मक्के केँ खेत मे – New Episode
chapter 6
माधुरी रामपाल कों देख - हा कहते हैं औऱ मेने सुना भि हैं
रामपाल शोक मे - कियाकोन थें क्याँ केहरहे थें बताओसच कहु तोँ मेने भि सुना हैं
माधुरी शोक मे रामपाल कों देख - कियाकोन बताओ
रामपाल - पहले तुम्
माधुरी - अच्छा बाबा बताती हुबात 6 दिन पहले कि हैं
आगे
माधुरी - 6 दिन पहले दोपहर कों जब मे आपके लिये खानां लेके आँ रही थि तौ रास्ते मे मैंने देखा एक् बहुतबरा साप बैठा हैं मे डर गई साप् नें मुझे देखा औऱ खेत केँ अंदरचला गय़ा मगरउस रास्ते सें जाने कि हिम्मत नहीं हुईँ तौ मेनेबगल वाले वोँ रामु अंकल केँ गंने वालेखेत सें जाने कि सोचीमगर जब मे खेत सें होतेजा रही थि मुझे किसीदो लोगो कि बातें करने कि आवाज़ सुनाई दि
रामपाल माधुरी कों देख - कमीना रामु दूसरा कोन थां औऱ किया बातें कररहे थें बता तोँ साले कि गांडमार लूंगा
माधुरी शोक सर्म सें रामपाल कों देख - छी कितनी गंदी बातें करते हैं औऱ यह कियाकर रहे हैं आप् हा बताइये
असल मे रामपाल माधुरी दबा दबाने मे लगा थां जब माधुरी बातें कररही थि रामपाल अपनीबहु केँ चुचे सें खेलरहा थां जैसेकोई खिलौना मिल गय़ा हौ खेलने मे लिये
रामपाल माधुरी कों देख मुस्कुराते हुवे - कियाकरू बहु तेरे चुचे इतने सॉफ्ट रसीले नर्म हैं उफ दबाने मे इतना मज़ा आँ रहाइस लिये
माधुरी रामपाल केँ हाथ अपने चुचे सें दूर करते हुवे रामपाल कों देख - अच्छा जी मेरे चुचे खिलौना नहीं हैं एक् तोँ दबादबा केँ लालकर लिये आपके
रामपाल माधुरी केँ चुचे कों देखते हुवे मुस्कुराके - टाइट भि
माधुरी रामपाल कों देख केँ देख - बेसरम
रामपाल हस्ते हुवे - अच्छा बताओआगे कियाहुआ कोन थां
माधुरी - हा तोँ दूसरे थें श्याम अंकल
रामपाल - साले दोनों कमीने एक् संग हमेसा रहते हैं
माधुरी रामपाल कों देख - मुझे अपनीबात कहने देगे याँ नहीं
रामपाल - हाहाकहो कहो
माधुरी - हु तोँ आवाज़ सुनी औऱ लगभग गई तौ देखा दोनों बैठे आपके मेरेबरे मे बातें कररहे थें
रामु - दोस्त श्याम यह साला रामपाल कि भाग्य बरी अच्छी हैं दोस्त इतनी हसीनबहु जोँ मिली हैं
श्याम - अबे साले भाग्य उसकीकहा सें अच्छी हुइ क़िस्मत तौ रामपाल केँ बेटे मनोज कि अच्छी हैं नाँ
दोनों एक् दूसरे कों देखजोर जोर सें हसने लगते हैं
रामु हस्ते हुवे - तेरीबात तोँ सही हैं रातखूब मनोज लेता होता इतनी सुंदर पत्नि मिली हैं तोँ लरके केँ मजे हैं
श्याम - दोस्त मजे तोँ रामपाल केँ भि हैं देखने कों मिलता हि होगा नाँ देखा नहीं दोनों केँ बीच रिश्ते केसे हैं
रामु - बात तोँ सहीकही तूने एक् हमारी बहुवे हैं जब तक कोई जरूरी बात नाँ कों कुछ बोलती नहीं औऱ वही रामपाल उसकीबहु हस्ते बातें करते रहते हैं
श्याम - कही दोनों कां चक्कर नाँ चल जाये मनोज बेटा तोँ काम सें गय़ा हैं घऱ मे कोई औऱ हैं नहींउन दोनों केँ अलावा
रामु स्याम कों देख - दोस्त यह तोँ मेने सोचा हि नहीं हौ सकता हैं दोस्त दोनों अकेले भाभी केँ जाने केँ बाद रामपाल भि अकेले जीवनजी रहा हैं बेचारी भाभी जवानी मे चली गई रामपाल हिलाते हुवेजी रहा हैं
रामपाल गुस्से सें खरे होके - सालों कि यह हिम्मत अभि जाके दोनों कि गांड मे डंडा घुसाता हु
माधुरी रामपाल कों पकर गुस्से मे - फिनबीच मे बोला आपने
रामपाल पलंग पे लेत सन्त होके - अच्छा बाबाकहो
माधुरी रामपाल कों देख - हु
श्याम - हौ भि सकता हैं दोस्त रामपाल तौ जवानी मे आशिक थां अरे वोँ बगलगाव वाली सुशीला सें उसका चक्कर चलरहा थां
रामु - हासही कहा तूने दोस्त रामपाल कि बहु मस्तमाल हैं शपथ सें जब जाताहु उसकेघऱ तौ घुघट् मे आती हैं मगर उसके चिकनी पेट ढोरीउफ देखता हु तोँ लन्ड खरा हौ जाता हैं
श्याम - अबे धीरे-धीरे कोईसुन लेगाअगर रामपाल कों पताचला नां तौ हमे दोरा दोरा केँ मारेगा
रामु - दबेयहा इस वक्तकोन आयेगा तुपता तेरी रामपाल कि बहु मे किया अच्छा लगता हैं
श्याम - उसकेबरे चुचे ब्लाउस सारी केँ ऊपर सें हि उफखरे दिखते हैं उसकी गांड चलती हैं तोँ मस्त हिलती हैं
रामु - तूनेसही कहा दोस्त मस्तमाल हैं रामपाल कि बहुनाम भि कितना मस्त हैं माधुरी
श्याम - किया लगता हैं रामपाल उसकीबहु मे चक्कर चल गय़ा तोँ
रामु - हु तौ अच्छा हि हैं दोनों केँ लिये दोनों अपनीआग ठंडीकर पायेंगे
