शक कां अंजाम – New Episode
शक कां अंजाम
PART 2
UPDATE 32
रूम कि चाबी मे पहले हि संग लेँ आया थां। नीरू नें मुझको लॉक खोलने सें रोका औऱ वोँ नॉक करनाचाह रही थि पऱ मैनेलॉक खोला औऱ उसको लेकर अंदरआया.
वॉशरूम सें ओह्ह्ह हू कि आवाज़े आँ रही थि। मुझे औऱ नीरू कों लग गय़ा कि अंदर चुदाई चलरही थि। नीरू मेराहाथ खींचकर रूम सें फिन बाहर् निकालने लगी पर्र मैने उसको खींचा औऱ वॉशरूम केँ बाहर् लें आया.
अंदर सें पानी गिरने कि औऱ जीजाजी केँ ज़ोरलगा कर हाफने कि आवाज़ आँ रही थि। बीचबीच मे ऋतु दिदी कि हल्की आहें सुनाई देरही थि.
नीरू नें मेरी कलाई पर्र चिकोटी काटली औऱ मुझे उसकेसंग कमरे केँ बाहर् आने कां इशारा किया पऱ मे उसको पकड़े वहा खड़ारहा.
मगर अंदर सें जीजाजी कि “नीरू”नाम लेकर चोदने कि आवाज़ आँ हि नहींरही थि। कुच्छ सेकेंड्स तक मैने नीरू कों रोकेरखा पर्र ज्यादा देर तक नहींरोक पाया.
नीरूअब मेराहाथ छोड़कर अकेले हि बाहर् जानेलगी। वोँ दरवाजे कि तरफ 7-8 कदमबढ़ चुकी थि औऱ मे अभि भि वॉशरूम केँ बाहर् हि खड़ा थां.
तभी मुझे पहलीबार वॉशरूम सें “नीरू”नाम सुनाई दिया। जीजाजी नें “नीरू”नाम लेकर चोदना शुरुआत कर दिया थां.
दरवाजे केँ लगभग पहुच चुकी नीरू केँ कानो मे भि ये आवाज़ पहुचि औऱ उसकेकदम ठिठककर रुकगये। वोँ पीछे मूडी औऱ मेरे चेहरे पऱ एक् विजयी मुस्कान थि.
मैने उंगली सें वॉशरूम कि तरफ इशारा किया। नीरू केँ धीमे धीमेकदम फिन सें वॉशरूम कि तरफ बढ़े। उसके चेहरे पऱ हवाइयाँ उड़ने लगी थि.
वॉशरूम केँ बाहर् खड़े मे औऱ नीरूअब अंदर सें आती वोँ आवाज़े सुनरहे थें.
जीजाजी: “ओह्ह्ह नीरू। अया …। आजा तुम्हारी तरफचोद लूँ मे …। क्याँ सेक्सी बॉडी हें नीरू … उम्म्म्म। आज तुम्हें चोदुन्गा … आँ अया। आँ। उहह … श नीरूमजा आँ गय़ा नीरू …। उहहउहह। उम्म्म.आँ आँ आँ नीरू … तेरी बुर चोदुन्गा मे नीरू …। अया आँ ह… नीरू तेरे मम्मे … आँ दबाडू तेरे मम्मे नीरू … ओह्ह्ह नीरू … मेरा लन्ड तेरी बुर मे … अयाया आअज़ा चोददूं”
बाहर् खड़ेये सभीसुन नीरू एक् चिंता मे डूबी हुईँ एकटक वॉशरूम केँ दरवाजे कों देखरही थि। अंदर जीजाजी अपनेचरम पर्र पहुच चुके थें औऱ बुरीतरह हाफ़रहे थें.
नीरू मुड़कर फिन दरवाजे कि तरफ बढ़ी। मे इठलाता हुआ उसके पीछे पीछे गय़ा। रूम कि चाबी मैनेवही छोड़ दि.
मे औऱ नीरूअब होटेल केँ बाहर् टहलरहे थें। नीरू नें अभि तक एक् शब्द भि नहीं बोला थां। मैने हि उस सें बाते करनी शुरुआत कि.
प्रशांत: “मैने तुम्हे पहले भि कहा थां पऱ तुमने मेरीबात कां यकीन नहीं माना.अब तोँ तुमने स्वयं अपने कानो सें सुना। अभि यकीनहुआ?”
