शक कां अंजाम – New Episode
UPDATE 15
ऋतू दिदी भि झड़ चुकी थि औऱ उहोने मेरे होठो कों अपने नाराम होंठो मे भरकर चूमना शुरुआत किया। उनके होंठ निरु कि तरह बहोत सॉफ्ट थें औऱ मुझे अच्छा लगा। चुदाई केँ मजे तोँ लें लिए पर्र अब वोँ ख़ुमार उतरने केँ बाद मे सोचने लगा कि ये मैंने क्याँ कर दिया। मैंने निरु कों धोखा देकरठीक नहि किया हें। मैअब तक जीजाजी कों निरु केँ संग सम्बन्ध पर्र शक़कर रहा थां औऱ अब मैंने स्वयं अपनी पत्नि कि बड़ी बेहन यानी बड़ी साली कों चोद दिया थां।
मुझेकिश करने केँ बादऋतू दिदी नें मुझे थैंकयू बोला औऱ मुझ पऱ सें उठि। उन्होंने मुझे पहले वॉशरूम मे जाने दिया। मे वॉशरूम मे कपडे लेकरआया औऱ सफाई केँ बाद कपडे पहनने लगा। फिन मेरेमन मे एक् विचार आया। कही ऋतू दिदी औऱ नीरज जीजाजी आपस मे मिलेहुए तौ नहि हैं। हौ सकता हें कि येसभी उनका प्लान होँ कि ऋतू दिदी मुझे फँसाकर चोदेगी औऱ दूसरी तरफ जीजाजी मेरी पत्नि निरु कों फँसाकर चोदेगे। कहीं जीजाजी दूसरे रूम मे निरु कों चोद तोँ नहि रहे।
मैंने अपनी पॉकेट चेक कि वहा मेरेरूम कि चाबी नहि थि। मै वॉशरूम सें एक् टेंशन लिए बाहर् आया। ऋतू दिदी अभि भि नंगी खड़ी थि औऱ फिन वोँ अन्दर वॉशरूम मे गई,। मैने टेबल पर्र देखा तौ मुझे दोनों रूम कि चाबिया पड़ी दीखि औऱ मैंने सुकून कि साँसली। ऋतू दिदी वॉशरूम केँ बाहर् आये उसके पहले हि मैंने अपनेरूम कि चाबीली औऱ बाहर् आँ गय़ा। मै सोचने लगा कि अपनेरूम मे जाऊं याँ निरु केँ पास जाऊं। अपनेरूम मे गय़ा तौ बाद मे निरुआकर पुछेगी कि मैंने ऋतू दिदी कों उसरूम मे अकेला क्यूं छोड़ दिया थां।
अबआगे कि कथा प्रशांत कि ज़ुबानी जारी हें…
मैफिन नीचे पेंटिंग गैलरी ढूँढ़ने गय़ा। मुझे कहींकोई बोर्ड नहि दिख। मैंने होटल केँ रिसेप्शन पर्र एक् स्टाफ सें पूछा कि “यहा आर्ट गैलरी कहां हें?” उसने जवाब दिया कि ऐसीकोई गैलरी नहि हैं। मेरा माथा ठनका। कुछ तौ गड़बड़ हैं। मे औऱ निरु किसीजाल मे फ़ांस गए हें। मै तोँ दिदी सें चुद हि चुका हूं, कहीं निरु भि जीजाजी सें चुद नाँ जाए, मुझे उसको बचाना होगा।
फिन मुझेयाद आया कि होटल वालों केँ पास तोँ रूम कि डुप्लीकेट चाबी होती हैं। कहीं जीजाजी नें उस चाबी सें मेरारूम तोँ नहि खोल लिया। मैने रिसेप्शन पर्र झूठ बोला कि मेरेरूम कि चाबी मेरेरूम मे रह गई, हें औऱ मुझे डुप्लीकेट चाबी सें रूम खुलवाना हैं। उन्होंने बताया कि थोड़ी देर पहले हि बुकिंग करने वाले Mr। नीरज कि रिक्वेस्ट पर्र वोँ रूम उन्होंने डुप्लीकेट चाबी सें खोला हें।
मैवहा सें भागा औऱ वोँ स्टाफ वाला देखते रह। मे अपनेरूम केँ बाहर् पहुँचा। घबराहट मे मुझसे चाबी भि ढंग सें नहि लगरही थि। मेरी पत्नि कि इज्जत खतरे मे थि औऱ मुझे उसको बचाना थां। मैंने दरवाजा खोला औऱ दरवाजे केँ पास जीजाजी मुस्कुराते हुए खड़े थें।
जीजजी: “तुम् आँ गए ? निरु कां ध्यान रखो”
इसकेबाद मुझे गूडनाईट बोलते हुए वोँ दरवाजा बंदकर बाहर् निकलगए।
ऐसालगा जैसे वोँ मुझे चिढारहे हौ कि मैंने आने मे देरकर दि औऱ उन्होंने निरु कों चोदने कां काम पहले हि कर दिया हें। मैरूम मे आगेबढा तोँ देखा कि निरुबेड पर्र डॉगी स्टाइल मे बैठि हैं। हालाँकि उसने कपडे पहनेहुए थें पर्र फिन भि मन मे एक् डर थां। मै उसके पीछे थां तौ उसने मुझे अभि तक देखा नहि थां। इस पोजीशन मे उसकी घुटनों तक कि ड्रेस ऊपरचढ़ चुकी थि औऱ उसकी गोरी जाँघे दिखरही थि।
मैने उसकेपास जाते हि उसकी गांड पर्र हाथरख फील किया कि उसने अन्दर पैंटी पहनी हें याँ नहि। तभी निरु मेरीतरफ गर्दन घुमाते हुए बोलि।
नीरु: “जीजाजी फिन सें नहि, दर्द हौ रहा हें…। ”
फिन मुझेवहा देखकर बोलते बोलते रुक गई,। मुझे तौ हार्ट अटैक आँ जानां चाहिए थां पर्र मे इस सिचुएशन केँ लिए मेंटली सजधजकर थां। नीरु केँ चेहरे पर्र दर्दभरे एक्सप्रेशन थें। जरुर जीजाजी नें निरु कों डॉगी स्टाइल मे बड़ी बेरहमी सें चोदा होगा औऱ निरु दर्द सें बेहाल हें कि चुदने केँ बाद भि डॉगी स्टाइल मे बैठि हें।
प्रशांत: “क्याँ हौ रहा थां यहा?”
