♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
Awesome update shubham bhay,
ritu ko kuchh too aesa clue मिला h jiski vajah से vo itni खुश h,
और usne hariya kaka ko un charo की achchhe से khatirdaari karne की khuli chhut de di h,
Hariya kaka ne un sab ko aisi saja dene kaa plan banaya h की un sab की ruh kaanp gai h,
wahi dusri tarf viraj कल से kaalej jaane wala h,
dekhte h अब aage क्या hotha h,
Waiting for next update
Mast updet bhay aur kya saja dihe bhay balatkariyo k sath esa hi hnaa chahiye unko bi durd kaa ehsas hnaa chahiye waiting for next updet
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
bhay iss update ne too hasate hasate मेरे pet mai durd krr दिया। Lajawaab update bhai_____
Jagdish के aa jane से gauri ne filhaal flackback के roop mai kahani sunani बंद krr di h और ise next day sunayegi। Viraj अब कल से collage jayega dekhte haen bhay collage mai ajay singh की choti beti neelam से जब viraj kaa saamna hoga तब क्या hotha hai_____
Idhar ritu ne hariya kaka ko khuli chhoot de di h की woh un chaaro की achhe से khatirdaari kare। or hariya kaka ne jis prakaar से unki khatirdaari shuru की h bhay mazaa aa गया। Hariya kaka की majedaar baate padh krr bhay hasi hi नहीं बंद hu rahi thi__
Ritu ko subah phone पर कोई achhi बात ptaa chali h jisse की woh खुश hu gai h। Ab next update mai dekgte haen bhay क्या dhamaka hotha hai_____
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
♡ एक् नया संसार ♡
भाग.《 37 》
अब तक,,,,,,,,
"सबरकर बछुवा। " हरिया नें कहा___"गला फाड़ने सें कां होई?ऊता हिम्मत रखै सें होई। अउर ईताअबे शुरूआतै हुआ हैं। अबेता मंजिल बहोत बाॅकी हैं बछुवा। "
"आआहहहहहह मममममम्मी रेरेएएएएएए। " हरिया नें ज़ोर कां झटका दिया। सूरज कि गाॅड कों चीरता हुआ हरिया कां लौड़ा करीबआधा घुस गय़ा थां। सूरज केँ मुख सें बड़ी भयंकर चीख निकली थि। उसकी ऑखों केँ सामने अॅधेरा छा गय़ा। सूरज बेहोश हौ चुका थां। उसकी हालतदेख कर बाकीसभी केँ होशउड़ गए। सूरज केँ मित्र थरथर काॅपने लगे। वोँ अनायास हि ज़ोर ज़ोर सें पागलों कि तरह रोने चिल्लाने लगे।
"अबे चुपकरा मादरचोदो वरनाई लौड़ा इसकी गाॅड सें निकाल केँ तुम्हरी गाॅड मे घुसेड़ दूॅगा हम्। " हरिया गुर्राया तोँ वोँ डर केँ मारे एक् दम सें चुप हौ गए। उनकेचुप होँ जाने केँ बाद हरिया नें सूरज कि गाॅड मे थप्पड़ मारते हुए बोला___"कां बे मादरचोद। ससुरे इतने सें हि टाॅयबोल गय़ा रे। अभि ता हम् पूरा लौड़ा डाला भि नहि हूॅ। "
हरिया सूरज कि गाॅड मे धक्के लगाना शुरुआत कर दिया। हर धक्के केँ संग वो थोडा बहोत लौड़े कों सूरज कि गाॅड मे घुसेड़ता हि रहा थां। सूरज बेहोशी कि हालत मे भि कराहरहा थां। हरिया एक् बार तेज़े सें धक्का लगाया तोँ एच ज़ोरदार चीख केँ संग सूरजहोश मे आँ गय़ा। होश मे आते हि वो बुरीतरह रोने बिलखने लगा। रहम कि भीख माॅगने लगा वो। मगर हरिया कों तौ अब जैसे न् रुकना थां औऱ नाही रुका वो। तहखाने मे सूरज कां रोना औऱ चिल्लाना ज़ारी रहा।
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अबआगे,,,,,,,,,
उधर मुम्बई मे भि सुुुुबह हुइ।
गौरी नें सुभह पाॅचबजे हि विराज कों उठा दिया थां। सुभहउठ कर उसने थोड़ी बहोत एक्सरसाइज कि औऱ फिन बाथरूम मे फ्रेश होने केँ लिएचला गय़ा। फ्रेश होने केँ बाद वो कमरे मे आया तोँ देखा कि उसकी बेहन निधिबेड पऱ बैठी हुइ हैं।
"अरे तुम्हारी तरफ विद्यालय नहि जानां क्याँ?" मैने तौलिये सें अपनेसिर केँ बालों कों पोंछते हुएकहा।
"जानां हैं। " निधि नें गौर सें मेरेबदन कों देखते हुए कहा___"मे तोँ बस आपको बेस्ट ऑफलक कहनेआई थि। "
"अच्छा तोँ यहबात हैं। " मैने मुस्कुरा कर कहा___"मेरी गुड़िया मेरीजान मुझे बेस्ट ऑफलक कहनेरूम मे आई हैं?"
"हाॅमगर अपने तरीके सें। " निधि नें मुस्कुरा करकहा।
"अपने तरीके सें?" मे उसकीबात सें नासमझने वाले अंदाज़ सें बोला___"किस तरीके कि बातकर रही हैं तुँ?"
"वोँ मे कर केँ बताऊॅगी भाई। " निधि नें कहा___"बस आपको अपनी दोनो ऑखेंबंद करना पड़ेगा। औऱ खबरदार ग़लती सें भि अपनी ऑखेंमत खोलियेगा। वरना मे आपसेबात नहि करूॅगी। हाॅ नहि तोँ। "
"अरेयह क्याँ कहरही हैं गुड़िया?" मे उसकीबात सें हैरान हुआ___"आख़िर क्याँ चलरहा हैं तेरेमन मे?"