नीरू टहलती रही औऱ कुच्छ नहीं बोलीं। फिन कुच्छ देरबाद उसने कुच्छ बोला.
नीरू: “मे जीजाजी औऱ ऋतु दिदी सें इस बारे मे बात करूँगी”
प्रशांत: “अभि क्याँ बात करनी हें! जोँ उनकेदिल मे हें वोँ तुमने सुन लिया हें”
नीरू: “हौ सकता हें वोँ सिर्फ़ मज़े केँ लिएरोल प्ले करते होँ। जैसे मे औऱ तुम् जीजाजी कां नाम लेकर करते थें। इस सें ये तौ साबित नहीं होता कि जीजाजी सच मे मेरेसंग कुच्छ ग़लतकाम करना चाहते होंगे!”
प्रशांत: “मुझेपता हें, वोँ तुम्हारे संग ग़लतकाम करना चाहते हें”
नीरू: “तुमने तोँ औऱ भि बहोत कुच्छ बोला हें, जैसे कि मेरेपेट मे जीजाजी कां बच्चा हें!”
प्रशांत: “उसकेलिए सॉरी, पर्र येसच हें”
नीरू: “मे नहीं मानती। रोल प्लेअलग चीज़ हें औऱ सच मे चोदना अलग चीज़ हें”
प्रशांत: “किसी कां नाम लेकररोल प्लेतभी करते हें जब नीयत मे खोट हौ”
नीरू: “तुमने मुझेजब ज़बरदस्ती जीजाजी कां नाम लेकर चुदने कों बोला थां, तब मेरेदिल मे तोँ जीजाजी कों लेकरकोई खोट नहीं थि। हौ सकता हें जीजाजी कों भि किसी नें फोर्स किया हौ मेरानाम लेकर चोदने केँ लिए”
प्रशांत: “फोर्स कौन करेगा? ”
नीरू:“ऋतु दिदी नें!”
प्रशांत: “तुम्हे अपनी दिदी पऱ शक हें पऱ जीजाजी पर्र नहीं हें”
नीरू: “मुझेसच जानना हें”
प्रशांत: “सच तौ यही हें कि जीजाजी तुम्हे चोदना चाहते हें”
नीरू: “तुम्हारे सामने उन्होने मुझेउस दिन थप्पड़ मारा थां जब मैने उनके सामने अपने कपड़े खोले थें!”
प्रशांत: “क्यूकी तुम् उस वक्त वोँ सभी गुस्से मे कररही थि, वैसे भि मे भि वहा खड़ा थां तोँ उनकी हिम्मत नहीं होतीऐसा कुच्छ करने कि”
नीरू: “मैने तुम्हे बताया थां नां, मैने हमारी विवाह केँ पहले भि एक् बार नादानी मे उनको मौका दिया थां औऱ उन्होने मुझेडाट दिया थां”
प्रशांत: “वोँ इसीलिए क्यू कि उसदिन ऋतु दिदी घऱ मे हि थि औऱ तुम् दोनो कों देखरहे थि”
नीरू: “तुम्हे केसेपता, तुम् तौ वहा नहीं थें!”
प्रशांत: “जीजाजी नें स्वयं मुझे बोला हें”
नीरू: “मे नहीं मानती। मे एक् बार उनकेमूह सें सुनना चाहती हूं कि वोँ मुझे चोदना चाहते हें, तभी मुझे यकीन होगा”
प्रशांत: “जीजाजी तुम्हारे डर सें तुम्हे शायदकभी नहीं बोलेंगे कि वोँ तुम्हे सच मे चोदना चाहते हें, वरनाअब तक वोँ बोल चुके होते”
नीरू: “मे एक् बारफिन सें वोही ग़लती करूँगी जौ पहले कि थि। मे स्वयं उनको मुझे चोदने कों कहूँगी। इसबार वहा नां तुम् होगे औऱ नां हि ऋतु दिदी। फिन देखती हूं कि जीजाजी मुझेसच मे चोदते हें याँ नहीं”
प्रशांत: “तुम् पागल हौ क्याँ! जीजाजी तुम्हे चोद देंगे औऱ तुम् कुच्छ नहींकर पाओगी”
नीरू: “मुझेबस सच जानना हें, जीजाजी कां सच”
अब मे टेन्षन मे आँ गय़ा। क्याँ नीरूसच मे ये ख़तरनाक एक्सपेरिमेंट करना चाहती हें। वोँ तोँ चाहती हें कि ऋतु दिदी औऱ मे भि वहा नां रहे.फिन तोँ पक्का जीजाजी अकेले मे नीरू कों चोद हि डालेंगे.
