शक कां अंजाम – New Episode
UPDATE 06
हालंकी मे अभि सोना नहि चाहता थां पऱ उठ खड़ाहुआ तोँ जानां हि पड़ा। ऋतू दिदी ऊपर कि बर्थ पर्र जाकरलेट गयीँ, औऱ मे भि उनके सामने कि ऊपर वाली बर्थ पऱ जाकरलेट गय़ा। नीचे दोनों जीजा साली कि बातें औऱ हँसी चालु थि। मे छत कि तरफ सून्य मे निहार रहा थां। कुछसमझ नहि आँ रहा थां कि क्याँ होँ रहा हें औऱ मे क्याँ करू?कुछ मिनट्स ऐसे हि बीतगए औऱ मुझे नींद तोँ आँ नहि रही थि तोँ फिन मैंने करवट बदली। सामने ऋतू दिदी सीधा लेटी थि। लेटे होने सें उनकापेट अंदरदब गय़ा थां औऱ शर्ट केँ अंदर सें उनकीछति कां उभार साइड सें साफ़ बड़ादीख रहा थां। उन्होंने जौ शाल निकाली थि उस सें अपने पाँव सें लेकरकमर तक कां जिस्म ढकरखा थां।
ऋतू दिदी कि बर्थ केँ ठीक नीचे निरु बैठी थि औऱ मेरी बर्थ केँ नीचे नीरज जीजाजी थें। मुझेफिन एक् शररात सुझी। मैंने सोचा जीजाजी कां एक् टेस्ट लियाजाए। मेराबैग निरु जहाँ बैठी थि उसकेठीक नीचे थां। मैंने निरु कों अपनाशाल पास करने कों कहा। मुझेपता थां कि निरु कि ड्रेस उसकेआगे झूकते हि ऋतू दिदी केँ शर्ट कि तरहखुल जायेगी औऱ निरु कां क्लीवेज सामने बैठे जीजाजी कों दीख जाएगा। नीरुआगे झुकी औऱ बैग खिंचकर बर्थ केँ नीचे सें निकालने लगी। मे निरु कि ड्रेस कों उसके झूकते हि थोडा खुलादेख पारहा थां। मैंने अपनी नजरे नीचेकर जीजाजी केँ एक्सप्रेशन नोट करने कि कोशिश कि। जीजाजी भि अपनाहाथ आगेबढा निरु कि हेल्प करनेलगे बैग कों बाहर् निकालने मे औऱ चेन खोलने मे, जीजाजी कि नजरे सामने निरु पर्र हि थि औऱ निरु नें बैग सें शाल निकला औऱ मुझेदे दिया। बैग अंदर डालने केँ लिए निरुफिन झुकी औऱ मैंने जीजाजी केँ एक्सप्रेशन नोट करने कि कोशिश कि पऱ ऊपर सें देख नहि पाया औऱ जीजाजी नें वोँ बैग वापसी बर्थ केँ नीचे खिसकाने मे निरु कि सहायता कि।
मागरये तौ पक्का थां कि जीजाजी नें निरु कां क्लीवेज थोडा देख हि लिया होगा। मे शाल अपनी टांगो पऱ डाले लेटारहा। जीजाजी अब अपनीसीट सें उठकर निरु केँ बगल मे बैठगए थें। मेरे सामने ऋतू दिदी नें भि करवट लेँ ली थि औऱ उनकामुह अब मेरीतरफ थां पऱ आँखें बंद थि। उनके शर्ट कां ऊपर कां एक् बटन खुला थां औऱ उनकेहाथ केँ भार सें इसतरह साइडवाइ सोने कि वजह सें सें उनकाऊपर कां एक् मम्मा दबकर उनके शर्ट सें थोडा बाहर् झाँकरहा थां। मैउस नज़ारे कों देखने कां मौका नहि चूका औऱ आँखें खोले देखता रहा। फिन सोचाकही दिदी जाग गयीँ, तौ? इसलिये मैंने अपनी पलकेआधी बंद किये देखता रहा।
