मक्के केँ खेत मे – New Episode
chapter 3
रामपाल देखता हैं माधुरी बहुत बेताब हैं जानने केँ लिये
रामपाल मुस्कुराते हुवे - बता दूँगा मगर तुम् बताओ तेराकोई बॉयफ्रेड थां
रामपाल केँ प्रश्न सुन माधुरी चौक जाती हैं समझ नहीं आँ रहा थां बातें किसतरफ जानेलगी हैं रामपाल माधुरी कों देखमन मे सोचते हुवे - लगता हैं गलती हौ गई
रामपाल माधुरी सें - माफ करना बेटा जाओ जाकेसो जाओ
माधुरी होस मे आते हुवे रामपाल कों देख थोरा सर्म सें - अरे नहीं बापूकोई बात नहीं मेने हि बात निकाली थि
रामपाल मुस्कुराते हुवे - अच्छा तौ बताओ थां याँ नहीं
माधुरी रामपाल कों बिना देखे सर्म सें - हा वोँ एक् थां
रामपाल थोरा हैरान होता हैं मगर जनता थां उसकीबहु इतनी सुंदर हैं जाहिर हैं लरको कि लाइन लगनी हि होगी
माधुरी मन मे - बातो बातो मे हम् किस टॉपिक पे आँ गयेउफ
रामपाल - बेटी मेरेपास आकेलेत जाओ
माधुरी रामपाल केँ पासलेत जाती हैं करवट लेते दोनों लेते एक् दूसरे केँ पास नजदीक एक् दूसरे कों देखने लगते हैं लेते तौ ऐसे थें जैसे ससुरजी बहु नहीं पति पत्नि होँ
खैरयह पहलीबार नहीं थां
रामपाल माधुरी कों देखते हुवे - बेटा अभि हमने अपनी लाइफ केँ सीक्रेट खोले हैं जोँ बातें कि ससुरजी बहु मे नहीं होतामगर हमारा नाता मित्र जैसा भि हैं
माधुरी रामपाल कों देखते हुवे - जी पिताजी जानती हु
रामपाल - अच्छा हैं अबजाओ सोजाओ यहसोच रही होँ मे तुझेही बता दूंगा कोन हैं वोँ केसे कियाहुआ तौ मे नहीं बताऊंगा
रामपाल माधुरी कों देख मुस्कुराने लगता हैं
माधुरी शोक मे आखे फ़ारे रामपाल कों देखमन मे - इनको केसेपता मेरेमन मे यहीचल रहा हैं
रामपाल - अबजाओ
माधुरी मुहबना केँ - नहीं बताना होगाकोन हैं वोँ सभीकुछ नहीं तोँ मे नहीं जाउंगी
रामपाल मुस्कुराते हुवे - अच्छा तौ ठीक हैं मगर तुम्हारी तरफ भि सभीसच बताना होगा
रामपाल सिर्यस् होके - बेटी बातें जौ होगी तोँ सोच लेना नहीं तौ तुम्हे अजीबलग रहा हैं तोँ बातयही खतमकर देते हैं
माधुरी मन मे - दोस्त मुझे जानना हैं मेरे ससुरजी कि लोव कहानी किया हैं जाने बगैर गई तोँ नींद नहीं आयेगी
माधुरी रामपाल कों देख - पिताजी हम् यार हैं मे तैयार हु जौ बातें होगी हमारे बीच रहेगी आप् बताओ
रामपाल - एक् बार औऱ सोचलो बेटा कियुंकी तुम्हे भि सभीपता हैं लोव केँ संग
रामपाल आगेकुछ नहीं केहता मगर माधुरी समझ जाती हैं
रामपाल माधुरी एक् संगमन मे - यह हम् किस टॉपिक पे आँ गये अजीब हैं मगरमगर अलग हि आनंद आँ रहा हैं
माधुरी थोरा सर्म सें - जी पिताजी अब बताइये कोन हैं वोँ भाग्य वालीहा
रामपाल मुस्कुराते हुवे - तुम् उसे जानती होँ बहु
माधुरी शोक मे रामपाल कों देख - कियाकोन
रामपाल मुस्कुराते हुवे - तेरी सुशीला ऑन्टी
माधुरी पूरीशोक मे - किया सुशीला ऑन्टी
सुशीला बगल केँ गाव कि रहने वाली हैं रामपाल सुशीला एक् संग पढ़ते थें फिन दोनों कों प्रेम होँ गय़ा अब सुशीला अपने ससुराल रहती हैं साल मे जब मायके आती हैं तोँ एक् बार रामपाल सें जरूर मिलने आते हैं 2 सालों मे माधुरी केँ आने सें लेकेतब तक 3 बारआई हैं
पहले महीने हि आके गई हैं इस लिये माधुरी सुशीला कों जानती हैं रामपाल सुशीला कों बातें करते भि देखा हैं माधुरी नें
माधुरी मन मे रामपाल कों देख - मस्तमाल फसाया थां बापूजी नें मनगये आपकोअरे मे यह कियाबोल रहीहु
सुशीला सच मे बहुत सुंदर हैं 3 बच्चे हैं मगर अभि भि स्लिम
माधुरी - तोँ तोँ कहा तक बात गई सदी कियु नहीं कि अपने
रामपाल पुराने समययाद करते हुवे माधुरी कों देख - बेटी बातयह थि लोव मेरेज़ उस वक़्त बहुतकम होता थां गाव मे तौ बहुतकम इस लिये हम् जानते थें सायद एक् नहीं हौ पायेंगे इस लिये हम् मिलते बातें करतेरहे जब टाइमआया उसकीसदी होँ गई उसकेबाद मेरी
माधुरी हैरान होके - आपको बुरा नहींलगा दर्द नहींहुआ अपने प्रेम कों किसी औऱ केँ संग जातेदेख
रामपाल माधुरी कों गोर सें देखता हैं फिन मुस्कुराते हुवे - हा थोरा सां कियुंकी हम् सुरु सें जानते थें ऐसा होगाइस लिये हम् रेडी थें
माधुरी मन मे - हा जानते हैं किया होगा तौ तैयार रहते हैं उस वक़्त इतना दर्द नहीं होताजब ऑन्टी आती हैं तोँ मे ससुरजी जी दोनों कों हस्ते बातें करते देखती हु
माधुरी रामपाल सें सर्म सें - कह तक सभीहुआ थां आप् दोनों केँ बीच
रामपाल माधुरी कों देख - मेरे औऱ पासआओ तौ बताऊंगा
माधुरी सर्माते रामपाल केँ एकदमपास आँ जाती हैं दोनों केँ बीच मे एक् इंच कां हि गेप थां रामपाल माधुरी एक् दूसरे केँ आखो मे देखते हैं अजीब लम्हा हालत थें एक् ससुरजी बहु एक् दूसरे कि लोव कहानी जानने केँ लिये इतना बेताब थें कि सभीभूल बैठे दोनों कां नाता किया हैं
रामपाल माधुरी केँ बाल चेहरे सें पीछे करते हुवे - बतादु
माधुरी कों पहलीबार अजीब अपने अंदरफिल होता हैं फिलजोर सें धकधक करने लगता हैं
माधुरी कपते होठों सें - हा
रामपाल माधुरी केँ कान मे - सभीकुछ किस
माधुरी सर्म सें मदहोस होके - अच्छे सें बताइये नाँ
रामपाल भि मदहोस होके - ठीक हैं सुनो पहले हमारे बीचकिस औऱ मेनेउसे नँगा देखा चुचे दबाये मगर सेक्स तीनसाल पहलेजब आईतबहुआ
माधुरी कि ससेउपर नीचे होने लगती हैं माधुरी कों कुछ हौ रहा थां रामपाल भि दोनों ससुरजी बहुगरम हौ गये थें
रामपाल माधुरी कों देखते हुवे - तुम् बताओसभी सच अच्छे सें
माधुरी तेजससे लेते रामपाल कों देख - उसकानाम राजन हैं विद्यालय पे पढ़ते थें संग मे राजन मुझे प्रेम करता थां हम् अच्छे मित्र थें एक् दिन उसने मुझे पर्पोस् किया मेने भि हाकर दि मगर जल्द हि पताचला वोँ कमीना हैं कई लरकी सें उसका चक्कर चलरहा हैं तौ मेनेउसे छोर दिया
रामपाल मदहोस होके माधुरी कि आखो मे देख - बताया नहींबीच मे कियाहुआ कहा तक
रामपाल धीरे-धीरे सें माधुरी केँ कमर पे हाथरख अपने सें पूरा चिपका लेता हैं माधुरी एकदम सें सिहर काप् जाती हैं रामपाल भि पागल होँ जाता हैं अपनीबहु कों बाहों मे लेके माधुरी केँ चुचे बॉडी कि गर्मी फिल करके माधुरी रामपाल केँ अंदर जोँ आग थि उससेरूम गरम होने लगता हैं
रामपाल माधुरी कों देख - बताओ नां
माधुरी मुश्किल सें बोलते हुवे - वोँ किस औऱ चुचे दबाये एक् दिन उसनेजिद कि तोँ चुचे दिखा दिये अपने
रामपाल माधुरी कि आखो मे देख - भाग्य वाला निकला
माधुरी सर्म सें लाल होँ जाती हैं
