शक कां अंजाम – New Episode
UPDATE 18
मैने देखा दरवाजा अभि भि थोडा खुला हि थां, जितना मे खुला छोड़कर गय़ा थां। शायद जीजाजी निरु कों चोदने केँ बाद दरवाजा खुला हि छोड़कर चलेगए होंगे। मैनेरूम केँ अन्दर गय़ा औऱ दरवाजा बंद किया। निरु अभि भि डॉगी स्टाइल मे बैठि हुयी थि औऱ बीचबीच मे थोडा दाएबाए हीलरही थि। उसकी बुर कि दरारदिख रही थि पऱ चढ़ने केँ कोई निशान नहि थें। शायद जीजा नें चोदकर निरु कि बुर कि सफाईकर दि होगी। मेरीआहट सुनकर निरुबोल पडी।
नीरु: “प्रशांत, तुम् आँ गए!!”
प्रशांत: “हां”
नीरु: “तुम् कितनी देर सें आये हौ? मुझेखोल, मुझे कितना दर्द होँ रहा हैं। तुमने मुझेफोन किया थां क्याँ? मुझे किसी कां फोनआया थां, पऱ आँख पर्र पट्टी सें कुछ दिखा नहि रहा औऱ हाथ बँधे हें तौ फ़ोन केसे उठती”
नीरु इतनीदेर इसतरह बैठे मेरा इन्तेजार करते थोड़ी परेशान दीखरही थि।
मुझेसमझ नहि आँ रहा थां कि जीजाजी नें आकर निरु कों चोदा होगा याँ नहि। मैने निरु कि आँखों कि पट्टी औऱ हाथखोल दिए औऱ उसको उसका फ़ोन पकड़ा दिया। मे निरु केँ पेर भि खोलने लगा। निरु नें अपने फ़ोन मे कुछ देखा औऱ फिन मेरीतरफ मुड़ी।
नीरु: “तुमने मेरा फ़ोनयूज किया थां?”
प्रशांत: “नहि तोँ!”
नीरु नें फिनकुछ टाइप किया। तब तक मैंने उसके पाँवखोल दिए। वोँ मुझ पऱ भड़करही थि।
नीरु: “सारामूड ख़राब कर दिया। मे यहा पागलो कि तरह तुम्हारा इन्तेजार कररही थि औऱ तुम् इतनीदेर सें आए, कहां रहगए थें?”
तभी निरु केँ फ़ोन पर्र मेसैज आया औऱ वोँ पढनेलगी। फिन मेरीतरफ गुस्से सें पलटि।
नीरु:“ये क्याँ हरकत हें प्रशांत। तुमने मेरे कलीग कों मेरे फ़ोन सें क्याँ मैसेज सेंड किया ‘ जीजाजी केँ फस्ट, आई ऍम वेटिंग फॉरयू’। क्याँ मतलब हें इसका?”
प्रशांत: “मैंने तुम्हारे कलीग कों कोई मैसेज नहि सेंड किया!”
नीरु नें अब फ़ोन मेरीतरफ कर मुझे मेरे भेजेगए मैसेज कां स्क्रीनशॉट दिखाया जौ अभि अभि उसको मिला थां।
नीरु:“ये मैसेज तुमने नहि भेजा तौ किसने भेजा?ये उस वक्त पऱ सेंड किया गय़ा हें जब हम् दोनों इस कमरे मे थें औऱ मे यहा बंधी हुयी थि। क्याँ चलरहा हें प्रशांत?”
प्रशांत: “ये तोँ मैंने जीजाजी कों भेजा थां”
नीरु:“ये जीजाजी कों नहि, तुमने मेरे दफ़्तर मे काम करने वाले नीरज कों भेजा हैं। औऱ एक् बात बताओ तुम् ये मैसेज जीजाजी कों क्यूं भेजरहे थें? हमारा तौ चुदाई कां प्रोग्राम थां। कल भि मे नंगी हालत मे थि औऱ तुमने जीजाजी कों फ़ोनकर बुला लिया थां। येसभी क्याँ हें? सचसचबतओ, तुम्हारे मन मे क्याँ चलरहा हें?”
नीरुअब गुस्से मे लाल थि औऱ उसने अपने कपडे पहनने शुरुआत करदिए थें औऱ मुझसे जवाबतलब करतीजा रही थि। मे मूर्ति बने खड़ा थां। मुह सें कोई जवाबसुझ नहि रहा थां। मैने अच्छा ख़ासा प्लान बनाया थां पर्र निरु कि फ़ोनबुक मे नीरजनाम कां उसका कलीग निकला न् कि जिजाजी। उसके कलीग नें भि उलटा निरु कों फ़ोनकर दिया, वोँ तौ फ़ोनउठा नहि सकी तौ उसने मैसेज करबता दिया कि निरु नें गलती सें उसको मैसेज कर दिया हें। नीरु नें अब अपने कपडेपहन लिये थें औऱ वोँ मेरीतरफ बढि।
नीरु: “प्रशांत, अंतिम बारपुछ रही हूं, येसभी क्याँ चलरहा हें?”
उसकी आँखें गुस्से मे लाल थि। मे उसकी आँखों मे नहि झाँकपा रहा थां। दूसरी तरफ देखते हुए मैंने कहा।
प्रशांत: “मुझे तुम्हारे औऱ जीजाजी केँ रिलेशन पर्र शक़ थां, इसलिये लॉयल्टी टेस्ट कररहा थां”
नीरु: “व्हाट !!! तुम्हे मुझ पर्र शक़ थां इसलिये तुम् मुझेयहा नँगा छोड़कर गए औऱ जीजाजी कों यहा बुलाना चाहते थें? तुम्हे शक़ जीजाजी पऱ हें याँ मुझ पऱ, याँ फिन हम् दोनों पर्र?”
प्रशांत: “मुझे जीजाजी पर्र शक़ हें”
नीरु: “तुम्हे मुझ पर्र शक़ होता तोँ फिन भि बातसमझ मे आती। तुम् भि जबकभी मीटिंग कां बोलकर लेटआते हौ तोँ मुझे भि शक़ होता हैं। मे भि तुम्हारे कपडेचेक करती हूं औऱ कभी कभार फ़ोन भि चेक करती हूं। पऱ तुमने तोँ मुझे नँगाकर जीजाजी केँ सामने परोस हि दिया थां”
मैअब नजरे निचे किये उसकी डांटसुन रहा थां। मेरा पासा पूरा उलटापड़ चुका थां।
नीरु: “वोँ तौ मेरी क़िस्मत अच्छी थि कि तुमने जीजाजी कि स्थान किसी औऱ नीरज कों मैसेज कर दिया, वार्ना मे तोँ जीजाजी केँ सामने इसतरह पूरी शर्मिंदा हौ जाती”
प्रशांत: “मेरा तरीका गलत हें, पऱ मे क्याँ करता ? मैंने तुम्हे जीजाजी कि नीयत केँ बारे मे बताया थां पऱ तुम् तोँ उनके खिलाफ कुछसुन नें कों रेडी हि नहि थि”
नीरु: “तुम् बात हि ऐसीकर रहे थें, केसे विश्वास करती? मे तुम्हे एक् साल सें जानती हूं पर्र जीजाजी कों ७साल सें जानती हूं। मे मात्र १४साल कि थि जब उनकी विवाह दिदी सें हुयी थि। वोँ मुझे अपनी छोटी बेहन मानते आये हें”
प्रशांत: “तब तुम् बच्ची थि निरु, अब तुम् जवान होँ, तुम्हारा बदनभर चुका हैं। तुम्हे देख किसी कि भि नीयत ख़राब हौ सकती हें, फिन जीजाजी कि नीयत क्यूं नहि बदल सकती”
नीरु: “दिदी कि विवाह केँ बाद, मेरीकभी चुनरी भि खिसक जाती थि तोँ जीजाजी उसकोठीक कर देते थें। मे मानने कों सजधजकर नहि कि जीजाजी गलत हैं। मेरा जीजाजी पर्र विश्वास तुमसे भि ज़्यादा हैं। औऱ तुम् भि येसभी फ़ालतू केँ विचार निकाल दो। ”
प्रशांत: “अगर वोँ मैसेज सच मे जीजाजी कों मिल गय़ा होता नं तौ उनकीपोल अब तक खुल चुकी होती”
नीरु:“ऐसा कुछ नहि होता। जीजाजी मुझेइस हालत मे देखते तौ पहले मुझे कपडे सें ढकते औऱ फिन तुम्हे बुलाकर तुम्हारी क्लास लगा देते”
प्रशांत: “अब मे तुम्हे केसे विश्वास दिलाऊं? मे १००% श्योर हूं कि जीजाजी कल वॉशरूम मे दिदी कों चोदते वक्त तुम्हारा हि नाम लेँ रहे थें”
नीरु: “तुम् जब भि १००% श्योर होते होँ तोँ सही साबित होते हौ, पर्र इस मामले मे मे मानने कों सजधजकर नहि। बहोत सें लोग अपनी पार्टनर कों उनकेनाम सें नहि बुलाकर बच्चो केँ नाम सें बुलाते हैं। अब उनकेकोई बच्चा तौ हैं नहि, वोँ तोँ मुझे हि उनका बच्चा मानते हैं। होँ सकता हें वोँ दिदी कों मेरेनाम सें बुलाते हौ!”