"कुछ नहि चलरहा भाई। " निधि एकाएक हि हड़बड़ा गई थि, बोलीं___"बस आप् अपनी ऑखेंबंद कीजिए नं। "
मे उसे ग़ौर सें देखता रहा। उसके चेहरे पऱ इस वक़्त संसार भर कि मासूमियत विद्यमान थि। हुस्न मे वो बिलकुल मेरीमाॅ कि कार्बन काॅपी हि थि। हलाॅकि उसका चेहरा औऱ उसका पूरा रंगरूप मेरीमाॅ गौरी कि तरह हि थां। वोँ माॅ कि हमशक्ल टाइप कि थि।
"क्याँ हुआ भाई?" निधिकह उठी___"क्याँ सोचने लगे आप्? बंद कीजिए न् अपनी ऑखें। "
"अच्छा ठीक हैं बंद करताहूॅ। " मैने कहा__"पऱ कोई उटपटाॅग हरकतमत करना। "
"मे ऐसा वैसाकुछ नहि करूॅगी भाई। " निधि नें कहा___"औऱ अगरकर भि दूॅ तोँ मेरीभूल समझकर मुझे क्षमा कर देना। हाॅ नहि तौ। "
मे उसकी नटखट बातों पर्र मुस्कुरा उठा औऱ अपनी ऑखेंबंद करली। कुछ समयबाद हि मुझे अपने होठों पऱ कोई बहोत हि कोमल चीज़ महसूस हुईँ। अभि मे कुछसमझ भि नं पाया थां कि उस कोमल चीज़ नें मेरे होठों कों जोर सें दबोचकर दो सेकण्ड तक अपने अंदररख करउस पर्र कुछ किया उसकेबाद छोंड़ दिया। मेरे दिमाग़ मे विस्फोट सां हुआ। एकाएक हि मेरे दिमाग़ कि बत्ती जली। मैनेझट सें अपनी ऑखेंखोल दि। सामने देखा तोँ निधि भागते हुए कमरे केँ दरवाजे पऱ नज़रआई मुझे। दरवाजे केँ पास पहुॅच कर वो रुकी औऱ फिन पलटी। उसकेबाद मुस्कुराते हुए कहा__"बेस्ट ऑफलक भाई। " इतनाकह कर वो दरवाछे केँ बाहर् कि तरफहवा कि तरह निकल गई। जबकि मे बुतबना खड़ारह गय़ा।
मुझे यकीन नहि होँ रहा थां कि मेरी बेहन नें इनकुछ पलों केँ भीतर मेरेसंग क्याँ कर दिया थां। वो मेरे होठों कों बड़ी चतुराई सें चूमकर मुझे बेस्ट ऑफलककहा औऱ भाग भि गई। मुझे उससेइस सबकी उम्मीद नहि थि। फिन मुझे ध्यान आया कि वोँ मुझसे प्रेम करती हैं जिसका उसने इज़हार भि किया थां।
मे बहुतदेर तक बुतबना खड़ारहा। मेरी तंद्रा तब टूटीजब माॅ कमरे मे आकर बोलीं___"तूँ अभि तक सजधजकर नहि हुआ काॅलेज जाने केँ लिए?चल रेडी होकर आँ जल्द। मैने नास्ता सजधजकर करकेलगा दिया हैं। "
मे माॅ कि आवाज़ सुनकर चौंक पड़ा थां। उसकेबाद मैंने माॅ सें कहा कि आप् चलिए मे आताहूॅ। मेरे दिमाग़ मे अभि तक यहीचल रहा थां कि गुड़िया नें ऐसा क्यूं किया? मुझे अपने होठों पऱ अभि भि उसके नाज़ुक होठों कां एहसास होँ रहा थां। मैने अपने होठों पऱ जीभ फिराई तोँ मुझे मीठा सां लगा। स्स्स यह क्याँ हैं? मेरी गुड़िया केँ मुख औऱ होठों कां लार इतना मीठा थां। मुझे अपने अंदर बड़ा अजीब सां रोमाॅच होता महसूस हुआ। मेरारोम रोम गनगना उठा थां।
ख़ैर मे काॅलेज कि यूनीफार्म पहनकर कमरे सें बाहर् आया औऱ फिन नीचे डायनिंग हाल कि तरफबढ़ गय़ा। डायनिंग टेबल पऱ इससमय सभीलोग बैठेहुए थें। जगदीश अंकल, अभय चाचा, गुड़िया औऱ माॅ। मे भि एक् कुर्सी घसीटकर बैठ गय़ा। मेरी नज़र निधि पर्र पड़ी तौ उसने जल्द सें अपना चेहरा झुका लिया। उसके गोरे गोरे औऱ फूलेहुए गाल कश्मीरी सेब कि तरह सुर्ख होँ गए थें लाज औऱ लज्जा कि वजह सें।
"यह बहोत अच्छा कियाराज जौ तुमने अपनी पढ़ाई जारीकर दि। " सहसा सामने कुर्सी पऱ बैठेअभय चाचा नें कहा___"मुझे खुशी हैं कि इतनाकुछ होने केँ बाद भि तुम् अपने रास्ते सें नहि भटके। मुझे तुम् पऱ फक्र हैं राज औऱ मेरा आशीर्वाद हैं कि तुम् हमेशा कामयाबी औऱ सफलता केँ नये औऱ ऊॅची बुलंदियों कों प्राप्त करो। "
"धन्यवाद चाचा जी। " मैने कहा___"भले हि चाहे जोँ हुआ होँ मगर मे जानता थां कि आपकेदिल मे हमारे लिए इतनी भि नफ़रत नहि होगी जितनी कि बड़े पिताजी औऱ बड़ीमाॅ केँ दिलों मे हैं हमारे लिए। "
"वक्त बहोत बलवान होता हैं राज। "अभय चाचा नें कहा___"औऱ बहोत बेरहम भि। वोँ हमसे वोँ सभी भि करवा लेता हैं जिसे करने कि हम् कभी कल्पना भि नहि करते। पर्र कोईबात नहि बेटे, इंसान वही श्रेष्ठ औऱ महान होता हैं जौ हरतरह केँ कस्टों कों पार करकेआगे बढ़ता हैं। "
"राज बेटा मैने तुम्हारे लिए काॅलेज जाने केँ लिए एक् नई औऱ शानदार गाड़ी मगवा दि हैं जौ कि बाहर् हि खड़ी हैं। " जगदीश अंकल नें मुस्कुराते हुए कहा___"हम् चाहते हें कि तुम् अपनेनये सफर कि शुरूआत उसी सें करो। "
