मक्के केँ खेत मे – New Episode
chapter 12
रामपाल गम भुलाने चैनमन कों सांत करने केँ लिये जयादातर खेतो मे रहता थां, अब अपनीबहु कि पेलाई चुदाई करने केँ लियेदिन मे 2 याँ 3 बारआने लगा थां माधुरी कि चुदाई करकेचला जातामगर शाम होते हि जल्द वापस भि आँ जाता थां
बेचारा रामपाल कि कोई गलती नहीं हैं जबबहु हसीन मस्त कयामत माल हौ तौ चोदने कों मिले तौ कोन ससुरजी अपनीबहु सें दूर रहेगां माधुरी भि पुरे खुशी सें अपने ससुरजी कि सेवा मे कोईकसर नहीं छोरति थि
रात 8 बजे
रामपाल माधुरी केँ कमरे मे आता हैं तौ देखता हैं माधुरी पूरी नंगीखरी हैं माधुरी कों रामपाल केँ आने कां एहसास होता हैं औऱ पीछेमूर रामपाल कों देख मुस्कुराते हुवे - कियु इंतजार करना इतना मुश्किल हैं जौ आप् स्वयं चलेआये
असल मे माधुरी नाइटी पहनेआनी थि मगर रामपाल भइया साहब कों सबर हि नहींरहा औऱ चलेआये
रामपाल माधुरी कों उपर सें नीचे तक देखता हैं औऱ औऱ माधुरी कि मस्त गांड कों देखते हुवे - बहुजब इतनी सुंदर सेक्सी हौ तोँ ससुरजी केसे स्वयं कों रोक सकता हैं इस लियेचला आया
माधुरी रामपाल कि तरफ मुरके सीधेखरी हौ जाती हैं जिसकी वजह सें माधुरी केँ आगे कां सभीकुछ अच्छे सें रामपाल कों दिखने लगता हैं
रामपाल कुर्सी केँ आहिस्ता बैठते हुवे माधुरी कों देख - कोईसक नहींउपर वाले हैं तेरी बहुत फुर्सत सें बनाया हैं बहु
रामपाल जबबरे अच्छे सें गोर सें माधुरी कि नंगी बॉडीदेख रहा थां तब एकदम सें रामपाल कों माधुरी कि स्थान मालती दिखाई देती हैं
माधुरी रामपाल कों खोयादेख - कहाखो गये बापूजी
रामपाल होस मे आते हुवे माधुरी कों देख - कही नहीं बेटी
रामपाल मन मे - मालती तेरी बेटी सेम तेरी कॉपी हैं
माधुरी धीरे-धीरे बैड पे लेट जाती हैं औऱ रामपाल कों मुस्कुराते हुवेदेख - कियाबात हैं आये तौ बेताबी जोस मे थें अभि धीरे-धीरे बैठे हुवे हैं यकीन नहीं होता अभि तक तोँ मुझे नँगादेख पकर लेते
रामपाल माधुरी कों देखता हैं बैड पे लेती मुस्कुरा रही थि मस्त बॉडीबरे चुचे निपल काले चूत केँ कालेबाल उपर सें नीचे तक माधुरी लेती किया हि गजब कि लगरही थि किसी केँ भि होसउर जायेदेख केँ
रामपाल माधुरी कों देखते हुवे मुस्कुरा केँ - लन्ड तौ बहु तुझेही देखते हि खरा होँ जाता हैं रहीबात मे आज जल्द बाज़ी कियु नहींकर रहा तौ उसकीवजह यह हैं अब तुम् मेरी हौ जब चाहू तुम कोचोद सकताहु
माधुरी अपनी तांगे फैलाते हुवे अपनी टाँगो केँ बीच सें रामपाल कों देखते हुवेहस केँ - अच्छा जी मुझे अपनी पत्नि समझ किया हैं
रामपाल माधुरी कि गीली चूत कों देख मुस्कुराते हुवे - हा तूने औऱ यह तेरी गीली चूत नें भि मुझे अपना मालिक मान लिया हैं देखोइस लिये कितनी गीली हौ रही हैं मुझेदेख केँ
रामपाल कि बातें सुन माधुरी थोरि शर्मा जाती हैं
रामपाल खरा होके कपड़े निकाल नँगा होके माधुरी कों देखफिन खाट कों देखते हुवे - इस कमरेबेड पे मनोज तेरी चोदता हैं मगरआज मे इसीबेड पे तेरी चुदाई करुगा
माधुरी केँ अंदर रामपाल कि बातें सुनअलग जोस भरने लगता हैं
माधुरी मुस्कुराते हुवे रामपाल कों देख - हक बेटे कां मार हि लिया हैं अपनेबेड कमरे पे भि उफबरे चालक हैं आप्
रामपाल - अब लेती रहोगी याँ आकेमुह मे लोगी भि
माधुरी बेड सें नीचेआके रामपाल केँ पास घुटने मे बैठ रामपाल कों देखते हुवे लन्ड कों पकर - यह भि कहने कि बात हैं ससुरजी जी
रामपाल माधुरी कों देख - बहु तेरीगोद मे खेलाया हैं बच्चे सें जवानी तक तुम्हें बरा होते देखा हैं आज तुँ नंगी मेरे सामने घुटने पे हैं सभी सपना सां लगता हैं अगर हैं तोँ मे चाहता हुयह सपनाकभी खतम नाँ हौ
माधुरी रामपाल कों देख - बापूजी सपना नहीं हैं हकीकत हैं सचकहु तौ कईबार मुझे भि सभी सपना लगता हैं मगर जानती हुसच हैं इतनी खुशी प्रेम चैन मुझे आपसे मिला हैं सुरु सें अब तक फर्क इतना हैं पहले अंकल कां प्रेम अब ससुरजी पति कां प्रेम मिलरहा हैं
रामपाल माधुरी कों देख - हाअब बातें नहीं
माधुरी मुस्कुराते हुवे - समझ गई मेरे प्यारे ससुरजी जी
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माधुरी लन्ड कों पकरेमुह खोलते हुवे अंदर लेकेमजे सें लन्ड टोपे चुसना सुरुकर देती हैं रामपाल माधुरी कों देखते हुवेमन मे - मा कि तरह तुम् हौ बहु तेरीमा केँ संग भि बहुत मज़ाआता हैं मगर उमीद हैं फिनकभी तेरीमा मुझे चोदने देती वोँ डरती हैं कही किसी कों पता नां जाये जोकि मे समझाहु हरिपाल मेरेयार कों पताचला मे मे उसकी पत्नि कों चोद चुकाहु औऱ अब उसकी बेटी कों भि चोदरहा हु तोँ सभीखतम होँ जायेगा मुझे इसका ध्यान रखना होगा
माधुरी लन्ड चुस्के खरी होके रामपाल कों देखते हुवे - फिनकहा खोगये आप्
रामपाल होस मे आते हुवे माधुरी कों देख - कही नहींबहु
रामपाल मुस्कुराते हुवे - चलेबेड पे
माधुरी मुस्कुराते हुवे - चलिये
माधुरी जाने लगती हैं तौ पीछे सें रामपाल एक् चाटा माधुरी केँ गांड पे दे मारता हैं माधुरी कि गांड पूरीहिल जाती हैं उफ कितना मस्त गुडा वाली गांड थि माधुरी कि माधुरी आउच् करते हुवे पीछे रामपाल कों देख - उफ कितने बेसरम हैं आप् ससुरजी जी
रामपाल मुस्कुराते हुवे - अजी हैं हम् सुरु सें हि
माधुरी मुस्कुराते हुवेबैड पे लेत तांगे फैला लेती हैं रामपाल माधुरी केँ दोनों टाँगो कों पकरउपर करते हुवे माधुरी कों देख - सेटकरो अपनी चूत केँ छेद पे लन्ड
माधुरी मुस्कुराते हुवे नीचेहाथ लें जाके लन्ड पकर अपनी चूत कि छेद पे रखते हुवे रामपाल कों देख - ठीक हैं धीरे-धीरे सें अंदर जाने दीजिये
रामपाल धीरे-धीरे धीरे-धीरे पुरा लन्ड अंदर घुसाने लगता औऱ माधुरी कों दर्द मे मज़ाआने लगता हैं पुरा लन्ड अंदर तक घुस जाता हैं माधुरी सिसक् केँ संगअहह करती हैं औऱ रामपाल कों देख - उफठीक हैं सुरुकरे
रामपाल धक्के मारना सुरु करता हैं माधुरी बैड पे लेती रामपाल कों देखअहह उफमा सिसकिया लेने लगती हैं रामपाल केँ हर धक्के सें माधुरी केँ मुह सें अहह सिसक् निकलरही थि माधुरी रामपाल कों देखते हुवे - उफअहह आपका लन्ड ससुरजी जी मेरी चूत पे स्लिम बैठता हैं इतनाकसा मे मनोज केँ लन्ड लेने केँ बादफिल नहीं करती थि
रामपाल धक्के मारते हुवे माधुरी कों देख - बाप बाप होता हैं बहुसच तोँ यह हैं तेरी चूत मेरे लन्ड कों जकर् लेती हैं इतनी टाइट चूत मिली हैं
माधुरी दर्दमजे सें - अहह धीरे-धीरे दर्द होता हैं मिली हैं तौ चोद भि तोँ रहे हैं
रामपाल हफ्ते हुवे पलंग पे लेत - बेटा नहीं हैं तोँ बहु कां ख्याल ससुरजी कों हि रखना परेगा नाँ
माधुरी रामपाल केँ ऊपरआके लन्ड पकर चूत मे लेके बैठते हुवे - अहहमा मर गई हा आपको हि रखना परेगा
माधुरी थोरा रामपाल केँ ऊपर झुकते हुवे अपने दोनों हाथ रामपाल केँ सर केँ बगल पे रख रामपाल कों देख मुस्कुरा देती हैं
माधुरी धीरे-धीरे गांडउपर नीचे करने लगती हैं रामपाल भि नीचे सें धीरे-धीरे धक्का मारने लगता हैं माधुरी झुकी हुईँ थि तोँ माधुरी केँ दोनों चुचे मस्त रामपाल केँ चेहरे नजरो केँ समाने झूलरहे थें
रामपाल दोनों चुचे कों देख धक्के मरते हुवे - तुम् मा बनोगी दूध आयेगा तोँ मुझे जरूर पिलाना बहु
माधुरी झुकी रामपाल कों देख मुस्कुराते हुवे - बेटे कां हक बेटे केँ कमरे मे बेड पे हि माररहे हैं अब अपने पोते कां हक भि पहले सें हि मरने पे तुले हैं आप् तोँ बहुत बईमान निकले
रामपाल मुस्कुराते हुवे - सभी मेरा हि तौ हैं लेने मे कैसी सर्म
माधुरी इसीबीच कपते हुवे दूसरी बारझर जाती हैं