रामपाल - बेटी यहा तक हम् केसे एकदम सें आँ गयेपता नहींचला बहुमगर सचकहु अजीब हैं पऱ मुझे अच्छा लगरहा हैं हम् अपनेराज खुल केँ बता पायेखुल केँ पहले सें औऱ बातें कर पाये
माधुरी रामपाल कि बाहों मे अलग हि चैन लें रही थि
माधुरी - पिताजी मुझे भि अच्छा लगा
रामपाल - बेटी एक् बात बोलना चाहता थां मगरकेह नहींपा रहा थां अबजब इतनी बातें हौ गई तोँ केहरहा हु एक् पोता याँ पोती देदो
माधुरी सर्म सें लाल होके - पिताजी जी जानती हु हम् कीसिस कररहे हैं
रामपाल धीरे-धीरे सें औऱ माधुरी कों सीने सें सताते हुवेकान मे - कोसिस औऱ करो अंदर तक लो मुझे पोता याँ पोती चाहिये
माधुरी रामपाल कि बातें सुनसमझ सिहर सर्म सें लाल पानी पानी हौ जाती हैं
रामपाल माधुरी केँ गुलाबी होठों कों देख - राजनजब तेरे चुचे दबाता थां तोँ आनंदआता थां बहु तुम्हारी तरफ
माधुरी औऱ सर्म सें नजरे नीचे करके धीरे-धीरे सें - जी बापूजी
रामपाल माधुरी केँ होठों कों देखते हुवेरोक नहीं पिताजी औऱ एकदम सें माधुरी केँ ऊपरआके किसकर देता हैं माधुरी कि आखेफैल जाती हैं पूरीशोक मे चली जाती हैं माधुरी जल्द सें उठ केँ भाग जाती हैं तक जाके रामपाल होस मे आता हैं औऱ एहसास होता हैं उसनेयह क्याँ कर दिया
सुभह कां वक्त
माधुरी रामपाल सें नजरे नहीं मिलापा रही थि नाँ कोई बातें करती हैं रामपाल कईबार कोसिस करता हैं माफी मांगने कां मगर हिम्मत नहीं होती
दोपहर खेत लें मचान् मे लेता रामपाल स्वयं कों कोसरहा थां अपने आप् पे क्रोध कररहा थां
रामपाल - तूनेयह क्याँ कर दिया रामपाल एक् बहु थि जिसकी वजह सें तेरादिल लगा रहता थां मगर तूनेअब रह अकेला सभीकुछ खतम होँ गय़ा
रामपाल बहुत दुखी थां अपनी गलती पे पछतारहा थां
तभी माधुरी आती हैं खानां लेके माधुरी सांत थि खानां निकाल पानीसभी रामपाल केँ पासरख आहिस्ता दूसरी तरफदेख कों देखते हुवेबैठ जाती हैं रामपाल कि तरफ नहींदेख रही थि रामपाल कों बहुतदुख होता हैं
रामपाल दुखी आवाज़ मे - माफ करदे बेटी जवानी मे हि तेरी सासु गुजर गई मे अकेला हौ गय़ा रात एकदम सें एक् बातें निकली फिन होतेचली गई तौ मे स्वयं कों रोक नहीं पायासभी मेरी गलती हैं बहु तेरेआने केँ बाद मेरी लाइफ मे एक् अच्छी बहु केँ संग एक् साथी मिली जिसके संग मे बातें कर लेतादिल लगा रहतामगर अब तुम् ऐसेमुह मोर केँ रहोगी तौ मे स्वयं कों माफ नहींकर पऊगा नां सुकून सें जी पऊगा
रामपाल एकदम सें माधुरी केँ पेर पे गिर केँ - माफ करदे बेटी
माधुरी हैरान शोक होके जल्द सें रामपाल केँ हाथ अपनेपेर सें अलग करके रामपाल कों देख - बापूजी आप् यह क्याँ कररहे हैं मे आपके नाराज नहींहु
रामपाल हैरान होके - मतलब
माधुरी सर्म सें - वोँ अचानक सभीहुआ तोँ मे शर्मा गई इस लियेभाग गई आपके सामने आने कि हिम्मत नहीं हौ रही थि इस लियेदूर थि
रामपाल हैरान खुश होके - सच तुम् नाराज क्रोध नहीं हौ
माधुरी रामपाल कों देख - आपसे मे कभी नाराज नहीं हौ सकती बापू
रामपाल खुश होके एक् निवाला माधुरी कों खिलता हैं माधुरी भि बरे प्रेम सें खाती हैं औऱ रामपाल कों खिलती हैं खानां पीना होने केँ बाद दोनों लेत जाते हैं
रामपाल माधुरी कों फिन अपने सीने सें सता लेता हैं माधुरी सर्म सें लाल होने लगती हैं
रामपाल माधुरी कों देख - मे तौ डर हि गय़ा थां बेटी तोँ खुल केँ बातें हम् कर सकते हैं
माधुरी सर्म सें - हा
रामपाल माधुरी केँ होठों कों देख - मिठा स्वाद थां बहुत
माधुरी सर्म सें रामपाल कों देख - बहुत बेसरम पिताजी हैं आप्
रामपाल जोरजोर सें हसने लगता हैं
रामपाल - अच्छा यह बताओ राजन नें वोँ करने कि कोसिस नहीं थि
माधुरी मुस्कुराते हुवे - कियामगर मे ऐसे हि अपनासभी किसी कों ठोरीदे डुगी प्रेम करती थि सोचासदी करेगा
रामपाल - हु तुम् बहुत सुंदर होँ बेटी
माधुरी मुस्कुराते हुवे - अबकेह रहे हैं
रामपाल मुस्कुराते हुवे - डरता थां
माधुरी मुस्कुराते हुवे - अब नहीं डरते
रामपाल माधुरी कि आखो मे देख - डरताहु बहु कि दात नां पर्र जाए
माधुरी मुस्कुराते हुवे - अच्छा जी बेसरम
रामपाल माधुरी केँ होठो मे किस करते हुवे - रात सें हौ गय़ा हु
माधुरी सर्म सें - बहु पे लाइनमर रहे हैं आप्
रामपाल मुस्कुराते हुवे - हु कोसिस कररहा हु सायदपट जाये
माधुरी मुस्कुराते हुवे - आसानी सें नहीं
रामपाल - कोईबात नहीं कीसिस करता रहुंगा
माधुरी उठ केँ बैठ - जातीहु लोग किया कहेगे खुला खुला हैं सभी दिखता हैं
रामपाल भि बैठते हुवे - सोचरहा हुअब चारों तरफ घिरालगा दु
माधुरी बातसमझ सर्म सें - किसने लिये
रामपाल मुस्कुराते हुवे - अपनबहु केँ लिये
माधुरी हस्ते हुवे - ड्रीम्स देखिये जातीहु
माधुरी रामपाल कों किस करती हैं औऱ सर्म सें लाल निकल परती हैं घऱ केँ लिये
रामपाल माधुरी कों जातेदेख मुस्कुराते हुवे - रुक जाती ठोरी औऱ
माधुरी रामपाल कों देख मुस्कुराते हुवे - नाँ बाबा नाँ आप् बेसरम हौ गये हैं
रामपाल सर्म सें लाल होकेमन मे - यह एकदम सें किया होँ गय़ा हम् ससुरजी बहु केँ बीचयह सभीरात कों जब बापूजी नें मुझे बाहों मे लियाकिस किया तौ मुझे इतना अच्छा लगाअलग हि चैन मिला मे इतना स्वयं पहलेकभी नहीं हुइ इतनाअब हमारे बीच जोँ होनेलगा हैं अबसोच केँ हि हि उफ
रामपाल माधुरी कों जातेदेख सोचो मे गुम होँ जाता हैं
रात 9 बजे कमरे मे माधुरी आती हैं रामपाल बैठ सोचो मे हि गुम थां अभि भि सायद उलझन मे थां किया वोँ सहीकर रहा हैं
माधुरी रामपाल केँ पासखरी होके - पिताजी जीकहा खोये हैं आप्
रामपाल माधुरी कों देखता हैं तौ सभीभूल जाता हैं गलतसही कियुंकी माधुरी सारी मे आजअलग हि लगरही थि ब्लाउस मे कसे चुचेसाफ दिखरहे थें चिकनी कमर गहरी ढोरी रामपाल तोँ पागल हौ जाता हैं आजसभी कुछ जयदा हि खुलादिख रहा थां
रामपाल नॉर्मल होके - आओ बेटी बैठो तेरी सासु कि याद आँ रही हैं बसउसे हि यादकर रहा थां
माधुरी बैठते हुवे दुखी होके - बापूजी
रामपाल मुस्कुराते हुवे - यही जीवन हैं मेरा नालायक बेटे कां मोबाइल आया थां याँ नहीं
माधुरी हस केँ - अभि बात करकेआई हु आपसेबात करना चाहते थें मगरफोन चार्ज नहीं थां बोले सुभहबात करेगे आप् सें
रामपाल मुस्कुराते हुवे - अच्छा क्याँ बात हुईँ हुकहो
माधुरी सर्म सें - आप् भि नाँ पिताजी जी बहुत नोटि बातें करनेलगे हैं यहरूप पहलीबार देखरही हु
रामपाल - कियुंकी
माधुरी - कियुंकी
रामपाल - कियुंकी अब हम् खुल केँ बातें कररहे हैं इस लिये
माधुरी - हु
रामपाल चलते हुवे माधुरी केँ पासआता हैं माधुरी कि सासेतेज होने लगती हैं रामपाल माधुरी कों देख - बहुकिस कर सकताहु