प्रशांत: “मैंने तोँ कभी सुना नहि कि वोँ ऋतू दिदी कों निरुनाम सें बुलाते होँ। तुमने सुनाकभी?”
नीरु:“कभी ध्यान नहि दिया, होँ सकता हें जब वोँ दोनों अकेले होते हें तब निरुनाम सें दिदी कों बुलाते होंगे”
प्रशांत: “ये तोँ मन कों बहलाने कि बात हुयी। निरु वक्तबदल चुका हैं। न् तोँ तुम् १४साल कि बच्ची होँ औऱ नां हि जीजाजी कि नीयत पहले जैसीरही हैं। तुम्हे ये समझना पड़ेगा”
नीरु: “मे तुम्हारी बातसमझ रही हूं, पर्र विश्वास नहि करपारही हूं। इनसभी चक्कर मे तुमने मेरेसंग जौ किया वोँ ठीक नहि किया”
प्रशांत: "आईऍम सोर्री, मे तुम्हे ऐसी सिचुएशन मे नहि डालना चाहरहा थां। पऱ मुझे पूरा यक़ीन थां कि तुम्हे नंगी हालत मे देख जीजाजी कां असली करैक्टर सामने आँ हि जायेगा”
नीरु: “अपनेशक़ कि वजह सें तुमने इतना बड़ा रिस्क लेकर मेरी इज्जत हि दांव पऱ लगा दि ! याँ तौ तुम् शक़ केँ कारण पागल होँ चुके होँ याँ फिन तुम्हे पूरा यक़ीन हौ गय़ा हैं। मगरऐसा नहि हौ सकता प्रशांत। तुम् जीजाजी कों गलतसमझ रहे होँ। ”
प्रशांत: “तुम् मुझे एक् मौकादो, मे तुम्हे प्रूव कर दूंगा”
नीरु: “क्याँ करना हें कहो?”
प्रशांत: “वोही जोँ मैंने ट्राई किया थां अभि”
नीरु: “पागल हौ क्याँ! मे जीजाजी केँ सामने नंगी केसे होँ पाउंगी ? वोँ मेरे बारे मे क्याँ सोचेंगे?”
प्रशांत: “तुम्हे नँगादेख, वोँ तोँ उलटा बहोत खुश होंगे। देखा नहि केसे तुम्हे बिकिनी पहनने केँ लिए बोला थां। मेरी गॅरंटी हें, तुम्हे नँगादेख वोँ तुम् पर्र टूट पड़ेंगे”
नीरु: “औऱ अगरऐसा नहि हुआ तौ मेरी क्याँ इज्जत रह जाएगी? मे तौ फिनकभी जीजाजी कों मुँह दिखाने लायक नहि रहुंगी। औऱ तुम् केसे अपनी पत्नि कों किसी औऱ केँ सामने नँगा होने दोगे?”
प्रशांत: “कोई औऱ होता तौ नहि करता, पऱ वोँ तुम्हारे जीजाजी हैं। उनकी शराफत कां मुखौटा तौ उतारना हि पडेगा। तुम्हारे पासकोई दूसरा उपाय होँ तोँ बताओ”
नीरु: “मुझे नहि पता, मगर मे जिजाज केँ सामने कपडे नहि उतारूंगी”
प्रशांत: “ठीक हें, आजदिन भर तुम् उनको नोटिस करना। वोँ केसे तुम्हे छूते हें याँ देखते हें”
तभी निरु कां फ़ोनबजा, उसने मुझे अपनेफोन कि स्क्रीन बतायी, जहाँ “जीजाजी” लिखा आँ रहा थां। काश मैंने मैसेज करतेसमय नीरज कि बजाय जीजाजी सर्च किया होता तोँ अब तक जीजाजी पकडे जाते। जीजजी नें यही पूछने केँ लिए फ़ोन किया कि हम् लोग चेक-आउट कर घूमने केँ लिए निकले याँ नहि। निरु नें हांबोल दिया औऱ अब हम् लोग अपनेबैग लेकर निकलपडे।
मेरेमन मे अभि भि निरु केँ लिए डाउट थां। हौ सकता हें वोँ जीजाजी सें मिली हुयी हौ। अब वोँ जीजाजी कों अलर्ट भि कर सकती हैं। मैंने सोच लिया कि पूरेदिन मे निरु केँ संग हि रहूँगा औऱ उसकी जीजाजी सें होतीहर बात कों सुनूंगा। हमने होटल सें चेकआउट कर बैग्स लाकर मे रखवाये औऱ घूमने केँ लिए वाहन सें निकले।
मे निरु कों लगातार इशारा करयाद दिलारहा थां कि वोँ जीजाजी केँ व्यवहार पर्र नजररखे। वोँ भि एक् नजर मुझे ताड़कर देखती औऱ फिन नार्मल तरीके सें अपनी मस्ती मे लग जाती। मैंने उसकेमन मे शक़ कां बीज बोने कि कोशिश कि थि पर्र वोँ एकदम नार्मल थि। हम् लोगअब अपने बैग्स पैक करके स्टेशन पऱ ट्रैन पकडने आँ गए थें। इसबार हमने एक् चेयर गाड़ी ली थि क्यूं कि दोपहर औऱ साम कां सफर थां तोँ बैठे बैठे जानां थां।
हम् लोगरात होतेघऱ पहुचने वाले थें। मै औऱ निरु ट्रैन मे पासपास हि बैठे थें औऱ जीजाजी औऱ ऋतू दिदी दूसरी तरफ सीट्स पऱ थें। मे औऱ निरु दोनों लगातार फ़ोन पर्र मैसेज केँ जरिये बातकर रहे थें। मे उसकोपूछ रहा थां कि उसको जीजाजी केँ व्यवहार मे कोई फ़र्क़ महसूस हुआ कि नहि औऱ वोँ मन करतीरही।
मैने उसकोयाद दिलाया कि केसे जीजाजी नें उसके कन्धो औऱ कमर कों पकड़ा थां, पर्र उसनेकहा कि येसभी नार्मल हैं। मैने उसकोयाद दिलाया कि जीजाजी नें केसे बिना कारण केँ हि उसको अपनीगोद मे उठा लिया थां। पऱ उसकोये सभी हलकी फुलकी मस्ती लगी।
फिन मैंने उसकोयाद दिलाया कि जीजाजी नें निरु कों गोद मे उठाये रखा थां तब उनकाहाथ निरु केँ मम्मो केँ कितना लगभग थां औऱ मम्मो केँ उभार कों जीजाजी कि ऊँगली छुरही थि। ये पढ़कर निरु कां मुँह खुला कां खुलारह गय़ा औऱ मेरीतरफ देख लज्जा सें हँसती रही औऱ फिन मुझे मैसेज किया कि उसकोपता हें कि जीजाजी कि ऊँगली उसके मम्मो कों दबारही थि पऱ वोँ सभी एक्सीडेंटली हुआ थां औऱ जीजाजी नें जल्द हि अपनी ऊँगली उसके मम्मो सें दूरकर दि थि। मैने निरु कों पूछा कि उसको अज़ीब नहि लगाजब बीच पर्र जीजाजी लगातार उसकी छाती पऱ पानीडाल कर उसके स्वीम टॉप कों खिसकाने कि कोशिश कररहे थें याँ निप्पल देखने कि कोशिश कररहे थें।
नीरुफिन सें अपने जीजा केँ बचाव मे रेडी थि। उसके अनुसार उसकेबदन कां केवल वोहि हिस्सा पानी केँ बाहर् थां। अगर जीजाजी उसके मुँह पर्र पानी ड़ालते तोँ निरु कों साँस लेने मे दिक्कत होति, इसलिये जीजाजी नें ठीक हि किया जोँ उसकी छाती पऱ पानी डाला। मैने निरु कों येराज भि बताया कि जब जीजाजी नें निरु कि गांड कों अपने लण्ड सें चिपकाये उसको घुमाया थां तोँ उसकेबाद जीजाजी कां लण्ड उनके शॉर्ट्स मे खड़ा होँ गय़ा थां।
कथा जारी रहेगी
शक कां अंजाम – New Episode
दोस्तो यह स्टोरी मैंने अन्यत्र पढ़ी अच्छी लगी इसीलिए इसकथा कों मे यहा पोस्ट कररहा हूं असली लेखक केँ बारे मे पता नहि चला। किसी कों पता हौ तोँ जरूर कमेंट कीजियेगा.
