शक कां अंजाम – New Episode
UPDATE 09
इसके पहले कि जीजाजी मुझे औऱ ऋतू दिदी कों नाश्ता केँ लिएभेज कर निरु केँ संग अकेले मे नहाने कां बोलते, मे बीच मे कुदपडा।
प्रशांत: "ऋतू दिदी आप् औऱ जीजाजी नाश्ता करआए, मे औऱ निरुतब तक नाहाकर सजधजकर होँ जायेंगे"
नीरु अपनाबैग खोल कपडे निकालने लगी औऱ जीजाजी कों अपनी बिवी केँ संग नाश्ता केँ लिए जानां पडा। उनके जाते हि निरु मेरेपास आयी औऱ मुझेगले लगा लिया।
नीरु:"आई ऍम सोर्री, आजरात कों चुदाई कां वादा नहि निभा पाउंगी"
प्रशांत: "कोईबात नहि, संग मे तोँ नहा हि सकते हें"
नीरु:"अब इतना तोँ कर हि सकती हूं, चलो अंदर"
हम् दोनों कईबार पहले भि एक् संग नाहा चुके हें औऱ एन्जॉय कर चुके हैं। मुझेइस बात कि ख़ुशी थि कि मेरी बिवी अभि भि मेरी हि थि। अपने पहनने केँ कपडे हम् अंदर वाशरूम मे हि लेँ गए थें। निरु नें अपने सारे कपडे निकाले औऱ नंगी होँ गयीँ,। उसके नंगे सेक्सी शरीर कों देख मे वैसे हि पागल हौ जाता हूं। हम् दोनों अब बिना कपड़ो केँ शावर केँ नीचे खड़े थें। एक् दूसरे केँ अंगो कों सहलाते हुए गीला किया औऱ फिन साबुन लगाकर रगडा। उसने मेरे लण्ड कों जब साबुन लगाया तौ मुझे सबसे ज़्यादा ख़ुशी हुयी औऱ मुझे उसके मम्मो औऱ बुर कों रगडते हुए ख़ुशी मिली। उसके छुने सें औऱ उसको नंगा देखने सें मेरा लण्ड तोँ वैसे हि कड़क होकर४५ डिग्री केँ एंगल पर्र खड़ा थां। नहाने केँ बाद उसनेपलट कर शावरबंद किया। उसी समय मैंने उसको पीछे सें पकडा औऱ अपना लण्ड उसकी बुर मे डालकर उसको चोदने कि कोशिश कि पर्र उसने विरोध किया।
नीरु: "क्याँ कररहे होँ? जीजाजी औऱ दिदी बाहर् आँ जायेंगे"
प्रशांत: "इतना जल्द नहि आएंगे"
नीरु: "वोँ कभी भि आँ सकते हें औऱ तुमने प्रोटेक्शन भि नहि पहना हैं। तुम्हे याद हें न्, हमें अभि बच्चा नहि चाहिए"
प्रशांत: "थोडा सां तोँ करनेदो, तुम् १० तक गिनती कहो औऱ मे बाहर् निकाल दूंगा"
नीरु: "पक्का, बाहर् निकाल दोगे! निकाल देना नहि तौ गड़बड़ हौ जाएगी"
नीरुअब मेरा लण्ड अपनी बुर मे लेने कों रेडी हौ गई,। मैंने पीछे सें खड़े होकर उसकी बुर मे अपना लण्ड डाला। ३ दिनबाद मेरे लण्ड कों उसकी बुर कि गर्मी मिली थि औऱ मेरा लण्ड बावरा होँ गय़ा। मेरेहर धक्के केँ संग निरु१ सें लेकर१० तक गिनती बोलरही थि। १० धक्को केँ बाद उसने मुझे रुकने कों बोलि पर्र मे तोँ बहक चूका थां। मे उसको चोदता हि रहा औऱ वोँ लगातार अपना एक् हाथ पीछे लाकर मुझेरोक रही थि। मैने एक् हाथ सें उसके मम्मो कों भि पकड़ लिया औऱ दूसरे सें उसकीकमर पकडे उसको धक्के मारमजे लेतारहा। वोँ मुझ पर्र चिल्ला रही थि औऱ मे उसकीसुन हि नहि रहा थां। फिन निरु नें अपनी गांड सें एक् जोर कां झटका मुझे पीछे कि तरफ मारा औऱ मे उस सें दूरहुआ औऱ वोँ मुझ पर्र चीख़ने लगी।
नीरु:"ये क्याँ हौ गय़ा हें आज तुमको! इतनी लापरवाही तौ कभी नहि करता। ये देखा तुम्हारा लण्ड, इसकाजूस निकलना शुरुआत होँ चूका हैं, मे प्रेगनंट होँ गयीँ, तोँ?"
