शक कां अंजाम – New Episode
UPDATE 12
नीरु भि मेरी चुदाई सें अब तक आत्मसमर्पण कर चुकी थि। मे अब आहिस्ता उसके मम्मे दबाये उसकोचोद रहा थां। निरु नें अधिक मज़ा लेने केँ लिए अपनी टांगो औऱ गांड कों टाइटकर लिया थां औऱ मैंने अपने लण्ड कों निरु कि बुर मे जकड़ा हुआ पाया। नीरुअब स्वयं अपनी गांड कों आगे पीछेकर चुदने कां आनंद लेनेलगी थि। अगलेकुछ मिनट्स तक औऱ चोदने केँ बाद मुझेलग गय़ा कि अब मे झड़ने वाला हूं। मगर निरु केँ उत्साह कों देखते हुए मैंने उसकासंग दिया औऱ उसको चोदते रह।
फिन मुझेलगा कि अब कंट्रोल करना मुश्किल हें औऱ मेरे लण्ड कां जूस निकलने वाला हैं। मैने अपना लण्ड निरु कि बुर सें निकलना चाहा पऱ उसके पहले हि २ बून्द निरु कि बुर मे हि छूट गई,। मैंने अपना लण्ड बाहर् खिंचा पऱ उसको तोँ निरु नें दबारखा थां। मैने जल्द सें अपनाहाथ निरु केँ मम्मो सें हटाया औऱ उसके कूल्हों कों पकड़जोर लगया। मेरे लण्ड सें दो बूँद औऱ जूस कि निकली औऱ निरु कि बुर मे चली गई,। मेरेजोर लगाने सें मेरा लण्ड निरु कि बुर सें बाहर् आया औऱ आतेसमय अपनाजूस छोड़ता हुआआया। मेरा साराजूस अब निरु कि बुर औऱ गांड केँ बीचगिर गय़ा औऱ उसको गन्दा कर दिया।
झड़ने केँ बाद मे बड़ा रिलीफ महसूस कररहा थां कि तभी मेरी जांघ पर्र एक् जोर कां मुक्का लगा औऱ मेरीबस चीख नहि निकली। निरु नें अपना क्रोध मुझ पर्र निकाला थां। मुझे भि अब अपनी गलती कां अहसास हुआ। जोश जोश मे मैंने करीब-करीब निरु कों पूराचोद हि दिया थां। ऊपर सें मैंने अपना चिकना जूसउस पऱ ड़ाल गन्दा कर दिया थां।
थोड़ी देर पहले हि ऋतू दिदी औऱ जीजाजी नें अपनी चुदाई खत्म कि थि तोँ निरु अपनी साफ़ सफाई केँ लिएउठ कर वाशरूम भि नहि जा सकती थि। मे येसोच हि रहा थां कि मुझे एक् केँ बाद एक् दो मुक्के मेरी जांघ पर्र पढ़े औऱ मे अपनी जांघ कों रगड़ता हुआ पीछेहट कर निरु सें दूरहुआ। अभि निरु बहोत गुस्से मे थि तोँ उस सें दूर होना हि ठीक थां। निरु केँ पास अभि सफाई करने केँ लिए उसका गाउन थां याँ उसकी पैंटी। मैंने अपना अंडरवियर ऊपरकर पहन लीया।
नीरु नें भि कुछ हरकत कि थि औऱ उसने भि अपनी पैंटी ऊपर चढ़ाकर अपनी बुर पऱ जमा मेरे लण्ड केँ जूस कों साफ़ किया थां। मेरे गीले लण्ड सें मेरी अंडरवियर भि थोड़ी गीली हौ गयीँ, थि औऱ मुझे गीलालग रहा थां। मै सोचने लगा, बेचारी निरु कों कितना गीलालग रहा होगा, मैंने उस पर्र इतनाजूस डाला हें कि उसकी पैंटी औऱ भि अधिक गीली होगी।
तक़रीबन १५-२० मिनट्स केँ बादजब उसकोलगा कि जीजाजी - दिदी सो चुके हें तब वोँ अँधेरे मे हि उठी औऱ वॉशरूम मे चली गयीँ,। थोड़ी देरबाद वोँ वापिस आई औऱ मेरीतरफ पीठकर फिन सें चादर केँ अन्दर सो गई,।
मैंने चेक करने केँ लिए निरु केँ गाउन केँ ऊपर सें हि उसकी गांड पऱ हाथ लगाया औऱ फील किया कि उसने पैंटी नहि पहने थि, वोँ वॉशरूम मे जाकर अपनी गीली हौ चुकी पैंटी खोलआई थि। तभी मेरेहाथ पर्र एक् जोर कां चांटा पड़ा औऱ मैंने अपनाहाथ पीछे खींच लिया। निरु अभि भि तेज गुस्से मे थि औऱ मैंने फिन उसकोहाथ नहि लगाया। मे फिनसो गय़ा औऱ सुभह हि उठा।
सूबह उठने पऱ देखा कि निरु पहले हि उठ चुकी हें औऱ ऋतू दिदी भि। दोनों अपनेकाम मे लगे थें। मे निरु कां चेहरा पढ़ सकता थां। वोँ जब गुस्से मे होती हें तौ ऐसे हि होती हैं। मुझेलग गय़ा आज तोँ मेरी शामत हैं। जीजाजी भि उठ चुके थें औऱ हमने ब्रश किया औऱ फ्रेश होँ गय़ा। कल कि तरह एक् बारफिन डिसाइड हुआ कि दो-दो करकेलोग नाश्ता कों जाएंगे औऱ बाकीदो यही रुकेंगे नहाकर रेडी होने केँ लिये। मुझे नाराज होँ चुकी निरु कों मनाना थां।
मुझेपता थां कि वोँ बिना नहाए नाश्ता करने नहि जाएगी। मैंने बोल दिया कि मे नहाने केँ लिएयही रूकूंगा। जीजजी अपनी पत्नि ऋतू दिदी कों लेकर नाश्ता केँ लिए जानेलगे पऱ निरु नें उनको रोका औऱ कहा कि वोँ उनकेसंग नाश्ता कों जाएगी। मुझेपता थां कि निरु नें ऐसा क्यूं किया, वोँ मुझसे नाराज थि औऱ मेरेसंग अकेले नहि रहना चाहती थि।
जीजा साली दोनों नाश्ता केँ लिएचले गए। ऋतू दिदी नें मुझे पहले नहाने कों बोल दिया। ऋतू दिदी कों देख मे रात कि घटना इमेजिन कररहा थां कि वोँ केसेऊपर चढ़कर जीजाजी कों चोदरही थि। मुझेलगा कि रात कि चुदाई केँ बाद उनको नहाने कि अधिक जरुरत हैं। इसलिये मैंने उनको पहले जाने कों बोल दिया। वोँ कुछ मिनट्स मे हि नहाकर बाहर् आँ गई,, क्यूं कि उनकोबाल नहि धोने थें। ऋतू दिदी केँ बाहर् आते हि मे जल्द सें वॉशरूम मे अन्दर गय़ा। वाशरूम मे उनके जिस्म कि सौंधी गंध आँ रही थि। कपडे रखने कि स्थान पऱ ऋतू दिदी कां ब्रा औऱ पैंटी पड़ी थि जोँ उन्होंने शायदकल रात पहनी थि।
मै तोँ वैसे हि ऋतू दिदी केँ नएरूप कां दीवाना होँ चुका थां तोँ उनकी पैंटी औऱ ब्राउठा कर मैंने सूँघली औऱ जैसेनशा सां चढ़ गय़ा। मैंने अपना शॉर्ट्स नीचे किया औऱ ऋतू दिदी कि पैंटी कों अपने लण्ड पर्र रगड़कर अपनी थोड़ी ख़्वाहिश शांत कि। इसकेबाद मे नहाने चला गय़ा। बाहर् आया तोँ ऋतू दिदी नें बोला कि
“तुम् अन्दर चलेगए, मेरेकुछ कपडे अन्दर हि रहगए थें”।