एक् नजर मे ऋतू दिदी कां क्लीवेज देखता तोँ दूसरे सें नीचे बैठे जीजा साली कों देखता जौ आपस मे चिपककर बैठे बातेकर रहे थें। चूंकी मे औऱ ऋतू दिदी सोरहे थें तौ जीजा सालीआपस मे धीरे-धीरे धीरे-धीरे बातें कररहे थें। मेरा ध्यान बातों सें अधिक उनकी हरकतो पर्र थां। उन दोनों नें कुछ डिसाइड किया औऱ अपनी स्थान बदलली। अब नीरज जीजा विंडो केँ पास थें औऱ निरु उनकीगोद मे सररखे बर्थ पऱ लेटी हुयी थि। जीजाजी उसकेसर पर्र हाथफेर रहे थें तौ दूसरा हाथ निरु केँ पेट पर्र रखा थां। नीरु कि हर सांस केँ संग उसकापेट ऊपर नीचे होँ रहा थां औऱ संग हि जीजाजी कां उसकेपेट पर्र पड़ाहाथ भि ऊपर नीचे हौ रहा थां। मुझेइस तरह नीरज जीजाजी कां हाथ नीरु केँ पेट पर्र पड़ा होना अच्छा नहि लगा पऱ निरु कों कोई आपत्ति नहि थि। हलंकी मेरी आँखों केँ सामने केँ बर्थ पऱ ऋतू दिदी कां क्लीवेज दीखरहा थां पर्र मे अपनी पलकेआधी बंद कियेअब केवल नीचे हि देखरहा थां कि जीजा सालीअब औऱ क्याँ करेंगे। अब मे उनकी बातें भि सुनने लाग।
नीरज:"अब तोँ सोने वाली होँ, अब तोँ मेकअप उतारलो"
नीरु: "आपको मेरे मेकअप सें क्याँ प्रॉब्लम हें जीजाजी!"
नीरज: "मुझे तुम्हारे अंदर कि खुबसुरती देख्ना अधिक मनपसंद हैं। अपनी खुबसुरती कों इन बाहर् कि चीजो सें क्याँ ढकना"
मै ऊपर लेटाहुआ नीरज जीजाजी केँ बोलने कां मतलबसमझ रहा थां। वोँ शायद दूसरे शब्दो मे निरु केँ कपड़ो केँ बारे मे कमेंट कररहे थें कि वोँ निरु कों बिना कपड़ो केँ अंदर कि खुबसुरती देख्ना चाहते थें।
नीरु: "एक् कामकरो जीजाजी, आप् हि निकाल दो मेरा मेकअप"
नीरज जीजाजी नें अब अपने एक् अँगूठे कों निरु केँ नीचे केँ होंठ पर्र रगड़ा औऱ निरु कों दिखाया कि लिपस्टिक उनके अँगूठे पर्र लग गई, हैं।
नीरज: "मेरेलग गयीँ, लिपस्टिक, अब क्याँ करू, मेरेलगा लू?"
नीरु(हँसते हुए):"हॉ, लगालो, अच्छी लगेगी"
नीरज जीजाजी नें अब वोँ लिपस्टिक सें भरा अँगूठा अपने स्वयं केँ होंठ पर्र रगड़ा औऱ हंसने लगा। इस बहाने उस अँगूठे केँ जरिये हि सही पर्र जीजाजी नें अपनी साली केँ होठो कों अपने होठो सें एक् तरह मिला लिया थां। नीरु नें अपने होंठ खोले औऱ जीजाजी नें इसबार अपना अँगूठा निरु केँ ऊपर वाले होंठ पर्र रगड़ा औऱ फिन अपनेऊपर केँ होंठ पऱ रगडमजे लिये। नीरु हमेशा कि तरह एक् बारफिन खिलखिला रही थि। जीजाजी नें ये एक् बार औऱ रिपीट किया औऱ निरु केँ दोनों होंठों कों बारी बारी सें रगडकर उसके होंठों कां रस अपने होंठों पऱ लगया। फिन बारी थि गालो कि। जीजाजी नें अपनी उंगलिया कों निरु केँ गोरे गोरे गालो पर्र हलके हाथों सें रगड़ा जैसे मसाजकर रहे हौ। निरु मजाक मे "आहाआहा" करतेहुए मजे लें रही थि।
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UPDATE 07
