शक कां अंजाम – New Episode
UPDATE 24
PART 2
आपणेइस किस्सा कां पिछला हिस्सा पढ़ा होगा। अब उस किस्सा कां दूसरा हिस्सा पेश हें जहा शायद पिछली किस्सा मे छूटेहुए आपके सवालो केँ जवाबमिल जाए। किस्सा केँ पिछली हिस्से कों जलदी सें याद करवा देता हूं। प्रशांत कों शक़ थां कि उसकी वाइफ निरु कां उसके जीजाजी केँ संग नाजायज नाता हें औऱ जौ बच्चा निरु नें पैदा किया वोँ जीजाजी सें हुआ हैं। वोँ बच्चा जीजाजी नें अडॉप्ट कर भि लिया थां क्यूं कि उनकी पत्नि ऋतू बच्चा पैदा नहि करपारही थि। प्रशांत कां शक़ अभि भि बनाहुआ थां। आगे कि कथा प्रशांत कि ज़ुबानी आगे बढ़ाते हें.
रात कों सोने सें पहले मे ड्राइंगरूम मे बैठे अकेले टेलीविज़न देखरहा थां। निरु बेडरूम मे सोने कि तयारी कररही थि। मैंने टेलीविज़न बंद किया औऱ बेडरूम कि तरफ बढ़ा। अन्दर सें निरु केँ बुदबुदाने कि आवाज़ आँ रही थि।
वोँ दबी आवाज़ मे किसी सें फ़ोन पर्र बातकर रही थि। मेरेकान खड़े होँ गए, कहीं वोँ अपने नीरज जीजा सें तोँ बात नहि कररही? वोँ फ़ोन पऱ फुसफुसाते हुएबात कररही थि औऱ मुझे दरवाजे पर्र खड़े होकर साफ़कुछ सुनायी नहि देरहा थां। इसलिये मे चुपके सें कमरे केँ अन्दर दाखिल हुआ।
नीरु मेरीतरफ पीठकर बातकर रही थि औऱ उसके थोडा पास मे जाने पर्र मुझे उसके मुँह सें धीरे-धीरे सें
"आईलवयू"
बोलने कि आवाज़ आयी। मेरीआहट सुनकर निरु एकदम पलटी औऱ चौंक गयीँ,। नीरु नें फ़ोन पर्र
"बाद मे फोन करती हूं"
बोलकर फ़ोन काटा औऱ मुझसे बात करनेलगी।
नीरु: "एकदम सें केसे आँ गए? मुझे तौ दर्रा हि दिया"
प्रशांत: "तुम् क्याँ कोईगलत कामरही थि क्याँ?"
नीरु: "मे क्यूं भलाकोई गलतकाम करुँगी?"
प्रशांत: "किस सें बातकर रही थि?"
नीरु:"कोई नाहि, मेरी एक् सहेली थि"
प्रशांत: "कौन सि सहेली थि?"
नीरु: "तुम् इतना क्यूं पुछरहे होँ?"
प्रशांत: "इतना फुसफुसाते हुए धीरे-धीरे बातकर रही थि, इसलिये पुछरहा हूं कि कौन थां औऱ क्याँ बात थि"
नीरु: "मेरी सहेली पायल केँ संग उसकीकोई पर्सनल बातकर रही थि"
(मैमन मे सोचने लगा कि कौन लड़की अपनी सहेली कों " ईलवयू" बोलति हैं। पऱ मैंने निरु कों अभि ये नहि बताया कि मैंने उसका लास्ट सेंटेंस सुन लिया थां। )
मै चाहता थां कि मे स्वयं उसका फ़ोनचेक करू कि उसने किसको फ़ोन किया थां।
नीरु: "कहां खोगए? सोना नहि हें क्याँ? कहीं मुझे चोदने कां प्लान तौ नहि हें तुम्हारा आज?"
प्रशांत: "बूब्स तोँ चुसने हि नहि देति, चुदाई कां पूरा मज़ा भि नहि आता आजकल"
नीरु: "एक् मिनट, ये बताओ कि चोदने औऱ बूब्स चुसने कां क्याँ रिलेशन हें? चुदाई कां मज़ाअलग होता हें"
प्रशांत: "जब सें बच्चा हुआ हें, तब सें तुमने मुझे अभि तक बूब्स नहि चुसने दिया हैं। जैसे खाने केँ बाद मीठा खाते हें वैसे हि चुदाई केँ पहले बूब्स चुसने मे मज़ाआता हें"
नीरु:"जब तक मेरे बूब्स कां दूध पूरासुख नहि जाता मे तुम्हे नहि चुसने दूंग। मुझे अच्छा नहि लगेगा, मेरे बच्चे केँ अलावा कोई औऱ दूध चूसेगा तोँ"
रशांत: "मगर बच्चा यहा हें कहां? वोँ तोँ ऋतू दिदी औऱ नीरज जीजाजी कों गोददे दिया हैं। अभि यहाबचा हुआ हूं केवल मे, मुझे हि चुसने दो। चलो अपना टीशर्ट औऱ ब्रा निकलो। वैसे भि तुम्हारे बूब्स अब औऱ भारी होँ गए हें, मे उतावलापन रहा हूं उनको देखने, दबाने औऱ चुसने केँ लिए"
नीरु:"दूध तौ मेरा बच्चा हि पीयेंगा। "
प्रशांत: "तुम्हारा बच्चा तोँ वो ऋतू दिदी केँ मोठे मम्मे चुसरहा होगा"
(नीरु नें मुट्ठि बनाकर मुझे२-३ मुक्के मारदिए जौ मुझे बहुतजोर केँ लगे थें। )
नीरु: "लज्जा नहि आति, मेरी दिदी केँ लिएऐसे गंदे शब्दबोल रहे होँ!"