मैंने अनजान बनने कां नाटक किया जैसे मैंने उनके कपडे देखे हि नहि थां। हम् सजधजकर हौ हि रहे थें कि जीजाजी औऱ निरु नाश्ता करके आँ गए थें। निरु केँ चेहरे पऱ हंसी थि पर्र मुझे देखते हि वोँ उदासी मे बदल गयीँ,। ऋतू दिदी ऑलमोस्ट रेडी थें नाश्ता पर्र जाने केँ लिए तौ मैंने रूम कि चाबीजेब मे रखली।
कल सुभह मेरे औऱ निरु केँ नाश्ता पर्र जाने केँ बादजिस तरह जीजाजी वॉशरूम मे ऋतू दिदी कों चोदरहे थें, मुझेडर लगा कि अभि मेरे औऱ ऋतू दिदी केँ जाने केँ बाद वोँ अकेले मे निरु कों वॉशरूम मे न् चोददे। ऋतू दिदी अब ब्रेक फ़ास्ट पर्र जाने कों तैयार थि औऱ निरुबैग सें कपडे निकाल नहाने केँ लिए तैयार थि। मैंने ऋतू दिदी कों कुछ बहाने बनाकर आगे चलने कों कहा कि मे थोड़ी देर मे आता हूं। नीरुअब वॉशरूम मे नहाने चली गई, औऱ मे अपनेफोन पर्र कुछचेक करने केँ बहाने बैठारहा।
जीजाजी कमरे मे इधरउधर टहलरहे थें। मुझेपता थां जीजाजी कितने बेचैन होँ रहे होंगे कि मे वहा सें जाउ औऱ वोँ वॉशरूम मे घुसकर निरु केँ संगकुछ गन्दी हरकतकर सके। उन्होंने मुझसे एक् बार नाश्ता केँ लिए जाने कां भि याद दिलाया पर्र मे भि २मिनट बोलकर बिजी होने कि एक्टिंग करतारहा। कुछ मिनट केँ बाद निरुनहा कर बाहर् आँ गयीँ, थि। नहाने केँ बाद मेरी निरु औऱ भि खिलउठी थि, पर्र वोँ मुझसे नाराज थि।
जीजाजी अब वॉशरूम मे चलेगए। कहि निरु नें अपने ब्रा औऱ पैंटी बाथरूम मे तोँ नहि छोड़दिए, वार्ना जीजाजी भि मेरीतरह ब्रा पैंटी सूँघने केँ मजे लेंगे। मैंने निरु सें पूछा उसके ब्रा पैंटी बाथरूम मे तौ नहि छूटगए। उसने मुझेकोई जवाब नहि दिया।
मुझेलगा अब निरुसेफ हैं। मे रूम सें बाहर् निकलकर नाश्ता केँ लिए गय़ा। वो पंहुचा तौ ऋतू दिदी अपना नाश्ता समाप्त कर चुकी थि। मेरेलिए अच्छा थां कि ऋतू दिदी रूम मे जाएंगे तोँ जीजाजी कि हिम्मत नहि होगी निरु कों हाथ लगाने कि। ऋतू दिदी रूम कि तरफचले गए औऱ मे अब आहिस्ता नाश्ता करनेलाग। आज तोँ मुझे खाने सें रोकने केँ लिए निरु भि नहि थि। पर्र सच पूछो तोँ मुझे बुरा भि लगरहा थां, निरु कि वोँ टोका टाकी मे मिसकर रहा थां।
मैने धीरे-धीरे नाश्ता फिनिश करफिन रूम कि तरफबढ़। जेब मे हाथ डाला तोँ रूम कि चाबी मेरेपास हि रह गयीँ, थि। मे सीधारूम कां दरवाजा खोल अन्दर गय़ा। वाशरूम सें एक् बार फ्री सिसकियों कि आवाज़ आँ रही थि। अन्दर कल कि तरहफिन चुदाई चलरही थि। आज तोँ मुझे रोकने केँ लिए निरु भि वो नहि थि। मे रूम कां दरवाजा बंदकर वॉशरूम कि तरफबढ़। अन्दर सें लड़की कि चुदाई सें निकलती सिसकियों केँ संग जीजाजी कि क्लियर आवाज़ आँ रही थि जिसेसुन मेरा माथाफट गय़ा
“ओह्ह्ह निरु, ई विलफ़क यू। तुम्हारा क्याँ फिगर हें निरु, ओह तुम्हारे बूब्स, मज़ा आँ गय़ा, ओह्ह्ह निरु तुम्हे चोदने कां क्याँ मज़ा हें, आअह्ह्ह आअह्ह्, ओह निरु डार्लिंग, तुम्हारी बुर क्याँ गर्म हें, लें लो मेरा लण्ड, निरु अपनी बुर चुदवा … ायी, ओह निरु…”
मेरामन उससमय शून्य सां हौ गय़ा। जोर सें चीखने कि ख़्वाहिश हौ रही थि पऱ आवाज़ नहि निकलरही थि। अन्दर हि अन्दर मे रोरहा थां। ऊपर सें निरु कि आती वोँ सिसकिया बतारही थि कि वोँ स्वयं कितना अपने जीजा सें चुदाई कों एन्जॉय कररही थि।
मैनेइधर उधर देखाकोई चीजमिल जाए जिसे मे उठाकर वॉशरूम केँ दरवाजे पर्र पटककर दरवाजा तोड़द, पर्र एक् कुर्सी तक नहि थि उसरूम मे। मे वंहीसर पकड़कर जमीं पऱ बैठ गय़ा औऱ करीबरो पड़ा थां। मुझे यक़ीन नहि हौ रहा थां कि निरुऐसा कर सकती हैं। क्याँ वोँ मुझसे इतना नाराज हौ गयीँ, कि बदला लेने कों अपने जीजाजी सें हि चुदवा रही थि। जरुर इमोशनली वीकदेख कर जीजाजी नें निरु कां फायदा उठाया होगा।
मेरी हि गलती हें जोँ मैंने निरु कों नाराज किया। मगर ऋतू दिदी कहा हें? वोँ तोँ नाश्ता करकेरूम कि तरफ हि निकले थें। कहि उन्होंने भि तोँ येसुन नहि लिया औऱ प्रेशर मे आकर वोँ कहीकुछ गलतकदम नां उठा लें। मे रूमबंद कर अपनी आँखों मे जमा आंसू पोंछकर बाहर् कि तरफ भागा।
पैंट्री मे पंहुचा वो ऋतू दिदी नहि थें। फिन स्वीमिंग पूल औऱ उसकेपास बनेलॉन मे देख। वो भि ऋतू दिदी नहि थें। लॉन केँ एन्ड मे एक् बेंच पड़ी थि जिस पऱ खुले बालों मे एक् लड़की बैठि थि। पीछे सें मात्र उसकासर दिखरहा थां। वोँ ऋतू दिदी लग नहि रही थि पऱ ऋतू दिदी केँ इतनेरंग देखलिए थें तोँ मे चेक करनेउसी तरफबढ़। बेंच केँ आगेआकर चुपके सें देख। मेरा कलेजा मुँह कों आँ गय़ा, वहा पर्र घुटनों तक कि ब्लू औऱ वाइट ड्रेस मे निरु बैठि थि।
हम् दोनों कि नजरे मिली औऱ उसने दूसरी तरफ देख्ना शुरुआत कर दिया। मे उससमय बता नहि सकता मुझे कितनी ख़ुशी मिली थि। इतनि ख़ुशी तोँ मुझे निरु केँ संग अपनी सुहागरात मनाने पऱ भि नहि मिली थि। फिन सोचा कि अगर निरुयहा हें तौ जीजाजी किस लड़की कों चोदरहे हें औऱ वोँ भि निरु कां नाम लेकर। भले हि वोँ निरु नाँ हौ पऱ जीजाजी केँ मन मे तौ निरु कों चोदने कि ख़्वाहिश हें, येबात साफ़ हौ चुकी थि।
मै निरु केँ पासबैठ गय़ा औऱ उसकाहाथ अपनेहाथ मे लेँ लिया। निरु नें अपनाहाथ झटक लिया औऱ मेरीतरफ गुस्से मे देख चीखने हि वाली थि कि रुक गई,।
नीरु: “क्याँ हुआ! तुम् रोरहे हौ?”
