मक्के केँ खेत मे – New Episode
chapter 15
रात 8 बजे माधुरी रामपाल खानां पीना खाकेखाट पे लेते हुवे बातें करने मे लगे थें माधुरी रामपाल केँ ऊपर नंगी लेती हुई थि रामपाल भि नँगा माधुरी कों बाहों मे लिये हुवे थां
माधुरी रामपाल कों देख - रात खानां पीना होते हि मुझे नँगाकर देते हैं
रामपाल माधुरी केँ एक् चुचे दबाते हुवे - नंगी तुम् बहुत अच्छी लगती होँ बहुइस लिये
माधुरी सिसकिया लेते हुवे - उफ धीरे-धीरे चुचे दबाइये अहह
रामपाल चुचे कों छोर माधुरी कों देख - सवारी नहीं करोगी अपने ससुरजी जी केँ लन्ड पे
माधुरी मुस्कुराते हुवे रामपाल केँ ऊपर सें उठ केँ अपनी गांडउठा केँ लन्ड पकर चूत कि छेद पे सेट करते हुवेबैठ जाती हैं लन्ड पूरा चूत केँ अंदर तक घुस जाता हैं माधुरी दर्दमजे मे अहह ससुरजी जी
माधुरी रामपाल अपने ससुरजी केँ लन्ड कों चूत केँ लेके रामपाल केँ सीने पे दोनों हाथो कों रखे गांडउठा उठा केँ लन्ड कि सवारी करने लगती हैं
वही हरिपाल केँ घऱ
हरिपाल मालती लेते हुवे मालती हरिपाल केँ ऊपरआके हरिपाल कों देख - बहुतमन हैं करते हैं नां
हरिपाल मालती कों देख - ठीक हैं करलो
मालती यह सुनते हि हरिपाल कों नीचे सें नँगाकर देती हैं औऱ फिन अपनी नाइटी उठा केँ हरिपाल केँ लन्ड कों पकर अपनी चूत केँ छेद पे सेट करकेबैठ जाती हैं औऱ गांडउपर नीचे करते हुवे लन्ड लेने लगती हैं अहहउफ सिसकिया कि आवाजे कमरे मे गुजने लगती हैं
20 मिनटबाद
मालती नाइटी नीचे करकेबैड पे लेत जाती हैं औऱ अपनेमन मे कुछ सोचने लगती हैं
वही संगीता बैड पे लेती थि औऱ जूहीसो रही होती हैं
संगीता मन मे - ससुरजी जी केँ संग रिस्ता बनाके तौ मे बहुतखुश हुमगर किसी कों पताचला तौ उमीद करतीहु यहराज हि रहे
( मनोज मालती पास्ट् )
मालती मनोज केँ बीच वोँ बातें होँ चुकी थि जौ एक् सासू दामाद केँ बीच नहीं होना चाहिये थां मगर मनोज केँ मन मे कुछ औऱ थां
दोपहर 12 बजे मनोजआज काम पे नहीं गय़ा थां मनोज केँ दिमाग़ पे कुछ औऱ चलरहा थां
मनोजमन मे - कल माँ जी सें जोँ बातें हुइ अहह सोचते हि लन्ड खरा होँ जाता हैं मां जी नें उनकामन करता हैं तौ ससुरजी जी नहीं करते तोँ उन्हें क्रोध आता हैं क्याँ ससुरजी जी नें माँ जी कि चुदाई कमकर दि हैं
मनोज सोचते हुवे मालती कों मोबाइल लगा देता हैं
मनोजमन मे - मां जी सें बातें करकेकल आनंद बहुतआया अब तक मे 4 बारमुठ मार चूकाहु
मालती मोबाइल उठाते हुवे - दामाद जी बोलिये
मनोज - वोँ माँ जी आप् क्याँ कररही हैं
मालती - कमरे मे लेतीहु इस दोपहर कों गर्मी मे कोईकहा जायेगा
मनोजमन मे - इस लिये तौ अभि मोबाइल किया अभि हि आप् सें अकेले मे बात होँ सकती हैं
मनोज - हायह तोँ हैं ससुरजी जी संगीता कहा हैं
मालती - घऱ केँ पीछे औऱ कहा
मनोज - हु वोँ मां जीकल वोँ बातें हुईँ
मालती बीच मे - नहीं होना चाहिये थां दामाद जी
मनोज - आप् नाराज हैं मुझसे
मालती - नहीं जौ हुआउस बात कों यहीखतम कर देते हैं
मनोज - ठीक हैं समझ गय़ा
मालती - हुआजकाम पे नहींगये
मनोज - वोँ मन नहीं थां मे एक् लरकी कों घऱ बुलाया हैं
मालती शोक मे - किया कियु
मनोज - वोँ रण्डी हैं कुछदिन सें बहुतमन करता हैं करके कां इस लिये
मालती शोक गुस्से मे -दामाद जी आप् विवाह सुधा हैं आप् ऐसे केसेकर सकते हैं
मनोज - सोर्री मां जीकुछ दिन सें हिला हिला केँ थक गय़ा हु आप् बताओ क्याँ करू वोँ आप् बोलेंगे करुगा
मालती - पहले तौ किसी रण्डी केँ संग आपकोकुछ नहीं करना हैं अपना ध्यान कही औऱ लगाये छुट्टी लेकेफिन आँ जाइये घऱ
मनोज - ठीक हैं जैसा आप् कहेमगर अभि क्याँ करू
मालती थोरा सर्म सें - हिला लीजिये
मालती मन मे - कहाफस गई फिन बातें वही पे आँ गई
मनोज मुस्कुराते हुवेमन मे - आपको लेने कि सोच लिया हैं मां जी
मनोज दुःखी होके दुखी आवाज़ मे - आनंद नहींआता ऐसे हिलाने सें
मालती शोक मे हैरान होके - क्याँ
मनोज - कोसिस करताहु
मनोज लन्ड निकाल हिलाते हुवे - अहह मां जी हिलारहा हु
मालती यह सुनते हि बहुत जयदा सर्म सें पानी पानी होँ जाती हैं
मनोज - मां जी ससुरजी जी आपकी चूत रात कों मारी कि नहीं
मालती गुस्से सें - दामाद जीफिन आप् सुरु होँ गये
मनोज - माफकर दीजिये आप् सें बातें करते हुवे हिलाने मे बहुत मज़ा आयेगा इस लियेकर रहाहु
मालती - ठीक हैं मगर वादा कीजिये रण्डी केँ पास नहीं जायेंगे
मनोजखुश होके - वादा बोलिये नां माँ जी चूत मारीरात कों
मालती सर्म सें - नहींरात कों कुछ नहींहुआ
मनोज बबला होकेजोस मे लन्ड हिलाते हुवे - तौ आपकामन अभि चुदाई करने कां बहुतकर रहा होगा नाँ सच बताना मां जी
मालती धीरे-धीरे सें - हा दामाद जी बहुतमन हैं मगर कियाकर सकतीहु आपके ससुरजी जी कि उमर होने लगती हैं
मनोज कों यकीन नहीं होँ रहा थां अपनी सासू माँ सें गंदी बातें कररहा हैं
मनोज लन्ड तेजी सें हिलाते हुवे - माँ जी आपने पैंटी पहनी हैं चूत पे बाल हैं याँ नहीं हैं बताइये नां
मालती धीरे-धीरे सें - नहीं पहनी हैं औऱ चूत पे बाल हैं
मनोजजोस मे पागल होके - कितने बरेबाल हैं चूत पे आपके
मालती सर्म सें धीरे-धीरे सें - वोँ दामाद जी छोटे हैं
मनोज औऱ तेज लन्ड हिलाते हुवे - मां जी लगता हैं सफाई कि थि अपने
मालती सर्म सें - हा वोँ पीछे हफ्ते कि थि आप् हाफ कियुरहे हैं
मनोज - लन्ड हिलारहा हु नां अहहइस लिये
मालती सर्म सें - अच्छा समझ गई
मनोज - मां जी चूत आप् फूलीअहह मस्त फाको वालीगरम होगीउफ मां जीअहह
मनोज इतनाजोस मे थां कि लन्ड पानी निकाल देता हैं मनोजझर जाता हैं मगर जोँ आनंदआया थां मनोज कि जनता थां
मनोज हफ्ते हुवे - बहुत आनंदआया माँ जीउफ
मालती - दामाद जी मेने आपके लिये अपनी बेटी केँ लिये किया हैं प्लेस रण्डी याँ किसी स्त्री लरकी केँ पीछेमत जानां मेरी बेटी कों धोकामत देना
मनोज मोक्के कां फायेदा उठाते हुवे - अपने मुझे छोटे सें प्रेम क्याँ हैं पहले आप् मेरी प्यारी ऑन्टी थि अब सासू हैं वादा करताहु बस मां जी आपसेबात तौ कर सकताहु नां जोँ अभि हमने किये हैं प्लेस घऱआने तक
मालती सोचते हुवे - ठीक हैं मगर प्लेस दामाद जी किसी कों पता नां चले नहीं तोँ सभीखतम होँ जायेगा
मनोज - वादा हैं
मालती - ठीक हैं रखतीहु
मोबाइल कट
मालती अपनी चूत पे हाथ रखते हुवे - अभि जोँ बातें हुइ दामाद जी सें मेरी चूत गीली होँ गई अजीब एहसास थां मुझे अच्छा लगरहा थां जबकि मुझेपता हैं यहगलत हैं
वही मनोज खुशी सें नाचरहा थां
यही सें एक् सिलसिला सुरुहुआ मनोज संगीता सासू दामाद केँ बीच गंदी बातो कां मालती मनोज केँ संग बातें करने केँ लिये राजी केवल एक् वजह सें हुई कही मनोज रण्डी केँ पासचला नाँ जाये
5 दिनबाद
आजफिन मनोज अकेले दफ़्तर मे बैठे मालती सें गंदी बातें कररहा थां मालती कमरे मे लेतीहर प्रश्न कां जवाबदे रही थि
मालती मन मे - अब तौ मेरी चूत दामाद जी कि गंदी बातें सुनते हि गीली होने लगती हैं कियाकरू अहह
मालती स्वयं कों रोक नहीं पति औऱ धीरे-धीरे सें तांगे उपर करके फैला केँ सारी केँ अंदरहाथ डालके चूत मे बीच वाली उंगली घुसा केँ धीरे-धीरे धीरे-धीरे उंगली करने लगती हैं मालती केँ मुह सें अहह सिसकिया कि आवाजे धीरे-धीरे सें निकलरही थि मनोजसुन नहीं पाता
मनोज - माँ जी चूत मे उंगली करिये नां
मालती मुश्किल सें धीरे-धीरे सें - नहीं दामाद जी हम् मात्र बातें करेगे
मनोज - अच्छा ठीक हैं आज ससुरजी जी नें चुदा आपको
