♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
♡ एक् नया संसार ♡
भाग.《 31 》
अब तक,,,,,,,
"तुमको ज़रा भि अंदाज़ा हैं कि तुमने क्याँ किया हैं मेरेसंग?" प्रतिमा नें गुस्से सें फुंकारते हुए कहा___"तुम् अपने मज़े मे यह भि भूलगए कि मेरीजान भि जा सकती थि। तुम् इंसान नहि जानवर हौ अजय। आज केँ बाद मेरे लगभग भि मत आनां वरना मुझसे बुराकोई नहि होगा। "
अजय सिंह उसकीयह बातें सुनकर हैरान रह गय़ा थां। लेकिन जबउसे एहसास हुआ कि वास्तव मे उसने क्याँ किया थां तौ वो शर्मिंदगी सें भर गय़ा। वो जानता थां कि प्रतिमा वो महिला थि जोँ उसके कहने पऱ दुनिया कां कोई भि कामकर सकती थि औऱ करती भि थि। यह उसकाअजय केँ प्रति प्रेम थां वरनाकौन ऐसी स्त्री हैं जौ पति केँ कहने पर्र इसहद तक भि गिरने लगजाए कि वो किसी भि ग़ैर मर्द केँ नीचे अपनासभी कुछखोल करलेट जाए????अजय सिंह कों अपनी ग़लती कां एहसास हुआ। वो जल्दी हि आगेबढ़ कर प्रतिमा सें माफी माॅगने लगातथा उसको पकड़ने केँ लिए जैसे हि उसनेहाथ बढ़ाया तोँ प्रतिमा नें झटक दियाउसे।
"डोन्ट टचमी। " प्रतिमा गुर्राई औऱ फिनउसी तरह गुस्से मे तमतमाई हुई वो बेड सें नीचे उतरी औऱ बाथरूम केँ अंदर जाकर दरवाजा बंदकर लिया उसने। अजय सिंह शर्मिंदा सां उसे देखता रह गय़ा। उसमें अपराध बोझ थां इसलिए उसकी हिम्मत नं हुईँ कि वो प्रतिमा कों रोंकसके। उधर थोड़ी हि देर मे प्रतिमा बाथरूम सें मुह हाॅथ धोकर निकली। आलमारी सें एक् नया ब्लाउज निकाल कर पहना, तथा उसी साड़ी कों दुरुस्त करने केँ बाद उसने आदमकद आईने मे देखकर अपने हुलिये कों सही किया। सभी कुछठीक करने केँ बाद वो बिनाअजय कि तरफ देखे कमरे सें बाहर् निकल गई। अजय सिंहसमझ गय़ा थां कि प्रतिमा उससे बेहद नाराज़ हौ गई हैं। उसका नाराज़ होना जायज़ भि थां। भलाइस तरहकौन अपनी पत्नि कि जान लेँ लेने वाला सेक्स करता हैं?? अजय सिंह असहाय सां नंगा हि बेड पर्र पसर गय़ा थां।
अबआगे,,,,,,,,,,
फ्लैशबैक अबआगे______
उसदिन औऱ उसरात प्रतिमा नें अजय सिंह कि तरफ देखा तक नहि बात करने कि तोँ बातदूर। अजय सिंह अपनी पत्नि केँ इस रवैये बेहद परेशान हौ गय़ा थां, वो अपने किये पर्र बेहद शर्मिंदा थां। वो जानता थां कि उसने ग़लती कि थि लेकिन अब जोँ हौ गय़ा उसका क्याँ कियाजा सकता थां? उसनेकई बार प्रतिमा सें उस कृत्य केँ लिए माफ़ी माॅगी मगर प्रतिमा हरबार उसे गुस्से सें देखकर उससेदूर चली गई थि।
ख़ैर दूसरा दिन शुरुआत हुआ। आज प्रतिमा कां रवैया एकदम सामान्य थां। कदाचित् रात केँ बादअब उसका क्रोध उतर गय़ा थां। पिछली रात वो दूसरे कमरे मे अंदर सें कुंडी लगाकर सोई थि। वो जानती थि अजयउसे मनाने उसकेपास आएगा औऱ हुआ भि वहीमगर प्रतिमा कमरे कां दरवाजा नहि खोला थां। अजय सिंहमुह लटकाए वापसचला गय़ा थां। रात मे प्रतिमा नें इस बारे मे बहोत सोचा औऱ इस निष्कर्स पर्र पहुॅची कि अजय सिंह कां इसमें भला क्याँ दोष हौ सकता हैं? उस सूरत मे कोई भि मर्दवही करता जौ उसने किया। मज़े कि चरम सीमा कां एक् रूपऐसा भि हौ सकता हैं कि वो उस सूरत मे सभीकुछ भूल बैठता हैं। अजय सिंह केँ संग भि तौ वहीहुआ थां। प्रतिमा उससे प्रेम भि बहोत करती थि, वो उससेइस तरह बेरूखी अख्तियार नहि कर सकती थि बहोत देर तक।
सुभहजब हुई तोँ सबसे पहले वो अजय सिंह सें बड़े प्रेम सें मिली। अजय सिंहइस बात सें बेहदखुश हुआ। ख़ैर, दोपहर मे प्रतिमा फिन सें विजय सिंह केँ लिए खाने कां टिफिन सजधजकर करतथा एक् प्लास्टिक केँ बोतल मे पकाहुआ दूध लेकर खेतों कि तरफचल दि। आज भि उसने पिछले दिन कि हि तरह लिबास पहनाहुआ थां। हसीन गोरे जिस्म पर्र आज उसने पतली सि पीलेरंग कि साड़ी औऱ उसी सें मैच करता बड़ेगले कां ब्लाउज पहना थां। ब्लाउज केँ अंदरआज भि उसने ब्रा नहि पहना थां।
प्रतिमा मदमस्त चाल सें तथामन मे हज़ारों ख़याल बुनते हुए खेतों पऱ बने घर-मकान मे पहुॅची। पिछले दिन कि हि तरहआज भि आसपास खेतों पर्र कोई मजदूर नज़र नहि आया उसे, अलबत्ता विजय सिंह अवश्य उसे दाईंतरफ लगे बोरबेल पऱ नज़रआया। वो बोर केँ पानी सें हाॅथमुह धोरहा थां।
प्रतिमा नें ग़ौर सें उसे देखाफिन मुस्कुरा कर घर-मकान केँ अंदर कि तरफबढ़ गई। कमरे मे पहुॅच कर उसने पिछले दिन कि हि तरह बेन्च पऱ टिफिन सें निकाल कर खानां लगाने लगी। आज उसने अपना आॅचल ढुलकाया नहि थां। शायदयह सोचकर कि विजय कहींयह नं सोच बैठे कि रोज़ रोज़ मे अपना आॅचल क्यूं गिरा देतीहूॅ?