नीरु: “तुम् सोजाओ, कुछ नहि हुआ”
प्रशांत: “मैंने तुम्हारी गांड पर्र हाथरखा तोँ तुमने ये क्यूं कहा कि जीजाजी दर्द होगा”
नीरु: “तुम् क्रोध तोँ नहि होगी नं?”
प्रशांत: “क्याँ कर दिया तुमने!”
मेरे शब्द तौ करीब-करीब जुबान मे रुककर बड़ी मुश्किल सें निकलरहे थें।
निरु शायद क़बूलने वाली थि कि उसने भि मेरीतरह गलतीकर दि हें। जीसतरह ऋतू दिदी नें मुझे मेरी फेवरेट पोजीशन मे चोदा थां, शायदउसी तरह जीजाजी नें भि निरु कों उसकी फेवरेट डॉगी स्टाइल मे चोदा होगा। मै इमेजिन करनेलगा कि जीजाजी नें क्याँ किया होगा। मैंने निरु कि ड्रेस कों नीचे सें ऊपरचढा करकमर केँ ऊपर लें आया औऱ उसकी पैंटी बाहर् आँ दीखने लगी।
नीरु: “क्याँ कररहे होँ प्रशांत!”
जब जीजाजी नें निरु कि ड्रेस ऊपर उठायी होगी तोँ ठीकइसी तरह निरु नें बोला होगा कि “क्याँ कररहे होँ जीजाजी”
नीरु कि सेक्सी जाँघो कों देख मे उन पर्र हाथ फेरने लगा। वोँ गुदगुदाहट सें दर्द मे भि खिलखिलाने लगी।
नीरु: “छोडो, मुझे गुदगुदी हौ रही हें”
मगर मे अपनी पत्नि केँ शरीर कों छूतेहुए उसको सहलाता रहा। उसने जोँ जीजाजी सें चुदवाते हुए दर्द झेला होगा, मे उस दर्द कों कम करना चाहता थां।
नीरु:“आज मे तुम्हारे संग नहि चुदवा सकती, मेरे पांव मे दर्द हैं। प्लीज हाथ हटाओ”
मैनेअब निरु कि पैंटी केँ ऊपर हि अपनाहाथ फेरने लगा औऱ उसकी गांड कों सहलाने लगा। निरु लगातार थोडा हीलरही थि जैसे उसको गुदगुदी होँ रही हौ।
मैने सोचा मे निरु कि बुर कों चेककर लेता हूं कि उसकी क्याँ हालत हैं। मैंने निरु कि पैंटी कों पकड़ा औऱ उसकी गांड सें निकाल कर नीचेकर दिया। नीरु मुझे लगातार कपडे नाँ खोलने कों बोलरही थि। शायदइसी तरह उसने जीजाजी कों अपने कपडे नां खोलने कि गुहार कि होगी, पऱ उस हैवान जीजा नें अपनी साली कि एक् नहि सुनि होगी औऱ नँगा करकेचोद हि दिया होगा।
नीरु कि चिकनी गोरीगोल गांड मेरे सामने थि। मैंने उसकी गांड पऱ हाथफेर सहलाने लगा। निरुअब खिलखिलाते हुए मुझेमना कररही थि। शायद जीजाजी नें निरु कि इसी हंसी कां गलत मतलब निकाल उसकोचोद दिया होगा। मैंने अपनी ऊँगली निरु कि गांड कि दरार मे फिराते हुएचेक करना चाहा कि निरु कों दर्द होता हें कि नहि।
मेरी ऊँगली निरु कि गांड कि दरार मे फिरते हुए उसकी गांड केँ छेद तक आई औऱ मुझेसभी कुछठीक ठाकलगा। शायद जीजाजी नें निरु कि गांड नहि मारि थि। मै अपनी ऊँगली औऱ नीचे लेँ गय़ा औऱ मेरी ऊँगली निरु कि बुर केँ छेद केँ ऊपर केँ बालो कों लगी औऱ थोडा गीला हौ गई,। मैने अपनाहाथ पीछे खींच लिया। जीजाजी नें निरु कि बुर चोदी थि।
मुझे पहलेपता होता तोँ मे ऋतू दिदी केँ संग चुदाई नहि करता। मै अब निरु केँ पिछवाड़े पऱ डॉगी स्टाइल मे चोदने केँ अन्दाज मे आया औऱ उसकी गांड कों दोनों हाथों सें पकड़ लिया। जीजाजी नें इसीतरह निरु कि गांड कों पकड़कर धक्के मारकर चोदा होगा।
नीरु: “क्याँ कररहे हौ? हटो, कपडे पहनाओ मुझे”
मै अब निरु केँ पीछे सें हटा औऱ उसकी पैंटी उसकोफिन सें पहना दि औऱ उसकी ड्रेस फिन नीचेकर दि।
प्रशांत: “अबबतओ, क्याँ हुआ?”
नीरु: “तुमने ठीक हि कहा थां”
मैने निरु कों सुभह हि वार्न कर दिया थां कि जीजाजी कि नीयतठीक नहि हें औऱ वोँ ऋतू दिदी कों “निरु”नाम सें चोदरहे थें। तब उसने मेरीबात नहि मानी थि पर्र अब उसकोपता चल गय़ा थां कि मे सच थां।
प्रशांत: “देख, मैंने तुम्हे पहले हि कहा थां कि जीजाजी ठीक इंसान नहि हें”
नीरु: “इसमें जीजाजी बीच मे कहां सें आँ गए! मे हाईहील सैंडल कि बातकर रही हूं। खरीदते समय जिसके लिए तुमने कहा थां कि मुझेमोच आँ सकती हैं। आजसच मे हौ गय़ा”
फिन निरु नें पूरी घटना बतायी कि जब वोँ जीजाजी केँ संग पेंटिंग गैलरी देखने गई, थि, तबपता चला कि वोँ गैलरी सीजनल हैं। अभि वोँ बंद होँ गयीँ, हें। वोँ लोगफिन होटल केँ बाहर् आइसक्रीम खानेचले गए थें।
वापिस आते वक्त होटल केँ अन्दर निरु केँ हाईहील सैंडल कि वजह सें उसका पांवमुड गय़ा। उसकेपेर मे दर्द थां तौ होटल स्टाफ कि सहायता सें उसको व्हीलचेयर पऱ इसरूम मे लाया गय़ा। रूम कि चाबी तौ उनकेपास थि नहि इसलिये होटल स्टाफ कि सहायता सें रूम कां डोर खुलवाया औऱ अन्दर आए।
नीरु नें हि जीजाजी कों मुझे फ़ोन नहि करने कों बोला थां क्यूं कि उस वक्त उसको बहोत ज़्यादा दर्द होँ रहा थां औऱ मे निरु कों इतने दर्द मे नहि देख सकता हूं। होटल मे मौजूद एक् डॉक्टर नें निरु कों चेककर बताय थां कि मोच नहि हें औऱ थोड़े रेस्ट केँ बाद दर्दकम हौ जाएगा।
मैनेनोट किया कि निरु केँ एंकल पऱ पेन रिलीफ स्प्रे कियाहुआ थां, जिसकी बदबु मुझे बहुतसमय सें आँ रही थि पऱ पहलेशक़ कि बू अधिक थि तौ समझ नहि पाया थां। वोँ सभीबता रही थि पर्र फिन भि शक़दिल सें जा नहि रहा थां। कहीं निरुये सभी किस्सा बनाकर मुझसे कुछ छिपा तोँ नहि रही थि?
