♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
Wating
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
Shubham bhay एक gujarish h aapse_____
Flashback jaruri too h kyo की usse ateet mai क्या hua thaa yeh jaanne ko milega lekin iss flashback ko ap detail mai na likh krr short mai likhiye। Baaki kahani ko present mai chalne dijiye। Present mai kahani kafi shandaar chl rahi h.
yeh bus मेरा अपना maanna h bhay baaki ap ko jyada क्या kah sakta ho ap khud एक suljhe huye writer haen। iss site पर मेरे कुछ favrt writer haen jinme aapka nam bi shaamil hai____
Next update kaa intjar h bhai_____
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
♡ एक् नया संसार ♡
भाग.《 36 》
अब तक,,,,,,,,,
रितू हरिया काका कि बात पऱ मुस्कुराती हुइ तहखाने सें बाहर् निकल गई। जबकि रितू केँ जाते हि काका नें तहखाने कां गेटबंद किया औऱ फिन अपने दोनो हाॅथ मलतेहुए रोहित मेहरा केँ पास पहुॅचा।
"कां रे मादरचोद। " काका नें कहा___"तोरे केतनी अम्मा हैं अउर केतने बाप हें?"
"तमीज़ सें बातकरो ओके। " रोहित डर तौ गय़ा थां मगर फितरत केँ चलतेबोल हि गय़ा थां।
"तोरीमाॅ कि बुर मारूॅ ससुरे केँ। " काका केँ हाॅथ मे जौ मोटा सां लट्ठ थां उसने घुमाकर रोहित कि टाॅग मे ज़ोर सें धमक दिया। रोहित दर्द सें बुरीतरह चीखने चिल्लाने लगा। काका तोँ बहोत देर सें सब्र किये बैठा थां। उसेइस बात कां बेहद क्रोध भि थां कि इन लोगों नें रितू उल्टा सीधा भि बोला थां।
हरिया काकाउन चारों पर्र पिल पड़ा। फिन तौ तहखाने मे बस रोने औऱ चीखने कि आवाज़ें हि आँ रही थि। हरिया काकातब तक उन सबकी धुनाई करतारहा जब तक कि उसकापेट न् भर गय़ा थां। धुनाई करने केँ बाद वो उन चारों कों अधमरी हालत मे छोंड़ कर तहखाने सें बाहर् चला गय़ा औऱ बाहर् सें तहखाने कों लाॅककर दिया।
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अबआगे,,,,,,,,,
फ्लैशबैक अबआगे______
गौरी अभि यहसभी बता हि रही थि कि सहसाडोर बेल कि आवाज़ सें सबका ध्यान भंग होँ गय़ा। डोरबेल कि आवाज़ सें हि उन सबकोयह एहसास हुआ कि टाइम कितना हौ चुका थां। वरना ड्राइंगरूम मे रखे सोफों पऱ बैठेहुए उन्हें वक्त कां आभास हि नं हुआ थां। वोँ सभी तोँ गौरी केँ द्वारा सुनाए जारहे अतीत केँ किस्सों मे हि डूबेहुए थें।
"लगता हैं कि जगदीश भइया साहब आँ गए हें। " गौरी नें गहरी साॅस लेतेहुए कहा__"जा गुड़िया द्वार (दरवाज़ा) खोलदे। "
"जीमाॅ। " निधी नें भि गहरी साॅस लेकरकहा औऱ सोफे सें उठकर मुख्य दरवाज़ा कि तरफबढ़ गई।
"रात केँ नौबजगए हें। " गौरी नें सामने दीवार पर्र लगी घड़ी पर्र देखते हुए कहा___"इस कथा केँ चक्कर मे रात कां खानां बनाना भि रह गय़ा अभय। चलो यह किस्सा अबकल बताऊॅगी। अभि खानां बनालूॅ फटाफट। जगदीश भइया साहब कों दसबजे तक खानां खाकरसो जाने कि आदत हैं। "
"ठीक हैं भाभी आप् जाइए। "अभय नें गंभीर भाव सें कहा थां। वोँ अभि भि उन अतीत केँ दृष्यों मे खोयाहुआ लगा। उसकेऐसा कहने पर्र गौरीउठ कर किचेन कि तरफबढ़ गई।
तभी ड्राइंगरूम मे जगदीश ओबराय दाखिल हुआ। उसके पीछे पीछे हि निधी भि आँ गई। जगदीश ओबराय कि नज़रअभय सिंह पऱ पड़ी तौ उसनेबगल सें रखे सोफे पऱ बैठे विराज कि तरफ देखा।
"यह मेरेअभय चाचा जी हें अंकल। " विराज नें जगदीश कां आशयसमझ कर कहा___"आज सुभह लगभग ग्यारह बजे केँ आसपास आए हें। "
"ओहयह तौ बहोत अच्छी बात हैं। " जगदीश ओबराय केँ चेहरे पर्र खुशी केँ भाव नुमायां हुए, फिन उसनेअभय कि तरफ देखते हुए कहा___"केसे हें भइया साहब?"
