प्यास जोँ बढ़ती हि जाये – New Episode
प्रिय पाठकों
आज भि मैंने आप् सबकेलिए एपसोड पोस्ट किया हैं। मगर एक् बातदिल सें कहना चाहती हूं.
मुझे बहोत कम कमेंट्स मिलरहे हें। बिना कमेंट्स केँ मुझेयह समझ नहि आता कि आप् लोगों कों कथा मनपसंद आँ रही हैं याँ नहि। जब आप् कमेंट करते होँ तौ मुझेपता चलता हैं कि आप् पढ़रहे हौ औऱ किस्सा आपको कैसीलग रही हैं।
अगर आपको किस्सा अच्छी लगरही हैं, तोँ कृपया एक् छोटा सां कमेंट जरूरकर दिया करें। आपका फीडबैक मेरेलिए बहोत मायने रखता हैं।
आज केँ भाग कि अंतिम लाइन पढ़कर आप् अंदाजा लग हि चूका होगा अगलाभाग औऱ भि अधिक सेंसुअल औऱ गरम होनेवाला हैं
अगला एपिसोड जल्द लाने कि कोशिश करूँगी।
आप् सबका प्रेम औऱ सपोर्ट बनारहे, यही मेरी सबसे बड़ी ताकत हैं।
थैंकयू
~ स्वाती
प्यास जोँ बढ़ती हि जाये – New Episode
Update 26
नई शुरुआत – स्वाती कि नईभूख
फ्लॅशबैक : स्वाती कि स्टोरी (भाग 10)
स्वाती कां पूरा जिस्म एक् झटके सें सिहरउठा। उसका चेहरा नितिन कि छाती मे औऱ गहराछिप गय़ा। उसकी साँसें अचानक तेज हौ गईं। वो जानती थि कि नितिन क्याँ चाहरहे हें, मगरफिन भि शरम केँ मारे उसका चेहरा लाल हौ गय़ा।
“भैया। क्याँ कहरहे हौ.” स्वाती नें बहोत शर्माते हुए, मासूम बनतेहुए कहा। उसकी आवाज़ काँपरही थि।
नितिन नें स्वाती कों थोडा ऊपर खींचा औऱ उसके चेहरे कों देखा। स्वाती कि आँखें नीचे झुकी हुई थीं। नितिन नें मुस्कुराते हुए उसकी ठोड़ी कों उँगली सें ऊपर उठाया औऱ बोला,
“अरे। मासूम मतबनो। तुम्हें अच्छे सें पता हैं मे क्याँ कहरहा हूं। तुमने मेरे पूरे ऊपरी शरीर कों तोँ चूम लिया.मगर। नीचे। मेरे लन्ड कों। क्यूं नहि छुआ? क्यूं नहि चूमा?”
स्वाती नें लज्जा सें आँखें बंदकर लीं। उसका चेहरा अब औऱ लाल होँ गय़ा। उसकी साँसें भारी होँ चुकीथीं। वो जानती थि कि भैया उसेटीज कररहे हें, मगरफिन भि उसकी लज्जा उसेरोक रही थि।
“भैया। आप्। आप् ऐसा केसेपूछ सकते हें.” स्वाती नें काँपती हुईँ आवाज़ मे कहा, “मे। मे आपकी छोटी बेहन हूं। वोँ। वोँ स्थान.”
नितिन नें स्वाती कि कमर पऱ हाथ फेरते हुए औऱ कसकरउसे अपनीतरफ खींच लिया। स्वाती कि भि चिकनी जाँघे अब नितिन कि ट्रैक पैंट सें सट गई थि। नितिन कां खड़ा लन्ड स्वाती कि जाँघ सें दबरहा थां।
“हाँ। तुम् मेरी छोटी बेहन हौ। मगरआज। आज तुम् मेरी स्वाती होँ। मेरी प्यारी। मेरी कामुक। मेरी भूखी स्वाती.” नितिन नें स्वाती केँ कान मे फुसफुसाया, “कहो। तुमने नीचे क्यूं नहि छुआ? क्याँ डरलगरहा हैं। याँ। लज्जा आँ रही हैं?”
स्वाती नें नितिन कि छाती पऱ सिर रखकर लज्जा सें मुस्कुरा दि। उसकी उँगलियाँ नितिन कि पीठ पर्र कसगईं। वो कुछ लम्हा चुपरही, फिन बहोत धीमी, काँपती हुई आवाज़ मे बोलि,
“भैया। मुझे.डर भि लगरहा हैं। औऱ। लज्जा भि आँ रही हैं। मगर.मन। बहोत मनकररहा हैं.”
नितिन नें स्वाती केँ बालों कों सहलाते हुए कामुक स्वर मे कहा,
“तोँ फिन.अब मन कि सुनो नाँ। मेरी प्यारी छोटी बेहन.आओ। अपने भैया केँ पूरे जिस्म कों प्रेम करो.ऊपर सें लेकर नीचे तक.”
स्वाती नें शर्माते हुए नितिन कि छाती पर्र हल्का सां चुंबन किया औऱ फुसफुसाई,
“भैया। आप्। बहोत शैतान होँ गए हें आज.”
नितिन हँसा औऱ स्वाती कों औऱ कसकर जकड़ लिया। स्वाती कि साँसें अब पूरीतरह अनियंत्रित होँ चुकीथीं।
स्वाती नें नितिन कि छाती पऱ अंतिम बार गहरा चुंबन किया। फिन आहिस्ता, जैसेकोई सपनासच होने वाला हौ, वो नीचे सरकने लगी। नितिन कि साँसें तेज हौ गईं। वो चुपचाप लेटारह गय़ा, मगर उसकी आँखें स्वाती पर्र टिकी हुई थीं।
स्वाती नितिन कि कमर तक पहुँची। नितिन मात्र हल्की ग्रे शॉर्ट्स पहनेहुए थां। कोई अंडरवियर नहि। उसका७ इंच कां मोटा, हार्ड लन्ड शॉर्ट्स केँ अंदर पूरीतरह खड़ा हौ चुका थां। कपड़े पऱ साफ उभारदिख रहा थां — मोटा, लंबा औऱ उभरी नसों वाला। स्वाती कि साँसें रुकगईं।
वो कुछ लम्हा तक बसउसी उभार कों देखती रही। उसका चेहरा लाल हौ गय़ा। लज्जा औऱ उत्तेजना दोनों एक् संग उसके अंदरउबल रहे थें।
“भैया। यह.” स्वाती कि आवाज़ काँप गई।
नितिन नें स्वाती केँ बालों मे उँगलियाँ फेरते हुए बहोत धीमी आवाज़ मे कहा, “देखो नां। तुम्हारे लिए खड़ा हैं.”