कुछ हि देर मे विजय सिंह कमरे मे आँ गय़ा। कमरे मे अपनी भाभी कों देखकर वो चौंका फिन सामान्य होकर वहीं बेन्च केँ पास कुर्सी पर्र बैठ गय़ा।
"आज भि आपको हि कस्ट उठाना पड़ा भाभी। " विजय सिंह नें कहा___"कितनी तेज़धूप औऱ गर्मी होती हैं, कहीं आपकोलू लग गई औऱ आप् बीमार होँ गई तौ??"
"अरेकुछ नहि होगा मुझे। " प्रतिमा नें कहा___"इतनी भि नाज़ुक नहि हूॅ जौ इतने सें हि बीमार होँ जाऊॅगी। औऱ अगर होँ भि जाऊॅगी तोँ क्याँ हुआ? मेरी दवाई करवाने तुमको हि जानां पड़ेगा। जाओगे न् मुझे लेकर?"
"अरे क्याँ बात करती हें आप्?" विजय सिंह गड़बड़ाया___"ईश्वर करे आपकोकभी कुछ न् होँ भाभी। "
"हमारे चाहने सें क्याँ होता हैं?" प्रतिमा नें कहा___"जिसको जब जौ होना होता हैं वोँ हौ हि जाता हैं। इसलिए कहरही हूॅ कि अगर मे बीमार पड़ जाऊॅ तोँ तुम् मुझे लेँ चलोगे न् डाक्टर केँ पास??"
"इसमें भला पूछने कि क्याँ बात हैं?" विजय सिंह नें कहा___"औऱ हाॅ आपको डाक्टर केँ पास लें जाने कि ज़रूरत नहि पड़ेगी बल्कि डाक्टर कों मे स्वयं आपकेपास लें आऊॅगा। "
"ऐसा शायद तुम् इसलिए कहरहे हौ कि तुम् मुझे अपनेसंग लेँ जानां हि नहि चाहते। " प्रतिमा नें बुरा सां मुह बनाया___"सोचते होगे कि मुझ बुढ़िया कों कौन ढोता फिरेगा?"
"बु बुढ़िया???" विजय सिंह कों फिन सें ठसकालग गय़ा। वो ज़ोर ज़ोर सें खाॅसने लगा। प्रतिमा नें सीघ्रता सें उठकर मटके सें ग्लास मे पानी लिये उसकेमुह सें लगा दिया। इस बीचउसे सच मे ध्यान न् आया कि उसका आॅचल नीचेगिर गय़ा हैं।
"क्याँ हुआआज भि ठसकालग गय़ा तुम्हें?" प्रतिमा नें कहा___"क्याँ रोज़ऐसे हि होता हैं खाते टाइम?"
विजय सिंहकुछ बोल न् सका। उसकी आॅखों केँ बहोत पास प्रतिमा कि बड़ी बड़ी चूचियाॅ आधे सें अधिक ब्लाउज सें झूलती दिखरही थि। विजय सिंह कि हालतसमय भर मे खराब होँ गई। वो पानी पीनाभूल गय़ा थां।
"क्याँ हुआ पानी पियो न्?" प्रतिमा नें कहाफिन अनायास हि उसका ध्यान इसतरफ गय़ा कि विजय उसके सीने कि तरफ एकटक देखेजा रहा हैं। यहदेख वो मुस्कुराई।
"आजदूध लेकरआई हूॅ तुम्हारे लिए। " प्रतिमा नें मुस्कुराते हुए कहा___"औऱ हाॅ जहाॅदेख रहे हौ नं वहाॅ सूखा पड़ा हैं। इसलिए तोँ अलग सें लाईहूॅ। "
विजय सिंह कों जबरदस्त झटकालगा। प्रतिमा कों लगा कहीं उसने अधिक तोँ नहि बोल दिया। अंदर हि अंदर घबरा गई थि वो लेकिन चेहरे सें ज़ाहिर न् होने दिया उसने। बल्कि सीधी खड़ी होकर उसने अपने आॅचल कों सहीकर लिया थां।
"अरेऐसे आॅखें फाड़ फाड़कर क्याँ देखरहे होँ मुझे?" प्रतिमा हॅसी___"मे तौ मज़ाक कररही थि तुमसे। देवरु भाभी केँ बीच इतना तौ चलता हैं नं? चलोअब जल्द सें खानां खाओ। "
विजय सिंह चुपचाप खानां खानेलगा। इसबार वो बड़ा जल्द जल्दखा रहा थां। ऐसा लगता थां जैसेउसे कहीं जाने कि बड़ी जल्द थि।
"तुम् खानां खाओतब तक मे बाहर् घूम लेतीहूॅ। " प्रतिमा नें कहा___"औऱ हाॅदूध अवश्य पी लेना। "
"जी भाभी। " विजय नें नीचे कों सिर किये हि कहा थां।
उधर प्रतिमा मुस्कुराती हुईँ कमरे सें बाहर् निकल गई। पता नहि क्याँ चलरहा थां उसके दिमाग़ मे?"
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वर्तमान________
"अरे नैना फूफी आप्??" रितू जैसे हि हवेली केँ अंदर ड्राइंग रूम मे दाखिल हुइ तोँ सोफे पर्र नैना बैठी दिखी___"ओह फूफी मे बता नहि सकती कि आपको यहाॅदेख कर मे कितना खुश हुईँ हूॅ। "
"ओह माईगाड। " नैना सोफे सें उठतेहुए लेकिन हैरानी सें बोलीं___"तुँ तौ पुलिस वालीबन गई। कितनी सुन्दर लगरही हैं तेरे जिस्म पर्र यह पुलिस कि वर्दी। आईएमसो प्राउड आफयू। आँ मेरेगले लगजा रितू। "
दोनो एक् दूसरे केँ गले मिली। फिन दोनो एक् संग हि सोफे पऱ बैठ गई।
"मुझेडैड नें बताया हि नहि कि आप् आईं हें यहाॅ। " रितू नें खेदभरे भाव सें कहा___"वरना मे पुलिस थाने सें भागकर आपकेपास आँ जाती। ख़ैर, आब बताइये कैसी हें आप् औऱ फूफाजी जी केसे हें?"
"मे तोँ ठीक हि हूॅ रितू। " नैना नें सहसा गंभीर होकर कहा___"मगर तेरे फूफाजी जी कां पूछो हि मत। "
"अरे ऐसा क्यूं कहरही हें आप्?" रितू नें चौंकते हुए कहा____"फूफाजी जी केँ बारे मे क्यूं नं पूछूॅ भला?"
