♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
ha TheBlackBlood bole h mene lekin कुछ galt bi nahii बोला aapke updates slow आते then others writers.
Like anandsngh12 in bhay की 3 kahaniyan ya jyada continue h lekin sab kaa barabar update आते hain, मेरे khayal से sukh bhay ko fourm per sab लोग jante bi honge last days woh bimar chl rahe the phir bi sab kahaniyan mein जैसे -2 waqt milta दिया update.
Harry rocks yeh bhay की bi kahani continue h और daily update karte h, even inkaah एक system muze बहुत पसंद आया joo bi unko batana hotha h woh update के last mein एक "Note " likh dete h jiske karan sabhi kahani readers ko unke reason kaa ya कुछ dealy ya अन्य xyz sab malum rahta h,
Manta hoon aap थोड़ा jyada busy honge lekin long gap mat kijiye, yeh suggestion के liye hi bataya thaa और abi bi bol raha hoon.
Sir जैसे aap busy hote hu waise hi बहुत से readers और bi h jinke pas bi comments per dhyaan dene jitna waqt nahii hote इसलिए jaruri nahii की woh sabhi comment pade.
Sir writer की pachan उसकी kalam से likhe words hi hote h। Apne updates de diye ya chand panktiyan likh di tho use कभी jatana nahii चाहिए,
Xfourm per tho mein new hoon pehle tho mein EDITED per reader waha bi apko yeh kahani h lekin waha kaa dasha क्या h yeh apko bi ptaa h और muze bi और jinko nahii ptaa unke liye
EDITED
BTW sir एक writer की pachan readers से hoty hain readers की writer से nahii, इसलिए कोई bi aap ko pressurise nahii krr raha baki apko joo sai lage woh kijiye.
Bhailog अब aap लोग joo marzi chehe bol sakte poking krna, ungali krna ya feeling na samjhna whatever। lekin mein sirf sacch hi bol raha hoon.
Post Edited By Supermoderator GodFather
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♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
♡ एक् नया संसार ♡
एपसोड.《 43 》
अब तक,,,,,,,
"कहाॅ चलना हैं साहब?" ड्राइवर नें कैब कों स्टार्ट करतेहुए पूछा।
"हल्दीपुर। " मैनेकहा तौ ड्राइवर नें कैब कों आगे बढ़ा दिया। मैनेपलट कर स्टेशन कि तरफ देखा तोँ मुझे बड़े बापू कां वोँ व्यक्ति कहीं नज़र नं आया। अभि मे यहसभी देख हि रहा थां कि तभी मेराफोन मोबाइल बजउठा। मैने हड़बड़ा करफोन कों निकाल कर स्क्रीन पऱ फ्लैश कररहे नाम कों देखा। पवन कां मोबाइल थां। मैनेकाल रिसीव कि तौ वोँ मुझसे पूछने लगा कि मे इस टाइम कहाॅहूॅ तोँ मैनेउसे बता दिया कि कैब मे बैठकर हल्दीपुर केँ लिए निकल लियाहूॅ। मेरीबात सुनकर उसनेकहा कि ठीक हैं वोँ मुझे हल्दीपुर केँ बस स्टैण्ड पर्र मिलेगा जहाॅ पर्र उसकी दुकान हैं। उसकेबाद मैनेकाल कटकर दि।
"यहाॅ सें कितना वक्त लगेगा तुम्हारे गाॅव पहुॅचने मे?" आदित्य नें मुझसे पूछा।
"ज़्यादा सें अधिकआधे घंटे कां वक़्त लगेगा। " मैने कहा___"हल्दीपुर केँ बस स्टैण्ड सें पवन कों संग मे लेकर हि उसकेघऱ चलेंगे। "
मेरीबात सुनकर आदित्य कुछ नं बोला। मैने एक् बार पीछे मुड़कर कैब केँ पिछले शीशे केँ उसपार देखा। एक् जीप हमारी इसकैब केँ पीछे आँ रही थि। मैने सोचा होगाकोई। मगर मुझेकोई उम्मीद नहि थि कि इसतरह कोईजीप वाला एक् रिदम पर्र कैब केँ पीछेचल रहा थां। मैनेकई बारनोट कि वोँ जीप हमादे पीछे उतनी हि रफ्तार सें चलती हुइ आँ रही थि। मुझेसमझ नं आया कि ऐसाकौन होँ सकता हैं उसजीप मे जौ हमारे पीछे पीछे उतनी हि गति सें आँ रहा थां जितनी गति सें हमारी टेक्सी मार्ग पर्र दौड़ी जारही थि। मेरा माथा ठनका कि कौन होँ सकता हैं उसजीप मे?????
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अबआगे,,,,,,,,,
उधरअजय सिंह हवेली सें फैक्ट्री जाने केँ लिए निकल हि रहा थां कि तभी उसकाफोन मोबाइल बजउठा। अजय सिंह नें कोट कि पाॅकेट सें फोन निकाल कर स्क्रीन पर्र फ्लैश कररहे भीमानाम कों देखकर तनिक चौंका। उसने जल्दी हि काल कों रिसीव करफोन कों कानों सें लगा लिया।
"हाॅ भीमाकहो क्याँ ख़बर हैं?" कान सें लगाते हि अजय सिंह नें ज़रा उत्सुक भाव सें बोला थां।
"।। " उधर सें कुछकहा भीमा नें।
"यह तुम् क्याँ कहरहे हौ भीमा?"अजय सिंह नें तनिक चौंकते हुएकहा थां___"वोँ भला यहाॅ क्यूं आएगाअब? तुमने अच्छी तरह सें उसे देखा हैं न्?"
".। " उधर सें भीमा नें कुछकहा।
"तोँ ख़ाक़ देखा तुमने। " अजय सिंह कां लहजा एकाएक कठोर हौ गय़ा___"तुमको स्वयं ठीकतरह सें यकीन नहि हैं उसका। पहले तुम् उसे अच्छी तरह सें देखो औऱ जब तुम् उसे पहचान जाओतब हमे बताओ। "
".। " उधर सें भीमा नें फिनकुछ कहा।
"ऐसे नहि भीमा। "अजय सिंह परेशान सें लहजे मे बोला___"हमें पक्के तौर पर्र ख़बर चाहिए। हवा मे लाठियाॅ मत घुमाओ समझे। तुम्हें उसकेआने कां मात्र अंदेशा हैं। जबकि हम् यह अच्छी तरह जानते हें कि उस कायर औऱ डरपोंक मे अब इतनी हिम्मत नहि हैं कि वोँ इस गाॅव मे क़दम भि रखसके। उसे भि पता हैं कि यहाॅ क़दम रखते हि उसकीजान उसके शरीर सें जुदा होँ जाएगी। दूसरी बातयह हैं कि यहाॅ वोँ आएगा हि क्यूं? अपनीमाॅ औऱ बेहन कि वजह सें आता थां वोँ, मगरअब तौ वोँ दोनो उसकेपास हि हें। इसलिए अब उसके यहाॅआने कां कोई प्रश्न हि नहि उठता। "
".। " उधर सें भीमा नें फिनकुछ कहा।
"मात्र शक केँ आधार पर्र तुम् हमेंयह बतारहे होँ भीमा। "अजय सिंह नें कुछ सोचते हुए कहा___"पऱ अगर तुम्हें लगता हैं कि वोँ वही थां तौ ठीक हैं तुम् उसका पीछाकरो। पताकरो वोँ कहाॅ जाता हैं औऱ किससे मिलता हैं?"
".। " भीमा नें कुछकहा।
"तुम् सभी केँ सभी निकम्मे हौ। " अजय सिंह एकाएक बेहद गुस्से मे बोला___"जब तुम्हें उस पऱ शक होँ हि गय़ा थां तोँ उसका पीछा करते तुम्। "
".। " उधर सें भीमा नें फिनकुछ कहा।
"अरे तौ केसे गायब हौ गय़ा वोँ?" अजय सिंह चीखा___"वोँ अवश्य किसीबस मे याँ ऑटो मे बैठकर वहाॅ सें निकल गय़ा होगा। इतना जल्दकोई गायब नहि होता भीमा। वोँ यकीनन वही थां। उसने तुम्हें पहचान लिया होगा औऱ इसीलिए वोँ तुम्हारी नज़रों सें इतना जल्दओझल हुआ हैं। मगर उसकेसंग दूसरा वोँ व्यक्ति कौन होँ सकता हैं?"
".। " भीमा नें कुछकहा।
"हाॅ शायदयही बात हैं। " अजय सिंह नें थोडा नरमी सें कहा___"तुमने उसकेसंग किसी अजनबी कों देखाइसी लिए तुम्हारे मन मे दोतरह केँ विचार पैदाहुए। तुमने सोचा होगा कि किसी अजनबी केँ संग उसका क्याँ काम?इसी मे तुम् चूकगए भीमा। ख़ैर, कोई बात नहि। अगर वोँ मुम्बई सें यहाॅआया हैं तोँ यकीनन वोँ गाॅव कि हि तरफ आएगा। इस लिए अपने आदमियों सें बोलो कि फटाफट सारे रास्तों पर्र फैल जाएॅ औऱ गाॅव केँ रास्तों पर्र भि घेराबंदी कर लें। वोँ अवश्य किसीबस याँ ऑटो मे हि होगा। हर गाड़ी कि अच्छी तरह सें तलाशी लो। साला जाएगा कहाॅ हमसेबच कर?"
".। " भीमा नें कुछकहा।
"चलो अच्छी बात हैं। " अजय सिंह नें कहा___"जैसे हि वोँ मिले हमें ख़बरकर देना औऱ हाॅउसे पकड़कर सीधा हमारे पास हवेली लेकर आनां। हम् भि फैक्ट्री हि जारहे थें मगरअब नहि जाएॅगे। यहीं तुम् लोगों कां इन्तज़ार करेंगे हम्। "
यहकहकर अजय सिंह नें फोन सें कालकट कर दि औऱ फिन अपने नथुने फुलाते हुए स्वयं हि बड़बड़ाया___"आँ बेटा आँ। तेरा स्वागत हम् ऐसा करेंगे कि सारी दुनियाॅ हमारे स्वागत कार्यक्रम कि कायल हौ जाएगी। हाहाहाहाहा आँ सपोले जल्द आँ। "
अभि अजय सिंह अपनी हि बातों सें हॅस हि रहा थां कि तभी वहाॅ पऱ प्रतिमा आँ गई। उसकेसंग मे शिवा भि थां।
"क्याँ बात हैं अजय?" प्रतिमा नें मुस्कुराते हुए कहा___"अकेले अकेले हि मज़े लें रहे हौ। मगरकिस बात पऱ? हमे भि तोँ बताओ आख़िर माज़रा क्याँ हैं?"