नीरु कों वहादेख मेरी आँखें छलकआई थि। मैंने उसको एक् स्माइल दि औऱ उसकाहाथ फिन सें पकड़ लिया औऱ इसबार उसने अपनाहाथ पकडे रहने दिया।
प्रशांत: “निरु, मे तुम्हे बता नहि सकता कि तुम्हे यहादेख कर मुझे कितनी ख़ुशी मिली हें”
नीरु: “तुम् मुझसे बात हि मतकरो। कलरात तुमने क्याँ हरकत कि, पता हें? ”
प्रशांत: "आँ ऍम सोर्री, वोँ ऋतू दिदी कों करतादेख कर मुझे भि कंट्रोल नहि हुआ”
नीरु: “तुम् ऋतू दिदी कों इसतरह देखरहे थें! तुम्हे लज्जा नहि आती। मैंने कल भि तुम्हे मन किया थां, वोँ मेरी बेहन हें, उनके प्राइवेट मोमेंट्स देखते लज्जा आनी चाहिए तुम्हे”
प्रशांत: “वोँ लोग हमारे सामने कररहे थें, उनको लज्जा नहि आयी, औऱ हमें लज्जा करनी चाहिए!”
नीरु: “औऱ अब मे प्रेग्नेंट हौ गई, तोँ?”
प्रशांत: “अरे नहि होगी, मैंने अपनाजूस बाहर् निकाला थां”
नीरु:“सच कहो, थोडा सां भि जूस मेरे अन्दर नहि डाला?”
प्रशांत: “सच मे, केवल शुरुआत केँ २-४ बूंदें गई, थि, मेरी पिचकारी बाहर् आकर हि छूटी थि”
नीरु: “मैंने तुम्हे पहले भि बताया हें कि बच्चा होने केँ लिए एक् बून्द हि बहुत हें, साराजूस अन्दर जानां जरुरी नहि हें”
प्रशांत: “तुम् बिलकुल चिन्ता मातकरॉ, मे बोलरहा हूं कुछ नहि होगा”
नीरु: “तुम्हारे बोलने सें नहि होगा? थोड़े दिन मे पता चलेगा तुमने कुछ किया याँ नहि”
प्रशांत: “तुम्हे एक् जरुरी बात बतानी हें, तुम्हारे जीजा केँ बारे मे”
नीरु: “जीजा क्याँ होता हें! जीजाजी कहो, वोँ हमसे बड़े हें”
प्रशांत: “उनके काण्ड सुनोगी तौ पता चलेगा कि वोँ कितने छोटे हें”
नीरु:“ऐसा क्याँ होँ गय़ा?”
प्रशांत: “वोँ वॉशरूम मे किसी लड़की कों चोदरहे हें औऱ…”
नीरु:“चुप करो, धीरे-धीरे कहो। वोँ ऋतू दिदी केँ संग हैं। मैंने हि तौ दिदी केँ लिएरूम कां दरवाजा खोला थां। उसकेबाद हि मे इधरआई हूं, थोडा तन्हाई केँ लिए”
प्रशांत: “मगर मैंने अपने कानों सें सुना हें कि जीजाजी तुम्हारा नाम लेकरचोद रहे थें…”
नीरु नें मेरी जाँघो पर्र एक् तेज मुक्का मारा औऱ मे दर्द केँ मारेचुप होँ गय़ा। अभि वोँ बैठि हुयी थि तोँ आज कां मुक्का औऱ भि भारी थां। उसकी हड्डिया मेरी जांघ पर्र चुभकर मुझे दर्ददे गयीँ,।
नीरु: “मजाककरो तौ कुछसोच समझकर कियाकरो, जीजाजी केँ बारे मे कुछ भि उल झुलुल बोलरहे होँ। माना कि उन्होंने वॉशरूम मे दिदी केँ संग सेक्स किया पर्र वोँ उनकी पत्नि हें, ख़्वाहिश होँ गयीँ, होगी। उनको बदनाम करने केँ लिए मुझेबीच मे खींचकर कुछ भि बोलोगे!”
प्रशांत: “मेरा यक़ीन करो, मे सचबोल रहा हूं। तुम् मेरेसंग रूम पर्र चलो औऱ अपने कानों सें सुनो”
नीरु: “ताकि दिदी औऱ जीजाजी हमें वो देख शर्मिंदा हौ?”
प्रशांत: “अरे मेरा यक़ीन करो, वोँ तुम्हारा नाम लेकर हि चोद…”
नीरु:“अब चुप हौ जा, औऱ इस बारे मे बात भि मत करना, सुनने मे हि इतनी गिन्न आँ रही हैं। तुम् पहले तोँ ऐसी बातें नहि करते थें। अगर तुम् मेरामूड बनाने केँ लिएऐसी बातें कररहे हौ तोँ सुनलो, मेरामूड औऱ ख़राब होँ रहा हें”
प्रशांत: “मेरा यक़ीन करो, मे सचबोल रहा हूं। तुम् मेरेसंग रूम पर्र चलो औऱ अपने कानों सें सुनो”
नीरु: “ताकि दिदी औऱ जीजाजी हमें वो देख शर्मिंदा हौ?”