प्रशांत: "लज्जा कि क्याँ बात हें? ये तौ नार्मल हें, एक् बच्चा तोँ अपनी मां केँ मम्मे हि चुसगा। बच्चे कों थोड़े हि पता हें कि उसकी असली मां ऋतू नहि बल्कि निरु हैं। उसको तौ जौ मम्मे सामने नंगे दीखेंगे वोँ उनकोचुस लेगा। "
नीरु: "तुम्हे भि पता हें कि ऋतू दिदी केँ मम्मो मे दूध नहि हें, तौ वोँ अपनादूध केसे पीला सकती हें! मजाक कि आड़ मे अश्लील बातें मतकरो मेरी दिदी केँ बारे मे"
प्रशांत: "ये तोँ औऱ भि अच्छा हें कि ऋतू दिदी केँ बूब्स मे दूध नहि हें, जीजाजी तौ चुसने केँ मजे लेँ हि पाएँगे। यहा तड़प तोँ मे रहा हूं मम्मे चुसने केँ लिए"
नीरु: "तौ तुम् भि चलेजाओ वहा, बेशर्म कही केँ!"
प्रशांत: "मे वो गय़ा तौ फिन जीजाजी यहा आँ जायेंगे तुम्हारे मम्मो कों चुसने केँ लिए"
नीरु: "तुम्हारा दिमाग़ ख़राब होँ गय़ा हैं। पहले भि तुमने मेरे मुँह सें जीजाजी कां नाम बुलवाते हुए मुझे अपने सें चुदने कों मजबूर किया औऱ अभि भि ऐसी गन्दी बातकर रहे होँ!"
प्रशांत: "तौ फिन मुझे मम्मे चुसने दो"
नीरु: "बिलकुल नहि"
प्रशांत: "अपने जीजाजी कि तोँ कोईबात नहि टालती तुम्, वोँ बोलते तौ उनको तोँ चुसने देती न्?"
नीरु नें वही पड़ा तकिया उठाया औऱ मुझे मारने लगी। मैंने भि उसको पकड़कर पलंग पऱ गिरा दिया। मैंने उसकी नाइटी कों नीचे सें ऊपर उठाया औऱ वोँ हँसते हुए चिल्लने लगी। मैने उसकी नाइटी कों कमर सें ऊपर तक उठाया औऱ पेट नँगाकर उसकी पैंटी निकाल बुर भि नंगीकर दि। उसनेकोई विरोध नहि किया। मैंने उसकी पूरी नाइटी सर सें बाहर् निकलने केँ लिए थोडा ऊपर उठाया पऱ उसनेरोक दिया। वोँ अपने बूब्स नंगे नहि करना चाहती थि। मैंने अपने कपडे खोले औऱ नँगा हौ गय़ा। फिन सें उसकी नाइटी निकालने लगा पऱ फिन सें उसने मुझेरोक दिया।
नीरु: "नहि, पिछले कुछ दिनों सें मम्मो मे बहोत दर्द हौ रहा हैं। इसलिये घऱ पर्र ब्रा भि नहि पहनरही हूं। नाइटी खोलोगे तोँ मेरे बूब्स नंगे होकर बाहर् आँ जायेंगे"
प्रशांत: "वोँ हि तौ मे चाहता हूं। एक् बार दिखाओ तोँ सही कितने बड़े हौ गए हें"
नीरु: "एक् बार तुम् मेरे मम्मे नंगेदेख लओगे तौ फिन बिना दबाये छोडोगे नहि, इसलिये मे ये रिस्क नहि लुंगी"
प्रशांत: "प्लीज न् नीरु, दिखाओ अपने मम्मे"
मगर निरु नें अपनी नाइटी नहि निकलने दि। मे स्वयं हि उस पऱ चढ़ गय़ा। उसने मुझे बूब्स पर्र हाथलगा कर मसलने तौ नहि दिया पऱ मैंने अपना सीना उसकी छाती पर्र रखकरजब उसको चोदना शुरुआत किया तौ जरूरऊपर नीचे रगड़ सें मेरे सीने नें निरु केँ मम्मो कों दबाकर रगड़ दिया थां। बिना कंडोम पहने तोँ वोँ वैसे भि मुझे चोदने नहि देती थि, अभि बूब्स कों हाथ लगाना भि वर्जित हौ गय़ा थां। खैर मैंने निरु कों चोदने केँ हि मजे लेँ लिए थें।
मा बनने केँ बाद उसका जिस्म भि अब औऱ गुदगुदेदार होँ गय़ा थां, जिसतरह सें उसके मम्मे बढ़गए थें। हालाँकि उसको देखने पर्र कोई फ़र्क़ महसूस नहि होता, अभि भि वोँ वैसे हि पतलीकमर वाली स्लिम लड़की थि। एक् बार तोँ मन किया कि उस सें जीजाजी कां नाम बुलवाते हुए चोदता हूं, पऱ फिन अपना प्लान ड्राप कर दिया कि मुझे स्वयं कों अच्छा नहि लगेगा अगर वोँ सच मे जीजाजी कां नाम लेतेहुए चुदवाने केँ मजे लेगी तोँ।
जब मे निरु कों चोदने केँ बादउस पर्र सें उठा तौ देखा कि उसकी छाती सें नाइटी थोडा गीली हौ गई, हैं। निरु कां ध्यान दिलाया तोँ वोँ हल्का सां चिखि।
नीरु: "मेरादूध निकाल दिया तुमने! मेरी नाइटी पऱ दूध केँ दागलग जाएंगे अब। तुम्हे दबाने सें मन किया थां मैंने"
ये कहतेहुए वोँ उठ बैठि औऱ दूसरी नाइटी निकाल कर वॉशरूम मे चली गयीँ,। थोड़ी देरबाद वोँ चेंज करकेआयी।
नीरु:"अब सें तुम् मेरेऊपर आकर नहि चोदोगे। तुम्हारे सीने सें दबकर मेरादूध निकल जाता हैं। याँ तौ बैठे बैठे चोदना याँ फिन मेरे फेवरेट डॉगी स्टाइल मे"
प्रशांत: "तुम् मेरेऊपर बैठकर मुझे क्यूं नहि चोद लेती?"
नीरु: "अच्छा, ताकी तुम् मेरे उछलते हुए मम्मो देखपाओ, इसलिये नं? नॉटी!"