"अभि हमारे एक् व्यक्ति कां मोबाइल आया थां डार्लिंग। " अजय सिंह नें शिवा कि मौजूदगी मे भि उसे डार्लिंग कहा___"उसने हमें बताया कि विराज यहाॅ आँ रहा हैं। "
"क्याऽऽऽ???" प्रतिमा सोफे पऱ बैठीइस तरहउछल पड़ी थि जैसे अचानक हि उसके पिछवाड़े पऱ किसी नें गरमतवा रख दिया हौ, बोलि___"यह क्याँ कहरहे हौ तुम्? वोँ रंडी कां जना यहाॅकिस लिए आँ रहा हैं?"
"उसे उसकीमौत यहाॅला रही हैं प्रतिमा। " अजय सिंह नें कहा___"किसी नें सच हि कहा हैं कि जब गीदड़ कि मौतआती हैं तोँ वोँ शहर कि तरफ भागता हैं। वहीहाल उस हरामज़ादे कां हैं। उसकी भि मौतआई हुई हैं इसीलिए वोँ भागता हुआ यहाॅ आँ रहा हैं। "
"अच्छा हि तौ हैं डैड। " सहसा शिवा भि गर्मजोशी सें कह उठा___"आने दीजिए उस हराम केँ पिल्ले कों। उससेगिन गिन केँ हिसाब लूॅगा मे। उसदिन उसने मुझे बहोत मारा थां न्, आजउस सबका हिसाब मे लूॅगा। वोँ मेरा शिकार हैं डैड, आप् उसे मेरे हवाले करेंगे। मुझसे प्राॅमिस कीजिए डैड। "
"तुम्हारे हवाले उसे अवश्य करूॅगा बेटेमगर उसे अधमरा करने केँ बाद। "अजय सिंह नें कहा___"क्योंकि अधमरी हालत मे वोँ तुमसे जीत नहि पाएगा। वरना बेहतर हालत मे तौ तुम् उसकाकुछ नहि बिगाड़ पाओगे। "
"डैड आप् मुझे उससे कमज़ोर समझते हें क्याँ?" शिवा कि भृकुटी तन गई___"वोँ तोँ उसदिन मेरादिन हि ख़राब थां डैडइस लिए वोँ मुझेमार सका थां। वरना तोँ वोँ मेरे सामने कुछ भि नहि हैं। "
"दिन ख़राब नहि होते बेटे। "अजय सिंह नें खिसियाते हुए कहा___"वोँ तौ सभी एक् जैसे हि होते हें। रहीबात उसकी कि तुम्हारे सामने वोँ कुछ भि नहि हैं तोँ यहबात तुम् स्वयं कों उससे ऊॅचा दर्शाने केँ लिएकह रहे हौ। जबकि सच्चाई तुम् भि जानते होँ कि अकेले तुम् उसकाबाल भि बाॅका नहि कर पाओगे। ख़ैर जानेदो। "
अजय सिंह कि इन बातों पर्र शिवा बगले झाॅकने लगा थां। कदाचित उसेसमझ आँ गय़ा थां कि उसकी डींगें महज बकवास केँ सिवाकुछ भि नहि हैं। सच्चाई यही हैं कि विराज कां अकेले वोँ बाल भि बाॅका नहि कर सकता थां। यहबात उसका बाप भि बखूबी समझ चुका थां।
"मगरअजय वोँ यहाॅ आँ किसलिए रहा हैं?" प्रतिमा नें कहा___"उसके यहाॅआने कि कोईठोस वजह मुझे तोँ दूरदूर तक समझ मे नहि आँ रही। "
"कोई तोँ वजह होगी हि प्रतिमा। " अजय सिंह नें सोचते हुए कहा___"मत भूलो कि अभय भि मुम्बई गय़ा हुआ हैं। हम् यह नहि जानते कि इतने दिनों सें वोँ वहाॅ क्याँ कररहा हैं? उसे विराज मिला भि हैं कि नहि। पर्र आज कि सिचुएशन कों देखाजाए तौ यही लगता हैं कि अभय कों विराज औऱ विराज कि माॅ बेहनमिल चुकी हें। उन लोगों नें अभय कों औऱ अभय नें उन लोगों कों आपस मे सारी बातें बताई होंगी। "
"पऱ उनकीउन बातों सें विराज केँ यहाॅआने कां क्याँ कनेक्शन हौ सकता हैं?" प्रतिमा नें तर्क दिया।
"यह तोँ अभय कों भि पताचल चुका होगा कि हमारी असलियत क्याँ हैं?" अजय सिंह नें समझाने वाले अंदाज़ मे कहा___"गौरी सें सारी बातें जानने केँ बादअभय कों लगा होगा कि वोँ तोँ यहाॅ सें मुम्बई चलाआया हैं मगर उसके पत्नि बच्चे तौ अभि भि गाॅव मे हि हें। अभय समझता होगा कि उसके पत्नि बच्चों कों मुझसे बड़ा भारी खतरा हैं, इसलिए उसका पहलाकाम यही होगा कि वोँ अपने पत्नि बच्चों कों याँ तोँ भरपूर तरीके सें सुरक्षित करे याँ फिन किसीतरह वोँ उन्हें भि अपनेपास मुम्बई बुला लेँ। मगर प्रश्न यह पैदाहुआ होगा कि उसके पत्नि बच्चों कों यहाॅ सें लेकरकौन जाएगा वहाॅ?इस लिए उसने विचार विमर्ष करके विराज कों उन्हें लाने केँ लिए भेजा होगा। "
"तुम्हारी बातें औऱ तुम्हारी सोच अपनी स्थान यकीनन सही हें अजय। " प्रतिमा नें गंभीरता सें कहा___"मगर, अगर तुम्हारी बातों केँ अनुसार सोचाजाए तौ इन बातों मे भि एक् पेंच हैं। वोँ यह कि उस सूरत मे अभययह कभी नहि चाहेगा कि विराज कि जान कों कोई खतरा हौ जाए। यह तोँ वोँ भि समझ हि गय़ा होगा कि विराज कि जान कों हमसे खतरा हैं। इसलिए अपने पत्नि बच्चों कों यहाॅ सें लेँ जाने केँ लिए वोँ विराज कों वहाॅ सें हर्गिज़ नहि भेजेगा, औऱ अगर भेजना चाहेगा भि तोँ गौरी विराज कों यहाॅआने हि नहि देगी। इस सिचुएशन मे जान कों खतरे मे डालने कां काम स्वयं अभय हि करेगा। वोँ स्वयं यहाॅआकर अपने पत्नि बच्चों कों यहाॅ सें लें जानां उचित समझेगा नां कि विराज कों भेजना। "
"यहबात भि सही हैं। " अजय सिंह कों मानना पड़ा कि प्रतिमा कां तर्क भि अपनी स्थान बेहद पुख्ता हैं, बोला___"मगर यह भि सच हैं कि विराज केँ यहाॅआने कि कोई न् कोईठोस वजह तौ अवश्य हैं। बेवजह अपनीजान कों जोखिम मे डालने कि मूर्खता नाँ तौ वोँ स्वयं करेगा औऱ नाँ हि उसकीमाॅ याँ उसका चाचा उसे करने कि इजाज़त देंगे। "
"बिलकुल सहीकहा। " प्रतिमा नें कहा__"तौ प्रश्न यह हैं कि वोँ आख़िर यहाॅ आँ किसवजह सें रहा हैं?"