स्वाती नें शर्माते हुएमगर आँखें हटाए बिनाआगे झुकी। उसने अपनीनाक शॉर्ट्स केँ ऊपर सें हि नितिन केँ लन्ड केँ उभार पर्र रख दि औऱ गहरी साँसली।
“ऊह्ह। भैया.” स्वाती कि आह निकल गई। “आपकीयह। मर्दाना स्मेल। कितनी तेज औऱ कामुक हैं। मुझे पागलकर रही हैं.”
वो अपनीनाक कों उभार पऱ रगड़ने लगी। नितिन कां लन्ड शॉर्ट्स केँ अंदर औऱ सख्त होँ गय़ा। स्वाती नें दोनों हाथों सें शॉर्ट्स केँ ऊपर सें हि उसे सहलाना शुरुआत किया।
“इतना। इतना बड़ा औऱ मोटा हैं भैया। मैंने कभी ड्रीम्स मे भि नहि सोचा थां.” स्वाती फुसफुसाई। उसकी उँगलियाँ काँपरही थीं, मगर वो रुक नहि पारही थि।
स्वाती नें शॉर्ट्स केँ किनारे कों पकड़ा। उसकी उँगलियाँ काँपरही थीं। वो नितिन कि आँखों मे देखकर लज्जा सें बोलीं,
“भैया। मे। मे इसे देख्ना चाहती हूं.”
नितिन नें केवलसिर हिला दिया।
स्वाती नें बहोत आरामसे, जैसेकोई पवित्र चीजखोल रही होँ, नितिन कि शॉर्ट्स कों नीचे खींचा।
जैसे हि शॉर्ट्स नीचे सरकी, नितिन कां ७इंच कां मोटा, गुलाबी-भूरा, नसों वाला, पूरीतरह कड़ा लन्ड बाहर् छलांग लगाकर खड़ा होँ गय़ा। स्वाती कि आँखें चौड़ी होँ गईं।
वो एक् लम्हा केँ लिए स्तब्ध रह गई।
“ओह। भैया.” स्वाती केँ मुँह सें अनियंत्रित हल्की चीख निकल गई। “यह.यह इतना बड़ा। इतना मोटा। औऱ इतना सुंदर हैं.”
स्वाती पहलीबार अपनी आँखों सें अपने भइया कां कड़ा लन्ड देखरही थि। वो कुछ लम्हा तक केवल देखती रही — ऊपर कि गोल, चमकती हुइ टिप, उस पर्र चमकता हुआ प्रिकम, मोटी नसें, औऱ नीचे भारी अंडकोश।
“भैया। यह। मेरा भइया कां लन्ड हैं। जोँ मैंने इतने सालों सें सपनों मे देखा थां। आज.आजसच मे मेरे सामने हैं.” स्वाती केँ मन मे विचार घूमरहे थें। उसकी बुर फिन सें गीली होनेलगी।
वो धीरे-धीरे सें आगे झुकी। उसकी साँसें नितिन केँ लन्ड पऱ पड़रही थीं। स्वाती नें बहोत प्रेम सें, बहोत शर्माते हुए अपनीनाक नितिन केँ लन्ड केँ पास लें जाकर गहरी साँसली।
“हाय। भैया। आपकीयह स्मेल। कितनी नशीली हैं.”
स्वाती नितिन केँ कड़े लन्ड कों कुछ लम्हा तक मात्र देखती रही। उसकी आँखें आश्चर्य, लज्जा औऱ भूख सें भरी हुइ थीं। नितिन कां ७इंच कां मोटा, नसों वाला लन्ड उसके सामने पूरीतरह खड़ा थां, सुपाडे पर्र प्रिकम कि चमकदार बूँदचमक रही थि।
स्वाती नें धीरे-धीरे सें आगे झुककर सबसे पहले नितिन केँ लन्ड कि टिप पऱ बहोत नरम, प्रेम भरा चुंबन किया।
“उफ्फ.” नितिन कि साँसरुक गई। उसका लन्ड स्वाती केँ होंठों कों छूते हि औऱ सख्त हौ गय़ा।
स्वाती नें फिन सें चुंबन किया, इस बार थोडा लंबा। फिन उसने अपनेगरम, नरम होंठों सें नितिन केँ लन्ड कि पूरी लंबाई केँ संग हल्के-हल्के चुंबन बरसाने शुरुआत किए — नीचे सें ऊपर तक।
“भैया। आपकायह। इतना हसीन औऱ इतनागरम हैं.” स्वाती फुसफुसाई।
नितिन नें स्वाती केँ बालों मे उँगलियाँ फेरदीं औऱ कराहउठा, “स्वाती। आह्ह। तूँ। तुँ मुझे पागलकर रही हैं.”
स्वाती नें नितिन केँ लन्ड केँ मोटे सुपाडे पऱ अपनीनरम जीभरख दि। पहले मात्र हल्का-हल्का स्पर्श। फिन आरामसे घुमाने लगी। नितिन कां प्रिकम उसकीजीभ पऱ फैल गय़ा। स्वाती नें आँखें बंद करकेउसे चखा।
“मम्म। भैया। आपका स्वाद। थोडा सॉल्टी औऱ मीठा। मुझे बहोत अच्छा लगरहा हैं.”
स्वाती अब खेलने लगी। वो अपनीजीभ सें नितिन केँ लन्ड कि टिप कों घुमारही थि, कभी हल्का-हल्का चूसरही थि, कभीजीभ सें नसों केँ संग ऊपर-नीचे कररही थि।
नितिन कि कमर अनजाने मे ऊपरउठ रही थि। उसकी साँसें तेज हौ चुकीथीं।
“आह्ह। स्वाती। तेरीजीभ। कितनी गरम हैं। ऊह्ह। औऱ कर। मेरी प्यारी बेहन.”
स्वाती नें नितिन कि आँखों मे देखकर शर्माते हुए मुस्कुराया। फिन उसने धीरे धीरे अपना मुँह खोला औऱ नितिन केँ लन्ड कि टिप कों अपनेगरम, नरम होंठों मे लें लिया।
पहले केवल सुपाड़ा। वो उसे आहिस्ता चूसरही थि।
“आआह्ह्ह। स्वाती.!” नितिन जोर सें कराहउठा। उसकी आँखें आधीबंद हौ गईं। उसका चेहरा उत्तेजना सें लाल थां।
स्वाती नें आहिस्ता औऱ अंदर लिया। पहलेआधा, फिन थोडा औऱ। उसका मुँह नितिन केँ मोटे लन्ड सें भर गय़ा। वो आरामसे सिर ऊपर-नीचे करनेलगी।
“ओह्ह। स्वाती। तेरे मुँह मे। मेरी छोटी बेहन केँ मुँह मे। उफ्फ। कितना गरम औऱ नरम हैं.”
