♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
Gajab & Super update bro
Yaha viraj kaa dukh aur phir उसके gusse से suraj aur उसके friends ko marna mast hain
Y ritu kaa apne baap ke आदमी से bachna aur use marna b mast hain
too dono ne अब से sb sath krne kaa socha hain y mast hain अब too aur mast action aur plan dekhne ko milege
muze sabse jyada aapka yeh emotion kaa itne achhe aur vistar से descript karna muze बहुत अच्छा lgta hain jisse padne mai एक alag hi judav hu jata hain
Waiting for next
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
दोस्तों, केसे हें आप् सभी????आशा करताहूॅ कि आप् सभी बहोत अच्छे सें हि होंगे।
भाग रेडी होँ चुका हैं दोस्तों, बसकुछ हि देर मे आप् सबके सामने हाज़िर हौ जाएगा। आशा करताहूॅ कि आपकोयह एपसोड हमेशा कि तरह मनपसंद आएगा।
बहोत बहोत धन्यवाद भइया आपकीइस हसीन प्रतिक्रिया केँ लिए,,,,,,,,,, एपसोड दे दिया हैं,,,,,, पेज नंबर 327 पर्र,
आपकोऐसा क्यूं लगता हैं भइया कि कथा कों बीच मे छोंड़ दूॅगा मे??? ख़ैर,भाग दे दिया हैं,,,,,,, पेज नंबर 327 पऱ,
बहोत बहोत धन्यवाद भइया आपकीइस हसीन प्रतिक्रिया केँ लिए,,,,,,,,,, एपसोड दे दिया हैं,,,,,, पेज नंबर 327 पर्र,
भइया एपसोड देने कां टाइम तौ बता दिया थां मैने, आपनेठीक सें देखा नहि शायद। ख़ैर,भाग दे दिया हैं,,,,,,, पेज नंबर 327 पर्र,
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
♡ एक् नया संसार ♡
भाग.《 48 》
अब तक,,,,,,,,
"अच्छा ठीक हैं चल। " दिदी केँ होठों पऱ उनकी सुंदर सि मुस्कान उभर आई___"अपनी ज़िद तोँ तुम्हे छोंड़ना हैं नहि न्। "
"हाॅ तौ। " मैने भि इसबार इठलाते हुए कहा___"आपसे छोटाहूॅ तौ इतनी ज़िद तोँ आपसे करूॅगा हि औऱ आपको मेरी ज़िद माननी हि पड़ेगी। हाॅ नहि तौ। "
"अरे तूँ यह तकिया कलामकब सें करनेलगा?" रितू दिदी नें एकाएक हि चौंकते हुए कहा___"यह तकिया कलाम तौ गुड़िया(निधी) कां हैं नं?"
"हाॅ दिदी। " मेरी ऑखों केँ सामने एकाएक हि निधी कां चेहरा घूम गय़ा___"हर बात मे यह केहना उसकीआदत बन चुकी हैं औऱ पता हैं बहोत लाडली हौ गई हैं। अपनीहर बात मनवा लेती हैं वोँ। "
"हाॅ वोँ ऐसी हि थि। " रितू दिदी कहींखोई हुइ सि नज़रआईं, बोलीं___"कैसी हैं अब वोँ?"
"सभीकोई अच्छे सें हें दिदी। " मैने कहा___"माॅ गुड़िया औऱ अभय चाचा सभी। "
"काश मे उन्हें देख पातीराज। " दिदी केँ चेहरे पऱ पीड़ा केँ भावभर आए___"गौरी चाची औऱ गुड़िया सें मुआफ़ी माॅग पाती मे। "
"ओफ्फो दिदी। " मैने बुरा सां मुह बनाते हुए कहा__"यह सभी आप् क्यूं कहरही हें? प्लीज़ यहसभी आप् अपने ज़हन सें निकाल दीजिए। अबइस बारे मे आप् स्वयं कों दुखी नहि करेंगी। अब चलिए वरना हम् लेट होँ जाएॅगे जाने मे। "
मेरीबाय सुनकर दिदी नें कुछ कहना चाहामगर मैने उनके होठों पऱ अपनी उॅगली रखकर उन्हें चुपकरा दिया औऱ उन्हें फ्रेश होने केँ लिएकह कर मे कमरे सें बाहर् आँ गय़ा। बाहर् आया तौ मेरी नज़र दरवाजे केँ एक् साइड खड़ी नैना फूफी पर्र पड़ी। उनका चेहरा ऑसुओं सें तर थां। शायद उन्होंने हमारी सारी बातें सुनली थि। मुझे देखते हि उन्होंने जल्द सें अपनी साड़ी कां एक् छोर पकड़कर अपने ऑसुओं कों पोंछा। मे उन्हें यह करतेदेख वहीं पऱ खड़ा हौ गय़ा।
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अबआगे,,,,,,,
विराज केँ कमरे सें जाते हि रितू नें अपनेबदन सें पुलिस कि वर्दी निकाली औऱ एक् टाॅवेल लेकर बाॅथरूम मे घुस गई। उसकेसिर पर्र जोँ चोंटलगी थि वोँ बहोत अधिक दर्दकर रही थि। लेकिन उसने अपनेउस दर्द कों बड़ी मुश्किल सें जज़्ब कियाहुआ थां। खून तौ रिसा थां लेकिन उसने पाॅकेट सें रुमाल निकाल करउसे पहले हि साफकर लिया थां। चोंट इतनी भि गहरी नहि थि जिससे बात गंभीर होती। जीप केँ किनारे पर्र लगा लोहे कां पाइप उसकेसिर केँ किनारे वालेभाग केँ थोडा सां ऊपरलगा थां। उस व्यक्ति कों जीप मे डालने केँ बाद हि उसनेसिर सें रिसरहे खून कों रुमाल सें साफ किया थां। उसकेबाद उसनेसिर पऱ वापस पीकैप पहनली थि जिससे चोंट सें रिसाहुआ खून औऱ चोंट दिखनी बंद होँ गई थि। वोँ नहि चाहती थि कि उसकोलगी किसी भि प्रकार कि चोंट फार्महाउस मे किसी कों भि नज़रआए याँ पताचले।
बाथरूम मे रितू नें स्वयं कों फ्रेश किया औऱ फिन बाहर् आँ गई। कमरे मे उसने एक् नई वर्दी पहनी औऱ फिन पीकैप लगाकर स्वयं कों पूरीतरह सजधजकर किया। आलमारी सें उसने एक् दर्द कि टैबलेट ली औऱ वहीं एक् साइडरखे पानी केँ बाटल सें उसनेउस टैबलेट कों खाया। उसकेबाद वोँ कमरे सें बाहर् आँ गई।
नीचे डायनिंग हाल मे इससमय खानां खाने केँ लिए केवलतीन हि लोग थें। विराज, आशा, औऱ रितू। रितू केँ आने केँ बादपवन कि माॅ नें उन तीनों कों खानां परोसा। तीनों नें बड़े आहिस्ता खानां खाया। बाॅकि सभी अपने अपने कमरे मे थें। कुछ हि देर मे तीनों नें खानां खा लिया।
"तुँ क्याँ फिन सें ड्यूटी पर्र जारही हैं रितू?"आशा दिदी नें पूछा___"मैने तौ सोचा थां कि हम् सभी यहाॅ गप्पें लड़ाएंगे। मगरअब जबकि तुँ जारही हैं तौ फिन मे क्याँ करूॅगी इसके सिवा कि कमरे मे जाकर लम्बी तानकर सो जाऊॅगी। "
"लम्बी तानकर सोने कि ज़रूरत नहि हैं आशा। " रितू दिदी नें कहा___"साम कों तुम् सबकोराज केँ संग मुम्बई केँ लिए निकलना हैं। इसलिए सामान कि पैकिंग करके तैयार रहना। "
"क्याऽऽ???" आशा दिदी बुरीतरह चौंकी___"हम् आज हि साम कों यहाॅ सें जाएॅगे???"
रितू दिदी कि बात सुनकर मे भि बुरीतरह चौंक पड़ा थां। मे तोँ कुछ औऱ हि सोचेहुए थां। रितू दिदी केँ संग जाकर रास्ते मे उनसे गुनगुन जाने केँ लिए कहने वाला थां ताकि अपनीसब टिकटें कैंसिल करवा सकूॅ। मगर दिदी कि इसबात नें मुझे हिलाकर रख दिया थां।
"हाॅआशा। " उधर दिदी कहरही थीं___"तुम् लोगों कां यहाॅ सें सुरक्षित मुम्बई निकलना ज़रूरी हैं। क्योंकि आने वालाहर लम्हा एक् नये ख़तरे कों अपनेसंग लेकर आँ रहा हैं। तुम् सबके यहाॅ रहतेहुए किसी भि प्रकार कि अनहोनी होँ सकती हैं। इसलिए मे चाहती हूॅ कि तुम् सभी यहाॅ सें मुम्बई चलेजाओ। "
"अच्छा ठीक हैं रितू। "आशा दिदी नें कहा___"मे माॅ कों भि बता देतीहूॅ इस बारे मे। "
"ठीक हैं। " रितू दिदी नें कहा___"पवन औऱ राज केँ उस साथी कों भि बता देना। चल राज। "
आखिरी वाक्य मुझेदेख कर कहने केँ संग हि रितू दिदी कुर्सी सें उठकर बाहर् कि तरफचल दि। उनके पीछे पीछे मे भि बुझेमन सें चल दिया। बाहर् आकर दिदी अपनी जिप्सी कि तरफबढ़ गईं। जिप्सी कि ड्राइविंग शीट पर्र बैठकर दिदी नें मुझे भि संग मे बैठने कों कहा तोँ मे भि चुपचाप बैठ गय़ा। मेरे बैठते हि दिदी नें जिप्सी मेनगेट कि तरफ दौड़ा दिया।
"काका, यहाॅ सबका ख़याल रखना। " लोहे वालेगेट केँ पासरुक कर दिदी नें हरिया काका सें कहा___"हम् आते हैं कुछदेर मे। "
"फिकर नां करो बिटिया। " हरिया काका नें कहा__"हमरे रहते यहाॅ काहू कां कुछू न् होई। "
हरिया काका कि बातसुन कर दिदी मुस्कुराई औऱ फिन जिप्सी कों आगे बढ़ा दिया। मे उतराहुआ चेहरा लिये दूसरी तरफदेख रहा थां। सच कहूॅ तौ मुझे दिदी कां आशा दिदी सें यह कहना कि वोँ सभीलोग मेरेसंग आजसाम हि मुम्बई जाएॅगी बिलकुल अच्छा नहि लगा थां।
"क्याँ हुआ मेरा भइया नाराज़ हैं मुझसे?" सहसा रितू दिदी नें मेरीतरफ देखकर कहा थां। उनकीयह बातसुन कर मैने उनकीतरफ एक् नज़र देखा औऱ फिन बिनाकुछ बोलेफिन सें दूसरी तरफ देखने लगा।
"अपने सें दूर तोँ मे भि तेरी नहि जाने देना चाहती मेरे भइया। " दिदी नें गहरी साॅस ली___"मगर मौजूदा हालात कुछऐसे हें कि मुझेयह सभी करनापड़ रहा हैं। मगर मे यह नहि कहरही राज कि इसजंग मे मे याँ तुँ अकेले हें.नहि नहि बल्कि हम् दोनोसंग संग हि हें। "
उनकीइस बात सें मैने चौंककर उनकीतरफ एक् झटके सें देखा। वोँ मुझेदेख कर मुस्कुरा रही थि। उनकीइस मुस्कान कों देखकर मेरी सारी नाराज़गी दूर हौ गई।
"हाॅराज। " उन्होंने फिन कहा___"हम् दोनोसंग संग हि इसखेल मे काम करेंगे। मगर.
"मगर क्याँ दिदी???" मे चकराया।
"मगरयह कि तूँ अभि इन सबको लेकर मुम्बई सुरक्षित पहुॅच जा। " दिदी नें कहा___"जब यहसभी वहाॅ पहुॅच जाएॅगे तोँ इनकी सुरक्षा कि चिंता सें हम् दोनो हि मुक्त हौ जाएॅगे। उसकेबाद तुम् वहाॅ सें वापस आँ जानां यहाॅ। हम् दोनो तसल्ली सें फिनइस खेल कों अंजाम तक पहुॅचाएॅगे। "
"आपनेठीक कहा दिदी। " मैने कहा___"हम् स्वतंत्रतापूर्वक यहजंग तभीलड़ सकेंगे जब हमारी यह सारी कमज़ोरियाॅ हमारे दुश्मन कि नज़र सें याँ पहुॅच सें बहोत दूर हौ जाएॅगी। क्योंकि हमारे दुश्मन नें अगर हमारी एक् भि कमज़ोरी कों नुकसान पहुॅचा दिया तोँ वोँ नुकसान हम् हर्गिज़ भि सह नहि सकेंगे। "
"बिलकुल ठीक समझे मेरे भइया। " रितू दिदी नें मुस्कुरा कर कहा___"मे यहीकर रहीहूॅ। मे चाहती हूॅ कि तुँ हमारी इन सारी कमज़ोरियों कों यहाॅ सें मुम्बई लेँ जाकर उन्हें सुरक्षित करदे। उसकेबाद तुँ वापस यहाॅ आँ जानां, उस सूरत मे हम् दोनो बेहन भइयाखुल कर औऱ तसल्ली सें अपनीजंग लड़ सकेंगे। "
"मे समझता थां कि यहजंग केवल मेरी हैं दिदी। " मैने सहसा गंभीर होकर कहा___"औऱ इसजंग कों अकेले हि मुझे इसके अंजाम तक पहुॅचाना हैं। मगर आपसेमिल करयहपता चला कि इसजंग मे मे अकेला नहि हूॅ बल्कि मेरेसंग मेरेहर क़दम मे मेरासंग देने केँ लिए मेरी सबसे अज़ीज़ दिदी भि रेडी बैठी हें। यह मेरेलिए ऐसी खुशी हैं दिदी जिसका मे बयान नहि कर सकता। "
"चल अब तुँ फिन सें न् मुझे इमोश्नल कर देना। " रितू दिदी नें हौले सें हॅसते हुए कहा___"वरना मे फिन रोनेलग जाऊॅगी। "
"नहि दिदी। " मैने तपाक सें कहा___"आप् रोना नहि। आपकी ऑखों मे ऑसू देखते हि मेरे अंदरकुछ टूटने सां लगता हैं। जिससे मुझे तक़लीफ़ होने लगती हैं। "
"अच्छा यहसभी छोंड़ भइया। " रितू दिदी मेरीबात पर्र पहले तोँ मुस्कुराईं फिन सहसा बेचैनी सें पहलू बदलते हुए कहा___"राज तुझसे कुछ पूछूॅ?"
