मे भि खुशहु अपनी बेहन कि चूत अच्छे सें मारोअहह आपका लन्ड मेरी चूत मे लिया हैं तोँ मुझे भि अपने भइया सें चुदवा केँ मज़ा आँ रहा हैं
अशोक चुदाई करते हुवे - तुम्हे विवाह केँ बाद किसी औऱ नें चोदाँ हैं
माधुरी हैरान होके अशोक कों देखती हैं अशोक - बोल नां
माधुरी - हा मुझे एक् चोदाँ हैं
अशोक हैरान होके - कोन हैं वोँ
माधुरी मुस्कुराते हुवे - उफमाराज हैं समझ लीजिये उसकेबाद हि मेने सोचाउसे दिया हैं तोँ भइया कों भि दे देतीहु
अशोक माधुरी कों घोरी बनाके चुदाई करते हुवे - यानीउस इंसान कि वजह सें मुझे तेरी चूत मिली हैं सचकेह रहाहु
माधुरी चुदाई कां आनंद लेते हुवे - हामगर पुरासच नहीं हैं आप् कों देर स्वेर् मे अपनी चूत दे हि देती कियुंकी आप् कों मे नाराज दुखी नहींदेख सकती थि
अशोकतेज धक्के मरते हुवे - इतना प्रेम करती हौ
माधुरी - उफ भइया बहुत प्रेम करतीहु आपसेअब मेरी चूत कों करो
25 मिनटबाद
माधुरी अशोक कपड़े पहन लेते हैं दरवाजा खोल देते हैं फिन धीरे-धीरे बैठ बातें करने लगते हैं
अशोक - गुरिया मज़ाआया कि नहीं
माधुरी सर्म सें - बहुत आनंदआया भइया
अशोक - मुझे तौ इतना आनंदआया बता नहीं सकता तेरीगरम चूत मे लन्ड जाते हि अलग आनंदचैन मिला
माधुरी मुस्कुराते हुवे - मुझे भि भइया
रामपाल केँ घऱरात 10 बजे
मनोज मालती सें चैट पे बातें कररहा थां रामपाल संगीता केँ कमरे मे आता हैं संगीता नाइटी मे एक् चुचे निकाल बैठी जूही कों दूध पिलारही होती हैं रामपाल संगीता केँ बरे चुचेदेख लेता हैं यह पहलीबार नहीं थां
संगीता जैसे हि अपने पिताजी कों देखती हैं जल्द सें अपने चुचेधक लेती हैं रामपाल संगीता केँ पासआके बैठ जाता
संगीता - बापू नींद नहीं आँ रही आपको
रामपाल दूसरी तरफ चेहरा करके - बेटी जूही कों दूध पिलाती रहोअगर चाहती होँ तौ मे चला भि जाउंगा
संगीता - कैसी बातें कररहे हैं
संगीता चुचे निकाल जूही कों दूध पिलाने लगती हैं
रामपाल दूसरी तरफ चेहरा किये - बेटी तेरीमा केँ जाने केँ बाद सुकून सें सो नहीं पाता
संगीता भि अपनीमा कों याद करके इमोसनल होके अपने पिताजी कां दर्द समझते हुवे - पिताजी मुझे भि मा कि बहुतयाद आती हैं
रामपाल - हु तुम् बताओ मेरी नंही नातिन हमेसा दूध पीती रहती हैं क्याँ
संगीता हस्ते हुवे - आपनेसही कहा बापू
रामपाल हस्ते हुवे - तुम् जब छोटी थि तोँ तुम् भि अपनीमा केँ चुचेमुह मे लियेदूध पीती रहती थि
तभी रामपाल कों एहसास होता हैं क्याँ बोल दियामगर रामपाल मुस्कुरा रहा थां असल मे रामपाल नें यह जानबूझ कर चुचे बोला थां कियुंकी रामपाल अपनी बेटी कों चुदना चाहता थां
रामपाल केँ मन मे संगीता केँ लियेयह चुदाई वाला गंदीसोच जब संगीता पहलेआई थि तबकईबार रामपाल संगीता केँ चुचेदेख चुका थां उसकेबाद हि रामपाल नें सोच लियाबहु केँ बाद उसकी बेटी कि चूत मारेगा
वही संगीता खुले चुचे बापू केँ मुह सें सुन हैरान होँ जाती हैं तभी रामपाल - बेटी माफकर देनामुह सें निकल गय़ा
संगीता सर्म सें - कोईबात नहीं बापू
