शक कां अंजाम – New Episode
शक कां अंजाम
PART 2
UPDATE 27
जीजाजी उठ बैठेमगर निरु नें फिन सीने पऱ धक्का मार उनको लेटा दिया औऱ जल्द सें जीजाजी कि अंडरवियर कों नीचे खींच कां उनकानरम पड़ा लण्ड पकड़ लिया औऱ रगडने लगी। मेरे पसीने छुटने लगे थें कि मे निरु कां कौनसा रूपदेख रहा थां। जीजाजी निरु केँ सर पऱ हाथलगा कर उसकोदूर करने कि कोशिश कि। निरु नें लण्ड छोड़ा औऱ मेरीतरफ नजरेकर बुरीतरह रोतेहुए देखा।
नीरु:"यही देख्ना थां तुम्हे, अभि ख़ुशी मिली?"
जीजाजी अबउठगए औऱ निरु सें अपना लण्ड छुडाया। औऱ निरु कों डाटते हुए कपडे पहनने कों बोले औऱ इसतरह कि नादनी नहि करने कों बोले। नीरु नें अपना लोअर निकला औऱ नीचे सें पैंटी मे आँ गयीँ,। जीजाजी नें अपनी नजरे दूसरी तरफकर ली औऱ उसको कपडे पहनने कों बोले।
केवल ब्रा औऱ पैंटी मे निरु कां हसीन सेक्सी जिस्म मे देखपा रहा थां। पलंग पर्र बैठे बैठे हि निरु नें दूसरी तरफदेख रहे जीजाजी कां टीशर्ट पकड़ अपनीतरफ घुमाकर खींच लिया। निरुअब खाट पऱ नीचे लेटी थि औऱ जीजाजी बैलेंस खोकर निरु पऱ जा गिरे। जीजाजी फिन सम्भाले औऱ उठनेलगे।
थोडा उठे हि थें कि उनका टीशर्ट पकडे निरुउन पऱ झुल गई, औऱ उनको अपनीतरफ रोतेहुए जोरलगा कर खिंचा। जीजाजी नें एक् जोर कां थप्पड़ निरु कों लगा दिया। निरु केँ हाथ सें जीजाजी केँ टीशर्ट कि पकड़छूट गई, औऱ निरु धडाम सें पलंग पर्र औंधे मुँहजा गिरि औऱ बैड मे मुँह घुसाये सुबकते हुए रोनेलगी।
जीजाजी नें आज तक निरु सें ऊँची आवाज़ मे बात तक नहि कि थि औऱ आज उसकोजोर कां थप्पड़ मार दिया थां। औऱ उसकीइस हालत कां जिम्मेदार केवल मे थां। इतनाशोर सुनकर ऋतू दिदी आँ गए। ऋतू दिदी नें निरु कि हालत देखि। ऊपर सें आधा खुला ब्रा, नीचे सें केवल पैंटी मे निरुआधि नंगी होकरबैड पऱ उलटा लेटी थि। ऋतू दिदी नें एक् चादर लेकर निरु पऱ ढक दिया।
जीजाजी अभि भि दूसरी तरफदेख कर हाफ़रहे थें। फिन तेजी सें कमरे सें बाहर् चलेगए। थोड़ी देर निरु कि पीठ पर्र हाथ फेरने केँ बादजब निरु थोडा शांत हुयी तोँ ऋतू दिदी कमरे सें बाहर् चली गई,। मे वहा इतनीदेर सें मूर्ति बनकर हि खड़ा थां। निरु कां आजऐसा रूप देखा थां जिस पर्र मुझे विश्वास नहि हुआ।
जीजाजी औऱ ऋतू दिदी बच्चे सहित मेरेघऱ सें चलेगए। निरु बहुतदेर तक ऐसे हि बैड पऱ पड़ी रोतीरही। मेरी उसकेपास जाने कि हिम्मत नहि होँ रही थि। वोँ खड़ी होकरउठी औऱ अपने कपडेपहन करबैग पैक करनेलगी। नीरु मुझे छोड़कर अपने मायके चली गई,। निरु तोँ वापिस नहि आई पऱ थोड़े दिनबाद तलाक कां नोटिस जरूर आँ गय़ा। घऱ मे मेरे माँ पाप नें मुझे बहोत डाटा। उन्होंने निरु कों मनाने कि कोशिश भि कि थि पर्र निरु मेरेसंग अब औऱ नहि रहना चाहती थि।
फिन मुझेपता चला कि निरु मेरेशहर मे लौटआई हें क्यूं कि उसकी नौकरी तोँ यहीं पर्र थि। वोँ रेंट पऱ कहींअलग रहरही थि। वोँ मेरा फ़ोन भि नहि उठारही थि। दूसरे फ़ोन सें करता तोँ मेरी आवाज़ सुनकर फ़ोनरख देती। एक् दिनहार कर मे उसके दफ़्तर केँ बाहर् साम कों पहुच गय़ा। मुझेदेख उसने अपना मार्ग बदला पर्र मैंने उसकोरोक हि दिया। वो कुछलोग हमें देखने लगे। वहा तमाशा बनता इसलिये निरु मेरेसंग चलनेलगी। हम् लोगअब चलतेहुए बात करनेलगे।
प्रशांत: "आईऍम सोर्री, सभी मेरी हि गलती हैं। अब मे तुम् पर्र कभीशक़ नहि करुँगा, तुम् मेरी ज़िन्दगी मे फिनलौट आओ"
नीरु: "वोँ तौ अबकभी नहि हौ सकता। तुम्हारी वजह सें उसदिन केँ बाद सें जीजाजी नें मुझसे बात करना तक बंदकर दिया हें"
प्रशांत: "मे जीजाजी कों सभीसच बता दूंगा औऱ उनसे माफ़ी मांग लुँगा औऱ उनकोमना लुँगा कि वोँ तुमसे फिनबात करनेलगे"
नीरु: "औऱ अपनीआदत कां क्याँ करोगे? वोँ तौ कभी सुधरने वाली नहि हैं। इतना समझाया फिन भि शक़ करतेरह। अब क्याँ लगता हें तुम्हे? मेरे औऱ जीजाजी केँ बीचकुछ हें?"
प्रशांत: "अब औऱ शर्मिंदा मतकरो। मे पाँव पकड़कर माफ़ी माँगने कों सजधजकर हूं। मे तुम्हारे बिना नहि जी सकता। तुम्हारे बिनाघऱ काटने कों दौड़ता हें दोस्त। वापिस लौटआओ"
नीरुआगे बढ़ गई, औऱ चली गई,। मे लगातार कुछदिन तक एक् फूल लेकर उसका उसके दफ़्तर केँ बाहर् इन्तेजार करता औऱ उसकोफूल देकर मनाने कि कोशिश करता। आखिर इतने दिनों कि मेरी म्हणत रंग लायी।
नीरु: "तुम् अगरसभी कुछ पहले केँ जैसाकर दो तौ मे मान जाउँगी। तुम् पहले जीजाजी कों मनलो"
मै ख़ुशी केँ मारे निरु कों गले लगाना चाहता थां पऱ उसनेरोक दिया। मुझे पहले जीजाजी कों मनाना थां।
प्रशांत: "मे जीजाजी कों मना लुँगा, सभी पहले जैसा हौ जायेगा"
नीरु: "उसके पहले तुम् एक् सचजान लो। उसकेबाद भि तुम्हे लगता हें कि तुम्हे मेरेसंग रहना हें तौ ठीक हें। "
प्रशांत: "कैसासच?"
अब निरु नें अपने पिछली कथा बतानी शुरुआत कि।
जब निरु१४ साल कि थि तबऋतू दिदी औऱ नीरज जीजाजी कि विवाह हुयी थि। उस टीनएज (कुमार अवस्था) मे निरु भि जीजाजी कि तरफ आकृस्ट हुयी थि। उसको जीजाजी मे हीरोनजर आता थां। निरु कि कुछ कहने कि हिम्मत नहि होती थि पऱ वोँ जीजाजी केँ प्रेम मे पड़ चुकी थि। मगर जीजाजी बातबात मे निरु कों "बच्ची हें", "छोटी हें" बोलते रहते थें। ये सुनकर निरु कों बहोत बुरा लगता थां। वोँ बेसब्री सें इन्तेजार करनेलगी कि कब वोँ बड़ी होगी औऱ जीजाजी सें अपने प्रेम कां इजहार करेगी।
जिसदिन निरु१८ इयर्स कि हुयी वोँ सुभह रेडी होकरऋतू दिदी केँ घऱ पहुच गई,। दरवजा खुला हि थां वोँ सीधा अन्दर गई,। ड्राइंग रूम खाली थां औऱ वोँ बेडरूम मे चली गयीँ,। जीजाजी पलंग पऱ बैठे थें। निरु कों वो देखते हि खुश होकर उसको बर्थडे विश किया। मगर निरु केँ इरादे कुछ औऱ थें। नीरु नें जीजाजी केँ सामने हि अपना कुरता निकाल दिया औऱ ब्रा मे खड़ी हौ गयीँ,। फिन निरु नें जीजाजी कों बोला कि
"देखो मे बड़ी होँ गई, हूं"
निरुफिन जीजाजी कि तरफ बढ़ी जोँ सकते मे आकरअब तक खड़े हौ चुके थें। नीरु जीजाजी केँ सामने बाहें फैलाकर खड़ी होँ गयीँ,। तभी जीजाजी नें पहलीबार निरु कों थप्पड़ मारकर कपडे पहनने कों बोला थां औऱ कमरे केँ बाहर् चलेगए। निरुवही जमीं पर्र गिर पड़ी औऱ रोनेलगी थि। नीरु नें कपडेपहन लिए औऱ बाद मे ऋतू दिदी नें निरु कों समझाया। निरु कों थोडा वक्तलगा पर्र उसकोअकल आँ गयीँ, कि क्याँ ठीक हें औऱ क्याँ गलत हैं।
जीजाजी तब भि कुछदिन तक निरु सें नाराज रहे थें औऱ बाद मे ऋतू दिदी कि सहायता सें रिलेशनशिप नार्मल हुआ। नीरु नें जीजाजी सें सॉरी बोला थां औऱ आगे सें ये गलती नं करने कि शपथखा ली थि। फिन उनके रिश्ते सामान्य हुये। निरु कों भि पताचला कि ये उसकी नादनी थि औऱ बचपने कि ज़िद थि। फिन निरु समजदार बन गयीँ,। फिन उसकी मेरेसंग विवाह हुयी तौ उसकोपता चला कि उसका असली पार्टनर मे हि हूं।
नीरु कि ये किस्सा सुनकर मेरे भि होशउड़ गए थें। निरु कि ज़िन्दगी कां जौ कभी न् भुलने वाला हादसा थां वोँ मेरीवजह सें फिन रिपीट हुआ थां। मगर सबसे अधिक ख़ुशी इसबात कि थि कि जीजाजी कां करैक्टर अच्छा साबित हुआ थां। निरु कि गलती कों मैंने ध्यान न देना करना हि ठीकसम। क्यूं कि अब वोँ समझदार होँ चुकी थि औऱ रिश्तो कि मर्यादा पता थि।
नीरु: "मे किसी टाइम जीजाजी कि तरफ अट्रक्टेड थि। वोँ मेरा बचपना थां। पऱ अब वैसाकुछ नहि हैं। मैंने अपने आप् कों केवल तुम्हे सौंप दिया। तुम् जीजाजी पर्र इसतरह केँ आरोपलगा रहे थें जब कि ऐसाकुछ हें हि नहि उनकेदिल मे। तुम् मेरी अभि भि हेल्प करोगे?"