"यह क्याँ बात हुईँ दिदी?" मैने दिदी कि तरफ देखा__"कोई बात पूछने केँ लिएभला आपको मुझसे इजाज़त माॅगने कि क्याँ ज़रूरत हैं?"
"अच्छा नहि माॅगती इजाज़त। " दिदी फिन मुस्कुराई, बोलि___"मे तुझसे जोँ कुछ भि पूछना चाहती हूॅ उसका तूँ सचसच जवाब देगा नं?"
"हाॅ बिलकुल दिदी। " मैने कहा___"मे आपकेहर प्रश्न कां सचसच जवाब दूॅगा। पूछिए क्याँ पूछना चाहती हें आप्?"
"मेरेमन मे कई सारी बातें हैं राज। " रितू दिदी नें सामने रास्ते कि तरफ देखते हुए कहा___"औऱ उन्हीं कई सारी बातों मे कई सारे प्रश्न भि हें जिनके बारे मे मुझे जानना हैं। तूँ तोँ जानता हैं कि मे एक् पुलिस ऑफिसर भि हूॅइस लिएहर सवालों कां सहीसही जवाब पाना मेरीइस पुलिसिया फितरत मे भि शामिल हैं। "
"कोईबात नहि दिदी। " मैने मुस्कुरा कर कहा___"आपको जौ कुछ भि जानना हैं मुझसे आप् बेझिझक पूॅछ सकती हें। अगर आपके सवालों केँ जवाब मेरेपास होंगे तौ अवश्य मे आपकेहर प्रश्न कां जवाब दूॅगा। "
"सबसे पहला प्रश्न तोँ यही हैं कि तूँ मुम्बई मे कहाॅ औऱ किसहाल मे गौरी चाची औऱ गुड़िया कों संगलिए रहता हैं?" रितू दिदी नें कहा___"औऱ अब तौ तूँ इन सबको भि अपनेसंग हि लिएजा रहा हैं तोँ मेरायह सोचना जायज़ हि हैं कि इतने सारे लोगों कों तुँ कहाॅ ठहराएगा औऱ केसे सुरक्षित रखेगा?"
"बड़े बापू तौ मेरे बारे मे यही सोचते हें दिदी। " मैने सहसा मुस्कुरा कर कहा___"कि मे मुम्बई मे कहीं किसी होटल याँ ढाबे मे कप प्लेट धोने वालाकाम करता होऊॅगा। जबकि मेरी सच्चाई कां अगरआज उन्हें पताचल जाए तौ उनके पैरों तले सें यह ज़मीन गायब होँ जाएगी। "
"क्याँ मतलब???" रितू दिदी बुरीतरह चौंककर मेरीतरफ देखने लगी थि।
"मतलबसाफ हैं दिदी। " मैने गहरी साॅस ली___"भगवान सें बड़ाकोई नहि होता दुनियाॅ मे। यह परमेश्वर कि हि रहमत हैं दिदी कि मे चाहूॅ तोँ यहाॅ पऱ खड़े खड़े हि पूरा हल्दीपुर गाॅव ख़रीद लूॅ। जिस मामूली सि प्रापर्टी कों पाने केँ लिए बड़े बापू नें यहसभी किया थां नं उस प्रापर्टी कि लाखों गुनी दौलतआज मेरेपास हैं। "
"यह तूँ क्याँ कहरहा हैं राज?" रितू दिदी बुरीतरह उछल पड़ी थि। ब्रेक पैडल पऱ करीब-करीब वोँ खड़ी हि हौ गई थि। जिसके चलते जिप्सी केँ टायर ज़ोर सें चीखते हुए मार्ग पऱ स्थिर होँ गए थें। मेरीतरफ आश्चर्यचकित नज़रों सें देखते हुए बोलीं___"तेरे पास इतनी सारी दौलत कहाॅ सें आँ गई? तुँ.तूने कहींकोई ग़लतकाम करके तौ नहि यह दौलत अर्जित कि हैं??"
"हाहाहाहा अरे नहि दिदी। " मैने हॅसते हुए कहा___"क्याँ आपको लगता हैं कि आपकायह भइया दौलत पाने केँ लिएकोई ग़लतकाम करेगा?"
"लगता तौ नहि हैं राज। " दिदी कि ऑखें अभि भि फैली हुइ थि, बोलि___"मगर प्रश्न तोँ खड़ा होता हि हैं कि इतनी सारी दौलत अचानक एक् संगमिल जानां केसे संभव हौ सकता हैं?"
"इस दुनियाॅ मे सभीकुछ संभव हैं दिदी। " मैने कहा___"औऱ इसका जीता जागता प्रमाण मे स्वयं हूॅ। "
"मगर केसे मेरे भइया??" रितू दिदी चकितभाव सें बोल पड़ीं____"यह असंभव संभव केसे होँ गय़ा? औऱ अगरऐसा हि हैं तोँ यकीनन राजयह बहोत ख़ुशी कि बात हैं। "
मैने दिदी कों संक्षेप मे सारी स्टोरी बता दि। उन्हें बताया कि केसे एक् अरबपति इंसान नें मुझे अपना बेटा बना लिया औऱ अपनी सारी संपत्ति मेरेनाम कर दि। मैने उन्हें बताया कि मे उसी अरबपति व्यक्ति कि मल्टीनेशनल कंपनी मे जॉब करता थां। मेरेकाम औऱ मेरे नेचर सें प्रभावित होकर वोँ व्यक्ति एक् दिन मेरा मसीहा बन गय़ा।
मैने उन्हें बताया कि आज मे अपने पूरे परिवार केँ संगउसी व्यक्ति केँ अलीशान बॅगले मे शान सें रहताहूॅ। मेरीयह किस्सा सुनकर दिदी आश्चर्यचकित रहगईं थि। बहुतदेर तक उनकेमुख सें कोईबोल नं फूटा।
"यह.यह तौ कमाल हौ गय़ा राज। "फिन दिदी नें खुशी सें फूली नं समाते हुए कहा___"मे समझ सकतीहूॅ मेरे भइया। हाॅ भइया, मे सभीसमझ गई। भगवान नें तुम्हें तेरे अच्छे कर्मों कां फल दिया हैं। उससे तेरीदुख तक़लीफ़ें नहि देखी गई औऱ इसीलिए उसनेउस व्यक्ति कों तेरा मसीहा बनाकर भेज दिया तेरेपास। हाॅ भइया, यही सच हैं। मे बहोत खुशहूॅ तेरेलिए राज। "
"अब तौ आप् इसबात सें बेफिक्र हें न् कि इन सबको मे मुम्बई मे केसे रखूॅगा?" मैने मुस्कुरा करकहा थां।
"हाॅराज। " दिदी नें जिप्सी कों आगे बढ़ाते हुए कहा__"अब मुझेइन लोगों कि कोई चिन्ता नहि हैं। "
"हम्म, अब बताइये औऱ क्याँ जानना हैं आपको?" मैनेबात कों आगे बढ़ाया।
"मे नहि जानती राज कि जौ मे तुझसे कहने वालीहूॅ याँ जानने वालीहूॅ उसका तुम कोपता हैं भि याँ उसका तुझसे कोई ताल्लुक हैं भि कि नहि। " दिदी नें कहा___"मगर फिन भि इसलिए कहरही हूॅ कि तूँ मेरा भइया हैं औऱ तुझेही भि जानने कां हक़ हैं कि घऱ परिवार केँ बीच याँ तेरी बेहन केँ संग क्याँ क्याँ हुआ?"
"जी कहिए नं दिदी। " मैने कहा___"आप् बेझिझक अपनीबात मुझसे शेयरकर सकती हें। "
"मैने पुलिस कि जॉब अपनेशौक केँ लिए तोँ कि हि थि राज। " रितू दिदी नें जैसे कहना शुरुआत किया___"मगर दिल मे यह भि हसरत थि कि मे यहजॉब पूरी ईमानदारी केँ संग करूॅगी। ख़ैर, ड्यूटी ज्वाइन करने सें पहले हि मेरेमन मे यहबात थि कि मे चार्ज़ सम्हालते हि सबसे पहले दादाजी दादीमा केँ केस पऱ काम करूॅगी। यानी मे पता लगाऊॅगी कि उनका एक्सीडेन्ट वास्तव मे एक् हादसा हि थां याँ फिन किसी कि सोची समझीचाल थि? चार्ज़ सम्हालते हि मैनेऐसा किया भि, मगर पुलिस रिकार्ड मे मुझे कहींकोई ऐसा सुराग़ याँ क्लू तक नहि मिला जिससे मुझे संदेह भि होँ सके कि उनका एक्सीडेन्ट सोची समझीचाल कां नतीजा हौ सकता हैं। कहने कां मतलबयह कि मैने दादाजी दादीमा वालेकेस मे बहोत छानबीन कि मगरकुछ भि हाॅथ न् लगा। थक हारकर मैनेउस केस सें अपना ध्यान हटा लिया। यह अलगबात थि कि दिल मे यह मलालअब भि हैं कि मे दादाजी दादीमा केँ केस मे कुछ भि न् करसकी। "
इतनासभी कहने केँ बाद रितू दिदी कुछ लम्हा केँ लिए रुकी औऱ एक् नज़र मेरे चेहरे कि तरफ देखने केँ बादफिन सें सामने कि तरफ देखने लगीं।
"उसकेबाद फिनडैड केँ संग अजीब सि घटनाएॅ होने लगीं। " रितू दिदी नें गहरी साॅस लेने केँ बादफिन सें कहना शुरुआत किया___"सबसे पहले जोँ उनकेसंग अजीब घटना हुई वोँ यह थि कि कोई विदेशी ब्यक्ति उन्हें करोंड़ो कां चूनालगा कर कहीं गायब होँ गय़ा। अख़बार मे इसबात कि ख़बर भि छपी थि। जिसके चलतेडैड कि इज्ज़त पऱ भि असरहुआ। मे जानती हूॅ कि डैड नें उस विदेशी कि खोज मे धरती आसमान एक् कर दिया होगामगर उनके हाॅथकुछ नं लगा। ख़ैर, इस अजीब घटना केँ बादडैड केँ संगफिन सें एक् घटनाघटी। उनकी फैक्ट्री मे आगलग गई। फैक्ट्री मे लगीआग कि जाॅच उन्होंने अपने तरीके सें करवाई थि औऱ रिपोर्ट भि अपने तरीके सें हि बनवाई थि। ऐसा शायद उन्होंने इसलिए किया थां ताकि उनकी रेपुटेशन पर्र फिन सें कोई धब्बा नं लगजाए। हलाॅकि धब्बा लगने सें वोँ तब भि नहि रोंकपाए थें। मैनेजब देखा कि कोई नतीजा हि नहि निकला हैं तौ मैने फैक्ट्री कि जाॅच करने कां स्वयं हि बीड़ा उठाने कां सोचा। मेरेमन मे ऐसा करने कि मात्र दो हि वजहें थि। पहलायह जानना कि ऐसाकौन हैं जिसने डैड कि फैक्ट्री मे आग लगाई? दूसरा यह कि डैड केँ हुएउस भारी नुकसान कि भरपाई करना। ज़ाहिर सि बात हैं कि अगर मुजरिम कां पताचल जाता तोँ उससेइस नुकसान कि भरपाई करली जाती। मगर ऐसा भि न् होँ पाया थां। इसमें सबसे ज़्यादा चौंकानी वालीबात यह हुइ थि कि जब मैने स्वयं जाॅच करने केँ लिएकेस रिओपन करवाया तब गुनगुन शहर कां सारा पुलिस महकमा हि बदल दिया गय़ा थां। हरकोई इसबात सें हैरान थां। मगरसमझ मे किसी कों कुछ नं आया थां। दूसरी हैरानी कि बातयह कि लाख कोशिशों केँ बाद भि उसकेस मे यह नहि पताचल सका कि फैक्ट्री मे आग आख़िर किसने लगाई थि? हलाॅकि इसमें एक् कमज़ोरी यह थि कि डैड नें पूरी ईमानदारी सें कोऑपरेट नहि किया थां। "
इतनाकुछ बोलने केँ बाद रितू दिदी चुप होँ गईं। मैने सोचा शायद वोँ कुछ औऱ बोलेंगी मगरऐसा न् हुआ। उनकी नज़रें सामने रास्ते पऱ हि लगी हुई थि।