रामपाल नाटक करते हुवे - जान केँ अच्छा लगा तुँ बहुतदूध कि भूखी थि जबतबमा दूध पीने केँ लिये रोटी रहती थि
संगीता - अच्छा इतना परेसान मा कों करती थि
रामपाल - बहुतकई बार तोँ तुम् अपनीमा केँ चुचे पे कट देती थि
संगीता फिन हैरान होती हैं रामपाल - सोर्री बेटा मुझेचले जानां चाहिये पता नहींमुह सें क्याँ निकलजा रहा हैं
रामपाल जाने लगता हैं तोँ संगीता - नहीं बापूमत जाइये कोईबात नहीं आप् तौ वहीबता रहे थें जोँ सच हैं
तभी रामपाल संगीता कों देखता हैं औऱ संगीता केँ नंगे चुचे कों संगीता हैरान शर्मा जाती हैं कियाकरे समझ नहीं आँ रहा थां
रामपाल संगीता केँ पास बैठते हुवे - बेटी तेरे चुचे बिल्कुल तेरीमा कि तरह हसीनबरे बरे हैं यह काले निपल बहुत अच्छे लगरहे हैं माफ करना बेटी बापूहु अपनी बेटी कों इसतरह
रामपाल फिन रोने कां नाटक करते हुवे - बहुतयाद आती हैं तेरीमा कि मे अकेला होँ गय़ा हु मेरी बच्ची
जूहीसो गई थि तोँ संगीता जूही कों एक् स्थान सुला केँ रामपाल कों गले लगाते हुवे - बापूमत रो मुझे अच्छा नहींलग रहा
रामपाल पागल हौ जाता hain संगीता केँ नंगे चुचे अपने सीने पे फिल करके
रामपाल संगीता कों देख - माफ करना बेटी तुझेही भि दुखीकर दिया
संगीता - नहीं बापू आप् कों दुखीदेख मुझेदुख होगा हि
रामपाल संगीता केँ चुचेदेख - बेटी तुम्हारी तरफ अजीबलग रहा होगा नाँ अपने चुचे अंदर करलो मेरे भाग्य मे अबयहसभी देख्ना नहीं लिखा
संगीता इमोसनल होके - पिताजी देख सकते हैं मेरे चुचे दुःखी मत कों
रामपाल - थैंक्स बेटा पता हैं तुँ अपनीमा केँ चुचे केँ संग बहुत खेलती थि
संगीता हस्ते हुवे - सच मे मुझे तौ याद हि नहीं
रामपाल - बेटी बुरा नां मानो तौ तेरे चुचेदबा सकताहु छु सकताहु बेटी तुझेही गलतलगे तोँ मनाकर सकती हैं
संगीता - बापू आप् मेरे लियेसभी कुछ हैं ठीक हैं छु सकते हैं दबा सकते हैं
रामपाल खुश होके संगीता केँ माथे पे किस करते हुवे - मेरी प्यारी बेटी
रामपाल कां इमोसनल प्लान कामकर गय़ा थां नहीं करता तौ भि रामपाल केँ पास एक् औऱ प्लान थां जोँ काम करता हि
संगीता मन मे - एक् बाप बेटी मे ऐसा करनागलत हैं मगर मेरे लियेअब पिताजी हि सभीकुछ हैं मा केँ बाद बापू नें बहुत दर्द सेहके हमे पाला हैं इतना नहींकर सकती तौ मे बेटी केहलाने केँ लायक नहीं
रामपाल जल्दी संगीता केँ दोनों चुचे पकर् दबाने निपल मसलने लगता हैं अपने बापू केँ चुचे दबाने सें संगीता सिसक् परती हैं एक् नया एहसास जोस संगीता केँ अंदर तूफान कि तरह बाहर् आने लगता हैं
संगीता सिसकिया लेते हुवे रामपाल कों देख - अहह बापू इतनाजोर सें मत दबाओदूध निकल नीचेगिर रहा हैं
रामपाल संगीता कों देख - बेटी महोत नर्म चुचे हैं तेरे दबाने मे आनंद आँ रहा हैं बेटी दूध नीचेगिर रहा हैं मे पीलू तुम् बोलो तौ
संगीता मद्होस होते हुवे - पीलो बापू जितना पीना हैं
