प्यास जोँ बढ़ती हि जाये – New Episode
Update 30
नई शुरुआत – स्वाती कि नईभूख
ऑपरेशन रोहन : इंडक्शन
अगलेदिन दफ़्तर मे सुभह केँ दसबज चुके थें।
स्वाति नें आजखास तैयारी कि थि। वोँ लंबे वक्त तक शीशे केँ सामने खड़ीरही थि।
उसने एक् टाइट स्लीवलेस टॉप चुना थां, जौ गहराV-नेक वाला थां।
टॉप उसकेबदन सें चिपका हुआ थां औऱ उसकी गहरी क्लीवेज कों बहोत आकर्षक ढंग सें उभाररहा थां। जब वोँ बाजू उठाती थीं तोउसकी काली बालों वाली बगलें भि हल्के-हल्के झलक जातीथीं।
स्वाति नें स्वयं कों शीशे मे देखकर संतुष्ट मुस्कान दि।
ऊपर उसने एक् ब्लैक ओवरकोट पहन लिया, ताकि दफ़्तर मे सबके सामने सभीकुछ छुपारहे।
मगर वोँ जानती थि कि जब वक्त आएगा, तब वोँ ओवरकोट उतारकर अपनी असली तैयारी दिखा देगी।
जैसे हि स्वाति केबिन केँ दरवाजे पर्र पहुँचीं, उन्होंने देखा कि रिया औऱ रोहन पहले सें हि वहा मौजूद थें। दोनों खड़े होकर उसका प्रतीक्षा कररहे थें।
“गुड मॉर्निंग स्वाति मैम, ” रिया औऱ रोहन नें एक् संगकहा।
स्वाति नें मुस्कुराते हुए दोनों कों देखा। उसकी नजर सबसे पहले रोहन पऱ टिकी।
उसकी आँखों मे एक् हल्का सां सेक्सी चमक थि, जौ मात्र एक् समय केँ लिए दिखाई दि। फिन उसने सामान्य मुस्कान केँ संग जवाब दिया,
“गुड मॉर्निंग। रोहन, तुम् hour डिपार्टमेंट मे जाओ। तुम्हारा अपॉइंटमेंट ऑर्डर, आईडी कार्ड, लैपटॉप औऱ बाकी सारी चीजें सजधजकर हौ गई हें। जाकरसभी लेँ आओ। ”
रोहन नें सिर हिलाया, “जीमैम, ” औऱ केबिन सें बाहर् चला गय़ा।
स्वाति नें घड़ी देखी। उन्हें पता थां कि hour मे यहसभी काम मे कम सें कम३० सें ४० मिनट लगेंगे। उसने दरवाजा बंद किया औऱ रिया कि तरफ मुड़ी।
“रिया, मेरेसंग अंदरआओ। ”
रिया नें सिर हिलाया औऱ स्वाति केँ पीछे-पीछे चल दि।
स्वाति कि केबिन केँ अंदर एक् स्पेशल एंटीचैंबर थां।
वोँ रूम बहोत बड़ा औऱ शानदार थां, करीब एक् प्राइवेट बेडरूम जैसा।
बीच मे एक् बड़ा सां सोफा-कम-बेड थां, जोँ आहिस्ता तीन-चार लोगलेट सकते थें।
सेंटर टेबल पर्र ताजा फूलों कां गुलदस्ता रखाहुआ थां।
एक् तरफ फ्लैट स्क्रीन टेलीविज़न लगा थां औऱ कोने मे अटैच्ड टॉयलेट औऱ बाथरूम थां।
कमरे मे हल्की, मीठीगंध फैली हुईँ थि जौ स्वाति कि अपनी थि।
स्वाति नें दरवाजा बंद किया औऱ धीरे-धीरे सें ओवरकोट उतार दिया।
अब उसका टाइट फ्लोरल स्लीवलेस टॉप पूरीतरह दिखरहा थां।
गहरा V-नेकउसकी छातियों कों बहोत आकर्षक ढंग सें उभाररहा थां।
जब वोँ बाजू थोडा ऊपर करतीथीं तोउसकी काली बालों वाली बगलें भि झलक जातीथीं।
रिया नें स्वाति कों देखकर धीरे-धीरे सें कहा, “स्वाति मैम…आज आप् बहोत हसीनलग रही हें। ”
स्वाति मुस्कुराईं। उसकी मुस्कान मे एक् खतरनाक मिठास थि।
उसने रिया कां हाथ पकड़कर सोफा-कम-बेड कि तरफ लें गईं। दोनों आहिस्ता बैठगईं।
स्वाति नें रिया कों अपनीतरफ खींच लिया, ताकि रिया कि नंगी बाहें स्वाति कि नंगीकमर सें सट जाएँ।
“कल रात रोहन नें मेरे बारे मे क्याँ सोचा?” स्वाति नें रिया केँ बालों मे उँगलियाँ घुमाते हुए धीरे-धीरे सें पूछा। उसकी आवाज़ मे मीठापन थां, मगर उसमें एक् गहरा आग्रह भि थां।
रिया नें स्वाति कि नंगीबगल केँ पास अपनासिर टिकाते हुए धीरे-धीरे सें बताया, “स्वाति मैम, रोहन बहोत खुश थां। वोँ बार-बार आपकी तारीफ कररहा थां। आपकी व्यक्तित्व, आपकी ड्रेसिंग, आपकी स्टाइल, आपकी आवाज़, आपकीगंध … सभीकुछ। वोँ सोचरहा थां कि आप् उसे केवल नौकरी नहि, कुछ स्पेशल भि ऑफरकर रही हें। ”
स्वाति नें रिया कों औऱ पास खींच लिया। उसकी नंगीबगल अब रिया केँ चेहरे केँ बहोत लगभग थि। स्वाति कि गरम, भारीगंध रिया कि नाक मे घुसरही थि।
“बहोत अच्छा। ” स्वाति नें संतुष्ट स्वर मे कहा।
उसने रिया केँ बालों कों सहलाते हुएआगे पूछा, “उसने मेरी बगलों केँ बारे मे कुछकहा? याँ मेरीगंध केँ बारे मे? बताओ नाँ… डिटेल मे। ”
रिया नें स्वाति कि नंगीबगल पर्र अपनागाल हल्के सें रगड़ते हुए फुसफुसाया, “हाँमैम… उसनेकहा कि आपकी बगलें बहोत आकर्षक लगरही थीं। औऱ आपकीगंध … वोँ कहरहा थां कि वोँ परफ्यूम वाली नहि, आपकी अपनी बॉडी कि हैं… बहोत गरम औऱ याद रहने वाली। ”
स्वाति नें रिया कों औऱ कसकर पकड़ लिया।
उसकी नंगी छातियाँ रिया कि छाती सें दबरही थीं। स्वाति नें रिया केँ कान मे फुसफुसाते हुएकहा, “बहोत अच्छा। अब रोहन hour सें लौटने वाला हैं। मगर अभि हमारे पास टाइम हैं। ”
स्वाति नें रिया केँ होंठों पर्र हल्का सां चुम्बन किया।
चुम्बन आहिस्ता गहरा होता गय़ा।
स्वाति कि जीभ रिया केँ होंठों कों चखरही थि।
रिया नें स्वाति कि नंगीकमर कों कसकर पकड़ लिया।
कमरे मे सिर्फउसकी साँसों कि आवाज़ गूंजरही थि। स्वाति कि गरमगंध पूरे कमरे मे फैलरही थि।
स्वाति नें रिया केँ गले पऱ हल्के-हल्के चुम्बन करतेहुए धीरे-धीरे सें बोलीं, “आज मे रोहन कों औऱ लगभग लाने वाली हूं। मगर पहले… तुम्हें थोडा औऱ लगभग लाती हूं। ”
रिया नें स्वाति कि नंगीकमर कों औऱ कसकर पकड़ लिया। स्वाति नें रिया कों सोफा-कम-बेड पर्र थोडा औऱ लिटा दिया औऱ उसकेऊपर झुक गईं। उसकी नंगीबगल रिया केँ चेहरे केँ ठीकऊपर थि।
स्वाति नें रिया केँ कान मे फुसफुसाया, “रोहन आँ रहा हैं… मगर अभि तुम् मेरी हौ।