प्रशांत: “मे तुम्हे इस एक्सपेरिमेंट कि पर्मिशन नहींदे सकता”
नीरू: “तुम्हारा मुझ पऱ कोई अधिकार नहीं हें। हमारा तलाक़ भि होँ चुका हें। तुम् मुझे नहींरोक सकते”
प्रशांत: “कम सें कम मुझेवहा रहने कि तोँ इजाज़त दो। जैसे हि जीजाजी तुम्हारे संग ग़लतकाम करेंगे मे उन्हे रोक लूँगा”
नीरू:“कोई ज़रूरत नहीं हें। मे अपने आप् कों संभाल लूँगी। मुझे लगता थां कि जीजाजी मुझे अपनी बेटी मानते हें। अगर जीजाजी कों मुझे चोदने मे कोई हर्ज नहीं हें तौ ठीक हें, मे भि देखती हूं कि जिसको वोँ अपनी बेटी मानते हें उसको केसे चोदते हें”
प्रशांत: “देखो जीजाजी मुझे अपनेमन कि बात पहले हि बता चुके हें। उनको चोदना होगा तोँ वोँ मेरे सामने भि तुम्हे चोद हि देंगे। मेरेवहा रहने सें उनकोकोई फ़र्क नहीं पड़ेगा। मुझेवहा रहनेदो प्लीज़”
नीरू:“ठीक हें, अगर तुम्हे देख्ना हें तौ देख लेना। मे भि चाहती हूं कि तुम् स्वयं देखो कि तुम् जीजाजी केँ बारे मे कितना ग़लत होँ। मगर तुम् छूपकर रहोगे, औऱ कुच्छ भि हौ जाए बाहर् नहीं निकलोगे”
प्रशांत: “अगर जीजाजी नें तुम्हारे संग कुच्छ ग़लत किया तौ मे बाहर् आउन्गा औऱ उन्हे पीटूँगा”
नीरू:“किस हक़ सें? तुम् मेरे क्याँ लगते होँ? तुम् बीच मे नहीं आओगे, खाओ मेरीशपथ”
प्रशांत: “मगर…”
नीरू:“अगर जीजाजी सच्चे निकले तौ मे तुमसे विवाह नहीं करूँगी, क्यू कि तुमने फिन सें उन पऱ शक किया हें। अगर जीजाजी झूठे निकले औऱ मुझे चोदने कि कोशिश कि तोँ फिन तुम्हारी इक्षा कि तुम् मुझसे फिन सें विवाह करना चाहोगे याँ नहीं”
प्रशांत: “नीरू मुझेपता हें कि क्याँ होने वाला हें, इसलिये मुझे उन्हे रोकने कि पर्मिशन देदो”
नीरू: “तुम् मेरीशपथ खाओ कि बीच मे नहीं आओगे, वरना मे तुमसे छिपकर ये एक्सपेरिमेंट कर लूँगी”
प्रशांत: “नहीं। मे शपथ ख़ाता हूं कि मे बीच मे नहीं आउन्गा, मगर मुझेवहा रहना हें”
नीरू:“आज साम कों घऱ पहुचकर मे जीजाजी कों रात कों अपने बेडरूम मे बूलौंगी औऱ तुम् अटॅच्ड वॉशरूम मे छूपे रहना”
मैनेहा मे गर्दन हिलाई। मुझे बहोत डरलगरहा थां कि आजरात पता नहीं क्याँ होने वाला थां। हम् दोनोफिन होटेल रूम मे आँ गयेतब तक जीजाजी औऱ ऋतु दिदी कि चुदाई खत्म हौ चुकी थि.
ऋतु दिदी कों मैने आँखों केँ इशारे सें बता दिया कि मैने नीरू कों वॉशरूम सें आती जीजाजी कि आवाज़े सुना दि हें जैसा कि हमने प्लान किया थां.
मैनेऋतु दिदी कों रात कों होने वाले एक्सपेरिमेंट केँ बारे मे नहीं बताया। दिनभर हम् घूमते रहे औऱ नीरू थोड़ी टेन्षन मे दिखी.