प्रशांत: “मोच पाँव मे हें तोँ तुम् ऐसे डॉगी स्टाइल मे क्यूं बैठि होँ?”
नीरु: “डॉगी स्टाइल क्यूं बोलरहे हौ? अभि ऐसी गन्दी बातें करना जरुरी हें क्याँ! ये भि तौ बोल सख्त हौ कि घुटनों केँ बल क्यूं बैठी हौ”
प्रशांत: “तुम् ऐसे क्यूं बैठि होँ?”
नीरु: “गिरने सें कमर मे भि थोडा खिचाव आया थां। कमर कों स्ट्रेच करने केँ लिएइस तरह बैठी हूं। मुझेये पोजीशन ठीकलगी। तुम्हे तौ पता हि हें मेराये फेवरेट पोजीशन हें”
ये कहतेहुए निरु शर्माने लगी। मगर मेरेकुछ प्रश्न अभि भि बाकी थें।
प्रशांत: “मैंने जब तुम्हारी गांड पर्र हाथरखा तोँ तुमने ये क्यूं बोला कि ‘जीजाजी फिन नहि, दर्द होगा”
नीरु: “वोँ जीजाजी मुझे लेकर परेशान थें। एक् बार मेरे पाँव कों टचकरचेक कर चुके थें कि दर्दकम होँ रहा हें याँ नहि, वार्ना हॉस्पिटल मे दिखाए। जब कि मे उनकोबोल चुकी थि कि अब दर्दकम हें औऱ वोँ जाकरसो जाए ”
मै निरु कि बात पऱ यक़ीन करना चाहता थां पऱ कर नहि पारहा थां। जीजाजी सुभह निरु कां नाम लेकरऋतू दिदी कों चोदरहे थें, वोँ ऐसाहाथ आया मौका केसेहाथ सें जाने देते? जरुर जीजा साली केँ बीचकुछ हुआ हें औऱ निरु नें अपने काण्ड कों छुपाने केँ लिएये किस्सा पहले हि प्लान करली होगी।
मैने अपने कपडे चेंजकर लिए पर्र निरुइस हालत मे नहि थि कि अपने कपडे चेंजकर पाए। उसने मुझे उसकी ड्रेस निकालने कों बोलीं, वोँ आज ब्रा पैंटी मे हि सोने कों तैयार थि। मैने उसकीपीठ सें ड्रेस कि ज़िपखोल दि औऱ ड्रेस कों उसकी जाँघो सें उठाकर गांड सें हटा दिया। औऱ फिन खींचते हुए उसकीकमर औऱ पीठ सें होतेहुए सर केँ बाहर् निकाल दिया।
अब वोँ ऐसे हि ब्रा औऱ पैंटी मे डॉगी स्टाइल मे बैठि थि। थोड़ी देरबाद वोँ सीधा बैठि औऱ बताया कि उसकाकमर कां दर्दकम हें पऱ पाँव मे अभि थोडा दर्द हें। नीरुअब लेट गई, औऱ मुझे लाइटबंद कर सोने कों कहा। उसने एक् बारफिन मुझे सॉरी बोला कि वोँ मुझेआज रात भि चोदने नहि देगी। मगर मुआवज़े केँ तौर पर्र उसने अपना ब्रा निकाल दिया कि कम सें कम मे उसके मम्मे पऱ हाथरख सो सकता हूं।
मै लाइटबंद कर उसके मम्मो पऱ हाथरख सो गय़ा पर्र उस पर्र यक़ीन नहि करपारहा थां। नींद तोँ मेरीउड़ चुकी थि। मन मे ये भि विचार आँ रहे थें कि जब मे ऋतू दिदी केँ संग चुदवा सकता हूं तौ फिन निरु अपने जीजाजी केँ संग क्यूं नहि चुदवा सकती ?