"वजहकोई भि हौ उसकेआने कि। " अजय सिंह नें कहा___"हमारे लिए अच्छी बातयही हैं कि जिसे हम् महीनों सें खोजरहे थें वोँ स्वयं हि चलकर हमारे पास आँ रहा हैं। वोँ हमारे हाॅथलग जाएगा तौ बाॅकी केँ उसके चाहने वाले भि हमारे पाससिर केँ बल दौड़ते हुए आँ जाएॅगे। अब तौ मजा आएगा प्रतिमा। हरकोई हमारे हाथ मे स्वयं हि चला आएगा। फिन हम् अपने तरीके सें उनकेसंग कुछ भि कर सकेंगे। बस एक् हि बात कि चिंता हैं कि रितूइन सबकेबीच टपक नं पड़े। वोँ पुलिस वाली हैं औऱ ईमानदार पुलिस अफसर भि हैं वोँ। इसलिए उसके रहते हमारे लिए समस्या भि होँ सकती हैं। "
"अबकोई भि समस्या आएडैड। " शिवाकह उठा___"ऐसा सुनहरा मौका अपने हाॅथ सें जाने नहि देंगे हम्। अगर हमारे इस अच्छे काम केँ बीच समस्या बनकर रितू दिदी आएॅगी तौ उनका भि हिसाब पुस्तक कर दिया जाएगा। "
"पहलीबार अकल वालीबात कि हैं तुमने बेटे। "अजय सिंह नें कहा___"यह यकीनन हमारे लिए सुनहरा मौका हि हैं। अगर विराज हमारे हाॅथलग जाएगा तोँ उसकेसब चाहने वाले अपने आप् हि चलकर हमारे पास आँ जाएॅगे। इसलिए इस सुनहरे मौके पर्र हम् किसी भि समस्या कों जल्दी ख़त्म कर देने सें पीछे नहि हटेंगे। "
"तोँ क्याँ तुम् अपनी बेटी कों जान सें मार दोगेअजय?" प्रतिमा अंदर हि अंदर काॅप गई थि।
"ऐसा तौ मात्र तब होगा डियर। "अजय सिंह नें अजीबभाव सें कहा___"जब हमारे पासऐसा करने केँ सिवा दूसरा कोई मार्ग हि नं बचेगा। "
प्रतिमा देखती रह गई अजय सिंह कों। उसकी बातों सें उसके शरीर कां रोयाॅ रोयाॅ खड़ा हौ गय़ा थां। उसकी ऑखों केँ सामने उसकी हसीन सि बेटी रितू कां हसीन चेहरा कईबार फ्लैश करउठा। इस एहसास नें हि उसे अंदर तक हिलाकर रख दिया कि उसकी बेटी कों उसका हि बाप जान सें मार भि सकता हैं। एक् लम्हा केँ लिए उसकी ऑखों केँ सामने रितू कां मृत जिस्म खून सें लथपथ ज़मीन मे पड़ाहुआ दिख गय़ा उसे। यह दृष्य ऑखों केँ सामने चकराते हि प्रतिमा कां शरीर एकदम सें ठंडा पड़ता चला गय़ा।
"अबआगे कां क्याँ प्रोग्राम हैं डैड?"तभी शिवा कि आवाज़ प्रतिमा केँ कानों सें टकराई तोँ जैसेउसे होशआया।
"हमने अपने आदमियों कों निर्देश दे दिया हैं बेटे। "अजय सिंह नें कहा___"वोँ हर रास्तों पर्र घेराबंदी कर देंगे। विराज उनसेबच कर किसी भि हालत मे कहींजा नहि सकेगा औऱ उनके पकड़ मे आँ हि जाएगा। उसकेबाद हमारे व्यक्ति उसे लेकर सीधा हवेली हमारे पास आएॅगे। "
"दैट्स ग्रेट डैड। " शिवा नें खुश होकर कहा___"अब आएगामजा। मगरडैड विराज केँ आने कि ख़बर रितू दिदी कों नहि लगनी चाहिए। हम् उसे कहीं छुपाकर रखेंगे। इस हवेली मे उसे रखना मेरे ख़याल सें ठीक नहि हैं। "
"यह भि सहीकहा तुमने बेटे। "अजय सिंह नें कहा__"आज तुम्हारा दिमाग़ भि सहीतरह सें कामकर रहा हैं। मुझेइस बात सें बेहद खुशी महसूस हौ रही हैं। ख़ैर, तुम् फिकरमत करो बेटे, रितू केँ आने सें पहले हि हम् विराज कों ऐसी स्थान छुपा देंगे जहाॅ सें किसी कों कभीकुछ पता हि नहि चल पाएगा। एक् काम करते हें, हम् अपने आदमियों कों बोल देते हें कि वोँ विराज कों लेकर हवेली न् आएॅ बल्कि हमारे नये फार्महाउस पर्र लेकर पहुॅचें। ऐसाइस लिए बेटे कि रितू कां कोई भरोसा नहि हैं कि वोँ कब हवेली मे टपक पड़े। उस सूरत मे उसे अंदेशा भि हौ सकता हैं इनसभी बातों कां। पुलिस वाली हैं न् इसलिए अगर एक् बार उसकेमन मे शक कां कीड़ा आँ गय़ा तोँ वोँ उसशक केँ कीड़े कि कुलबुलाहट हौ अवश्य शान्त करने कि कोशिश करेगी। इसलिए बेहतर यही रहेगा कि हम् विराज कों अपनेनये फार्महाउस पऱ हि रखें। "
"हाॅ यहठीक रहेगा डैड। " शिवा नें कहा__"तौ फिन हमें भि अब सीधा फार्महाउस हि चलना चाहिए। "
"यस ऑफकोर्स माँ डियरसन। " अजय सिंह नें मुस्कुराते हुएकहा, फिन उसने प्रतिमा कि तरफ देखते हुए कहा___"चलो डियर रेडी हौ जाओ। हमें जल्द हि अपनेनये फार्महाउस केँ लिए निकलना हैं। "
अजय सिंह कि बात पर्र प्रतिमा नें हाॅ मे सिर हिलाया औऱ अपने कमरे कि तरफबढ़ गई। जबकि अजय सिंह औऱ शिवा वहीं ड्राइंगरूम मे रखे सोफों पर्र बैठकर प्रतिमा केँ आने कां इन्तज़ार करनेलगे। दोनो केँ चेहरे इस वक़्त हज़ार वाॅट केँ बल्ब कि तरहचमक रहे थें।
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उधरकैब मे बैठेहुए मे औऱ आदित्य धीरे-धीरे बस स्टैण्ड कि तरफआए, जहाॅ पर्र मैनेपवन कों भि अपनेसंग कैब मे बैठा लिया। पवन मेरेसंग आदित्य कों देखकर थोडा परेशान सां दिखा तौ मैनेउसे आदित्य केँ बारे मे बता दिया। मेरीबात सुनकर पवन केँ ज़हन सें तकलीफ़ व चिंता चली गई।
मैनेपवन सें बहोत पूछा कि उसने मुझे इतना अर्जेन्टली क्यूं बुलाया थां मगरपवन नें यहीकहा कि मे स्वयं अपनी ऑखों सें हि देख लूॅगा। बस स्टैण्ड सें पवन कों लेने केँ बाद हम् अपने गाॅव हल्दीपुर केँ लिए निकल चुके थें। इधर कां मार्ग ऐसा थां कि दूरदूर तक खाली हि रहता थां। यहाॅ रास्ते केँ दोनोतरफ पहाड़ थें। ऐसे पहाड़ जिनमें पेड़ पौधे याँ झाड़ झंखाड़ नाम केवल केँ हि थें। बस स्टैण्ड सें जब गाॅव कि तरफआओ तौ करीबदस किलोमीटर केँ बादबीच रास्ते मे एक् बड़ी सि नहर पड़ती थि। जिसके बीच मे एक् पक्का पुलबना हुआ थां जौ कि बहुत पुरानां थां।
आसपास कां सारा इलाका पथरीला थां। बड़ी बड़ी चट्टाने थि। मार्ग केँ दोनोतरफ कि सारी ज़मीनें पथरीली औऱ बंजर थि। एक् तरफ केँ पहाड़ पऱ बाक्साइड थां जिसमें पहले केँ वक़्त मे यहाॅ सें बहुत सारा बाक्साइड ट्रकों मे जाता थां। एक् बारकुछ मजदूर पहाड़ केँ धसने सें उसी मे दबकरमर गए थें जिससे बड़ा बवाल होँ गय़ा थां। ठेकेदार तौ अपनीजान बचाकर वहाॅ सें चंपत हौ गय़ा थां। इसकेबाद सें वहाॅ पर्र सें बाक्साइड लें जाने कां कामबंद करवा दिया गय़ा थां।
पहाड़ कि दूसरी साइड पऱ एक् अन्य मार्ग थि जौ दूसरे गाॅव केँ लिए जाती थि। उसपुल कों पार करने केँ बाद एक् चौराहा मिलता थां जिसमे सें अलगअलग दिशा मे अलगअलग गाॅव कि तरफ जाने केँ लिए कच्ची मार्ग बनी हुई थि। हल्दीपुर जाने केँ लिए सीधा हि जानां होता थां। किसी भि मोड़ सें मुड़ने कि ज़रूरत नहि थि। मगरअगर आप् मुड़ भि गए हें तोँ दूसरे गाॅव सें भि आप् एक् अन्य कच्चे रास्ते सें हल्दीपुर जा सकते हें। हल्दीपुर गाॅवआस पास केँ सब गावों कि मुख्य पंचायत थां। अन्य गाॅवों कि अपेक्षा हल्दीपुर गाॅव मे सुख सुविधा अधिक थि औऱ इससभी मे सबसे बड़ीबात यह थि कि आसपास केँ सब गाॅवों कां पुलिस थाना हल्दीपुर मे हि थां। हल्दीपुर कहने केँ लिए गाॅव थां वरना तौ वोँ किसी कस्बे जैसा हि थां। बस कस्बे कि तरह थोडा शहरी ढाॅचे मे ढलाहुआ नहि थां।
बस स्टैण्ड सें करीब-करीब बीस किलोमीटर चलने केँ बादकैब सें हम् जैसे हि पुल केँ पास पहुॅचने वाले थें कि दूर सें हि हमें सामने कि तरफधूल उड़ाती हुईँ कुछ जीपें हमारी तरफ हि आती हुइ दिखीं। वोँ सभी सीधे वाले रास्ते सें हि आँ रहीथीं। मुझे समझते देर न् लगी कि यहसभी जीपें असल मे किसकी हौ सकती हें। मेरी नज़रपवन पऱ पड़ी तौ वोँ भि सामने हि देखरहा थां। उसकी हालतडर औऱ भय सें ख़राब होनेलगी थि।
"राजयह यह तौ। " पवन नें सहमेहुए लहजे मे कहा___"यह तोँ तेरे बड़े बापू कि हि जीपें लगती हें। लगता हैं उन्हें तेरेआने कां पताचल गय़ा हैं। मगरमगर केसे? केसेपता चल गय़ा उन्हें?"
"अब जोँ होँ गय़ा उसे छोड़ भइया। " मैने सामने कि तरफदेख कर कहा___"मुझे पता हैं कि मेरेआने कां केसेपता चल गय़ा होगाउस अजय सिंह कों? पर्र कोईबात नहि पवन। घबराने कि कोईबात नहि हैं। आनेदे उन सबको। मे भि तौ देखूॅ कि अजय सिंह औऱ उसके आदमियों मे कितना दम हैं?"
"क्याँ हुआ भइया?" आदित्य जौ कि कैब कि खिड़की सें उसतरफ केँ पहाड़ों कों देखरहा थां, वोँ मेरीतरफ पलटकर बोल पड़ा थां___"किसमे कितना दम हैं?"