मै संतुष्ट होकरलेट गय़ा थां। निरु कों भि नींद आँ गई, थि। मैंने फिन उसका फ़ोन उठाया येचेक करने केँ लिए कि वोँ फ़ोन पर्र किस सें बातकर रही थि पऱ उसके फ़ोन पऱ लॉकलगा हुआ थां। सूबह भि मैंने ट्राई किया कि किसीतरह उसके फ़ोन कों देखपाउ औऱ उसकोशक़ भि न् हौ कि मे क्याँ कररहा हूं।
मैंने किसी बहाने सें उसका फ़ोन माँगा औऱ उसने अनलॉक करकेदे दिया। मैनेकल रात केँ फोन लॉग्स देखे औऱ पाया कि कलरात निरु अपने जीजाजी सें हि बातकर रही थि। मेरा दिमाग़ भन्ना गय़ा। मैंने कलरात सुना थां कि वोँ फ़ोन पर्र "आईलवयू" बोलरही थि औऱ वोँ उस वक्त जीजाजी सें हि बातकर रही थि। मै सोचने लगा कि अब मे क्याँ करु। पिछली बार गलती कि थि जौ शक़हुआ फिन भि खुलकर निरु सें कुछ नहि पूछा थां। मैंने सोच लिया कि मे खुलकर उसको पूछुंगा।
प्रशांत: "निरु, कल रात तुम् पायल सें हि बातकर रही थि नं?"
नीरु:"हॉ, क्याँ हुआ!"
प्रशांत: "ये देखोकॉल आईलोग, तुम् अपने जीजा सें बातकर रही थि"
ये सुनकर निरु कां चेहरा फीकापड़ गय़ा। उसने तुरन्त मेरेहाथ सें उसका फ़ोनछीन लिया।
नीरु: "मैंने तुम्हे अपना फ़ोन जासूसी करने केँ लिए नहि दिया थां"
प्रशांत: "तुम् मुझसे क्याँ छुपारही होँ? फ़ोन जीजाजी कों किया औऱ मुझेझूठ बोला कि पायल सें बातकर रही थि"
नीरु:"हां तोँ क्याँ हौ गय़ा? जरुरी तौ नहि कि मे हरचीज बताऊ कि किस सें क्याँ बातकर रही हूं!"
कथा जारी रहेगी
NOTE: दोस्तो यह स्टोरी मैंने अन्यत्र पढ़ी अच्छी लगी इसीलिए इसकथा कों मे यहा पोस्ट कररहा हूं असली लेखक केँ बारे मे पता नहि चला। किसी कों पता होँ तौ जरूर कमेंट कीजियेगा.
kahani only shak nahii h yaha dhokha , blindness or character less bi h bhay dono kaa video bnaa lo or niru kaa jija kaa jana kaa baad dikha krr tab baat karo
शक कां अंजाम – New Episode
PART 2
UPDATE 25
प्रशांत: "अगर तुम् फ़ोन पर्र किसी कों "आईलवयू' कहो तोँ फिन भि मुझे तुमसे पूछने कां अधिकार नहि हें? तुम्हारा तुम्हारे जीजाजी केँ संग क्याँ चलरहा हें? सचसचबतओ, तुमने अपने जीजाजी सें चुदवाया हें नं? औऱ वोँ बच्चा तुमने पैदा किया हें, वोँ जीजाजी केँ चोदने सें हि पैदाहुआ हें नं? आज मुझे तुम् खुलकर सचबतओ। तुमने कितनी बार अपने जीजाजी सें चुदवाया हें"
नीरु: "तुम्हारा दिमाग़ तौ ख़राब नहि हौ गय़ा हें!"
प्रशांत: "हॉ, होँ गय़ा दिमाग़ खराब। तुम् अपने जीजाजी कों छुपकर आईलवयू बोलति हौ। उनके बच्चे कि मां बन जाती हौ, मे पागल हि थां जोँ मुर्ख बनतारहा। पर्र अब नहि"
नीरु नें मुझे गुस्से सें देखा औऱ तेजी सें चलतेहुए बेडरूम मे गई,। मे उसके पीछे गय़ा कि अब वोँ क्याँ नाटक करती हें जब उसकी चोरी पकड़ी गई, हैं। उसने अलमारी खोली औऱ एक् एनवलप निकल। मेरेपास आई औऱ मेरे मुँह पर्र वोँ एनवलप मरा। फिन सुबकते हुए वोँ दनदनाते हुए बेडरूम सें बाहर् चली गई,।
मैने वोँ एन्वेलप खोला। वोँ किसी होटल मे बुकिंग कां थां। वोँ मेरे बर्थडे कि जश्न कां बुकिंग थां। तभी निरुफिन सें रोती हुयी अन्दर आई औऱ रोतेहुए हि मुझसे कहनेलगी।
नीरु: "तुम्हारे बर्थडे केँ लिए जीजाजी केँ संग मिलकर सरप्राइज प्लान किया थां। जीजाजी केँ मिलने वाले कां होटल थां, इसलिये केक पऱ क्याँ लिखवाना हें वोँ उनकोबता रही थि। "आईलवयू प्रशांत' लिखवाना चाहती थि, पूरा बोलने केँ पहले हि तुम् रूम मे आँ गए थें इसलिये पूरा नहि बोल पायी थि। औऱ तुमने मेरे करैक्टर पर्र इतना बड़ा ईल्जाम लगा दिया!"
प्रशांत: "मे तोँ बसपुछ रहा थां। तुम् मुझेसभी सच भि तोँ बता सकती थि!"
नीरु:"ये पूछने कां कौनसा तरीका हें कि मैंने जीजाजी सें चुदवाया हें औऱ वोँ बच्चा उन्होंने हि पैदा करके दिया हें!"