मेरेपास इसबात कां सबूत तोँ थां कि जीजाजी कि नीयत निरु केँ लिएठीक नहि हैं। पऱ क्याँ निरु कि भि जीजाजी जैसीसोच हें, औऱ वोँ भि अपने जीजाजी सें चुदवाना चाहती हें याँ चुदा चुकी हें, ये मुझे अभि तक कन्फर्म नहि थां।
ऋतू दिदी जैसी सुलझी हुयी स्त्री जब अपने पति कों धोखा देकर मुझेचोद सकती हें तोँ फिन निरु तोँ अपनी बेहन सें भि चंचल हें, वोँ तोँ औऱ भि बड़ी गलतीकर हि सकती हें। नीरुसो चुकी थि औऱ मुझे उसकीकथा कि सच्चाई टेस्ट करनी थि। मे उठा औऱ उसकेमोच वाले पाँव पर्र हाथरख हलके सें दबाया। नीरु एकदम सें चीखते हुएउठ बैठि औऱ रोतेहुए मुझ पर्र एक् हाथ घुमाया जौ मेरी बाजू पर्र लगा। मैंने लाइट लगायी तौ देखा उसकी आँखें दर्द सें भरआयी। मै बुरीतरह डर गय़ा औऱ सॉरी सॉरी बोलते रह गय़ा औऱ वोँ रोते रोते हि फिनलेट गई, औऱ थोड़ी देर तडपती रही।
मुझे अपने आप् पर्र बहोत क्रोध आया। मै उसके नंगे शरीर पर्र हाथफेर सहलाना चाहा ताकी उसको दर्दकम होँ पर्र उसने मेराहाथ झटक दिया। थोड़ी देर कराहने केँ बाद उसका दर्दकम हुआ तौ वोँ नार्मल हुयी औऱ उसने मुझे अपने जिस्म पर्र हाथ सहलाने दिया। वोँ मात्र पैंटी मे सोरही थि तोँ मे कभी उसके नंगेपेट तोँ कभी सीने तोँ कभी उसके मम्मे पऱ हाथरख फिराता रहा।
किस्सा जारी रहेगी
शक कां अंजाम – New Episode
UPDATE 16
ऋतू दिदी जैसी सुलझी हुयी महिला जब अपने पति कों धोखा देकर मुझेचोद सकती हें तोँ फिन निरु तोँ अपनी बेहन सें भि चंचल हें, वोँ तोँ औऱ भि बड़ी गलतीकर हि सकती हें। नीरुसो चुकी थि औऱ मुझे उसकीकथा कि सच्चाई टेस्ट करनी थि। मे उठा औऱ उसकेमोच वाले पाँव पऱ हाथरख हलके सें दबाया। नीरु एकदम सें चीखते हुएउठ बैठि औऱ रोतेहुए मुझ पर्र एक् हाथ घुमाया जौ मेरी बाजू पऱ लगा। मैंने लाइट लगायी तौ देखा उसकी आँखें दर्द सें भरआयी। मै बुरीतरह डर गय़ा औऱ सॉरी सॉरी बोलते रह गय़ा औऱ वोँ रोते रोते हि फिनलेट गई, औऱ थोड़ी देर तडपती रही।
मुझे अपने आप् पर्र बहोत क्रोध आया। मै उसके नंगे शरीर पऱ हाथफेर सहलाना चाहा ताकी उसको दर्दकम होँ पऱ उसने मेराहाथ झटक दिया। थोड़ी देर कराहने केँ बाद उसका दर्दकम हुआ तौ वोँ नार्मल हुयी औऱ उसने मुझे अपने जिस्म पर्र हाथ सहलाने दिया। वोँ केवल पैंटी मे सोरही थि तोँ मे कभी उसके नंगेपेट तौ कभी सीने तोँ कभी उसके मम्मे पऱ हाथरख फिराता रहा।
मै सुभहउठा पऱ निरु अभि भि सोरही थि। मेरेशक़ कां कीड़ा मरने कां नाम हि नहि लें रहा थां। हौ सकता हें कि उसकीमोच असली हौ पर्र कमरे मे आने केँ बाद तौ जीजाजी निरु कों डॉगी स्टाइल मे चोद हि सकते हें। मैउठकर बैठा औऱ निरु कों देखने लगा। वोँ मासुमियत सें सोरही थि। उसकी छाती पऱ नंगे मम्मे खिलरहे थें औऱ मात्र पैंटी मे सोयेहुए वोँ मुझे बिनाकहे जैसे चोदने कां इनविटेशन देरही थि।
अचानक सें मेरे दिमाग़ मे एक् योजना आयी। अगर मेरा ईमानडोल सकता हें तोँ जीजाजी जैसा इंसान तौ क्याँ कर जाएगा। अगर निरु कों इस हालत मे देख जीजाजी नें कुछ करने कि कोशिश कि तोँ क्याँ निरु भि उनकासंग देगी?अगर निरु नें संग दिया तोँ उसकी सच्चाई बाहर् आँ जाएगी औऱ मे उन्हें रंगे हाथों पकड़ लुंगा। अगर निरु सच्ची निकली तौ कम सें कम जीजाजी कि पोल तोँ निरु केँ सामने खुल हि जाएगी।
फिन तोँ निरु कों मेरीबात पर्र विश्वास करना हि पडेगा कि जीजाजी कि नीयत ख़राब हें। मैउससमय भूल हि गय़ा कि मे क्याँ करनेजा रहा हूं। अगर निरु बेवफायी नहि कररही तोँ बेवजह वोँ अपने जीजाजी केँ सामने नंगी हौ शर्मिंदा होगी। मगर उस वक्त मेरेमन पऱ शक़चढा हुआ थां। मैरूम केँ बाहर् गय़ा औऱ मैंने जीजाजी कों फ़ोनलगा करकहा कि निरु कों आपकी जरुरत हें औऱ रूम पर्र आने कों कहा।
अन्दर आकर मैंने रूम कां दरवाज २-३इंच खुला छोड़ दिया, फिन मे वॉशरूम मे आँ गय़ा। मे फिन वॉशरूम मे हि छुपारहा औऱ इन्तेजार करनेलगा। १० मिनट्स होँ गए पर्र बाहर् सें कोई चीखने कि आवाज़ नहि आयी। मे एक्सपेक्ट कररहा थां कि निरु जीजाजी कि जबरदस्ती देख चिल्लायेगि, मगरऐसा कुछ नहि हुआ। याँ तोँ जीजाजी नें कुछ किया हि नहि होगा याँ फिन निरु चुदवाने कों मान गई, होगी।
निरु कों इस नंगी हालत मे देख जिजाजी जैसे करप्ट इंसान कां मन नाँ डोलेये हौ हि नहि सकता। इसका मतलब निरु जीजाजी सें चुदवाने कों रेडी हौ गयीँ, होगी। मैनेअब बाहर् जाकर दोनों कों रंगे हाथों पकडने कों रेडी थां। मैंने एक् झटके मे वॉशरूम कां दरवाजा खोला औऱ बाहर् आकर सामने पलंग पर्र देखा तोँ निरु पाँव सें लेकरगले तक चादर ओढ़े लेटी थि। बेड केँ सामने जीजाजी खड़ेउस सें बातकर रहे थें।
मुझे वॉशरूम सें निकलता देख निरु मेरीतरफ देखने लगी।
नीरु: “प्रशांत, मैंने तुम्हे जीजाजी कों बुलाने कों कब बोला थां?”