"यह तोँ थि घटनाओं कि बातें। " तभी उन्होंने फिन सें कहना शुरुआत किया___"औऱ यहसभी मैने तुझसे इसलिए शेयर कियाराज ताकि तूँ भि जानसके कि यहकेस मेरी नाकामी कां भि हिस्सा हें। जिन्हें मे सुलझा नहि पाई। मगर जबसेयह सभी हालात शुरुआत हुएतब सें मैने हवेली केँ अंदर भि कान लगाना शुरुआत कर दिया थां। उससे ज़्यादा तौ नहि मगर इतना अवश्य सुना मैने कि तेरा ज़िक्र बारबार हवेली केँ अंदर मेरे माॅमडैड केँ बीचहुआ। एक् बार तोँ मैनेयह भि सुना कि यहसभी तुमने किया हैं। मे यहसुन कर हैरान तोँ हुईँ मगर अधिक ध्यान नहि दियाकभी। क्योंकि तब मेरे दिमाग़ मे भि यही बातें थि कि तुँ यहसभी कर हि नहि सकता। मगर अधिक दिनों तक मे तुझेही भि नज़रअंदाज़ नहि करपाई। क्योंकि कहीं नं कहीं मेरे भि दिमाग़ मे यहबात आँ हि गई थि कि मेरेडैड कां अगरकोई सबसे अधिक बुरा करना चाहेगा तौ वोँ केवल तुँ हि थां। इसलिए मैंने उनसब घटनाओं मे तुम को जोड़ना शुरुआत किया औऱ फिन मुझे भि यह लगनेलगा कि तेराइन सब घटनाओं मे ताल्लुक यकीनन होँ सकता हैं। "
यहसभी कहने केँ बाद रितू दिदी एकदम सें चुप हौ गईं। जिप्सी पुल केँ पास पहुॅच चुकी थि। इसलिए जिप्सी रोंककर रितू दिदी मेरीतरफ अजीबभाव सें देखने लगीथीं। जैसे मेरे चेहरे सें हि समझ जानां चाहती हों कि सच्चाई क्याँ हैं।
"मेरा हि तोँ इनसब घटनाओं मे ताल्लुक थां दिदी। " मैने गहरी साॅस लेतेहुए जैसे उनकेऊपर बम फोड़ा__"हाॅ दिदी। आपनेजिन घटनाओं कां ज़िक्र कियाउन सबका कर्ता धर्ता मे हि तोँ थां। वोँ विदेशी डीलर भि मे हि थां जिसने बड़े बापू सें वोँ डील कि औऱ फिन बिनाकुछ बताए गायब हौ गय़ा थां। उसकेबाद उनकी फैक्ट्री मे आग भि मैने हि लगाई थि। कहने कां मतलबयह कि बड़े पिताजी केँ संग जौ कुछ भि अभि तक बुराहुआ हैं उसका जिम्मेदार मात्र मे हि रहाहूॅ औऱ आगे भि जोँ कुछ उनकेसंग बुरा होगा उसका भि जिम्मेदार मे हि होऊॅगा। "
"क्याऽऽऽ????" रितू दिदी मेरीबात सुनकर बुरीतरह उछल पड़ीथीं, बोलीं___"नहि नहि मे नहि मान सकतीराज। भला तूँ यहसभी केसेकर सकता थां? तुँ तौ यहाॅ थां हि नहि। "
"आपके मानने याँ न् मानने सें सच्चाई बदल नहि जाएगी दिदी। " मैने कहा___"औऱ हाॅ, आपको तोँ अभि यह भि नहि पता कि फैक्ट्री केँ तहखाने मे कुछ थां भि याँ नहि?"
"क्याँ मतलब??" रितू दिदी कि ऑखें फैली___"फैक्ट्री केँ तहखाने मे भला क्याँ थां जिसकी बातकर रहा हैं तुँ?"
"आपको क्याँ लगता हैं दिदी?" मैने फीकी सि मुस्कान केँ संग कहा___"आपके डैड इतनेकम कमीने इंसान हें? अरे नहि दिदी, वोँ तोँ ऊॅचे दर्ज़े केँ पापी हें। कपड़ा मील कां ब्यापार व फैक्ट्री तौ महज दिखावा केवल थि जबकि उनकाअसल कारोबार तोँ ड्रग्स अफीमचरस आदि कां थां। लेकिन यह कारोबार चूॅकि कानून कि नज़र मे ग़ैर कानूनी होता हैं इसलिए बड़े पिताजी इस कारोबार कों सबकी नज़रों सें छुपाकर करते थें। फैक्ट्री केँ अंदर मौजूद उस तहखाने मे उनकीवही काली दुनियाॅ कां काला चिट्ठा मौजूद थां जिसे मैने फैक्ट्री मे वक्तबम लगाने सें पहले हि गायबकर दिया थां। मे नहि चाहता थां कि उनकायह कारनामा कानून कि नज़र मे आए। मे तौ अपने हाॅथों सें उन्हें हर सज़ा देना चाहता हूॅ। कानून कि चपेट मे आने सें भला मे केसे उन्हें अपने तरीके सें सज़ादे सकता थां? इसलिए मैने तहखाने सें उनका वोँ सारा ज़खीरा गायबकर दिया जोँ ग़ैर कानूनी थां। "
मेरीयह बातें सुनकर रितू दिदी कि ऑखें हैरत सें फटी कि फटीरह गई थि। उनके चेहरे पर्र हैरत औऱ अविश्वास कां सागर मानो हिलोरें लेँ रहा थां।
"क्याँ सच मे इस सबमें तेरा हि हाॅथ थां राज?" रितू दिदी नें अविश्वास भरे लहजे सें कहा___"मगर यहसभी केसे मुमकिन होँ सकता हैं मेरे भइया?यह सभी केसेकर लिया तूने?बंद फैक्ट्री केँ अंदर औऱ वोँ भि तहखाने केँ अंदर पहुॅचना इतनी आसानबात तौ न् थि। उस सूरत मे तोँ बिलकुल भि नहि जबकि तुँ कभी फैक्ट्री गय़ा हि नहीं थां। फिन केसेयह सभीकर लिया तूने?"
"मन मे सच्ची लगन होँ तौ सभीकुछ मुमकिन हौ जाता हैं दिदी। " मैने कहा___"ऊपर वाला भि फिन आपकेलिए राहें आसानकर देता हैं। यह तोँ मुझेपता हि थां कि बड़े पिताजी कि शहर मे कहीं पऱ कपड़ा मील कि फैक्ट्री हैं। पर्र चूॅकि मे कभी फैक्ट्री गय़ा नहि थां इसलिए मैने फैक्ट्री केँ संबंध मे जानकारी हाॅसिल करने केँ लिए अपने साथीपवन कों लगाया। उसने मुझे फैक्ट्री केँ संबंध मे सारी बातें बताई। उसकेबाद मैने प्लान बनाया औऱ इस प्लान मे गुड़िया(निधी) नें भि मेरासंग देने केँ लिए ज़बरदस्ती मेरी वाइफ कां रोल किया। उसकेबाद मुझेपवन नें बताया कि बड़े बापू कां एक् बिजनेस पार्टनर हैं जिसका नाम अरविंद सक्सेना हैं, इतना हि नहि इन दोनो पार्टनर्स केँ बीच बहोत हि गहरे संबंध हें। पवन नें जब गहरे संबंधों कि बात कि तोँ मे समझ न् पाया थां कि यह केसे संबंधों कि बातकर रहा हैं। मेरे पूछने पऱ उसने बताया कि बड़े पिताजी औऱ सक्सेना आपस मे एक् दूसरे कि बीवियों केँ संगसभी कुछकर लेते हें। यहबात जानकर मेरे पैरों तले सें ज़मीन निकल गई। मैने सोचा कि बड़े पिताजी भलाऐसा केसेकर सकते हें?? मगर मे जानता थां कि ऐसे ब्यक्ति सें भला अच्छे कर्म कि उम्मीद केसे कि जा सकती हैं? ख़ैर, पवन सें अरविंद सक्सेना केँ बारे मे सुनकर मैनेपवन सें कहा कि सक्सेना केँ खिलाफ़ कोईऐसा सबूत हाॅसिल करे जिसके आधार पर्र वोँ कुछ भि करने कों सजधजकर होँ जाए। मेरे कहने पर्र पवन नें वैसा हि किया औऱ फिन एक् दिनपवन नें मुझे बताया कि उसने सक्सेना केँ घऱ सें कुछ फोटोग्राफ्स औऱ वीडियोज़ हाॅसिल किये हें। जिनमें सक्सेना बेहद आपत्तिजनक स्थित मे हैं। मैनेपवन सें उन फोटुओं कों कुरियर द्वारा मॅगवा लिया। इसकेबाद मैने सक्सेना कों तेल कि धार पर्र लेने मे ज़रा भि देरी न् कि। कहने कां मतलबयह कि मैनेउन फोटोग्राफ्स केँ आधार पऱ सक्सेना कों इतना मजबूर कर दिया कि वोँ कुछ भि कर सकता थां। सबसे पहले मैने उससे बड़े पिताजी केँ कारोबार कि सारी जानकारी ली उसकेबाद मैने उससे बड़े बापू कि औऱ भि बहोत सारी जानकारी हाॅसिल कि। सक्सेना दरअसल थोडा फट्टू किस्म कां व्यक्ति थां। उसेइस बात कां पताचल गय़ा थां कि उसका पार्टनर उसकी ग़ैर जानकारी मे ग़ैर कानूनी धंधा भि करता हैं औऱ उसकेकई ऐसे खतरनाॅक लोगों सें भि संबंध हें जिनका रिकार्ड कानून कि फाइलों मे वर्षों सें दबा पड़ा हैं। "
मे इतनाकुछ कहने केँ बादकुछ लम्हा केँ लिए रुका औऱ फिन कहना शुरुआत किया___"सक्सेना कों डर थां कि कहीं वोँ किसीदिन कानून कि चपेट मे नं आँ जाए। इस लिए वोँ बड़े बापू सें पार्टनरशिप तोड़ना चाहता थां मगर वोँ ऐसाकर नहि पारहा थां। उसेयह भि डर थां कि कहीं उसके पार्टनर कों उस पऱ शक न् होँ जाए औऱ उसे भि इस धंधे मे न् लपेट लें। यहबात मुझेतब पताचली थि जब मे स्वयं सक्सेना सें मिला थां। सक्सेना सें मैने एक् सौदा किया। वोँ सौदायही थां कि मे उसे औऱ उसकी फैमिली कों सुरक्षित विदेश भेजने कां बंदोबस्त कर दूॅगा, इसके बदलेउसे वोँ करना पड़ेगा जोँ मे कहूॅगा। मैनेउसे अपना सारा प्लान समझाया। सारीबात सुनकर पहले तोँ वोँ मेरीबात मानने सें इंकार करनेलगा। उसेडर थां कि कहींइस सबमें उसकीजान पर्र नं बनआए। पर्र मैनेउसे अच्छी तरह समझाया औऱ उसे इसकेलिए राज़ी किया। "
"इसका मतलब फैक्ट्री मे लगीआग तूने सक्सेना केँ द्वारा लगवाई थि?" सहसा रितू दिदी मेरीबात केँ बीच मे हि बोल पड़ी___"मगर जैसा कि तूने बताया कि तहखाने मे डैड कां ग़ैर कानूनी ज़खीरा मौजूद थां तौ उसे केसे गायब करवाया तूने? क्याँ उसे भि सक्सेना केँ द्वारा हि गायब किया?"
"सक्सेना केँ संगपवन थां। " मैने बताया___"सक्सेना कों तहखाने केँ लाॅक कां पासवर्ड पता थां। उसकाकाम थां तहखाने कां लाॅकखोल कर तहखाने मे समयबम लगाना। पवन कां काम केवलयही थां कि तहखाने मे मौजूद उस ग़ैर कानूनी ज़खीरे कों तहखाने सें निकाल कर अपने कब्जे मे लेँ लें। प्लान केँ अनुसार पवनउस सारे सामान कों पुलिस हेडक्वार्टर मे कमिश्नर केँ हवाले कर देगा। पुलिस कमिश्नर कों ऊपर सें आदेश थां कि उस सामान कों ब्यक्तिगत तौर पर्र रखे औऱ जबउस सामान कि ज़रूरत पड़े तौ उसेउसी तरह मेरे हवाले करदें जैसे वोँ सामान पवन केँ द्वारा उन्हें सौंपा गय़ा थां। "
"यह तुँ क्याँ कहरहा हैं राज?" रितू नें बुरीतरह चौंकते हुए कहा___"भला पुलिस कां कमिश्नर ऐसा केसेकर सकता हैं? दूसरी बातऊपर सें उसेऐसा करने कां आदेश केसेमिल सकता हैं? यह तोँ बड़ी हि अविश्वसनीय बात हैं?"