श्याम - मगर ससुरजी बहु मे यहसभी होता होगा
रामु श्याम कों देख - इसबरी दुनिया मे ऐसाकुछ नहीं जोँ नहीं होता होगा रिश्ते कि वजह सें कोई एक् दूसरे कों गंदीनजर सें नहीं देखता देखते भि हैं तौ कुछकर नहीं पाते पर्र एक् बारसभी हौ गय़ा तोँ मजे हि मजे
श्याम - तूनेसही कहा दोस्त चल बहुतदेर होँ गई घऱ चलते हैं घुप भि तेज होँ गई हैं
रामु - सहीकहा चलते हैं
रामु श्याम दोनों घऱ जाने लगते हैं वही माधुरी छुपीसभी बातें सुनने शोक मे थि
माधुरी चलते हुवे - छी कितनी गंदे बातें कररहे थें मेरे ससुरजी जी केँ बारे मे मुझेपता हैं आजकल केँ लोगो कि सोचमगर ससुरजी कि जीलोव कहानी हैं यह मेरे लियेशोक वालीबात हैं सुसीला बहुत प्यारा नाम हैं
रामपाल गुस्से सें उठ केँ बैठ - दोनों कमीनो कि गांड
माधुरी बीच मे - छी बापूजी हमेसा गंदी गालिया कि मुह सें निकलती हैं
रामपाल माधुरी कों देख - तोँ किया बोलू देखा नहीं किया बातें कररहे थें रामपाल शोक मे एक् मिनटएसी लिये तुमने मुझसे पूछा मेरी गिर्लफ्रेड हैं याँ नहीं
माधुरी उठकरबैठ रामपाल कों देख थोरै सर्म सें - हा वोँ बातो बातो मे मुह सें निकल गय़ा फिन बातें होतीचली गई अन्टी कों जानती हुआती रहती हैं मगर मुझे पक्का नहीं थां वही होगी मुझे जानना थां इस लियेमुह सें निकल गय़ा
रामपाल माधुरी कों हैरानी सें देखता हैं औऱ मुस्कुराते हुवे - अच्छा हुआ निकल गय़ा नहीं तौ तुम् मुझे नहीं मिलती
माधुरी सर्म सें लाल होँ जाती हैं
रामपाल - उन दोनों कि वजह सें हम् एक् हुवेइस लिये जाने देताहु दोनों कों नहीं तोँ उनकी
माधुरी - बसबसआगे नहीं
रामपाल माधुरी केँ चुचे दबाते हुवे - तुमहरा वोँ आशिक कियानाम थां उसका
माधुरी सिसकिया लेते हुवे - राजन
रामपाल चुचेमजे आहिस्ता दबाते हुवे - सादी केँ बादजब तुम् गई तोँ उसने तुझेही परेसान नहीं किया
माधुरी रामपाल कों देख - उफअहह किया नां एक् बार बहुत किया
रामपाल माधुरी कि आखो मे देख - बताओ किया क्याँ हुआ थां
माधुरी रामपाल कि आखो मे देख - तोँ सुनिये
माधुरी - सदी केँ बाद पहलीबार मायके गई तब राजन कि बेहन मेरी अच्छी साथी थि मे बारबार जाती थि इस लिये राजन हामरे बीच प्रेम होँ गय़ा जब मे गई रीना सें मिलने तौ रीना नहीं थि राजन थां
1
माधुरी आगन मे राजन कों देख - राजन रीनाकहा हैं
राजन माधुरी कों उपर सें नीचे तक देखते हुवे - मांग मे सिंदूर गले मे मंगलसूत्र सारी मे बहुत सुंदर लगरही हौ माधुरी
माधुरी राजन कों देख - बकवास नहीं राजन रीनाकहा हैं बताओ नहीं तोँ मे जातीहु
राजन - दिदी गई हैं प्रीति केँ घऱ आँ जायेगी चलो बातें करते हैं
माधुरी राजन कों देख - जरूरत नहीं हैं मे चलतीहु
राजन माधुरी केँ हाथपकर - हमारे बीच जौ प्रेम थां उसके लिये प्लेस
माधुरी राजन कों देख - प्रेम मेने किया थां तुमसे तूने धोका दियाठीक हैं
दोनों कमरे मे आते हैं राजन माधुरी केँ सामने खरा माधुरी कों देख - बहुत हसीनलग रही हौ जनताहु मेने धोका दिया हैं मेरी गलती थि
माधुरी - बसयही बोलना थां तौ मे जातीहु
राजन - एक् बार प्रेम करने दोगी
माधुरी गुस्से सें राजन कों देख - सोचना भि मत मे किसी औऱ कि होँ चुकीहु मेरासभी कुछ तेरा थां मगर तूनेखैर जानेदो
राजन माधुरी केँ हाथपकर प्रेम सें - सेक्स करने केँ लिये नहींकेह रहा लास्ट एक् बार प्लेस कभी तूने मुझसे सच्चा प्रेम किया उसकीशपथ
माधुरी राजन कों देखते हुवे - फिनकभी इसबात कों सुरु नहीं करोगे नाँ मेरे समने आओगे
राजनखुश होके - पक्का
राजन माधुरी केँ पीछेआके माधुरी सें चिपक् केँ खरा होँ जाता हैं औऱ दोनों हाथो सें माधुरी केँ मस्त चिकनी पेट कों पकर दबाने मसलने लगता हैं माधुरी सिसक् परती हैं तेज सासे लेने लगती हैं
राजन धीरे-धीरे सें - बहुत चोदता होगा तुम को तेरा पति हैं नां
माधुरी सिसकिया लेते हुवे - अहह तुझेही किया मेरे पति हैं चोदेगे हि
राजन माधुरी केँ गले मे किस करते हुवे -विवाह करके लेके गय़ा हि तुम को चोदने केँ लिये हैं उफ माधुरी तुगजब कि माल हैं मेरी भाग्य फूटी थि खैरअहह बता नां कितनी देर चोदता हैं तुम्हें चूत सें पानी कितनी देर मे तेरा निकलता हैं बता नाँ
माधुरी मदहोसी मे सिसकिया लेते हुवे - उफ तुम्हे जानने कि जरूरत नहीं हैं समझअहह गय़ा उफमाअहह