"इसकी क्याँ ज़रूरत थि अंकल?" मैने कहा___"मे वहाॅ पऱ पढ़ने जारहा हूॅ नाँ कि किसी कों अपनी अमीरी दिखाने। क्षमा करना अंकलमगर मे चाहता हूॅ कि मे भि उसीतरह कालेज जाऊॅ जैसेसब आम लड़के जाते हें। बाॅकि दफ़्तर केँ कामों केँ लिए मे यहसभी यूज करूॅगा। मुझे खुशी हैं कि आपने मेरेलिए एक् नई गाड़ी लाकर दि। "
"ठीक हैं बेटे जैसी तुम्हारी ख़्वाहिश। " जगदीश अंकल नें कहा___"मुझे यहजान कर अच्छा लगा कि तुम् ऐसीसोच रखते हौ। "
"वैसेराज किस काॅलेज मे एडमीशन लिया हैं तुमने?" अभय चाचा नें कुछ सोचते हुए पूछा।
".मे चाचा जी। " मैने बताया।
"अरेइस काॅलेज मे तोँ नीलम नें भि एडमीशन लियाहुआ हैं। " अभय चाचा चौंके थें___"औऱ निश्चय हि तुम्हारी मुलाक़ात उससे होगी हि वहाॅ। वोँ जब तुम्हें वहाॅ पर्र देखेगी तोँ जरूर बड़े भाई कों बताएगी कि तुम् भि उसी काॅलेज मे पढ़रहे हौ जहाॅ पऱ वोँ पढ़रही हैं। उसकेबाद तुम् पर्र ख़तरा भि हौ सकता हैं बेटे। इस लिए ज़रा सम्हल कर रहना। "
"चिन्ता मत कीजिए चाचा जी। " मैने अजीबभाव सें कहा___"मे तोँ चाहता हि हूॅ कि अब धीरे-धीरे धीरे-धीरे बड़े बापू कों यहपता लगे कि मे किस स्थान पऱ हूॅ। उन्होने तोँ मेरी तलाश मे जानेकब सें अपने आदमियों कों लगाया हुआ हैं। उनके व्यक्ति आज महीने भर सें मेरीखोज मे मुम्बई कि खाक़छान रहे हें। "
"तुम्हें यहसभी केसेपता?" अभय चाचा बुरीतरह चौंके थें।
"मे उनकीहर गतिविधि पऱ नज़र रखताहूॅ चाचा जी। " मैने कहा___"आप् अभि कुछ नहि जानते हें कि मैंने यहाॅ पर्र बैठे बैठे हि उनकी कैसी कैसी खातिरदारी कि हैं। "
"क्याँ मतलब?"अभय चाचा केँ माथे पऱ बल पड़ता चला गय़ा, बोले___"किस खातिरदारी कि बातकर रहे हौ तुम्?"
"यहसभी आपको जगदीश अंकलबता देंगे चाचा जी। " मैने कहा___"फिलहाल तौ मे अभि काॅलेज जारहा हूॅ। आज मेरा पहलादिन हैं। इसलिए मुझे आशीर्वाद दीजिए कि मे अपनेइस सफर पऱ कामयाब होऊॅ। "
"मेरा आशीर्वाद सदा तुम्हारे संग हि रहेगा राज। "अभय चाचा नें कहा।
उसकेबाद हम् सबने नास्ता किया औऱ फिन नास्ता करके मैंने अपनाबैग लिया। सबसे आशीर्वाद लेकर मे निधि कों लेकर बाहर् आँ गय़ा।
मैने गैराज सें अपनी बाइक निकाली औऱ निधि कों पीछे बैठाकर लान सें होतेहुए मेनगेट सें बाहर् निकल गय़ा। निधि मेरेसंग इसलिए थि क्योंकि उसे भि विद्यालय जानां थां। जोकि मेरे काॅलेज केँ रास्ते पर्र हि थां। निधि मेरे पीछे चुपचाप बैठी हुइ थि। वोँ कुछबोल नहि रही थि। यह बड़ी आश्चर्य कि बात थि वरना वो चुप रहने वालों मे सें न् थि।
"तौ मैडमआज चुपचुप सि क्यूं हैं भई?" मैने बाइक चलाते हुए कहा___"वैसे आज तोँ मैडम नें ग़जब हि कर दिया हैं। "
"आप् किससे बातकर रहे हें भाई?" निधि नें कहा।
"किससे कां क्याँ मतलब हैं मैडम?" मैने कहा___"आप् हि सें बातकर रहाहूॅ। "
"अच्छा। " निधि नें कहा___"तोँ मे मैडमहूॅ?"
"औऱ नहि तोँ क्याँ। " मैने कहा___"मेरी गुड़िया किसी मैडम सें कम हैं क्याँ?"
"ओहोऐसा क्याँ?" निधि एकदम सें सरककर मुझसे चिपक गई, बोलि___"मगर आपकीटोन बदली हुई क्यूं लगरही हैं मुझे?"
"क्याँ बताऊॅ गुड़िया?" मैने कहा___"आज सुभह सुभह एक् बिल्ली नें मेरे होठों कों काट लिया थां। "
"क्याँ?????" निधिचीख पड़ी___"आपने मुझे बिल्ली कहा? अपनीजान कों बिल्ली कहा? जाइए नहि बात करना आपसे। हाॅ नहि तोँ। "
"अरे तौ तुम् क्यूं नाराज़ होँ रही होँ?" मैने कहा___"मे तौ उस बिल्ली कि बातकर रहाहूॅ जिसने आज मेरे होठों कों काटा थां। "
"फाॅर काइण्ड योर इन्फोरमेशन। " निधि नें कहा___"आप् जिसे बिल्ली कहरहे हें वोँ मे हि थि। औऱ आपने मुझे बिल्ली कहा। बहोत गंदे हें आप्। हाॅ नहि तौ। "
"ओह माँ गाॅड। " मैने कहा___"तोँ वोँ तुम् थि?"
"अधिक ड्रामें मत कीजिए। " निधि एकाएक मुझसे अलग होकर बाइक मे पीछेसरक गई, बोलि___"मुझे आपसेबात नहि करनीबस। आपने अपनीजान कों बिल्ली कहा हैं। यह तोँ मेरी इनसल्ट हैं, हाॅ नहि तौ। "
"मगर मुझेयह सभी अच्छा नहि लगा गुड़िया। " मैने सहसा गंभीर होकर कहा___"तुम को वैसा नहि करना चाहिए थां मेरेसंग। यह ग़लत हैं। "
मेरीइस बात पऱ निधि कि तरफ सें कोई प्रतिक्रिया नं हुईँ। वोँ एकदम सें चुप थि।
"तूँ जानती हैं न् कि भइया बेहन केँ बीचयह सभी ग़लत होता हैं। " मैने कहा___"मैने उसदिन भि तुझसे कहा थां। फिनआज तूनेऐसा क्यूं किया गुड़िया? तुम कोपता हैं अगरयह सभीमाॅ कों पताचल गय़ा तोँ उन पऱ क्याँ गुज़रेगी?"