रामपाल - गोरीबन जाओबहु गांड भि रोज मारते रहना होगा नहीं तोँ गांड कि छेदबंद होँ जायेगी
माधुरी रामपाल केँ ऊपर सें उठकेबदल मे घोरी बनते हुवे पीछे रामपाल कों देख मुस्कुराते हुवे - वैसेजब सें अपने मेरी गांड मारना सुरु किया हैं मुझे भि गांड मे खुजली होने लगती हैं
रामपाल हस्ते हुवे - होगी हि गांड मरने मरवाने कां अलग हि मज़ा हैं
रामपाल उठते हुवे माधुरी केँ गांड केँ पास घुटने पे बैठ एक् हाथ माधुरी केँ गांड पे रखते हुवे - बहु तेरी गांड मस्त उभरी बाहर् निकली हुईँ हैं घोरी बनती हौ तोँ गजबसीन बनता हैं देख औऱ जोस आँ जाता हैं
माधुरी थोरा हफ्ते हुवे पीछे रामपाल कों देख - उफ जयदाजोस मे आके गांड मे पुरापेल मत देना गांड कि छेद हैं चूत कि नहीं बहुत दर्द होता हैं
रामपाल हस्ते हुवे - अच्छा बाबा धीरे-धीरे सें घुसाउंगा ठीक हैं
रामपाल गिला लन्ड लेकेकस केँ मुठी केँ पकरे गांड कि छेद पे रख गांड धीरे-धीरे धीरे-धीरे आगे करते हुवे लन्ड कों अंदर घुसाने लगता हैं
माधुरी अपनी गांड कि छेद पे लन्ड आते हुवेफिल करके दर्द मे - धीरे-धीरे धीरे-धीरे आने दीजिये अहह दर्द हौ रहा हैं अहह डालते रहिये
रामपाल आखिर पुरा लन्ड अंदर घुसा केँ चुदाई करने लगता हैं
रामपाल धक्के मरते हुवे - बहु सुरु मे अंदर लेने मे बहुत दर्द होता होता नां मुझे भि बहुत दिकत होती हैं अंदर घुसने मे
माधुरी पीछेमूर रामपाल कों देख सिसकते हुवे - अहह ससुरजी जी आपनेसही कहा अंदर लेने मे बहुत दर्द होता हैं मगर एक् बार अंदरघुस जाता हैं तौ दर्दकम औऱ आनंद जयदाआने लगता हैं
रामपाल हफ्ते हुवे - मे थक गय़ा अब तुम् स्वयं करो
रामपाल कि बातें सुन माधुरी स्वयं अपनी गांडआगे पीछे करते हुवे अपनी गांड मे लन्ड लेने लगती हैं माधुरी हफ्ते हुवे - अहहउफ मे भि बहुतथक गई हु आप् इतनीदेर चुदाई करते हैं कि मेरी हालत खराब हौ जाती हैं
रामपाल माधुरी कों देख हफ्ते हुवे - कियाकरू तेरी चुदाई करने सें मन हि नहीं भरता
रामपाल फिन माधुरी कों खाट पे लेता केँ माधुरी केँ ऊपरलेत तेज धक्के मरने लगता हैं फटफटफच् अहहउफ मा पागल कि आवाज़ सिसकिया केँ संग रामपाल माधुरी एक् संगझर जाते हैं औऱ माधुरी फिन माधुरी कि चूत कों अपनेगरम माल सें भर देता हैं फिन दोनों पलंग पे लेते हफ्ने लगते हैं
इनको आराम करने लेते हैं हम् हरिपाल संगीता केँ पास्ट् मे चलते हैं
हरिपाल नें मोबाइल पे रामपाल सुशीला कि गरम स्टोरी सुनाने संगीता कों गरम करकेमुठ मरने पे मजबूर करके संगीता कों झरवा केँ पहलाचरम सुखदे दिया थां मगरजोस ठंडा होते हि संगीता कों समझ मे आता हैं उसने गलतीकर दि हैं
अबतीन दिन होँ गये थें इसबात कों नाँ हरिपाल मोबाइल करता हैं संगीता कों नाँ संगीता कि हिम्मत होती हैं हरिपाल कों मोबाइल करके बातें करने कि
आखिर 5 दिन दोपहर 1 बजे माधुरी कमरे मे सोरही थि तब संगीता खाट पे लेती जौ कियाहुआ सभी सोचने मे लगी थि
संगीता मन मे - 5 दिन हौ गयेमगर वोँ दिन जौ हुआ मेरे दिमाग़ मे बारबार घूमरहा हैं जब भि सोचती हु तौ पता नहीं मेरे अंदर अजीब कां मदहोसी छाने लगती हैं अंकल नें भि एक् बार मोबाइल नहीं किया क्याँ बात हैं कही मुझेगलत तोँ नहींसमझ रहे
संगीता मोबाइल उठते हुवे - मुझेबात करनी हि होगी ताकिसभी मामला सहीकर सकु
संगीता मोबाइल हिम्मत करकेलगा देती हैं हरिपाल खेत मे पैर केँ नीचे खटिये मे लेता थां मोबाइल उठा केँ नंबर देखते हुवे मुस्कुरा केँ मन मे - इसीदिन कां इंतजार कररहा थां मे चाहता थां तुम् स्वयं पहले मोबाइल करो
रामपाल मोबाइल उठा केँ - मेरी प्यारी बेटी कों अपने अंकल कि याद आँ हि गई
संगीता थोरा सर्म सें - आपने मोबाइल नहीं किया तौ मेने
हरिपाल - क्याँ बात हैं बेटा उसदिन जोँ हुआउसे सोच मुझेगलत तौ नहींसमझ रही
संगीता जल्द सें - नहीं नहीं अंकल आपको कियुगलत सम्झुगी गलती मेरी हैं जोँ हुआ वोँ नहीं होना चाहिये थां
हरिपाल - जनताहु मगरसच कहु बेटा जोँ बातें हमारे बीच हुईँ खुलके मुझे बहुत अच्छा लगा
संगीता हैरान होके - अंकलयह आप् कैसी बातें कररहे हैं
हरिपाल - सचकेह रहाहु गलती मेरी भि हैं मगर बेटी सच बताना तुम्हें आनंद नहींआया खुलके बातें करके
संगीता - वोँ मे अंकलमगर फिन भि
हरिपाल - बेटी देखो जनताहु तुम् सोचरही होगी मे तेरे बापू कां साथीहु तेरा अंकल हमारे बीचऐसी बातें नहीं होनी चाहिये हैं नाँ
संगीता धीरे-धीरे सें - जी
हरिपाल - दिल सें पूछो हम् खुलके बातें किये तोँ कितना मज़ाआया बेटी मे तोँ तुम्हे औऱ तेरे पिताजी सुशीला केँ बीचहुआ सभी बताने वाला थां मगर लगता हैं तुम् जानना नहीं चाहती
संगीता - ऐसीबात नहीं हैं अंकलमगर मुझेगलत लगता हैं
हरिपाल - बेटी दिल कि सुनोगलत सहीकुछ नहीं होता जिसमे खुशी मिलेवही करना चाहिये मुझे मेरी प्यारी बेटी सें खुलके बात करने मे बहुत अच्छा लगा सच्ची मगर तुम् नहीं चाहती तोँ हम् फिनकभी ऐसी बातें नहीं करेगे
संगीता उलझन मे फस जाती हैं कही नां कही संगीता कों भि बहुत आनंदआया थां गंदी खुलके बातें करने मे
संगीता - वोँ मे जनता चाहती हु बातें करना भि मगर अंकल किसी कों पताचल गय़ा तौ डरतीहु
रामपाल संगीता कि बातें सुनते हि खुशी सें मन मे चिल्लाते हुवे - हरिपाल आखिर तूने भि लरकीपता हि ली
रामपाल जोस कों काबू मे रखते हुवे धीरे-धीरे सें - राज रहेगा किसी कों बता चलने नहीं देगे जाके पहले दरवाजा बंद करकेआओ
संगीता धीरे-धीरे सें - जी अंकल
संगीता दरवाजा बंद करकेबैड पे लेत केँ - जी
रामपाल - तोँ बेटी बताओ जानना चाहोगी आगे तेरे बाप सुशीला केँ बीच कियाहुआ
संगीता सर्म सें धीरे-धीरे सें - जी
हरिपाल - ठीक हैं सुनो तोँ मे सभी दरवाजे पे खरादेख रहा थां तोँ देखा तेरे बाप नें एक् कुछ किया तोँ सुशीला दर्द मे उछलपरी तब सुशीला नें बोला तेरे बाप कों अंदर उंगली कियु डालीतब समझआया मामला किया हैं
इतना सुनते हि संगीता कि सासेतेज होने लगती हैं फिन सें संगीता कि बॉडीगरम होने लगती हैं संगीता बेचैन मचलने लगती हैं मदहोसी छाने लगती हैं पेर सें पांव कों मसंलने लगती हैं संगीता समझ गई थि उसके बाप नें कहा उंगली घुसाइ थि
हरिपाल धीरे-धीरे सें - बताओ नाँ बेटी तेरे बाप नें कहाकिस मे उंगली घुसाइ थि
संगीता तौ मदहोसी मे पुरागरम हौ चुकी थि
संगीता तेज सासे लेते हुवे धीरे-धीरे सें सर्म सें - उफ अंकल मुझे सर्मआती हैं
हरिपाल धीरे-धीरे सें - बताओ नां बेटी मुझेसुन अच्छा लगेगा
संगीता सर्म सें धीरे-धीरे सें - चूत मे
हरिपाल गरम होके अपना लन्ड मसलते हुवे - किसके चूत मे
संगीता अपनी चूत पे हाथ रखते हुवे धीरे-धीरे सें - सुशीला ऑन्टी केँ चूत मे
हरिपाल मन मे - गरम होँ गई हैं यही मोक्का हैं पूरीतरह संगीता कों फसाने कां
हरिपाल - बेटी आजकोन सें कलर कि बिकनी पहनी हौ
संगीता सर्म सें - अंकलआज रेडकलर कि पहनी हैं
संगीता केँ मुह सें इतना सुनते हि हरिपाल कां लन्ड टाइट होके फटने लगता हैं
हरिपाल अपने लन्ड कों कस केँ पकरते हुवे धीरे-धीरे सें - औऱ पैंटी
संगीता सर्म सें - वोँ वोँ अंकल पैंटी भि रेडकलर कि पहनी हैं
हरिपाल पागल होकेजोस मे - मैचमैच अच्छा हैं बेटी सच बताना उसदिन हम् बातकर रहे थें तोँ तूने अपनी चूत मे उंगली कि नां
संगीता सिहर जाती हैं सर्म सें पानी पानी होते हुवे धीरे-धीरे सें - छि गंदे अंकल नहीं कि मेने
हरिपाल थोरा हस्ते हुवे - बताओ नाँ प्लेस बेटी किया नां
संगीता धीरे-धीरे सें - हा कियामगर चूत मे उंगली नहीं कि उपर सें हि किया