स्वाती कि आँखों मे पानी आँ गय़ा थां, मगर वो रुकी नहि। वो नितिन केँ लन्ड कों चूसती, अपनीजीभ सें घुमाती औऱ कभी-कभी गहरी साँस लेकर उसकी खुशबू लेतीरही।
नितिन स्वाती केँ बालों कों पकड़े हुए थां। उसकीकमर हल्की-हल्की ऊपरउठ रही थि।
“स्वाती। हम्म। तुँ। तुँ बहोत अच्छा कररही हैं। मेरी प्यारी। हाय। औऱ गहरी.”
स्वाती नें नितिन केँ लन्ड कों औऱ गहरा लेने कि कोशिश कि। उसकागला भर गय़ा, मगर वो प्रेम सें चूसती रही। उसके मुँह सें निकलने वाली आवाजें कमरे मे गूँजरही थीं।
नितिन कां चेहरा उत्तेजना सें तनाहुआ थां। उसकी आँखें स्वाती पऱ टिकी हुई थीं। वो बार-बार कराहरहा थां,
“हाय। स्वाती। मेरी छोटी बेहन। तूँ मुझे। हम्म.चूस रही हैं। मे। मे झड़ने वाला हूं.”
स्वाती नें नितिन केँ मोटे लन्ड कों मुँह मे लेकरकुछ गहरे स्ट्रोक्स दिए। नितिन कि कमरऊपर उठनेलगी औऱ उसकी साँसें अनियंत्रित हौ गईं। स्वाती कों एहसास होँ गय़ा कि नितिन झड़ने केँ बहोत लगभग हैं।
उसने जल्दी लन्ड कों मुँह सें बाहर् निकाल लिया। नितिन कां लन्ड उसके होंठों सें जुड़ी लार कि डोर केँ संग झटका खाकर खड़ारहा।
“नहि भैया। अभि नहि.” स्वाती नें काँपती हुई, मगर शरारती आवाज़ मे कहा, “मैंने इतनेसाल प्रतीक्षा किया हैं। आज इतनी जल्दमत ख़त्म करदो। मुझे औऱ मज़ा लेनेदो.”
नितिन नें हाँफते हुए स्वाती केँ बालों मे उँगलियाँ फेरदीं औऱ कराहा, “स्वाती। तूँ। तुँ मुझेमार डालेगी। ओह्ह.”
स्वाती नें कुछसमय नितिन कों आराम करने दिया। वो उसके लन्ड केँ पास हि बैठीरही, अपनीगरम साँसें उसकीटिप पऱ छोड़ती रही। जब नितिन कि साँसें थोड़ी स्थिर हुईं, तौ स्वाती नें अपनीनरम जीभ निकाली औऱ नितिन केँ लन्ड कि पूरी लंबाई पर्र आरामसे लंबे-लंबे चटकारे लगाने शुरुआत करदिए।
“मम्म। भैया। आपका लन्ड। कितना गरम औऱ कितना हार्ड हैं। जैसेकोई लोहे कि छड़.” स्वाती नें फुसफुसाया।
उसने नितिन केँ लन्ड कों एक् हाथ मे पकड़ लिया। ये इतनागरम औऱ इतना सख्त थां कि स्वाती कों लगा जैसेकोई लोहे कां दंड हौ। उसनेउसे धीरे धीरे सहलाया, ऊपर-नीचे करतेहुए अपनी उँगलियों सें नसों कों दबाया।
फिन स्वाती नीचे झुकी औऱ नितिन केँ अंडकोषों (testis) पर्र हल्के-हल्के चुंबन बरसाने लगी। वो उन्हें चूमती, चूसती औऱ अपनीजीभ सें सहलाती रही।
“अह्ह। स्वाती। तेरीजीभ। मेरे अंडों पऱ। उफ्फ.” नितिन कराहउठा।
स्वाती नें नितिन केँ अंडकोश कों सूँघा, उनकी मर्दाना महक कों अंदर लिया औऱ फिन अपनीजीभ सें उन्हें चाटने लगी।
“भैया। आपकीयह गेंदें। कितनी भारी औऱ कितनी सेक्सी हें। मे इन्हें चूसना चाहती हूं.”
स्वाती नें एक्-एक् करके दोनों अंडकोश कों मुँह मे लिया औऱ आहिस्ता चूसा। नितिन कि कमर बार-बार उठरही थि।
फिन स्वाती कि जीभ औऱ नीचेसरक गई। उसकीजीभ नितिन केँ अंडकोश केँ नीचे वाले हिस्से पर्र पहुँची औऱ अचानक उसके गांड केँ छेद कों छू गई।
स्वाती नें एक् लम्हा झिझका, मगरफिन उसकी ख़्वाहिश जीत गई। उसने अपनीगरम जीभ सें नितिन केँ गांड केँ छेद कों हल्का-हल्का चाटना शुरुआत कर दिया।
“आआह्ह्ह। स्वाती। वहा। आह्ह्ह। तूँ। तूँ क्याँ कररही हैं.” नितिन कां पूरा जिस्म झुरझुरी सें भर गय़ा।
स्वाती नें नितिन कि आँखों मे देखकर शर्माते हुएकहा, “भैया। पूरा। पूरा जिस्म। मेरा हैं आज.”
वो कुछदेर तक नितिन केँ गांड केँ छेद कों चाटती रही। नितिन अब पूरीतरह पागल होँ चुका थां।
जब स्वाती कों लगा कि नितिन फिन सें झड़ने केँ लगभग हैं, तोँ उसने जल्दी उसका मोटा लन्ड मुँह मे लें लिया। इस बार बहोत गहरा।
“ग्लक। ग्लक। ग्लक.” स्वाती नें नितिन केँ लन्ड कों गले तक लें लिया। उसकी आँखों सें पानी आँ गय़ा, मगर वो रुकी नहि। वो तेजी-तेजी सें सिर ऊपर-नीचे करनेलगी।
नितिन कां चेहरा तन गय़ा। उसने स्वाती केँ बाल पकड़लिए।
“स्वाती। आह्ह्ह। मे। मे आने वाला हूं। आह्ह्ह। मेरी बेहन। आह्ह्ह.”
स्वाती नें औऱ तेजी सें चूसना शुरुआत किया। उसकीजीभ नितिन केँ लन्ड कि नसों पर्र घूमरही थि।
“आआआह्ह्ह्ह। स्वाती। लेँ लेँ। सभी लें लेँ। आह्ह्ह्ह!!!”