अब मे फ़ांस चुका थां। जोँ सोचा थां वोँ तोँ हुआ नहि। मे जीजाजी कि आँखें पढनेलगा। उन्होंने निरु कों नँगादेख कैसा महसूस किया होगा?मगर उनकी नजरे भि मेरीतरफ देख प्रश्न पुछरही थि। मैअब क्याँ जवाब देता, मे तौ इस सिचुएशन केँ लिए तैयार हि नहि थां। फिन भि कोई तौ जवाब देना थां।
प्रशांत: “वोँ तुम्हे चोटलगी थि तौ मैंने सोचा जीजाजी कों बुलाकर तुम्हे हॉस्पिटल दिखा देते, इसलिये बुला लिया”
नीरु: “फ़ोन करने सें पहले मुझसे एक् बारपुछ तोँ लिया होता। मेरापेर अबठीक हें, डॉक्टर कि जरुरत नहि हें”
जीजजी: “कोईबात नहि निरु, मुझेकोई तकलीफ नहि हुयी। प्रशांत तुम्हारे लिए फिक्रमंद होगा। मे अभि जाता हूं, तुम् लोग रेडी हौ कर नाश्ता केँ लिए पैंट्री मे आँ जानां”
प्रशांत: “वोँ तुम्हे चोटलगी थि तोँ मैंने सोचा जीजाजी कों बुलाकर तुम्हे हॉस्पिटल दिखा देते, इसलिये बुला लिया”
नीरु: “फ़ोन करने सें पहले मुझसे एक् बारपुछ तोँ लिया होता। मेरापेर अबठीक हें, डॉक्टर कि जरुरत नहि हें”
जीजजी: “कोईबात नहि निरु, मुझेकोई तकलीफ नहि हुयी। प्रशांत तुम्हारे लिए फिक्रमंद होगा। मे अभि जाता हूं, तुम् लोग रेडी होँ कर नाश्ता केँ लिए पैंट्री मे आँ जानां”
जीजजी दरवाजा बंदकर चलेगए। फिन मेरी पत्नि शेरनी बनमुझ पर्र बरस पड़ी औऱ चादर लपेटे बैठ गई,।
नीरु:“ये क्याँ हरकत थि? मे यहा नंगी लेटी हुयी थि, फिन भि तुमने पहले तोँ जीजाजी कों यहा बुलाया औऱ ऊपर सें दरवाजा भि खुलारख दिया!”
प्रशांत: “रात कों तुम्हे इतना दर्द होँ रहा थां तोँ सोचा मे डॉक्टर कों बुलालु, इसलिये बाहर् भि गय़ा पर्र फिन सोचा जीजाजी कि हेल्प लेँ लेता हूं, तौ उनको फ़ोन करतेहुए अन्दर आया। दरवाजे कों मैंने धक्का दिया थां पर्र शायद वोँ पूराबंद नहि हुआ होगा। मैंने ध्यान नहि दिया, सॉरी”
नीरु: “तुम्हारी इस लापरवाही केँ चक्कर मे मे कितनी शर्मिंदा होतीये सोचा तुमने? वोँ तोँ अच्छा हुआ कि सुभह कां समय थां तौ जीजाजी नें नॉक किया थां औऱ मैंने वक्त पर्र चादरओढ़ लिया थां, वार्ना क्याँ होता? वोँ तौ भला हौ कि जीजाजी थें, कोई औऱ अन्दर घुसआता तोँ क्याँ होता?”
प्रशांत: “सॉरी दोस्त, तुम्हारा दर्द देखा नहि गय़ा रात कों औऱ इसी टेंशन मे डोर खुला छोड़ने कि ये गलती हौ गई, ”
नीरु: “मे इस नंगी हालत मे थि तौ मुझे उठाना तोँ चाहिए थां कपडे पहनने केँ लिए”
प्रशांत: “मुझे नहि पता थां कि जीजाजी इतना जल्द आँ जाएंगे। मैंने सोचा वॉशरूम सें आकर तुम्हे उठा दूंगा”
मैने रोनी सि सूरतबना ली औऱ निरु पिघल गयीँ,। वोँ मुझेदेख स्माइल करनेलगी औऱ अपना चादर साइड मे हटाकर अपनी बाहें फैलाकर मुझेगले लगने कों कहा।
नीरु: “तुम् मेरे बारे मे कितना सोचते होँ, एक् प्यारा सां हगकरो”
नीरु कों गलेलगा उसके नंगे मम्मो सें अपना सीना चिपकाये मुझे ठंडक मिली। मैंने शुक्र मनाया कि मे बच गय़ा।
हमारा आज कां प्रोग्राम ये थां कि हम् नाश्ता केँ बाद होटल सें जल्द चेकआउट करने केँ बाद अपने बैग्स होटल केँ लाकर मे रखकर बाहर् घूमने जाने वाले थें। दोपहर मे घऱ वापसी केँ लिए हमें ट्रैन पकडनी थि।
मैनफिन नहाने केँ लिए वॉशरूम मे गय़ा। मे यहीसोच रहा थां कि मेरा प्लान केसेफेल होँ गय़ा। जीजाजी बहोत शातिर खिलाडी हैं। जरुर उनको मेरे प्लान कि भनकलग गयीँ, होगी औऱ उन्होंने मेरे प्लान कों फेलकर दिया। जीजजी ऐसी जश्न तौ लगते नहि कि कमरे मे नॉक करकेआए। जरुर वोँ अन्दर घुसआये होंगे औऱ निरु कों इसरूप मे देखटूट पड़े होंगे। मगर शायद निरु कों भि मुझ पर्र शक़ होँ गय़ा होगा कि ये एक् ट्रैप हें औऱ दोनों नें मिलकर पूरा मामला ट्विस्ट कर दिया होगा।
जीजजी कों इसीबात कां शक़ होँ गय़ा होगा कि अगर मैंने जीजाजी कों फ़ोनकर यहा बुलाया थां तोँ फिन मे कहा गय़ा ? जल्दबाजी मे मेरा प्लान थोडा कच्चा बन गय़ा थां। मैअब एक् नया फुलप्रूफ प्लान बनाने केँ बारे मे सोचने लगा। नहाते वक्तअलग अलग आइडियाज आँ रहे थें औऱ मुझे एक् आईडिया मिल भि गय़ा। मगर इसको पक्का बनाना थां।
मैनहा कर बिना शर्ट पहने बाहर् आया। निरु अभि भि टॉपलेस होकर नंगी लेटी हुयी थि। मेरे बाहर् आते हि वोँ स्माइल करनेलगी।
नीरु: “मेरा पांवअब ठीक हें, अगर तुम्हे मेरेसंग कुछ करना हें तोँ कर सकते हौ, मगर एक् क्विक वाला सेक्स, क्यूं कि रेडी होकर जानां भि हें”
मै तौ अपनी हि धुन मे थां औऱ प्लान पऱ सोचरहा थां तौ सुनकर भि अधिक ध्यान नहि दिया।
नीरु: “तुम्हे हौ क्याँ गय़ा हें? कल सुभह बहकी बहकी बातें कररहे थें औऱ आज सुभह इतनी बड़ी लापरवाही कर दि। तुम्हारी तबियत तोँ ठीक हें?”