संगीता सर्म सें मन मे - यह क्याँ होँ रहा हैं मुझे इतना अच्छा आनंद मुझे केसे आँ सकता हैं अंकल सें गंदी बातें करते हुवे इतना आनंद तौ अशोक केँ संग भि नहींआता उफ कियाकरू मे
हरिपाल धीरे-धीरे सें - फिनझर गई थि नाँ कैसालगा थां पहलीबार झरी थि नां तुम्
संगीता सर्म सें लाल होके धीरे-धीरे सें - हु पहलीबार थां मेरा अंकल
हरिपाल - हुकहो नाँ
संगीता - मुझे अभि भि गलतलग रहा हैं सभी मे आपकी मित्र कि बेटी होने वालीबहु हु मेरी विवाह होने वाली हैं
हरिपाल मन मे - लगता हैं अभि भि पुराकाम नहींहुआ हैं संगीता अभि भि उलझन मे हैं मगर मे भि हार नहीं मनुगा
हरिपाल - ठीक हैं बेटी जैसा तुम् चाहोबस एक् विस पूरी करदो एक् फोटो बिकनी वालीभेज दो मुझे देख्ना हैं मेरी प्यारी बेटी बिकनी मे कैसी दिखती हैं उसकेबाद हम् ऐसी गंदी बातें नहीं करेगे
संगीता शोक हैरान होके - अंकलयह आप् कैसी बातें कररहे हैं
हरिपाल दुखी आवाज़ मे - सोर्री बेटा मे रखताहु माफ करनामुह सें निकल गय़ा
संगीता जल्द सें - रुकिये मे मे भेज देतीहु
हरिपाल - सुक्रिया बेटी रखताहु
मोबाइल कट
संगीता फिन उलझन सोचो मे फस जाती हैं बहुत सोचने केँ बाद संगीता मोबाइल केँ कमरे कों चालू करकेसमय सेट करके एक् स्थान रखबैठ जाती हैं औऱ अपनीकली टिसर्ट उपरकर देती हैं वैसे हि समयखतम होते हि फोटोखिच जाती हैं
संगीता फोटो कों देखमन मे - सर्म आँ रही हैं दिलकेह रहा हैं गलत हैं रुकजाऊ मगर मे
संगीता अपनीसोच कों वही रोकते हुवे सीधा फोटो हरिपाल केँ पासभेज देती हैं
हरिपाल इंतजार मे थां जैसे हि फोटोआता हैं हरिपाल देखता हैं उसकेहोस उर जाते हैं लन्ड इतना टाइट हौ जाता हैं कि रामपाल कों दर्द होने लगता हैं रामपाल जल्द सें पास वाले मक्के केँ खेत केँ अंदर जाके अपना लन्ड निकाल फोटोदेख हिलाने लगता हैं
हरिपल् फोटो देखते हुवेजोर जोर सें तेज सें हिलाते हुवेमन मे - किया फोटो भेजी हैं तूने बेटी उफयहरेड बिकनी केँ तेरी दोनों बरे गोरे चुचेसही सें कैद भि नहीं हैं तेरी चुचे केँ बीच केँ दरारउफ कियालग रहे हैं तूने अपनाफेस नहीं दिखाया कोईबात नहीं
संगीता नें टिसर्ट सें अपनाफेस छुपा लिया थां मगर जौ दिखरहा थां रेडकलर कि बिकनी मे कैद चुचेउफ गजब थें टाइटखरे करक्
हरिपाल फोटो देखते हुवे हिलाते हिलाते जोर कि पिचकारी मरते हुवेझर जाता हैं हरिपाल हफ्ते फोटो कों देख - एक् दिन बिकनी नहीं रहेगी नंगी फोटो रहेगी जिसमे तेरे दोनों चुचे नंगीदेख पऊगा
हरिपाल फिन खटिये पे आके लेटते हुवेमन मे - देर सवेर हि सही संगीता बेटी तूँ मानेगी मेरीहर बात उसका सबूतयह फोटो तूने भेजी वोँ हैं अभि गलतसही सोचरही हौ मगर जनताहु जनताहु तेरा फैसला किया होगाअगर तुम को आनंद नहीं आँ रहा होता तौ सुरु मे हि रुक जातीमगर तूँ रुकी नहींबस इंतजार हैं पूरीतरह तुम को पाने कां
( हरिपाल संगीता पास्ट् यही रोकते हैं )
( पर्जेंट )
मनोज अशोकरूम मे दारू पीते हुवे बातें कररहे थें
अशोक एक् पैक मरते हुवे मनोज कों देख - दोस्त तेरी बेहन कि बहुतयाद आँ रही हैं सालापता नहीं छुट्टी कब मिलेगी
मनोज सिग्रेट पीते हुवे मस्त सोफे पे लेता अशोक कों देख - तेरी बेहन कि भि बहुतयाद आती हैं मुझे
अशोक सिग्रेट जलाते हुवे - किया क़िस्मत हैं हमारी तेरी बेहन मेरी पत्नि मेरी बेहन तेरी पत्नि
मनोज हस्ते हुवे - तूनेबात तौ सहीकही
अशोक सोफे पे लेत सिग्रेट पीते हुवे मनोज कों देख - तेरी भाग्य अच्छी हैं साले मेरी सेक्सी बेहन तेरी मिली नहीं तोँ तुम को कालि लरकी मिलती
मनोजमुह सें धुवा निकलते हुवे - सच हैं तेरीबात मगर मेरी बेहन भि तुम्हे जैसे कों नहीं मिलती
अशोक हस्ते हुवे - सही बोला दोस्त एक् बातकहु
मनोजउठ केँ बैठ अशोक कों देख - बोल
अशोक - हमारी बहने हैं तौ बहुत सेक्सी माल
मनोज थोरा हैरान होता हैं मगरयह सुन मनोज कों भि अच्छा लगता हैं
मनोज दारू कां एक् पैक मारते हुवे - यह भि तूनेसही कहा
अशोक भि एक् पैक पीते हुवे मनोज कों देख - हमारी बहने बहुत हसीन सेक्सी होत हैं किया लगता हैं हमारी बेहन कां चक्कर विवाह सें पहले होगा किसी सें
मनोज अशोक कों देख - नहीं दोस्त ऐसा नहीं लगता
अशोक - तुम्हे केसेपता
मनोज केँ मुह सें निकल जाता हैं - कियुंकी तेरी बेहन माधुरी कि सील सुहागरात कों मेने तोरी थि
मनोज केँ मुह सें सच सुनने केँ बाद अशोकमन मे - हु मुझे तोँ पता हैं मेरी छोटी बेहन कां चक्कर उस कमीने सें चलरहा थां मगर मेनेबचा लिया मुझेलगा किसी औऱ सें भि होगामगर सायद नहीं हैं तोँ मेरी बेहनसील पैक मिली कमीने कों
मनोज कों एहसास होता हैं उसने कियाकेह दिया
मनोजनशे मे - सोर्री दोस्त मुह सें निकल गय़ा
अशोक मनोज कों देख - कमीने सुन तेरी बेहन कां सील भि मेने सुहागरात कों तोरीसुन लिया
अशोकमन मे - अब तेरीमा कों चोदने कां प्लान बनारहा हुमगर सासुमा रेडी हि नहीं होती हैं
अब मनोज हैरान होता हैं मगर मनोजफिल करता हैं उसका लन्ड पुराखरा हौ गय़ा हैं
दोनों नशे मे हि सोफे पे वहीसो जाते हैं
वही रामपाल माधुरी लेते हुवे एक् दूसरे कों प्रेम सें देखरहे थें
रामपाल - तुम्हें बाहों मे लेके पत्नि वाली फीलिंग आँ रही हैं
माधुरी मुस्कुराते हुवे - कियु पत्नि नहींहु
रामपाल मुस्कुराते हुवे - हौ मगरबहु हि ठीक हैं बहु कि चुदाई मे जयदा आनंद हैं
माधुरी हस्ते हुवे - बेसरम कही केँ
हरिपाल केँ घऱ
हरिपाल संगीता कि चुदाई करने मे लगा थां फटफटफच् फच् सिसकिया पायल औऱ अहह कि आवाजे कमरे मे गुजरही थि
तोँ वही मालती सभी सें अंजान उसकेपीठ पीछे उसका पति रोजरात अपनीबहु चोदने जाता हैं उसके सोने केँ बाद
सुभह होती हैं माधुरी हरिपाल सुभह केँ काम मे लग जाते हैं
आज केँ लिए इतना हि
मक्के केँ खेत मे – New Episode
chapter 13
सुभह माधुरी खानां बनाने मे लगी थि रामपाल पास मे हि खटिये पे बैठाहुआ थां
रामपाल माधुरी कों देख बातें कररहे थें तब संगीता कां मोबाइल आता हैं
माधुरी - कैसी हैं ननदीजी
संगीता - अच्छी हु कमीनी
माधुरी रामपाल कों देख मुस्कुराते हुवे धीरे-धीरे सें - तेरा बाप मेरे ससुरजी जीयही हैं पास मे बैठे हैं
संगीता हैरान होके - कियाकही उन्होंने सुना तोँ नहीं
माधुरी - नहीं सुना
रामपाल माधुरी कों देख - संगीता बेटी कां मोबाइल हैं कियाबहु
माधुरी रामपाल कों देख - जी बापूजी
माधुरी मोबाइल इस्पिकर पे कर देती हैं
रामपाल - कैसी हैं मेरी प्यारी लाडली औऱ मेरी प्यारी जूही कैसी हैं
संगीता हस्ते हुवे - बहुत अच्छी हैं पिताजी
रामपाल - बहुतमन हैं तुम्हे औऱ अपनी नातिन कों देखने कां
संगीता कुछकेह पति एक् आवाज़ आती हैं
हरिपाल - भार मे जा मेरीबहु नहीं जायेगी तेरेयहा समझ गय़ा
रामपाल - साले तूँ हैं केसे नहींआने देगा तेरी बेटी मेरीबहु हैं भूल तौ नहींरहा
हरिपाल - तोँ क्याँ मेरी बेटी जब चाहेवहा सें आयेगी जायेगी
रामपाल - औऱ मेरी बेटी भि जब उसकादिल करेगा आयेगी जायेगी
माधुरी बैठीमन मे - फिन सुरु होँ गये दोनों
तभी मालती कि आवाज़ आती हैं
मालती - केसे हैं आप्
मालती कि मिठी आवाज़ सुन रामपाल एक् लम्हा केँ लियेउस दिन मे चला जाता हैं जब रामपाल मालती केँ बीचसभी हुआ थां
रामपाल मुस्कुराते हुवे - अच्छा हु मस्तहु आइयेकभी
मालती मुस्कुराते हुवे - जरूर आयेगे
हरिपाल मालती कों देख - अरेइस कमीने सें कियुबात कररही होँ औऱ हमारे बीच मे किसको आने कों बोला तुम्हारी तरफ
मालती गुस्से सें हरिपाल कों देख - कियाकहा आपने
हरिपाल डरते हुवे - कुछ तोँ नहीं बातें करो
संगीता हरिपाल कों देख हसने लगती हैं