नीरज जिजाजी नें बीचबीच मे निरु केँ गालो कों भि पकड़कर खिंच दिया औऱ निरु नें हलके दर्द केँ संग जीजा केँ हाथ पऱ हलका सां मारते हुए रोका। नीरु केँ चेहरा पर्र होतेइन सभी एक्शन केँ बीच, मैंने ध्यान हि नहि दिया कि नीरज जीजा कां दूसरा हाथ जौ अब तक निरु केँ पेट पर्र थां वोँ अबकमर सें थोडा नीचे खिसककर निरु केँ कुल्हे कि हड्डी कों पकडे थां जहा लड़किया अपनी पेंटी बाँधती हैं। नीरु नें वैसे हि घुटनो तक कि नीचे सें खुली ड्रेस पहनी थि, जौ कि अब घुटनो सें ३-४इंच थोडा ऊपर खिसक गयीँ, थि। मेरी ख़्वाहिश हुयी कि मे नीचे जाकर दोनों कों अलगकर दू पऱ तभी निरु जीजा कि गोद सें उठ गई,। जीजा औऱ साली केवल अपनी पोजीशन चेंजकर रहे थें। जीजाअब खिड़की केँ पास सें खिसककर बर्थ केँ लागभाग बीच मे बैठे थें औऱ निरु नें खिड़की कि तरफ पाँव किये औऱ हवा वाला तकिया लगाए बर्थ पऱ लेट गई,।
जीजाजी क्यूं कि बर्थ केँ बिच मे बैठे थें तोँ निरु कि जाँघे अब जीजा कि गोद पऱ टीकी थि। मुझेठीक लगा कि अब जीजा निरु केँ चेहरे कों नहि छु पाएँगे। खिड़की थोड़ी खुली थि औऱ आतीहवा सें निरु कि ड्रेस थोड़ी ऊपरउठ गई,। नीरु कि थोड़ी सें नंगी जाँघे दिखने लगी औऱ जीजा नें अपना एक् हाथ निरु केँ घुटनो केँ थोडा ऊपररख दियाजहा सें ड्रेस उठ चुकी थि। निरु अभि भि नार्मल तरीके सें लेटी थि। नीरु केँ कहने पर्र जीजा नें खिड़की जरूर पूरीबंद करली थि वार्ना ड्रेस ऊपर उठते हि निरु कां शरमिंदा होनातय थां। मे अब तक दर्शक बना बैठा थां। जीजजी कां एक् हाथ अभि भि निरु केँ घुटनो केँ थोडा ऊपर थां तोँ दूसरे हाथ सें अब उन्होंने निरु केँ घुटनो केँ नीचे टांगो पर्र रख दबना शुरुआत किया। नीरु कि गोरी चिकनी टांगो पऱ जीजा केँ हाथ फिसलरहे थें औऱ निरु गुदगुदी सें हिलरही थि। निरु थोड़ी देर मे उबासी लेनेलगी थि औऱ उन दोनों नें डिसाइड किय कि अब वोँ भि सो जाएंगे।
जीजजी नें अपनाहाथ निरु कि टांगो सें हटाया औऱ निरु अपने पाँव नीचेकर बैठ गई,। जिजाजी बर्थ सें उठ खड़े हुये। निरु खाली होँ चुकी बर्थ पर्र एक् बारफिन लेट गयीँ,।
नीरु:"गुड नाईट जीजाजी"
नीरज: "इतना सूखा सूखागुड नाईट!गुड नाईटकिश तोँ बनत हें"
नीरु: "गीला वालामत देना"
जीजाजी अब निरु कि कमर केँ पास बर्थ केँ किनारे पर्र बैठगए औऱ निरु कों कहा कि वोँ सुखा वालागुड नाईटकिश देंगे। उन्होंने फिन निरु केँ दोनों हाथों कि हथेलियो कों अपने एक् एक् हथेलियो मे पकड़ उंगलिया फँसा दि। जीजाजी अब निरु केँ चेहरे पऱ झुकगए। मे तौ जोर सें चीख़कर उनको रोकने वाला थां पऱ मेरी आवाज़ हि नहि निकली। जीजाजी निरु केँ ऊपर झुकेहुए थें, ओर५-६ सेकंड केँ बाद हि वोँ उठे। उपार सें मुझे केवल जीजाजी कि पीठ औऱ सर हि दीखे। मुझे नहि पताचला कि जीजाजी नें निरु कों किस स्थान किश दिया थां। जीजाजी केँ सामने सें हटते हि मैंने निरु कों नोट किया। वोँ शरमाते हुए स्माइल कररही थि। मे सोचने लगाकिश कही होंठों पऱ तोँ नहि कर दिया?