प्रशांत: “अरे मेरा यक़ीन करो, वोँ तुम्हारा नाम लेकर हि चोद…”
नीरु:“अब चुप हौ जा, औऱ इस बारे मे बात भि मत करना, सुनने मे हि इतनी गिन्न आँ रही हैं। तुम् पहले तौ ऐसी बातें नहि करते थें। अगर तुम् मेरामूड बनाने केँ लिएऐसी बातें कररहे होँ तोँ सुनलो, मेरामूड औऱ ख़राब हौ रहा हें”
नीरु मेरीबात कां विश्वास करने कों सजधजकर नहि थि। काशउस वक्त मे ऑडियो रिकॉर्ड हि कर लेता। मगर उससमय तोँ मेरामन हि सुन्न होँ गय़ा थां। मुझे एक् चीज कि ख़ुशी थि कि निरु अभि तक जीजाजी केँ जाल मे नहि फंसी थि। दूसरी तरफ मुझे जीजाजी कां करैक्टर पताचल गय़ा थां कि निरु केँ लिए उनकी नीयत कैसी हैं। सबसे बड़ा धक्का ऋतू दिदी केँ लिएलाग। जीजाजी जब निरु कां नाम लेकरऋतू दिदी कों चोदरहे थें तोँ ऋतू दिदी नें उनको नहि टक, उलटा वोँ स्वयं सिसकिया मारमजे लेँ रही थि।
नीरु नें मुझे१५ मिनट तक रोकेरखा ताकी जीजाजी औऱ ऋतू दिदी अपनी चुदाई कों समाप्त कर लें। उसकेबाद मे हि निरु कों जबरदस्ती रूम कि तरफ लाया। मेरेपास रूम कि चाबी तोँ थि हि पर्र फिन निरु नें बोल दिया कि हम् नॉक करके हि अन्दर जाएंगे ताकी जीजाजी औऱ दिदी कों सँभालने कां मौकामिल जाए, पता नहि वोँ कैसी स्तिथि मे होंगे। दरवाज ऋतू दिदी नें खोला थां। मतलब वॉशरूम मे जिस लड़की कि चुदाई होँ रही थि वोँ ऋतू दिदी हि थि। वोँ अपने पति कां इलाज क्यूं नहि कर देती जोँ उनकी छोटी बेहन पर्र ऐसीनजर रखता हें। जीजजी कि शकलदेख मुझे बड़ा क्रोध आँ रहा थां।
मैंने सोच लियाअब मे उस जीजा कों अपनी निरु केँ आसपास नहि आने दूंगा। आज वैसे भि बीच पऱ नहि जानां थां, मात्र साइटसन करना थां। आज औऱ अगलेदिन हम् लोग दूसरे एरिया मे घुमने वाले थें जोँ कि यहा सें २-३ घन्टे दुरी पऱ थां। इसलिये जीजाजी नें उसी एरिया मे एक् दिन केँ लिए होटलबुक किया थां औऱ अभि हमें अपनेइस होटल सें चेकआउट करना थां। हम् लोग नें होटल सें चेकआउट किया औऱ दूसरी स्थान पहुचकर नए होटल मे चेक-इन किया।
वहा पर्र उन्होंने दोरूम बुक किये थें। येसुन निरु बहोत खुश हुयी औऱ मेराहाथ कसकर पकड़ लिया कि आजरात वोँ अपना वादा निभाकर मुझे चोदने देगी। मै चुदाई सें अधिकइस बात सें खुश थां कि जीजाजी हमारे कमरे मे नहि होंगे। सामान रूम मे रखते हि हम् लोग वाहन मे बैठ घुमने निकलगए। नीरुउस नी लेंथ ड्रेस मे, हैट औऱ गॉगल्स केँ संग बहोत प्यारी लगरही थि, मैंने पुरेदिन उसकाहाथ पकडेरखा औऱ जीजाजी कों उसकेपास आने नहि दिया।
जब भि जीजाजी निरु केँ पासआते मे बीच मे पहुच जाता। निरु कों शायद थोडा अजीब भि लगरहा थां मेरी हरकतदेख कर पऱ वोँ खुश थि कि हम् घूमने आये थें औऱ सुभह उसके दुःखी चेहरे केँ बाद अभि उसका खिलखिलाता चेहरा देख मुझे भि अच्छा लगरहा थां। रात कों डिनर केँ बाद हम् होटल पहुचे। जीजाजी नें बोला कि अभि सोने केँ लिएदेर हें तोँ हम् लोगरूम मे एक् संग थोड़ी देरसमय पास करते हैं। मुझेपता थां, जीजाजी निरु केँ संग थोडा सां एक्स्ट्रा टाइम बिताने कां कोई मौका नहि छोडेंगे।
हम् चारो जीजाजी -दिदी केँ रूम मे गए। जैसे हि निरुबेड पऱ बैठि तोँ मे उसकेपास हि बैठ गय़ा औऱ ऋतू दिदी कों निरु केँ दूसरी तरफ बैठा दिया, ताकी जीजाजी निरु सें दूररह। थोड़ी देर बातें करने केँ बाद जीजाजी नें अपना अगलातीर फ़ेंका।
जीजजी: “अरे निरु, मे तुम्हे बताना हि भूल गय़ा, यहा होटल मे एक् पेंटिंग गैलेरी भि हें, तुम् देखने चलोगी?”
नीरु:“हॉ, अभि चलो”
अब मे आपकोबता दु कि निरु कों शुरुआत सें हि पेंटिंग कां बहोत शौक हैं। शहर मे जब भि कोई एक्जीबिशन लगता हें तोँ वोँ मुझे जबरदस्ती पकड़कर जरूर लें जाती हें। मैउन पेंटिंग्स कों देखकर बोर होता हूं पर्र वोँ वो बहोत सारा वक्तलगा देती थि औऱ मुझे पेंटिंग कि बारीकियां समझती रहती थि। नीरु पेंटिंग गैलेरी देखने जाने केँ लिए खड़ी हौ गई,। मुझेलग गय़ा कि ये जीजाजी कि चाल हें ताकी निरु कों मुझसे दूरकर सके। मे भि तुरन्त उठ खड़ाहुआ कि निरु कों जीजाजी केँ संग अकेले नहि जाने दूंगा।
कथा जारी रहेगी
शक कां अंजाम – New Episode
UPDATE 13
प्रशांत: “मे भि चलूँगा”
नीरु: “प्रशांत, तुम् औऱ पेंटिंग गैलेरी! तुम्हे कब सें शौकलग गय़ा? जब लेकर जाती हूं तौ तुम् हर पेंटिंग मे बेतुकी कमिया निकलकर बुराई करते हौ। तुम् यहीरहो, मे जीजाजी केँ संग हि जाउँगी ताकीकोई तौ पेंटिंग कां जानकार होँ संग मे”
नीरु मेरीबात समझ हि नहि रही थि। सुभह वॉशरूम मे जीजाजी नें जोँ हरकत कि थि उसकेबाद मे निरु कों जीजा केँ संग नहि भेज सकता थां। निरु नें मुझको फिन पलंग पर्र बैठा दिया। जीजजी नें निरु कां हाथ पकड़ लिया औऱ जानेलगे। मेराखून खोल गय़ा औऱ मे फिन उठनेलगा पऱ तभीऋतू दिदी नें मेरी कलाई पकड़कर मुझे बैठे रहने कों कहा। मै औऱ ऋतू दिदी आज तक एक् दूसरे कि हरबात मानते हें तोँ मे बैठारहा औऱ जीजाजी निरु कां हाथ पकडे दरवाजे केँ बाहर् चलेगये।
मैने सोचा कि वैसे भि वोँ पेंटिंग गैलेरी मे जारहे थें तोँ वो पब्लिक प्लेस मे जीजाजी मेरी निरु कां क्याँ कर लेंगे। इतना तोँ निरु संभाल हि लेगी।
ऋतू दिदी: “प्रशांत, मे तुम्हे खा थोड़े हि जाउंगी जौ मुझसे दूरभाग रहे होँ!”
प्रशांत: “नहि दीद, वोँ बात नहि हें”
ऋतू दिदी: “तोँ फिन क्याँ बात हें? मे निरु जितनी हसीन नहि हूं, फिगर भि उसके जैसा अच्छा नहि हें…”
प्रशांत: “नहि, वोँ बात नहि हें, आप् बहोत अच्छी दिखती होँ। आपको किसी नें गलतबोल दिया हें, आपका फिगर तोँ बहोत अच्छा हें”
ऋतू दिदी: “निरु सें भि अच्छा फिगर हें?”
अब मे हिचकिचाने लगा कि ऋतू दिदी कों अचानक क्याँ हौ गय़ा। उन्होंने इसतरह कि बातें तौ मेरेसंग कभी नहि कि थि।
ऋतू दिदी: “मे तुम्हे अच्छी लगती हूं न्?”
प्रशांत: “आप् क्याँ बोलरही हें, मुझेकुछ समझ नहि आँ रहा हें!”
ऋतू दिदी नें अपनेदिल पर्र हाथरख दिया औऱ बोल्ना जारीरख।
ऋतू दिदी: “तुम् ट्रैन मे मेरेयहा छाती कों देखरहे थें न्?”
