♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
केसे हें दोस्तो आप् सभी,,,,,,
माफी चाहता हूॅइस बात केँ लिए कि आपकी अदालत मे कोई एपसोड नहि हाज़िर करपारहा हूॅ, मगर दोस्तो इसमें मेराकोई दोस नहि हैं। मे काम केँ सिलसिले मे घऱ सें बाहर् हूॅ।
आप् तौ जानते हें कि एपसोड लिखने केँ लिए शान्त दिमाग़ औऱ मुनासिब समय चाहिए होता हैं। मे रात मे एपसोड लिखने कां सोचता हूॅमगर मूड हि नहि बन पाता। दरअसल काम कि थकान कि वजह सें रात मे जल्द हि नींदआने लगती हैं।
मुझेपता हैं आप् सभी एपसोड कां बेसब्री सें इन्तज़ार कररहे हें, जबकि मे अपनी मजबूरियों केँ चलते आपको एपसोड नहि देपारहा। आज अभि थोड़ी सि फुर्सत मिली हैं तौ मैने सोचा आप् सबसे थोड़ी बातें करलूॅ।
दोस्तो, काम तोँ बहोत हैं फिन भि आज याँ कल तक अपनीदो मे सें किसी एक् किस्सा कां भाग देने कि कोशिश करूॅगा।
शुक्रिया,,,,,
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
भाग.《 21 》
अब तक.
डरी सहमी हालत मे वो कुछदेर अपनीमाॅ कों देखती रहीफिन हिम्मत करके वो पलटी औऱ बेड सें अपनीमाॅ केँ सारे कपड़े उठाकर उसने बाथरूम केँ बाहर् सें हि करुणा कि तरफ उछाल दिया। अपने नंगे शरीर पऱ अचानक कपड़ों केँ पड़ने सें करुणा बुरीतरह हड़बड़ा गई। उसकी नज़र पहले स्वयं केँ ऊपर गिरेहुए कपड़ों पर्र पड़ीफिन बाथरूम केँ गेट पऱ डरी सहमी खड़ी अपनी बेटी पर्र। दिव्या पर्र नज़र पड़ते हि वो चौंकी। एकाएक हि उसे अपनी नग्नता कां एहसास हुआ। उसने हड़बड़ाकर अपने नंगे शरीर कों छिपाने केँ लिएउन कपड़ों सें अपने जिस्म केँ गुप्तांगों कों ढॅका। जबकि बाथरूम केँ गेट पर्र खड़ी दिव्या सीघ्र हि अपनी नज़रें अपनीमाॅ पऱ सें हटाकर वापसपलट गई। बाहर् शिवा कि धुनाई औऱ उसकी दर्द मे डूबी हुई चीखें चालू थि। कुछदेर बाद करुणा अपने कपड़े पहनकर बाथरूम सें बाहर् निकली औऱ बेड पऱ बैठी अपनी बेटी दिव्या कों देखकर उसकेबदन मे एक् अजीब सि झुरझुरी महसूस होतीचली गई। चेहरे पऱ लाज औऱ लज्जा कि लालीफैल गई औऱ उसकासिर झुक गय़ा। अपनी हि बेटी सें नज़र मिलाने कि हिम्मत न् हुइ उसमें।
"माँ। " दिव्या बेड सें उठकरतथा दौड़ते हुएआकर अपनीमाॅ सें लिपट गई। उसकी आॅखों सें आॅसू बहनेलगे थें। करुणा कों समझ नं आया कि वो अपने सीने सें लिपटी तथा आॅसू बहाती बेटी सें क्याँ कहे?? उसके दिलो दिमाग़ मे अंधड़ सां मचाहुआ थां। कमरे केँ बाहर् सें अबकोई आवाज़ नहि आँ रही थि। शायदअभय शिवा कों लेकरजा चुका थां।
करुणा कुछ लम्हा बुतबनी खड़ीरही फिन जाने क्याँ सोचकर उसने अपने सीने सें दिव्या कों अलग करके कहा__"जाओ अपने कमरे मे औऱ अपनीइस स्कूली ड्रेस कों चेंजकर लो। "
दिव्या नें अजीबभाव सें अपनीमाॅ केँ चेहरे कि तरफ देखा, औऱ फिनपलट कर कमरे सें बाहर् निकल गई। इधर दिव्या केँ जाते हि करुणा केँ चेहरे पऱ एकाएक पत्थर जैसी कठोरता आँ करठहर गई। ऐसालगा जैसे उसने किसीबात कां बहोत बड़ा फैंसला कर लिया हौ।
अबआगे,,,,,,,