प्रशांत: "वोँ तुम्हारा पास्ट थां औऱ कम उम्र कि छोटी सि भूल थि। मे तुम्हारी औऱ जीजाजी कि दोस्ती फिन सें करवा दूंगा"
अगली छुट्टी पर्र मे ऋतू दिदी औऱ जीजाजी केँ घऱ पहुंच। ऋतू दिदी नें मेरा वेलकम किया। मैने जीजाजी औऱ ऋतू दिदी सें माफ़ी मांगली औऱ कहा कि निरु मेरेपास वापिस आने कों रेडी हें पर्र उसकेलिए जीजाजी कों निरु कों क्षमा करना होगा औऱ फिन सें पहले वाले रिलेशन बरकरार रखने होंगे। ऋतू दिदी नें भि जीजाजी सें रिक्वेस्ट कि टाकी वोँ मानजाए। जीजाजी नें ऋतू दिदी कों कहा कि वोँ मुझसे अकेले मे बात करना चाहते हैं। ऋतू दिदी अन्दर चलेगए।
जीजाजी: "तुम्हे मुझ पऱ शक़ थां नं कि मे निरु पर्र बुरी नीयत रखता हूं औऱ उसका फायदा उठाने कि कोशिश करता हूं?"
प्रशांत: "मे उसकेलिए माफ़ी मांग चुका हूं, एक् बारफिन सॉरी बोलते हूं। मे गलत थां, मगरअब शक़ नहि करूँगा"
जीजाजी: "नहि, तुम् सही थें औऱ तुम्हारा शक़ठीक हि थां"
प्रशांत: "आप् मेरा मजाक उड़ारहे हें, आप् अभि भि मुझसे नाराज हौ?"
जीजाजी: "नहि मे सीरियस हूं। निरुजब मुझसे गले लगती हें तोँ सच मे मुझे बहोत अच्छा लगता हैं। मे भि चाहता हूं कि वोँ मुझसे बारबार चिपके। वोँ मुझे सीधा समझती हें पर्र मे हूं टेढा। मे उसकासच मे फायदा उठाना चाहता हूं, पऱ कभीउठा नहि पाया"
प्रशांत: "ये आप् क्याँ कहरहे हें?"
जीजाजी: "तुमने सच हि सुना थां। निरु केँ संगकभी कुछ करने कां मौका नहि मिला वार्ना अब तक उसकोचोद चुका होता"
मैन अब सदमे मे थां। निरु नें जौ कहानी बतायी उसके हिसाब सें जीजाजी अच्छे चरित्र केँ हैं। ग़लती केवल निरु नें कि थि।
प्रशांत: "निरु नें मुझे बताया थां कि जब वोँ १८बरस कि हुयी तौ वोँ स्वयं आपके सामने रेडी थि, फिन आपने फायदा क्यूं नहि उठाया?"
जीजाजी: "उसदिन पहलीबार निरु कों अन्दर केँ कपड़ो मे देखकर मे पागल होँ गय़ा थां। उसीदिन सोच लिया थां कि एक् बार निरु कों चोदना हैं। मे तोँ सजधजकर थां, पर्र बेडरूम केँ खुले दरवाजे केँ बाहर् दूर सें मुझेऋतू रसोई केँ दरवाजे पऱ खड़ीदिख गयीँ, थि। वोँ हमें हि देखरही थि। अगरउस दिनघऱ मे ऋतू नहि होती तोँ मेरेदिल केँ अरमान उसीदिन पुरे होँ जाते"
इसका मतलबये थां कि निरु अभि तक जीजाजी कों यु हि अच्छा इंसान समझती थि। अन्दर सें तोँ वोँ जीजाजी भि भेडिया हि थां जोँ निरु कों मौका मिलते हि दबोचाना चाहता थां।
जीजाजी: "उस वक्त तौ मैंने ऋतू केँ सामने अच्छा बनतेहुए निरु कों थपप्पड़ मार दिया। सोचा थां कि बाद मे निरु कों अकेले मे पकड़कर चोद दूंगा। मगरऋतू नें निरु कों ऐसी पट्टी पढ़ाई कि निरु कों अकल आँ गयीँ,। फिन मेरीकभी हिम्मत नहि हुयीआगे बढ़कर निरु कों पुछु कि मे उसको चोदना चाहता हूं"
प्रशांत: "औऱ मैंने जोँ आपको निरु कां नाम लेतेहुए ऋतू दिदी कों चोदते हुए सुना थां वोँ!"
जीजाजी: "सही सुना तुमने। निरु कां नाम लेकरऋतू कों चोदता हूं औऱ अपनेमन कों थोड़ी तसल्ली देता हूं"
प्रशांत: "ऋतू दिदी कों येसभी पता हें? आप् निरु कां नाम लेकरऋतू दिदी कों चोदते हॉ, ऋतू दिदी इसकेलिए केसे मानी?"
जीजाजी: "बड़ी मुश्किल सें मानीऋतू इसके लिये। मैंने उसकोकहा कि येखेल हि तोँ हें, फिनजब मे उसको निरु कां नाम लेकर चोदता थां तौ उसको भि अधिक मज़ाआता थां इसलिये हम् करते रहते हैं। ऋतू कों भि शायदलगा कि मे निरु कि जवानी देखकर बहक सकता हूं, इसलिये रोले प्ले केँ लिएमान गयीँ, "
प्रशांत: "तोँ आपने निरु केँ संग भि कुछ किया"
जीजाजी: "अभि तक तोँ नहि किया पऱ करना हैं। जिसदिन मुझेपता चला कि तुमने मेरी पत्नि ऋतू कों चोदा थां उसदिन मे तुमसे डील करने वाला थां। पर्र मुझेपता थां कि निरुकभी नहि मानेगी"
प्रशांत: "तोँ फिन मेरेघऱ पऱ उसदिन जब निरु आपकेसंग कुछ करना चाहती थि तोँ उसको क्यूं रोका!"
जीजाजी: "वोँ तौ केवल तुम्हे दिखाने केँ लिएकर रही थि। उसकेमन मे मेरेलिए अबकुछ नहि हें, ये मुझेपता थां"
प्रशांत: "मतलब मेरा आप् पऱ शक़सही थां। मे फ़ालतू हि निरु पऱ भि शक़ करतारह। अब मे आपको एक्सपोज करके रहूँगा"
जीजाजी: "केसे करोगे? तुम्हारी बात कां विश्वास कौन करेगा? मे निरु कों दोबार थप्पड़ मारकर दूरकर चुका हूं। निरु नें तौ तुम्हे यहा इसलिये भेजा हें कि तुम् मुझेमना पाओ। वोँ तुम्हारी बात कां विश्वास क्यूं करेगी?"
जीजाजी कि बातसही थि। जीजाजी पर्र शक़ करने कि वजह सें निरु नें मुझे तक छोड़ दिया थां तोँ वोँ अब मेरीबात कां यक़ीन कभी नहि करेगी कि जीजाजी करेक्टरलेस व्यक्ति हैं। मे अबफ़स चुका थां। पहलेपता होता तोँ फ़ोन मे रिकॉर्डिंग चालूकर देता।
जीजाजी: "अब तुम् सोचरहे होगे कि मैंने तुम्हे येसच क्यूं बताया? उसदिन गुस्से गुस्से मे निरु नें मेरे कपडेखोल कर मेरा लन्ड पकड़ा थां। तुम्हे बता नहि सकता मुझे कितना मज़ाआया थां। मे तौ आगे बढ़कर निरु कों जबरदस्ती चोद नहि पाऊंगा क्यूं कि मे उसका विश्वास हमेशा केँ लिएखो दूंगा। मगरअब तुम् मेरी इसमें सहायता करोगे"
प्रशांत: "मे तुमको एक्सपोज करुँगा, न् कि सहायता करूँगा"
जीजाजी: "जब तक तुम् मुझे नहि मनाओगे तब तक निरु तुम्हारी ज़िन्दगी मे वापिस नहि आएगी। अगर तुम्हे निरु वापिस चाहिए तोँ एक् बार मेरी सहायता करदो ताकी मे निरु कों चोद पाऊं"
प्रशांत: "कमीने इंसान!! मे तेरे गंदे इरादे कभी पुरे नहि होने दूंगा"
जीजाजी: "ठीक हें फिन तुम् निरु कों भूलजाओ। आज नहि तोँ कल मे किसीतरह निरु कों चोद हि लुंगा। अकेलि लड़की हें, मुझ पऱ अँधा भरोसा भि करती हैं। मौका मिलते हि मे वैसे हि उसकोचोद दूंगा। "
प्रशांत: "निरु नं सही पऱ ऋतू दिदी मेरीबात कां विश्वास करेगी। मे उनको तुम्हारी सारी सच्चाई बताऊँगा"
जीजाजी: "कोसिश करकेदेख लो। तुम्हारी इमेज बिगड चुकी हैं। तुम्हारा कोई विश्वास नहि करेगा"
मैनेऋतू दिदी कों आवाज़ लगायी। वोँ कमरे मे वापिस आयी।
प्रशांत: "आपकोपता हें ये कितना कमीना इंसान हैं। निरु केँ बारे मे क्याँ सोचता हें ये जानकार."