"यही तौ मज़ेदार बात हैं दिदी। " मैने मुस्कुरा कर कहा___"जिस व्यक्ति नें मुझे अपना बेटा मानकर अपनी अरबों कि संपत्ति मेरेनाम कि उसकानाम जगदीश ओबराय हैं। जगदीश ओबराय एक् बहोत बड़ा बिजनेस टाइकून हैं औऱ उसका संबंध ऐसेऐसे लोगों सें हैं जिसके बारे मे व्यक्ति सोच भि नहि सकता। उसी केँ कहने पर्र ऊपर सें यहाॅ कमिश्नर केँ पास वोँ आदेशआया थां औऱ इसके पहले भि सारा पुलिस महकमा भि बदला गय़ा थां। सारा पुलिस महकमा बदलने कां केवलयही मकसद थां कि बड़े पिताजी इतनी आसानी सें पुलिस महकमें मे कोई सेंध नं लगा सकें। पहले वाले उनके सारे पुलिस केँ कनेक्शन समाप्त करना भि ज़रूरी थां। इसीलिए ऐसा किया गय़ा थां। यहअलग बात हैं कि आज भि बड़े बापू औऱ आपकेलिए यह सारी बातें रहस्य बनी हुईँ थि। "
"ओह माँ गाड। " रितू दिदी कि ऑखें आश्चर्य सें फटी पड़ी थि, बोलि___"कोई सोच भि नहि सकता कि तूने इतना बड़ा कारनामा अंजाम दिया होगा। मुझे तौ अभि भि यकीन नहि होँ रहा हैं कि यहसभी तूने किया हैं। ख़ैर, जैसा कि तूने बताया कि डैड कां सारा ग़ैर कानूनी सामान आज भि पुलिस कमिश्नर केँ पास सुरक्षित मौजूद हैं, औऱ वोँ उस सामान कों तेरे हवाले तभी करेंगे जब तुम्हें उस सामान कि ज़रूरत होगी। मेरा प्रश्न यह हैं कि उस सामान केँ द्वारा आने वाले वक्त मे क्याँ करने वाला हैं तूँ?"
"आपकेइस प्रश्न कां जवाब बहोत हि सीधा औऱ साफ हैं दिदी। " मैने सपाटभाव सें कहा___"मे चाहूॅ तोँ आज यहीं पर्र खड़े खड़े बड़े बापू कों कानून कि ऐसी चपेट मे ला सकताहूॅ जहाॅ सें वोँ सात जन्मों मे भि उबर नहि पाएॅगे। मगर मे यहकाम इतना जल्द करूॅगा नहि। क्योंकि एक् हि बार मे मे उन्हें ऐसा झटका नहि देना चाहता कि वोँ उस झटके सें एक् हि बार मे खाक़ मे मिल जाएॅ। बल्कि मे तौ उन्हें थोडा थोडा करके झटका देना चाहता हूॅ औऱ उन्हें यह मौका भि देना चाहता हूॅ कि वोँ अपनीतरफ सें जितनी भि कोशिश करनी होँ कर लें अपने बचाव केँ लिए। "
"ओह तौ यहबात हैं। " रितू दिदी कों जैसेसभी कुछसमझ आँ गय़ा थां, बोलीं___"डैड कां वोँ सारा ग़ैर कानूनी सामान तेरेलिए किसी तुरुप केँ इक्के सें कम नहि हैं। ख़ैर, तोँ अबआगे कां क्याँ प्लान हैं तेरा?"
"अभि कां तोँ यही प्लान हैं दिदी कि पहलेइन सभी लोगों कों मुम्बई पहुॅचा करइन सबको सुरक्षित करदूॅ। " मैने गहरी साॅस ली___"उसके बाद मे यहाॅ वापस आऊॅगा औऱ आपकेसंग मिलकर कुछअलग औऱ अनोखा करने कि कोशिश करूॅगा। "
अभि हम् बात हि कररहे थें कि तभी वहाॅ पर्र एक् कैबआकर रुकी। हम् दोनो कां ध्यान उसतरफ गय़ा। कुछ हि पलों मे कैब सें करुणा चाची, दिव्या, शगुन औऱ हेमराज मामाजी उतरे। मे औऱ दिदी भि जिप्सी सें उतरकर उनकेपास गए। कैब वाले कों उसका रुपया देने केँ बाद वोँ सभी हमारी तरफ मुड़े। करुणा चाची कि नज़र जैसे हि मुझ पर्र पड़ी तोँ उनकी ऑखों मे ऑसू तैरते दिखाई देनेलगे। वोँ तेज़ी सें मेरीतरफ बढ़ीं औऱ फिन मुझे अपने सीने सें लगा लिया। मे भि अपनी चाची सें मिलकर थोडा भावुक सां हौ गय़ा लेकिन फिन मैने अपने जज़्बातों कों काबू किया औऱ फिन उनसेअलग हौ गय़ा। मेरी नज़र दिव्या पर्र पड़ी तोँ वोँ मुझे हि देखरही थि। मैने अपनी बाहें फैला दि तौ वोँ एकदम सें मेरीतरफ दौड़ पड़ी औऱ मुझसे लिपट गई। उससे मिलने केँ बाद मैने शगुन कों प्रेम दिया।
थोड़ी देर सबसे मिलने केँ बाद मैने उन्हें जिप्सी मे बैठने कों कहा तौ वोँ सभी जिप्सी मे बैठगए। सबके बैठते हि दिदी नें जिप्सी कों वापस मोड़कर आगे बढ़ा दिया। मे दिदी केँ संगआगे हि बैठा थां बाॅकी सभी पिछली शीट्स पऱ बैठे थें। कुछ हि टाइम मे हम् सभी फार्महाउस पहुॅच गए। फार्महाउस केँ अंदर जाकर करुणा चाची नैना फूफी सें मिली औऱ पवन कि माॅ बेहनआदि सें। उसकेबाद नैना फूफी नें चाची औऱ मामाजी जी सें खाने कां पूॅछा तौ वोँ बोलीं कि वोँ घऱ सें खापीकर हि चले थें। ख़ैर, लेडीज बर्थडे पार्टी एक् स्थान बैठकर बातों मे लगगईं जबकि मे अपने मित्र पवन औऱ आदित्य केँ पास आँ गय़ा। साम कों हमे मुम्बई केँ लिए निकलना भि थां।
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प्रतिमा अपने कमरे केँ अटैच बाथरूम सें बाहर् निकली। सामने बेड पर्र पूरीतरह सें निर्वस्त्र पड़े शिवा कि नज़र जैसे हि अपनीमाॅ पऱ पड़ी तौ उसकेमुझ सें अहह निकल गई। प्रतिमा केँ गोरे सफ्फाक शरीर पर्र इससमय सिर्फ एक् पिंककलर कां टावेल थां। जिसे वो अपनी भारी भरकम छातियों कों आधे सें ढॅके थि तथा नीचे उसकी मोटी चिकनी औऱ गोरी जाघों तक कों ढॅकाहुआ थां। जब सें रितू हवेली सें गई थि तब सें दोनोमाॅ बेटा कमरे मे वासना औऱ हवस केँ खेल मे डूबेहुए थें। प्रतिमा खुश थि कि उसे बेटे केँ रूप मे एक् जवान मर्दमिल गय़ा थां जौ उसके शरीर कि गर्मी कों शान्त करने मे कोईकसर नहि छोंड़ेगा। अजय सिंहअब जवानी केँ दौर सें बाहर् निकल चुका थां। उसकेसंग सेक्स करने मे प्रतिमा कों मजा तोँ आता थां लेकिन पूर्ण संतुष्टि नहि मिलती थि।
शिवा, जोँ कि अजय सिंह कि हि कार्बन काॅपी थां। गुण औऱ शक्ल सें वोँ अपने बाप पर्र हि गय़ा थां। जब सें उसने जवानी कि देहलीज़ पर्र क़दमरखा थां तब सें उसकी नज़रें घऱ कि लड़कियों औऱ औरतों पर्र हि जमी रहती थि। वोँ उनसब केँ जिस्मों कों भोगने कि लालसा मे रातदिन लगा रहता थां। मगरडर वभय कि वजह सें वोँ कभी ज़्यादा आगेबढ़ नहि पाया थां। अपनीमाॅ पऱ उसका सबसे अधिक क्रश थां। अक्सर वोँ अपने बाप कों प्रतिमा कों पेलते हुए देखा करता थां। प्रतिमा केँ भारी भरकम बूब्स औऱ गदराया हुआबदन उसके अंदर बुरीतरह वासना कि आग भड़का देता थां।
लेकिन उसकी चाहतआज वर्षों बाद पूरी होँ चुकी थि। जिस स्त्री पऱ उसका सबसे अधिक क्रश थां उस महिला केँ बदन कों वो भोगरहा थां। वोँ अपने बाप कां शुक्र गुज़ार थां कि उसनेउसे यह अनमोल तोहफा दिया थां। रितू जैसे हि हवेली सें निकली थि वैसे हि शिवा औऱ प्रतिमा एक् दूसरे कि बाहों मे समागए थें। हवेली मे उन दोनो केँ अलावा दूसरा कोई न् थां। नौकर चाकर दोपहर मे अपने अपनेरूम मे चले जाते थें। इसलिए इस तन्हाई कां भरपूर फायदा उठाया थां इन दोनो नें।
शिवा कों याद नहि कि पहलेदिन सें अब तक वोँ कितनी बार अपनीमाॅ कों भोग चुका थां। उसे तौ बस इतनासमझ आँ रहा थां कि उसका अभि दिल नहि भरा हैं। यहसोच कर वोँ फिन सें अपनीमाॅ पऱ चढ़ जाता औऱ अलगअलग पोजीशन मे अपनीमाॅ कों रौंदता रहता। प्रतिमा कों भि जवान मर्द कां यहजोश बहोत मजादे रहा थां। इसलिए वोँ स्वयं भि उसीजोश सें अपने बेटे कां पूरीतरह सें संग देती थि।
"ऐसे क्याँ देखरहे होँ शिव?" अपने सामने प्रतिमा अपने बेटे कों ऐसे हि संबोधित करनेलगी थि, बोलि___"क्याँ दिल नहि भरा अभि?"
"हाॅ मेरी रंडीमाॅ। " शिवा नें अपने लन्ड कों ज़ोर सें मसलते हुए कहा___"तुमको जितना भि पेलूॅ उतना हि लगता हैं कि अभि औऱ पेलूॅ। शपथ सें आज तक जितनी लड़कियों कों अपने नीचे सुलाया हैं उनसब मे सें तुम् सबसेऊपर हौ। तुम्हारे जैसाबदन औऱ तुम्हारे जैसीअदा किसी औऱ मे नहि देखी मैने। "
"केसे देखते मेरेशिव। " प्रतिमा नें बड़ीअदा सें शिवा केँ पासआते हुए कहा___"वोँ सभी लड़कियाॅ तुम्हारी माॅ तोँ नहि थि न्? वोँ सभी तुम्हें एक् माॅ जितना प्रेम औऱ समर्पण भाव केसेकर सकतीथीं?"
"हाॅयह बात तौ सचकही तुमने। " शिवा नें प्रतिमा केँ टावेल केँ छोर कों पकड़कर अपनीतरफ ज़ोर सें खींचा तौ टावेल प्रतिमा केँ शरीर सें अलग होताचला गय़ा औऱ प्रतिमा भि उसी झोंक मे शिवा केँ ऊपर आँ गई। जबकि अपनेऊपर प्रतिमा केँ आते हि शिवा नें कहा___"तुम् एक् स्त्री केँ संगसंग मेरीमाॅ भि तौ होँ। इसीलिए इतना प्रेम औऱ समर्पण हैं तुममें। तभी तोँ मेरादिल बारबार यही कहता हैं कि एक् बार औऱ होँ जाए। "
"तोँ करो नं शिव। " प्रतिमा नें कहने केँ संग हि झुककर शिवा केँ होठों कों चूम लिया___"रोंका किसने हैं तुम्हें? मे तोँ स्वयं भि यही चाहती हूॅ कि तुम् मुझेइस हवेली केँ हर ज़र्रे पर्र लेँ जाकर बुरीतरह सें प्रेम करो। मुझेऐसे ऐसे तरीके सें पेलो कि पूरी हवेली मे मेरी चीखें गूॅजने लगें। "
"हाय कितना विल्ड पसन्द हैं तुम्हें?" शिवा नें प्रतिमा कि एक् छाती कों बुरीतरह मसल दिया, बोला___"तुम् तौ वोँ चीज़ हौ डियरमदर कि तुम्हें एक् अकेला मर्द संतुष्ट नहि कर सकता। तभी तोँ डैड तुम्हारे लिए अपनेसंग संग एक् औऱ मर्द कों लेकरआते थें। क्याँ नाम थां उसका?अरे हाॅ सक्सेना। ओहरे वोँ साला केसे केसे मेरीइस राॅड माॅम कों पेलता रहा होगा। "
"क्यूं जलन होँ रही हैं तुम्हें??" प्रतिमा नें सहसा मुस्कुरा कर पूछा।
"जलन किसबात कि डियरमदर?" शिवा नें कहा__"यह तोँ तुम्हारी ख्वाहिशों कि बात हैं। सबको अपनी ख्वाहिशें पूरा करना चाहिए। तुमने भि वही किया, सो मुझे इसमें जलने कि क्याँ ज़रूरत हैं?"