मैने अपना लण्ड देखा जिसके मुह पर्र सच मे एक् बूँद मेरे सीमेन कि थि। मैंने उसको सॉरी बोला औऱ हमनेफिन सफायी शुरुआत कि। निरु नें सच हि कहा थां, जीजाजी कों निरु केँ इतना लगभगदेख मे इन्सेक्युरे हौ गय़ा थां औऱ एक् ग़लती करनेजा रहा थां, जिस सें निरु प्रेग्नेंट होँ सकती थि। मैने अपनाबदन पोंछकर कपडेपहन लिए औऱ ध्यान दिया कि निरु केँ कपड़ो केँ अलावा उसकाटु पीेस बिकिनी कस्टूमए भि थां जौ मे पहलीबार देखरहा थां। निरु भि अब नाहाकर कपडे पहनने आँ गई, थि।
प्रशांत: "येनयी बिकिनी तुम्हारी हें?"
नीरु:"आज हम् बीच पर्र जाएंगे तोँ कपड़ो केँ अंदर हि बिकिनी पहनकर जाउँगी। वहा जाते हि चेंज नहि करना पडेगा"
प्रशांत: "मगरये तौ टु पीेस बिकिनी हैं। बीच पर्र बहुतलोग होगे, थोडा बॉडी ढकने वाला कस्टूमए फिन भि ठीक रहता। तुम्हारे पास तोँ ऐसा स्वीमिंग कस्टूमए पड़ा भि हें"
नीरु:"हां मैंने सोचा थां पऱ जीजाजी नें बोले कि मेरा फिगर हि ऐसा हें तौ मुझेटु पीस बिकिनी पहनना हि चहिये, मुझे पर्र अच्छा दिखेगा"
प्रशांत: "जीजाजी क्याँ ऋतू दिदी कों भि टुपीस कस्टूमए पहनने देंगे?"
नीरु: "जीजाजी बोल भि देंगे तौ भि ऋतू दिदी नहि पहनेगी। उनको लगता हें कि उनका फिगरटु पीस बिकिनी केँ लिएठीक नहि हैं। मैंने भि तौ उनको बोला थां पऱ वोँ मानी नहि"
प्रशांत: "ये तुमने कब खरीदा? "
नीरु: "एक् महीने पहले। जीजाजी नें बहोत पहले हि मुझे फ़ोनकर बोल दिया थां कि बीच घुमने कां प्रोग्राम बनारहे हैं। लास्ट वीक जैसे हि प्रोग्राम फिक्स हुआ मैंने तुमको बता दिया"
मै अब वाशरूम सें बाहर् आँ गय़ा औऱ निरु अंदर कपडे चेंज करनेलगी। मुझे जीजाजी पर्र क्रोध आया। मेरी बिवी कों वोँ टुपीस बिकिनी कां झाँसा देकर निरु केँ नंगे शरीर देखने कां मज़ा लेना चाहते हैं।
नीरु थोड़ी देर मे बाहर् आयी पर्र जीजाजी औऱ दिदी कां कोईपता नहि थां। जीजाजी कों वैसे हि अधिक खाने कि आदत थि औऱ होटल मे फ्री नाश्ता थां तौ वोँ अच्छे सें मजेलूट कर हि आने वाले थें। नीरु नें डेनिम शॉर्ट्स औऱ टीशर्ट पहना थां औऱ अपनामेक उपकररही थि तभी जीजाजी औऱ दिदी आँ गए। निरु कों देखते हि जीजाजी एक्ससिटेड होँ गए।
नीरज: "निरु क्याँ हॉटलग रही होँ!"
शक कां अंजाम – New Episode
UPDATE 10
नीरु कड़ी होकरघुम कर अपना प्रदशन करनेलगी औऱ अपनी तारीफ़ सुन फूली नहि समायी। उसने मुझे भि देख, क्यूं कि मैंने उसकी तारीफ़ अभि तक नहि कि थि।
नीरज: "वोँ पिंक वाली बिकिनी लेनामत भूलना"
नीरु: "वोँ मैंने कपड़ो केँ अंदरपहन लिया हें"
नीरज: "वेरी गूड़, स्मार्ट लड़की हें"
जीजाजी कों पहले हि पता थां कि निरु नें पिंककलर कां टुपीस बिकिनी लिया थां। मुझेलगा कही जिजाजी नें हि निरु कों वोँ कॉस्ट्यूम उपहार तौ नहि किया थां!
दिदी अपने कपडेबैग सें निकालने लगी औऱ बाथरूम मे गई,। मैंने रूम कि चाबी लें ली औऱ निरु कों लेकर नीचे नाश्ता केँ लिएचला गय़ा। निरु अपने फिगर कां बहोत ध्यान रखती हें औऱ मेरे खान-पान कां भि। वोँ अधिक नहि खाती औऱ हेल्दी हि खाती हैं। हम् लोगो नें जल्द हि अपना नाश्ता समाप्त किया औऱ फिन अपनेरूम मे आए। वाशरूम सें ऋतू दिदी कि सिसकियो औऱ चीखो कि आवाज़ आँ रही थि। मै वाशरूम कि तरफ बढ़ने लगा पर्र निरु नें मेराहाथ पकड़कर रोक लिया औऱ मुझे खींचते हुएफिन दरवाजे केँ बाहर् लेँ आयी औऱ रूमबंद कर दिया।
नीरु: "तुम्हे लज्जा नहि आती! अन्दर मेरी दिदी औऱ जिजाजी हें"
प्रशांत: "लज्जा तौ उनकोआणि चहिये, कॉमनरूम मे इतनी आवाज़ करऐसा कामकौन करता हें!"