अभय नें हल्की मुस्कान केँ संग पहलेउसे नमस्कार कियाफिन बोला___"जी मे ठीकहूॅ आप् सुनाइये। "
"मे तोँ बहोत ज़्यादा ठीकहूॅ भइया साहब। " जगदीश नें हॅसकर कहा___"जब सें यह बच्चे औऱ गौरी बेहन यहाॅआए हें तब सें ज़िंदगी खुशहाल लगनेलगी हैं। वर्ना इतने बड़े बॅगले मे नौकर चाकर रहने केँ बाद भि अकेलापन हि महसूस होता थां। "
"ऐसा क्यूं कहते हें आप्?" अभय सिंह चौंका थां___"इसके पहले अकेलापन क्यूं महसूस होता थां आपको?"
"अरे भइयाअब मेरे सिवा मेराकोई थां हि नहि तोँ अकेलापन महसूस तोँ होगा हि। " जगदीश नें कहा___"नसीब औऱ किस्मत बहोत अजीब होते हें। अच्छा खासा परिवार हुआ करता थां मेरा। मगर फिनसभी कुछ ख़त्म होँ गय़ा। धन दौलत तौ नसीब सें बहोत मिली हमेंमगर उस दौलत कों भोगने वालों कों नसीब नें छीन लिया हमसे। जी जान सें प्रेम करने वाली पत्नि थि, वोँ भि हमें छोंड़ करइस फानी दुनियाॅ कों अलविदा कह दिया। एक् बेटा औऱ बहू थें तौ वोँ भि चलेगए हमें छोंड़ कर। बसतब सें अकेले हि थें। मगरफिन शायद ईश्वर कों हमारे अकेलेपन पऱ तरस आँ गय़ा औऱ उसने हमारे उजड़े हुए गुलशन मे फिन सें बहार लाने केँ लिएइन सबकोभेज दिया। अब लगता हैं कि अपना भि कोई हैं। "
अभय सिंह जगदीश ओबराय कि बातें सुनकर हैरान थां। उसेयाद आया कि विराज नें उससेकहा थां कि यहसभी अब अपना हि हैं। तौ इसका मतलब वोँ सहीकह रहा थां। यानी मेरा भतीजा अब करोड़ों कि सम्पत्ति कां मालिक हैं? अभय सिंह कों यकीन नहि होँ रहा थां मगर हक़ीक़त तोँ उसके सामने हि थि इसलिए यकीन करना हि पड़ाउसे। वो सोचने लगा कि उसका बड़ा भइया यानीअजय सिंह तोँ अक्सर यही कहता थां कि विराज किसी होटल याँ ढाबे मे कप प्लेट धोता होगा। मगर भला वोँ भि केसेयह कल्पना कर सकता थां कि विराज आज केँ वक्त मे कितना बड़ा व्यक्ति बन चुका थां। वो चाहे तोँ चुटकियों मे उसे औऱ उसकी पूरी प्रापर्टी कों खरीद सकता थां।
"यहसभी ईश्वर कि अजब लीला हि हैं भइया साहब। "फिन अभय सिंह नें गहरी साॅस लेकर कहा___"वोँ जोँ कुछ भि करता हैं बहोत सोचसमझ कर करता हैं। किस इंसान कब कहाॅ औऱ किस चीज़ कि ज़रूरत होती हैं वोँ उसेउस स्थान पहुॅचा हि देता हैं। हम् नासमझ होते हें जोँ यहसमझ बैठते हें कि ईश्वर नें हमें दिया हि क्याँ हैं?"
"हाॅयह बात तोँ हैं। " जगदीश नें कहा___"औऱ सच पूछो तोँ ईश्वर कि इस लीला सें मे खुशहूॅ भइया साहब। पहले अवश्य उससे शिकायतें थि कि उसने मेरासभी कुछछीन लियामगर आजकोई शिकायत नहि हैं। यहसभी मुझे अपना समझते हें। मुझे वैसे हि चाहते हें जैसेकोई सगा अपनों कों चाहता हैं। यूॅ तोँ इस दुनियाॅ मे अपने भि अपनों केँ लिए नहि होते। मगर कोई अजनबी भि ऐसामिल जाता हैं जोँ अपनों सें कम नहि होता। चार दिन कां जिंदगी हैं, इसे सबकेसंग खुशी खुशीजी लो तौ आत्मा तृप्त हौ जाती हैं। क्याँ लेकर हम् इस दुनियाॅ मे थें औऱ क्याँ लेकर जाएॅगे? यहधन दौलत तौ सभी यहींरह जाएगी मगर हमारे कर्म अवश्य हमारे संग जाएॅगे। "
"आप् ठीक कहते हें भइया साहब। "अभय नें कहा___"आप् तोँ वैसे भि किसी फरिश्ते सें कम नहि हें वरनाकौन ऐसा हैं जोँ किसी ग़ैर कों अपनासभी कुछदे दे?"
