शक कां अंजाम – New Episode
शक कां अंजाम
PART 2
UPDATE 30
थोड़ी थोड़ी देर मे मे एक् गहरा झटका निरु कि बुर मे मारता औऱ वोँ तेजचीख केँ संग अपनी हालत बयान करति। करीब-करीब १०-१५ मिनट्स तक मैंने निरु कों इसीतरह धक्के मारते हुए चोदा। उसकाअसर जल्द हि दीखने लगा। शुरुआत मे निरुरह रहकर सिसकिया भररही थि मगरअब वोँ लगातार सिसकिया मारते हुए अपने जिस्म कों पलंग पऱ रगड़कर मजे लें रही थि।
प्रशांत: "निरु, मैंने प्रोटेक्शन नहि पहना हें"
नीरु: "हम्म।। कोईबात नहि.उह्ह्ह्हह्ह चोददो मुझे।। जीजाजी"
प्रशांत: "बच्चा हौ गय़ा तोँ?"
नीरु: "उम्म्म्म।। मे इमरजेंसी पिल लें लुंगी। हाआअह। चोदते रहो"
प्रशांत: "परसोरात चुदाई केँ बाद तुम् पिल लेना तोँ नहि भूल गयीँ, नं निरु?"
नीरु: "अह्ह्ह।। परसो कहां चुदवाया।। आआआह।। मेरा पीरियड थां."
प्रशांत: "औऱ कलरात चुदवाया तब?"
नीरु: "उह्ह्ह। उम्म्म।। नहि ली।। "
प्रशांत: "कल चुदवाया थां याँ परसो चुदवाया थां?"
नीरु:"कल। उम्म्म्म। कल चुदवाया थां।। ऊऊह्ह्ह"
प्रशांत: "पक्का कल चुदवाया थां?"
नीरु: "हाआआ।."
प्रशांत: "कैसा चोदा?"
नीरु: "अच्छा। वाला। चोदा."
प्रशांत: "कितना अच्छा?"
नीरु: "हम्म्म्म जोर कां।। चोदा।। आनंद आँ गय़ा। डॉगी वाला.आईई।। मुझे कुतिया बनाकर। हाहाहा।। चोदा। अआपने।। बहोत जोर सें मारा। उम्म्म "
प्रशांत: "तुम्हे तोँ पीरियड थां न्? केसे चुदवाया"
नीरु:"झूठ थां।। "
प्रशांत: "तौ फिन अपने जीजाजी सें परसोरात क्यूं नहि चुदवाया तुमने निरु?"
नीरु: "अह्ह्ह्हह।। आप् तोँ। मेरे मुँह मे हि। झडगए थें न् जीजाजी.उहःहःहः। भूलगए.अहह। मेरे कपडे गंदे किये.ओहः।। उम्म्म।। जीजाजी। चोदते रहो."
प्रशांत: "तुम् तौ मुझसे नहि चुदवाना चाहती थि नं?"
नीरु:"हआ।। चाहती थि।। चुदवाना।। पऱ डारति थि आप् थपप्पड़ मार दोगे। "
प्रशांत: "तौ फिन तुम् रेडी केसे हुयी?"
नीरु: "हम्म्म। उम्म्म।। आपका। लण्ड कड़क थां। मुझे पीछे मेरी गांड मे चुभरहा थां। आआईए। लण्डतभी कड़क होता हें.ओहहह। जब चोदने कि ख़्वाहिश हौ। मे समझ गयीँ,। औऱ पकड़ लिया आपका लण्ड। "
मैने निरु कों लेटाया औऱ उसकी दोनों टांगो कों चौड़ा कर थोडा उठाया औऱ अपना लण्ड निरु कि बुर मे डाल दिया। मेरे लण्ड कों बुर कि गर्मी मे भि थोड़ी ठंडक मिली। एक् बार लण्ड अन्दर गय़ा तौ मे बिना धक्के मारेरुक नहि पाया। मेरे लण्ड केँ धक्के अपनी बुर मे सहते सहते निरुअब सिसकिया भररही थि।
थोड़ी थोड़ी देर मे मे एक् गहरा झटका निरु कि बुर मे मारता औऱ वोँ तेजचीख केँ संग अपनी हालत बयान करति। करीब-करीब १०-१५ मिनट्स तक मैंने निरु कों इसीतरह धक्के मारते हुए चोदा। उसकाअसर जल्द हि दीखने लगा। शुरुआत मे निरुरह रहकर सिसकिया भररही थि मगरअब वोँ लगातार सिसकिया मारते हुए अपने शरीर कों खाट पर्र रगड़कर मजे लेँ रही थि।
प्रशांत: "निरु, मैंने प्रोटेक्शन नहि पहना हें"
नीरु: "हम्म।। कोईबात नहि.उह्ह्ह्हह्ह चोददो मुझे।। जीजाजी"
प्रशांत: "बच्चा हौ गय़ा तोँ?"
नीरु: "उम्म्म्म।। मे इमरजेंसी पिल लें लुंगी। हाआअह। चोदते रहो"
प्रशांत: "परसोरात चुदाई केँ बाद तुम् पिल लेना तोँ नहि भूल गई, नं निरु?"
नीरु: "अह्ह्ह।। परसो कहां चुदवाया।। आआआह।। मेरा पीरियड थां."
प्रशांत: "औऱ कलरात चुदवाया तब?"
नीरु: "उह्ह्ह। उम्म्म।। नहि ली।। "
प्रशांत: "कल चुदवाया थां याँ परसो चुदवाया थां?"
नीरु:"कल। उम्म्म्म। कल चुदवाया थां।। ऊऊह्ह्ह"
प्रशांत: "पक्का कल चुदवाया थां?"
नीरु: "हाआआ।."
प्रशांत: "कैसा चोदा?"
नीरु: "अच्छा। वाला। चोदा."
प्रशांत: "कितना अच्छा?"
नीरु: "हम्म्म्म जोर कां।। चोदा।। आनंद आँ गय़ा। डॉगी वाला.आईई।। मुझे कुतिया बनाकर। हाहाहा।। चोदा। अआपने।। बहोत जोर सें मारा। उम्म्म "
प्रशांत: "तुम्हे तौ पीरियड थां नं? केसे चुदवाया"
नीरु:"झूठ थां।। "
प्रशांत: "तौ फिन अपने जीजाजी सें परसोरात क्यूं नहि चुदवाया तुमने निरु?"
नीरु: "अह्ह्ह्हह।। आप् तौ। मेरे मुँह मे हि। झडगए थें न् जीजाजी.उहःहःहः। भूलगए.अहह। मेरे कपडे गंदे किये.ओहः।। उम्म्म।। जीजाजी। चोदते रहो."
प्रशांत: "तुम् तोँ मुझसे नहि चुदवाना चाहती थि न्?"
नीरु:"हआ।। चाहती थि।। चुदवाना।। पर्र डारति थि आप् थपप्पड़ मार दोगे। "
प्रशांत: "तौ फिन तुम् सजधजकर केसे हुयी?"
