शक कां अंजाम – New Episode
UPDATE 21
मैंने अपना लण्ड निरु कि बुर केँ छेद पऱ अडा लिया। मुझे उम्मीद थि कि निरुअब पलटकर मुझेरोक देगी याँ चिल्लायेगी पऱ ऐसा नहि हुआ। मैने अपना लण्ड निरु कि बुर मे थोडा घुसाया औऱ निरु केँ मुँह सें एक् तिखीअहह निकली औऱ फिन मैंने अपना लण्ड धीरे-धीरे धीरे-धीरे पूरा निरु कि बुर मे उतारकर उसकी गांड कों दोनों हाथों सें थाम लिया। नीरुगाय कि तरह चुपचाप बैठिरही। मैंने अपना लण्ड एक् बार थोडा बाहर् खींचफिन तेजी सें अन्दर घुसा दिया। निरु नें मुँहखोल कर एक् लम्बी अहह निकाली। निरु कि गांडऐसे कम्पन कररही थि जैसेकोई हल्का सां भूकम्प आँ गय़ा होँ।
मैनेअब धक्के मारना शुरुआत किया औऱ निरुतेज सांन्सें मारते हुएडरी हुयी सिसकियाँ भरनेलगी औऱ उसके मुँह सें “जीजाजी” निकला औऱ उसके२ सेकंड केँ बाद“ओह नो” निकला। जैसे जैसे मेरा लण्ड निरु कि बुर मे अन्दर बाहर् हौ रहा थां मेरेदिल पर्र चाक़ू चलरहा थां। मैसमझ नहि पारहा थां कि निरु नें अब तक मुझे रोका क्यूं नहि।
वोँ मुँह सें “जीजाजी ओहनो”बोल रही हें पर्र उसकाबदन उसकी आवाज़ कां संग देकरकोई विरोध नहि कररहा थां। अगर मे ये एक्सपेरिमेंट नहि करता तौ शायद अभि जीजाजी निरु कों चोदरहे होते औऱ निरु उनको चोदने भि देती। निरु केँ लिए तोँ अभि यही सच्चाई थि कि वोँ अपने जीजा सें चुदवा रही थि औऱ वोँ भि बिना विरोध केँ।
मुझे हि डरलगरहा थां क्युकी मे बिना प्रोटेक्शन केँ निरु कों चोदरहा थां। बाद मे जब उसकोपता चलेगा कि मे उसको बिना प्रोटेक्शन केँ चोदरहा थां तौ मुझे पऱ हि क्रोध करेगी। मुझे निरु बिना प्रोटेक्शन केँ १५ सेकंड सें जायदा चोदने नहि देति, मगर फिलहाल वोँ मुझे जीजाजी समझकर २-३ मिनट सें बिना प्रोटेक्शन चोदने देरही थि। नीरु कां दिलरो रहा थां याँ नहि पर्र मेरा मेरादिल रोरहा थां। निरु नें मेरादिल तोड़ दिया। उसको अपने जीजाजी सें चुदवाते हुएजरा भि ऑब्जेक्शन नहि थां।
क्याँ निरु अपने जीजा सें चुदवाने कों मेंटली तयारी थि? शायद मेरी हि गलती हैं। मैंने उसके जीजाजी पऱ शक़कर उसको मेंटली रेडीकर दिया थां। ट्रेन मे भि वोँ जिसतरह सें जीजाजी कों लेकर गंदे मजाककर रही थि हौ सकता हें उसको मैंने इनसभी कामो केँ लिए स्वयं हि रेडीकर दिया थां। मेरा दिमाग़ ख़राब होँ गय़ा औऱ मैंने जोरजोर केँ झटकेमार निरु कों चोदना शुरुआत कर दिया।
निरु कि भि आहेंअब तेज सिसकियों मे बदल गई, औऱ अब वोँ “जीजाजी… धीरे-धीरे” बोलेजा रही थि। मेरेदिल मे औऱ आगलग गयीँ,। वोँ “जीजाजी मतकरो” भि कह सकती थि। मगर उसने धीरे-धीरे करने कों कहा, मतलब वोँ चुदवाने कों सजधजकर हें अगर जीजाजी उसको धीरे-धीरे धीरे-धीरे प्रेम सें चोदे तौ।
अपनी बुर मे पड़ते झटके सें निरुअब बेहाल होँ गयीँ, औऱ मुँह खोलते हुए एक् बड़ीअहह भरी औऱ
“ओहमाय गॉड जीजाजी… आआह्ह्ह … ओह्ह्ह्हह जीजाजी … स्लो … उम्म्म्म … आईए … जीजाजी … आआह्ह … धीरे-धीरे” बोलते हुए अपनासर ऊपरछत कि तरफउठा येसभी बोलति रही। इन सभीतेज झटको औऱ निरु कि सिसकिया सुनकर मेरी गोटियो मे जमा मेराजूस अब लण्ड कि नलि मे इकट्ठा होँ गय़ा थां। अब मेराजूस मेरे लण्ड सें बाहर् आने कों उतारू थां।
मैने अपनेबदन कों टाइटकर लिया औऱ अपनेजूस कों छुट्ने सें रोकेरखा। मगरअब मेरेलिए ये मुश्किल थां। मैंने अपना लण्ड निरु कि बुर सें निकाल दिया। नीरु कि तेजतेज आती सिसकियों कां म्यूज़िक अब एकदमबंद हौ गय़ा थां। उसकासर जोँ छत कि तरफ खड़ा थां अब उसकी गर्दन झुक गयीँ, औऱ वोँ नीचे पड़े पिलो कों देखरही थि। मुझेसमझ नहि आया कि क्याँ करू?
निरु कों सभी सच्चाई बतादु याँ थोडा इन्तेजार करू कि अब वोँ शायद पीछेमुड कर मुझेरोक दे। अपना लण्ड मे फिन अन्दर डालना नहि चाहरहा थां क्यूं कि मे झड़ जाता। नीरुकुछ सेकण्ड्स ऐसे गर्दन झुकाये डॉगी स्टाइल मे बैठिरही। मैंने हि अब अपना एक् हाथ उसकी गांड सें हटाया औऱ अपनी उंगलिया उसकी बुर औऱ गांड केँ छेद केँ बाहर् रगडना शुरुआत किया। जैसे हि मेरी उंगलियो नें निरु केँ छेद कों रगडा तौ निरु कि झुकि हुयी गर्दन थोड़ी उठी औऱ अब वोँ फिन सामने देखने लगी औऱ एक् हलकीअहह निकली।
जैसे जैसे मे निरु कि बुर औऱ गांड केँ छेद कों रगडरहा थां मैंने देखा उसकी गांड औऱ जाँघे काम्प रही थि, जैसेबरफ केँ पानी मे खड़ाकर दिया होँ औऱ उसकी ठण्ड सें कम्पकपी छूटरही हौ। मैनेअब अपनी मिडिल फिंगर निरु कि बुर मे थोड़ी घुसेड दि। निरु कि बुर कां तापमान एकदम गर्म थां।
अपनी ऊँगली वही रखतेहुए मैंने अब अपनाथंब निरु कि गांड मे घुसेड दिया। नीरु केँ दोनों छेद जैसे हि मेरी उंगलियो सें बंदहुए तौ उसकी एक् कराह निकली। मैंने अब अपनी दोनों उंगलिया उसकेछेद मे औऱ अन्दर उतार दि औऱ अन्दर बाहर् करनेलगा।
निरु केँ मुँह सें एक् बारफिन रहरहकर अहहअहह निकलने लगी। मेरा लण्ड कि नलि मे जमा पानीअब शांत होँ चुका थां पऱ निरु कि सिसकियों सें मेरा लण्ड अभि भि कड़क थां। मुझे निरु पर्र क्रोध भि आँ रहा थां। वोँ मेरी उंगलियो सें चुदकर सिसकिया भरमजे लें रही थि। मैने अपनी उंगलिया उसके दोनों छेद सें बाहर् निकली औऱ निरु कि गर्दन एक् बारफिन झुक गई, औऱ आहेंबंद हुयी। मैंने फिन पोजीशन लेकर अपना लण्ड उसके दोनों छेद पर्र रगडा।