"अगर मैने अपनासभी कुछ विराज बेटे कों दे दिया हैं तौ उससे मुझे मिला भि तोँ बहोत कुछ हैं भइया साहब। " जगदीश नें कहा___"मुझे वोँ मिला हैं जिसके लिए मे वर्षों सें प्यास रहा थां। मे किसी अपने केँ लिए तड़परहा थां, तथा अपनों केँ बीचरह कर जौ खुशी मिलती हैं मे उसकेलिए तरसरहा थां। आज मेरेपास यहसभी खुशियाॅ हैं भइया साहब औऱ यहसभी मुझे किसी रिश्वत केँ चलते नहि मिला हैं। बल्कि मेरे नसीब सें मिला हैं। मे तौ विराज कों बहोत पहले सें अपनी सारी प्रापर्टी कां वारिस बनाना चाहता थां मगरयह हि मनाकर रहा थां। एक् अच्छे व खुद्दार इंसान कां बेटा जौ थां। किसी कि ऐसी मेहरबानी कों कबूल केसेकर सकता थां यह?मगर मे चाहता थां कि विराज हि मेरा वारिस बने। क्योंकि इसके चेहरे पऱ हि मुझे अपने बेटे कि झलक दिखती थि। अगरयह मेरीबात नहि मानता तौ मे इसके सामने अपनी झोली फैलाकर भीख भि माॅग लेता भइया साहब। "
अभय सिंह जगदीश कि यहसभी बातें सुनकर चकितरह गय़ा। उसे यकीन नहि होँ रहा थां कि दुनियाॅ कोई इंसान ऐसा भि होँ सकता हैं। ख़ैरइन दोनों केँ बीचऐसी हि बातें होती रहीं। कुछ वक़्त बाद हि गौरी नें सबको खाने कां कहा। सभी डायनिंग हाल मे आँ गए औऱ कुर्सियों मे बैठगए। गौरी नें सबको खानां सर्व किया। सबके खाने केँ बाद गौरी नें भि खानां खाया औऱ फिनसभी अपने अपने कमरे मे सोने केँ लिएचल दिये। रास्ते मे चलते वक़्त विराज सें गौरी नें पूछा___"तेरा काॅलेज कब सें शुरुआत हौ रहा हैं??"
"कल सें माॅ। " विराज नें कहा___"कल सुभह मुझे थोडा जल्दउठा दीजिएगा। ऐसा नं हौ कि पहलेदिन हि मे लेट हौ जाऊॅ। "
"चल ठीक हैं। " गौरी नें कहा___"मे तुझेही भोर केँ टाइम पऱ हि उठा दूॅगी। अबजा आहिस्ता सो जानां। "
गौरी केँ कहने पऱ विराज अपने कमरे कि तरफबढ़ गय़ा। उधर गौरी भि पलटकर अपने कमरे कि तरफचली गई।
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वर्तमान अबआगे______
हरिया काका कों उन चारों कि खातिरदारी करने कां कहकर रितू तहखाने सें बाहर् आकर सीधा अपने कमरे मे चली गई थि। थोड़ी हि देर मे हरिया काका कि पत्नि बिंदिया रितू केँ कमरे मे खानां खाने कों पूछने आई तोँ रितू नें मनाकर दिया। बिंदिया केँ जाने केँ बाद रितू नें दरवाजा बंद किया औऱ बेड पर्र जाकरलेट गई। बहुतदेर तक वो इस सबके बारे मे सोचती रही। फिन जानेकब उसकीऑख लग गई।
सुभह उसकीऑख उसकेफोन मोबाइल केँ बजने पऱ खुली। उसने अलसाए हुए सें फोन कि स्क्रीन पऱ फ्लैश कररहे नम्बर कों देखा तौ उसका साराआलस लम्हा भर मे हि दूर होँ गय़ा। संग हि उसके होठों पऱ एक् मुस्कान तैर गई।
"हैलो। "फिन उसनेकाल रिसीव करते हि कहा।
"." उधर सें कुछकहा गय़ा।
"वैरीगुड। " रितू नें कहा___"सारी डिटेल मुझे सेन्ड करदो। एण्ड थैंक्स। "
रितू नें इतनाकह करकाल कटकर दि। उसके चेहरे पऱ एक् मुस्कान थि। वो जल्दी हि बेड सें उठकर बाथरूम कि तरफचली गई। लगभगआधे घंटेबाद रितू ड्राइंगरूम मे सोफे पऱ बैठी काॅफी पीरही थि। बिंदिया नें हल्का फुल्का नास्ता बना दिया थां उसकेलिए। रितू नास्ता औऱ बहुत पीकरकर केँ बाहर् निकल गई। लोहे वालेगूट केँ पास शंकर औऱ हरिया काका बंदूख लिएमिल गएउसे।
"क्याँ हाल समाचार हैं काका?" रितू नें हरिया काका कि तरफदेख कर कहा___"उन लोगों कि खातिरदारी मे कोईकमी तोँ नहि कि नं आपने?"
"अइसनहोई सकत हैं कां बिटिया?" हरिया काका नें मुस्कुरा कर कहा___"हम् ताऊ ससुरन अइसन पेलेन हैं कि उन सबकी अम्मा चुद गई हैं। "
"काकाकभी कभी आप् बहोत गंदाबोल जाते हें। " रितू नें बुरा सां मुह बनाया___"आप् यह भि नहि देखते हें कि मे आपकी बेटी जैसीहूॅ औऱ आप् भि तोँ मुझे अपनी बेटी जैसी हि मानते हें न्? फिनभला आप् केसे मेरे सामने ऐसे गंदे शब्दबोल सकते हें?"
"हमकामाफ करदो बिटिया। " हरिया नें जल्दी हि दोनो हाॅथ जोड़ लिये___"ई ससुरी जबान हमरे काबू नं रह पावत हैं। अउर हमहु सरवाजोश जोशमा बोल हि जात हें। बस अबकी बारीमाफ करदो बिटिया। अगली बारी सें अइसन गलती नां होई। हमारशपथ। "
"कोईबात नहि काका। " रितू नें कहा__"अब बताओउन लोगों कां हाल कैसा हैं अब?"