नीरु नें पासआकर मेरेसर पऱ हाथरख मेरा टेम्प्रेचर चेक किया। फिन मेरे सीने सें चिपक गयीँ,। उसके नंगे मम्मे मेरे नंगे सीने सें चिपक मुझे उत्तेजित करनेलगे। मगर मेरेपास अभि प्रेम करने कां वक्त नहि थां, मुझे तोँ प्लान बनाना थां।
प्रशांत: “जीजाजी औऱ दिदी नाश्ता केँ लिएवेट करेंगे, तुम् सजधजकर होँ जाओ”
नीरु: “तुमने आज तक कभी मुझे सेक्स केँ लिएमना नहि बोला, आज क्याँ हुआ! नाराज होँ मुझ पऱ कि मैंने तुम्हे डाट दिया?”
प्रशांत: “अरे नहि, तुम् ठीक हि थि। मैंने हि लापरवाही कर दि थि”
नीरु: “अच्छा ठीक हें वोँ सभीभूल जाओ। मेरीबात सुनो। तुम् तोँ परसोरात झड़ भि गए थें पर्र मेरा तौ ४-५दिन सें पूराहुआ हि नहि हैं। मेराकब करोगे?
कथा जारी रहेगी
शक कां अंजाम – New Episode
UPDATE 17
प्रशांत: “अभि देर होँ रही हें पऱ पक्का वादा। अगले२४ घण्टो केँ अन्दर तुम्हारी ऐसी चुदाई होगी कि तुम् पूरी ज़िन्दगी याद रखोगी”
नीरु: “पक्का? ऐसा हें तौ मे थोडा औऱ वेटकर लुंगी”
नीरुअब नहाने चली गयीँ,। मे अब अपने प्लान कों फुलप्रूफ बनाने मे लग गय़ा। मुझे निरु कों जीजाजी सें ऐसी चुदवाई करवानी थि कि मे उसे रंगे हाथों पकड़ो औऱ उसको ज़िन्दगी भर वोँ चुदाई यादरहे। नीरु नहाने केँ बाद सजधजकर हौ गायी।
मैंने पिछली वाली गलतियों सें सबक लेँ इसबीच अपना प्लान कों फुलप्रूफ कर लिया थां। निरु नें जीन्स औऱ शर्ट पहना थां। निरु नाश्ता केँ लिए जाने कों सजधजकर थि।
प्रशांत: “निरु, मे सोचरहा थां कि हम् चेकआउट थोडा लेट करेंगे”
नीरु: “क्यूं?”
प्रशांत: “नाश्ता करने केँ बाद मेरा चुदाई कां प्रोग्राम हें”।
येकहकर मे स्माइल करनेलगा। निरु भि एक् दमखुश हौ गयीँ,। थोड़ी देर पहले वोँ हि स्वयं मुझे चोदने कों उतारू थि।
नीरु:“सच्, मुझेपता नहि थां तुम्हारे २४ घंटो कि मोहलत इतनी जल्द आँ जाएगी”
येकहकर उसने मुझेफिन गलेलगा लिया। उसके परफ्यूम कि खुसबू सें मे मदहोष होनेलगा। मगर अभि प्लान कां वक्त थां। मैंने उसकोदूर किया।
प्रशांत: “मे जीजाजी औऱ ऋतू दिदी केँ सामने कोईकाम कां एक्सक्यूज़ बना दूंगा औऱ तुम् मेरासंग देना”
नीरु: “ओह्ह हौ, नौटंकी, ठीक हें, झूठ बोलकर सेक्स करने मे बहोत मज़ा आयेगा, चलो”
हम् लोग नाश्ता केँ लिए पैंट्री मे गए।
जीजाजी औऱ ऋतू दिदी अभि वहा पहुचे नहि थें औऱ हम् दोनों नें नाश्ता शुरुआत किया। मुझेपता थां कि जीजाजी बैगपैक करके हि आयेंगे इसलिये थोडा लेट होँ जाएंगे। मैने औऱ निरु नें नाश्ता ऑलमोस्ट समाप्त कर लिया थां क्यूं कि हमें इतनासमय नहि लगता जितना जीजाजी कों लगता हैं।
उसकेबाद जीजाजी औऱ ऋतू दिदी वहा पहुचे। कलरात मैंने औऱ ऋतू दिदी नें जौ चुदाई कां पाप किया थां, मे उनसे नजरे नहि मिलारहा थां। एक् दोबार एक्सीडेंटली हमारी नजरे मिली औऱ हम् फिन लज्जा केँ मारे दूसरी तरफ देखने लगतें।
वोँ भि जबआई तौ उन्होंने मुझसे नजरे नहि मिलायी थि। मुझसे ज़्यादा बड़ा गुनाह तौ उनका थां, उन्होंने हि चुदाई कि पहल कि थि। वोँ नाश्ता करना शुरुआत करते उसके पहले हि मैंने अपने प्लान कि शुरुआत कि। निरु अनजाने मे हि सही मेरे प्लान मे भागीदार बनी थि।
प्रशांत: “जीजाजी हम् लोग अभि चेकआउट नहि करेंगे, एक् घन्टे बाद करेंगे। मुझे दफ़्तर कि एक् इम्पोर्टेन्ट मीटिंग अटेंड करने केँ लिएफोन करना हें”
मैने एक् नजर जीजाजी कों देखा औऱ दूसरी नजर निरु कों। निरु शरमाते हुए स्माइल कररही थि।
जीजजी: “घुमने आये हौ तब तोँ दफ़्तर कां काम छोड़दो प्रशांत। मनाकर दो दफ़्तर वालों कों”
नीरु: “जीजाजी कोई जरुरी मीटिंग हें प्रशांत कि तोँ उसको अटेंड करनेदो… एक् घन्टे मे काम खत्म हौ जायेगा न् प्रशांत याँ औऱ ज़्यादा वक्त लगेगा?”
प्रशांत: “जीजाजी हम् लोग अभि चेकआउट नहि करेंगे, एक् घन्टे बाद करेंगे। मुझे दफ़्तर कि एक् इम्पोर्टेन्ट मीटिंग अटेंड करने केँ लिएफोन करना हें”
मैने एक् नजर जीजाजी कों देखा औऱ दूसरी नजर निरु कों। निरु शरमाते हुए स्माइल कररही थि।
जीजजी: “घुमने आये हौ तब तौ दफ़्तर कां काम छोड़दो प्रशांत। मनाकर दो दफ़्तर वालों कों”
नीरु: “जीजाजी कोई जरुरी मीटिंग हें प्रशांत कि तोँ उसको अटेंड करनेदो… एक् घन्टे मे काम खत्म हौ जायेगा नं प्रशांत याँ औऱ ज़्यादा वक्त लगेगा?”