अभय गुस्से मे तथा भभकते हुएअजय सिंह केँ घऱ सें बाहर् आकर अपनेघऱ कि तरफ जानेलगा। अभि वो अपनेघऱ कि बाउंड्री पार हि किया थां कि उसे उसकी बेटी दिव्या भागते हुएघऱ सें बाहर् उसकीतरफ हि आती दिखी। बुरीतरह रोयेजा रही थि वो। अभय कों देखकर वो उससे रोतेहुए लिपट गई, फिन जल्दी हि अपने पिता सें अलग हुई।
"बापू वोँ म मां.माँ नें। " दिव्या रोयेजा रही थि। उसकेमुख सें कुछ निकल हि नहि रहा थां।
"क्याँ हुआ बेटी.क्याँ कहरही हैं तुँ?" अभय अंजानी आशंका सें घबरा गय़ा।
"बापू, वोँ मां कमरे कां दरवाजा हि नहि खोलरही हें। " दिव्या नें रोतेहुए कहा__"मैने बहोत बार माँ कों पुकारा मगर मां नं तौ दरवाजा खोलरही हें औऱ नाँ हि कुछबोल रही हें। पिताजी मां नें कहींकुछ कर तौ नहि लिया? आप् उन्हें बचा लीजिए जल्द सें। "
"क्याऽऽऽ???" अभय बुरीतरह चौंका, औऱ संग हि दौड़ पड़ाघऱ केँ अंदर कि तरफ। उसके पीछे दिव्या भि रोतेहुए दौड़ पड़ी थि।
अभय जितना तेज़ दौड़ सकता थां उतना तेज़ दौड़कर हि उस कमरे केँ पास पहुॅचा थां जिस कमरे केँ अंदर करुणा थि।
"करुणाऽऽऽ दरवाजा खोलो। "अभय नें चीखते हुए कहा__"यह क्याँ बेवकूफी हैं??? दरवाजा खोलो जल्द। करुणाऽऽऽ। "
अभय केँ चिल्लाने कां कोईअसर न् हुआ। वो कुछदेर इसीतरह करुणा कों पुकारता रहा। मगर नां तौ दरवाजा खुला औऱ नां हि अंदर सें करुणा नें कुछकहा। अभय कों किसी अनिष्ट कि आशंका हुईँ। उसने दरवाजे कों तोड़ने कि कोशिश करनेलगा।
"करुणा, प्लीज दरवाजा खोलो। "अभय दरवाजे कों तोड़ने केँ संगसंग कहता भि जारहा थां__"यह तुम् क्याँ पागलपन कररही होँ? अगर तुम् यह समझती हौ कि इस सबमें तुम्हारा कोईदोस हैं तोँ तुम् ग़लतसमझ रही होँ करुणा। तुम् मेरी करुणा होँ, मुझे तुम् पर्र स्वयं सें भि अधिक भरोसा हैं। तुम् कभी ग़लत नहि होँ सकती। मे जानता हूॅ कि उस हरामज़ादे नें हि तुम्हें ग़लत इरादे सें देखने कि कोशिश कि हैं। तुम् तोँ उसे अपना बेटा हि मानती हौ करुणा। तुम् कहीं भि ग़लत नहि होँ, प्लीज ऐसा वैसाकुछ मत करना। "
अभय पूरी शक्ति सें कमरे केँ दरवाजे कों तोड़ने केँ लिए धक्के माररहा थां। पास मे हि उसकी बेटी दिव्या भि खड़ी थि, जोँ सिसक सिसककर रोयेजा रही थि। अंदर हि किसी कमरे मे शगुन केँ रोने कि भि आवाज़ आँ रही थि। मगर उसके रोने कि तरफ किसी कां ध्यान नहि थां।
"तुम् मुझेसुन रही हौ न् करुणा?" अभय अधीरभाव सें कहरहा थां__"तुम्हें मेरीशपथ हैं, तुम् कोई भि ग़लत क़दम नहि उठाओगी। तुम् मेरीजान हौ करुणा, तुम्हारे बिना जीने कि मे सोच भि नहि सकता। तुम्हें यहसभी करने कि याँ सोचने कि कोई ज़रूरत नहि हैं। तुम् मेरी नज़र मे उसीतरह गंगा कि तरह पवित्र होँ करुणा। प्लीज ऐसा वैसाकुछ मत करना, वर्ना तुम्हारी शपथ सारी दुनियाॅ कों आगलगा दूॅगा मे। "
बड़ी मुश्किल सें औऱ भीषण प्रहार केँ बाद आख़िर दरवाजा टूट हि गय़ा। कमरे केँ अंदर कि तरफटूट कर गिरा थां दरवाजा। अभय नें एक् भि समय नहि गॅवाया। बिजली कि सि तेज़ी सें वो कमरे केँ अंदर दाखिल हुआ। औऱ.