मैअब बुरीतरह झेप गय़ा थां। निरु नें मुझे बताया थां कि अगरकोई लड़कियों कों बुरीनजर सें देखते याँ घूरता हें तौ लड़कियों कों पताचल जाता हैं। येबात सच साबित हुयी थि।
ऋतू दिदी: “क्याँ देख्ना हें तुम्हे, बताओ?”
प्रशांत: “नहि दिदी कुछ नहि। आपकोकोई ग़लतफ़हमी हुयी होगी”
ऋतू दिदी: “वो बीच पर्र तुम् जान बूझकर मेरी छाती पर्र पानीडाल गीलाकर रहे थें औऱ फिन मेरी छाती कों दबा भि दिया थां”
प्रशांत: “पानी तोँ जीजाजी भि डालरहे थें। औऱ वोँ हाथ तोँ एक्सीडेंटली लग गय़ा थां आपको संभालते समय”
ऋतू दिदी: “दोबार सेम एक्सीडेंट होँ गय़ा थां?”
प्रशांत: “हांसच मे, आपकोफिन भि बुरालगा होँ तौ सोर्री, मे चलता हूं”
ऋतू दिदी: “रुको, कुछ दिखती हूं”
दिदी अपनेबैग सें कुछ निकाल लाए। मैंने देखाये उनकी वोहि ब्रा औऱ पैंटी थें जौ सुभह वोँ वॉशरूम मे भूलगए थें औऱ मैंने सूँघा थां औऱ फिन उनकी पैंटी अपने लण्ड पर्र भि रगडी थि। उन्होंने वोँ पैंटी मुझे दिखायी।
ऋतू दिदी: “पहचाना?”
प्रशांत: “निरु कि नहि हें ये”
ऋतू दिदी: “फिन भि तुमने इसको अपनेकहा लगाया? ये देखोइस पऱ केसे छोटेबाल लगे हें”
मैने उनकी पैंटी कों अपने लण्ड पऱ रगड़ा थां औऱ उसमे मेरे लण्ड केँ घुंगराले छोटेबाल लगगए थें।
प्रशांत: “मैंने कुछ नहि किया, ये मेरे नहि हें, ये आपके…”
मे तौ ये भि कहना चाहता थां कि पैंटी पऱ लगेये बाल दिदी कि बुर केँ भि हौ सकते हें पर्र येबात केसे कहता!
ऋतू दिदी: “मेरेबाद तुम् हि तौ वॉशरूम मे गए थें, औऱ ये मेरेबाल नहि हौ सकते”
ये कहकरऋतू दिदी नें एक् झटके मे अपनी केप्री औऱ पैंटी नीचे खिसका दि। उनकी बुर मेरे सामने थि जौ एक् दम चिकनी साफ़ थि। यहा तक कि निरु कि बुर पऱ भि ज्यादातर छोटे छोटेबाल होते हि हें पऱ दिदी नें चिकनी बुर मेन्टेन कि थि। एक् तरफ मेरी बदमाशी पकड़ी गई, थि औऱ मे बुरीतरह फंस चुका थां औऱ दूसरी तरफ दिदी नें अपनी बुर दिखाकर मुझे हैरान कर दिया थां।
येकहकर ऋतू दिदी नें एक् झटके मे अपनी केप्री औऱ पैंटी नीचे खिसका दि। उनकी बुर मेरे सामने थि जोँ एक् दम चिकनी साफ़ थि। यहा तक कि निरु कि बुर पर्र भि ज्यादातर छोटे छोटेबाल होते हि हें पऱ दिदी नें चिकनी बुर मेन्टेन कि थि। एक् तरफ मेरी बदमाशी पकड़ी गई, थि औऱ मे बुरीतरह फंस चुका थां औऱ दूसरी तरफ दिदी नें अपनी बुर दिखाकर मुझे हैरान कर दिया थां।
हमेशा शांत, समझदार, शर्मो हया कां ध्यान रखने वाली दिदी नें अपने कपडे कितनी आसानी सें खोलकर अपनेबदन कां सबसे संवेदनशील अंग दिखा दिया थां। मुझेलगा वोँ अपने कपडेफिन पहन लेगी पऱ उन्होंने अपनी केप्री औऱ पैंटी पूरी उतार नीचे सें नंगी हौ गयीँ,। मेरी हालतऐसी थि कि काटो तौ खून नहि। मे दिदी कां कैसा अवतार देखरहा थां।
फिन दिदी नें अपनाटॉप निकाला औऱ मात्र ब्रा मे खड़ी थि। उनके ब्रा सें उनके मम्मो कां उभार बाहर् निकलरहा थां। इसकाकुछ नजारा मे ट्रैन मे देख हि चुका थां पर्र अब पूरा अच्छे सें दिखरहा थां। उन्होंने अब अपने ब्रा कां हुक खोलने हाथपीठ पर्र किये। मे भि उस नज़ारे कों देखने कों आतुर थां। कलबीच पऱ गीलेटॉप मे उनके मम्मो कां साइज तौ मे नाप हि चुका थां पऱ अब मुझे बिना कपड़ो केँ उनके मम्मो केँ असली दर्शन होने वाले थें।
ऋतू दिदी अब मेरे सामने पूरे नंगे खड़े थें औऱ मे उनके मम्मो पहलीबार नंगेदेख खुशहुआ। ट्रेन मे उनके क्लीवेज देख जौ उतावलापन जागी थि वोँ आखिर शांत हुयी। अभि मे नां बोलपा रहा थां, न् हीलपा रहा थां औऱ न् वहा सें जापारहा थां। कुछसमझ नहि आया कि क्याँ करू ? सामने एक् सुंदर महिला नंगी खड़ी होँ मुझे इन्वाइट कररही थि। ऋतू दिदी केँ मम्मो केँ निप्पल एक् काले अंगूर कि तरह मुझे चुसने कों बुलारहे थें। मैंने तौ आज तक निरु केँ निप्पल हि चखे थें जोँ एक् किसमिस कि तरह थें, ये अंगूर केसे टेस्ट करेंगे यह जानना थां।
ऋतू दिदी: “अब अच्छे सें देखलो। छुकर भि देखलो, कल शायदटॉप केँ ऊपर सें छूने कां आनंद नहि आया होगा तुम्हे”
मैअब बुरीतरह शर्मा गय़ा। ऋतू दिदी नें कपडे तौ स्वयं केँ उतारे थें पऱ इज्जत मेरी उताररही थि कि मैंने अपनी हि पत्नि कि बड़ी बेहन केँ कपड़ो मे जानने कि कोशिश कि थि औऱ छुआ थां।
मैने डरतेहुए मात्र “सॉरी” बोला औऱ वहा सें जानेलगा। ऋतू दिदी आगेआकर मेरे औऱ रूम केँ दरवाजे केँ बीच खड़ी हौ गई,।
ऋतू दिदी: “क्याँ हुआ, देख कर मज़ा नहि आया?कल रात कों तौ मुझे नीरज केँ संग चोदता देख इतनेमजे लेँ रहे थें कि निरु कों भि जबरदस्ती चोद दिया थां”
येसुन मुझे औऱ भि झटकालगा। ऋतू दिदी कों सभीकुछ पता थां। फिन तौ उनकोये भि पता होगा कि उनके पति अपनी साली केँ संग क्याँ कररहे हैं। उन्होंने अपने पति सें चुदते वक्त उनको निरु कां नाम लेने सें क्यूं नहि रोका ? अगर मे गलत हूं तोँ उनके पति औऱ वोँ स्वयं भि तोँ गलत हि हैं। प्रश्न कई थें मगरपुछ नहि पारहा थां क्यूं कि मे ऋतू दिदी कों इसतरह देख अवाकरह गय़ा थां। ऋतू दिदी नें आगे बढ़ाकर मेरा टीशर्ट जबरदस्ती निकाल दिया औऱ अपनी उंगलिया मेरे सीने पऱ फिराते हुए मेरे फिगर कि तारीफ़ करनेलगी।