प्रशांत: "अरे मे तोँ हमेशा कि तरह मजाककर रहा थां"
नीरु: "मुझे तौ नहि लगा कि तुम् मजाककर रहे थें। मुझेअब तुम्हारा बर्थडे नहि मनाना हें, वोँ बुकिंग मे कैंसिल करवारही हूं। तुम्हारा बर्थडे तुम् अकेले हि मनाना, मे वीकेंड पर्र अपनेघऱ जारही हूं"
मैने निरु कों समझाने कि कोशिश कि पऱ वोँ नहि मानि। फ्राइडे इवनिंग मे हि वोँ अपने मायके चली गयीँ,।
मुझे बहोत बुरालगा औऱ अगलेदिन मे उस सें मिलने उसकेघऱ चला गय़ा। दोपाहर सें पहले मे निरु केँ मायके मे आया। घऱ केँ बाहर् मेरे ससुरजी जी प्लांट्स कों पानीदे रहे थें। उन्होंने बताया कि निरु अन्दर हि हैं। मे अन्दर गय़ा तौ वो ड्राइंग रूम मे कोई नहि थां। तभी निरु अपनेरूम सें खिलखिलाते हुए भागते बाहर् आयी। उसके भारी हौ चुके बूब्स ऊपर नीचे तेजी सें उच्छल रहे थें। उसका हँसता चेहरा देख मुझे ख़ुशी हुयीमगर तभी उसके पीछे पीछे उसके जीजाजी भि आए।
मुझेदेख कर वोँ दोनों रुकगए। निरु मेरे अधिक लगभग खड़ी थि औऱ मैंने नोट किया कि उसकी साटन कि नाइटी मे उसने ब्रा नहि पहना हें, जैसा कि उसने पहले भि बताया थां कि आजकल बूब्स मे होते दर्द कि वजह सें वोँ ब्राकम हि पहनती हैं। उसकी नाइटी निप्पल केँ वहा सें गीली थि, शायदउस दिन कि तरहदूध निकला होगा। गीलेपन सें निरु केँ निप्पल कां तीखापन साफ़ दिखाई देरहा थां।
जीजाजी: "अरे प्रशांत तुम् यहा? हैप्पी बर्थडे इन एडवांस। निरु तोँ बोलरही थि कि तुम् काम मे फंसगए हौ इसलिये तुम्हारा सरप्राइज बर्थडे बुकिंग भि कैंसिल कर दिया औऱ अभि तुम् यहा?"
मै निरु कि शकल देखने लगा, उसने हि शायद बुकिंग कैंसलेशन केँ लिएये झूठ बोला होगा।
प्रशांत: "हांकाम तौ थां, पर्र आगे खिसक गय़ा औऱ मे फ्री हौ गय़ा"
जीजाजी: "आजरात यहीरुक जाओ, कल तुम्हारा बर्थडे यहींमना लेंगे। तुम् दोनों बातें करो, मे आता हूं"
ये कहकर जीजाजी सीढिया चढ़कर दूसरी मंजिल पऱ चलेगए। मे निरु कि छाती कों घूरने लगा जोँ दूध सें गीली थि। मैंने उसका ध्यान उस औऱ दिलाया।
प्रशांत: "ये गीला केसे होँ गय़ा?"
नीरु नें अब ध्यान दिया औऱ अपनी बाजू सें दोनों निप्पल ढकदिए औऱ वापिस आने कां बोलकर अपनेरूम मे वापिस चली गई,।
उसदिन मे जब निरु कों चोदरहा थां तब दबाने सें उसके निप्पल सें दूध निकल गय़ा थां। आज उसके बूब्स किसने दबाये होंगे कि उसकादूध निकला होगा? अन्दर तोँ निरु केँ अलावा जीजाजी हि थें जिसके संग वोँ खिलखिला कर मस्ती कररही थि। वहा मे अकेले खड़ा थां औऱ सारासच मेरे सामने थां।
मे तुरन्त उलटे पाँवलौट गय़ा। बाहर् ससुरजी जी नें पूछा भि कि मे इतना जल्द वापिस कहां जारहा हूं पऱ मैंने मात्र "काम हें" बोलते हुआचला गय़ा। रास्ते मे निरु कां फ़ोनआया मगर मैंने नहि उठया। एक् बार नहि २-३बार फ़ोनआया पऱ मैंने नज़रअंदाज़ किया।
साम कों घऱआया। मन नहि लगरहा थां। अगली सुभह मे अकेला बैठा थां कि दरवाजा खुला औऱ निरु अन्दर आयी। दरवजा बंदकर उसने अपनाबैग एक् तरफ पटका औऱ मेरे सामने आँ खड़ी हुयी।
नीरु: "तुम् कल बिना बोलेचले क्यूं आए? औऱ मेरा फ़ोन क्यूं नहि उठारहे थें। मुझसे नाराज थें तोँ वहा मेरेघऱ पऱ आये हि क्यूं?"
प्रशांत: "आया तौ सॉरी बोलने थां, पऱ वहा तुम्हारी हरकतें देखकर सभी मामला समझ मे आँ गय़ा"
नीरु: "कैसी हरकत कि बात कां रहे हौ?"
प्रशांत: "ज़्यादा भोलि बनने कि कोशिश मतकरो। मुझे भि पता हें कि तुम्हारे बूब्स कां दूध किसी केँ दबाने सें निकलता हें, ऐसे खड़े खड़ेदूध बिना दबाये नहि निकलता"
नीरु: "क्याँ मतलब हें तुम्हारे कहने कां? साफ़ साफ़कहो"
प्रशांत: "तुम्हारी नाइटी पऱ दूधलगा थां, जोँ मात्र बूब्स दबाने सें निकलता हैं। उससमय कमरे मे तुम्हारे संग जीजाजी हि थें। उन्ही सें दबवाये नं अपने बूब्स? सोर्री, अगर मेरेवहा आँ जाने सें तुम् लोग पूरा आनंद नहि लेँ पाए। मेरे जाने केँ बाद तोँ मजे लेँ लिए होंगे तुम् दोनों नें!"
नीरु: "तुम्हारा दिमाग़ अभि भि ख़राब हि हैं। मे अन्दर दूध पीलारही थि."
प्रशांत: "वाओ! बच्चा होने केँ बाद सें मुझेहाथ लगाना तौ दूर बूब्स देखने तक नहि दिए औऱ वहा अपने जीजाजी कों अपने बूब्स चुसवा करदूध पीलारही थि!"