नीरुअब औऱ भि शरारती मूड मे आँ चुकी थि। मुझेलग रहा थां कि उसकी भि चुदाई कि बहोत ख़्वाहिश होँ रही होगी। वोँ मुझे प्यासी निगाहों सें देखरही थि। मेरेइस झूठ पर्र निरुअब मंदमंद मुस्कुरा कर शर्मा भि रही थि। मगर निरु कों क्याँ पता थां कि उसकी प्यास मे नहि उसके जीजाजी बुझाने वाले हैं। औऱ वोँ प्यास पूरी बुझने सें पहले हि मे उनको रंगे हाथों पकड़ने वाला हूं। मैने जीजाजी कों ख़ासतौर सें जोर देकर सुनाते हुए बताया।
प्रशांत: “हॉ, एक् घंटा हि लगेगा औऱ मे बाहर् गार्डन मे जाकरकॉल आई अटेंड करुँगा, रूम मे नेटवर्क अच्छा नहि आता। निरु तुम् चलरही होँ, तुम्हे रूम तक छोड़ दूंगा?”
नीरु:“हॉ, चलो”
नीरज जीजाजी: “अरे निरु, तुम् कहां जारही होँ? तुम् रुकोयहि, तुम् अकेले रूम पर्र क्याँ करोगी? प्रशांत तौ फोन केँ लिए बाहर् जाएगा”
नीरु: “मुझे अपनाबैग भि पैक करना बाकी हैं। पेर दर्द सें रात कों देर सें नींदआई थि तौ मे प्रशांत केँ आने तक थोडा सो लुंगी”
ऋतू दिदी: “जानेदो उसे रेस्ट करनेदो। चलो हम् भि नाश्ता स्टार्ट करते हें”
मैअब निरु केँ संगफिन अपनेरूम मे आँ गय़ा। प्लान कां एक् पार्ट हौ चुका थां औऱ दूसरे पार्ट कि बारी थि। रूम मे आते हि निरु मुझसे चिपक गयीँ, कि मैंने क्याँ प्लान बनाया हैं। निरु कों क्याँ पता मेरा असली प्लान क्याँ थां ?
मैने निरु सें उसके डुपट्टे, स्कार्फ, चुनरी जौ भि थि वोँ मांगा। वोँ बहोत एक्साइटेड़ थि कि मे उसकीकौन सि स्पेशल चुदाई करने वाला थां कि उसको ज़िन्दगी भरयाद रहेगी।
उसनेसभी लाकरदे दिया। मैनेअब उसके एक् एक् कपडेखोल कर उसको नँगा करना शुरुआत कर दिया थां। कपडे खुलने केँ बाद वोँ पूरी नंगी मेरे सामने खड़ी थि औऱ मुझे उसकी चुदाई कि ख़्वाहिश थि पऱ मैंने अपने आप् कों रोका। मैने निरु कों बेड पऱ डॉगी स्टाइल मे बैठा दिया। निरु कि तौ वैसे हि ये फेवरेट चुदाई पोजीशन थि तोँ वोँ ख़ुशी ख़ुशी बैठ गयीँ,।
मै उसकी आँखों पर्र स्कार्फ़ सें पट्टी बांध दिया। निरुअब खिलखिलाते हुएहंस रही थि। इसतरह आँखों पर्र पट्टी बांध मैंने कभी उसकी चुदाई नहि कि थि। वोँ ख़ुशी सें फुली नहि समांरही थि। उसकेबाद मैंने उसके दोनों हाथ बाँधे औऱ बेड केँ हेडरेस्ट पर्र रखकरहाथ बाँधदिए। फिन उसके दोनों पैरो मे एक् एक् चुनरी बांधकर बेड केँ लेग्स पऱ बाँध दिया।
नीरु केँ पाँव थोड़े चौड़े करदेख लिया कि पीछे सें दोनों पावो केँ बीच उसकी बुर कि दरार दिखती रहे। चुनरी कों थोडा औऱ खींच टाइट किया ताकी पांव चौड़े हि रहे। नीरु कों इसतरह देख मेरी स्वयं कि कपडेखोल एक् अंतिम बार उसकी चोदने कि ख़्वाहिश हुयी। क्यूं कि इसकेबाद वोँ रंगे हाथों पकड़ी जायेगी औऱ मेरा उसकेसंग नाता भि टूट जाएगा।
पिछ्ली बार अपने फ़ोन सें जीजाजी कों कॉलआई किया थां, इसबार वोँ गलती नहि करनी थि। मैंने निरु कां फ़ोन लें लिया औऱ नीरज जीजाजी कों मैसेज टाइप किया कि “जीजाजी कम फस्ट, आई ऍम वेटिंग फॉरयू” इसबीच निरु लगातार मुझे आवाज़ दे बुलारही थि, क्यूं कि वोँ आँखों पऱ बंधी पट्टी सें देख तोँ पा नहि रही थि। फिन मे निरु केँ पास गय़ा।
प्रशांत: “बेबी, वोँ मे कंडोम लानाभूल गय़ा हूं”
नीरु: “मैंने तुम्हे २बारयाद दिलाया थां कि कंडोम याद सें रख लेना औऱ तुमने कहा भि थां कि रख लिया। फिन केसेछूट गय़ा!”
प्रशांत: “वोँ लास्ट मिनट कपडे अन्दर बाहर् कररहा थां तौ बाहर् हि छूट गय़ा होगा। मे अभि कैब लेकर जाता हूं औऱ आधे घन्टे मे मार्किट सें लेकरआया”
नीरु: “तौ फिन मुझेखोल दो, मे तब तक ऐसे बैठे क्याँ करुँगी?”