"सामने देखोयार। " मैने आदित्य सें कहा___"जिसका मुझे अंदेशा थां वहीहुआ। "
"क्याँ मतलब?" आदित्य नें चौंकते हुए पूछा।
"यह जौ सामने सें कई सारी जीपें हमारी तरफआती हुइ नज़र आँ रही हें नं। " मैने कठोरभाव सें कहा___"यह सभी मेरे बड़े बापू कि हि हें। इनसभी मे उनके व्यक्ति हें औऱ वोँ स्वयं भि होँ सकते हें। यहसभी मुझे पकड़ने केँ लिए आँ रहे हें। "
"ओह इसका मतलब कि ऐक्शन कां वक्त आँ गय़ा हैं। " आदित्य एकदम सें सतर्क भाव सें कह उठा__"चिन्ता मत करनायार। मेरे रहते इनमें सें कोई तुम्हें छू भि नहि सकेगा। "
"मे जानता हूॅयार। " मैने कहा__"मगर मे यह भि नहि चाहता कि तुम्हें ज़रा सि खरोंच भि आए। आख़िर तुम् मेरेयार हौ अब। "
"मे तुम् जैसा मित्र पाकरखुश हूॅ मेरे साथी। " आदित्य नें सहसा भावपूर्ण लहजे मे कहा___"इस लिए मुझेअब किसी भि चीज़ केँ लिए रोंकना मत। बहोत दिनों बाद किसी अपने केँ लिएदिल सें कुछ करने कां मौका मिला हैं। "
"फिन भि साथी। " मैने आदित्य केँ कंधे पर्र हाॅथ रखतेहुए कहा___"मे तुम्हें अकेले कुछ नहि करने दूॅगा। बल्कि मे भि तुम्हारे संग हि इन सबका मुकाबला करूॅगा। "
"नहि विराज। " आदित्य बोला___"यह सभी तुम्हारे बस कां काम नहि हैं। अगर तुम्हें मेरे रहतेकुछ हौ गय़ा तौ मे कभी भि अपने आपको मुआफ़ नहि कर पाऊॅगा। "
"अपनेइस मित्र कों इतना कमज़ोर भि मत समझो भइया। " मैने मुस्कुरा कर कहा__"अगर तुमसे ज़्यादा नहि हूॅ तोँ कम भि नहि हूॅ। "
"क्याँ मतलब??" आदित्य नें नासमझने वालेभाव सें पूछा थां।
"यही कि थोडा बहोत मार्शल आर्ट्स मे भि जानता हूॅ। " मैने कहा__"औऱ मुझे स्वयं पऱ यकीन हैं कि मे तुम्हारे संगइन लोगों कां डॅटकर मुकाबला कर सकताहूॅ। "
"अगरऐसी बात हैं तोँ ठीक हैं मित्र। " मेरीबात सुनकर आदित्य नें कहा।
हम् दोनोबात कररहे थें जबकि मेरेबगल मे बैठापवन सामने कि तरफ एकटक देखेजा रहा थां। आदित्य कैब ड्राइवर केँ बगल वालीशीट पर्र बैठाहुआ थां। तभी वोँ मेरे पीछे कि तरफदेख कर चौंका।
"अरे हमारे पीछे भि दो गाड़ियाॅ लगी हुईँ हें विराज। " आदित्य नें कहा___"क्याँ यह भि तुम्हारे हि बड़े बापू केँ व्यक्ति हें?"
"क्याऽऽ???" मैने बुरीतरह चौंकते हुए पीछेपलट कर देखा, औऱ पीछे आँ रही दोनो गाड़ियों कों ध्यान सें देखते हुए कहा__"यह तोँ कोई औऱ हि हें दोस्त। पर्र होँ सकता हैं कि इसमे भि बड़े बापू केँ हि व्यक्ति हों। "
मेरेसंग संगपवन नें भि पीछे मुड़कर देखा थां। पीछे देखने केँ बाद उसके चेहरे पऱ तनिक राहत केँ भाव उभरे। यह बात मैने भि नोट कि। मेरा माथा ठनका। इसका मतलबपवन जानता हैं कि हमारे पीछे आँ रही दोनो गाड़ियाॅ किसकी हें। मेरेमन मे पवन सें यहबात पूछने कां ख़याल तौ आयामगर फिन मैने जल्दी हि उससे पूछने कां अपना ख़याल ज़हन सें निकाल दिया। मुझेपवन पर्र भरोसा थां। वोँ मेरा बचपन कां सच्चा साथी थां। मगरइस टाइम वोँ हमारे पीछे आँ रही गाड़ियों केँ बारे मे जानते हुए भि मुझेकुछ न् बताया थां। बल्कि राहत कि साॅस लेकर वो धीरे-धीरे बैठ गय़ा थां। मुझेसमझ न् आया कि एकदम सें उसमें ऐसा बदलाव केसे आँ गय़ा?
उधरपुल कों पारकर वोँ जीपें हमारे बहुत नज़दीक पहुॅच चुकी थि। मेरी नज़र अचानक हि सामने बैठे आदित्य पऱ पड़ी। उसने अपनेबैग सें एक् रिवाल्वर निकाला थां। मतलबसाफ थां कि आदित्य हरतरह सें चौकन्ना औऱ चाकचौबंद हि थां। देखते हि देखते सामने सें आँ रही वोँ जीपें कैब केँ बीस मीटर केँ फाॅसले पर्र आकररुक गईं। बीच मार्ग पऱ औऱ मार्ग कि पूरी चौड़ाई पऱ दो जीपेइस तरहआकर खड़ी हौ गई थि कि अब सामने सें कैब निकल नहि सकती थि। उसकेलिए ड्राइवर कों मार्ग केँ नीचे हल्के सें ढलान पऱ कैब कों उतारना पड़ता।
हमारे पीछे आँ रही दोनो गाड़ियाॅ भि कैब केँ पीछेदस मीटर केँ फाॅसले पर्र खड़ी हौ गई थि। इधर सामने खड़ी जीपों केँ दरवाजे एक् संग एक् झटके सें खुले औऱ उसमें सें मेरे बड़े बापू केँ चिरपरिचित व्यक्ति बाहर् निकले। सबके हाॅथों मे लट्ठ थें। जीपों सें उतरकर वोँ सभीकैब कि तरफआने लगे। मैने देखा कि बड़े बापू वहाॅ कहीं नज़र नहि आए मुझे। इसका मतलब उन्होंने इन लोगों कों मुझे लाने केँ लिए भेजा थां।
"पवन, तुम् इसकैब मे आहिस्ता बैठे रहना। " मैनेपवन सें कहा__"औऱ हाॅ चिन्ता कि कोईबात नहि हैं। मे औऱ आदित्य अभि इन लोगों सें निपटकर आते हें। चलो मित्र। "
"चलो मे तोँ एकदम सें रेडी हि हूॅ। " आदित्य नें कहा___"मगर एक् समस्या हैं दोस्त। "
"समस्या?" मैने पूछा__"कैसी समस्या?"
"हमारे पीछे खड़ी गाड़ियों मे कौन हौ सकता हैं?" आदित्य नें कहा__"क्याँ उसमें भि दुश्मन हि हें? यह जानना ज़रूरी हैं भइया। क्योंकि वोँ पीछे सें हम् पऱ हमला करके हमें नुकसान भि पहुॅचा सकते हें। "
"वोँ हम् पऱ हमला नहि करेंगे मित्र। " मैने एक् नज़रपवन पऱ डालने केँ बाद कहा__"बल्कि मुझे लगता हैं कि वोँ लोग हमारी सुरक्षा केँ लिए हें। "
"हमारी सुरक्षा केँ लिए?" आदित्य केँ संगसंग पवन भि चौंका थां मेरीबात सें।
"हाॅ भइया। " मैने कहा___"पवन नें तोँ यही बोला हैं मुझसे। "
"क्याँ????" पवन बुरीतरह हड़बड़ा गय़ा, बोला___"मैने ऐसाकब कहा तुझसे?"
"यही तौ ग़लतबात हैं नं भइया। " मैने अजीबभाव सें कहा___"कि तुमने कुछकहा हि नहि। मगर मे तेरे चेहरे सें सभीसमझ गय़ा हूॅ। तुँ बताना नहि चाहता तोँ कोईबात नहि। चलो आदित्य, वोँ कैब केँ लगभग हि आँ गए हें। "
मेरे कहते हि आदित्य अपनीतरफ कां दरवाजा खोलकर कैब सें बाहर् आँ गय़ा औऱ इधर मे भि। पवन मूर्खों कि तरह मुझे देखता रह गय़ा थां। जब मे उतरने लगा तोँ उसने मुझे पकड़ने केँ लिए हाॅथ बढ़ाया अवश्य मगर मे उसे बेफिक्र रहने कां कहकरकैब सें बाहर् आँ गय़ा। कैब सें उतरकर मे औऱ आदित्य सामने कि तरफबढ़ चले।
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उधर हास्पिटल मे!
रितू टाइम सें पहले हि हास्पिटल पहुॅच गई थि। हास्पिटल केँ बाहर् हरतरफ सादे कपड़ों मे पुलिस केँ व्यक्ति तैनात कर दिये थें उसने। सबको शख्त आदेश थां कि कोई भि संदिग्ध व्यक्ति विराज कों किसी भि तरह कां नुकसान न् पहुॅचा सके। सभी कुछ ब्यवस्थित करने केँ बाद हि वो हास्पिटल केँ अंदर विधी केँ पास आँ गई थि। उसने विधी केँ माता पिता कों भि मोबाइल करके बुला लिया थां।
रितू केँ कहने पर्र हास्पिटल कि नर्सों नें विधी कों एकदम सें साफ सुथरा करकेनये कपड़े पहना दिये थें। विधी केँ बारबार पूछने पऱ हि रितू नें उसे बताया कि उसका महबूब उसका प्रेम आज उसकेपास आँ रहा हैं। रितू केँ मुख सें यहबात सुनकर विधी कां मुरझाया हुआ चेहरा ताजे गुलाम कि मानिंद खिलउठा थां मगरफिन जाने क्याँ सोचकर उसकी ऑखेंछलक पड़ीं। रितू उसकी भावनाओं औऱ जज़्बातों कों बखूबी समझ सकती थि, कदाचित यहीवजह थि कि जैसे हि विधी कि ऑखें छलकीं वैसे हि रितू नें उसे अपने सीने सें लगा लिया थां।
"अरे दिदी यह मेरेसंग क्यूं हौ गय़ा?" विधी नें रोतेहुए कहा___"मैने उस ईश्वर कां क्याँ बिगाड़ा थां जौ उसने मेरी ज़िदगी औऱ मेरी साॅसे कमकर दि? उसको ज़रा भि मेरी खुशियाॅ रास नहि आईं। उसने मुझसे अपराध करवाया। मुझसे अपराध करवाया कि मैने अपने प्रेम कों दुख दिया औऱ उसे स्वयं सें दूरकर दिया। आज इस हालत मे मे केसे उसके सामने स्वयं कों पेश करूॅगी? मे जानती हूॅ कि वोँ मुझेइस हाल मे देखेगा तौ उसे मेरीइस हालत पर्र बहोत दुख होगा। मे उसे दुखी होतेहुए नहि देख सकती दिदी। मुझसे ग़लती हौ गई जौ मैने आपसेउसे बुलाने केँ लिएकहा। मे मर जाती तौ उसे इसकापता हि नहि चलता औऱ नाँ हि उसेइस सबसेदुख होता। क्याँ ऐसा नहि हौ सकता दिदी कि वोँ यहाॅआए हि न्? वापस वहींलौट जाए जहाॅ सें वो आँ रहा हैं। "
"ऐसी बातें मतकर पागल। " रितू कां हृदययह सोचकर हाहाकार करउठा कि इसहाल मे भि वोँ लड़की अपने महबूब कों खुश देख्ना चाहती हैं, बोलीं___"कुछ मतबोल तूँ। सभीकुछ अच्छा हि होगा विधी औऱ यह तोँ अच्छा हि हुआ जोँ तूने मुझसे विराज कों बुलाने कां कह दिया। तुँ नहि जानती विधी कि तेरे मिलने सें मुझे क्याँ मिल गय़ा हैं। तेरा प्रेम औऱ तेरे प्रेम कि इस प्यास नें मेरा समूचा अस्तित्व हि बदल दिया हैं। इसकेलिए मे ताऊम्र तक तेरी आभारी रहूॅगी। मुझेदुख हैं कि तेरे जैसी पाक़दिल वाली लड़की कों मे किसी भि तरह सें बचा नहि सकती। काश मेरेपास कोई चमत्कार कि छड़ी होती जिससे मे तुम को लम्हा भर मे ठीककर देती औऱ तेरे हाॅथों मे तेरे महबूब कां प्रेम सौंप देती। "
"दिदी मेरेबाद आप् मेरेराज कां ख़याल रखिएगा। " विधी नें बिलखते हुए कहा__"उसे खूब प्रेम दीजिएगा। उसने अपने जिंदगी मे कभीसुख नहि देखा। उसके अपनों नें उसेहर लम्हा मात्र दर्द दिया हैं। यहाॅ तक कि मैने भि उसे सबसे ज़्यादा दर्द दिया हैं। "
"ऐसामत कह विधी। " रितू केँ अंदरहूक सि उठी थि, बोलीं__"तेरा हर शब्द मुझे बेहद पीड़ा देता हैं। मे चाहती हूॅ कि जितना भि तेरेपास जिंदगी शेष हैं उसे तूँ हॅसी खुशी अपने महबूब केँ संग जिये। इस संसार मे जौ भि आया हैं उसे एक् दिनइस दुनियाॅ सें सबको छोंड़ करचले हि जानां हैं। यही संसार कां सबसे बड़ा सत्य हैं। इसलिए विधीयह दुखयह संताप अपने अंदर सें निकालने कि कोशिश करो। तुमने किसी कों कोई दर्द नहि दिया। यह सभी तोँ इंसान केँ अपने क़िस्मत सें मिलते हें। कोई किसी कों कुछदे नहि सकता। देने वाला मात्र भगवान हैं औऱ लेने वाला भि। ख़ैर छोंड़ यहसभी बातें औऱ चल मेरेसंग। उस कमरे मे तेरे माॅमडैड भि बैठेहुए हें। "
"आपने उन्हें क्यूं बुला लिया दिदी?" विधी नें रितू केँ संग चलतेहुए कहा__"वोँ इस सबके बारे मे क्याँ सोचेंगे?"
