शक कां अंजाम – New Episode
UPDATE 03
मै एक् बार तौ खुशहुआ कि मेरीवजह सें खराबहुआ माहौल फिनठीक हुआ पऱ फिन जीजाजी केँ शब्दो पर्र ध्यान दिया। क्याँ उनके कहने कां मतलबये थां कि वोँ निरु कों मम्मी बनायेंगे। उन्होंने कहा थां कि "निरु कों जौ बच्चा होगा वोँ मेरा हि तोँ होगा"
मैनेइन शब्दो पऱ ध्यान दिया पर्र बाकी किसी नें उस पऱ ध्यान नहि दिया। निरु तोँ उलटाखुश होकर अपने जीजा कि गोद मे हि बैठ गई, थि। दिदी भि अपनी चिंता छोड़कर हलकी मुस्करायी। मै भि सोचने लगा शायद मैंने हि गलत सुना याँ फिनगलत मतलब निकला होगा। फिलहाल मेरी बिवी अपने जीजा केँ गले पड़ी थि। हलांकि ये पहला मौका नहि थां जब वोँ अपने जीजा सें इतने लगभग थि पऱ मे थोडा असहज महसूस कररहा थां पऱ बाकी तीनो कों ये सामान्य लगरहा थां तोँ मैंने भि इसको लाइटली लिया। नीरुफिन अपनी स्थान आकर बैठी औऱ जीजा साली मे टाँग खिचाई औऱ मजाक शुरुआत हौ गय़ा औऱ मे मात्र दर्शक हि बनारहा। ऋतू दिदी बीच मे अपने एक्सपर्ट कमेंट कर देती औऱ निरु कों डांटकर समझा भि देती।
हम् सभी लोगो नें डिनरकर लिया थां औऱ फिनसंग बैठे थें। थोड़देर प्लानिंग केँ बाद दिदी नें बोला कि उनका सामान तौ पैक हें मगर हम् लोगो नें पैकिंग कि हें याँ नहि। उन्होंने सजेस्ट किया कि हमें पहले अपनेबैग पैककर लेने चहिये। मेरी लास्ट मिनट पैकिंग हि बाकी थि तोँ मे उठ गय़ा। निरु भि उठ गई,।
नीरु: "जीजाजी मैंने अपनीतरफ सें कपडे फाइनल करलिए हें पऱ आप् मेरी सहायता करो कि क्याँ लेना हैं। आप् मेरेसंग चलो"
दिदी: "तुम् लोग पैकिंग फाइनल करोतब तक मे रसोई कां काम समाप्त कर देती हूं फिन सजधजकर होंगे"
मैअब अपने बैडरूम मे आए औऱ पीछे पीछे निरु अपने जीजा कों लेकर अंदरआयी। मे अपनी पैकिंग सें अधिकउन दोनों कों आब्जर्वर कररहा थां।
नीरु नें अपना सूटकेस खोलकर जीजाजी कों दिखाया। उसमे उसके कपडे पड़े थें। उसने एक् एक् करसभी बाहर् निकाले औऱ जीजाजी कों दिखाने लगी कि क्याँ रखा हें औऱ क्याँ नहि। कपडे निकलने केँ संग हि सूटकेस मे नीचे पड़े निरु केँ ब्रा औऱ पेंटी भि दिखने लगे। मुझे थोड़ी लज्जा महसूस हुयी कि इसतरह अपने अंदर पहनने केँ कपडे उसके जीजाजी बैग मे देखपा रहे थें पऱ उन दोनों पर्र कोई फर्क नहि थां। वोँ दोनों कपड़ो कों फाइनल करने मे लगे थें औऱ मेरी पैकिंग होँ गई, तोँ मे उनको देखता रहा। पैकिंग होते हि हम् सभी बाहर् आँ गए। दिदी भि रसोई कां काम समाप्त कर बाहर् आँ गयीँ, थि। टी.वी.चल रहा थां पऱ केवल मे देखरहा थां। बाकी तीनो अपनेकल केँ प्लान बनारहे थें। आधे घंटेबाद दिदी नें आगे केँ काम समाप्त करने कों कहा। दिदी नें बोला कि अब हम् सजधजकर होँ जाते हैं। ख़ासतौर सें निरु कों सजधजकर होने मे ज़्यादा वक्त लगेगा तौ उसको जाने कों बोला।
नीरु: "जीजाजी आप् मेरेसंग चलो औऱ बताओ कि मे क्याँ पहनू"
नीरुअब अपने जीजा कों लेकर मेरे बैडरूम मे चली गयीँ, औऱ दरवाजा बंद होँ गय़ा। अन्दर सें केवल निरु केँ चहकने औऱ खिलखिलाने कि आवाज़ आँ रही थि औऱ बीचबीच मे जीजाजी केँ हंसी कि। इधर दिदी मेरेसंग बातकर रही थि।
दिदी: "निरुघऱ मे सबसे छोटी हें तोँ सबकी लाड़ली रही हैं। उसकी बचपने कि आदत तुम्हे अजीब तौ नहि लगती न्?"