स्वाति नें रिया कों थोडा औऱ पास खींच लिया। उसकी नंगीबगल रिया केँ चेहरे केँ ठीकऊपर थि। स्वाति नें मोबाइल उठाया औऱ hour कों कॉलआई कर दिया।
“हेलो, मे स्वाति बोलरही हूं। रोहन कों जितनी भि चीजें हें, सभी हैंडओवर करदो। उसकेबाद उसे पूरे दफ़्तर कां टूरदो — फर्स्ट फ्लोर सें लेकर फिफ्थ फ्लोर तक। हर डिपार्टमेंट मे उसे कि पर्सन्स सें मिलवाओ। औऱ यहसभी समाप्त होने केँ बाद मुझेकॉल आई करना। ”
hour नें “जीमैम” कहा औऱ मोबाइल रख दिया।
स्वाति नें मोबाइल रखतेहुए रिया कों देखकर मुस्कुराई, “अब हमारे पासकम सें कम डेढ़ घंटा हैं। ”
रिया कि साँसें तेज हौ गईं। स्वाति नें रिया कों सोफा-कम-बेड पर्र लिटा दिया औऱ स्वयं उसकेऊपर झुक गई।
उसकी नंगी छातियाँ रिया कि छाती सें दबरही थीं।
स्वाति नें रिया केँ होंठों पऱ गहरा चुम्बन किया।
चुम्बन आरामसे गरम औऱ भूखा होता गय़ा।
स्वाति कि जीभ रिया केँ मुंह मे घुस गई औऱ उसे चखनेलगी।
रिया नें स्वाति कि नंगीकमर कों कसकर पकड़ लिया।
स्वाति नें रिया केँ गले पऱ हल्के-हल्के चुम्बन करतेहुए नीचे उतरना शुरुआत किया।
उसने रिया कि छाती पऱ चुम्बन किया, फिन निचली छाती कों चाटा।
रिया कराहउठी।
स्वाति नें मुस्कुराते हुएकहा, “आज मे तुम्हें पूरीतरह अपनीबना लूंगी। ”
स्वाति नें रिया कां टॉपऊपर किया औऱ उसकी नंगी छातियों कों चूमने लगी।
उसकीजीभ रिया कि निप्पल्स कों घेररही थि। रिया नें स्वाति केँ बालों मे उँगलियाँ घुमाईं औऱ कराहती हुइ बोलि, “स्वाति मैम… बहोत अच्छा लगरहा हैं…”
स्वाति नें रिया कि छाती कों चूसते हुएकहा, “आज रोहन कों दफ़्तर घुमाया जारहा हैं… औऱ मे तुम्हें यहा घुमारही हूं। ”
स्वाति नें रिया कों पलट दिया औऱ उसकीपीठ पऱ चुम्बन करनेलगी।
उसकीजीभ रिया कि रीढ़ पऱ नीचेउतर रही थि।
फिन स्वाति नें रिया कां पैंट नीचे किया औऱ उसकी नितंबों कों चूमने लगी।
रिया कि साँसें बहोत तेज हौ गईं।
स्वाति नें रिया कों फिन सें पलट दिया औऱ उसकी जांघों केँ बीच अपना चेहरा लें गई।
उसकीजीभ रिया कि गीली स्थान पऱ घूमने लगी।
रिया नें स्वाति केँ बाल पकड़लिए औऱ जोर सें कराहउठी।
“स्वाति मैम… आह्ह्ह्हह … बहोत अच्छा… मत रुको…”
स्वाति नें रिया कों चाटते हुएकहा, “आज मे तुम्हें पूरीतरह चख लूंगी। ”
स्वाति नें रिया कि जांघों कों फैलाया औऱ अपनीजीभ कों औऱ गहराई तक लेँ गई।
रिया कि बॉडी काँपरही थि। स्वाति नें अपनीबगल रिया केँ चेहरे केँ पास लें जाकरकहा, “सूँघो… मेरीगंध सूँघो। ”
रिया नें स्वाति कि नंगीबगल पऱ अपना मुँहरख दिया औऱ गहरी साँसली।
स्वाति कि गरम, भारीगंध रिया कों पागलकर रही थि। रिया नें स्वाति कि बगल कों चाटना शुरुआत किया।
स्वाति नें कराहते हुएकहा, “उम्मम्मम्म … चाटो… अच्छे सें चाटो। ”
दोनों कि देहें एक् दूसरे सें चिपकी हुईँ थीं।
स्वाति नें रिया कों अपनी उँगलियों सें चोदना शुरुआत किया।
रिया तेज़-तेज़ सें कराहरही थि। स्वाति कि उँगलियाँ तेजी सें अंदर-बाहर् हौ रहीथीं।
रिया नें स्वाति कि छाती कों चूसते हुएकहा, “स्वाति मैम… आह्ह्ह्हह…। मे आपकी हूं… पूरीतरह आपकी…”
स्वाति नें रिया कों औऱ तेजी सें चोदते हुए बोलि, “हाँ… तुम् मेरी होँ। औऱ रोहन भि जल्द मेरी होने वाला हैं। ”
दोनों कि साँसें तेज होँ चुकीथीं। स्वाति नें रिया कों चरम पऱ पहुंचा दिया।
रियाजोर सें कराहउठी औऱ स्वाति कि बगल कों कसकर पकड़ लिया।
स्वाति नें रिया कों चूमते हुएकहा, “अब रोहन आँ रहा हैं… मगर तुम् अभि मेरी होँ। ”
स्वाति औऱ रिया अभि-अभि अपनेगरम सेशन सें निकली थीं।
एंटीचैंबर मे हवा मेंउसकी साँसों कि गर्मी औऱ देहों कि गंध अभि भि घुली हुइ थि।
दोनों कि देहें पसीने सें तरथीं। स्वाति नें रिया कों अपनी बाहों मे कसकर पकड़रखा थां।
रिया कि साँसें अभि भि तेजथीं।
स्वाति नें रिया केँ होंठों पऱ एक् अंतिम गहरा चुम्बन किया औऱ धीरे-धीरे सें बोलीं, “आज तुमने मुझे बहोत अच्छे सें चखा… औऱ मैंने तुम्हें। ”
रिया नें स्वाति कि नंगीबगल पर्र अपना मुँह रखकर एक् अंतिम बार गहरी साँसली।
स्वाति कि गरम, भारीगंध अभि भि उसके मुँह मे थि।
“स्वाति मैम… आपकीबगल… आपकीगंध … मे कभी नहि भूलूंगी, ” रिया नें कराहते हुएकहा।
दोनों नें आहिस्ता कपड़े पहनलिए।
स्वाति नें अपना टाइट स्लीवलेस टॉपठीक किया, जिसकी गहरी क्लीवेज अभि भि आकर्षक ढंग सें दिखरही थि।
रिया नें अपनाटॉप पहन लिया। दोनों सोफा-कम-बेड पर्र धीरे-धीरे बैठगईं।
स्वाति नें रिया कों अपनीगोद मे बिठाया औऱ उसके बालों मे उँगलियाँ घुमाते हुए धीरे-धीरे सें बोलीं, “अब थोड़ी देर आरामकर लो। रोहन hour सें लौटरहा होगा। ”
रिया नें स्वाति कि नंगीकमर पर्र हाथ रखतेहुए मुस्कुराई, “स्वाति मैम…आज आपने मुझे कितना पागलकर दिया। अभि भि मेरी बॉडी काँपरही हैं। ”
स्वाति नें हँसते हुए रिया केँ होंठों कों चूम लिया औऱ बोलि, “यह तौ बस शुरुआत थि। अब रोहन आँ रहा हैं। तुम् अपनीसीट पऱ जाओ। जैसे हि वोँ आए, उसे सीधे मेरेपास भेज देना। मे उसकी इंडक्शन सेशनइसी एंटीचैंबर मे लूंगी। ”
रिया नें चिढ़ाते हुएकहा, “इंडक्शन सेशन? याँ… कुछ औऱ? स्वाति मैम, आप् रोहन कों भि उसीतरह पागल करने वाली हें जैसे मुझे किया?”
