शक कां अंजाम – New Episode
शक कां अंजाम - by moorti kavi
ये किस्सा हें एक् लड़के प्रशांत कि। आप् उसी केँ नज़रिये सें ये स्टोरी पढिये।
दोस्तो यहकथा मैंने अन्यत्र पढ़ी अच्छी लगी इसीलिए इस स्टोरी कों मे यहा पोस्ट कररहा हूं असली लेखक केँ बारे मे पता नहि चला। किसी कों पता होँ तौ जरूर कमेंट कीजियेगा.
परिचय
प्रशांत २३साल कां नौजवांन मम्मी बाप कां इक्लौता लड़का औऱ गर्ल फ्रेंड बनाने केँ चक्कर मे कभी नहि पड़ा क्योंकि बहोत शर्मीला हैं। कॉलेज समाप्त होते हि पास केँ बड़ेशहर मे नौकरी लग गयीँ, औऱ मां बाप कां घऱ छोड़कर नएशहर मे रहनेलगा।
नीरू- प्रशांत कि पत्नि सुंदर फिगर एकदम पेरफ़ेक्ट। चुलबुली, बब्बली सि लड़की अपनी शरारत औऱ नटखटपन नहि भूली थि
ऋतु नीरू कि बड़ी दिदी हैं। ऋतु दिदी निरु सें ७साल बड़ी हें औऱ उनकी विवाह लगभग६-७ साल पहले नीरजजी सें हुयी थि।
नीरज ऋतु दिदी केँ पति हैं।
INDEX
शक कां अंजाम – New Episode
UPDATE 01
येकथा हें एक् लड़के प्रशांत कि। आप् उसी केँ नज़रिये सें ये स्टोरी पढिये।
मेरानाम प्रशांत हें औऱ मे २३साल कां नौजवांन हूं। मेरे मां बाप कां इक्लौता लड़का हूं औऱ गर्ल फ्रेंड बनाने केँ चक्कर मे कभी पड़ा नहि क्युकी मे बहोत शायरहा हूं औऱ काम बोलता हूं। कॉलेज खत्म होते हि पास केँ बड़ेशहर मे मेरी नौकरी लग गई, औऱ मे मां बाप कां घऱ छोड़कर नएशहर मे रहनेलगा। मे अपने करियर पऱ कंसन्ट्रेट कररहा थां औऱ घऱ वालें मेरी विवाह करवाना चाहते थें औऱ मे उनको हमेशा ताल देता।
एक् बारजब मे कुछदिन कि छुट्टियो मे घऱ गय़ा तोँ घऱ वालों नें मुझे बोला कि उन्होंने एक् लड़की देखि हें औऱ मे एक् बारउस लड़की कों देख औऱ मिललु। विवाह चाहे तौ मे बाद मे करलु। घऱ वालों कां दिल रखने केँ लिए मे रेडी हौ गय़ा औऱ मे अपने माता-पिता केँ संग लड़की केँ घऱ गय़ा। मन मे यही थां कि वापिस घऱआकर लड़की कों रेजेक्ट कर दूंगा औऱ पीछा छुड़ा लुंगा। लड़की कों मेरे सामने लाय गय़ा औऱ मेरी सिट्टी पिट्टी घुम होँ गई,। सुंदर सि लड़की थि औऱ उसका फिगर एकदम पेरफ़ेक्ट। कभी सोचा नहि थां कि ऐसी लड़की सें विवाह करने कां मौका मिलेंगा। उसकेसंग अलग सें बात करने कों भि मिला।
उसकानाम निरु थां औऱ मे उसकी खुबसुरती मे इतनाखो गय़ा कि कुछ पुछा हि नहि, येसोच कर कि कही वोँ नाराज न् हौ जाए। वोँ जरूर मेरे बारे मे जानकार इम्प्रेस हुयी औऱ इंटरेस्ट दिखाया। उसकेघऱ वालों नें बताया कि निरु कि नौकरी उसीशहर मे लगी हें जहा मे अभि नौकरी कररहा हूं। वोँ लोग निरु कों उस अनजान शहर मे अकेले नहि भेजना चाहते थें औऱ उसीशहर मे किसी सें विवाह करवाना चाहते थें। मुझसे पुछा गय़ा कि मे विवाह कों सजधजकर हूं याँ नहि, मे चाहु तोँ सोचकर जवाबदे सकता हूं। मैंने जल्दी हांबोल दिया औऱ हम् दोनों केँ घऱ वाले बहोत खुश हुये। मे खुश थां कि मुझे इतनी हसीन बिवी मिलेगी। निरुखुश थि कि उसकी नौकरी कां सपना पूरा होगा औऱ मुझे तौ वोँ, वैसे हि पसन्द कर चुकी थि।