निरु केँ मुँह सें एक् बारफिन रहरहकर अहहअहह निकलने लगी। मेरा लण्ड कि नलि मे जमा पानीअब शांत होँ चुका थां पर्र निरु कि सिसकियों सें मेरा लण्ड अभि भि कड़क थां। मुझे निरु पर्र क्रोध भि आँ रहा थां। वोँ मेरी उंगलियो सें चुदकर सिसकिया भरमजे लेँ रही थि। मैने अपनी उंगलिया उसके दोनों छेद सें बाहर् निकली औऱ निरु कि गर्दन एक् बारफिन झुक गयीँ, औऱ आहेंबंद हुयी। मैंने फिन पोजीशन लेकर अपना लण्ड उसके दोनों छेद पर्र रगडा।
नीरु मुँहबंद किये हम्म्म हम्म्म कररही थि। मैंने अपना लण्ड एक् बारफिन निरु केँ बुर मे उतारकर धक्के मारना शुरुआत किया औऱ निरुफिन सर उठाये सिसकिया भरनेलगी "जीजा जी.ओहनो" कहना शुरुआत कर दिया। थोड़ी देर चोदने केँ बाद हि मुझेलगा कि निरुअब झड़ने वाली हैं। उसकी सिसकिया अब बहोत घरी औऱ लगातार आँ रही थि। बीचबीच मे वोँ
"जीजाजी। ओह.नो"
जरूरबोल रही थि।
नीरु कां बदनअब एकदम कड़ा हौ चुका थां। निरु केँ मुँह सें जानी पहचानी
"हूउउउन। हुउउउउन। ऊऊह्ह्ह ह्हुउउ उउउ। ीीेहठ"
कि आवाज़ आँ रही थि। इसीतरह आवाजें निकालते हुए निरुअब झड़ चुकी थि औऱ थोडा शांत हौ गई, थि। नीरु कों झड़ता देख मेरे लण्ड कां पानी बाहर् निकलने कों उफ़नने लगा थां। मन मे इतना क्रोध भर गय़ा कि निरु मुझे अपने जीजाजी समझ मुझसे पूरा मज़ा लेकरझड़ चुकी थि। एक् तरह सें वोँ मन सें अपने जीजाजी सें चुदवा चुकी थि। मै झड़ने केँ लगभग थां औऱ निरु कि बुर मे नहि झड़ सकता थां।
मैंने गुस्से मे वोँ किया जोँ आज तक नहि किया थां। मैंने हमेशा सुना थां कि गांडमार भि सकते हें औऱ ख़्वाहिश भि थि। विवाह केँ इन एक् साल मे मैंने दो-तीन बार निरु कों बोला थां कि हम् गांड मारते हें पऱ निरु नें मनाकर दिया कि दर्द होता हैं। मेरे सामने निरु कि गांड कां छेद थां औऱ अब झड़ने केँ लिए उसकी गांड सें बेहतर स्थान नहि होँ सकती थि। मैने अपना लण्ड निरु कि बुर सें निकाला औऱ उसकी गांड केँ छेद कों खोल उसमेडाल दिया।
निरु केँ मुँह सें चिल्लाते हुए
"ओह्ह्ह्ह जिजाजीई" निकला।
मैने निरु कि गांड मे हलके हलके धक्के मारने शुरुआत किया औऱ हर धक्के केँ संग लण्ड गांड मे जाते हि निरु
"ओह्ह्ह्ह जीजा" कहति
मुझे गांड मारने सें निरु नें हमेशा मना किया पऱ आज वोँ मुझे जीजासमझ गांड भि मारने देरही थि। मेरा क्रोध अब सातवे आसमान पर्र थां। मैंने एक् जोर कां झटका निरु कि गांड मे मारा औऱ निरु कि चख निकली
"आईईए"
मे दूसरा झटका मारने केँ लिए लण्ड पीछे खीचा औऱ उसके पहले हि निरु उच्छल करआगे खिसक गई, औऱ मेरा लण्ड निरु कि गांड केँ बाहर् आँ गय़ा। पीछे मुडते हुए निरु केँ मुँह सें निकला
"जीजाजी नहि, दर्द हौ."
औऱ मुझे देखते हि उसने अपना एक् हाथ अपने मुँह पऱ रख लिया। उसने अपना मुँहफिन आगे किया औऱ चेहरा तकिये मे घुसाकर सुबकना शुरुआत कर दिया।
मुझेकुछ समझ नहि आँ रहा थां कि ये रोना धोनाकिस कारण सें थां। जीजाजी सें चुदने कि लज्जा कि वजह सें थां याँ फिन राहत थि कि उसने जीजाजी सें नहि चुदवाया बल्कि मुझसे चुदवाया थां। मै घुटनों केँ बल चलतेहुए उसके साइड मे आया। उसकीपीठ पर्र हाथ फेरते हुए उसको दिलासा दिया। मुझे आखिर अच्छा लगा कि देर सें हि सही पऱ निरु नें चुदाई कों रोकने कों कहा थां। मगर बहुतदेर भि कर दि थि।
प्रशांत: "निरु, रोनाबंद करो। कुछ नहि हुआ हैं, मे हि हूं"
नीरु नें तकिये सें मुँह निकला औऱ मेरीतरफ देखा। उसकी आँखें आँसुओ सें भरी थि। उसका रोताहुआ चेहरा देख मुझे अच्छा नहि लगा। झूठा हि सही, मैंने उसकादिल तोड़ दिया थां। नीरुअब घुटनों केँ बल खड़ी हौ गई,। फिन मेरीतरफ पलती औऱ मेरे सीने सें लगफिन सुबकने लगी। मैंने उसकीपीठ पऱ हाथ फेरते हुए उसको शांत किया। थोड़ी देरबाद वोँ पीछेहति औऱ सुबकते हुएबात करनेलगी।
नीरु:"ऐसा क्यूं किया तुमने? पता हें मेरेदिल कि धड़कन कितनी तेज हौ गई, थि, मुझे हार्ट अटैक आँ जाता तौ? क्यूं किया तुमने ऐसा?"
हलाँकि मे भि निरु कां करैक्टर टेस्ट लेँ रहा थां पर्र सच सुनकर उसको बुरा लगता। इसलिये मैंने झूठबोल दिया।
प्रशांत: "मे बसचेक कररहा थां कि तुम् प्लान कों ढंग सें फॉलो करोगी याँ नहि। तुम् कुछ गड़बड़ कर दोगी तौ प्लान फेल होँ जाएगा। तुमने मना बोलने मे बहोत देरकर दि"
नीरु: "मे इन्तेजार कररही थि कि तुम् अन्दर कब आओगे। मे रोकना चाहरही थि पऱ जीजाजी कों फेस करने कि हिम्मत नहि होँ रही थि। जब तुम् इतनीदेर नहि आये तोँ फिन मुझको हि रोकना पड़ा"
प्रशांत: "अब रोनाबंद करो, कुछ भि नहि हुआ हैं। तुम् अब असली टेस्ट केँ लिए तैयार हौ? मे अबसच मे जीजाजी कों बुलाने वाला हूं"
नीरु: "मुझसे नहि होगा प्रशांत अबयेसभी। मुझे नहि करना"
प्रशांत: "अरे तुमने बहोत अच्छा किया हैं। सोचोअगर जीजाजी नें आकरकुछ नहि किया तौ! सभीठीक होँ जायेगा नं"
नीरु: "अभि जोँ हुआ उसकेबाद मुझेडर लगरहा हैं। अगरसच मे जीजाजी नें मुझेचोद दिया तौ?"
प्रशांत: "तोँ फिन मे अन्दर आँ जाऊँगा"
नीरु: "तुम् वक्त पर्र नहि आये औऱ तब तक जीजाजी नें मुझे चोदना शुरुआत कर दिया तोँ? मुझेये रिस्क नहि लेना। मे येसभी बुरी फीलिंग फिन सें नहि लेना चाहती"
प्रशांत: "अभि तोँ मे अन्दर हि थां तोँ केसेआता? मे एकदम वक्त पऱ आँ जाऊंगा। मैंने तुम्हारे औऱ मेरे फ़ोन मे एक् एप्प डाउनलोड कि हैं। एक् फ़ोनयहा रखकर वीडियो बनाएगा औऱ दूसरा बाहर् मेरेपास रहेगा। जैसे हि जीजाजी कुछ गड़बड़ करेंगे, मे अन्दर आँ जाउँगा"
नीरु: "मुझेइस पऱ भरोसा नहि हैं। तुम् यहीं कमरे मे रहो"
प्रशांत: "मे यहा रहूँगा तौ जीजाजी कुछ करेंगे हि नहि। उनका टेस्ट केसे होगा?"