रामपाल - मे किया केहता हुजब मनोज अशोक दोनों आँ जायेंगे तोँ एक् संग मिलते हैं
मालती - जैसा आप् कहे
रामपाल - ठीक हैं तयरहा सुनरहा हैं नाँ कमीने
हरिपाल जूही कों देख प्रेम सें - तेरे नानाजी कों एक् दिन बहुत मारुंगा
रामपाल - हाथलगा केँ दिखा किसीदिन तेरी
तभी मालती जल्द सें खासने लगती हैं तोँ रामपाल समझते हुवे जौ कहने वाला थां मुह मे रह जाता हैं
रामपाल - हा तोँ तयरहा रखताहु
मोबाइल कट
माधुरी रामपाल कों देख हस्ते हुवे - बापूजी जरासोच समझ गाली दियाकरो कईलोग होते हैं पास मे
रामपाल माधुरी कों देख मुस्कुराते हुवे - ठीक हैं बाबा
खानां तैयार होँ चुका थां माधुरी रामपाल सुभह कां खानां पीना करते हैं
( हरिपाल संगीता पास्ट् )
संगीता उलझन मे थि दोदिन हरिपाल सें गंदी बातें अपने बाप कि लोव किस्सा सुन केँ संगीता कों बहुत मज़ाआया थां मगर अंदर कोने मे सभीगलत लगरहा थां संगीता सही भि थि हरिपाल होने वाला ससुरजी भि थां पिताजी कां साथी भि
दोपहर 1 बजे बहुत गर्मी होती थि तोँ गाव मे सब किसीपैर केँ नीचे याँ घऱ मे हि रहते थें माधुरी संगीता सें बातें करके अपने कमरे मे आती हैं तब संगीता हरिपाल केँ बीच बातें याद करने लगती हैं
2 दिन हौ गये थें संगीता अभि भि उलझन मे थि मगरअब स्वयं कों रोक नहीं पति
संगीता हरिपाल कों मोबाइल करती हैं हरिपाल दोदिन सें इंतजार कररहा थां कब संगीता कां मोबाइल आयेगा हरिपाल मुस्कुराते हुवे मोबाइल उठा केँ
हरिपाल - हा बेटी कैसी हौ
संगीता - जी अंकल मे ठीकहु कियाकर रहे हैं आप्
हरिपाल - क्याँ करुगा वहीपैर केँ नीचे गर्मी मे कहा जाया जाये
संगीता - हु आपनेसही कहा
2 मिनट तक नॉर्मल बातें होती हैं याँ कहे रामपाल करता हैं
हरिपाल - अच्छा बेटी रखताहु
संगीता - रुकिये वोँ फोटो भेजी थि कैसीलगी
हरिपाल मुस्कुराते हुवेमन मे - यही तौ चाहता थां तुम् स्वयं पूछो
हरिपाल अपना नाटक सुरु करते हुवे - बेटी मुझे लगता हैं अबहमे वैसी बातें नहीं करनी चाहिये
संगीता हैरान होके धीरे-धीरे सें - कियु अंकल
हरिपाल - देखो बेटी मुझे तौ बहुत अच्छा लगता हैं तेरेसंग वोँ गंदी बातें करकेमगर तुम् हि उलझन मे पऱ जाती हौ इस लिये
संगीता धीरे-धीरे सें - अब करुगी नां बात मुझे बापू ऑन्टी केँ बीच कियाहुआ जानना भि हैं
हरिपाल - फिनयह तोँ नहीं कहोगी गलत हैं
संगीता धीरे-धीरे सें - नहीं
हरिपाल - ठीक हैं अभि टेक्स्ट लें लेताहु
संगीता धीरे-धीरे सें - हु
हरिपाल - अभि कोन सि कलर कि बिकनी पैंटी पहनी हैं
संगीता धीरे-धीरे सें सर्म सें - बुलु बिकनी वाइट पैंटी
हरिपाल - अच्छा चूत मे बाल हैं तेरे
संगीता सर्म सें - छि अंकल सर्मआती हैं मुझे
हरिपाल जोस मे गरम होके - बताओगी नहीं तौ बातखतम करते हैं
संगीता धीरे-धीरे सें - हैं
हरिपाल - अच्छे सें बताओ
संगीता सर्म सें - वोँ बाल हैं चूत पे
हरिपाल कां लन्ड लोहाबन गय़ा थां
रामपाल खरा होकेआस पास देखता हैं फिन मक्के केँ खेत केँ अंदर एक् स्थान जाकेखरा होके लन्ड निकाल हिलाने लगता हैं
हरिपाल लन्ड हिलाते हुवे - कितने बरेबाल हैं तेरी चूत पे
संगीता भि पूरीगरम होँ जाती हैं संगीता चूत पे हाथ रखते हुवे - 2 इंचबरे बाल हैं
संगीता कि तेज सासे हरिपाल कों सुनाई देती हैं
हरिपाल - बहुत कालेघने बाल होगे नाँ चूत तोँ दिखता भि नहीं होता
संगीता बहुतगरम हौ जाती हैं पूरी बॉडी मे जैसेआग लग गई होँ संगीता जल्द सें अपनी लेग्गिंस निकाल केँ साइड मे रखती हैं फिन अपनी तांगे फैला केँ वाइट पैंटी केँ ऊपर सें हि अपनी चूत केँ फाको केँ बीच उंगली करने लगती हैं संगीता केँ मुह सें सिसकिया औऱ तेज सासे कि आवाज़ हरिपाल केँ कानों मे जाती हैं तौ हरिपाल औऱ जोस मे गरम होकेपगल होने लगता हैं हरिपाल कां लन्ड औऱ टाइट होँ जाता हैं
हरिपाल लन्ड हिलाते हुवे - कहो नां मेनेसही कहा नां
संगीता चूत केँ फाको केँ बीच उंगली करते हुवे मदहोसी मे - उफ अंकल आपनेसही कहा बहुतघने बाल हैं मेरी चूत पे अहह
हरिपाल पगल होके - सफाईकब करने वाली होँ
संगीता चूत केँ तेजी सें उंगली करते हुवे - उफ अंकलकल करुगी
हरिपाल - बेटी चूत मे उंगली कररही होँ नाँ सच बताना
संगीता थोरा हैरान सर्म सें - वोँ वोँ ऐसा नहीं हैं जौ आप् सोचरहे हैं
हरिपाल - तौ पैंटी केँ ऊपर सें उंगली कररही होँ हैं नाँ सच केहना
संगीता धीरे-धीरे सें मदहोसी मे सिसकते हुवे - अहह अंकलकर रहीहु
हरिपाल तोँ पागल हौ गय़ा थां अपना लन्ड मुठी मे पकरे हुवे थां
हरिपाल - उफ बेटी तुम्हारी चूत बहुतगरम होती एक् फोटो भेजो नाँ
संगीता धीरे-धीरे सें सर्म सें - ठीक हैं मगर किसी कों दिखाना मत
हरिपाल - मे भला किसको कियु रिखाऊगा
संगीता धीरे-धीरे सें - ठीक हैं भजतीहु
संगीता एक् फोटो भेजती हैं हरिपाल देखता हैं तोँ पागल हौ जाता हैं
संगीता लेती थि वाइट पैंटी मे संगीता कि पैंटी चूत केँ फाको केँ बीच मे घुसी हुइ थि चूत कि उभारसाफ दिखरहे थें मोती गोरी जांघों केँ बीच टाइट फूली कुवारी सीलपैक चूत वाइट पैंटी मे उफ कियासीन थां
रामपाल फोटो देखते हुवे तेजी सें लन्ड हिलाते हुवे - बेटी कितनी टाइट चूत हैं तुम्हारी पैंटी तोँ तेरी चूत मे घुसी हुइ हैं
संगीता गरम होके - उफ अंकलअहह घुसी हैं कियाकरू मे अहह
हरिपाल औऱ तेज सें लन्ड हिलाते हुवे - बेटी किसी कां लन्ड देखा हैं तूने
संगीता पैंटी केँ ऊपर सें चूत मे उंगली करते हुवे - उफ अंकल नहीं देखा
हरिपाल - अपने अंकल कां लन्ड देखोगी
संगीता हैरान होती हैं मगरगरम मदहोसी मे सर्म सें - हा देखुंगी
बस किया थां हरिपाल जल्द सें एक् फोटोभेज देता हैं जिसे देखती हि संगीता कि चूत पानी निकाल देती हैं संगीता फिनझर जाती हैं पैंटी पूरी गीली होँ जाती हैं
हरिपाल भि झर जाता हैं
संगीता हफ्ते हुवे - अंकलबाद मे बात करते हैं
हरिपाल हफ्ते हुवे - ठीक हैं बेटी बस एक् किस देदो मिठा वाला होठों पे
संगीता सर्म सें - उमा
हरिपाल मुस्कुराते हुवे - मेरी प्यारी बेटी बहुत मज़ाआया मुझे तुम्हें आया
संगीता सर्म सें धीरे-धीरे सें - हा बहुतआया अच्छा लगा
मोबाइल कट
हरिपाल खुशी सें पगल होँ जाता हैं आखिर संगीता कों हरिपाल नें फसा हि लिया
हरिपाल संगीता पास्ट् रोकते हैं
पर्जेंट शाम 3 बजे
रामपाल माधुरी कों घोरी बनके चुदाई कियेजा रहा थां माधुरी घोरीबनी धक्के चुदाई कां आनंद लेते हुवे - उफमामर गई ससुरजी जी दूसरी बारआके मुझेचोद रहे हैं ऐसे हि दिन मे 3 बार चुदाई करतेरहे तौ अहह मेरी चूत कि हालत खराब होँ जायेगी अहह आपकी भि
रामपाल धक्के मारते हुवे हफ्ते हुवे - उफ तेरा ससुरजी अभि भि स्लिम हैं बहुउफ तेरीयह मस्त चूत मरने मे जोँ मज़ाआता हैं उफबता नहीं सकता
30 मिनटबाद
माधुरी हफ्ते हुवे रामपाल कों देख - आपमें कितना दम हैं वोँ तौ मे देख हि रहीहु अहह मेरी चूत
रामपाल माधुरी कि चूत देखते हुवे - देखो नां केसे मेरामाल तेरी चूत सें निकलरहा हैं
माधुरी नीचेझुक चूत कों देख - छि बेसरम
माधुरी नंगी आगन् मे जाते हुवे - मुझे पिसाब करना हैं
रामपाल मुस्कुराते हुवे - मुझे देख्ना हैं
माधुरी हैरान रामपाल कों देख सर्म सें - देख लीजिये फिन
रामपाल मुस्कुराते हुवे - तौ देखादो फिन
आगन् मे एक् स्थान माधुरी नंगीबैठ पिसाब करने लगती हैं तेजधार पानी केँ चूत सें निकलने लगता हैं रामपाल माधुरी केँ आगे नँगा बैठा माधुरी कों पिसाब करतेदेख - उफबहु केसेतेज दार निकलरहा हैं
माधुरी रामपाल कों देख सर्म सें - बहु कों पिसाब करतेदेख आपका लन्ड फिनखरा हौ रहा हैं ससुरजी जी