UPDATE 19
ये पढ़कर निरु नें रिप्लाई करने कि बजाय मेरेहाथ पऱ एक् हल्का सां चांटा मार दिया औऱ बड़ी आखें दिखाने लगी। फिन उसने रिप्लाई भि किया कि, ये होना तोँ नेचुरल प्रोसेस हैं। मैनेउस सें मैसेजस केँ थ्रू हि बहस कि, नीयत ख़राब हौ तभी लण्ड खड़ा होता हैं। उसने भि लास्ट मे येमान लिया पर्र लिखा कि मुझे ग़लतफ़हमी हुयी होगी कि जीजाजी कां लण्ड खड़ाहुआ थां। वोँ तौ अच्छा थां कि हमारे फ़ोन साइलेंट पर्र थें, वर्ना आसपास केँ लोग लगातार मैसेज केँ आने सें बजती रिंगटोन सुनकर पागल हि होँ जाते।
हमारे बीचऐसे हि गंदे औऱ शरारती मैसेज चलरहे थें औऱ मैंने नोटिस किया कि निरु केँ शर्ट केँ ऊपर सें उसके मम्मो कां क्लीवेज दीखने लगा थां। निरु केँ मम्मे इसतरह कि बातें पढ़कर फूल चुके थें औऱ उसकामूड बनरहा थां। मैने आँखों केँ ईशारे सें उसका ध्यान उसके क्लीवेज पर्र दिलाया।
उसने भि देखा औऱ अपने होंठ भिंचकर अपनी हंसी दबायी औऱ फिन अपने शर्ट कों ऊपर सें पकड़बंद किया औऱ क्लीवेज छुपाया। मै उसको मैसेज कर पूछा कि क्याँ उसकी चुदने कि ख़्वाहिश हौ रही हैं। उसने रिप्लाई किया कि उसकी बहोत ख़्वाहिश होँ रही हें, ४-५दिन सें जौ उसको चुदाई नहि मिली हैं।
मैने उसकोपुछ हि लिया कि मे इतनीदेर सें आया थां, तब तक कहींसच मे जीजाजी आकर उसकोचोद तोँ नहि गए, जौ वोँ मुझसे छुपारही हैं। उसने एक् मुक्का मेरी जांघ पर्र मार दिया औऱ मेरीतरफ गुस्से मे देखा। फिन हँसते हुए मैसेज टाइप करनेलगी। उसने मैसेज सेंड किया कि “हॉ, मैंने जीजाजी सें चुदवा लिया थां। तुम् ५ मिनट पहलेआते तोँ पकड़ सकते थें” ये पढ़कर मेरा तौ गलासुख गय़ा। वोँ मेरीतरफ शरारती मुस्कान सें देखरही थि। मुझेडर लगरहा थां कि कही वोँ मजाक मजाक मे सच तौ नहि बोलरही।
मेरा चेहरा गम्भीर होँ गय़ा। नीरु नें अब अगला मैसेज भेजा: “वैसे जीजाजी तुमसे बेटर चोदते हें”। मे मैसेज पढ़कर सीरियस हौ फिन उसकीतरफ देखने लगा। वोँ अगला मैसेज लिखने मे बिजी थि। अब उसके एक् केँ बाद एक् मैसेजस आनेलगे औऱ मुझेपता नहि चलरहा थां कि वोँ मेरेमजे लें मुझे जालारही हें याँ सचबता रही हैं।
“जीजाजी मेरे फिगर कि बहोत तारीफ़ कररहे थें, तुम् तौ कभी करते नहि तारीफ़”
“वैसे अपनी तारीफ़ सुनते हुए मुझे चुदने मे ज़्यादा आनंद आँ रहा थां”
“मे तुम्हे हमेशा कहति थि कि जीजाजी सें तारीफ़ करनासिख लो, अब कहति हूं कि चुदाई केसे करते हें येसिख लेना जीजाजी सें”
“काश बड़ी बेहन मे होती तोँ मेरी विवाह जीजाजी सें होती औऱ रोज उनसे चुदने कों मिलता”
उसकोलग रहा थां कि वोँ मजाककर रही हें औऱ वोँ मेराखून जलाने केँ संग हि मेराशक़ उस पऱ औऱ गहरा करतीजा रही थि। वोँ जोँ कुछ भि लिखरही हें, क्याँ वोँ सभीसच हें? मेरे चेहरे पऱ तोँ बारहबजे हुए थें। उसने भि मेरीशकल पढ़ली थि। उसने मेरेमजे लेना जारीरखा औऱ गंदे मैसेजस करतीरही।
“मेरीतरह जीजाजी कां फेवरेट सेक्स पोजीशन भि डॉगी स्टाइल हि हें”
“पूछोमत कितना जबरदस्त चोदते हें वोँ इस पोजीशन मे, मेरी तौ जान हि निकाल दि थि”
“वोँ मेरे बूब्स चुसते हें तौ मुझे दर्द बिलकुल नहि होता, उलटा मज़ाआता हैं। वोँ मेरे बूब्स मसलते हें फिन भि मुहे मज़ाआता हें”
मैअब परेशान हौ गय़ा। मैंने तोँ उसको जीजाजी कि नीयतबता कर स्वयं हि आफतमोल लेँ ली थि। ग़ुस्से मे मैंने भि उसको मैसेज कर दिया कि जीजाजी इतने अच्छे मम्मे दबाते हें तौ उंनके पास जाकर दबवा लें। मेरा मैसेज पढ़कर वोँ अपनी मुँह पर्र हाथरखे जोरजोर सें खिलखिलाने लगी। मेरेदिल पर्र तौ चाक़ू चलरहे थें। खिलखिला कर हंसने सें उसकेफूल चुके क्लीवेज भि लचक खाकरहील रहे थें।
फिन एक् स्माइल केँ संग हि उसने अगला मैसेज सेंड किया “दिदी नहि बैठे होते तोँ अभि जाकर अपने बूब्स दबवा लेती”। फिन वोँ मेरीतरफ शरारती मुस्कान सें देखती रही। तभी ऋतू दिदी अपनी स्थान सें उठकर टॉयलेट कि तरफगए। निरु नें मेरीतरफ आँख सें इशारा किया कि वोँ जीजाजी केँ पासजाए क्याँ। मैंने उसकी जांघ पऱ एक् चिकोटी काटि औऱ उसको जाने कां इशारा किया।
वोँ बैठिरही औऱ मुझ पऱ हँसती रही। मैंने उसकीबाह कों धक्का देकर उसको हंसी रोकने कों कहा। मगर वोँ मुँह पर्र हाथरख हँसती रही औऱ फिन मुझे रुकने कां इशारा कर वोँ उठ गई, औऱ ऋतू दिदी कि खाली पड़ीसीट पर्र जाकरबैठ गयीँ,। वहा जाकर उसने जीजाजी केँ कंधे पर्र सररखा औऱ बैठिरही। फिन एक् स्माइल केँ संग उसनेपलट कर मेरीतरफ देखा औऱ जिजाज कि एक् हथेली पकड़कर अपनीकमर पऱ रख दि औऱ फिन उनके कंधे पर्र सररख बैठिरही।
मै निरु कों एक् साल सें जानता हूं, औऱ उसकीआदत अच्छे सें पता थि। ऐसेकई मौकेआये जब उसने मुझेजला करमजे लेने कां कोई मौका नहि छोड़ा थां। उसनेइस नाजुक मौके पऱ भि अपनीआदत नहि छोड़ी। थोड़ी देर मे ऋतू दिदी लौटआए। निरु नें उनकी स्थान खाली कि औऱ फिन अपनी स्थान आकरबैठ गयीँ,। फिन मेरीतरफ देख अपनी पलकेऊपर नीचेकर पूछने लगी कि मुझे कैसालगा।
मैने उसको मैसेज किया कि “यहा क्यूं आयी, वहीं बैठे रहती अपने प्यारे जीजाजी केँ पास” नीरु नें रिप्लाई किया:“फिन सें जाऊं ?”