"कुछ नहि सोचेंगे वोँ। " रितू नें विधी कों अपने एक् हाथ सें पकड़े हुए कहा__"तुमने कोईपाप नहि किया हैं। प्रेम हि किया हैं न्, यह तौ कुदरत कि सबसेखास नियामत हैं। जब उन्हें तेरे प्रेम कि दास्तां पता चलेगी तौ यकीनमान वोँ भि तेरेइस पाक़ प्यार केँ सामने नतमस्तक होँ जाएॅगे। "
"मुझे उनके सामने अपने महबूब सें मिलने मे बहोत लज्जा आएगी दिदी। " विधी कां मुर्झाया हुआ चेहरा एकाएक हि लज्जा कि लाली सें सुर्ख होँ उठा थां, बोलि___"आप् प्लीज़ उन्हें उस टाइम किसी दूसरे कमरे मे याँ फिन बाहर् भेज दीजिएगा। "
"तूँ भि नं बिलकुल पागल हैं। " रितू नें उसे रोंककर उसके माॅथे पर्र प्रेम सें मगर हल्के सें चूमते हुए कहा___"ख़ैर, जैसा तेरी अच्छा लगे मे वैसा हि करूॅगी। अबखुश?"
रितू कि इसबात सें विधी केँ मुर्झाए चेहरे पऱ हल्की सि रंगत नज़रआई औऱ होठों पऱ फीकी सि मुस्कान तैरती हुई दिखी। कुछ हि देर मे रितूउसे हास्पिटल केँ एक् स्पेशल कमरे मे लेँ आई औऱ उसेबेड पऱ आहिस्ता सें लेटा दिया। कमरे मे एक् तरफरखे सोफों पऱ विधी केँ माॅमडैड बैठेहुए थें। उनका चेहरा देखकर हि समझ आँ रहा थां कि वोँ अकेले मे खूबरोए थें अपनी बेटी कि इस हालत केँ लिए।
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"केसे हें भीमा काका?" मैंने बड़े पिताजी केँ एक् व्यक्ति कों देखते हुए कहा___"मुझे ढूढ़ने मे कोई तकलीफ़ तोँ नहि हुई न् आपको?"
"अधिक शेखीमत झाड़ छोकरे। " भीमा काका नें गुस्से सें कहा___"वरना यहीं पर्र ज़िंदा गाड़ दूॅगा समझे। शुकरकर कि मेरे मालिक कां मुझे आदेश नहि हैं वरनापलक झपकते हि तूँ इस टाइमलाश मे तब्दील हुआ यहीं पड़ा होता। "
"लगता हैं आपको अपने बाहुबल पऱ ज़रूरत सें ज़्यादा हि घमंड हैं। " मैने कहा___"तभी तौ आप् अपने सामने किसी कों कुछसमझ हि नहि रहे हें। "
"सहीकहा छोकरे। " भीमा नें कहा__"मुझे अपने बाहुबल पऱ घमंड तोँ होगा हि। आख़िर मालिक कां मे सबसेखास व्यक्ति हूॅ। "
"तोँ क्याँ आदेश दिया हैं आपके मालिक नें आपको?" मैने पूछा।
"यही कि तुझेही घसीटते हुए यहाॅ सें लेकर जाऊॅ। " भीमाकह रहा थां___"औऱ लेँ जाकर उनके पैरों पर्र पटकदूॅ। "
"बहोत खूब। " मे हॅसा___"तौ फिन खड़े क्यूं होँ काका? मुझे घसीटते हुए यहाॅ सें लें चलो अपने मालिक केँ पास। "
"लगता हैं इस लड़के कों मरने कि बड़ी जल्द हैं भीमा। " भीमा केँ बगल सें लट्ठलिए खड़े एक् अन्य व्यक्ति नें हॅसते हुए कहा___"औऱ शायद इसका भेजा भि फिन गय़ा हैं। तभी तौ यह अनाप शनापबके जारहा हैं। मे तोँ कहताहूॅ लें चलइसे घसीटते हुए। "
"सही कहरहा हैं तुँ मंगल। " भीमा काका नें उससे कहा___"जब किसी कि मौत निकट होती हैं न् तोँ वोँ व्यक्ति ऐसी हि मूर्खतापूर्ण बातें करता हैं। ख़ैर, पकड़इसे। मे इसकेसंग आए इसकेइस मित्र कों पकड़ता हूॅ। "
भीमा केँ कहने केँ संग हि मंगल मेरीतरफ बढ़ा औऱ भीमा आदित्य कि तरफ। मंगल नें जैसे हि मुझे पकड़ने केँ लिए अपना हाॅथआगे बढ़ाया वैसे हि मैने बिजली कि सि स्पीड सें उसका वोँ हाॅथ पकड़ा औऱ उसकीतरफ पीठकर उसकेहाथ कों अपने कंधे पर्र रखकर ज़ोर कां झटका दिया। कड़कड़ कि आवाज़ केँ संग हि मंगल कां हाॅथबीच सें टूट गय़ा। हाॅथ टूटते हि मंगल हलाल होते बकरे कि तरह चीखा। जबकि उसका हाॅथ तोड़ने केँ बाद मे पलटा औऱ उसी स्पीड सें उसके गंजेसिर कों दोनो हाॅथों सें पकड़कर शख्ती सें एक् तरफ कों झटक दिया। परिणामस्वरूप मंगल कि गर्दन टूट गई औऱ उसकीजान उसकेबदन सें जुदा हौ गई। उसका बेजान हौ चुका शरीर झूलते हुए वहीं ज़मीन पऱ गिर गय़ा। यहसभी इतना जल्दहुआ कि किसी कों कुछसमझ मे हि नहि आया कि समयभर मे यह क्याँ होँ गय़ा।
मेरीइस हरकत सें आदित्य जौ भीमा कि गर्दन कों अपने बाजुओं मे कसे झटकेदे रहा थां वोँ चकितरह गय़ा। उसने भि भीमा कि गर्दन कों झटके देकर तोड़ दिया थां। पलक झपकते हि दो हट्टे कट्टे आदमियों कों इसतरह मौत केँ मुह मे जातेदेख बाॅकी सभीलोग पहले तोँ भौचक्के सें रहगएफिन जैसे उन्हें वस्तुस्थित कां एहसास हुआ। सभी केँ सभी एक् संग हमारी तरफ लट्ठलिए दौड़ पड़े।
आदित्य नें मेरीतरफ देखा, मैने भि उसकीतरफ देखा। ऑखों ऑखों मे हि हमारी बात हौ गई। जैसे हि सामने सें लट्ठलिए वोँ लोग हमारे पास पहुॅचे वैसे हि आगे केँ दो व्यक्ति लट्ठ कों पूरी शक्ति सें घुमाकर हम् दोनो पऱ वार किया। हम् दोनो हि झुकगए जिससे उनके लट्ठ कां वार हमारे सिर सें निकल गय़ा।
इससे पहले कि वोँ दोनो सम्हल पाते उनकीपीठ पर्र हम् दोनो कि फ्लाइंग किक पड़ी। वोँ दोनो व्यक्ति लट्ठ समेत ज़मीन कि धूल चाटने लगे। मैने एक् व्यक्ति केँ गिरते हि उसके लट्ठ वालेहाथ मे ज़ोर सें लात मारी। उसकेहलक सें चीख़ निकल गई। उसने लट्ठ छोंड़ दिया तोँ मैने जल्द सें उसका लट्ठउठा लिया। यही क्रिया आदित्य नें भि कि थि।
हम् दोनो केँ हाॅथ मे अब लट्ठ थि। उन दोनो केँ गिरते हि उनके पीछेआए बाॅकी केँ व्यक्ति भि हमारी तरफ एक् संग दौड़ पड़े। देखते हि देखते उनसभी नें हम् दोनो कों चारों तरफ सें घेर लिया। मे औऱ आदित्य आपस मे पीठ केँ बल जुड़गए थें औऱ घूमरहे थें अपनेजगह पर्र। उधर चारों तरफ घूमते हुएउन सब आदमियों नें एक् संग हम् पऱ लट्ठ कां वार किया। मैने औऱ आदित्य नें जल्दी हि उनकेवार कों अपने अपने लट्ठ सें रोंका औऱ पूरी शक्ति सें ऊपर कि तरफ झटका दिया। नतीजा यहहुआ कि सभी केँ सभीइधर उधर लड़खड़ा करगिर पड़े। उन लोगों केँ गिरते हि मैने औऱ आदित्य नें उन्हें उठने कां मौका नहि दिया। हम् दोनो हि उनसभी पऱ पिल पड़े। लट्ठ केँ ज़ोरदार वारउन सबके जिस्मों पर्र पड़ने लगे थें। वातावरण मे उन सबकी दर्द मे डूबी हुई चीखें निकलने लगी थि।
थोड़ी हि देर मे वोँ सभी वहीं मार्ग पर्र पड़े बुरीतरह कराहे जारहे थें। किसी कां सिर फूटा, किसी केँ हाॅथ टूटे तौ किसी केँ पांव। कहने कां मतलबयह कि वोँ सभीकुछ हि देर मे अधमरी सि हालत मे पहुॅच गए थें। तभी वातावरण मे हमे सामने कि तरफ किसीजीप केँ स्टार्ट होने कि आवाज़ सुनाई दि। हम् दोनो नें सामने कि तरफ देखा तौ सबसे पीछे कि कतार मे खड़ीजीप अपनी स्थान सें पीछे कि तरफ जानेलगी थि।
"लगता हैं उसमें कोई व्यक्ति बचाहुआ हैं मित्र। " आदित्य नें सामने उसजीप कि तरफ देखते हुए कहा____"औऱ वोँ इन सबकाहाल देखकर यहाॅ सें भागने कि सोचरहा हैं, बल्कि भाग हि रहा हैं वोँ। "
"वोँ यहाॅ सें भागने नं पाए साथी। " मैने कठोरभाव सें कहा___"वर्ना वोँ अजय सिंह कों यहाॅ कां साराहाल बताएगा औऱ अजय सिंहफिन सें अपनेकुछ आदमियों कों भेजेगा याँ फिन वोँ स्वयं हमें पकड़ने केँ लिए आँ सकता हैं। मे इस सबसेडर तौ नहि रहामगर इस वक़्त मे यहाॅ किसी सें लड़ने केँ उद्देश्य सें नहि आयाहूॅ बल्कि पवन केँ बुलाने पर्र आयाहूॅ। तुम् समझरहे होँ न् मेरीबात?"