मालती चूत मे उंगली करते हुवे-उफ नहीं
मनोज - लन्ड लेने कां बहुतमन करता होगा नाँ
मालती थोरा हफ्ते सिसकिया लेते हुवे - बहुत करता हैं दामाद जी
मनोज - जरा सोचिये आप् नंगी हैं मे आपकेउपर हु अपना लन्ड आपकी चूत केँ छेद पे रख एक् धक्के सें आपकीगरम फूली चूत मे अपना लन्ड घुसा देताहु अहह तोँ कितना आनंद आयेगा नां आपको भि मुझे भि अहह मां जी
मालती मनोज कि बातें सुन इमेजिन करती हैं तौ एकदम सें झरने लगती hain चूत फच् केँ संग बहुत सारा पानी निकाल देता हैं मालती हफ्ते हुवेमन मे - इतना आनंद तौ मुझे पहलेकभी नहींआया अहहअब जाकेचैन मिला
मालती थोरा हफ्ते हुवे - अच्छा दामाद जी रखतीहु
मोबाइल कट
मनोज मुस्कुराते हुवेमन मे - चूत मे उगलीकर रही थि आपकी सासे कि तेज आवाजे सिसकिया औऱ चूत सें निकली फच्फच् कि आवाजे मुझे सुनाई देरही थि मां जीअहह एक् दिन चूत मे उंगली मेरे कहने पे करेगी
तोँ यही एक् महीने पहिले हुआउस दिन सें आज तक मनोज कों जिसदिन मोक्का मिलता मालती सें गंदी बातें करते हुवे लन्ड हिला लेता
( मनोज मालती पास्ट् खतम होता हैं )
अबबात करे पर्जेंट कि तोँ मालती मनोज सें बातें करने कों राजी हुईँ ताकि मनोज रण्डी केँ पास नाँ जाए जबकि मालती कों पता नहीं थां उसका दामाद उसेफसा रहा हैं धीरे-धीरे धीरे-धीरे मालती कों मनोज सें मोबाइल पे गंदी बातें करने मे मज़ाआने लगा मालती मनोज सें बातें करते चूत मे उंगली करके पानी निकाल लेती औऱ मालती कों चैनमिल जाता
मगर मनोज चूत मे उंगली करने कों कहता तोँ मालती मनाकर देती मालती कों लगता हैं मनोज कों नहींपता मगर मनोजसभी सुन सकता थां
हरिपाल संगीता कि वजह सें मालती पे जयदा ध्यान नहींदे पता थां नां जयदा चुदाई मालती कि करता थां हरिपाल संगीता अपने मे लगे रहते थें यहीवजह थि कि मालती अपने दामाद सें फस्ती चली गई
मनोज केँ संग बातें करते मालती कां दिललगा रहतायह सभी मालती केँ लिये मोबाइल पे गंदी बातें करनानया थां चूत मे आग लगती तौ मोबाइल पे बातें करते उंगली करकेझर जाती
पर्जेंट दोपहर 12 बजे
माधुरी रामपाल केँ लिये खानां लेके खेतो मे घऱ सें निकल परती हैं माधुरी खेत सें होते हुवेजब जारही होती हैं तोँ मन मे - मेरा भइया मुझे परेसान करता रहता हैं वैसे जयदा प्रसां तोँ नहीं करतामगर फिन भि भइया हैं मेरा कियाकरू मे
माधुरी उसरात कों याद करते हुवेमन मे - मेरी चूत मे पहलीबार कुछ गय़ा तोँ वोँ मेरे भइया कां उंगली थां कितना अजीब हैं मेरे भइया नें मेरा फायेदा उठा केँ मेरी चूत मे उंगली कि चुचे दबाये क़िस्मत सें अपने आप् कों बचाते हुवेआई हु नहीं तौ उफ मे क्याँ सोचने लगीहु
माधुरी आगे देखते हुवे - चलो आँ गई ससुरजी जी कों पेट औऱ चुदाई दोनों कि भूखलगी होगी
माधुरी मुस्कुराते हुवे रामपाल केँ केँ पासआती हैं दोनों खानां खाने लगते हैं
वही हरिपाल केँ घऱ
हरिपाल संगीता घऱ केँ पीछे बातें कररहे होते हैं जूही कों दूध पिला केँ सुला दिया होता हैं
हरिपाल संगीता कों देख - बहु खटिये पे लेतजाओ
संगीता खटिये पे लेत हरिपाल कों देख - अब क्याँ
हरिपाल घऱ कि तरफ देखते हुवे - अपनी पेटीकोट सारीउपर करो
संगीता हैरान होके हरिपाल कों देख - ससुरजी जी रिस्क हैं कोई आँ सकता हैं
हरिपाल संगीता केँ पास बैठा संगीता कों देख - पीछेकोई आँ नहीं सकताआगे तेरी सासू माँ कमरे सें निकलती नहीं हैं
संगीता कों डर तोँ लगरहा थां मगर पेटीकोट सारीउपर करके अपनी तांगे फैला देती हैं पूरीसाफ चूत हरिपाल केँ समाने थि
हरिपाल बैठे हि अपनेहाथ संगीता केँ चूत केँ रख अंगुटे सें संगीता कि चूत कों सहलाने फाको केँ बीच घिसने लगता हैं संगीता खटिये मे तेरी पेटीकोट सारीउपर किये तांगे फैलाए हरिपाल कों देख - अहह ससुरजी जीउफ बहुत आनंदआता हैं जब आप् मेरी चूत केँ संग खेलते हैं
हरिपाल चूत कों मसलते हुवे संगीता कों देख - इतनी प्यारी टाइट चूत हैं मेरीबहु कि मज़ा तोँ आयेगा हि नाँ अहहबहु कितनी गरम चूत हैं तेरी
वही मालती मनोज सें बातकर रही थि
मनोज - माँ जी आप् मुझसे प्रेम करती हैं
मालती - यह भि कहने कि बात हैं
मनोज - मां जी मुझे आप् पसन्द हैं महीने सें बातकर रहे हैं मे कों पूछने वालाहु उसका जवाबसच मे दीजियेगा
मालती लेतीहु सोचने केँ बाद - ठीक हैं पूछीये
मनोज - आप् मुझे बातें करने केँ लिये राजी माधुरी कि वजह सें हुई औऱ मे रण्डी केँ पास नां जाऊ उसके लिये भि सच हैं
मालती - हासचकहा आपने
मनोज - महीने सें बातें करते आँ रहे हैं आपको मुझसे गंदी बातें करने मे आनंदआता हैं नाँ सच
मालती थोरा सर्म सें धीरे-धीरे सें - हासच हैं
मालती मन मे - पति जीबहु दोनों लगे रहते हैं मे अकेले रह जातीहु आपसेबात करते हुवे मुझे आनंदआने लगा इतनाजोस गरम हौ जातीहु मुझे स्वयं एहसास नहीं होता गंदी बातें करते चूत मे उंगली करकेजब मे झरतिहु चैनमिल जाता हैं
मनोज - आप् मुझसे गंदी बातें करते हुवे चूत मे उंगली करती हैं सच
मालती शोक मे हैरान होके - आपको केसेपता चला
मनोज मुस्कुराते हुवे - चूत गीली होती हैं तब लन्ड जाये याँ उंगली फच्फच् कि आवाजे आती हि हैं सच हैं
मालती सर्म सें धीरे-धीरे सें - हासच हैं
मनोज नाराज होके - तौ मे कहताहु तब कियु नहीं करती मां जी मुझे आप् बहुत जयदा पसन्द हैं मेरी भि तौ सोचिये
मालती - ठीक हैं दामाद जी जोँ बोलगे करुगी
मनोजखुश होके - सच मां जी
मालती धीरे-धीरे सें - सच
मनोज - आईलोव यू मां जी
मालती सर्म सें - आईलोव यू दामाद जी
मनोजखुश होके - मां जी आपके बताया थां आप् कों किसी औऱ नें चोदा हैं उसकानाम तोँ नहीं बताया मगर मे जानना चाहता हुकब कि बात हैं
मालती मन मे - तेरा बाप हैं दामाद जीबता नहीं सकतीमगर देखो भाग्य कां खेल हमारे बीच किया हौ रहा हैं
मालती - माफ करना दामाद जीबता नहीं सकती
मनोज - समझ सकताहु इतना तौ बता सकती हैं हैं दिन मे रात मे कितने बार आपको चोदा थां
मालती मुस्कुराते हुवे - ठीक हैं बताती हुरात कों एक् बार
मनोज हैरान होके - किया एक् बार उसकेबाद
मालती - उसरात केँ बादकभी नहीं
मनोजगरम होके लन्ड पैंट केँ ऊपर सें मसलते हुवे - बहुत आनंदआया होगा
मालती - हु बहुत मज़ाआया थां
मनोज - उसकेबाद कभीआज तक उसने चोदा आपको
मालती - नहीं कियुंकी मे डरती थि किसी कों पताचला तौ सभीखतम होँ जायेगा
मनोज - अच्छा अब मुझसे बातें करते हुवेडर नहीं लगता
मालती - लगता हैं मगरयह मामला अलग हैं
मनोज - हु केसे सुरुहुआ थां सभी
मालती - बस हौ गय़ा अचानक सें
मनोज - अच्छा मां जी मुझे आपको ब्लाउस मे देख्ना हैं देख्ना चाहता हु आपकेबरे चुचे केसे ब्लाउस मे कसे दिखते हैं
मालती सर्म सें - अच्छा तौ यहवजह हैं स्क्रीन टच मोबाइल मुझे दिलाने कि
मनोज मुस्कुराते हुवे - हा मुझे उमीद थां एक् दिन हम् यहा तक आँ जायेंगे माँ जी ससुरजी जी आपकी प्रेम नहीं करतेमगर मे करुगा संग दोगी नां आप्
मालती सोचते हुवे - दामाद जी छोटे सें बरे होते आपको देखा हैं अचनाक् हमारे बीचसभी सुरुहुआ मगर मुझे आप् बहुत मनपसंद आँ गये हैं इस लिये जौ बोलेंगे करुगी
मालती मन मे - पता नहीं केसे दामाद जी मुझे इतना मनपसंद आँ गये कि एक् दिन दामाद जी सें बातें करते हुवे मे रह नहीं पातीहु
मनोज - आपको पाकेबता नहीं सकता मे कितना स्वयं हु माँ जी एक् फोटो भेजिये नजदीक सें चुचे केँ
मालती सर्म सें - अच्छा भेजती हु