ऋतू दिदी: "चुप होँ जाओ प्रशांत। इतना होने केँ बाद भि मैंने तुम्हारा कितना सपोर्ट किया औऱ फिन भि तुम् वहींराग अलापरहे होँ!"
ऋतू दिदी फिन सें उदास होकर अन्दर कमरे मे चलेगए।
जीजाजी: "प्रशांत तुम्हे निरु चाहिए याँ नहि? चलो एक् डील करते हैं। तुम् बस एक् बार निरु कों चोदने मे मेरी सहायता करो, निरुफिन हमेशा केँ लिए तुम्हे मिल जाएगी। वैसे भि तुमने एक् बार मेरी पत्नि ऋतू कों चोदा थां याद हें! अब उसकी भरपायी करने कां वक्त आँ गय़ा हें"
मै अपने आप् कों बहोत अकेला महसूस कररहा थां। मुझेसभी सचपता थां पऱ फिन भि मे कुछकर नहि सकता थां। मेरीबात कां कोई विश्वास करने कों सजधजकर नहि होगाये मुझे अहसास हौ चुका थां। अगर मे जीजाजी कि बात नहि मानुगा तोँ निरु मेरेपास नहि आएगी। जीजाजी जैसा कमीना इंसान केसे नं केसे करके निरु कां फायदा तौ उठा हि लेगा। मुझे हि अब निरु कों बचाने थां, औऱ उसका एक् हि तरीका थां कि निरु पहले मेरेपास आँ जाए।
प्रशांत: "मुझेये डील मंजूर हें"
जीजाजी अपनी कुर्सी सें उठ खड़ेहुए औऱ मेरे सें हाथ मिलाया। मे उस इंसान कों छुना भि नहि चाहता थां पऱ मज़बूरी मे उस सें हाथ मिलाना पड़ा।
जीजाजी: "अगले वीकेंड मे तुम्हारे घऱ आँ रहा हूं। निरु कों तुमसे मिलवा दूंगा। पर्र अपना वादामत भूलना। याद रखना निरु कां भरोसा मुझ पऱ अधिक औऱ तुम् पऱ कम हैं। अगर मुझसे चीटिंग कि तौ मे निरु कों तुमसे फिनछीन लूंगा"
मैअबवहा सें चलाआया। मुझेउस कमीने जीजाजी कों एक्सपोज करना थां। मुझे किसी भि तरह सबूत इकठ्ठा करना थां औऱ निरु कों दिखाना थां। वार्ना मेरीबात वोँ नहि मानेगी। मैने निरु कों इन्फोर्म कर दिया कि जीजाजी नेक्स्ट वीकेंड आँ रहे हैं।
इसबीच पूरेवीक मे परेशान रहा कि ये कमीना जीजाअब क्याँ करने वाला हें? वोँ मेरी सहायता सें केसे निरु कां फायदा उठायेगा ये मेरीसमझ सें बाहर् थां। येबात तौ पक्की होँ गई, थि कि जीजा कमीना हें औऱ निरु एक् दम साफ़ हैं। अबबस इंतजार थां वीकेंड कां जब जीजा मेरेघऱ आने वाला थां। वोँ दिन भि आँ हि गय़ा।
सैटरडे कों डोरबेल बजी। दरवजा खोला तौ देखा निरु थि। उसके चेहरे पर्र एक् टेंशन थि। निरु नें आज साड़ी पहनरखी थि। वोँ हलकी नीली साड़ी जौ उसके जीजाजी कि फेवरेट थि। मैंने उसको बैठाया। उसके ब्लाउज केँ पीछे कि खिड़की सें उसकी नंगी गोरीपीठ दिखरही थि। उसके होंठों पर्र लाल लिपस्टिक लगी थि। बहुत टाइमबाद उसको साड़ी मे देखरहा थां। बच्चा होने केँ बाद भि उसने अपना फिगर मेन्टेन कररखा थां औऱ साड़ी मे बहोत सुंदर लगरही थि।
एक् हि फ़र्क़ थां छाती मे। मम्मी बनने केँ बाद वैसे हि उसके बोओब्स बहुत बड़े होँ गए थें, जिससे उसका वोँ प्राचीन ब्लाउज उसके बूब्स कों पूरीतरह छुपा नहि पारहा थां। ब्लाउज छाती सें बहुतफुल हुआ थां। हम् दोनों इन्तेजार करनेलगे। कुछ टाइमबाद फिन डोरबेल बजी। निरुडर केँ मारे याँ फिन नर्वस होकर एकदम सें हील गई,।
प्रशांत: "मे देखता हूं, शायद जीजाजी आये होंगे"
मैने दरवाजा खोला, सामने जीजाजी खड़े थें। उन्होंने आँखों केँ ईशारे सें पूछा औऱ मैंने सर हिलाकर उनको संकेत दिया कि निरु अन्दर हि हैं। जीजा केँ चेहरे पर्र एक् बड़ी कुटिल मुस्कान आँ गयीँ,। वोँ अन्दर आये औऱ हमेशा कि तरहजोर सें "निरु" कि आवाज़ लगायी। निरु जोँ अब तक चुपचाप टेंशन मे बैठ थि वोँ एक् झटके मे अचानक सोफ़े सें उठ गई, औऱ उसके चेहरे पऱ एक् चौड़ी स्माइल आँ गयीँ,। नीरु करीब दौड़ते हुए जीजाजी कि तरफ लपकि औऱ जीजाजी नें भि अपनी बाहें फैला दि। निरु जीजाजी केँ पासआकर करीब उनकी बाँहों मे कूद गई, थि। वोँ दोनों गलेलग करआपस मे चिपकगए थें।
निरु अपनी बाहें जीजाजी केँ गले मे डाललटक गयीँ, थि। जीजाजी नें निरु कों गले लगाएहुए चारोतरफ घुमा दिया। निरु केँ बड़े सें बूब्स जीजाजी कि छाती सें चिपककर दब चुके थें। मुझे बहोत बुरालग रहा थां। वोँ दोनों घुमना रुके तौ अब निरु कि पीठ मेरीतरफ थि। जीजाजी नें दोनों हाथों सें निरु केँ पतले शरीर कों जकड़रखा थां। एक् हाथ कि उंगलिया जीजाजी नें निरु केँ पीठ पऱ ब्लाउज कि खिड़की मे डाल दि थि औऱ निरु कां नंगीपीठ कों छु लिया। फिन जीजाजी नें मेरीतरफ देखा औऱ आँखों सें इशारा किया कि केसे वोँ निरु कों छुरहे हें औऱ मे कुछ नहि करपारहा हूं। मेरेतन शरीर मे आगलगरही थि।
कुछ सेकण्ड्स केँ बाद निरु स्वयं जीजाजी सें गलेलग करअलग हुयी। पऱ जीजाजी केँ दोनों हाथअब निरु कि पतली नंगीकमर कों पकडेहुए थें।
नीरु: "जीजाजी, आईऍम सोर्री, आप् आँ गए औऱ मुझे क्षमा कर दिया, मेरेलिए यही बहुत हें"
जीजाजी: "केसे नहि आता? मे अपनी निरु सें अधिकदिन दूर थोड़े हि रह सकता हूं। मेरीयाद आई तुम्हे?"
नीरु: "बहोत यादआयी"
जीजाजी: "क्यूं प्रशांत, अब तोँ तुम्हे कोईशक़ नहि हें न्?"
जीजाजी कुटिल मुस्कान सें मुझेपुछ रहे थें। निरु भि मेरीतरफ पलटकर देखने लगी। उसके चेहरे पर्र स्माइल अभि भि चिपकी हुयी थि औऱ मोतियो सें दांत झिलमिला रहे थें औऱ लिपस्टिक सें रंगे होंठ फ़ैलकर स्माइल सें चौड़े थें।
प्रशांत: "नहि, मुझेअब कोई भि शक़ नहि हें"
(जीजाजी औऱ निरुअब थोडा सां हंस पड़े। )
जीजाजी: "प्रशांत कां एक् छोटा सां टेस्ट लेकर देखते हें निरु, कि इसकोशक़ हें याँ नहि?"
नीरु: "कैसा टेस्ट?"
जीजाजी: "एक् कामकरो, तुम् मेरे गालो पऱ एक् किशकरो। देखते हें प्रशांत कों कैसा लगता हें"
(नीरुफिन हंस पड़ी औऱ मेरा चेहरा देखने लगी। मैंने चेहरे पऱ नकली स्माइल लाने कि कोशिश कि। मन मे क्रोध थां औऱ अपने दांतपीस रहा थां उस कमीने जीजाजी कि चालाकी पऱ। )
जीजाजी: "चलोकम ओन निरु, किश करो"
(नीरु नें मेरीतरफ देख, जैसे परमिशन लें रही थि। )
जीजाजी: "क्यूं प्रशांत, तुम्हे कोई दिक्कत तोँ नहि हें नं?"
(मनमार कर मुझेउस समय नाँ बोल्ना पड़ा। )
प्रशांत: "नहि, मुझेकोई दिक्कत नहि हें"
कथा जारी रहेगी
NOTE: दोस्तो यहकथा मैंने अन्यत्र पढ़ी अच्छी लगी इसीलिए इस स्टोरी कों मे यहा पोस्ट कररहा हूं असली लेखक केँ बारे मे पता नहि चला। किसी कों पता हौ तोँ जरूर कमेंट कीजियेगा.
शक कां अंजाम – New Episode
शक कां अंजाम
PART 2
UPDATE 28
जीजाजी नें निरु कां चेहरा अपनीतरफ घुमाया औऱ निरु नें एक् किश जीजाजी केँ गाल पऱ कर दिया। जीजाजी केँ गोरेगाल पर्र निरु केँ होंठों केँ निशान लिपस्टिक सें बनगए।
जीजाजी: "निरु, देखोजरा, प्रशांत कों बुरा तौ नहि लगा नं?"