"क्यूं कि अब वोँ तेरे फूफाजी जी नहि रहे। " नैना नें कहा___"मैने उस नामर्द कों तलाक़ दे दिया हैं औऱ अब यहीं रहूॅगी अपनेघऱ मे। "
"त.ला.क़????" रितू बुरीतरह उछल पड़ी थि___"मगर क्यूं फूफी? ऐसी भि भला क्याँ बात होँ गई कि आपने उन्हें तलाक़ दे दिया?"
नैना नें कुछ लम्हा सोचा औऱ फिन सारीबात बता दि उसे जोँ उसने प्रतिमा कों बताई थि। सारी बातें सुनने केँ बाद रितू सन्नरह गई।
"ठीक किया आपने। "फिन रितू नें कहा___"ऐसे व्यक्ति केँ पास रहने कां कोई मतलब हि नहि हैं जौ ऐसीसोच रखता हौ। "
"रितू मे सोचरही हूॅ कि मे कोई ज्वाब करलूॅ। " नैना नें हिचकिचाते हुए कहा___"अगर तेरी नज़र मे मेरेलिए कोई ज्वाब हौ तौ दिलवा दे मुझे। "
"आपको ज्वाब करने कि क्याँ ज़रूरत हैं फूफी?" रितू नें हैरानी सें कहा___"क्याँ आप् यह समझती हें कि आप् हमारे लिएबोझ बन जाएॅगी?"
"ऐसीबात नहि हैं रितू। " नैना नें कहा__"बस मेरामन बहलता रहेगा। सारादिन बेड पऱ पड़े पड़ेइस सबके बारे मे सोचसोच कर कुढ़ती रहूॅगी। इसलिए अगरकोई ज्वाब करने लगूॅगी तौ मेरादिन आहिस्ता कट जाया करेगा। "
"क्याँ इस बारे मे आपनेडैड सें बात कि हैं?" रितू नें कहा।
"भाई औऱ भाभी सें मैने अभि इस बारे मे कोईबात नहि कि हैं। " नैना नें कहा___"पऱ मे जानती हूॅ कि भाई मुझे ज्वाब करने कि इजाज़त कभी नहि देंगे। वोँ भि यही समझेंगे कि मे उनकेलिए बोझबन जाऊॅगी ऐसा मे सोचरही हूॅ। "
"हाॅ यहबात हैं हि। " रितू नें कहा___"हम् मे सें कोई नहि चाहेगा कि आप् कोई ज्वाब करें। "
"नहि रितू प्लीज़। " नैना नें रितू केँ हाॅथ कों अपनेहाथ मे लेकर कहा___"समझने कि कोशिश कर मेरी बच्ची। क्याँ तूँ चाहती हैं कि तेरी फूफी उस सबके बारे मे सोचसोच कर दुखी हौ?"
"नहि फूफी हर्गिज़ नहि। " रितू नें मजबूती सें इंकार मे सिर हिलाया___"मे तोँ चाहती हूॅ कि मेरी प्यारी फूफी हमेशा खुश रहें। "
"तौ फिनकोई ज्वाब दिलवा दे मुझे। " नैना नें कहा___"मे कोई भि काम करने कों सजधजकर हूॅ। बस कामऐसा हौ कि मुझे एक् सेकण्ड केँ लिए भि कुछ सोचने कां वक़्त नं मिले। "
"ज्वाब तौ मे आपको दिलवा दूॅगी। " रितू नें कहा____"मगर उससे पहले एक् बारडैड सें भि इसकेलिए पूछना पड़ेगा। "
"ठीक हैं मे बात करूॅगी भाई सें। " नैना नें कहा___"अब जा तूँ भि चेन्ज कर लें तब तक मे तेरेकुछ खाने कां बंदोबस्त करतीहूॅ। "
"आप् परेशान मत होइये फूफी। " रितू नें कहा____"माॅम हें नां इस सबकेलिए। "
"इसमें तकलीफ़ कि क्याँ बात हैं?" नैना नें कहा___"विवाह सें पहले भि तौ मे यही करती थि तेरेलिए भूल गई क्याँ?"
"केसेभूल सकतीहूॅ फूफी?" रितू नें मुस्कुरा कर कहा___"मुझे सभीयाद हैं। आप् हम् तीनो बेहन भइया कों पढ़ाया करती थि औऱ पिटाई भि करती थि। "
"अरे वोँ तौ मे प्रेम सें मारती थि। " नैनाहॅस पड़ी___"औऱ वोँ ज़रूरी भि तोँ थां न्?"
"सहीकह रही हें आप्। " रितू नें कहा__"जब तक हम् बच्चे रहते हें तब तक हमेंयह सभी बुरा लगता हैं औऱ जब बड़े होँ जाते हें तोँ लगता हैं कि बचपन मे पढ़ाई केँ लिए जोँ पिटाई होती थि वोँ हमारे भले केँ लिए हि होती थि। "
"मैनेघऱ केँ सब बच्चों कों पढ़ाया थां। " नैना नें कुछ सोचते हुए कहा___"लेकिन उनसब बच्चों मे एक् हि ऐसा बच्चा थां जोँ मेरे हाॅथों मार नहि खाया औऱ वोँ थां हमारा राज। मे सोचा करती थि कि ऐसाकौन सां प्रश्न उससे करूॅ जौ उससे न् बने औऱ फिन मे उसकी पिटाई करूॅमगर अरेरे कितना तेज़ थां राज। हर विषय उसका कम्प्लीट रहता थां। छोटे भाई भाभी नें उसे बचपन सें हि पढ़ाई मे जीनियस बनारखा थां। वैसी हि निधी भि थि। जाने कहाॅ होंगे वोँ सभी?"
कहते कहते नैना कि आॅखों मे आॅसू आँ गए। रितू केँ चेहरे पऱ बेहद हि गंभीर भाव आँ गए थें। उसकेमुख सें कोई शब्द नहि निकला बल्कि शख्ती सें उसने मानोलब सि लिए थें।
"क्याँ हौ गय़ा हैं इसघऱ कि खुशियों कों?" नैना नें गंभीरता सें कहा___"नं जाने किसकी नज़रलग गई इसघऱ केँ हॅसते मुस्कुराते हुए लोगो पऱ? सभीकुछ बिखर गय़ा। विजय भाई क्याँ गए जैसेइस घऱ कि रूह हि चली गई। माॅ बाबूजी उनके सदमें मे कोमा मे चलेगए। गौरी भाभी औऱ उनके बच्चे जाने दुनियाॅ केँ किस कोने मे जीरहे होंगे? बड़ी भाभी नें बताया कि करुणा भाभी भि अपने बच्चों केँ संग अपने मायके चलीगईं हें जबकि अभय भाई किसीकाम सें कहीं बाहर् गए हें। इतनी बड़ी हवेली मे गिनती केँ चारलोग हें। यह किस्मत कि कैसी विडम्बना हैं रितू???"