"नं नहींऽऽऽऽ। " अभय केँ हलक सें चीख निकल गई। कमरे मे पहुॅचते हि उसने देखा कि करुणा कमरे कि छत पऱ लगे पंखे केँ नीचे रस्सी केँ सहारे झूलरही थि। रस्सी कां फंदा उसकेगले मे थां तथा रस्सी कां दूसरा सिरा कमरे कि छत पर्र बीचोबीच लगे लोहे केँ कुंडे मे फॅसा थां। नीचे फर्स पर्र एक् स्टूल लुढ़का हुआ पड़ा थां।
स्पष्ट थां कि करुणा नें आत्म हत्या करने केँ लिए हि यहसभी किया थां। वो इस घटना केँ बाद स्वयं कों हि इस सबका दोसी मानती थि। वोँ समझती थि कि अब वो किसी कों मुॅह दिखाने केँ काबिल नहि रही हैं। वो समझती थि कि इस सबकेबाद उसके पति उसे ग़लत समझेंगे। शायदइसी वजह सें उसनेयह क़दम उठाया थां।
अभय बुरीतरह उसके पैरों सें लिपटा रोयेजा रहा थां, उसकी बेटी दिव्या कां भि वहीहाल थां। अचानक अभय कों जाने क्याँ सूझा कि उसने जल्दी हि बेड कों खींचा औऱ करुणा केँ पैरों केँ नीचेउसी लुढ़के पड़े स्टूल कों रखा। जिससे करुणा केँ गले मे फॅसा रस्सी कां फंदा टाइट नं हौ। अभय स्वयं बेड पर्र चढ़ गय़ा औऱ करुणा केँ गले सें रस्सी केँ फंदे कों छुड़ाने लगा।
कुछ हि समय मे करुणा केँ गले सें रस्सी कां फंदा निकल गय़ा। करुणा केँ गले मे फंदा फॅसाहुआ थां जिसकी वजह सें करुणा कि आॅखें वजीभ बाहर् आँ गई थि। अभय नें करुणा कों अपने दोनो हाथों सें सम्हाल करउसी बेड पर्र आहिस्ता सें लिटाया, औऱ करुणा कि नब्जचेक करनेलगा। अभययह महसूस करते हि खुश होँ गय़ा कि करुणा कि नब्ज अभि चलरही हैं। मतलब उसने करुणा कों सही वक़्त पर्र सही सलामत बचा लिया थां। अगर थोड़ी देर औऱ होँ जाती तौ शायद ईश्वर भि करुणा कों मौत सें बचा नहि पाते। अभय नें खुश होँ कर करुणा कों स्वयं सें चिपका लिया। दिव्या भि दौड़कर अपनीमाॅ सें लिपट गई।
करुणा अभि बेहोशी कि अवस्था मे थि। अभय केँ कहने पर्र दिव्या नें जल्दी हि एक् ग्लास मे पानी लाकरअभय कों दिया। अभय उस पानी सें हल्के हल्के छीटे डालकर करुणा कों होश मे लाने कि कोशिश करनेलगा। कुछ हि देर मे करुणा कों होश आँ गय़ा। उसने गहरी गहरी साॅसे लेतेहुए अपनी आॅखें खोली। सबसे पहले नज़र अपने पति पर्र हि पड़ी उसकी। वस्तुस्थित कां ख़याल आते हि उसका चेहरा बिगड़ने लगा। आॅखों सें आॅसू बहनेलगे।
"मुझे क्यूं बचाया अभय आपने?"फिन उसने उठकर रोतेहुए कहा__"मुझे मर जाने दिया होता नं। इस सबसे मुक्ति तोँ मिल जाती मुझे। "
"तुमने यहसभी करने सें पहले क्याँ एक् बार भि नहि सोचा थां करुणा कि तुम्हारे बाद मेरा औऱ हमारे बच्चों कां क्याँ होता?"अभय नें भर्राए स्वर मे कहा__"तुमने क्याँ सोचकर यहसभी किया करुणा? क्याँ तुम् यह समझती थि कि इस सबकीवजह सें मे तुम् पर्र किसी प्रकार कां शक याँ तुम् पऱ कोई लांछन लगाऊॅगा?? नहि करुणा नहि.हमारा प्रेम इतना कमज़ोर नहि हैं जोँ इतनी सि बात पऱ तुम्हें मुझसे जुदाकर देगा। मुझे तोँ हरहाल मे तुम् पऱ यकीन हैं करुणा मगर शायद तुम्हें मुझ पर्र यकीन नहि रहा। तुम्हें मुझ पऱ भरोसा नहि थां, अगर होता तोँ इतना बड़ा फैसला नहि करती तुम्। "