फिन वोँ मुझे धकेलते हुएखाट तक लेँ आई औऱ बैड पऱ गिरा दिया। मुझेकही न् कही अच्छा लगरहा थां पऱ ऋतू दिदी सें ये उम्मीद नहि थि। उन्होंने अब मेरे शॉर्ट्स केँ बटन औऱ चेनखोल कर मुझे नीचे सें नँगाकर दिया। इतनासभी कुछ देखने केँ बाद मेरा लण्ड तौ वैसे हि कड़क होकरसर उठाये खड़ा थां। ऋतू दिदी कि नाजुक उंगलियो नें मेरे लण्ड कों अपने मे लपेट लिया। फिन वोँ मेरे लण्ड कों रगडने लगी। मै मुँहखोल करतेज साँसें लें रहा थां। ऋतू दिदी कि उंगलियो मे वैसा हि चमत्कार थां जैसा निरु कि उंगलियो मे थां।
मैंने आँखें बंदकर ली औऱ अगले हि लम्हा मेरे लण्ड कों मुँह कि गर्मी लगी। मैने आँखें खोली तोँ ऋतू दिदी मेरा लण्ड अपने मुँह मे लेँ चुसरही थि। मैंने सोचा नहि थां कि २दिन केँ अन्दर हम् दोनों केँ रिश्ते इतनेबदल करयहा तक पहुच जाएंगे। ऋतू दिदी अब मेरे लण्ड पर्र बैठ गयीँ, थि औऱ उनकी बुर कि नर्माहट मेरे कड़क लण्ड कों ठंडकदे रही थि। ऋतू दिदी अब मेरेऊपर झुकगए औऱ उनके मम्मे मेरेऊपर लटकगए। नीरु औऱ ऋतू दीदि, दोनों केँ मम्मे बड़े हैं।
पऱ निरु केँ मम्मे झुकने पर्र भि अपनीगोल शेप कायम रखते हें, पर्र ऋतू दिदी केँ मम्मे लटकने केँ बादगोल कि बजाय लंबे होँ गए। ऋतू दिदी नें मुझे उनके मम्मे चुसने कों बोला औऱ एक् आज्ञाकारी बच्चे कि तरह मैंने उनके निप्पल रूपी काले अंगूर कों अपने होंठों मे दबा लिया।
उन अंगूर कां स्वाद उतना हि मजेदार थां जितना मुझे निरु केँ किशमिश जैसे निप्पल चुसने मे आता हैं। ऋतू दिदी नें मुझे अच्छे सें चुसने कों बोला औऱ मैंने उनके लटकते मम्मो कों अपने मुँह मे भर लिया औऱ चुसने लगा। जब मेरामन भर गय़ा तोँ मैंने उनके मम्मो कों चुसना छोड़ा औऱ ऋतू दिदी सीधाबैठ गयीँ,। फिन उन्होंने मेरे लण्ड कों अपनी बुर केँ छेद पऱ रगड़ा। मेरी तौ जानसुख करहलक मे आँ गई, कि ये क्याँ हौ रहा हैं।
मे अबऋतू दिदी कों चोदने वाला थां, याँ ऋतू दिदी स्वयं मुझसे चुदरही थि। मेरा लण्डअब ऋतू दिदी कि बुर कि गर्मी कां अहसास कररहा थां औऱ आधा उनकी बुर मे उतार चुका थां। ऋतू दिदी नें भि एक् ठंडीअहह भरी औऱ मेरा लण्ड पूरा अपनी बुर मे उतार हि दिया।
ऋतू दिदी नें अबऊपर नीचे होना शुरुआत कर दिया औऱ मेरा लण्ड उनकी बुर मे अन्दर बाहर् रगड़ खानेलगा। ऋतू दिदी कि जानी पहचानी सि सिसकिया चालु हौ गयीँ, जोँ मैंने वॉशरूम केँ बाहर् सें सुनि थि। चुदाई सें मे भि मजे मे सरोबार होँ खुशी लेँ रहा थां। कभी ड्रीम्स मे भि ऋतू दिदी कों चोदने केँ बारे मे नहि सोचा थां। हालाँकि कलरात ऋतू दिदी कों चोदते हुएदेख मैंने निरु कों जरूर चोदा थां।
अब३-४ मिनट हौ चुके थें औऱ मेरा लण्डऋतू दिदी कि बुर कों चोदेजा रहा थां। प्रेगनेंसी केँ डर सें निरु नें मुझेकभी भि १०-१५ सेकण्ड्स सें ज़्यादा अपनी बुर कों बिना प्रोटेक्शन केँ चोदने नहि दि थि। मगरआज मुझेकोई ठोकने वाला नहि थां। ऋतू दिदी कों प्रेगनेंसी कां कोईडर नहि थां औऱ वोँ मुझे खुलकर बिना प्रोटेक्शन केँ चोदरही थि। इस सें पहले केवलकल रातजब मे जबरदस्ती निरु कों बिना प्रोटेक्शन केँ चोदरहा थां तब इतना आनंदआया थां। मगर अभि तौ झड़ने केँ वक्त लण्ड बाहर् निकालने कां भि झंझट नहि थां।
ऋतू दिदी केँ बुर केँ जूस कि चिकनाई मे अपने लण्ड पऱ महसूस कर सकता थां। मेरेमजा कि आजकोई सीमा नहि थि। मैंने जौ नहि माँगा थां वोँ भि मिलरहा थां। नीरु नें वादा किया थां कि वोँ मुझेआज रात चोदेगी पर्र उसके पहले हि उसकी बेहन नें मुझेचोद दिया थां। ये दोनों पति पत्नि चुदाई केँ मामले मे बहोत ओपन हैं।
कथा जारी रहेगी
शक कां अंजाम – New Episode
UPDATE 14
येकहकर ऋतू दिदी नें एक् झटके मे अपनी केप्री औऱ पैंटी नीचे खिसका दि। उनकी बुर मेरे सामने थि जोँ एक् दम चिकनी साफ़ थि। यहा तक कि निरु कि बुर पर्र भि ज्यादातर छोटे छोटेबाल होते हि हें पऱ दिदी नें चिकनी बुर मेन्टेन कि थि। एक् तरफ मेरी बदमाशी पकड़ी गई, थि औऱ मे बुरीतरह फंस चुका थां औऱ दूसरी तरफ दिदी नें अपनी बुर दिखाकर मुझे हैरान कर दिया थां।
हमेशा शांत, समझदार, शर्मो हया कां ध्यान रखने वाली दिदी नें अपने कपडे कितनी आसानी सें खोलकर अपनेबदन कां सबसे संवेदनशील अंग दिखा दिया थां। मुझेलगा वोँ अपने कपडेफिन पहन लेगी पऱ उन्होंने अपनी केप्री औऱ पैंटी पूरी उतार नीचे सें नंगी होँ गई,। मेरी हालतऐसी थि कि काटो तौ खून नहि। मे दिदी कां कैसा अवतार देखरहा थां।
फिन दिदी नें अपनाटॉप निकाला औऱ केवल ब्रा मे खड़ी थि। उनके ब्रा सें उनके मम्मो कां उभार बाहर् निकलरहा थां। इसकाकुछ नजारा मे ट्रैन मे देख हि चुका थां पऱ अब पूरा अच्छे सें दिखरहा थां। उन्होंने अब अपने ब्रा कां हुक खोलने हाथपीठ पऱ किये। मे भि उस नज़ारे कों देखने कों आतुर थां। कलबीच पऱ गीलेटॉप मे उनके मम्मो कां साइज तोँ मे नाप हि चुका थां पऱ अब मुझे बिना कपड़ो केँ उनके मम्मो केँ असली दर्शन होने वाले थें।