"यह प्रश्न ऐसा हैं फूफी जौ हर व्यक्ति कि ज़ुबां पऱ रक्श करता हैं। " रितू नें कहा___"मगर उसकाकोई जवाब नहि हैं। "
"जबाव तोँ हर प्रश्न कां होता हैं रितू। " नैना नें कहा___"संसार मे ऐसाकुछ हैं हि नहि जिसका जवाब नं होँ। "
"आप् कहना क्याँ चाहती हें फूफी?" रितू नें हैरानी सें देखा थां।
"कहने कों तोँ बहोत कुछ हैं रितू। " नैना नें गहरी साॅस ली___"मगर कहने कां कोई मतलब नहि हैं। "
"प्लीज कहिए नं फूफी। " रितू नें कहा__"अगर कोईबात हैं मन मे तौ बेझिझक कहिये। "
"जानेदे रितू। " नैना नें पहलू बदला___"तुँ सुना कैसीचल रही हैं तेरी पुलिस कि जॉब??"
"बस ठीक हि हैं फूफी। " रितू कि आॅखों केँ सामने विधी कां चेहरा नाच गय़ा___"आप् तौ जानती हि हें इसजॉब मे दिनरात भागा दौड़ी हि होती रहती हैं। कभीइस मुजरिम केँ पीछे तौ कभी किसी क़ातिल केँ पीछे। "
"हाॅ यह तोँ हैं। " नैना नें कहा___"मगर पुलिस आफीसर बनने कां सपना तौ तूने हि देखा थां न् बचपन सें। "
"बचपन मे तौ बसयहसभी एक् बचपना टाइप कां थां फूफी। " रितू नें कहा___"मगर जब बड़े होने पऱ हर चीज़ कि समझआई तोँ लगा कि सचमुच मुझे पुलिस आफीसर बनना चाहिए। मेरी ख्वाहिश थि कि पुलिस आफीसर बनकर मे दादाजी दादीमा जी केँ एक्सीडेन्ट वालाकेस फिन सें रिओपेन करके उसकी तहकीक़ात करूॅगी। मगरसभी कुछ जैसे एक् ख्वाहिश सिर्फ हि रह गय़ा। "
"क्याँ मतलब???" नैना चौंकी।
"मतलबयह फूफी कि मे दादाजी जी केँ एक्सीडेन्ट वालेकेस मे कुछ नहि कर सकती। " रितू नें असहाय भाव सें कहा___"क्योंकि मैनेउस केस कि फाइल कों बहोत बारीकी सें पढ़ा हैं, उसमें कहीं पऱ भि यह नहि दिखाया गय़ा कि वोँ एक्सीडेन्ट एक् सोची समझी साजिश कां नतीजा थां बल्कि यह रिपोर्ट बनाकर फाइलबंद कर दि गई कि वोँ एक्सीडेन्ट महज एक् हादसा याँ दुर्घटना थि जोँ कि सामने सें आँ रहे ट्रक सें टकराने सें होँ गई थि। ट्रक कां ड्राइवर नशे मे थां जिसकी वजह सें उसने ध्यान हि नहि दिया औऱ साइड होने बजाय उसने दादाजी जी कि वाहन सें टकरा गय़ा थां। "
"मगर प्रश्न यह हैं कि तुझेही ऐसा क्यूं लगता हैं कि वोँ एक्सीडेन्ट महज दुर्घटना नहि बल्कि किसी कि सोची समझी साजिश थि?" नैना नें हैरानी सें कहा___"यानी कोई बाबूजी कों जान सें मार देना चाहता थां। "
"मुझे शुरुआत मे इसबात कां मात्र अंदेशा थां फूफी। " रितूकह रही थि___"वोँ भि इसलिए क्योंकि ऐसा शहरों मे होता हैं। दादाजी जी कि किसी सें कोई दुश्मनी नहि थि। फिन भि उनकेसंग यह हादसा हुआ। उस वक़्त इसके बारे मे इस एंगल सें मेरा केवल सोचना थां। मे नहि जानती थि मे ऐसा क्यूं सोचती थि? शायदइस लिए कि शुरुआत सें हि मेरे ज़हन मे क्राइम केँ प्रति सोचने कां ऐसा नज़रिया थां। लेकिन पुलिस कि जॉब ज्वाइन करनेबाद जब मैनेउस केस कि फाइल कों बारीकी सें अध्ययन किया तौ मुझे यकीन होँ गय़ा कि वोँ एक्सीडेन्ट महजकोई दुर्घटना नहि थि बल्कि जानबूझ कर दादा कि वाहन मे टक्कर मारी गई थि। "
"ऐसा क्याँ थां उस फाइल मे?" नैना कि आॅखें हैरत सें फटी पड़ी थि____"जिससे तेरी यकीन हौ गय़ा कि यहसभी सोचसमझ कर किया गय़ा थां?"
"फाइल मे जिस स्थान पऱ एक्सीडेन्ट यानी कि दादाजी जी कि गाड़ी कां एक्सीडेन्ट हुआ थां उस स्थान पर्र जाकर मैने स्वयं निरीक्षण किया हैं। " रितू नें कहा___"मेन हाइवे पर्र उस स्थान भले हि अधिकतर वाहनों कां आनां जानां नहि हैं मगरफिन भि इक्का दुक्का गाड़ी तौ आते जाते हि रहते हें वहाॅ पऱ। इतनी चौड़ी मार्ग पऱ कोई ट्रक वाला अपनीलेन सें आकर केसे किसी गाड़ी कों टक्कर मार सकता हैं? यहठीक हैं कि वोँ टू-लेन मार्ग नहि थि बल्कि टू-इन-वन थि। फिन भि इतनी चौड़ी मार्ग पऱ कोई ट्रक वाला अपनीलेन सें हटकर केसे टक्कर मार देगा। फाइल मे लिखा हैं कि ट्रक कां ड्राइवर नशे मे थां तौ प्रश्न हैं कि नशे कि उस हालत मे उसने एक् हि एक्सीडेन्ट क्यूं कियों किया? बल्कि एक् सें अधिक एक्सीडेन्ट होँ सकते थें उससेमगर ऐसा नहि थां। अब चूॅकि फाइल मे नाँ तौ उस ट्रक वाले कां कोईअता पता हैं औऱ नां हि कोईऐसा सबूत जिसके तहतआगे कि कोई कार्यवाही कि जासके इसलिए मे कुछ नहि कर सकती। "
"क्याँ केवलयही एक् वजह हैं जिससे तुम्हें लगता हैं कि बाबूजी कां एक्सीडेन्ट महज दुर्घटना नहि थि?" नैना नें कहा___"याँ फिनकोई औऱ भि वजह हैं तेरेपास??"