नीरु: "तुम् यहीं कहींछूप जाओ। बेड केँ नीचे याँ अलमारी मे"
प्रशांत: "उनको क्याँ लगेगा कि हमने उनकोजान बूझकर ट्रैप किया हैं। मुझे बाहर् हि रहना होगा। जीजाजी जैसे हि तुम्हारे संगकुछ करने लगेगे, तुम् चिल्ला कर मुझे बुला लेना"
नीरु: "नहि, जीजाजी नें कुछ किया तोँ मे उन्हें मना नहि बोल पाउँगी। अभि भि मे मना नहि बोल पायी थि"
प्रशांत: "हौ जायेगा निरु"
नीरु:"ऋतू दिदी कां क्याँ होगा? उनका तोँ जीजाजी सें भरोसा उठ जाएगा। मुझे किसी कों इस हालात मे नहि डालना हैं। जीजाजी पकडेगए तोँ शोर होगा औऱ हम् चारो केँ रिश्ते केँ लिएठीक नहि हें"
प्रशांत: "तौ फिन तुम्हे जीजाजी कि सच्चाई कभीपता नहि चलेगी"
नीरु: "मुझे फ़र्क़ नहि पडता, मुझे नहि जानना कि उनकी सच्चाई क्याँ हें"
प्रशांत: "मगर मुझे जानना हैं। मे अब औऱ उस व्यक्ति कों तुम्हे गलत नीयत सें छूने नहि दे सकता"
नीरु: "जीजाजी कों आनेदो, उन्हें मेरेसंग जौ करना हें उन्हें करनेदो। मे कुछ नहि कहूँगी औऱ तुम् भि कुछ नहि कहोगे। मुझे देख्ना हें कि मुझे चोदने केँ बाद उनकेमन मे कोई रिगरेट होता हें कि नहि। उनकेमन मे ज़िन्दगी भर जोँ शर्मिन्दगी रहेगि, वोहि उनकेलिए सबसे बड़ीसजा होगी"
प्रशांत: "ये क्याँ बोलरही होँ? मे उनको तुम्हे चोदते हुए केवल देखते हि रहु?"
नीरु:"हॉ। हम् दोनों तौ इस सदमे कों भूलकर आगेबढ़ भि जायेंगे पर्र ऋतू दिदी कां क्याँ होगा? उनको तोँ जीजाजी केँ संग हि रहना होगा। वोँ तोँ मम्मी भि नहि बन सकती, उनका तौ केवल जीजाजी हि आसरा हैं। उनका तौ घऱटूट जाएग। केसे भि होँ, जीजाजी उनके पति हें"
प्रशांत: "मे इसकेलिए तैयार नहि हूं। मे तुम्हे जीजाजी केँ संग चुदते हुए नहि देख सकता। कैसीबात कररही हौ? कोई पति अपनी पत्नि कों किसी केँ संग चुदते हुए चुपचाप देखते रहेबस?"
किस्सा जारी रहेगी
NOTE: दोस्तो यहकथा मैंने अन्यत्र पढ़ी अच्छी लगी इसीलिए इसकथा कों मे यहा पोस्ट कररहा हूं असली लेखक केँ बारे मे पता नहि चला। किसी कों पता हौ तौ जरूर कमेंट कीजियेगा.
शक कां अंजाम – New Episode
UPDATE 22
नीरु: "तुम् भि अज़ीब होँ। मुझेदो बार नँगा जीजाजी केँ सामने करीब छोड़कर चलेगए थें। भूलगए?"
प्रशांत: "नंगारख कर जाने मे औऱ चोदने मे फ़र्क़ हें"
नीरु: "तोँ फिनये एक्सपेरिमेंट हि मतकरो। जौ चलरहा हें उसको चलनेदो"
प्रशांत: "मे चाहता हूं कि जीजाजी गलत हें तोँ ज़िन्दगी भर तुमसे दूर हि रहो"
नीरु: "तोँ ठीक हें, मात्र तुम्हारे लिए मे एक् बारफिन करने कों तैयार हूं। तुम् अन्दर आँ जानां पऱ चिल्ला करऋतू दिदी कों मतपता लगने देना कि जीजाजी नें क्याँ हरकत कि हैं। हम् जीजाजी कों समझा देंगे। मुझेऋतू दिदी कां घऱ नहि तोडना हैं। मे ज़िन्दगी भर जीजाजी सें फिनदूर हि रहूँगी औऱ बात भि नहि करूंगी"
प्रशांत: "ठीक हें"
नीरु:"मगर अभि नहि, सुभह करेंगे। अभि मेरी सारी एनर्जी खत्म होँ चुकी हें"
मै औऱ निरुअब सोगए औऱ मे थोड़ी देरसो नहि पाया क्यूं कि मे अभि भि निरु कों समझ नहि पाया थां। हालाँकि उसकी चुदाई मैंने हि कि थि पर्र उसनेमन मे तोँ जीजाजी सें हि चुदवाया थां। अगली सुभह हम् दोनों जल्दउठ गए थें। उसदिन हम् दोनों कों दफ़्तर भि जानां थां पर्र उसके पहले जीजाजी कां टेस्ट लेना थां। जीजाजी भि उठ चुके थें क्यूं कि उनको भि अपनेघऱ केँ लिए निकलना थां।
नीरु: "तुम् फिनसोच लो प्रशांत। तुम्हे ये एक्सपेरिमेंट करना हैं। बहोत बड़ी गड़बड़ भि हौ सकती हैं। तुमने पहले भि जोँ प्लान किये थें वोँ बिगडगए थें। कुछ बुरेसच बाहर् नाँ हि आये तोँ अच्छा हें। "
प्रशांत: "तुम् क्याँ चाहती हौ? एक् बुरे इंसान कां सच हमेंपता न् चले?"
नीरु:"पता चले पऱ कोई बतंगड नाँ बने, कोई बवाल खड़ा न् हौ बस"
प्रशांत: "तौ फिन क्याँ करे कि सच भि पतालगे औऱ बवाल भि न् होँ"
नीरु: "तुम् अभि वाक केँ लिए बाहर् चलेजाओ। मे यहा पर्र कल कि तरह पोजीशन लेँ लुंगी। जीजाजी कों अन्दर आनेदो। देखति हूं कि वोँ क्याँ करते हैं। मुझे क्रोध आया तोँ मे उनको अच्छे सें हैंडल कर लुंगी। तुम् अनजान बने रहना कि उन्होंने क्याँ किया हें औऱ दिदी कों भि नहि बतायेंगे। येबात मेरे औऱ जीजाजी केँ बीच हि रहेगी। तुम्हे येसभी पता हें, इसबात कां जीजाजी कों पता नहि चलेगा"
प्रशांत: "कलरात तोँ तुम् रोक नहि पायी, अभि केसे रोकोगी?"