अगले महीने हि हमारी विवाह हौ गयीँ,। एक् महीने पहले मैंने सोचा भि नहि थां कि मे विवाह कर लूंगा औऱ अबसभी कुछ इतना जल्द होँ गय़ा। मगर मुझे अपने डिसिशन पर्र कोई पछ्तावा नहि थां। मेरा किराए केँ घऱ कों शेयर करने केँ लिए एक् लाइफ पार्टनर आँ चूका थां। विवाह सें पहले केँ इस एक् महीने मे भि मेरीबात निरु सें होतीरही थि। एक् चीज जौ मुझेपता चली थि वोँ ये कि वोँ बहोत चुलबुली सि लड़की हैं। मेरा बिहेवियर उसके बिहेवियर सें एकदम उलटा थां तोँ मुझे वोँ बहोत पसन्द आयी। मे चुपचाप कमबात करता औऱ वोँ जल्द हि किसी केँ संग घुलमिल जाती औऱ ज़्यादा बात करने कि बहोत आदत थि। मेरे शांतघऱ मे हमेशा चहलपहल रहनेलगी। जिन पड़ोसियो सें मैंने कभीबात नहि कि थि, निरु कि वजह सें उनकेनाम भि जानने लगा औऱ वोँ हमारे घऱ भि कभीआते थें। मुझेलगा जैसे मेरी लाइफ कम्पलीट होँ गई, हैं। मेरी ज़िन्दगी कां अधुरापन दूर हौ गय़ा थां। विवाह केँ बाद भि वोँ चुलबुली, बब्बली सि लड़की अपनी शरारत औऱ नटखटपन नहि भूलि थि। हम् दोनों नें करियर कों देखते हुए डिसाइड किया थां कि हम् अपना बच्चा अभि प्लान नहि करेंगे। निरु कों बच्चो सें बहोत लगाव थां। वोँ अपना बच्चा चाहती थि पऱ उसे हम् दोनों केँ करियर कि भि परवाह थि।
हमारी विवाह कों एक् साल हौ चूका थां औऱ हमारी ज़िन्दगी बहोत आहिस्ता चलरही थि। पर्र फिन हमारी ज़िन्दगी मे एक् तूफ़ान आया। एक् दिन निरु मेरेपास आयी औऱ हमेशा कि तरह मुझसे बातें करनेलगी।
नीरु: "प्रशांत, हम् लम्बे टूर पऱ कभी नहि गए, क्याँ हम् लोग किसीबीच वाली स्थान घुमने जाए, ३-४ दिन केँ लिये। आगे लॉन्ग वीकेंड भि आने वाला हें"
प्रशांत: "कोई स्थान सोची हें तुम्हे कि कहां जानां हें? मगर अभि वक्त बहोत कमबचा हें, इतना जल्द हम् सारी बुकिंग करवा नहि पाएंगे"
नीरु: "उसकी चिंता तुम् मतकरो। मे सभी सम्भाल लुंग। तुम् सजधजकर हौ याँ नहि?"
प्रशांत: "अगरसभी अच्छे सें मैनेज हौ जायेगा तोँ मे तैयार हूं, पर्र तुम् अकेले केसे मैनेज करेगी? पूरा प्लान तोँ बताओ"
नीरु: "बंदोबश्त हौ चूका हैं। जिजाजी औऱ दिदी यहा आँ रहे हैं। फिन हम् चारो घुमने जाएंगे। जीजाजी नें ट्रैन केँ टिकटबुक करदिए हें औऱ होटल भि बुक होँ गयीँ, हें"
नीरुचहक रही थि औऱ बहोत एक्ससिटेड लगरही थि औऱ मे दंग थां कि उसने सारी तयारी पहले हि करली पर्र मुझसे अबपुछ रही थि।
प्रशांत: "सारा प्लान तोँ तुमने औऱ नीरज जीजाजी नें बना हि लिया हें। कब सें प्लान चलरहा थां? मुझे पहले क्यूं नहि बताया?"