"कलरात ता खातिरदारी करेरहे हम् उनकीऊके बाद हम् अभि तक नाँ गए हें। " हरिया नें कहा___"पर्र ईता पक्का हैं बिटिया कि ऊ ससुरन केँ हाल बेहाल होईगा होईअब तक। "
"चलिएचल कर देखते हें एक् बार। " रितू नें कहा औऱ पलट वापस अंदर कि तरफ जानेलगी। हरिया भि उसके पीछे पीछेचल दिया। थोड़ी देरबाद हि वोँ दोनो तहखाने कां दरवाजा खोलकर अंदर पहुॅचे। अंदर पहुॅचते हि रितू औऱ हरिया कि नाॅक मे बदबू भरतीचली गई।
दोनो नें जल्द सें अपनेमुह पऱ रुमाल लगाली। अंदर कां दृश्य बड़ा हि अजीब थां। एक् तरफ कि दीवार पर्र चारो लड़के बॅधेहुए बेहोशी कि हालत मे सिर नीचे झुलाए स्वयं भि झूल सें रहे थें। दूसरी तरफ कि दीवार मे दो बंदूखधारी थें जोँ सूरज केँ फार्महाउस पऱ गार्ड थें।
"काकाइन लोगो नें तोँ यहाॅमहक फैलारखी हैं?" रितू नें कहा___"क्याँ इतनी अधिक खातिरदारी कि हैं आपनेइन सबकी?"
"अरे नां बिटिया। " हरिया कह उठा__"इनकी खातिरदारी ता हिसाबै सें भईरही। "
"तौ फिनयह महक क्यूं हैं यहाॅ?" रितू नें कहा___"ऐसा लगता हैं जैसेइन लोगों कां टट्टी पेशाब सभीछूट गय़ा हैं। "
"वाता छुटबै करी बिटिया। " हरिया नें कहा___"स्वयं सोचौई ससुरे कल सें ईहाॅ बॅधे हें। अबजबई ससुरन कां टट्टी पेशाब लागीता कां करिहैं ईलोग?कब तक ई सारेऊ कां दबा केँ रखिहैं? ई चीज़ता अइसन हैं बिटिया जे सरकार भि नाँ रोक पाइहैं, ई ससुरे ता अभि नवानवा लौंडा हें। "
"ओहयह तोँ बिलकुल सहीकहा आपने काका। " रितू नें कहा___"मगर इन लोगों कि इस गंदगी कों भि तोँ दूर करना पड़ेगा वरनायह सभीइसी सें मर जाएॅगे औऱ मे इन्हें इतना जल्द मरने नहि दे सकती। इस लिए आप् यहाॅ कि इस गंदगी कों हटाने कां जल्दी काम शुरुआत करो। "
"ठीक हैं बिटिया। " हरिया नें कहा___"पाईप तालगा हि हैं। बस मोटरवा कां चालूकरै कां हैं। ईतादुई मिनटमा होईजाई बिटिया। "
"ठीक हैं काका। " रितू नें कहा___"आप् यहसभी साफ करवा दीजिए मे पाॅच मिनट मे आतीहूॅ। "
रितूयह कहकर बाहर् निकल गई। उन लोगों कि यह दुर्दशा देखकर उसकेमन कों बड़ी खुशीमिल रही थि। उसने सोचा कि ऐसे हरामियों केँ संगऐसा हि होना चाहिए। पऱ अभि तोँ यह शुरूआत हैं। कुछदेर बाद हि हरिया काका रितू कों बुलाने आया। रितू उसकेसंग पुनः तहखाने मे पहुॅची। इसबार कां दृश्य बहुतअलग थां। तहखाने मे जौ महक फैली हुइ थि वोँ अब नहि थि। काका नें मोटे पाइप सें जौ पानी कां प्रेसर निकलता थां उससे तहखाने कां पूरा फर्स औऱ दीवारें साफकर दिया थां। फर्स कि दीवारों केँ चारोतरफ किनारे किनारे बड़े बड़े छेंदबने हुए थें। उसमें हि पानी केँ संग सारी गंदगी कों निकाल दिया थां काका नें। उसकेबाद तहखाने मे रूम फ्रशनर कर दिया थां ताकिमहक दूर हौ जाए याँ समझ मे न् आए।
दीवारों पर्र रस्सी सें बॅधे चारो लड़के औऱ वोँ दोनो गार्ड्स अबहोश मे आँ चुके थें। रितूयह देखकर चौंकी थि कि उनसब केँ जिस्मों पऱ नीचेकमर सें एक् लॅगोट टाइप कां कपड़ा बाॅध दिया थां काका नें बाॅकी पूराबदन नंगा थां। ऐसा शायदइस लिए थां क्यूं कि उनसब केँ कपड़े गंदे होँ चुके थें औऱ बदबू फैलारहे थें।