इतना सुनते हि रामपाल एक् चुचे कों मुह मे लेके चूसने लगता हैं फिन रामपाल दोनों चुचेपकर दबाते हुवे दूसरे चुचे कों पागल होके चूसने लगता हैं रामपाल मन मे - अहह क्याँ भाग्य हैं मेरी सोचा औऱ मेरी बेटी केँ चुचे कां दूध भि पीरहा हुउफ कितना मीठा हैं मेरा लन्ड अब फटने जैसा हौ गय़ा हैं उफ मेरी बेटी केँ दूध वाले चुचेअहह
संगीता भि पूरीगरम होँ गई थि चूत सें पानी निकलरहा थां संगीता मन मे - अहह इतनी जल्द मेरी चूत कभी गीली नहीं हुईँ यह एहसास सभी सें अलग हैं मुझे बहुत आनंद आँ रहा हैं मे पूरीगरम हौ चुकीहु
तभी रामपाल मजे सें दूध पीके संगीता कों पकरकिस करने लगता हैं संगीता पर्र इसबार संगीता हैरान नहीं थि बल्कि पुरासंग देते हुवे अपने बापू कों किस मे संग देती हैं दोनों बाप बेटी मजे सें सभी भुलके एक दूसरे केँ होठो कों जीब कों चूसने लगते हैं
संगीता मन मे - उफ मे जलरही हु इतनाजोस गरमकभी नहींहु यह आनंद एहसास ससुरजी जी केँ संग करने सें अलग हैं
रामपाल मन मे - बेटी पूरीगरम हौ गई हैं यही मोक्का हैं
रामपाल किस तोरके जल्द सें लन्ड निकाल खाट पे लेत जाता हैं संगीता अपने बाप कां लन्ड देख औऱ गरम होँ जाती हैं
संगीता बिना देरी किये रामपाल कां लन्ड बहुतमजे सें चूसने लगती हैं तोपे कों मजे सें चूसते हुवे पुरामुह मे लेके चूसने लगती हैं अपनी बेटी कों लन्ड इतनेमजे सें चुस्टे देख रामपाल कों अलग हि आनंदजोस चढ़ने लगता हैं रामपाल - अहह मेरी प्यारी बेटी गजबउफ बहुत अच्छे सें चूसरही हौ अपने पिताजी कां लन्ड चुसो बेटी औऱ चुसो
संगीता मजे सें लन्ड चूसते हुवेमन मे - पिताजी कां लन्ड चुस्के मुझेअलग हि आनंद स्वाद आँ रहा हैं उफ बापू कां लन्ड कितना गरम होता हैं
6 मिनटबाद
रामपाल संगीता कि आखो मे देख - बेटी मुझे बहुत सेक्स करने कां मन हैं मे जनताहु गलत हैं तेरीमा केँ जाने केँ बाद सेक्स नहीं क्याँ मे टरप्रहा हु प्लेस अपने बापू कों एक् बार अपनी चूत चुदने दे
संगीता रामपाल कों देख - बापू इतना दुखी प्लेस कहने कि जरूरत नहीं हैं आप् मेरीजान हैं मे आपकी
संगीता नाइटी निकाल खाट पे पूरी नंगी होके थोरा सर्म सें रामपाल कों देख - जूहीसो रही हैं तोँ धीरे-धीरे सें करना
रामपाल पुरा पागल होके अपनी बेटी कि नंगी बॉडी कों देखते हुवे - बेटी बिल्कुल मा जैसी सुंदर बॉडी हैं तेरी चुचे तेरी चूत सभीकुछ
संगीता सर्म सें लाल हौ जाती हैं औऱ खुश भि
रामपाल पुरा नँगा होँ जाता हैं संगीता अपनी तांगे फैला केँ - बापू आपकी बेटी कि चूत आपके समाने हैं जौ करना हैं कर लीजिये
रामपाल पुरेजोस गरम होके - हा बेटी करुगा सभीकुछ
रामपाल पुरा पलंग पे लेत जाता हैं औऱ अपनी बेटी कि चूत कों मजे सें चाटने चूसने लगता हैं संगीता कों इतना आनंदआता हैं कि संगीता मस्तखाट पे लेती अपने पिताजी सें चूत चुस्वाने कां मज़ा लेने मे खो जाती हैं रामपाल मन मे - भाग्य वाले कों अपनी बेटी कि चूत मिलती हैं मेरी बेटी कि चूत बहुतगरम हैं औऱ चूत केँ रस कां स्वाद तोँ उफ इतना आनंद आँ रहा हैं मुझे कि अहह चुस्टे रहने कां दिलकर रहा हैं
2 मिनट होते हि हैं कि संगीता गांड उठाने होते - अहहमा पिताजी मे झरने वालीहु औऱ चुसोअहह अपनी बेटी कि मर गई बापू