नीरु: "मुझेपता थां तुम् मना नहि करोगे। मुझे भि कल जीजाजी नें फ़ोन करके बताया कि ये प्लान हें औऱ हम् दोनों कों उनकेसंग जानां हि पड़ेगा"
नीरु केँ घऱ मे उसकी माता-पिता केँ अलावा केवल उसकी एक् बड़ी बेहनऋतु दिदी हैं। ऋतु दिदी निरु सें ७साल बड़ी हें औऱ उनकी विवाह लगभग६-७ साल पहले नीरजजी सें हुयी थि। जौ अब रिश्ते मे मेरा साढु भइया होँ गए थें। नीरु कि दिदी कों मे भि दिदी कहकर हि बुलाता हूं औऱ वोँ दोनों मुझे प्रशांत नाम सें बुलाते हें क्यूं कि मे उनसे उमरा मे ४-५साल छोटा हूं।
शक कां अंजाम – New Episode
UPDATE 02
अगलेवीक नीरज जीजा औऱ ऋतू दिदी हमारे घऱआने वाले थें औऱ हम् सभी हमारे शहर सें ट्रैन सें निकलने वाले थें। पूरे सप्ताह निरुघऱ मे इधर सें उधरदौड रही थि औऱ तयारी मे लगी थि। साम कों दफ़्तर सें आने केँ बाद वोँ फ़ोन पर्र लग जाती औऱ अपनी दिदी औऱ जिजा केँ संगबात कर क्याँ लेना औऱ क्याँ नहि लेना कि तयारी करती। मुझे निरु कां एक्ससिटेमेंट देखकर बहोत अच्छा लगरहा थां औऱ मेरे चेहरे पऱ भि उसकोदेख स्माइल आँ जाती। कुछ महिनो पहलेजब मे निरु केँ संग उसकेघऱ गय़ा थां तौ वहा नीरज जीजाजी सें भि मिला। इन दोनों जीजा साली कां नाता एकदम मस्ती वाला थां। दोनो एक् दूसरे सें हँसी मजाक करते रहते औऱ एक् दूजे कि टाँग खीचने कां कोई मौका नहि छोड़ते थें। वोँ दोनों जबसंग होते तौ एंटरटेनमेंट बारबार होता रहता थां। ऋतू दिदी सें सुना थां कि निरु शुरुआत सें हि अपने जीजाजी केँ मुहलग गयीँ, थि औऱ बिना शरमाये उनसेसभी शेयर करती थि औऱ खुलकर बातें करती थि। ऋतू दिदी कां स्वभाव निरु सें उलटा थां। बहोत हि शान्त औऱ गम्भीर मगर समजाहदार थि। वोँ हाउसवाइफ थि औऱ आगे पीछे कां सारा नॉलेज रखती थि औऱ मौका पड़ने पर्र मुझे औऱ निरु कों भि समझती रहती थि। नीरु सुंदर थि तौ ऋतु दिदी भि काम नहि थि। दिदी कां वजन निरु सें थोडा अधिक थां पर्र दोनों कि शकले बहुत मिलती थि औऱ खुबसुरती लाजवाब थि।
मै अपनीआदत केँ हिसाब सें ऋतु दिदी सें शरमाता थां औऱ ज़्यादा बात नहि करता थां। ऋतू दिदी हि आगे बढ़कर मुझसे बात करती औऱ मुझे नार्मल करने कि कोहिश करती थि। क्यूं कि निरुजब बोल्ना शुरुआत करती तौ मुझेसभी भूल हि जाते हैं। अबबात करते हें नीरज जीजा कि। नीरज जीजा औऱ ऋतू दिदी भि मेरी औऱ नीरू कि तरह अपोजिट थें। ऋतू दिदी शांत औऱ समझदार थि तोँ नीरज बहोत बातूनी औऱ हमेशा मजाक केँ मूड मे रहते थें। शायदये भि एक् कारण थां कि निरु कि नीरज जीजा सें बहोत अच्छी बनती थि। निरु चाहे कपडे खरीदती तोँ भि नीरज जीजा केँ मनपसंद कां कलर याँ डिज़ाइन लेती। वोँ नए कपडेपहन कर मुझे दिखाती औऱ पूछती कैसीलग रही हूं। निरु तौ मुझेहर तरह केँ कपड़ो मे सुंदर हि लगती थि तौ मे शान्ति सें बोल देता कि अच्छी लगरही हौ। येह सुनकर वोँ मुझे सुना देती कि कैसी फिकी तारीफ़ कि हैं। जीजाजी होते तौ उसकी बहोत तारीफ़ करत। मुझे जिजा सें तारीफ़ करना सीखना चहिये। केवल कपड़ो कि बात नहि थि, दूसरे मौको पर्र भि मेरा कम्पैरिजन हमेशा नीरज जीजा सें करती कि अगर जीजाजी होते तोँ ये करते याँ वोँ करते। एक् समझदार व्यक्ति कि तरह मे उसकीबात हमेशा हँसी मे टाल देता औऱ कभीमंद नहि किया औऱ नां हि मुझे बुरा लगता थां क्यूं कि मे जानता थां कि निरु कि आदत उसके जिजा सें बहोत मिलती हें औऱ मे एकदम उलटा हूं।