इस टाइम वोँ सबहोश मे थें। पाइप केँ पानी सें वोँ सभी नहाएहुए थें। मगरकल सें नं कुछ खाया थां नं हि कुछ पिया थां उन लोगों नें इसलिए उन सबकी हालत खराब थि।
"हमें छोंड़ दो इंस्पेक्टर। " रोहित नें रोतेहुए कहा___"हम् तुम्हारे पांव पकड़ते हें। हमें जानेदो यहाॅ सें। हम् शपथ खाते हें कि कभी भि किसी लड़की केँ संगऐसा वैसाकुछ नहि करेंगे। "
"हाॅहाॅ हम् कुछ नहि करेंगे। " अलोक नें बुरीतरह गिड़गिड़ाते हुए कहा___"हमें इस नर्क सें निकाल दो इंस्पेक्टर। यहाॅ हमारा दम घुटाजा रहा हैं। कल सें हम् यहाॅ वैसे केँ वैसे हि बॅधेहुए हें। न् हमारे पैरों मे जान हैं नां हि हाॅथों मे ताकत। हमसेअब औऱ नहि खड़ाहुआ जारहा इंस्पेक्टर। प्लीज हमें छोंड़ दो। "
"अभि तोँ यह शुरूआत हैं। " रितू नें कठोरभाव सें कहा___"मे तुम् लोगों कां वोँ हाल करूॅगी जिसके बारे मे किसी नें सोचा भि नहि होगाआज तक। तुम् लोगों नें जौ कुकर्म किया हैं उसकेलिए कानून तुम्हारा कुछ भि नहि बिगाड़ सकता क्योंकि तुम् लोगों केँ हरामी बाप बड़ी आसानी सें तुम् लोगों कों कानून कि गिरफ्त सें निकाल लेते। इस लिए मैंने सोचा कि तुम् लोगों कों कानूनन सज़ा दिलाने सें कोई फायदा नहि होगा बल्कि तुम् लोगों कों कानून केँ बाहर् आकर हि सज़ा दि जा सकती हैं। वही मैने किया हैं। तुम्हारे बाप दादाओं कों पता हि नहि चलेगा कभी कि उनके बच्चे कहाॅगए हें?"
"नहि नहि ऐसामत करो। " किशनरो पड़ा___"हम् मानते हें कि हमने अपराध किया हैं मगर एक् बार क्षमा करदो। एक् बार तोँ सभीकोई क्षमा कर देता हैं इंस्पेक्टर। "
"अगरतम लोगों नें अपने जिंदगी मे केवल एक् हि अपराध किया होता तोँ अवश्य तुम् लोगों कों क्षमा कर देती। " रितू नें कहा___"मगर तुम् लोगों नें तोँ एक् केँ बाद एक् संगीन अपराध किये हें। दूसरों कि बेहन बेटियों कि इज्जत खराबकर उनकी ज़िदगी बरबाद कि हैं तुम् लोगों नें। मेरेपास तुम् सबका काला चिट्ठा मौजूद हैं। इतना हि नहि तुम् लोगों केँ बाप कां भि। मेरेपास ऐसेऐसे सबूत हें कि तुम् लोगों केँ बापों कों मे सबके सामने नंगा दौड़ा सकतीहूॅ। "
रितू कि यह बातें सुनकर उन सबकीरूह काॅप गई। उन्हें अपनी स्थित औऱ अपने बापों कि स्थित कां अंदाज़ा अबहुआ थां। उनके बाप तौ जानते भि नहि थें कि उनके बच्चे उनकी हि अश्लील वीडियो बनाएहुए हें। खुफिया कैमरे सें वीडियो बनाई गई थि औऱ इन सबका मास्टर माइंड सूरज चौधरी थां।
"काकाइन सबकोआज कां भोजनदे दो। " रितू नें हरिया सें कहा___"मगर भोजन भि वही देना जोँ हम् कुत्तों कों देते हें। छलनी मे आटा छालने सें जोँ छलनी मे बचता हैं नां उसी कि मोटी रोटिया बनवाना औऱ इन चारों कों केवल एक् एक् सूखी रोटी देना। जबकि इन दोनों गार्ड्स कों ठीकठाक भोजनदे देना। क्योंकि इन लोगों इन हरामियों केँ जैसाकोई अपराध नहि किया हैं। यह तौ बस गेहूॅ केँ संगघुन कि तरह यहाॅ पिसने आँ गए हें। इन्हें छोंड़ा नहि जा सकता वरनायह दोनोउस चौधरी कों यहाॅ कि सारी बातें बता देंगे। "