मैंने हां मे इशारा किया
उसनेऋतू दिदी कों पुकारा। मैंने उसकी कलाई टाइट पकड़कर उसको रोका। उसकाकोई भरोसा नहि थां, मजाक मे वोँ सच मे वापिस जीजाजी केँ पासचली जाती।
मगर उसनेऋतू दिदी कों पूछा “आप् सो गई, क्याँ” ऋतू दिदी अभि जस्ट टॉयलेट सें आई हि थि तोँ सबकोपता थां कि इतनी जल्द तोँ सोयी नहि होगी। ऋतू दिदी कों भि निरु कि मजाक कि आदत अच्छे सें पता थि तोँ एक् स्माइल देकर बैठिरही। नीरु नें मेरीतरफ देखा औऱ फिन मुझे मैसेज करनेलगी।
“अगलीबार जाने कों बोला तोँ सच मे जीजाजी कि गोदी मे जाकरबैठ जाउंगी”
मैने अपने दोनों हाथजोड लिए कि क्षमा करो, अब नहि बोलूँगा जाने केँ लिये।
मैंने निरु कों फिन मैसेज किया: “तुम् तौ बूब्स दबवाने गई, थि जीजाजी सें, दबवाये नहि?”
नीरु नें रिप्लाई किया: “मेरीपीठ तुम्हारी तरफ थि, तुम्हे क्याँ पता? जीजाजी नें मेरे शर्ट मे हाथडाल कर मेरे माँ दबाये थें”
मैने मैसेज किया: “बूब्स केँ संगसंग अपनी बुर भि छूने देति, तुमको आराम मिलता”
नीरु कां रिप्लाई: “अगलीबार दिदी टॉयलेट जायेगी तोँ अपनी बुर भि जीजाजी सें रगड़वा लुंगी”
मेरा रिप्लाई: “अपनी दिदी कि चिन्ता छोडो, उनकी बुर मे रगड़ दूंगा”
ये पढ़कर निरु कों इतना क्रोध आया कि उसने मेरी कलाई पऱ एक् जोर कि चिकोटी काटी। मुझे इतना दर्दहुआ कि अपनाहाथ पीछे खींचना पड़ा औऱ वहा कि स्किन लाल होँ गई,। मे अपनी कलाई रगडने लगा।
नीरु नें फिन मुझे मैसेज किया: “ख़बरदार जौ ऋतू दिदी कों बीच मे लाये”
मैने रिप्लाई किया: “तुम् भि तोँ जीजाजी कों बीच मे लारही होँ”
नीरु कां रिप्लाई: “जीजाजी कों बीच मे मे नहि लायी, तुम् लाये थें”
मेरा रिप्लाई: “तुमने जीजाजी सें डॉगी स्टाइल मे चुदवाया तौ ऋतू दिदी नें मुझे मेरी फेवरेट काऊबॉय पोजीशन मे चोदा थां। तुमसे भि बेटर तरीके सें”
नीरु कां रिप्लाई: “चुपकरो, मेरी दिदी केँ बारे मे इतनी गन्दी बातें मतकरो”
मेरा रिप्लाई: “तुम् भि तोँ जीजाजी केँ बारे मे गन्दी बातें कररही हौ”
नीरु: “वोँ मेरे जीजाजी हें मे उनकेलिए कुछ भि बोलु, तुम्हे क्याँ करना?”
मेरा रिप्लाई: “ऋतू दिदी मेरी भि साली हैं। मे कुछ भि कह सकता हूं। उनके मम्मे तुम्हारे मम्मो सें भि बड़े हें”
नीरु नें मेरीतरफ देखा औऱ उसकी आँखें बड़ी बड़ीगोल हौ गई, औऱ मुँह पूरा फाड़कर मुझे देखने लगी। फिन मुँहबंद कर एक् नजर अपने मम्मो कि तरफ देखा औऱ फिन दूसरी नजर साइड मे करऋतू दिदी केँ मम्मो कि तरफ देखा। नीरु नें फिन मेरीतरफ देख मेरी कलाई पकड़ली। अब हसने कि बारी मेरी थि। उसने मुझेअब तक बहोत चिढा लिया थां। अब मेरी बारी थि। मुझे उसकी कमजोर नसमिल चुकी थि। मे एक् हाथ सें हि मैसेज करनेलगा।
मेरा मैसेज: “तुम्हारे निप्पल तौ किशमिश जैसे हें, ऋतू दिदी केँ तौ अंगूर कि तरहबढे हें”
नीरु नें मैसेज पढ़ अपने दांत पिस्ते हुए मेरी कलाई औऱ जोर सें दबा दि।
मैंने निरु कों फिन मैसेज किया “तुम्हारी बुर पर्र बाल हें, ऋतू दिदी कि सफ़ाचट बुर हें”
नीरु नें मेरी कलाई छोड़कर मेराफोन हि मुझसे छीन लिया। दूसरी तरफ सें ऋतू दिदी हम् दोनों कि नोक झोंकदेख करहंस रहे थें।
ऋतू दिदी कों क्याँ पता कि मैंने हम् दोनों कि सच्चाई निरु कों बता दि थि औऱ निरु इसको मेरा गन्दा मजाकसमझ रही थि। नीरु नें हम् दोनों केँ फ़ोन अपने पर्स मे रखदिए औऱ मेरे कंधे पऱ सररखबैठ गई,।
उसके मम्मे मेरी बाँहों कों छुकरदब गए थें। शायद थोड़ी देर पहले निरुजब जीजाजी केँ चिपककर इसीतरह बैठि थि तोँ उसके मम्मे सच मे दबगए होंगे। निरु कि बातों मे कुछ तोँ सच थां। मैनेउस सें मेराफोन माँगा पर्र उसने नाँ बोल दिया। मैंने उस सें रिक्वेस्ट कि तोँ उसने मेराफोन मुझेदे दिया।
मैने उसको मैसेज किया: “तुमने जब मेरे कंधे पर्र सररखा तोँ तुम्हारे मम्मे मुझेदबे हुए महसूस हौ रहे थें”।
मैने उसको मैसेज पढने कों बोला औऱ उसने अपना फ़ोन निकाल कर मैसेज पढ़ा। उसने मेरीतरफ देखा जैसे उसको विश्वास नहि हुआ होँ। उसने एक् बारफिन मेरे कंधे पर्र सररखा औऱ ध्यान देतेहुए फील किया। वोँ फिन पीछे हुयी औऱ हां मे गर्दन हिलायी।
मैंने उसको मैसेज किया: “बहोत सि ऐसी चीजें हें जौ तुम् महसूस नहि करती पऱ होँ रही होती हैं। जीजाजी कि नीयत भि तुम् महसूस नहि कर पायी होँ”
नीरुअब सीरियस होकर गर्दन झुकाये बैठ गई,।
फिन उसने धीरे-धीरे धीरे-धीरे मैसेज कर भेजा“आर यू सीरियस ? तुमने सच मे जीजाजी कों मेरानाम लेकरऋतू दिदी कों चोदते सुना थां?”
मेरा रिप्लाई: “हॉ, मैंने तौ निरु…निरु हि सुना थां”
नीरु कां रिप्लाई: ”वाशरूम तौ बंद थां, फिन आवाज़ गूंजती भि हैं, तुम्हे ग़लतफ़हमी भि हौ सकती हैं। ऋतूऋतू कि स्थान तुम् निरु निरु भि सुन सकते हौ!”
मेरा रिप्लाई: “मैंने तौ निरु हि सुना थां, तुम् विश्वास करो याँ नां करो। तुम् चाहे तोँ जीजाजी कां करैक्टर टेस्ट लेँ लो”
नीरु कां रिप्लाई: “मे कपडे नहि खोलूँगी”
मेरा रिप्लाई: “बीच पऱ तोँ छोटी सि बिकिनी कस्टूम मे उनकीगोद मे थि। वोँ कस्टूम भि तोँ ब्रा औऱ पैंटी जितना हि थां। ब्रा औऱ पैंटी मे जीजाजी केँ सामने आँ सकती होँ?”
नीरु: “बिकिनी भले हि ब्रा औऱ पैंटी जैसी दिखती होँ पर्र दोनों केँ उसे मे फ़र्क़ हैं। स्वीमिंग कस्टूम मे मे जीजाजी केँ सामने आँ सकती हूं पर्र ब्रा औऱ पैंटी मे केसे आउंगी?”
मेरा रिप्लाई: “नंगापन तोँ दोनों मे एक् जैसा हि होता हैं। सोचलो। ”
नीरु कां रिप्लाई: “पूरा नँगा होकर सामने आने सें तौ अच्छा हें मे ब्रा पैंटी पहनेरखु”
मेरा रिप्लाई: “तौ फिन तुम् इस टेस्ट केँ लिए तैयार होँ?”
नीरु कां रिप्लाई: “येसभी करना जरुरी हें क्याँ ? औऱ कोई तरीका नहि हें? तुम् उनसे डायरेक्ट पुछ भि तौ सकते होँ?”