(दोनो मेरीतरफ देखने लगे औऱ मे अपना क्रोध छीपाने लगा औऱ स्माइल करतारहा। )
नीरु: "जीजाजी, आपकेगाल पऱ लिपस्टिक लग गायी, मे हटा देती हूं"
जीजाजी: "रहनेदो, ये प्रेम कि निशानी हैं। अभि मेरे दूसरे गाल पऱ भि ऐसी हि निशानी दो जल्द सें"
(नीरु नें फिन जीजाजी केँ दूसरे गाल पर्र भि ऐसे हि किश किया, मगर मैंने मुँहफेर लिया। मे येदेख नहि पाया। मगर जीजाजी कि कमीनपन यहीं खत्म नहि हुआ। )
जीजाजी: "मुझे तौ निशानी मिल गयीँ,, मगरअब मे तुम्हे एक् निशानी दूंगा। चलो अपनागाल आगेकरो"
(नीरुफिन स्माइल करनेलगी औऱ मेरीतरफ देखते हुए उसकागाल जीजाजी कि तरफ थां। जीजाजी नें निरु केँ गोरेगाल कों अपने होंठ मे भरकर थोडा खींचते हुएजोर कां किशकर लिया। मेरादिल तेजी सें धडकने लगा थां। मे बेबस थां। जीजाजी नें निरु केँ दूसरे गाल पऱ भि किशकर दिया औऱ निरु केँ गाल कों गीलाकर दिया। निरु नें जल्द सें अपनेहाथ सें अपनेगाल पोंछकर साफ़ किया। )
नीरु: "क्याँ जीजाजी, गाल गीलेकर दिए। याद हें जब मे छोटी थि तब भि आप् यही करते थें!"
जीजाजी: "हॉ, मगर तब हम् पर्र कोई बेवजह शक़ नहि करता थां। अबशक़ करने वाला आँ गय़ा हें"
(वोँ दोनों फिन मेरीतरफ देखने लगे औऱ स्माइल करनेलगे। )
जीजाजी: "मुझेलग रहा हें कि प्रशांत कों मन हि मनशक़ होँ रहा हें औऱ जलन होँ रही हें"
(वोँ दोनों मेरा चेहरा ध्यान सें पढनेलगे औऱ हंसरहे थें। सच पूछो तौ बहुत वक़्त बाद निरु कों इतनाखुश चहकता देखकर मुझे अच्छा लगरहा थां। परन्तु निरु कि ये ख़ुशी जिस इंसान सें मिलने कि वजह सें थि वोँ सोचकर क्रोध अधिक आँ रहा थां। )
नीरु: "नहि, मुझे लगता हें प्रशांत अबशक़ नहि करेगा"
जीजाजी: "हाथ कंगन कों अरसी क्याँ? अभि इसका एक् छोटा सां टेस्ट लेँ लेते हें"
(ये कहतेहुए जीजाजी नें तुरन्त निरु कों घुमाकर अपनेआगे खड़ा किया औऱ उसकीपीठ केँ पीछे आँ गए। फिन अपने दोनों हाथआगे लाकर निरु केँ नंगे पतलेपेट सें पकड़ लिया। निरु पीछे सें जीजाजी सें चिपकी हुयी थि। नीरु तौ हंसरही थि पर्र जीजाजी कि कुटील मुस्कान जारी थि। जीजाजी केँ लण्ड कां हिस्सा अभि निरु कि गांड सें चिपका हुआ थां। मगर मैंने कोशिश करतेहुए अपने चेहरे पऱ शिकन नहि आने दि। कुछ सेकण्ड्स निरु कों इसतरह पकडे रहने केँ बाद निरु नें स्वयं अपने आप् कों जीजाजी सें छुड़ाया औऱ कहा कि प्रशांत अबखुश हैं। पऱ जीजाजी कहा मानने वाले थें। )
जीजाजी : "लगे हाथों एक् औऱ टेस्ट लें लेते हें"
एक् औऱ टेस्ट लेने कां कहते हि जीजाजी नें अपनी दोनों बाँहों मे निरु कों उठा लिया। निरुअब जीजाजी कि बाँहों मे लेटी हुयी थि। साड़ी कां पल्लु थोडा सीने सें हट गय़ा थां। जीजाजी कां एक् हाथ निरु कि दोनों जाँघो केँ नीचे सें पकडे उसको उठाये हुए थां औऱ दूसरा हाथ निरु कि पीठ केँ नीचे थां।
नीरु कि पीठ केँ नीचे वाले जीजाजी केँ हाथ कि हथेली कि उंगलिया निरु कि बगल केँ नीचे सें होतेहुए निरु केँ साइड बूब्स केँ उभार कों छुरही थि। जीजाजी जान बूझकर अपनी उंगलिया निरु केँ बूब्स सें दूर करते औऱ फिन वापिस लगाकर थोडा दबा देते।
मेराखून अन्दर सें खौलने लगा। एक् मुक्का जीजाजी कों मारने कि ख़्वाहिश हुयी पर्र साराबना बनाया मामला बिगड सकता थां इसलिये धीरज सें काम लिया औऱ शांतरहा।
प्रशांत: "अभि औऱ कोई टेस्ट बचा हें क्याँ? कब तक खड़े रहेंगे, आइए बैठिए"
जीजाजी कि ख़्वाहिश लग तोँ नहि रही थि पर्र उन्होंने निरु कों अपनीगोद सें नीचे उतरा औऱ हम् सभीलोग सोफ़े पर्र बैठगए। मे अब सोचने लगा कि यहा तक तौ ठीक हें पर्र जीजाजी अबकौन सि तकनीक लगाएँगे कि वोँ निरु कों चोदपाए।
निरु तौ उसकेलिए कभी नहि मानेगी। बाकिबचे वक्त हमने वक्तपास किया। रात कां खानां खाने केँ बाद हम् सोने कि तयारी कररहे थें। निरुजब रसोई मे थि तब जीजाजी नें मुझसे धीरे-धीरे सें कहा कि वोँ आजरात हि निरु कों चोदने कां प्लान कररहे हैं।
ये सुनकर मेरी तौ धड़कने बंद सि होँ गई, थि। आज हि मुझे मेरी निरु वापिस मिली थि औऱ आज हि वोँ उसकी इज़्ज़त तारतार करने वाले थें। जीजाजी केँ मन मे कौनसी खिचड़ी पाकरही थि मुझे नहि पता थां पर्र निरु पर्र पूरा भरोसा भि थां।
नीरु नें मेरीबात कां कभी यक़ीन नहि किया थां कि जीजाजी कि नीयत उसकेलिए खराब हें पर्र अगरआज रात जीजाजी नें निरु केँ संगकुछ करने कि कोशिश कि तौ उनकीपोल खुल हि जाएगी। कम सें कम निरु कि आँखें तौ खुलेगी। नीरु भि थोड़ी देर मे काम खत्मकर आँ गयीँ, थि औऱ हमारे संगबैठ गयीँ,।
जीजाजी: "प्रशांत ये बताओ कि जबकभी मे औऱ निरु कमरे मे अकेले होते थें तौ तुम् बाहर् बैठशक़ करते थें न्?"
(उनके अचानक आयेइस क्वेश्चन सें मे सहम गय़ा। इसके पीछे जरूर उनकाकोई प्लान छुपा थां औऱ मुझेसोच समझकर जवाब देना थां। )
प्रशांत: "मैंने कभीशक़ नहि किया"
जीजाजी: "तुम्हे क्याँ लगता हें निरु? प्रशांत नें शक़ किया होगा?"
नीरु कों तौ पता हि थां कि मे केसेशक़ करता थां। इसलिये उसने डरतेहुए हांबोल दिया।
जीजाजी: "तौ ठीक हैं, आज मे औऱ निरु एक् हि कमरे मे सोयेंगे। अन्दर सें दरवाजे कि कुण्डी नहि लगाएँगे। अगर प्रशांत कों शक़हुआ तौ वोँ अन्दर आकरदेख सकता हैं। अगरशक़ नहि हें तौ सुभह तक कमरे मे नहि आएगा। कैसालगा मेरा आईडिया?"
नीरु औऱ मे अब एक् दूसरे कि शकल देखने लगे। जीजाजी नें कैसा भयंकर प्लान बनाया थां कि टेस्ट कि आड़ मे निरु केँ संग सोने कां भि मौका मिलेगा औऱ निरु कों भनक भि नं लगे कि जीजाजी क्याँ करनाचाह रहे हैं।
नीरु: "इसकी क्याँ जरुरत हें! मुझे लगता हें प्रशांत अन्दर नहि आएगा"
जीजाजी: "तौ एक्सपेरिमेंट करकेदेख लेते हैं। क्यूं प्रशांत, तुम्हे कोई ऑब्जेक्शन तोँ नहि हें?"
(मेरी बोलति बंद होँ चुकी थि। हां कहुंगा तौ भि फसूंगा औऱ नां बोला तौ भि फसूंगा। मगर मुझे निरु पर्र पूरा भरोसा थां। )
प्रशांत: "मे ये डिसिजन निरु पऱ छोड़ता हूं। उसको जोँ अच्छा लगे वोँ ठीक हैं। अगर उसकोये एक्सपेरिमेंट करना हें तोँ मे टेस्ट केँ लिए तैयार हूं"
नीरु: "नहि, मुझे एक्सपेरिमेंट कि जरुरत नहि लगरही हें"
(मैनेमन हि मन"एस" बोला कि मेरीचाल सहीपडी। निरु इसकेलिए नहि मानगी)
जीजाजी: "मुझे लगता हें तुम्हे एक्सपेरिमेंट करना चहिये। अपने जीजाजी कि बात नहि मानोगी तुम् निरु?"
नीरु नें हल्का सां स्माइल किया औऱ कहा "जैसी आपकी ख़्वाहिश जीजाजी। आप् बोलते हौ तौ एक्सपेरिमेंट कर लेते हें"
मेरादिल फिन सें धक् सें रह गय़ा। निरु कों जीजाजी केँ चँगुल सें बचाने कि मैंने अपनी अंतिम कोशिश कि।
प्रशांत: "निरु अभि तुमने नां बोला औऱ अभि हांबोल दिया। तुम् प्रेशर मे मतआओ। तुम्हारी जौ दिल कि ख़्वाहिश हें वोँ कहो न्!"