"मतलब मुझेअगर बाहर् कां कोई भि व्यक्ति पेले तौ तुम्हें कोई तकलीफ़ नहि हैं??" प्रतिमा नें कहा।
"जब डैड कों हि कोई तकलीफ़ नहि हुइ तोँ मुझे क्यूं होगीभला?" शिवा नें कहा___"ख़ैर छोंड़ो इन बातों कों औऱ आओ एक् बार औऱ घमासान पेलाई होँ जाए। "
"क्यूं नहि शिव। " प्रतिमा नें मुस्कुराते हुए कहा__"मुझे भि एक् बार औऱ करने कि ख़्वाहिश हैं। "
कहने केँ संग हि प्रतिमा नें अपने एक् हाॅथ कों सरकाकर नीचे शिवा केँ मुरझाए हुए लन्ड कों पकड़ लिया औऱ उसे सहलाने लगी। इधर शिवा नें भि प्रतिमा कि छातियों कों हाथों सें पकड़कर मसलने लगा। अभि यहसभी यह दोनोकर हि रहे थें कि बगल सें एक् स्टूल पऱ रखे मोबाइल कि घंटीबज उठी। मोबाइल केँ बज उठने सें दोनो केँ हि चेहरे पऱ अप्रिय भाव उभरे।
"हैलो। " मोबाइल उठाते हि शिवा नें कहा।
".। " उधर सें कुछकहा गय़ा।
"क्याऽऽऽ???" शिवा अपनेडैड कि बातसुन कर बुरीतरह चौंका थां।
".। " उधर सें फिनकुछ कहा गय़ा।
"ऐसा केसे हौ सकता हैं डैड?" शिवा केँ चेहरे पऱ तकलीफ़ केँ भावउभर आए, बोला___"कहीं ऐसा तौ नहि कि दिदी कों उसकापता चल गय़ा होँ औऱ फिन उन्होंने उसे अपने रास्ते सें हटा दिया हौ? अगरऐसा कर भि दिया होगा तौ हम् उन पऱ शक तौ कर सकते हें मगर उनके सामने उन पऱ इसबात कां इल्ज़ाम नहि लगा सकते। "
".। " उधर सें कुछदेर तक कहा गय़ा।
"ऐसाकब तक चलेगा डैड?" शिवा केँ चेहरे पर्र सहसा गुस्से केँ भाव आए___"हरबार हमारे हाथ नाकामी हि लगती हैं। हमेंअब स्वयं मैदान मे उतरना पड़ेगा। इसतरह तौ हमारा एक् एक् व्यक्ति लापता होता रहेगा औऱ हम् कुछकर हि नहि पाएॅगे। इसलिए हमें सीरियसली यहसभी स्वयं हि करना पड़ेगा। रितू दिदी कि गतिविधियाॅ स्पष्ट समझ मे आँ रही हें कि वोँ हमारे खिलाफ़ हें। अगर विराज सें वोँ मिल चुकी हें तौ साफ हैं कि उन्हें हमारे बारे मे सभीकुछ पताचल गय़ा होगा औऱ अब वोँ उस कमीने विराज कां संगदे रही हें। हाॅडैड, दिदी भले हि आपकी बेटी हें मगरबात जब अन्याय औऱ जुर्म कि आएगी तोँ वोँ हमारा संग नहि देंगी। यह उनके कैरेक्टर सें साफपता चलता हैं। "
".। " उधर सें फिनकुछ कहा गय़ा।
"यसडैड। " शिवाकह उठा___"अब तोँ साफसाफ औऱ खुलकर खेल होना चाहिए। "
".। " उधर सें अजय सिंह नें कुछकहा।
"ओकेडैड। " शिवा नें कहा___"आप् आँ जाइये। मे औऱ माॅम हवेली मे हि हें। "
इसकेसंग हि संबंध विच्छेद हौ गय़ा। शिवा नें रिसीवर कों केड्रिल पऱ रखा औऱ धम्म सें बेड पर्र चित्त लेट गय़ा। प्रतिमा उसी कों एकटक देखेजा रही थि।
"क्याँ बात हुईँ डैड सें?" प्रतिमा नें पूछा।
"डैड बतारहे थें कि उन्होंने जिस व्यक्ति कों दिदी केँ पीछे लगाया थां। " शिवा नें कहा___"उस व्यक्ति कां मोबाइल बहुतदेर सें बंदबता रहा हैं। "
"क्याऽऽ???" प्रतिमा हैरान____"इसका मतलब हमारा यह व्यक्ति भि बली कां बकरा साबित हौ गय़ा। "
"यहसभी आपकी बेटी कि वजह सें हौ रहा हैं माॅम। " शिवा नें कठोरभाव सें कहा___"उसी नें हमारे उस व्यक्ति कां गेम बजाया होगा। उसे पता हैं कि अगर वोँ ऐसा करेगी तोँ हम् उस पर्र बेवजह औऱ बिना सबूत केँ कोई इल्ज़ाम नहि लगा सकेंगे। मगरअब हम् भि बताएॅगे उसे कि हमसे गद्दारी करने कां क्याँ अंजाम होता हैं? डैड नें भि यहीकहा हैं कि यहकाम रितू दिदी कां हि हैं औऱ अबडैड नें भि फैंसला कर लिया हैं कि वोँ स्वयं इससभी कां पता करेंगे औऱ दिदी कों उनके किये कि सज़ा देंगे। "
"उफ्फ क्याँ करूॅइस लड़की कां?" प्रतिमा नें कसमसाते हुए अपने माॅथे पऱ हथेली मारी___"अपने हि माॅ बाप कों गर्त मे डुबाने पऱ तुली हुईँ हैं यह। "
"अब आपकीउस बेटी केँ संगकोई रियायत नहि होगी माॅम। " शिवा नें गुस्से सें कहा___"अभि तक यहीसोच कर हमनेउस पर्र कोई कठोर क़दम नहि उठाया थां कि चलोकोई बात नहि हमारी अपनी हैं वोँ, मगरअब नहि। उसने हमसे बगावत कि हैं माॅम। अपने हि माॅ बाप कां सर्वनाश करने पऱ तुली हुइ हैं वोँ। इसलिए अबउसे उसकेइस जघन्य अपराध कि शख्त सज़ा मिलेगी। "
प्रतिमा कुछकह न् सकी। अंदर हि अंदर काॅपकर रह गई वोँ। उसे अपनी बेटी केँ लिएदुख तोँ हुआ थां लेकिन उसे भि इसबात कां एहसास थां कि उसकी बेटी नें अपने पैरेंट्स केँ खिलाफ़ जाकर ग़लत किया हैं। वोँ अपने पति औऱ बेटे कों अच्छी तरह जानती थि। वोँ अब किसी भि सूरत मे रितू कों मुआफ़ करने वाले नहि थें। उसे स्वयं भि रितू केँ इस कृत्य पर्र क्रोध आयाहुआ थां। मगर वोँ कर भि क्याँ सकती थि? अब तौ बस वोँ मन हि मन ईश्वर सें प्रार्थना कर सकती थि कि सभीकुछ ठीक होँ जाए।
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इधर रितू केँ फार्महाउस पऱ!
मे, आदित्य औऱ पवनआपस मे बातें हि कररहे थें कि सहसा कमरे केँ दरवाजे पर्र बाहर् सें नाॅक हुइ। पवन नें उठकर दरवाजा खोला तोँ देखा बाहर् रितू दिदी खड़ी थि। दिदी कों देखते हि पवन एक् तरफहट गय़ा तोँ दिदी अंदर आँ गई। मैने दिदी केँ चेहरे पऱ हल्का तकलीफ़ केँ भाव देखे तौ चौंका।
"क्याँ बात हैं दिदी?" मैंने उनकेपास आकर पूछा__"सभी ठीक तोँ हैं नां?"
"हाॅसभी ठीक हैं राज। " रितू दिदी नें कहा___"मे यह कहनेआई हूॅ कि तुम् सबको अभि यहाॅ सें निकलना होगा गुनगुन केँ लिए। क्योंकि बाद मे संभव हैं कि डैड अपने किसी अन्य आदमियों कों यहाॅ रास्तों पऱ घेरा बंदी केँ लिएलगा दें। हलाॅकि उन्हें यहपता नहि हैं कि तुँ अभि यहीं हैं याँ यहाॅ सें जा चुका हैं। मगर हालात बदल चुके हें। "
"यह आप् क्याँ कहरही हें दिदी?" मैने चौंकते हुए कहा__"हालात तोँ बदलेहुए हि थें उसमें अब क्याँ हौ गय़ा हैं?"
"बहोत कुछहुआ हैं मेरे भइया। " रितू दिदी नें कहा___"डैड कों मुझ पर्र पहले सें शक थां इसलिए आज उन्होंने मेरे पीछे अपना एक् व्यक्ति लगाया हुआ थां जिसे मैनेबीच रास्ते पऱ हि धर लिया थां औऱ फिनउसे बेहोश करके यहाॅ लेँ आई थि। अब ज़ाहिर सि बात हैं कि डैड नें अपने व्यक्ति सें मोबाइल पऱ जानकारी प्राप्त करनी चाही होगीमगर जब वोँ यह जानेंगे कि उनके व्यक्ति कां मोबाइल हि बंद हैं तोँ उन्हें समझते देर नहि लगेगी कि मैने उनके व्यक्ति कों गिरफ्तार कर लिया हैं याँ फिनउसे ठिकाने लगा दिया हैं। उस सूरत मे वोँ मुझ पऱ बेहद क्रोध होंगे औऱ संभव हैं कि मेरी तलाश मे घऱ सें स्वयं हि निकल लें। अगर उन्होंने ऐसा किया तौ समझलो उनकेसंग औऱ भि व्यक्ति होंगे जौ यहाॅ केँ हर रास्तों पऱ फैल जाएॅगे। ऐसे मे तुम् लोगों कां यहाॅ सें गुनगुन केँ लिए निकलना मुश्किल होँ जाएगा। इसीलिए कहरही हूॅ कि तुम् सभी जितना जल्द होँ सके यहाॅ सें जल्दी निकलने कि तैयारी करो। बाहर् मेरी जिप्सी कों मिलाकर दो गाड़ियाॅ हें। उन दोनो गाड़ियों मे तुम् सभी धीरे-धीरे आँ जाओगे। मगर सामान कुछ भि नहि जा पाएगा। इसलिए सामान कों यहीं छोंड़ देना। सारा सामान यहाॅ सुरक्षित हि रहेगा। "
"आपने तौ कह दिया दिदी। " मैने सहसा दुखीभाव सें कहा___"कि मे इन सबको लेकर यहाॅ सें चला जाऊॅ। मगर मे जानता हूॅ कि आज केँ वक़्त मे आप् कितने बड़े ख़तरे मे हें। मे आपकोऐसे अकेले छोंड़ कर केसे यहाॅ सें चला जाऊॅ दिदी? मेरे जाने केँ बादअगर आपकोकुछ होँ गय़ा तौ सारी ज़िंदगी मे अपने आपको क्षमा नहि कर पाऊॅगा। "
"चुपकर तुँ। " दिदी नें मुझे ज़बरदस्ती झिड़क दिया, हलाॅकि मे जानता थां कि वोँ अपने अंदर केँ जज़्बातों कों शख्ती सें दबारही थि, बोलीं___"जब देखो इमोशनल होता रहता हैं। अब ज़्यादा केहना नहि औऱ चुपचाप यहाॅ सें सबको लेकर निकल। "
"मे कहीं नहि जाऊॅगा आपको अकेला छोंड़ कर। " मेरी ऑखों मे ऑसू आँ गए।