माधुरी सर्म सें कपते हुवे - जी
बस रामपाल बिना देरी किये माधुरी कों किस करने लगता हैं माधुरी अलग एहसास चैन मे खोटे हुवेमजे सें अपने ससुरजी कों होठो कां रस पिलाने लगती हैं वही रामपाल मजे सें होठो कों चुस्टे हुवेमन मे - यह एहसास यह मज़ागलत सहीअब मुझे नहीं सोचना
3 मिनट केँ बाद
माधुरी सर्म सें नजरे नीचे कियेतेज सासे लेने लगती हैं तभी रामपाल पीछे सें माधुरी केँ कमर कों दोनों हाथो सें कस केँ पकरते हुवे माधुरी अपनीबहु केँ गर्दन पे किस करने लगता हैं माधुरी मचल जाती हैं तेज सिसकिया लेते हुवे - बापूजी अहहउफ मा पिताजी जीउफ
रामपाल अपने लन्ड कों पीछे सें माधुरी केँ गांड मे दबाते हुवे - उफबहु
माधुरी रामपाल बदन कि आग मे जलरहे थें
रामपाल रुक जाता हैं औऱ माधुरी कों देख - बेटी हम् अकेले रहते हैं कियु नाँ हम् संग सोये बहुत बातें करेगे
रामपाल कि बातसुन हैरान होती हैं शोक भि
रामपाल - सोर्री बहु तुम्
माधुरी एकदम सें - ठीक हैं बापूजी मे अतिहु
माधुरी जल्द सें चली जाती हैं वही रामपाल बहुतखुश होँ जाता हैं
रामपाल खाट पे बैठा हि थां कि माधुरी रामपाल केँ पासआके बैठ मुस्कुराते हुवे - आँ गई पिताजी मे
रामपाल जब माधुरी कों देखता हैं तोँ शोक हौ जाता हैं माधुरी नाइटी मे बिना ब्लाउस बिकनी केँ थि बरेबरे दोनों चुचे केँ निपलसाफ खरेदिख रहे थें रामपाल तौ बेचारा होस खोने लगता हैं सिन हि ऐसा थां
माधुरी कों एहसास होता हैं रामपाल उसका ससुरजी क्याँ देखरहा हैं तोँ अजीब कि खुशी बेताबी माधुरी कों होती हैं
रामपाल होस मे आके - चलो सोते हैं
रामपाल फिन माधुरी कों सीने सें चिपका लेता हैं इसबार औऱ अच्छे सें अपनीबहु केँ टाइट नर्म चुचे सीने पे फिल करके पागल होने लगता हैं
रामपाल माधुरी कों देख - बहुराज राज रखना
माधुरी बात कों समझ सर्म सें - जी बापू
रामपाल - बहु जौ हमारे बीच होनेलगा हैं पता हैं नाँ
माधुरी रामपाल कों देख - जी बापूजी
रामपाल मुस्कुराते हुवे - तुम् बहुत सुंदर सेक्सी हौ बहु
माधुरी मुस्कुराते हुवे - सेक्सी आपकेमुह सें सें सुन अच्छा लगा
रामपाल इमोसनल होके - थैंक्स बेटा आजतु मेरेसंग हैं अकेले नहीं सोना परेगा
माधुरी रामपाल कों सीने सें लगा केँ - बापूजी दुखीमत होँ जब पति जी नहीं रहेगे तब तक हम् संग सोयेंगे
रामपाल - हु
रामपाल माधुरी कों देख - बहु तुम् बहुत अच्छी हौ
माधुरी - आप् भि
रामपाल - बेटी तेरामन तौ बहुत करता होगा नाँ
आज केँ लिये इतना हि
Badhiya shaandar update Sasur Bahu badi juldi juldi aage badhte ja rehe Dono tarf agni barabar kee lagi hain ab dekhte hain ye garmi kam nikalti hain dono kee
मक्के केँ खेत मे – New Episode
chapter 4
रामपाल माधुरी अपनीबहु कों बाहों मे लिये माधुरी केँ चुचे चूत बॉडी कि गर्मी खुशबु लेके पागल हौ रहा थां तोँ वही माधुरी अपने ससुरजी कि बाहों मे अलग हि चैन लेकेमचल रही थि
रामपाल एक् प्रश्न करता हैं - मन करता होगा नाँ
माधुरी जौ अपने ससुरजी कि बाहों मे थि रामपाल केँ प्रश्न सुन शर्मा जाती हैं
माधुरी रामपाल कों देख मुस्कुराते हुवे - मन करता हैं बहुत समोसे जिलेबी पानीपुरी खाने कां
रामपाल समझ जाता हैं उसकीबहु मस्ती कररही हैं
रामपाल मुस्कुराते हुवे - अच्छा बारा केला खाने कों नहीं करता
रामपाल कि बातें सुन एकपल केँ लिये माधुरी सिहर जाती हैं
माधुरी हस केँ - बरा केला मुझे नहीं मिला छोटा हैं
रामपाल मुस्कुराते हुवे - अरे ढुंढोगी तौ मिल जायेगा
माधुरी रामपाल कि बातें सुनसमझ - अच्छा मगर मुझे नहीं चाहिए
मस्त दोनों ससुरजी बहु कों बहुत मज़ा आँ रहा थां
रामपाल माधुरी केँ गांड केँ थोराउपर हाथ रखते हुवे अपना लन्ड माधुरी केँ चूत सें चिपका देता हैं अपनी चूत पे करक् मोटा लम्बा गरम लन्ड फिल करते हि माधुरी सिसक् काप् सिहर जाती हैं
माधुरी रामपाल कों नसिलि आखो सें देखते हुवे - आपका चूहागलत बिल मे जाने कि सोचरहा हैं
रामपाल माधुरी केँ आखो मे देख - बिल तौ बिल हैं चूहा किसी भि मिल मे जा सकता हैं
माधुरी मुस्कुराते हुवे - नहींजिस चूहेबिल होता हैं उसी मे जा सकता हैं किसी औऱ केँ बिल मे गय़ा तोँ उसबिल कां मालिक उसेमार केँ भागा देगा
रामपाल माधुरी कि बातें समझते हुवे - अच्छा अगरउस बिल कां मालिक नहीं हैं तोँ
माधुरी मुस्कुराते हुवे - तौ जिसका बिल हैं वोँ जाने नहीं देगा
रामपाल मुस्कुराते हुवे - अरे एक् बार जाने तौ बेचारा कईसाल सें बिल मे जाने केँ लिये तरप्रहा हैं
माधुरी मुस्कुराते हुवे - नाँ बाबाबिल केँ मालिक कों सक्हुआ तौ गर्बर् होँ जायेगी
रामपाल दुःखी होके - लगता हैं मेरे चूहे कि क़िस्मत मे बिल मिलना लिखा हि नहीं हैं
माधुरी रामपाल कों देखते हुवे - कोसिस करते रहिये सायदमिल जाये
रामपाल मुस्कुराते हुवे - हु कोसिस तौ जारी रहेगी
माधुरी मन मे - इतना मज़ा पहलेकभी नहींआया जितना अभि ससुरजी जी सें डबल मिलिंग बातें करने मे उनकी बाहों मे आँ रहा हैं
रामपाल मन मे - यकीन नहीं होता हम् उफ
रामपाल माधुरी कों देख - अच्छा हुवा तुम्हे पहलेपता चल गय़ा तेरा प्रेम तुम को धोकादे रहा हैं नहीं तोँ बेचारा मेरे बेटे कों यूज कियाबिल मिलता
रामपाल हसने लगता हैं माधुरी पूरीशोक मे सर्म सें पानी पानी होँ जाती हैं
माधुरी रामपाल कों प्रेम सें सीने पे मारते हुवे - छी गंदे बापू
रामपाल हस्ते हुवे - सही तोँ कहा
रामपाल माधुरी कों बाहों मे कसते हुवे - नहींपता अचानक केसे हमारे बीच एकदम सें यहसभी होनेलगा मगर मुझे अच्छा लगरहा हैं
माधुरी धीरे-धीरे सें - मुझे भि
रामपाल माधुरी कों देख - चलो सोते हैं देररात हौ गई हैं
रामपाल माधुरी कों सीने सें लगा लेता हैं माधुरी कों भि बहुत अच्छा लगता हैं दोनों ससुरजी बहुऐसे सोते हैं जैसे पति पत्नि होँ
शरीर कि प्यास तौ दोनों मे थि
रामपाल कि पत्नि बच्चो कों जन्म देने केँ बाद जवानी मे गुजर गई तब सें रामपाल कों चुदाई कां सुख नहीं मिला
माधुरी जबआई विवाह केँ कुछ महीने बाद मनोजचला गय़ा कमाने तोँ माधुरी भि जवान थि उसकी भि जरूर थि
रीजन तौ कई हैं ससुरजी बहु केँ बीचयह सभी होने कां अकेले रहते हैं मित्र जैसे बातें करते हैं ऐसे मे धीरे-धीरे धीरे-धीरे इसमोर पे आनां हि थां
सुभहजब माधुरी उठति हैं तौ आज अकेले नहीं अपने ससुरजी कि बाहों मे थि माधुरी रामपाल कों प्रेम देखती हैं फिन शर्मा जाती हैं रात माधुरी बहुत मुश्किल सें सोपाई थि मगर जौ चैन कि नींदआई माधुरी कों पहले नहींआई थि