प्रशांत: "बिलकुल नहि दिदी। घऱ चहकता हें तोँ अच्छा लगता हैं। जब वोँ घऱ पर्र नहि होती हें तौ घऱ सुना औऱ अजीब लगता हें"
दिदी: "मेरा पीहर हौ याँ मेरा ससुराल, जब तक निरु रहती हें तोँ किसी बच्चे कि कमी नहि खलती। उसके जाते हि सन्नाटा छा जाता हें औऱ सभी उसकोमिस करते हें"
प्रशांत: "अच्छा हें उसकोसभी मिस करते हैं। मेरे जैसे कां तौ होना नं होनासभी एक् हें"
दिदी: "नहि, ऐसीबात नहि हैं। माँ पिताजी तुम्हारी बहोत तारीफ़ करते हैं। नीरज सें भि अधिक वोँ तुम्हे मनपसंद करते हें"
दिदी सें बात करके थोड़ी शान्ति मिलरही थि पर्र बेडरूम सें लगातार आती आवाजो सें मे थोडा अनकम्फर्टेबल हौ रहा थां। मैंने दिदी कों भि सजधजकर होने कों बोल दिया। दिदी अबउठ खड़ी हुयी औऱ नीरज कों आवाज़ लगाकर बुलाया ताकि निरु सजधजकर हौ सके ताकिदेर न् हौ। दिदी अब गेस्ट रूम मे चेंज करने गई,।
मै अपने बैडरूम केँ दरवाजे तक पंहुचा औऱ अंदर सें आती जीजा साली कि मस्तियो कि आवाज़ मे मेरी अंदर जाने कि हिम्मत नहि थि। क्याँ पता क्याँ देखने कों मिले?मन मे कही न् कही एक् डरघऱकर गय़ा थां। मे वही सोफे सें लेकर बैडरूम केँ दरवाजे तक चक्कर लगतारहा। कुछ मिनट्स केँ बाद हि जीजाजी मेरे बैडरूम सें बाहर् आए। मै चुपके सें जीजाजी कों ऊपर सें नीचे देखते हुए निरिक्षण करनेलगा कि वोँ क्याँ करकेआये होंगे। उनकेबाल बिखरे हुए थें औऱ टीशर्ट पऱ खींचने कि वजह सें सिलवटे थि। मै अपने बैडरूम कि तरफबढा ताकि अंदर जाकर निरु कि खोजखबर लें सकू। पऱ जीजाजी नें बीच मे हि रोक दिया। जीजाजी नें बोला कि लड़कियो कों सजधजकर होने मे समय लगता हैं, हम् मर्दो कों नहि। हम् थोड़ी देरबाद जायेंगे सजधजकर होंने। उन्होंने मुझे बातों मे उलझाये २-३ मिनट रोकेरखा। फिन मैंने हि उन्हें कहा कि मुझे कपडे थोड़े आयरन भि करने हें तोँ मे अंदर जाता हूं। जीजाजी वहीं सोफे पऱ बैठ अपना फ़ोनचेक करनेलगे औऱ मे बैडरूम मे गय़ा। नीरु अल्मारी केँ सामने हि खड़ी थि औऱ केवल अपनी ब्रा औऱ पेंटी मे थि। मुझे देखते हि उसने दरवाजा बंद करने कों कहा। मैंने दरवाजा बंद किया औऱ टाइमिंग गिनने लगा।
जीजजी केँ बैडरूम सें जाने केँ बाद सें लेकरअब तक २-३ मिनट्स हुए होंगे। क्याँ निरु इतना जल्द अपने कपडेखोल कर केवल ब्रा औऱ पेंटी मे आँ सकती हें कि नहि। उसने साड़ी, पेटीकोट औऱ ब्लाउज जीजाजी केँ जाने केँ बाद इतना जल्दखोल लिए होंगे याँ जीजाजी केँ रहतेहुए हि उसने कपडेखोल दिए थें? याँ फिन होँ सकता हें कि निरु केँ कपडे स्वयं जीजाजी नें हि खोले