नितिन कां पूरा जिस्म अकड़ गय़ा। उसका मोटा लन्ड स्वाती केँ मुँह मे फड़कने लगा औऱ गर्म-गर्म मोटी धारें स्वाती केँ गले मे छूटने लगीं।
स्वाती नें आँखें बंद करके पूरारस निगल लिया। कुछ बूँदें उसके होंठों केँ किनारे सें बहगईं। वो नितिन कां लन्ड मुँह मे लिएहुए हि रह गई, जब तक आखिरी बूँद तक नं निकलजाए।
नितिन हाँफते हुएबेड पर्र पसर गय़ा। स्वाती नें लन्ड कों मुँह सें निकाला, उसकेटिप पर्र लगी अंतिम बूँद कों चाट लिया औऱ नितिन कि तरफ देखकर शर्माते हुए मुस्कुराई।
स्वाती नें नितिन केँ लन्ड सें आखिरी बूँद भि चूसली। फिन धीरे धीरेऊपर चढ़कर नितिन केँ चेहरे केँ ऊपर आँ गई। उसके होंठ अभि भि चमकरहे थें — नितिन केँ रस सें।
वो नितिन कि आँखों मे गहरीनजर डालकर मुस्कुराई औऱ धीरे-धीरे सें उसके होंठों पर्र झुक गई।
इसबार किस बहोत गहरा औऱ साझा थां। स्वाती नें अपने मुँह मे नितिन कां अपनारस नितिन केँ मुँह मे डाल दिया। नितिन नें पहले झिझका, मगरफिन स्वाती कि जीभ केँ संग अपनारस भि चूसने लगा।
“मम्म। स्वाती.” नितिन कराहउठा।
स्वाती नें किस तोड़कर नितिन कि आँखों मे देखा औऱ शर्माते हुए फुसफुसाया,
“भैया। आपका स्वाद। कितना गाढ़ा औऱ कितना मीठा हैं। मैंने पूरा पिया.अब आप् भि चख लीजिए.”
नितिन नें स्वाती कों कसकरगले लगा लिया। दोनों देर तक एक्-दूसरे कि बाहों मे लिपटे रहे। स्वाती नितिन कि छाती सें चिपकी हुईँ थि। नितिन स्वाती कि पीठ, कमर औऱ नंगी जाँघों पऱ हाथफेर रहा थां। कभी-कभी स्वाती कि ब्रेस्ट्स कों हल्का-हल्का दबाता, कभी गर्दन पर्र चुंबन करता।
स्वाती नें नितिन कि छाती पर्र सिर रखकरकहा,
“भैया। यह लम्हा। मुझेलग रहा हैं जैसे सपना हैं। आपकी बाहों मे। आपकी खुशबू मे। मे पूरीतरह खो जानां चाहती हूं.”
नितिन नें स्वाती केँ बालों कों सहलाते हुए फुसफुसाया,
“स्वाती। तुँ मेरी हैं। आज सें हमेशा मेरी.”
दोनों केँ बीच छोटे-छोटे चुंबन, आरामसे स्पर्श, जाँघों कां रगड़ना औऱ गहरी साँसें चलरही थीं। स्वाती नितिन कि छाती पर्र उँगलियाँ फेररही थि, नितिन स्वाती कि पीठ पऱ हाथ घुमारहा थां।
कुछ मिनटबाद स्वाती नें महसूस किया कि नितिन कां लन्ड फिन सें उसके जाँघ केँ पास हार्ड होँ रहा हैं। वो शरारती मुस्कान केँ संग नीचे देखकर बोलि,
“भैया। यहफिन सें। खड़ा होँ गय़ा हैं। इतनी जल्द?”
नितिन नें शर्माते हुए मुस्कुराया। उसने स्वाती कों औऱ कसकरगले लगाते हुएकहा,
“यह तेरे सेक्सी जिस्म कां चमत्कार हैं स्वाती। तुँ मेरेऊपर लेटी हुइ हैं। तेरीगरम स्किन, तेरी ब्रेस्ट्स, तेरी खुशबू। मे स्वयं कों रोक नहि पारहा। भले हि हम् भइया-बेहन हें। मेरा लन्ड तेरे अंदर जाने केँ लिए बेकरार हैं.”
स्वाती नें नितिन कि आँखों मे देखा। उसकी आँखों मे लज्जा थि, मगर ख़्वाहिश भि थि। वो नितिन कि छाती पऱ उँगलियाँ फेरते हुए बोलि,
“भैया। जौ कुछ हमनेअब तक किया हैं। वोँ भि भइया-बेहन केँ लिएसही नहि थां। मगरफिन भि होँ गय़ा नां? हम् दोनों नें एक्-दूसरे कों चूमा, चाटा, चखा। अब आप् क्यूं हिचकिचा रहे हें?
मे आपकी छोटी बेहन हूं। मगरआज मे आपकी मादा भि बनना चाहती हूं.”
नितिन नें स्वाती कों औऱ कसकर जकड़ लिया। दोनों कि साँसें फिन सें तेज होँ गईं।
स्वाती नें नितिन केँ कान मे फुसफुसाया,
“भैया। छोडो भि यह हिचकिचाना। आजरात। मे आपको पूरीतरह अंदर लेना चाहती हूं.”
प्यास जोँ बढ़ती हि जाये – New Episode
Update 27
नई शुरुआत – स्वाती कि नईभूख
फ्लॅशबैक : स्वाती कि कथा(भाग 11)
नितिन स्वाती केँ ऊपरचढ़ गय़ा। दोनों कि साँसें भारीथीं। नितिन नें स्वाती केँ दोनों हाथ उसकेसिर केँ ऊपरकर दिए औऱ उन्हें अपनी मुट्ठी मे पकड़ लिया। वो स्वाती केँ चेहरे कों देखरहा थां — उसकी शर्मीली आँखें, गुलाबी गाल, औऱ वोँ नरम होंठ जोँ अभि भि उसकेरस सें चमकरहे थें।
नितिन कां दिल ज़ोर-ज़ोर सें धड़करहा थां।
“यहसच हैं। मे अपनी छोटी बेहन केँ ऊपर लेटा हूं। मे उससे प्रेम करने वाला हूं। मेरी अपनी स्वाती। मेरी प्यारी छोटी बेहन। मैंने कभी ख्वाब मे भि नहि सोचा थां कि यहदिन आएगा। कि मे अपनी स्वाती कों इसतरह छूऊँगा। कि मेरा लन्ड उसकी बुर केँ अंदर जाएगा.”
वो स्वाती केँ होंठों पर्र झुका औऱ बहोत धीरे-धीरे, बहोत गहरे सें किस करनेलगा। स्वाती नें भि नितिन केँ होंठों कों चूस लिया। दोनों कि जीभें एक्-दूसरे सें लिपटगईं। नितिन कां लन्ड स्वाती कि गीली बुर केँ ऊपर रगड़खा रहा थां। स्वाती कि साँसें नितिन केँ मुँह मे घुलरही थीं।
नितिन नें स्वाती केँ निचले होंठ कों आरामसे चूसा, फिन ऊपरी होंठ कों भि। स्वाती नें अपनीजीभ सें नितिन कि जीभ कों सहलाया। दोनों कां किस आहिस्ता भूखा औऱ गहरा होताजा रहा थां। नितिन नें स्वाती केँ होंठों कों चूसते हुए उसकीजीभ कों अपनीजीभ सें दबाया। स्वाती कि सिसकी उसके मुँह मे घुल गई।
स्वाती कि आँखें बंदथीं। उसकेमन मे विचार घूमरहे थें —
“आज मेरे भइया मुझे चोदेंगे। मेरा अपना असली भइया। जिसे मे सालों सें चुपके-चुपके चाहती थि। आज वोँ मुझमें अपना लन्ड डालने वाले हें। आह। मुझे बहोत excitement हौ रही हैं। मेरी बुर अभि सें हि फड़करही हैं। भैया। मुझे चोदो। मुझे अपनीबना लो.”