स्वाति नें रिया केँ कान मे काटते हुए फुसफुसाया, “हाँ…मगर तुम्हारे संग तोँ मे पहले सें हि पागल हूं। ”
दोनों हँस पड़ीं। उसकी हँसी मे एक् छुपाहुआ, सेक्सी इशारा थां। रिया नें स्वाति कि छाती पऱ हल्का सां चुम्बन किया औऱ उठ खड़ी हुई।
“ठीक हैं स्वाति मैम… मे रोहन कों आपकेपास भेज दूंगी। ”
रिया बाहर् चली गई।
स्वाति नें मुस्कुराते हुए ओवरकोट उठाया औऱ उसेपहन लिया।
सारेबटन बंदकर दिए। फिन उसने AC कां स्विच ऑफकर दिया।
कमरे मे गर्मी आहिस्ता बढ़ने लगी। स्वाति नें अपनी बगलों कों देखकर संतुष्ट मुस्कान दि।
“अब रोहन केँ आने तक मे अच्छे सें पसीने सें तर होँ जाऊंगी… औऱ वोँ मेरी असली, गरम गंध सूँघ सकेगा। ”
स्वाति सोफे पऱ बैठ गई। उसकी आँखों मे एक् खतरनाक चमक थि।
कमरे मे गर्मी बढ़रही थि औऱ स्वाति कि बॉडी धीरे धीरे पसीना छोड़ने लगी थि।
करीब१५ मिनटबाद रोहन hour सें वापसआया। उसकेहाथ मे लैपटॉप, आईडी कार्ड औऱ कुछ फाइलें थीं।
रिया केबिन केँ बाहर् खड़ी थि। उसने रोहन कों देखते हि मुस्कुराते हुएकहा, “भैया, स्वाति मैम नें कहा हैं कि तुम्हारा पहला इंडक्शन सेशन वोँ स्वयं लेंगी। अंदर एंटीचैंबर मे जाओ। ”
रोहन नें सिर हिलाया औऱ एंटीचैंबर कां दरवाजा खोला
अंदर स्वाति लैपटॉप पऱ कामकर रहीथीं। रूमगरम थां। AC बंद थां। ओवरकोट केँ अंदर स्वाति कां टाइट स्लीवलेस टॉप पसीने सें जिस्म सें चिपका हुआ थां।
रोहन नें अंदरकदम रखा।
“गुड आफ्टरनून मैम, ” रोहन नें कहा।
स्वाति नें ऊपर देखा। उसकीनजर रोहन पर्र टिकी। उसने एक् सेक्सी मुस्कान दि औऱ बोलीं, “आओ रोहन… बैठो। ”
रोहनबैठ गय़ा। स्वाति नें कुछ औपचारिक प्रश्न पूछे — प्रोजेक्ट केँ बारे मे, उसकी एक्सपेक्टेशन केँ बारे मे। रोहन जवाबदे रहा थां, मगर उसकीनजर बार-बार स्वाति पर्र जारही थि।
थोड़ी देरबाद स्वाति नें हल्का सां साँस छोड़ते हुएकहा, “बहोत गर्मी हौ रही हैं आज। मे AC ऑन करनाभूल गई। रोहन, जरा AC कां स्विच ऑनकरदो नां। ”
रोहनउठा औऱ AC कां स्विच ऑन करनेलगा।
जैसे हि रोहनपीठ घुमाकर AC कि तरफ गय़ा, स्वाति नें आरामसे अपने ओवरकोट केँ बटन खोलने शुरुआत किए।
एक्-एक् करके। पहलाबटन, फिन दूसरा, फिन तीसरा… आखिर मे ओवरकोट पूरीतरह खुल गय़ा। स्वाति नें उसे उतारकर साइड टेबल पर्र रख दिया।
अब उसका टाइट फ्लोरल स्लीवलेस टॉप पूरीतरह दिखरहा थां।
गहरा V-नेकउसकी छातियों कों बहोत आकर्षक ढंग सें उभाररहा थां।
उसकी बॉडी पसीने सें चमकरही थि।
काली बालों वाली बगलें पसीने सें तरथीं। स्वाति कि गरम, भारीगंध अब औऱ तेज हौ गई थि।
रोहन AC ऑन करके मुड़ा।
स्वाति नें उसे सेक्सी नजरों सें देखा।
उसकी आँखों मे एक् खतरनाक भूख थि।
वोँ जानबूझकर थोडा आगे झुकी, ताकि उसकी क्लीवेज औऱ भि गहरी दिखे।
“थैंकयू रोहन, ” स्वाति नें धीमी, भारी आवाज़ मे कहा। “अब गर्मी कम होँ जाएगी… मगर मेरी बॉडी तौ अभि भि गरम हैं। ”
रोहन कि नजर स्वाति कि चमकती बॉडी पर्र टिक गई।
स्वाति कि पसीने सें तर बगलें, उसकी चमकती छाती, उसकी गरमगंध — सभीकुछ उसे पागलकर रहा थां।
स्वाति नें मुस्कुराते हुएकहा, “बैठो रोहन…अब हम् तुम्हारा इंडक्शन शुरुआत करते हें। ”
रोहनबैठ गय़ा। स्वाति नें अपनी कुर्सी थोड़ी औऱ पास खींचली।
उसकी नंगीबगल अब रोहन केँ बहोत लगभग थि।
स्वाति नें जानबूझकर बाजू थोडा ऊपर किया, ताकि रोहन उसकीबगल कि गंध अच्छे सें सूँघसके।
“तोँ बताओ रोहन… तुम् मेरेसंग कितने क्लोजली काम करना चाहते होँ?” स्वाति नें डबल मीनिंग मे पूछा।
रोहन कि साँस थोड़ी तेज हौ गई।
स्वाति कि गरम, पसीने सें चमकती बॉडी औऱ उसकी भारीगंध उसे पूरीतरह घेररही थि।
स्वाति नें रोहन कों अपनीतरफ देखा। उसकी आँखें रोहन केँ चेहरे पर्र टिकी हुई थीं।
कमरे मे AC कि ठंडीहवा अभि शुरुआत हि हुई थि, मगर स्वाति कि बॉडी अभि भि पसीने सें चमकरही थि।
“तौ रोहन…अब हम् तुम्हारा इंडक्शन शुरुआत करते हें, ” स्वाति नें धीमी, भारी आवाज़ मे कहा।
रोहन नें सिर हिलाया, मगर उसकीनजर स्वाति कि चमकती क्लीवेज औऱ पसीने सें तर बगलों पर्र बार-बार जारही थि।
स्वाति नें जानबूझकर थोडा आगे झुकते हुए पूछा, “तुम्हें लगता हैं कि तुम् मेरेसंग लंबे वक्त तक कामकर पाओगे? मतलब… बहोत क्लोजली?”
रोहन नें निगलते हुए जवाब दिया, “हाँ मैम… मे पूरी कोशिश करूँगा। ”
स्वाति मुस्कुराईं।
वोँ उसने अपने दोनों बाजूऊपर उठाकर बालों कों बांधने लगी उसकी काली बालों वालीबगल रोहन केँ सामने पूरीतरह खुल गई।
पसीने कि बूँदें वहाचमक रहीथीं।
स्वाति नें रोहन कि तरफ देखते हुएकहा, “गर्मी बहोत हैं नां? मेरी बॉडी तौ अभि भि पसीना पसीना होँ रही हैं।
रोहन थोडा असहज होँ गय़ा। उसकी साँसें तेज होँ गईं।
स्वाति नें यहदेख लिया। उसने जल्दी अपनी मुस्कान नरम कि औऱ सामान्य स्वर मे कहा, “धीरे-धीरे बैठो रोहन। कोई जल्द नहि हैं। बताओ… तुम्हें AI/ML प्रोजेक्ट मे सबसे अधिककौन सां पार्ट मनपसंद हैं?”
रोहन नें राहत कि साँसली औऱ कुछदेर तक प्रोजेक्ट केँ बारे मे बात कि।
स्वाति ध्यान सें सुनरही थीं। मगर जब रोहन थोडा सहज होँ गय़ा, स्वाति नें फिन सें अपनाखेल शुरुआत किया।
उसने कुर्सी कों औऱ पास खींच लिया।
अब उसकी जांघ रोहन कि जांघ सें हल्के सें छूरही थि।
स्वाति नें हल्के सें अपना बाजूऊपर उठाया औऱ बगल कों खोलते हुएकहा, “तुम्हें लगता हैं कि तुम् प्रेशर मे भि अच्छा परफॉर्म कर पाओगे? मतलब… लंबे वक्त तक… गहराई तक?”
रोहनफिन सें असहज होँ गय़ा।
उसकीनजर स्वाति कि चमकती बगल पऱ टिक गई। स्वाति कि गरमगंध अब औऱ तेज हौ गई थि।
स्वाति नें फिन सें मुस्कान नरम कि औऱ सामान्य स्वर मे कहा, “आहिस्ता कहो रोहन। कोई प्रेशर नहि हैं। तुम्हारा बैकग्राउंड अच्छा हैं, इसलिये मैंने तुम्हें चुना हैं। ”
रोहन नें थोडा सहज होकर जवाब दिया। मगर स्वाति नें फिन सें अपनाखेल शुरुआत किया।
उसने जानबूझकर आगे झुकते हुए अपनी गहरी क्लीवेज दिखाई औऱ धीरे-धीरे सें बोलीं, “मुझेऐसे लोग मनपसंद हें जौ मेरीहर बात कों समझें… औऱ बिना हिचकिचाहट केँ फॉलो करें। तुम् वैसा होँ नां रोहन?”
रोहन कि साँसतेज हौ गई। स्वाति कि गरम बॉडी, उसकीगंध, उसकी बगलें… सभीकुछ उसे पागलकर रहा थां।
स्वाति नें फिन सें सामान्य होकरकहा, “चलो, अब प्रोजेक्ट केँ कुछ टेक्निकल पॉइंट्स देखते हें। ”
मगरकुछ देरबाद स्वाति नें अपनीबगल कों रोहन केँ चेहरे केँ औऱ लगभग लें जाकरकहा, “गर्मी फिन सें बढ़रही हैं… तुम्हें मेरे पसीने कि महक परेशान तौ नहि कररही नाँ”?”
रोहनकुछ बोल नहि पारहा थां।
स्वाति नें मुस्कुराते हुए अपनी उँगली सें अपनीबगल कि पसीने कि बूँद कों पोंछा औऱ रोहन कि तरफ देखा।
“आहिस्ता रोहन… मे केवल तुम्हें अच्छे सें समझना चाहती हूं। ”
स्वाति कि हर हरकत मे सिडक्शन थां, मगर वोँ बीच-बीच मे सामान्य होकर रोहन कों सहज भि करदेरही थीं।
रोहन कां मन पूरीतरह उलझ चुका थां।
स्वाति नें फिन सें आगे झुकते हुए धीरे-धीरे सें कहा, “अब बताओ… तुम् मेरेसंग कितना क्लोज आनां चाहते हौ?”