नीरु नें मेरे कंधे पऱ एक् हाथमार दिया औऱ डांट दिया।
नीरु: "दिदी बाहर् आएगी औऱ हमको देखेगी तोँ उनको कैसा लगेगा? उनको शरमिंदा होना पडेगा। हम् थोड़ी देरबाद अंदर जाएंगे, उनको अपनाकाम खत्म करनेदो"
प्रशांत: "तुम् तोँ मुझे वाशरूम मे कुछ करने हि नहि देरही थि। अपनी दिदी कों देख, पति कों कितना खुश रखती हें"
नीरु: "मे तौ तुम्हे जैसेकुछ करने हि नहि देती हूं? दिदी कों बिना प्रोटेक्शन करवाने सें कोई रिस्क नहि हें पर्र मे तौ प्रेग्नेंट हौ सकती हूं न्, तुम् प्रोटेक्शन लगाकर आते तौ मे तुम्हे वाशरूम मे करने देती "
येकहकर निरु शर्माने लगी। उसने मुझे अगले२० मिनट्स तक अंदर जाने नहि दिया औऱ हम् इन्तेजार करते हि रहे। फिन उसकेबाद, हमारे पास चाबी होने केँ बावजूद भि निरु नें डोरनॉक किया औऱ दिदी केँ दरवाज खोलने पऱ हम् अंदरगए। ऋतू दिदी नें एक् टॉपपहन रखा थां औऱ नीचे डेनिम शॉर्ट्स पहने थें। मुझे देख्ना थां कि जीजाजी नें ऋतू दिदी कों कौन सें कस्टूमए दिए थें बीच पऱ पहनने केँ लिये। मै आगे बढ़कर तोँ ऋतू दिदी कों पुछ नहि सकता थां इसलिये इंतजार करना थां बीच पऱ पहुचने तक। हम् लोगअब वाहन मे बैठकर बीच पर्र पहुचगए।
हमने बीच-चेयर रेंट पऱ लें लिये। निरु औऱ जीजाजी कुछ अधिक हि एक्ससिटेड थें। ऋतू दिदी औऱ मे हमारा सामान चेयर पऱ रखरहे थें तब तक जीजा अपने कपडे उतार अंदर पहने स्वीमिंग शॉर्ट्स मे आँ गए थें। नीरु नें भि टॉप औऱ शॉर्ट्स निकाला औऱ पिंककलर केँ टुपीस बिकिनी मे आँ गई,। निरु कां फिगर हि ऐसा हें कि ब्रा औऱ पेंटी मे जब वोँ होती हें तौ मे उसको चोदे बिना नहि रह सकता। अभि उसटुपीस बिकिनी मे उसकी वोहि हालत थि औऱ किसी सेक्स बम सि लगरही थि। मेरी हालतये थि तौ जिजाजी कि क्याँ हालत होगी, वोँ मे सोच सकता थां। जिजाजी केँ मुह सें तारीफो केँ बोलफूट पड़े औऱ निरु शरमाते हुए स्माइल कररही थि। अपने जिजाजी सें इतनी तारीफ़ सुनकर उसके तौ कॉस्ट्यूम केँ सारे पैसे वसूल हौ गए थें। निरुअब अपने जिस्म पर्र सनस्क्रीन लोशन लगाने लगी। जिजाजी नें भि फायदा उठाते हुए निरु कि टांगो पऱ लोशन लगाने मे हेल्प कि। जीजाजी जब निरु कि जाँघो पर्र लोशन लगाने केँ बहाने उसके शरीर कों छुने कां मज़ा लेँ रहे थें तोँ मे जलभून रहा थां। मैंने भि अपने कपडे निकालने शुरुआत किये।
जीजाजी नें निरु कां एक् हाथ पकडा औऱ दोनों दौड़ते हुए पानी कि तरफ भागे औऱ पानी मे उतरगए। दौड़ते समय निरु किसी जलपरी सि लगरही थि। वो कुछ विदेशी लड़किया भि टुपीस मे थि औऱ वोँ भि निरु केँ सामने फ़ीकी पड़ गयीँ, थि। मै भि अपने कपडे उतार स्वीम शॉर्ट्स मे थां औऱ निरु केँ पीछे पीछे गय़ा पऱ उनकीतरह दौडकर नहि गय़ा, आहिस्ता पैदल गय़ा।