रामपाल माधुरी कों देख मुस्कुराते हुवे - कियुंकी भाग्य वाले ससुरजी कों हि यह नजारा देखने कों मिलता हैं
माधुरी पिसाब करने केँ बादखरी होके रामपाल कों देख - अबयहमत कहनाफिन चुदाई करनी हैं
रामपाल मुस्कुराते हुवे माधुरी कों देख - बस एक् राउंड
माधुरी हस्ते हुवे - ऐसे हि खेत सें आतेरहे हैं नां तोँ खेत सें मक्के गायब हौ जायेंगे
रामपाल हस्ते हुवे - कोईबात नहींबहु कि चुदाई पहले
माधुरी मुस्कुराते हुवे - चलिये फिन चूत कि हालत तौ खराब हैं फिन भि एक् राउंड लेँ हि सकतीहु आपका लन्ड
रामपाल माधुरी कमरे मे फिन चुदाई कां खेल खेलने लगते हैं
( संगीता हरिपाल पास्ट् )
खुल केँ गंदी बातें करने केँ बाद हरिपाल अपना लन्ड कां फोटो भि भेज केँ संगीता कों दिखा देता हैं
रात 9 बजे मालती केँ सोने केँ बाद हरिपाल कमरे सें बाहर् निकल संगीता कों मोबाइल करता हैं
संगीता पलंग पे लेती थि नींदउर गई थि सोचो मे गुम थि मोबाइल बजतादेख मोबाइल उठा केँ - जी अंकल
हरिपाल - बेटी कैसालगा अपने अंकल कां लन्ड
संगीता कुछदेर सन्त रहने केँ बाद बोलती हैं
संगीता - सोर्री अंकलहमे अबयहसभी यहीरोक देना चाहिये
हरिपाल पुराहिल जाता हैं हरिपाल कों लगा थां संगीता फस गई हैं मगर संगीता फिन उलझन मे थि
इसबार हरिपाल कों क्रोध आँ जाता हैं मगर स्वयं कों सन्त करते हुवे - जैसा तुम् बोलो बेटी
संगीता - सोर्री अंकल मे आपकी बेटी जैसीहु आपके बेटे कि होने वाली पत्नि औऱ आपकीबहु
हरिपाल - समझ गय़ा मुझे भि माफकर देना रखताहु
यही सें हरिपाल संगीता केँ बीच बातें बंद होँ जाती हैं गंदी बातें नॉर्मल हालचाल बातें होती रहती हैं मगर बहुतकम हफ्ते मे एक् बारबस 2 मिनट बातें
टाइम गुजरता हैं संगीता बहु बनके हरिपाल केँ घऱ आँ जाती हैं सुहागरात कों अशोक संगीता कि सीलतोर रहा थां वही रामपाल बैड पे लेता संगीता केँ बारे मे सोचरहा थां
विवाह केँ 20 दिनबाद अशोक मनोजफिन अपने नौकरी करने सेहरचले जाते हैं
दोपहर 12 बजे रामपाल घऱ केँ पीछे खटिये पे लेता थां तब संगीता रामपाल केँ पासआके बैठते हुवे रामपाल कों देख - आप् नाराज हैं मुझसे
हरिपाल संगीता कों देख - तुम्हे ऐसा कियु लगता हैं बहु
संगीता - कियुंकी आप् मुझसे पहले जैसाबात नहीं करते जबकि मे आपकेपास समाने हु
हरिपाल संगीता कों देखता रहता हैं फिनपैर कों देखते हुवे - नाराज नहींहु बेटी बसदूर रहताहु ताकिफिन वोँ दिनयाद आँ आँ जायेसच कह तौ वोँ दिन हमारे बीच हुई बातें भुला नहींहु नाँ भुलुगा
रामपाल उठकरबैठ संगीता कों देख - तुम् सें प्रेम करनेलगा थां मे
संगीता पूरीशोक मे हरिपाल कों देख - किया
हरिपाल - हा बच्ची थि तब सें तुम्हारी तरफ देखता आयाहु जब तुम् जवान हुई तुम्हें देखता हस्ते मुस्कुराते मस्ती करते तोँ मेरादिल मचल जाता तुझेही बाहों मे लेनागाल पे किस करना
रामपाल नजरे नीचे किये दर्दभरी आवाज़ मे - कईबार दिल कों समझाया यहमतकर मित्र कि बेटी हैं तेरी होने वालीबहु मगरजब तुम् मेरे सामने आतीसभी भूल जाता मेरा मित्र तेरा बाप सुशीला कों देख मुझे भि उस वक्त एक् गिर्लफ्रेंड कि चाहतजगी थि मे भि चुपके सें मिलना प्रेम करना बातें करना चाहता थां वोँ फिल लेना चाहता थां मगर मुझेकोई मिली हि नहीं
हरिपाल थोरिदेर चुप रहता हैं औऱ संगीता हैरान हरिपाल कों देखती रहती हैं
हरिपाल - उसदिन एकदम सें हमारे बीचबात सुरु हुईँ मे खूब थां कि अब मे तुम्हारी तरफ अपनेदिल कि बातकेह पऊगा बिनाडरे जनता थां नाँ कहोगी फिन भि कहना चाहता थां
हरिपाल संगीता कों देख - तीनदिन तुमसे बातें कर जितना अच्छा खुशी मिलीबता नहीं सकताजिस रात मे तुझेही अपनेदिल कि बात कहने कों चाहा तुमने
संगीता इतनासभी सुनने केँ बाद औऱ शोक हौ जाती हैं
हरिपाल संगीता कों देखते हुवे - मुझेबस तुमसे बातें करनी थि जैसे एक् बॉयफ्रेंड अपनी गिर्लफ्रेंड सें करता हैं मुझे तुमसे प्रेम करना थां मे तुमहारे संग एक् रिस्ता सभी सें चुपके बनाना चाहता थां मगरयह हुआ नहीं
संगीता पूरीहिल जाती हैं यकीन नहीं हौ रहा थां हरिपाल कि बातें सुन
हरिपाल - माफकर देनाबहु जनताहु तुम् मेरे बारे मे कियासोच रही होँ हा मे गिराहुआ इंसान हु हौ सके तोँ मुझेमाफ कर देना
तभी मालती आते हुवे हरिपाल संगीता कों देख - अच्छा तोँ तुम् ससुरजी बहुयहा बैठे बातें कररहे हैं
हरिपाल मालती कों देख मुस्कुराते हुवे - कियुजलन होँ रही हैं
मालती मुह बनते हुवे - इतनी सि बात केँ लिये मे कियु जलनेलगी कियुबहु
संगीता हस्ते हुवे - जी आपनेसही कहा माँ जी
मालती हरिपाल केँ पास बैठते हुवे संगीता कों देख - तेरे ससुरजी मुझे बहुत मानते हैं प्रेम करते हैं बच्ची थि तब सें तुम को बहुत खेलाया माधुरी अशोक सें जयदा प्रेम तेरी करते थें
संगीता हैरान होके हरिपाल कों देखती हैं
मालती - हातब जाके उन्होंने फैसला लिया तुम को अपनेघऱ बहु बनाके लाएँगे ताकि तुम् उनकेसंग रहो हमेसा
संगीता औऱ हैरान होके हरिपाल कों देखती हैं
हरिपाल मालती कों देख - बस भि करो मालती जाकेसो जाओ नींद नहीं आँ रही तुम को
मालती - दिन मे कोन सोता हैं जाके आप् जोँ जाओ
हरिपाल - अरे मे यही सोताहु भूल गई
मालती - ठीक हैं ठीक हैं चलोबहु इनका सोने कां वक्त होँ गय़ा हैं अबशाम कों हि उठेगे
संगीता - जी मां जी
मालती संगीता जाने लगते हैं तब संगीता एक् नजर हरिपाल कों देख केँ जाती हैं
रात 9 बजे
संगीता बैड पे लेती हरिपाल कि कही बातें औऱ मालती कि कही बातें याद करके करवटबदल रही थि गहरी सोचो मे थि
संगीता एकदम सें खरी होके हरिपाल केँ कमरे केँ दरवाजे पे आती हैं धीरे-धीरे सें दरवाजा खतखटाती हैं तौ हरिपाल दरवाजा खोलके खरी संगीता कों देख हैरान होता हैं
संगीता नाइटी मे थि जिसमे संगीता बहुतहॉट सेक्सी लगरही थि संगीता हरिपाल कों देख - नाइटी मे कैसीलग रहुहु ससुरजी जी
हरिपाल संगीता कों देख - अच्छी लगरही हौ
सुखा जवाबसुन संगीता कों अच्छा नहीं लगता
संगीता हरिपाल पलंग पे बैठे थें कोईकुछ नहींबोल रहा थां
संगीता बोलती हैं - मुझे भि वोँ 3 दिन हुई बातें अच्छे सें याद हैं भूलि नहीं
हरिपाल संगीता कों देखने लगता हैं
संगीता - मुझे भि आपसे बातें करके अच्छा लगरहा थां मे बातें करना चाहती थि मगरबार बारगलत सही केँ बीचफस जाती थि कियुंकी वोँ गलत हैं हमारे बीच नहीं होना थां
हरिपाल चुप रहता हैं फिन संगीता कों देख - किया मेरी एक् इक्छा पूरी करुगी बेटी
संगीता सोचते हुवे - जी बोलिये कर पाउंगी तौ जरूर करुगी
हरिपाल संगीता केँ हाथपकर संगीता कों देख - एक् बार मुझे तुम्हारी तरफ पुरा प्रेम करनेदो आज पूरीरात मेरेसंग गुजरो प्लेस बहुबस एक् बार वादा हैं आगे सें मे एक् अच्छा ससुरजी बनके रहुंगा
संगीता पूरीशोक होती हैं हैरानी सें हरिपाल कों देखती हैं फिन अपनाहाथ हरिपल सें छुरा केँ जाने लगती हैं तोँ हरिपाल बहुत दुखी होँ जाता हैं मगरतभी हरिपाल कों दरवाजा बंद करने कि आवाज़ आती हैं हरिपाल देखता हैं संगीता दरवाजा बंदकर चुकी हैं हरिपाल हैरान सें संगीता कों देखता हैं
संगीता अपनी नाइटी उतरते हुवे हरिपाल कों देख - अपने मुझे बच्ची थि तब सें बहुत प्रेम दिया हैं अपने बच्चो सें जयदामा केँ जाने केँ बाद अपने बापू कां बहुतसंग दिया बुरेसमय मे आज पहलीबार अपने मुझसे कुछ माँगा हैं मना केसेकर सकतीहु आज कि रात मे आपकी हुई जोँ करना हैं कर लीजिये
संगीता केँ बातें पूरी होते हि नाइटी संगीता केँ बॉडी सें सीधा नीचे गिरती हैं औऱ संगीता पूरी नंगीखरी थि जिसेदेख हरिपाल कि आखेफटी कि फटीरह जाती हैं
( हरिपाल संगीता कां पास्ट् यही रोकते हैं )