संगीता पहलीबार बहुत जल्द बुरीतरह सें झर जाती हैं
रामपाल बैठते हुवे संगीता कों देख हफ्ते हुवे - बेटी तेरी चूत कां स्वाद अहह बहुत मस्त हैं मज़ा आँ गय़ा
संगीता हफ्ते हुवे - पिताजी मुझे भि आनंद आँ गय़ा इतना आनंदबता नहीं सकती
रामपाल टाँगों केँ बीचआके लन्ड पकर चूत पे घिसते हुवे संगीता कों देख - बेटी कों चोदने कां मोक्का क़िस्मत वाले कों मिलता हैं
रामपाल फिन धीरे-धीरे धीरे-धीरे अपना लन्ड अपनी बेटी कि चूत मे घुसाने लगता हैं मोटा लम्बा लन्ड अपने बापू केँ अपनी चूत केँ अंदर जातेफिल करके संगीता दर्दमजे मे पलंग पकरते हुवे - अहहडाल दो पुरा बापू अपनी बेटी कि चूत मे अपना लन्ड अहहयह दर्द आनंदचैन
रामपाल पुरा लन्ड अंदर घुसा देता हैं वैसे हि गरमगरम गिलाकसी हुई लन्ड पे फिल करके रामपाल भि अलगजोस मे आँ जाता हैं
रामपाल संगीता केँ दोनों तांगे उपर किये संगीता केँ ऊपर लेटके धीरे-धीरे धीरे-धीरे चुदाई करते हुवे संगीता कों किस करने लगता हैं संगीता तोँ आजअलग हि मजे मे थि औऱ रामपाल भि संगीता - अहह पिताजी
रामपाल चुदाई करते हुवे - मेरी प्यारी बेटी अहह अपने पिताजी कों अपनी चूत देने केँ लिये सुक्रिया अहहयह मज़ा तौ बेटी कि चुदाई करने मे हि आता हैं अहह मेरी बेटी मेरीजान कितनी गरम चूत हैं तेरी
रामपाल फिन एक् तांगे संगीता केँ उठा केँ अपने कंघे पे रखते हुवे एक् हाथ सें संगीता केँ एक् चुचे दबाते हुवे रामपाल - अहह बेटी मज़ा आँ रहा हैं अपने बापू कां लन्ड लेके अपनी चूत मे बोल नां बेटी
संगीता रामपाल कों देख - उफ पिताजी अहह जोँ आनंद मुझे आँ रहा हैं आपका लन्ड लेके अपनी चूत मे बता नहीं सकती पिताजी चोदो अपनी बेटी कों औऱ तेजजोर सें चोदो मज़ा आँ रहा हैं
रामपाल पलंग पे लेत जाता हैं संगीता जल्द सें रामपाल केँ ऊपरआके चूत मे लन्ड लेके रामपाल केँ ऊपरलेत जाती हैं
रामपाल अपनी बेटी कों बाहों मे भर लेता हैं औऱ नीचे सें धक्के मरने लगता हैं सत्सत् फच्फच् केँ संग तेजी सें लन्ड संगीता केँ चूत केँ अंदर बाहर् होने लगता हैं संगीता अपने पिताजी केँ ऊपर लेती चुदाई कां पुरा आनंद लें रही थि संगीता - बापू मेरे बापू इतना मज़ा औऱ चोदो अपनी बेटी कों अहह बापू इतना मज़ा मुझेकभी नहीं मिला
रामपाल धक्के मरते हुवे - मेरी प्यारी बेटी तेरे बापू हैं नाँ तेरी चूत अच्छे सें मारेगे तूँ बस चूत देती रहना मे पेलता रहुंगा
रामपाल संगीता कों घोरी बनके चुदाई करने लगता हैं संगीता घोरीबनी मजे सें अहहउफ सिसकिया लेते हुवे मस्त चुदवा रही होती हैं
रामपाल बहुतजोस मे चुदाई करनेजा रहा होगा हैं बाप बेटी अलग हि जोस मे थें पहलीबार चुदाई मे मजे मे दोनों खोगये थें फच्फच् फटफट पायल कि आवाज़ सिसकिया कि आवाज़ कमरे मे गुजरही थि
रामपाल संगीता कों खाट पे लेता केँ तेज धक्के मरने लगता हैं रामपाल संगीता दोनों झरने वाले थें संगीता - अहह बापू औऱ जोर सें मे झरने वालीहु अहह बापूआने वाला हैं जोर सें करो नाँ