साम कों हम् घऱ पहुचे। जीजाजी औऱ ऋतु दिदी सोने केँ लिए गेस्ट रूम मे चलेगये। मे औऱ नीरू हमारे बेडरूम मे आँ गये.
प्रशांत: “नीरूफिन सें सोचलो, कुच्छ ग़लत होने पऱ मे तुम्हे बचना चाहता हूं”
नीरू: “तुम्हे घऱ सें बाहर् जानां हें याँ यहा बाथरूम मे छूपे रहना हें? यहा रहना हें तोँ तुम् जीजाजी केँ जाने तक बाहर् नहीं आओगे”
मे चुप होँ गय़ा। नीरू नें कुच्छ देरबाद जीजाजी कों संदेश किया कि वोँ हमारे बेडरूम मे आँ जाए औऱ ऋतु दिदी कों नहीं बताए.
जीजाजी केँ आने सें पहले मे जाकर अटॅच्ड वॉशरूम मे छूप गय़ा। जीजाजी कमरे मे आए औऱ नीरू नें दरवाज़ अंदर सें लॉककर दिया.
जीजाजी: “क्याँ होँ गय़ा, सभीठीक तौ हें औऱ प्रशांत कहा हें?”
नीरू: “वोँ बाहर् गय़ा हें। आप् ये बताओ मे आपको कैसी लगती हूं!”
जीजाजी: “ये पूछने केँ लिए मुझे सोतेहुए बुलाया! तुम् तौ मेरीपरी हौ। तुमसे हसीनइस दुनिया मे कोई नहीं हें”
जीजाजी नें नीरू केँ चेहरे पर्र आती बालो कि लत कों नीरू केँ कानो केँ पीछे अटकाया औऱ फिन अपने हाथो कि उंगलियों केँ पीछे कि तरफ सें नीरू केँ गालो पऱ फिराया.
नीरू:“ये नहीं पुछा मैने, ये बताओ मे आपकीकौन हूं?”
जीजाजी: “ये कैसा प्रश्न हें! तुम् मेरी इकलौती साली होँ”
नीरू: “वोँ तौ दुनिया कि नज़रो मे हमारा नाता हें। आप् मुझे क्याँ समझते होँ?”
जीजाजी: “क्याँ होँ गय़ा तुमको आज!”
मे वॉशरूम कां हल्का सां दरवाजा खोले एक् दरार सें येसभी देखरहा थां। नीरू औऱ जीजाजी एक् दूसरे सामने लगभग खड़े थें। नीरू कां चेहरा गंभीर थां.
जीजाजी नें नीरू कां हाथ अपनेहाथ मे पकड़ा थां औऱ चेहरे पर्र एक् स्माइल थि.
नीरू: “मैनेआज सुभह वोँ सभी सुना जोँ आप् वॉशरूम मे ऋतु दिदी कों चोदते हुएकह रहे थें”
ये सुनकर जीजाजी दंगरह गये औऱ चेहरे पऱ सें स्माइल गायब होँ गई, औऱ उसकी स्थान गंभीरता नें लेँ ली.
नीरू: “बोलिए, आपनेऐसा क्यू किया?”
जीजाजी: “वोँ … एम्म … मे …”
नीरू:“सच सच बताओ, आप् मेरे बारे मे क्याँ सोचते होँ! क्याँ आप् मुहे चोदना चाहते हौ?”
जीजाजी: “नहीं, ऐसी कोईबात नहीं हें नीरू।.वोँ तौ मे बस …”
नीरू: “आप् मुझे चोदना चाहते हौ तौ मे आपको नहीं रोकूंगी। आपके सामने खड़ी हूं, जोँ करना हें करलो”
जीजाजी: “क्याँ कहरही होँ! मे ऐसा नहीं सोचता …”
नीरू नें अपनाटी शर्ट अपनेसिर सें होकर निकाल दिया औऱ उपर सें सिर्फ़ ब्रा मे वहा खड़ी थि। जीजाजी बोलते हुएरुक गये औऱ नीरू कि छाती कों घूर्ने लगेजहा ब्रा केँ बीच सें नीरू केँ मम्मे दिखरहे थें.