पता नहि उन्होंने होंठों पर्र किश किया याँ नहि पऱ जिसतरह जीजाजी निरु पर्र झुके थें औऱ निरु केँ बूब्स कां जोँ उभार हैं, उसके हिसाब सें कम सें कम जिजाजी केँ सींनेसे निरु केँ बूब्स कों तौ दबा हि दिया होगा। फिलहाल जिजाजी मेरी नीचे वाली बर्थ पऱ आँ गए थें औऱ निरु अकेली अपने बर्थ पर्र लेटी हुयी थि। मेरी थोड़ी बहोत नींद तोँ उड़ हि चुकी थि। थोड़ी हि देर मे निरु मासुमियतसे सोरही थि। माजाक मजाक मे उसको शायदपता हि नहि कि उसका जीजाजी उसकेसंग क्याँ कररहे हैं। मुझे हि अबकुछ करना थां। सोचते सोचते हि मेरीआँख लग गयीँ, औऱ मे भि सो गय़ा।
जब नींद खुली तोँ नीचे बर्थ पर्र निरु नहि थि। कहीं वोँ जीजा केँ संग एक् हि बर्थ पऱ तोँ नहि लेटी थि? मैंने धीरे-धीरे सें अपनी गरदन बर्थ सें बाहर् लटकाकर नीचे वाली बर्थ कों देखा पऱ वोँ बर्थ भि खाली थि।, जीजा साली दोनों ग़ायब थें। अपनी कलाई पऱ बंधीघडी मे वक्त देखा तोँ सुभह केँ ५बजे थें। मे उठकर नीचे उतरने हि वाला थां कि आहाट हुयी औऱ मे फिनआँख आधीखोल लेट गय़ा।
नीरु औऱ जीजाजी आँ गए थें औऱ फुसफुसाते हुएकुछ बातें कररहे थें। जिस सें मुझेपता लगा कि वोँ टॉयलेट मे गए थें।
नीरु: "मुझे बहोत रिलीफ महसूस होँ रहा हैं। पर्र बहोत हि गन्दा थां"
नीराज: "तुम्हे आदत नहि हें इसलिये, धीरे-धीरे धीरे-धीरे आदतपद जाएगी। अभि बहुत वक्त सें साफ़ सफाई नहि कि हें इसलिये"
दोनोफिन अपनी अपनी बर्थ पर्र लेटगए। मे उनके बातों कां मतलब निकालने लगा। कही जीजाजी नें अपना गन्दा सां लण्ड निरु केँ मुह मे तोँ नहि डाल दिया, जिसे निरु गन्दा बोलरही थि। जीजाजी शायद उसको अपना लण्ड साफ़ सफाई केँ बादफिन मुह मे देने वाले थें।
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UPDATE 08
मेरे भि लण्ड पर्र जबकभी बाल बड़े होँ जाते थें तोँ निरुमुह मे लेने सें मनबोल देती थि औऱ मुझेबाल छोटे करने कों बोलती याँ साफ़ करने कों। वोँ भि अपनी बुर केँ बालो कों कभी बड़ा नहि होने देती थि। अभि तक जोँ कुछ भि हुआ थां उनसभी मे थोड़ी बहोत शक कि गुंजाईश थि औऱ कभी मे पॉजिटिव तौ कभी नेगेटिव सोचरहा थां। किसी निष्कर्ष पर्र नहि पहुँच पारहा थां कि सच्चाई क्याँ हैं।