नितिन नें किस तोड़कर स्वाती कि गर्दन पऱ मुँह लें जाया। वहा उसने बहोत प्रेम सें, मगर भूखेपन सें चूमना शुरुआत किया। स्वाती कि गर्दन पर्र उसके चुंबन केँ निशान बनरहे थें। वो स्वाती कि गर्दन कों चूसता, हल्का-हल्का काटता औऱ फिनजीभ सें सहलाता। स्वाती कि साँसें तेज होँ गईं।
“स्वाती.” नितिन नें बहोत धीमी, काँपती हुईँ आवाज़ मे कहा, “मुझे यकीन नहि होँ रहा। मे अपनी छोटी बेहन केँ ऊपर लेटा हूं। औऱ मे उसे चोदने वाला हूं। यह सपना हैं याँ हकीकत?”
स्वाती नें नितिन केँ बालों मे उँगलियाँ फेरते हुए शर्माते हुएमगर प्रेम सें कहा,
“भैया। यह हकीकत हैं। मे आपकी हूं। आज पूरीतरह आपकी हूं.”
नितिन नें स्वाती कि ब्रेस्ट्स कों चूमा। एक्-एक् करके दोनों ब्रेस्ट्स कों चाटा, चूसा औऱ निप्पल्स कों काटा। स्वाती कि कमरऊपर उठरही थि। वो नितिन केँ सिर कों अपनी ब्रेस्ट्स पऱ दबारही थि। नितिन नें स्वाती केँ एक् निप्पल कों मुँह मे लेकरजोर सें चूसा, फिन जीभ सें घुमाया। स्वाती कि कमर बार-बार ऊपरउठ रही थि।
“ओह्ह। भैया। मेरे निप्पल्स। ओह्ह। चूसिए.” स्वाती कराहउठी।
नितिन नें स्वाती कि दूसरी ब्रेस्ट कों भि उसीतरह चूसा। उसकेबाद उसने आहिस्ता स्वाती कि जाँघें फैलाईं। स्वाती कि साँसें औऱ तेज हौ गईं। नितिन कां मोटा, हार्ड लन्ड स्वाती कि गीली बुर केँ ठीकऊपर आकररुक गय़ा। वो स्वाती कि बुर केँ ऊपर अपना लन्ड रखकर हल्का-हल्का दबारहा थां।
स्वाती कि आँखें आधीबंद होँ गईं।
नितिन कि आँखें नम हौ गईं। वो स्वाती केँ होंठों पऱ एक् लंबा, भावुक किस करनेलगा। फिन उसने अपना मोटा लन्ड स्वाती कि बुर पर्र रखा औऱ बहोत धीरे धीरे, टिजिंग तरीके सें रगड़ना शुरुआत कर दिया।
नितिन कां लन्ड स्वाती कि गीली बुर केँ ऊपर ऊपर-नीचे सरकरहा थां। वो अपनी लन्ड कि टिप सें स्वाती कि क्लीट कों हल्का-हल्का दबारहा थां औऱ फिन नीचे लाकर बुर केँ मुंह पर्र रगड़रहा थां। स्वाती कि बुर सें निकलने वालारस नितिन केँ लन्ड पऱ फैलरहा थां।
स्वाती कां पूराबदन काँपने लगा।
“अह्ह। भैया। क्याँ कररहे हौ। आह्ह। आपका लन्ड। मेरी बुर पर्र। रगड़रहा हैं। अह्ह। मुझे पागलकर रहे हें.”
स्वाती केँ मन मे विचारों कां तूफान उठरहा थां —
“हाय। भैया कां लन्ड मेरी बुर पऱ रगड़रहा हैं। इतना मोटा औऱ गरम। मेरी बुर फड़करही हैं। वोँ अंदर नहि डालरहे। बस रगड़रहे हें। मुझे औऱ horny कररहे हें। भैया। मुझे औऱ मत सताओ। मुझे चोदो.मगर। उफ्फ.यह भैया कां लन्ड कि मेरचुत पर्र रगड़ भि कितनी मस्तलग रही हैं …… उम्मम्मम्मम.”
नितिन नें स्वाती कि जाँघों कों औऱ फैलाया औऱ अपना लन्ड स्वाती कि बुर पऱ औऱ जोर सें दबाते हुए ऊपर-नीचे रगड़ने लगा। स्वाती कि क्लीट पऱ हरबार लन्ड कि टिपदब रही थि। स्वाती कि कमर अनियंत्रित तरीके सें ऊपरउठ रही थि। वो नितिन केँ कूल्हों कों पकड़ने कि कोशिश कररही थि।
“अह्ह। भैया। अह्ह। औऱ दबाइए। स्स्स्सस्स्स्सस्स्स्सस्स्स्स। मेरी बुर। आपका लन्ड महसूस कररही हैं। उफ्फ। मुझे औऱ गीलाकर रहे हें.”
नितिन नें स्वाती केँ कान मे फुसफुसाते हुएकहा,
“तेरी बुर। कितनी गीली होँ गई हैं स्वाती। मेरा लन्ड तेरेरस सें चमकरहा हैं। तुँ देखरही हैं नाँ। तेरा भइया तेरी चोदने सें पहले तेरी बुर कों कितना पागलकर रहा हैं.”
स्वाती नें नितिन कि पीठ पऱ नाखून गाड़दिए। उसकी जाँघें काँपरही थीं।
“आह। भैया। रुक जाइए। अह्ह। मे। मे औऱ नहि सहपारही। आपका लन्ड। मेरी बुर पर्र। इतना अच्छा लगरहा हैं। ऊह्ह। मुझे औऱ मत तड़पाइए। चोद दीजिए मुझे.बना दो अपनी बेहन कों एक् काली सें फूल”
नितिन नें स्वाती कि जाँघों कों कसकर पकड़ा औऱ अपना लन्ड स्वाती कि बुर पऱ औऱ तेजी सें रगड़ने लगा। स्वाती कि बुर सें निकलने वाला गर्मरस नितिन केँ लन्ड पऱ फैलता जारहा थां। स्वाती अब लगातार कराहरही थि।
“हम्म। भैया। उफ्फ। ओह्ह। क्याँ कररहे होँ। उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़। मेरी बुर। फड़करही हैं। हाय। मुझे चोदो। प्लीज भैया। अब औऱ मत सताओ.”