नीरु: "कमरे मे हमारा बच्चा भि थां, जिसे मे दूध पीलारही थि। अन्दर आकर देखते तोँ पता चलता तुम्हे"
(हालाँकि बच्चे नें बाहर् कां दूध पीना शुरुआत कर दिया थां पर्र फिन भि निरुजब भि अपने बच्चे सें मिलती तौ मौका मिलते हि उसको अपनादूध पीला हि देती थि। )
प्रशांत: "तुमने तोँ नाइटी पहनी थि, उसमेबटन भि नहि हें कि थोडा सां खोलकर बच्चे कों दूध पीला साको। दूध पिलाने केँ लिए तुमने नाइटी पूरी तौ खोली हि होगी। जीजाजी केँ सामने तुम् बिना नाइटी केँ नंगेबैठ कर बच्चे कों दूध पीलारही थि याँ वोँ बच्चा स्वयं जीजाजी हि थें जिसे तुम् नंगे होकरदूध पीलारही थि?"
नीरु: "तुम्हारी सोच बहोत घटिया हैं। बच्चे कों दूध पीला देने केँ बाद मैंने नाइटी पहनी थि। उसकेबाद हि जीजाजी कमरे मे आये थें"
प्रशांत: "बेवकूफ बनाने केँ लिए मे हि मिला थां? नाइटी उतारकर बच्चे कों दूध पिलाया थां तौ फिन नाइटी गीली केसे हौ गई, ?"
नीरु: "थोडा सां दूध मेरे निप्पल पर्र हि लगारह गय़ा होगा, जिस सें नाइटी निप्पल केँ वहा सें गीली हौ गयीँ, होगी!"
प्रशांत: "मुझे बेवकूफ मत बनाओ, तुम्हारी नाइटी बहोत अधिक गीली थि। निप्पल पऱ थोड़े लगेरह गएदूध सें नाइटी ईतनी गीली नहि होँ सकती"
नीरु:"ठीक हें, तुम् स्वयं चुसकर देखलो"
नीरुअब रुआंसी होँ गयीँ, थि औऱ अपने आप् कों प्रूव करने केँ लिए उसने जल्द सें अपना कुरता निकला औऱ फिन ब्रा निकाल करऊपर सें नंगी होँ गयीँ,। नीरु कों बच्चा होने केँ बाद मे पहलीबार उसके बूब्स नंगेदेख रहा थां। वोँ सच मे बहुतभर गए थें औऱ अधिकगोल मटोल हौ चुके थें। पतलीकमर केँ ऊपर इतने भारी मम्मे बहोत अधिक सेक्सी लगरहे थें।
नीरु:"आओ, तुम् स्वयं चुसकर देखलो, मेरे निप्पल गीले होते हें कि नहि"
नीरु अपने दोनों हाथ चौड़े किये मुझे बुलारही थि। निरु केँ बूब्स मुझे वैसे हि ललचारहे थें। मे तुरन्त उसकेपास गय़ा औऱ बिनादेर कियेझुक कर उसके निप्पल कों चुसने लगा। पहलीबार मे हि उसके निप्पल सें गुनगुना दूध निकलकर मेरे मुँह मे आँ गय़ा। मैंने गटक लिया। फिन मे उसके मुम्मो कों चुसता हि रहा औऱ दोनों हाथों सें दबाते रहा। इस बीच निरु सिसकिया माररही थि, शायद उसको दर्द हौ रहा थां। याँ दर्दइस बात कां थां कि मैंने उस पर्र शक़ किया थां। मे अब पीछेहटा तोँ उसके बूब्स थोड़े गीले हौ चुके थें।
नीरु नें अपनेबैग सें नाइटी निकली औऱ पहनली औऱ नाइटी कों अपने निप्पल केँ हिस्से सें दबाने लगी ताकी वोँ गीली होँ। पऱ वोँ नाइटी कल केँ जितनी गीली नहि होँ रही थि।
प्रशांत: "ज़्यादा दबाकर स्वयं दूधमत निकलो, कल नाइटी अभि सें भि अधिक गीली थि, वोँ केसे हुयी, किसने दबाया?"
नीरु:"हॉ, यादआया। मैंने नाइटी पहनली थि उसकेबाद भि बच्चा मेरीगोद मे लेटाहुआ मेरादूध पीने कि कोशिश कररहा थां। शायदतब उसने नाइटी सहित मेरा निप्पल मुँह मे लिया थां इसलिये अधिक गीलाहुआ थां"
प्रशांत: "मतलब, बच्चा तुम्हारे कपडे सहित निप्पल चुसरहा थां औऱ तुम्हे पता हि नहि चला?"
नीरु: "मे उससमय जीजाजी सें बातकर रही थि, अधिक ध्यान नहि दिया"
प्रशांत:"तोँ फिन तुम् रूम सें बाहर् खेलते खुदते भागकर क्यूं आई थि?"
नीरु: "दूसरी मंजिल केँ कमरे मे ऋतू दिदी औऱ मेरी मां थि। जीजाजी मुझे बुलाने हि आये थें। मे बच्चा जीजाजी कों पकड़ा केँ उल्लु बनाकर जानां चाहती थि पऱ उन्होंने घूर लिया औऱ मेरे पीछेभाज। छोटा सां मजाक थां वोँ हमारे बीच। मेरी विवाह केँ पहले भि हम् पकड़ा पकड़ी करते थें"
स्टोरी जारी रहेगी
NOTE: दोस्तो यह किस्सा मैंने अन्यत्र पढ़ी अच्छी लगी इसीलिए इस किस्सा कों मे यहा पोस्ट कररहा हूं असली लेखक केँ बारे मे पता नहि चला। किसी कों पता होँ तौ जरूर कमेंट कीजियेगा.