रामपाल संगीता केँ कमर कों पकरें तेज धक्के मारते हुवे - मेरी बेटी मे भि झरने वालाहु अहह मेरी बेटी अहह बेटी उफ बेटी आने वाला
संगीता - पिताजी मे भि अहहमा बापू मेरे बापू मे गई
रामपाल संगीता संग मे झर जाते हैं
रामपाल बगल मे लेत हफने लगता हैं औऱ संगीता भि मगर दरवाजे पे कोई थां जौ सभीदेख लन्ड हिला केँ पानी निकाल चुका थां औऱ वोँ मनोज थां शुरुआत मे सभीदेख बेचारा पुराहिल चुका थां मगर एक् चुदाई देख पुरागरम होके लन्ड हिलाने केँ बादमाल गिरा चुका थां
मनोज कमरे मे आकेबैड पे लेतमन मे - साला मे यह क्याँ देख लिया अच्छा हुआ मे पिसाब करने निकला मेरे पिताजी गुरिया अपनी बेटी कों चोदरहे हैं मगरकब सें मुझे क्याँ अब मे भि अपनी बेहन कों चोद सकताहु अहह मेरी बेहन कि चूत कितनी मस्त हैं केसे पिताजी सें चुदवा रही थि चलो एक् चूत औऱ मिल गई उफ मेरी गुरिया कल तेरी चूत मारुंगा
वहीइस सभी सें अंजान रामपाल संगीता एक् दूसरे कों देखते हैं संगीता अब सर्म सें लाल होँ जाती हैं
रामपाल संगीता कों बाहों मे लेके - बेटी जितना थैंक्स बोलूकब हैं जौ तूने दिया हैं नां सायदकोई बेटी अपने पिताजी कों नहीं देगी
संगीता रामपाल कों देख - बापूसभी कां पता नहींमगर मे आपकोसभी दे सकतीहु जोँ मेरेपास हैं
रामपाल हैरान होके - बेटी अगर मे पहलेजब तूँ कुवारी थि तब केहता तौ भि तुम् अपनी चूत देती मुझे
संगीता रामपाल कों देख - हा कियुंकी आप् सें बहुत प्रेम करतीहु बापू हमारे बीच जोँ हुआसभी गलत हैं जानती हुमगर मेरी खुशी आप् सें हैं
रामपाल इमोसनल होके संगीता कों गलेलगा केँ - मेरी प्यारी बेटी
संगीता भि रामपाल केँ सीने सें चिपक जाती हैं
रामपाल - बेटी आनंदआया नां
संगीता सर्म सें - बहुत बहुत जयदा आनंदआया बापू
तभी रामपाल संगीता एक् दूसरे कों देखते हुवे एक् संग - मुझे आपसे तुमसे कुछ कहना हैं
रामपाल संगीता हैरान फिनहस देते हैं
रामपाल - तुम् कहो
संगीता - नहीं आप्
रामपाल - नहीं तुम्
संगीता हिम्मत करके रामपाल कों देख - पिताजी माफ करना मुझेयह सच जानके
रामपाल बीच मे - यही कि मेरायार तेरा ससुरजी तेरेबीच एक् चुदाई वाला रिस्ता हैं औऱ जूही कां बाप मेरायार तेरा ससुरजी हैं
संगीता पूरीहिल जाती हैं काप् जाती हैं
संगीता कपते हुवे - पिताजी आपको केसेपता चला
रामपाल गहरी सासू माँ लेते हुवे - सुभहजब सभी जाने वाले थें तौ तुम् हरिपाल घऱ पीछे बातें कररहे थें जब मे पीछेआया तौ हरिपाल नें तुम को बाहों मे लिये थां मे शोक मे चला गय़ा तुम् दोनों पैर केँ पीछे थें तौ मे धीरे-धीरे सें पास गय़ा तुम् दोनों कि पूरीबात सुनी
हरिपाल - बहु मेरी पत्नि मे जारहा हु तेरेबिन रात नींद नहीं आयेगी पऱ तुम्हारा रुकना भि जरूरी हैं मेरायार रामपाल अकेला हैं
संगीता - जी बापूजी
हरिपाल - हमारी बेटी कां ख्याल रखना मोबाइल पे बातें करते रहेगे
संगीता - जी
रामपाल संगीता कों देख - मे हिल गय़ा थां यकीन नहीं होँ रहा थां मेरायार तुम् एक् बच्चा भि हैं
संगीता रामपाल कों देख - आप् क्रोध हैं मुझपे अपनेयार पे
रामपाल - नहीं
संगीता हैरान होके - कियु.