राजन माधुरी केँ सीने सें सारीहटा केँ माधुरी कों अपनीतरफ घुमा केँ माधुरी केँ उभरे सीने यानी चुचे पे किस करने लगता हैं माधुरी कि आखे चढ़ने लगती हैं माधुरी कि चूत गीली होने लगती हैं माधुरी सिसकिया अहहउफ करते मदहोस होने लगती हैं
राजन नीचे माधुरी केँ पेट कों चूमने लगता हैं माधुरी औऱ जोर सें सिसकिया लेने लगती हैं माधुरी - अहह राजनरुक जामतकर
राजनमन मे - उफ कियामाल हैं साला क़िस्मत हि खराब हैं मगर मे तेरी लेके हि रहुंगा अहह मेरी माधुरी मेरीजान
राजनखरा होता हैं औऱ माधुरी कों किस करने लगता हैं माधुरी भि पुरासंग देते हुवेकिस करने लगती हैं दोनों एक् दूसरे कों अपनारस पिलने लगते हैं माधुरी गलतसही सोचने मे नहीं थि
किस करने केँ बाद
माधुरी स्वयं कों संभलती हैं औऱ राजन कों देख - बस हौ गय़ा अब मेरे पीछे नहीं आनां नहीं तौ अच्छा नहीं होगा
राजन माधुरी कों देख - समझ गय़ा यह बताओ नाँ कोन कि कलर कि पैंटी पहनी हैं
माधुरी गुस्से सें - लाल
राजन माधुरी केँ ब्लाउस बिकनी केँ अंदरहाथ डालके जोर सें चुचेदबा देता हैं माधुरी जोर सें अहह सिसक् परति हैं औऱ राजन कों दूर धक्का देके गुस्से सें - हद मे रहो हमारे बीच जौ थां खतम हौ चुका हैं दुबारा परेसान मत करना
माधुरी रामपाल कों देख - यहीहुआ थां बापूजी आप् मुझे गंदी स्त्री समझरहे होंगे नां
रामपाल माधुरी कों देख - नहींबहु तुमने जोँ क्याँ अपने प्रेम कों साबित करने केँ लिये क्याँ दूसरी तुम् नहीं चाहती थि राजन तुम्हारी तरफबार बार परेसान करे किसी कों पताचले मेने भि प्रेम किया हैं तौ तुम्हारी तरफसमझ सकताहु
माधुरी रामपाल कों देख - आप् बहुत अच्छे हैं गंदे भि
रामपाल मुस्कुराते हुवे - अच्छा गंदाकाम तौ क्याँ हि नहीं अभि तक
माधुरी सर्म सें - छी गंदे पिताजी जी हैं आप्
देररात होँ चुकी थि दोनों सो जाते हैं
सुभहउठ माधुरी नहाने लगती हैं नहाते हुवेरात कि बातें औऱ रामपाल कि हरकतयाद करकेमन मे - पिताजी जी भि नाँ उनकी हरकते आज केँ जवान लरको कि तरह हैं बातें भि ऐसी पूछोमत उफयहरेड लाइट भि नां खैर जौ होना हैं देर स्वेर् होके रहेगा
माधुरी नहाने केँ बाद तैयार होती हैं फिन खानां बनाने बैठ जाती हैं रामपाल देर सें उठता थां बाहर् आके माधुरी कों देख - आज किया बनाने वाली होँ बहु
माधुरी पीछे रामपाल कों देख मुस्कुराते हुवे - रोटीमटर कि सब्ज़ी
रामपाल माधुरी केँ पास जाके होठो पे किस करते हुवे - आनंद आयेगा खाने मे
माधुरी सर्म सें रामपाल कों देख - आपकी पत्नि नहींहु जब देखोकिस करते रहते hain
रामपाल मुस्कुराते हुवे - जनताहु बहु हौ औऱ मुझे अपनीबहु कि बहुत मनपसंद हैं
माधुरी मुस्कुराते हुवे-बरे गिरे व्यक्ति हैं आप् पिताजी जीबहु कि लेने पे लगे हैं
रामपाल - जबबहु करक्माल हौ तोँ कियु नहीं
रामपाल माधुरी ससुरजी बहु मस्ती गंदी बातें करते रहते हैं खानां तैयार होता हैं खाते हैं फिन कमरे मे
रामपाल माधुरी कों गोदी मे बैठ केँ खिलाते हुवे - बहुत फैली गांड हैं बहु तेरी चूत कि गर्मी उफसाफ फिल हौ रही हैं मुझे
माधुरी औऱ अपनी चूत कों रामपाल केँ लन्ड पे दबाते घिसते हुवे - अच्छा इस लिये मुझे अपनेगोद मे बैठाया हैं अपनीबहु कि चूत कि गर्मी फिल करके केँ लिये
रामपाल दोनों हाथ माधुरी केँ चुचे पे रखजोर सें दबाते हुवे - उफसही कहाबहु तूनेअहह कितने मस्तबरे चुचे हैं तेरे
माधुरी सिसकिया लेते हुवे अपनी चूत कों रामपाल केँ लन्ड मे रगराते हुवे - अहह पिताजी जी मेरे चुचेअहह दर्द होँ रहा हैं
रामपाल माधुरी कों खाट पे लेता केँ माधुरी केँ पेट कों चूमने लगता हैं माधुरी सिसकिया लेते हुवे रामपाल कों देख - अहह सुभह सुभह सुरु हौ गये आप् अहहखेत नहीं जानां हैं आपको
रामपाल पेट चूमते हुवे - जानां हैं बहुमगर अब तोँ तेरे बिनादिल खेत मे भि नहीं लगता हैं
रामपाल माधुरी केँ ब्लाउस बिकनी निकाल दोनों चुचे नंगेकर देता हैं औऱ एक् चुचेमुह मे लेकेमजे सें चूसने लगता हैं माधुरी कों बहुत आनंदआने लगता हैं माधुरी तरपने सिसकिया लेते हुवे मचलने लगती हैं
माधुरी - अहहउफ मा बापूजी अहह चूसिये अपनीबहु केँ चुचे कों उफअहह मेरे ससुरजी जीअहह
रामपाल खरा होके माधुरी कों देख - बहुतु नहीं जानती मे कितना बेचैन हु तेरी चूत देखने औऱ तेरी चूत मे लन्ड डालने केँ लिये अभि देखा तेरी चूत तोँ स्वयं कों रोक नहीं पाऊगा इस लियेजा रहाहु 2 दिन साला लन्ड हिलाते रहना होगा