"हम् किसी सें कुछ नहि कहेंगे बेटी। " एक् गार्ड शालीनता सें बोला___"हम् इन सबके बारे मे सबकुछ जानते हें। यहलोग सचमुच बहोत हि गंदेलोग हें। हम् तौ ग़रीब व्यक्ति हें। दो पैसों केँ लिए इनके यहाॅ गार्ड कि जॉबकर रहे थें। यहलोग औऱ इन लोगों केँ बाप जब भि फार्महाउस आते थें तौ उन लोगों केँ संगहर बारकोई दूसरी लड़कियाॅ होती थि। रातभर यहलोग अंदर अय्याशियाॅ करते। कुछ लड़कियों कों यहलोग जबरदस्ती उठा लाते थें औऱ उनकी इज्जत कों तारतार करते थें। यहसभी बड़ेलोग हें बेटी। पैसों कि गरमी नें इन्हें शैतान बना दिया हैं। "
"साले हरामजादे हमारा नमक खाता हैं औऱ हमारे हि बारे मे ऐसी बातें करता हैं?" सूरज गुस्से मे चीखा थां।
"मेरे हाॅथ बॅधे हें छोरे। " गार्ड नें कहा___"वरना तुम्हें बताता कि मुझे हरामजादा कहने कां क्याँ अंजाम होता। नमक खाता थां तोँ मुफ्त कां नहि खाता थां समझे। बीस बीस घंटे चौकीदारी करता थां तब तेरे बाप कां नमक खाता थां मे। बात करता हैं साला रंडी कि औलाद। "
"अपनी जुबान कों लगामदे कुत्ते। " सूरज पूरी शक्ति सें चीखा थां।
"कुत्ता तोँ तुँ हैं साले गस्ती कि औलाद। " गार्ड नें भि ताव खातेहुए बोला___"इसी लिए तेरेलिए ऐसी रोटी बनने वाली हैं। "
सूरजखून केँ ऑसू पीकररह गय़ा। उसकी ऑखों मे ज्वाला धधकने लगी थि। रितूउन दोनो कि बातेसुन रही थि औऱ सोच भि रही थि कि गार्ड तोँ बेचारे बेकसूर हि हें। पऱ वोँ उन्हें छोंड़ करकोई रिश्क नहि लेना चाहती थि। क्योंकि यह भि हौ सकता थां कि वोँ दोनो अच्छा बनने कां नाटककर रहेहों। यानी सूरज नें उन लोगों कों सिखाया पढ़ाया हौ कि उसकेआते हि हमेंआपस मे कैसी बातें करनी हैं। ताकि रितूयही समझे कि गार्ड्स बेकसूर हें औऱ वोँ उन्हें छोंड़ देने कां विचार करे। औऱ अगर वोँ छोंड़ देगी तौ फिन वोँ यहाॅ सें जाकर सीधा चौधरी कों सारीबात बता देंगे। उसकेबाद चौधरी रितू कां हिसाब पुस्तक कर लेता।
"काका, अभि भि इसमें गरमी बाॅकी हैं " रितू नें कहा___"इस लिए खिला पिलाकर ज़रा अच्छे सें फिन खातिरदारी करना। भोजन मे कुत्ते वाली मात्र एक् रोटी हि देना इन्हें। इसकेबाद कल हि इन्हें खानां देना। अब चलतीहूॅ मे। "
"ठीक बिटिया। " हरिया खातिरदारी कां सुनकर खुश होँ गय़ा थां।
रितूपलट कर तहखाने केँ दरवाजे सें बाहर् निकल गई। उसके जाते हि हरिया नें तहखाने कां दरवाजा बंद किया। एक् कोने मे रखे मोटे डंडे कों उठाया औऱ उन चारों कि तरफ बढ़ा। हरिया कों अपने लगभगआते देखउन चारों कि रूह काॅप गई।
"कां रे मादरचोद। " हरिया नें सूरज कि टाॅग मे मोटा डंडा घुमाकर जड़ दिया___"बहुतै गरमीचढ़ रखी हैं नं तोही। हम् लोगन कि गरमी कों बहुतै अच्छे सें उतारता हूॅ। "
"माफ करदो काका। " सूरज नें सहसा हरिया सें रिश्तेदारी जोड़ते हुएकह उठा___"ग़लती हौ गई। अबकुछ नहि कहूॅगा। प्लीज़ क्षमा करदो न्। "
"माफ़ी ता हम् दे दूॅगा बछुवा। " हरिया नें डंडे कों सूरज केँ पिछवाड़े पऱ हौले हौले सहलाते हुए कहा___"पऱ एखर कीमतदे कां पड़ी। बोल देसकत हैं तुँ कीमत?"