"तुम्हे मेरी क़सम हैं मेरे भइया। " रितू दिदी नें झटके सें मेरा हाॅथ पकड़कर अपनेसिर पऱ रख लिया थां___"तूँ यहाॅ सें सबको लेकर अभि इसी वक़्त जाएगा। मेरी चिन्ता मतकर। तेरी दिदी कोई इतनी भि गैर मामूली नहि हैं जिसेकोई भि ऐरा ग़ैरा हजमकर जाएगा। अरे मे तेरी बेहनहूॅ राज। जिसका भइया इतना प्रेम करता होँ उसका ईश्वर भि कुछ नं कर सकेंगे। औऱ फिनबस दोदिन कि हि तोँ बात हैं न् मेरे भइया। फिन तोँ तूँ आँ हि जाएगा नं मेरेपास। तूँ चिन्ता मतकर, मे स्वयं कों ऐसी स्थान छुपा लूॅगी कि तेरेआने सें पहले मेरा बाप तौ क्याँ कोई भि माँ कां लाल मुझे ढूॅढ़ नहि पाएगा। चलअब तुँ बेफिक्र होकरजा। "
यहकहकर दिदी एक् लम्हा केँ लिए भि नहि रुकीं। बल्कि कहने केँ संग हि कमरे सें बाहर् चलीगईं। उनके जाने केँ बाद भि कुछदेर तक मे भौचक्का सां खड़ारह गय़ा थां। होशतब आयाजब आदित्य नें मेरे कंधे पर्र अपना हाॅथरख कर हल्के सें दबाया।
"चलो साथी। " आदित्य नें भारी स्वर मे कहा___"यहाॅ सें चलने कि तैयारी करो। अपनीइस महान दिदी कि बात मानो। मे इतने दिनों सें देखरहा हूॅ कि रितू मात्र अपने भइया केँ लिए हि जीरही हैं। हर टाइमउसे मात्र तुम्हारी हि फिक्र रहती हैं। आज भि वोँ केवल तुम्हारी औऱ इन सबकी फिक्र कि वजह सें हि तुम्हें यहाॅ सें सीघ्र चलने कों कहकर गई हैं। उसे अपनेऊपर मॅडरा रहे भीषण खतरे कि कोई फिक्र नहि हैं। मे तुमसे केवल एक् हि बात कहूॅगा यार____औऱ वोँ यह कि इन सबको मुम्बई मे सुरक्षित पहुॅचाने केँ बाद तुम् एक् लम्हा केँ लिए भि वहाॅ नहि रुकना। बल्कि उल्टे पेर वापस सीधा यहीं आओगे। मे स्वयं भि तुम्हारे संग हि आऊॅगा। "
"आदि मेरे मित्र। " मैने भावना मे बहकर आदित्य कों गले सें लगा लिया। उसने स्वयं भि मुझे ज़ोर सें कस लिया थां।
"कितना ग़लत सोचा करता थां मे रितू दिदी केँ बारे मे। " तभीपवन कह उठा___"हर समयशक कि नज़र सें देखता थां उनको। मगर यहाॅआकर पताचला कि वोँ कितनी अच्छी हें औऱ उनके अंदर तेरेलिए कितना प्रेम हैं। उन्होंने सच कां संग देने केँ लिए अपने हि माॅ बाप औऱ भइया सें हर नाता तोड़ लिया। सच मे राज, हमारी रितू दिदी बहोत महान हें। "
मैनेपवन कों भि स्वयं सें छुपका लिया। कुछ देरऐसे हि एक् दूसरे केँ गलेलगे रहने केँ बाद हम् तीनोअलग हुए औऱ फ्रेश होने केँ लिए अपने अपनेरूम मे चलेगए। अपने कमरे मे पहुॅच कर मैने जगदीश अंकल कों मोबाइल लगाया औऱ उनसेकुछ ज़रूरी बातें कि। उनको यहाॅ केँ हालात केँ बारे मे बताया औऱ यह भि बताया कि मे इन लोगों कों मुम्बई पहुॅचा कर वापस आँ जाऊॅगा। इसलिए मेरे औऱ आदित्य दोनो केँ लौटने कि टिकट कां इंतजाम वोँ कर देंगें। जगदीश अंकल सें मैनेयह भि कहा कि इस सबके बारे मे वोँ माॅ कों अवश्य मना लेंगे वरना वोँ मुझे वापसआने नहि देंगी।
जगदीश अंकल सें बात करने केँ बाद मे बाथरूम मे फ्रेश होने केँ लिएचला गय़ा। कुछ हि देर मे हम् सभी बाहर् लान मे खड़ी जिप्सी मे थें। जिप्सी मे रितू दिदी केँ संग मे, करुणा चाची, दिव्या औऱ शगुन थें। जबकि दूसरी जीप मे शंकर काका जौ कि ड्राइविंग शीट पऱ थें उनकेसंग आदित्य, पवन, आशा दिदी औऱ माॅआदि बैठे थें। सबसेमिल कर औऱ हरिया काका कों फार्महाउस कि सुरक्षा कां कहकर हम् सभी फार्म हाउस सें बाहर् निकल पड़े।
फार्महाउस मे इस टाइम हरिया काका, बिंदिया, नैना फूफी औऱ हेमराज मामाजी थें। हेमराज मामाजी कों आज यहीं पर्र रुकने कां कह दिया थां करुणा चाची नें। रास्ते मे रितू दिदी नें फोन पर्र मोबाइल लगाकर अपने महकमे मे किसी सें बात कि औऱ कुछ पुलिस केँ व्यक्ति सादे कपड़ों मे उनकेआस पास हि रहने केँ लिएकहा।
दोनो गाड़िया ऑधी तूफान बनी गुनगुन केँ लिए उड़ीजा रही थि। आसपास हरतरफ हमारी नज़रें भि दौड़रही थीं। ताकिअगर कहीं बड़े बापू याँ उनके व्यक्ति हमें दिखें तौ हम् पहले सें हि उनसे निपटने केँ लिए रेडी हौ जाएॅ। करीब-करीब दस मिनटबाद हि दो पुलिस कि गाड़ियाॅ हमें नज़रआईं। एक् हमारी वाहन कों ओवरटेक करके हमारे आगेआगे चलनेलगी औऱ दूसरी वाहन हमारे पीछे पीछे चलनेलगी।
आधे घंटेबाद हम् सभी गुनगुन केँ रेलवे स्टेशन पहुॅच गए। यहाॅ सें मुम्बई जाने केँ लिएसाम कों पाॅचबजे ट्रेन थि। इससमय साढ़े तीनबजे थें। रेलवे स्टेशन पहुॅच कर रितू दिदी नें हम् सबको वेटिंग रूम मे बैठाया औऱ वहीं पऱ पुलिस केँ कुछ आदमियों कों भि बैठाया। मे दिदी केँ पास चुपचाप बैठा थां। दिदी एकटक मुझे हि देखरही थि।
"नाराज़ हैं मुझसे???" दिदी नें मेरेसिर पऱ हाॅथ फेरते हुए कहा___"चल कोईबात नहि मेरे भइया। तूँ कहीं भि रहेबस सलामत रहे तोँ तेरीहर नाराज़गी भि सह लूॅगी मे। तुँ जबलौट केँ आएगा नं तब तुम्हे मना लूॅगी मे। फिन देखूॅगी कि तूँ मुझसे कितनी देर तक नाराज़ रह पाता हैं? बच्चूलाल मुझेऐसे वैसेमत समझना तुँ। मुझे भि नाराज़ भइया कों मनाना बहोत अच्छे सें आता हैं। समझे नं मेरे प्यारे भइया?"
रितू दिदी कि बात पऱ मुझे अंदर हि अंदर हॅसी तौ आईमगर मैने अपने चेहरे पऱ उन भावों कों ज़ाहिर नं होने दिया। ऐसे हि बैठे बैठे औऱ इधरउधर कि बातों सें वक़्त ब्यतीत हौ गय़ा औऱ पाॅचबज गए। मुम्बई जाने वाली ट्रेन कां एनाउंसमेन्ट होनेलगा तौ हम् सभी वेटिंगरूम सें बाहर् आँ गए। कुछ हि देर मे ट्रेन प्लेटफार्म पर्र आकर खड़ी हौ गई। हम् सभीएसी वाले डिब्बों कि तरफबढ़ चले औऱ कुछ हि देर मे हम् सभीएसी केँ फर्स्ट क्लास डिब्बे मे आँ गए। हम् सभी कि शीटें पासपास हि थीं। सबकेबैठ जाने केँ बाद मे रितू दिदी केँ संग बाहर् आँ गय़ा।
"मे परसों किसी भि हाल मे यहाॅ आँ जाऊॅगा दिदी। " बाहर् आते हि मैने दिदी सें कहा___"आप् स्वयं कां बहोत अच्छे सें ख़याल रखेंगी। कुछ दिनों केँ लिए ड्यूटी पऱ जानां भि बंदकर दीजिएगा। हलाॅकि मैंने भि ऐसाकुछ इंतजाम कर दिया हैं कि बड़े बापूकुछ कर हि नहि पाएॅगे। "
"क्याँ मतलब??" रितू दिदी नें चौंककर मेरीतरफ देखा___"क्याँ कर दिया हैं तूने??"
"बहोत जल्द आपको भि पताचल जाएगा दिदी। " मैने अजीबभाव सें कहा___"बहुत दिन होँ गए हें बड़े पिताजी कों झटका दियेहुए। इसलिए मैने सोचा कि इस मौके पऱ उन्हें एक् झटका देना बिलकुल उचित औऱ फायदेमंद हैं। आख़िर मुझे भि तौ आपकी फिक्र हैं दिदी। ऐसे ख़तरे मे अकेला छोंड़ करजारहा हूॅ, तौ कुछ तोँ आपकी सुरक्षा कां इंतजाम करदूॅ। "
"अरे पर्र तूने किया क्याँ हैं राज?" रितू दिदी नें नाँ समझने वालेभाव सें कहा___"क्याँ तुँ मुझे नहि बता सकता?"
"बता तौ सकताहूॅ दिदी। " मैने शरारत सें उनकी सुर्ख हौ चुकी नाॅक पर्र हल्के सें उॅगली मारते हुए कहा___"मगर यह एक् सरप्राइज़ हैं। इसलिए बता नहि सकता। मगर डोन्ट वरीकल आपको भि पताचल जाएगा। "
"तूँ न् बहोत बदमाश हौ गय़ा हैं। " रितू दिदी नें तोँ मेरी नाॅक हि पकड़ली, बोलि___"ख़ैर, देखती हूॅकल कि तूने क्याँ शरारत कि हैं मेरेडैड केँ संग?"
"यस ऑफकोर्स। " मे मुस्कुराया औऱ फिन एकाएक हि मैने गंभीरता सें कहा___"दिदी एक् बार विधी केँ घऱ भि हौ आइयेगा आप्। उसदिन केँ बादआज तक नहि जा पायाहूॅ मे। जबकि यह मेरा फर्ज़ थां कि मे अपनी पत्नि कि हर क्रिया कों स्वयं अपने हाॅथों सें करता। "
"तुँ चिंता मतकर मेरे भइया। " रितू दिदी नें कहा___"मैने सभीकुछ कर दिया हैं। बसयहसभी एक् बारठीक हौ जाए उसकेबाद तुँ स्वयं अपने हाॅथों सें विधी कि अस्थियों कों पावन गंगा मे विसर्जित कर देना। "
"क्याँ कहा आपने?" मे खुशी सें चौंकते हुए बोला___"आप् नें विधी कि अस्थियाॅ एकत्रित कररखी हें?"