नितिन नें स्वाती केँ होंठों पर्र फिन सें गहराकिस किया औऱ फुसफुसाया,
“तेरी बुर। मेरे लन्ड कों बुलारही हैं स्वाती। सुनरही हैं? कितनी गीली होँ गई हैं। मे तेरे अंदर डालने सें पहले तेरी औऱ पागल करना चाहता हूं.”
स्वाती कि आँखें आधीबंद थीं। वो पूरीतरह नितिन केँ लन्ड केँ रगड़ने मे खो चुकी थि।
नितिन नें स्वाती कि जाँघें औऱ फैलाईं। उसका मोटा, हार्ड लन्ड स्वाती कि गीली बुर केँ ठीकऊपर आकररुक गय़ा। नितिन नें स्वाती केँ चेहरे कों दोनों हाथों मे लिया औऱ बहोत गंभीर, मगर भूखे स्वर मे कहा,
“स्वाती। एक् बारफिन सोच लेँ। मे तेरा भइया हूं। अगर मैंने अंदर डाला। तोँ फिन हम् कभी वापस नहि जा सकेंगे.”
स्वाती नें नितिन कि आँखों मे देखकर बहोत प्रेम सें मुस्कुराते हुएकहा,
“भैया। हम् पहले सें हि वापस नहि जा सकते। आपने मुझे चाटा। मैंने आपका लन्ड चूसा.अब यह लन्ड मेरी बुर मे जानां हि चाहिए। मे आपसे चुदवाना चाहती हूं। अपनेसगे भइया सें.”
नितिन कि आँखें नम होँ गईं। वो स्वाती केँ होंठों पर्र एक् लंबा, भावुक किस करनेलगा। फिन उसने अपना मोटा लन्ड स्वाती कि बुर पर्र रखा औऱ बहोत आरामसे दबाव बनाया।
स्वाती कि साँसें रुकगईं।
नितिन कां मोटा सुपाड़ा (टिप) स्वाती कि छोटी, टाइट बुर केँ मुंह पऱ दबाव बनाने लगा। स्वाती कि बुर पहले सें हि बहोत गीली थि, फिन भि नितिन कां मोटासिर अंदर घुसने केँ लिए स्थान नहि बनापा रहा थां। स्वाती कि साँसें फँसगईं।
“हाय। भैया। धीरे-धीरे। बहोत धीरे-धीरे.” स्वाती नें काँपते हुएकहा।
नितिन नें स्वाती केँ चेहरे कों दोनों हाथों मे लिया औऱ बहोत प्रेम सें बोला,
“देखो मेरी आँखों मे स्वाती। मे बहोत आरामसे करूँगा। अगर दर्द होँ तौ जल्दी बता देना। मे रुक जाऊँगा। ठीक हैं?”
स्वाती नें मात्र सिर हिलाया। उसके होंठ काँपरहे थें।
नितिन नें फिन सें बहोत आहिस्ता दबाव बनाया। स्वाती कि बुर कां छोटा मुंह नितिन केँ मोटे सुपाड़े कों अंदर लेने कि कोशिश कररहा थां। स्वाती कि आँखें बंद होँ गईं। अचानक एक् तेज दर्द उसके निचले हिस्से मे फैल गय़ा।
“ओह्ह भैया। आह्ह। इतना मोटा हैं। उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़। मेरी बुर फटरही हैं। भैया रुक जाइए। हम्म। बहोत दर्द हौ रहा हैं.” स्वाती कि आवाज़ काँपरही थि।
नितिन नें जल्दी दबावरोक दिया। उसने स्वाती केँ माथे पर्र बहोत प्रेम सें चुंबन किया औऱ फुसफुसाया,
“शश.शश। मेरीजान। मे रुक गय़ा। देखो। मे अंदर नहि जारहा। बस यहीं रुका हूं। साँसलो। धीरे धीरे साँसलो.”
स्वाती कि आँखों सें आँसू निकलआए। नितिन नें स्वाती केँ गालों पऱ चुंबन बरसाए औऱ बहोत नरम स्वर मे बोला,
“देखो स्वाती। मे तेरा भइया हूं। मे तुझेही कभी दर्द नहि देना चाहता। अगर बहोत दर्द होँ रहा हैं तोँ हम् रुक भि सकते हें। कोई जल्द नहि हैं.”
स्वाती नें सिर हिलाया औऱ काँपती हुइ आवाज़ मे कहा,
“नहि भैया। दर्द हैं। मगर। मे सह लूँगी। आप् आहिस्ता हि अंदर डालिए। मुझे आपका लन्ड अंदर चाहिए.”
नितिन नें स्वाती केँ होंठों पर्र फिन सें एक् लंबा, सांत्वना भराकिस किया। फिन उसने बहोत धीरे धीरे, बेहद सावधानी सें फिन सें दबाव बनाया। स्वाती कि बुर कां मुंह आरामसे नितिन केँ मोटे सुपाड़े कों अंदर लेनेलगा। स्वाती केँ होंठ काँपरहे थें।
“आआह्ह। भैया। आह्ह। दर्द हौ रहा हैं। आह। बहोत टाइट हैं। आह्ह.”
नितिन नें स्वाती केँ चेहरे कों देखते हुए बहोत धीरे-धीरे सें कहा,
“देखो मेरी आँखों मे। मे अभि भि रुक सकता हूं। बस सुपाड़ा अंदर गय़ा हैं। बाकी अभि नहि डालरहा। साँसलो मेरीजान। मे तुम को दर्द नहि देना चाहता.”
स्वाती नें नितिन कि आँखों मे देखा। आँसू उसके गालों पर्र बहरहे थें, मगर उसने नितिन केँ गाल पर्र हाथरखा औऱ बहोत प्रेम सें कहा,
“भैया। आप् बहोत प्रेम सें कररहे हें। आह्ह… मुझे दर्द हौ रहा हैं। मगर। मुझे आपका लन्ड अंदर चाहिए। आरामसे। मे सह लूँगी.”
नितिन नें स्वाती केँ माथे पर्र चुंबन किया औऱ बहोत धीरे धीरे, प्रेम सें सुपाड़े कों औऱ अंदर धकेलने लगा। स्वाती कि बुर केँ लिप्स लन्ड केँ मोठे सुपाड़े कों घेररहे थि। स्वाती केँ होंठ काँपरहे थें औऱ उसकी आँखों सें आँसूबह रहे थें।
“ऊह्ह। भैया। ओह्ह। दर्द.हाय। मगर। आपका लन्ड। अंदर आँ रहा हैं। हाय.”
नितिन नें स्वाती केँ होंठों पर्र फिन सें किस किया औऱ फुसफुसाया,
“बहोत अच्छा कररही हैं मेरीजान। मे बहोत आरामसे कररहा हूं। बस सुपाड़ा अंदर हैं। बाकी अभि नहि। तूँ धीरे-धीरे साँस लें। मे यहा रुका हूं.”