स्वाति नें रोहन कों अपनीतरफ देखा।
उसकी आँखों मे एक् नरममगर गहरीचमक थि। कमरे मे AC कि ठंडीहवा चलरही थि, मगर रोहन कों ठण्ड मे भि पसीना आँ रहा थां।
“तोँ रोहन…अब हम् तुम्हारे प्रोजेक्ट केँ बारे मे औऱ बात करते हें, ” स्वाति नें धीमी आवाज़ मे कहा।
रोहन नें सिर हिलाया। स्वाति नें जानबूझकर थोडा आगे झुकते हुए पूछा, “तुम्हें लगता हैं कि तुम् प्रोजेक्ट मे बहोत गहराई तक जा पाओगे? मतलब… पूरीतरह डूबकर?”
रोहन थोडा असहज होँ गय़ा। उसकीनजर स्वाति कि चमकती क्लीवेज पऱ चली गई।
स्वाति नें यहदेख लिया। उसने जल्दी मुस्कान नरम कि औऱ सामान्य स्वर मे कहा, “धीरे-धीरे कहो। कोई जल्द नहि हैं। ”
रोहन नें थोडा सहज होकर जवाब दिया।
स्वाति नें ध्यान सें सुना। मगर कुछदेर बाद स्वाति नें फिन सें अपनाखेल शुरुआत किया।
उसने कुर्सी कों औऱ पास खींच लिया। अब उसकी जांघ रोहन कि जांघ सें हल्के सें छूरही थि।
स्वाति नें अपना बाजू थोडा ऊपर उठाकर बालों कों पीछे किया। उसकी काली बालों वालीबगल रोहन केँ सामने पूरीतरह खुल गई। पसीने कि बूँदें वहाचमक रहीथीं। स्वाति नें रोहन कि तरफ देखते हुएकहा, “गर्मी बहोत हैं नाँ?”
रोहनफिन सें असहज होँ गय़ा। स्वाति नें मुस्कान नरम कि औऱ सामान्य स्वर मे कहा, “चलो, अब प्रोजेक्ट केँ कुछकोर आईडिया समझलो। ”
रोहन थोडा सहज होँ गय़ा। स्वाति नें कुछदेर तक प्रोजेक्ट कि बात कि। मगरजब रोहन पूरीतरह सहज होँ गय़ा,
उसने जानबूझकर आगे झुकते हुए अपनी गहरी क्लीवेज दिखाई औऱ धीरे-धीरे सें बोलीं, “मुझे जौ एक्सपेक्टेड थां वोँ सभी तुम् मे हैं।। मेरा मतलब ….जोँ प्रोजेक्ट कों चाहिए वोँ।.हैं नं रोहन?”
रोहन कि साँसतेज हौ गई। स्वाति कि गरम बॉडी, उसकीगंध, उसकी बगलें… सभीकुछ उसे पागलकर रहा थां।
स्वाति नें फिन सें सामान्य होकरकहा, “आहिस्ता कहो रोहन। कोई प्रेशर नहि हैं। ”
रोहन नें थोडा सहज होकर जवाब दिया। स्वाति नें मुस्कुराते हुए अपनी उँगली सें अपनीबगल कि पसीने कि बूँद कों पोंछा औऱ रोहन कि तरफ देखा।
“अब बताओ… तुम् मेरेसंग क्लोजलि कामकर सकोंगे नाँ ?”
रोहनफिन सें असहज हौ गय़ा। स्वाति नें हल्का सां हँसकर उसेसहज किया, “आहिस्ता… मे केवल तुम्हें अच्छे सें समझना चाहती हूं। ”
इसतरह स्वाति बार-बार रोहन कों असहज करती औऱ फिनसहज कर देती।
रोहन आरामसे कम्फर्टेबल होनेलगा। स्वाति कि हर हरकत मे सिडक्शन थां, मगर वोँ उसे आहिस्ता अपने कंफर्ट जोन मे लें आँ रहीथीं।
टाइम दोपहर केँ लगभग पहुँच चुका थां।
स्वाति नें घड़ी देखी औऱ मुस्कुराते हुएकहा, “वक्त होँ गय़ा हैं। हम् दोपहर बाद३बजे फिन यहीं मिलेंगे। ”
रोहन नें सिर हिलाया।
स्वाति नें उसे सेक्सी नजरों सें देखते हुएकहा, “औऱ हाँ… लञ्च केँ बाद फुल्ली अटेंटिव होकर आनां। ”
दोपहर केँ वक्त रोहन औऱ रियापास केँ एक् छोटे होटल मे लञ्च करनेगए।
दोनों एक् टेबल पऱ बैठे थें। रिया बहोत बातें कररही थि, मगर रोहन अधिकबोल नहि रहा थां।
रिया नें प्लेट मे चावल डालते हुए पूछा, “भैया, स्वाति मैम केँ संग इंटरव्यू कैसारहा? उसने क्याँ-क्याँ पूछा? तुम्हें लगता हैं कि वोँ अच्छी बॉस होंगी?”
रोहन नें हल्का सां मुस्कुराते हुएकहा, “हाँ… अच्छी लगीं। ”
रिया नें हँसते हुएआगे पूछा, “बस ‘अच्छी लगीं’? बताओ नाँ डिटेल मे उनकी स्टाइल, उनकी बातें, उनका अंदाज… कैसालगा तुम्हे? सभीकुछ। मे तोँ रोज उनकेसंग काम करती हूं, मगर तुम्हें आज पहलीबार मिली हें। ”
रोहन नें चुपचाप खातेहुए कहा, “वोँ बहोत कॉन्फिडेंट हें। प्रोजेक्ट कि बातें अच्छे सें समझाती हें। ”
रिया नें रोहन कि प्लेट मे सब्जी डालते हुए चिढ़ाई, “भैया, तुम् आज बहोत कमबोल रहे होँ। स्वाति मैम नें तुम्हें इतना प्रभावित कर दिया क्याँ? याँ फिन तुम् कुछसोच रहे हौ?”
रोहन नें हल्का सां हँसकर टाल दिया, “बस… सोचरहा हूं कि नया नौकरी कैसा रहेगा। ”
रिया नें मुस्कुराते हुएकहा, “अच्छा रहेगा। स्वाति मैम बहोत सपोर्टिव हें। तुम् उन्हें अच्छे सें इम्प्रेस करने कि कोशिश करो। ”
दोनों नें दोपहर का खाना पूरा किया। रोहन केँ मन मे स्वाति कि तस्वीर घूमरही थि —उसकी चमकती बॉडी, उसकीगंध, उसकी सेक्सी नजरें। वोँ अधिकबोल नहि पारहा थां।
वोँ सीधे अपनी प्राइवेट बाथरूम मे गई औऱ अच्छे सें नहाई।
गरम पानी उसके जिस्म पऱ बहरहा थां। स्वाति नें अपने जिस्म कों अच्छे सें साफ किया।
नहाने केँ बाद उसने ब्रा औऱ पैंटी पहनी औऱ ऊपर एक् हल्का, पारदर्शी गाउनडाल लिया।
गाउन बहोत पतला थां — उसकी सेक्सी ब्रा औऱ पैंटी साफ़दिख रही थि।
स्वाति नें शीशे मे स्वयं कों देखा।
उसकेबाल अभि भि गीले थें।
गाउन केँ नीचे सेक्सी ब्रा औऱ पैंटी मे लिपटा उसका चिकना शरीर औऱ नंगी जांघें झलकरही थीं।
स्वाति मुस्कुराई।
“अब रोहन कों दूसरा झटका देने कां वक्त हैं। ”
स्वाति नें एंटीचैंबर मे आकर सोफे पर्र बैठ गई।
गाउन थोडा खुलाहुआ थां। रूम अभि भि थोडा गरम थां। स्वाति जानती थि कि रोहनआने वाला हैं।
रोहन एंटीचैंबर कां दरवाजा धीरे-धीरे सें खोला।
अंदर कि नजरआते हि उसकी साँसथम सि गई।
स्वाति सोफा पर्र आहिस्ता बैठी हुई थीं।
वोँ अभि-अभि नहाकर आईथीं।
उनकेबाल अभि भि गीले थें — कुछबाल चेहरे पऱ चिपके हुए थें, कुछ कंधों पर्र बिखरे हुए थें।
गाउन बहोत हल्का औऱ पारदर्शी थां। उसके कामुक शरीर कि साफझलक दिखरही थि।
गाउन केँ गले सें उसकी छातियाँ हल्के सें उभरी हुई थीं।
पसीने कि स्थान अब पानी कि बूँदेंउसकी गर्दन, कंधों औऱ छाती पर्र चमकरही थीं।
स्वाति तरोताजा औऱ बेहद आकर्षक लगरही थीं।
रोहन दरवाजे पऱ खड़ारह गय़ा।
उसकी आँखें स्वाति कि बॉडी पर्र टिकगईं।
वोँ पलक भि नहि झपकारहा थां। स्वाति कि गीली बॉडी, उनके चमकते बाल, पानी कि बूँदें जोउसकी छाती पर्र रुककर नीचेसरक रहीथीं — सभीकुछ उसे चमत्कार कि तरह खींचरहा थां।
स्वाति नें धीरे-धीरे सें मुस्कुराते हुएउसे देखा। उसकी आँखों मे एक् नरममगर गहरीचमक थि।
“रोहन… अंदरआओ, ” स्वाति नें बहोत नरम औऱ प्यारी आवाज़ मे कहा।
रोहन नें धीरे-धीरे सें कदम बढ़ाया। स्वाति नें सोफे पऱ अपनेबगल कि स्थान दिखाते हुएकहा, “यहा बैठो… मेरेपास। ”
रोहन नें हिचकिचाते हुए उसकेपास बैठ गय़ा।
स्वाति कि गीलीगंध अब उसके बहोत लगभग थि — नहाने केँ बाद कि ताजगी, हल्की साबुन कि गंध औरउसकी अपनीगरम बॉडी कि गंध।
स्वाति नें अबकोई सेडक्शन नहि किया।
वोँ बस चुपचाप रोहन कों देखरही थीं।
उसकी नजरें रोहन कि आँखों पर्र टिकी हुईँ थीं।
वोँ उसके चेहरे कों, उसकी नजरों कों, उसकेबदन कि हलचल कों शांतिपूर्वक देखरही थीं।
रोहन स्वाति कि बॉडी कों देखे बिना नहि रहपारहा थां।
उसकीनजर बार-बार स्वाति कि गीली छाती पर्र, उनके कंधों पर्र रुकी पानी कि बूँदों पऱ, उनके गीले बालों पऱ जारही थि।
वोँ पूरीतरह मंत्रमुग्ध हौ चुका थां।
स्वाति चुपचाप उसेदेख रहीथीं।
उसकी आँखों मे एक् संतुष्ट चमक थि।
वोँ देखरही थीं कि रोहन उसके सेक्सी जिस्म कि सुंदरता कों आखोसे पिरहा थां।
वोँ जानबूझकर कुछ नहि बोलरही थीं — मात्र उसेदेख रहीथीं, जैसे उसकीहर नजर, हर साँस कों पढ़रही हों।
कुछ समयबाद स्वाति नें बहोत धीरे-धीरे सें पूछा, “धीरे-धीरे होँ रोहन?”