"मुझेमाफ कर दीजिए अभय। " करुणा नें रोतेहुए कहा__"मे जानती हूॅ कि आपकोमुझ पऱ हरतरह सें भरोसा हैं। मगर हालात ऐसेबन गए थें कि मुझेयही लगरहा थां कि इस सबकीवजह सें मे अब कहीं भि किसी कों मुह दिखाने केँ काबिल नहि रही। इसी लिए मे इस सबकोसहन नहि करपाई औऱ स्वयं कों समाप्त करने कां फैसला कर लिया थां। "
"आजअगर तुम्हें कुछ हौ जाता तौ। " अभय नें एकाएक ठंडे स्वर मे कहा__"मे उस हरामज़ादे कों ज़िंदा नहि छोंड़ता जिसकी वजह सें यहसभी हुआ। "
"मुझे नहि पता थां अभय कि वोँ कमीना मुझेइस नज़र सें देखता हैं। " करुणा नें कहा__"अगर पता होता तोँ कभीउसे इसघऱ मे घुसने हि नहि देती। "
"पिताजी, शिवा भाई बहोत गंदे हें। " सहसाइस बीच दिव्या नें भि हिम्मत करके कहा__"वोँ अक्सर अकेले मे मुझे गंदी नज़र सें देखते हें। "
"क्याऽऽ???" अभय बुरीतरह उछल पड़ा, फिन गुर्राते हुए बोला__"उस हरामखोर कि यह हिम्मत थि कि वोँ मेरी बेटी कों भि गंदी नज़र सें देखता थां?? नहि छोंड़ूॅगा उसनीच औऱ घटिया इंसान कों, अभि उसेजान सें मार दूॅगा मे। "
अभययह सभीकह करबेड सें उठने हि लगा थां कि करुणा नें हड़बड़ा कर जल्दी हि अभय कां हाॅथ पकड़ लिया, फिन बोलीं__"नहि अभय, आप् ऐसाकुछ भि नहि करेंगे। जौ कुछहुआ उससेयह तोँ पताचल हि गय़ा हैं कि वोँ कैसा लड़का हैं। इसलिए अब उससेकोई मतलब नहि रखेंगे हम्, औऱ नाँ हि उसेइस घऱ मे आने देंगे। "
"करुणा उसनीच कि हिम्मत तौ देखो, वोँ हमारी इस नन्हीं सि बच्ची केँ बारे मे भि ऐसी नीयत रखता हैं। " अभय नें मारे गुस्से केँ उफनते हुए कहा__"उसने एक् बार भि नहि सोचा होगा कि वोँ यहसभी क्याँ सोचता हैं औऱ करने कां इरादा रखता हैं? नहि करुणा, ऐसेनीच औऱ गिरी हुई सोच वाले लड़के कों एक् समय भि जीवित रखनापाप हैं। मुझे भाई भाभी कि कोई परवाह नहि हैं, मे उसे किसी भि कीमत पऱ अब ज़िंदा नहि छोंड़ूॅगा। "
"नहि अभय, प्लीज रुक जाइए। आपको मेरीशपथ। " करुणा नें भारी स्वर मे कहा__"सबसे पहले हमें उसके माता पिता सें इस बारे मे बात करना चाहिए। उन्हें बताना चाहिए कि उनका बेटा कैसीसोच रखता हैं अपने हि घऱ कि माॅ बहनों केँ लिए। जल्दबाज़ी मे उठाया हुआ क़दम अच्छा नहि होताअभय। स्वयं कों शान्त कीजिए"
"मे भाभी सें बोलआया हूॅ कि आज केँ बादअगर उनकेइस नीच बेटे नें मेरेघऱ कि तरफ देखा भि तौ उसकेलिए अच्छा नहि होगा। "अभय नें कहा।
"यह आपने अच्छा किया। " करुणा नें कहा__"दिदी अवश्य इस संबंध मे बड़े भाई सें बात करेंगी। "
"हमसे बहोत बड़ी ग़लती हुइ हैं करुणा। " अभय नें एकाएक अधीर होकर कहा__"आज मुझे एहसास हौ रहा हैं कि क्यूं मेरी देवी समान गौरी भाभी हम् सबको छोंड़ करइस हवेली सें अलग खेतों मे बनेउस घर-मकान पर्र रहती थि? मात्र इसी हरामज़ादे कि वजह सें करुणा। उसरात विराज आया थां मुम्बई सें, औऱ सुभह उसने हि शिवा कों मारमार कर अधमरा किया थां। तब हमने सोचा थां कि उसने बेवजह हि किसी खुंदक मे शिवा कों मारा थां। जबकि अब मुझेसभी बातों कि समझआई हैं कि क्यूं विराज नें शिवा कों मारा थां?"