माधुरी हस्ते हुवे - मे हु नाँ
रामपाल माधुरी कों देख - उफबहु अच्छा चलताहु
माधुरी - जी बापूजी
रामपाल खेत केँ लिये निकल परता हैं माधुरी कों अच्छा नहीं लगता नाँ रामपाल कों दोनों एक् दूसरे सें एक् समय केँ लियेदूर रहना नहीं चाहते थें
माधुरी अपनी चूत मे हाथरख - गीली हौ गई
2 दिनबाद - दोपहर 1 बजेखेत मे
माधुरी रामपाल खानां खाके बैठे बातें कररहे थें खेतो कों देखते हुवे
रामपाल माधुरी कों देख - बहुदो दिन गुजरगये तेरीरेड लाइटहटी याँ नहीं
माधुरी रामपाल कों देख मुस्कुराते हुवे - बहुत बेताब हैं आप् अपनीबहु केँ बिल मे अपना चूहा घुसाने केँ लिये
रामपाल - बेचैन कियु नां होऊबहु एक् तोँ मेरे चुचे कां कोईबिल नहीं हैं अब तेरेबिल कां हि सहारा हैं
माधुरी मुस्कुराते हुवे - दूसरे केँ बिल पे अपनाहक जमाने मे लगे हैं
रामपाल मुस्कुराते हुवे - जिस चुचे कां अपनाकोई बिल नहीं होता वोँ दूसरे केँ बिल मे हि घुसने कि सोचता हैं
माधुरी सर्म सें - पिताजी जी आपकी बातें बहुत गंदी होती हैं बहुततेज हैं आप् बातें करने मे
रामपाल - यह छोरो बताओ नाँ रेड टाइटहटी याँ नहीं प्लेस
माधुरी रामपाल कों देख सर्म सें - हाहट गई हैं
रामपाल खुश होके - सच मे
माधुरी सर्म सें - हा बाबा
रामपाल माधुरी केँ हाथपकर नीचे लें आता हैं माधुरी हैरान रामपाल कों देख - बापूजी आप्
रामपाल बिना बोले मक्के केँ खेत केँ अंदर लेकेआता हैं औऱ माधुरी कों देख - बहुअब रुक नहीं सकताएसी ( मक्के केँ खेत मे ) तेरी चूत मरने वालाहु चलो जल्द करते हैं
माधुरी हैरान सर्म सें रामपाल कों देख - कोई आँ गय़ा देख लिया तौ
रामपाल - कोई नहीं आयेगा बहु प्लेस समझो नाँ मेरी तरप् कों
माधुरी रामपाल कों देख उसकी बेताब कों देख - ठीक हैं आज आप् अपनीबहु कों इस मक्के केँ खेत मे चोद हि दो मे भि तरप्रही हु
आज केँ लिये इतना हि
मक्के केँ खेत मे – New Episode
chapter 7
रामपाल माधुरी बीचखेत मे थें रामपाल बहुत बेताब जोस मे थां बेचारा पत्नि केँ जाने केँ बाद चुदाई कां सुख नहीं लें पाया थां
माधुरी भि बेचैन बेताब थि अपने ससुरजी सें चुदवाने केँ लिये मनोज केँ नाँ होने सें माधुरी रात तरप्मचल केँ सोती थि
रामपाल अपना लन्ड निकाल माधुरी कों देख - चलबहु चूस केँ गिला करदे ताकि तेरी चूत मे लन्ड धीरे-धीरे चलाजाए
माधुरी घुटनों पे बैठ लन्ड कों मुठी मे पकर रामपाल कों देख सर्म सें - पिताजी जीआज अपनीबहु कों चोद केँ हि मानेंगे
रामपाल मुस्कुराते हुवे - औऱ नहीं तौ क्याँ चलो चुसो नां
माधुरी मुस्कुराते हुवेमुह मे लन्ड लेके चूसने लगती हैं रामपाल मजे मे खोने लगता हैं मक्के केँ खेत मे ससुरजी बहु कां रसलीला सुरु होँ गय़ा थां माधुरी मन मे - उफ मक्के केँ खेत मे अपने ससुरजी सें चुद्दूगी सोचा नहीं थां अहह मेरी चूत लन्ड लेने केँ लिये तरप्रही हैं
रामपाल - उफबस बेटी आगे कां प्रोग्राम करते हैं
माधुरी लन्ड मुह सें निकाल रामपाल कों देखती हैं
रामपाल माधुरी कों देख - बेटी घोरीबन जाओ
माधुरी पहलीबार अपनी चूत देखाने चुदने वाली थि बेताब भि थि सर्म भि आँ रही थि मगर माधुरी सारी पेटीकोट उठा केँ घोरीबन जाती हैं
रामपाल बेताबी सें झुक केँ अपनीबहु केँ चूत देखने लगता हैं जोँ फूली टाइट चिकनी थि रामपाल दोनों हाथो सें चूत फैला केँ चूत केँ फाको मे उंगली सें रुब करने लगता हैं माधुरी जोर सें सिसकिया लेने लगती हें सिहर जाती हैं पहलीबार पति केँ अलावा किसी औऱ नें उसकी चूत देखती छुवा थां माधुरी जोरजोर सें सासे लेने लगती हैं
रामपाल तेजी सें उंगली करते हुवे - उफशपथ सें बहु तेरी चूत बहुत हसीन टाइटगरम हैं बाल नहीं हैं चल बताना सुभहसाफ किया नाँ
माधुरी सर्मजोस मे - उफ पिताजी जी आपनेसही कहाअहह सुभहसाफ किया हैं उफमा पिताजी जी बहुत अच्छा लगरहा हैं उंगली करते रहिये
रामपाल कुछदेर उंगली करते रहता हैं एसी मे माधुरी कि चूत रस सें गीली होँ जाती हैं
रामपाल पुरा नँगा हौ जाता हैं औऱ घुटनों पे बैठ लन्ड मुठी मे पकर माधुरी कि गांड फैला केँ छेद पे अपना लन्ड रख देता हैं अपनी चूत केँ छेद पे अपने ससुरजी कां गरम मोटा लन्ड फिल करते हि माधुरी पागल होने लगती हैं रामपाल धीरे-धीरे सें अंदर लन्ड घुसाने लगता हैं