"हाॅराज। " रितू दिदी नें कहा___"मे भला केसेभूल सकती थि उसे? तेरा बाहर् निकलना ख़तरे सें खाली नहि थां इसलिए तेरेनाम सें मे स्वयं हि विधी केँ घऱ गई थि औऱ फिन विधी केँ डैड केँ संग उसकी अस्थियाॅ लेने गई थि। विधी कि अस्थियों कों मैने फार्महाउस मे सुरक्षित रखाहुआ हैं। मैने सोचा थां कि जबयहसभी फसाद समाप्त होँ जाएगा तब मे तुझसे कहूॅगी कि जाराज अपनी विधी कि अस्थियों कों पवित्र गंगा मे बहादे। "
"ओह दिदी, आप् सच मे बहोत महान हें। " कहतेहुए मेरी ऑखों मे ऑसू आँ गए___"आपको मेरीहर चीज़ कां कितना ख़याल हैं। "
"विधीअगर तेरी प्रेमिका याँ पत्नि थि तौ वोँ मेरी भि तौ कुछ लगती थि राज। " दिदी नें गंभीर भाव सें कहा__"मेरे जिंदगी मे उसकी अहमियत बहोत ज़्यादा हैं मेरे भइया। उसी कि वजह सें मेरा हृदय परिवर्तन हुआ। उसी कि वजह सें मुझेपता चला कि सच्चा प्रेम क्याँ होता हैं। उसी नें मुझे बताया कि जिस भइया कों मैनेकभी देख्ना तक गवाॅरा नहि किया थां वोँ वास्तव मे कितना अच्छा हैं। हाॅराज, विधी नें सभी बताया मुझे। उसकेबाद जब उसने मुझसे कहा कि उसे एक् बार अपने महबूब सें मिलना हैं औऱ उसी कि बाहों मे अपने जिंदगी कि आखिरी साॅस लेनी हैं तौ उस वक़्त मेरा कलेजा दहल गय़ा। मेरे अंदर सें किसी नें चीखचीख करकहा कि देख लें रितू, एक् यह हैं कि अपने प्रेम केँ लिए इसने कितने दुखसहे औऱ स्वयं कों खाक़ मे भि मिला दिया औऱ एक् तुँ हैं कि एक् ऐसे भइया कों कभी देख्ना तक पसन्द नहि किया जिसका कहींकोई दोष हि नहि थां। जिसने तेरेसंग कभी बुरा हि नहि किया। बल्कि हमेशा इज्ज़त औऱ सम्मान केँ संग तुझेही दिदी कहतेहुए थकता नहि थां। शपथ सें भइया, उस टाइम मुझे अपनी ग़लतियों कां बड़ी शिद्दत सें एहसास हुआ औऱ मैनेइस सबके बारे मे अलगतरह सें सोचना शुरुआत किया। मैने विधी सें वादा किया कि उसके महबूब कों उसकेपास अवश्य लाऊॅगी। उसकेबाद मैने तेरे दोस्तों केँ बारे मे पता किया तोँ मुझे तेरे गहरेयार केँ रूप मे पवन कां पताचला। मे पवन सें मिली औऱ उससे तेरे बारे मे पूछा। मगर वोँ मुझे तेरे बारे मे कुछ भि बताने कों सजधजकर हि नहि हौ रहा थां। उसे लगता थां कि मे तेरे बारे मे इसलिए पूछरही हूॅ ताकि तेरापता करके मे अपनेडैड कों बतादूॅ कि तूँ फलाजगह पर्र हैं। जबपवन मुझेकुछ भि बताने सें इंकार कर दिया तौ मैनेउसे सारी बातें बताई औऱ स्वयं उसे विधी केँ पास लें आई। यह साबित करने केँ लिए कि मे जौ कुछ भि उससेकह रही थि वोँ सभीसच हैं औऱ इसके पीछे मेरे अंदरकोई भि बुरी भावना नहि हैं। विधी कों देखने बाद हि पवन कों एहसास हुआ कि मे सचकहरही हूॅ औऱ तभी उसने तुझसे बात कि थि। "
दिदी कि बातें सुनकर मे फिन सें पिछली यादों मे खो गय़ा थां। तभी दिदी कि आवाज़ फिन सें मेरे कानों मे पड़ी___"इस सबकीवजह सें हि मुझेलगा कि तूँ औऱ गौरी चाची इतने भि ग़लत याँ बुरे नहि हें जितना कि बचपन सें माॅमडैड नें हम् तीनो भइया बहनों कों बताया थां याँ सिखाया थां। उसकेबाद मैने अपने माॅमडैड औऱ भइया पऱ नज़र रखना शुरुआत किया तौ जल्द हि मुझे सच्चाई कां पताचल गय़ा कि वास्तव मे बुराकौन हैं। बस उसकेबाद तोँ तेरीयह दिदी केवल तेरी हि बेहनबन कररह गई मेरे भइया। मैने अपने माॅमडैड व भइया सबसे नाता तोड़ दिया। ऐसे रिश्तों सें रिश्ता जोड़े रखने कां मतलब भि क्याँ थां जिन रिश्तों मे वासना औऱ हवस केँ सिवाकुछ थां हि नहि। "
मैने रितू दिदी कों अपने सीने सें लगा लिया। वोँ बुरीतरह भावनाओं औऱ जज़्बातों मे बहनेलगी थि जिसकी वजह सें उनकी ऑखों सें ऑसू बहनेलगे थें। एसी केँ उस डिब्बे केँ पास हि हम् दोनो भइया बेहन एक् दूसरे सें गलेलगे हुए थें। आसपास सें आते जातेलोग हमें अजीबभाव सें देखने लगे थें। यहदेख कर मैने दिदी कों स्वयं सें अलगअलग किया औऱ उन्हें लेकर डिब्बे केँ अंदर आँ गय़ा।
रितू दिदी एक् बारफिन सबसे मिली औऱ फिन ट्रेन केँ चलते हि वोँ ट्रेन सें उतरने केँ लिए बाहर् कि तरफ जाने लगीं। मे भि उनके पीछे पीछेगेट तक आँ गय़ा। गेट केँ पास पहुॅच करजब दिदी ट्रेन सें उतरने लगी तोँ मुझेऐसा लगा जैसे मेरीकोई अनमोल चीज़ मुझसे छूटने वाली हैं। मैने हौले सें दिदी कों दिदी कहकर आवाज़ दि तोँ वोँ जल्दी मेरीतरफ पलटीं, जैसे उन्हें मेरे पुकारने कां हि इन्तज़ार थां। जबपलट कर उन्होंने मेरीतरफ देखा तोँ यहदेख कर मेरादिल बैठ गय़ा कि उनका चेहरा ऑसुओं सें तर थां। मैने उन्हें खींचकर स्वयं सें छुपका लिया, वोँ स्वयं भि मुझसे कसकर लिपट गई। मगर जल्दी हि वोँ मुझसे अलग भि होँ गईं।
"अब तूँ जाराज। " फिन उन्होने स्वयं कों सम्हालते हुए कहा___"सबका ख़याल रखना। मे तेरेआने कां इंतजार करूॅगी औऱ हाॅ गुड़िया कों मेरा प्रेम देना। "
"आप् भि अपना ख़याल रखियेगा। " मैने कहा___"औऱ अब आप् सीधा फार्महाउस जाएॅगी। दोदिन केँ लिए ड्यूटी सें छुट्टी लें लीजिएगा। मे जबआऊॅ तौ आपको फार्महाउस पऱ हि हॅसते मुस्कुराते हुए पाऊॅ। "
"मेरी मुस्कुराहट तौ तुँ हि हैं मेरे भइया। " रितू दिदी नें मेरे चेहरे कों सहलाया___"जब तुँ आँ जाएगा नं तौ मेरायह चेहरा अपने आप् हि खिल उठेगा। "
मे उनकीइस बात पर्र हौले सें मुस्कुराया औऱ फिनझुक कर उनके माथे पर्र हल्के सें चूम लिया। मेरीइस क्रिया सें वोँ भि मुस्कुरा दि औऱ फिन मेरेगाल पऱ हलके सें चूमकर वोँ सावधानी सें धीरे-धीरे धीरे-धीरे चलरही ट्रेन सें उतरगईं। मे गेट पर्र खड़ा उन्हें तब तक देखता रहाजब तक कि आगे मोड़ आँ जाने कि वजह सें दिदी मेरी नज़रों सें ओझल नं हौ गईं। उनकेओझल होते हि मे दरवाजे सें पीछे कि तरफ हटकर वहीं पऱ ट्रेन केँ उस डिब्बे कि पिछली पुश्त सें टेक लगाये हुए ऑखेंबंद कर खड़ा हौ गय़ा। कुछदेर यूॅ हि खड़े रहने केँ बाद मैंने एक् गहरी साॅसली औऱ फिन मे अंदर अपनीशीट कि तरफ आँ गय़ा।
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विराज केँ ओझल होते हि रितू प्लेटफार्म सें बाहर् कि तरफ तेज़ तेज़ क़दमों केँ संग बढ़ती चली गई। दिलो दिमाग़ मे ज़बरदस्त तूफान तारी होँ गय़ा थां उसके। दिल मे भड़कते हुए जज़्बात उसके काबू सें बाहर् होनेलगे थें जिसकी वजह सें उसकी रुलाई फूटने कों आतुर थि। मगर बड़ी मुश्किल सें उसने स्वयं कों सम्हाला हुआ थां। स्टेशन सें बाहर् आते हि वोँ अपनी जिप्सी कि तरफबढ़ गई। जिप्सी केँ पास हि एक् औऱ जीप थि जिसमें शंकर काका बैठेहुए थें। रितू नें शंकर काका कों वापस लौटने कां कह दिया। पुलिस केँ जोँ व्यक्ति आगे पीछेआए थें उनमें सें एक् जीप वाले पुलिस वालों कों रितू नें शंकर केँ संग जाने कां कह दिया जबकि दूसरे जीप वालों कों अपनेआस पास हि रहने कों कहा।
शंकर काका केँ जाने केँ बाद रितू नें भि जिप्सी कों आगे बढ़ा दिया। लेकिन उसकी जिप्सी कां रुख हल्दीपुर कि तरफ नं होकर किसी औऱ हि तरफ थां। उसके पीछेकुछ हि फाॅसले पर्र एक् अलगकार मे दूसरे पुलिस वाले भि थें जौ सादे कपड़ों मे थें। करीबदस मिनटबाद रितू नें जिस स्थान पर्र जिप्सी कों रोंका उसकेपास हि एक् "जिम" थां।
जिम केँ बाहर् कुछ हि दूरी केँ फाॅसले पर्र उसने अपनी जिप्सी कों खड़ीकर वोँ नीचे उतरी औऱ पास हि एक् दुकान केँ पास जाकर उसने दुकान सें मिनरल वाटर कां एक् बाटल खरीदा औऱ वापसआकर जिप्सी मे बैठ गई। अपनी बाईं कलाई पर्र बॅधी रिस्टवाच पर्र उसने एक् नज़र डाली। साम केँ पाॅचबज करबीस मिनट हौ रहे थें।
जिप्सी मे बैठी रितू थोड़ी थोड़ी देर केँ अंतराल मे बाटल सें पानी पीतीरही। उसकी नज़रजिम केँ मुख्य दरवाजे पर्र थि। मतलबसाफ थां कि वोँ किसीऐसे ब्यक्ति कां इन्तज़ार कररही थि जौ उसजिम सें बाहर् आने वाला थां। कुछदेर औऱ गुज़रने केँ बाद एक् बारफिन सें रितू नें अपनी कलाई पऱ बॅधी रिस्टवाॅच मे नज़र डाली। पाॅचबज करतीस मिनट हौ चुके थें। उसके पीछेकुछ हि दूरी पऱ दूसरी व्हीकल मे बैठे दूसरे पुलिस वाले रितू कि तरफ नाँ समझने वालेभाव सें देखेजा रहे थें।
उस टाइम रितू केँ होठों पऱ अजीब सि मुस्कान उभरीजिस टाइमजिम केँ मुख्य दरवाज़ा सें कुछ लड़के औऱ लड़कियाॅ बाहर् निकले। रितू कि नज़र एक् ऐसी लड़की पऱ स्थिर होँ गई जिसके सुंदर जिस्म पर्र इस वक़्त जिम वाले कपड़े थें। एकदम चुस्त दुरुस्त। उसकोदेख कर हि लगरहा थां कि इसकी ऊम्र अट्ठारह याँ बीस सें अधिक नहि होगी।
रितू नें देखा कि वोँ लड़कीजिम सें निकलने केँ बाद पार्किंग एरिया कि तरफबढ़ गई हैं। कुछ हि देर मे वोँ लड़की एक् नई नवेली स्कूटी मे पार्किंग सें बाहर् आती हुई दिखी औऱ फिन रितू कि ऑखों केँ सामने सें हि वोँ दाहिने तरफ केँ रास्ते कि तरफ सरपट जाती हुइ नज़रआई। उसके जाते हि रितू नें जिप्सी कों स्टार्ट किया औऱ उस लड़की केँ पीछेचल पड़ी। उसके पीछे दूसरी कार मे बैठे बाॅकी केँ पुलिस वाले भि बढ़चले।
मेन मार्केट सें निकलने केँ बाद रितू नें देखा कि सामने जारही वोँ लड़की एक् मोड़ पऱ मुड़ गई हैं। रितू नें भि जिप्सी कों उस मोड़ पऱ मोड़ दिया। रितू कि नज़र बराबर उस लड़की पर्र थि। सामने एक् अधेड़ सां व्यक्ति इसतरफ अचानक हि आता दिखा। शायद किसी दुकान याँ किसीघऱ सें निकला थां वोँ। उसके दोनो हाॅथों मे एक् एक् ब्लैक कलर कि प्वालिथिन थि। वोँ अधेड़ व्यक्ति अपनी साइड कि तरफआने केँ लिए पहले पीछे कि तरफ देखा औऱ फिनरोड क्राॅस करने केँ लिए जैसे हि आगे बढ़ा वैसे हि वोँ उस लड़की कि स्कूटी सें टकरा गय़ा।
रितू नें साफतौर पऱ देखा थां कि अधेड़ ब्यक्ति केँ पास पहुॅचते पहुॅचते उस लड़की नें स्कूटी कि रफ्तार कों बहुतकम कर लिया थां मगर कदाचित उसका ध्यान कहीं औऱ थां इसलिए हड़बड़ाहट मे उसेसमझ हि नं आया कि वोँ अब क्याँ करे? जितना उससे हौ सकता थां उतना उसने किया थां। लेकिन अब वोँ इसका क्याँ करती कि लाख कोशिशों केँ बाद भि उसकी स्कूटी उस अधेड़ ब्यक्ति केँ बदन सें छू हि गई थि। जिसका परिणाम यहहुआ कि वोँ अधेड़ ब्यक्ति बीच मार्ग पऱ भरभरा करगिर गय़ा थां। उसके दोनो हाॅथों पर्र मौजूद प्वालीथिन छूट गई थि औऱ पक्की मार्ग पऱ गिरते हि प्वालीथिन केँ अंदर मौजूद सामान फूट गय़ा थां। प्वालीथिन मे दवाई कि बोतलें थि जोँ फूटगईं थि औऱ अब सारीदवा मार्ग पऱ फैलती जारही थि।
अधेड़ केँ गिरते हि उस लड़की नें पहले स्कूटी कों खड़ी किया उसकेबाद वोँ एकदम सें पांव पटकते हुएउस अधेड़ केँ सिर पर्र आँ धमकी।
"देख कर नहि चल सकते थें तुम्?" फिन उसकी करकस आवाज़ वातावरण मे गूॅजी___"अभि मर जाते तोँ क्याँ करतेफिन? मार्ग कों क्याँ अपने बाप कि जागीर समझरखा हैं जोँ जहाॅ सें चाहेचल सकते होँ?"