नीरू: “मे तैयार हूं, आपसे चुदवाने केँ लिए। क्याँ आप् मुझे चोदने कों तैयार होँ?”
नीरू जीजाजी कि आँखो मे झाँकरही थि औऱ जीजाजी कि नज़र नीरू केँ आधे नंगे जिस्म पर्र टिकी थि.
नीरूआगे बढ़ी औऱ जीजाजी केँ सीने पर्र सिररख कर उनसे चिपक गई,। जीजाजी नें भि उसको अपने बाहों मे भर लिया औऱ नीरू कि नंगी बाहो पऱ हाथ फेरने लगे.
नीरू: “आप् मुझे चोदोगे नां?”
जीजाजी नें कोई जवाब नहीं दिया। पर्र अब जीजाजी कां हाथ नीरू कि ब्रा सें झाँकति नंगीपीठ औऱ नंगीकमर पर्र फिनरहा थां.
नीरू: “कुच्छ बोलते क्यू नहीं, क्याँ आप् मुझे चोदोगे!”
जीजाजी: “तुम् क्याँ चाहती हौ?”
नीरू: “वोही जोँ आप् चाहते हौ। आप् मुझे चोदना चाहते होँ तोँ मे भि आपसे चुदवाना चाहती हूं”
जीजाजी नें फिन नीरू कि पीठ सें उसकी ब्रा कां हुकखोल दिया। एक् झटके मे उस ब्रा कि पकड़ नीरू केँ जिस्म सें ढीलीपड़ गयीँ, औऱ नीरू कां पूरा जिस्म एक् झटके मे हिल गय़ा.
शायद नीरू कों ये उम्मीद नहीं थि कि जीजाजी उसका ब्रा कां हुकखोल लेंगे। नीरूचुप होँ गई, थि। मगर नीरू केँ पीछे सें नंगीपीठ औऱ कमर पर्र उपर सें नीचे जीजाजी कि उंगलिया घूमरही थि.
अंदर वॉशरूम मे खड़े मेरेहाथ पेर काँपरहे थें कि आगे क्याँ होने वाला थां। क्याँ नीरू केँ लिए इतना काफ़ी नहीं हें जीजाजी कि नीयत जानने केँ लिए!
नीरू जौ अब तक जीजाजी केँ सीने सें चिपकी हुइ थि अब उसने अपना ब्रा अपनी छाती सें चिपकाए थोडा जीजाजी सें पीछेहटी.
नीरू केँ चेहरे पऱ टेन्षन थि पऱ जीजाजी केँ चेहरे पऱ स्माइल लौट चुकी थि। जीजाजी नें ब्रा केँ स्ट्रॅप नीरू केँ कंधो सें नीचे गिराई, पर्र नीरू अभि भि ब्रा कों छाती सें चिपकाए हुइ थि औऱ ब्रा गिरने नहीं दिया औऱ अपने मम्मे भि छिपाए रखे.
जीजाजी नें अपने दोनोहाथ सें नीरू केँ दोनो कंधे पकड़े। दोनो अभि भि एक् दूसरे कि आँखों मे झाँकरहे थें। नीरू कि आँखें गीली होँ करचमक रही थि औऱ एक् डर भि थां.
नीरू: “आप् सच मे मुझे चोदना चाहते हौ!”
जीजाजी: “तुम् जैसी हसीन लड़की कों चोदना तौ हर व्यक्ति कां सपना होगा”
नीरू: “औऱ आपका भि यही सपना हें?”
जीजाजी: “मे भि तौ एक् व्यक्ति हि हूं”
नीरू नें अपनाहाथ ब्रा सें हटा लिया औऱ हाआत नीचेकर दिए। वोँ ब्रा खिसककर नीचेगिर गय़ा औऱ नीरूवहा टॉपलेस खड़ी थि.
जीजाजी केँ नज़रे नीरू कि छाती पर्र गयीँ, औऱ इतना तड़पने केँ बाद पहलीबार नीरू केँ स्तन कों पूरा नंगा देखा औऱ उनकेमूह सें शर्म कि बजाय तारीफे निकलने लगी.
जीजाजी: “वाह! नीरू तुम्हारे जैसे सुंदर मम्मे मैनेकभी नहीं देखे.ये दुनिया केँ सबसे सुंदर मम्मे हें”
नीरू कां चेहरा बतारहा थां कि वोँ पूरीतरह दंग थि। उसकोये उम्मीद नहीं थि। उसने सोचा थां कि जीजाजी उसको कपड़े फिन पहना देंगे पऱ वोँ तोँ उसके नंगे शरीर कि तारीफे कररहे थें.