नीरु अंदर जाते हि कम पानी मे बैठकर गीली हौ गयीँ, थि। जीजाजी नें निरु कां हाथ पकड़कर खड़ा किया औऱ उसको पीछे सें कमर सें पकड़कर अपनेबदन सें चिपकाये औऱ हवा मे उठाकर चारोतरफ गोलगोल घुमाया। नीरु कि गांड कां हिस्सा जीजाजी केँ लण्ड केँ हिस्से सें चिपक गय़ा थां औऱ मुझेपता थां जिजाजी केसेमजे लें रहा थें मेरी बिवी केँ। निरुअब जीजाजी सें दूर हुयी औऱ फिन पानी मे बैठ गई,। जीजजी झुककर उसकीतरफ पानी उछालकर उसको गीलाकर रहे थें। मे तब तक उनकेपास पहुच गय़ा। मुझेपता थां कि जीजाजी निरु पर्र पानीउछल कर उसके बिकिनी टॉप कों गीलाकर उसके निप्पल केँ तीखेपन कों देख्ना चाहते होंगे।
मगरउस बिकिनी टॉप कि मोटाई सें निरु केँ निप्पल कां हलका सां उभार हि दीखरहा थां। थोड़ी देर मे ऋतू दिदी हमारे पासआती दिखि। ऋतू दीदीने ग्रेकलर कां हॉट शॉर्ट्स पहनरखा थां औऱ ऊपर कालेरंग कां टैंकटॉप थां जौ कि वोँ शायद अपनेटॉप केँ अंदर हि पहनकर आयी थि। इतनेकम कपड़ो मे मैंने पहलीबार ऋतू दिदी कों देखा। मुझेकही सें भि उनका फिगर इतना बुरा नहि दिखा कि वोँ टुपीस बिकिनी नहि पहनसके। निरु केँ मुकाबले उनका हलका सां वजन हि अधिक थां। मैऋतू दिदी कां नंगापेट तोँ नहि देख पाया क्यूं कि टैंकटॉप कमर केँ नीचे तक थां पऱ फिगर कां अन्दाजा तोँ होँ हि जाता हैं। जीजाजी नें शायदऋतू दिदी कों वैसे हि डरारखा थां कि उनका फिगर अच्छा नहि हैं।
किस्सा जारी रहेगी
शक कां अंजाम – New Episode
UPDATE 11
ऋतू दिदी भि आकर निरु केँ पासबैठ गयीँ,। नीरज जीजाजी अभि भि पानी कों निरु कि तरफ उछालरहे थां औऱ मुझे भि बोले कि मे ऐसा हि करू। वोँ मेरी बिवी पऱ पानीउछल रहा थां तोँ मैंने उनकी बिवी यानीऋतू दिदी पऱ पानी उछालना शुरुआत किया। नीरु तोँ धीरे-धीरे आँखबंद किये पानी कि बौछार झेलरही थि पर्र ऋतू दिदी नें दोनों हाथआगे किये पानी रोकने कि असफ़ल कोशिश कि। जल्द हि उनका टैंकटॉप भीग गय़ा औऱ उनके मम्मो सें चिपक गय़ा। उनहोने अंदरकुछ नहि पहना थां। वोँ तौ उनकेलिए अच्छा थां कि टैंकटॉप वाइटकलर कां नहि थां वार्ना अब तक तोँ उनके निप्पल कां घेरा टैंकटॉप सें चिपक हमेंदीख चूका होता। भले हि वोँ ब्लैक टैंकटॉप थां पऱ वोँ अब अच्छे सें भीगकर ऋतू दिदी केँ मम्मो सें चिपक उनके मम्मो कि साइजबता रहा थां। हालाँकि ट्रेन मे मैंने उनके क्लीवेज कि झलक देखि थि पऱ अब मे उनके पुरे मम्मो कि साइज कों महसूस करपारहा थां। ऋतू दिदी केँ मम्मे निरु केँ मम्मो सें काम सें काम१इंच तोँ बड़े होंगे हि। संग हि उनके निप्पल भि बहुत बड़े थें। निरु केँ निप्पल थोड़े छोटे थें। मे औऱ भि जोश केँ संगऋतू दिदी केँ बूब्स कों निशाना बनाकर पानी डालने लगा। टैंकटॉप अबऋतू दिदी केँ बूब्स पऱ चमड़ी कि तरह चिपक गय़ा थां। अगर वोँ टैंकटॉप स्किन कलर कां होता तौ ऋतू दिदी नंगी हि नजरआती। हमनेअब पानी डालना बंद किया।
ऋतू दिदी कां ध्यान अब उनकी छाती पर्र गय़ा औऱ वोँ शर्मा गयीँ, औऱ मेरीतरफ देखने लगी। उनकेसर उठाते हि मे दूसरी तरफ निरु कों देखने लगा। मे ऋतू दिदी कों शरमिंदा नहि करना चाहता थां। मैनेफिन ऋतू दिदी कि तरफ देखा वोँ अपनी छाती कों देखकर अपना टैंकटॉप आगे खिंचकर अपने मम्मो सें दूरकर रही थि ताकि कपडा मम्मो सें नां चिपके। मै सोचने लगा कि जीजाजी बेवजह हि निरु केँ पीछे पड़े हैं, ऋतू दिदी कां स्वयं कां