शक कां अंजाम – New Episode
Insaani pavitriya, ya ye kahin jaaye insaan के dimag की upoj hoty h कुछ cheeje जैसे काम vasna। iske chalte insaan कुछ ayese karya krr jate h jishe akshar लोग manshik vikritiya kahte haen। लेकिन vasna में lipte लोग iss एक majaa hi maante h। जैसे की iss story के sare kirdaaro ko udaharan के roop में le sakte haen। story के kirdaar jish tarike से shadbo kaa upyog किया ushe hi dekh lijiye.
। halanki ish में एक और story chupi huyi h। woh h shaq.कुछ baatein rishto की majbuti ko लेकर bi.
Btw। yeh insaan की upor h की rishto ko kis prakaar से sawarenge ya jod के rakhenge.
kehte h कुछ rishta kachhe dhagge की prakaar hote h, एक nazuk dori से bandhi huyi पर yeh insaan के upor h की woh viswaash। ji ha viswaash। yeh insaan के upor h की woh kese viswaash के jariye ishe majbut kare.
आते h story की title और story की base shaq पर। Agar insaan ko shaq h kisi पर bi, ya too sai समय पर hi dur krr leni चाहिए। क्योंकि yahi shaq pahle galatfami kaa roop lenge, फिर aage isse bi ghaatak। hinsa और aparadh kaa roop lenge। लेकिन कुछ लोग shaq दूर karne की bajaye ushi shaq ko sacch maanke apne apme jujhte rahte h जैसे की Prashant.
लेकिन wo bhul jate haen की upor wale ne एक bohot hi mahattvapoorn vardan दिया haen sochne के liye, vichar vimarsh karne के liye, kese asambhav ko sambhav banaya jaye उसके liye buddhi और gyan ko prayog karne के liye। और wo haen insaani dimag। jee ha dimag, sai समय पर sai tarike से अगर dimag lagaya jaye तो har wo chiz हम hasil krr sakte h jiski hume khwahish hu.har muskil ko paar krr aage badh sakte h। Har problem kaa solution nikal sakte h। too shaq dur krna Kounsi badi बात h bhala.
kasma Kas से jujhne से अच्छा thaa Prashant pahle hi shaq ko dur krr lete और sabse badi बात apni biwi ko saaf kah dete की usko पसंद नहीं yun milna julna niraj से। Agar तब bi woh नहीं maanti too sidha kanooni karwaahi karte। taalak tak chale जाते.
halanki woh too apni hi patni की didi sangh hawas के game में lipt hu गया.
Kuch thodi bohot sazishein bi h kahani pe.for example जैसे niraj ne racha.
Khair yeh story sirf shaq पर hi नहीं balki viswaash की kami, vasna, dhokha, daga देना, bewafayi पर adharit एक fantasy kahani h
Prashant, niru, niraj और Ritu - Insaan में kayi dabi huyi ichchaye hoty h। पर घर parivar, samaaj kaa dar और maryada के chalte apne man की ichchaye man में hi daba lete h। लेकिन kayi लोग ayese bi hote haen joh chori chupke hi sai apne man की ichchaye purti krr hi lete haen.ye लोग man की ichchaye daba नहीं pate। chahe iske liye apne jeevan sathi ko dhokha hi kyun na देना pade.जैसे iss story के mukhya kirdaar Prashant, niru, niraj और Ritu.। yeh लोग vasna में dube i kese apni ichchha puri karne के liye कोई na कोई raah nikal hi leta h, chahe chori chori chupke chupke hi sai, और ishe story की madhyam से hamare samaks pesh karne की writer sahab ne joh koshish की haen ushme kamyab rahe.
Prashant, niru, niraj, Ritu जैसे लोग kese Hawas की agni में jalte kese har riste ko tod dete haen। kese maryada ko tod madod के potli में bandhke bahti vasna की dariya में baha dete ushi ko writer sahab ne darshaya haen story के madhyam से। jisme wo kamyab rahe.
halanki Prashant, niru, Ritu और Niraj ko bhoolni नहीं yeh बात। और woh yeh की
apne karmaphalo kaa saza ishi जिंदगी में bhugtna padta h
Khair.