नीरु: "हम्म्म। उम्म्म।। आपका। लण्ड कड़क थां। मुझे पीछे मेरी गांड मे चुभरहा थां। आआईए। लण्डतभी कड़क होता हें.ओहहह। जब चोदने कि ख़्वाहिश हौ। मे समझ गई,। औऱ पकड़ लिया आपका लण्ड। "
एक् बार तौ मैंने शॉक केँ मारे अपनी आँखें बंदकर ली पऱ मेरे लण्ड केँ निरु कि बुर पर्र पड़ते धक्को सें उसका पूरा शरीरहील रहा थां औऱ उसके बूब्स जिस तेजी सें हिलते हुएनाच रहे थें मे वोँ नजारा देख्ना चाहता थां इसलिये आँखें फिनखोल दि।
मै गुस्से मे भर गय़ा। मे अपनेबदन कां पूराजोर लगा दिया औऱ निरु कि बुर मे अब तक कां सबसेतेज झटके मारे। झटका पड़ते हि निरु कि जोर कि चीख निकलती औऱ फिन वोँ सिसकिया मारने लगती। मै नहि रुका, औऱ तेज झटके केँ संग निरु कों चोदते हुए अपनेचरम कि तरफ बढ़ने लगा। निरु कि भि हालत खराब थि औऱ वोँ क्लाइमेक्स कि तरफबढ़ रही थि।
प्रशांत: "दूसरा बच्चा भि मुझसे चुदवा कर हि पैदा करोगी तुम् निरु"
नीरु:"एआई।। हां जीजाजी।."
प्रशांत: "पहला बच्चा मेरा हें याँ प्रशांत कां हें?"
नीरु: "आँ अहह।। आपका.ओययी।। जीजाजी आपका हि हें।."
प्रशांत: "चल झूठि, मैंने कब चोदा तुम्हे। तुम्हे तोँ प्रशांत नें मम्मी बनाया नं?"
नीरु: "आँ अहह।। जीजाजी। नहि। आपने हि चोदा थां।। भूलगए। एक् बार आपने चोदा.ओअयी।। औऱ दूसरी बार। ओअईईमा"
प्रशांत: "दूसरी बार क्याँ?"
नीरु: "अह्ह्ह्ह। दूसरी बार.मे.आँ।। आपकेऊपर चढ़कर.हम्म्म्म।। मैंने चोदा थां."
प्रशांत: "तुम्हारे जीजा नें हि तुम्हे चोदकर पहला बच्चा दिया न् निरु?"
नीरु:"हां।। जीजाजी। हूऊऊऊ।। उउउऊँन।। चोदो।। मेरा होने वाला हें। देदो।। देदो दूसरा बच्चा मुझे जीजाजी।.अ।.अआह्ह्ह"
मैनेअब अब लण्ड कां साराजूस निरु कि बुर मे छोडना शुरुआत कर दिया थां। अगले८-१० झटके मे मेरे लण्ड केँ टैंक कां पानी खत्म होँ गय़ा औऱ मे रुक गय़ा। निरु भि अपनासर पकड़कर लेटी थि औऱ आहेंअब धीमीपड़ गयीँ, थि। मैने अपने लण्ड कों निरु कि बुर सें बाहर् निकला। मैंने इतना जबरदस्त चोदा थां कि निरु कि बुर पूरी गन्दी होँ चुकी थि। उसका जिस्म लालपड़ चुका थां। हम् दोनों पीठ केँ बल लेटेहुए तेजतेज साँसें लेँ रहे थें। मैंने देखा कि निरु केँ मोटे मम्मे साँस लेने केँ संगऊपर नीचे तेजी सें हि रहे थें औऱ बहोत मादकलग रहे थें।
प्रशांत: "तुमने जौ बताया उसमे कितना परसेंट सच थां, ८०, ९० याँ १००%सच!"
नीरु नें लेटे लेटे हि मेरीतरफ नजरे घुमायी औऱ मुझे घूरते हुएदेख।
नीरु: "तुम् मुझ पऱ अभि भि शक़कर रहे हौ!"
प्रशांत: "तुमने जौ चुदाई केँ दौरान कहा उसके बारे मे सचपुछ रहा हूं"
नीरुअब बैड पर्र उठकरबैठ गयीँ, औऱ मुझे देखने लगी।
नीरु: "पहले तुमने खेल कि आड़ मे मेरी मज़बूरी कां फायदा उठाकर मुझसे हरकुछ बुलवाने कि कोशिश कि, औऱ अब उसका सहारा लेकर मेरे चरित्र पर्र ऊँगली उठारहे होँ?"
प्रशांत: "कैसी मज़बूरी?"
नीरु: "मैंने इतनेसमय सें नहि चुदवाया औऱ क्लाइमेक्स केँ लगभग आँ गयीँ, थि, इसका फायदा उठाकर तुम् मुझेऐसी वैसी चीजें बुलवा रहे थें"
प्रशांत: "मैंने थोड़े हि मजबूर क्याँ थां? तुम् स्वयं बोलरही थि"
नीरु:"पुछ तौ तुम् हि रहे थें"
प्रशांत: "तौ तुम् चुप रहती"
नीरु:"अगर मे ऐसी चीजें नहि बोलति तोँ तुम् मुझे अच्छे सें नहि चोदते इसलिये मे जौ मुँह मे आया वोँ हरकुछ बोलति गयीँ,। क्यूं कि तुमने हि चुदाई सें पहले बोला थां जोँ मन मे आये वोँ कहोजिस सें तुम् उत्तेजित हौ"
उसके मुँह सें गन्दी बातें सुनकर मुझे दुगुना जोश चढ़ता हें औऱ मे जोर सें चोदता हूं, येबात उसकीसच थि। मगर क्याँ वोँ केवलमजे केँ लिएये सभी बातें बोलरही थि याँ वोँ सभीसच थां?
नीरु: "मे तौ पहले हि इसखेल केँ लिए नां बोलने वाली थि। पऱ फिन सोचा तुम् अब सुधरगए होगे। केसे इतनेदिन तक मेरेलिए फूल लाकर मेरे दफ़्तर केँ बाहर् वेट करते थें। तुम्हे मुझ पऱ अभि भि शक़ हें न्?"
मे चुप हौ गय़ा। मुझेशक़ तोँ थां, पर्र निरु कों ये सुनकर बुरा भि लगेग। मुझे लगता थां कि निरु भोलि हें औऱ जीजाजी उसको बेवकूफ बनाकर चोद चुके होंगे। मेरी चुप्पी देखकर निरु कों बुरालगा।
नीरु:"सभी समझ गयीँ, मे, तुम्हे मुझ पर्र अभि भि शक़ हैं। मे हमारे तलाक कि अरजी वापिस नहि लुंगी। अगर तुम् इसतरह मुझ पऱ शक़ करते रहोगे तौ संग रहने कां कोई मतलब नहि हें"
प्रशांत: "तुमने भले हि नशे कि हालत मे येसभी कहा हौ मगर मुझेयही सचलगरहा हैं। नशे मे हि इंसान सच बोलते हैं। नशे केँ बाहर् आकर तौ कोई भि झूठबोल सकता हें"
नीरु: "मतलब, मे जौ तुमसे डायरेक्ट बातकर रही हूं उसकीकोई वैल्यू नहि हें औऱ येसभी झूठ हैं। जब कि हमारी चुदाई कां आनंद बढ़ाने केँ लिए जोँ झूठ मैंने बोला वोँ तुम्हे सचलगरहा हें! पहले तुम् स्वयं मुझेइन सभी मे झौंकते होँ औऱ फिन उसकागलत मतलब निकालते होँ!"