इसबार भि निधीकुछ न् बोलीं। मे उसकी चुप्पी देखकर बेचैन व परेशान सां हौ गय़ा। मैंने जल्दी हि मार्ग केँ किनारे पऱ बाइक कों रोंक दि औऱ पीछेपलट कर देखा तौ चौंक गय़ा। निधि कां चेहरा ऑसुओं सें तर थां। उसकी ऑखेंलाल होँ गई थि। मे उसकीइस हालत कों देखकर हिल सां गय़ा। वोँ मेरी बेहन थि, मेरीजान थि। उसकी ऑखों मे ऑसूॅ किसी सूरत मे नहि देख सकता थां मे। मे जल्दी बाइक सें नीचे उतरा औऱ झपटकर उसे अपने सीने सें लगा लिया।
"यह क्याँ हैं गुड़िया?" मैने दुखीभाव सें कहा___"तुँ जानती हैं नं कि मे तेरी ऑखों मे ऑसू नहि देख सकता। फिन क्यूं तूने अपनी ऑखों कों रुलाया? क्याँ मुझसे कोई ग़लती होँ गई हैं? बता नं गुड़िया। "
"यहऑसू तौ अब मेरी तक़दीर मे लिखने वाले हें भाई। " निधि नें भर्राए गले सें कहा__"जब सें होश सम्हाला थां तब सें आप् हि कों देखा थां, आपको हि अपना आदर्श माना थां। फिन हमारे संग वोँ सभीकुछ होँ गय़ा। आप् हमसेदूर यहाॅजॉब करने आँ गए। मगर दोदिल तौ हमेशा रोतेरहे। एक् अपने बेटे केँ लिए तोँ एक् अपने भइया कि मुहब्बत केँ लिए। मे नहि जानती भाई कि कब मेरेदिल मे आपकेलिए उसतरह कां प्यार पैदा होँ गय़ा। फिन मैने आपकी वोँ डायरी पढ़ी। जिसमें आपने अपनी मुहब्बत कि दुखभरी दास्तां लिखी थि। विधी कि बेवफाई सें आप् अंदर हि अंदर कितना दुखी थें यह मुझेउस डायरी कों पढ़कर हि पताचला थां। उसदिन जब हम् दोनो घूमने समंदर गए थें। तब आपने वहाॅ शराबपी औऱ अपनी हालत खराबकर ली थि। आपको मेरे चेहरे मे विधी नज़रआई औऱ आपने अपनेदिल कां सारा गुबार निकाल दिया। मे आपकीउस दशा कों देखकर बहोत दुखी होँ गई थि। आप् तोँ शुरुआत सें हि मेरीजान थें। मुझेउस दिनलगा कि आपको सहारे कि ज़रूरत हैं। मैंने जोँ अब तक अपनेदिल मे उस प्यार कों छुपाया हुआ थां उसे बाहर् लाने कां फैसला कर लिया। मुझे किसी कि परवाह नहि थि कि लोग मेरे बारे मे क्याँ कहेंगे याँ क्याँ सोचेंगे? मुझे तौ बसइसबात कि फिक्र थि कि मेरे भाई दुखी नं रहें। मे अपकी खुशी केँ लिए किसी भि हद तक जाने कों सजधजकर होँ गई थि। इसीलिए उसदिन मैने आपसे अपने प्यार कां इज़हार कर दिया थां। मुझेपता हैं कि भइया बेहन केँ बीचयह सभी नहि होँ सकता इसके बावजूद मैंने यह अनैतिक कदमउठा लिया। आपने भि तोँ बाद मे मुझसे यहीकहा थां न् कि ठीक हैं तुझेही जौ करना हैं कर। मुहब्बत तोँ किसी सें भि होँ सकती हैं। मगरआज फिन आपनेकह दिया कि यहसभी ग़लत हैं। अब तौ ऐसाहाल होँ चुका हैं कि मेरेदिल सें आपकेलिए वोँ चाहतजा हि नहि सकती। मुझेइस बात पर्र रोनाआया भाई कि आप् कभी मेरे नहि हौ सकते। यह देशयह समाजकभी मेरी झोली मे आपको जायजबना कर नहि डाल सकता। तोँ फिनयह ऑसूॅ तोँ अब मेरी तक़दीर हि बनगए नं भाई। इन ऑसुओं पर्र आज तक भला किसी कां ज़ोरचला हैं जोँ मेराचल जाएगा। "
मे निधि कि बातें सुनकर चकितरह गय़ा थां। मुझे उसकी हालत कां एहसास थां। क्योंकि इश्क़ केँ अज़ाब तौ मुझे पहले सें हि हासिल थें। जिनका असरआज भि ऐसा हैं कि दिलहर समय प्यास उठता हैं। मगर मे अपनी बेहन कि इश्क कों केसे स्वीकार कर लेता? मेरीमाॅ एक् आदर्शवादी औऱ उच्च विचारों वाली हैं। उसेअगर यहपता चल गय़ा कि उसकी अपनी औलादें ऐसा अनैतिक कर्मकर रही हें तौ वोँ तोँ जीतेजी मर जाएगी। मुझेसमझ नहि आँ रहा थां कि मे किसे चुनूॅ? अपनी बेहन कि मुहब्बत कों याँ फिनमाॅ कों?
"सभीकुछ वक्त पर्र छोड़दो गुड़िया। " मैने कहा___"औऱ हरसमय यही कोशिश करो कि यहसभी तुम्हारे दिल सें निकलजाए। "
"नहि निकलेगा भाई। " निधि नें रोतेहुए कहा___"मैने बहोत कोशिश कि मगर नहि निकाल सकी मे अपनेदिल सें आपको। ख़ैर जाने दीजिए भाई। आप् परेशान नं होईये। आज केँ बाद आपको शिकायत कां मौका नहि दूॅगी। "
मैने निधि कों ध्यान सें देखा। उसके चेहरे पर्र दृढ़ता केँ भाव दिखाई देनेलगे थें। जैसे उसनेकोई फैंसला कर लिया होँ। मैने उसकी ऑखों सें ऑसू पोछे औऱ फिन वापस बाइक पऱ आँ गय़ा। बाइक स्टार्ट कर मे आगेबढ़ गय़ा। सारे रास्ते निधिचुप रही। मुझे भि समझ नं आया कि मे क्याँ बातें करूॅ उससे। थोड़ी हि देर मे उसका विद्यालय आँ गय़ा। मैनेउसे विद्यालय केँ गेट पर्र उतारा औऱ प्रेम सें उसकेसिर पऱ हाॅथफेर करआगे बढ़ गय़ा। निधि केँ बारे मे सोचते सोचते हि मे काॅलेज पहुॅच गय़ा।
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पुलिस हेडक्वार्टर गुनगुन।
लम्बी चौड़ी मेज केँ उसपार पुलिस कमिश्नर बैठाहुआ थां। जिसकी वर्दी पऱ लगीनेम प्लेट मे उसकानाम कुलभूषण घोरपड़े लिखाहुआ थां। पचास सें पचपन केँ बीच कि ऊम्र कां वो एक् प्रभावशाली ब्यक्तित्व वाला इंसान थां। उसके बाएॅ साइड कि एक् कुर्सी पऱ इंस्पेक्टर रितू बैठी हुईँ थि। बाॅकी पूरा दफ़्तर खाली थां।
रितू नें कमिश्नर सें गुज़ारिश कि थि कि वोँ अपनीबात मात्र उनसे हि करेगी। उन दोनो केँ बीचकोई तीसरा नहि होना चाहिए। कमिश्नर चूॅकि अच्छी तरह जानता थां कि रितू हल्दीपुर केँ बघेल परिवार कि ठाकुर अजय सिंह कि बेटी हैं। इसलिए उसकीइस गुज़ारिश कों उसने स्वीकार कर लिया थां वरना पुलिस कि एक् मामूली सि इंस्पेक्टर रैंक कि ऑफिसर कि इस डिमाण्ड कों स्वीकार करना कदाचित कमिश्नर कि शान मे गुस्ताख़ी करने जैसा होता।
"सो ऑफिसर, अब बताओ कि ऐसी क्याँ खासबात करनी थि तुम्हें जिसके लिए तुमने हमसेऐसी गुज़ारिश कि थि?" पुलिस कमिश्नर नें कहा___"यह तौ हम् समझगए हें कि मामला यहाॅ केँ मंत्री औऱ उसके बेटे कां हैं। मगरयह समझ नहि आया कि अचानक सें तुम्हारा प्लान केसेबदल गय़ा?"