जीजाजी: "देखा तुमने निरु, केसे तुमको बहकारहा हैं। मुझेदाल मे कालालग रहा हैं। इसकी नीयत मे अभि भि शक़ हें"
(नीरुफिन हसनेलगी। )
नीरु: "क्याँ जीजाजी आप् फिन सें प्रशांत कों छेड़रहे हौ। प्रशांत सही हें, मेरी वैसे भि ख़्वाहिश नहि हें औऱ कोई एक्सपेरिमेंट करने कि"
मेरेदिल कों ये सुनकर बड़ा सुकूंन मिला कि निरु नें नाँ बोला। मगर कमीना जीजाकहा पीछे रहने वाला थां।
जीजाजी: "ठीक हें, तुम् दोनों कों एक् दूसरे पऱ पूरा विशवास होँ हि गय़ा हें तोँ मेरायहा क्याँ काम हें? मे जाता हूं अपनेघऱ"
नीरु: "आप् तोँ नाराज हौ गए! अच्छा ठीक हें एक् अंतिम टेस्ट लेकर देखते हैं। इस बहाने आप् कम सें कमयहा रुकेंगे तौ सहि। कितने दिनबाद तोँ बात हुयी हें आपसे"
मैनेमन हि मन अपना माथापीट लिया। जीजाजी कि चाल कामयाब रही औऱ वोँ अब निरु केँ संग सोने वाले थें।
नीरु: "जीजाजी आप् ऊपरबेड पऱ सो जानां औऱ मे नीचेबैड लगा लुंगी"
जीजाजी: "येबात बोलनि थोड़े हि थि! अब प्रशांत कों शक़ होता होगा तोँ भि नहि होगा। हमें तोँ कोशिश करनी हें कि उसकोशक़ हौ। अलगखाट कां प्लान कैंसिल करते हैं। अब हम् एक् हि बेड पर्र सोयेंगे। फिन देखते हें कि प्रशांत कों शक़ होता हें कि नहि!"
नीरु मेरीशकल देखने लगी। मेरी तोँ हालत ख़राब थि। जीजाजी नें निरु कां हाथ पकड़ा औऱ गेस्ट रूम मे लें गए। मे वहा खड़ा कां खड़ा हि रह गय़ा। मे धडाम सें सोफ़े पऱ बैठ गय़ा औऱ अपना माथा पकड़ लिया। जीजाजी नें दरवाजा बंदकर लिया।
बाहर् मेरी हालत ख़राब थि कि अब जीजाजी अन्दर निरु केँ संग क्याँ करने वाले थें। कुछ मिनट्स गुजरे औऱ मे वहीं बैठारहा कि कोई आवाज़ आये तोँ मे निरु कि हेल्प करुँगा। मन मे बुरे बुरे विचार आँ रहे थें औऱ बहुत वक़्त बीत गय़ा। मुझे निरु कि चिलाने कि आवाज़ सुनायी देनेलगी जहाँ वोँ मेरानाम लेकर "बचाओ बचाओ" चिल्ला रही थि।
मे तुरन्त गेस्ट रूम केँ बाहर् पहुंच। सोचा दरवाजा खोलू याँ नहि, खोला तोँ मुझे शक्की बता दिया जाएग, नहि खोला तौ निरु कि हेल्प नहि कर पाउंगा। फिन सोचा निरु स्वयं मुझे आवाज़ लगारही हें तोँ मुझे अन्दर जानां चहिये।
मैंने जोर सें दरवाजे कों धक्का देकर खोला। अन्दर कां नजारा देखकर मेरेहोश उड़गये। मैने देखा कि बैड पर्र निरु पूरी नंगी घोड़ी बनकर बैठि हें औऱ उसके पिछवाड़े पऱ जीजाजी भि नंगे चिपके हुए थें। जीजाजी धक्के पऱ धक्के मारकर निरु कों डॉगी स्टाइल मे चोदरहे थें।
नीरु मेरीतरफ देखकर करीब-करीब रोती हुयी हालत मे मुझसे हेल्प मांगरही थि कि मे उसकोबचा लु। निरु केँ बड़े सें मम्मे छाती सें लटकेहुए थें औऱ जीजाजी केँ हर धक्के केँ संगआगे पीछे तेजी सें हील, झुल रहे थें। वोँ दृश्य देखकर मे वहीं मूर्ति बनकर खड़ारह गय़ा।
मे आगे बढ़कर निरु कि हेल्प करनाचाह रहा थां पऱ कदमआगे बढ़ नहि पारहे थें औऱ पेरजम चुके थें। जीजाजी कहकहा लगाकर निरु कों चोदजा रहे थें।
फिन जीजाजी नें निरु कों बोला "देखा, मैंने कहा थां नं कि प्रशांत कों शक़ होगा औऱ दरवाजा खोलकर अन्दर आएग। तुम् शर्तहर गयीँ, निरु, अब पूरा चुदवा लो"
ये सुनकर निरु नें मुझको आवाज़ लगाना बंदकर दिया औऱ सिसकिया भरतेहुए जीजाजी कों चोदने केँ लिए बोलने लगी
"अहह।। जीजाजी।। चोददो। जोर सें।। जोर सें चोदो मुझे। अपनी निरु कों जोर सें चोदो। आईए।। जीजाजी"
मेरा तौ दिल हि टूट गय़ा। जैसे मैंने अन्दर आकरकोई गुनाह कर दिया थां। इसकेबाद जीजाजी नें निरु कि बुर मे एक् जोर कां झटका मारा। इस झटके सें निरु पूराहील गयीँ, औऱ जोर सें उसके मुँह सें चीख निकली
"आईईए जीजाजी। आनंद आँ गय़ा। औऱ मारो।। "
उसकेबाद जीजाजी नहि रुके औऱ एक् केँ बाद एक् जोरजोर केँ झटके निरु कि बुर मे मारते गए। हर झटके केँ बाद निरुमजे लेतेहुए जीजाजी कों उत्साहीत कररही थि।
जीजाजी: "निरु तेरी बुर मे अपना पानी छोड़दु बोल, तूँ मेरे बच्चे कि मां बनेगी?"
नीरु:"हां जीजाजी।। मम्मी बनादो मुझेचोद कर जल्द सें."
जीजाजी: "तोँ ये लें निरु,। अहह। अह्ह्ह।। ये लेँ। ये लें।। औऱ लेँ।। "
नीरु: " अहहअहह।। ओह्ह्ह्ह जीजाजी। आनंद आँ गय़ा। चोदो मुझे।। ोोोीईए।। उम्म्म्म। आँ मायआ।। चोददो। जोर सें चोददो। जीजाजी।। "
जीजाजी कि स्पीड औऱ तेज होँ गई, औऱ थोड़ी देरबाद उनका झटका निरु कि बुर केँ अन्दर हि रह गय़ा औऱ जीजाजी कां सर पीछे कि तरफ किये थोडा झुकगए औऱ उनकाबदन पूरा कड़ा हौ गय़ा।
जीजाजी नें अपने लण्ड कां सारामाल निरु कि बुर मे खालीकर दिया थां। मेरेहाथ पेर बुरीतरह सें काँपरहे थें औऱ मे रोनेलगा थां। चिल्लाना चाहरहा थां पऱ आवाज़ नहि निकलरही थि। जीजाजी फिन थोडा नार्मल हुये। उन्होंने अपने लण्ड कों निरु कि बुर सें बाहर् कि तरफ खिंचा।
तभी एक् जादूहुआ औऱ जीजाजी केँ लण्ड केँ निकलते हि बहुत सारा चिकना पानी बुर सें बाहर् आया औऱ तभी एक् छोटा सां बच्छा निरु कि बुर सें निकलकर बैड पर्र गिर गय़ा, जीजाजी नें निरु कों बोला कि
"ये लेँ, हौ गय़ा अपना बच्चा"
निरु नें खुश होतेहुए उस बच्चे कों अपने सीने सें लगा लिया। मेरेहोश उड़गए, औऱ मे नीचेगिर गय़ा। देखा तोँ मे ड्राइंग रूम मे सोफ़े केँ पास पड़ा थां। वोँ एक् बुरा सपना थां। गेस्ट रूम कां दरवाजा अभि भि बंद हि थां।
मैने भगवन कां थैंकयू बोला कि येसभी सपना थां। पता हि नहि चलाकब मेरीआँख लग गई, थि औऱ इतना भयंकर सपनादेख लिया। मे गेस्ट रूम केँ दरवाजे केँ पास गय़ा ताकी अन्दर सें आतीकोई आवाज़ सुनपाउ पर्र सभी शान्ति थि।
घडी मे रात केँ २बजरहे थें, अब तक तोँ जीजाजी औऱ निरुसो चुके होंगे। दरवजा खोलने कां सोचा पर्र फिनडर केँ मारेरुक गय़ा। दरवजा खोला तौ मुझ पर्र शक्की होने कां ठप्पा लग जाएगा। मे सीधा अपने बेडरूम मे गय़ा औऱ सोने कि कोशिश करनेलगा।
सूबह८:३० पऱ मेरी नींद खुली। निरु कां ख़याल आया औऱ मे दौड़ते हुए बाहर् गय़ा। गेस्ट रूम कां दरवाजा अभि भि बंद थां। शर्त केँ मुताबिक़ सुभह तक दरवाजा नहि खोल सकता थां पऱ अब तौ सुभह होँ चुकी थि।
मैने डरते कांपते हाथों सें दरवाजा खोला। अन्दर खाट पऱ जीजाजी अकेले सोयेहुए थें। कमर तक चादर ढाकाहुआ थां। ऊपर सें टॉपलेस थें। दोनों तकिये एकदम चिपके हुए थें। खली तकिये औऱ जीजाजी केँ पास वाली स्थान पर्र चादर पऱ सिलवटे थि जैसे वो पहलेकोई सोयाहुआ थां।
कहीं निरु औऱ जीजाजी एकदमपास चिपककर सोये तोँ नहि थें? ऊपर सें जीजाजी आधे नंगे थें। क्याँ पता चादर केँ अन्दर वोँ पूरे नंगे होँ? निरु वो नहि थि। मैंने दरवाजा बंद किया औऱ निरु कों ढूंढा।
वोँ रसोई मे नहि थि पऱ वॉशरूम मे नहाने कि आवाज़ आँ रही थि। छुट्टी केँ दिन इतना जल्द तौ निरु नहाती नहि हैं। जरुररात कों जीजाजी नें निरु कों गन्दा कर दिया होगा इसलिये उसको नहाना पड़रहा हें। मै उदास होकर अपने कमरे मे जाकरलेट गय़ा।
थोड़ी देरबाद निरुआई औऱ ड्रेसिंग टेबल केँ सामने बैठकर सजधजकर होनेलगी। फिन वोँ चली गयीँ,, शायद रसोई मे, क्यूं कि रसोई सें आवजेआने लगी थि। थोड़ी देरबाद नहाधो कर मे औऱ जीजाजी दोनों नाशते कि टेबल पर्र बैठे थें। निरु अभि रसोई मे हि थि।
जीजाजी: "रात कों तुमने दरवाजा खोलकर देखा तोँ नहि नं?"