फिगर इतना अच्छा हैं। शायद जीजाजी कों भि ऋतू दिदी केँ बूब्स मनपसंद हें तभी तौ सुभह ट्रेन मे ऋतू दिदी जीजाजी कि डिमांड पऱ अपना क्लीवेज दिखारही थि। पानी मे मस्ती केँ दौरन जीजाजी बारबार निरु सें चिपकाने कि कोशिश कररहे थें। मे स्वयं जब निरु सें चिपका तौ मेरेतन जिस्म मे भि आगलग गई, थि। नीरु केँ मम्मो कों उसका कॉस्ट्यूम पूराढक नहि पारहा थां औऱ उसका क्लीवेज साफ़दीख रहा थां। एक् बार तौ मन किया कि मे निरु केँ बूब्स दबा हि दू पर्र आसपास जीजाजी औऱ दिदी थें तोँ अपने आप् पऱ काबू पाया।
जीजाजी नें सुझाव दिया कि हम् समुन्दर कि लहरो सें टकराये। ऋतू दिदी नें मनाकर दिया तोँ वोँ निरु कां हाथ पकड़कर थोडा आगे लेँ गए। जीजाजी नें निरु कि कमर केँ पीछेहाथ रख पकडा औऱ निरु नें जीजाजी कि पीठ पर्र हाथरख पकडा। सामने सें एक् लहरआयी औऱ दोनों नें खड़े होकर उसका सामना किया। एक् केँ बाद एक् लहरेआती गई, औऱ वोँ दोनों मजे लेतेरहे औऱ उछालते रहे। जीजाजी बारबार मौकादेख निरु कि नंगीपीठ औऱ कमर याँ पेट पर्र हाथरख फील लेँ हि लेते। मैने भि सोचा वोँ मेरी बिवी कां आनंद लेँ रहे हें तौ मे उनकी पत्नि कां आनंद लुंगा। मैंने ऋतू दिदी कों संग चलने कों कहा कि हम् लहरो कां सामने करेंगे। वोँ मुझेकभी टालती नहि हैं। वोँ लहरो कां सामने करने मे थोड़ी दरी क्यूं कि उनको स्वीमिंग नहि आती हैं। मगर मेरे कहने पर्र वोँ सजधजकर हौ गई,। मे उन्हें लेकर थोडा आगे गय़ा जहाँ लहरो कां करेंट ज़्यादा थां। मै उनकीकमर पऱ हाथरखे खड़ा अगलीलहर कां इन्तेजार करनेलगा। जैसे हि एक् बड़ीलहर पासआयी ऋतू दिदी घबराकर पलट गयीँ, औऱ लहर केँ फ़ोर्स सें गिरने लगी। मैनेअपन हाथआगे कर उनको गिरने सें रोका। अचानक येसभी हुआ जिसके कारण मेराहाथ सीधा जाकर उनके मम्मो केँ ठीक नीचे जाकरलगा औऱ उनके मम्मो कां उभार हलका सां मेरी ऊँगली कों छु गय़ा।
मैनेऋतू दिदी कों फिन सीधा खड़ा किया औऱ अगलीलहर कां इन्तेजार किया। इस बारलहर अधिकउठी औऱ ऋतू दिदी फिन घबराकर पलटि औऱ फिन अनबेलेन्स होकर गिरने लगी।
मुझे एक् बारफिन उन्हें थामना पड़ा पऱ इसबार मेराहाथ उनकीबगल सें नीचे गय़ा औऱ उनका एक् मम्मा मेरेहाथ सें दब गय़ा। एकदम मक्खन सां रसीले उनका मम्मा थां, औऱ उसको छूते हि मुझे करेंट सां लगा। नीरु केँ मम्मे ऋतू दिदी केँ मुकाबले थोड़े टाइट थें तोँ मुझेऋतू दिदी केँ मम्मे दबाने मे अधिक आनंदआया। मैंने उनके सम्भलते हि अपनाहाथ उनके मम्मे सें हटा लिया। ऋतू दिदी लज्जा केँ मारे स्माइल करनेलगी।
ऋतू दिदी नें मुझसे कहा कि वोँ अब जानां चाहती हें नहि तौ वोँ पानी केँ फ़ोर्स सें नीचेगिर जाएगी। मगर मैंने उनको भरोसा दिलाया कि मे उनके पीछे खड़ा रहुगा औऱ गिरने नहि दूंगा। ऋतू दिदी अब लहरो कि तरफफेस कर खड़ी थि औऱ मे उनके पीछे खड़ाहुआ। मैंने दोनों हाथो सें उनकीकमर कों पक़ड़ा। उनकीकमर सच मे पतली हि थि औऱ निरु कि कमर सें २इंच सें अधिक फर्क महसूस नहि हुआ। इस बारऋतू दिदी नें लहर कां सामने कर लिया। एक् दोबार प्रैक्टिस केँ बाद मे उनकेसंग खड़ा हौ गय़ा।