नीरु:"अब मे सजधजकर हूं, मे कर लुंगी। तुम् रूम मे मत आनां। मेरेसंग गलत होगा तौ मे हि सम्भालूंगी"
प्रशांत: "मे तुम्हरे फ़ोन पर्र वीडियो चालू करकेजा रहा हूं, मे बाहर् सें अपने फ़ोन पर्र देखते रहुंगा। जरुरत हुयी तोँ मे अन्दर आँ जाऊँगा"
नीरु:"ठीक हें, तुम् वीडियो पऱ देख लेना। पऱ जीजाजी कों हैंडल मे हि करुँगी। मे कमजोर नहि हूं"
औऱ प्लान केँ मुताबिक मैंने निरु कों कल कि तरह अन्दर केँ कपड़ो मे डॉगी स्टाइल मे बेड पऱ बैठा दिया। निरु कां फ़ोन मैंने अपनेबेड केँ हेड रेस्ट पर्र खड़ाकर दिया थां ताकी वीडियो शूटिंग होतीरहे। जीजजी औऱ दिदी घऱ जाने केँ लिए तैयार हौ रहे थें। मे उनको बोलकर बाहर् चला गय़ा कि जीजाजी कों निरु नें बुलाया हें औऱ मे आधे घन्टे केँ लिएवाक करनेजा रहा हूं।
बाहर् गार्डन मे आकर मैंने अपने फ़ोन पर्र एप्प चालुकर वीडियो देख्ना शुरुआत किया। निरु पलंग पऱ डॉगी स्टाइल मे बैठि थि। आज केँ दिन जीजाजी कि सच्चाई बाहर् आने वाली थि। मै इन्तेजार कररहा थां कि कब जीजाजी रूम मे आए। निरु भि तकलीफ़ कि मुद्रा मे थि कि अब क्याँ होने वाला थां। तभी एक् धडाम कि आवाज़ आयी। उस आवाज़ सें निरु पूराहील गयीँ, औऱ फिन एक् औऱ हलकी धडाम कि आवाज़ आई औऱ मेरे फ़ोन कि स्क्रीन पर्र अँधेरा छा गय़ा। आवाज़ आनी भि बंद होँ गायी। मे अपने फ़ोन कों थप्पड़ मारने लगा जैसे खराबी मेरे फ़ोन मे हि होँ।
मैने२-३ मिनट इन्तेजार किया कि वोँ वीडियो फिन चालू होगा पर्र वोँ नहि हुआ। मेरीदिल कि धड़कने बढ़ने लगी। कही निरु मुसीबत मे तौ नहि हैं। हालाँकि वीडियो मे अब तक जीजाजी आते दीखे नहि थें। मैने डरते डरते निरु कों फ़ोन लगया, हालाँकि येगलत वक्त होँ सकता थां। मगर निरु कां फ़ोनलग हि नहि रहा थां। मुझे औऱ टेंशन होनेलगी।
मैनेफिन अपनेघऱ कि तरफबढ़ चला। मुझे नहि पतारूम मे जीजाजी आये होंगे याँ नहि, उन्होंने कुछ किया भि होगा याँ नहि। लिफ़्ट भि उसदिन कुछ अधिक हि देरी सें आयी। ५ मिनटबाद मे अपनेघऱ केँ दरवाजे केँ बाहर् थां।
चाबि तौ मे लेकर हि गय़ा थां तोँ मैंने डरतेहुए दरवाजा खोला। दरवाजे केँ पास हि जीजाजी-दिदी केँ बैगपैक पड़े थें। उनमे सें एक् बैग नीचे गिरा पड़ा थां। पास मे सोफ़े पर्र ऋतू दिदी डरेहुए बैठे थें। मैंने एकदम नार्मल रहने कि एक्टिंग कि। मैने वोँ बैग सीधा किया औऱ ऋतू दिदी कों पूछा कि जीजाजी कहा हैं?
ऋतू दिदी कि आँखों मे आंसू आँ गए। मे उनकेपास पहुंच। मुझेडर थां कि कहीं जीजाजी नें निरु कों चोदना चालू तोँ नहि कर दिया औऱ ऋतू दिदी नें देख लिया हौ। मैनेऋतू दिदी सें रोने कां कारण पूछा औऱ जीजाजी कहां हें ये भि पुछा। ऋतू दिदी नें जौ कहाउस सें मेरेहोश जरूरउड़ गए। ऋतू दिदी नें जीजाजी कों येबता दिया थां कि उसदिन मेरे औऱ ऋतू दिदी केँ बीच चुदाई हुयी थि। मैने अपना माथापीट लिया। इस तरह केँ सीक्रेट कौन सि महिला अपने पति कों बताती हें?
फिन उन्होंने सुबकते हुए बताया कि जीजाजी मेरे बेडरूम मे निरु सें बात करनेगए हें। मेरे तौ हाथ पांव कॉंम्प उठे। एक् तरफये डर थां कि जीजाजी अब मेरीपोल निरु केँ सामने खोल डेंग। निरु तोँ मुझे तलाक देकरअलग हौ जाएगी। इतनी हसीन पत्नि मुझे मिली हें, इतनी ख़ुशी सें रहरहे थें तोँ एक् गलतीअब भारी पड़ने वाली थि। दूसरी तरफये डर भि थां कि निरु केँ फ़ोन कों क्याँ हुआ होगा औऱ वोँ आवाज़े क्याँ थि।
जीजाजी औऱ निरु कहीं मेरी औऱ ऋतू दिदी कि चुदाई कां बदला लेने केँ लिएआपस मे हि चुदाई नं कर लें। कहां तौ मे जीजाजी केँ करैक्टर पर्र शक़कर केँ निरु कों बहलारहा थां औऱ अब मेरा हि करैक्टर खुलकर निरु केँ सामने आने वाला थां। मैघऱ पऱ भाग्ता हुआआया थां कि मे जीजाजी कों निरु केँ संगगलत हरकत करतेहुए पकडूँगा पर्र अब तोँ मेरी हि हरकत पकड़ी गई, थि औऱ मेरी हिम्मत नहि थि कि उससमय मे अपना बेडरूम खोलकर उन दोनों कां सामना भि कर पाऊं।
मै वही नजरे झुकाये बैठारहा। हाथ पांव अभि भि कॉंम्प रहे थें औऱ मन मे अलगअलग तरह केँ बुरे विचार आँ रहे थें। ऋतू दिदी केँ सुबकने सें मेरे बेडरूम सें आती आवाजें भि सुनाई नहि देरही थि। मेरेमन मे कलरात कि निरु कि आवाजें गूँजरही थि
"जीजाजी ओह न्। जीजाजी धीरे-धीरे। जीजाजी दर्द होँ रहा हैं। वगैरह"
ईसीतरह चिन्ता मे ५ मिनिट्स, फिन१० मिनिट्स हौ चुके थें। नां तौ बेडरूम कां दरवाजा खुला औऱ नाँ हि अन्दर सें कोई आवाज़ आई औऱ नं हि मेरीकुछ करने कि हिम्मत थि। मै स्वयं सोचने लगा कि जब अन्दर सें निरु औऱ जीजाजी बाहर् आयेंगे औऱ मुझसे प्रश्न पुछेंगे तोँ मे क्याँ जवाब दूंगा? क्याँ मे सारा ईल्जाम ऋतू दिदी पऱ डालदू? मगर मे भि तोँ भागीदार थां।
मैऋतू दिदी सें हि पुछ लीया कि क्याँ जीजाजी गुस्से मे थें। ऋतू दिदी नें एक् बारफिन रोता मुँहबना कर अपने आंसू पोछे औऱ सुबकने लगी। मेरी तोँ उनके कंधे पऱ हाथरख दिलासा देने कि भि हिम्मत नहि हुयी। मे अब अपने जवाब रेडी करनेलगा कि मे क्याँ बोलुंगा। याँ फिन मे स्वयं हि जीजाजी पर्र चढ़ जाऊँगा कि वोँ भि तौ निरु कां नाम लेकरऋतू दिदी कों चोदरहे थें।
तभी बेडरूम कां दरवाजा खुला औऱ जीजाजी बाहर् आए। मे अपनी स्थान खड़ा हौ गय़ा कि अबकुछ सुनने कों मिलेंगा। जीजाजी नें बोला"ऋतू चलो" औऱ ऋतू दिदी उठकर बैग्स केँ पासआए। वोँ दोनों दरवाजे केँ बाहर् चलेगए औऱ मैंने दरवाजे तक जाकर देखा वोँ लिफ्ट मे थें। मैंने दरवाजा बंद किया औऱ अब मुझे निरु कां सामना करना थां।
मै डरतेहुए बेडरूम केँ अन्दर पहुँचा। निरु अलमारी केँ सामने खड़ी थि औऱ मात्र पैंटी पहने थि। उसकेहाथ मे ब्रा थि। ये ब्रा औऱ पैंटी कलरात वाला नहि थि। मेरादिल धक् सें रह गय़ा, क्याँ सच मे मेरे औऱ ऋतू दिदी केँ बारे मे सुनकर निरु कां दिलटूट गय़ा होगा औऱ उसने जीजाजी सें चुदवा लिया होगा? मेरे अन्दर आते हि निरु नें मेरीतरफ देखा औऱ अपनेआँख कों पोंछी। क्याँ वोँ रोरही थि? अपनी आँखें पोछते हि वोँ मेरीतरफ देख मुस्कुरायी तौ मुझे बहोत राहत मिली कि वोँ मुझसे नाराज नहि थि। मै उसकीतरफ बढा औऱ उसके नजदीक आयातब तक उसने ब्रापहन लिया थां। मैंने अब थोडा डरतेहुए निरु सें बात कि।
प्रशांत: "निरु तुम् ठीक होँ!"