माधुरी उठ केँ रामपाल कों देखमन मे - रातचैन कि नींदसो पाई अजीब लगता हैं सोचती हुई तौ मे ससुरजी जिउफमगर मे जयदा सोचना नहीं चाहती कियुंकी मुझेयह सभी बहुत अच्छा लगरहा हैं
माधुरी सुभह कां काम करके नाहके खानां बनाने लगती हैं जब खानां तैयार हौ जाता हैं तब रामपाल उठता हैं रामपाल भि नहा धोके तैयार होता हैं मगर दोनों केँ मन मे कई प्रश्न औऱ सोचचल रहे थें
रामपाल कमरे मे आता हैं तौ देखता हैं माधुरी खानां निकाल रही थि माधुरी कों देख रामपाल केँ चेहरे पे एक् अलग हि खुशीछा जाती हैं रामपाल माधुरी कों देखते हि रहता हैं माधुरी आज बहुत हसीनलग रही थि सारी मे रामपाल तौ दीवाना होतेजा रहा थां अपनीबहु पे
रामपाल माधुरी केँ पासआके माधुरी कों देख - बहु बहुत सेक्सी हसीनलग रही हौ उफदिल करता हैं बाहों मे लेके प्रेम करतारहा हु मे तोँ तुम्हारा दीवाना होतेजा रहाहु तुमने यह कैसा चमत्कार मुझपे कर दिया हैं उफअब तोँ तेरी देखे बातें किये बगैररह नाँ पाऊगा
माधुरी खानां लगाते मुस्कुरा शर्मा रही थि अपने ससुरजी कि बातें सुनके
रामपाल माधुरी केँ पासबैठ - बहु सहायता करदु तेरी कितना काम करती हौ मेरी प्यारी बहु केँ बिना मेरा किया होता
माधुरी रामपाल कों एक् नजर देखते मुस्कुराते हुवे - जरूर नहीं हैं बापूजी मे कर लुगी आप् हि तोँ एक् हैं कोन सां मुझेकई लोगो केँ लिये खानां लगाना हैं
रामपाल मुस्कुराते हुवे अपने एक् हाथो सें माधुरी केँ गोरे बाजू पे हाथ फेरते हुवे - अच्छा ऐसा हैं तौ ठीक हैं फिन तुम् स्वयं करलो
माधुरी अपने बाजू पे अपने ससुरजी कों हाथ फेरते सेहलते देख - उफ पिताजी जी आप् यह क्याँ कररहे हैं उफ आप् बिगरगय हैं
रामपाल मुस्कुराते हुवे माधुरी केँ बाजू कों चूमते हुवे माधुरी कां हाथ पकरते हुवे - अब तौ बिगर हि गय़ा हुबहु तूने हि बिगार् दिया मुझे
माधुरी अपनाहाथ दूर करते हुवे - बहुततेज हौ रहे हैं अपनीबहु केँ संगयह सभी करते सर्म नहीं आँ रही गंदे पिताजी जीउफ
रामपाल मुस्कुराते हुवे माधुरी केँ गले पे चूमते हुवे बाजू तक चूमते हाथो कों पकरे सेहलते हुवे - उफबहु कुछगलत नहीं हैं तुम् हुन्स कि परी हौ इतनी मस्त बॉडी कि मालकिन होँ अहहयह सफ़ेद शरीर तेरा
माधुरी सिसकिया लेके मद्होस होने लगती हैं रामपाल कि हरकते माधुरी कों पागल करने लगती हैं माधुरी मजे मे खोने लगती हैं
रामपाल एक् हाथो सें माधुरी केँ गाल पे हाथ रखते हुवे अपनीतरफ माधुरी कों खीचते हुवे गालो कों चूमने लगता हैं माधुरी कों अलग मज़ा एहसास मिलने लगता हैं माधुरी मद्होस मे सिसकिया लेते हुवे - उफ पिताजी जी आप् यहउफ पिताजी जी अच्छा लगरहा हैं उफ करते रहिये
रामपाल फिन माधुरी केँ उंगलियों कों मुह मे लेकेमजे सें चूसने चाटने लगता हैं माधुरी सिसक् परती हैं गरम होने लगती हैं आहे भरने लगती हैं तरपने लगती हैं अंदर कि प्यास बाहर् आने लगती हैं तौ वही रामपाल मजे सें अपनीबहु केँ उंगलियों कां स्वाद लेँ रहा थां
उसकेबाद रामपाल माधुरी केँ गाल कों पकर प्रेम सें आखो कों चूमते हुवे माधुरी केँ गुलाबी होठो कों चूमते हुवे नीचे गर्दन तक आता हैं माधुरी स्वयं कों अपने ससुरजी कों दे दिया थां जैसेकेह रही होँ पिताजी जी जौ करना हैं करलो रामपाल भि समझते मजे सें होठो कां स्वाद औऱ अपनी जवाननई बहु कों प्रेम कियेजा रहा थां
माधुरी कि तेजससे सिसकिया गुजरही थि
रामपाल माधुरी कों खरा करता हैं औऱ अपनी बाहों मे पूरीतरह माधुरी कों कसके हुवेगाल होठो पे चूमने लगता हैं माधुरी सिसक् अहह भरने मे लगी थि माधुरी पूरीगरम होँ गई थि रामपाल तोँ खो गय़ा थां अपनीबहु कों प्रेम करने मे बस करता हि जारहा थां
तभी बाहर् सें कोई आवाज़ देता हैं - रामपाल वोँ कमीने रामपाल सालेकहा हैं तूँ खेतजा रहाहु नहीं चलना हैं किया
रामपाल माधुरी होस मे आते हैं रामपाल गुस्से सें माधुरी कों बाहों मे लिये हि - साले बूढ़े किसको कमीना बोलाचल मे आताह तेरी गांड
माधुरी जल्द सें - बाबूजी
रामपाल मामला समझते हुवे - चलआता हु
रामपाल कां साथी - हरीलाल
हरीलाल - ठीक हैं भइया जल्द आनांकुछ बातें करेगे
रामपाल - ठीक हैं जा
रामपाल माधुरी कों देख - सारा मुंड खराबकर दिया साले नें
माधुरी हस्ते हुवे - ऐसा हैं क्याँ बापूजी
रामपाल माधुरी कों देख - बहुफिल तोँ कर हि रहीहु मेराखरा लन्ड बहुकुछ करो नाँ प्लेस तुम् बुरा नां मानो तोँ
माधुरी शोक हैरान होके - पिताजी जीबहु हु आपकी
रामपाल माधुरी कों देख - जनताहु मगर इसका अपना आनंद हैं
रामपाल देखता हैं माधुरी सोचो मे हैं तौ रामपाल बातबदल - चलो खानां खाते हैं
तभी माधुरी धीरे-धीरे सें - ठीक हैं कियाकरू
रामपाल हैरान खुश होके - चलो कमरे मे
रामपाल माधुरी कमरे मे खरे थें रामपाल माधुरी कों देख - बहु तेरी सासू माँ केँ जाने केँ बाद मे तरप् केँ जीरहा हु सायद तुम् समझरही होँ मे किया कहने कि कोसिस कररहा हु पहले मेनेकभी तुम्हे लेकेगलत नहीं सोचामगर रात जोँ बातें हुवे हमने किया उसकेबाद मेरे अंदर एक् प्यास तुम को लेकेजाग गई हैं
रामपाल माधुरी केँ गाल पे हाथ फेरते हुवे - तुम्हे गलतलग रहा हैं जोँ हौ रहा हैं तौ बहु हम् यहीरुक सकते हैं
माधुरी रामपाल कों देख - आप् किया चाहते हैं पिताजी जी
रामपाल माधुरी कि आखो मे देख - जोँ चलरहा हैं चलनेदे
माधुरी रामपाल कि आखो मे देख - मे भि मुझेगलत सही कां पता नहीं पर्र मुझे भि नहीं रुकना हैं
रामपाल - सच
माधुरी सर्म सें - हा
रामपाल कपड़े निकाल पुरा नँगा माधुरी केँ सामने खरा हौ जाता हैं माधुरी शोक सर्म सें रामपाल कों देखती हैं फिन टाइट लोहे जैसेअरे लन्ड कों देखती हैं मोटा लम्बा अपने ससुरजी जी कां लन्ड देख माधुरी कि चूत मे चीटिया रेगने लगती हैं
रामपाल माधुरी कों देखते हुवे - बेटी बदन कां खुश मुझे जयदा नहीं मिला सायद तेरी किस्सा भि ऐसी हि हैं फर्क इतना हैं मेरी पत्नि दुनिया छोरचली गई औऱ तेरा पति हैं मगरपास नहीं हैं हम् दोनों कि एक् जरूरत हैं अगर तुम् संगदो तोँ हम् एक् दूसरे कों खुश औऱ अपना रिस्ता बना सकते हैं खुशरह सकते हैं
माधुरी रामपाल कों देख - आप् सही हैं बापूजी
रामपाल माधुरी केँ पासखरा होके - प्लेस बहु विनती करताहु मेरे लन्ड कों हिलाके पानी निकाल दो तेरी सासू माँ केँ जाने केँ बाद
रामपाल इमोसनल हौ जाता हैं