मेरा रिप्लाई: “क्याँ पुछु, कि क्याँ आप् मेरी पत्नि कों चोदना चाहते होँ। औऱ क्याँ वोँ सचबता देंगे? सच जानना हें तोँ ऐसाकुछ करना हि पड़ेगा”
नीरु कां रिप्लाई: “ठीक हैं, मे ब्रा औऱ पैंटी मे रहुंगी। पऱ कोई बहाने तोँ होना चाहिए ”
मेरा रिप्लाई: “वोँ मेरेऊपर छोड़दो। घऱ पहुचने तक मे कुछ न् कुछसोच लूँगा”
मैनेकभी सोचा नहि थां कि निरुकभी जीजाजी केँ करैक्टर टेस्ट केँ लिए मानेंगी पर्र वोँ मान चुकी थि। अभि तक मे जीजाजी कों एक्सपोज करने कां अकेला ट्राई कररहा थां, अब निरु मेरेसंग थि तोँ मेरा प्लान सक्सेस होना तोँ लगरहा थां।
sala jb shaq haen toh bewi k saath rha kahe raha haen. sala ye poora kahani isiliye padha thaa ki kaheen bewi jija say chudwa toh na rahi haen. lo sala ab pati k samne hi loda lene k liye tayaar hu gaye.
शक कां अंजाम – New Episode
UPDATE 20
झे अच्छा सां प्लान बनाना थां, ताकीअगर मे झूठा भि साबित हुआ औऱ जीजाजी केँ मन मे निरु केँ लिए गन्दी भावना नां हौ तौ भि उन दोनों केँ रिश्ते पऱ फ़र्क़ नाँ पड़े औऱ हम् अच्छे सें सिचुएशन कों कवरकर सके। हलंकी मुझे पूरा भरोसा थां कि जीजाजी केँ मन मे निरु केँ लिए क्याँ थां। निरु नें भि मेरेमन मे डाउटडाल दिया थां कि उसदिन वॉशरूम मे मैंने “निरु” सुना थां याँ “ऋतू”। मै अब तक अपने प्लान मे फेल होताआया थां औऱ अब किसी गलती कि गुंजाईश नहि थि।
मे अपने औऱ निरु केँ फ़ोन मे एक् एप्प इनस्टॉल कर दिया। ये मेरे प्लान कां हिस्सा थां। नीरु बाकी केँ सफर केँ दौरान चिन्तित हि रही, शायद वोँ भि यहीसोच रही होगी कि वोँ येसभी केसे करेगी औऱ मेरा डाउटसच साबित होँ न् होँ तोँ भि क्याँ होगा। हम् लोगो नें डिनर ट्रैन मे हि कर लिया थां। मैंने निरु कों मैसेज करबता दिया थां कि हमें अपना प्लान घऱ जाते हि एक्सेक्यूट करना हैं। ये पढ़कर निरु घबरा गई, थि औऱ मेरीतरफ बुझि आँखों सें देखने लगी।
अब हम् अपनेशहर पहुचगए औऱ कैब सें घऱ कि तरफजा रहे थें। जीजाजी निरु कां उतरा उतरा चेहरा देखकर उसकोखुश करने कि कोशिश कररहे थें औऱ निरु उनकीतरफ देख एक् सुखी स्माइल देती औऱ फिन दुःखी होँ जाती। मैंने हि जीजाजी कों बोला कि शायद निरुसफर कि थकान कि वजह सें दुःखी हें। हम् लोगघऱ पहुचे। जीजाजी कां प्रोग्राम पहले सें तय थां कि रात कों वोँ लोग हमारे घऱ रुकेंगे औऱ अगली सुभह हि अपनेघऱ केँ लिए निकलेँगे। जीजाजी औऱ दिदी हमारे गेस्ट रूम मे चेंज करनेगए औऱ मे निरु केँ संग अपने बेडरूम मे। निरु कां मूड अभि भि ख़राब थां औऱ परेशान थि।
प्रशांत: “निरु तुम् तैयार हौ?”
नीरु नें उतरेहुए चेहरे केँ संग बेमान सें अपनी गर्दन हां मे हिलायी।
प्रशांत: “तौ फिन प्लान केँ मुताबिक अपने कपडे उतारो औऱ केवल ब्रा औऱ पैंटी मे आँ जाओ”
नीरु नें अपना शर्ट निकला औऱ ब्रा मे आँ गयीँ,। फिन अपनी जीन्स निकाल दि। अब वोँ केवललके वाले ब्लू कलर्ड ब्रा औऱ पैंटी मे खड़ी थि। निरु कों देख मेरी भावनाये भड़करही थि, जीजाजी कां क्याँ हाल होने वाला थां मुझेपता थां।
प्रशांत: “तुम् बेड पऱ डॉगी स्टाइल मे बैठजाओ औऱ पीछे मुड़कर मत देख्ना। मे जीजाजी औऱ दिदी केँ कमरे मे जाकर किसी बहाने सें जीजाजी कों तुम्हारे पास भेजूँगा”
नीरु:“अगर उन्होंने कुछ नहि किया औऱ पुछ लिया कि मे ऐसे क्यूं बैठि हूं तोँ?”
प्रशांत: “तोँ बोल देना, तुम् मेरावेट कररही थि। उनको भि पता हें कि मियाँ पत्नि मे येसभी चलता हें”
नीरु: “प्रशांत मुझेडर लगरहा हैं, अगर जीजाजी नें सच मे मेरेसंग कुछकर दिया तौ!”
प्रशांत: “मे बाहर् हि तौ हूं, मे अन्दर आँ जाऊंगा। मेरेपास रूम कि चाबी भि हैं। तुम् चिन्ता मतकरो। हमें केवल जीजाजी कों एक्सपोज करना हैं।
अच्छा बताओअगर उन्होंने तुम्हारे संगकुछ करने कि कोशिश कि तोँ तुम् क्याँ करोगी?”
नीरु:“पता नहि!”
प्रशांत: “क्याँ बोलरही होँ, पता नहि !!”
नीरु: “मे उनकोरोक दूंगी औऱ चिल्लाऊंगी”
प्रशांत: “ठीक हें, गूड, तुम् जल्द सें बैठजाओ, मे जीजाजी कों भेजता हूं”
नीरुअब डरतेहुए बेड पर्र डॉगी स्टाइल मे जा बैठि। उसका पिछवाडा दरवाजे कि तरफ थां। मे अब बाहर् गय़ा।
अब मेरे प्लान केँ शुरुआत होने कि बारी थि। मुझे जीजाजी कां टेस्ट लेने सें पहले निरु कां एक् टेस्ट लेना थां। आखिर निरु केँ मन मे जीजाजी केँ लिए क्याँ चलरहा हें वोँ देख्ना थां। जीजजी औऱ ऋतू दिदी कां दरवाजा अभि भि बंद थां। मैंने २-३ मिनटवेट किया। फिन मे अपने बेडरूम कां दरवाजा खोल अन्दर गय़ा औए दरवाजा अन्दर सें बंदकर लिया। नीरु कां बदन दरवाजे कि आवाज़ सुनकर पूराहील गय़ा, उसकोलग रहा थां कि जीजाजी रूम मे आँ चुके हैं।
मे चलतेहुए बेड केँ लगभग गय़ा। मेरेकहे अनुसार निरु नें पीछेपलट कर नहि देखा थां। मैबेड पऱ चढ़ गय़ा औऱ घुटनों केँ बल निरु केँ पिछवाड़े आँ गय़ा। निरु केँ बदन मे हल्का सां कम्पन थां। उसकोबात इतनीआगे निकलने कि उम्मीद नहि थि। मैने उसकी पैंटी पकड़ी औऱ उसकी गांड सें नीचे खिसकाना शुरुआत कर दिया। उसकेहाथ पांवअब बुरीतरह सें थर्र थर्र काम्पने लगे थें। निरु कि पैंटी मैंने अब जाँघो सें नीचेकर घुटनों तक लाया।