नीरु: "नहि, जीजाजी औऱ दिदी जारहे हें तौ थोडा इमोशनल हौ गई,। "
प्रशांत: "जीजाजी नें कुछकहा तुमसे। औऱ वोँ फ़ोन पऱ वीडियो बंद हौ गय़ा। जीजा नें कुछ किया."
नीरु: "बाहर् जोर सें कुछ गिरने कि आवाज़ आई औऱ डर केँ मारे हिलने सें वोँ मेरा फ़ोनबेड सें नीचेगिर गय़ा औऱ बंद होँ गय़ा। मे बहोत डर गयीँ, औऱ अपना गाउनपहन लिया। सोर्री, मे वोँ एक्सपेरिमेंट नहि कर पायी, मुझे बहोत डरलगरहा थां"
प्रशांत: "तुम् रो क्यूं रही थि, जीजाजी कुछबोल रहे थें?"
नीरु: "जीजाजी बहोत इमोशनल लगरहे थें तोँ मे भि उनकोदेख इमोशनल हौ गई,। इतना इमोशनल तोँ वोँ मेरी विवाह केँ वक्त पऱ विदाई मे हुए थें। फिनकुछ अज़ीब सि बातें कररहे थें, कि मे खुशहु याँ नहि, हमारी शादीशुदा लाइफ अच्छे सें चलरही याँ नहि पुछरहे थें। तुम्हारा ध्यान रखने कों कहरहे थें। औऱ बहोत सि बातें कि। "
नीरुइस बीच रेडी भि होतीजा रही थि। मे समझ नहि पारहा थां कि जीजाजी नें सच मे मेरे औऱ ऋतू दिदी केँ रीलेशन केँ बारे मे निरु कों नहि बताया थां।
प्रशांत: "तुम् उनकोबाई बाई बोलने बाहर् क्यूं नहि आयी?"
नीरु: "वोँ चलेगए? मुझेऋतू दिदी कों बाई भि केहना थां। मैंने सोचा पहले मे दफ़्तर केँ लिए रेडी हौ जाती हूं। मेरा फ़ोन तोँ ख़राब हें, तुम् अपना फ़ोनदो मे अभि फ़ोन करती हूं दिदी कों"
(अगर मेरे फ़ोन सें ऋतू दिदी कों फ़ोन जाएगा औऱ जीजाजी कों पता चलेगा तौ औऱ बवाल होगा तोँ मुझे निरु कों रोकना पडा। )
प्रशांत: "अब तक तोँ वोँ निकलगए होंगे। तुम् बाद मे दफ़्तर सें फ़ोनकर लेनाऋतू दिदी कों"
मैनेनोट किया कि निरु केँ कलरात केँ ब्रा औऱ पैंटी वहींबैड केँ पास पड़े थें। मैंने वोँ पैंटी उठाली औऱ ऊँगली सें छुकरचेक किया तौ वोँ थोड़ी गीली थि। मेरेशक़ कि सुईफिन घूमने लगी। निरु कि बुर गीली हें मतलब पक्का उसने जीजाजी सें चुदवाया होगा।
प्रशांत: "ये तुम्हारी पैंटी गीली केसे!"
नीरु नें मेरेहाथ सें पैंटी खींचली औऱ अपना नीचे पड़ा ब्रा भि उठा लिया औऱ बाथरूम मे लें जातेहुए मुझे जवाब दिया।
नीरु: "बेशरम कही केँ, तुम्हे बड़ाचेक करने हें मेरे अन्दर केँ कपडे। अभि थोड़ी देर पहले हि बाथरूम करकेआई थि, थोडा लग गय़ा होगा। तुम् मुझ पर्र शक़कर रहे होँ?"
प्रशांत: "नहि, कोईकुछ भि कहे, हम् एक् दूसरे पऱ भरोसा बनाये रखेंगे"
स्टोरी जारी रहेगी
NOTE: दोस्तो यह स्टोरी मैंने अन्यत्र पढ़ी अच्छी लगी इसीलिए इस किस्सा कों मे यहा पोस्ट कररहा हूं असली लेखक केँ बारे मे पता नहि चला। किसी कों पता हौ तोँ जरूर कमेंट कीजियेगा.
abi tak k kahani mein sabse bada chutiya wala sochna rakkha hua h parsant jante huwe bi anjane ban raha h k beta iska nahee jiji kaa h
शक कां अंजाम – New Episode
UPDATE 23
जीजाजी नें निरु कों मेरासच नहि बताया थां औऱ मुझे भि जीजाजी औऱ निरु कां सच नहि पताचला थां।
मगर मे अब भविष्य मे जीजाजी कां सामना करने कि हालत मे नहि थां। कुछ वीक्स बादपता चला कि निरु प्रेग्नेंट होँ गयीँ, थि। मेरे तौ होश हि उड़गए औऱ साराशक़ जीजाजी पर्र थां। मैंने निरु कों एबॉर्शन केँ लिए बोला तौ उसनेमन बोल दिया औऱ उलटामुझ पऱ हि क्रोध करनेलगी कि मैंने जोँ उसकोदो बार बिना प्रोटेक्शन केँ चोदा थां उसी गलती कि वजह सें वोँ प्रेग्नेंट हुयी हैं। उसने मेरे औऱ अपनेघऱ वालों कों भि बता दिया औऱ मुझेडाट पड़ी कि मैंने एबॉर्शन केँ लिए क्यूं बोला? मैंने हमारे करियर कि हि बात कि पऱ सच तौ ये थां कि मुझे वोँ बच्चा जीजाजी कां लगरहा थां।
फिन मुझेइस तरह उदास देखकर निरु नें एक् दिन मुझे बोला कि हम् ये बच्चा जीजाजी औऱ ऋतू दिदी कों दे देंगे, उनको वैसे हि बच्चा नहि होँ रहा हें तोँ वोँ गोद लें लेंगे। मेराशक़ अब औऱ भि गहरा हौ गय़ा थां। मुझेसमझ नहि आया कि मे खुश हौ जाऊ कि बच्चा अपने असली बाप केँ पास जाएगा औऱ मुझे किसी औऱ कां पाप अपनेऊपर नहि लेना पडेगा। याँ फिन मुझे दुखी होना चाहिए कि इसका मतलबये सभी प्लांड थां औऱ जीजाजी नें जानबूझकर निरु कों चोदकर अपने स्वयं कां बच्चा पैदा किया थां।
नीरु केँ घऱ वालें, जीजाजी औऱ ऋतू दिदी बहोत खुशहुए पऱ मेरेघऱ वालों नें ऑब्जेक्शन कर दिया कि पहला बच्चा तोँ हम् हि रखेंगे। मगर मे ये केसे होने देता, मे बीच मे कूद पड़ा औऱ ऐलानकर दिया कि ये पहला बच्चा तोँ जीजाजी औऱ ऋतू दिदी हि गोद लेंगे। घूमने जाने सें पहले जीजाजी नें बोला थां कि निरु उनके बच्चे कि हि मां बनेगी। उस वक्त मुझे वोँ मजाकलगा पऱ जीजाजी नें शायद वोँ सच करके दिखा दिया थां। फाइनली सभीसेट हौ गय़ा। निरु बहोत खुश थि। उसको तौ पता हि थां कि ये बच्चा उसने वैसे हि जीजाजी सें पैदा किया थां उन्ही केँ लिये। निरुखुश होकर मुझे थैंकयू बोलने आई
नीरु: "मुझे बहोत अच्छा लगा कि तुम् ये बच्चा ऋतू दिदी कों देने केँ लिएमान गए। इस चक्कर मे हमने कितने दिनों सें सेक्स नहि किया हैं। मे तुमसे बहोत खुश हूं, चलो मेरेसंग जौ करना हें करलो। कुछ वक्तबाद प्रेगनेंसी मे मे तुम्हे चोदने नहि दूंगी। "
प्रशांत: "कोईबात नाहि, मे आज तुम्हे जमकर चोदूंगा कि आने वाले वक्त कां भि चोद दूंगा"
नीरु:"अब तोँ मे वैसे हि प्रेग्नेंट हूं तौ तुम् मुझे पहलीबार बिना प्रोटेक्शन केँ पूराचोद सकते हौ। तौ जितना मज़ा लेना हें आज लेँ लो"
प्रशांत: "हां दोस्त, बिना प्रोटेक्शन केँ बिनाडरे हुए पूरा चोदने मे कितना मज़ाआता हें, क्याँ बताऊ!"