मनोज बेताबी सें इंतजार करने लगता हैं तभी फोटोआती हैं जिसेदेख मनोज पागल होके देखने लगता हैं पीलेरंग बिरंगे ब्लाउस मे मालती केँ बरे टाइट चुचेकैद थें मगरआधे उपर सें गोरे गोरे रसीले चुचेबीच केँ दरारगजब केँ दिखरहे थें मालती केँ ब्लाउस मे कैद चुचे बहुतगजब लगरहे थें
मनोज - मां जी क्याँ नजारा दिखा दिया अपने इतने मे मेरी हालत खराब हौ रही हैं आगेपता नहीं क्याँ होगा
मालती सर्म सें - मनपसंद आया कैसालगा आपको
मनोज - बहुत हसीन सेक्सी उफ मां जीबरे बरे चुचे हैं आपके
मालती धीरे-धीरे सें - हाबरे तोँ हैं आपको पसन्द आयाजान खुशीहु अच्छा मे रखतीहु फिनबाद मे बात करेगे
मनोज - एक् किस देदो
मालती सर्म सें - उमाउमा
मोबाइल कट
मनोज खुशी सें पागल होके - आखिर वाहन अपनी सासू कों पता हि लिया उमीद नहीं थि मगरअहह माँ जीअब आपको अच्छे सें लूंगा
मालती बैड पे लेतीमन मे - किसने सोचा थां इसउमर मे आके मे अपने दामाद सें फस जाउंगी
मालती अपने रामपाल केँ बीच चुदाई कि उसरात कों याद करते हुवे - आपकेसंग बहुत आनंदआया थां मगर दामाद जी केँ संगअलग हि मज़ाआता हैं बातें करने मे उसरात जौ हुआ
( रामपाल मालती पास्ट् सुरु होता हैं )
रामपाल नें मालती अपनेयार कि पत्नि कि चुदाई 6 महीने पहले कि थि उस टाइम संगीता पेग्नेंट थि हरिपाल मालती संगीता कों लेके रामपाल केँ यहाआया हुआ थां अशोक मनोज तोँ सेहरचले गये थें
उसरात संगीता माधुरी एक् कमरे मे सोनेचले गये थें औऱ हरिपाल रामपाल बाहर् खटिये मे मस्त खानां सराब पीकेसो रहे थें
मालती अकेली कमरे मे सोरही थि
रातजब रामपाल कों प्रेम लगती हैं तौ आगन् मे आता हैं तब मालती भि पिसाब करकेकल पे हाथ धोनेआती हैं रामपाल कों देख - अरे आप् प्यास लगी हैं क्याँ
रामपाल मालती कों देख - जी भाभी
मालती हस्ते हुवे - भाभी नहीं समधन कहिये
रामपाल मालती कों देख - दो रिश्ते हैं मेरामन वैसे भाभी मे बहुत फायेदे हैं
मालती मुस्कुराते हुवे - मगरकोई फायेदा नहीं मिलेगा
मालती कल चलते हुवे - पी लीजिये प्यास लगी हैं तोँ
रामपाल हाथो मे पानी लेके पीने लगता हैं पानी पीने केँ बाद
रामपाल मालती केँ पासखरा होके मुस्कुराते हुवे - मुझे तौ प्रेम लगी थि तौ आया आप् कहा सें आँ रही हैं
मालती शर्मा जाती हैं
मालती मुस्कुराते हुवे - आपको जानने कि जरूरत नहीं हैं
रामपाल मालती केँ लगभग जाकेकान मे धीरे-धीरे सें - आप् पिसाब करने गई थि हैं नां
मालती बहुतशोक सह सें लाल होके रामपाल कों देख - छि बेसरम इस लिये भाभी कहते हैं ताकि गंदी बातें करसके
रामपाल मालती कों हिम्मत करके बाहों मे लेके मालती कि आखो मे देख - हा भाभी
मालती रामपाल कि बाहों मे अजीब मेहसूस करती हैं
मालती रामपाल कों देख - देखिये यहसही नहीं हैं जाने दीजिये
रामपाल मालती कों देख - भाभी प्लेस आज मुझेपता नहीं क्याँ होँ रहा हैं आप् कों देख मे औऱ बेहकरहा हु प्लेस भाभी एक् बार मुझे करने दीजिये प्लेस एक् बार
मालती शोक मे रामपाल कों दूर करके हुवे धीरे-धीरे सें - आप् पागल होँ गये हैं क्याँ कैसी बातें कररहे हैं मे आपकीयार कि पत्नि हु
रामपाल कि आखेनम हौ जाती हैं आज रामपाल कों अपनी पत्नि कि बहुतयाद आँ रही थि ममता केँ जाने केँ बाद सें रामपाल नें जिस्म कां बदन कां भोग नहीं लेँ पाया थां
मालती जब देखती हैं रामपाल बहुत दुखी हैं तोँ मालती कों समझआता हैं रामपाल आज कियु इतना दुखी हैं उसकेसंग करने कि कोसिस कररहा थां रामपाल कों दुखी दर्द मे देख मालती कों भि बहुतदुख होता हैं
मालती कों ममता कि कहीबात यादआती हैं जब ममता बीमार बैड पे लेती थि औऱ मालती उसकेपास बैठी थि
ममता मालती कों देख दर्द मे - मेरी मित्र मेरी भाभी मे अपने पति कों बीचसफर मे छोरजा रहीहु वोँ अकेले पर् जायेंगे संगीता मनोज मेरे पति कां ख्याल रखना मे जानती हु तुम् रखोगी औऱ देवर जीजी तौ हैं हि मालती उन्हें टूटने मत देना हौ सके तौ उन्हें दूसरी विवाह करने कों कहना अकेले जीवन जीना उनके लिये मुश्किल होँ जायेगी वादा करती होँ
मालती आसु बहते हुवे ममता केँ हाथपकर - हा वादा करतीहु
ममता केँ जाने केँ बाद हरिपाल मालती नें रामपाल कों दूसरी विवाह करने केँ लिये बहुतकहा मगर रामपाल नें साफमना कर दिया
ममता केँ नां होने सें मालती नें हि संगीता औऱ मनोज कों मा कां प्रेम दिया
मालती सभीयाद करके रामपाल कों लेके अपने कमरे मे आती हैं दोनों बैठ जाते हैं
मालती रामपाल कों देख - जानती हु देवर जीजी आपने बहुतकुछ सहा हैं मे एक् विवाह सुधा स्त्री हु आपकीयार कि पत्नि हामरे बीचकुछ होता हैं औऱ यहबात पति जी किसी कों पता चलती हैं तौ सभीकुछ टूट केँ बिखर जायेगा आपकी पति जी कि दोस्ती महारे बीचबने नये रिश्ते सभीकुछ
रामपाल नजरे नीचे किये - जनताहु माफकर देना भाभी मे बेहक गय़ा थां
मालती रामपाल कों देखती हैं फिनखाट पे लेत केँ रामपाल कों देख - मगर अभि एक् बार आप् मेरेसंग कर सकते हैं मगर केवल एक् बार मे नहीं चाहती किसी कों पताचले सभी बिखरटूट जाये
रामपाल हैरान मालती कों देख - सच भाभी
मालती - हा जल्दकर लीजिये
रामपाल - भाभी आप् संग देगी नाँ मुझेऐसा नां लगे मे आपका फायेदा उठारहा हु
मालती रामपाल कों देख - ठीक हैं पूरासंग दुगी
रामपाल खरा होके होके मालती कों देखता हैं मालती सीने सें सारीहटा देती हैं रामपाल औऱ हैरान होता हैं मालती उफ कियालग रही थि ब्लाउस केँ कसे दोनों बरे चुचे पहार् जैसेखरे थें मालती केँ गोरे चिकने पेट गहरी ढोरीउफ किया बवाललग रही थि मालती
रामपाल भि कईसाल सें भूखा थां मालती कों इसतरह देख अंदर कि आग भरक् जाती हैं
मालती रामपाल कों देखमन मे - जौ होने वाला हैं गलत हैं मगर अपनेयार देवरु जी कों टूटता नहींदेख सकती
वक़्त कम थां जल्द सें पूरा मज़ा लेना थां इस लिये रामपाल बिना देरी किये पूरा नँगा हौ जाता हैं रामपाल कां खरा लन्ड मालती केँ नजरो केँ सामने थां मालती रामपाल केँ लन्ड देख सर्म सें मन मे - पति जी सें थोराबरा मोटा हैं सोचा नहीं थां आजयहसभी होगा हमारे बीच
रामपाल मालती कों देख - भाभी आपनेकहा थां पूरासंग देगी तोँ आइये नाँ मेरे लन्ड कों मुह मे लेके चूसिये नाँ
मालती खाट सें उठके रामपाल केँ पासआके खरी होके सर्म सें - ठीक हैं देवरु जी मेने जोँ कहा करुगी आपकासंग दुगी
आज केँ लिये इतना हि
बहोत हि गरमागरम कामुक औऱ उत्तेजना सें भरपूर कामोत्तेजक भाग हैं भइया आनंद आँ गय़ा
bohot badhiya shaandar update Manoj ne apni saas kee agni bHadka di hain halanki sasur haripal tow apni bahu mai laga hua hain biwi kee koyi samachar hi nahinleta Lagta rampal hi thandi karega apni samdhan ko
मक्के केँ खेत मे – New Episode
chapter 16
( रामपाल हरिपाल पास्ट् - 6 महीने पहले )
मालती रामपाल केँ पासखरी थि रामपाल पूरा नँगाखरा थां मालती नीचे बैठते हुवे रामपाल केँ लन्ड कों हाथ मे पकर लेती हैं
रामपाल मालती कों देख - अहह भाभीअब देरमत करो
मालती रामपाल कों एक् नजर देखती हैं फिनमुह मे लन्ड लेके चूसने लगती हैं रामपाल ममता केँ जाने केँ बाद बेचरा तरप्तरस केँ जीरहा थां अब जाके उसके लन्ड कों किसी नें पकरा किसी केँ मुह मे गय़ा थां
मालती घुटने पे बैठी लन्ड कों पकरे हुवेमजे सें मुह मे लेके चूसने लगती हैं रामपाल मालती कों देख - उफ भाभी आप् तोँ मस्तचूस रही हैं अहह भाभी आपकोबता नहीं सकता कितना तरप्रहा थां मे अब जाके मेरे लन्ड कों कोई मिला हैं वोँ आप् हैं चूसिये अहह