"केसे कीमत काका?" सूरज नें नासमझने वालेभाव सें कहा।
"ऊ कां हैं नाँ बछुवा। " हरिया नें कहा___"हमका अपने जिंदगी मा एक् बारता जरूर केहू केँ गाॅड मारै कां मनरहा। जब हमरी तोहरे काकी सें विवाह हुई ता हम् बड़ाखुश हुए। सुहागरात मा हम् तोहरे काकी सें बोल दिये कि हमकातोर गाॅड मारै कां हैं। पऱ ऊ ससुरी हमरीई बात पऱ बिगड़ गै। फेर ता अइसनै चलतरहा बछुवा अउर हम् आज तक केहूकेर गाॅड मारै कां नाँ पायन। एसे हम् कहत हें कि कीमतमा तोहीआपन गाॅड हमसे मरावै कां पड़ी। "
"नहि नहि। " सूरज हरिया कि यहबात सुनकर अंदर तक काॅप गय़ा।
"देख बछुवा ईता तोहीकरै कां पड़ी। " हरिया नें कठोरता सें कहा__"ई हमरे खुशी कां बात हैं। सरवाआज तक केहूकेर गाॅड मारै कां नाँ पायन हम्। पऱ आजता हम् तोर गाॅडमार केँ रहब बछुवा। अबईतै सोच लें कि तूँ ईसभी खुशीमा करिहे याँ रोईरोई केँ। हीहीहीहीही। "
हरिया ज़ोर ज़ोर सें हॅसेजा रहा थां। उसकी हॅसी नें तहखाने मे बड़ा हि भयानक वातावरण पैदाकर दिया थां। उन चारी कि अंतरआत्मा तक काॅप गई। सूरज तौ हरिया कों इसतरह देखने लगा थां जैसे वो उसकाकाल हौ।
"हमरे बिटिया केरबात ता तुँ लोगसुन हि लिये होँ नाँ। " हरिया कहरहा थां___"तूँ सभीअब इहैं रहने वाले हौ। अउर हम् अब तुँ ससुरन केँ रोज बारी बारी सें गाॅड मारब। "
"ऐसा मतकरो काका हम् तुम्हारे हाथ जोड़ते हें प्लीज। " रोहित सहमेहुए सें बोला।
"हाॅथ जोड़ै कां कौनव फायदा नां होई बछुवा। " हरिया नें कहा___"काहे सें केँ ई हमरे ख्वा.अरे ऊ कां कहत हें.ख्वाहिश.हाॅ ईहैं.हाॅ ताई हमरे ख्वाहिश कां बात हैं। गाॅड मारै कां हमरा बहुतै ख्वाहिश हैं बछुवा। अबईबात मा हम् कौनवकेर बात नां मानब। चल रे पहिले तोरै गाॅड कां उद्घाटन हम् करब हीहीही। "
सूरज कि गाॅड मे हरिया नें ज़ोर सें मोटा डंडाजड़ दिया। सूरज दर्द केँ मारे पूरी शक्ति सें चीखने लगा थां। जबकि हरिया नें सूरज कि कमर मे बॅधे कपड़े कों खोलकर एक् तरफ उछाल दिया। सूरज बुरीतरह इधरउधर होँ रहा थां। मगर दोनोहाथ ऊपर बॅधे थें औऱ दोनो पांव फैलाए हुए चारों केँ पैरों सें बॅधेहुए थें।
"ई कां रे रंडीकेर दुम। " हरिया सूरज कि लुल्ली कों देखकर कहा___"ईता बच्चन जइसन हैं रे। मादरचोद नामरद हैं कां रे?"
"आहहहहह। " अपनी लुल्ली पऱ डंडे कि हल्की मार पड़ते हि सूरज बिलबिला उठा थां।
इधर हरिया नें ऊपर खूॅटी सें रस्सी कि गाॅठखोल कर सूरज केँ ऊपरउठे हुए हाॅथों कों नीचे कि तरफकर दिया। सूरज कां बाजू बुरीतरह अकड़ गय़ा थां। कल सें एक् हि पोजीशन मे बॅधा थां वो। इस टाइम वो जन्मजात नंगा थां। वो बुरीतरह हिलरहा थां औऱ हरिया सें अपनी गाॅड नं मारने केँ लिए विनती कररहा थां। मगर हरिया मानने वालों मे सें नहि थां।
"हमनेकहा नां बछुवा। " हरिया नें सूरज कि मुंडी पकड़कर आगे कि तरफ झुका दिया, फिन बोला___"हम् कौनवबात नाँ मानब। ई हमरे ख्वाहिश केरबात हैं। एसे हम् तोर गाॅडता मरबैकरब। "
हरिया नें अपनी सफेद धोती कि गाॅठ छोरी औऱ धोती कों खोलकर ऊपर खूॅटी पऱ टाॅग दिया। सूरजथर थर काॅपरहा थां। उसके हाॅथआपस मे अभि भि बॅधेहुए थें इसलिए वो अधिककुछ कर नहि सकता थां। इससमय वो हरिया सें यहसभी नं करने केँ लिए गिड़गिड़ाए जारहा थां।
"काहे बछुवा। " हरिया नें सूरज कि नंगी गाॅड मे ज़ोर सें एक् थप्पड़ लगाया, बोला___"अब काहे गिड़गिड़ाय रहा हैं। कछूयाद हैं? अइसनै ऊ लड़कियन लोग भि तोहरे सामने गिड़गिड़ाती रही होंगी। मगर तुँ उनमा सें केहूकेर बात न् मानेरहे होई हैं नाँ? ता मादरजोद फेर हमसे कइसन याँ उम्मीद करत हैं कि हम् तोरबात मानजाब रे वैश्या केँ जने सारे?"