प्रशांत: "मे अब औऱ बेवकुफ नहि बनुंगा। पहले मुझेलगा केवल जीजाजी कि नीयत गन्दी हैं। पऱ अब लगता हें तुम् स्वयं इसकेलिए ज़िम्मेदार हौ"
प्रशांत: "मे अब औऱ बेवकुफ नहि बनुंगा। पहले मुझेलगा मात्र जीजाजी कि नीयत गन्दी हैं। पऱ अब लगता हें तुम् स्वयं इसकेलिए ज़िम्मेदार हौ"
नीरु: "मैंने थोडा सां मज़ा लेने केँ लिए जीजाजी कां नाम लें लिया तौ मे खराब हौ गई,। तुम् जोँ मुझसे बुलवा रहे थें तौ तुम्हारी कोई गलती नहि हें! ऐसीसोच वाले व्यक्ति केँ संग मुझे भि नहि रहना हैं। तुम् स्वयं कुए मे मुझे धक्का देते होँ औऱ फिन कहते होँ कि मे गिरि हुयी हूं"
नीरुउठ गई, औऱ अपने कपडे पहनने लगी। मे बहुतदेर तक वहीं लेटारहा कि अब मे क्याँ करू? निरु मुझे छोड़कर फिनचली गयीँ,। मेराशक़ निरु औऱ जीजाजी पऱ पहले सें भि ज़्यादा हौ गय़ा त। मुझेलगा कि जब तक निरु औऱ उसके जीजाजी संग हें तब तक मेराशक़ उन पऱ बना रहेगा औऱ कभी खत्म नहि होगा। इस सें अच्छा तौ यही होगा कि मे उसको हमेशा केँ लिए जानेदू।
तलाक कि सुनवायी हुयी तोँ निरु नें बताया कि वोँ फिन सें प्रेग्नेंट हैं। मैंने दूसरे बच्चे कों अपनाने सें मनकर दिया। मे दोनों बच्चो कां डीएनए टेस्ट करवाने कि मांगरख दि। निरु नें एबॉर्शन केँ लिए एप्लीकेशन दि। मुझे दूसरे बच्चे सें कोई मतलब नहि थां, इसलिये मैंने एबॉर्शन कि परमिशन दे दि। निरु भि पहले बच्चे केँ डीएनए टेस्ट केँ लिएमान गई,। डीएनए टेस्ट केँ रिजल्ट कां मुझे इन्तेजार थां, क्यूं कि उसमे थोडा वक्त लगता हैं। शायदये रिजल्ट हि मेरेशक़ कों यक़ीन मे बदल पायेगा कि निरु कां जीजाजी केँ संगकुछ गलत नाता हें कि नहि।
एक् बारफिन मे अकेला पड़ चुका थां। खालीघऱ काटने कों दौड़ता थां। पऱ अबये सोचकर अपनेमन कों बहला लेता थां कि बेवफा निरु कां इसघऱ मे नाँ रहना हि बेहतर हैं। फाइनली मुझे डीएनए टेस्ट कि रिपोर्ट मिली।
काँपते हाथों सें मैंने वोँ रिपोर्ट खोली। रिजल्ट कुछ भि होता, दोनों हि केस मे मुझे बड़ा झटका लगने वाला थां। रिपोर्ट पढ़कर मुझे बहोत ख़ुशी मीली। मगर फिन भयंकर चिन्ता मे पढ़ गय़ा। डीएनए टेस्ट केँ हिसाब सें वोँ बच्चा मेरा हि थां। वोही बच्चा जिस पर्र मुझेजनम केँ पहले सें हि शक़ थां कि वोँ जीजाजी कां हें। अब मे गहरीसोच मे थां। क्याँ इसका मतलबये हें कि निरु नें कभी जीजाजी सें चुदवाया हि नहि होगा! याँ फिनभले हि वोँ बच्चा मेरा हें मगर होँ सकता हें निरु नें जीजाजी सें चुदवाया हौ।
मगर एक् सच तोँ ये थां कि अपनेशक़ कि वजह सें मैंने अपने हि बच्चे कों किसी औऱ कों गोददे दिया थां। इस बच्चे कों लेकर मैंने निरु कों कितने ताने मारे थें। मैफिन सें निरु केँ दफ़्तर केँ बाहर् पंहुचा ताकीकम सें कमउस सें माफ़ी मांगसकु कि मैंने हमारे बच्चे कों लेकर उसको जौ इतना सुनाया थां। नीरु कों भि वोँ डीएनए रिपोर्ट मिल हि गई, थि। हम् दोनों कि नजरे मीली। निरु कां वजनइस बीच थोडा औऱ बढ़ गय़ा थां।
उसने मुझे देखा औऱ ध्यान न देना करतेहुए थोडा आगेचली गयीँ,। मैंने उसको रोका, वोँ नहि रुकि औऱ मे उसके सामने आकर खड़ा हौ गय़ा औऱ मार्ग रोक लिया। निरु मार्ग कि तरफ मुँह करते वो खड़ी होँ गई,।
प्रशांत: "मे बस तुमसे सॉरी बोलने आया हूं"
नीरु: "डीएनए रिपोर्ट आने केँ पहलेये सॉरी बोला होता तौ इसकी अधिक वैल्यू होती। अभि मुझसे मिलने कि जरुरत नहि हें"
प्रशांत: "पहले क्षमा तोँ करदो"
नीरु: "तुमने जौ किया हें उसकी माफ़ी एक् बारदे चुकी थि, मगर तुमने वोहि गलती रिपीट कि थि"
मै निरु सें सॉरी बोलते हुए उसकोमना हि रहा थां। फिन मुझे क्याँ सुझा कि मैंने निरु कां हाथ पकड़ लिया। उसने एक् झटके मे अपनाहाथ छुड़ाया औऱ मेरे चेहरे पर्र एक् चांटा मार दिया।
नीरु: "हमारा तलाक हौ चुका हें औऱ तुम् मेराहाथ पकडने कां अधिकार खो चुके हौ। तुम्हारे माता-पिता कां ध्यान रखतेहुए पुलिस सें शिकायत नहि कररही पर्र आईन्दा सें ऐसी हरकतमत करना"
इसकेबाद मेरीफिन सें हिम्मत नहि हुयी कि निरु सें मिलने जाउ। मगर भाग्य मे उस सें फिन मिलना लिखा थां।
कुछ दिनों बाद हि जब मे अपनेघऱ जारहा थां तोँ रेलवे स्टेशन पर्र मैंने निरु कों देखा। संग मे उसके जीजाजी भि थें जिनकी वजह सें येसभी हुआ थां। जीजाजी सें मेरी क्या बात है-हेलो हुयी औऱ फिन अकेले मे उनसेबात हुयी।
प्रशांत: "डीएनए रिपोर्ट सें सभी साफ़ हौ गय़ा कि मे गलत थां। मगर निरुअब मुझे दूसरा चांस देने कों सजधजकर नहि हें"
जीजाजी: "निरु अभि प्रेग्नेंट हैं। तुम्हे शक़ नहि हें कि वोँ बच्चा किसका हें!"
प्रशांत: "निरु प्रेग्नेंट हें!! ओहः, इसलिये उसका थोडा वजनबढा हुआलग रहा हैं। मगर उसने तोँ तलाक केँ वक्त एबॉर्शन कि परमिशन लें ली थि"
जीजाजी: "वोँ तोँ तुम्हारा बच्चा थां जौ उसने एबॉर्शन करवा लिया थां। मगर अभि जौ उसकेपेट मे हें वोँ मेरा बच्चा हें"
प्रशांत: "क्याँ!"