रोहन नें सिर हिलाया, मगर उसकी आँखें अभि भि स्वाति कि गीली बॉडी पऱ थीं।
स्वाति नें हल्का सां मुस्कुराते हुएकहा, “अच्छा… तोँ अब हम् आगेबात करते हें। ”
मगर वोँ फिनचुप हौ गईं। बस रोहन कों देखरही थीं। रोहन कि नजर स्वाति कि छाती पर्र रुकी पानी कि बूँद पऱ टिकी हुई थि, जौ आहिस्ता नीचेसरक रही थि। स्वाति नें जानबूझकर कुछ नहि किया — बसउसे देखने दिया।
रोहन पूरीतरह मंत्रमुग्ध थां। स्वाति चुपचाप उसेदेख रहीथीं — उसकीहर नजर, हर साँस कों महसूस कररही थीं।
कमरे मे सिर्फउसकी साँसों कि आवाज़ थि। स्वाति कि गीली बॉडी, उनके गीलेबाल, औऱ वोँ खामोश मगर गहरीनजर — सभीकुछ रोहन कों पूरीतरह बाँधे हुए थां।
स्वाति नें रोहन कों अपनीतरफ देखा। उसकी आँखों मे एक् नरममगर गहरीचमक थि।
वोँ शरारत पूर्ण स्वर मे रोहन कों छेड़ते हुए बोलीं " अगर तुम्हारा देख केँ मनभर गय़ा होँ.तोँ आगेबढे."
रोहन हड़बड़ाकर उस सम्मोहन सें बहारआया उसने शर्मा कर नजरे नीचीकर ली
स्वाति मुस्कुराई
“रिलॅक्स रोहन…टेक आईटीइजी।। चलोअब हम् प्रोजेक्ट केँ बारे मे औऱ डिटेल मे बात करते हें, ” स्वाति नें धीमी आवाज़ मे कहा।
रोहन नें सिर हिलाया। मगर उसकीनजर स्वाति कि गीली बॉडी पऱ टिकी हुईँ थि। स्वाति कि गीली बालों वाली छाती, पसीने औऱ पानी कि बूँदों सें चमकती क्लीवेज, औरउसकी नंगी बगलें — सभीकुछ उसे पूरीतरह मंत्रमुग्ध कररहा थां।
स्वाति नें जानबूझकर थोडा आगे झुकते हुए प्रोजेक्ट कि बात शुरुआत कि, “इस प्रोजेक्ट मे हमें बहोत डीपली काम करना पड़ेगा। डेटा कों समझना, मॉडल कों ट्रेन करना, औऱ रिजल्ट्स कों परफेक्ट बनाना… तुम्हें लगता हैं कि तुम् इतनी गहराई तक जा पाओगे?”
रोहन नें थोडा हिचकिचाते हुए जवाब दिया, “हाँ मैम… मे कोशिश करूँगा। ”
स्वाति मुस्कुराईं।
उसकी मुस्कान मे एक् छुपाहुआ इशारा थां।
वोँ जानबूझकर थोडा औऱ आगे झुकी, ताकि रोहन कि नजर उसकी चमकती छाती पऱ पड़े।
“कोशिश नहि… पूरामन लगाकर करना पड़ेगा। कभी-कभी रातें भि लंबी होँ जाएँगी। तुम् थक तौ नहि जाओगे नां?” स्वाति नें धीरे-धीरे सें पूछा।
रोहन कि नजर स्वाति कि बगल पर्र टिक गई। वोँ मुश्किल सें जवाबदे पाया, “नहि मैम… मे सजधजकर हूं। ”
स्वाति नें फिन सें सामान्य होकरकुछ टेक्निकल पॉइंट्स बताए।
रोहन जवाबदे रहा थां, मगर उसकी आँखें स्वाति कि बॉडी पऱ घूमरही थीं।
स्वाति चुपचाप उसेदेख रहीथीं। वोँ देखरही थीं कि रोहन उसकी अदाओ सें ….केसे उसके केँ जाल मे उतररहा हैं।
वक़्त बीतता गय़ा।
दो घंटे तक यही सिलसिला चलतारहा।
स्वाति कभी प्रोजेक्ट कि बात करतीं, कभी जानबूझकर आगे झुककर अपनी क्लीवेज दिखातीं, कभी बाजू उठाकर अपनीबगल खोल देतीं। औऱ रोहन उसमेखो जाता
दोपहर ढल चुकी थि।
स्वाति नें घड़ी देखी औऱ मुस्कुराते हुए बोलीं, “वक्त हौ गय़ा हैं रोहन। आज केँ लिए इतना हि। ”
रोहन नें सिर हिलाया।
स्वाति नें कामुक आवाज़ मे शरारत सें मुस्कुराते हुए पूछा, "आय होप ….तुम् सभीकुछ अच्छी समझगए होंगे समझे नाँ।। याँ तुम्हारा ध्यान कही औऱ हि थां ?”
रोहनकुछ कहने वाला थां, मगर स्वाति नें उसे बोलने कां मौकादिए बिनाकहा, “ टुमारो मॉर्निंग …। फिन यहीं मिलेंगे। तब मे तुम्हें औऱ डीपलीSSS…। समझाऊंगी……। इसबार पूरा ध्यान लगाना। कुछ भि मिसमत करना”
स्वाति नें रोहन कों एक् अंतिम सेक्सी नजर दि। रोहन केबिन सें बाहर् निकला। स्वाति मुस्कुराते हुए सोफे पर्र बैठ गई।
प्यास जोँ बढ़ती हि जाये – New Episode
Update 31
नई शुरुआत – स्वाती कि नईभूख
ऑपरेशन रोहन : तड़प
साम केँ सातबज चुके थें।
रोहन औऱ रियाघऱ पहुँचे।
माँ अभि भि बाहर् थीं, इसलिये घऱ मे मात्र दोनों हि थें।
रिया नें दरवाजा खोला औऱ रोहन केँ पीछे-पीछे अंदरआई।
रोहन कां मन अभि भि दफ़्तर मे स्वाति मैम केँ संग बीते वक़्त मे खोयाहुआ थां।
उसकी आँखों केँ सामने बार-बार स्वाति कि मुस्कान, उनकी गहरीनजर, औऱ उनकीगरम स्मेल घूमरही थि।
रिया नें बैगरखा औऱ रोहन कि तरफ देखते हुए पूछा, “भैया, आज दफ़्तर कैसारहा? स्वाति मैम नें तुम्हारा इंडक्शन केसे लिया?सभी कुछ ठीक-ठाक हुआ नां?”
रोहन नें जूते उतारते हुए केवल इतनाकहा, “हाँ…ठीक थां। ”
रिया नें हँसते हुएआगे पूछा, “बस ‘ठीक थां’? बताओ नां डिटेल मे। स्वाति मैम नें क्याँ-क्याँ पूछा? तुम्हें प्रोजेक्ट समझाया? वोँ बहोत स्ट्रिक्ट हें नाँ? तुम् घबरा तौ नहि गए थें?”