Brilliant kahani line with awesome writing skills
pr mein na khush ho . muze freely likhni h takii santust haan saku jaesa kee Chutiyadr sahab kee kahani pr revo deti ho thik waise imagination kaafi khatarnak or dilchasp h. Baaki khaufnaak imagination revo say krr dun kya
tab tak shaq thaa yakin nahee. uske baad yakin karne laga. Khair. ab shaq kare ya yakin. kul milake iss kahani k woh chaar lead characters totally characterless the
Hey aalu saheb. yeh SultanTipu40 saheb iss post pr kahe lal pile hu rahe h. uff Prashant ko kya ab hum readers kuch bol bi nahee sakte kya. akhir baat kya h
प्रशांत भोसड़ी वाले कों कोई समझाऐ हमेशा नीरज सें गांड मरवाता रहता हैं कभीऋतू सें भि बातकर लेँ साला चुतिया
शक कां अंजाम – New Episode
संसार मे मात्र 2 हि प्रकृतिक अवश्यकताएँ समस्त चेतन जीव-जंतुओं कों पूरी करनी होती हें
1- भोग : अपने साकार रूप कि रक्षा केँ लिए, उसको ऊर्जा देने केँ लिएभोग अर्थात भोजन आवश्यक हैं। अन्यथा उसका स्वरूप हि ख़त्म हौ जाएगा। जिसे हम् मृत्यु कहते हें
2- संभोग : अपने गुण-कर्म कि विशेषताओं-विशिष्टताओं (genetics) कों आपके संसार छोड़ देने केँ बाद भि जीवित रखने केँ लिए। संभोग कि प्रक्रिया द्वारा प्रजनन किया जाता हैं।
जबकि वर्तमान युग उपभोग कां युग बनताजा रहा हैं.यहा पदार्थ सें सेवा तक, भावनाओं सें सम्बन्धों तक सबका उपभोग कियाजा रहा हैं।
उपभोग (consumption) एक् नकारात्मक औऱ अप्राकृतिक प्रवृत्ति हैं। जौ साधनों, संसाधनों हि नहि सम्पूर्ण प्रकृति कां हि भक्षण किएजा रही हैं
आजहर आदमी उपभोग केँ मद(नशे) मे इतनाडूब गय़ा हैं कि उसकेपास भोग औऱ संभोग कां भि "खुशी" लेने कां टाइम नहि.बल्कि
वोँ अपने वक़्त औऱ सुविधा केँ अनुसार उनका "प्रयोग" कर लेता हैं।
By kamdev99008 saheb
waise kammo dahling iss kahani के kirdaaro leke क्या mat h aapka
muze too kahin say bi romance na dikhi story main. romance ko importance diya hi kaha h iss story main. sara game too bus shaq, galatfami, hawas, lahparwahi, saryantra, lalach pr hi too adharit h.
काजल तौ हमारी जान हैं निरु केँ लिए इंसाफ कि लड़ाई जारी रहेगी प्रशांत चुतिया साला
story k agami bhag ko jis prakaar say pesh kee h woh sacch main best h. narrations or language kee pakad bi kafi majbut h or flow bi badhiya. muze problem h iss niraj nam k kirdaar say
शक कां अंजाम – New Episode
शक कां अंजाम
PART 3
UPDATE 43
मूल लेखक नें यह किस्सा जिस स्थान ख़त्म कि हैं। मेरा प्रयास हैं स्टोरी वही सें कों आगे बढ़ाने कां औऱ नए मौलिक एपसोड देने कि। एक् पाठक (जिन्हो अपनानाम नहि बताने केँ लिए अनुरोध किया हैं) औऱ मेरा मिलजुल कर प्रयास रहेगा, इस स्टोरी कों औऱ आगे लें कर जाने कां। लीजिये पेश हैं भाग 3 Update 43। ) ( New-7)
उसकेबाद प्रशांत कईबार नीरज कों नीरू केँ मोबाइल पर्र फ़ोन करता हैं जिसे नीरज हि उठाता हैं औऱ प्रशांत नीरज कों बच्चे कि फोटो भेजने केँ लिए कहता हैं पऱ हरबार नीरज प्रशांत कों टाल देता हैं। उधर नीरू नें जीजाजी औऱ ऋतू सें मिलना जुलना बहोत कमकर दिया थां औऱ अपना अधिक सें अधिक वक़्त अपने बेटे निशंक कों देनेलग गई, थि क्योंकि उसकेपास ६ महीने कि छुट्टिया थि.