होंगे तभी तोँ अंदर सें इतनी मस्ती कि अवाजे आँ रही थि। मैने अपने आप् कों डांट दिया कि मे भि क्याँ सोचरहा हूं। मेरे बाहर् बैठे रहते जीजाजी कि इतनी हिम्मत नहि होँ सकती हैं। उन दोनों केँ अंदर रहते तोँ मैंने दरवाजा खोलने कि कोशिश भि नहि कि थि। हौ सकता हें उस वक्त दरवाजा अंदर सें लॉक्ड थां। अबयेसभी चीजेपता करने केँ लिए तौ बहोत देर होँ चुकी थि। निरु नें अपना ब्रा निकाल दिया थां ताकि दूसरा मैचिंग कां ब्रापहन पाए।
शक कां अंजाम – New Episode
UPDATE 04
मुझेशक हुआ कि रोज केँ मुकाबले निरु केँ मम्मे कुछ ज़्यादा हि फुलेहुए हैं। क्याँ येसभी मेरा भ्रम थां याँ निरु कां जीजा केँ संग मस्ती करने सें येहाल हुआ थां। याँ ये भि होँ सकता हें कि उनकेबीच एक् क्विक सेक्स हुआ हौ। दिल नहि मानरहा थां पऱ मन मे शक कां एक् बीजउग गय़ा थां। मे अब केसे कन्फर्म कर सकता थां। मैंने सोचा मे निरु कि पेंटी मे हाथ डालकर उसकी बुर कों छूकर देखुंगा। अगर वो गीलाहुआ तौ मतलबकुछ गड़बड़ हैं। मै निरु कों देखरहा थां जोँ टॉपलेस होकर मात्र एक् पेंटी पहने अल्मारी मे कपडेदेख रही थि। मे पीछे गय़ा औऱ उस सें चिपक गय़ा औऱ उसके मम्मे अपने हाथों सें दबाने लगा। नीरु नें मुझको झटका देकर अपने सें दूर किया औऱ कहा कि अभि ज़्यादा रोमांटिक होने कि जरुरत नहि हें औऱ अभि कुछ नहि हौ सकता हें क्यूं कि वक्त नहि हें।
मैंने भि सोच लिया थां कि मे पता करके रहूँगा औऱ मैंने उसकोफिन पीछे सें दबोच लिया औऱ वोँ स्वयं कों मुझसे छुड़ाने लगी। मैंने उसको पीछे सें पकड़कर हवा मे उठा दिया औऱ वोँ अपने पाँव साइकिल कि तरह चलाते हुए फडफडाने लगी। मे उसको लेकरखाट पर्र गिर गय़ा औऱ जबरदस्ती उसकी पेंटी मे हाथ डालने कि कोशिश करनेलगा। वोँ लगातार मेराहाथ पकड़ मुझे रोकती रही जैसे उसकी चोरी पकडे जाने वाली हौ। मैनेआज तक कभी निरु पर्र जबरदस्ती नहि कि थि। हालाँकि उसनेकई बार जबरदस्ती मेरामूड नं होतेहुए भि मेरेसंग चुदाई कि थि। मैने अपनाहाथ उसकी पेंटी मे हाथ डालही दिया औऱ उसकीछूट तक लें गय़ा। उसकी बुर केँ छोटे छोटे बालो पर्र ऊँगली छु गयीँ, औऱ थोड़ी गीली हुयी। निरु नें मेराहाथ जल्दी बाहर् निकाल दिया औऱ उठ खड़ी हुयी।
मे अपनी गीली ऊँगली केँ किनारे कों देखता रह गय़ा औऱ दिल कों धक्का सां लगा। मे निरु केँ चेहरे कों पढ़ने लगा कि कहीचोर तोँ नहि छुपा हैं। मगर वोँ तौ हंसरही थि औऱ चहकते हुए शरमाते बोलि।
नीरु: "बड़ी मस्ती चढ़रही हें आज! अभि जानां हैं, कलरात होटलरूम मे देखती हूं कि तुम् क्याँ करते हौ"