अगलीलहर आते हि ऋतू दिदी लहर केँ संग पीछेचली गयीँ, औऱ मुह केँ बलबीच कि तरफ थोडा आगेबह गयीँ,। पानी कि लहरो कि वजह सें उनका टैंकटॉप ऊपरउठ गय़ा औऱ उनकी गोरीकमर औऱ पीठ मुझे पहलीबार दिखि। उन्होंने अंदर ब्रा नहि पहनरखा थां। अगर वोँ सीधा लेटी होती तोँ उनके मम्मो केँ दर्शन मुझे होँ जाता। उन्होंने नीचे उलटा लेटे लेटे हि अपनाटॉप नीचे किया औऱ मेरीतरफ मुडी। मुझे उनकी नंगीकमर दिखाई दि। अब क्लियर थां कि निरु केँ मुकाबले उनकीकमर मात्र एक् याँ डेढ़इंच हि ज़्यादा होगी। ऋतू दिदी अबबीच केँ किनारे जानेलगी औऱ मेरे रोकने पऱ भि नहि रुकी। वोँ औऱ अधिक शरमिंदा नहि होना चाहती थि। मैंने जीजाजी सें एक् छोटा सां बदला लें लिया थां।
नीरु कि तरफ ध्यान लगाया तोँ देखा जीजाजी नें उसको अपनी दोनों बाँहों मे उठारखा थां। एक् हाथ निरु कि पीठ पऱ थां औऱ दूसरा निरु कि जाँघिय केँ नीचे औऱ निरु आहिस्ता जीजाजी कि बाँहों मे हाथपेर फैलाये लेटी हुयी थि। मैअब उनके लगभग सामने कि तरफ पहुंच। जीजाजी कां हाथ जोँ निरु केँ पीठ सें पकडे थां उसकी हथेली निरु केँ बगल केँ नीचे थि औऱ उंगलिया करीब-करीब निरु केँ मम्मो कों छुरही थि। मेरेआने केँ बाद जीजाजी नें निरु कों नीचे उतारा। मगर निरु जीजाजी केँ पीछे गयीँ, औऱ कूदकर उनकीपीठ पर्र पिग्गी बैक कि तरहलटक गई,।
मे साइड सें देख सकता थां कि निरु केँ मम्मे जीजाजी कि पीठ सें चिपकगए थें औऱ मम्मे कां थोडा सां उभार बिकिनी ब्रा केँ साइड सें थोडा बाहर् निकलगए थां। जीजजी नें भि अपनेहाथ पीछे लें जाकर निरु कि जाँघो केँ नीचे सें पकड़कर उसको उठाये रखा। मैंने निरु कि नंगीकमर औऱ पीठ पऱ हाथफेर कर उसको अहसास दिलाया कि मे भि वो खड़ा हूं। वोँ कुछ सेकण्ड्स मे जीजाजी कि पीठ सें उतरि औऱ मेरेगले लग गई,। उसके मम्मे मेरे सीने सें चिपकगए। वोँ बीच पऱ आकर बहोत खुश थि औऱ येदीख रहा थां। थोड़ी देर औऱ पानी मे मस्ती करने केँ बाद हम् लोग बाहर् आये औऱ बीच चेयर पर्र लेटगए।
निरु जाकर उलटा लेटी थि। उसकीपीठ पर्र मात्र उसके बिकिनी ब्रा कों बाँधे डोरी कां एक् नॉटलगा थां। जीजाजी आकर उसकेपास बैठगए औऱ निरु कि नंगीपीठ पर्र हाथ फेरने लगे। पता चला वोँ सनस्क्रीन लोशनलगा रहे थें। मुझे बुरालगा तौ मैंने उनसेकहा कि मे लगा देता हूं, औऱ वोँ ऋतू दिदी कों लोशनलगा दे। पर्र उन्होंने बताया कि ऋतू नें पहले हि लोशनलगा लिया हें औऱ स्वयं निरु केँ जिस्म कों छूतेहुए लोशन लगाते रहे। मैंने सनस्क्रीन लोशन स्वयं रख लिया। निरुअब सीधा लेटी।
जीजाजी लोशन कि बोतल ढूँढ़ने लगे। मैंने स्वयं लोशन उंगलियो मे लिया औऱ निरु केँ पेट औऱ सीने पऱ लोशन लगाने लगा। जीजाजी मुझसे लोशन मांगरहे थें पऱ मैंने उनको तकलिफ नां लेने कों कहा औऱ उनको लोशन नहि दिया। जीजजी फिन दूसरी बीच चेयर पर्र चलेगए क्यूं कि अब उनकीदाल नहि गलने वाली थि।