मालती मजे सें लन्ड चुस्टे हुवेमन मे - अहह मज़ा तौ मुझे भि आँ रहा हैं देवर जीजीउफ कितना गरम मोटा लन्ड हैं पति जी सें थोराबरा हैं
लन्ड चूसने केँ बाद मालती बैड पे जाकेलेत जाती हैं रामपाल टैंगो केँ बीचआके पैंटी साइड करके चूत चूसने लगता हैं मालती कों बहुत आनंदआने लगता हैं मालती - उफअहह देवरु जी चुसो मेरी चूत कों अहहआज बहुतमन थां चुदाई कां मगर आपके मित्र तौ सोगये
उफअबअहह आप् कि चोद केँ मेरी चूत कि गर्मी निकाल दीजिये
रामपाल मजे सें चूत चाटते चूसते हुवेमन मे - मेरी साथी कि पत्नि कि चूत चूस केँ स्वाद लें रहाहु अहह कितनी फूलीगरम चूत हैं
मालती पलंग पकरे रामपाल कां सर अपनी चूत औऱ दबाते हुवे झरने लगती हैं
रामपाल मालती कों देख - आप् कि चूत मे आगलगी हैं हरिपाल चुदाई नहीं करता क्याँ सही सें
मालती रामपाल कों देख हफ्ते हुवे - पहले जैसे नहीं करतेअब मुश्किल सें हफ्ते मे 1 बार
रामपाल मन मे - इतनी हसीन पत्नि हैं औऱ साला चोदता नहीं हैं औऱ मे यहा तरप् केँ जीरहा हु
रामपाल बेचारे कों पता हि नहीं थां हरिपाल तोँ उसकी बेटी संगीता कि हि जयदा लेने मे लगा रहता हैं जवान सुंदर बहु मिली हैं
रामपाल मालती केँ ऊपरआके चूत केँ लन्ड घुसा केँ मालती कों किस करते हुवे चुदाई करने लगता हैं मालती रामपाल कों देख - अहह देवर जीजी अपने मित्र कि पत्नि कों चोद हि दिया घुसा दिया चूत मे मे लन्ड
रामपाल धक्के मरते हुवे मालती कों देख - साथी आपकी चूत नहींमार रहा तौ मेरा फर्ज़ हैं अहह भाभी बहुत गर्मी कसी चूत हैं आपकी
मालती सिसकिया लेते हुवे - उफ क्याँ बताऊं देवर जीजीबस अभि तोँ आप् मेरी चूत कि गर्मी निकाल दोबसअहह बहुत मज़ा आँ रहा हैं
रामपाल घुटने पे बैठ मालती केँ मोटे दोनों जांघो कों पकरे मालती कों देख चुदाई करते हुवे - उफ भाभी आप् कमाल कि हैं अहह चुदाई करने मे अलग हि मज़ा आँ रहा हैं भाभीआज तौ मेरी भाग्य पे यकीन नहीं होँ रहा मे आपकी चुदाई कररहा हु
मालती लेती चुदाई कां मज़ा लेते हुवे - उफ देवरु जीकरलो यकीन आप् मेरी चूत मे अपना लन्ड घुसा केँ मुझेपेल रहे होँ चोदरहे हैं
अब मेरीबरी हैं
मालती रामपाल कों पलंग पे लेता केँ रामपाल केँ ऊपरआके लन्ड कों चूत मे लेते रामपाल केँ ऊपरलेत केँ गांडआगे पीछे करते हुवे लन्ड कि सवारी करने लगती हैं रामपाल भि मालती कि गांड पे हाथरखे दबाते हुवे - अहह भाभी मस्त लन्ड कि सवारी करती hain आप्
मालती रामपाल कों किस करते हुवे - अहह आपका लन्ड दमदार हैं तोँ सवारी करने मे भि आनंद आँ रहा हैं अहह मे झरने वालीहु अहहमा
40 मिनट चुदाई केँ बाद
मालती रामपाल कों देख - अब जाइये
रामपाल कपड़े पहनखरा होके मालती कों देख - मज़ाआया याँ नहींयह तोँ बता दीजिये
मालती सर्म सें - बहुत आनंदआया सच मे मगर जैसा मेनेकहा थां एक् बार हि थां
रामपाल - समझ गय़ा एक् बार हि सही आपकी चुदाई करनेचैन मिल गय़ा
रामपाल चला जाता हैं मालती बैड पे हफ्ते हुवे - सच मे देवरु कि आपकेसंग अलग हि आनंदआया पहलीबार मेरी चूत केँ किसी औऱ कां लन्ड गय़ा हैं
तौ यही थि स्टोरी 6 महीने पहले रामपाल नें मालती कों चोदा थां उसकेबाद मालती बीच मे आईमगर चुदाई नहीं हुइ
( अब पर्जेंट मे आते हैं )
अगलेदिन दोपहर 12 बजे मनोजफिन मालती कों मोबाइल करता हैं मालती हरिपाल संगीता सभीघऱ केँ पीछेपैर केँ नीचे बैठे बातें कररहे होते हैं
मालती जूही कों लेके खेलारही होती हैं मोबाइल रिंग होता हैं तौ मालती समझ जाती हैं उसके दामाद कां मोबाइल हैं
हरिपाल मालती कों देख - किसका मोबाइल आया हैं देखो तौ
मालती मोबाइल देखते हुवे - मेरीयार कां हैं
मालती संगीता कों जूही देते हुवे - मे बात करतेआती हु
मालती चली जाती हैं तोँ हरिपाल संगीता कों बाहों मे लें लेता हैं
संगीता हरिपाल कों देख हस्ते हुवे - माँ जी केँ जाते हि टूट परते हैं
हरिपाल संगीता केँ चुचे दबाते हुवे - क्याँ करू तुँ मस्तमाल जौ हैं
बहु एक् बारखेत मे करते हैं नाँ
संगीता जूही कों देख - पहले आपकी बेटी कों दूध पीला केँ सुला देतीहु फिनचोद लेना अपनीबहु कों
हरिपाल मुस्कुराते हुवे - जैसी मेरीबहु कहे
दूसरी तरफ मालती कमरे मे आके दरवाजा बंद करकेखाट पे लेटते हुवे - बोलिये दामाद जी
मनोज - दिनरात आपकोयाद करताहु मां जीअहह आपकोयाद करते हि मेरा लन्ड खरा हौ जाता हैं
मालती अपनी चूत पे सारी केँ ऊपर सें हाथ रखते हुवे - उफ दामाद जी मेरा भि वहीहाल हैं पता नहीं केसेमगर मुझे आप् मनपसंद आँ गये हैं
मनोज - मां जी अपने दामाद कां लन्ड देखेगी
मालती चूत सेहलाते हुवे - हा देख्ना हैं
मनोज - वीडियो फोन करताहु
मालती गरम होके - ठीक हैं
मनोज वीडियो फोन करता हैं
मनोज अपना लन्ड दिखते हुवे - कैसा हैं माँ हि आपकी चूत मे जाने केँ लिये देखिये केसे तरप्रहा हैं
मालती गरम मदहोसी मे मनोज कां लन्ड देख अपनी चूत सेहलाते हुवे - उफ बहुत मोटा प्यारा हैं अहह मेरी चूत गीली होनेलगी हैं
मनोजजोस मे पागल होके - मां जी अपने चुचे दिखाइये नाँ
मालती - ठीक हैं दामाद जी दिखती हु
मनोज बेताबी मे लन्ड हिलाते हुवे इंतजार करने लगता हैं
मालती ब्लाउस केँ बटन खोलके दोनों नंगे चुचे दिखते हुवे - दामाद हि देख लीजिये अपने सासू माँ कि नंगी चुचे
मनोज मालती अपने सासू माँ केँ नंगे चुचेदेख पगल होके - उफ माँ जी बहुत सुंदर टाइटबरे चुचे हैं आपके काले निपल बहुत अच्छे लगरहे हैं शपथ सें माधुरी सें बरे सुंदर चुचे हैं आपके
मालती सर्माते हुवे - सच आपको मेरे चुचे अच्छे लगे
मनोज लन्ड हिलाते हुवे - बहुत जयदा मां जीबता नहीं सकता चूत दिखाइये नां रहा नहींजा रहा
मालती मोबाइल कों एक् स्थान रखते हुवे मनोज कों देख सर्म सें - ठीक हैं दामाद जी अपनी चूत दिखती हु
मालती बैड पे लेत पेटीकोट सारी पूराउपर करके अपनी दोनों तांगे उठा देती हैं मालती कि छोटे बालों वाली चूत नंगी मनोज केँ सामने थि
मनोज केँ खुशी औऱ जोस कां कोई ठिकाना नहीं थां मनोज कां लन्ड फटने लगता हैं मनोज तेजी सें लन्ड हिलाने लगता हैं
मनोज मालती कि फूली गीली चूत देखते हुवे लन्ड हिलाते हुवे - मां जीउफ किया दिखा दिया अपने बहुतगजब कि चूत हैं आपकी मोती छोटे बालो वाली चूत अहह आपकी चूत गीली होकेरस निकाल रही हैं
मालती पलंग पे लेते तांगे उठाये सर्म सें - उफ दामाद हि बहुत सर्म आँ रही हैं मगर खुशी भि हैं आपको मेरी चूत मनपसंद आई
मनोज - कैसी बातें कररही हैं आप् मेरी सासू कि चूत हैं एसी चूत सें माधुरी जैसी सुंदर लरकी निकली हैं अहह तोँ वोँ चूत हसीन होगी हि अहह माँ जी चूत मे उंगली करिये नाँ
मालती सर्म सें - अच्छा करतीहु दामाद जी
मालती तांगे फैला देती हैं औऱ दो उंगली अपनी गीली चूत केँ अंदर घुसा केँ उंगली करने लगती हैं गीली होने कि वजह सें फच्फच् कि आवाजे मनोज कों सुनाई देने लगती हैं यहसीन अपनी सासू माँ कों चूत मे उंगली करतेदेख मनोज पागल होके लन्ड हिलाने लगता हैं
मनोज लन्ड हिलाते हुवे - अहह मां जी औऱ तेज उंगली करो नाँ
मालती औऱ तेज उंगली करते हुवे - अहह दामाद हि कररही हुउफ
मनोज - उफ मां हि आपकी चूत पानी निकाल रही हैं
मालती तेज उंगली करते हुवे - मर गई अहह दामाद जी मे झरने वालीहु अहहमा बहुत अच्छा लगरहा हैं देखरहे हैं नां आप् दामाद जी
मनोज - अहह माँ जी मे भि झरने वालाहु
मालती - आने वाला हैं अहह आँ गय़ा दामाद जी निकलने वाला हैं