सूरज केँ बगल सें बॅधे बाॅकी तीनों यहसभी डरे सहमे सें देखरहे थें। उनकी हालत बहोत खराब थि। वोँ यहसोच सोचकर मरेजा रहे थें कि सूरज केँ बाद उनकेसंग भि यहीसभी होगा। कभी स्वप्न मे भि उन लोगों नें यह नहि सोचा थां कभीऐसा भि वक़्त उनके जिंदगी मे आएगा।
"आआआहहहहह। " सूरज केँ मुख सें दर्दभरी कराह निकल गई। हरिया उसके सामने आकर सूरज केँ सिर केँ बाल पकड़कर उठाया थां, बोला___"लें देख मादरचोद कि लौड़ा केहीकहत हें। देख नं रंडी केँ पूत। हम् चाहूता अपनेई लौड़े सें तुम् सबकीएकै बारमा गाॅड फाड़दूॅ मगर फाड़ूॅगा नहि। हम् ता एक् एक् करकेअउर तसल्ली सें तुम् चारोन कि गाॅड मारब ससुरे लोग। "
हरिया नीचे सें नंगा हौ चुका थां औऱ इससमय अपने मोटे तगड़े लौड़े कों सूरज केँ चेहरे केँ बेहदपास सहलारहा थां। सूरज झुकाहुआ थां क्योकि हरिया नें एक् हाॅ सें उसकेसिर केँ बाल पकड़कर उसे नीचे झुकाया हुआ थां।
देखते हि देखते हरिया कां लौड़ा अकड़कर खड़ा हौ गय़ा। बाॅकी तीनों आश्चर्य सें हरिया केँ लौड़े कि तरफ देखेजा रहे थें। उन लोगों कि यहसोच कर नानीमा मर गई कि यही लौड़ा उन लोगों कि भि गाॅड मारेगा। हरिया सूरज केँ पीछे आँ गय़ा। अपने पीछे जातेदेख सूरजफिन सें बुरीतरह हिलने लगा। वो बारबार हरिया सें मिन्नतें करने लगता थां।
"चिन्ता नाँ कर बछुवा। " हरिया नें सूरज कि गाॅड कों फैलाते हुए कहा___"बस एकैबार तीनौ लोकन केँ दर्शन होई हें ऊखेबाद ता मज़ा मिली। अउर हाॅ गाॅड कां अपने ढीलै रखिहे नाहीं ता ससुरे फाटजाई ता हमरादोष नां दीहे। "
सूरज बुरीतरह छटपटाए जारहा थां। मगर हट्टे कट्टे हरिया कां एक् हाॅथ सूरज केँ सिर पऱ थां जिसे वो सूरज कों नीचे झुके रहने केँ लिए मजबूर कियेहुए थां। जबकि दूसरे हाॅथ सें वो ढेर सारा थूॅक लेकरउसे अपने लौड़े पर्र लगाया औऱ फिन लौड़े पकड़कर सूरज कि गाॅड मे सेट किया।
तहखाने मे मौजूद बाॅकी तीनो वोँ लड़के औऱ वोँ दोनो गार्ड्स फटी ऑखों सें यह दृश्य देखेजा रहे थें। हरिया नें लौड़ा सेटकर गाॅड कि तरब दबाव बढ़ाया।
"आआआहहहहह। " सूरज कों दर्द होनेलगा। उसकी गाॅड बेहद टाइट थि। जबकि हरिया कां लौड़ा मोटा तगड़ा थां। हर लम्हा केँ संग सूरज कि हालत हलाल होते बकरे जैसी होतीजा रही थि। वो बुरीतरह छटपटा रहामगर हरिया कि मजबूत पकड़ सें वो छूट नहि पारहा थां। बड़ी मुश्किल सें हरिया केँ लौड़े कां टोपा सूरज कि गाॅड मे घुसा। इतने मे हि सूरजगला फाड़े चिल्लाने लगा थां।
"सबरकर बछुवा। " हरिया नें कहा___"गला फाड़ने सें कां होई?ऊता हिम्मत रखै सें होई। अउर ईताअबे शुरूआतै हुआ हैं। अबेता मंजिल बहोत बाॅकी हैं बछुवा। "
"आआहहहहहह मममममम्मी रेरेएएएएएए। " हरिया नें ज़ोर कां झटका दिया। सूरज कि गाॅड कों चीरता हुआ हरिया कां लौड़ा करीब-करीब आधाघुस गय़ा थां। सूरज केँ मुख सें बड़ी भयंकर चीख निकली थि। उसकी ऑखों केँ सामने अॅधेरा छा गय़ा। सूरज बेहोश हौ चुका थां। उसकी हालतदेख कर बाकीसभी केँ होशउड़ गए। सूरज केँ साथीथर थर काॅपने लगे। वोँ अनायास हि ज़ोर ज़ोर सें पागलों कि तरह रोने चिल्लाने लगे।
"अबे चुपकरा मादरचोदो वरनाई लौड़ा इसकी गाॅड सें निकाल केँ तुम्हरी गाॅड मे घुसेड़ दूॅगा हम्। " हरिया गुर्राया तोँ वोँ डर केँ मारे एक् दम सें चुप होँ गए। उनकेचुप होँ जाने केँ बाद हरिया नें सूरज कि गाॅड मे थप्पड़ मारते हुए बोला___"कां बे मादरचोद। ससुरे इतने सें हि टाॅयबोल गय़ा रे। अभि ता हम् पूरा लौड़ा डाला भि नहि हूॅ। "
हरिया सूरज कि गाॅड मे धक्के लगाना शुरुआत कर दिया। हर धक्के केँ संग वो थोडा बहोत लौड़े कों सूरज कि गाॅड मे घुसेड़ता हि रहा थां। सूरज बेहोशी कि हालत मे भि कराहरहा थां। हरिया एक् बार तेज़े सें धक्का लगाया तोँ एच ज़ोरदार चीख केँ संग सूरजहोश मे आँ गय़ा। होश मे आते हि वो बुरीतरह रोने बिलखने लगा। रहम कि भीख माॅगने लगा वो। मगर हरिया कों तोँ अब जैसे न् रुकना थां औऱ नाही रुका वो। तहखाने मे सूरज कां रोना औऱ चिल्लाना ज़ारी रहा।
भाग हाज़िर हैं दोस्तो,,,,,,,,,
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