टोपाफक् केँ संग अंदरघुस जाता हैं माधुरी दर्द मे मर गई मा पिताजी जी बहुत दर्द होँ रहा हैं धीरे-धीरे घुसाओ नाँ
रामपाल धीरे-धीरे सें लन्ड अंदर घुसते हुवे - बहु बहुत टाइट चूत हैं तेरीअहह बहुतगरम भि मेरा लन्ड जलने लगता हैं
रामपाल एक् जोर कां धक्का मरते हुवे पुरा लन्ड अंदर तक घुसा देता हैं माधुरी जोर सें दर्द मे चीख परती हैं आखो सें आसु निकलआते हैं
रामपाल माधुरी केँ गांड कों पकरे - अहह कितना गरम हैं उफअब जाकेचैन मिला
माधुरी दर्द मे - मर गई बापूजी बहुत दर्द होँ रहा हैं
रामपाल - बस बेटी अब मज़ा आयेगा
रामपाल चुदाई करना सुरु करता हैं संग मे माधुरी केँ मस्त गांड दबाते रहता हैं लन्ड फटफटफच् आवाज़ केँ संग माधुरी केँ चूत केँ अंदर बाहर् होने लगता हैं रामपाल धक्के मारेजा रहा थां माधुरी घोरीबनी अपने ससुरजी कां लन्ड लेतीजा रही थि अहहउफ सिसकिया लेँ रही थि
रामपाल गांड दबाते चुदाई करते हुवे - यकीन नहीं होताबहु मेरा लन्ड तेरी चूत मे हैं तुम्हे मे घोरीबना केँ मक्के केँ खेत मे चोदरहा हुउफ तेरी हैं गरम टाइट चूत इतना मज़ा आँ रहा हैं तेरी चुदाई करने मे बता नहीं सकताबहु तुशपथ सें मस्तमाल हैं अहहचैन मिल गय़ा
माधुरी दर्दमजे मे सिसकिया लेते हुवे - अहह पिताजी जी यकीनकर लो आपकीबहु घोरीबनी हैं आप् चोदरहे हैं अहह आनंद आँ रहा हैं मेरी चूत तरप्रही थि लन्ड केँ लिये आपका लन्ड लेकेखुश हौ गई हैं
खेत मे फटफच् अहहउफ सिसकिया तेज सासेगुज रही थि
10 मिनटबाद माधुरी झर जाती हैं
माधुरी बैठी थि रामपाल उपर केँ ब्लाउस बिकनी निकाल माधुरी केँ चुचे दबाने लगता हैं
माधुरी - उफ बापूजी आपने तोँ जान निकाल दि धीरे-धीरे दबाइये दर्द होता हैं
रामपाल मुस्कुराते हुवे - अभि तोँ सुरु कियाहु बेटी
रामपाल जमीन पे लेत माधुरी कों देख मुस्कुराते हुवे - चलोबहु तेरीबरी अब
माधुरी सर्म सें रामपाल केँ ऊपरआके लन्ड चूत मे लेकेबैठ जाती हैं गांड रामपाल कि तरफ थि
माधुरी दोनों हाथो कों पीछे जमीन पे रखे पीछे थोराझुक केँ अपनी गांडउपर नीचे करते हुवे लन्ड कि सवारी करने लगती हैं रामपाल नीचे लेता माधुरी केँ बॉडी कों सेहलने चुचे दबाने लगता हैं
रामपाल - उफबहु मस्त सवारी करके लन्ड लें रही हौ मनोज केँ संगऐसा हि करती होँ किया
माधुरी जौ मजे मे खोई थि तेजी सें लन्ड चूत मे लें रही थि रामपाल कि बातसुन - अहहउफ हा पिताजी जी लेतीहु अहह अभि तोँ आपका मोटा लन्ड लें रहीहु बहुत मज़ा आँ रहा हैं
रामपाल - बहुअब मेरीतरफ करके बैठो मेरे लन्ड पे
माधुरी रामपाल कि तरफफेस करके लन्ड पे बैठ जाती हैं
माधुरी रामपाल केँ ऊपर जमीन पे दोनों हाथो कों रखेझुक जाती हैं औऱ रामपाल नीचे सें धक्के मारते हुवे चुदाई करने लगता हैं माधुरी दर्दमजे सें - उफमामर गई पिताजी जी इतनीतेज चुदाई करोगे तोँ अहह मेरी चूत छील जायेगी अहह आप् तोँ कमाल केँ हैं
रामपाल तेजी सें चुदाई करते हुवे - बहु मे नहींतु कमाल कि हैं तेरी मस्तगरम चूत कमाल कि हैं तुँ पूरी कमाल कि हैं अहह मेरी क़िस्मत हि खुल गई मेरीबहु मुझेमिल गई अबरोज तेरी चूत मारुंगा
माधुरी चुदाई कां मज़ा लेते हुवे - मार लेना बापूजी उफ करते रहिये
रामपाल - उफथक गय़ा बहुअब तुम् करो
रामपाल कि बातसुन माधुरी रामपाल केँ ऊपरलेत केँ अपनी गांड तेजी सें उपर नीचे करते हुवे लन्ड लेने लगती हें माधुरी - अहह बापूजी मे झरने वालीहु अहहउफ मा मज़ा आँ रहा हैं उफ
रामपाल हफ्ते हुवे - मे भि करतीरहो जोर सें अहहउफ मे अहह
माधुरी पूरीतरह रामपाल कों पकर लेती हैं औऱ पुरा लन्ड अंदर तक लेके झरने लगती हैं रामपाल भि कई सालों कां जमा अपनामाल अपनीबहु माधुरी केँ अंदर गिरा देता हैं दोनों तेज सासे लेने लगते हैं
रामपाल मस्त होँ गय़ा थां कई सालों बाद चुदाई कां सुख मिला भि बहु सें तोँ आनंद औऱ डबल होँ गय़ा थां माधुरी कों भि बहुत मज़ाआता हैं 43 मिनट चुदाई चली थि जिसमे माधुरी 4 बारझरी जबकि मनोज 15 मिनट चुदाई करता थां ऐसा नहीं थां माधुरी कों मनोजखुश नहींकर पारहा थां
माधुरी रामपाल कपड़े पहन बाहर् आते हैं
रामपाल माधुरी कों देख -- बहु तेरी चुदाई करने जौ आनंदआया बता नहीं सकताचलो नां बातें करते हैं
माधुरी रामपाल कों देख - नाँ बाबा नाँ आपके मोटे लन्ड सें चुदने केँ बाद मेरी चूत मे जलन दर्द होँ रहा हैं मे थक भि गई हु मे तौ चली