नीरु: "तुम्हे केसेपता? मैंने तौ तुम्हे कभी बिना प्रोटेक्शन पूरा चोदने हि नहि दिया?"
(अब उस भोलि निरु कों क्याँ पता कि मे उसकी बड़ी बेहन कों बिना प्रोटेक्शन केँ बिनाडरे पूराचोद चुका हूं। )
प्रशांत: "वोँ उसरात कों करीब तुम्हे पूराचोद दिया थां। याद हें जबऋतू दिदी जीजाजी केँ संगकर रही थि"
नीरु:"उस रात तोँ तुमको लन्ड मेरी बुर सें बाहर् निकालना पड़ा थां, आज तोँ तुम्हे मेरी बुर मे हि साराजूस निकालने कों मिलेंगा। औऱ तुम्हे बड़ायाद हें उसदिन ऋतू दिदी क्याँ कररही थि। बहोत घूरने केँ मजेलिए होंगे तुमने तौ!"
प्रशांत: "किसी औऱ कों चोदते हुए देखते हें तौ भि तौ उतना हि आनंदआता हें नं!"
नीरु:"चलो नं, आज कि चुदाई कों स्पेशल बनाती हैं। तुमने उसदिन कहा थां कि अगले२४ घन्टे मे मेरी स्पेशल चुदाई होगी औऱ तुमने वादा निभाकर सच मे मेरी स्पेशल चुदाई कि थि। मे कितना डरते डरते चुदवा रही थि, तुमने सच हि कहा थां कि वोँ चुदाई मुझे हमेशा याद रहेगी"
प्रशांत: "तोँ फिन क्याँ प्लान हें? आज क्याँ स्पेशल करू?"
नीरु: "मेरे फेवरेट डॉगी स्टाइल मे चोदना औऱ तुम् मेरानाम लेकर चोदोगे। उसदिन तुम् बतारहे थें कि तुमने बाथरूम मे जीजाजी कों निरु निरु बोलते हुए चोदते सुना थां। वोहीअब बोलते हुए चोदना"
प्रशांत: "ठीक हें, मगरफिन तुमको भि उसदिन कि तरह जीजाजी जीजाजी बोलते हुए चुदवाना पड़ेगा"
(नीरुये सुनकर लज्जा सें लाल हौ गई, औऱ मुझे एक् हल्का सां हाथपीठ पर्र मार दिया। )
नीरु:"हट पागल। तुम्हे क्याँ पताउस वक्त मेरेदिल मे क्याँ चलरहा थां। हालत ख़राब हौ गयीँ, थि मेरीसोच सोचकर"
प्रशांत: "उसदिन तोँ तुम्हे चुदवाते समयपता नहि थां पऱ आज तौ पता हें कि मे हि चोदरहा होँऊंगा, तौ फिन जीजाजी कां नाम लेने मे क्याँ हें"
नीरु: "नहि, मे किसी औऱ कां नाम नहि लुंगी। तुम् मेरानाम लेकर चोदोगे बस"
प्रशांत: "तौ फिन इसमें क्याँ स्पेशल हें?"
नीरु: "तुम्हारे लिए स्पेशल ये हें कि तुम् बिना प्रोटेक्शन पहलीबार पूराचोद सकते होँ औऱ मेरेलिए स्पेसल हें कि तुम् पहलीबार मेरेनाम कां जाप करतेहुए मुझको चोदोगे"
नीरु स्पेशल सजधजकर होने बेडरूम मे गयीँ, औऱ मुझेकहा कि मे उसके बुलाने केँ बाद हि अन्दर जाऊँगा औऱ वोँ कमरे कि रौशनी एकदमकम रखेगी ताकी रोमांटिक माहौल रहे। कुछ मिनट्स बाद हि उसने दरवाजा थोडा खोल मुझे आवाज़ दि। मे अब बेडरूम मे पंहुचा तोँ देखा कि अन्दर बहोत धीमी रौशनी थि।
रूम अन्दर गंधरहा थां। निरु सामने वोहि साड़ी पहने खड़ी थि जौ उसको जीजाजी नें दि थि औऱ उसनेये साड़ी जीजाजी केँ यहाआने वालेदिन पहनी थि।
नीरु साड़ी मे वैसे हि डबल सेक्सी लगती हें तोँ मेरे लण्ड कां जूस तोँ अन्दर उबाल मारने लगा। मे सीधा निरु कि तरफबढ़। मैने निरु केँ पास जाकर उसकी नंगीकमर पऱ हाथरखा औऱ एक् साँस छोड़ते हुए उसकी स्माइल औऱ चौड़ी होँ गयीँ,। मैंने जीजाजी कि हि स्टाइल मे निरु कि तारीफ़ कि।
प्रशांत: "वाउ निरु, आज तौ बड़ी कमाल कि लगरही होँ"
नीरु: "आपकेलिए हि सजधजकर हुयी हूं जी."
(नीरु शायद जीजाजी बोलने वाली थि पर्र बोलते बोलते हि रुक गयीँ, थि। )
मैने निरु कों घुमाया औऱ उसको पीछे सें आकर उसके पतलेपेट पऱ हाथरख पकड़ लिया। मेरा लण्डअब तक कड़क हौ चुका थां औऱ निरु कि साड़ी कों चिरता हुआ जैसे अन्दर घूसने कों उतारू थां।
नीरु नें अपनेसर कां पिछला हिस्सा मेरे कंधे पर्र रख दिया औऱ मे उसकी गर्दन औऱ कंधे पर्र चुमने लगा। निरु आँखबंद किये आहेंभर रही थि। मैनेअब एक् हाथ उसकेपेट सें हटाकर उसके ब्लाउज पर्र रख दिया औऱ मे उसके मम्मो कों महसूस कर पाया, क्यूं कि उसने अन्दर ब्रा नहि पहना थां।
नीरु: "जल्द सें चोददो मुझे, मेराजूस निकलरहा हें औऱ कपडे गंदे हौ जायेंगे"
मै निरु कों खाट केँ पास लेँ आया औऱ वोँ डॉगी स्टाइल मे पलंग पर्र चढ़कर बैठ गयीँ,। मे भि अब उसके पिछवाड़े पऱ आकरबैठ गय़ा औऱ उसकी साड़ी कों पेटिकट सहित उसके मुड़े हुए घुटनों केँ ऊपर लेँ आया ताकीऊपर उठने मे आसानी हौ। मै निरु कि साड़ी कां पल्लु कंधे सें निकाल करकमर तक नीचे उतार लाया।
उसकीपीठ करीब पूरी नंगी मेरे सामने थि औऱ उसका पतला फिगर मे देखकर चोदने कों लालायित थां। मैनेअब उसकी साड़ी औऱ पेटिकट कों जाँघो केँ ऊपर उठाया औऱ गांड सें हटा दिया। मैंने देखा कि उसने पैंटी भि नहि पहनी थि औऱ उसकी गोरीगोल गांड मुझे चोदने कों बुलारही थि। मैने अपनी उंगलिया उसकी बुर औऱ गांड पर्र फेरानी शुरुआत कि औऱ वोँ तडपने लगी औऱ आहें भरनेलगी। थोड़ी बहोत ऊँगली मैंने उसकी बुर केँ छेद मे भि उतार दि औऱ रगडने लगा।
सच मे उसकी बुर अच्छे सें गीली होँ चुकी थि। कुछदेर ऊँगली करने सें हि उसकीतेज साँसें चलनेलगी औऱ पूरा शरीर हिलने लगा। मैनेअब अपने कपडे उतारे औऱ चोदने कि पोजीशन ली। मेरा लण्ड निरु कि बुर सें छूटे हि उसकी बुर सें निकले पानी सें गीला होँ गय़ा। मैंने उसको तडपाने केँ लिएऐसे हि अपने लण्ड सें उसकी बुर केँ बाहरि भाग कों रगडा।
नीरु: "अंदरडाल कर जल्द सें चोदना शुरुआत करो, नहि तौ मे ऐसे हि झाड़ जाउँगी। मे एकदमभरी बैठि हूं"
मैनेअब "ओह्ह निरुउउउ" बोलते हुए अपने लण्ड कों निरु कि बुर मे उतारा औऱ निरु एक् तेजअहह केँ संग हि काम्पने लगी। मैंने अब धीरे-धीरे धीरे-धीरे उसको अन्दर बाहर् धक्के मारकर चोदना शुरुआत किया। चुदाई शुरुआत होते हि मे बराबर "ओह्ह निरू क्याँ बुर हें तुम्हारि, आनंद आँ गय़ा। क्याँ फिगर हें तुम्हारा निरु, तुम्हे चोददु क्याँ मेरी प्यारी निरु"
नीरुमजे लेतेहुए लगातार सिसकिया माररही थि औऱ मे उसकेनाम कों लेकरठीक वैसे हि कररहा थां जैसाउस दिन मैंने जिजाजजी कों बाथरूम मे निरु कां नाम लेकरऋतू दिदी कों चोदते हुए सुना थां। बिनाडर केँ पहलीबार, बिना प्रोटेक्शन निरु कों चोदते हुए मुझे आनंद आँ रहा थां औऱ उसकी बुर मे बने पानी सें लगातार छपछप कि आवाजें आँ रही थि जोँ कि मेरा औऱ उसकानशा बढारही थि।
नीरु:"अहह प्रशांत अब बहोत मज़ा आँ रहा हें, अब रुकना मत औऱ चोदते रहना। आह्ह्ह्हुउउउ आयहहा."