स्वाती नें नितिन कि छाती कों कसकर पकड़ लिया। उसकी बुर नितिन केँ मोटे सुपाड़े कों घेरकर दर्द सें कसरही थि, मगरसंग हि एक् अजीब सि गर्माहट भि फैलरही थि।
नितिन नें स्वाती केँ चेहरे कों दोनों हाथों मे लिया औऱ बहोत प्रेम सें, मगर गंभीर स्वर मे कहा,
“स्वाती। सुनो। अभि औऱ दर्द होगा। मे झूठ नहि बोलूंगा। मेरा लन्ड मोटा हैं। औऱ तेरी बुर बहोत छोटी औऱ तंग हैं। जैसे-जैसे अंदर जाएगा, दर्दबढ़ सकता हैं। मगर सुनो मेरीजान। यह दर्द हमेशा नहि रहेगा। एक् बारजब यह दर्द निकल जाएगा, तब जोँ मजा आएगा। वोँ सभीकुछ भुला देगा। मे तुम्हें वोँ मजा दूँगा। जोँ तूनेकभी महसूस नहि किया.”
स्वाती नें आँसूभरी आँखों सें नितिन कों देखा औऱ काँपती हुईँ आवाज़ मे कहा,
“भैया। मे। अह्ह। मे सह लूँगी। आप् आरामसे कीजिए। मुझे आपका लन्ड चाहिए.”
नितिन नें स्वाती केँ माथे पर्र फिन सें चुंबन किया औऱ बहोत आहिस्ता दबाव बढ़ाया। स्वाती कि बुर नितिन केँ मोटे सुपाड़े कों औऱ अंदर लेने कि कोशिश कररही थि। स्वाती केँ होंठ काँपरहे थें।
“आआह्ह। भैया। हाय। दर्द। ऊह्ह। बहोत दर्द होँ रहा हैं। ऊह्ह.”
नितिन नें स्वाती कि जाँघ कों सहलाते हुए बहोत धीरे-धीरे सें कहा,
“साँसलो मेरीजान। आहिस्ता साँसलो। मे अभि रुका हूं। बस एक् इंच औऱ। बस.”
स्वाती नें आँखें बंदकर लीं। नितिन नें बहोत प्रेम सें, मगर लगातार दबाव बनाते हुए अपना लन्ड औऱ अंदर धकेला। स्वाती कि बुर नितिन केँ मोटे लन्ड कों घेरकर दर्द सें कसरही थि। स्वाती केँ जिस्म मे हल्की-हल्की झुरझुरी दौड़रही थि।
“ओह्ह भैया। अह्ह। दर्द। उफ्फ.लग रहा हैं जैसेफट रही हैं। हाय.”
नितिन नें स्वाती केँ गाल पर्र चुंबन किया औऱ फुसफुसाया,
“बहोत अच्छा कररही हैं स्वाती। मे बहोत धीरे-धीरे कररहा हूं। बसदोइंच औऱ अंदर हैं। मे रुक नहि रहा.मगर बहोत धीरे-धीरे। तूँ साँस लें। मे तुम्हारी तरफ दर्द नहि देना चाहता.”
स्वाती नें नितिन कि छाती कों औऱ कसकर पकड़ लिया। उसके होंठ काँपरहे थें। नितिन नें फिन सें बहोत धीरे धीरे दबाव बढ़ाया। स्वाती कि बुर नितिन केँ लन्ड कों घेरती जारही थि। स्वाती कि साँसें फँस “आँ.ई…….ई…ई ….ग। मररररररर्र …….गईइइइइइइइ। भैया। आह्ह। दर्द। ऊह्ह। बहोत। ऊह्ह.”
नितिन नें स्वाती केँ होंठों पऱ फिन सें एक् लंबा, सांत्वना भराकिस किया औऱ धीरे-धीरे सें बोला,
“देखो मेरी आँखों मे। मे यहा हूं। मे तुम्हें छोड़ नहि रहा.बस तीनइंच। बस इतना हि। मे रुक गय़ा हूं। साँस लेँ मेरीजान। बहोत अच्छा कररही हैं.”
स्वाती कि आँखों सें आँसूबह रहे थें। नितिन नें स्वाती केँ गालों पर्र चुंबन बरसाए औऱ बहोत प्रेम सें फुसफुसाया,
“दर्द होगा.मगर मे तुम्हे कभी अकेला नहि छोड़ूँगा। जबयह दर्द निकल जाएगा। तब जौ मजा आएगा। वोँ सभीकुछ भुला देगा। मे तेरी वोँ मजा दूँगा.”
स्वाती नें नितिन कि आँखों मे देखकर काँपती हुईँ आवाज़ मे कहा,
“भैया। आप्। बहोत प्रेम सें कररहे हें। दर्द हौ रहा हैं। मगर। मुझे आपका लन्ड अंदर चाहिए। आहिस्ता। मे सह लूँगी.”
नितिन नें स्वाती कि जाँघ कों सहलाते हुएफिन सें बहोत आहिस्ता दबाव बढ़ाया। स्वाती कि बुर नितिन केँ मोटे लन्ड कों औऱ अंदर लें रही थि। स्वाती केँ होंठ काँपरहे थें औऱ उसकी साँसें फँसगईं।
“हम्म। भैया। उफ्फ। दर्द.आह। तीनइंच। हम्म.”
नितिन नें स्वाती केँ माथे पर्र चुंबन किया औऱ फुसफुसाया,
“बहोत अच्छा कररही हैं मेरीजान। मे रुक गय़ा हूं। बस इतना हि। तुँ आहिस्ता साँस लेँ। मे यहा हूं.”
स्वाती कि बुर अभि भि नितिन केँ लन्ड कों कसकर पकड़े हुए थि। दर्द अभि भि कम नहि हुआ थां। नितिन नें स्वाती केँ चेहरे कों देखा। आँसू उसके गालों पर्र बहरहे थें। वो समझ गय़ा कि स्वाती कों अभि भि बहुत दर्द हौ रहा हैं।
नितिन नें स्वाती कि गर्दन पर्र मुँह लें जाकर बहोत प्रेम सें चूमना शुरुआत किया। वो स्वाती कि गर्दन कों चूमता हुआ नीचे उसकी ब्रेस्ट्स पर्र आँ गय़ा। एक्-एक् करके दोनों ब्रेस्ट्स कों चाटा औऱ चूसा। स्वाती कि साँसें थोड़ी स्थिर हुईं। नितिन नें स्वाती केँ निप्पल कों जीभ सें घुमाया औऱ हल्का-हल्का काटा। स्वाती कि कमर हल्की हल्की उठरही थि।
“हाय। भैया। अह्ह.” स्वाती कराहउठी।
नितिन नें स्वाती कि ब्रेस्ट्स कों चूमते हुए फुसफुसाया,
“देखो मेरीजान। मे तुम्हे दर्द सें थोडा दूर लें जारहा हूं। तेरी ब्रेस्ट्स। कितनी नरम औऱ कितनी हसीन हें। मे इन्हें चूमता रहूँगा। जब तक दर्दकम न् होँ जाए.”