वही दूसरी तरफ मनोज बातें मोबाइल मे माधुरी सें कररहा थां जबकि मनोज कों पता हि नहीं थां उसका बाप उसकी पत्नि कों चोदरहा हैं औऱ माधुरी चुदवाते हुवे बातें कररही हैं
माधुरी नंगी लेती थि रामपाल माधुरी केँ ऊपर लेता माधुरी कों बाहों मे कियेचोद रहा थां औऱ माधुरी भि अपनी गांडउठा उठा केँ लन्ड लेँ रही थि मोबाइल बगल मे रखा थां इस्पिकर पे माधुरी चुदवाते बातें भि कररही थि रामपाल धीरे-धीरे सें - मज़ा आँ रहा हैं बहु मुझे तौ बातें करतीरहो
माधुरी रामपाल कों देख मुस्कुराते हुवे - बहुत कमीने हैं आप्
माधुरी - जी पति जीउफ बहुतमन करता हैं जल्द आँ जाओ आप्
मनोज - उफजान मेरा भि बस जल्द हि आऊगा तेरी चूत कि गर्मी निकाल दुगा
माधुरी रामपाल कों देख मुस्कुराते हुवे धीरे-धीरे सें - आपके पिताजी मेरे ससुरजी जी आपकी पत्नि कि चूत कि गर्मी निकाल रहे हैं रोजतीन मे तीनबार राजरात कों
रामपाल मुस्कुराते हुवे एक् तेज धक्का मार देता हैं माधुरी आउछमर गई अहह
मनोज - कियाहुआ माधुरी
माधुरी दर्दमी रामपाल कों देख - उफकुछ नहींजी मचर् हैं
मनोज - अच्छा
आज केँ लिये इतना हि
मक्के केँ खेत मे – New Episode
chapter 14
सुभह होते हि माधुरी उठके अपनेकाम मे लग जाती हैं नहाती हैं तैयार होती हैं फिन खानां बनाने लगती हैं
रामपाल देरी सें उठता हैं नहाता हैं फिन तैयार होके आगन् मे बैठ माधुरी सें बातें करने लगता हैं
रामपाल माधुरी कों देख - बहु मनोज आयेगा तौ उसकेसंग हि सोना परेगा तेरी औऱ मुझे अकेला
माधुरी खानां निकलते हुवे रामपाल कों एक् नजरदेख - हा पिताजी जीमगर कर भि क्याँ सकते हैं मे उनकी पत्नि हु उनकाहक मुझे उन्हें देना हि होगा
रामपाल - बहुत अच्छा बेटी मे भि नहीं चाहता तुम् मात्र मुझे प्रेम करो मुझपे ध्यान दो मनोज कां हक मे माररहा हुमगर जब तक रहेगा उसे पूरा प्रेम देना बाकी चोरी छुपे तेरी चूत मे मार हि लूंगा
माधुरी रामपाल कों देख मुस्कुराते हुवे - जमतीहु आप् एक् दिन भि मुझे चोदे बगैररह नहीं सकते हैं
रामपाल मुस्कुराते हुवे - औऱ तुम् एक् भि दिन मुझसे चुदवाये बिना
माधुरी हस्ते हुवे - गंदे सुभह सुभहफिन सुरु आईये खानां खाते हैं
रामपाल नीचे चटाई पे बैठ जाता हैं औऱ माधुरी भि बैठ जाती हैं दोनो ससुरजी बहु खानां खाते हैं
खानां खाने केँ बाद रामपाल माधुरी कों कमरे मे लेकेआता हैं माधुरी भि समझते हुवे सारी पेटीकोट उपर करके पलंग पे अपनी गांडउपर उठा केँ घोरीबन जाती हैं
रामपाल घुटने पे बैठ चूत नें लन्ड धीरे-धीरे सें पूरा घुसा केँ माधुरी कि गांड पकर् धक्के मारने लगता हैं माधुरी अहहउफ सिसकिया लेने लगती हैं
माधुरी घोरीबनी चुदाई कां आनंद लेते हुवे - ससुरजी जीअहह धीरे-धीरे
रामपाल धक्के मरते हुवे - बहु लगता हैं मनोज जल्द आँ जायेगा
माधुरी - उफ ससुरजी जी आँ भि गये तोँ क्याँ होँ जायेगा हमारी चुदाई रुकेगी नहींअहह औऱ तेजकरो बहुत मज़ा आँ रहा हैं अहह ससुरजी जी
रामपाल तेज धक्के मरते हुवे - उफबहु मस्त चूत हैं तेरी तुँ भि मस्तमाल हैं मेरेयार नें गजबमाल पैदा किया हैं जिसे मे चोदरहा हु
35 मिनटबाद
रामपाल माधुरी बाहर् आते हैं रामपाल माधुरी कों देख - अच्छा बहुजा रहाहु खेत मे आँ जानां खानां लेके एक् राउंड खेत मे करेगे
माधुरी मुस्कुराते हुवे - कितना चोदते हैं मुझेमन नहीं भरता
रामपाल माधुरी कों उपर सें नीचे तक देख मुस्कुराते हुवे - इतनी हसीन सेक्सी बहु सें केसेमन भर सकता हैं स्वयं कों देखो तुँ भला हैं अच्छा चलताहु
रामपाल चला जाता हैं माधुरी चूत पे हाथरख मुस्कुराते हुवे - उफ कियागजब केँ ससुरजी जी मिले हैं दिनरात चोदके मेरी चूत ठंडाकर देते हैं
( संगीता हरिपाल पास्ट् )
हरिपाल केँ कहने पे संगीता एक् रात अपनासभी कुछ अपने ससुरजी कों देने केँ लिये राजी होँ गई थि संगीता नाइटी निकाल पूरी नंगी होँ जाती हैं हरिपाल केँ समाने
हरिपाल संगीता कों नँगादेख पूराहोस खो देता हैं जिस खजाने कों देखने केँ लिये वोँ टरप्रहा थां अब वोँ खाजना उसके नजरो केँ सामने थां एक् सुंदर भला जौ उसकीनई नवेली बहु मित्र कि बेटी थि
रामपाल आखेबरी किये संगीता कों उपर सें नीचे तक देखते हुवे - इस सुंदर नजरे तेरीइस खजाने कों देखने केँ लिये कितना बेचैन तरप्रहा थां मे तुम कोबता नहीं सकताबहु तेरेयह गोरेबरे टाइट चुचे तुम कोजब बाहों मे लेता थां तोँ सीने पे फिल करता थां तेरी बॉडी कि गर्मी खुशबु तेरी चूत कि गर्मी सभी मुझे पागलकर देते थें मगरआज आखिर मुझेसभी देखने कों मिल हि गय़ा
रामपाल चलते हुवे संगीता केँ लगभगआके खरा होँ जाता हैं संगीता सिहर औऱ सर्म सें लाल होते हुवे हरिपाल कों देखती हैं
हरिपाल संगीता कों देख - बहुत सुंदर हौ तुम् बहुउपर सें नीचे तक सभीकुछ बहुत सुंदर पर्फेट हैं बरे टाइटखरे चुचे काले छोटेबाल वाली तेरी चूत मुझेपगल कर दिया
रामपाल अपने कपड़े निकलते हुवे - आजरात तुम् मेरी हौ इस मोक्के कों समय कों बर्बाद नहीं जाने दूंगा
हरिपाल कि बातें सुन संगीता औऱ सिहर जाती हैं
हरिपाल नँगा होके संगीता केँ सामने खरा लन्ड पकरे संगीता कों देख - इस लन्ड कों तूने देखा हि हैं अबइसे प्रेम करोमुह मे लेके प्रेम सें चुसोयह लन्ड आज तुम्हें वोँ मज़ा देगा जिसे तुम् कभीभूल नहीं पाओगी
हरिपाल संगीता कों नीचे बैठा देता हैं संगीता हरिपाल कों देखती हैं फिन लन्ड हाथो मे पकरमुह मे लेके चूसने लगती हैं हरिपाल आखेबंद करकेफिल करते हुवे - अहहबहु बता नहीं सकता कितना चैन मिला मुझे अपना लन्ड तेरेमुह मे देके चुसोबहु अच्छे सें चुसो
संगीता पुरेदिल सें हरिपाल केँ लन्ड कों पकरेचूस औऱ चाटरही थि हरिपाल संगीता कों देखता रहता हैं यकीन नहींकर पारहा थां उसकी साथी कि बेटी उसकीबहु उसका लन्ड मजे सें चूसरही हैं चाटरही हैं
संगीता लन्ड चुस्टे चाटते हुवेमन मे - यहअलग एहसास हैं अलग मज़ा हैं ससुरजी जी केँ लन्ड चूसने कां सच मे बहुत आनंद आँ रहा हैं कितना मोटा लन्ड हैं ससुरजी जी कां पति जी सें बहुत मोटा लम्बा हैं
लन्ड चुसाइ केँ बाद संगीता हरिपाल कों देखमुह साफ करते हुवे - अब किया ससुरजी जी
हरिपाल संगीता कों पलंग पे गिराते हुवे - बहुतकुछ बाकी हैं
हरिपाल संगीता कों किस करने लगता हैं बॉडीपेट चूमने लगता हैं संगीता सिसकिया लेने लगती हैं अहहउफ करने लगती हैं
हरिपाल फिन संगीता केँ दोनों चुचे दबाने लगता हैं फिन एक् चुचेमुह मे लेके चूसने लगता हैं संगीता गरम होने लगती हैं वही हरिपाल पागल होनेलगा थां नर्मबरे चुचे अपनीबहु केँ दबाते चूसने मे खोया थां
संगीता मचलते हुवे सिसकिया लेते हुवेमन मे - अहह मेरे ससुरजी जी मेरी चुचेदबा चूसरहे हैं अहहयह अलग एहसास मज़ा मुझे पागलकर रहा हैं
रामपाल फिनपेट चूमते हुवे चूत केँ पासआके चूत मे एक् किस करता हैं फिन चूत कों जिब सें चाटने लगता हैं संगीता तांगे फैलाते हुवेबैड पे मचलते तरपते उछल केँ अहहउफ सिसकिया लेने लगती हैं
संगीता गांड उठाते हुवे - अहह ससुरजी जी चूसिये मेरी चूत कों अहहमा बहुत आनंद आँ रहा हैं इतना आनंद तोँ मुझे पति जी केँ संग भि नहींआया अहह ससुरजी जी मेरी चूत कां रसपीजाओ निकाल केँ
रामपाल चूत केँ अंदरजिब चाटने चटते चुस्टे हुवेमन मे - मेरी भाग्य कितनी कमाल कि हैं मा कों पहले चोदाअब बेटी कों चोदरहा हुउफ कितनी गरम टाइट चूत हैं अहह चूत कां स्वाद तोँ कमाल कां हैं बहु तेरीमा कि चूत कां स्वाद भि बहुतगजब कां थां अहह
4 मिनट मे हि संगीता हरिपाल केँ सर अपनी चूत मे दबाते हुवे झटके मारते झरने लगती हैं