माधुरी रामपाल केँ होठों पे किस करते हुवे - मुझे भि बहुत जयदा मज़ाआया मे बहुतखुश हु पिताजी जी आपसे चुदके
माधुरी मुस्कुराते हुवे जाने लगती हैं अपनी गांड हिलाते हुवे रामपाल माधुरी कों जातेदेख मुस्कुराते हुवे - रात कों औऱ अच्छे सें लूंगा
माधुरी पीछे रामपाल कों देख सर्म सें - बहुततेज होँ रहे हैं पिताजी जी
माधुरी घऱआके पलंग पे लेत सारीउपर करके चूत मे हाथरख - अहह बहुत मज़ाआया सोचा नहीं थां पिताजी जी केँ अंदर इतनादम होता पति जी 15 मिनट चोदते हैं मे दोबार झर जातीहु मगर बापूजी उफ मेरी चूत आज तोँ चैनमिल गय़ा पिताजी जी कां लन्ड लेके
वही रामपाल मचान पे लेतेमन मे - यकीन नहीं होता मेने अपनीबहु कों चोद दिया मक्के केँ खेत मे उफरात औऱ लूंगा
रात 8 बजे
माधुरी कों रामपाल कों किस कियेजा रहा थां माधुरी भि पुरेजोस मे अपने ससुरजी जी कां संग लें रही थि दोनों ससुरजी बहुमुह मिठा करते हैं
रामपाल माधुरी कों देख - बहुजलन अभि भि होँ रही हैं क्याँ
माधुरी सर्म सें - हा थोरा सां आपका मोटा लन्ड जौ गय़ा हैं
रामपाल माधुरी केँ नाइटी निकाल नँगा करते हुवे मुस्कुरा केँ - अबफिन जायेगा मेरा मोटा लन्ड तेरी चूत मे
रामपाल माधुरी कों खाट पे गिरा देता हैं माधुरी नंगीखाट पे लेती रामपाल कों मुस्कुराते हुवे देखने लगती हैं
रामपाल माधुरी कि नंगी बॉडी कों देखते हुवे - खेत मे अच्छे सें तेरी पूरी बॉडी हुस्न कों देख नहीं पाया थां बहुमगर अबदेख रहाहु तुम् सभी मे बहुत सुंदर होँ तुम्हारी बॉडी भि बहुत अच्छी हैं
रामपाल माधुरी केँ चिकनी चूत कों देख - उफ तेरी चूत बहु मस्त हैं
माधुरी सर्म सें - अच्छा बहु कों नँगा करके मीठी बातें कररहे हैं
रामपाल माधुरी कों देख मुस्कुराते हुवे - मीठी नहींसच
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रामपाल माधुरी केँ पास जाके माधुरी केँ उपरआके चुचेमुह मे लेके चूसने लगता हैं माधुरी सिसकिया लेते हुवे - अहह मेरे प्यारे ससुरजी जी चूसिये जितना चूसना हैं अहह बेटे कां काम आप् कररहे हैं
रामपाल चुचेमुह सें निकाल माधुरी कों देख - करना हि पड़ेगा
रामपाल माधुरी केँ तांगे फैला केँ माधुरी कों देख - चूत कां रस नहीं पिया हैं अब पियूँगा
माधुरी सर्म सें रामपाल कों देख - रोका किसने हैं चूस लीजिये
रामपाल भि बिना देरी किये अपनीबहु कि मस्त चूत केँ फाको केँ बीचजिब सें चाटने लगता हैं माधुरी जोर सें सिसक् परती हैं माधुरी कों अलग हि आनंदआने लगता हैं माधुरी अपनी गांडउठा उठा केँ रामपाल केँ सर कों अपनी चूत पे दबाते हुवे - अहह ससुरजी जीयह कैसा मज़ाचैन हैं उफमा बहुत मज़ा आँ रहा हैं
रामपाल अपनीबहु केँ चूत कां स्वाद लेते हुवेमन मे - बहुतगरम नमकीन मस्त स्वाद हैं मज़ा आँ रहा हैं उफबहु कि चूत कां स्वाद उफ
6 मिनट मे हि माधुरी झर जाती हैं
रामपाल माधुरी कों देख मुस्कुराते हुवे - झर गई इतनी जल्द
माधुरी सर्म सें लाल होके हफ्ते रामपाल कों देख - गंदे ससुरजी जी
रामपाल माधुरी लें उपर आँ जाता हैं माधुरी रामपाल केँ लन्ड कों पकर अपनी चूत केँ छेद पे सेट करते हुवे रामपाल कों देख - घुसा दीजिये ससुरजी जी अपनीबहु केँ चूत मे अपना लन्ड
रामपाल माधुरी कों देखते हुवे एक् धक्के मे पुरा लन्ड घुसा देता हैं माधुरी दर्द मे चीख मारती हैं आसु निकलआते हैं
रामपाल माधुरी कों देख दर्दहुआ
माधुरी रामपाल कों देख मुस्कुराते हुवे - दर्द मे चैन मिला आप् सुरु करिये
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रामपाल भि माधुरी केँ ऊपर लेता धक्के पे धक्के मरने लगता हैं औऱ माधुरी दोनों तांगे उठाये रामपाल कों बाहों मे पकरे चुदाई कां मज़ा लेते हुवे - अहहउफ मर गई ससुरजी जीअहह बहुततेज चुदाई करते हैं आप्
रामपाल धक्के मारते हुवे माधुरी कों देख - तेज चुदाई करने मे हि असली मज़ाआता हैं मेरीबहु मनोज केँ संग इतना आनंदआता हैं
माधुरी - उफ नहीं ससुरजी जी आपकेसंग बहुत जयदा मज़ा आँ रहा हैं
रामपाल दोनों हाथो केँ सहारे माधुरी सें उपरआके जोरजोर सें धक्का मारने लगता हैं चुदाई करने लगता हैं माधुरी दर्द मे अहहउफ करते जाती हैं फटफटफच् फच् पायल कि माधुरी कि दर्द सिसकिया कमरे मे गुजरही थि बेचारा मनोज कों पता हि नहीं थां उसकी पत्नि कों उसका बाप चोदरहा हैं औऱ उसकी पत्नि मजे सें चुदवा रही हैं