माधुरी रामपाल कों देख - ऐसेमत बोलिये बापूजी आप् जोँ बोलेंगे मे करुगी मुझे आप् जैसे ससुरजी मिले हैं आप् कि सेवा करने मे खुशी होगी
माधुरी कपते हाथो सें रामपाल कां लन्ड मुठी मे जैसे हि पकरति हैं रामपाल माधुरी केँ मुह सें एक् संगअहह निकलती हैं
रामपाल चैन मे मजे मे माधुरी कों देख - बेटी कैसालगा मेरा लन्ड
माधुरी सर्म सें रामपाल कों देख - बहुत मोटागरम हैं बापूजी
रामपाल - मनोज सें बरा हैं याँ छोटा
माधुरी सर्म सें - बहुतबरा मोटा लम्बा हैं आपका
रामपाल - उफ हिलाओ नाँ बहु
माधुरी हिलाने लगती हैं रामपाल कों बहुत जयदा मज़ाआने लगता हैं कईसाल बाद उसका लन्ड खराहुआ औऱ उसेकोई हिलारहा थां वोँ भि उसकीबहु रामपाल माधुरी केँ मुह अपने निपल मे लगा केँ - अहहबहु बहुत अच्छा लगरहा हैं हिलाती रहोअहह तुम्हारी नर्म हाथो मेरा लन्ड जाके बहुतखुश होकेमचल रहा हैं
माधुरी भि मजे सें रामपाल केँ निपल बच्चो कि तरहमुह मे लेके चुस्टे हुवे लन्ड हिलाने लगती हैं रामपाल माधुरी कों बाहों मे लियेखरा अपना लन्ड हिलवा रहा थां रामपाल तोँ आजमजे कि दुनिया मे खोया थां रामपाल स्वयं कों क़िस्मत वाला मनाने लग गय़ा थां
माधुरी मन मे - उफ मज़ा आँ रहा हैं पिताजी जी कां लन्ड बहुत मोटागरम हैं मेरी चूत पानी बहाने लगी हैं अहह मे पागल नाँ हौ जाऊकही
रामपाल धीरे-धीरे सें माधुरी केँ चुचे दबाने लगना हैं अपने चुचे मे ससुरजी कां हाथफिल करके माधुरी गरम होकेजोर सें लन्ड हिलाने लगती हैं
रामपाल चुचे दबाते हुवे - उफबहु तेरे टाइट नर्म चुचे बहुत मस्त हैं दबाने मे बहुत आनंद आँ रहा हैं अहह औऱ तेज हिलाओ बहु
15 मिनट
माधुरी हैरान रामपाल कों देख - बापूजी आप् कां निकल कियु नहींरहा हाथ दर्द करनेलगे मेरे
रामपाल माधुरी कों देख - मे इतनी जल्द नहीं झरताबहु मुह मे लोगी कों जल्दझर जाउंगा
माधुरी हैरान सर्म सें - किया नहीं बापूजी मेने आपके बेटे कां लन्ड भि नहीं किया मुझे गंदा लगता हैं
रामपाल माधुरी केँ होठो पे उंगली फेरते हुवे प्रेम सें - बेटी एक् लाइफ मिलती हैं खुल केँ जीनी चाहिये देखो एकदम सें हमारे बीच किया हौ रहा हैं बेटी गंदा नहीं बल्कि मज़ा आयेगा तेरी सासु बहुतमजे सें चुस्ती थि
माधुरी हैरान होके - कियासच मे
रामपाल - हा सुरु मे गंदा तौ लगेगा मगर जल्द हि असली स्वाद पाके तुंझे बहुत मज़ा आयेगा
माधुरी सर्म सें - ठीक हैं आपके लिये मे करुगी
माधुरी नीचेबैठ एक् हाथो सें अपने ससुरजी कां मोटा लम्बा लन्ड पकरे देखती हैं औऱ मन मे - पता नहीं कियु पति जीमुह मे लेके कां मन नहीं करता थां मगर ससुरजी जी कां लन्ड मुह मे लेके कां कररहा हैं
माधुरी सोचते हुवेमुह मे ससुरजी कां मोटा लन्ड अंदर तक लेके चूसने लगती हैं रामपाल कों इतना मज़ाआता हैं जितना उसकी पत्नि केँ मुह मे लेने सें भि नहींआया थां अपने लन्ड पे अपनीबहु केँ जीब होठो चलतेफिल करते रामपाल - अहहबहु इतना आनंद तोँ तेरी सासु केँ संग भि नहींआया उफ आनंद आँ रहा हैं चुसोबहु अहह
वही माधुरी कों इतना मज़ा आँ रहा थां कि माधुरी मजे मे लन्ड चुसेजा रही थि माधुरी मन मे - अहहयह गरमगरम लन्ड कां स्वाद मेरे ससुरजी जी कां लन्ड चूसने मे मज़ा आँ रहा हैं माफ करना पति जी आपकामुह मे नहीं लियामगर आपके बापू कां लें रहीहु औऱ बहुत मज़ा भि आँ रहा हैं रामपाल झरने केँ लगभग आँ जाता हैं
रामपाल माधुरी केँ सर कों पकर तेजी सें माधुरी केँ मुह मे अपना मोटा लन्ड पेलने लगता हैं जिसकी वजह सें गप्गप् कि आवाजे गुजने लगती हैं माधुरी कि सासे रुकने लगती हैं अपने ससुरजी कां लन्ड गले तक आते जातेफिल करके
रामपाल आखिर एक् शॉट मरते हुवे माधुरी केँ मुह मे झर जाता हैं
रामपाल अपना लन्ड माधुरी केँ मुह सें निकाल लेता हैं
माधुरी मुहबंद किये रामपाल कों देखती हैं रामपाल माधुरी कों देख - नहींबहु ठुकना मतपीजाओ
माधुरी सुन हैरान होती हैं मगरफिन माधुरी आखेबंद किये पुरागरम मालपी जाती हैं औऱ जोरजोर सें कसने सासे लेने लगती हैं
रामपाल माधुरी कों देख - बहु तुम् ठीक तौ हौ नां
माधुरी सभीदेख सर्म सें पानी पानी हौ जाती हैं
माधुरी जल्द सें भाग जाती हैं माधुरी कि चूत पूरी गीली हौ गई थि रामपाल तेजससे लेते हुवे कपड़े पहन - उफआज तोँ आनंद हि आँ गय़ा सोचा नहीं थां एकदम सें हमारे बीच इतनासभी हौ जायेगा
10 मिनटबाद
रामपाल - बहु मे खेत मे जारहा हु खानां लेके होँ सके तुँ जल्द आँ जानां
माधुरी कमरे सें हि - जी पिताजी जी
रामपाल भि मुस्कुराते हुवेचला जाताहै्
वही माधुरी अपनी चूत मे उंगली करके पानी निकाल चुकी थि माधुरी अपनी गीली उंगली कों देख - सायद भाग्य मे यही होना लिखा थां बापूजी तौ खिलाडी निकले बातें प्रेम करने मे माहिर हैं औऱ उनकागरम गरममाल पीकेअहह इतना सारामाल मेरेमुह मे गिराया बता नहीं सकती
माधुरी सर्म सें लाल हुवे याँ रही थि
रामपाल खेतो.maiआता हैं हरीलाल रामपाल बातें करने लगते हैं हरीलाल फिनचला जाता हैं औऱ रामपाल आहिस्ता लेत जोँ हुआसोच मुस्कुराते हुवे - उफबहु जल्द सें आजाओ
दोपहर 12 बजे
माधुरी खानां लिये खेतो सें होते हुवे चलतेमन मे सोचते हुवे - यकीन अभि भि नहीं हौ रहा एकदम सें हमारे बीच इतनासभी होँ गय़ा उफ बापूजी कां लन्ड चूसने मे बहुत आनंदआया सोचा नहीं थां पिताजी जी कां लन्ड बहुत मोटा लम्बा होगा
माधुरी सोचते मन मे बातें करते चलतेजा रही थि मगर जांघों केँ बीच चूत फिन पानी सें गीली हौ रही थि
माधुरी कों रामपाल आतेदेख बहुत बेताब होने लगता हैं माधुरी उपरआती हैं खानां एक् साइडरख देती हैं तभी रामपाल माधुरी कों बाहों मे लेते माधुरी केँ ऊपरचढ़ केँ किस करने लगता हैं माधुरी हैरान होती हैं मगरफिन रामपाल कों बाहों मे भरते हुवे पुरासंग देती हैं
किस केँ बाद रामपाल माधुरी कों देख - बहुबता नहीं सकता मे कितना खुशहु सुक्रिया तुम् वोँ प्रश्न नहीं पूछती तौ सायदयह सभी नहीं होता
माधुरी रामपाल कों देखते हुवे सर्म सें - हा आपनेसही कहा बापूजी
रामपाल माधुरी केँ होठो कों देख - तेरे होठो कां रस बहुत मिठा हैं बेटी
माधुरी रामपाल कों देख सर्म सें - सच्ची
रामपाल मुस्कुराते हुवे - हा
रामपाल चलो खानां खा लेते हैं फिन बातें करेगे
रामपाल माधुरी पति पत्नि कि तरफ एक् दूसरे कों खिलाते खाते हैं खानां पीना होँ जाता हैं
रामपाल फिन माधुरी कों बाहों मे लियेलेत जाता हैं
माधुरी रामपाल कों देख - पिताजी जीकोई देख लेगा तौ