नीरूइस सदमे सें उभरी भि नहीं थि कि जीजाजी कि दोनो हथेलियो नें नीरू केँ बड़े सें बूब्ज़ कों पकड़ लिया थां औऱ हल्का सां दबा भि लिया थां.
नीरू कां मूह थोडा खुल गय़ा औऱ जीजाजी कि स्माइल औऱ बढ़ गई, औऱ डाट दिखने लगे थें। मे वॉशरूम मे अपनी मुट्ठी भींचे गुस्से मे खड़ा थां.
नीरू नें फिन आँखें बंदकर ली थि। जीजाजी नें फ़ायदा उठाया औऱ नीरू केँ बूब्ज़ सें हाथहटा कर अपनेमूह मे नीरू केँ निपलभर लिए औऱ चूसने लगे.
नीरू कि पहलीबार सिसकी निकली औऱ चेहरा च्चती कि तरफ हौ गय़ा औऱ मूह खुला कां खुलारह गय़ा.
मे वॉशरूम मे बैठामन हि मन नीरू कों कहरहा थां कि अब तौ प्लीज़ वोँ जीजाजी कों रोकदे इस सें पहले कि वोँ उसका औऱ अधिक फ़ायदा उठापाए, पर्र नीरू कों जीजाजी कि बेशर्मी कि लिमिट देखनी थि.
अगले कुच्छ सेकेंड्स तक जीजाजी छपर्र छपर्र करतेहुए नीरू केँ निपल औऱ बूब्ज़ कों अपनेमूह मे लिए चूस्ते रहे औऱ दबाते रहे.
नीरू नें फिन आँखें खोली औऱ जीजाजी केँ कंधे पकड़कर उनको अपने स्तन सें दूर किया। जीजाजी फिन सीधा खड़े होँ गये पऱ चेहरे पऱ स्माइल थि.
अगले एपिसोड मे पढ़िए जीजाजी कि असली गंदी वाली नीयत सामने आने केँ बाद नीरू कां क्याँ रिक्षन रहेगा।
स्टोरी जारी रहेगी
शक कां अंजाम – New Episode
शक कां अंजाम
PART 2
UPDATE 33
अब तक आपने पढ़ा कि नीरू नें जीजाजी कि नीयत जानने केँ लिए एक् एक्सपेरिमेंट किया उनको चोदने कां इन्विटेशन दिया। जीजाजी नें नीरू कों टॉपलेस देखकर उसके मम्मे दबाए औऱ चूसलिए। फिन नीरू नें जीजाजी कों अपने सें दूर किया.
अब आगे…
जीजाजी नें बिना टाइम गवाए नीरू कों अपने सीने सें फिन चिपका लिया। नीरू केँ मम्मे जीजाजी केँ सीने सें चिपककर दबगये थें औऱ जीजाजी नें नीरू कि नंगीपीठ औऱ कमर कों कसकर पकड़ा हुआ थां.
नीरू एक् ज़िंदा लाश कि तरह चिपकी हुइ थि औऱ कोई विरोध नहीं किया। उसका भरोसा उस व्यक्ति पर्र सें आजटूट गय़ा थां जिस पऱ सबसे अधिक यकीन थां.
जीजाजी केँ हाथ तेज़ी सें नीरू कि पीठ औऱ कमर केँ मखमली स्किन पऱ उत्तेजना केँ संगघूम रहे थें औऱ जीजाजी केँ होंठ नीरू केँ गर्दन औऱ कंधे पर्र चूमरहे थें.
कुच्छ सेकेंड्स केँ बाद जीजाजी नें नीरू कों छोड़ा औऱ अपनाटी शर्ट निकाल कर टॉपलेस हौ गये, नीरू देखती हि रह गई,। जीजाजी जल्द हि पूरे नंगे नीरू केँ सामने थें औऱ उनका लन्ड अब तक कड़क होकर स्टील केँ पाइप कि तरह खड़ा थां.
नीरू कां ध्यान जीजाजी केँ लन्ड पऱ नहीं गय़ा थां। वोँ तौ अभि भि उनके आँखों मे झाँकरही थि कि कोई लज्जा बाकी हें भि याँ नहीं.