रामपाल घोरीबना केँ चुदाई करने लगता हैं धक्के सें मस्त माधुरी कि दोनों चुचे लटकेहवा मे झूलरहे थें रामपाल मजे सें पेलेजा रहा थां
माधुरी दर्दमजे मे - ससुरजी जीअहह सर्म कीजिये अपनीबहु कों अहहमा घोरीबना केँ चोदरहे हैं उफमामर गई
रामपाल तेज धक्के मारते हुवे - बहु सर्म करता नाँ तोँ तेरी चूत नहीं मिलती कितनी टाइट हैं तेरी चूत तु भि बहुत मस्तमाल हैं पता हैं जबतुआती थि तुझेही देखता थां तौ सोचता थां कितनी मस्तमाल हैं
माधुरी शोक मे फिन मुस्कुराते हुवे - अहह अच्छा जी सुरु सें आपकीनजर मेरेउपर थि
रामपाल चुदाई करते हुवे - हा नाँ भि बीच मे थां
50 मिनटबाद
चुदाई खतम होती हैं माधुरी गरमगरम अपने ससुरजी कां माल अपनी चूत मे लेके लेती हुई हाफरही थि माधुरी रामपाल कों देख - इतना सारामाल मेरी चूत मे भर दियाकही माबन गई तौ
रामपाल माधुरी कों देख - कियु नहीं चाहती तुम् माबनो
माधुरी रामपाल कों देख - दिल सें चाहती हु पर्र डर हैं कही मुझमे कमी नां हौ
रामपाल माधुरी कों बाहों मे लेके - नहींबहु तुझमे कोईकमी नहीं हैं वैसे भि पताचल हि जायेगा
माधुरी रामपाल कों प्रेम सें देख - हु आपनेसही कहा
रात 11 बजे रामपाल कि बेटी संगीता केँ घऱ
संगीता कमरे सें निकल एक् खाली कमरे मे आती हैं जहा पहले सें हि कोई थां जौ संगीता कों देखखुश होके - आँ गई बहु
संगीता धीरे-धीरे सें -आप् नां किसीदिन मरवा दोगे किसी कों पताचल गय़ा तोँ
अंजान - कियाकरू बेटी तुझसे बातें किये बगैर तेरी चुदाई किये बगैर नींद नहींआती
संगीता सर्म सें - आप् भि नां बापूजी सासु तौ हैं नां उन्हें प्रेम करो नाँ
ससुरजी संगीता कों बाहों मे लेके मुस्कुराते हुवे - प्रेम याँ चुदाई
संगीता सर्म सें - छी बहुत गंदे होँ आप् बेसरम भि
ससुरजी म्यूज़िक केँ पेट कों मसलते हुवे दबाते हुवे - बहुउफ तेरीयह चिकनी पेटअहह बहुत आनंदआता हैं दबाने मसल्ने मे
संगीता सिसकिया लेते हुवे - अहह ससुरजी जीजरा धीरे-धीरे दर्द होँ रहा हैं
संगीता अपने ससुरजी कों दूर करते हुवे अपनी नाइटी उतरते हुवे ससुरजी कों देख मुस्कुराते नसीली आखो सें देख - जयदादेर करनासही नहीं होगा मेरे प्रेम ससुरजी जी हमारी बेटी सोरही हैं कहीजाग गई तौ मुझे जानां परेगा औऱ आप् कों लन्ड हिलाके सोना परेगा
ससुरजी संगीता कों देख मुस्कुराते हुवे - बहु तेरीयह बात भि सही हैं
तभी संगीता नाइटी उतार पूरी नंगी हौ जाती हैं उफ संगीता कि नंगी हसीन मस्त बॉडी मस्त थि
ससुरजी संगीता केँ नंगी बॉडी कों देख - उफबहु जब भि देखता हुदिल नहीं भरताउफ किया मस्त बॉडी हैं, ससुरजी चुचे कों देख, तेरे दोनों बरेखरे चुचे मस्त हैं काले निपल वाले, तेरी चूत उफ शब्द नहीं हैं
संगीता ससुरजी केँ पासआके अपने चुचे दबाके दूध निकलते हुवे - देखिये इतना स्वयं बचा हैं मेरे बच्चे केँ पिताजी आपको हि पीके खाली करना होगा
ससुरजी मुस्कुराते हुवे - जरूर इसके लिये तोँ हमेसा तैयार रहताहु
चलो टाइम आँ गय़ा हैं कुछराज खोलने कां औऱ चीजो कों किल्यर करने कां
देखो रामपाल औऱ माधुरी केँ पिता हरिपाल दोनों जिगरी मित्र हैं जब रामपाल हरिपाल कि सदी होती हैं बच्चे बरे होते हैं तौ दोनों फैसला करते हैं अपनी बेटी कि विवाह एक् दूसरे केँ बेटे सें करेगे
बसतय हौ जाता हैं
रामपाल - पत्नि मलती - बेटी संगीता बेटा मनोज
हरिपाल - पत्नि सुजाता - बेटी माधुरी बेटा अशोक
जब मनोज 18 कां हुआ तोँ उसकी विवाह हरिपाल कि बेटी माधुरी सें कर दि गई औऱ हरिपाल कि बेटी रामपाल कि बहु बनकेआई
जब संगीता 18 कि हुईँ तब रामपाल नें भि अपनी बेटी संगीता कि विवाह अपनेयार केँ बेटे अशोक सें कर दि औऱ संगीता हरिपाल कि बहुबन गई
आज अभि कि बातकरे तोँ मनोज कि विवाह केँ 2 साल सें जयदा होँ गये हैं मगर माधुरी मा नहींबन पाई
मगरवही संगीता केँ विवाह केँ एक् साल सें जयदा होँ चुके हैं औऱ संगीता नें एक् बेटी कों जन्म दिया हैं औऱ वोँ बेटी हरिपाल संगीता केँ बीच चुदाई सें पैदा हुइ हैं
संगीता हरिपाल नें अपनी बेटी कां नाम जूहीरखा जौ अभि 1 महीने कि होने वाली हैं
रामपाल हरिपाल दोनों साथी हैं तौ समझगये होगे माधुरी संगीता भि यार हैं एक् बरीवजह यह भि रही माधुरी रामपाल केँ बीच खुले मस्ती वाले बातें होने कां