रोहन नें पानी पीतेहुए संक्षेप मे जवाब दिया, “नहि… घबरा नहि गय़ा। उन्होंने प्रोजेक्ट कि डिटेल बताई। ”
रिया नें रोहन केँ पासआकर सोफे पऱ बैठते हुएकहा, “अरे भैया, तुम् आज बहोत कमबोल रहे हौ। स्वाति मैम नें तुम्हें इतना प्रभावित कर दिया क्याँ? बताओ नाँ… उनका स्टाइल कैसा थां? वोँ केसेबात करती हें? मुझे तौ रोज देखकर लगता हैं कि वोँ बहोत पावरफुल हें। ”
रोहन नें टेलीविज़न कि तरफ देखते हुए केवल इतनाकहा, “हाँ… पावरफुल हें। ”
रिया नें हल्का सां हँसकर रोहन केँ कंधे पर्र हाथ रखतेहुए पूछा, “अच्छा, औऱ ऑफर? 60K पैकेज तौ बहोत अच्छा हैं। तुम् खुश होँ नां? स्वाति मैम नें तुम्हें इम्प्रेस किया नां?”
रोहन नें मात्र सिर हिलाकर कहा, “हाँ… खुश हूं। ”
रिया नें थोडा औऱ लगभगआकर पूछा, “भैया, तुम् आज बहोत quiet होँ। क्याँ हुआ? स्वाति मैम नें कुछ स्पेशल कहा क्याँ? याँ फिन तुम् थकगए हौ? बताओ नाँ… मुझे तौ बहोत उत्सुकता हैं जानने कि कि तुम्हारा पहलादिन कैसारहा। ”
रोहन नें हल्का सां मुस्कुराते हुएकहा, “बस… थोडा थक गय़ा हूं। ”
दोनों नें मिलकर डिनर रेडी किया। रिया खाते-खाते फिन सें बातें कररही थि, “स्वाति मैम कि कंपनी बहोत बड़ी हैं नाँ? तुम्हें वहा अच्छा लगेगा। वोँ तुम्हें अच्छे सें गाइड करेंगी। तुम्हें क्याँ लगता हैं, वोँ कैसीबॉस होंगी?”
रोहन नें चावल खातेहुए मात्र इतनाकहा, “अच्छी होंगी। ”
रिया नें हँसते हुएकहा, “भैया, तुम् आजसच मे बहोत कमबोल रहे होँ। क्याँ स्वाति मैम नें तुम्हें इतना व्यस्त कर दिया? याँ फिन तुम् कुछसोच रहे हौ? बताओ नां… मे तुम्हारी twin sister हूं, मुझसे छुपाओ मत। ”
रोहन नें प्लेट मे देखते हुएकहा, “बस…थक गय़ा हूं रिया। कल सें काम शुरुआत होगा, तौ सोचरहा हूं। ”
डिनर समाप्त होने केँ बाद रोहनउठ खड़ाहुआ। वोँ रिया कि लगातार पूछताछ सें बचना चाहता थां। उसनेकहा, “रिया, मुझे नींद आँ रही हैं। मे सोनेजा रहा हूं। ”
रिया नें थोड़ा हैरान होकरकहा, “अभि? ठीक हैं… अच्छे सें सोना। कल दफ़्तर मे अच्छे सें काम करना। ”
रोहन नें मात्र सिर हिलाया औऱ अपने कमरे मे चला गय़ा।
रोहन अपने कमरे मे आया। उसने दरवाजा बंद किया औऱ चिटकनी लगाई। पलंग पऱ लेटते हि उसकी आँखें बंद हौ गईं, मगर नींद कां नामोनिशान नहि थां। पूरामन स्वाति सें भराहुआ थां।
कल कां पूरा सेशन उसके दिमाग़ मे रीप्ले होँ रहा थां — स्वाति कि गीली छाती, उनकी काली बालों वाली बगलें, उनकी गहरी क्लीवेज, औऱ वोँ गरम स्मेल… रोहन कि साँसें तेज हौ गईं।
उसका लन्ड पैंट केँ अंदरखड़ा हौ चुका थां।
रोहन नें पैंट कां बटन खोला औऱ लन्ड कों बाहर् निकाल लिया।
लन्ड पहले सें हि सख्त थां। उसने धीरे धीरे ऊपर-नीचे करना शुरुआत कर दिया।
“स्वाति मैम… आपकी छातियाँ… कितनी जूसी हें…” रोहन नें फुसफुसाते हुएकहा।
उसकीगति आहिस्ता तेज होती गई। उसकेमन मे स्वाति कि बगल कि तस्वीर घूमरही थि।
“उफ्फ्फफ्फ्फ़ स्वाति … कितनी सेक्सी बगलें हें तुम्हारी… आअह्ह्ह्हह … मे उनको चाटना चाहता हूं…” रोहन नें कराहते हुएकहा।
उसकी उँगलियाँ अब तेजी सें लन्ड पऱ चलरही थीं। लन्ड पूरीतरह सख्त औऱ गरम होँ चुका थां।
रोहन नें आँखें बंदकर लीं औऱ स्वाति कि कल्पना मे खो गय़ा।
“स्वातीईई….मेरी जान … तुम् मुझे पागलकर रही हौ… उफ्फ्फ्फ़ … कितनी सेक्सी हैं साली तुँ … ”
रोहन कि गतिअब बहोत तेज हौ गई थि। उसकी उँगलियाँ लन्ड केँ सिरे पर्र घूमरही थीं।
स्वाति कि छाती, बगलें, औऱ बुर कि कल्पना उसे औऱ पागलकर रही थि।
“साली… छिनाल … अह्ह्ह्हह … कितना तड़पारही हैं मुझे.तेरी चूचिया। हाय्यय्यय्य ……। साली…झुक झुककर दिखारही थि … जी करता हैं। उन्हें जीभर केँ चुसू"
रोहन कि साँसें बहोत तेज हौ चुकीथीं।
उसका लन्ड अब दर्दकर रहा थां।
वोँ स्वाति कि कल्पना मे पूरीतरह खो चुका थां, स्वाति उसेचूम रही हें, उसकीबगल चाटरही हें, औऱ वोँ स्वाति कों चोदरहा हैं।
“उफ्फफ्फ्फ़ स्वाति मेर रानी … तेरीचुत।। कितनी गुलाबी होगी।। सालीमेर छिनाल।.तेरी बुर… मेरे लन्ड कों पूरा निगल लेगी…आअह्ह्ह्हह … मे झड़ने वाला हूं…”
रोहन नें जोर सें कराहते हुए झड़ना शुरुआत कर दिया।
उसके लन्ड सें गरम, गाढ़ा वीर्य निकलकर उसकेपेट औऱ हाथ पऱ फैल गय़ा।
मात्रा इतनी अधिक थि कि कुछ बूँदें पलंग पऱ भि गिरगईं।
रोहन कि साँसें बहोत तेजथीं। वोँ कुछदेर तक लेटारहा।
फिन उसने आँखें खोलीं औऱ फुसफुसाया, “स्वाति … तूने तोँ मुझे पूरीतरह पागलकर दिया हैं… कितनी सेक्सी हौ तुम्… बस.केवल एक् बार…मौका मिल जाये। तुम को तौ मे रगड़रगड़ केँ चोदुँगा ”
उसी टाइम स्वाति अपने बेडरूम मे अकेली थि।
कमरे मे हल्की रोशनी थि। स्वाति बेड पर्र लेटी हुईँ थि, उसका गाउनऊपर सरकाहुआ थां।
उसकी नंगी जांघें फैली हुई थीं।
स्वाति कि आँखें बंदथीं, मगरमन पूरीतरह रोहन मे खोयाहुआ थां।
कल कां पूरा इंडक्शन सेशन उसके दिमाग़ मे रीप्ले हौ रहा थां।
स्वाति नें रोहन कि पैंट केँ अंदर उभरेहुए लन्ड कों कईबार देखा थां।
उसका आकार, उसकी मोटाई, उसकी लंबाई सभीकुछ स्वाति केँ मन मे घूमरहा थां।
“रोहन… तुम्हारा लन्ड… कितना मोटा औऱ लंबा होगा…” स्वाति नें मन हि मन फुसफुसाया।
उसने अपनी उँगली धीरे-धीरे सें अपनी बुर पऱ रख दि।
स्वाति कि बुर पहले सें हि गीली थि। उसने अपनी उँगली कों आहिस्ता अपनी बुर केँ ऊपर घुमाना शुरुआत कर दिया।
स्वाति कि साँसें थोड़ी तेज हौ गईं।
“उम्मम्मम्म … रोहन… तुम्हारा लन्ड… कितना सख्त थां… मैंने देखा थां…” स्वाति नें कराहते हुएकहा।
उसने अपनी उँगली कों अपनी बुर केँ अंदरडाल दिया।
उँगली धीरे धीरे अंदर-बाहर् होँ रही थि।
स्वाति कि बुर कि गरम दीवारें अपनी उँगली कों कसकरपकड़ रहीथीं।
स्वाति नें अपनी दूसरी उँगली भि अंदरडाल दि। अब दोनों उँगलियाँ तेजी सें अंदर-बाहर् हौ रहीथीं।
“ओह्ह्ह्ह … रोहन… तुम्हारा लन्ड… मेरी बुर मे… कितना अच्छा लगेगा…” स्वाति नें कराहते हुएकहा।
उसकेमन मे रोहन कां लन्ड घूमरहा थां, मोटा, लंबा, नसों सें भराहुआ, औऱ पूरीतरह खड़ा।