जीजाजी नें झुककर नीरू कां पाजामा नीचेखिच कर निकाला औऱ फिन पैंटी कों भि निकाल दिया.अब नीरू पूरी नंगी खड़ी थि औऱ शून्य मे निहार रही थि.
जीजाजी नें नीरू कि कमर मे हाथ डाला औऱ उसको पलंग केँ पास लें आए। मे वॉशरूम मे छूपाहुआ अभि भि मन मे रिक्वेस्ट कररहा थां कि नीरूअब तोँ जीजाजी कों रोक लेँ.
जीजाजी नें नीरू कों डॉगी स्टाइल मे बैठा दिया औऱ स्वयं नें पोज़िशन लेँ ली नीरू केँ पिच्छवाड़े। जीजाजी नें नीरू कि गोरी गान्ड केँ उभार पर्र थोड़ी देरहाथ फिराया औऱ फिन अपना लन्ड पकड़कर नीरू कि गान्ड कि दरार औऱ बुर केँ बाहर् रगड़ा.
मे अब अपने आप् कों रेडी करनेलगा कि मुझेअब अंदर जाकर जीजाजी कों रोकना हि होगा। नीरू नें सिर घुमाकर साइड मे देखाजहा वॉशरूम कां दरवाजा थां.
मेरी नीरू सें नज़रे मिली औऱ मे इशारा किया कि मे बाहर् आनां चाहता हूं। नीरू नें अपनासिर हल्का सां घुमाया औऱ आँखो केँ इशारे सें मुझेमना किया। मुझे बहोत क्रोध आया.
मे औऱ नीरू आँखो हि आँखो मे बातकर रहे थें कि तभी नीरू कि एक् तेजअहह निकली औऱ उसकामूह खुला कां खुलारह गय़ा औऱ संग मे जीजाजी कि भि एक् राहतभरी अहहआई.
जीजाजी कां लन्ड नीरू कि बुर मे उतर चुका थां औऱ उनकाबदन नीरू कि गाअंड सें चिपक गय़ा थां। एक् सेकेंड केँ लिए मैने आँखें बंदकर ली औऱ एक् कड़वा घुट पीकरफिन आँखें खोलली.
जीजाजी कों शायद यकीन नहीं होँ रहा थां कि उन्होने अपना लन्ड आख़िरकार नीरू कि बुर मे उतार हि दिया हें। जीजाजी लंबी लंबी साँसें लें रहे थें। नीरू कि गान्ड पर्र पड़े उनकेहाथ चुदाई कि उत्तेज्नना मे काँपरहे थें.
10 सेकेंड्स केँ बादजब उनकोये अहसास हुआ तोँ उन्होने अपना लन्ड फिन थोडा बाहर् खींचा औऱ पूरा बाहर् निकालने सें पहले हि फिन अंदर धक्का मारते हुए अपना लन्ड नीरू कि बुर मे उतार दिया.
इस बार बड़ी तेज़ी सें लन्ड बुर मे उतरा औऱ नीरू केँ खुलेमूह सें एक् तेज सिसकी निकल गई, औऱ आँख कुच्छ सेकेंड्स केँ लिएबंद होँ गई,। जीजाजी भि “अया” करतेरह गये.ये तोँ बस एक् शुरुआत थि.
जीजाजी फिन नहीं रुके, उन्होने लगातार धक्के मारते हुए नीरू कों चोदना शुरुआत कर दिया। घोड़ी बनी नीरू कां शरीरउन धक्को सें आगे पीछेहिल रहा थां.
जीजाजी नें दोनो हाथो सें नीरू कि कमर पकड़ी हुई थि औऱ डॉगी स्टाइल मे नीरू कों चोदते रहे। नीरू कि सिसकिया चालू होँ चुकी थि। वोँ सिसकिया नाँ तौ दर्दभरी थि औऱ नाँ हि मज़े सें भरी.
नीरू कि सिसकिया एक् टूटेदिल केँ दर्द कि सिसकिया थि। नीरू कां चेहरा मेरीतरफ हि थां औऱ मे उसकेसिर सें लटकी ज़ुल्फो केँ बीच मे सें उसकी आँखों सें आँसू निकलते देखपा रहा थां.