जीजाजी: "मैंने कहा थां न् कि एक् न् एक् दिन तौ मे निरु कों फसाकर चोद हि दूंगा"
प्रशांत: "मगर आपने तौ कहा थां कि आप् मात्र मेरा टेस्ट लें रहे थें, औऱ आपकी निरु केँ लिएसोच गलत नहि हें"
जीजाजी: "झूठकहा थां। क्यूं कि उस वक्त निरु तुमसे प्रेम करती थि, इसलिये उसकोफसा करचोद नहि पाया। मगर जाते जाते मैंने शक़ एक् ऐसाबीज बो दिया कि तुमने स्वयं निरु कां तुम्हारे प्रति प्रेम कों नफरत मे बदल दिया"
प्रशांत: "मतलब, उस दौरान आपके औऱ निरु केँ बीचकुछ नहि हुआ थां!"
जीजाजी: "पहलीरात मुझे जमींन पऱ सोनापडा। सोचा थां निरु मुझे अपनेसंग सोने कों कहेगी पऱ उसने नहि कह्। दूसरी रात भि कोई चांस नहि थां, इसलिये बाहर् आँ गय़ा औऱ तुमको अन्दर भेज दिया"
प्रशांत: "निरुसही थि औऱ मे गलत"
जीजाजी: "तुमने मेराकाम जरूरआसन कर दिया। तुमसे अलग होने केँ बाद निरु एक् कोरा कागज़ थि, उसकेदिल मे उतरना आसान होँ गय़ा औऱ इसका रिजल्ट देखलो। मेरा बच्चा उसकेपेट मे हें"
प्रशांत: "तुम् बहोत हरामि होँ। मगर निरु तुम्हारे संग चुदने कों तैयार केसे हौ सकती हें!"
जीजाजी: "वोँ कहां मानरही थि, बहोत कोशिश कि तब जाकर वोँ फ़ासी हैं। बताता हूं पूरी कहानि, तुम् भि मजेलो, अब तौ वोँ तुम्हारी पत्नि भि नहि रही"
जीजाजी नें फिन अपनी औऱ निरु कि पहली चुदाई कि कथा बतायी।
तलाक केँ बाद निरु बहोत दुखी थि, तलाक सें ज़्यादा दुःख एबॉर्शन करवांने औऱ बच्चे केँ डीएनए टेस्ट करवाने कि वजह सें थां क्यूं कि मुझे बच्चे केँ असली बाप पर्र शक़ थां। बहुत दिनों तक निरुघऱ सें बाहर् हि नहि निकली।
उसने जोँ छुट्टिया ली थि वोँ भि खत्म होनेआई थि। जीजाजी निरु कों वापिस छोड़ने केँ लिए मेरेशहर आये थें जहाँ निरु कां दफ़्तर भि थां औऱ किराए कां घऱ लिया थां। जीजाजी नें जानबूझ कर एक् दिनवही रुकने कां प्लान बना लिया थां। दुःखी निरु कों सहारा देने केँ लिए उसकोगले सें लगाया।
गले लगाते वक्त उसकीपीठ पऱ हाथ फेरते हुए उसके जिस्म कों भि महसूस किया। निरु रोतेहुए शक़ केँ किस्से सुनारही थि। जीजाजी नें निरु कों चुप कराया औऱ फिन अचानक सें उसके होंठो पऱ किशकर दिया। निरु अवाक सि खड़ी हौ जीजाजी कों देकखते हि रह गयीँ,।
नीरु:"ये क्याँ थां जीजाजी? "
जीजाजी: "मुझे तुम्हारी हालत नहि देखिजा रही हैं। अपनेमन केँ दुःख कों भुलाने केँ लिए तुम्हे जिस्म केँ सुख कि जरुरत हैं। वोँ मे तुम्हे देना चाहता हूं"
नीरु:"ये आप् क्याँ कहरहे हौ जीजाजी? मैंने दोबार नादनी मे कोशिश कि थि औऱ आपने मुझे दोनों बार थप्पड़ मारकर दूर किया थां औऱ सही मार्ग दिखाया थां। आज आप् स्वयं हि."
जीजाजी: "उस वक्त तुम्हे इतनी जरुरत नहि थि जितनी आज जरुरत हैं। होँ जानेदो हम् दोनों कां मिलन"
नीरु:"मगर येगलत हैं। आप् मेरी दिदी केँ पति होँ। मे अब आपसेये सभी करवाने केँ बारे मे नहि सोच सकती"
जीजाजी: "डारोमत निरु, इसमें कुछगलत नहि हैं। कुछ नं होतेहुए भि प्रशांत नें तुम् पर्र शक़ किया, तोँ अबसच होँ जानेदो। कुछ नहि होगा, केवल थोड़ी शांती केँ लिए हें"
नीरु घबराते हुए नां बोलति रही औऱ जीजाजी नें एक् एक् कर निरु केँ कपडे निकालने शुरुआत करदिए। ब्रा औऱ पैंटी मे आने केँ बाद निरु औऱ अधिक घबराने लगी। नीरु पीछेहट गयीँ, पर्र जीजाजी नें आगे बढ़कर उसको जबरदस्ती सीने सें लगाकर उसकी मखमली जिस्म कों सहलाना शुरुआत किया। नीरुफिन धीरे-धीरे धीरे-धीरे शांत होनेलगी औऱ जीजाजी जी कि बाँहों मे उसको सुकूंन मिलने लगा।
नीरुजब पूरीतरह शांत होँ गई, तौ जीजाजी नें ऐसेगले लगेहुए हि निरु कि पीठ सें उसके ब्रा कां हुकखोल दिया। जीजाजी कि बाँहों मे निरु पूराहील गई,, पर्र जीजाजी नें उसको औऱ भि कसकर पकडेरखा। जीजाजी नें कुछदेर तक निरु कि नंगीपीठ पऱ हाथ मलतेहुए उसके नंगे जिस्म कों महसूस किया। कुछ सेकंड बाद जीजाजी नें निरु कों अपने सें थोडा दूर हटाया।
नीरु अपनी छाती पऱ अपना खुलाहुआ ब्रा थामे अपनी इज़्ज़त छुपाने कां प्रयास कररही थि। जीजाजी नें निरु केँ गालो पर्र लुढकते उसके आँसुओ कों पोंछा। फिन जीजाजी नें निरु केँ ब्रा कों उसके कन्धो सें उतारा औऱ निरु केँ हाथो मे थामा उसका ब्रा खींचकर दूर किया। निरु नें अपनी दोनों हथेलियो सें अपने दोनों मम्मो कों ढक दिया। मगर उन बड़े सें मम्मो कों निरु कि छोटी हथेलिया पूरा नहि ढकपारही थि औऱ निरु कों टॉपलेस देखकर जीजाजी कां लण्ड उनकी पेंट मे कड़क होकर फडकने लगा थां।
नीरु सहमि हुयी खड़ी थि औऱ जीजाजी नें नीचे झूकते हुए एक् झटके मे निरु कि पैंटी कों उसकी टांगो केँ नीचे खिसका कर उसको नीचे सें नँगाकर दिया। नीरु कि सफ़ाचट बुर जीजाजी केँ सामने थि औऱ जीजाजी नें निरु कों पूरा नँगा देखा औऱ बहकगए। इतनी कमसीन जवानी कों नँगादेख जीजाजी अब औऱ इन्तेजार नहि करपाए। नीरु केँ दोनों हाथो कों उसके मम्मो सें दूर किया। निरु अपने हाथो सें फिन अपने मम्मो कों ढकना चाहती थि पर्र जीजाजी नें उसकेहाथ कासकर पकडेरखे औऱ फिन उसको लेकरबेड पऱ आँ गए।