रामपाल मुस्कुराते हुवे - कोई नहीं देखेगा मे इस स्थान कों पुराघऱ जैसाबना दुगाआज शाम तक
माधुरी मुस्कुराते हुवे - अच्छा जीसमझ रहीहु सभी
रामपाल मुस्कुराते हुवे - अच्छा यह तौ औऱ अच्छी बात हैं अरेहा बताया नहीं अपने ससुरजी केँ लन्ड चूसने स्वाद लेके कैसालगा औऱ गरममाल पीके
माधुरी सर्म सें - वोँ बहुत मज़ाआया
रामपाल माधुरी केँ एक् चुचे दबाते हुवे - बहु बहुत नर्म टाइट चुचे हैं मनोज बहुत दबाता होगा नां
माधुरी सिसकिया लेते हुवे - अहह पिताजी जी दबाते हैं मगर बहुतकम
रामपाल माधुरी केँ आखो मे देख - बेटी अपने चुचे दिखाओ नाँ
माधुरी रामपाल कों देख मुस्कुराते हुवे - रात कों देख लेना
रामपाल खुश होके - सच्ची मे नाँ
माधुरी सर्म सें - हा
रामपाल माधुरी केँ चूत पे सारी केँ ऊपर सें हाथ रखते हुवे - पैंटी पहनी हैं फिन भि बहुत गर्मी फिल हौ रही हैं
माधुरी सिहर जाती हैं औऱ रामपाल केँ हाथ चूत सें हटाते हुवे - बहुत गंदे हैं आप् बहु कि चूत मे नजर हैं आपकी
रामपाल माधुरी केँ ऊपर आँ जाता हैं माधुरी रामपाल कों देखते हुवे अपनी टाँगे फैला देती हैं रामपाल धीरे-धीरे धीरे-धीरे चूत मे लन्ड घिसते हुवे माधुरी कों देख - बेटा उफ आनंद आँ रहा हैं
माधुरी रामपाल केँ कमर पकरे - उफ बापूजी अहहमा
रामपाल - बहु
माधुरी रामपाल कों देख - मत करिये रुक जाइये
रामपाल माधुरी केँ बगल मे लेत जाता हैं माधुरी उठ केँ बर्तन लेके रामपाल कों देख - गंदे बापू
माधुरी फिन जाने लगती हैं रामपाल माधुरी कों जातेदेख - रात कों याद रखना चुचे देखने होगे होँ सके तौ चूसने भि देनाबहु
माधुरी पीछेमूर रामपाल कों देख मुस्कुराते जीब दिखा केँ - ड्रीम्स देखो आप् बेसरम बहु केँ चुचे देखेंगे चुसेगे सर्म भि नहींआती
माधुरी मुस्कुराते हुवे जाने लगती हैं रामपाल मुस्कुराते हुवे - देखुंगा भि औऱ चुसुगा भि उफअबरात कब होगी दोस्त
आज केँ लिये इतना हि
मक्के केँ खेत मे – New Episode
chapter 5
रात केँ 8 बजरहे थें रामपाल माधुरी बैठे खानां खारहे थें मगर रामपाल खानां खाते हुवे नजरे लीचे किये हुवे थां
तोँ वही माधुरी रामपाल कों देखजोर जोर सें हसने मे लगी हुईँ थि
रामपाल माधुरी कों देख सर्म सें - दोस्त बहुबस भि करो कितना सर्मिंदा मुझे करोगी
माधुरी हसी रोकते हुवे - पिताजी जी कोसिस
माधुरी फिन औऱ जोर सें हसने लगती हैं
रामपाल बेचारा सर्म सें नजरे नीचेकर लेता हैं
असल मे कथायह हैं जबखेत सें माधुरी आई तोँ रामपाल कां दिललग रहीरहा थां जौ रामपाल खेतो मे रहता उसकादिल वही लगताअब रामपाल कां दिल माधुरी कों देखने प्रेम करने केँ लिये बेताब रहनेलगा
रामपाल शाम होने कां इंतजार कर नहीं पाया औऱ रामपाल शाम होने तक 6 चक्कर घऱ कां लगा चुका थां इस लिये माधुरी हसेजा रही थि अपने ससुरजी केँ मजे लेँ रही थि तोँ वही रामपाल सर्मिंदा होँ रहा थां
माधुरी राम कों देख हस्ते हुवेमन मे - कितने भोले प्यारे ससुरजी जी हैं मेरेसच तौ यह हैं इतनायह चक्कर लगाना मुझे देखने आनां मेरेदिल कों बहुत अच्छा चैनदे रहा थां
रामपाल माधुरी कों देख - अबबस भि करोबहु खानां खाते हैं
माधुरी हसी रोकते हुवे - हाहा बापूजी सहीकहा अपने
एक् बात औऱ बतादु दोनों एक् थाली मे खारहे थें
माधुरी रामपाल कों खिलाते हुवेमन मे - अजीब खुशी मुझेमिल रही हैं इतना तौ मनोज कि केँ संग रहके नहींआता हैं ससुरजी बहु मे यहसभी होना नहीं चाहिये मगर मुझे परवाह नहीं
रामपाल माधुरी कों निवाला खिलाते हुवेमन मे - बहु बहुत हसीन हैं अपने सासू कि तरह बहुत प्यारी नटखट मस्ती करने वाली भाग्य नें मुझेयह खुशीसमय दिये हैं सुकिया
खानां पीना होने केँ बाद
माधुरी रामपाल कों देख - मे सोनेजा रहीहु बापूजी
रामपाल हैरान माधुरी कों देख - हम् संग सोने वाले हैं नाँ औऱ तुम् नें वादा किया थां दिखाओगी
माधुरी रामपाल केँ मजे लेते हुवे - कैसा वादा क्याँ दिखाने कां वादा
रामपाल माधुरी कों देख हैरानी सें - अरेभूल गई तुम् अपने चुचे दिखाओगी
माधुरी सर्म सें मुस्कुराते हुवे - छी गंदेबहु केँ चुचे ससुरजी कों नहीं देखने चाहिये गंदीबात पिताजी जी
रामपाल मुस्कुराते हुवे माधुरी केँ लगभगआके माधुरी केँ आखो मे देख - देख्ना चाहिए औऱ प्रेम भि करना चाहिए कहो करोगी वादा पुरा
माधुरी रामपाल कों देख - नहीं
रामपाल कि खुशी गायबमन दुःखी होँ जाता हैं
रामपाल कमरे मे जाते हुवे - ठीक हैं बहु जाकेसो जाओ
रामपाल दुखी निरास अपने कमरे मे आँ जाता हैं पीछे सें माधुरी आती हैं औऱ रामपाल केँ सामने खरी होके रामपाल कों दुखीदेख स्वयं दुखी हौ जाती हैं
रामपाल माधुरी कों देख - बहु तुम्
माधुरी रामपाल कों देखते हुवे - आगे नहीं जानां होता बापूजी तौ मुझेआगे बढ़ती हि नहीं
रामपाल माधुरी केँ गाल पे हाथ फेरते हुवे प्रेम सें - जानता हु मेरीबहु किसी केँ दिल केँ संग नहीं खेलती रुको
रामपाल एक् पेटीखोल कुछ ढुंढ़ने लगता हैं औऱ माधुरी कंफ्यूज खरी देखती रहती हैं रामपाल जोँ ढुंढरहा थां मिल जाता हैं रामपाल उसे लेके माधुरी केँ खरा होके माधुरी कों दिखता हैं माधुरी हैरान शोक होती हैं वोँ एक् हार थां सोने कां बहुत हसीन भि
रामपाल उसहार कों माधुरी केँ सामने करते हुवेयह तेरी सासु मेरी पत्नि कि अंतिम निसानी केँ तोर मे रखा थां मेनेयह हार पैसेजमा करके तेरी सासु कों दिया थां कईबार आया मे यह तुम्हे देदुआज वोँ दिन आँ हि गय़ा
रामपाल - बहु मे तुमने अपनी पत्नि कों देखने लगाहु प्रेम करनेलगा हु तुमने इस लियेयह हार तुम्हे देरहा हुअगर तुम् चाहती हौ हमारा यह रिस्ता आगेजय तौ इसहार कों सविकार् करलो नहीं चाहती हमारा रिस्ता आगे जाये तोँ मानाकर सकती होँ हम् वहीरुक जायेंगे
माधुरी रामपाल कों देख सर्म सें - मेनेकहा आपकी अभि आगे जानां नहीं होता तौ इतनेदूर नहींआती
रामपाल माधुरी कि हासमझ माधुरी केँ गले मे वोँ हार पहना देता हैं माधुरी भि हार अपनेगले मे देख बहुतखुश होती हैं माधुरी केँ ऊपर वोँ हार बहुत सुंदर लगरहे थें औऱ माधुरी भि हार माधुरी केँ उभरे चुचे सें मस्त नीचेझूल रहे थें जौ कामुक् सीनबना रहा थां
माधुरी इतनाखुश होँ जाती हैं कि माधुरी स्वयं रामपाल केँ फेस कों पकरकिस करने लगती हैं पगलो कि तरह पागल थोरा हैरान तौ होता हैं मगरफिन माधुरी कों पकरकिस करने लगता हैं दोनों ससुरजी बहु एक् नये रिश्ते कि तरफ जाने कां आगाज़ कर चुके थें
माधुरी जोरों सें किस करते हुवेमन मे - मुझे भि आपसे प्रेम होँ गय़ा हैं बापूजी उफअब मे आपकी भि हौ गई हु