आखीर वोँ दिन भि आयाजब निरु केँ जीजा औऱ दिदी हमारे घऱआने वाले थें। वोँ लोग दोपहर बादसाम होते होतेआने वाले थें औऱ देररात कों हमें ट्रेन पकड़नी थि। नीरु सुभह सें हि एक्ससिटेड थि। इतनेदिन केँ लिए पहलीबार घुमने जारहे थें औऱ उसकोबीच पर्र जानां बहोत पसन्द भि थां। उस सें भि बड़ी ख़ुशी थि कि संग मे जीजाजी होंग। वार्ना मेरेसंग कही घुमने जाने पऱ तौ वोँ बोर होँ जाती थि। मेरेलिए भि अच्चा त। जब भि कही घुमने जाते तौ वोँ मुझे घुमा घुमाकर परेशान कर देती। अब वोँ सारी परेशानिया जीजाजी कों झेलनी थि।
नीरुघऱ मे वैसे तौ साड़ी नहि पहनती पर्र क्यूं कि जीजाजी आने वाले थें तौ उसने ख़ासतौर सें जिजाजी कि दि हुयी साड़ी पहनी थि उनकोखुश करने केँ लिये। साड़ी पहन वोँ मेरेपास आयी औऱ ख़ुशी केँ मारे मुझे थैंकयू थैंकयू बोलते हुए मेरेगले लगउछल रही थि। उसके मम्मो कां साइज बहुत अच्चा खासा थां औऱ उसके उछलने केँ संग हि उसके मां मेरे सीने सें दबकर मुझेचोट मारते हुए गुदगुदी केँ संग मेरामूड भि बनारहे थें। साड़ी मे तौ वैसे हि वो दूसरे कपड़ो केँ मुकाबले कुछ ज़्यादा हि सेक्सी लगती हें औऱ गजब धाती हें तोँ मैंने भि उसको अपने सें चिपका लिया औऱ एक् क्विक सेक्स कि डिमांड रख दि। मागर निरु नें नाँ बोल दिया। निरु नें बोलै कि जिजाजी केँ आने केँ बाद वोँ कोईकाम नहि करेगी, इसलिये वोँ अभि सें खानां बनाकर रख डेगी। मुझे अपने अरमानो कां गला घोंटना पद। नीरु रसोई मे काम पर्र लग गयीँ, थि औऱ दरवाजा बजते हि मैंने दरवाजा खोला। नीरज जीजाजी नें दरवाजा खुलते हि जोर सें "निरु" कि आवाज़ लगाई पर्र मुझेदेख हलका सां मुस्कुराये औऱ आगेबढ़ गए औऱ निरु निरु केँ नाम कि झाडीलगा दि। नीरु रसोई सें दौड़ती हुयीआयी। उसने एप्रन पहनरखा थां औऱ आते हि उछलकर जीजाजी केँ गलेलग उछलने लगी। मुझे दोपहर कि घटनायाद आँ गई,। जब वोँ ऐसे हि मेरेगले लग उछली थि औऱ मेरामूड बन गय़ा थां। मै सोचने लगा अभि नीरज जीजा कि क्याँ हालत होगी। मुझे थोडा ऑक्वर्ड भि लगरहा थां पर्र निरु कि एक्साइमेंट देखकर मुझे हँसी भि आँ रही थि।
मैउन दोनों कों देखरहा थां कि पीछे सें ऋतु दिदी कि आवाज़ आयी औऱ मुझसे मेराहाल चाल पुछा। मे जब भि अपने ससुराल जाता हूं तौ निरु मुझेभूल जाती हें पर्र ऋतू दिदी मेरा बराबर ध्यान रखती हैं। मैनेऋतु दिदी कों अंदर लिया औऱ उनसे भि हालचाल पुछा। निरु औऱ जीजाजी अब तक अलग हौ कर नार्मल होँ चुके थें। तभी निरु कों अपने रसोई कां ख़याल आया औऱ "मेरी रोटीजल गयीँ, " बोलते हुएभाग करफिन रसोई मे गयीँ,। जीजाजी भि उसके पीछे रसोई मे चलेगए ये कहतेहुए कि "निरु नें जीजाजी केँ लिए क्याँ पकाया हें"
मैने दिदी कों बैठने केँ लिए बोला।
ऋतु: "ये निरु एकदम पगली हैं। तुमको परेशान तौ नहि करती न्?"