मेरादिल नहि मानरहा थां औऱ मुझेये सभीगलत फ़हमी हि लगी। हौ सकता हें उसकेसंग जौ मे जबरदस्ती कररहा थां उसवजह सें उसकी बुर गीली हुयी हौ। याँ फिन ज़्यादा सें ज़्यादा थोड़ी देर पहले जीजाजी उसकेसंग जौ हँसी मजाककर रहे थें उसवजह सें उसकी बुर गीली होँ गई, होँ, पऱ वोँ जीजाजी केँ संगये गन्दा काम नहि कर सकती। वोँ तौ मात्र मुझे प्रेम करती हैं। फिलहाल उसने दूसरा ब्रापहन लिया औऱ अपनी घुटनो तक कि ड्रेस पहनने कों निकाल दि। मैंने उसको कुरता औऱ लेगिंग पहनने कों बोला।
नीरु: "जीजाजी नें बोला हें सफर पर्र आरामदायक खुले खुले कपडे होने चाहिए इसलिये मे यही ड्रेस पहनूँगी"
अबअगर जीजाजी नें वोँ ड्रेस फाइनल कि थि तौ मेरा बोलने कां कोई फायदा नहि थां। निरु नें वोँ स्लीवलेस घुटनो तक कि ड्रेस पहनली। हालाँकि वोँ उस ड्रेस मे बहोत सुंदर लगरही थि, पऱ हमेशा कि तरह मैंने फ़ीका रिस्पांस दिया। मे भि टी-शर्ट औऱ लोअरपहन कर सजधजकर थां सफर केँ लिये। रात कां सफर थां पर्र फिन भि निरु हमेशा कि तरह मेकअप करनेलगी। मे अब बाहर् हॉल मे आँ गय़ा।
जीजाजी वहा नहि थें, शायद वोँ भि चेंज करनेगए थें। कुछ मिनट्स मे हि जीजाजी औऱ ऋतू दिदी अपने कमरे सें बाहर् आए। ऋतू दिदी नें लूज पजामा औऱ ऊपर एक् बटन डाउन शर्ट पहना थां। जीजाजी नें अपनी बिवी कों तौ निरु कि तरह छोटे कपडे नहि पहनाये थें। जीजाजी नें आते हि निरु केँ बारे मे पुछा। मैंने बोल दिया कि वोँ मेकअप कररही हैं।
नीरज: "अभि रात कों मेकअप कि क्याँ जरुरत हें? रुको मे निरु कों बाहर् लेकरआता हूं। ऋतू तुम् तब तक प्रशांत कि हेल्प सें अपनेबैग बाहर् लेँ आओ। "
जीजजी अब मेरे बैडरूम कि तरफबढे औऱ अंदर जाकर दरवाजा जोर सें बंदहुआ। उस दरवाजे केँ बंद होने कि आवाज़ सें मेरेदिल कों जैसे धक्का लगा। जैसे किसी नें मेरेदिल पऱ एक् मुक्का मार दिया होँ। अन्दर सें निरु केँ चिल्लाने कि आवाज़ आनेलगी "नहि
जीजाजी, नहि जीजाजी"। मुझे बहोत क्रोध आया।
दिदी: "ये दोनों फिन शुरुआत होँ गए, अब अगलेकुछ दिन इनकीयही मस्ती मजाक चलता रहेगा औऱ साराकाम हम् दोनों कों हि करना पड़ेगा प्रशांत। चलो हम् बैग लेँ आते हें"
मैनेसोच लिया मे अंदर जाकर जीजा कों रंगे हाथों पकड़ लूंगा पर्र ऋतू दिदी केँ बैग्स लाने कां क्याँ होगा? मुझेपता थां कि ऋतू दिदी मुझसे कोईकाम नहि करवाती हैं। दिदी अपनेरूम कि तरफबढ़ गए थें। मैंने दूर सें हि उनको आवाज़ दि।
प्रशांत: "ट्राली वालेबैग तोँ आप् आहिस्ता खिंचकर ला सकते हैं, मेरी जरुरत हें क्याँ आपको?"