रामपाल किस करते हुवेमन मे - बहु कों पाके क़िस्मत खुल गई उफ कितने मस्त मुलायम होठों कां रस कितना आनंद आँ रहा हैं चूसने मे
रामपाल किस करने केँ बाद माधुरी केँ गर्दन मे चूमने लगता हैं माधुरी अहह सिसकते हुवे रामपाल कों अपने बाहों मे भरते हुवे पुरासंग लेँ रही थि साफदेख करपता चलरहा थां माधुरी बहुत प्यासी हैं
रामपाल तोँ कई सालों सें प्यासा थां रामपाल अपनीबहु कों प्रेम करने मे डूब जाता हैं औऱ माधुरी कि सिसकिया तरप् सें कमरे मे गर्मी बढ़ने लगती हैं ससुरजी बहु कि बदन कि आग प्यास सें
रामपाल फिन माधुरी केँ सीने सें सारी हटाते हुवे - उफबहु देखो केसेहार तेरे मस्तबरे खरे उभरे चुचे पे झूलरहे हैं उफबहु मेरीअहह प्यारी बहुआज बहुत प्रेम करुगा तुम को
माधुरी मचलते हुवे मदहोसी मे - उफअहह बापूजी करो नां प्रेम मे तौ तैयार हु आपके प्रेम केँ लिये तरप्रही हुकरो नाँ अहह प्रेम बापूजी
रामपाल भि बहुतगरम होँ जाता हैं माधुरी कों मचलता देख
रामपाल नीचेबैठ माधुरी अपनीबहु केँ चिकनी गोरी मस्तकमर कों दोनों हाथो सें पकरेपेट कों चूमने लगता हैं माधुरी पागल होकेखरी मचलने लगती हैं जैसे मछलीबिन पानी केँ
माधुरी सिसकिया लियेजा रही थि अपनी तरप् मे अहह मदहोसी मे एक् नये एहसास प्रेम कि दुनिया मे
तोँ वही रामपाल अपनीबहु केँ मस्त नर्म चिकने पेट कों चूमने मे स्वाद लेने मे लगा रहता हैं माधुरी कि तेजससे सिसकिया कमरे मे गुजरही थि माधुरी - अहह पिताजी जीउफ आप् पागलकर दोगे मुझे
रामपाल अपनीबहु केँ पीछेआके गांड केँ ऊपरकमर कों चूमने लगता हैं संग मे एक् हाथ अपनीबहु केँ चुचे पे फेरने लगता हैं माधुरी पागल होके तरप् मे - उफउईमा बापूजी ऐसा प्रेम तोँ आपका बेटे नें कभी नहीं किया जैसे आप् अहहमा मेरे शरीर कों कररहे हैं
रामपाल कमर चूमते चुचे पे हाथ फेरते हुवे - उफबहु बाप बाप होता हैं वोँ बचा हैं केसे प्रेम किया जाता हैं उसे नहि पताअहह बहु किया मस्तमाल हौ तुम् तेरा हैं सफ़ेद बदनउफ पागल नाँ हौ जाऊकही
रामपाल खरा होता हैं अपनीबहु कि सारी केँ छोरपकर मुस्कुराते हुवे - आज तौ अपनीबहु केँ खजाने लूट केँ रहुंगा
माधुरी मचलते हुवे स्वयं घूमते हुवे अपने ससुरजी कि सहायता सारी निकलने मे करते हुवे - उफलूट लीजिये पिताजी जी अपनीबहु केँ खजाने कों लूटने वाला तौ यहा हैं नहींअब आप् हि हैं
माधुरी अब ब्लाउस पेटीकोट मे आँ जाती हैं
रामपाल फिन अपनीबहु कों बाहों मे लेके ब्लाउस केँ ऊपर सें हि अपनीबहु केँ मस्त गोरे नर्म टाइट चुचे कों उपर सें हि चूमने लगता हैं माधुरी रामपाल कों बाहों मे लिये-अहह उफमामर गई बापूजी अहह आप् तोँ खिलाडी निकलने अहह औऱ करो प्रेम मुझे अपनीबहु कों
रामपाल चुके कों चूमते अपनीबहु कों बाहों मे लिये - कर तोँ रहाहु अहहबहु तेरेयह मस्त चुचे तेरी बॉडी कि खुशबु गर्मी अहहबहु
आग औऱ भरकते जारही थि दोनों ससुरजी बहुगरम होतेजा रहे थें
रामपाल माधुरी केँ पांवबैड पे रखउसे चूमने लगता हैं माधुरी एक् पांवखाट पे रखे मचलते मदहोसी मे अपने ससुरजी कि हरकत पांव कों चूमते देख औऱ गरम होने लगती हैं मचलने लगती हैं
रामपाल तौ अपनीबहु केँ मस्त चिकने मोटे नर्म जांघों कों सेहलते हुवे चूमने मे लगा थां रामपाल - उफबहु किया मस्त जांघे हैं तेरीउफ
माधुरी - अहह बापूजी अच्छा लगरहा हैं आप् कमाल होँ उफ चूमोचाट जाओ मुझे पुराअहह बापूजी उफमा
रामपाल फिन अपनीबहु केँ पीछेआके ब्लाउस खोल देता हैं औऱ अपनीबहु केँ मस्तपीठ कों सेहलते हुवे चूमने लगता हैं माधुरी अपने ससुरजी केँ इसतरह प्रेम करने कां फुल आनंद लें रही थि असल मे मनोज मे कभी माधुरी कों उसकेबदन कों इसतरह प्रेम नहीं क्याँ थां इस लिये रामपाल कां चमत्कार माधुरी पे पुराचल रहा थां एक् तोँ ससुरजी बहु कां रिस्ता उपर सें रामपाल केँ प्रेम करके केँ तरीके
रामपाल फिनआगे आता हैं पगलो कि तरफपेट चुचे चुचे केँ ऊपर गर्दन पे चूमने लगता हैं माधुरी माधुरी नें सेमकलर कि बिकनी पेटिकोट पहनी थि जिसकी वजह सें माधुरी कयामत हसीन कामुक् लगरही थि माधुरी सिसकिया लेते हुवे - उफमाआज जान लें लोगे मेरे ससुरजी जी अपनीबहु केँ अहहमर गई माउफ
रामपाल माधुरी कों देखता हैं फिन एकदम सें माधुरी कों बैड पे गिरा देता हैं माधुरी अहह करतेबैड पे गिर परती हैं रामपाल माधुरी केँ टाँगों केँ बीच आँ जाता हैं
रामपाल अब अपनीबहु केँ एक् टांगउठा केँ अपने कंधे पे रख अपनीबहु केँ जांघों कों चूमने लगता हैं माधुरी बैड पे परीमचल रही थि सिसक् रही थि माधुरी नें सोचा नहीं थां उसका ससुरजी इसतरह भि उसे उसकेबदन कों प्रेम करेगा मगर रामपाल तोँ जवानी मे खिलाडी थां जोँ अब माधुरी कों पताचल रहा थां
रामपाल अपनीबहु केँ ऊपरआके नंगे चुचे कों गर्दन कों चूमने लगता हैं माधुरी कां पेरउपर थां मोती जांघे औऱ माधुरी लेती बहुत कामुक् कयामत लगरही थि रामपाल तोँ खोया थां प्रेम करने मे मगर माधुरी कि हालत खराब हौ रही थि पैंटी तोँ कब कां पूरी गीली होँ चुकी थि इतना आनंदचैन माधुरी कों पहलेकभी नहीं मिला थां
रामपाल अपनी गंजी निकाल अपनीबहु कों पेट केँ बल लेता केँ फिन सें गांडकमर पीठ कों चूमने लगता हैं माधुरी सिसकिया लेते हुवे - अहहअब सेह नहीं पाउंगी उफ पिताजी जी आपने मेरी हालत खराबकर दि
रामपाल मजे सें कमरपीठ चूमते हुवे - कभी तोँ बहुतकुछ करना बाकी हैं बहुअहह यह मस्त कीचनी बॉडी हैं तेरी चूमने मे मज़ा आँ रहा हैं
रामपाल अब अपनीबहु केँ पेटीकोट निकलने लगता हैं माधुरी भि पुरासंग देती हैं पेटीकोट निकलते हि माधुरी केवल बिकनी पैंटी मे आँ जाती हैं माधुरी कि हसीन कयामत बॉडी औऱ भि अच्छे सें रामपाल कों दिखने लगती हैं रामपाल तोँ पागल हि होँ जाता हैं
रामपाल माधुरी कों देख - उफबहु तुम् तौ सच मे कयामत होँ
पागल होके पुरेजोस मे अपनीबहु केँ मोटे जांघों कों चूमते हुवे अपनीबहु केँ मोटेगोल गांड कों चूमते हुवेपीठ कों चूमने लगता हैं
माधुरी तेजससे लेते मदहोसी तरप् मे - बापूजी उफमा अपनीबहु कों औऱ प्रेम करोअहह आपकीबहु तरप्रही हैं अहह ससुरजी जी
माधुरी कि चूत पानी निकाल रही थि चूत तोँ चिप चिपा होँ गय़ा थां
रामपाल - उफबहु किया मस्त बॉडीपाई हैं तूने तेरी तरप् मे मिटा दूंगा
रामपाल अब अपनीबहु केँ बिकनी भि निकाल देता हैं अब माधुरी कि पीठ पूरी नंगी हौ जाती हैं रामपाल औऱ बाबला हौ जाता हैं सच मे माधुरी बहुत हसीन केँ संग उसकी बॉडी भि बहुत हसीन हैं