लड़की अनाप शनाप बोलने मे लगी हि थि कि आसपास सें कई सारेलोग आकर वहाॅ पऱ इकट्ठा होँ गए। सभी एक् दूसरे सें पूछने लगे कि क्याँ हुआ??? मार्ग पर्र गिराहुआ वोँ अधेड़ व्यक्ति किसीतरह उठा औऱ कुछ हि दूरी पर्र अपनी दवाईयों कां हालदेख कर उसके चेहरे पऱ बेहद पीड़ा केँ भावउभर आए। उसनेसिर उठाकर अपने चारों तरफ करुणभाव सें देखा औऱ फिन उसकी नज़रउस लड़की पर्र पड़ी जोँ उसकेसिर पर्र आँ धमकी थि।
"लगता हैं इस लड़की नें इस अधेड़ ब्यक्ति कों अपनी स्कूटी सें टक्कर मारी हैं। " आसपास खड़े लोगों केँ बीच सें एक् व्यक्ति नें कहा___"देखो तोँ बेचारे कि सारी दवाइयाॅ मार्ग पऱ फूटकर फैल गई हें। "
"आजकल तोँ मार्ग पऱ चलना भि दूभर हौ गय़ा हैं भइया। " एक् अन्य ब्यक्ति नें तंज कसा___"मोटर साइकिल औऱ वाहन वालेआम व्यक्ति कों जब देखोतब टक्कर मार देते हें औऱ उल्टा उसी पर्र चढ़ दौड़ते हें। देखरहे हौ न् इस लड़की कों। इसनेइस बेचारे बूढ़े व्यक्ति कों टक्कर मार दि औऱ अब उल्टा इसे हि डाॅटरही हैं। "
"ऐ मिस्टर। " लड़कीयह सुनते हि उस व्यक्ति कि तरफ पलटी___"इसमें मेरीकोई ग़लती नहि हैं समझे। यह बुड्ढा स्वयं हि मरने केँ लिए मेरी स्कूटी केँ सामने आया थां। वोँ तोँ अच्छा हुआ कि मैने वक्त पऱ ब्रेक मार दिया वरना इसका तौ यहीं पर्र रामनाम सत्य हौ जानां थां आज। "
"अरे देखो तोँ केसेबात कररही हैं यह लड़की?" एक् अन्य नें कहा___"एक् तौ स्वयं हि टक्कर मारी इसने औऱ ऊपर सें इस बूढ़े व्यक्ति कां दोषलगा रही हैं यह। "
"बड़े बाप कि लगती हैं भइया। " एक् दूसरे नें कहा__"बड़े बाप कि बेटी हैं तभी इतना तीखा बोलती हैं। तमीज़ नाम कि तोँ कोईबात हि नहि हैं इसमें। "
"हाऊ डेयरयू टाकटु मी लाइकदिस?" लड़की नें गुस्से सें चिल्लाते हुए कहा___"तुम्हें पता हैं कि तुम् किससे बातकर रहे हौ? अगरजान जाओगे न् तौ यहीं पर्र खड़े खड़े पेशाब कर दोगे समझे। मे इसशहर केँ मंत्री कि बेटी हूॅ। इस शहर केँ मंत्री कों तोँ तुम् सभी अच्छी तरह जानते हि होगे न्?"
लड़की केँ इतना कहते हि आसपास खड़े लोगों कों साॅप सां सूॅघ गय़ा। पलक झपकते हि वोँ सभी वहाॅ सें इसतरह गायब हौ गए जैसेगधे केँ सिर सें सींग गायब होँ जाते हें। उन सबके जाते हि लड़की केँ होठों पऱ विजयी मुस्कान उभरी औऱ फिन उसने हिकारत केँ सें भाव सें उस अधेड़ कि तरफ देखा। मार्ग पर्र बैठा वोँ अधेड़ अपनीउस दवा कि तरफदेख रहा थां जोँ मार्ग पर्र फैल गई थि। उसकीतरफ देखकर लड़की नें "हुॅह"कहा औऱ फिनपलट कर अपनी स्कूटी कि तरफ आँ गई। स्कूटी कों स्टार्ट कर वोँ आगेबढ़ चली।
यह सभी तमाशा देख रितू नें फोन पऱ किसी सें कुछकहा औऱ लड़की कि तरफ तेज़ी सें जिप्सी कों दौड़ा दिया। उसके चेहरे पर्र बेहद गुस्से केँ भाव थें। सीघ्र हि उसकी जिप्सी उस लड़की कि स्कूटी केँ पास आँ गई औऱ फिन रितू नें पीछे सें टक्कर मार दि उसे। परिणामस्वरूप लड़की औऱ उसकी स्कूटी उछलते हुए मार्ग पर्र गिरे औऱ कुछदूर तक घिसटते हुएचले गए। फिज़ा मे लड़की कि चीख़ गूॅज गई थि। यहाॅ पऱ आसपास कोई दुकान याँ घऱ नहि थां। मार्केट एरिया पीछे हि थां। हलाॅकि कुछ हि दूरी पऱ बड़ी बड़ी बिल्डिंग्स दिखरही थि। ज़ाहिर थां उन्हीं बड़ी बड़ी बिल्डिंग्स मे सें किसी एक् बिल्डिंग पर्र इस लड़की कां अलीशान घऱ होगा।
रितू नें जिप्सी कों आगे बढ़ाकर लड़की केँ पास रोंका औऱ उतरकर लड़की केँ पास गई। लड़की मार्ग केँ बाएॅ साइड उल्टी पड़ी दर्द सें कराहरही थि। बड़ी मुश्किल सें वोँ उठकर बैठी औऱ फिन अपने जिस्म पऱ लगी चोटों कों देखने लगी।
"देख कर नहि चल सकती थि क्याँ?" रितू नें उसी कां वाक्य उसी केँ लहजे मे दोहराया____"अभि मर जाती तौ क्याँ करती तुम्? मार्ग कों क्याँ अपने बाप कि जागीर समझरखा हैं जोँ जहाॅ सें चाहेचल सकती होँ?"
रितू कि बात सुनकर उस लड़की नें दर्द सें कराहते हुए रितू कि तरफ देखा औऱ फिन एकाएक हि उसके चेहरे पर्र क्रोध उतरआया। इस हालत मे भि वोँ मार्ग पऱ सें किसी स्प्रिंग लगे खिलौने कि तरहउछल कर खड़ी हौ गई औऱ फिन बिनाकुछ बोले हि घूमकर एक् फ्लाइंग किक कां वार रितू पर्र कर दिया। मगर उसकायह वारउसे स्वयं हि भारीपड़ गय़ा। क्योंकि जैसे हि उसने फ्लाइंग किक चलाई वैसे हि झुककर रितू नें उसकीउस टाॅग पऱ अपनी टाॅगचला दि थि जोँ नीचे मार्ग पऱ जमी थि। नतीजा यहहुआ कि जमीन सें लड़की कां पांव हटते हि उस लड़की कां बैलेंस बिगड़ा औऱ वोँ गुड़ीमुड़ी होकर मार्ग पऱ औंधेमुह गिरी। उसकेमुख सें दर्द मे डूबी चीख़ निकल गई।
"तेरे जैसीदो कौड़ी कि फाइटर लड़कियाॅ मेरेपास ट्यूशन लेनेआती हें मूर्ख लड़की। " रितू नें उसकेसिर केँ बाल अपनी मुट्ठियों मे कसकरऊपर उठाते हुए कहा___"तेरे अंदर अपने हरामी बाप कां गंदाखून भरा हैं नं। चल तुम्हें भि वहीं लें चलतीहूॅ जहाॅ तेरा वोँ हरामी भइया औऱ उसके हरामी यार हें। "
"मुझे छोंड़ दो वरना इसका अंजाम बहोत बुरा होगा तुम्हारे लिए। " लड़की नें छटपटाते हुए कहा___"तुम्हें पता नहि हैं कि तुमने किसकी बेटी पर्र हाॅथ उठाने कि ज़ुर्रत कि हैं?"
"यही, बस यही अकड़ तौ निकालनी हैं तेरी औऱ तेरे बाप कि भि। " रितू नें घुटने कां वार ज़ोर सें लड़की केँ पेट पऱ किया तोँ हिचककर रह गई वोँ, जबकि रितू नें उसके बालों कों औऱ ज़ोर सें खींचते हुए कहा___"बहोत जल्द तुम् सबकीऐसी हालत होने वाली हैं जिसकी तुम् लोगों नें कभी कल्पना भि नं कि होगी। "
"बहोत पछताओगी तुम्?" लड़की नें चीखते हुए कहा___"मेरा बाप तुम्हारा वोँ हाल करेगा कि तुम् अपना चेहरा दुनियाॅ कों दिखाने केँ काबिल नहि रहोगी। "
"यह तौ टाइम हि बताएगा मेरीजान। " रितू नें लड़की कि कनपटी केँ एक् खास हिस्से पऱ अचानक हि कराट मारी थि, जिसका नतीजा यहहुआ कि लड़की बेहोश होतीचली गई। जबकि रितू नें कहा___"कि मुह दिखाने केँ काबिल कौन नहि रहता। "
रितू नें लड़की केँ बेहोश शरीर कों उठाकर अपनी जिप्सी मे डाला औऱ पिछली शीट केँ नीचे सें एक् ब्लैक कलर कि बड़ी सि प्लास्टिक कि पन्नी निकाल कर उसकेऊपर ऐसे तरीके सें डाल दिया कि कोईयह नं सोचसके कि उसके नीचेकोई इंसानी शरीर भि होँ सकता हैं। यहसभी करने केँ बाद रितू पलटी औऱ आसपास कां बारीकी सें मुआयना किया तौ कुछ हि दूरी पऱ उसे लड़की कां फोन पड़ा दिखा। मार्ग पऱ गिरने सें फोन कि स्क्रीन चटक गई थि। रितू नें किनारे साइड कि एक् बटन कों दबाया तौ जल्दी हि स्क्रीन फ्लैश करउठी। इसका मतलब वोँ चालू हालत मे थां अभि। यहदेख कर रितू नें मोबाईल कां कवर निकाल करफोन केँ ढक्कन कों खोला औऱ बैटरी निकाल ली। उसकेबाद सारी चीज़ें पाॅकेट मे डालने केँ बाद उसने अपने दूसरे पाॅकेट सें अपनाआई मोबाइल निकाला। उसेयाद आया कि उसनेआई मोबाइल फार्महाउस पऱ हि स्विच ऑफकर दिया थां। यह ध्यान आते हि उसके होठों पऱ एक् जानदार मुस्कान उभरी। उसने अपने आईफोन कों वापस पाॅकेट मे रखा औऱ आकर जिप्सी मे बैठ गई। जिप्सी कों स्टार्ट कर उसने यूटर्न लिया औऱ वापसचल दि।
मार्केट केँ पासआते हि उसे दूसरी व्हीकल पऱ वोँ पुलिस वाले दिखे। उनमें सें एक् पुलिस वाले नें रितू कों बताया कि उसनेउस अधेड़ व्यक्ति कों दूसरी दवाइयाॅ खरीदकर दे दि हें। उसकीबात सुनकर रितूआगे बढ़ गई। उसके पीछे दूसरे पुलिस वाले भि अपनी व्हीकल मे चल पड़े। उनकी नज़र रितू कि जिप्सी पऱ थोडा सां फैली हुईँ उस ब्लैक कलर कि प्लास्टिक कि पन्नी पर्र पड़ी जिसके नीचे रितू नें उस लड़की कों छुपा दिया थां। लेकिन उन लोगों नें इस पर्र अधिक ध्यान नं दिया। उनको अपनेआला अफसर कां आदेश थां कि इंस्पेक्टर रितू केँ आसपास हि रहना हैं औऱ उसकी किसी भि गतिविधी पऱ कोई प्रश्न जवाब नहि करना हैं।
रितू कि जिप्सी ऑधी तूफान बनी हल्दीपुर कि तरफ बढ़ीचली जारही थि। उसके पीछे हि दूसरी वाहन पऱ वोँ पुलिस वाले भि थें। रितू कों अंदेशा थां कि हल्दीपुर केँ पास वाले रास्तों पऱ कहीं उसका बाप याँ उसके व्यक्ति मिल न् जाएॅमगर हल्दीपुर केँ उसपुल तक तौ कोई नहि मिला थां। पुल सें दाहिने साइड जिप्सी कों मोड़कर रितू फार्महाउस कि तरफबढ़ चली। कुछ दूरी पर्र आकर रितू नें जिप्सी कों रोंक दिया। कुछ हि पलों मे उसके पीछे वालीकार भि उसकेपास आकररुक गई।
"अब आप् सभी यहाॅ सें वापसलौट जाइये। " रितू नें एक् पुलिस वाले कि तरफदेख कर कहा___"आज कां काम इतना हि थां। अगर ज़रूरत पड़ी तौ वायरलेस याँ मोबाइल द्वारा सूचित कर दिया जाएगा। "
"ओके मैडम। " एक् पुलिस वाले नें कहा___"जैसा आप् कहें। जय हिन्द। "
उन सबने रितू कों सैल्यूट किया औऱ फिन अपनी व्हीकल कों वापस मोड़कर वहाॅ सें चलेगए। उनके जाते हि रितू नें भि अपनी जिप्सी कों फार्महाउस कि तरफ बढ़ा दिया। आने वाला वक्त अपनी आस्तीन मे क्याँ छुपाकर लाने वाला थां यह किसी कों पता नं थां। "
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दोस्तों, भाग हाज़िर हैं,,,,,,,,
आशा करताहूॅ कि आप् सबकोयह भाग मनपसंद आएगा। आप् सबकी प्रतिक्रिया औऱ सुंदर सें रिव्यू कां इन्तज़ार रहेगा।
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