रामपाल अपनामुह चूत सें अलग करकेमुह साफ करते हुवे संगीता कों देखता हैं संगीता तेज सासे लेते हुवे हरिपाल कों देख सर्म सें लाल हौ जाती हैं हरिपाल मुस्कुरा देता हैं
हरिपाल बहुत बेताब थां स्वयं कों रोक नहींपता औऱ लन्ड पकर संगीता कि चूत मे घुसने लगता हैं अंदर लन्ड जाते हि संगीता खाट पकरे दर्द मे अहहमर गई ससुरजी जी बहुत दर्द हौ रहा हैं
संगीता केँ आसु निकलआते हैं कियुंकी हरिपाल कां मोटा लम्बा लन्ड संगीता कि चूत मे गय़ा थां तोँ दर्द होना हि थां
अंदर पूरा लन्ड घुसके रामपाल जोँ गर्मी टाइटकसक अपने लन्ड पे फिल करता हैं हरिपाल औऱ जोस मे पागल होने लगता हैं संगीता दर्द मे हरिपाल कों देख - ससुरजी जीअहह दर्द होँ रहा हैं बहुत
हरिपाल संगीता कों देख - बसबहु तेरी चूत टाइट हैं बहुतगरम भि ऐसालग रहा हैं आग केँ अंदर छोटीबिल मे लन्ड घुसा दियाहु
संगीता हरिपाल कों देख - उफमा ससुरजी जी पति जी कां छोटा हैं
हरिपाल हैरान होके - अच्छा इस लिये इतना टाइट चूत हैं तेरी
हरिपाल संगीता केँ ऊपर पूरालेत चुदाई करने लगता हैं किस करते हुवे संगीता भि तांगे उठाये हरिपाल कों पकरेकिस करने लगती हैं
संगीता मन मे - यहगलत हौ रहा हैं मगर जौ आनंद मुझेमिल रहा हैं वोँ मज़ाहर स्त्री चाहती हैं ससुरजी जी कां मोटा लन्ड मेरी चूत केँ अंदर दीवार कों रगर पानी निकाल रही हैं इतनाजोस तरप् पति जी केँ संग करतेसमय नहींआती थि जितना ससुरजी जी केँ बातो सें हि आता हैं
रामपाल किस करते हुवे धक्के मरते हुवेमन मे - माफ करना मित्र तेरी बेटी इतनी कमाल कि सेक्सी हैं बता नहीं सकताअहह यह आनंदबहु कि चूत क़िस्मत वाले कों मिलती हैं अहह कितनी टाइट चूत हैं उफ
रामपाल फिन संगीता केँ ऊपर सें घुटने पे बैठ चुदाई करने लगता हैं धक्के केँ संग संगीता कि बॉडी मस्तहिल रही थि औऱ संगीता मजे मे अहहउफ कररही थि चूत पानी निकले जारहा थां फच्फच् पायल कि आवाजे कमरे मे गुजरही थि संग मे हरिपाल संगीता कि तेज सासे
हरिपाल संगीता कों देख चुदाई करते हुवे - आनंद आँ रहा हैं बहु
संगीता हरिपाल कों देख - अहहमा ससुरजी जी बहुत मज़ा आँ रहा हैं अहह मे मे झरने वालीहु अहह ससुरजी जी
संगीता फिनझर जाती हैं
रामपाल फिन संगीता कों घोरी बनकेतेज धक्के मरने लगता हैं इतनातेज कि संगीता कि गांड पूरीहिल जारही थि फटफटफच् कि मस्त आवाजे केँ संग संगीता कि दर्दमजे वालीअहह सिसकिया कि आवाजे भि संगीता रामपाल दोनों झरने वाले थें
संगीता - अहहमर गई उफमा औऱ जोर सें मे झरने वालीहु
हरिपाल तेज धक्के मरते हुवे - अहहबहु मे भि झरने वालाहु
रामपाल एक् तेज धक्के मरते हुवे पूराजर तक चूत केँ अंदर लन्ड घुसा केँ झरने लगता हैं फिन लन्ड बाहर् चूत सें निकाल हफने लगता हैं चूत सें गरमगरम हरिपाल कां माल निकल गिरने लगता हैं
हरिपाल पलंग पे लेत जाता हैं संगीता भि दोनों पसीने सें भीगेथके हाफरहे थें 10 मिनटबाद
हरिपाल संगीता कों देख मुस्कुराते हुवे - आनंदआया
संगीता हरिपाल कों देखकुछ नहीं कहती तोँ हरिपाल दुखी हौ जाता हैं
जबकि पूरीरात केँ लिए संगीता हरिपाल कि थि तौ हरिपाल पूरीरात वक्त लेके केँ संगीता कि खूब चुदाई करता हैं इसबात कां ध्यान भि रखताकही मालती जौ बाहर् सोरही हैं वोँ देख नाँ लेँ
सुभह होने वाली थि तब संगीता जिसकी हालत हरिपाल नें खराबकर रखा थां नाइटी पहन हरिपाल कों देख - वादा निभाना कल सें मुझे आप् पहले वाले अंकल ससुरजी जी चाहिए
हरिपाल दुखी तौ होता हैं मगरखुश भि थां एक् रातचोद पाया संगीता कों
हरिपाल संगीता कों देख - ठीक हैं बहु तुम् जैसा बोलो
संगीता लंगराते हुवेचली जाती हैं
हरिपाल पलंग पे लेतामन मे - मुझेलगा आगे भि करेगे मगरकोई बात नहीं हरिपाल तेरीबहु नें तेरे लियेसभी भुलके अपनी इज़त पूरीरात दि हैं तौ तुम्हे भि अपना वादा पूरा करना होगा
इसकेबाद हरिपाल एक् अच्छा ससुरजी बनके रहनेलगा मस्ती बातें मगररात कां सीनयाद आतेमन मचल जाता तोँ हरिपाल जल्द सें स्वयं कों संभलरोक लेता
6 दिनबाद
रात कों जयदा गर्मी कि वजह सें हरिपाल मालती बाहर् सोरहे थें तब संगीता आके धीरे-धीरे सें हरिपाल कों उठा केँ कमरे मे लेकेआती हैं
हरिपाल संगीता कों देख थोरा हैरान होके - क्याँ बात हैं बहु
संगीता हरिपाल केँ कपड़े निकलते हुवे - 6 दिन आपका टेस्ट थां आप् पास होँ गये
हरिपाल हैरान होके - मतलब
हरिपाल कों नँगा करकेबैड पे लेता केँ संगीता अपनी नाइटी निकाल पूरी नंगी होके हरिपाल कों देख - देख्ना चाहती थि आप् अपना वादा निभाते हैं याँ नहींमगर आप् नें निभाया
संगीता हरिपाल केँ पासबैठ हरिपाल कों देख - आपकेसंग गंदी बातें करके हि मे जितना जोस गर्मी एक्साईमेंट फिल करती थि उतना आपके बेटे केँ संग नहींकर पति उस पूरीरात अपने मुझे बहुत चोदा हालत खराबकर दि मगर जौ आनंदआया मे भूल नहींपा रही
संगीता हरिपाल लेँ उपरआके लन्ड कों अपनी चूत केँ छेद केँ सेट करते हुवेबैठ जाती हैं पूरा लन्ड अंदर जाते हि संगीता अहहमर गई
हरिपाल पूरा हैरान शोक बैठा संगीता कों देखेजा रहा थां
संगीता गांडउपर नीचे करते हुवे लन्ड चूत मे लेने लगती हैं औऱ हरिपाल कों देख - उफऐसा नहीं थां मुझे आपसे चुदना नहीं थां आपका लन्ड जब देखातब मेने चूत मे आपका लन्ड देखकई बार उंगली कि उफ जोँ मज़ाआया बता नहीं सकतीमगर उसरात अहहमा मर गई रात पहलीबार आपका लन्ड चूत मे लेके जोँ मज़ाआया बता नहीं सकती
संगीता हरिपाल कों देख - आपने मुझे मजबूर कर दिया आपने लन्ड केँ आगे मे हार गई मुझे आपका प्रेम चाहिए बोलिये ससुरजी जी अपनीबहु कों रोज चुदाई करेगे बोलिये मेरी चूत कि गर्मी निकलगेगे
हरिपाल शोक सें बहारआते हुवे हैरानी सें - हाहाबहु
बसफिन किया थां संगीता हरिपाल केँ बीच एक् रिस्ता सुरुहुआ संगीता तोँ हरिपाल सें मोबाइल पे हि पट गई थि हरिपाल नें संगीता कों तीनदिन मे जौ मज़ा दिया संगीता कों वोँ मज़ा अशोक केँ संग चुदाई करके भि नहीं मिला दूसरी संगीता उलझन मे थि सहीगलत मगररात भर चुदाई केँ बाद संगीता हरिपाल कि दीवानी बन गई
7 दिन चुदाई केँ बाद एक् दिन संगीता केँ पीरियड नहींआये उसकेकुछ दिनबाद भि नहींआया तौ संगीता समझ गई पेट सें हैं
फिन वक्त केँ संग संगीता हरिपाल केँ बच्ची कों जन्म दिया जूही कों
( तोँ यही थां पास्ट् संगीता हरिपाल कां यही पे पास्ट् खतम होता हैं )
( पर्जेंट )
अबहाल यह हैं संगीता हरिपाल मस्त चुदाई कां खेल खेलते रहते हैं सभी सें चुपके सभी कों लगता हैं जूही संगीता अशोक कि बेटी हैं जबकि सचकुछ औऱ हैं
दोपहर 12 बजे
माधुरी खेत मे खानां लेकेआती हैं रामपाल संगीता पहले खानां खाते हैं फिन नजरे देखते हुवे बातें करने लगते हैं
रामपाल - बहु बेटे केँ आते हि मे सोचरहा हु तुम् अपने मायके औऱ संगीता अपने मायके तुम् दोनों केँ कई महीने होँ गये हैं मायके गये संगीता बेटी अपनी नातिन कों देख्ना चाहता हु
माधुरी रामपाल कों देख - अच्छा जी मुझेभगा रहे हैं
रामपाल संगीता कों बाहों मे लेके होठो पे किस करते हुवे - पागलकोई तौ होना चाहिये घऱ संभलने केँ लिये
हरिपाल माधुरी केँ संगपकर मुस्कुराते हुवेचलो नाँ
माधुरी मुस्कुराते हुवे - हद हैं चलिये
हरिपाल खेत मे माधुरी कि चुदाई करने लगता हैं माधुरी तांगे उठाये रामपाल कों देख - अहह ससुरजी कि उफ मज़ा आँ रहा हैं औऱ जोर सें
रामपाल माधुरी केँ पेर फैलाये हुवे धक्के मरते हुवे - उफ बेटी तेरी चूत केँ बालबरे हौ रहे हैं उफ तेरी चूत पे बाल होते हैं तोँ बहुत अच्छा दिखता हैं अहहमगर साफ करना हि होगाउफ समझ गई