मुझेलग गय़ा कि अब निरुउस फेज मे पहुच चुकी हें जहाँ वोँ गहरेनशे मे चली जाती हैं। मैंने अब उसकी परीक्षा लेनी शुरुआत कि।
प्रशांत: "निरु मे तुम्हारा नाम लेकरचोद रहा हूं, तुम् भि जीजाजी कां नाम लेकर चुदवाओ, जैसेउस दिन चुदवा रही थि"
नीरु नें "नां" बोला औऱ चुदवाती रही। मैंने अब अपने चोदने कि स्पीड एक् दम धीमीकर दि। निरुअब चिढ गयीँ, औऱ मुझेजोर सें चोदने कों बोलने लगी। पऱ मैंने जिदरख दि कि उसको भि जीजाजी केहना पडेगा।
वोँ ऐसे हि आँखबंद किये नशिली आवाज़ मे उतावलापन रही थि औऱ मेरे हलके धक्के उसको औऱ ज़्यादा तरसारहे थें। फिन अचानक उसके मुँह सें वोँ निकला जिसका मुझेवेट थां।
नीरु: "जीजाजी जोर सें चोदो"
मैनेअब फिन सें धक्के मारने कि स्पीड बढ़ाई औऱ उसको पहले कि तरह चोदना जारीरखा।
प्रशांत: "निरु तुम्हे ऐसेचोद दू?"
नीरु:"हॉ, जीजाजी चोददो मुझेऐसे। एआईए। ओह्ह्ह जीजाजी क्याँ चोदते हौ तुम्। ऐसे हि जोर सें चोददो"
प्रशांत: "ओह मेरी प्यारी निरु, अपने जीजा सें चुदवाओगी न् तुम्"
नीरु:"हां जीजाजी चोददो"
प्रशांत: "निरु मे तुम्हारा ब्लाउज खोलकर तुम्हारे मम्मे नंगेकर दू"
नीरु:"खोल दो जीजाजी"
मैने निरु केँ ब्लाउज कि गाँठ पीछे सें खोल दि औऱ बाकी कां ब्लाउज उसने स्वयं हि पूरा अपने हाथों सें निकाल करदूर कर दिया। मै पीछे सें चोदते हुये, उसके मम्मे लटकते हुए औऱ हिलते हुएदेख सकता थां।
प्रशांत: "निरु, मेरी साली, तुम्हारे मम्मे तोँ बहोत जबरदस्त हें "
नीरु:"आयी। जीजाजी जोर सें चोदो अपनी साली कों। मेरे बाकी केँ कपडे भि पूरेखोल कर चोदो.चोद दो अपनी साली कों जीजाजी"
नीरु नें अपनी साड़ी पेट सें अपने पेटिकट सें बाहर् निकाल कर अपने पेटिकट कि डोरीखोल दि। साड़ी अलगकर उसने अपना पेटिकट ऊपर खिसका कर अपनेसर सें निकाला औऱ पूरी नंगी होँ गई,।
रशांत: "वाउ निरु, पूरी नंगी तुम् बहोत सेक्सी लगरही हौ, तुम्हारे जीजाजी अब तुम्हे पूरा चोदेगे, तुम् तैयार होँ"
नीरु: "अपनी पूरी नंगी साली कों चोददो जीजाजी। ओह जीजाजी। मेरा.होने वाला हें। जीजाजी। जोर सें मारो"
मैनेअब निरु कों झटके मारने शुरुआत किये, मेरा स्वयं कां जूसअब मेरी लण्ड कि नलि मे भर चुका थां औऱ पिचकारी छुट्ने केँ लगभग थि। पऱ मे कोशिश कररहा थां कि पहले निरुझड़ जाए।
प्रशांत: "ओह्ह निरु, क्याँ सेक्सी फिगर हें, तुम्हारे जीजा तुमको पूराचोद देंगे, ओह्ह्ह निरु तुम्हे चोदने मे मुझे क्याँ मज़ा आँ रहा हें"
नीरु :"अह्ह्ह जीजाजी। मुझे भि आनंद आँ रहा हें। मे आने वाली होऊँ.अह्ह्ह जीजाजी.ओह्ह्ह जीजाजी चोदोअहह आँ आँ अहहआयी मम्मी.आहह-आहह जीजाजी। हौ गय़ा। मेरा"
मैनेअब अगले १५-२०जोर केँ झटके मारे औऱ पहलीबार अपना साराजूस निरु कि बुर मे खालीकर दिया। निरुवही तकिये पऱ सर टिकाये वैसे हि डॉगी स्टाइल मे बैठिरही। मैने अपना लण्ड बाहर् निकाला औऱ उसके साइड मे गय़ा। निरुतेज तेज साँसें लेँ रही थि। १५-२० सेकंड केँ बाद वोँ अपनी साँसें समेटते हुएउठी औऱ मेरी छाती पऱ बंद मुठियो सें मारने लगी।
नीरु:"जब मेरा होने वाला थां तभी मुझको जीजाजी कां नाम लेने कों बोलकर फसाया तुमने, ऐसे तुमको ज़्यादा आनंदआया फिन?"
प्रशांत: "मैंने मजबूर थोड़े हि किया थां, तुम् नाँ बोल सकती थि"
नीरु: "मे तब कितनी देर सें उतावलापन रही थि, तुमने हि बदमाशी कि हें जानबूझ कर। ऐसे वक्त मे तुम् अगर मेरे दुश्मन कां नाम लेने कों बोलते तौ भि लेँ लेति, फिन जीजाजी क्याँ चीज हैं। वैसे भि नामकुछ भि लो पर्र चोद तौ तुमहि रहे थें न्!"