"आप् तोँ जानते हें सर कि हमारा कानून आज केँ टाइम मे बड़े बड़े लोगों केँ हाथ कि कठपुतली बनकररह गय़ा हैं। " रितू नें कहना शुरुआत किया___"मंत्री केँ जिस बेटे नें अपने दोस्तों केँ संगउस मासूम लड़की केँ संग वोँ घिनौना कुकर्म किया थां उसकेलिए उसे कानूनन कोई सज़ामिल हि नहि पाती। क्योंकि उनसब लड़कों केँ बाप इसशहर कि नामचीज़ हस्तियाॅ हें। उनके एक् इशारे पर्र हमें पुलिस केँ लाॅकअप कां तालाखोल करउन लड़कों कों छोंड़ देना पड़ता। हमारे पासभले हि चाहे जितने सबूतव गवाह होतेमगर हम् उन सबूतों औऱ गवाहों केँ बाद भि उन्हें कानूनी तौरकोई सज़ा नहि दिला पाते। उल्टा होतायह कि उन पर्र हाॅथ डालने वालों केँ संग हि कुछ बुरा हौ जाता। वोँ लड़की बग़ैर इंसाफ पाए हि इस दुनियाॅ सें अलविदा होँ जाती। आप् नहि जानते सर, उस लड़की कों ब्लड कैंसर हैं। वो बसकुछ हि दिनों कि मेहमान हैं। उन दरिंदों कों उस पऱ ज़रा सि भि दया नहि आई। आप् उस लड़की कि किस्सा सुनेंगे तौ हिलकर रह जाएॅगे सर। इस छोटी सि ऊम्र मे उसने कितना बड़ा त्याग किया हैं इसकी आप् कल्पना भि नहि कर सकते हें। ऐसे कुकर्मियों कां एक् हि इलाज़ हैं सर___सज़ा एमौत। ऐसे लोगों कों हज़ार बार ज़िंदा करके हज़ारों बार तड़पा तड़पा कर माराजाए तब भि कम हि होगा। इस लिएसर मैनेउन सबकोऐसी हि सज़ा देने कां फैंसला किया हैं। "
"देखो ऑफिसर भावनाएॅ औऱ जज़्बात रखना बहोत अच्छी बात हैं। " कमिश्नर नें कहा___"मगर हमारे कानून मे भावनाओं औऱ जज़्बातों केँ आधार पऱ किसी कां फैंसला नहि हुआ करता। बल्कि ठोस सबूतों औऱ गवाहों केँ आधार पऱ हि फैंसला होता हैं। तुम् कानून कि एक् रक्षक होँ तुम्हें इसतरह कां गैरकानूनी फैसला लेने कां कोईहक़ नहि हैं। किसे सज़ा देनी हैं औऱ केसे देनी हैं यह फैसला अदालत करेगी। तुमने अपनी मर्ज़ी सें यह जौ क़दम उठाया हैं इसकेलिए तुम्हें सस्पेण्ड भि कियाजा सकता हैं। इसलिए बेहतर होगा कि तुम् यहसभी करने कां विचार छोंड़ दो। "
"यहसभी मे आपको बताए बग़ैर भि कर सकती थि सर। " रितू नें कहा___"मगर मैनेऐसा किया नहि। आपकोइस बारे मे बताना अपना कानूनी फर्ज़ समझा थां मैने। वरनाउन लड़कों केँ संगकब क्याँ हौ जातायह कभीकोई जान हि नहि पाता। यह बात आप् भि जानते हें सर कि मंत्री स्वयं भि ग़ैर कानूनी काम धड़ल्ले केँ संग करता हैं औऱ हमारा पुलिस डिपार्टमेंट उसके खिलाफ कोई कार्यवाही करने कि तौ बातदूर बल्कि ऐसा सोचता तक नहि। ऐसाकौन सां अपराध नहि हैं सर जिसे वोँ चौधरी अंजाम नहि देता?मगर आज तक उस पऱ कानून नें हाथ नहि डाला। मात्र इसडर सें कि कहीं उसका क़हर हमारे डिपार्टमेंट पर्र नं बरस पड़े। वाउ सरवाउ, क्याँ कहने हें इस पुलिस डिपार्टमेंट केँ। अरे इतना हि डरते हें उससे तौ पुलिस कि जॉब हि नं करनी थि सर। "
"सभी तुम्हारे जैसा नहि सोचते हें ऑफिसर। " कमिश्नर नें कहा___"औऱ अगर सोचते भि हें तौ बहोत जल्द उनकी वोँ सोचबदल भि जाती हैं। क्योंकि डिपार्टमेंट मे ऐसेकुछ लोग भि होते हें जोँ वर्दी तौ पुलिस कि पहनते हें मगरजॉब उस चौधरी केँ यहाॅ करते हें। उसकीजी हुज़ूरी करते हें। क्योंकि इसी मे वोँ अपनाभला समझते हें। हमेंसभी पता हैं ऑफिसर मगरकुछ कर नहि सकते। अगर करना भि चाहेंगे तौ दूसरे दिन हि हमारे सामने ट्राॅसफर ऑर्डर आँ जाएगा। यहसभी तौ आमबात हौ गई हैं ऑफिसर। "
"कमाल कि बात हैं सर। " रितू नें कहा___"इस तरह मे तोँ कोईकाम हि नहि होँ सकता। पुलिस कि अकर्मण्ड्यता सें नुकसान किसका होगा?उन मासूम लोगों कां जोँ दिनरात अपने पत्नि बच्चों केँ लिएखून पसीना बहाते हें, इसकेबाद भि भरपेट वोँ अपने परिवार कों खानां नहि खिला पाते। चरस औऱ अफीम जैसे ज़हर कां हरदिन वोँ इसीतरह शिकार होते रहेंगे। ऐसे हि नं जाने कितनी लड़कियों कां रेप होता रहेगा। औऱ यहसभी कुकर्म करने वाले अपनीहर जीत कां जश्न मनाते रहेंगे। "
"कानून नें अपनी ऑखों पर्र पट्टी बाॅधी हुइ हैं तुम् भि ऑखों पऱ पट्टी बाॅधलो। " कमिश्नर नें कहा___"इसी मे इस डिपार्टमेंट कां भला हैं ऑफिसर। "