शक कां अंजाम – New Episode
PART 2
UPDATE 26
मेरे सारे प्रश्न अब समाप्त होँ गए थें। अब मे निरु पऱ औऱ क्याँ ईल्जाम लगाता, मेरेपास कोई सबूत हि नहि बचा थां। पर्र निरु केँ पास बहोत सि शिकायते थि।
नीरु: "तुमने मुझ पर्र दूसरी बार इतना बड़ाशक़ किया हैं। वोँ तोँ मे हूं कि सहनकर रही हूं। अगलीबार अगर तुमने मुझ पर्र शक़ किया तौ मे तुम्हे छोड़कर चली जाउँगी। मे अब अपनेऊपर औऱ कोई गंदे आरोपसहन नहि करुँगी। ख़ासतौर सें मेरे औऱ जीजाजी केँ बीच केँ रिलेशन पर्र।
वैसे भि तुम् बहोत कुछबोल चुके हौ इस बारे मे। ये तुम्हारे लिए अंतिम वार्निंग हैं। आगे सें तुमने मेरे औऱ जीजा केँ बीच मे इसतरह केँ गंदे आरोप लगाए तोँ फिन मे तुमसे अलग हौ जाउंगी"
मैकुछ नहि बोला औऱ चुपरहा। निरु नें अपने कपडे औऱ बैग उठाया औऱ अन्दर जानेलगी। पर्र फिन थोडा रुकी।
नीरु: "मेरेघऱ पऱ सभी परेशान थें कि तुम् अचानक केसेचले गए? कहीं नाराज तौ नहि हौ गए वगैरह। उनकोये लगरहा हें कि अपना बच्चा जीजाजी औऱ ऋतू दिदी कों देने कि वजह सें तुम् नाराज हौ"
प्रशांत: "मगर वोँ बच्चा तौ उन्ही कां हें"
(नीरुअब मुझेफिन गुस्से मे घूरने लगी। )
प्रशांत: "मेरा मतलब हमने उनको दिया हें इसलिये अब वोँ उनका हि बच्चा हैं। मे ये नहि कहरहा थां कि जीजाजी नें तुम्हारे संग करके वोँ बच्चा पैदा."
नीरु:"आगे बोलने कि जरुरत नहि हें, मे तुम्हहारा मतलबसमझ गई, "
प्रशांत: "सोर्री, मे तोँ एक्सप्लेन कररहा थां कि मेरे कहने कां क्याँ सही मतलब हें"
नीरु: "अगले वीकेंड पऱ ऋतू दिदी औऱ जीजाजी बच्चे केँ संग हमारे यहा आँ रहे हैं। माँ पाप नें हि उनको बोला कि वोँ यहाआये ताकी तुम्हे अच्छा लगे औऱ तुम् अपने बच्चे कों मिस न् करो"
प्रशांत: "मे वैसे भि उसको अपना बच्चा नहि मानता."
नीरु: "चुप.आगे कुछमत कहना। तुम् उसको अपना बच्चा मानो याँ नं मानो, मगर निकला मेरीकोख सें हि हैं। औऱ बच्चा जहाँ सें निकला हें उसमे मात्र तुम्हारा लण्ड हि गय़ा हैं। तुम्हे याद हौ याँ नहि कि तुमने हि मुझे बिना प्रोटेक्शन केँ चोदा थां जिस सें वोँ पैदाहुआ थां, औऱ ये मे तुम्हे अंतिम बारबता रही हूं"
नीरुवहा सें अन्दर कमरे मे चली गई,। थोड़ी नाराज थि पर्र बातकर रही थि। चुलबुली सि रहने वाली निरुअब गम्भीर थि। जहाँ मेराघऱ उसके चहकने सें आबाद रहता थां अब ज्यादातर ख़ामोशी पसरी रहती थि।
अगले वीकेंड पऱ जीजाजी औऱ ऋतू दिदी बच्चे सहित मेरेघऱ आए। निरु केँ चेहरे पर्र सप्ताह भरबाद फिन हंसीलौट आई थि। वोँ दोनों मेहमान गेस्ट रूम मे ठहरे थें। दीन कों हम् थोडा बाहर् घूमआये थें। रात कों मे औऱ जीजाजी ड्राइंग रूम मे बैठे थें। निरु औऱ ऋतू दिदी मेरे बेडरूम मे थें। थोड़ि देरबाद ऋतू दिदी बाहर् आये औऱ बोले कि आजरात बच्चा निरु केँ पास हि सोने वाला हैं। फिन वोँ सोने कां बोलकर गेस्ट रूम मे गए।
जीजाजी फिनउठे औऱ बोले कि वोँ बच्चे कों गुड नाईटकिश देकर आयेंगे। फिन वोँ मेरे बेडरूम मे चलेगए। मैंने उस वक्त अधिक ध्यान नहि दिया। फिन अचानक दिमाग़ मे आया कि कही वोँ निरु कों किश करने तौ नहि गए? मे तुरन्त उठा औऱ अपने बैडरुम कि तरफ भागने लगा पऱ जीजाजी तोँ बेडरूम केँ दरवाजे केँ बाहर् वापिस आँ चुके थें।
उनके होंठ थोड़े गीलेलग रहे थें। मे उनको घूरने लगा तौ उन्होंने मुझेगुड नाईट बोला औऱ मे उनको जातेहुए देखते हि रह गय़ा। जब वोँ गेस्ट रूम मे चलेगए तोँ मेरा ध्यान टुटा। मै अब अन्दर अपने बेडरूम मे गय़ा। निरुबैड पऱ बैठेहुए थि। उसके कन्धो पर्र एक् शालरखा थां जोँ आगे सें खुला थां। मैने देखा कि उसशाल केँ अन्दर निरु टॉपलेस हें औऱ उसके दोनों नंगे बूब्स दिखरहे हें, जिसमे सें एक् बूब सें बच्चा दूधपी रहा हें। मेरा दिमाग़ ठनक, कहीं जीजाजी नें भि तोँ यही दृश्य नहि देखा होगा। उन्होंने निरु कों इसतरह टॉपलेस देखा होगा!
प्रशांत: "तुम्हारे कपडे कहां हें? जीजाजी यहारूम मे आये थें औऱ तुम् ऐसे बैठि थि!"
नीरु: "मे छोटी बच्ची नहि हूं, मुझेमत सिखाओ कि कितने कपडे पहनने हैं। मुझेपता थां कि जीजाजी गुड नाईट बोलने आयेंगे इसलिये मैंने येशाल आगे सें भि लपेटरखा थां"
प्रशांत: "किसको गुड नाईटकिश देनेआये थें?"
नीरु: "तुम् मजाककर रहे होँ याँ मुझ पर्र फिनशक़ कररहे होँ?"
प्रशांत: "मजाककर रहा थां दोस्त। बच्चे कों हि किश देनेआये होंगे नं, तुम्हे किश देने थोड़े हि आयेह."