"क्याँ मतलब हैं आपका?" करुणा चौंकी।
"इसीनीच कि वजह सें करुणा। " अभय नें आवेश मे कहा__"यह तौ समझ हि गई होँ तुम् कि शिवा अपने हि घऱ कि माॅ बहनों केँ बारे मे ऐसी नीयत रखता हैं। उसनेउसी नीयत सें गौरी भाभी औऱ हमारी फूल सि बच्ची निधि पर्र भि यहीसभी कियारहा होगा। इसी वजह सें यहसभी हुआ हैं। "
"मगरअगर ऐसीबात थि तौ। " करुणा नें सोचने वालेभाव सें कहा__"गौरी दिदी कों इस बारे मे बड़ी दिदी औऱ बड़े भाई कों बताना चाहिए थां। अगर वोँ यहसभी उनसे बताती तोँ वोँ अपने बेटे पऱ लगाम लगाती। मगर वोँ तोँ हवेली हि छोंड़ कर खेतों वाले घर-मकान मे गुड़िया केँ संग रहनेलगी थि। क्याँ केवल इतनी सि बात कि वजह सें??"
"वजह तौ हमेंयही बताया थां भाई भाभी नें कि गौरी भाभी नें प्रतिमा भाभी केँ कमरे सें उनके जेवर चुराए थें। " अभय नें कहा__"औऱ इतना हि नहि बल्कि बड़े भाई कों अपनेरूप जाल मे फसाने कि कोशिश भि कि थि। इसलिए बड़े भाई नें उन लोगों कों हवेली सें निकाल दिया थां। "
"हाॅ तोँ ग़लत क्याँ थां अभय?" करुणा नें अजीबभाव सें कहा__"गौरी दिदी नें तौ सच मे बड़े भाई केँ संग ग़लत करने कि कोशिश कि थि। इस सबका सबूत भि दिखाया थां प्रतिमा दिदी नें हम् लोगों कों। उन फोटोग्राफ्स मे साफसाफ दिखता थां कि केसे गौरी दिदी नें बड़े भाई कों उनके हि कमरे मे अपनी बाहों मे जकड़ा हुआ थां। "
"क्याँ यह स्वाभाविक बात लगती हैं करुणा कि बड़े भाई गौरी भाभी केँ संगउस स्थित मे हों औऱ दूसरा कोईउस स्थिति मे उनकी फोटो खींचे?" अभय नें सोचने वालेभाव सें कहा__"जबकि उस स्थिति मे होना तौ यह चाहिए थां कि अगर गौरी भाभी नें बड़े भाई कों ग़लत नीयत सें जकड़ा हुआ थां तौ इस सबका बड़े भाई विरोध करते, औऱ गौरी भाभी कों इस सबकेलिए डाॅटते। दूसरी बातउन लोगों कि उस वक़्त कि फोटो बनाने वालाकौन थां?? अगर फोटो खींचने वाली प्रतिमा भाभी थि तौ उन्हें फोटो खींचने कि बजायइस सबको रोंकना थां। आखिर फोटो खींचने केँ पीछे उनका क्याँ उद्देश्य थां? क्याँ मात्र यह कि हम् सभीउन फोटोज़ कों देखकर यह यकीनकर सकें कि गौरी भाभीसच मे बड़े भाई केँ संगयह सभी करने कि नीयत रखती हें याँ यहसभी करती भि हें???"