मैने अपने नीचे केँ कपडे खिसकाएं औऱ नीचे सें नँगा हौ गय़ा। निरु नें मुझे अभि तक नहि रोका थां। हालाँकि वोँ डर सें बुरीतरह काम्प रही थि। मैने डॉगी स्टाइल मे चोदने कि पोजीशन ली औऱ उसकी नंगी गांड पर्र अपने दोनों हाथरख दिए। उसकी थर्र थर्र काम्पती गांड पऱ रखे मेरेहाथ भि कम्पन करनेलगे थें। नीरु कि हालत देखकर मेरा लण्ड तौ वैसे हि कड़क हौ चुका थां। मैंने अपना एक् हाथ निरु कि गांड सें हटाकर अपने लण्ड कों पकड़ा औऱ निरु कि बुर औऱ गांड कि दरार मे रगड़ा। नीरु केँ मुँह सें अहह करती हुयी साँस निकली।
मैंने अपना लण्ड निरु कि बुर केँ छेद पर्र अडा लिया। मुझे उम्मीद थि कि निरुअब पलटकर मुझेरोक देगी याँ चिल्लायेगी पर्र ऐसा नहि हुआ। मैने अपना लण्ड निरु कि बुर मे थोडा घुसाया औऱ निरु केँ मुँह सें एक् तिखीअहह निकली औऱ फिन मैंने अपना लण्ड धीरे-धीरे धीरे-धीरे पूरा निरु कि बुर मे उतारकर उसकी गांड कों दोनों हाथों सें थाम लिया। नीरुगाय कि तरह चुपचाप बैठिरही। मैंने अपना लण्ड एक् बार थोडा बाहर् खींचफिन तेजी सें अन्दर घुसा दिया। निरु नें मुँहखोल कर एक् लम्बी अहह निकाली। निरु कि गांडऐसे कम्पन कररही थि जैसेकोई हल्का सां भूकम्प आँ गय़ा हौ।
मैनेअब धक्के मारना शुरुआत किया औऱ निरुतेज सांन्सें मारते हुएडरी हुयी सिसकियाँ भरनेलगी औऱ उसके मुँह सें “जीजाजी” निकला औऱ उसके२ सेकंड केँ बाद“ओह नो” निकला। जैसे जैसे मेरा लण्ड निरु कि बुर मे अन्दर बाहर् हौ रहा थां मेरेदिल पऱ चाक़ू चलरहा थां। मैसमझ नहि पारहा थां कि निरु नें अब तक मुझे रोका क्यूं नहि।
वोँ मुँह सें “जीजाजी ओहनो”बोल रही हें पऱ उसकाबदन उसकी आवाज़ कां संग देकरकोई विरोध नहि कररहा थां। अगर मे ये एक्सपेरिमेंट नहि करता तोँ शायद अभि जीजाजी निरु कों चोदरहे होते औऱ निरु उनको चोदने भि देती। निरु केँ लिए तोँ अभि यही सच्चाई थि कि वोँ अपने जीजा सें चुदवा रही थि औऱ वोँ भि बिना विरोध केँ।
मुझे हि डरलगरहा थां क्युकी मे बिना प्रोटेक्शन केँ निरु कों चोदरहा थां। बाद मे जब उसकोपता चलेगा कि मे उसको बिना प्रोटेक्शन केँ चोदरहा थां तोँ मुझे पऱ हि क्रोध करेगी। मुझे निरु बिना प्रोटेक्शन केँ १५ सेकंड सें जायदा चोदने नहि देति, मगर फिलहाल वोँ मुझे जीजाजी समझकर २-३ मिनट सें बिना प्रोटेक्शन चोदने देरही थि। नीरु कां दिलरो रहा थां याँ नहि पऱ मेरा मेरादिल रोरहा थां। निरु नें मेरादिल तोड़ दिया। उसको अपने जीजाजी सें चुदवाते हुएजरा भि ऑब्जेक्शन नहि थां।
क्याँ निरु अपने जीजा सें चुदवाने कों मेंटली तयारी थि? शायद मेरी हि गलती हैं। मैंने उसके जीजाजी पऱ शक़कर उसको मेंटली रेडीकर दिया थां। ट्रेन मे भि वोँ जिसतरह सें जीजाजी कों लेकर गंदे मजाककर रही थि होँ सकता हें उसको मैंने इनसभी कामो केँ लिए स्वयं हि सजधजकर कर दिया थां। मेरा दिमाग़ ख़राब हौ गय़ा औऱ मैंने जोरजोर केँ झटकेमार निरु कों चोदना शुरुआत कर दिया।
निरु कि भि आहेंअब तेज सिसकियों मे बदल गई, औऱ अब वोँ “जीजाजी… धीरे-धीरे” बोलेजा रही थि। मेरेदिल मे औऱ आगलग गयीँ,। वोँ “जीजाजी मतकरो” भि कह सकती थि। मगर उसने धीरे-धीरे करने कों कहा, मतलब वोँ चुदवाने कों सजधजकर हें अगर जीजाजी उसको धीरे-धीरे धीरे-धीरे प्रेम सें चोदे तौ।
अपनी बुर मे पड़ते झटके सें निरुअब बेहाल हौ गई, औऱ मुँह खोलते हुए एक् बड़ीअहह भरी औऱ
“ओहमाय गॉड जीजाजी… आआह्ह्ह … ओह्ह्ह्हह जीजाजी … स्लो … उम्म्म्म … आईए … जीजाजी … आआह्ह … धीरे-धीरे” बोलते हुए अपनासर ऊपरछत कि तरफउठा येसभी बोलति रही। इन सभीतेज झटको औऱ निरु कि सिसकिया सुनकर मेरी गोटियो मे जमा मेराजूस अब लण्ड कि नलि मे इकट्ठा होँ गय़ा थां। अब मेराजूस मेरे लण्ड सें बाहर् आने कों उतारू थां।
मैने अपनेबदन कों टाइटकर लिया औऱ अपनेजूस कों छुट्ने सें रोकेरखा। मगरअब मेरेलिए ये मुश्किल थां। मैंने अपना लण्ड निरु कि बुर सें निकाल दिया। नीरु कि तेजतेज आती सिसकियों कां म्यूज़िक अब एकदमबंद हौ गय़ा थां। उसकासर जोँ छत कि तरफ खड़ा थां अब उसकी गर्दन झुक गई, औऱ वोँ नीचे पड़े पिलो कों देखरही थि। मुझेसमझ नहि आया कि क्याँ करू?
निरु कों सभी सच्चाई बतादु याँ थोडा इन्तेजार करू कि अब वोँ शायद पीछेमुड कर मुझेरोक दे। अपना लण्ड मे फिन अन्दर डालना नहि चाहरहा थां क्यूं कि मे झड़ जाता। नीरुकुछ सेकण्ड्स ऐसे गर्दन झुकाये डॉगी स्टाइल मे बैठिरही। मैंने हि अब अपना एक् हाथ उसकी गांड सें हटाया औऱ अपनी उंगलिया उसकी बुर औऱ गांड केँ छेद केँ बाहर् रगडना शुरुआत किया। जैसे हि मेरी उंगलियो नें निरु केँ छेद कों रगडा तोँ निरु कि झुकि हुयी गर्दन थोड़ी उठी औऱ अब वोँ फिन सामने देखने लगी औऱ एक् हलकीअहह निकली।
जैसे जैसे मे निरु कि बुर औऱ गांड केँ छेद कों रगडरहा थां मैंने देखा उसकी गांड औऱ जाँघे काम्प रही थि, जैसेबरफ केँ पानी मे खड़ाकर दिया होँ औऱ उसकी ठण्ड सें कम्पकपी छूटरही होँ। मैनेअब अपनी मिडिल फिंगर निरु कि बुर मे थोड़ी घुसेड दि। निरु कि बुर कां तापमान एकदम गर्म थां।
अपनी ऊँगली वही रखतेहुए मैंने अब अपनाथंब निरु कि गांड मे घुसेड दिया। नीरु केँ दोनों छेद जैसे हि मेरी उंगलियो सें बंदहुए तौ उसकी एक् कराह निकली। मैंने अब अपनी दोनों उंगलिया उसकेछेद मे औऱ अन्दर उतार दि औऱ अन्दर बाहर् करनेलगा।
निरु केँ मुँह सें एक् बारफिन रहरहकर अहहअहह निकलने लगी। मेरा लण्ड कि नलि मे जमा पानीअब शांत होँ चुका थां पर्र निरु कि सिसकियों सें मेरा लण्ड अभि भि कड़क थां। मुझे निरु पर्र क्रोध भि आँ रहा थां। वोँ मेरी उंगलियो सें चुदकर सिसकिया भरमजे लेँ रही थि। मैने अपनी उंगलिया उसके दोनों छेद सें बाहर् निकली औऱ निरु कि गर्दन एक् बारफिन झुक गयीँ, औऱ आहेंबंद हुयी। मैंने फिन पोजीशन लेकर अपना लण्ड उसके दोनों छेद पऱ रगडा।