"हर्गिज़ नहि सर। " रितू केँ मुख सें शैरनी कि भाॅति गुर्राहट निकली। एक् झटके सें वो कुर्सी सें खड़ी हौ गई थि, बोलि___"मे इतनी कमज़ोर नहि हूॅ जोँ ऐसे गीदड़ों सें डर जाऊॅगी। आपको अपनी चिंता हैं औऱ इस डिपार्टमेंट कि तौ करते रहिए चिंता। मगर मे चुप नहि बैठूॅगी सर। मे उन हराम केँ पिल्लों कों ऐसी सज़ा दूॅगी कि फरिश्तों कां भि कलेजा हिल जाएगा। "
"बिहैव योरसेल्फ ऑफिसर। " कमिश्नर नें शख्तभाव सें कहा___"तुम् कानून कों अपने हाथों मे नहि लेँ सकती। "
"आपने मजबूर कर दिया हैं सर। " रितू नें आहतभाव सें कहा___"बड़ी उम्मीद केँ संगआई थि आपकेपास। सोचा थां कि आप् मेरी सहायता करेंगे। मगर आप् तौ.ख़ैर जाने दीजिए सर। मुझेबस एक् प्रश्न कां जवाब चाहिए आपसे। क्याँ आप् नहि चाहते हें कि ऐसे लोगों कों सज़ा मिले?"
"बिलकुल चाहते हें ऑफिसर। " कमिश्नर नें कहा___"मगर हमारे चाहने सें क्याँ होता हैं? हम् तौ बस मजबूर कर दिये जाते हें कुछ न् करने केँ लिए। "
"अगर आप् सच मे चाहते हें सर। " रितू नें कहा___"तौ फिन मेरासंग दीजिए। आपको करनाकुछ नहि हैं। बस इतना करना हैं कि अगरऊपर सें कोईबात आए तोँ आप् यही कहेंगे कि विधीरेप केस पर्र कोई कार्यवाही नहि कि गई हैं। सबूत केँ तौर पऱ आप् उन्हें फाइलें भि दिखा सकते हें। मे आपको यकीन दिलाती हूॅसर कि आप् पर्र औऱ आपकेइस डिपार्टमेंट पऱ किसी भि तरह कि कोईबात नहि आएगी। क्योंकि मेरेपास उस मंत्री केँ ऐसेऐसे सबूत हें कि वोँ चाहकर भि हमारा कुछ बुरा नहि कर सकता। आप् बस वोँ करते जाइये जौ मे कहूॅ। फिन आप् देखिए कि केसे मे शहर सें इस गंदगी औऱ इस अपराध कां नामो निशान मिटाती हूॅ। "
"केसे सबूत हें तुम्हारे पास?" पुलिस कमिश्नर चौंका थां।
"बस आप् यह समझिए सर कि उस मंत्री कि औऱ उस जैसे लोगों कि जानअब मेरी मुट्ठी मे हैं। " रितू नें कहा___"वोँ सभी अपनेहाथ पांव चलाना तौ चाहेंगे मगरचला नहि पाएॅगे। "
"अगरऐसी बात हैं ऑफिसर तोँ हम् यकीनन तुम्हारे संग हें। " कमिश्नर नें एकाएक गर्मजोशी सें कहा___"तुमने हमें पहले क्यूं नहि बताया कि तुम्हारे पासइन लोगों केँ खिलाफ़ इतने पुख़्ता सबूत हें?"
"आप् मेरीबात हि कहाॅसुन रहे थें सर। " रितू नें सहसा मुस्कुरा कर कहा__"बस जाने क्याँ क्याँ कहेजा रहे थें। "
"ओह साॅरी ऑफिसर। " कमिश्नर हॅसा__"तौ अब बताओ क्याँ करना हैं आगे?"
"मैंने तोँ पहले हि करना शुरुआत कर दिया थां सर। " रितू नें कहा___"बस आपकोइस बात कि जानकारी देना चाहती थि। अब तौ आप् बस आहिस्ता यहीं पर्र बैठकर न्यूज आने कां इंतजार कीजिए। "
"ओकेऐज योरविश। " कमिश्नर नें कंधे उचकाए___"एण्ड हमें बेहद खुशी हुइ कि तुम् एक् ईमानदार औऱ बहादुर ऑफिसर हौ। बेस्ट ऑफलक। "
"थैंक्यू सर। " रितू नें कहा औऱ फिन कमिश्नर कों सैल्यूट कर वो दफ़्तर सें बाहर् निकल गई।
बाहर् आकर वो अपनी पुलिस जिप्सी मे बैठकर हैडक्वार्टर सें बाहर् निकल गई। उसके चेहरे पर्र इससमय खुशी औऱ जोश दोनो हि भाव गर्दिश कररहे थें। मार्ग पऱ उसकी जिप्सी हवा सें बातें करतेहुए एक् फोन स्टोर कि दुकान पऱ रुकी। मगर फिन जाने क्याँ सोचकर उसनेफिन सें जिप्सी कों आगे बढ़ा दिया।
आधे घंटे सें कम वक्त मे हि वो एक् घर-मकान केँ सामने आकर रुकी। उसने अपनी पाॅकेट सें अपना आईफोन निकाला औऱ उसमें कोई नंबर डायल किया।
"बाहर् आओ। " उसनेकाल कनेक्ट होते हि कहा, औऱ फिन बिनाउधर कां जवाब सुनेकाल कटकर दिया। थोड़ी देरबाद हि उसकेपास एक् व्यक्ति आकर खड़ा हौ गय़ा। वोँ व्यक्ति यहीकोई पच्चीस याँ तीस कि उमर केँ आसपास कां रहा होगा।
"जी मैडम कहिए क्याँ आदेश हैं?" उस व्यक्ति नें बड़ी शालीनता सें कहा।
"एक् कामकरो अगर यहाॅपास मे कहींकोई फोन स्टोर होँ तौ एक् फोन मोबाइल खरीदकर लें आओ। " रितू नें जेब सें दो हज़ार केँ पाॅचनोट निकाल करउसे देतेहुए कहा__"औऱ एक् नईसिम भि। कोशिश करना कि सिमऐसे हि मिलजाए औऱ जल्दी एक्टिवेट भि होँ जाए। तुम् समझरहे हौ न्?"