प्रशांत: "नहि"
जीजाजी: "अच्छा किया नहि देख। मे औऱ निरुजिस हालत मे थें, ये तुम् देखते तौ निरु बड़ी शर्मिंदा होती औऱ तुमको भि अच्छा नहि लगता"
प्रशांत: "मतलब।। आपने।."
जीजाजी: "मैंने बोला थां नं कि बस एक् मौका चहिये। मैंने फायदा उठाकर निरु कों चोद दियाकल रात। अभि तुमने मेरासंग दिया हें तौ मे भि वादा निभांगा। निरु कों तुम् अबरख सकते हौ"
मैनउस वक्त जीजाजी कां गाला दबाना चाहता थां पर्र तभी निरु नाशता लेकर आँ गयीँ, तौ मे कुछकर नहि पाया।
जीजाजी: "कलरात प्रशांत उसके टेस्ट मे पास हौ गय़ा। उसने हमारा दरवाजा नहि खोला। "
नीरु: "मुझेपता थां, वोँ नहि खोलेगा"
जीजाजी: "प्रशांत ज़िदकर रहा हें कि मे आज यहींरुक जाऊ। कह रहा थां कि मे आज भि उसका टेस्ट लेँ सकता हूं। वोँ आजरात भि शक़ नहि करेगा औऱ दरवाजा नहि खोलेगा"
नीरु:"अगर आप् एक् दिन औऱ रुकोगे तोँ मे तोँ तैयार हूं"
मै एक् सदमे मे निरु कि शकल देखने लगा। कल रात जीजाजी सें चुदवाने केँ बाद भि उसकामन नहि भरा औऱ नां हि उसकोकोई पश्चाताप थां। वोँ एक् बारफिन अपने जीजाजी केँ संग सोने कों सजधजकर थि!
कथा जारी रहेगी
NOTE: दोस्तो यह किस्सा मैंने अन्यत्र पढ़ी अच्छी लगी इसीलिए इस स्टोरी कों मे यहा पोस्ट कररहा हूं असली लेखक केँ बारे मे पता नहि चला। किसी कों पता होँ तौ जरूर कमेंट कीजियेगा.
शक कां अंजाम – New Episode
शक कां अंजाम
PART 2
UPDATE 29
पुरादिन हम् लोग घूमने फ़िरने मे बिजीरहे। पूरादिन मे परेशान रहा कि कलरात तौ निरु कों नहि बचा पाया पर्र आजरात उसको केसे बचाऊजब कि निरु स्वयं फसनेजा रही थि। रात कों हम् घऱ पहुचे औऱ सोने कि तयारी कररहे थें।
जीजाजी: "कल हम् गेस्ट रूम मे सोये थें, शायदइस वजह सें प्रशांत नें दरवाजा नहि खोला होगा। आज हम् तुम्हारे बेडरूम मे सोयेंगे निरु"
नीरु:"ठीक हें, मे पलंगलगा देती हूं जीजाजी, आप् आँ जाइए"
नीरु अन्दर चली गयीँ,।
प्रशांत: "ये आप् गलतकर रहे हें जीजाजी। आपने बोला थां कि बस एक् बार हि निरु कों चोदना चाहते होँ। येआजरात फिन सें क्याँ हें?"
जीजाजी: "क्याँ बताऊ?कल रात डॉगी स्टाइल चोदने मे बहोत मज़ाआया। इसलिये आजरात भि चोदने सें रोक नहि पारहा हूं। सोचरहा हूं आज निरु सें स्वयं कों चुदवाउ। वोँ मेरेऊपर आकर मुझे चोदेगी तौ औऱ मज़ाआएग। फिन निरु रेडी हें तोँ तुम्हे क्याँ प्रॉब्लम हें?"
प्रशांत: "आप् उस भोलि लड़की कों फसारहे हौ। "
जीजाजी: "तौ फिन दरवाजा खोलकर अन्दर आँ जानां। अगर हम् कुछ नहि कररहे होगे तोँ सोचलो, निरु कां तुम् पर्र सें भरोसा उठ जायेगा"
प्रशांत: "औऱ मैंने आप् दोनों कों चुदते हुए पकड़ लिया तौ?"
जीजाजी: "दरवाजा खोला मतलब तुम्हे उस पऱ शक़ हैं। फिन चुदते हुए पकडे जाने केँ बाद निरु लज्जा केँ मारे तुम्हारे पासकभी नहि रहेगी"
जीजाजी अब मेरे बेडरूम मे चलेगए औऱ दरवाजा बंद करतेसमय अपनी आईब्रो उचकाते हुए मुझे चिढा दिया। मे एक् बारफिन वहीं सोफ़े पऱ सर पकड़कर बैठ गय़ा। मैने सोचाइस सें अच्छा तौ निरु कों बुलाना हि नहि चाहिए थां। उसको बुलाकर तौ मैंने औऱ फसा दिया।
करीब-करीब एक् घन्टे तक मे वो बैठेरहा। पता थां कि अन्दर क्याँ होँ रहा होगा पर्र फिन भि दरवाजा खोलने कि हिम्मत नहि हुयी। मैंने सभीकुछ निरु पर्र छोड़ दिया। अगर उसकी ख़्वाहिश होगी तौ चुदवा लेगी वार्ना नहि चुदवाएगी।
एक् घन्टे बाद दरवाजा खुला। मे चोकन्ना होँ गय़ा। अन्दर लाइटबंद थि औऱ जीजाजी दरवाजा बंदकर बाहर् मेरेपास आए।
जीजाजी: "प्रशांत, तुम् टेस्ट मे पास हौ गए। अब तक मैंने जौ भि कहा वोँ झूठ थां। मे नहि चाहता थां कि निरुफिन ऐसे व्यक्ति केँ पासफिन जाए जौ उस पऱ शक़ करता हौ। इसलिये इतने सारे टेस्ट लेने पड़े। मेरी निरु पर्र कोई गन्दी नीयत नहि हें"
मै मुँह फाड़े जीजाजी कों देखरहा थां। मुझे उनकी बातों कां यक़ीन नहि होँ रहा थां।
जीजाजी : "मैंने जोँ भि गंदे शब्द निरु केँ लिए इस्तेमाल किये उसका अफ़सोस हें, पर्र तुमको यक़ीन दिलाने केँ लिए बोलने पड़े। तुम्हारी निरु एकदम पवित्र हैं। वोँ केवल तुम्हारी हैं। जाओ उसकेपास। वोँ अन्दर सोरही हें"
जीजाजी नें मेरे कंधे पऱ हाथरख मुझे भरोसा दिलाने कि कोशिश कि। मुझेसमझ नहि आया कि ये कैसा इंसान हैं। मेरेसंग इतना गन्दा मजाक किया ताकी मेरा टेस्ट लेँ पाए।
मै अब अपने बेडरूम मे गय़ा। निरु दूसरी तरफ मुँह किये करवटलिए सोरही थि। लाइटबंद थि। मे निरु केँ पास जाकरलेट गय़ा। जीजाजी कि बातों पर्र यक़ीन नहि होँ रहा थां। मुझेलगा वोँ अपनेपाप कवर करने कि कोशिश कररहे थें। निरु कों बिना चोदे वोँ छोड़ देंगे ये मुमकीन नहि हैं। फिन मेरेमन मे एक् प्लान आया।
जीजाजी उठकर बाहर् गए हें येबात सोयी हुयी निरु कों शायद नहि पता होगी। अगर अभि मे निरु केँ संगकुछ भि करू तौ उसकोयही लगेगा कि जीजाजी कररहे हैं। मुझेकुछ करना चाहिए औऱ निरु केँ रिएक्शन सें पता चलेगा कि जीजा-साली केँ बीचे अभि तक क्याँ हुआ हैं।
मैने करवटली औऱ निरु केँ लगभगलेट गय़ा। एक् हाथ लेँ जाकर निरु कि कमर पऱ रख दिया। वोँ सोयी हुयी थि औऱ कोई रिएक्शन नहि दिया। मतलब नींद मे जीजाजी नें निरु कों छुआ तोँ होगा हि। मैनेअब अपनाहाथ लें जाकर निरु केँ हिप्स पर्र रख दिया। फिन सें निरु नें कुछ नहि कहा।
मैंने अब अपनाहाथ उसकी गांड पऱ फेरना शुरुआत किया। इस हलचल कां पता निरु कों चला औऱ उसने मेराहाथ वो सें हटा दिया। नीरु कों पता थां कि जीजाजी नें उसकी गांड पर्र हाथ फेरा हें पऱ फिन भि उसने अधिक रियेक्ट नहि किया। मैंने अपना बाजू निरु कि कमर पर्र रखतेहुए हाथ उसके सीने केँ आगे लेँ गय़ा।
मैनेफिन धेरे धीरे-धीरे अपनी हथेली आगेकर उसके बूब्स केँ एकदम लगभग लें गय़ा। अचानक निरु कां हाथआया औऱ मेरी हथेली कों उसके बूब्स सें चिपका दिया। एक् बार तौ मे डर गय़ा। समझ नहि आया कि निरु नींद मे येकररही हें याँ थोडा जाग गई, हें औऱ जीजाजी कां हाथसमझ कर उसने मेराहाथ उसके बूब्स पऱ रख दिया हें!