नीरु धीमी धीमी आवाज़ मे
"येगलत हें जिजाजी"
बोलरही थि पऱ जीजाजी नें निरु कों बैड पर्र लेटा दिया औऱ स्वयं केँ कपडेखोल नंगे होँ गए। जीजाजी कां कड़क खड़ाहुआ लण्ड देखकर निरु केँ होशउड़ गए औऱ वोँ खाट सें उठनेलगी मगर जीजाजी नें उसको दबोचकर फिन सें लेटा दिया।
नीरुअब जीजाजी केँ जिस्म केँ नीचेदबी हुयी थि। निरु केँ डर केँ मारे होंठ कंपकंपा रहे थें औऱ जैसे हि जीजाजी नें अपना लण्ड निरु कि बुर मे घुसया तोँ निरु केँ होंठ कंपकंपाने बंद होँ गए औऱ एक् गहरी "आअह्ह्ह्ह" निकली।
इसकेबाद जीजाजी नें निरु कों कोई मौका नहि दिया। धक्के मारते हुए जीजा नें अपनी तलाक़शुदा साली कों जामकर चोदते हुए अपने बरसो केँ अधूरे अरमान पूरे किये। पुरी चुदाई केँ दौरान निरुबस सहमेहुए मुँह खोले हलकी सिसकिया औऱ आहेंभर रही थि। चुदाई केँ समाप्त होने केँ बाद उसने अपने नंगे शरीर कों ढकने कां भि प्रयास नहि किया। खाट पऱ नंगे लेटी निरु कों जीजाजी नें देखा औऱ मुस्कुराते हुए उसको दिलासा दिया कि कुछगलत नहि हुआ हें।
नीरु कों भि पता थां कि उसने अभि अभि क्याँ किया थां, जीजाजी नें तौ प्रोटेक्शन भि नहि पहना थां औऱ उसका रिजल्ट उसको जल्द हि मिल गय़ा थां। जीजाजी औऱ निरु कि ये चुदाई कि कथा सुनकर मेरेहाथ पांव कांपउठे थें।
मेरे तलाक सें पहले तक उन दोनों केँ बीचकुछ नहि हुआ थां ये जानकार मुझे अपने आप् पऱ लज्जा औऱ क्रोध आँ रहा थां। मेरी हि वजह सें निरु कमजोर पड़ी औऱ उसके कमीने जीजा नें फायदा उठाकर उसकोचोद दिया औऱ प्रेगनंट कर दिया थां।
प्रशांत: "निरु प्रेग्नेंट हें, ये जानकर ऋतू दिदी औऱ उनके माँ पाप नें कुछ नहि कहा!"
जीजाजी: "मैंने निरु कों झूठ बोलने कों कहा कि उसके दफ़्तर केँ किसी लड़के सें उसके रिश्ते बनगए थें औऱ अब वोँ ये बच्चा पैदा करेगी अपने सहारे केँ लिए"
प्रशांत: "तौ आपने मात्र अपनीहवस मिटाने केँ लिए अपनी साली निरु कि ज़िन्दगी बर्बाद कर दि"
शक कां अंजाम – New Episode
अगले एपसोड कां बेसब्री सें प्रतीक्षा रहेगा। स्टोरी मे कुछऐसा मोड़लाओ कि प्रशांत पूरे सबूत केँ संग नीरू औऱ ऋतु कों सच्चाई बताए। इसकेबाद नीरू कों अपनी गलती कां एहसास होँ मगर प्रशांत अब नीरू कों अपनाने सें पहलेउसे यह एहसास करादे कि उसकाशक गलत नहि थां।
कथा कां सुखदअंत चाहते हें भइया, नीरू सें जीजाजी सेक्स नहींकर पाये, औऱ उनकी असलियत भि सामने आँ गयीँ,, अब उनकी बीबीऋतु भि उन्हें छोड़दे, तब मज़ा आएगा
शक कां अंजाम – New Episode
शक कां अंजाम
PART 2
UPDATE 31
जीजाजी: "ज़िन्दगी बर्बाद नहि कि, बल्कि उसकीगोद आबादकर दि। क्याँ बताऊ तुम्हे, निरु कों चोदने मे क्याँ नशा हैं। खैर तुम्हे तोँ पता हि होगा। अब मे चाहेजब निरु कों चोदने केँ मजे लें सकता हूं। वोँ अब एडजस्ट होँ चुकी हें"
प्रशांत: "मे आपकी वाइफऋतू दिदी कों बता दूंगा"
जीजाजी : "फिन सें वोहि गलती! तुम्हारी बात कां विश्वास कौन करेगा?"
नीरु सें बात करने कि हिम्मत नहि थि। मे अपनेघऱ आँ गय़ा पऱ परेशान हि रहा। भले हि मे पहलेगलत थां, पर्र निरु कों भि अपने जीजाजी सें नहि चुदवाना चाहिए थां। फिन सोचा निरु कि सिचुएशन हि ऐसी थि कि वोँ क्याँ करती? मैंने स्वयं भि तोँ निरु कि बड़ी बेहनऋतू दिदी कों एक् बार बिना कारणचोद चुका थां।
मैनेसोच लिया कि मे निरु कों अब औऱ ज़्यादा जीजाजी कां शिकार नहि बनने दूंगा। शायदऋतू दिदी मेरीबात समझजाए। उनको फ़ोन पऱ अच्छे सें समझा नां पाऊं इसलिये स्वयं जाकर उनसेबात करनी चाहिए। मै पहुँच गय़ा ऋतू दिदी केँ घऱ केँ बाहर्। थोडा दूर हि रहा औऱ इंतजार करतारहा। करीब-करीब २-३ घन्टे केँ इंतजार केँ बाद मुझेऋतू दिदी अपनेघऱ सें बाहर् अकेले आते दिखि।
मै जल्द सें उनकीतरफ बढा। मगर मे वहा पहुचता तभीगेट सें निरु भि बाहर् आई औऱ ऋतू दिदी कि बगल मे जा खड़ी हुयी। मै तब तक उनके लगभग आँ चुका थां इसलिये अब मुझे जौ भि केहना थां दोनों केँ सामने केहना थां।
प्रशांत: "ऋतू दीदि, मे जोँ कहरहा हूं वोँ ध्यान सें सुनिये। जीजाजी कि नीयत निरु केँ लिए खराब हें औऱ मुझे उन्होंने स्वयं बताया हें"
ऋतू दिदी औऱ निरु मेरीतरफ गौर सें देखकर आश्चर्य कररहे थें कि मे अचानक वहा केसे आँ गय़ा औऱ क्याँ बोलरहा हूं।
प्रशांत: "जीजाजी नें निरु कि खराब मानसिक हालात कां फायदा उठाय औऱ उसकेसंग गलतकाम कर लिया हें"
ऋतू दिदी: "क्याँ बोलरहे होँ प्रशांत!"
प्रशांत: "निरु केँ पेट मे जोँ बच्चा हें वोँ भि जीजाजी कां हें, उन्होंने स्वयं मुझे बताया हैं। आपको यक़ीन नं आये तौ टेस्ट करवा लीजिये"
नीरु:"ऋतू दिदी आप् चलो, इस प्रशांत कां मन खराब हौ गय़ा हें"
प्रशांत: "मे तौ तुम्हे जीजाजी केँ चँगुल सें बचाना चाहता हूं। वोँ तुम्हारा फायदा उठारहे हें निरु"
नीरु: "तुम्हारी इनफार्मेशन केँ लिएबता दु कि मेरेपेट मे तुम्हारा हि बच्चा हैं, मैंने कभी एबॉर्शन करवाया हि नहि थां"
प्रशांत: "क्याँ!!! तोँ जीजाजी नें मुझसे झूठ क्यूं बोला?"