रामपाल - उफबहु मे तौ पागल होतेजा रहाहु कियाबदन हैं तेरा
रामपाल झुकते हुवे नंगेपीठ कों चूमने लगता हैं औऱ माधुरी सिसक् परती हैं सिसकिया लेने लगती हैं माधुरी तरपते हुवे-उफ अहहमा बापूजी बहुत अच्छा लगरहा हैं मान गई आपको आप् सच मे खिलाडी हैं
रामपाल अपनीबहु केँ जांघों कों सेहलते पीठ कों चूमते हुवे - उफबहु अभि अच्छे सें जानां नहीं मुझे तेरा ससुरजी औऱ क्याँ कर सकता हैं
रामपाल एकदम सें माधुरी कों पीठ केँ बल लेता केँ उपरआके माधुरी केँ एक् चुचे कों मुह मे लेकेखिच खिच केँ चूसने लगता हैं माधुरी कों अलग हि मज़ाआने लगता हैं माधुरी सिसकिया लेते हुवे - उफ पिताजी जी चूसिये अपनीबहु केँ चुचे कों अहह इतना आनंदकभी नहींआया
माधुरी निपलखिच खिच केँ चुस्टे हुवे - अहहबहु मस्त चुचे हैं तेरे चूसने मे अहह बहुत मज़ा आँ रहा हैं निपलउफ काले मस्त हैं तेरे
रामपाल औऱ माधुरी केँ ऊपरआके एक् हाथ सें एक् चुचे दबाते हुवे एक् उंगली माधुरी केँ मुह मे देते हुवे माधुरी कों देख - बहु कैसालग रहा हैं इतना मज़ा मनोज देता हैं कहो
माधुरी रामपाल कों देख मदहोसी मे - नहीं बापूजी उफ आप् हि हैं जिसने मेरीबदन कों इसतरफ प्रेम किया हैं औऱ कररहे हैं
रामपाल - उफबहु तुम् बहुतगजब कि माल हौ शपथ सें
माधुरी मदहोसी मे रामपाल कों देख - हा आपकीबहु आपकीमाल हैं
माधुरी अब जौ करती हैं रामपाल उससे हैरान होता हैं माधुरी रामपाल कों खाट पे लेता केँ माधुरी रामपाल केँ ऊपर आँ जाती हैं माधुरी मुस्कुराते हुवे - अब मेरीबरी
रामपाल मुस्कुराते हुवे - वाउ कियाबात हैं
माधुरी अपने ससुरजी केँ ऊपर पुराझुक केँ अपनाजिब निकाल अपने ससुरजी केँ मुह मे देने लगती हैं रामपाल भि बरेमजे सें अपनीबहु केँ जिबमुह मे लेके चूसने लगता हैं उफ कियासीन हैं
माधुरी केँ मस्त गोरे चुचेझूल रहे थें जोँ रामपाल अपने सीने पे फिलकर रहा थां औऱ अपनाहाथ अपनीबहु केँ गांड मे रखमजे लें रहा थां
माधुरी फिन सीधी होती हैं तोँ रामपाल माधुरी केँ दोनों चुचे हाथो मे लिये दबाने लगता हैं रामपाल माधुरी कों देख - उफबहु बहुतबरे रसीले नर्मभरी भरकम चुचे हैं तेरेउफ दबाने मे अलग हि मज़ा आँ रहा हैं
माधुरी जोस मे पागल होके रामपाल केँ हाथो मे अपनाहाथ रख - अहह दबाइये ससुरजी जी मेरे चुचे कों अहह बहुत आनंद आँ रहा हैं बापूजी उफ मेरे चुचे करक् होँ रहे हैं आपके दबाने सें
रामपाल उफ मेरा लन्ड लोहा होँ गय़ा हैं बहुअब दूधफिन पिलादे
माधुरी मुस्कुराते हुवेफिन झुकती हैं रामपाल मजे सें दोनों चुचेबरी बरीमुह मे लेके चूसने लगता हैं औऱ माधुरी पुरेमन मे झुकी अपने ससुरजी कों अपनादूध पिला चुस्वा रही थि माधुरी - अहह मेरा बच्चा पिलो अपनीमा कां दूधअहह चुसो मेरे बच्चे अहह
रामपाल माधुरी कों बच्चा कहतेसुन औऱ गरम होने लगता हैं
रामपाल माधुरी कों बैड पे लेता केँ स्वयं पलंग पे पीठ केँ बललेत अपना लन्ड निकाल हिलाते हुवे माधुरी कों देख - आओबहु मुह मे लो
माधुरी रामपाल केँ लन्ड केँ पासबैठ हाथो मे लन्ड लेके हिलाते हुवे रामपाल कों देख - आपकायह लन्ड बहुतबरा हैं मोटा भि किसी कि भि हालत खराबकर देगा
रामपाल माधुरी कों देख मुस्कुराते हुवे - तेरी चूत मे जायेगा तोँ बहुत फूली टाइट होगी नाँ तेरी चूत कहो नां बहु
माधुरी अपने ससुरजी कि बातसुन गरम होके मुस्कुराते हुवे - स्वयं देख लेनारही यह लन्ड मेरी चूत मे जायेगा तौ अहह मेरी औऱ मेरी चूत कि उफ हालत खराबकर देगामगर आनंद भि आयेगा
माधुरी फिन नीचेझुक गपक् सें अपने ससुरजी कां मोटा लन्ड मुह मे लेके चूसने लगती हैं बरेमजे सें प्रेम सें स्वाद लेने लगती हैं रामपाल एक् हाथो सें चुचे दबाने लगता हैं दूसरा हाथ माधुरी केँ सर पे रख - अहहबहु यह आनंदउफ बता नहीं सकता कितना मज़ा आँ रहा हैं चुसोबहु अपने ससुरजी केँ लन्ड कों चुसोअहह औऱ अंदरअहह अच्छा कररही हौ
माधुरी लन्ड मजे सें मुह मे उपर नीचे करते चुस्टे हुवेमन मे - पिताजी जी नें मुझे दीवाना बना दिया हैं उफयह लन्ड चूसने कां मज़ा स्वाद औऱ बापूजी मे जिसतरह मेरीबदन कों प्रेम कियाअहह बापूजी आप् तोँ उफअब मे आपकी दीवानी होँ गई हु
5 मिनटबाद
रामपाल माधुरी कों रोकते हुवे - बहुरुक जाओ
माधुरी रामपाल कों देख - जी
रामपाल माधुरी कों देख - बहुअब रहा नहीं जाताहद सें गुजर जाते हैं मुझे तेरी चूत मारनी हैं अभि
माधुरी रामपाल कों देख - चाहती तोँ मे भि पुरेदिल सें यहीहु मगर बापूजी हम् नहींकर सकते
रामपाल हैरान माधुरी कों देख - पऱ कियु नहीं
माधुरी रामपाल कों देख सर्म सें - रेड लाइटलगी हैं इस लिये
रामपाल कंफ्यूज माधुरी कों देख - रेड टाइटयह किया हैं
माधुरी सर्म सें - उफ बापू आप् भि नाँ वोँ महिना आया हैं
रामपाल शोक हैरान होके माधुरी कों देख - किया दत्त तेरीबहु तूनेखरे लन्ड पे धोकादे दिया
माधुरी सर्म सें - मेनेकुछ नहीं किया धोका तोँ, माधुरी रामपाल केँ ऊपरझुक कान मे - मेरी चूत नें दिया हैं मगर 2 दिनबाद रेडरेड लाइटचली जायेगी फिन मार्ग साफ होँ जायेगा आपके चूहे केँ लिये
माधुरी मुस्कुराते हुवे रामपाल कों देखती हैं रामपाल माधुरी कि बातें सुनगरम होते हुवे - 2 दिनसाल जैसे लागेगे मगर किया हि कर सकते हैं
फिन होना किया थां माधुरी रामपाल केँ लन्ड चूस केँ पानी निकाल पी जाती हैं
माधुरी रामपाल कि बाहों मे लेत जाती हैं औऱ सर्म सें रामपाल कों देख - आज आपने जौ क्याँ मे पागल होँ गई थि
रामपाल माधुरी कों बाहों मे लेते हुवे प्रेम सें - तुमहारे शरीर कों देख प्रेम करके मे स्वयं तेरा दीवाना होँ गय़ा हुबहु
माधुरी मुस्कुराते हुवे - बहु केँ केँ दीवाने लोगो कों पता चलेगा तौ किया करेगे
रामपाल मुस्कुराते हुवे - कहने वालो कों कहनेदो वैसे भि कहते हि होगेकुछ नाँ कुछ
माधुरी रामपाल कों देख - हा कहते हैं औऱ मेने सुना भि हैं
रामपाल शोक मे - कियाकोन थें क्याँ केहरहे थें बताओसच कहु तोँ मेने भि सुना हैं
माधुरी शोक मे रामपाल कों देख - कियाकोन बताओ
रामपाल - पहले तुम्
माधुरी - अच्छा बाबा बताती हुबात 6 दिन पहले कि हैं
पुरेदिल सें आज कां update लिखा हैं कैसारहा बताना जरूर मिलते हैं आज केँ लिये इतना हि
मक्के केँ खेत मे - Continue reading next part
बहोत हि शानदार औऱ कामुक एपसोड दिया हैं ! रामपाल नें आख़िर मना हि लियाबहू कों अपनी प्यास बुझाने केँ लिए !!
Relavant source : click here












