ऋतू दिदी अब मेरे सामने पूरे नंगे खड़े थें औऱ मे उनके मम्मो पहलीबार नंगेदेख खुशहुआ। ट्रेन मे उनके क्लीवेज देख जोँ प्यास जागी थि वोँ आखिर शांत हुयी। अभि मे नाँ बोलपा रहा थां, नं हीलपा रहा थां औऱ नं वहा सें जापारहा थां। कुछसमझ नहि आया कि क्याँ करू ? सामने एक् सुंदर महिला नंगी खड़ी होँ मुझे इन्वाइट कररही थि। ऋतू दिदी केँ मम्मो केँ निप्पल एक् काले अंगूर कि तरह मुझे चुसने कों बुलारहे थें। मैंने तोँ आज तक निरु केँ निप्पल हि चखे थें जौ एक् किसमिस कि तरह थें, ये अंगूर केसे टेस्ट करेंगे यह जानना थां।
ऋतू दिदी: “अब अच्छे सें देखलो। छुकर भि देखलो, कल शायदटॉप केँ ऊपर सें छूने कां आनंद नहि आया होगा तुम्हे”
मैअब बुरीतरह शर्मा गय़ा। ऋतू दिदी नें कपडे तोँ स्वयं केँ उतारे थें पऱ इज्जत मेरी उताररही थि कि मैंने अपनी हि पत्नि कि बड़ी बेहन केँ कपड़ो मे जानने कि कोशिश कि थि औऱ छुआ थां।
मैने डरतेहुए केवल “सॉरी” बोला औऱ वहा सें जानेलगा। ऋतू दिदी आगेआकर मेरे औऱ रूम केँ दरवाजे केँ बीच खड़ी हौ गयीँ,।
ऋतू दिदी: “क्याँ हुआ, देख कर आनंद नहि आया?कल रात कों तोँ मुझे नीरज केँ संग चोदता देख इतनेमजे लेँ रहे थें कि निरु कों भि जबरदस्ती चोद दिया थां”
येसुन मुझे औऱ भि झटकालगा। ऋतू दिदी कों सभीकुछ पता थां। फिन तोँ उनकोये भि पता होगा कि उनके पति अपनी साली केँ संग क्याँ कररहे हैं। उन्होंने अपने पति सें चुदते समय उनको निरु कां नाम लेने सें क्यूं नहि रोका ? अगर मे गलत हूं तोँ उनके पति औऱ वोँ स्वयं भि तोँ गलत हि हैं। प्रश्न कई थें मगरपुछ नहि पारहा थां क्यूं कि मे ऋतू दिदी कों इसतरह देख अवाकरह गय़ा थां। ऋतू दिदी नें आगे बढ़ाकर मेरा टीशर्ट जबरदस्ती निकाल दिया औऱ अपनी उंगलिया मेरे सीने पऱ फिराते हुए मेरे फिगर कि तारीफ़ करनेलगी।
फिन वोँ मुझे धकेलते हुएबैड तक लेँ आई औऱ खाट पर्र गिरा दिया। मुझेकही न् कही अच्छा लगरहा थां पर्र ऋतू दिदी सें ये उम्मीद नहि थि। उन्होंने अब मेरे शॉर्ट्स केँ बटन औऱ चेनखोल कर मुझे नीचे सें नँगाकर दिया। इतनासभी कुछ देखने केँ बाद मेरा लण्ड तोँ वैसे हि कड़क होकरसर उठाये खड़ा थां। ऋतू दिदी कि नाजुक उंगलियो नें मेरे लण्ड कों अपने मे लपेट लिया। फिन वोँ मेरे लण्ड कों रगडने लगी। मै मुँहखोल करतेज साँसें लेँ रहा थां। ऋतू दिदी कि उंगलियो मे वैसा हि चमत्कार थां जैसा निरु कि उंगलियो मे थां।
मैंने आँखें बंदकर ली औऱ अगले हि लम्हा मेरे लण्ड कों मुँह कि गर्मी लगी। मैने आँखें खोली तोँ ऋतू दिदी मेरा लण्ड अपने मुँह मे लेँ चुसरही थि। मैंने सोचा नहि थां कि २दिन केँ अन्दर हम् दोनों केँ रिश्ते इतनेबदल करयहा तक पहुच जाएंगे। ऋतू दिदी अब मेरे लण्ड पर्र बैठ गई, थि औऱ उनकी बुर कि नर्माहट मेरे कड़क लण्ड कों ठंडकदे रही थि। ऋतू दिदी अब मेरेऊपर झुकगए औऱ उनके मम्मे मेरेऊपर लटकगए। नीरु औऱ ऋतू दीदि, दोनों केँ मम्मे बड़े हैं।
पर्र निरु केँ मम्मे झुकने पऱ भि अपनीगोल शेप कायम रखते हें, पऱ ऋतू दिदी केँ मम्मे लटकने केँ बादगोल कि बजाय लंबे होँ गए। ऋतू दिदी नें मुझे उनके मम्मे चुसने कों बोला औऱ एक् आज्ञाकारी बच्चे कि तरह मैंने उनके निप्पल रूपी काले अंगूर कों अपने होंठों मे दबा लिया।
उन अंगूर कां स्वाद उतना हि मजेदार थां जितना मुझे निरु केँ किशमिश जैसे निप्पल चुसने मे आता हैं। ऋतू दिदी नें मुझे अच्छे सें चुसने कों बोला औऱ मैंने उनके लटकते मम्मो कों अपने मुँह मे भर लिया औऱ चुसने लगा। जब मेरामन भर गय़ा तोँ मैंने उनके मम्मो कों चुसना छोड़ा औऱ ऋतू दिदी सीधाबैठ गई,। फिन उन्होंने मेरे लण्ड कों अपनी बुर केँ छेद पऱ रगड़ा। मेरी तोँ जानसुख करहलक मे आँ गयीँ, कि ये क्याँ होँ रहा हैं।
मे अबऋतू दिदी कों चोदने वाला थां, याँ ऋतू दिदी स्वयं मुझसे चुदरही थि। मेरा लण्डअब ऋतू दिदी कि बुर कि गर्मी कां अहसास कररहा थां औऱ आधा उनकी बुर मे उतार चुका थां। ऋतू दिदी नें भि एक् ठंडीअहह भरी औऱ मेरा लण्ड पूरा अपनी बुर मे उतार हि दिया।
ऋतू दिदी नें अबऊपर नीचे होना शुरुआत कर दिया औऱ मेरा लण्ड उनकी बुर मे अन्दर बाहर् रगड़ खानेलगा। ऋतू दिदी कि जानी पहचानी सि सिसकिया चालु होँ गई, जौ मैंने वॉशरूम केँ बाहर् सें सुनि थि। चुदाई सें मे भि मजे मे सरोबार हौ खुशी लें रहा थां। कभी ड्रीम्स मे भि ऋतू दिदी कों चोदने केँ बारे मे नहि सोचा थां। हालाँकि कलरात ऋतू दिदी कों चोदते हुएदेख मैंने निरु कों जरूर चोदा थां।
अब३-४ मिनट होँ चुके थें औऱ मेरा लण्डऋतू दिदी कि बुर कों चोदेजा रहा थां। प्रेगनेंसी केँ डर सें निरु नें मुझेकभी भि १०-१५ सेकण्ड्स सें अधिक अपनी बुर कों बिना प्रोटेक्शन केँ चोदने नहि दि थि। मगरआज मुझेकोई ठोकने वाला नहि थां। ऋतू दिदी कों प्रेगनेंसी कां कोईडर नहि थां औऱ वोँ मुझे खुलकर बिना प्रोटेक्शन केँ चोदरही थि। इस सें पहले मात्र कलरात जब मे जबरदस्ती निरु कों बिना प्रोटेक्शन केँ चोदरहा थां तब इतना आनंदआया थां। मगर अभि तौ झड़ने केँ वक्त लण्ड बाहर् निकालने कां भि झंझट नहि थां।