माधुरी - उफ ससुरजी जी अच्छे सें आप् हि मेरे चूत केँ बालसाफ कर देना
रामपाल तेज धक्के मरते हुवे - यह तौ मेरे लिये क़िस्मत वालीबात हैं जरुरु मे अपनीबहु कि चूत केँ बालसाफ करुगा अपने हाथो सें
इनको तोँ यहीछोर देते हैं
अब हम् मालती अनोज सासू माँ दामाद केँ बीच कियाचल रहा हैं जान लेते हैं
मालती मनोज केँ बीच मात्र बातें होती हैं मोबाइल पे मगरयह बातें नॉर्मल नहीं होती
( एक् महीने पास्ट् )
एक् महीने पहले सें सभी सुरुहुआ एक् दिन दोपहर कों मालती मोबाइल करती हौ मनोज कों
छुट्टी कां दिन थां मनोज पार्क मे बैठा थां
मनोज - जी मां जी
मालती - केसे होँ दामाद जी
मनोज - जी अच्छा हु आप् कैसी हैं बाकीसभी
मालती - जीसभी अच्छे हैं अभि माधुरी सें बात हुई मेरी
मनोज - मां जी मेने भि अभि हि बात कि माधुरी सें
मालती - हु दामाद जी कहना नहीं चाहती फिन भि दोसाल होँ गई हमारी उमर रुकेगी नहींसमझ रहे हैं नां
मनोज दुखी होके - समझरहा हु माँ जी कीसिस कररहे हैं मगर
मालती - मे यह कहतीहु आप् आइयेफिन माधुरी बेटी आप् अपना चेकप् करवा लेँ किया हैं पताचल जायेगा
मनोज - जी माधुरी नें बताया मुझेकहा भि
मालती - हु मेरेमन मे एक् डर हैं कही माधुरी बेटी केँ अंदरकोई परोबलम हुई तोँ कही आप् उसेछोर दूसरी विवाह तोँ नहीं करेगे
मनोज हैरान होके - आप् यह कैसी बातें कररहे हैं माँ जी माधुरी कों मे बहुत प्रेम करताहु छोरने कां प्रश्न नहीं उठताअगर माधुरी केँ अंदरकोई प्रॉबलम् हुइ तौ हम् ( सरोगेट ) करवा लेगे
मालती हैरान होके - यह सरोगेसी किया हैं
मनोज हैरान होके - आपको नहींपता
मालती - नहीं मुझे नहींपता आप् बताओ किया हैं
मनोज औऱ हैरान होके - नहीं वोँ मे आप् कों केसे बताऊसमझ नहींआता
मालती - अरे दामाद जी बताओ भि मेरी बेचैनी औऱ मत बढाओ
ममोजकुछ सोचते हुवे - जी बताना हु सुनिये ध्यान सें ( सरोगेसी ) मे जोँ पति पत्नि बच्चे पैदा नहींकर सकते तौ वोँ किसी दूसरी महिला जोँ विवाह सुधा हौ एक् बच्चे कि मा कों उसकीकोख मे अपना अंडाडाल बच्चे पैदा करवा सकते हैं
मालती शोक मे - किया अच्छे सें समझाईये मुझे
मनोज - सुनिये माधुरी मेरा अंडाउस महिला केँ कोख मे जायेगा औऱ जोँ बच्चा पैदा होगा हमारे खून कां होता हमारा हि होगाबस कोख किसी औऱ कां होगा
मालती हैरान होके - क्याँ ऐसा भि होता हैं मगरऐसा कोन करेगा भलाकोन दूसरे केँ बच्चे पैदा करके देगा
मनोज - प्रश्न अच्छा हैं देगामगर कोई अपना हि जिसे हम् जानते हैं
मालती - मुझे तोँ पता हि नहीं थां उमीद करतीहु ऐसाकुछ करना नाँ परे
मनोज - मे भि नहीं तौ मुश्किल होँ जायेगी
मालती - हासही कहा अपने
मनोज - सासुजी एक् बात केहनी थि शपथ खाइये माधुरी कों नहीं बताएगी
मालती - कोन सि बात हैं जोँ माधुरी कों नहींबता सकती
मनोज - पहलेशपथ खाइये
मालती सोचते हुवे - ठीक हैं शपथ खातीहु अब बताइये
मनोजआस पासदेख केँ - वोँ माधुरी मुझेरोज करने नहीं देती
मालती कंफ्यूज होके - किया करने नहीं देती हैं
मनोज हिम्मत करके - चुदाई
मालती शोक मे हैरान होके - यह क्याँ बोलरहे हैं आप् दामाद जी
मनोज - जीसही बोलरहा हु हफ्ते मे एक् बार करने देती हैं आप् हि बताइये मेरामन करेगा तोँ मे कहा जाउंगा
मालती हैरान होके - पर्र ऐसा माधुरी कियु करती हैं
मनोज - मुझे क्याँ पता माँ जीजबमन बहुत करता हैं तौ दिल करता हैं रण्डी केँ पासचला जाऊ
मालती शोक मे - नहीं नहीं दामाद जीऐसा मत करना
मनोज दुखी आवाज़ मे - आप् भि समझ सकती हैं जब आपकामन करता होगा चुदाई कां औऱ असुरजी नहीं करते होगे आपकी चुदाई तौ आपको बुरा लगेगा कि नहीं
मालती गुस्से मे - यह किया बकवास बोलरहे हैं अंदाज़ा भि हैं आपको
मनोज दुखी होके - आप् भि करलॉ क्रोध मुझपे मे तौ सच बोला सायद जयदाबोल गय़ा
मालती गहरी सासू लेते हुवे - दुखीमत होइये समझती हु आप् सही भि हैं
मनोज - तोँ बताइये मां जी आपकामन करता हि चुदाई कां तोँ ससुरजी जी नहीं करते आपकी चुदाई तोँ क्रोध आता हैं याँ नहीं
मालती मन मे - यहकहा सें कहा बातें पहुँच गई
मालती सर्म सें - जीजी मे माधुरी सें बात करुगी
मनोज - नहींशपथ खाई हैं अपनेरही बात तौ अबसभी सही हौ गय़ा हैं असल मे माधुरी कों करता थां नाँ तोँ दर्द होता थां इस लियेरोज नहीं करने देती थि अब जाके माधुरी नें मुझे बताया मेरा बहुत मोटा हैं
मालती पूरीशोक मे - अच्छा मे रखतीहु दामाद जी
मोबाइल कट
मनोज कां लन्ड पानी निकाल चुका थां अपनी सासू माँ केँ संग गंदी बातें करने मनोज कों बहुत आनंदआया थां
ममोजजब ( सरोगेसी ) वाली बातें बतारहा थां तभी मनोज केँ मन मे मोक्के कां फायेदा उठाने कां औऱ अपनी सासू माँ सें गंदी खुलके बातें करने कां मोक्का दिखाई दिया जोँ मनोज नें उठा लिया थां
माधुरी वालीकथा झूठी थि मनोज मे बस मालती कों खोलने गंदी बातें करने कां मोक्का मार्ग बनाया थां झूठी कहनी सें
रामपाल हरिपाल अशोक मनोजसभी साले मोक्के कां फायेदा उठारहे थें
मनोज अपना लन्ड मसलते हुए - उफ माँ जी किया बताऊं आपको थोरिदेर हि सही जौ मज़ा आयेगा चुदाई कि बातें करकेअहह मेरा लन्ड पानी निकाल दियाउफ
मनोजरूम कि तरफ जातेहुए - बता नहीं कियाफिन हम् वैसे बातें कर पायेंगे
( पास्ट् यही रोकते हैं )
पर्जेंट
शाम 3 बजे मालती खाट पे लेती चूत सेहलाते मसलते हुवे सारी केँ ऊपर सें मन मे - पता नहीं कियु पति जी अशोक कि विवाह केँ बाद सें मेरी चुदाई बहुतकम कर दि हैं अब तोँ हफ्ते मे एक् बार मुश्किल सें करते हैं अहह मेरी चूत कियाकरू इसका मे
वही हरिपाल संगीता कमरे मे पलंग पे बैठे थें हरिपाल जूही कों लेकेगोद मे खेलारहा थां
हरिपाल जूही कों देख - मेरी प्यारी बेटी मा नें दूध पिलाया कि नहीं
संगीता जूही कों देख मुस्कुराते हुवे - जूही बेटी बताओ अपने बापू कों अभि दूध पिलाया हैं मा नें मुझे
हरिपाल संगीता कों देख मुस्कुराते हुवे - मगर बाप कों तोँ नहीं पिलाया नां
संगीता मुस्कुराते हुवे - सीधे बोलिये नां आपको पीना हैं दूध
संगीता ब्लाउस खोल देती हैं दोनों चुचे बाहर् आँ जाते हैं हरिपाल केँ मुह मे पानीआने लगता हैं हरिपाल जूही कों बैड पे रख देता हैं
औऱ जल्द सें एक् चुचेमुह मे लेके पीने लगता हैं
हरिपाल संगीता केँ दूध सें भरे चुचेचूस चूस पीने लगता हैं औऱ संगीता बैठी पिलाने लगती हैं संगीता हरिपाल कों दूध पीतेदेख - अहह ससुरजी जीउफ जूही केँ पीने केँ बाद भि बहुतदूध रह जाता हैं पिलोअहह आप् केँ लिये हि हैं उफमा अच्छा लगता हैं उफदूध पीते हैं तौ
दूध पीने केँ बाद हरिपाल संगीता कों देख - उफबहु आनंद आँ जाता हैं मुझे भि तेरादूध पीके बहुत मिठादूध हैं तेरा
हरिपाल नँगा होके संगीता केँ संग बाहों मे लेकेलेत जाता हैं औऱ सारी पेटीकोट उपर करने लगता हैं संगीता मुस्कुराते हुवे - सासुजी कों पताचला तोँ आपकीखैर नहीं
हरिपाल मुस्कुराते हुवे - नहींपता चलेगा बहु
हरिपाल सारी पेटीकोट उपरकर देता हैं संगीता अपना एक् पांव उठाके केँ ऊपर रखती देती हैं हरिपाल फिन लन्ड चूत मे घुसा देता हैं
हरिपाल संगीता कों बाहों मे लिये लेते लेते चुदाई करने लगता हैं औऱ संगीता तांगे उठाये लन्ड लेती रहती हैं संगीता - अहह ससुरजी जी मेरे बच्ची केँ बापूअहह औऱ तेज मज़ा आँ रहा हैं अहहउफ जल्दकर लीजिये अभि जूहीजगी हुई हैं अहह मेरी चूत
हरिपाल तेज धक्के मरते हुवे - समझ गय़ा मेरीजान मेरीबहु
आज केँ लिये इतना हि
मक्के केँ खेत मे - Kahani ab aur interesting hogi
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