स्वाति नें अपनी उँगलियों कों औऱ तेजी सें अंदर-बाहर् करना शुरुआत कर दिया।
उसकी बुर सें चिकनाहट कि आवाज़ आँ रही थि।
“रोहन… उफ्फफ्फ्फ़……। वोँ तेरा … मोटा लन्ड… मेरी बुर कों फाड़ देगा… स्स्सस्स… तुम्हारा लन्ड मुझे अपनी बुर मे चाहिए रोहन …”
स्वाति नें अपनी तीसरी उँगली भि अंदरडाल दि।
अबतीन उँगलियाँ स्वाति कि बुर मे तेजी सें घूमरही थीं।
स्वाति कि छातियाँ ऊपर-नीचे हौ रहीथीं।
उसने अपनी एक् चूचिहाथ सें दबाते हुए कराहते हुएकहा, “उम्मम्मम्म… रोहन… तुम्हारा लन्ड… मेरी छातियों पऱ… मेरी बगलों मे … उफ्फ्फफ्फ्फ़ … मे पागल हौ रही हूं …”
स्वाति कि उँगलियाँ अब बहोत तेजी सें अंदर-बाहर् होँ रहीथीं।
उसकी बुर सें तरल निकलरहा थां।
स्वाति नें रोहन कि कल्पना मे खोकरजोर सें कराहते हुएकहा, “ओह्ह्ह्ह ….रोहन… आह्ह्ह्हह … मुझे चोदो…जोर सें चोदो…एस्सस्सस्सस्स… मुझे अपना बनाली रोहन …””
स्वाति कां बदन अचानक कड़क गय़ा।
उसनेजोर सें कराहते हुए झड़ना शुरुआत कर दिया।
उसकी बुर सें गरमतरल निकलकर उसकी जांघों पऱ फैल गय़ा।
स्वाति कि बॉडी काँपरही थि। उसने अपनी उँगलियाँ बुर मे हि रखे रखीं औऱ धीरे धीरे साँसें संभालीं।
स्वाति नें आँखें खोलीं औऱ मुस्कुराते हुए फुसफुसाया, “रोहन…कल तुम् मेरी बुर मे आओगे… मे प्रतीक्षा कररही हूं…”
प्यास जोँ बढ़ती हि जाये – New Episode
Update 32
नई शुरुआत – स्वाती कि नईभूख
ऑपरेशन रोहन : इंडक्शन कां दूसरा दिन -शुरुवात
अगलेदिन सुभह १०:३०बजे स्वाति दफ़्तर पहुँची।
आज उसने एक् सफेद, बहोत टाइट औऱ थोडा ट्रांसपेरेंट स्लीवलेस टॉप चुना थां।
टॉप कां गला इतना गहरा थां कि उसकी छातियों कि गहरी क्लीवेज साफदिख रही थि।
टॉप उसके जिस्म सें चिपका हुआ थां, जिससे उसकी निप्पल्स कि आउटलाइन भि हल्के-हल्के झलकरही थि।
ऊपर हल्का ब्लैक ओवरकोट थां, मगर स्वाति जानती थि कि वोँ इसेकब उतारना हैं।
उसकी बगलें आज औऱ भि खुलकर दिखरही थीं क्योंकि टॉप केँ बाजू बहुतकटे हुए थें।
बाल खुलेहुए थें, औऱ वोँ जानबूझकर कोई परफ्यूम नहि लगाई थि, वोँ चाहती थि कि उसकी अपनीगरम बॉडी कि स्मेल धीरे धीरे फैले।
रोहनठीक वक्त पर्र आया। स्वाति नें उसे एंटीचैंबर मे बुलाया।
जैसे हि रोहन अंदरआया, स्वाति मुस्कुराई।
उसने ओवरकोट उतार दिया औऱ लैपटॉप पऱ काम करनेलगी।
“आओ रोहन… मेरेपास बैठो, ” स्वाति नें नरम आवाज़ मे कहा।
रोहन उसकेबगल मे बैठ गय़ा। स्वाति लैपटॉप पऱ प्रोजेक्ट कां कुछ डेटा दिखारही थि।
वोँ जानबूझकर थोडा आगेझुक गई। उसका गहरागला औऱ नीचे खिसक गय़ा।
उसकी गहरी क्लीवेज पूरीतरह खुलकर दिखरही थि।
पसीने कि हल्की बूँदें उसकी छाती पऱ चमकरही थीं।
रोहन कि आँखें स्वाति कि छाती पर्र टिकगईं।
वोँ पलक भि नहि झपकारहा थां।
स्वाति कि नंगी, चमकती छाती, उसकी गहरी क्लीवेज, औऱ हल्के सें दिखरही निप्पल्स कि आउटलाइन सभीकुछ उसे पागलकर रहा थां।
उसकेमन मे विचार घूमरहे थें — “कितनी सुंदर हैं… कितनी सेक्सी… मे इन छातियों कों छूना चाहता हूं… इन बगलों कों सूँघना चाहता हूं…”
स्वाति नें यहदेख लिया। उसने मुस्कुराते हुएकुछ लम्हा तक उसे देखने दिया।
फिन बिना उसकीतरफ देखे हि नॉटीटोन मे कहा, “अगर तुम्हें देख्ना ख़त्म हौ गय़ा हौ तौ लैपटॉप स्क्रीन पऱ भि कुछ ध्यान दो रोहन…”
रोहन चौंककर सीधा हौ गय़ा।
स्वाति नें हल्का सां हँसकर कहा, “धीरे-धीरे… कोई जल्द नहि हैं। ”
स्वाति नें फिन सें आगे झुककर प्रोजेक्ट कि बात शुरुआत कि।
उसकी क्लीवेज औऱ भि गहरीदिख रही थि।
रोहन कि नजर बार-बार वहींजा रही थि। स्वाति कि स्मेल अब आहिस्ता फैलरही थि गरम, भारी, औऱ बहोत आकर्षक।
स्वाति केँ मन मे विचार घूमरहे थें, “देखो कितना ताड़रहा हैं… अभि तौ शुरुआत हैं… आहिस्ता तुम् मेरे हौ जाओगे रोहन…”
रोहन नें मुश्किल सें जवाब दिया, “हाँ मैम…यह मॉडल अच्छा हैं। ”
स्वाति नें फिन सें आगे झुककर कुछ औऱ दिखाया।
उसकीबगल अब रोहन केँ चेहरे केँ बहोत लगभग थि।
रोहन कि साँसें तेज हौ गईं। स्वाति नें यह देखकर मन हि मन मुस्कुराई।
“क्याँ हुआ रोहन?कुछ तकलीफ़ हैं?” स्वाति नें नॉटी मुस्कान केँ संग पूछा।
रोहन नें हिचकिचाते हुएकहा, “नहि मैम…बस… बहोत गर्मी हैं। ”
स्वाति नें हल्का सां हँसकर कहा, “हाँ… गर्मी तौ हैं। मगर मुझे तौ अच्छी लगरही हैं। ”
स्वाति नें जानबूझकर अपना बाजू थोडा औऱ ऊपर किया। उसकीबगल पूरीतरह खुल गई।
रोहन कि नजरवहा टिक गई। स्वाति चुपचाप उसेदेख रही थि।
इसतरह स्वाति आहिस्ता सिडक्शन बढ़ारही थि। रोहन पूरीतरह मंत्रमुग्ध हौ चुका थां।
स्वाति नें लैपटॉप पर्र एक् औऱ स्लाइड खोली।
वोँ जानबूझकर रोहन केँ बहोत लगभगझुक गई।
उसका गहराV-नेक औऱ नीचे खिसक गय़ा।
उसकी नंगी छातियाँ अब औऱ भि अधिक उभरी हुइ दिखरही थीं।
पसीने कि हल्की बूँदें उसकी क्लीवेज मे चमकरही थीं।
रोहन कि नजर स्वाति कि छाती पऱ टिकी हुईँ थि।
वोँ मुश्किल सें साँस लेँ पारहा थां।
उसकेमन मे विचार घूमरहे थें — “कितनी सुंदर हैं… कितनी सेक्सी… मे इन छातियों कों छूना चाहता हूं… इन बगलों कों सूँघना चाहता हूं… स्वाति मैम मुझे पागलकर रही हें…”
स्वाति नें यहसभी देख लिया।
उसने मुस्कुराते हुएकुछ लम्हा तक उसे देखने दिया।
फिन बिना उसकीतरफ देखे हि नॉटीटोन मे कहा, “अगर तुम्हारा देख्ना ख़त्म होँ गय़ा हौ तौ लैपटॉप स्क्रीन पर्र भि कुछ ध्यान दो रोहन… वरना मे सोचूंगी कि तुम् प्रोजेक्ट मे इंटरेस्टेड नहि हौ। ”
रोहन चौंककर सीधा हौ गय़ा। उसके चेहरे पर्र लज्जा कि लालीछा गई।
स्वाति नें हल्का सां हँसकर कहा, “आहिस्ता… जस्टचिल दोस्त। मे समझ सकतीहु। ”
स्वाति नें फिन सें प्रोजेक्ट कि बात शुरुआत कि।
मगरअब वोँ औऱ लगभग आँ गई थि।
उसकी जांघ रोहन कि जांघ सें लगातार छूरही थि। स्वाति कि गरम स्मेल अब औऱ तेज होँ गई थि।
“इस प्रोजेक्ट मे हमें बहोत क्लोजली काम करना पड़ेगा, ” स्वाति नें धीरे-धीरे सें कहा।
“मतलब… एक्-दूसरे केँ बहोत पास। कभी-कभी रातें भि लंबी हौ जाएँगी। तुम् थक तोँ नहि जाओगे नाँ?”