"जी मे समझ गय़ा मैडम। " व्यक्ति नें सिर हिलाते हुए कहा___"आप् फिक्र मत कीजिए। यहींपास मे हि एक् फोन स्टोर हैं। मे अभि दोनो चीज़ें लेकरआता हूॅ। "
"ठीक हैं। " रितू नें दोनोट औऱ उसकीतरफ बढ़ाए___"इन्हें भि लें लो। अगर कम पड़ें तौ लगा देना नहि तौ स्वयं रख लेना। "
"ठीक हैं मैडम। " व्यक्ति नें खुश होकर कहा___"मे अभि लेकरआता हूॅ। आप् यहीं पऱ इंतजार कीजिए। "
"ओकेठीक हैं। " रितू नें कहा।
वोँ व्यक्ति हवा कि तरह वहाॅ सें गायब हौ गय़ा। रितूउसे यूॅ तेजी सें जातेदेख बरबस हि मुस्कुरा पड़ी। मार्ग केँ किनारे जिप्सी कों खड़ेकर वो जानेकिन ख़यालों मे खो गई। चौंकी तबजबउस व्यक्ति नें वापसआकर उसे आवाज़ दि।
"यह लीजिए मैडम। " व्यक्ति नें एक् छोटा सां थैला पकड़ाते हुए कहा___"इसमें सैमसंग कां एक् फोन हैं औऱ एक् सिम भि। दुकानदार नें कहा हैं कि आधे घंटे मे सिम चालू होँ जाएगी"
"ओह वैरीगुड। " रितू नें कहा___"एण्ड थैक्स। अबजाओ तुम्। "
"अच्छा मैडम। " व्यक्ति नें सलामबजा करकहा औऱ चला गय़ा।
रितू थैले कों अपनेबगल सें रखकर जिप्सी कों यू टर्न दिया औऱ आगेबढ़ गई। अब उसकी जिप्सी कां रुखशहर सें बाहर् कि तरफ थां।
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मे काॅलेज कि पार्किंग मे अपनी बाइक कों खड़ीकर काॅलेज केँ अंदर कि तरफबढ़ गय़ा। यह मुम्बई कां सबसे बड़ा औऱ टाप क्लास कां काॅलेज थां। मुझेपता थां काॅलेजों मे रैगिंग होनाआम बात हैं। इसलिए मे स्वयं भि इसकेलिए रेडी थां। काॅलेज केँ अंदर बहुत सारे स्टूडेंट्स थें। मगर मे यहदेख कर थोडा हैरान हुआ कि एक् स्थान बहुत भीड़ सि थि।
मे समझ तोँ गय़ा कि वोँ भीड़किस बात केँ लिए थि। मुमकिन थां कि वहाॅ पर्र सीनियर लोग किसी जूनियर कि रैगिंग लें रहे होंगे। मगर हैरानी कि बातयह थि कि इतनी भीड़ क्यूं थि वहाॅ पऱ। उत्सुकतावश मे उसीतरफ बढ़ता चला गय़ा।
थोड़ी हि देर मे मे उस भीड़ केँ पास पहुॅच गय़ा। मगर भीड़ कि वजह सें समझ नहि आया कि भीड़ केँ अंदर क्याँ चलरहा हैं? तभी मेरे कानों मे ज़ोरदार चीख सुनाई पड़ी। यह किसी लड़की कि चीख़ थि। ऐसालग रहा थां जैसे उसकेसंग कोई ज़ोर ज़बरदस्ती कि जारही थि। मेरारोम रोम खड़ा हौ गय़ा। किसी कमज़ोर लड़की पर्र ज़ोर ज़बरदस्ती? मुझसे यहसहा न् गय़ा। मे एकदम सें उस भीड़ कां हिस्सा बने लोगों कों खींचकर दूर हटाने लगा। बड़ी मुश्किल सें मे उन लोगों केँ बीच सें निकलते हुए अंदर कि तरफ पहुॅचा। अंदर कां दृष्य ऐसा थां कि मेरा दिमाग़ खराब हौ गय़ा।
अंदरकोई लड़का किसी लड़की केँ ऊपर चढ़ाहुआ थां। नीचे पड़ी लड़की बुरीतरह रोतेहुए छटपटा रही थि औऱ चीखरही थि। वोँ लड़काउस लड़की केँ कपड़े फाड़ने पऱ तुलाहुआ थां। उसके चारोतरफ खड़ेकुछ लड़के हॅसरहे थें। मुझे लड़की कां चेहरा नज़र नहि आँ रहा थां। मगरयह दृष्य देखकर मेरे अंदर गुस्से कि आगधधक उठी।
मैने ज़ोर सें एक् लातउस लड़के केँ पेट केँ बगल मे मारी। वोँ उस लड़की सें हटकरतथा लहराते हुएहुए भीड़ केँ पास गिरा। चारोतरफ फैली हुई भीड़ एकदम सें छितर बितर हौ गई। मैने जिसेलात मारी थि उसकेमुख सें ज़ोरदार चीख निकल गई थि। मगर वो जल्द सें उठकर मेरीतरफ पलटा।
"किसकी मौतआई हैं?" वोँ लड़का गरजते हुए बोला___"किसकी इतनी हिम्मत हुईँ कि मुझे मारा?आशू राना पऱ हाथ उठाया?"
"उस भीड़ कि तरफ क्याँ देखरहा हैं?" मैने कहा___"यह सभी तोँ नामर्द हें। नपुंषक लोंग हें यह। मात्र तमाशा देख्ना जानते हें। तुम्हे कुत्ते कि तरह मारने वाला मर्द तौ इधर खड़ा हैं। "
"तूने मुझे मारा?"आशू राना नें अजीबभाव सें ऑखें नचाते हुए कहा___"तुम्हे पता हैं मे कौनहूॅ? अबे मेरे बारे मे जान जाएगा न् तोँ मूत निकल जाएगा तेरा, समझा क्याँ?"