थोड़ी देर मेराहाथ निरु केँ बूब्स सें चिपका रहा। मैंने फिन अपनी उंगलियो कों समेटा जिसकी वजह सें मेरी उंगलियो नें निरु केँ बूब्स कों दबोचाना शुरुआत किया। निरु नें कुछ नहि बोल। मैंने ५-६बार उसके बूब्स कों दबोचा। मुझेअब बुरा लगनेलगा।
जीजाजी नें जरूर निरु केँ बड़े बूब्स कों दबाने केँ मजेलिए होंगे औऱ निरु नें कुछ नहि बोला होगा। मैंने फिन अपनाहाथ उसकी छाती सें हटा लिया। मैनेअब उसकी नाइटी कों नीचे सें ऊपर उठाना शुरुआत किया औऱ उसके पाँव नंगे होतेगए।
निरु बिना हिले लेटीरही। उसकी नाइटी घुटनों तक हि थि तौ मैंने जल्द हि ऊपर सें कमर तक हटा दिया। फिन उसकी नंगी जाँघो पऱ अपनी हथेली रख दि औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे फिराते हुएफील करनेलगा। निरु नें कुछ नहि बोला औऱ शान्ति सें सोयीरही। मैंने अगलाकदम उठाया औऱ निरु कि पैंटी पकड़कर नीचे करना शुरुआत किया।
नीरु नें कोई विरोध नहि किया औऱ उसकी एक् गांड कां गाल नँगा होँ गय़ा थां। मैंने अपनाहाथ उसकी नंगी गांड केँ गाल पर्र फेरया। कुछ हि सेकंड मे उसने मेराहाथ पकड़ लिया औऱ नींद मे हि बोलीं।
नीरु: "परेशान मतकरो, सुभहकर लेना, अभि नहि"
मै थोडा कंफ्यूज थां। उसने जीजाजी कां नाम नहि लिया थां। मैंने उसकी पैंटी फिनऊपर कर दि। फिन मैंने कमर तक ऊपर होँ चुकी उसकी नाइटी केँ अन्दर हाथ डाला। मेराहाथ अब नाइटी केँ अन्दर निरु केँ मम्मो कि तरफ बढ़ा। मेराहाथ जाकर निरु केँ ब्रा पर्र रुका। औऱ मैंने उसके बूब्स कों एक् बारफिन दबया।
निरु नें नाइटी केँ बाहर् सें हि मेराहाथ पकड़ लिया। मैंने एक् बारफिन सें उसका बूब्स दबाय औऱ निरु मेरीतरफ पलटते हुए मुझे रुकने कों बोलि।
नीरु:"रुक जाओ, क्यूं कररहे होँ? अभि तोँ।."
नीरु कि आँखें खुली। मे उसकी आँखों मे देखरहा थां।
प्रशांत: "अभि तौ क्याँ?"
नीरु: "अभि तौ नहि कर सकते। प्रशांत, कलकर लेना"
मै सोच मे पड़ गय़ा कि कहीं वोँ ये तौ नहि कहना चाहती थि कि "अभि तोँ किया थां"। मगर मुझेदेख कर बोलते हुएरुक गयीँ, ! निरुफिन करवट लेकरसो गयीँ,। याँ फिन होँ सकता हें कि उसकोपता थां कि उसकेपास मे सोयाहुआ थां। मेरेइस प्लान नें पूरीतरह काम नहि किया।
सूबह जीजाजी अपनेघऱ चलेगए। संग मे एक् पहेली छोड़गए कि उनके औऱ निरु केँ बीच पिछली दोरात मे क्याँ हुआ थां। निरु नें नहा लिया थां। फिन मेरेपास आकर शरमाते हुएबात करनेलगी।
नीरु:"रात कों मेरेसंग क्याँ करने कि कोशिश कररहे थें?"
प्रशांत: "वोही जौ बहोत दिनों सें नहि हुआ। मगर तुमने रोक दिया!"
नीरु: "मेरे पीरियड चलरहे थें। आज हि खत्महुआ हैं। अब तुम् चाहे तौ कर सकते होँ"
मेरीजान मे जानआई कि जीजाजी नें इसका मतलब निरु केँ संगकुछ नहि किया होगा। कल सुभह भि निरु केँ जल्द नहाने कां कारणये पीरियड्स थें!
प्रशांत: "जीजाजी नें रात कों मुझेकहा कि मे तुम्हारे पासआकर सोजाऊ!"
नीरु: "तुम्हारे टेस्ट केँ चक्कर मे जीजाजी परसो पूरीरात जमीं पऱ सोये थें। सुभह मे नहाने गई, तब मैंने उनको पलंग पऱ सोने कों बोला थां। कलरात भि एक् घण्टा वेट किया कि तुम् दरवाजा खोलोगे पऱ तुम् नहि आए। मेरी तौ आँखलग गयीँ, थि। जीजाजी बैठेरहे औऱ फिन मुझेबोल करगए थें कि वोँ तुम्हे अन्दर भेजरहे हें"
अबसमझ मे आया कि निरु कों पहले हि पता थां कि मे उसकेपास लेटाहुआ थां। मगरये भि हौ सकता हें कि निरु मुझसे झूठबोल रही हौ ताकी मेराशक़ मिटासके।
नीरु: "बहोत दिन हौ गए, आज हम् कुछ स्पेशल वाली चुदाई करे!"
प्रशांत: "पिछली बार वाली स्पेशल चुदाई याद हें? मैंने जीजाजी बनकर तुमको चोदा थां औऱ तुम्हारी हालत ख़राब होँ गई, थि!"
नीरु:"याद हें! मेरेहाथ पेर काँपगए थें उसदीन। हम् दोनों बहोत दिनों बाद चुदाई कररहे हैं। आज भि कुछ स्पेशल करो"
प्रशांत: "स्पेशल चुदाई केँ लिए क्याँ करू? एक् काम करता हूं, इस टेडी बीयर कों कुर्सी पऱ रखता हूं औऱ इसको प्रशांत मान लेते हें औऱ मे जीजाजी बनकर तुम्हारी चुदाई करता हूं "
नीरु: "तुम् फिन सें वोहिखेल खेलकर मुझे जीजाजी बनकर चोदना चाहते हौ? तुम्हे पता हें नं कि इसतरह कि चुदाई केँ बाद मुझे कितना बुरालगा थां? मुझे नहि चुदवाना ऐसे"
प्रशांत: "तौ फिन थोडा चेंज करते हैं। मे बन जाता हूं निरु औऱ तुम् बनजाओ जीजाजी औऱ परसोरात वाला नाटक करते हैं। टेडी बीयर मेरा रोलेकर रहा हें तौ इसको कमरे सें बाहर् बैठते हैं। औऱ मे निरु बनकर तुम्हारे संग अन्दर रहूँगा"
नीरुशक़ कि नजरो सें मेरीशकल देखने लगी।
नीरु: "तुम् करना क्याँ चाहरहे हौ?"
प्रशांत: "थोड़ी मस्ती होगी औऱ मजा आएगा। तुम् बतओ, ये एक्साइटिंग होगा कि नहि? "
नीरु: "एक्साइटिंग तौ हें, मगर मे करुँगी क्याँ?"
प्रशांत: "जौ मन मे आये वोँ बोलॉ, जितना मुझे भड़काओगी उतनी अच्छी चुदाई होगी"
मै बेड पऱ बैठ गय़ा। निरु नें टेडी बीयर कों कमरे सें बाहर् रख दिया औऱ अन्दर आकर दरवाजा बंदकर दिया औऱ कुण्डी लगाने लगी।
मुझेये देख आश्चर्य हुआ। मे निरु कां रोलकर रहा थां तोँ मैंने प्रश्न उठया।
प्रशांत: "कुंडी क्यूं लगायी जीजाजी? हम् तोँ कुण्डी बिना लगाए सोने वाले थें, ताकी प्रशांत शक़ होने पऱ अन्दर आँ पाए"
नीरु:"हॉ, मगर जीजाजी नें कुण्डी लगायी थि"
प्रशांत: "भूलोमात, तुम् स्वयं जीजाजी बनी हुयी हौ अभि!"
नीरु:"ओके ओके मे जीजाजी कां रोल करती हूं!। सुन निरु, अगर हमारे सोने केँ बाद प्रशांत नें दरवाजा खोला तौ हमेंपता केसे चलेगा?इसलिये कुण्डी लगायी ताकी दरवजा कों धक्का देने पऱ जोर कि आवाज़ आये औऱ हमेंपता चले"
मुझे एक् झटकालगा। जीजाजी नें कुण्डी क्यूं लगायी होगी? क्याँ उनकी नीयतसच मे खराब थि? मगर जीजाजी तौ मुझसे बोलकर गए थें कि उनकी नीयत अच्छी हें औऱ उन्होंने निरु केँ संगकुछ नहि किया, फिन कुण्डी क्यूं लगायी थि?
नीरु:"अब हम् कुछऐसा करते हें कि प्रशांत कां ध्यान हमारी तरफआये औऱ शक़करे। कहोकुछ करे निरु?"
प्रशांत: "ऐसा क्याँ करे जीजाजी?"
नीरु: "तुम् आवाज़े निकालो, जैसेयहा हम् दोनों केँ बीचकुछ हौ रहा हें"
प्रशांत: "आप् भि नं जीजाजी। ऐसे केसे आवजे निकाल दूं। मुझे लज्जा आती हैं। मेरी तौ हंसीछूट जाएगी, ऐसे आवाज़ नहि नीलकेगी"
नीरु: "तुम् आवाज़े निकालो, जैसेयहा हम् दोनों केँ बीचकुछ होँ रहा हें"
प्रशांत: "आप् भि न् जीजाजी। ऐसे केसे आवजे निकाल दूं। मुझे लज्जा आती हैं। मेरी तौ हंसीछूट जाएगी, ऐसे आवाज़ नहि नीलकेगी"
नीरु: "एक् काम करते हैं। पहले माहौल बनाती हैं। तुम् लेटजाओ"
मैअब निरुबने हुएलेट गय़ा औऱ जीजाजी बनी निरु मेरेपास आकरलेट गयीँ, औऱ मेरेऊपर हाथरख दिया।
नीरु: "अभि मूडबना क्याँ?"