रोहन नें मुश्किल सें कहा, “नहि मैम… मे रेडी हूं। ”
स्वाति नें अपनीबगल थोडा औऱ ऊपर करके बालों कों पीछे किया।
उसकी काली बालों वालीबगल रोहन केँ चेहरे केँ बहोत लगभग थि।
पसीने कि बूँदें वहाचमक रहीथीं।
स्वाति नें रोहन कि तरफ देखते हुएकहा, “तुम्हे मेरी पसीने कि स्मेल सें प्रॉब्लम होँ रही हैं क्याँ? गर्मी मे औऱ यह औऱ भि तेज होँ जाती हैं। ”
रोहन कि साँसतेज होँ गई।
स्वाति नें यह देखकर मन हि मन मुस्कुराई। उसकेमन मे विचार घूमरहे थें, “देखती हु बच्चू ….तुम् कब तक सहते हौ … अभि तोँ शुरुआत हैं रोहन… आरामसे तुम् मेरे होँ जाओगे। ”
स्वाति नें फिन सें सामान्य होकरकुछ टेक्निकल पॉइंट्स बताए।
रोहन जवाबदे रहा थां, मगर उसकीनजर बार-बार स्वाति कि छाती औऱ बगलों पर्र जारही थि।
स्वाति नें जानबूझकर अपना बाजू औऱ ऊपर किया औऱ रोहन कि तरफ झुकते हुए पूछा, “इस कोड मे क्याँ गलती हैं? देखो अच्छे सें… बहोत क्लोज सें देखो। ”
रोहन कि नजर स्वाति कि बगल पऱ टिक गई। स्वाति कि गरम स्मेल उसे पूरीतरह घेररही थि।
स्वाति नें फिन सें हल्का सां हँसकर कहा, “धीरे-धीरे रोहन…कोई जल्द नहि हैं। ”
रोहन पूरीतरह मंत्रमुग्ध हौ चुका थां। स्वाति चुपचाप उसेदेख रही थि, उसकीहर नजर, हर साँस कों महसूस कररही थि।
रोहन पूरीतरह मंत्रमुग्ध होँ चुका थां। स्वाति चुपचाप उसेदेख रही थि — उसकीहर नजर, हर साँस कों महसूस कररही थि।
स्वाति नें लैपटॉप पऱ एक् औऱ स्लाइड खोली औऱ जानबूझकर रोहन केँ बहोत लगभगझुक गई।
उसकी जांघअब रोहन कि जांघ सें लगातार छूरही थि।
स्वाति नें बात करतेहुए अपना दाहिना हाथ धीरे-धीरे सें रोहन कि जांघ पर्र रख दिया।
उसकी उँगलियाँ हल्के-हल्के रोहन कि जांघ पर्र घूमने लगीं।
रोहन कि साँसरुक सि गई।
स्वाति कि गरम, नरम उँगलियाँ उसके पैंट केँ ऊपर सें उसकी जांघ कों सहलारही थीं।
रोहन केँ मन मे तूफान उठरहा थां।
“क्याँ होँ रहा हैं… स्वाति मैम कां हाथ… इतनागरम… इतनानरम… वोँ जानबूझकर छूरही हें… मेरी जांघ… औऱ ऊपर… मेरा लन्ड पहले सें हि खड़ा हैं… अब तौ कंट्रोल नहि हौ रहा… वोँ देख लेंगी तौ क्याँ सोचेंगी… मगररुक क्यूं नहि रही … स्वाति मैम कि उँगलियाँ… कितनी सेक्सी… कितनी जानबूझकर… मे पागल होँ रहा हूं…”
स्वाति नें रोहन केँ पैंट केँ ऊपर उभरेहुए लन्ड कों देख लिया।
उसकी आँखों मे एक् संतुष्ट मुस्कान खेल गई।
वोँ मन हि मन मुस्कुराई — “देखो… कितना खड़ा होँ गय़ा हैं… १९साल कां जवान लड़का… मेरी उँगलियों केँ स्पर्श सें हि पागल होँ रहा हैं… अभि तोँ शुरुआत हैं रोहन… आहिस्ता तुम् मेरे हौ जाओगे…”
दोनों बाहर् सें पूरीतरह नॉर्मल दिखरहे थें।
स्वाति बातकर रही थि, रोहन जवाबदे रहा थां।
मगर अंदर तूफान चलरहा थां।
स्वाति कि उँगलियाँ रोहन कि जांघ पऱ घूमती रहीं, कभी हल्का दबाव, कभी सहलाना, कभीऊपर कि तरफ सरकना।
स्वाति नें फिन सें सामान्य होकरकहा, “तुम् कितने एलएलएम् जानते हौ रोहन?”
रोहन नें मुश्किल सें जवाब दिया।
स्वाति कि उँगलियाँ अभि भि उसकी जांघ पऱ थीं।
वक्त दोपहर केँ लगभग पहुँच चुका थां।
स्वाति नें घड़ी देखी औऱ मुस्कुराते हुए बोलीं, “वक़्त हौ गय़ा हैं रोहन। अभि केँ लिए इतना हि। ”
रोहन नें सिर हिलाया।
स्वाति नें उसे सेक्सी नजरों सें देखते हुएकहा, “आज दोपहर का खाना जल्दकर लेना। हम् दोपहर कां सेशन२:१५ बजे शुरुआत करेंगे। यह सेशन बहोत इम्पोर्टेन्ट होगा, हम् बहुत'डीपSS' जायेगे। ”
रोहन केबिन सें बाहर् निकला। स्वाति मुस्कुराते हुए सोफे पऱ बैठ गई।
स्वाति नें रिया कों मैसेज किया।
स्वाति: रिया, आज तुम् रोहन सें कह देना कि तुम्हें क्लाइंट केँ दफ़्तर जानां हैं। तुम् उसेघऱ पर्र मिलना। औऱ हाँ, रोहन कों थोडा लेट होनेदो। आज कां सेशन उसके बारे मे कुछमत पूछना। अगर वोँ स्वयं बताए तोँ ठीक, वरनामत पूछना। वोँ शक न् करे कि यह हमारी प्लानिंग हैं।
रिया नें जल्दी रिप्लाई किया, रिया:जी स्वाति मैम। मे वैसा हि करूंगी।
स्वाति नें मोबाइल रख दिया औऱ मुस्कुराई। अब वोँ पूरीतरह सजधजकर थि।
स्वाति नें अपनी प्राइवेट बाथरूम मे जाकर एक् औऱ बार नहाया।
गरम पानी उसके जिस्म पऱ बहरहा थां।
उसने अपने नंगेबदन कों अच्छे सें साफ किया।
नहाने केँ बाद उसने मात्र एक् बहोत हल्का, पारदर्शी गाउनडाल लिया, ब्रा औऱ पैंटी केँ बिना।
गाउन इतना पतला थां कि उसकी नंगी बॉडी कि हर आउटलाइन साफदिख रही थि। स्वा
ति नें शीशे मे स्वयं कों देखा। उसकेबाल अभि भि थोड़े गीले थें।
गाउन केँ नीचे उसकी छातियाँ, उसकी काली बालों वाली बगलें, औऱ उसकी जांघें, सभीकुछ आकर्षक ढंग सें दिखरहा थां।
स्वाति नें मन हि मन सोचा, “आज रोहन कां युवा, ताजा लन्ड मेरी प्यासी बुर मे जाएगा। मे उसे पूरीतरह अपनाबना लूंगी। ”
स्वाति नें एंटीचैंबर कों औऱ भि खासबना दिया। बेड पऱ नरम चादर बिछाई।
कमरे मे हल्की गंध फैलाई।
AC कों हल्का रखा, ताकि गर्मी बनीरहे।
स्वाति जानती थि कि आज कां सेशन बहोत एक्शन वाला होगा।
वोँ रोहन कों पहले औऱ लगभग लाएगी, फिनउसे पूरीतरह फाँस लेगी।
स्वाति सोफे पऱ बैठ गई।
उसका गाउन थोडा खुलाहुआ थां।
उसकी नंगी जांघें औऱ गहरी क्लीवेज साफदिख रहीथीं। स्वाति मुस्कुराई।
“रोहन…अब तुम् मेरे होँ। आज मे तुम्हें वोँ सभी दूंगी जौ तुम् चाहते हौ… औऱ जोँ मे चाहती हूं। ”
स्वाति नें घड़ी देखी। दोपहर २:१५ कां वक्त होँ रहा थां। रोहनआने वाला थां।
प्यास जोँ बढ़ती हि जाये - Next part mein bada twist
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