मनोज - उफ मेरा भि अहह मां हि मस्त चूत हैं आपकी
एक् संग मालती मनोजझर जाते हैं
मनोज हफ्ते हुवे - इतना मज़ा तोँ आज तक मुझे नहींआया
मालती हफ्ते हुवेमन मे - मोबाइल मे मे ऐसे दामाद जी कों चूत मे उंगली करते हुवे दिखते हुवे झरुगी सोचा नहीं थां मगर जोँ आनंदआया बता नहीं सकतीआज मे जल्दझर गई पता नहीं कियु दामाद जी सें बातें करते हि मे बहुतजोस मे आँ जातीहु
मनोज - मां जी मे जल्दआने वालाहु आपकी चूत मारुंगा अच्छे सें
मालती उठकर बैठते हुवे मोबाइल हाथ मे लेके - इतना चोदना हैं चोद लेना दामाद जी मे स्वयं बेचैन हु आपसे चुदने केँ लिये
मोबाइल कट
हरिपाल संगीता कि चुदाई करके लेता होता हैं संगीता जूही कों लेके कमरे मे आकेसो गई थि
हरिपाल खटिये मे लेतापैर कों देखते हुवे ममता कों याद करने लगता हैं
हरिपाल मन मे - ममता भाभी आपकी बहुतयाद आती हैं आप् बहुत अच्छी थि मस्ती करने वाली आपके जाने केँ बाद रामपाल टूट गय़ा मे भि आपकेसंग बिताये समय बहुतयाद आते हैं
( हरिपाल ममता पास्ट् सुरु करते हैं )
हरिपाल ममता केँ बीचे चुदाई कां खेलतब सुरुहुआ थां जब ममता जिंदा थि मनोज संगीता xxx केँ थें
रामपाल ममता अपने बच्चो केँ संग हरिपाल केँ घऱआया हुआ होता हैं शाम कां वक्त होता हैं हरिपाल ममता कों खेत घुमाने लेकेआया होता हैं औऱ रामपाल मालती केँ संग मस्ती करने मे लगाहुआ थां
हरिपाल ममताखेत देखते हुवे चलते हुवे बातें करते हुवेजा रहे होते हैं
हरिपाल ममता कों देख - भाभी आप् इतनी सुंदर हैं कि मुझे अपने कमीने यार सें जलन होती हैं
ममता हस्ते हुवे - अरे देवर जीजी मालती भाभी भि तौ बहुत हसीन हैं
हरिपाल मुस्कुराते हुवे - मालती हसीन हैं मगर आपसे जयदा नहीं
मालती हरिपाल कों देख - अच्छा जीऐसा कियु
हरिपाल ममता केँ पासखरा होके ममता कों देख - आपकी सुंदर आखे गुलाबी होठ सुंदर चेहरा आपकी पर्फेट बॉडीकोई कमी नहीं हैं आपमें भाभी
ममता सर्म सें - आप् भि नां देवर जीजी
हरिपाल हिम्मत करके ममता कों बाहों मे धीरे-धीरे सें भर लेता हैं ममता हैरान हरिपाल कों देख - देवर जीजी आप् यह कियाकर रहे हैं
हरिपाल मुस्कुराते हुवे - अरे मेरी भाभी हैं आप् इतनाहक तौ हैं
ममता मुस्कुराते हुवे - अच्छा जीऐसी बात हैं मगरकोई देख लेगा
ममता कि बातसुन हरिपाल कि हिम्मत औऱ बढ़ जाती हैं
हरिपाल ममता केँ होठो पे उंगली फेरने लगता हैं ममता सिसकिया परती हैं सिहर जाती हैं अजीब कि हलचल ममता कि बॉडी मे होने लगती हैं हरिपाल धीरे-धीरे सें ममता कों देखते हुवे अपनाहोठ आगे लेँ जाने लगता हैं यहदेख ममता हरिपाल कों पीछे करते हुवे - अबचले
हरिपाल सर्मिंदा होते हुवे - सोर्री भाभी चलते हैं
तभी हरिपाल यादों सें बाहर् आँ जाता हैं कियुंकी मालती हरिपाल केँ पासआके बैठ गई थि
( पास्ट् यही रोकते हैं )
वही अशोक दफ़्तर मे बैठा माधुरी कों याद करकेमन मे - केसे भि मुझे अपनी बेहन कों चोदना हैं कुछ करना परेगा
अशोक माधुरी कों मोबाइल करता हैं तोँ माधुरी रामपाल कों खानां देके चुदवा केँ आँ गई थि औऱ कमरे मे लेती सोने कि कोसिस कररही थि
अपने भइया कां मोबाइल देख माधुरी परेसान होके मोबाइल उठा लेती हैं
माधुरी - हा भइया बोलिये
अशोक - बेहन तुमने बोला थां चूत मे उंगली करोगी
माधुरी गुस्से सें चिल्लाते हुवे - नहीं करुगी समझगये आप् जैसा भइया किसी कां नाँ होँ कितने गिरगये हैं आप् मुझेघिन आती हैं आपसे मुझे आपकीसकल भि देख्ना मनपसंद नहीं
माधुरी गुस्से मे अशोक कों बहुतकुछ सुना देती हैं
अशोक कों बहुत बुरा लगता हैं अशोकभले हि माधुरी कों परेसान करनेलगा थां मगर उससे पहले छोटे सें बरे होने तक माधुरी कों बहुत प्रेम करता थां ख्याल रखता थां आजउस प्यारी बेहन केँ मुह सें इतनासभी कुछ सुनके अशोक कों बहुत बुरा लगता हैं
अशोक - सोर्री बेहनअब परेसान नहीं करुगा
मोबाइल कट
माधुरी कां क्रोध जबसंत होता हैं तब जाके माधुरी कों भि बहुत बुरा लगने लगता हैं
माधुरी मन मे - मेनेयह क्याँ कर दिया गुस्से मे अपने भइया कों क्याँ कुछबोल दिया जैसे भि हैं मुझसे बहुत प्रेम करते हैं भले हि अब उनकीनजर बुरी होँ गई मुझे लेकेमगर उसकेबाद भि उनकेदिल मे मेरे लिये बहुत प्रेम हैं क्याँ कर दिया माधुरी भइया कों बहुत बुरालगा होगा
( हरिपाल ममता पास्ट् )
हरिपाल ममता कां खेत मे किस होते होतेरह गय़ा थां जबसभी घऱआते हैं रात कां खानां खाते हैं संग मे बैठ बहुत सारी बातें करते हैं
उसकेबाद सब अपने कमरे मे चले जाते हैं
हरिपाल थोरिदेर बाद बाहर् आके खटिये लेत जाता हैं आसमान कों देख ममता कों लेके सोचने लगता हैं 30 मिनटबाद
ममता बाहर् आती हैं तोँ हरिपाल कों खटिये मे लेतादेख हैरान होती हैं ममता हरिपाल केँ पासआके - आप् अंदर सोनेगये थें नां
हरिपाल ममता कों देख - भाभी खुले मे सोने कां अलग मज़ा हैं
ममता हरिपाल केँ पास बैठते हुवे - वोँ तौ हैं
फिन संति
तभी हरिपाल ममता कां हाथपकर अपनेसंग खाट पे लेता देता हैं ममता हरिपाल कों देख - कियाबात हैं
हरिपाल हिम्मत करके - भाभी आप् समझ नहीं हैं मुझे क्याँ चाहिये
ममता हरिपाल कों देखती रहती हैं
हरिपाल ममता केँ गाल सेहलाते हुवे - पता नहीं कियु आपको देखता हु तोँ स्वयं कों रोक नहींपता
हरिपाल ममता कि सारीउपर करने लगता हैं तोँ ममता हरिपाल केँ हाथ कों पकररोक देती हैं हरिपाल ममता कों देख - आपकीआखो मे साफदेख रहाहु आपका भि मन हैं भाभीमत रोकिये मुझे
ममता हरिपाल कों देख - गलत हैं
हरिपाल ममता केँ एक् चुचे दबाते हुवे - नहीं हैं
ममता केँ मुह सें सिसकिया निकाल जाती हैं
हरिपाल खरा होके ममता कों गोदी मे उठा केँ एक् खाली कमरे मे आता हैं औऱ ममता कों नीचे उतार देता हैं
ममता हरिपाल कों देख - प्लेस देवरु जी समझिये गलत हैं रुक जाइये
हरिपाल ममता कों पीछे सें बाहों मे लेके कसते हुवे नहीं भइयाआज नहीं
ममता हरिपाल कों दूर करते हुवे - मतकरो
हरिपाल ममता कों देख - भाभी एक् बार अपनी चूत मे मेरा लन्ड लेके देखो बहुत आनंद आयेगा
हरिपाल ममता केँ पासआके आखो मे देख - आपकीइस आखो मे अधूरी प्रेम दिखाई देती हैं मुझे वादा हैं यहराज रहेगा मे आपको बहुत प्रेम दूंगा आपकी चूत कि सेवा अपने मोटे लन्ड सें करुगा आज आप् चली गई तौ फिनकभी मे आपसेजोर नहीं करुगा
ममता हरिपाल कों देख अपनी सारी निकलते हुवे - कर लीजिये जोँ करना हैं मगर किसी कों पता नाँ चले
हरिपाल भि जल्द सें कपड़े निकलते हुवे - नहीं चलेगा
आज केँ लिये इतना हि
मक्के केँ खेत मे – New Episode
chapter 16
( हरिपाल ममता पास्ट् )
हरिपाल केँ कहने पे ममता भि हार मानते हुवे हरिपाल कों चूत देने केँ लिए रेडी हौ जाती हैं कमरे मे हरिपाल ममता पुरे नंगे थि माधुरी संगीता रामपाल सभी अंजान आहिस्ता सोरहे थें
ममताखाट पे जाके तांगे फैलाते हुवेलेत जाती हैं हरिपाल ममता केँ सामने खरा ममता कि सुंदर नंगी बॉडी कों हैरान होके देखने लगता हैं ममता कों बहुत सर्मआने लगती हैं
सच मे ममता कयामत लगलगरही थि सफ़ेद भरा जिस्म बरेबरे दोनों चुचे केँ काले निपल मोटे जांघों केँ बीच फूली छोटी काले बालों वाली चूत देख रामपाल ममता सें - उफ भाभी जनता थां अंदर खजाना बहुतगजब कां होगामगर जौ सोचा उससे जयदा हि निकल गय़ा भाभीउफ आप् बहुत कयामत हसीन हैं सच मे
ममता सर्म सें - आप् भि नां देवरु जी मुझे सर्म आँ रही हैं