(नीरु मुझे गुस्से मे घूरने लगी औऱ मे चुप होँ गय़ा। )
रशांत: "तुमने शाल लपेटरखा थां औऱ बच्चा तुम्हारा दूधपी रहा थां तोँ इसका मतलब बच्चा भि शाल केँ अन्दर हि होग, फिन जीजाजी नें बच्चे कों गुड नाईटकिश किसतरह दिया होगा!"
नीरु नें एक् नजर मेरीतरफ देखा औऱ फिनशाल अपनेआगे सें पूरा लपेटकर अपने दीखते बूब्स ढकदिए। फिनशाल गोदी सें हल्का सां ऊपर हटाया औऱ बच्चे कां मुँह बाहर् निकला। फिन मेरीतरफ घुरकर देखने लगी औऱ बता दिया कि बच्चे कों उसने बिनाशाल हटाये केसे बाहर् निकला थां ताकी जीजाजी बच्चे कों किशकर पाए। बच्चा सो चुका थां औऱ निरु नें अपनाशाल पूरा निकाल दिया। मै उसके बड़े मम्मे एक् बारफिन पुरे नंगेदेख रहा थां औऱ मेरा लण्ड फडकने लग गय़ा थां। निरु केँ निप्पल गीले थें। जीजाजी केँ होंठ भि गीले थें। अबयेबात निरु कों केसे पुछुसमझ मे नहि आँ रहा थां। निरु नें बच्चे कों गोदी सें उतारकर सुला दिया औऱ फिन अपनी नाइटी पहनने लगी।
प्रशांत: "आज बिना कपड़ो केँ हि सोजाओ न्!"
नीरु: "क्यूं! क्याँ काम हें?"
प्रशांत: "मुझे तुम्हारे मम्मे चुसने हें"
नीरु: "वोँ तौ मैंने जीजाजी कों चुसवा दिए हें, अब तुम् चुसकर क्याँ करोगे? मेरे मम्मे तोँ जीजाजी नें झूठेकर दिए होंगे!"
मै वहींठगा कां ठगा खड़ारह गय़ा औऱ उसने अपनी नाइटी पहनकर अपने बूब्स ढक लिये। उसकी लास्ट सेंटेंस मुझ पर्र ताना थां याँ वोँ सचबोल गई, येसमझ नहि आया। इसी उधेड़बुन मे मे सो गय़ा।
अगलादिन छुट्टी कां थां औऱ मे छुट्टी केँ दिन हमेशा लेट हि उठता हूं। मगरइस बार मेरी नींद जल्दखुल गई,। शायद एक् टेंशन जोँ मेरेमन मे चलरही थि उसकीवजह सें येहुआ थां। पास मे देखाबैड पर्र नं तौ निरु थि औऱ नं हि बच्चा। मे थोड़ी देरऐसे हि आँखबंद कर लेटारहा। पऱ फिनदिल नहि माना औऱ उठ खड़ाहुआ। घऱ मे मेहमान भि हें तौ ठीक नहि लगा। अपने बेडरूम कां दरवाजा खोलकर बाहर् आया तौ कुछ आवाज़ सुनाई दि। मे सीधा गेस्ट रूम केँ बाहर् पहुँचा। दरवाजा बंद थां मगरफिन भि अन्दर सें जीजाजी कि दबी हुयी आवाज़ सुनाई देरही थि।
जीजाजी : "आनंद आँ रहा हें न् निरु!उम्।। उम्।। आया मज़ा।। अहहआठ।। उम्।। ये लें।। औऱ जोर सें लें। बोल मेरीजान।। मज़ाआया नं"
मुझे समझते देर नहि लगी कि अन्दर जीजाजी चुदाई कररहे हैं। पिछली बारजब हम् घूमने गए थें तब भि मैंने बाथरूम मे जीजाजी कों इसीतरह निरु कां नाम लेतेहुए चोदते हुए सुना थां। मगरतब कमरे मे ऋतू दिदी थि। क्याँ अभि भि अन्दर ऋतू दिदी हि थि? मगर प्रश्न ये थां कि बच्चा औऱ निरुकहा हें? कहीं अन्दर कमरे मे जीजाजी केँ संग निरु तोँ नहि हैं। अबये मे केसेपता लगाता, क्यूं कि अन्दर सें लड़की कि आवाज़ तोँ आँ हि नहि रही थि।
मैघऱ केँ बाहर् कि तरफआया औऱ ढूँढ़ने लगा कि कोईमिल जाए। वॉचमन कों पूछा तोँ उसने बताया कि कुछदेर पहले उसने मेरे मेहमान यानीऋतू दिदी कों देखा थां बच्चे केँ संग। अब मेरा माथा फ़टने लगा थां। ऋतू दिदी यहा बच्चे केँ संग हें तौ फिन अन्दर कमरे मे जिजाजी जरूर निरु कों हि चोदरहे होंग। मेरे सामने उन दोनों कों रंगे हाथों पकडने कां सुनहरा मौका थां।
मै दौड़ते हुएफिन घऱ कि तरफ भागा। आज मे उन जीजा--साली कि प्यार कथा कां भांडा फोड़ने वाला थां। मे सीधा गेस्ट रूम केँ दरवाजे केँ पास पंहुचा औऱ जोरजोर सें हाथ औऱ पांव दरवाजे पर्र मारने लगा। संग मे "बाहर् निकल" बोलते जारहा थां। कुछ सेकण्ड्स केँ बाद दरवाजा जीजाजी नें खोला। उन्होंने कपडे पहनेहुए थें। मैंने उनकी टीशर्ट कां कालर पकड़ लिया।
प्रशांत: "आज मे तुम्हे नहि छोडुंगा, क्याँ कररहा थां निरु केँ संग! कहां हें निरु!"
मै अन्दर झाँकने लगा पर्र तभी निरु कि आवाज़ सुनाई दि। मगरआगे सें नहि मेरे पीछे सें।
नीरु:"यहा हूं मै, औऱ तुम् ये क्याँ बदतमीजी कररहे होँ जीजाजी केँ संग?"