अभि रितूकुछ बोलने हि वाली थि कि उसकी पैन्ट कि जेब मे पड़ाफोन बजउठा। उसने पाॅकेट सें फोन निकाल कर स्क्रीन मे फ्लैश कर रहें नंबर कों देखाफिन काल रिसीव करउसे कान सें लगाकर कहा___"हाॅ रामदीन कहो क्याँ बात हैं?"
"." उधर सें पता नहि क्याँ कहा गय़ा।
"ओहचलो ठीक हैं। " रितू नें कहा___"मे जल्दी पहुॅच रहीहूॅ। "
मोबाइल काटने केँ बाद रितू एक् झटके सें सोफे सें खड़ी होँ गई औऱ फिन नैना सें कहा__"क्षमा करना फूफी मुझे तत्काल पुलिस स्टेशन जानां होगा। "
"ठीक रितू आहिस्ता जानां। " नैना नें कहा___"साम कों जल्द आनां। "
"जी बिलकुल फूफी। " रितू नें मुस्कुरा कर कहा___"रात मे हम् दोनोखूब सारी बातें करेंगे। "
इसकेबाद रितू वहाॅ सें चली गई। जबकि नैना वहीं सोफे पऱ बैठीउसे बाहर् कि तरफ जाते देखती रही। इस बात सें अंजान कि पीछे दीवार केँ उसतरफ खड़ाअजय सिंहइन दोनो कि बातें सुनरहा थां। उसके पीछे प्रतिमा भि खड़ी थि।
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फ्लैशबैक अबआगे_______
विजय सिंह खानां खाने केँ बादतथा दूध पीने केँ बाद थोड़ी देर वहीं एक् तरफरखे बैड पर्र आराम करना चाहता थां। लेकिन उसने सोचा कि उसकी भाभी बाहर् धूप मे जाने कहाॅघूम रही होंगी? इसलिए उसे देखने केँ लिएतथा यह कहने केँ लिए कि वोँ अबघऱ जाएॅ बहोत धूपव गर्मी हैं, वो कमरे सें निकलकर बाहर् आँ गय़ा।
बाहर् आकर उसनेआस पास देखामगर प्रतिमा उसे कहीं नज़र न् आई। यहदेख कर वो चिन्तित होँ उठा। वो जल्दी हि आगे बढ़ते हुएआस पास देखने लगा। चलते चलते वो आमों केँ बाग़ कि तरफबढ़ गय़ा। यहाॅ करीबदस एकड़ मे आमों केँ पेड़ लगाएगए थें। आधुनिक प्रक्रिया केँ तहत बहोत कम वक़्त मे हि यह बड़े होँ करफल देनेलगे थें। यह मौसम भि आमों कां हि थां।
विजय सिंहजब बाग़ केँ पास पहुॅचा तौ देखा कि प्रितिमा एक् आम केँ पेड़ केँ पास खड़ीऊपर कि तरफदेख रही थि। उसने अपने पल्लू कों कमर मे घुमाकर खोंसा हुआ थां। उसके दोनो हाॅथऊपर थें। विजय सिंह केँ देखते हि देखते वो ऊपर कि तरफ उछली औऱ फिन नीचे आँ गई। विजय सिंहउसे यह हरकत करतेदेख मुस्कुरा उठा। उसे देखकर कोई नहि कह सकता थां कि यहतीन तीन बच्चों कि माॅ हैं बल्कि इस वक़्त वो जिसतरह सें उछलउछल करऊपर लगेआम कों तोड़ने कां प्रयास कररही थि उससेयही लगता थां कि वोँ अभि भि कोई अल्हड़ सि लड़की हि थि। वो बारबार पहले सें अधिक ज़ोरलगा करऊपर उछलती मगर वो नाकाम होकर नीचे आँ जाती। आम उसकी पहुच सें दूर थां लेकिन फिन भि वोँ मान नहि थि। उछलकूद केँ चक्कर मे वो पसीना पसीना होँ गई थि। उसकी दोनोकाख पसीने सें भीगी हुई थि तथा ब्लाउज भि भीग गय़ा थां। चेहरे औऱ कनपटियों पर्र भि पसीना रिसाहुआ थां।
विजय सिंह उसकेपास जाकर बोला___"तौ आप् यहाॅआम तोडने कां प्रयास कररही हें। मे ढूॅढरहा थां कि जाने आप् कहाॅ गायब हौ गई हें?"
"अरेभला मे अब कहाॅ गायब होँ जाऊॅगी विजय?" प्रतिमा नें मुस्कुरा कर कहा__"इस ऊम्र मे तुम्हारे भाई कों छोंड़ करभला कहाॅजा सकतीहूॅ?"
"चलिये मे आपकोआम तोड़कर दे देताहूॅ फिन आप् धीरे-धीरे बैठकर खाइयेगा। " उसकीबात पर्र ज़रा भि ध्यान दिये बग़ैर विजय नें कहा थां।
"नहि विजय। " प्रतिमा ऊपर थोड़ी हि दूरी पर्र लगेआम कों देखती हुइ बोलीं___"इसे तौ मे हि तोड़ूॅगी। "
"पर्र वोँ तोँ आपकी पहुॅच सें दूर हैं भाभी। " विजय भि आम कि तरफ देखते हुए बोला___"भला आप् उस तक केसे पहुॅच पाएॅगी? औऱ जब पहुॅचेंगी हि नहि तोँ उसे तोड़ेंगी केसे?"
"कह तोँ तुम् भि ठीक हि रहे होँ। " प्रतिमा नें बड़ी मासूमियत सें दोनोहाथ कमर पऱ रखकर कहा___"सचमुच मे बहुतदेर सें प्रयास कररही हूॅइस मुए कों तोड़ने कां मगरयह मेरे हाॅथ हि नहि लगरहा। "
"इसीलिए तौ कहताहूॅ कि मे तोड़ देताहूॅ भाभी। " विजय नें कहा___"आप् फालतू मे हि इस गर्मी मे परेशान हौ रही हें। "
"मगर मे इसे अपने हाॅथ सें हि तोड़ना चाहती हूॅ विजय। " प्रतिमा नें कहा___"मुझे बहोत खुशी होगीअगर मे इसे अपने सें तोड़कर खाऊॅगी तौ। "
"फिन तौ यह संभव नहि हैं भाभी। " विजय नें कहा___"याँ फिनऐसा कीजिए कि नीचे सें एक् पत्थर उठाइये औऱ उसआम कों निशाना लगाकर पत्थर मारकर तोड़ लीजिए। "
"उफ़्फ़ विजययह तौ मुझसे औऱ भि नहि होगा। " प्रतिमा नें आहतभाव सें कहा___"क्याँ तुम् मेरी सहायता नहि कर सकते?"
"म मे.????" विजय चौंका___"भला मे केसे आपकी सहायता कर सकताहूॅ?"