हरिपाल ममता केँ ऊपरआके पेट चूमने लगता हैं ममता सिसकिया लेने लगती हैं हरिपाल पेट सेहलते चूमते हुवेउपर जाके ममता कों किस करने लगता हैं जीभर केँ रस पीने केँ बाद रामपाल ममता केँ चुचे दबाने लगता हैं ममताअहह उफ करने लगती हैं
हरिपाल फिन एक् चुचेमुह मे लेके चूसने लगता हैं ममता सिसकिया लेते मचलते हुवे - अहह देवरु जीउफ अच्छा लगरहा हैं चूसिये मेरे चुचे कों अहहउफ
हरिपाल खूब अच्छे सें चुचे दबाते हुवे चुस्के पिता हैं
हरिपाल बैड पे लेटते हुवे - भाभीअब आपकीबरी हैं
ममता सर्माते हुवे हरिपाल केँ लन्ड कों पकरमुह मे लेकेमजे सें चूसने लगती हैं हरिपाल पागल होँ जाता हैं आखो पे यकीन नहींकर पारहा थां हरिपाल मजे मे खोटे हुवे - अहह भाभी क्याँ मस्त चुस्ती हैं उफ
ममता चमरे टोपे कों चूस केँ रस पीते हुवेमन मे - मुझे इतना आनंद कियु आँ रहा हैं देवरु जी केँ संगअहह कितना अच्छा स्वाद हैं देवर जीजी केँ लन्ड कां चुस्के पीते रहने कां मनकररहा हैं
6 मिनटबाद
हरिपाल ममता कों पलंग पे लेता केँ तांगे फैला केँ - अब आपका देवरु आपकी चूत कां स्वाद लेगा
ममताजोस मदहोसी मे हरिपाल कों देख - तौ लें लीजिये नाँ
हरिपाल जोस मे - भाभीउफ आपकी चूत मस्त हैं
हरिपाल झुकते हुवे चूत केँ फ़ाके केँ बीचजिब सें चाटने अंदरजिब डालके चूसने लगता हैं ममतामजे मे पलंग पकर् केँ - अहह देवर जीजी बहुत जयदा हि मज़ा आँ रहा हैं खाजाओ मेरी चूत कों चुस्टे रहिये
हरिपाल चूत चाटते चुस्टे हुवेमन मे - उफ जैसा सोचा थां अहह कितनी गरम चूत हैं भाभी कि चूत कां स्वाद भि अहह मस्त हैं यकीन नहीं होता भाभी कों चोदने वालाहु रामपाल माफकर देना दोस्त तेरी पत्नि मस्त हैं
ममता हरिपाल केँ सर कों पकर अपनी चूत पे दबाते हुवे - आने वाला हैं देवर जीजी चुस्टे रहिये अहहमा देवर जीजी निकल गय़ा मर गई
ममताझर जाती हैं हरिपाल केँ मुह मे
हरिपाल मुहसाफ करते हुवे ममता कों देख मुकुराते हुवे - पहलेमना कररही थि अबमजे लें रही हैं
ममता सर्म सें हस्ते हुवे - समय नहीं हैं सुरु करिये
हरिपाल - हुसमझ गय़ा
हरिपाल घुटने मे बैठा अपने लन्ड कों पकर चूत केँ छेद पे रखते हुवे धीरे-धीरे सें अंदर घुसाने लगता हैं जैसे जैसे अंदर हरिपाल कां लन्ड जाने लगता हैं ममता दर्द मे पलंगकस केँ पकर लेती हैं हरिपाल एक् धक्का मरतेबचा लन्ड पूरा अंदर घुसा देता हैं ममता दर्द मे अहहमर गई
हरिपाल नें पूरा लन्ड घुसा दिया थां अंदर कि गर्मी कसी चूत फिल करके हरिपाल जोस मे पागल होने लगता हैं
हरिपाल ममता केँ जांघों कों पकरे धक्के मरने लगता हैं ममता दर्दमजे मे हरिपाल कों देखते हुवे - अहह देवर जीजी बहुत मोटा लन्ड हैं आपकाअहह बहुत आनंद भि आँ रहा हैं अपनी भाभी कि चूत कि गर्मी आज निकाल हि दीजिये
हरिपाल जोस मे पागल होके चुदाई करते हुवे - भाभी रामपाल केँ संग आनंद नहींआता हैं क्याँ आपको
ममता चुदाई कां मज़ा लेते हुवे - देवर जीजी पति जी बहुत अच्छे हैं आनंद भि आता हैं मगरपता नहीं मुझे आपका लन्ड लेके बहुत मज़ा आँ रहा हैं अहह चोदो देवर जीजी अपनी भाभी कों अहहमा यह मज़ा
हरिपाल फिन एक् तांगे उपरउठा केँ पकर लेता हैं एक् हाथ सें ममता केँ चुचे दबाते हुवे चुदाई करने लगता हैं फच्फच् अहहउफ सिसकिया पायल कि आवाजे धीरे-धीरे कमरे केँ बाहर् तक आँ रही थि
हरिपाल तेज धक्के मरते हुवे चुदाई करने लगता हैं जिसमे ममता औऱ मजे सें चुदवाते हुवे - अहह देवर जीजीउफ इतना आनंदअहह मुझे पहले नहीं मिलायह अलग आनंद हैं देवरु सें चुदवाने कां
हरिपाल चुदाई करते चुचे दबाते हुवे - भाभीउफ इतनी टाइटकसी गरम चूत आपकी मरने मे मुझे भि बहुत आनंद आँ रहा हैं अब घोरीबन जाइये
ममता घोरीबन जाती हैं हरिपाल लन्ड चूत मे घुसा केँ ममता कि गांड दबाते पकरे चुदाई करने लगता हैं हरिपाल - उफशपथ सें भाभी मेरीनजर तोँ सुरु सें आप् पे थि अहहमगर डरता थां आप् क्रोध करेगी
ममता घोरीबनी चुदाई कां मज़ा लेते हुवे - अहह मुझे एहसास हुआउफ मगर यकीन नहींकर पारही थि अहहअब देखो मे चुदरही हु आप् मुझेचोद रहे हैं देवर जीजीअहह मस्त चुदाई करते hain आप्
36 मिनटबाद
हरिपाल ममता कों बाहों मे लेके - भाभी किया हम् आगे भि कर सकते हैं
ममता हरिपाल कों देख - ठीक हैं देवरु जीजब मोक्का मिलेगा
हरिपाल खुश होके - सच नाँ भाभी आपको आनंदआया
ममता सर्म सें बहुत मज़ाआया देवर जीजी
ममताफिन थोरा दुखी सिर्यस् होके - हम् चुपके सें सभी करेगे मगररोज हमेसा नहीं औऱ धयानरहे किसी कों सक् भि नाँ होँ ऐसाहुआ तोँ सभी तबाह हौ जायेगा जोँ मे बिल्कुल नहीं चाहती
हरिपाल - जी मे भि नहीं चाहता
हरिपाल ममता कों किस करते हुवे - आपकी चुदाई करकेआज जोँ मज़ाआया यह पहली चुदाई मुझेयाद रहेगी
ममता सर्म सें - मुझे भि अब जाइये
हरिपाल कपड़े पहनचला जाता हैं
ममतामन मे - पता नहींसही कररही हु याँ गलत
इस रात चुदाई केँ बाद हरिपाल जब भि आता मोक्का देखते हि ममता कि चुदाई कर देता औऱ किसी कों पता भि नहीं चलता थां ममता कों हरिपाल पसन्द आँ गय़ा थां मगर ममताइस सभी मे रामपाल अपने बच्चो कों पूरा प्रेम देती थि उसकेबाद हि अपने खुशी देखती थि
मगर क़िस्मत मे कुछ औऱ होना लिखा थां अचनाक् ममता बीमार पऱ गई कई डॉक्टर कों दिखाया मगरकोई फायेदा नहींहुआ ममता औऱ बीमार होतीचली गई
हरिपाल तोँ अपना सारा रुपया जमीन भि बेच ममता कों बचाना चाहता थां रामपाल भि सभीकुछ बेचके ममता कों बचाना चाहता थां मगर जाने वाले कों कोनरोक सकता हैं
आखिर एक् दिन ममता दुनिया सें सभी कों छोरचली जाती हैं ममता कां जानां सभी केँ लिए एक् बहुतबरा झटका थां
उस टाइम माधुरी मनोज xxx केँ थें ममताचली गई रामपाल गम मे डूब गय़ा मगर हरिपाल संगीता रामपाल कां सहारा बने वक्त केँ संग रामपाल कों एहसास हुआ उसकेदो बच्चे हैं जिसका उसे ख्याल रखना हैं तोँ रामपाल अपने दर्द कों सीने केँ अंदर छुपा केँ जीनेलगा टाइम केँ संग माधुरी मनोज अशोक संगीता बरे हुवे औऱ दोस्ती रिस्तेदारी मे बदल गई
आज ममता कों सभीयाद करते हैं मगर अपना दर्दगम किसी कों नहीं दिखाते
( यही पे पास्ट् खतम होता हैं हरिपाल ममता कां )
पर्जेंट
रात 9 बजे
माधुरी हरिपाल पलंग पे नंगे लेते हुवे थें रामपाल माधुरी कों किस करते हुवे चुचे दबाते जारहा थां माधुरी मचल जाती हैं
रामपाल माधुरी कों देख - अपनी चूत कां रस पिलादे बहु बहुत प्यास लगी हैं
माधुरी मुस्कुराते हुवे अपनी दोनों तांगे फैलाते हुवे चूत पे हाथरख रामपाल कों देख - अहह पिलो नां ससुरजी जी देखिये मेरी चूत रस भि निकलरही हैं
रामपाल माधुरी कि गीली चूत देखमुह मे पानी लाते हुवे - उफबहु तेरी चूत कां रस पीके नासाचढ़ जाता हैं
रामपाल झुकता हैं औऱ सीधा चूत कों मुह मे लेके चूसने चाटने लगता हैं माधुरी सिसकिया लेते हुवे रामपाल केँ सर कों अपनी चूत पे दबाते हुवे - अहह ससुरजी जी चूसिये अपनीबहु कि चूत कों अहह मेरी चूत कां रस निकाल लेँ जितना पीना हैं पी जाइये अहह ससुरजी जी
रामपाल मजे सें अपनीबहु केँ चूत कां स्वाद लेता रहता हैं एसी मे माधुरी झर जाती हैं
रामपाल माधुरी केँ चूत मे लन्ड घुसा केँ माधुरी केँ ऊपर पूरालेत जाता हैं माधुरी भि अपने पांव सें रामपाल कों जकर् लेती हैं बाहों मे भर लेती हैं रामपाल धक्के मरने लगता हैं माधुरी मजे सें चुदवाने लगती हैं
रामपाल चुदाई करते हुवे - बहु तेरी चूत मे लन्ड जाते हि उफ किया बताऊ कितना आनंदआता हैं