प्रशांत: "पऱ चुदते हुए तोँ तुमने जीजाजी कों हि याद किया। इसकीसजा तुम्हे मिलेगी"
नीरु:"ठीक हें, कल मे तुम्हे तुम्हारी फेवरेट काऊबॉय पोजीशन मे चुदुंगी। तुम् भि चाहे जिसका नाम लेँ लेना। उस दिन तुम् ऋतू दिदी कों चोदते हुएदेख बड़ा एक्ससिटेड होँ रहे थें, तुम् भि ऋतू दिदी कां नाम लें लेना"
अगलेदिन मे नीचे लेटा औऱ निरु मेरेऊपर आकर मुझे चोदने लगी। मेरी तौ ऋतू दिदी कां नाम लेने कि ख़्वाहिश नहि होँ रही थि क्यूं कि जीजाजी कों तोँ सचपता हि थां औऱ कभी न् कभी निरु कों पताचल सकता थां। मागर निरु नें हि मुझको पूछा कि मे ऋतू दिदी कां नाम क्यूं नहि लेँ रह। तोँ मैंने एक् दोबार ऋतू दिदी कां नाम लेँ भि लिया। चुदते हुए निरु एक् बारफिन नशे मे चली गयीँ, थि। मैने निरु कों बोला कि मे ऋतूनाम लें रहा हूं तोँ वोँ भि नीरजनाम लेँ लें। वोँ मान गयीँ,। मे "ऋतू मुझेचोद दो"बोल रहा थां तौ निरु "नीरज मे तुम्हे चोदूंगी" बोलरही थि। जैसे जैसे चुदाई आगे बढ़ी मैंने अपनेबोल अचानक बदलदिए।
प्रशांत: "ओह निरु, अपना जीजाजी कों नहि चोदोगी"
नीरुकुछ नहि बोलीं औऱ ऊपर नीचे उछलते हुए मुझे चोदती रहीबस "हां नीरज मे तुम्हे चोदूंगी" बोलि।
मैनेफिन नीचे लेटे थोड़े झटके मारे औऱ कहा कि "निरु अपने जीजाजी कों अच्छे सें चोददो"।
मेरे झटके खाकार निरु हल्का सां चीखी औऱ फिन"हां जीजाजी निरु चोदेगी आपको। ओह्ह जीजाजी मे चोदूंगी आपको, जोर सें चोदूंगी"
प्रशांत: "हां निरु, चोद दो अपने जीजाजी कों"
नीरु:"हां जिअज्जी ओह आनंद आँ रहा हें जीजाजी"
प्रशांत: "मुझेचोद कर मेरे बच्चे कि मम्मी बनोगी न् निरु"
नीरु:"हां जीजाजी, मुझेचोद कर अपने बच्चे कि मां बनादो, ओह्ह जीजाजी मेरे बूब्स पकड़लो"
नीरु बैठे बैठे उच्छल कर मुझको चोदरही थि औऱ उसके टाइट मम्मे ऊपर नीचे उच्छल रहे थें जिनको अब मैंने पकड़लिए औऱ दबाने लगा। नीरुअब आँखबंद करे तड़पते हुए मुझे चोदती रही औऱ अपने मुँह सें लगातार "ओह जीजाजी चोददो मुझे " कहतेहुए मुझे चोदती रही। जब वोँ झड़ने लगीतब मेरेऊपर पूरालेट गई, औऱ उसके नंगे मम्मे मेरे सीने सें चिपकगए औऱ वोँ जोर सें चीखी"अहह जीजाजी क्याँ चोदा हें"।
कुछ सेकण्ड्स केँ बाद उसको अहसास हुआ कि उसने क्याँ किया हें औऱ अपना मुँह छिपाए वोँ मेरेऊपर सें उठी औऱ सीधा वॉशरूम मे भागी। पूरे१५ मिनट्स केँ बाद वोँ वॉशरूम सें बाहर् आई औऱ वोँ रोरही थि। मैंने उसको रोने कां कारण पूछा तोँ मुझ पर्र हि भड़क गयीँ, कि मैंने हि उसको करप्ट कर दिया औऱ जीजाजी कां नाम लेकर चोदने कों मजबूर किया थां। मैने उसको शांतकर लाइटली लेने कों बोला। मगर मे स्वयं समझ नहि पारहा थां कि मे इसका क्याँ मतलब निकलूँ। मैंने उसको करप्ट किया थां याँ वोँ स्वयं हि तैयार थि।
यह९ महिने मेरेलिए बहोत मुश्किल सें गुजरे। रहरहकर जीजाजी औऱ निरु केँ चुदते हुयी तसवीरे हि घूमरही थि। जब बच्चा पैदाहुआ तौ मुझेउस बच्चे कि शकल जीजाजी जैसीलग रही थि। नीरु कि प्रेगनेंसी सें लेकर बच्चा पैदा होने तक मैंने निरु कों कईबार बोला हें कि कहींये बच्चा जीजाजी कां तोँ नहि औऱ निरु हमेशा बात कों मजाक मे उडा देती। उसको लगता कि मे मजाककर रहा हूं, पऱ मे उसको सीरियसली पुछरहा होता थां। कभीकभी तोँ कोफ़्त कहकर निरुबोल हि देती कि
"हॉ, ये बच्चा जीजाजी कां हि हैं। क्याँ करना हें?"
मै मात्र मुँह फाड़े उसको देखते हि रहता औऱ वोँ मेरे गालो कों खींचकर मुझे शांतकर देती। हालाँकि निरु कां उस बच्चे सें दिललग चुका हें पर्र बच्चा जब मम्मी कां दूध पीना छोड़ देगातब वोँ बच्चा ऋतू दिदी कों सौंप दिया जाएगा। मेरेमन मे शक़ कां कीड़ा आज भि कुलबुला रहा हैं। मैंने निरु कों बोला हें कि मे वोँ एक्सपेरिमेंट आज भि करना चाहता हूं ताकी जीजाजी कां सच बाहर् आए, पऱ निरु हमेशा बात कों मजाक मे उडा लेती हैं। मैने अपनी उम्मीदें नहि खोयी हैं। मे कोसिश करता रहूँगा कि मे येसचपता लगाकर रहु औऱ निरु कों फिनमना लु कि वोँ अपने जीजाजी कां टेस्ट लेँ।
स्टोरी लिखी जाने तक बच्चा जीजाजी औऱ ऋतू दिदी कों सौंप दिया गय़ा। बच्चा मिलने सें जीजाजी बहोत खुश थें औऱ जीजाजी जब प्रशांत सें मिले तौ उसको क्षमा कर दिया, क्यूं कि ऋतू दिदी नें अपनी गलतीमान कर माफ़ी मांगली थि। जीजाजी नें प्रशांत कों अकेले मे ये भि बताया कि बच्चा नाँ होने कि वजह सें ऋतू दिदी कों हाइपर सेक्स कि बीमारी हौ गयीँ, थि। वोँ एक् दिन भि बिना सेक्स केँ नहि रह सकती हैं। अब शायद बच्चा मिलने सें वोँ बीमारी ठीक होँ जाए। शायदइसी हाइपर सेक्स कि बीमारी केँ कारणऋतू दिदी ट्रैन मे अपना क्लीवेज दिखारही थि औऱ जीजाजी कों वॉशरूम मे औऱ रात कों हमारे सामने छोड़रही थि। मगर वॉशरूम मे निरु कां नाम लेकर छोड़ने कां रहस्य आज भि बनाहुआ हैं।
एन्डनोट: प्रशांत अब स्वयं एक् बारफिन निरु-जीजाजी-ऋतुदीदी केँ संग घूमने कां प्लान केँ बारे मे सोचरहा हें, जहा वोँ अपना एक्सपेरिमेंट फिन सें करना चाहता हैं। मेरे हिसाब सें उसेशक़ करनाबंद कर देना चाहिए औऱ निरु केँ संग धीरे-धीरे रहना चहिये। जीजाजी नें प्रशांत पऱ एक् अहसान हि किया हें कि निरु कों ये नहि बताया कि प्रशांत नें निरु कि दिदी केँ संग क्याँ गलतकाम किया हें।
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कथा जारी रहेगी
NOTE: दोस्तो यहकथा मैंने अन्यत्र पढ़ी अच्छी लगी इसीलिए इसकथा कों मे यहा पोस्ट कररहा हूं असली लेखक केँ बारे मे पता नहि चला। किसी कों पता हौ तोँ जरूर कमेंट कीजियेगा.
शक कां अंजाम - Next part mein bada twist
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