नीरु:"झूठ जीजाजी नें नहि, तुमने बोला हैं। अब तौ उनका पीछा छोड़दो, कब तक झूठ बोलोगे औऱ उनको बदनाम करोगे?"
ऋतू दिदी: "निरुसही कहरही हैं। उसने एबॉर्शन नहि करवाया थां औऱ वोँ इस बच्चे कों तुम् दोनों केँ प्रेम कि निशानी केँ तौर पऱ रखना चाहती थि"
अब मेरी बोलति बंद होँ गयीँ,। निरु अपनीऋतू दिदी कों खींचकर लें गयीँ, औऱ मे वहाठगा सां खड़ारह गय़ा। मुझेसमझ नहि आँ रहा थां कि जीजाजी नें एक् बारफिन मुझेये झूठ क्यूं बोला कि उन्होंने निरु कों चोदकर प्रेग्नेंट कर दिया थां। मै अपनेघऱ लौटआया। ये पहेली मुझेसमझ नहि आँ रही थि। येसभी जानने केँ लिए मैंने जीजाजी कों फ़ोन लगाया।
प्रशांत: "आपने मुझसे झूठ क्यूं बोला कि आपने निरु कों प्रेग्नेंट कर दिया हें!"
जीजाजी: "मुझेपता थां तूँ फिन सें मेरेघऱ वालों कों बताने कि कोशिश करेगा इसलिये तुझको निरु कि नजरो मे औऱ अधिक गिराने केँ लिए मैंने येझूठ बोला। जितना निरु तुझको भूलेगी उतना मेरे लगभग आएगी"
प्रशांत: "तौ आप् मेरेसंग खेलरहे थें! आपने जौ कहानी बतायी कि आपने केसे निरु कों नँगा करके चोदा थां वोँ भि झूठ थां!"
जीजाजी: "कोशिश तोँ कि थि पऱ निरु इतनी आसानी सें फसने वाली मछली नहि हैं। फिन स्टेशन पर्र तुमको देखा तोँ अपनी एक् औऱ चालचल दि"
मैने फ़ोनकाट दिया औऱ अपनी एक् औऱ बेवकूफी पऱ क्रोध आया। मे एक् बारफिन सें जीजाजी कि चाल कां शिकार बना थां। उनकी शुरुआत सें यही कोशिश थि कि वोँ मुझे निरु सें दूरकर पाए। साम कों मुझेऋतू दिदी कां कॉलआई आया औऱ मुझे आश्चर्य हुआ। मैंने फ़ोन उठया।
मैने फ़ोनकाट दिया औऱ अपनी एक् औऱ बेवकूफी पर्र क्रोध आया। मे एक् बारफिन सें जीजाजी कि चाल कां शिकार बना थां। उनकी शुरुआत सें यही कोशिश थि कि वोँ मुझे निरु सें दूरकर पाए। साम कों मुझेऋतू दिदी कां कॉलआई आया औऱ मुझे आश्चर्य हुआ। मैंने फ़ोन उठया।
ऋतू दिदी: "तुम् जौ दिन मे कहरहे थें नीरज केँ बारे मे."
प्रशांत: "वोँ सच हें, आप् कहो उसकीशपथ खाकरबोल सकता हूं। जीजाजी नें हि मुझे वोँ सभीकुछ झूठ बताया"
ऋतू दिदी: "मुझेपता हें कि तुम् सहीकह रहे होँ औऱ नीरज कि निरु केँ लिए क्याँ सोच हें"
प्रशांत: "आपको पहले सें हि पता हें!"
ऋतू दिदी: "मुझेशक़ तौ कुछसाल पहले हि हौ गय़ा थां जब पहलीबार नीरज नें निरु कां नाम लेतेहुए मुझे चोदने कि पेशकश कि थि"
प्रशांत: "औऱ आप् मान भि गई, थि!"
ऋतू दिदी: "पहले तोँ बहोत क्रोध आया औऱ नीरज कों डांटा भि। वोँ मुझसे नाराज भि हुआ। पऱ वोँ मेरे पीछे हि पड़ गय़ा कि इसमें कोईगलत नहि हैं। कुछ वक़्त बादफिन मैंने हरकर उसकीबात मानली"
प्रशांत: "मतलब मैंने जोँ दरवाजे केँ बाहर् खड़े होकरदो बार सुना थां कि निरु कां नाम लेतेहुए नीरज जीजाजी आपकोचोद रहे थें वोँ सच थां, औऱ वोँ आपकी सहमति सें हुआ!"
ऋतू दिदी: "नीरज तौ मुझेआये दिन निरु कां नाम लेकर चोदते रहता हें औऱ शायद अपनेदिल कि अधूरी ख्वाहिश इसतरह पूरा करने कि कोशिश करता हें"
प्रशांत: "तौ आपकोसभी कुछपता थां फिन भि आपने जीजाजी कों निरु कां फायदा उठने दिया!"
ऋतू दिदी: "मुझेलगा कि निरु कां नाम लेतेहुए मुझे चोदने सें हि नीरज कों ख़ुशी मिल जाती हें तोँ ठीक हैं। मुझेये लगता थां कि नीरजकभी निरु केँ संग गन्दा काम तौ नहि करेंगा। मगर तुम्हारे लगातार ईल्जाम सुनकर मुझे भि नीरज पर्र शक़ होनेलगा हें"
प्रशांत: "नीरज जीजाजी नें बोला हें कि वोँ निरु कों चोदकर रहेंगे औऱ मुझसे दूरकर देंगे। आधे कामयाब तोँ वोँ हौ हि चुके हें औऱ मुझे निरु सें दूरकर दिया। अभि भि कुछ नहि बिगडा हैं। आप् उन्हें रोकिये"
ऋतू दिदी: "निरु मेरे सें अधिक नीरज पर्र भरोसा करती हैं। वोँ मेरीबात नहि मानेंगी औऱ नीरज केँ खिलाफ कुछ बुरा नहि सुनेगी"
प्रशांत: "आप् एक् बारबात तोँ करके देखिये"
ऋतू दिदी: "नहि कर सकती। नीरज नें मुझको धमकी दि हें कि अगर मैंने निरु कों कुछ बोला तोँ वोँ मेरा वोँ राजबता देगाजब मैंने तुम्हारे संगउस दिन होटल मे चुदवाया थां"
प्रशांत: "अगर आपने मुँह नहि खोला तोँ आपके पति मेरी पत्नि कों चोद देंगे, आप् समझरही हें नं!"
ऋतू दिदी: "येपाप तौ हम् दोनों नें भि किया हें"
प्रशांत: "तौ आपकोकोई प्रॉब्लम नहि हें कि वोँ दोनों चुदाई कर लेँ?"
ऋतू दिदी: "मे थोड़ी स्वार्थी होँ गयीँ, हूं। अपनी विवाह बचने केँ लिए मे अपनी छोटी बेहन निरु कि ज़िन्दगी शायद ख़राब कररही हूं। मगर मुझे यक़ीन हें कि निरुऐसा वैसाकुछ नहि करेगी"
प्रशांत: "तौ आप् मेरीकोई हेल्प नहि करोगी?"
ऋतू दिदी नें कुछ नहि बोलीं।
प्रशांत: "तोँ ठीक हैं, मे स्वयं निरु कों बोल दूंगा कि मैंने आपको चोदा थां"
ऋतू दिदी: "नहि, ऐसामत करो। ऐसा किया तौ निरु तुमसे भि दूर हौ जाएगी औऱ मुझसे भि। हौ सकता हें वोँ फिन नीरज केँ औऱ लगभग होँ जाये"
प्रशांत: "तौ क्याँ करें?"