माधुरी - उफमा ससुरजी जी मेरी चूत केँ अंदर आपका लन्ड जब जाता हैं तोँ अहह मुझे भि अलग हि चैन मज़ाआता हैं ससुरजी जी अपनीबहु कि चूत चोदचोद केँ ठंडाकर दोउफ
वही हरिपाल केँ घऱ
संगीता बैड पे लेती जूही कों दूध पिलारही थि नाइटी सें दोनों चुचे बाहर् निकल केँ दोनों चुचे टाइटदूध सें भरे हुवे थें
संगीता मन मे जूही कों देखते हुवे - ससुरजी जी सुरु सें मुझे चोदना चाहते थें उनकी हरकत सें शक होता थां यकीन नहीं होता मे चुद गई औऱ चुदते आँ रहीहु उसकी निसानी भि मेरीगोद मे हैं ससुरजी केँ बच्चे कि मा सायद हि कोईबहु बनती होगी
संगीता जूही कों प्रेम करते हुवे - खैरअब पीछेहटा नहींजा सकता जूही कों एक् पिताजी कि तरह प्रेम देते हैं मुझे पत्नि कि तरह
कमरे मे हरिपाल लेताहुआ थां दूसरी तरफ करवट लेतेसो रहा थां हरिपाल रोज संगीता केँ पास नहीं जाता थां यह रिस्क होता
बदल मे मालती दूसरी तरफ करवट लेके मनोजसे चैट पे बातें कररही थि
बतादु ममता 10 विपास थि मालती 8 वि मोबाइल चलाना संगीता नें सिखाया एक् दिन मे हि सीख गई थि
मालती मनोजचैट पे
मनोज - माँ जी ससुरजी जीसोगये
मालती पीछे हरिपाल कों देख - हा दामाद जीसोगये हैं
मनोज - यकीन नहीं होता आप् इतनी हसीन हैं आपकी जैसी पत्नि कि कि चुदाई तौ मे रोज करता माधुरी कि जैसे करताहु आपकी बेटी जौ हैं bah बहुत सुंदर हैं आपकीतरह
मालती मुस्कुराते हुवे - औऱ नहीं तौ क्याँ मगर क्याँ हि कर सकते हैं
मनोज - माँ जी वीडियो कॉलआई कररहा हु
मालती सर्म सें - ठीक हैं
मनोज वीडियो फोन करता हैं
मनोज - मां जी नाइटी पहनी हैं चुचे नंगी करके नाइटी उपर करके चूत मे उंगली करिये नां मोबाइल सामने रख देना ताकिसभी मुझे अच्छे सें दिखे
मालती हरिपाल कों देख धीरे-धीरे सें - मगर दामाद जी रिस्क हैं
मनोज मुस्कुराते हुवे - एसी मे तौ मज़ा हैं करिये नाँ प्लेस
मालती सर्म सें - अच्छा बाबा करतीहु रुकिए
मालती पांव कि तरफ अच्छे सें मोबाइल रखते हुवेलेत जाती हैं मनोज पलंग पे लेता लन्ड हिलाते हुवेसभी देखरहा होता हैं
मालती पलंग पे लेत केँ नाइटी बीच मे पेट मे कर देती हैं जिसकी वजह सें चूत चुचे पुरे नंगे होँ जाते हैं अब मालती अपनी चूत सेहलते मसलने लगती हैं मनोज कां लन्ड देखते हुवेगरम होके
उफ किया हि सीनदिख रहा थां मनोज कों भरा शरीर मालती केँ दोनों बरे नंगे चुचे तांगे फैली चूत मसलरही थि मनोज तौ देख पागल होकेजोर जोर सें लन्ड हिलाने लगता हि मालती मुश्किल सें सिसकिया रोके हरिपाल कों देखमन मे - उफअहह पति जी आप् मुझपे ध्यान देते तौ अहह मे अपने दामाद जी केँ संगयह सभी नहीं करतीमगर अब मुझेयह सभी करने मे मज़ाआने लगा हैं मोबाइल पे हि मेरा दामाद मुझेखुश कर देता हैं मेरी चूत सें पानी निकाल देता हैं आप् सोतेरहो बस
मनोज लन्ड हिलाते हुवे - उफशपथ सें मेरी सासू क्याँ मस्तमाल हैं केसे अपनी चूत मसलरही हैं अहहयह नजारा अपनी सासू माँ कों नंगी चूत मसलते हुवेदेख लन्ड हिलाने कां मोक्का भाग्य वाले कों मिलता हैं
उफअहह किया भाग्य हैं मेरी
ममता थोरा गर्दन उठा केँ वीडियो कॉलआई मे मनोज अपने दामाद कों लन्ड हिलाते देख औऱ जोस मे उंगली करने लगती हैं बसफिन मालती कपते हुवेमन मे - अहहआने वाला हैं आँ गय़ा मुह मे निकलजा अहह दामाद जीमर गई झर गई अहहमा
मालती झर जाती सें हैं चूत सें सफेद पानी निकलने लगता हैं
मालती कों झरतेदेख मनोज भि झर जाता हैं
मालती हफ्ते हुवे मोबाइल लेके धीरे-धीरे सें - अहह दामाद जी मज़ा आँ गय़ा
मनोज हफ्ते हुवे - माँ जी मुझे भि बहुत मज़ाआया अब तौ रहा नहींजा रहादिल कररहा हैं जल्दआके अपनीगरम चूत चुदने कां
मलती सर्म सें - उफ मेरा भि दमादजी मगर छुट्टी लेके हि आनां
मनोज - समझ गय़ा मां जी चूत तैयार रखना
मालती जोसगरम होके - मे भि तैयार हु मेरी चूत भि आपका लन्ड लेने केँ लिए रखतीहु
मोबाइल कट
मालती हरिपाल कों देखमन मे - अब तौ मेरा दामाद जी मेरी चूत कि आग ठंडी करेगा सभी आपकी गलती हैं दामाद जी केँ संग मोबाइल पे उफ चूत मे उंगली करते गंदी बातें करने मे अलग हि मज़ाआता हैं
रामपाल केँ घऱ
रामपाल माधुरी कि मस्त चुदाई करकेसो गय़ा थां मगर माधुरी नंगी लेती सोचो मे घुम थि
माधुरी मन मे - उसशाम भइया नें हमे देखा नहीं होता तोँ मे लूट गई होती
( माधुरी राजन पास्ट् )
शाम 3 बजे कां टाइम होता हैं राजन नें माधुरी कों खेत मे बुलाया थां माधुरी खेत सें होते हुवे राजन सें मिलने निकलपरी थि राजन अंदरगाव सें थोरादूर एक् मक्के केँ खेत केँ बाहर् खराआस पास देखते हुवे माधुरी केँ आने कां इंतजार कररहा होता हैं
खेत मे पहलीबार नहीं होता बल्कि यह 5 बार थां जब माधुरी राजन सें मिलने जारही थि मगरआज कुछ औऱ होना थां
माधुरी जबजारही होती हैं तौ क़िस्मत सें अशोकखेत मे हल्का होनेआया थां जबखेत सें बाहर् आता हैं तौ उसे माधुरी दूर जाते दिखाई देती हैं
अशोक बोतलहाथ मे लिये माधुरी कों देख - यह माधुरी जाकहा रही हैं कही वोँ भि हल्का होने तौ नहींजा रही
अशोक सोचने लगता हैं तभी देखता हैं माधुरी मोबाइल उठा केँ किसी सें बातें करने जाने लगती हैं तब अशोक कों झटका लगता हैं औऱ अशोक कों कुछ गर्बर् लगती hain
अशोकमन मे - मोबाइल पे बातें करतेजा रही हैं मुझेपता नहीं कियु गर्बर् लगरहा हि मुझे देख्ना होता
अशोक बोतलवही रख देता हैं औऱ माधुरी केँ पीछे पीछे छुपते पीछा करने लगता हैं
10 मिनट पीछा करने केँ बाद माधुरी मक्के केँ खेत केँ पीछे जाती हैं जहा राजनखरा थां माधुरी कों देख राजनखुश हौ जाता हैं
राजन - तुम् आँ गई
माधुरी राजन कों देख - तुमने बुलाया तौ आनां हि परामगर राजनयह रिस्क हौ सकता हैं
राजन - दोस्त अबतब किसी नें नहीं देखाआगे भि नहींदेख पायेगा घऱ पे कम मोक्का मिलता हैं खेत हि एक् मार्ग हैं
अशोकपास मे हि सभीदेख दोनों कि बातें सुनशोक मे चला जाता हैं
अशोक गुस्से सें मन मे - मेरी छोटी बेहन कों यही कमीना मिला थां क्याँ वोँ अंधी हैं याँ नां समझ इसकेबरे मे तोँ कईलोग जानते हैं सच मे लरकियो कों कमीने लरके हि अच्छे लगते हैं भोले सच्चे लगते हैं बेवकूफ लरकी
राजन् माधुरी कों लेकेखेत मे अंदर जाता हैं बीच मे एक् स्थान माधुरी कों लेके गोदी मे बैठ जाता हैं अशोक गुस्से सें पागल होँ गय़ा थां मगर अशोक सन्तमन मे - जानना होगा इनकेबीच सभी होँ गय़ा होँ याँ होने वाला हैं
अशोक बहुत धीरे-धीरे सें अंदर बिना आवाज़ किये राजन माधुरी केँ पास थोरिदूर आहिस्ता बैठ जाता हैं अशोक इतनी चूत पे थां कि अच्छे सें सभीदेख सुन सकता थां
राजन केँ गोदी मे तांगे फैलाये माधुरी बैठी थि औऱ राजन माधुरी केँ गर्दन मे किस करते हुवेसूट केँ ऊपर सें चुचे दबाते हुवे - मेरीजान तुम्हें मुझपे भरोसा नहीं हैं क्याँ जब चुचे चूत दिखाने कों कहताहु तोँ तुम् सुहागरात कों देखकर लेना बोलके रोक देती होँ
माधुरी राजन कों देख सिसकिया लेते हुवे - बाबूअहह सुहागरात केँ लिएकुछ तोँ बचना चाहिए उफ धीरे-धीरे दबाओ दर्द हौ रहा हैं
सामने कि अशोकसभी देख गुस्से सें पागल हौ रहा थां मगर अशोक कों फिल होता हैं उसका लन्ड पूरा लोहा जैसा टाइटखरा हौ गय़ा हैं
अशोक हैरान होता हैं फिन पैंट केँ बटनखोल चड्डी कों नीचे करके लन्ड बाहर् निकाल देखता हैं लोहे जैसा करक्नशे फूली हुईँ
अशोक केँ मन मे कुछआता हैं औऱ वोँ भि गांड जमीन पे रख तांगे फैला केँ लन्ड हिलाते हुवे अपनी बेहन राजन कों देखते हुवेमन मे - अहह मेरी बेहनतु इस कमीने केँ संगयह सभीकर रही हैं यकीन नहीं होता