प्रशांत: "नहि दीदि, मुझे अच्छा लगता हें उसकोइस तरहखुश देखकर। "
अंदर रसोई सें निरु औऱ जिजा दोनों केँ चीख़ने कि आवाज़ आँ रही थि औऱ मेरा ध्यान बारबार उधरजा रहा थां।
ऋतु: "तुम् परेशान मत हौ, इन दोनों कां शुरुआत सें ऐसा हि हैं। पूराघऱ सर पऱ उठे लेते हें"
थोड़ि देरबाद जिजाजी औऱ निरु दोनों रसोई सें बाहर् आए, एक् दूसरे केँ हाथों मे हाथ डाले औऱ चहकते हुये। निरु अपनी दिदी केँ पास जाकरबैठ गयीँ, औऱ जीजाजी मेरेपास पड़े सोफेसीट पर्र आकरबैठ गए। उन दोनों कि बातें चालु हौ गई, औऱ ऋतू दिदी बीचबीच मे थोडा बोल देती पऱ मे पुरे वक्तचुप हि रहा। उन लोगो केँ बीच बातें होतीदेख मैंने भि बातआगे बढ़ाने औऱ मेरी प्रजेंस दिखाने केँ लिएबात कि।
प्रशांत: "ट्रैन कितने बजे कि हैं, ए.सि। ट्रेन बुक कि हें?"
नीरज: "निरु कों ए.सि। स्लीपर मे सोने मे प्रॉब्लम होती हें इसलिये मैंने उसकेलिए नॉन-ए.सि। फर्स्ट क्लास क्प्म्पार्टमेन्ट बुक किया हें"
मेरी बिवी केँ बारे मे जोँ जानकारी मुझे नहि थि वोँ जीजा कों अधिकपता थि। मे अपनाबजट जोड़ने लगा। फर्स्ट क्लास केँ मुकाबले ए.सि। ३टिएर अधिक सस्ता पड़ता औऱ ए.सि। भि मिलता। वोँ लोगफिन सें प्लान करनेलगे कि बीच पऱ जाकर वोँ क्याँ मस्ती करेंगे औऱ मे फिन सें लेफ्ट आउटफील करनेलगा। मैंने सोचा मुझेअब टॉपिक बदलना चेहये।
प्रशांत: "आपकी विवाह कों इतनेसाल हौ गए, आप् लोगखुश खबरीकब सुनारहे होँ?"
मैखुश हुआ कि मैंने अच्चा टॉपिक ढून्ढ कर उनकी बातचीत मे शामिल हौ पाउँगा पर्र एक् बारफिन मैंने मुह कि खायी। इतनीदेर सें जीजा औऱ निरु कि चहचहाने कि आवाज़ एकदमबंद हौ गयीँ, औऱ ख़ामोशी पसर गयीँ,। निरुअब एकदम गम्भीर हौ गई, औऱ बोलीं।
नीरु: "मैंने तुम्हे कभी बताया नहि, दिदी कों मेडिकल प्रॉब्लम हें औऱ वोँ कन्सीव नहि कर सकती हें"
ऋतू दिदी नें निराशा मे अपनामुह झुका लिया औऱ निरु नें उनके कंधे पर्र हाथरख उनको सान्त्वना दि। ये प्रश्न पुछ मैंने बेवकूफ़ी कर दि थि औऱ मैंने जल्दी उनसभी सें माफ़ी मांगी।
दिदी नें मुझको गिल्टी फील नां करने केँ लिए बोलीं, कि इसमें मेराकोई दोष नहि, क्यूं कि मुझेपता हि नहि थां इस बारे मे। तभी जीजाजी नें माहौल कों लाइट बनया।
नीरज:"अरे तोँ क्याँ होँ गय़ा! निरु कों जौ बच्चा होगा वोँ मेरा हि तौ होगा"
नीरु: "ओह्ह्ह्ह! आईलवयू जीजाजी, युआरद बेस्ट"
ये कहतेहुए निरु अपनीसीट सें उठी औऱ जाकर जीजाजी कि गोद मे बैठ गयीँ, औऱ उनकोगले लगा दिया औऱ जिजाजी नें भि उसकी नंगीकमर कों पकडे उसको जकड़ लिया।
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