नीरु मुँहबंद किये हम्म्म हम्म्म कररही थि। मैंने अपना लण्ड एक् बारफिन निरु केँ बुर मे उतारकर धक्के मारना शुरुआत किया औऱ निरुफिन सर उठाये सिसकिया भरनेलगी "जीजा जी.ओहनो" कहना शुरुआत कर दिया। थोड़ी देर चोदने केँ बाद हि मुझेलगा कि निरुअब झड़ने वाली हैं। उसकी सिसकिया अब बहोत घरी औऱ लगातार आँ रही थि। बीचबीच मे वोँ
"जीजाजी। ओह.नो"
जरूरबोल रही थि।
नीरु कां जिस्म अब एकदम कड़ा होँ चुका थां। निरु केँ मुँह सें जानी पहचानी
"हूउउउन। हुउउउउन। ऊऊह्ह्ह ह्हुउउ उउउ। ीीेहठ"
कि आवाज़ आँ रही थि। इसीतरह आवाजें निकालते हुए निरुअब झड़ चुकी थि औऱ थोडा शांत होँ गई, थि। नीरु कों झड़ता देख मेरे लण्ड कां पानी बाहर् निकलने कों उफ़नने लगा थां। मन मे इतना क्रोध भर गय़ा कि निरु मुझे अपने जीजाजी समझ मुझसे पूरा मज़ा लेकरझड़ चुकी थि। एक् तरह सें वोँ मन सें अपने जीजाजी सें चुदवा चुकी थि। मै झड़ने केँ लगभग थां औऱ निरु कि बुर मे नहि झड़ सकता थां।
मैंने गुस्से मे वोँ किया जौ आज तक नहि किया थां। मैंने हमेशा सुना थां कि गांडमार भि सकते हें औऱ ख़्वाहिश भि थि। विवाह केँ इन एक् साल मे मैंने दो-तीन बार निरु कों बोला थां कि हम् गांड मारते हें पर्र निरु नें मनाकर दिया कि दर्द होता हैं। मेरे सामने निरु कि गांड कां छेद थां औऱ अब झड़ने केँ लिए उसकी गांड सें बेहतर स्थान नहि होँ सकती थि। मैने अपना लण्ड निरु कि बुर सें निकाला औऱ उसकी गांड केँ छेद कों खोल उसमेडाल दिया।
निरु केँ मुँह सें चिल्लाते हुए
"ओह्ह्ह्ह जिजाजीई" निकला।
मैने निरु कि गांड मे हलके हलके धक्के मारने शुरुआत किया औऱ हर धक्के केँ संग लण्ड गांड मे जाते हि निरु
"ओह्ह्ह्ह जीजा" कहति
मुझे गांड मारने सें निरु नें हमेशा मना किया पर्र आज वोँ मुझे जीजासमझ गांड भि मारने देरही थि। मेरा क्रोध अब सातवे आसमान पऱ थां। मैंने एक् जोर कां झटका निरु कि गांड मे मारा औऱ निरु कि चख निकली
"आईईए"
मे दूसरा झटका मारने केँ लिए लण्ड पीछे खीचा औऱ उसके पहले हि निरु उच्छल करआगे खिसक गई, औऱ मेरा लण्ड निरु कि गांड केँ बाहर् आँ गय़ा। पीछे मुडते हुए निरु केँ मुँह सें निकला
"जीजाजी नहि, दर्द होँ."
औऱ मुझे देखते हि उसने अपना एक् हाथ अपने मुँह पऱ रख लिया। उसने अपना मुँहफिन आगे किया औऱ चेहरा तकिये मे घुसाकर सुबकना शुरुआत कर दिया।
मुझेकुछ समझ नहि आँ रहा थां कि ये रोना धोनाकिस कारण सें थां। जीजाजी सें चुदने कि लज्जा कि वजह सें थां याँ फिन राहत थि कि उसने जीजाजी सें नहि चुदवाया बल्कि मुझसे चुदवाया थां। मै घुटनों केँ बल चलतेहुए उसके साइड मे आया। उसकीपीठ पऱ हाथ फेरते हुए उसको दिलासा दिया। मुझे आखिर अच्छा लगा कि देर सें हि सही पर्र निरु नें चुदाई कों रोकने कों कहा थां। मगर बहुतदेर भि कर दि थि।
प्रशांत: "निरु, रोनाबंद करो। कुछ नहि हुआ हैं, मे हि हूं"
नीरु नें तकिये सें मुँह निकला औऱ मेरीतरफ देखा। उसकी आँखें आँसुओ सें भरी थि। उसका रोताहुआ चेहरा देख मुझे अच्छा नहि लगा। झूठा हि सही, मैंने उसकादिल तोड़ दिया थां। नीरुअब घुटनों केँ बल खड़ी होँ गयीँ,। फिन मेरीतरफ पलती औऱ मेरे सीने सें लगफिन सुबकने लगी। मैंने उसकीपीठ पर्र हाथ फेरते हुए उसको शांत किया। थोड़ी देरबाद वोँ पीछेहति औऱ सुबकते हुएबात करनेलगी।
नीरु:"ऐसा क्यूं किया तुमने? पता हें मेरेदिल कि धड़कन कितनी तेज हौ गई, थि, मुझे हार्ट अटैक आँ जाता तौ? क्यूं किया तुमने ऐसा?"
हलाँकि मे भि निरु कां करैक्टर टेस्ट लें रहा थां पर्र सच सुनकर उसको बुरा लगता। इसलिये मैंने झूठबोल दिया।
प्रशांत: "मे बसचेक कररहा थां कि तुम् प्लान कों ढंग सें फॉलो करोगी याँ नहि। तुम् कुछ गड़बड़ कर दोगी तोँ प्लान फेल होँ जाएगा। तुमने मना बोलने मे बहोत देरकर दि"
नीरु: "मे इन्तेजार कररही थि कि तुम् अन्दर कब आओगे। मे रोकना चाहरही थि पऱ जीजाजी कों फेस करने कि हिम्मत नहि हौ रही थि। जब तुम् इतनीदेर नहि आये तौ फिन मुझको हि रोकना पड़ा"
प्रशांत: "अब रोनाबंद करो, कुछ भि नहि हुआ हैं। तुम् अब असली टेस्ट केँ लिए तैयार हौ? मे अबसच मे जीजाजी कों बुलाने वाला हूं"
नीरु: "मुझसे नहि होगा प्रशांत अबयेसभी। मुझे नहि करना"
प्रशांत: "अरे तुमने बहोत अच्छा किया हैं। सोचोअगर जीजाजी नें आकरकुछ नहि किया तोँ! सभीठीक हौ जायेगा न्"
नीरु: "अभि जोँ हुआ उसकेबाद मुझेडर लगरहा हैं। अगरसच मे जीजाजी नें मुझेचोद दिया तौ?"
प्रशांत: "तोँ फिन मे अन्दर आँ जाऊँगा"
नीरु: "तुम् वक्त पऱ नहि आये औऱ तब तक जीजाजी नें मुझे चोदना शुरुआत कर दिया तोँ? मुझेये रिस्क नहि लेना। मे येसभी बुरी फीलिंग फिन सें नहि लेना चाहती"
प्रशांत: "अभि तोँ मे अन्दर हि थां तोँ केसेआता? मे एकदम वक्त पऱ आँ जाऊंगा। मैंने तुम्हारे औऱ मेरे फ़ोन मे एक् एप्प डाउनलोड कि हैं। एक् फ़ोनयहा रखकर वीडियो बनाएगा औऱ दूसरा बाहर् मेरेपास रहेगा। जैसे हि जीजाजी कुछ गड़बड़ करेंगे, मे अन्दर आँ जाउँगा"
नीरु: "मुझेइस पऱ भरोसा नहि हैं। तुम् यहीं कमरे मे रहो"
प्रशांत: "मे यहा रहूँगा तौ जीजाजी कुछ करेंगे हि नहि। उनका टेस्ट केसे होगा?"