मे जब निरु केँ क्लेवगे पर्र लोशनलगा रहा थां तोँ निरु मुझे प्रेम सें देखरही थि। मैजब निरु केँ शरीर कों मलरहा थां तोँ वोँ उत्तेजित होँ रही थि, जौ कि उसकी नशीली आँखों मे दीखरहा थां। वोँ भि मेरे हाथों औऱ जाँघो कों मलरही थि। तभीऋतू दिदी नें याद दिलाया कि अब हमें लञ्च केँ लिए जानां चहिये।
हम् लोगो नें वहालगे चेंजबूथ मे जाकर कपडे चेंज किये औऱ फिन दोपहर का खाना केँ लिए निकलगए। दोपहर का खाना केँ बाद थोड़ी लोकलशॉप पऱ शॉपिंग कि औऱ सामान गाड़ी मे रखदिए। फिन हम् वाटर स्पोर्ट्स केँ लिए वापिस बीच पऱ आए। जीजाजी बारबार निरु केँ पास जाकर चिपकने केँ लिए कोशिश कररहे थें।
साम कों हम् डिनर केँ बाद हि होटल पहुंचे औऱ बहोत हि थकेहुए थें। ख़ासतौर सें निरु बहोत हि थकी हुयी थि। रूम एक् हि थां तोँ सबसे पहले निरु वाशरूम मे चेंज करने गई, औऱ रात कों पहनने केँ लिए घुटनो तक कां नाईट गाउनपहन लिया। फिन ऋतू दिदी चेंज करने गई, औऱ टीशर्ट औऱ पजामा पहन लिया। उसकेबाद जीजाजी चेंजकर आये औऱ लास्ट मे मे चेंजकर आया।
मै जब चेंज करकेआया तोँ देखाऋतू दिदी एक् बेड पर्र पीठ टिकाये बैठी थि औऱ दूसरे बेड पर्र निरु थकान केँ मारे चादरओढ कर लेटी हुयी थि। जीजाजी निरु केँ दूसरी तरफ उसके सिरहाने बैठे थें औऱ उसकी तबियत पुछरहे थें। मैउन दोनों बेड केँ बीच मे आयातब तक जीजाजी भि निरु कि चादर केँ अंदरघुस गए। मे ऋतू दिदी केँ बेड केँ किनारे पऱ बैठ गय़ा ताकि सामने सें निरु कों देख सकूँ। निरुछत कि तरफ देखते हुए सीधा लेटी थि पर्र जीजाजी निरु कि तरफ करवट लेकर लेटे थें।
चादर केँ ऊपर सें मे निरु केँ बूब्स कां उभारदेख पारहा थां। संग हि जीजाजी कां हाथ चादर केँ अंदर निरु केँ पेट पर्र रखाहुआ थां। समझ नहि आँ रहा थां कि केसे रियेक्ट करूँ, वोँ जीजाजी मेरी बिवी केँ संग एक् हि चादर मे थें औऱ ऋतू दिदी नें भि कुछ नहि बोला। हालाँकि जीजाजी केवल निरु कां हालचाल पुछरहे थें। बातों बातों मे जीजाजी कां हाथपेट सें खिसककर ऊपर आँ रहा थां औऱ जल्द हि निरु केँ बूब्स केँ २इंच नीचे कि तरफ थां। जीजाजी कभी भि मेरी निरु केँ मम्मो कों दबा सकते थें औऱ मे केवलदेख रहा थां। इसके पहले कि जीजाजी कोईगलत हरकत करते, ऋतू दिदी लेट गयीँ, औऱ जीजाजी कों भि आवाज़ लगायी कि वोँ निरु औऱ मुझे सोनेदे क्यूं कि हम् सभीथक गए हैं।
मैनेऋतू दिदी कि तरफ देखकर स्माइल किया औऱ मन हि मन उन्हें थैंकयू बोला। मगर जीजाजी तोँ हिले भि नहि। उनकाहाथ जरूर एक् इंच औऱ ऊपर खिसककर निरु केँ बूब्स केँ ठीक नीचे तक पहुँच गय़ा। मैअब अपनी स्थान उठ खड़ाहुआ। ठीकउसी समयऋतू दिदी नें जीजाजी कों फिन आवाज़ लगायी औऱ जीजाजी नें अपनाहाथ निरु केँ जिस्म सें हटाया औऱ चादर सें बाहर् निकलगए। अब जीजजी ऋतू दिदी केँ खाट पऱ आँ गए औऱ मे जाकर निरु केँ पासलेट गय़ा जहाँ थोड़ी देर पहले जीजाजी लेटे थें। लाइटबंद कर अँधेरा कर दिया गय़ा औऱ मे निरु सें चिपककर सो गय़ा। थकान केँ मारे मुझे नींद आँ गयीँ,।