"आप् कहना क्याँ चाहते हें अभय??" करुणा नाँ समझने वालेभाव सें बोलीं।
"आज केँ इस हादसे सें मेरे सोचने कां नज़रिया बदल गय़ा हैं करुणा। " अभय नें गंभीर लहजे मे कहा__"हम् सभी जानते थें कि विजय भाई औऱ गौरी भाभी किसी देवी देवता सें कम नहि थें। उन्होंने भूल सें भि किसी केँ संगकभी भि कुछ ग़लत नहि किया थां। वोँ पढ़ाई लिखाई मे भले हि ज़ीरो थें, मगरजब सें उन्होने खेती बाड़ी कां काम सम्हाला थां तब सें हमारे घऱ केँ हालात हज़ार गुना बेहतर होँ गए थें। यहाॅ तक कि उनकी मेहनत औऱ लगन सें किसी भि चीज़ कि कभीकोई कमी न् रही थि। उनकी हि मेहनत औऱ रुपये पैसे सें इतनी बड़ी हवेली बनी औऱ उनके हि पैसों सें बड़े भाई नें अपने कारोबार कि बुनियाद रखी थि। माॅ बाबूजी विजय भाई औऱ गौरी भाभी कों सबसे ज़्यादा मानते थें। विजय भाई औऱ गौरी भाभी नें कभी भि मुझे किसीबात केँ लिएकुछ नहि कहा, बल्कि विजय भाई नें तोँ उस वक्त केँ हिसाब सें मुझे एक् बुलेट मोटर साइकिल खरीदकर दि थि। पूरे गाॅव मे किसी केँ पास बुलेट नहि थि। इतना हि नहि उन्होंने अपने हि पैसों सें बाबूजी केँ लिए एक् शानदार वाहन खरीदी थि ताकि बाबूजी बड़ेशान सें उसमें सवारी करें। घऱ कां बड़ा बेटा होने कां जोँ फर्ज़ अजय भाई कों निभाना चाहिये थां वोँ फर्ज़ विजय भाई निभारहे थें वोँ भि अपनी पूरी निष्ठा केँ संग। मुझेयाद हैं करुणा कि अजय भाई औऱ प्रतिमा भाभीकभी भि विजय भाई औऱ गौरी भाभी सें ठीक सें बात नहि करते थें। बल्कि उनकेहर काम मे कोई न् कोई नुक्स निकालते हि रहते थें। फिन वक्त गुज़रा औऱ एक् रात विजय भाई कों किसी ज़हरीले सर्प नें काट लिया औऱ वोँ इस दुनिया सें चलबसे। उनकेइस दुनिया सें जाते हि हम् सबकी खुशियों पर्र ग्रहण सां लग गय़ा करुणा। माॅ बाबूजी कों उनकीमौत सें गहरा सदमालगा थां। हम् सभी उनके सदमे कि वजह सें परेशान हौ गए थें। बड़े भाई औऱ भाभी नें हि उन्हें सम्हाला थां। एक् दिनमाॅ बाबूजी उसी वाहन सें शहरजा रहे थें तौ रास्ते मे उनका एक्सीडेंट हौ गय़ा औऱ वोँ दोनोउस एक्सीडेंट कि वजह सें कोमा मे चलेगए। समझ मे नहि आँ रहा थां कि यहसभी क्याँ होँ रहा थां हम् सबकेसंग?"
"इनसभी बातों कों सोचने कां क्याँ मतलब हैं अभय?" करुणा नें कहा__"जोँ होना थां वोँ तोँ हौ हि गय़ा। इसमें कोई क्याँ कर सकता थां भला?"