नींदआधी थि तोँ मे फिनसो गय़ा औऱ सुभह नींद खुली पर्र मैंने पलकेबंद हि राखी थि। सबसे पहलेआधी पलकेखोल कर निरु कि तरफदेख। वोँ अपनी बर्थ पर्र चादर ओढ़े लेटी थि तौ मुझे थोड़ी शान्ति मिलि। फिन आधी पलकेबंद किये हि सामने कि बर्थ पर्र देखा तोँ ऋतू दिदी कि आँखें खुली थि औऱ उनका ब्राआधा शर्ट सें बाहर् निकला दिखाई दिया। अच्छा हुआ कि मैंने अपनी पलके पूरी नहि खोलि थि वार्ना दिदी मुझेदेख लेती। दिदी एक् नजर मेरीतरफ देखरही थि तौ दूसरी नजर मेरे नीचे केँ बर्थ पऱ देखरही थि जहा उनके पति लेटेहुए थें। वोँ थोडा शर्मा रही थि औऱ फिन अपना शर्ट थोडा चौड़ा कर ब्रा मे सें अपने स्तन दिखाने कि कोशिश कररही थि। नीचे वाली बर्थ सें उनके पति शायदकोई डिमांड रखरहे थें जिस कारणऋतू दिदी अपने शर्ट कों थोडा खोल अपना क्लीवेज दिखारही थि।
उनका करीब-करीब आधा ब्रा बाहर् दीखरहा थां औऱ उसमे झाँकते उनके बड़े सें गोरे गोरे मम्मे झाँकरहे थें। मुझे जीजाजी पऱ क्रोध आया। एक् तरफ वोँ मेरी बिवी कों छूकरमजे लेँ रहे हें औऱ दूसरी तरफ अपनी भोलि बिवी कों इसतरह कपडे खोलने कों मजबूर कररहे हैं। मुझेये रोकना थां औऱ मे हलका सां हिला औऱ फिन अपनी पोजीशन मे हि लेटारहा। सामने देखा तौ दिदी नें अपना शर्टबंद कर लिया थां। मुझे अपनीचाल पऱ ख़ुशी हुयी। मैनेअब धीरे-धीरे धीरे-धीरे अपनी ऑखें खोलि औऱ सामने दिदी कों देखगुड मॉर्निंग बोला औऱ उन्होंने भि बोला। मे अब सीधालेट गय़ा औऱ छत कि तरफ देखने लगा। फिन मैंने दिदी कि तरफ नजरे घुमायी वोँ दूसरी तरफमुह कर करवट लेँ लेटी थि। शायद वोँ अपने शर्ट केँ बटनबंद कररही थि औऱ कपडे एडजस्ट कररही थि। थोड़ी देर मे दिदी अपनी बर्थ सें नीचे उतरि औऱ फिन जीजाजी भि उठगए। दिदी नें निरु कों उठाने कि कोशिश कि औऱ फिन टॉयलेट मे चली गयीँ,। मे अब अपनी बर्थ सें नीचे उतरा औऱ निरु कों आवाज़ लगायी पर्र वोँ नहि उठि। जीजाजी कि आँखखुल गई, थि औऱ मैंने उनको नां चाहते हुए भि गुड मॉर्निंग बोला औऱ उन्होंने मुस्कुरा कर आँखें झपका दि।
मैने निरु कों एक् औऱ आवाज़ लगायी पर्र वोँ नहि उठि। तभी जीजाजी नें निरु कों एक् आवाज़ लगायी औऱ निरु कि आँखें खुली औऱ हमारी तरफदेख मुस्कुराते हुएगुड मॉर्निंग बोलीं। नीरु नें अपना चादर एक् तरफ किया औऱ लेटे लेटे हि हाथो कों सर कि तरफ लम्बे कर एक् अंगडाई ली। निरु केँ मम्मे उभरकर औऱ फूलगए औऱ घुटनो सें ड्रेस थोड़ी खिसककर उसकी जंघे दिखने लगी। मै जल्दी आगे बढ़कर निरु कि जाँघो केँ आगे खड़ा हौ गय़ा ताकि जीजाजी औऱ कुछ नं देखपाए। मगर जीजाजी कां ध्यान तोँ निरु केँ मम्मो कि तरफ थां जोँ निरु कि अंगडाई सें फूल चुके थें। मैअबउन दोनों केँ बीचआकर खड़ा होँ गय़ा पर्र तब तक निरुउठ करबैठ गई, थि औऱ मे भि उसकेपास बैठ गय़ा ताकि जीजाजी उधरआकर नाँ बैठजाए।
नीरज: "नींद कैसीआयी निरु?"