"बिलकुल कर सकते हौ विजय। " प्रतिमा नें खुश होकर कहा___"तुम् मुझे अपनी बाहों सें ऊपरउठा सकते होँ। उसकेबाद मे बड़े आहिस्ता उसआम कों तोड़ लूॅगी। "
"क क्याँ????" विजय सिंह बुरीतरह उछल पड़ा, हैरत सें उसकी आॅखें फैलती चली गई थि, बोला___"यह आप् क्याँ कहरही हें भाभी? नहि नहि यह मे नहि कर सकता। आप् कोई दूसरा आमदेख लीजिए जोँ आपकी पहुॅच पऱ हौ उसे तोड़ लीजिए। "
"अरे तोँ इसमें क्याँ हैं विजय?" प्रतिमा नें लापरवाही सें कहा___"थोड़ी देर कि तौ बात हैं। तुम् मुझे बड़े धीरे-धीरे उठा सकते होँ, मे इतनी भि भारी नहि हूॅ। तुम्हारी गौरी सें तौ कम हि हूॅ। "
"पऱ भाभी मे आपको केसेउठा सकताहूॅ?" विजय कि हालत खराब___"नहि भाभीयह मुझसे हर्गिज़ भि नहि होँ सकता। "
"क्यूं नहि हौ सकता विजय?" प्रतिमा उसकेपास आकर बोलीं___"बल्कि मुझे तोँ बड़ी खुशी होगी विजय कि तुम्हारे द्वारा हि सही लेकिन मे अपने हाॅथों सें उसआम कों तोड़ूॅगी। प्लीज़ विजय.मेरे लिए.मेरी खुशी केँ लिएयह करदो नं?"
विजय सिंह कों समझ नहि आँ रहा थां कि वो क्याँ करे? वो तौ स्वयं कों कोसेजा रहा थां कि वो यहाॅआया हि क्यूं थां?
"ओह विजयपता नहि क्याँ सोचरहे हौ तुम्?" प्रतिमा नें कहा___"भला इसमें इतना सोचने कि ज़रूरत हैं? तुम् कोई ग़ैर तौ नहि हौ नं औऱ नाँ हि मे तुम्हारे लिएकोई ग़ैरहूॅ। हम् दोनो देवर जी भाभी हें औऱ इतना तोँ बड़े आहिस्ता चलता हैं। मे तोँ कुछ नहि सोचरही हूॅऐसा वैसा। फिन तुम् क्यूं सोचरहे होँ?"
"पऱ भाभी किसी कों पता चलेगा तौ लोग क्याँ सोचेंगे हमारे बारे मे?" विजय सिंह नें हिचकिचाते हुएकहा।
"सबसे पहलीबात तोँ यहाॅ पऱ हम् दोनो केँ अलावा कोई तीसरा हैं हि नहि। " प्रतिमा कहरही थि___"औऱअगर होता भि तोँ मुझे उसकीकोई परवाह नहि होती क्योंकि हम् कुछ ग़लत तौ कर नहि रहे होंगे फिन किसी सें डरने कि याँ किसी केँ कुछ सोचने सें डरने कि क्याँ ज़रूरत हैं? देवर जी भाभी केँ बीच इतना प्यारवश चलता हैं। अब छोड़ों इसबात कों औऱ जल्द सें आओ मेरेपास। "
विजय सिंह कां दिल धाड़ धाड़ करकेबज रहा थां। उसेलग रहा थां कि वो यहाॅ सें भागजाए लेकिन फिन उसने भि सोचा कि इसमें इतना सोचने कि भला क्याँ ज़रूरत हैं? उसकी भाभीठीक हि तौ कहरही हैं कि इतना तोँ देवर जी भाभी केँ बीच चलता हैं। फिन वोँ कौन सां कुछ ग़लत करनेजा रहे हें।
"ओफ्फो विजय कितना सोचते हौ तुम्?" प्रतिमा नें खीझते हुए कहा____"तुम्हारी स्थान अगर मे होती तौ एक् समय भि नं लगाती इसकेलिए। "
"अच्छा ठीक हैं भाभी। " विजय उसकेपास जातेहुए बोला___"मगर इसके बारे आप् किसी सें कुछमत कहियेगा। बड़े भाई सें तौ बिलकुल भि नहि। "
"अरे मे किसी सें कुछ नहि कहूॅगी विजय। " प्रतिमा हॅसकर बोलीं___"यह तौ हमारी आपस कि बात हैं न्। अबचलो जल्द सें मुझे उठाओ। सम्हाल कर उठाना, गिरामत देना मुझे। पता चले कि लॅगड़ाते हुए हवेली जानां पड़े। "
विजय सिंहकुछ न् बोला बल्कि झिझकते हुए वो प्रतिमा केँ पास पहुॅचा। प्रतिमा कि हालतयह सोचसोच कर रोमाॅच सें भरीजा रही थि कि विजयउसे अपनी बाहों मे उठाने वाला हैं। अंदर सें थराथरा तोँ वो भि रही थि लेकिन दोनो कि मानसिक अवस्था मे अलगअलग हलचल थि।
विजय सिंहझुक कर प्रतिमा कों उसकी दोनो टाॅगों कों अपने दोनो बाजुओं सें पकड़कर ऊपर कि तरफ खड़े होतेहुए उठाना शुरुआत किया। प्रतिमा नें झट सें अपने दोनो हाॅथों कों विजय सिंह केँ दोनो कंधो पऱ रख दिया। वो एकटक विजय कों देखेजा रही थि। उस विजय कों जिसके चेहरे पर्र इसबात कि ज़रा भि शिकन नहि थि कि उसनेकोई बोझ उठाया हुआ हैं। यहअलग बात थि कि दिल मे बढ़ी घबराहट कि वजह सें उसके चहरे पऱ पसीना छलछला आया थां।
प्रतिमा बड़ी शातिर महिला चालाक महिला थि। उसने विजय कों उसके कंधो पर्र सें पकड़ा हुआ थां। जैसे हि विजय नें उसेऊपर उठाना शुरुआत किया तौ वो झट सें स्वयं कों सम्हालने केँ लिए अपने सीने केँ भार कों विजय केँ सिर पर्र टिका दिया। उसकी भारी भारी चूचियाॅ जोँ अब तक पसीने सें भींग गई थि वोँ विजय केँ माथे सें जा टकराई। विजय केँ नथुनों मे प्रतिमा केँ बदन कि तथा उसके पसीने कि गंध समाती चली गई। विजय कों किसीनशे केँ जैसा आभासहुआ।
"वाउ विजय तुमने तौ मुझे किसीरुई कि बोरी कि तरहउठा लिया। " प्रतिमा नें हॅकर कहा___"अब औऱ ऊपर उठाओ ताकि मे उसआम कों तोड़ सकूॅ। "