"मे यहसभी कभी नहि भूला करुणा। " अभय नें कहा__"मे कभी किसी सें कुछ कहता नहि मगर मेरे अंदर हमेशा यहसभी गूॅजता रहता हैं। आज केँ इस हादसे नें मेरी आॅखें खोल दि हैं करुणा। इस हादसे नें यह सोचने पऱ मजबूर कर दिया हैं मुझे कि यह जोँ कुछ भि हुआ वोँ सभी क्याँ सच थां याँ फिन किसी झूॅठ कों छुपाने केँ लिएउस पर्र इनसभी बातों कों गढ़कर पर्दा डाला गय़ा थां? यह तौ सच हैं करुणा कि माॅ बाप कां खून औऱ उनके अच्छे संस्कारों कि वजह सें हि कोई औलादसही रास्तों पर्र चलतेहुए भविश्य मे अपने अच्छे काम औऱ नाम कि वजह सें अपनेमाॅ बाप औऱ कुल कां नाम रोशन करते हें। शिवा कों देखकर अंदाज़ा लगाना कोई मुश्किल नहि हैं कि उसकी परवरिश औऱ उसकेखून मे कितनी गंदगी हैं। दुनियाॅ मे बहोत सें ऐसेमाॅ बाप हें जिनके एक् हि बेटा होता हैं मगर वोँ अपने एक् हि बेटों कों क्याँ ऐसे संस्कार देते हें जिसकी वजह सें वोँ अपने हि घऱ कि माॅ बहनो पऱ बुरी नीयतरखे?? नहि करुणा नहि.कम सें कम मेरी जानकारी मे तोँ ऐसेमाॅ बाप औऱ ऐसे बेटे नहि हें। अवश्य इनमें हि कहीं न् कहींकोई ख़राबी हैं। मैने फैंसला कर लिया हैं कि मे स्वयं सारी सच्चाई कां पता लगाऊॅगा। "
"सच्चाई???" करुणा चौंकी__"कैसी सच्चाई अभय?"
"वहीं सच्चाई करुणा। " अभय नें मजबूत लहजे मे कहा__"जोँ हमसे छुपाई गई औऱ उसके बदलेकुछ औऱ हि हमें दिखाया गय़ा। उस टाइम मैंने इस सबकापता करने कि कोशिश इसलिए नहि कि थि क्यूं जोँ कुछ मुझे सबूत केँ संग दिखाया गय़ा थां उससे मे अत्यधिक गुस्सा औऱ गुस्से मे थां। उस सूरत मे मे उन लोगों कि शकल तक नहि देख्ना चाहता थां। मगरअब नहि, अब मे पता लगाऊॅगा इस सबका। मे मुम्बई जाऊगा करुणा.औऱ गौरी भाभीतथा उनके दोनो बच्चों कों ढूढूॅगा। उनसे हि सच्चाई कां पता चलेगा। मैने अपने गुस्से औऱ नाराज़गी कि वजह सें इतनेसाल बर्बाद कर दिये। कभी सोचा तक नहि कि एक् बार गौरी भाभी सें भि पूछ लेना चाहिए कि उन पऱ जौ आरोप लगाया गय़ा थां वोँ सच भि थां याँ झूॅठ?काश! मैंने यहसभी उनसे पूछा होता। अरे कानून भि हर मुजरिम कों अपनी सफाई मे कुछ कहने कां अवसर देता हैं, जबकि मैंने तौ पूॅछा तक नहि थां। मानलो कि अगर गौरी भाभी पऱ लगाएगए सारे आरोप सिरे सें हि ग़लतहों तोँ सोचो क्याँ होगा करुणा? मे अपनी हि नज़रों मे गिर जाऊॅगा। कितना बड़ा पापी कहलाऊॅगा कि अपनी देवी समान भाभी पर्र लगे झूॅठे आरोपों कों सचमान कर उनके बारे मे क्याँ क्याँ सोच लिया थां मैंने?? मुझेनरक मे भि स्थान नहि मिलेगी करुणा.मे तोँ लज्जा सें हि मर जाऊॅगा। "
"स्वयं कों सम्हालिए अभय। " करुणा कि आॅखें छलक पड़ी थि__"यकीनन हमसे बहोत बड़ीभूल होँ गई हैं। मगरअब जौ होँ गय़ा उसे लौटाया भि तौ नहि जा सकता न्? परमेश्वर जानता हैं कि इस सबकेबाद भि हमनेकभी उनका बुरा नहि चाहा हैं। हमें जोँ कुछ बताया गय़ा थां उससे हमेंदुख अवश्य पहुॅचा मगर इसके बावजूद हमनेकभी उनके बारे मे बुरा नहि चाहा। आज आपनेअगर इस सबकापता लगाने कां फैसला कर हि लिया हैं तोँ यह अच्छी बात हैं अभय। सच्चाई कां पता तौ चलना हि चाहिए। "
"तुम् चिन्ता मतकरो करुणा। " अभय नें कहा__"मैंने अबइसबात कों जानने कां फैसला कर लिया हैं कि इस सबके पीछे कि सच्चाई क्याँ हैं। मे कल हि विद्यालय मे लम्बी छुट्टी कि अर्ज़ी दे दूॅगा। अब मेरेपास केवलयही काम रहेगा.किसी भि हाल मे सच्चाई कां पता लगाना। "