कुछखट पट कि आवाजो केँ संग मेरी नींद खुली औऱ अँधेरे मे हि मे पास केँ बैड पऱ हलचल महसूस करनेलगा। मुझे समझते देर नहि लगी कि वो चुदाई होँ रही हैं। एक् केँ ऊपर एक् चढ़कोई चुदाई कररहा थां। जीजाजी कि इतनी हिम्मत कि यहादो लोग औऱ सोयेहुए हें औऱ वोँ इसतरह कां कामकर रहे हैं। सुभह हि तौ वाशरूम मे जीजाजी नें ऋतू दिदी कों चोदा थां औऱ रात कों फिन शुरुआत हौ गए। जीजाजी सें अधिक कण्ट्रोल तोँ मेरेपास थां जौ मे ३दिन सें बिना चुदाई केँ रहरहा थां जब कि मेरी बिवी ज़्यादा सेक्सी थि। धीरे-धीरे धीरे-धीरे मुझे अँधेरे मे औऱ अच्छे सें दिखने लगा थां। मैने महसूस किया कि जोँ ऊपरचढ़ करचोद रहा हें वोँ मर्द नहि कोई स्त्री हैं।
ऋतू दिदी तोँ ऐसाकाम कभी नहि कर सकती हैं। मुझेशक हुआकही जीजाजी कों ऊपरचढ़ कर चोदने वाली मेरी बिवी निरु तौ नहि। मेरी तौ धड़कने २ सेकण्ड्स केँ लिएरुक गई,। मैंने अपनेपास चादर केँ अंदर सोयी लड़की पर्र हाथ फेरा। पेट पऱ हाथरख मम्मो केँ ऊपर तक लाय औऱ कपडे महसूस करलगा कि निरु तोँ मेरेपास हि लेटी हुयी हैं, औऱ मैंने सुकून कि सांसली। जीजाजी पर्र चढ़कर चोदने वाली लड़कीअब सीने सें उठकर लण्ड पर्र बैठे बैठे हि चोदरही थि। उसके खुलेबाल उसके उछलने केँ संग हि हीलरहे थें।
मेरी आँखें अब औऱ भि अच्छे सें देखने लगी थि। वोँ ऋतू दिदी हि थि। मुझे अपनी आँखों पऱ भरोसा नहि होँ रहा थां। ऋतू दिदी जैसी सीधी औऱ शान्त महिला ऊपरचढ़ करचोद भि सकती हैं? फिन मैंने अपने आप् कों समझया कि ऋतू दिदी कां वोँ रूप तोँ दूसरो केँ लिए हैं। बैडरूम मे तोँ हर महिला कां एक् अलग खुलाहुआ रूप होता हैं। बैठे बैठे उछलने सें ऋतू दिदी केँ बड़े बूब्स उनके टीशर्ट केँ अंदर हि ऊपर नीचेहिल रहे थें। वोँ बहोत मादकलग रही थि। नीचे उन्होंने कुछ नहि पहना थां क्यूं कि मे उनके गांड कां कर्व हिलता हुआदेख सकता थां।
ऋतू दिदी कों इसतरह चोदते देख मेरेदिल केँ तारबज गए थें। मेरेपास लेटी निरु दूसरे बैड कि तरफ हि मुह करके करवट लें नींद मे सोयी थि। मे निरु केँ पीछे सें चिपक गय़ा औऱ उसके मम्मो कों दबोचकर दबा दिया।
फिन मैंने निरु केँ गाउन कों घुटनो सें ऊपर उठाया औऱ कमर केँ ऊपर तक चढा लिया। फिन जल्द सें अपनाहाथ उस गाउन केँ अंदरडाल कर निरु केँ ब्रा सहित उसका बूब्स दबाने लगा। कुछ हि सेकण्ड्स मे निरु कि नींदउड़ गयीँ, औऱ मेराहाथ हटाया। नींद उड़ने सें उसका ध्यान भि अब शायदपास केँ पलंग पऱ होती चुदाई पर्र गय़ा, क्यूं कि मैंने फिन सें अपनाहाथ निरु केँ बूब्स पऱ रखा औऱ इसबार उसने मेराहाथ पकडा पर्र हटाया नहि।
नीरु स्वयं शॉक मे थि कि पास केँ खाट पऱ चुदाई चलरही थि। निरु कों भि अब तक पताचल गय़ा कि ऊपरचढ़ कर चोदने वाली उसकी बेहनऋतू हि हैं। ऋतू दिदी एक् बारफिन आगेझुक कर जीजाजी केँ सीने पऱ अपनी छातीरख लेट गयीँ, औऱ धक्के मारते हुए चोदती रही। मै ऋतू दिदी कि धक्के मरती औऱ हिलती गांड कों देखकर होशखो बैठा थां। मेरी स्वयं कि चोदने कि ख़्वाहिश हौ चुकी थि। मैंने अपनाहाथ निरु केँ मम्मो सें हटाया औऱ उसकी पेंटी कों नीचे खिंचकर निकालने लगा।
किस्सा जारी रहेगी
शक कां अंजाम - Next part mein bada twist
Relavant source : click here