"मे समझ गय़ा विराज। " आदित्य नें अपनीकमर मे जीन्स पर्र खोंसी हुई रिवाल्वर कों निकालते हुए कहा___"तुम् फिकरमत करो। वोँ साला यहाॅ सें ज़िंदा वापस नहि जा सकेगा। "
इतना कहने केँ संग हि आदित्य नें रिवाल्वर वाला हाॅथऊपर उठाया औऱ निशाना साधकर सामने यू टर्न लेँ चुकीजीप केँ अगले वाले दाहिने टायर पर्र फायरकर दिया। अचूक निशाना थां आदित्य कां। नतीजा यहहुआ कि टायर केँ फटते हि जीप अनबैलेंस होँ गई औऱ वोँ मार्ग केँ किनारे ढलान कि तरफ तेज़ी सें बढ़ी। ढलान मे उतरते हि कदाचित ड्राइवर नें उसे जल्द सें मोड़कर वापस मार्ग पऱ लाने कि कोशिश कि थि, मगर ढलान पर्र बाएॅ साइड सें अगले पहिये केँ उतर जाने सें जीप ढलान पर्र उलटती चली गई।
जीप कों उलटती देख आदित्य उसतरफ कों बढ़ा हि थां कि फिन जाने क्याँ सोचकर वोँ रुक गय़ा। मेरीतरफ देखकर बोला__"तुम् उसे देखो, मे इन लोगों कां किस्सा समाप्त करताहूॅ। "
मे समझ गय़ा कि आदित्य मुझेइन लोगों केँ पास अकेला नहि छोंड़ना चाहता थां। हलाॅकि अजय सिंह केँ सब व्यक्ति इस वक़्त मार्ग पऱ लहूलुहान हुए पड़े कराहरहे थें। उनमें सें किसी मे अब उठने कि शक्ति नहि थि। मगरफिन भि आदित्य मुझेउन सबकेपास अकेला नहि रहने देना चाहता थां। इसीलिए उसने मुझेउस उलट चुकीजीप कि तरफ जाने कां कहा थां। वहाॅ पऱ तौ वोँ मात्र एक् ड्राइवर हि थां। मुझे आदित्य कि इसबात पऱ अंदर हि अंदर उसकी दोस्ती पऱ नाज़हुआ। मे उसकीबात सुनकर उसतरफ बढ़ गय़ा जिसतरफ वोँ जीप ढलान पर्र उलटती चली गई थि।
उलटी हुइ जीप केँ पासजब मे पहुॅचा तोँ देखा ड्राइवर वालेडोर पऱ नीचे कि तरफढेर साराखून बहतेहुए वहीं ज़मीन पऱ फैलता जारहा थां। मैनेझुक कर देखा ड्राइवर मर चुका थां। जीप केँ ऊपरलगे लोहे कां एक् सरिया टूटकर उसकेसिर केँ आरपार होँ चुका थां। उसी सें खून बहताहुआ नीचे ज़मीन पर्र फैलता जारहा थां। जीप पूरी कि पूरीउलट गई थि। उसके पहिये ऊपर कि तरफ थें औऱ ऊपर कां भाग नीचे कि तरफ हौ गय़ा थां।
ड्राइवर कां यहहाल देखकर मे वापस आदित्य केँ पास आँ गय़ा। मैने आदित्य कों ड्राइवर कां हालबता दिया। इधर आदित्य नें ज़मीन पर्र कराहरहे सब आदमियों कि गर्दनें तोड़कर उन सबको यमलोक पहुॅचा चुका थां।
"दोस्त मजा तोँ नहि आयामगर ख़ैरकोई बात नहि। " मैने आदित्य कि तरफ देखते हुए लेकिन मुस्कुराते हुए कहा___"अब इन लाशों कां क्याँ करें?"
"इन्हें यहाॅ खुली स्थान पऱ औऱ मार्ग पर्र इसतरह छोंड़ कर जानां भि ठीक नहि हैं मेरे मित्र। " आदित्य नें कहा___"इससे मामला बहोत गंभीर होँ सकता हैं। पुलिस इन सबके क़ातिलों कों ढूॅढ़ने केँ लिए एड़ी सें चोंटी तक कां ज़ोरलगा देगी। "
"तौ अब क्याँ करें दोस्त?" मे एकाएक हि चिंता मे पड़ गय़ा थां, बोला___"इन लोगों कों कहाॅ लें जाएॅगे हम्? दूसरी बात वोँ कैब ड्राइवर भि इस सबका चश्मदीद गवाहबन चुका हैं। ऐसे मे यकीनन हम् बहोत जल्द कानून कि गिरफ्त मे आँ सकते हें। "
"वोँ सभी हम् लोग सम्हाल लेंगे। " तभीयह वाक्य पीछे सें किसी नें कहा थां। मे औऱ आदित्य यहसुन कर चौंकते हुए पीछे कि तरफ पलटे। हमारे पीछेकुछ लोग खड़ेहुए थें। मुझे समझते देर नं लगी कि यहसभी वहीलोग हें जोँ हमारे पीछे आँ रही गाड़ियों पऱ थें।
"आप् लोगकौन हें?" मैने तनिक घबराते हुए एक् सें पूछा___"औऱ यह आपने केसेकहा कि हम् सभीइन लोगों कों सम्हाल लेंगे? बातकुछ समझ मे नहि आई। "
मेरीबात सुनकर उस व्यक्ति नें अपने शर्ट कि ऊपरीजेब सें एक् आई कार्ड जैसाकुछ निकाला औऱ हमारी तरफउसे दिखाते हुए बोला___"हम् सभी पुलिस वाले हें औऱ आपके पीछे पीछे आपकी सुरक्षा केँ लिए हि लगेहुए थें। "
मे औऱ आदित्य उसकीयह बातसुन बुरीतरह चौंक पड़े थें। यहसच हैं कि उसकीयह बातऐसी थि कि बहुतदेर तक हमारे पल्ले हि न् पड़सकी थि। मे तौ यहसोच कर हैरान थां कि यहसभी पुलिस वाले हें औऱ इन लोगों नें हम् दोनो कों अजय सिंह केँ सब आदमियों कां बेदर्दी सें कत्ल करतेहुए अपनी ऑखों सें देखा थां। इसके बावजूद यहलोग यहकहरहे हें कि यह हमारी सुरक्षा केँ लिए हि हमारे पीछेलगे हुए थें। मेरे दिमाग़ कि नशें तक दर्द करने लगींयह सोचते हुए कि यहलोग हमारी सुरक्षा क्यूं कररहे थें? इनकी नज़र मे तोँ अब हम् दोनो मुजरिम हि बन चुके थें। इनकी ऑखों केँ सामने हि तोँ हमनेअजय सिंह केँ सब आदमियों कों जान सें मारा थां। उस सूरत मे तौ इन लोगों हमें गिरफ्तार कर लेना चाहिए। मगर नहि, यहलोग तौ यहकहरहे हें कि इन लाशों कों यह सम्हाल लेंगे। मुझेकुछ समझ मे नहि आँ रहा थां कि पुलिस वालेभला ऐसा केसेकह औऱ कर सकते हें? मैने आदित्य कि तरफ देखा तौ उसकाहाल भि मुझसे जुदा न् थां। वोँ भि मेरीतरह हैरान परेशान सां उनसब पुलिस वालों कि तरफइस तरहदेख रहा थां जैसेउन सबकेसिर उनके धड़ों सें निकलकर ऊपरहवा मे कत्थक कररहे हों।
"बात कुछसमझ मे नहि आई। " मैने स्वयं कों सम्हालते हुए अपने सामने खड़े एक् पुलिस वाले सें कहा___"आप् पुलिस वाले हमारी सुरक्षा किसवजह सें कररहे हें औऱ किसके कहने पर्र? इतना हि नहि यह भि कहरहे हें कि आप् इन लाशों कों सम्हाल लेंगे? जबकि आप् लोगों कों करना तोँ यही चाहिए कि ऐसे जघन्य हत्याकाण्ड केँ लिए हमें जल्दी गिरफ्तार कर हवालात मे बंदकर दें। "
"वोँ सभी छोंड़िये। " मेरे सामने खड़े एक् पुलिस वाले नें कहा___"आप् लोग यहाॅ सें आगे बढ़िये, यहसोच कर कि यहाॅकुछ हुआ हि नहि हैं। हमने आपकेकैब ड्राइवर कों भि समझा दिया हैं। वोँ इस मामले मे अपनामुख किसी केँ सामने जिंदगी भर नहि खोलेगा। आपके पीछेकुछ दूरी केँ फाॅसले पऱ हमारे कुछ व्यक्ति आपकी सुरक्षा मे उसीतरह लगे रहेंगे जैसेअब तक लगेहुए थें। "
"यह तोँ बड़ी हि हैरतअंगेज बात हैं। " मे उसकीइस बात सें चकित होकर बोला___"केसे पुलिस वाले हें आप् लोग कि इतनाकुछ होने केँ बाद भि आप् हमें गिरफ्तार करने कि बजाय यहाॅ सें बड़े आहिस्ता चले जाने कां कहरहे हें? ऊपर सें हमारी सुरक्षा केँ लिए आप् अपने पुलिस केँ कुछ आदमियों कों भि हमारे पीछेलगा रहे हें। "