विजय नें उसे पूराऊपर उठा दिया। प्रतिमा कां नंगापेट विजय केँ चेहरे केँ पास थां। उसकी गोरी सि लेकिन गहरी नाभी विजय कि ऑखों केँ बिलकुल पास थि। उसकापेट एकदम सफ़ेद औऱ बेदाग़ थां। विजयइस सबको देख्ना नहि चाहता थां मगर क्याँ करे मजबूरी थि। उसे अपने अंदर अजीब सि मदहोशी कां एहसास हौ रहा थां। उधर प्रतिमा मन हि मन मुस्कुराए जारही थि। आम कां वोँ फल तोँ उसके हाॅथ मे हि छूरहा थां जिसे वो बड़े आहिस्ता तोड़ सकती थि लेकिन वो चाहती थि इस परिस्थिति मे विजय उसकेसंग कुछ तौ करे हि। यहसच थां कि अगर विजयउसे वहीं पऱ लेटाकर उसकाभोग भि करनेलग जाता तोँ उसेकोई ऐतराज़ न् होतामगर यह संभव नहि थां।
विजय प्रतिमा केँ पेट पऱ अपने चेहरे कों छूने नहि देना चाहता थां। वो जानता थां कि गर्मी किसी केँ सम्हाले नहि सम्हलती। गर्मी जबसिर चढ़ने लगती हैं तोँ सबसे पहले विवेक कां नास होता हैं। उसकेबाद सभीकुछ तहसनहस होँ जाता हैं। उधर प्रतिमा बखूबी समझती थि कि विजय कलियुग कां हरिश्चन्द्र हैं, यानी वोँ किसी भि कीमत वोँ नहि करेगा जौ वो चाहती हैं। मतलब जौ कुछ करना थां उसेखुद हि करना थां।
प्रतिमा नें महसूस किया कि विजय उसके नंगेपेट सें अपने चेहरे कों दूर हटाने कि कामयाब कोशिश कररहा हैं। यहदेख कर प्रतिमा नें अपनेबदन कों अजीब सें अंदाज़ मे इसतरह हिलाया कि विजय कों यहीलगे कि वो अपना संतुलन बनाए रखने केँ लिए हि ऐसा किया हैं। प्रतिमा नें जैसे हि अपनेबदन कों हिलाया वैसे हि उसकापेट विजय केँ चेहरे सें जालगा। उसकामुह औऱ नाॅक बिलकुल उसकी गहरी नाभी मे मानोदब सां गय़ा थां। विजय सिंह इससे बुरीतरह विचलित हौ गय़ा। उसने पुनः अपने चेहरे कों दूर हटाने कि कोशिश कि लेकिन इसबार वो कामयाब नं हुआ। क्योंकि प्रतिमा ऊपर सें उससे चिपक सि गई थि। विजय सिंह कि हाॅथ कि पकड़ ढीलीपड़ गई। परिणामस्वरूप प्रतिमा कां बदन नीचे खिसकने लगा।
"क्याँ कररहे हौ विजय?" प्रतिमा नें सीघ्रता सें कहा___"ठीक सें पकड़ो न् मुझे। "
"आपनेआम तोड़ लिया कि नहि?" विजय नें उसेफिन सैऊपर उठाते हुए कहा___"जल्द तोड़िये न् भाभी। "
"क्याँ हुआ विजय?" प्रतिमा हॅसकर बोलीं___"मेरा भार नहि सम्हाला जारहा क्याँ तुमसे?"
"ऐसीबात नहि हैं भाभी। " विजय नें झिझकते हुए कहा___"पर्र एक् आम तोड़ने मे कितना टाइम लगेगा आपको?"
"अरे मे एक् आम थोड़ी न् तोड़रही हूॅ विजय। " प्रतिमा नें कहा___"कई सारे तोड़रही हूॅ ताकि तुम्हें बारबार उठाना नां पड़े मुझे। "
"ठीक हैं भाभी। " विजय नें कहा___"पऱ ज़रा जल्द कीजिए न् क्योंकि खेतों मे काम करने वाले मजदूरों केँ आने कां वक़्त होँ गय़ा हैं। "
"अच्छा ठीक हैं। " प्रतिमा नें कहा___"अब औऱ आम नहि तोड़ूॅगी। अब आहिस्ता सें नीचे उतारो मुझे। "
विजय सिंह तौ जैसेयही चाहता थां। उसने अपनी पकड़ ढीलीकर दि जिससे प्रतिमा नीचे खिसकने लगी। उसने दोनो हाॅथों मे आम लियाहुआ थां इसलिए सहारे केँ लिए उसने कोहनी टिकाया हुआ थां विजय पर्र। प्रतिमा कां भारी छातियाॅ विजय केँ चेहरे पर्र सें रगड़ खाती हुइ घप्प सें उसके सीने मे जालगी। प्रतिमा केँ मुह सें मादक सिसकी निकल गई। विजय नें उसकीइस आह कों स्पष्ट सुना थां।
"उफ़्फ़ विजय बड़े चालू होँ तुम् तौ। " प्रतिमा नें हॅसकर कहा___"मेरे दोनो हाॅथों मे आम हें इसलिए ठीक सें संतुलन नहि बनापाई औऱ तुम् इसी कां फायदा उठारहे हौ। चलोकोई बात नहि। कम सें कमआम तौ मिल हि गए मुझे। चलो दोनोबैठ कर खाते हें यहीं पेड़ कि ठंडी छाॅव केँ नीचेबैठ कर। "
"आप् खा लीजिए भाभी। " विजय नें असहजभाव सें कहा___"मे तोँ रोज़ हि खाताहूॅ। अभि ठीक सें पके नहि हें। एक् हप्ते बाद इनमें मीठापन आँ जाएगा। "
"देखो नं विजय यहाॅ कितना अच्छा लगरहा हैं। " प्रतिमा नें कहा___"पेड़ों कि छाॅव औऱ मदमस्त करने वाली ठंडी ठंडीहवा। इसहवा केँ सामने तोँ एसी भि फेल हैं। मन करता हैं यहीं पर्र सारादिन बैठी रहूॅ। घऱ मे पंखा औऱ कुलर मे भि गर्मी शान्त नहि होती औऱ ऊपर सें बीचबीच मे लाइटचली जाती हौ तोँ फिन समझो कि प्राण हि निकलने लगते हें। "
"हाॅ गाॅवों मे तौ लाइट कां आनां जानां लगा हि रहता हैं। " विजय नें कहा___"मे सोचरहा हूॅ कि हवेली मे एक् दो जनरेटर रखवा देताहूॅ ताकिअगर लाइन नं रहे तोँ उसके द्वारा बिजली मिलसके औऱ किसी कों इस गर्मी मे परेशान न् होना पड़े। "
"यह तौ तमने बहोत अच्छा सोचा हैं। " प्रतिमा नें कहने केँ संग हि वहीं पेड़ केँ नीचेसाफ करने केँ बाद साड़ी केँ पल्लू कों बिछाकर बैठ गई। उसेइस तरह पल्लू कों बिछाकर बैठते देख विजय हैरान रह गय़ा। उसकी भारी छातियाॅ उसके बड़ेगले वाले ब्लाउज सें स्पष्ट नुमायाॅ हौ रही थि।
"आओ न् विजय तुम् भि मेरेपास हि बैठजाओ। " प्रतिमा नें एक् आम कों उठाकर कहा__"ऐसा लगता हैं कि इन्हें पहले पानी सें धोना पड़ेगा। "