ऋतू: "नहि, मे लें आउंगी। कोईबात नहि"
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UPDATE 05
इनसभी केँ बीच लगातार अंदर सें निरु केँ चीख़ने औऱ जीजाजी केँ जोर सें खिलखिला कर हंसने कि आवाज़ आतीरही औऱ संग हि निरु भि बीचबीच मे हंसरही थि। दिदी अपनेरूम मे बढ़ी औऱ मे दौडकर अपने बैडरूम केँ दरवाजे तक बढा औऱ सांसरोक कर तेजी सें दरवाजा खोलकर अंदर केँ नज़ारे कों देखने केँ लिए रेडी थां। तभी दरवाजा खुला औऱ सामने जीजा हि खड़े थें एक् चौड़ी स्माइल केँ संग, जैसे मुझे चिढारहे हौ कि मे उनको नहि पकड़ पाया औऱ वोँ पहले हि मेरी बिवी केँ मजे लेँ चुके हैं। जीजाजी दरवाजे केँ बाहर् निकले औऱ मे अंदर गय़ा औऱ वोँ दरवाजा बंदकर चलेगए। मैंने देखा निरुखाट पर्र पेट केँ बल उलटी लेटी हुयी हैं। उसने अपनी घुटनो तक कि ड्रेस पहनी हुयी थि। उसके चेहरे पऱ खुलेबाल बिखरे थें औऱ टाँगे घुटनो सें मुड़कर ऊपरछत कि तरफ खड़ी थि। मे आगेबढा औऱ जाकर एक् हाथ उसकी गांड पर्र रख दिया। वोँ एकदमपलट कर बोलि "जीजाजी" औऱ मुझेदेख जैसे उसको सदमालगा। वोँ अपने जीजाजी कों एक्सपेक्ट कररही थि औऱ मे आउटऑफ सिलेबस आँ गय़ा थां।
प्रशांत: "क्याँ हुआ? तुम् तौ मेकअप कररही थि फिनयहा क्यूं लेटी होँ?"
नीरुअब उठकरबैठ गई, थि औऱ अपने कपडे एडजस्ट करनेलगी।
नीरु: "मे तौ मेकअप हि कररही थि पर्र जीजाजी करने हि नहि देरहे थें औऱ जबरदस्ती खिंचकर ड्रेसिंग टेबल सें खाट पर्र लें आए। सफर पर्र जाने सें पहले भि तोँ मेकअप कर हि सकते हैं, मे तोँ करुँगी"
ये कहतेहुए वोँ फिनउठी औऱ ड्रेसिंग टेबल केँ सामने बैठकर अपना मेकअप दुरुस्त करनेलगी औऱ मे बैग पकड़कर बाहर् खिंच लाया।
दिदी औऱ जिजाजी सोफे पऱ बैठे थें औऱ बैगपास मे हि पड़े थें।
नीरज: "क्याँ हुआ? निरुफिन मेकअप करनेलगी? मे जाऊं वापिस"
ऋतू: "रहनेदो उसको, उसकी ख़्वाहिश हें तोँ करनेदो मेकअप, क्यूं परेशान करते होँ"
५-१० मिनट्स केँ बाद निरु बाहर् आँ गई, औऱ जीजा उसकोदेख उसकी तारीफो केँ पूल बाँधने लगे। निरु ख़ुशी सें फूली नहि समांरही थि। मुझेदेख आँखें दिखारही थि कि जीजाजी सें सीखो केसे तारीफ़ करते हैं। मैनेकैब मंगवायी औऱ हम् लोग स्टेशन पहुचे। पहलीबार मे फर्स्ट क्लास सें सफरकर रहा थां। आज तक ३टिएर ए.सि। याँ नॉनए.सि। स्लीपर मे हि सफर किया थां। हम् अपने कम्पार्टमेंट मे पहुचे। हमारे केबिन मे आमने सामने, ऊपर नीचेचार हि बर्थ थें सोने केँ लिये। मैंने पुछा हम् लोगो कों नॉन-ए.सि। सें हि जानां थां तौ नॉनए.सि। स्लीपर सें जा सकते थें।
नीरज: "स्लीपर मे एक् हि कोच मे ७०-८०लोग होते हैं, वहा फर्स्ट क्लास वाली प्राइवेसी कहां होती हैं। यहा देखो हम् चारो हि हैं। कुछ भि कर सकते हें"