रामपाल संगीता कों देख मुस्कुराते हुवे - देर हि सहीबहु हमारी भि वही स्टोरी हैं
संगीता पूरीशोक मे - क्याँ केसे
रामपाल सभीकुछ बता देता हैं
संगीता शोक मे - बापू देखा आपकेयार सें मे चुद गई मगरदेर स्वेर् माधुरी भि चुद गई क्याँ हि क़िस्मत कां खेल हैं माधुरी आपके बच्चे कि मा बनने वाली हैं उसने भि राज छुपा केँ रखा मेने भि एक् मिनट तौ इस लिये आपके अंदर हिम्मत आई औऱ आप् मेरेपास आये
रामपाल संगीता कों देख - यह भि सच हैं मगर मे तेरे अपनी बेटी केँ संग जबदस्ति नहीं करने वाला थां मुझे परोसा थां मेरी बेटी मेरा दर्द सम्झेगी औऱ ऐसाहुआ भि मुझेसभी सें जयदा खुशी हैं मेरे लिये तूने अपनासभी मुझे दिया बेटी लोवयू
संगीता रामपाल कों देख - लोवयू पिताजी
रामपाल संगीता कों देख - बेटी मुझे तेरे सें कुछ औऱ चाहिये
संगीता - बोलिये नाँ पिताजी
रामपाल - मे चाहता हुतुजब यहा सें जाए तौ अपनेपेट मे मेरा बच्चा लेकेजाए कहो करुगी
संगीता हैरान फिन खुशी सें - हा बापू आपके बच्चे कि माबन मुझे औऱ जयदा खुशी होगी
रामपाल खुश होके - थैंक्स बेटा उसके लियेजब तक होँ तेरी चुदाई अच्छे सें करनी होगी अपनामाल तेरी चूत मे अच्छे सें भरना होगा
संगीता जोसगरम होके रामपाल केँ ऊपरआके लन्ड चूत मे लेके रामपाल केँ उपरलेत मुस्कुराते हुवे - तोँ भर दीजिये अपनामाल मेरी चूत मे कर दीजिये अपनी बेटी कों पेट सें
भइया याहा तौ अलग हि खेलचल रहा थां वही हरिपाल केँ घऱ
अशोक माधुरी केँ कमरे मे अपनी बेहन कि चुदाई करने मे लगा थां
तोँ वही मालती मनोजचैट करने मे लगे थें
सुभह
सुभह होते हि मनोज संगीता कों अकेले मे बात करने लिये बेचैन बेकरार थां मगर रामपाल कि वजह सें रोका थां
संगीता खानां बनारही थि मनोज खटिये पे बैठा संगीता कि गांडदेख रहा थां औऱ रात जौ देखायाद कर केँ जोस मे पागल हौ रहा थां
मनोजमन मे - उफ कितनी मस्त गांड हैं मेरी भि बेहन कि रात पिताजी नें खूब चोदा मेरी छोटी बेहन नें खूबमजे सें लन्ड लिया हैं
10 बजते हि रामपाल संगीता केँ कमरे मे जाके संगीता कों किस करता हैं औऱ दोनों चुचे दबाते हुवे - बेटी खेतजा रहाहु आँ जानां खेत मे चुदाई करुगा तेरी
संगीता सिसकिया लेते हुवे रामपाल कों देख - उफ पिताजी ठीक हैं आँ जाउंगी खेत मे चोदना अपनी बेटी कों
रामपाल भि गरम होके मुस्कुराते हुवेचला जाता हैं
मनोजइस समय कां इंतजार कररहा थां रामपाल केँ जाते हि मनोज संगीता केँ पास जाता हैं
संगीता - भइया आईये बैठिये नां
मनोज संगीता केँ पासबैठ जाता हैं औऱ संगीता कों देखने लगता हैं
आज केँ लिये इतना हि
मक्के केँ खेत मे - Kahani ab aur interesting hogi
bohot behtareen shaandar update Manoj ne apni saas k maze le liye aur Rampal ko bi chance mil gyaa apni bhabi say majaa lene la sai Ab Ashok kaa nambar hain apni behna say majaa lene kaa sai mast ja rahi hain story
bohot sai Rampal ne bi apni beti kee sawari krr daali aur ab Manij bi chadhega Lagta aage jaake gurup sex hone wala hain sabka muze tow lagta aesa hone bi chahiye
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