"जी बिलकुल भाभी। " विजय नें कहा__"इन्हें धोना हि पड़ेगा वरना इनका जौ रस होता हैं वोँ अखर शरीर मे लग जाएगा तौ वहाॅ इनफेक्शन होने कि संभावना होती हैं। "
"तोँ अब क्याँ करें विजय?" प्रतिमा नें कहा__"मेरा मतलब पानी तोँ यहाॅ पर्र हैं नहि। "
"दीजिए मे इन्हें धोकर लाताहूॅ। " विजय नें कहा औऱ उन सारेआमो कों उठाकर बाग़ सें बाहर् चला गय़ा।
"कितने भोले होँ विजय। " विजय केँ जाने केँ बाद प्रतिमा बड़बड़ाई___"लेकिन समझते सभीकुछ होँ। औऱ शायदयह भि समझ हि गए होगे कि तुम्हारी भाभी एक् नंबर कि छिनाल याँ राॅड हैं। उफ़्फ़ विजय क्याँ करूॅ तुम्हारा? तुम्हारी स्थान कोई औऱ होता तौ अब तक मुझे मेरेआगे पीछे सें पेल चुका होता थां। तुम् भि मुझे पेलोगे विजय.बस थोडा औऱ मेहनत करनी पड़ेगी तुम्हें पटाने मे। औऱ अगर उससे भि नं पटे तोँ फिन आख़िर मे एक् हि चारारह जाएगा। ओह विजय आँ जाओ न्.समझ क्यूं नहि रहे हौ कि तुम्हारी यह राॅड भाभी यहाॅ बाग़ मे अकेले तुम्हारे संग मज़े करना चाहती हैं। मुझे अपनी मजबूत बाहों मे कसलो न् विजय.मेरे शरीर सें यह कपड़े चीर फाड़कर निकाल दो औऱ टूट पड़ोमुझ पऱ। आहहहहहह शशशशश विजय मुझेतब तक पेलोजब तक कि मेरादम नं निकलजाए। देखलो विजय.तुम्हारी यह राॅड भाभी मात्र तुम्हारे लिए यहाॅआई हैं। मुझेमसल डालो.मुझे रगड़ डालो.ओह मेरे अंदर कि इसआग कों शान्त करदो विजय। "
पेड़ केँ नीचे बैठी प्रतिमा हवशव वासना केँ हाथों अंधी होकर जाने क्याँ क्याँ बड़बड़ाए जारही थि। कुछ हि देर मे विजय सिंह आँ गय़ा औऱ उसने धुलेहुए आमों कों एक् बाॅस कि टोकरी मे रखकर लाया थां। उसने प्रतिमा कि तरफ देखा तोँ चौंक पड़ा।
"आपको क्याँ हुआ भाभी?" विजय नें हैरानी सें कहा___"आपका चेहरा इतनालाल सुर्ख क्यूं होँ रखा हैं? कहीं आपकोलू तौ नहि लग गई। हे ईश्वर आपकी तबीयत तौ ठीक हैं नं भाभी। "
"मे एकदमठीक हूॅ विजय। " विजय कों अपनेलिए फिक्र करतेदेख प्रतिमा कों समयभर केँ लिए अपनीसोच पर्र ग्लानी हुईँ उसकेबाद उसने कहा___"औऱ मेरेलिए तुम्हारी यह फिक्र देखकर मुझे बेहद खुशी भि हुईँ। मे जानती हूॅ तुम् सभी हमें अपना समझते हौ तथा हमारे लिए तुम्हारे अंदरकोई मैल नहि हैं। एक् हम् थें कि अपनो सें हि बेगाने बनगए थें। मुझे क्षमा करदो विजय।। " कहने केँ संग हि प्रतिमा कि आॅखों मे आॅसू आँ गए औऱ वो एक् झटके सें उठकर विजय सें लिपट गई।
विजय उसकीइस हरकत सें हैरान रह गय़ा थां। लेकिन प्रतिमा कि सिसकियों कां सुनकर वो यही समझा कि यहसभी उसने भावना मे बहकर किया हैं। मगरभला वो क्याँ जानता थां कि महिला उसबला कां नाम हैं जिसका रहस्य देवता तौ क्याँ ईश्वर भि नहि समझ सकते।
भाग हाज़िर हैं दोस्तो,,,,,,,,
chamatkari bhay aj kaa updet behad hi sandar thaa aur lagta he naina kuch jantihe aur ritu kaa ghussa raj kaa naam aane pr aur ritu kobhi sanka he daada daadi k kes mai maindbloing waiting for next updet
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
Behad hi shandaar aur jabardast update bhay
bhut khoob superb.
Bade hi behtareen dhang से dikhaya hain aapne dono ghatnao Ko.
moorti aur Vijay के bich के incident Ko.
Ritu aur Naina bua की baatein bi badi hi dilchasp rahi.
Mzaaaa aa gya bhay waah.
Flashback Ko saath hi लेकर chlo.
Thik आज की prakaar.
aur अब,
Aage kaa intjar
Wow bhay dono update hi jabardast hey. bhay ek request hey kuch flashback baki rakhna, jisko ajay aur moorti kee jubani last mey samney lana sayed yeh aur achcha hoga yeh bass maira ek request hey baki ap behtar jantey hu, keep it up and as always waiting for
धन्यवाद भइया आपकीइस हसीन प्रतिक्रिया केँ लिए,,,,,, रिशभ भइया धन्यवाद आपकेइस सुंदर फीडबैक केँ लिए,,,,
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
Jabardast Update bhaiii
Flashback m mazaa aa thaa hain dekhte hain patima kis hadd takk girti hain
aur Ajay ke bare m poora pta chalega क्या क्या kand kiye hain pese ke liye
Idar naina BUAA ko ritu n bataya की dadaji kaa accident sochi sji chl hain
Ritu kaa najariya vakaii m behtarin hain
Vese mujhe yeh बहुत aacha lga की flashback ke bich m आज ko bhii continue krr rhe hain iska mja hii कुछ alag hain
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) - Next part miss mat karna
धन्यवाद भइया आपकीइस सुंदर प्रतिक्रिया केँ लिए,,,,,, भइया बहोत दिनबाद दिखे आप्, कहाॅ गायब थें???
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