नीरू सिसकियो केँ बीच मे सूबक भि रही थि पऱ जीजाजी पऱ कोईअसर नहींहुआ औऱ वोँ मज़े लेते नीरू कों चोदते हि रहे। मे गुस्से मे अपनी मुट्ठी भींचे वहा खड़ा थां औऱ इंतेजार कररहा थां कि नीरू एक् बार सहायता केँ लिए मुझे बुलाए.
वॉशरूम मे मे हेल्पलेस सां खड़ा थां। इक्षा तोँ थि कि बाहर् जाकर जीजाजी कों रोकलू, पऱ किस अधिकार सें बाहर् जाता। नीरू स्वयं येसभी करवारही थि.
अगर मुझे पहलेपता होता कि मेरे औऱ ऋतु दिदी केँ प्लान कां ये अंजाम होने वाला हें तोँ मे कभी नीरू कों वोँ सभी नहीं सुनाता कि जीजाजी “नीरू”नाम लेकरऋतु दिदी कों चोदते हें.
मगरअब काफ़ी देर होँ चुकी थि। नीरू केँ रोने कि आवाज़े अब औऱ भि ज़ोर सें आनेलगी थि। उसको शायद सहायता कि ज़रूरत थि। मुझसे फिनरहा नहीं गय़ा, उसकी रुलाई कों मैने सहायता कि गुहार मान लिया.
मैने तेज़ी सें वॉशरूम कां दरवाजा गुस्से मे खोला औऱ आवाज़ होते हि जीजाजी कां ध्यान मेरीतरफ गय़ा। मगर उनकोकोई फ़र्क नहीं पड़ा औऱ नीरू कों चोदते रहे.
नीरू कों चोदने कां मौका वोँ भला अपनेहाथ सें केसे जाने देते। मुझे देखते हि उनको तोँ औऱ पंखलग गये। जीजाजी नें झटकेमार कर नीरू कों चोदना शुरुआत किया.
उन झटको केँ दर्द सें नीरू कि चीख निकल गई,। मे जीजाजी पर्र चिल्लाया औऱ आगेआकर उनको धक्का देकर नीरू सें दूर किया। जीजाजी मेरे धक्के सें अनबॅलेन्स होकरखाट सें नीचे चीखते हुएगिर पड़े.
नीरू जोँ अब तक डॉगी स्टाइल मे बैठी थि, वोँ अबपेट केँ बल पलंग पऱ लेट गयीँ,। मैने उसकी नंगीपीठ औऱ सिर पर्र हाथ फेरा औऱ उसको शान्त्वना दि.
फिन मे जीजाजी केँ पास पहुचा जौ अब तक खड़े हौ चुके थें। मुझे नहींपता मैने कितने पुंछ औऱ लाते मारी परंतु उनकेमूह सें जितनी चीखें निकली उन्होने मुझे विचलित कर दिया.
जीजाजी मुझसे उम्र मे बड़े थें औऱ हमेशा आदर दिया थां तोँ उनकीचीख सुनकर आगे औऱ हाथ उतहाने कि हिम्मत नहीं हुईँ। मे उन पर्र बस चिल्लाने लगा.
स्टोरी आपनेअंत कि तरफबढ़ रही हैं
आप् कैसाअंत चाहते हें इस किस्सा कां
सुखद
दुखद
अन्य औऱ क्याँ औऱ कारण
आपकी क्याँ राय हैं मतदान मे भाग लीजिये
किस्सा जारी रहेगी
किस्सा आपनेअंत कि तरफबढ़ रही हैं आप् कैसाअंत चाहते हें इस किस्सा कां सुखद दुखद अन्य औऱ क्याँ औऱ कारण आपकी क्याँ राय हैं मतदान मे भाग लीजिये
शक कां अंजाम – New Episode
बहोत शानदार, कथा कां हैप्पी अंत होँ, मगर उससे पहले प्रशांत नीरू कों तडपाए। ऋतु केँ संग मिलकर ऐसा प्लान करें जिससे नीरू कों प्रशांत पऱ पूरा भरोसा होँ जाए। वोँ प्रशांत कों पाने केँ लिए तड़पे औऱ बाद मे सबकुछ ठीक होँ जाए। वैसे स्टोरी आपकी हैं जैसा चाहेअंत करें
शक कां अंजाम - Next part mein bada twist
Relavant source : click here