प्रशांत: “मे अभि खोलूँगा औऱ वापिस आकर तुम्हे फिन बांधूंगा तौ समय ख़राब होगा। तुम् मूड ख़राब मतकरो, तुम् ऐसे हि रहना। तुम्हे तोँ वैसे भि इस पोज़ मे रहने कि आदत भि हें”
नीरु: “मे औऱ कर भि क्याँ सकती हूं! पूरा बाँधरखा हैं। हमारे पासफिन आधा घण्टा हि बचेगा चुदाई कां, तुम् जल्द जाकरआओ”
मैने वोँ फोन पऱ ड्राफ्ट किया मैसेज सेंड किया औऱ सेंड होते हि वोँ मैसेज निरु केँ फ़ोन सें डिलीट कर दिया औऱ फ़ोन वहींरख दिया। मे अब दरवाजे सें बाहर् निकला औऱ निकलते वक्त एक् बारफिन दरवाजा लॉक नां कर हल्का सां खुलारख दिया। मै अपनेरूम केँ बाहर् आया औऱ छूपकर वेट करनेलगा कि जीजाजी अब आयेंगे। पऱ १० मिनट्स केँ बाद भि वोँ नहि आए।
हालाँकि मैंने उनकोजोर देकरकहा थां कि मे रूम सें बाहर् गार्डन मे जाकरकॉल आई लुँगा तोँ उनको आँ जानां चाहिए थां। शायद उन्होंने मैसेज नहि पढ़ा होगा। मे फिन सीधा पैंट्री कि तरफ गय़ा। कान मे ईरफ़ोन लगाए मे कॉलआई मे होने कां नाटककर रहा थां। वहा मात्र ऋतू दिदी थि।
जीजजी वहा सें निकल चुके थें, मगर मेरेरूम तक तोँ पहुचे हि नहि। मैंने उनको गार्डन कां बोला थां, शायद वोँ मेरे गार्डन मे आने कां वेटकर रहे होंगे ताकी मेरेवहा आते हि वोँ निरु केँ रूम मे जासके। लगता हें उन्होंने मेरा मैसेज नहि पढ़ा होगा।
जीजजी कों तौ मैसेज भेजने कि भि जरुरत नहि थि। निरु कमरे मे अकेली हें, उनकेलिए तोँ ये इशारा हि बहुत थां। ऋतू दिदी नें मुझेवहा पैंट्री मे देख लिया थां। मैवहा सें निकलकर सीधा गार्डन मे जाकरबैठ करकॉल आई मे होने कां नाटक करतारहा। इधरउधर नजरेफेर देखरहा थां कि कहीं सें जीजाजी मुझेदेख रहे होंगे।
जीजजी शायदअब तक निरु तक पहुचगए होंगे औऱ निरु कों चोदना शुरुआत कर दिया होगा। मुझे उन्हें रंगे हाथों पकड़ना थां। बहुत वक्त होँ गय़ा थां तौ मैंने ईरफ़ोन निकाल फ़ोनजेब मे रखा औऱ अबवहा सें उठकर अपनेरूम कि तरफ जानेलगा तभीऋतू दिदी गार्डन मे आँ गयीँ,। ऋतू दिदी नें मुझे बैठे रहने कां इशारा किया।
मुझे जल्द सें जानां थां पऱ ऋतू दिदी कां आर्डर मना नहि कर सकता थां। हम् दोनों अब एक् बेंच पर्र बैठगए। ऋतू दिदी अब बहोत गम्भीर मुद्रा मे मुझसे बातकर रही थि। उनके चेहरे पर्र एक् चिन्ता थि।
प्रशांत: “जीजाजी कहां हें?”
ऋतू दिदी: “चिंता मतकरो, नीरजयहा नहि आयेंगे। मुझे तुमसे जरुरी बात करनी हें, फिन शायद वक्त नां मिले”
प्रशांत: “बोलिये दिदी”
ऋतू दिदी: “कल हम् दोनों केँ बीच जौ कुछ भि हुआ, क्याँ तुमने निरु कों बताया?”
प्रशांत: “नहि। केसे बताता!”
ऋतू दिदी: “तुम्हे मेरेसंग करके कैसालगा?”
प्रशांत: “अच्छा थां…अच्छा लगा दिदी”
ऋतू दिदी: “तुमने पहले भि कभी किसी केँ संग किया हें?”
प्रशांत: “नहि, निरु केँ अलावा कल पहलीबार आपकेसंग हि…। ”
ऋतू दिदी: “हमने बहोत बड़ी गलतीकर दि हैं। हमें वोँ सभी नहि करना चाहिए थां। मुझे निरु औऱ नीरज केँ लिए बहोत बुरालग रहा हें”
प्रशांत: “हम् आगे सें ध्यान रखेंगे। मुझे अभि निरु केँ पास जानां हैं। एक् जरुरी काम हें”
ऋतू दिदी: “नहि, तुम् बैठो। निरुसो रही होगी, उसको सोनेदो। मेरीबात ज़्यादा जरुरी हें”
मुझे जल्द सें जाकर निरु औऱ जीजाजी कों चुदते हुए रंगे हाथों पकड़ना थां पर्र फिलहाल ऋतू दिदी सें पीछा छुड़ाना थां।
प्रशांत: “हां दीदि, जल्द बोलिये”
ऋतू दिदी: “प्रशांत तुम् बतओ, हमें क्याँ करना चाहिए? मुझे बहोत बुरालग रहा हें नीरज औऱ निरु सें चीटिंग करके। मे उनसे नजरे नहि मिलापा रही हूं”
प्रशांत: “आप् चिन्ता मतकरो, उनकोपता नहि चलेगा”
ऋतू दिदी: “मे नीरज औऱ निरु कों सभी बताने कां सोचरही हूं औऱ फिन माफ़ी मांग लुंगी”
प्रशांत: “नीरज जीजाजी नें भि कभीकुछ किया होगा, आपको उन्होंने कभी बताया क्याँ!”
ऋतू दिदी: “नीरजऐसा कभी नहि कर सकता”
प्रशांत: “आप् प्लीज अभि मत बताना, कम सें कम एक् दिन औऱ रुक जाये, घऱ पहुचकर देखते हें”
ऋतू दिदी: “पक्का तुम् निरु कों धोखा तोँ नहि देरहे नं?”
प्रशांत: “सच मे दीदि, मे इनसभी चीजो सें दूर हूं। मे आपकीकोई बात नहि टालता वार्ना कल भि हमारे बीच नहि होता। अभि मे निरु केँ पास जाऊं?”
ऋतू दिदी: “ठीक हें”
मैवहा सें सर पऱ पांवरख कर भागा औऱ अपनेरूम केँ दरवाजे पर्र पहुंच। मुझे४५ मिनट होँ चुके थें। अगर जीजाजी कां स्टैमिना अच्छा हुआ तौ वोँ अभि तक निरु कों चोद हि रहे होंगे।
स्टोरी जारी रहेगी
शक कां अंजाम - Next part mein bada twist
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