नीरु: "टॉयलेट सें आने केँ बाद बहोत अच्छी नींदआयी"
मैसमझ पारहा थां कि निरु कों अच्छी नींद क्यूं आयी होगी, इन्होने जरूर टॉयलेट मे जाकरकुछ किया होगा। मैंने जासूसी शुरुआत कर दि।
प्रशांत: "तुम् टॉयलेट कब गई, ?"
नीरु:"रात कों, मुझेडर लगता हें इसलिये तुम्हे आवाज़ भि लगायी थि संग लेँ जाने केँ लिये, पर्र तुम् घोड़े बेचकर सोरहे थें। मगर जीजाजी मेरी आवाज़ सुन एक् बार मे उठगए थें"
मैने तौ कोई आवाज़ नहि सुनी थि, शायद मुझे बहकाने केँ लिएझूठ बोलरही होंगी। थोड़ी देर मे दिदी फ्रेश होकर आँ गए औऱ फिन हम् सभी भि होँ आए।
स्टेशन आने केँ बाद हम् सीधा होटल पहुचे। जीजाजी नें बुकिंग कारवाई थि औऱ उन्होंने रूम कि एक् हि चाबीली। हम् चारोरूम कि तरफचल पड़े। हमने उनको पुछा एक् हि रूम क्यूं बुक किया हैं। उन्होंने बताया कि वोँ दोबेड वालाडबल रूम हें तोँ चारोलोग एक् संगरह सकेंगे। जीजाजी औऱ ऋतू दिदी आगेआगे चलरहे थें। पीछे चलतेहुए निरु नें मेरीतरफ देखकर आँखों औऱ होंठो सें इशारा किया कि वोँ अपना वादा पूरा नहि कर पाएगी। कलघऱ पऱ सजधजकर होते वक्तजब मे उसकी पेंटी मे हाथ डालने कि कोशिश कररहा थां तब उसने वादा किया थां कि वोँ आजरात मुझे होटलरूम मे चोदने देगी। अब क्यूं कि हम् चारो एक् हि रूम मे सोने वाले थें तोँ हम् दोनों केँ चुदने कां कोई चांस नहि थां औऱ इसकेलिए वोँ होंठ हिलाकर मुझसे सॉरीबोल माफ़ी मांगरही थि। हम् लोगअब रूम मे पहुचे। वो पर्र दो क्वीन साइजबेड लगे थें। हम् चारो केँ सोने केँ लिए बहुत थां तौ कोई प्रॉब्लम नहि थि। मगर समस्या ये थि कि वाशरूम एक् हि थां। हम् लोगो कों घुमने केँ लिए निकलना थां औऱ सबको नहाना भि थां।
नीरज: "एक् काम करते हैं, दोलोग यहा नहाने औऱ सजधजकर होने कों रुकेंगे औऱ बाकीदो लोग कॉम्प्लिमेंटरी नाश्ता करने नीचे पैंट्री मे जाएंगे। "
ऋतू दिदी: "ठीक हें तोँ पहलेकौन नहाने कों रुकेगा?"
नीरज: "निरु तुम् मेरेसंग चलो, मे तुम्हे नाश्ता करवा लाटा हूं, फिन हम् आकर नाहा लेंगे"
मुझे जीजाजी कि नीयतसमझ मे आँ गई,। वोँ कहीं निरु केँ संग नहाने कां प्रोग्राम तौ नहि बनारहे थें। मगर निरु नें हि उनका प्लान फ़ैलकर दिया।
नीरु: "नहि, मे नहाये बिनाकुछ नहि खाउंगी"
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