"इस बारे मे आप् अधिकसोच विचार मत कीजिए। " पुलिस वाले नें कहा___"अब आप् अधिकदेर मत कीजिए औऱ बेफिक्र होकर यहाॅ सें गाॅव जाइये। "
इतनाकह कर वोँ पुलिस वालापलट गय़ा। उसकेसंग बाॅकी केँ पुलिस वाले भि पलटगए थें। जबकि हैरान परेशान हम् दोनो उन्हें मूर्खों कि तरह देखते रहगए। साला दिमाग़ कां दही हौ गय़ा मगर पुलिस वालों कां यह रवैया हमारी समझ मे ज़रा भि नं आँ सका थां।
"विराज भइया। "उन लोगों केँ जाते हि आदित्य कह उठा___"मैने अपनी इतनी बड़ी लाइफ मे ऐसे विचित्र किस्म केँ पुलिस वालेआज तक नहि देखे। मतलब कि____दोस्त क्याँ कहूॅअब? मुझे तौ कुछसमझ मे हि नहि आँ रहा। "
"सही कहरहे हौ साथी। " मैनेकुछ सोचते हुए कहा___"यह तोँ हद सें भि अधिक वाला अंधेर होँ गय़ा। ख़ैर जानेदो, हमारे तोँ हक़ मे हि हैं नं? अच्छा हि हुआ, वरनाअगर यहलोग हमेंइस सबकेलिए गिरफ्तार करजेल कि सलाखों केँ पीछेडाल देते तोँ बड़ी गंभीर समस्या होँ जाती हमारे लिए। "
"हाॅ दोस्त। " आदित्य नें कहा___"मगर यहबात ऐसी हैं कि कुछदिन तक हि क्याँ साला जिंदगी भर हमारे ज़हन मे किसी सर्प कि भाॅति कुण्डली मारकर बैठी रहेगी। हम् जिंदगी भरइस सबके बारे मे सोचते रहेंगे मगरइस सबका कारण हमेंसमझ मे हि नहि आएगा। "
"आएगा साथी। " मैने पूर्वत सोचते हुए हि कहा___"इस सबका कारण अवश्य समझ मे आएगा औऱ बहोत जल्द आएगा। फिलहाल तौ हमें यहाॅ सें निकलना हि चाहिए। "
"बिलकुल। " आदित्य नें कहा___"चलो चलते हें। मगर दोस्त सामने जाने कां मार्ग तौ बंद हैं। हमें सबसे पहलेयह सारी जीपें सामने केँ रास्ते सें हटानी पड़ेंगी। "
"हाॅ तोँ चलोहटा देते हें। " मैने कहा__"उसमे क्याँ हैं। "
मेरे इतना कहते हि आदित्य मेरेसंग चल पड़ा। कुछ हि देर मे हमनेउन जीपों कों रास्ते सें हटा दिया। इस काम मे एक् दो पुलिस वाले भि हमारी सहायता करने केँ लिए आँ गए थें। सब जीपों कों रास्ते सें हटाने केँ बाद मैने औऱ आदित्य नें एक् काम औऱ किया। वोँ यह कि उनसब जीपों केँ टायरों सें हवा निकाल दि। उसकेबाद हम् दोनोआकर कैब मे बैठगए।
कैब मे आकर मैने देखा कि पवन किसी औऱ हि दुनियाॅ मे खोयाहुआ एकदम शान्त बैठा थां। उसके चेहरे पऱ आश्चर्य कां सागर विद्यमान थां। मैनेउसे उसके कंधों सें पकड़कर हिलाया, तब जाकर उसकी चेतना लौटी। चेतना लौटते हि वोँ मेरीतरफ अजीबभाव सें देखने लगा। अभि भि उसके चेहरे पर्र गहन हैरत केँ भाव थें।
"ऐसे दीदें फाड़कर क्याँ देखरहा हैं?" मैने मुस्कुराते हुएकहा उससे।
"यह यहसभी क्याँ थां?" उसकेमुख सें अजीब सि आवाज़ निकली___"यह तुम् दोनो नें क्याँ औऱ केसेकर दिया? सबकोमार दिया तुम् दोनो नें। तुम्हे पता हैं यहबात जब तेरे बड़े पिताजी कों पता चलेगी तौ क्याँ होगा?"
"कुछ नहि होगा भइया। " मैने कहा___"औऱ अगरकुछ होगा भि तौ वोँ यह होगा कि उसअजय सिंह कि गाॅडफट केँ उसके हाॅथ मे आँ जाएगी समझा। स्वयं कों बहोत बड़ा सूरमा समझने वालेअजय सिंह कों जब अपने आदमियों केँ बारे मे ऐसी ख़बर मिलेगी तोँ उस वक्त उसकी हालत क्याँ होगीइस बात कां अंदाज़ा लगाकर देख भइया। "
"तुँ मेरावही दोस्त हैं याँ तेरी स्थान तेरा चोलापहन करकोई औऱ आँ गय़ा हैं?" पवन नें चकितभाव सें कहा थां, बोला___"मेरा मित्र इतना खतरनाक तोँ नहि थां। जिसतरह तूने एक् हि झटके मे अजय सिंह केँ मुस्टंडे आदमियों कां क्रिया कर्मकर दिया हैं न् उससे तौ यही लगता हैं कि तूँ मेरा वोँ दोस्त नहि हौ सकता। "
"मे तेरावही दोस्त हूॅ भइया। " मैने कहा__"बस वक़्त बदल गय़ा हैं। इसलिए वक़्त केँ संगसंग मैने स्वयं कि भि बदल लिया हैं। मगर यकीनरख, मेरायह बदलाव केवल उनकेलिए हैं जिन्होंने मुझ पऱ औऱ मेरेमाॅ बेहन पर्र अत्याचार किया हैं। अपने अज़ीज़ों केँ लिए तोँ मे आज भि वहीहूॅ जैसा पहलेहुआ करता थां। ख़ैर छोंड़ यहसभी, यहबता कि हमारे पीछे आँ रहेयह पुलिस वालों कां क्याँ चक्कर हैं? यहलोग मेरी सुरक्षा कि बात क्यूं कररहे थें मुझसे? औऱ तोँ औऱ इन लोगों नें तोँ हमे गिरफ्तार भि नहि किया जबकि मैंने औऱ आदित्य नें अजय सिंह केँ सब आदमियों कों उनकी ऑखों केँ सामने उन सबकोजान सें मार दिया हैं? यहसभी क्याँ चक्कर हैं भइया?देख मुझसे कोईबात मत छिपा तूँ। जोँ भि बात हैं उसेसाफ साफबता दे मुझे। आख़िर ऐसी क्याँ वजह थि जिसके लिए तूने मुझेइस तरह यहाॅआने कों कहा थां?"
"अबजब तुँ यहाॅ आँ हि गय़ा हैं तोँ थोडा औऱ इन्तज़ार कर लें मेरे दोस्त। " पवन नें कहने केँ संग हि अपना चेहरा अपनीतरफ केँ दरवाजे कि खिड़की कि तरफफेर लिया, फिन बोला___"मे अपनेमुख सें तुम्हे कुछ नहि बता सकता औऱ नाँ हि वोँ सभी बताने कि मुझमें हिम्मत हैं। कुछ वक्त तक औऱ धीरजरख लें, उसकेबाद सभीकुछ पताचल जाएगा तेरी। "
पवन यह बातें सुनकर मे उसे अजीबभाव सें देखता रह गय़ा थां। मुझेसमझ नहि आँ रहा थां कि ऐसी क्याँ बात हैं जिसे मेरायार इसहद तक मुझसे छिपारहा हैं? मेरे दिलो दिमाग़ मे अनगिनत आशंकाएॅ उत्पन्न होँ गई थि। पवन अभि भि खिड़की केँ उसपार देखरहा थां। उससमय तौ मे चौंक हि पड़ाजब पवन नें बड़ी सफाई सें अपनी ऑखों सें ऑसू पोछने कि क्रिया कि थि। यहदेख कर मेरे अंदर बड़ी तेज़ी सें चिंता औऱ बेचैनी बढ़ती चली गई। सहसा मेरी ऑखों केँ सामने अभय चाचा केँ पत्नि बच्चों कां चेहरा नाच गय़ा। मेरे मस्तिष्क मे जैसे विष्फोट सां हुआ। मन मे एक् हि ख़याल उभरा कि छोटी चाची औऱ उनके बच्चों केँ संगकोई ऐसीबात तौ नहि हौ गई जोँ कि नहि होनी चाहिए थि। मगरफिन मेरेमन मे प्रश्न भरा कि इसबात कों बताने मे भलापवन कों क्याँ तकलीफ़ होँ सकती हैं? इसका मतलब मामला कुछ औऱ हि हैं। मगरऐसा क्याँ मामला होँ सकता हैं?