"आप् हर सच्चाई कां अवश्य पता लगाइये अभय। " करुणा नें कहा__"मगर इसबात कां भि ध्यान दीजिए कि वोँ लोग भि शान्त नहि बैठेंगे जिन्होंने गौरी दिदी पर्र यहसभी आरोप लगाये थें। संभव हैं कि अपनीपोल खुल जाने केँ डर सें वोँ कोई भि कठोरकदम उठा लें। इसलिए उन लोगों सें सतर्क औऱ सावधान रहिएगा। "
"चिन्ता मतकरो करुणा। " अभय नें कठोरभाव सें कहा__"मुझे पता हैं कि अपने रास्ते पऱ आने वाली रुकावट सें केसे निपटना हैं। "
"फिन भि सावधान रहिएगा। " करुणा नें कहा__"क्योंकि इस सबसेयह तोँ समझ आँ हि गय़ा हैं कि वोँ लोग किसी केँ संगकुछ भि कर सकते हें। "
"कुछ भि करने वालों कों मे देख लूॅगा करुणा। " अभय नें कहा__"मेरे मुम्बई जाने केँ बाद तुम् यहाॅ सबकीदेख भाल अच्छे सें करना। दिव्या तब तक विद्यालय नहि जाएगी जब तक मे मुम्बई सें लौट नहि आता। "
"क्याँ ऐसा नहि हौ सकता कि हम् सभी हि मुम्बई चलें?" करुणा नें कहा__"कौन जाने आपके जाने केँ बाद यहाॅ केसे हालात बन जाएॅ?उस स्थिति मे मे अकेली स्त्री भला किसी कां केसे मुकाबला करूॅगी??"
"मे तुम् सबको मुम्बई नहि लें जा सकता क्योंकि मुम्बई मे तुम् लोगों कों लिए मे कहाॅ कहाॅ भटकूॅगा? अंजान शहर मे अपना कहींकोई ठिकाना भि तोँ होना चाहिए। " अभय नें कहा__"इस लिए तुम् ऐसाकरो कि कुछदिन केँ लिए दिव्या औऱ शगुन कों लेकर अपने मायके चलीजाओ। वहाॅ तुम् सभी सुरक्षित रहोगे, औऱ मे भि तुम् लोगों केँ लिए निश्चिंत रहूॅगा। "
"हाॅयह ठीक रहेगा। " करुणा नें कहा__"आप् मेरे भइया कों मोबाइल कर दीजिए वोँ आँ जाएगा औऱ हम् लोगों कों अपनेसंग लें जाएगा। "
"ठीक हैं। " अभय नें कहा__"मे बात करताहूॅ तुम्हारे भइया सें, तब तक तुम् ज़रागरम चाय तोँ बनाकर पिलादो मुझे। "
"जी अभि लाई। " करुणा नें बेड सें उठतेहुए कहा।
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भाग हाज़िर हैं दोस्तो.
आप् सबकी प्रतिक्रिया कां इन्तज़ार रहेगा,,,,,,
दोस्तो आपको पहले हि बता चुकाहूॅ कि इस टाइम मे काम केँ सिलसिले मे घऱ सें बाहर् हूॅ, इस लिएभाग देने मे सक्षम नहि हूॅ। आप् मेरी मजबूरी समझेंगे, यहीआशा करताहूॅ।
Nice update. Admi krodh main aa krr sochne samjhne kee taqat hara baithta h. wo bi Abhaya k sath huwa thaa. Abhaya ne toh faisla krr liya h. for the update
bhay kahani bhut HI SHAANDAAR MOD pr chl RAHI h .ABHAY bi AB APNE bhay or BHABHI k SATH KYA huwa uskah PATAA LAGAANE NIKAL RAHA h.KYA HOGA jb ABHAY KO sacch kaa PATAA CHALEGA .KHAIR INTEJAAR RAHEGA AGAKE UPDATE kaa
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
bhut hi अच्छा uodate thaa bhay। Akhir मेरा dar sai nikla। Karuna ne galt kadsm utha hi lya thaa woh उसका shauhar sai waqt पर aa gya वरना bipatti hu jata। Abhay na sai faisla किया he leki parivar की suraksha pahle he। Ab dekhate he की aage क्या hotha he.
Subham bhay plzz update थोड़ा regular dete raho वरना kahani kaa flow tut jata he। aj के update के liye muze pichale update ko phir से padhna pada.
Waiting 4 next update
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) - Next part miss mat karna
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