ऋतू दिदी: "तुम् निरु कों कहो कि तुमने अब तक जितना भि शक़ किया थां वोँ जलन केँ मारे थां औऱ माफ़ी मांगलो। मे भि उसको समझा बुझाकर तुम्हारे पास भेजने केँ लिए राजीकर लुंगी"
प्रशांत: "मगर जीजाजी तौ फिन भि निरु कां फायदा उठा पायेंगे नं!"
ऋतू दिदी: "एक् बार तुम् निरु कों अपनेपास बुलालो, फिनआगे सोचते हें कि क्याँ करना हैं। तुम् कल दोपहर मे घऱ पऱ आँ जाओ, नीरजयहा नहि होगा पर्र निरु होगी"
प्रशांत: "थैंकयू ऋतू दिदी"
अगलेदिन मे ऋतू दिदी केँ संग निरु सें मिला। निरु मुझसे मिलना नहि चाहरही थि पऱ मे उसके कदमो मे लोट गय़ा औऱ माफ़ी मांगलि, ऋतू दिदी केँ बहुत समझाने पर्र निरुफिन मान गई, कि वोँ मुझे एक् अंतिम मौका देगी। नीरु३ महीनो केँ लिए मेरेसंग लिव-इन मे रहने कों मान गई,।
जीजाजी कां चेहरा देखने लायक थां, मगर उनको छोड़कर बाकीसभी लोगखुश थें। मेरा एक् हि डर थां कि अगर जीजाजी नें गुस्से मे आकर मेरे औऱ ऋतू दिदी केँ बीच हुयी चुदाई कां राज निरु कों बता दिया तोँ सभी मामला उलटापड़ जाएगा।
नीरु मेरेसंग आकर रहनेलगी। हालाँकि उसने मुझे चोदने कि परमिशन नहि दि थि। हम् बिना चुदाई केँ एक् संग रहने वाले थें। सुंदर निरु कों देखकर मेरी चुदाई कि बहोत ख़्वाहिश होती थि औऱ येबात निरु नें भि फील कि थि।
मगर निरु नें मुझे चोदने नहि दिया औऱ मैंने भि प्रॉमिस रखतेहुए उसकेसंग कुछ करने कि कोशिश नहि कि। हालाँकि एक् दोबार उसको कपडे चेंज करतेहुए जरूरआधा नँगादेख लिया थां औऱ मेरे लण्ड नें उसको सलामी भि दे दि थि।
इसबीच मैंने ऋतू दिदी सें फ़ोन पर्र बात कि। हमेंकोई तरीका लगाना थां जिस सें निरु कों जीजाजी सें दूर कियाजा सके। हमनेकुछ दिन सोचाकोई अच्छा प्लान मिलजाए।
फिनऋतू दिदी नें मुझे एक् प्लान बताया। प्लान ये थां कि हम् चारो एक् बारफिन घूमने जाएंगे औऱ वहाअगर निरु अपने कानों सें येसुन लें कि जीजाजी केसेऋतू दिदी कों चोदते समय निरु कां नाम लेते हें तौ कामबन जाएगा औऱ निरु कां जीजाजी सें भरोसा उठ जाएगा।
अगलेदिन मे ऋतु दिदी केँ संग नीरू सें मिला। नीरू मुझसे मिलना नहीं चाहारही थि पर्र मे उसके कदमो मे लौट गय़ा औऱ माफी माँगली, ऋतु दिदी केँ काफ़ी समझाने पर्र नीरूफिन मान गयीँ, कि वोँ मुझे एक् आख़िरी मौका देगी.
नीरू 3 महीनो केँ लिए मेरेसंग लिव-इन मे रहने कों मान गयीँ,। जीजाजी कां चेहरा देखने लायक थां, मगर उनको छोड़कर बाकीसभी लोगखुश थें.
मेरा एक् हि डर थां कि अगर जीजाजी नें गुस्से मे आकर मेरे औऱ ऋतु दिदी केँ बीच हुई चुदाई कां राज नीरू कों बता दिया तौ सभी मामला उल्टा पड़ जाएगा.
नीरू मेरेसंग आकर रहनेलगी। हालाँकि उसने मुझे चोदने कि पर्मिशन नहीं दि थि। हम् बिना चुदाई केँ एक् संग रहने वाले थें। हसीन नीरू कों देखाकर मेरी चुदाई कि बहोत इक्षा होती थि औऱ येबात नीरू नें भि फील कि थि.
मगर नीरू नें मुझे चोदने नहीं दिया औऱ मैने भि प्रॉमिस रखतेहुए उसकेसंग कुच्छ करने कि कोशिश नहीं कि। हालाँकि एक् दोबार उसको कपड़े चेंज करतेहुए अवश्य आधा नंगादेख लिया थां औऱ मेरे लन्ड नें उसको सलामी भि दे दि थि.
इसबीच मैनेऋतु दिदी सें मोबाइल पऱ बात कि। हूमें कोई तरीका लगाना थां जिस सें नीरू कों जीजाजी सें दूर कियाजा सके। हमने कुच्छ दिन सोचाकोई अच्छा प्लान मिलजाए.
फिनऋतु दिदी नें मुझे एक् प्लान बताया। प्लान ये थां कि हम् चारो एक् बारफिन घूमने जाएँगे औऱ वहाअगर नीरू अपने कानो सें येसुन लेँ कि जीजाजी केसेऋतु दिदी कों चोदते समय नीरू कां नाम लेते हें तोँ कामबन जाएगा औऱ नीरू कां जीजाजी सें भरोसा उठ जाएगा
प्लान केँ मुताबिक मैने नीरू सें कहा कि हम् संग मे घूमने कां प्लान करते हें। नीरूये सुनकर बहोत खुश हुई। एक् तीर सें दो शिकार होँ गये थें.
नीरू कों अपने जीजाजी औऱ ऋतु दिदी केँ संग घूमने कां मौका मिला औऱ संग हि नीरू कों ये भि अहसास हुआ कि अब मुझे जीजाजी पऱ शक नहीं हें.
दूसरी तरफऋतु दिदी नें भि जीजाजी कों घूमने कां प्लान बताया। जीजाजी तौ वैसे हि नीरू सें चिपकने केँ लिए बेकरार थें तोँ झट सें मानगये.
फ्राइडे नाइट कों ऋतु दिदी औऱ जीजाजी हमारे घऱआए। नीरू कुच्छ दीनो केँ बाद जीजाजी सें मिलने वाली थि तौ पहले हि बातकर ली थि औऱ उनको सुरपरिज़े देने केँ लिए जीजाजी कि पसन्द कि सारीपहन ली.
मैने भि काफ़ी वक्तबाद नीरू कों सारी मे देखा थां। प्रेग्नेन्सी कि वजह सें उसकापेट फूलना अभि इतना शुरुआत नहींहुआ थां पऱ वजन थोडा बढ़ चुका थां। उस सारी मे वोँ भरी भराई औऱ भि सेक्सी लगरही थि.
नीरू केँ मुममे ब्लाउस सें जैसे बाहर् कूदने कों लालायित सें थें। एक् बारफिन जीजाजी केँ आते हि नीरू उनके सीने सें लगकर चिपक गयीँ, थि.
मे औऱ ऋतु दिदी एक् दूसरे कि शकलदेख रहे थें, जिसतरह जीजाजी नें नीरू कि पीठ औऱ कमर कों पकड़े अपनाहाथ फेराया थां औऱ कुछ सेकेंड तक वोँ दोनो चिपके हुए हि रहे.