"चलबता फिन। " मे उसकीतरफ बढ़ने लगा___"बता कौन हैं तुँ? मे भि तौ देखूॅ कि तेरे बारे मे जानकर मेरामूत निकलता हैं कि नहि। चलबता जल्द। "
"यह समझारे इसे। "आशू राना नें इधरउधर देखते हुए कहा___"इसे समझाओ रेकोई। यह सालाआशू राना कों नहि जानता। ओ रहमान समझाबे इसे कि मे कौनहूॅ? इसेबता कि मेरा बाप कौन हैं?"
"क्यूं तेरे क्याँ बहोत सारे बाप हें जोँ यहबोल रहा हैं कि तेरा बाप कौन हैं?" मे उसके लगभग पहुॅच गय़ा थां। झपटकर उसकी गर्दन दबोचली मैने। अपनी गर्दन दबोचे जाने पर्र वो छटपटाने लगा। मुझ पऱ अपने दोनो हाॅथों सें वार करनेलगा।
"ओए खड़े क्याँ हौ सालो। " उसने तिरछी नज़र सें अपने साथियों कि तरफ देखते हुए कहा___"मारो इसे। इसनेमुझ पऱ हाथ उठाया हैं। इसकाकाम तमाम करना हि पड़ेगा अब। "
चारोतरफ खड़े उसके दोस्त एक् संग मेरीतरफ दौड़ पड़े। मैंने आशू राना कि गर्दन कों छोंड़ कर एक् पंच उसकी नाॅक पऱ ठोंक दिया। वो बुरीतरह चीखते हुए जमीन पऱ गिर गय़ा। इधर चारोतरफ सें जैसे हि उसके मित्र मेरेपास आए तौ मे एकदम सें पोजीशन मे आँ गय़ा। जैसे हि एक् मेरीतरफ बढ़ा मैनेघूम करबैक किक उसके चेहरे पऱ रसीदकर दि। वो उलटकर धड़ाम सें गिरा। दूसरे केँ हाॅथ मे मुझे चाकूनजर आया। उसने चाकू वाला हाॅथ घुमा दियामुझ पऱ। मैने बाएॅहाथ सें उसकेउस वार कों रोंका औऱ दहिने हाथ सें एक् मुक्का उसकी नाॅक मे जड़ दिया। उसकेनाक सें भल्ल भल्ल करकेखून बहनेलगा। बुरीतरह चीखते हुए वो भि झूलते हुएगिर गय़ा। मे जल्दी पलटा औऱ जल्द सें नीचेझुक भि गय़ा। अगर नहि झुकता तौ तीसरे वाले कां हाॅकी कां डंडा सीधा मेरेसिर पर्र लगता। मगर मे ऐन वक़्त पऱ झुक गय़ा थां। हाॅकी कां वार जैसे हि मेरेसिर केँ ऊपर सें निकल चुका तौ मे सीधा होकर उछलते हुए उसकीपीठ पर्र एक् किकजमा दि। वो मुह केँ बल जमीन चाटने लगा। फिन तौ जैसे वहाॅ पर्र उन सबकी चीखों कां हंगामा गूॅजने लगा। कुछ हि देर मे आशू राना केँ सब दोस्त जमीन पर्र पड़े बुरीतरह कराहरहे थें। मे चलतेहुए आशू राना केँ पास गय़ा औऱ झुककर उसका कालर पकड़कर उठा लिया।
"अब एक् बात मेरी भि सुन तूँ। " मैने ठंडे स्वर मे कहा___"तूँ चाहे यमराज कां भि बेटा होगा नं तब भि मे तुम्हे ऐसे हि धोऊॅगा। इसलिए आज केँ बाद किसी लड़की केँ संगकुछ बुरा करने कि सोचना भि मत। अबदफा होँ जा यहाॅ सें। आज केँ लिए इतना बहुत हैं मगर दूसरी बार तुँ सोच भि नहि सकता कि मे तेरा औऱ तेरेइन साथियों कां क्याँ हाल करूॅगा। "
आशू राना केँ चेहरे पऱ डर दिखाई दिया मुझे। वोँ मेरे छोंड़ते हि वहाॅ सें भाग लिया। उसके पीछे उसकेसब मित्र भि भागलिए। कुछदूर जाकरआशू राना रुका औऱ फिनपलट कर बोला___"यह तूनेठीक नहि किया। इसका अंजाम तोँ तुम्हे भुगतना हि पड़ेगा। "
"अबेजा। " मे दौड़ा उसकीतरफ तोँ वोँ सरपट भागा बाहर् कि तरफ।
उन लोगों केँ जाने केँ बाद मे वापस पलटा। मैनेउस लड़की कि तरफ देखा। वोँ दूसरी तरफसिर झुकाए खड़ी थि। उसका दुपट्टा मेरे सामने कुछ हि दूरी पर्र जमीन मे पड़ाहुआ थां। मे आगेबढ़ कर उसका पीलेरंग कां दुपट्टा उठाया औऱ उस लड़की कि तरफबढ़ गय़ा।
"यह लीजिए मिस। " मैने पीछे सें उसे उसका दुपट्टा देतेहुए बोला___"आपका दुपट्टा। "
"जी शुक्रिया आपका। " उसने मेरे हाॅथ सें दुपट्टा लिया, औऱ फिन मेरीतरफ पलटते हुए बोलीं____"अगर आप् नहि आते तौ वोँ नं जाने मेरे सां.। "
उसका वाक्य अधूरा रह गय़ा। मुझ पऱ नज़र पड़ते हि उसकीऑखे फैल गई। वो आश्चर्यचकित भाव सें मुझे देखने लगी। मेरा भि हालकुछ वैसा हि थां। जैसे हि वो मेरीतरफ पलटी तौ मेरी नज़र उसके चेहरे पर्र पड़ी। औऱ मे उसका चेहरा देखकर उछल हि पड़ा थां।
"नी.लम???" मेरेमुख सें लरजता हुआ स्वर निकला।
"रा.ज। " उसकेमुख सें अविश्वसनीय भाव सें निकला।
"ओह साॅरी। " मैने एकदम सें स्वयं कों सम्हालते हुए कहा___"आपका दुपट्टा। "
मैनेउसे उसका दुपट्टा पकड़ाया औऱ जल्दी पलट गय़ा। मे उसकेपास रुकना नहि चाहता थां। मे तेजतेज चलतेहुए उस स्थान सें दूरचला गय़ा। जबकि नीलमबुत बनी वहीं पऱ खड़ीरह गई।
भाग हाज़िर हैं दोस्तो,,,,,,,,,,
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