फिन एक् दिन नीरज सोचता हैं अबइस प्रशांत केँ कांटे कों हमेशा केँ लिए निकालने कां वक़्त आँ गय़ा हैं। वोँ ऋतू कि एल्बम सें नीरू कि बचपन कि एक् फोटो निकालता हैं औऱ उसे थोड़ा फोटोशॉप कर केँ छोटे बच्चे कि फोटो एडिटिंग कर देता हैं
उसकेकुछ दिनबाद नीरज सुन्दर सें बोलकर काजल कों पूरीरात केँ लिए बुलवाता हैं औऱ उसेवही पुरानां रोले प्ले करने केँ लिए बोलता हैं एक्स्ट्रा पैसे भि दे देता हैं औऱ दफ़्तर केँ काम कां बहाने कर होटल मे चला जाता हैं
नीरज काजल कों उसका पार्ट अच्छी तरह सें समझाता हैं औऱ फ़ोन मे ऑडियो रिकॉर्डिंग चालूकर देता हैं औऱ काजल कि चुदाई उसे नीरूबोल कर करता हैं औऱ काजलउसे जीजाजी जीजाकह कर चुदवाती हैं औऱ अगलेदिन वोँ प्रशांत कों फ़ोन नीरू केँ मोबाइल सें मोबाइल मिलाता हैं
नीरू कां फ़ोनआया हैं यहदेख प्रशांत झट सें फ़ोनउठा लेता हैं
प्रशांत : हेलो नीरू बधाई होँ, हमारा बेटा कैसा निशंक कैसा हैं।
नीरज : प्रशांत मे नीरजबोल रहा हूं।
प्रशांत उनकी आवाज़ सुनकर मायूस होँ जाता हैं औऱ बोलता हैं
प्रशांत : नीरजजी कैसी हैं नीरू औऱ मेरा बेटा निशंक। क्याँ नीरू मुझेयाद करती हैं कभी.
नीरज : देख मुझेअब तुझपे बहोत तरसआने लगा हैं, मे तोँ तेरी सहायता पहले भि कररह थां पर्र तूनेसभी गड़बड़कर दि थि मे तोँ अब भि तेरी सहायता करने केँ लिए रेडी हूं
प्रशांत : खुश होतेहुए कैसी सहायता नीरजजी
नीरज:सुन तेरेलिए एक् अच्छी खबर हैं। आज तुम्हें तेरे बेटे कि फोटो भेजूंगा बस तूँ भि मेरी थोड़ी सहायता करदे।
प्रशांत: थैंक्स जीजाजी। आप् हि होँ जोँ मेरे बारे मे सोचते होँ, मुझे क्याँ करना होगा
नीरज : नीरू केँ संगकल उसकामूड बहोत अच्छा थां उसे दफ़्तर मे प्रमोशन मिलने वाली हैं तौ मैंने तेरे बारे मे भि बात कि थि।
प्रशांत : थैंकयू जीजाजी.