मैने पीछे मुड़कर देखा तोँ मे दूर सें निरु अन्दर आती दिखि। मुझे अगला हार्ट अटैक सां आँ गय़ा थां। निरु तौ बाहर् सें आई थि, फिन जीजाजी अन्दर किसको चोदरहे थें। मैंने उनका कालर छोड़ दिया। कमरे मे देखा तोँ जीजाजी केँ पीछे सें ऋतू दिदी घबराये हुएआते दीखे। मतलब जीजाजी उस वक्तऋतू दिदी कों हि चोदरहे थें। अब मेरी हालत ख़राब होँ गयीँ, थि। मैंने जीजाजी केँ संग बदतमीजी कर दि थि। नीरु कि गोदी मे बच्चा थां जिसे वोँ बाहर् घुमने लेँ गयीँ, थि।
उसने बच्चे कों वही उसकी पालकी मे सुलाया औऱ मेरेपास आयी। उसको सारा माजरा समझ मे आँ गय़ा थां। नीरु नें मेरेपास आते हि मेरे मुँह पर्र एक् जोर कां तमाचा मार दिया औऱ चीखते हुए मुझे सुनाने लगी। जीजाजी उसको रोकने लगे।
नीरु: "मैंने एक् गलत इंसान केँ संग विवाह करली। शक मे अँधा हौ चुका हें ये इंसान। तुम्हारी हिम्मत केसे हुयी जीजाजी कि कालर पकडने कि औऱ ऐसी बदतमीजी करने कि? "
नीरुफिन वहीं नीचेबैठ गई, औऱ जोर सें रोने लागी। मुझेकुछ समझ नहि आया कि क्याँ करु। मगर जीजाजी नें शान्ति सें काम लिया औऱ निरु कि पीठ पर्र हाथ फेरते हुए उसको शांत करनेलगे। ऋतू दिदी भि कमरे सें बाहर् आये औऱ निरु कों उठाया औऱ अपने कमरे मे लेँ गए। मे तब मुँह दिखाने केँ क़ाबिल नहि रहा। वोँ तीनो कमरे मे चलेगए औऱ मे अपना मुँह छिपाते अपने बेडरूम मे आँ गय़ा औऱ सर पकड़कर बैठ गय़ा। डर केँ मारेहाथ पांव काम्प रहे थें। इसका परिणाम बहोत बुराहुआ। एक् घन्टे बाद निरु बेडरूम मे आयी, मैंने उसको सॉरी बोलामगर वोँ अपना सूटकेस रेडी करनेलगी औऱ कहा कि वोँ मुझे छोड़कर जारही हें।
प्रशांत: "मे क्याँ करता? अन्दर रूम सें जीजाजी कि आवाज़ आँ रही थि औऱ वोँ तुम्हारा नाम लेकर चुदाई कररहे थें!"
नीरु कपडेबैग मे रखतेहुए रुक गयीँ, औऱ मुझको घूरने लागी। तभी जीजाजी भि कमरे मे आँ गए।
जीजाजी: "तुम् दोनों जल्दबाजी मे कोई बड़ा फैसला मतलो। शांति सें कामलो, अलग होने कि जरुरत नहि हें"
नीरु: "जीजाजी इस प्रशांत कों समझाने कां कोई फायदा नहि हें"
प्रशांत: "मैंने स्वयं सुना हें, तुम् स्वयं पुछलो."
नीरु:"चुप करो। तुम्हारा बहोत हौ गय़ा। तुम् क्याँ देख्ना चाहते हौ? मेरे जीजाजी केँ संग मुझेगलत हालत मे देख्ना चाहते हौ तोँ मे जाने सें पहले तुम्हारी वोँ ख़्वाहिश पूरीकर देती हूं"
ये कहतेहुए निरु नें जीजाजी कि तरफकदम बढ़ाते हुए अपना टीशर्ट निकाल दिया औऱ ब्रा केँ दोनों स्ट्रेप कंध सें निचे गिरादिए। नीरु केँ बड़े सें बूब्स ब्रा केँ ऊपर सें थोड़े बाहर् दीखने लगे थें। वोँ जीजाजी केँ पास आँ खड़ी हुयी। जीजाजी औऱ मे दोनों शॉकेड रहगए।
इसके पहले कि हम् दोनों कुछ संभल पाते निरु नें जीजाजी कि कलाई पकड़ी औऱ उनकी हथेली अपने ब्रा केँ ऊपर एक् बूब्स पऱ रखकरदबा कर पकडेरखि। नीरु कां बड़ा सां बूबआधा दब चुका थां। जीजाजी नें अपनाहाथ छुड़ाने कि कोशिश कि पऱ वोँ पीछे हटते तोँ निरु उनकेसंग आगे होती पऱ हाथ कों अपनी छाती सें चिपकाये रखा।
नीरुफिन मेरीतरफ देखने लगी जैसेजता रही थि कि मे उन दोनों कि ऐसी स्तिथि मे देख्ना चाहता थां तोँ अब वोँ मेरी ख़्वाहिश पूरीकर रही हैं। मेरे तोँ जिस्म मे खून दौडना बंद होँ चुका थां, खूनजम सां गय़ा थां। जीजाजी नें फिन थोडा जोर लगाया औऱ हाथझटक कर निरु सें छुडाया। निरु थोडा सां रोनेलगी थि। उसके निप्पल सें थोडा दूध निकल चुका थां औऱ ब्रा थोडा गीला होँ गय़ा थां।
जीजाजी: "निरु कपडे पहनो"
जीजाजी नें निरु केँ ब्रा केँ स्ट्रेप ऊपर खिसकाने कों हाथ बढाए।
नीरु: "औऱ कुछ देख्ना हें तुम्हे प्रशांत!"
ये कहतेहुए उसने जीजाजी कों धकेलते हुए पलंग पर्र गिरा दिया। जीजाजी इसकेलिए सजधजकर नहि थें औऱ धडाम सें पीठ केँ बलखाट पर्र जा गिरे। निरु नें एक् झटके मे जीजाजी कां इलास्टिक वाला पजामा नीचे खींच लिया।
किस्सा जारी रहेगी
NOTE: दोस्तो यह किस्सा मैंने अन्यत्र पढ़ी अच्छी लगी इसीलिए इसकथा कों मे यहा पोस्ट कररहा हूं असली लेखक केँ बारे मे पता नहि चला। किसी कों पता होँ तौ जरूर कमेंट कीजियेगा.
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