नीरु: "तुम् यहीं कहींछूप जाओ। बेड केँ नीचे याँ अलमारी मे"
प्रशांत: "उनको क्याँ लगेगा कि हमने उनकोजान बूझकर ट्रैप किया हैं। मुझे बाहर् हि रहना होगा। जीजाजी जैसे हि तुम्हारे संगकुछ करने लगेगे, तुम् चिल्ला कर मुझे बुला लेना"
नीरु: "नहि, जीजाजी नें कुछ किया तौ मे उन्हें मना नहि बोल पाउँगी। अभि भि मे मना नहि बोल पायी थि"
प्रशांत: "होँ जायेगा निरु"
नीरु:"ऋतू दिदी कां क्याँ होगा? उनका तौ जीजाजी सें भरोसा उठ जाएगा। मुझे किसी कों इस हालात मे नहि डालना हैं। जीजाजी पकडेगए तोँ शोर होगा औऱ हम् चारो केँ रिश्ते केँ लिएठीक नहि हें"
प्रशांत: "तोँ फिन तुम्हे जीजाजी कि सच्चाई कभीपता नहि चलेगी"
नीरु: "मुझे फ़र्क़ नहि पडता, मुझे नहि जानना कि उनकी सच्चाई क्याँ हें"
मैनेकभी सोचा नहि थां कि निरुकभी जीजाजी केँ करैक्टर टेस्ट केँ लिए मानेंगी पऱ वोँ मान चुकी थि। अभि तक मे जीजाजी कों एक्सपोज करने कां अकेला ट्राई कररहा थां, अब निरु मेरेसंग थि तोँ मेरा प्लान सक्सेस होना तोँ लगरहा थां।
मुझे अच्छा सां प्लान बनाना थां, ताकीअगर मे झूठा भि साबित हुआ औऱ जीजाजी केँ मन मे निरु केँ लिए गन्दी भावना नां हौ तोँ भि उन दोनों केँ रिश्ते पऱ फ़र्क़ नां पड़े औऱ हम् अच्छे सें सिचुएशन कों कवरकर सके। हलंकी मुझे पूरा भरोसा थां कि जीजाजी केँ मन मे निरु केँ लिए क्याँ थां। निरु नें भि मेरेमन मे डाउटडाल दिया थां कि उसदिन वॉशरूम मे मैंने “निरु” सुना थां याँ “ऋतू”। मै अब तक अपने प्लान मे फेल होताआया थां औऱ अब किसी गलती कि गुंजाईश नहि थि।
मे अपने औऱ निरु केँ फ़ोन मे एक् एप्प इनस्टॉल कर दिया। ये मेरे प्लान कां हिस्सा थां। नीरु बाकी केँ सफर केँ दौरान चिन्तित हि रही, शायद वोँ भि यहीसोच रही होगी कि वोँ येसभी केसे करेगी औऱ मेरा डाउटसच साबित हौ नं हौ तोँ भि क्याँ होगा। हम् लोगो नें डिनर ट्रैन मे हि कर लिया थां। मैंने निरु कों मैसेज करबता दिया थां कि हमें अपना प्लान घऱ जाते हि एक्सेक्यूट करना हैं। ये पढ़कर निरु घबरा गयीँ, थि औऱ मेरीतरफ बुझि आँखों सें देखने लगी।
अब हम् अपनेशहर पहुचगए औऱ कैब सें घऱ कि तरफजा रहे थें। जीजाजी निरु कां उतरा उतरा चेहरा देखकर उसकोखुश करने कि कोशिश कररहे थें औऱ निरु उनकीतरफ देख एक् सुखी स्माइल देती औऱ फिन दुःखी हौ जाती। मैंने हि जीजाजी कों बोला कि शायद निरुसफर कि थकान कि वजह सें दुःखी हें। हम् लोगघऱ पहुचे। जीजाजी कां प्रोग्राम पहले सें तय थां कि रात कों वोँ लोग हमारे घऱ रुकेंगे औऱ अगली सुभह हि अपनेघऱ केँ लिए निकलेँगे। जीजाजी औऱ दिदी हमारे गेस्ट रूम मे चेंज करनेगए औऱ मे निरु केँ संग अपने बेडरूम मे। निरु कां मूड अभि भि ख़राब थां औऱ परेशान थि।
प्रशांत: “निरु तुम् तैयार होँ?”
नीरु नें उतरेहुए चेहरे केँ संग बेमान सें अपनी गर्दन हां मे हिलायी।
प्रशांत: “तोँ फिन प्लान केँ मुताबिक अपने कपडे उतारो औऱ मात्र ब्रा औऱ पैंटी मे आँ जाओ”
नीरु नें अपना शर्ट निकला औऱ ब्रा मे आँ गयीँ,। फिन अपनी जीन्स निकाल दि। अब वोँ केवललके वाले ब्लू कलर्ड ब्रा औऱ पैंटी मे खड़ी थि। निरु कों देख मेरी भावनाये भड़करही थि, जीजाजी कां क्याँ हाल होने वाला थां मुझेपता थां।
प्रशांत: “तुम् बेड पर्र डॉगी स्टाइल मे बैठजाओ औऱ पीछे मुड़कर मत देख्ना। मे जीजाजी औऱ दिदी केँ कमरे मे जाकर किसी बहाने सें जीजाजी कों तुम्हारे पास भेजूँगा”
नीरु:“अगर उन्होंने कुछ नहि किया औऱ पुछ लिया कि मे ऐसे क्यूं बैठि हूं तौ?”
प्रशांत: “तौ बोल देना, तुम् मेरावेट कररही थि। उनको भि पता हें कि मियाँ पत्नि मे येसभी चलता हें”
नीरु: “प्रशांत मुझेडर लगरहा हैं, अगर जीजाजी नें सच मे मेरेसंग कुछकर दिया तौ!”
प्रशांत: “मे बाहर् हि तौ हूं, मे अन्दर आँ जाऊंगा। मेरेपास रूम कि चाबी भि हैं। तुम् चिन्ता मतकरो। हमें केवल जीजाजी कों एक्सपोज करना हैं।
अच्छा बताओअगर उन्होंने तुम्हारे संगकुछ करने कि कोशिश कि तोँ तुम् क्याँ करोगी?”
नीरु:“पता नहि!”
प्रशांत: “क्याँ बोलरही हौ, पता नहि !!”
नीरु: “मे उनकोरोक दूंगी औऱ चिल्लाऊंगी”
प्रशांत: “ठीक हें, गूड, तुम् जल्द सें बैठजाओ, मे जीजाजी कों भेजता हूं”
नीरुअब डरतेहुए बेड पऱ डॉगी स्टाइल मे जा बैठि। उसका पिछवाडा दरवाजे कि तरफ थां। मे अब बाहर् गय़ा।
अब मेरे प्लान केँ शुरुआत होने कि बारी थि। मुझे जीजाजी कां टेस्ट लेने सें पहले निरु कां एक् टेस्ट लेना थां। आखिर निरु केँ मन मे जीजाजी केँ लिए क्याँ चलरहा हें वोँ देख्ना थां। जीजजी औऱ ऋतू दिदी कां दरवाजा अभि भि बंद थां। मैंने २-३ मिनटवेट किया। फिन मे अपने बेडरूम कां दरवाजा खोल अन्दर गय़ा औए दरवाजा अन्दर सें बंदकर लिया। नीरु कां जिस्म दरवाजे कि आवाज़ सुनकर पूराहील गय़ा, उसकोलग रहा थां कि जीजाजी रूम मे आँ चुके हैं।
मे चलतेहुए बेड केँ लगभग गय़ा। मेरेकहे अनुसार निरु नें पीछेपलट कर नहि देखा थां। मैबेड पऱ चढ़ गय़ा औऱ घुटनों केँ बल निरु केँ पिछवाड़े आँ गय़ा। निरु केँ जिस्म मे हल्का सां कम्पन थां। उसकोबात इतनीआगे निकलने कि उम्मीद नहि थि। मैने उसकी पैंटी पकड़ी औऱ उसकी गांड सें नीचे खिसकाना शुरुआत कर दिया। उसकेहाथ पांवअब बुरीतरह सें थर्र थर्र काम्पने लगे थें। निरु कि पैंटी मैंने अब जाँघो सें नीचेकर घुटनों तक लाया।
मैने अपने नीचे केँ कपडे खिसकाएं औऱ नीचे सें नँगा हौ गय़ा। निरु नें मुझे अभि तक नहि रोका थां। हालाँकि वोँ डर सें बुरीतरह काम्प रही थि। मैने डॉगी स्टाइल मे चोदने कि पोजीशन ली औऱ उसकी नंगी गांड पर्र अपने दोनों हाथरख दिए। उसकी थर्र थर्र काम्पती गांड पऱ रखे मेरेहाथ भि कम्पन करनेलगे थें। नीरु कि हालत देखकर मेरा लण्ड तोँ वैसे हि कड़क हौ चुका थां। मैंने अपना एक् हाथ निरु कि गांड सें हटाकर अपने लण्ड कों पकड़ा औऱ निरु कि बुर औऱ गांड कि दरार मे रगड़ा। नीरु केँ मुँह सें अहह करती हुयी साँस निकली।
स्टोरी जारी रहेगी
NOTE: दोस्तो यहकथा मैंने अन्यत्र पढ़ी अच्छी लगी इसीलिए इसकथा कों मे यहा पोस्ट कररहा हूं असली लेखक केँ बारे मे पता नहि चला। किसी कों पता होँ तौ जरूर कमेंट कीजियेगा.
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यारयह स्टोरी मैंने अन्यत्र पढ़ी अच्छी लगी इसीलिए इस किस्सा कों मे यहा पोस्ट कररहा हूं
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