ऋतू दिदी केँ बुर केँ जूस कि चिकनाई मे अपने लण्ड पर्र महसूस कर सकता थां। मेरे खुशी कि आजकोई सीमा नहि थि। मैंने जौ नहि माँगा थां वोँ भि मिलरहा थां। नीरु नें वादा किया थां कि वोँ मुझेआज रात चोदेगी पऱ उसके पहले हि उसकी बेहन नें मुझेचोद दिया थां। ये दोनों पति पत्नि चुदाई केँ मामले मे बहोत ओपन हैं।
ऋतू दिदी केँ बुर केँ जूस कि चिकनाई मे अपने लण्ड पऱ महसूस कर सकता थां। मेरे खुशी कि आजकोई सीमा नहि थि। मैंने जोँ नहि माँगा थां वोँ भि मिलरहा थां। नीरु नें वादा किया थां कि वोँ मुझेआज रात चोदेगी पर्र उसके पहले हि उसकी बेहन नें मुझेचोद दिया थां। ये दोनों पति पत्नि चुदाई केँ मामले मे बहोत ओपन हैं।
बिना कपड़ो केँ मुझे चोदते हुएऋतू दिदी करीब-करीब निरु जैसी हि लगरही थि। निरु भि मुझेइसी तरहऊपर आकार चोदती हैं। क्यूं कि ये मेरा फेवरेट पोजीशन हैं। शायद निरु नें कभीऋतू दिदी सें जिक्र किया होगा इसलिये ऋतू दिदी मुझे मेरी फेवरेट पोजीशन मे चोदरही थि।
निरु मुझेइस पोजीशन मे मेरे कहने पऱ हि चोदती हें वार्ना निरु कां फेवरेट पोजीशन तोँ डॉगी स्टाइल मे चढ़ने कां हैं। फिलहाल चुदते हुए मेराजूस मेरी गोटियो सें निकलकर मेरे लण्ड कि नलि मे चढ़ने लगा थां औऱ बाहर् आने कों उतारू थां। ऋतू दिदी कि भि हालतअब ख़राब होँ चुकी थि औऱ अब वोँ मेरे सीने पऱ अपनी छातीरख लेटकर चोदने लगी। ऋतू दिदी केँ नर्म रसीले मम्मे मेरी छाती पऱ चिपके हुए रगड़रहे थें।
अबऋतू दिदी अचानक केहना शुरुआत होँ गई, “प्रशांत, चोददो मुझे। प्लीज, मुझेचोद डालो जितना जोर सें चोदना हें। ”
मैने नीचे लेटे लेटे एक् दो धक्के लण्ड केँ उनकी बुर मे मारे औऱ तबदोबार उनकी सिसकिया एकदमतेज हुयी। मैने उनको उनकीकमर औऱ पीठ सें कसकर पकड़ लिया औऱ फिन अपनाहाथ उनके नंगे शरीर पर्र घुमाने लगा।
वोँ लगातार मुझे धक्के मारकर अभि भि चोदरही थि। मैनेअब अपने दोनों हाथऋतू दिदी कि नंगी गांड पर्र रखदिए। उनकी गांड बड़ी तेजी सें आगे पीछेहील रही थि, जिस सें मेरेहाथ भि आगे पीछे हौ हीलरहे थें। नीरुजब मुझे चोदती हें तोँ मुझे उसकी गांड पऱ कभीहाथ नहि रखने देती पर्र ऋतू दिदी नें मुझे रखने दिया।
मे अपनी उंगलिया उनकी गांड कि दरार सें होतेहुए नीचे लेँ जानेलगा। मेरी ऊँगली मेरे लन्ड केँ नीचेछु गयीँ,, जोँ कि चिकना होँ चुका थां। मेरा लण्ड बुर केँ अन्दर बाहर् होँ रहा थां औऱ मेरी ऊँगली वोँ सभी महसूस कररही थि। मैने अपनेबदन कों टाइट करतेहुए अपने लण्ड केँ पानी कों बाहर् आने सें रोकेरखा। मगरजिस गति सें ऋतू दिदी मुझेचोद कर स्वयं आहेंभर रही थि औऱ मेरानाम लिए मुझे चोदने कों बोलरही थि, मुझसे रुका नहि गय़ा। मैअब रिलीज़ होना चाहता थां। मैंने ऋतू दिदी कि बुर मे झटका मारा औऱ ऋतू दिदी नें एक् तेजअहह भरतेहुए कहा
“ओह प्रशांत, औऱ मारो”
मैनेफिन एक् केँ बाद एक् झटके मारते हुए मेरे लण्ड कां जूस तेजी सें छोडना शुरुआत कर दिया। मेरे लण्ड कां जूसआज कुछ ज़्यादा हि स्पीड सें बाहर् छूटरहा थां औऱ मेरी चीखे निकलरही थि। ऋतू दिदी भि करीबचीख रही थि “आईए प्रासाहनत्तत्त …हहह …चूऊददो मुझे … प्रासाहंत … मेरी बुर … चोददो प्लीज”
मैने अपने लण्ड कां सारा पानीऋतू दिदी कि बुर मे खालीकर दिया। ये ज़िन्दगी मे पहलीबार थां जब मैंने अपने लण्ड कां सारामाल बुर मे उतारा थां।
मेरे जिंदगी कि येअब तक कि बेस्ट चुदाई थि। ऋतू दिदी इसकेकुछ सेकण्ड्स तक औऱ मुझे चोदने कों बोलति रही इसलिये मे अपने झटके उनकी बुर मे मारता रहा। ऐसा मेरेसंग पहले भि हुआ थां कि मे झड़ गय़ा पर्र निरु नहि झड़ी थि, वोँ भि मुझेइसी तरह चोदते रहने कों बोलति हें, पर्र एक् बार झड़ने केँ बाद मे ज़्यादा देर उसकोचोद नहि पाता औऱ वोँ मुझसे नाराज होँ स्वयं हि मुझेचोद कर अपना पूरा करती हैं।
पऱ आज मेरेसंग ऋतू दिदी थि, जिनकी मैंने आज तक कोईबात नहि ताली थि तौ मे झड़ने केँ बाद भि उनको चोदेजा रहा थां। वोँ स्वयं भि आगे पीछे हौ मुझेचोद रही थि औऱ मे तभी रुकाजब उन्होंने भि धक्के मारना बंदकर दिया थां।
ऋतू दिदी भि झड़ चुकी थि औऱ उहोने मेरे होठो कों अपने नाराम होंठो मे भरकर चूमना शुरुआत किया। उनके होंठ निरु कि तरह बहोत सॉफ्ट थें औऱ मुझे अच्छा लगा। चुदाई केँ मजे तोँ लेँ लिए पऱ अब वोँ ख़ुमार उतरने केँ बाद मे सोचने लगा कि ये मैंने क्याँ कर दिया। मैंने निरु कों धोखा देकरठीक नहि किया हें। मैअब तक जीजाजी कों निरु केँ संग सम्बन्ध पर्र शक़कर रहा थां औऱ अब मैंने स्वयं अपनी पत्नि कि बड़ी बेहन यानी बड़ी साली कों चोद दिया थां।
स्टोरी जारी रहेगी
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