मैंने इस बारे बहोत सोचामगर मुझेकुछ समझ नं आया। अंत मे थकहार कर मैने अपने ज़हन सें यहसभी बातें झटक दि, यहसोच कर कि कुछ वक्तबाद सभीकुछ पता तोँ चल हि जाएगा। पवन नें तोँ बारबार यहीकहा थां मुझसे। मैने एक् बारपलट कर पीछे कि तरफ देखा। हमारे पीछे पुलिस वालों कि एक् व्हीकल कुछ फाॅसले पर्र लगी हुईँ आँ रही थि। उन लोगों कों देखकर एक् बारफिन सें मेरेमन मे उनके बारे मे ढेरों प्रश्न चकराउठे। आख़िर यह पुलिस वाले मेरी सुरक्षा मे क्यूं लगेहुए हें औऱ किसने कहा होगा इन्हें ऐसा करने केँ लिए? सोचते सोचते मेरासिर दर्द करनेलगा तौ मैने उनके बारे मे सोचने कां काम भि बंदकर दिया।
अभि मे रिलैक्स होकर बैठा हि थां कि एकाएक मेरे मस्तिष्क मे धमाका हुआ। धमाके कां गुबार जब छॅटा तोँ एक् चेहरा नज़रआया मुझे। वोँ चेहरा थां रितू दिदी कां। वोँ भि तोँ पुलिस वाली थि। तौ क्याँ उन्होंने इन लोगों कों मेरी सुरक्षा केँ लिए भेजा हैं? नहि नहि हर्गिज़ नहि, वोँ भलाऐसा केसेकर सकती हें? मे भला उनका लगता हि क्याँ हूॅ?आज तक कभी जिसने मुझे अपना भइया नहि माना औऱ नां हि मुझसे कभीबात करना मनपसंद किया। वोँ भला मेरी सुरक्षा कि चिंता क्यूं करेंगी? यह तौ सूर्य देवता केँ पश्चिम दिशा सें उदय होने वालीबात हैं, जौ कि निहायत हि असंभव बात हैं। तोँ फिन औऱ क्याँ वजह होँ सकती हैं? सहमा मुझे ध्यान आया कि मे एक् बारफिन सें इनसभी बातों पर्र अपना माथा पच्ची करने मे लग गय़ा हूॅ। इस ख़याल केँ आते हि मैनेफिन सें अपने ज़हन सें इनसभी बातों कों झटक दिया औऱ फिन आहिस्ता रिलैक्स होकरबैठ गय़ा। मगर मैने महसूस किया कि रिलैक्स होनाइस वक़्त मेरेबस मे हि नहि थां। क्योंकि मेरेमन मे फिन सें तरहतरह केँ सोच विचार चलनेलगे।
करीबदस मिनटबाद हि हल्दीपुर गाॅव नज़रआने लगा थां हमें औऱ फिनकुछ हि देर मे हम् गाॅव मे दाखिल होँ गए। पवन केँ निर्देश पर्र कैब ड्राइवर नें कैब कों पवन केँ घऱ कि तरफ जाने वालीगली मे मोड़ दिया थां। जबकि हमारी हवेली उत्तर कि तरफ थि।
कुछ हि देर मे हम् पवन केँ घऱ केँ पास पहुॅच गए। गर्मियों कां वक्त तोँ नहि थां मगरइस टाइमआस पास किसी भि घऱ केँ पासकोई इंसानी जीवदिख नहि रहा थां। हलाॅकि गाॅव मे जब हम् दाखिल हुए थें तौ दाएॅतरफ एक् चौपाल पर्र कुछ लोगों कों बैठे देखा थां हमने। मैने सबसे ज़रूरी कामयह किया थां कि गाॅव मे दाखिल होने सें पहले हि अपने चेहरे कों रुमाल सें ढॅक लिया थां। ताकिगाव कां कोई ब्यक्ति मुझे किसीतरह सें पहचान नं सके।
पवन केँ घऱ केँ सामने कैब रुकी तौ ड्राइवर कों छोंड़ कर हम् तीनों जल्द सें कैब सें बाहर् निकले औऱ अपना अपनाबैग लेकरपवन केँ घऱ केँ अंदर आँ गए। कैब ड्राइवर कों मैने उसकीकैब कां भाड़ा पहले हि दे दिया थां औऱ उसे समझा भि दिया थां कि हम् लोगों केँ उतरते हि वोँ वापस बिजली कि स्पीड सें चला जाएगा। अगर यहाॅ कहींकोई कैब रुकवाए तोँ वोँ रोंके नहि। वरना वोँ स्वयं बहोत बड़ी मुसीबत मे फॅस जाएगा।
कैब ड्राइवर हम् लोगों सें इतनाडरा हुआ थां कि वोँ हमसे रुपया भि नहि लें रहा थां। एक् हि बातबोल रहा थां कि हम् उसे जानेदें। वोँ हमारी कोई भि बातकभी भि किसी सें नहि कहेगा। मगर मैनेउसे समझाया कि डरने कि कोई ज़रूरत नहि हैं। ख़ैर, हम् लोगों कों उतारकर उसनेकैब कों वहीं पऱ किसीतरह बैक करके वापसी केँ लिए मोड़ा औऱ वहाॅ सें चंपत होँ गय़ा। मुझे यकीन थां कि वोँ रास्ते मे कहीं भि रुकने वाला नहि थां।
पवन केँ घऱ केँ अंदर जैसे हि हम् तीनोआए तौ पवन नें जल्द सें घऱ कां मुख्य दरवाजा बंदकर उसमें कुण्डी लगा दि थि। पवन सिंह मेरे बचपन कां मित्र थां। ग़रीब थां औऱ बिना बाप कां थां। उससे बड़ी उसकी एक् बेहन थि। जौ मेरी भि मुहबोली बेहन थि। वोँ मुझे अपनेसगे भइया सें भि ज़्यादा मानती थि। अभि तक उसकी विवाह नहि हौ सकी थि। इसकीवजह यह थि कि पवन केँ पास रुपये पैसे कि तंगी थि। आजकललोग दहेज कि माॅग बहोत ज़्यादा करते हें। पवन कि माॅ बयालिस साल कि विधवा महिला थि। लेकिन स्वभाव सें बहोत अच्छी थि। वोँ मुझे अपने बेटे कि तरह हि प्रेम करती थि।
हम् लोग चलतेहुए बैठक मे पहुॅचे औऱ वहाॅ एक् तरफ किनारे पर्र रखी एक् चारपाई पर्र बैठगए। जबकि पवन अंदर कि तरफचला गय़ा थां। आदित्य इधरउधर बड़े ग़ौर सें देखरहा थां। कदाचित यहदेख रहा थां कि यहाॅ गाॅव मे कच्चे खपरैलों वाले घर-मकान बनेहुए थें। जबकि उसनेआज तक ऐसे घर-मकान मात्र फिल्मों मे हि देखे होंगे कभी।
दोस्तो, निर्धारित टाइम सें पहलेभाग हाज़िर हैं,,,,,,,,,
यह एपसोड मे कल सें थोडा थोडा करकेलिख रहा थां। थोडा थोडा करकेइस लिए क्योंकि तीनचार घण्टे कां वक्त एकसाथ मिल हि नहि रहा थां मुझे। हिन्दी मे लिखने पर्र वक्त भि बहोत ज़्यादा लगता हैं। इतनेभाग कों अगर अंग्रेजी फाॅन्ट मे लिखना होता तौ कदाचित कल हि आपके सामने एपसोड हाज़िर होँ जाता। ख़ैर,,,
एक् बात कहना चाहता हूॅ औऱ वोँ यह कि कुछलोग कहते हें कि फ्री होने केँ बाद मे रेगुलर भागदूॅ। जबकि मैने शुरुआत मे हि आप् सबसेकहा थां कि रेगुलर भाग देना मेरेलिए बहोत मुश्किल हैं। यहबात मैंने आप् सबसेबीच बीच मे भि कही थि। सबको लगता हैं कि उन्हें किसी भि स्टोरी कां एपसोड रोज़ाना पढ़ने कों मिले औऱ यहबात यकीनन अपनी स्थान सही भि हैं। आपकी स्थान अगर मे होता तौ मे भि यही चाहता औऱ यही डिमाण्ड भि करता। मगर दोस्तो, यह आप् भि समझ सकते हें कि यहसभी इतना आसान नहि होता। हर लेखक चाहता हैं कि उसके पाठक उससेखुश रहेंमगर अक्सर ऐसा होता हैं कि वही नहि हौ पाता जौ हम् बड़ी शिद्दत सें चाहते हें। आप् सभी मेरीइस बात सें अगर सहमत हें तोँ यह मेरेलिए अच्छी बात होगी। मुझे खुशी होगी कि आप् सभी मेरी हि बस नहि बल्कि हर लेखक कि मजबूरियों कों बेहतर तरीके सें समझते हें।
!! शुक्रिया !!
Bilkul sai kaha bhay aapne, ek writer ko ek update tayyar karne mai kam say kam 3 ghante kaa waqt lagta h, or kisi bi insaan k liye apne busy schedule mai say itna waqt nikalna thora musibat hotha h
बहोत बहोत धन्यवाद जीतू भइया आपकीइस सुंदर प्रतिक्रिया औऱ शानदार रिव्यू केँ लिए,,,,,,,,,, एपसोड दे दिया हैं,,,,,,
बहोत बहोत धन्यवाद भइया आपकीइस हसीन प्रतिक्रिया केँ लिए,,,,,,,,,, एपसोड दे दिया हैं,,,,,,
करता धांसू भाग हैं भइया आप् कि लेखनी कमाल कि हैं बहोत हि हसीनएवं रोमांचक भाग
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
Awesome update shubham bhay,
behad hi shandaar, lajawab और amazing update h bhay,
what an mind blowing and outstanding update bhay,
ajay ko viraj के yaha aane के baare mai ptaa chl गया h,
और usne और shiva ne too bohot saare khyali pulaav paka लिया h,
ajay too ritu ko bi marne tak के liye tayyar hu गया h, इस से jyada कोई insaan अब क्या gir sakta h,
wahi dusri tarf viraj और aditya ne un gundo kaa too khel hi baja dala h,
unn police walo के behavior के vajah से un dono ko ascharya too हुआ h, लेकिन viraj ne uss बात ko समय पर chhod दिया h,
udhar vidhi raj के aane kaa sunkar bohot खुश h,
dekhte h अब aage क्या hotha h,
agle update kaa besabri से intazar rahega bhay
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) - Next part miss mat karna
bhay gajab kardiya kya action seen likha bhay ab entjar he viraj kaa vidhi aur ritu say milneka aur sari galt fehmi yoko dorhoneka waiting for next updet
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