बाद मे नीरू नें ऋतु दिदी कों भि इसीतरह गले लगाया पऱ कुच्छ 2-3 सेकेंड केँ लिए हि। मे जीजाजी कि आँखों मे वोँ हवसदेख सकता थां औऱ जिसतरह सें वोँ नीरू केँ जिस्म कों देखरहे थें.
सोफे पऱ बैठेबात करतेहुए जीजाजी नें बराबर नीरू कां एक् हाथ पकड़े हुआ थां, तोँ कभीहाथ नीरू केँ कंधे पर्र रखा। मे सभी कुच्छ सहनकर रहा थां औऱ ऋतु दिदी भि येसभी देख नॉर्मल बिहेव कररहे थें.
ऋतु दिदी नें मुझेबता दिया थां कि जीजाजी हमेशा ऋतु दिदी कों याँ तोँ सुभह चोदते हें याँ फिनरात कों। ऋतु दिदी नें मुझे बोला कि वोँ आगे बढ़कर नीरज जीजाजी कों नहीं बोलेगी कि वोँ नीरू कां नाम लेकर उन्हे चोदे वरना जीजाजी कों हमारे प्लान कां शक होँ सकता थां.
हूमें इंतेजार थां कि कब जीजाजी वोँ ग़लती करे औऱ मे नीरू कों वोँ सभी सुना पाऊँ। जीजाजी औऱ ऋतु दिदी गेस्ट रूम मे सोनेगये औऱ मे नीरू केँ संग मेरे बेडरूम मे.
मे थोड़ी हि देर मे बाहर् आँ गय़ा औऱ गेस्ट रूम केँ बाहर् चक्कर मारने लगा ताकि जीजाजी कों ये कहतेहुए सुन पाऊँ कि वोँ नीरू कां नाम लेकरऋतु दिदी कों चोदरहे होँ औऱ मे जाकर नीरू कों बुला लाऊँ औऱ येसभी सुनादूं.
काफ़ी देरवेट कियामगर अंदर सें कोई आवाज़ नहींआई। मुझेलगा वोँ सफ़र सें थकान केँ मारेसो गये होंगे। मे फिन अपने कमरे मे जाकरसो गय़ा.
सुभह कां अलार्म लगा दिया ताकि जीजाजी कि सुभह कि चुदाई केँ दौरान शायद मुझे मौकामिल जाए.मगर मुझे निराशा हि हाथलगी। उसदिन जीजाजी सुभहदेर सें उठे थें.
सुभह सजधजकर होकर हम् लोग एक् वाहन सें घूमने कों निकलगये। होटेल मे सामान रखकर लञ्चकर हम् घूमने निकलगये। नीरू औऱ जीजाजी दोनो बहोत खुशलग रहे थें.
वहा पऱ बहोत सें छोटे छोटे झरना थें, प्रोग्राम थां कि हम् झरने मे नहाने केँ मज़े लेंगे। हम् चारो एक् झरने केँ पासआए.
जीजाजी टॉपलेस होकर शॉर्ट्स मे आँ गये औऱ नीरू कां हाथ पकड़े झरने केँ नीचे लें आए। मे भि सिर्फ़ एक् शॉर्ट्स मे वहा पहुचा.
नीरू नें एक् लूसटी शर्ट औऱ संग मे एक् पाजामा पहना थां। जीजाजी नें नीरू केँ दोनोहाथ पकड़लिए थें औऱ उसको सीधा झरने केँ पानी कि धार मे नीचे पकड़े रखा.
सारा पानी सीधा नीरू कि छाती पऱ गिररहा थां। नीरू कां टी शर्ट गीले होकरबदन सें चिपक गय़ा औऱ अंदर सें ब्रा कि झलक दिखने लगी थि.
मे झरने केँ बहते पानी केँ अंदर बैठा असहाय सां देखरहा थां औऱ मेरेसंग थि ऋतु दिदी। हम् दोनो भि थोडा गीला होँ चुके थें.
जीजाजी औऱ नीरू कि पानी मे मस्तिया जारी थि। नीरू पानी सें बचकर जानां चाहरही थि पर्र जीजाजी नें नीरू कों कसकर अपने सें चिपका लिया औऱ उसको जाने नहीं दिया.
हम् सभीलोग फिन बहते पानी मे बैठे थें। ऋतु दिदी थोड़ी देरबाद चेंज करनेचले गये। नीरूवही च्छिच्छले पानी मे उल्टा लेट गई,.
जीजाजी नीरू केँ पास हि बैठे थें। नीरू केँ टी-शर्ट औऱ पाजामे केँ बीच सें नंगीकमर दिखरही थि। जीजाजी कभी नंगीकमर कों देखते तोँ कभी नीरू कि गांद सें चिपके उसके पाजामे कों.
नीरू आँखें बंदकिए उल्टी लेटी थि औऱ जीजाजी नें मुझे देखते हुए अपने शॉर्ट मे अपने लन्ड कों पकड़ा औऱ आगे पीछे हिलाकर चोदने कि आक्टिंग कि.
जीजाजी मुझेये दिखना चाहरहे थें कि वोँ इसतरह नीरू कों चोदेन्गे औऱ मे कुच्छ भि नहींकर पाउन्गा.
नीरूजब सीधा लेटी तोँ जीजाजी उसकी छाती कां उभार ताड़रहे थें। लेटने सें नीरू केँ भारी मम्मे भि टी शर्ट केँ उपर सें थोडा बाहर् झाँकरहे थें औऱ जीजाजी कि नज़रे वहीजमी हुइ तही.
जब हम् वहा सें निकले तौ मुझे थोड़ी राहत मिली.रात कों हम् होटेल रूम मे लौटआए। इसबार होटेल मे रूम बुकिंग भि मैने हि कि थि। जानबूझकर एक् हि रूमबुक किया थां.
एक् बेड पर्र मे औऱ नीरू थें तोँ दूसरे पर्र नीरू केँ जीजाजी औऱ ऋतु दिदी। थके थें तौ नींद जल्द आँ गई, औऱ सुभह हि खुली.
रूम मे वॉशरूम एक् हि थां तौ ऋतु दिदी नें पहले सें तैयारी केँ हिसाब सें मुझे औऱ नीरू कों पहले नाश्ता करने केँ लिएभेज दिया औऱ ताकि वोँ स्वयं औऱ जीजाजी तब तक नहासके.
आज मुझे नाश्ता जल्द सें खत्मकर फिन सें रूम मे जाने कि जल्द थि इसलिये मे जल्द जल्द नाश्ता कररहा थां औऱ नीरू कों आश्चर्य हौ रहा थां.
मैने नीरू कों भि जल्द करने कों कहा पर्र वोँ आहिस्ता खारही थि। मुझेफिन दिल पऱ पत्थर रखकर नीरू कों कहना पड़ा कि वोँ अधिकखा कर मोटी हौ रही हें.
नीरू कि आँखें फटकर बाहर् आँ गई, औऱ उसने नाराज़ होकर खानां वही छोड़ दिया। मैने नीरू कों सॉरी बोला औऱ फिन सें रूम कि तरफ लाया.
मैनेऋतु दिदी कों पहले हि बोल दिया थां कि वोँ चुदाई आहिस्ता थोड़ी देर सें शुरुआत करे ताकि मेरे औऱ नीरू केँ नाश्ता करने केँ बादआने तक उनकी चुदाई चलतीरहे.
स्टोरी जारी रहेगी
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कथा कां सुखदअंत चाहते हें भइया, नीरू सें जीजाजी सेक्स नहींकर पाये, औऱ उनकी असलियत भि सामने आँ गई,,
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