नीरज : मैंने उसेकहा कि वोँ तुम्हे माफकर दे। मगर अब तोँ वोँ बिलकुल रेडी नहि हौ रही।
प्रशांत : तोँ क्याँ बोलि नीरूहां वोँ तोँ हैं आपको भि तोँ मालूम हैं वोँ कितनी जिद्दी हैं।
नीरज : मगर वोँ कहती हैं अब मुझे प्रशांत कि कोई जरूरत नहि हैं औऱ अब तोँ उसनेसाफ़ कह दिया हैं जौ ख़ुशी मुझे प्रशांत नें नहि दि वोँ आपने दि हैं। उसने तौ मुझे तकलीफ हि दि हैं। मुझ पऱ शक भि करता थां औऱ फिन उसने मुझे तलाक भि दे दिया औऱ जब मुझे डिलीवरी केँ टाइम उसकी जरूरत थि तब भि वोँ नहि आया औऱ आप् मेरेसंग रहे औऱ अब भि मेरासंग देरहे हौ.
तौ मैंने नीरू कों कहा नीरूकुछ औऱ जरूरते भि तौ होती हैं तोँ वोँ बोलि जीजाजी वोँ भि आप् अब पूरीकर दो आप् मुझे एक् बार तौ चोद हि चुके हौ औऱ उसकेबाद मैंने कितनी हि बार आपका लन्ड चुसा हैं जिसकी गिनती भि मुझेयाद नहि हैं।
औऱ अब तौ मेरी डिलीवरी कों हुए भि वक्त हौ गय़ा हैं तौ अब आप् क्यूं नहि मुझे पूरासुख दे देते। तोँ उसकेबाद मैंने उसकेसंग सुहागरात मनाई हैं जिसकी ऑडियो रिकॉर्डिंग भेजरहा हूं
प्रशांत : नहि नीरजजी उसकीकोई जरूरत नहि हैं
नीरज : क्यूं नहि हैं पहले तोँ तुम्हे बहोत शौंक थां छुपछुप कर सुनने कां औऱ देखने कां। अब रिकॉर्डिंग सुनकर बताना केसेलगी मेरी औऱ नीरी कि सुहागरात तभी तेरे बेटे कि फोटो तुम को भेजूंगा.
प्रशांत : नीरजजी आप् यहसभी क्यूं कररहे होँ
नीरज : तेरीपता तोँ हैं मे चाहता हूं अपना बच्चा। ऋतू तोँ मुझे बच्चा दे नहि पायी जल्द हि मे नीरू कों प्रेग्नेंट कर दूंगा। अब नीरू मुझे मेरा बच्चा देगी औऱ वोँ इसकेलिए त्यार हैं। सुहागरात कि रिकॉर्डिंग सुनकर बताना हनीमून केसे करना हैं क्योंकि तुँ दो बच्चे पैदाकर चूका हैं ताकि वोँ जल्द सें प्रेग्नेंट हौ जाए।। तुम् मुझे औऱ टिप्स देना.
प्रशांत : औऱ ऋतू दिदी
नीरज : यहउसी कां तौ आईडिया हैं चलअब मेरी औऱ नीरू कि सुहागरात कां किस्सा सुन
जब मे सुहागरात वाले कमरे मे अंदर गय़ा, ऋतू नें नीरू औऱ कमरे कों बहोत सुन्दर सजाया हुआ थां औऱ नीरू तौ श्रृंगार करने केँ बाद दुल्हन केँ लाल लिबास मे क्यामत हि लगरही थि ऊपर सें गहनों औऱ फूलो सें लदी हुईँ थि। तुम्हे तोँ पता हि हैं, माल तोँ हैं हि वोँ जबरदस्त, दो बच्चे पैदा करने केँ बाद भि आज भि चूचियां एकदम टाइट टाइट हैं उसकी उपोयर सें बड़ी औऱ हौ गयीँ, हें, बड़ीबड़ी गोलगोल गांड, नाभिदेख कर तौ ऐसे लगता थां कि बुर केँ स्थान पे नहि नाभि मे हि लौड़ापेल दू, गोरी लंबी चौड़ी, जंघे गोलगोल, मे खुश थां वोँ दिनआज आँ गय़ा थां उसकी पूरीरात चुदाई करूंगा, मे अंदर गय़ा, दरवाजा बंद किया, वोँ खड़ी होँ गई, अबआगे रिकॉर्डिंग आहिस्ता सुन। रखता हूं बाद मे फ़ोन करता हूं