प्रशांत: "नहि"
नीरु नें फिनअपन पाँव मेरी टाँगो पर्र रगडना शुरुआत किया। फिन मुझसे वोहि प्रश्न दोहराय पर्र मैंने फिन आवाज़ निकालने सें मनाकर दिया।
नीरु: "क्याँ कररही होँ निरु। ऐसे केसे चलेगा। एक् कामकरो तुम् आँखबंद करो औऱ मुझे प्रशांत समझलो"
नीरुबने हुए मैंने अपनीआँख बंदकर ली औऱ तभी निरु कां हाथआकर मेरे लण्ड कों लगा औऱ वोँ मेरा लण्ड रगडने लगी। मे सोचने लगा कि क्याँ सचमुच जीजाजी नें निरु कि आहें निकालने केँ लिए उसकी बुर कों रगड़ा होगा?
नीरु: "क्याँ हुआ निरु, अब तोँ आवाज़ निकालो"
मैनेअब हलकी हलकी सिसकिया निकालनी शुरुआत कर दि। वैसे भि बहुत दिनों बाद निरु मेरा लण्ड रगड़रही थि तोँ मुझे मज़ा आँ रहा थां। कुछ सेकण्ड्स केँ बाद मेरे पजामा खोलकर निरु नें मेरा नँगा लण्ड रगडना शुरुआत कर मेरी आहेंबढा दि थि। मैउस लण्ड रगड़ाई कां मज़ा लें हि रहा थां कि निरु नें मेराहाथ पकड़कर अपनी बुर पर्र लगा दिया औऱ मेराहाथ अपनी बुर पऱ रगडने लगी।
नीरु:"चलो निरु, तुम् भि मेरे रगडो, दोंनो कि सिसकिया निकलेगी तौ प्रशांत कों शक़ ज़्यादा होगा"
मै अब निरु कि बुर कों कपड़ो केँ ऊपर सें हि रगडने लगा। पर्र फिन निरु नें अपनी नाइटी ऊपरकर दि औऱ मेराहाथ अपनी पैंटी मे डाल दिया। मे अब आहिस्ता निरु कि बालोभरी बुर कों रगडने लगा। थोड़ी देर मे निरु कि भि सिसकिया निकलने लगी। एक् दूसरे केँ नाजुक अंगो कों रगड़ते हुए हम् एक् दूसरे कों मज़ा दिलारहे थें औऱ एक् नशे मे खोरहे थें।
प्रशांत: "जीजाजी, अगर प्रशांत नें दरवाजा खोलने कि कोशिश कि तौ?"
नीरु: "हम् कौन सां कुछगलत कररहे हें? आनेदो, वोँ शक़ करते पकड़ा जाएगा"
प्रशांत: "जीजाजी मुझेडर लगरहा हैं। येगलत हें न्!"
नीरु: "हम् तोँ मात्र प्रशांत कां टेस्ट लेने केँ लिएकर रहे हैं। चलोकुछ औऱ करते हें!"
प्रशांत: "क्याँ करू जीजाजी!"
नीरु: "तुम्हारे कपडेखोल दू? अधिक अच्छे सें आवाज़ निकलेगी तौ प्रशांत कों अधिकशक़ होगा"
प्रशांत: "खोलदो, हमें तौ वैसे भि प्रशांत कां शक़ बढ़ाना हैं। पर्र कपडेखोल कर क्याँ करेंगे?"
नीरु: "वोही जौ एक् मर्द औऱ महिला करते हें"
प्रशांत: "क्याँ जीजाजी?"
नीरु: "नहाते हैं। तुम्हे क्याँ लगा निरु?"
प्रशांत: "मुझेलगा.। "
नीरु: "तुम्हे लगाचु।।.ई तुम् मुझसे चुदवाओगी?"
प्रशांत: "क्याँ बोलरहे हौ जीजाजी? बाहर् प्रशांत हें, उसकोपता चला तौ?"
नीरु: "वोँ नहि आएगा निरु, कुण्डी लगारखी हें, दरवाजा नहि खुलेगा"
प्रशांत: "चुदाई कि आवाज़ तोँ बाहर् जाएगी न्?"
नीरु: "अच्छा हैं। आवाज़ सुनकर अगर प्रशांत नें दरवाजा खोलने कि कोशिश कि तौ इसका मतलब उसको हम् पऱ शक़ हें"
प्रशांत: "हां! तोँ फिनचोद दो मुझे जीजाजी"
नीरु: "तौ कपडे खोलो अपने"
प्रशांत: "ठीक हें"
नीरु: "अपने स्वयं केँ कपडे खोलने मे क्याँ मजा आएगा। निरु मे तुम्हारे कपडे खोलूँगा औऱ तुम् मेरे"
मैने निरु कि नाइटी निकालने केँ बाद उसके ब्रा औऱ पैंटी निकाल कर उसको पूरा नँगाकर दिया। निरु नें फिन मेरे कपडे निकाल कर मुझे नँगाकर दिया। नंगा करते हि उसने मेरा लण्ड पकड़ लिया औऱ हिलाते हुए कड़क करनेलगी। लण्ड थोडा बड़ाहुआ तोँ निरु उसको अपने मुँह मे लेकर चुसने लगी। इतने दिनों बादकोई लड़की मेरे लण्ड कों चुसरही थि औऱ मे जैसेहवा मे तैरने लगा थां औऱ आहें भारतहुआ मजे लेतारहा। जब मेरा पानी निकलने लगातब जाकर निरु रुकी।
नीरु: "निरुअब तुम्हारी बारी हें, मेरे लण्ड कों चुसने कि"
ये कहतेहुए निरु पलंग पर्र कोहनी केँ बलआधा लेट गयीँ, औऱ अपने पाँव चौड़े करदिए। चुत खुली देखते हि इतनेदिन कि मेरी उतावलापन जाग गई, औऱ मे टूटपद। मे अब बेतहाशा निरु कि बुर कों अपनी जुबान सें रगड़ रगड़कर चाटरहा थां। उस सें भि मन नहि भरा तौ उसकी बुर केँ होंठों कों थोडा खोला औऱ फिन अपने मुँह मे भरकरकिश किया औऱ चुसा। ऐसा करते हि निरु कों आनंदआया औऱ वोँ मुझे उत्तेजित करना चालू हौ गई,।
नीरु:"वाउ निरु, तुम् तोँ बहोत अच्छा लण्ड चाटती औऱ चुसती होँ"
प्रशांत: "आपने भि मेरी बुर अच्छे सें अपनी जुबान सें चोदा हें"
नीरुअब औऱ नशे मे जानेलगी। मे अपनी जुबान औऱ होंठों सें तोँ कभी ऊँगली कां भि सहारा लेकर निरु कि बुर मे खुजली करतेहुए उसको उत्तेजित करतारहा।
प्रशांत: "अब हम् रोले रिवर्स करले। मे जीजाजी औऱ तुम् निरु!"
नीरु नें नशे मे अपनी गर्दन हिलायी औऱ हांकहा।
प्रशांत: "तौ निरुअगर तुम्हे मज़ा आँ रहा हें तौ आवाज़ नहि निकालोगी क्याँ?"
नीरु: "ओह्ह! जीजाजी, क्याँ मस्त चुसते होँ आप्। आआह आनंद आँ रहा हें। उह्ह्ह्ह।। उम्मम्मम्म आआह जीजाजी। बुर मे जुबान डालकर चोदो मुझे। हम्म्म्म। हांऐसे। जल्द जल्द.आँ आँ।। ऊवाहः जीजाजी।। आनंद आँ रहा हें।। औऱ चोदो"
नीरु केँ मुँह सें जीजाजी कां नाम सुनकर बुरालग रहा थां पऱ निरु कों इसतरह बहुतदिन बादमजे लेतेदेख बहोत खुसी भि मिलरही थि। इसलिये मे पुरेजोश केँ संग अपनी जुबान कां खुरदुरा भाग निरु कि बुर मे रगड़कर उसकोमजे दिलता रहा। इन सभी केँ बीच निरु लगातार मजे केँ मारे अपना पाँवखाट पऱ ऊपर नीचे रगड़कर उतावलापन रही थि। वोँ बहोत बुरीतरह आहें भरतीरही औऱ लास्ट मे वोँ थोडा शांत हुयी।
नीरु:"बस जीजाजी रुकजाओ। मेरा पूरा पानी निकाल दिया आपने।। आँ जाओ।। मेरे मम्मे चुसलो अब।। आपकेलिए हि बड़े किये हें मैंने।। चुसलो सारादूध इसका"
नीरु स्वयं मुझेआगे बढ़कर अपने मम्मे चुसने कों बोलरही थि। जब कि कुछ वक्त पहलेजब हम् संग थें तब उसने मुझे मम्मे चुसने सें मनाकर दिया थां।
शायद इतनेदिन कि जुदाई कां असर थां याँ अगरशक़ कि नजर सें देखु तोँ निरु मुझेअपन जीजासमझ कर अपने मम्मे चुसवाने कि परमिशन देरही थि। मैने निरु केँ बूब्स चूसे पऱ अब उनमें दूध नहि थां। याँ तोँ नैचुरली दूध खत्म हौ गय़ा थां याँ फिन जीजाजी नें पहले हि पिछली दो रातो मे निरु केँ मम्मो कां सारादूध चुसकर समाप्त कर दिया थां!
नीरु केँ मम्मे चुसते चुसते मेरेमन मे एक् आईडिया आया, शायद मे निरु सें कुछ औऱ सच निकलवा सकता थां। मुझेपता थां कि निरुजब चुदाई केँ नशे मे डूबती हें तोँ फिन उसकोहोश नहि रहता औऱ बहोत कुछबोल जाती हैं। मे उस वक्त उसके मुँह सें सच्चाई निकलवा सकता हूं।
मैने निरु कों लेटाया औऱ उसकी दोनों टांगो कों चौड़ा कर थोडा उठाया औऱ अपना लण्ड निरु कि बुर मे डाल दिया। मेरे लण्ड कों बुर कि गर्मी मे भि थोड़ी ठंडक मिली। एक् बार लण्ड अन्दर गय़ा तोँ मे बिना धक्के मारेरुक नहि पाया। मेरे लण्ड केँ धक्के अपनी बुर मे सहते सहते निरुअब सिसकिया भररही थि।
स्टोरी जारी रहेगी
शक कां अंजाम - Next part mein bada twist
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