वही राजनआज पूरामन बना केँ आया थां माधुरी कों चोदने कां
राजन माधुरी केँ सूट केँ फिन बिकनी केँ अंदरहाथ डालके नंगे चुचे कों पकर् दबाने लगता हैं माधुरी मदहोस होने लगती हैं गरम होके सिसकिया लेने लगती हैं
राजनफिन एक् हाथ सें माधुरी कि चूत लेग्गिंस केँ ऊपर सें सहलाने मसलने लगता हैं माधुरी दो हमले सें सिहर जाती हैं गरम होने लगती हैं
माधुरी सिसकिया लेते हुवे - अहह बाबूऐसा मतकरो अहह
राजन चूत केँ फाको केँ बीचउपर सें हि उंगली करते हुवे एक् हाथ सें चुचे दबाते हुवे - मज़ा नहीं आँ रहा मेरीजान सच बताना
माधुरी तांगे औऱ फैला केँ राजन कों देख - बाबू बहुत मज़ा आँ रहा हैं करतेरहो
अशोकयह सभीदेख सुन पागल होँ जाता हैं लन्ड तेजी सें हिलाते हुवेमन मे - इतनी गर्मी हैं मेरी बेहनजी चूत मे पता नहीं थां
वही राजन माधुरी कों पूरागरम कर चुका थां
राजन माधुरी कों किस करते हुवे - मेरीजान आज करने
राजन माधुरी कों धीरे-धीरे सें नीचे लेता देता हैं माधुरी गरम होँ चुकी थि चुदासि हौ चुकी थि इसलिए राजन कों नहीं रोकती
राजन माधुरी केँ सूट कों निकलने लगता हैं माधुरी भि संग देने लगती हैं यहदेख अशोक लन्ड हिलाना छोर जल्द सें पैंटपहन बाहर् आके थोरादूर जाते हुवेमन मे - कमीने तुम को तौ मे अपनी बेहन कि सील तोरने नहीं दूंगा जोँ कर लियाकर लियाअब तुम्हे मेरी बेहन नहीं मिलेगी
राजन आवाज़ बदल केँ थोराजोर सें - यहाइस मक्के केँ खेत मे जंगली सुगरघुस गय़ा हैं जल्दआओ तुम् सभीआज इस सुगर कि खैर नहींजान सें मार देगे साले कों बहुत परेसान कररखा हैं
अशोक कि आवाज़ खेत केँ अंदर माधुरी राजन कि कानों मे जाती हैं तौ दोनों कि फट जाती हैं माधुरी बिकनी मे लेती थि जल्द सें डरते हुवेसूट पहन केँ - मर गई बोला थां किसीदिन पकरे जायेंगे पकरी गई नाँ तौ मेरीइजत मा बापूसभी कि इज़त मीठी मे मिल जायेगी
राजन डरते हुवे - कुछ नहीं होगा पीछे सें भाग निकलते हैं
माधुरी राजन पीछे सें खेत सें बाहर् आते हैं राजन अपनीघऱ कि तरफ माधुरी अपनीघऱ कि तरफ भागने लगते hain
वही अशोकसभी कों भागते देख हसने लगता हैं उसकेबाद लन्ड पे हाथरख मसलते हुवे - जोँ देखा उसकेबाद मेरी बेहन कों लेके मेरे विचार बदलगये हैं मेरी बेहनउफ सायदइस कां फायेदा उठा सकताहु
इतना सोचते हि अशोक कां लन्ड फिनखरा हौ जाता हैं
रात कों 9 बजे
माधुरी खाट पे लेतीमन मे - क़िस्मत सें बच गई पकरी जाती तोँ सोच केँ हि डरलगरहा हैं
तभी दरवाजे पे अशोकआके - गुरिया दरवाजा खोल नां
माधुरी खरी होके दरवाजा खोल अशोक कों देख - भइया आप् क्याँ बात हैं
अशोक दरवाजा बंद करकेखाट पे बैठ - आओ बैठोकुछ बात करनी हैं
माधुरी भि अशोक केँ पासबैठ जाती हैं
माधुरी - जी भइया बोलिये
अशोक माधुरी कों देख - खेत गई थि नाँ
माधुरी पूरीहिल जाती हैं डर सें कपने लगती हैं
अशोकवही आवाज़ चेज करके जोँ बोला बोलके माधुरी कों सुनाना हैं तौ माधुरी कों झटका लगता हि अब तौ माधुरी पूरी कपने लगती हैं
अशोक माधुरी कों देख - मेने अंदरखेत मे राजन तुम्हे सभी करते देखा हैं
माधुरी कपते डरते अशोक कां देख रोने सि आवाज़ मे - भइया प्लेस माफ करदो प्लेस
अशोक माधुरी कों चुप करवाते हुवे - गुरिया प्रेम केँ खिलाफ नहींहु मे मगर तेरी लरकागलत चुना हैं
माधुरी हैरान होके - भइया आप् कहना क्याँ चाहते हैं
अशोक माधुरी कि तरफ अच्छे सें बैठ - जौ सुना सुना थां अबदेख भि लिया लरकियो कों कमीने बिगरे धोकेबाज़ लरके कि बातें सच्ची लगती हैं ऐसे लरके लरकियो कों साफ इमानदार भोलेभले लगते हैं औऱ जोँ लरकेसच मे अच्छे दिल केँ साफ वफादार इमानदार होते हैं वोँ लरके लरकियो कों कमीने धोकेबाज़ लगते हैं उनकी बातें झूठी लगती hain अब यकीन होँ गय़ा सभीसच हैं
माधुरी हैरान डरी अशोक कों देख - साफसाफ बोलिये
अशोक - तोँ सुनो राजन बहुत कमीना लरका हैं उसकाकई लरकियो सें चक्कर हैं एक् बार तोँ खेत मे उसे स्वयं आखो सें रीना केँ संग करते देखा हैं
अपने भइया कि बातसुन माधुरी पूरीशोक होँ जाती हैं
माधुरी - नहीं नहीं मेरा राजनऐसा नहीं हैं आप् झुठबोल रहे हैं
अशोकसर पे हाथ रखते हुवे - यही दीवानगी किसी अच्छे लरके केँ लिये होती तौ मे स्वयं तुम् दोनों कि विवाह करवा देता
अशोक माधुरी कों देख - ठीक हैं मे तुम्हारी तरफ सबूत दुगातब यकीन करोगी नां
माधुरी कपते होठों सें - जी
अशोक जाते हुवे - ठीक हैं कल सबूत दुगा तूने
अशोकचला जाता हैं मगर माधुरी शोक मे चली गई थि
अगलेदिन शाम कों अशोक रीना केँ घऱ जाता हैं अकेले मे रीना सें बातें करना हैं
अशोक रीना कों देख - जनताहु राजन तेरी लेता हैं तूँ गाव कि रण्डी हैं मेरा एक् कम करदे 1000 हजार दुगा
रीना अशोक कों देख - रण्डी हु तौ क्याँ खैर कैसाकाम हैं कहो
अशोक अपना मोबाइल देते हुवे - राजन कों खेत मे बुला वीडियो बना केँ दे मुझे
रीना अशोक कों देख - तुम्हारी तरफ पागल दिखती हु रण्डी हुकई कां लन्ड लिया हैं मगर किसी नें देखा नहीं मुझेमगर वीडियो बनके तूँ सभी कों दिखाना चाहता हैं
अशोक - पागल तूँ अपनाफेस मत दिखाना राजन कां फेस दिखना चाहिए बस
रीना सोचते हुवे - तबटिक हैं मगर तूँ यहसभी कर कियुरहा हैं
अशोक - तुझेही क्याँ बोल करेगी
रीना मुस्कुराते हुवे - ठीक हैं पैसे निकल
अशोक 1000 देते हुवे - एक् घंटेबाद आऊगा
रीना मुस्कुराते हुवे - ठीक हि
रीना वैसा हि करती हैं राजन कों खेत मे बुलाती हैं राजन भि गरम थां माधुरी कि लें नहीं पाया थां तोँ खेत मे आँ जाता हैं
रीना पहले हि स्थान सेट करके केमरा चालू करकेसेट कर चुकी थि
राजन रीना कि चुदाई करने लगता हैं राजनसभी सें अंजान थां बेचारा
एक् घंटेबाद अशोक अपना मोबाइल लेकेआता हैं
रात 10 बजे
माधुरी केँ कमरे मे अशोक राजन रीना कां वीडियो देखारहा थां औऱ माधुरी पूरीशोक मे हिल जाती हैं
माधुरी केँ आखो सें आसु निकलआते हैं
अशोक माधुरी कों बाहों मे लेके - रोनाबंद कर अच्छा हुआ मेनेदेख लिया तुँ बच गई
माधुरी अशोक केँ बाहों मे सिमट केँ रोते हुवे - यकीन नहीं होता उनके मुझे धोका दिया
अशोक माधुरी कों बाहों मे लिएबैड पे लेत बाहों मे कस लेता हैं
अशोक माधुरी कों देख - उस कमीने केँ लिएमत रोबच गई यही सुकरमना तेरेलिए मनोज हि अच्छा लरका हैं
माधुरी आसुसाफ करते हुवे - आपनेसही कहा भइया मुझेबचा लिया आपनेउस कमीने सें
अशोक माधुरी कों बाहों मे लिए पागल होँ रहा थां
अशोक माधुरी कों देख तुम् बहुत हसीन हौ
अशोक धीरे-धीरे सें माधुरी केँ ऊपर आँ जाता हैं माधुरी हैरान होके - भइया आप् यह क्याँ कररहे हैं
अशोक - मुझेवही करना हैं जोँ खेत मे राजन तेरेसंग कररहा थां
माधुरी शोक मे - क्याँ नहीं भइया छोरिये मुझे
अशोक माधुरी केँ दोनों हाथ पकरे - देख गुरिया मुझेबस थोरा बहुत आनंद लेनेदे तेरी बचाया हैं इतना तौ कर भइया केँ लिएअगर किसी नें देख लिया होताघऱ मे पता चलतातब किया होता मेनेमा बापू कों नहीं बताया राजरखा इतनासभी तेरेलिए
माधुरी हिल जाती हैं मगर हालतऐसी थि माधुरी अशोक कों रोक नहीं सकती थि
माधुरी रोने सि आवाज़ मे - ठीक हैं मगर मे वोँ सभी नहीं करने दुगी नां मे आपकोकुछ दिखाउगी
अशोकखुश होके - चलेगा
आज केँ लिए इतना हि
मक्के केँ खेत मे - Continue reading next part
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