प्रशांत नें फ़ोनचेक किया तौ कुछदेर बाद देखा ऑडियो फाइल आगयी थि
उसे फाइल खोली तोँ रिकॉर्डिंग मे काजल नीरूबन करबात कररही हैं
नीरू ( काजल ): जीजाजी प्रणाम औऱ अब सें आप् हि मेरे पति हौ
नीरज: नीरू तुमसे मैंने कितनी बारकहा हैं मेरे पांवमत छुआकरो तुम् मेरेदिल कि रानी होँ, आओ मेरेगले लगजाओ आज तुम्हे दुल्हन केँ वेश मे गलेलगा कर मुझे बहूत अच्छा एहसास होँ रहा हैं औऱ तुम्हारी चूचिया तोँ मुझे पागलबना रही हैं
नीरू: जीजाजी सभीकुछ यहीखड़े खड़े करना हैं क्याँ चलोखाट पऱ चलते हें
नीरज : अच्छा बैठो। लो तुम्हारे लिएयह हार मैंने कबका बनवाकर रखाहुआ थां कब तुम् मेरेपास दुल्हन बनकर आओगी औऱ तुम्हे मुँह दिखाई मे यहहार दूंगा।.
नीरू : जीजाजी आप् हि पहनादो औऱ उसकेहार केँ खड़कने औऱ चुडिया खड़कने कि आवाज़ सुनाई देती हैं
नीरज : नीरूअब मे तुम्हारा घूंघट उठारहा हूं तुम् तोँ दुल्हन केँ श्रृंगार मे बहोत जचरही होँ औऱ यहहार तुम् पर्र बहोत जचरहा हैं औऱ पता नहि उस प्रशांत नें इतनी सुंदर पत्नि कों केसेछोड़ दिया
नीरू : जीजाजी आप् भि आजइस ख़ुशी केँ मौके पऱ किसका जिक्र लेँ आये। मे कब सें इसरात कां इन्तजार कररही थि.
औऱ रिकॉर्डिंग वही ख़त्म होँ गई,
तभी प्रशांत कां फ़ोनबज उठा औऱ फिन नीरू केँ नम्बर सें फ़ोन थां.
उधर नीरज थां
नीरज। प्रशांत रिकॉर्डिंग सुनी
प्रशांत : वोँ तोँ अधूरी थि
नीरज ;; हाँयही चेककर रहा थां कि तुम् पूरी सुनो.
नीरज: मैंने नीरू कां घूंघट उठाया तौ मुझे मज़ा आँ गय़ा, घुघंट उठाकर उसका चेहरा देखा उसकीआँख बंद थि मैंने उसकेलाल लालहोठ पऱ अपनीहोठ रखउसे किश किया तौ वोँ सिहर गई। मे भि स्वयं सिहर गय़ा। मैंने उसकेहाथ थामलिए, अबआगे कि रिकॉर्डिंग भेजूंगा। पूरीसुन औऱ मुझेकुछ टिप्स भि देना। तभी निशंक कि फोटो मिलेगी.
प्रशांत : तड़पते हुए नीरजजी प्लीज ऐसामत करो.
नीरज : अरे दोस्त प्रशांत सुन लें., कौन सां वोँ अब तेरी बीबी हैं जोँ तेरी बुरालग रहा हैं मे तेरी सहायता हि कररहा हूं तोँ तुँ भि तोँ कुछकर मेरेलिए
.
जारी रहेगी
शक कां अंजाम - Next part mein bada twist
नहीं भइया, चलने दिजीए भाग 3 कि स्टोरी जोँ लेखकलिख रहे हैं,उनकी लेखनी भि अच्छी हैं, भाग देतेरहे। 1 सें ज़्यादा लेखक सें किस्सा खिचड़ी बन जायेगी।
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