यही संगीता हरीलाल केँ ऊपर भि लागू होता हैं
यह एक् राज हि हैं संगीता हरिपाल नें किसी कों पता नहीं चलने दिया जूही किसकी बेटी हैं पऱ यहसभी केसेकब हुवा जल्द हि आप् सभी कों पताचल जायेगा
भाग्य भि अजीबखेल खेलरही थि रामपाल नें अब जाके अपने साथी कि बेटी अपनीबहु कों चोद पाया हैं मगर बेचारा रामपाल कों क्याँ मालूम उसका साथी हरिपाल उसकी बेटी संगीता कों चोद केँ माबना चुका हैं
आज केँ लिये इतना हि
दोनों संगीता औऱ माधुरी कों उनके बाप सें भि चुदवाना बाद रोमांचक दृश्य होगा ।
मक्के केँ खेत मे – New Episode
ajay bhay, आपकी अन्य कहानियों कि तुलना मे यह स्टोरी change of taste (स्वाद मे बदलाव) जैसी हैं औऱ आपकी पिछली कहानियों मे तुलना मे आपके लेखन मे बहोत बेहतर सुधार आया हैं।
यह पूरा चैप्टर ससुरजी-बहू कां रसीला माहौल लेकरआया हैं औऱ आपनेइसे इतना रसदार बनाया हैं कि पढ़ते-पढ़ते मेरा लन्ड खड़ा होँ गय़ा थां। पिछले चैप्टर सें भि ज़्यादा वाइल्ड, ज़्यादा डिटेल्ड औऱ अधिक गंदा, खेत सें लेकरखाट तक हरसीन मे वोँ गर्मी औऱ बेइज्जती वालामजा हैं जोँ पाठक कों जल्दी अंदर खींच लेता हैं।
जैसे मक्के केँ खेत वालासीन, उफ़्फ़ यह तौ मास्टरपीस थां! रामपाल कां “चलबहू चूस केँ गिलाकर दे” औऱ माधुरी कां घुटनों पर्र बैठकर लन्ड चूसना… बिल्कुल परफेक्ट बिल्डअप। फिन घोड़ी बन जानां, चूत फैलाकर उंगली, औऱ वोँ पहला धक्का जब पूरा लन्ड अंदर घुसा, माधुरी कि चीख, आँसू औऱ दर्द सें मज़े मे बदलना… सभी इतनारॉ औऱ रियल थां कि लगरहा थां जैसे मे वहीं खड़ादेख रहा हूं। “फट्…फच्… फच्” कि आवाज़ें औऱ 10 मिनटबाद माधुरी कां पहलीबार झड़ना, बहोत तेज़ औऱ संतोषजनक थां।
काउगर्ल औऱ रिवर्स पोज़िशन वालासीन तौ औऱ भि गज़बढा गय़ा, जब माधुरी ऊपर चढ़कर लन्ड कि सवारी करती हैं, गांड़ ऊपर-नीचे, चूचियाँ हिलती हुईं… औऱ रामपाल नीचे सें धक्के माररहा हैं, यहसीन बहोत विज़ुअल औऱ हॉर्नी थां। आपका लिखा “मेरी चूत छील जाएगी” वाला लाइन तौ बहोत हॉटलगा। 43 मिनट कि चुदाई, माधुरी कां 4 बार झड़ना औऱ रामपाल कां सालों कां जमामाल अंदर छोड़ना, क्लाइमेक्स जबरदस्त थां।
इससेइतर रात कां सेकंड राउंड + चूत चाटना, यह तौ कामुकता कों अगलेचरण मे हि लें गय़ा! रामपाल कां चूत चाटना, माधुरी कां सर कों चूत पर्र दबाना औऱ केवल 6 मिनट मे झड़ जानां… बहोत रेयर औऱ लजीज डिटेल हैं। फिन मिशनरी औऱ घोड़ी मे तेज़ धक्के, “फटफटफच् फच्” कि आवाज़ें कमरे मे गूँजरही थीं औऱ बेचारा मनोज कों कुछपता हि नहि… यह बेईमानी वाला थ्रिल बहोत स्ट्रॉन्ग थां।
औऱ अंत मे संगीता-हरिपाल कां सीन औऱ दोनों परिवारों कां पुरानां कनेक्शन बताना, यह बहोत स्मार्ट मूव थां। अब कहानी मे डबल इनसेस्ट लेयर आँ गय़ा हैं (रामपाल अपनी साथी कि बेटी कों चोदरहा हैं, औऱ हरिपाल उसकी बेटी कों चोदकर मां बना चुका हैं)। जूही कां रिवील भि बहोत क्यूरियस बना दिया हैं।
कुछ चीजें जिसने मुझे अधिक आकर्षित किया, हर चीज़ डिटेल मे लिखी हैं (चूत फैलाना, लन्ड कां टोपा अंदर जानां, रसीला स्वाद, गांड़ दबाना, चूचियाँ चूसना)
गन्दी बातें बहोत नेचुरल औऱ देसी जैसे “बापूजी आपका मोटा लन्ड”, “मेरी चूत तरपरही थि”, “अब रोज़ तेरी चूत मारूँगा” सभी बिल्कुल मूड मे थां।
चैप्टर लंबा हैं मगर कहीं भि बोर नहि करता। हर राउंड अलगफील देता हैं।
मगरकुछ स्थान स्पेलिंग/ग्रामर साफ़कर सकते हें जैसे “तरप्मचल” → “तरपमचल”, “पति कों” → “पति केँ”। जौ आपकी पिछली कहानियों मे भि साफ़ झलकती थि, मगरयह छोटीबात हैं, किस्सा कि गर्मी पर्र कोईअसर नहि पड़ता।
मुझे तोँ यहअब तक कां सबसे स्टीमी चैप्टर लगरहा हैं। माधुरी कां कैरेक्टर बहोत बोल्ड औऱ भूखाबन गय़ा हैं, औऱ रामपाल कां “अब रोज़ तेरी चूत मारूँगा” वाला वादा अगले चैप्टर केँ लिए बहोत बड़ाहुक छोड़ गय़ा। संगीता-हरिपाल वाली साइड किस्सा भि अब उत्सुकता बढ़ारही हैं।
पढ़कर बहोत मजाआया, अगलेभाग कि उत्सुकता सें इंतजार मे.!
मक्के केँ खेत मे - Kahani ab aur interesting hogi
Zabardast sab ek dusre say fanse huwe hain koyi mazboori mai tow koyi sahmati say Dekhte hain aage kiya hotha hain Shaandar garma garam mast update
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