मै उनके"कुछ भि करने" कां मतलब नहि समझा थां, उनके इरादे नेक नहि लगरहे थें। मे औऱ नीरज जीजाजी एक् बर्थ पऱ बैठे थें औऱ सामने दोनों बहने बैठी थि। बातें करने मे सहुलीयत हौ इसकेलिए निरु औऱ उसके जीजाजी आमने सामने हि बैठे थें। इसलिये मेरे सामने ऋतू दिदी बैठी थि। मे औऱ ऋतू दिदी केवलउन दोनों कि बातें सुनरहे थें जौ मस्ती मजाक मे एक् दूसरे कि टाँग खिंचरहे थें। दोनो एक् दूसरे कों धमकीदे रहे थें कि कलबीच पर्र देख्ना मे क्याँ करता याँ करती हूं। उन्होंने अब तक जोँ किया थां उसी सें मे सदमें मे थां तोँ आगे क्याँ होने वाला थां येसोच चिन्तित भि थां। इनसभी केँ बीचऋतू दिदी एकदम शांत थि। क्याँ उनको भि मेरीतरह शक नहि होता होगा अपने पति औऱ बेहन केँ रिश्ते पर्र? याँ फिन वोँ जानबुझ कर उनको करने देती होगी क्यूं कि वोँ मेरीतरह भोलि थि। मैने देखा थां कि ऋतू दिदी कभी कभार निरु कों डाँट देती थि।
शायद उनके बचपन कि आदत होगी निरु केँ इस शरारती रूप कों देखने कि औऱ उसे डाँटने कि। यही कारण होगा कि वोँ निरु कि जिजाजी सें सभी मस्तियो कों हंसकर टाल देती होगी। ऋतू दिदी अपनीशाल निकालने केँ लिए अपनीसीट केँ नीचे पड़ेबैग कों निकालने केँ लिएआगे झुकी। मेरा ध्यान ऋतू दिदी पऱ गय़ा औऱ झुकने केँ संग हि उनके शर्ट केँ ऊपर केँ हिस्से सें उनके बूब्स केँ उभार कि थोड़ी झलक मिली। मै घबराकर दूसरी तरफ देखने लगा जहाँ निरु औऱ जीजाजी बातों मे मशगुल थें। मेरेमन मे चोर थां। मैंने मौका देखते हुएफिन ऋतू दिदी कों देखा। ऋतू दिदी कों कभीइन गन्दी नज़रो सें नहि देखा थां पऱ कुछ घंटो सें जीजाजी औऱ निरु कि हरकतें देख मेरा दिमाग़ भि करप्ट होँ गय़ा थां। ऋतू दिदी बैग कि चेन खोलेशाल निकालने केँ लिए हिली औऱ उनके बूब्स कां उभार भि उनके हिलने केँ संग जेली कि तरह हिलता हुआ बड़ा मादक दिखाई दिया। मेरेमन मे घंटियां बजनेलगी। मैफिन एक् सेकंड दूसरी तरफ देखने लगा कि कहीकोई मुझेऋतू दिदी केँ बूब्स घुरते तोँ नहि देखरहा। औऱ फिन मे ऋतू दिदी केँ बूब्स कि थोड़ी सि दिखती झलक कों घुरने लगा।
ऋतू दिदी नें शाल निकाल लिया थां औऱ बैग कि चेन वापसी बंद करनेलगी। मे थोड़ी देर औऱ उस नज़ारे केँ मजे लेना चाहता थां पऱ मे अब दूसरी तरफ देखने लगा, ताकिऋतू दिदी मुझे उन्हें घुरते हुए नाँ देख लेँ। ऋतू दिदी बैग अंदररख सीधा हौ चुकी थि। मे फिन उनकीतरफ देख थोड़ी स्माइल करनेलगा। दिदी नें जीजा साली कि बातो मे ध्यान लगाने उनकीतरफ देखा तौ मे उनकी छाती कों घुरने लगा। कुछ दीख तोँ नहि रहा थां पर्र शर्ट केँ अंदर सें हि उनके उभारों कों देखने लगा। फिन अपने आप् पर्र क्रोध भि आया कि मे ये क्याँ कररहा हूं? थोड़ी देरबाद ऋतू दिदी नें बोला कि उनको नींद आँ रही हें तौ सभीसो जाते हैं। मे उनकीबात कां सम्मान करतेहुए जल्दी उठ खड़ाहुआ। पर्र जीजा साली कि बातें अभि खत्म नहि हुयी थि औऱ उन्होंने हम् दोनों कों ऊपर कि दोनों बर्थ पर्र सोने कां बोल दिया।
शक कां अंजाम - Next part mein bada twist
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