स्वाती नें नितिन केँ बालों मे उँगलियाँ फेरदीं। नितिन नें स्वाती कि ब्रेस्ट्स कों चाटते हुए उसकीकमर कों भि चूम लिया। वो आरामसे स्वाती कि नाभि तक आँ गय़ा औऱ वहाजीभ डालकर चूसने लगा। स्वाती कि साँसें अब थोड़ी शांत हौ रहीथीं।
नितिन नें स्वाती केँ चेहरे कों देखा। आँसू अभि भि बहरहे थें, मगरअब उसकी साँसें पहले जितनी तेज नहि थीं। नितिन नें स्वाती केँ होंठों पर्र एक् लंबा, प्रेम भराकिस किया औऱ बहोत धीरे-धीरे सें बोला,
“स्वाती। सुनो.अब दर्द थोडा कमहुआ हैं नां.?”
स्वाती नें काँपती हुइ आवाज़ मे कहा,
“थोडा। भैया। मगर अभि भि हैं.”
नितिन नें स्वाती केँ माथे पर्र चुंबन किया औऱ बहोत गंभीर, मगर प्रेम भरे स्वर मे कहा,
“मेरीजान। अब मुझे एक् जोरदार धक्का मारना पड़ेगा। ताकि मेरा पूरा लन्ड तेरे अंदरचला जाए.यह धक्का तेरेलिए बहोत दर्दनाक होगा। क्योंकि तेरीसील टूटेगी। तेरी वर्जिनिटी चली जाएगी। मगर सुनो। एक् बारजब यह दर्द निकल जाएगा। तब जौ मजा आएगा। वोँ सभीकुछ भुला देगा। मे तुम्हें वोँ मजा दूँगा। जौ तूनेकभी नहि लिया.”
स्वाती नें नितिन कि आँखों मे देखा। डर औऱ उत्तेजना दोनों उसके चेहरे पर्र साफ थें। उसने बेडशीट कों दोनों हाथों सें कसकर पकड़ लिया।
“भैया। मे। मे रेडी हूं। आप् धक्का मारिए.”
नितिन नें स्वाती केँ होंठों पर्र फिन सें एक् लंबाकिस किया। फिन उसने स्वाती कि जाँघों कों कसकर पकड़ा औऱ बहोत जोरदार, एक् हि तेज धक्के मे अपना पूरा मोटा लन्ड स्वाती कि बुर मे घुसा दिया।
“अ.आई…ई…ई ….ग। मररररररर्र ……गईइइइइइइइ……। आआआआह्ह्ह्ह्ह्ह। भैया। आआआह्ह्ह्ह्ह.!!” स्वाती चीखउठी।
नितिन कां पूरा७ इंच कां लन्ड एक् हि जोरदार धक्के मे स्वाती कि छोटी, तंग बुर मे घुस गय़ा। स्वाती कि हymen एक् हि झटके मे टूट गई। स्वाती केँ मुँह सें तेजचीख निकली। उसकी आँखें चौड़ी होँ गईं। बेडशीट कों उसने इतनीजोर सें पकड़ लिया कि उसके जोड़उभर आए।
“आआआआह। भैया। आआआह्ह्ह्ह। फट गई। आआआह्ह्ह्ह। मररररररर्र ……गईइइइइ…। बहोत दर्द। आआआह्ह्ह्ह। भैया। आआआह्ह्ह्ह.!!”
स्वाती केँ जिस्म मे तेज दर्द कि लहर दौड़ गई। उसकी बुर नितिन केँ पूरे लन्ड कों घेरकर कस गई। स्वाती केँ होंठ काँपरहे थें औऱ उसकी आँखों सें आँसू कि धारबह रही थि।
“आआआआह। भैया। आआआह्ह्ह्ह। दर्द। आआआह्ह्ह्ह। फटरही हैं। आआआह्ह्ह्ह। भैया। आआआह्ह्ह्ह.!!”
नितिन नें स्वाती कों कसकरगले लगा लिया। स्वाती कि बुर सें खून कि कुछ बूँदें निकलकर नितिन केँ लन्ड पऱ लगगईं। स्वाती कां पूराबदन काँपरहा थां।
नितिन नें स्वाती केँ बालों मे उँगलियाँ फेरते हुए बहोत प्रेम सें फुसफुसाया,
“शश.शश। मेरीजान। होँ गय़ा। हौ गय़ा। अब आराम। मे रुक गय़ा हूं। पूरा अंदर हैं। अब मे हिल नहि रहा। साँस लेँ। मे यहा हूं.”
स्वाती नें नितिन कि छाती कों कसकर पकड़ लिया। उसकी सिसकारियाँ अभि भि निकलरही थीं।
“आआआह्ह्ह्ह। भैया। आआआह। बहोत दर्द। आआआह्ह्ह्ह। खून। आआआह्ह्ह्ह.”
नितिन नें स्वाती केँ माथे पऱ, गालों पऱ औऱ होंठों पऱ लगातार चुंबन बरसाए औऱ बहोत धीरे-धीरे सें बोला,
“तेरीसील टूट गई, हैं…… मेरीजान ……तुमने बहोत अच्छा कर लिया मेरीजान। अब दर्द आहिस्ता कम होगा। मे तुम को छोड़ नहि रहा। मे यहा हूं। मेरी प्यारी छोटी बेहन.”
स्वाती नें नितिन कि छाती मे अपना चेहरा छिपा लिया। उसकेबदन मे अभि भि दर्द कि लहरें चलरही थीं, मगर नितिन कि गरम छाती औऱ उसके प्रेम भरे शब्दउसे थोडा सहारा देरहे थें।
दोनों उसी पोजीशन मे कुछदेर तक ऐसे हि लेटेरहे। नितिन कां पूरा मोटा लन्ड स्वाती कि छोटी, तंग बुर मे पूरीतरह घुसाहुआ थां। स्वाती कि बुर नितिन केँ लन्ड कों कसकर पकड़े हुए थि। स्वाती केँ जिस्म मे अभि भि हल्की-हल्की दर्द कि लहरें चलरही थीं, मगर अब वोँ पहले जितनी तेज नहि थीं।
नितिन नें स्वाती कों बहोत कसकरगले लगारखा थां। उसका एक् हाथ स्वाती कि पीठ पऱ थां औऱ दूसरा उसके बालों मे। वो स्वाती केँ माथे पऱ, गालों पऱ औऱ होंठों पऱ लगातार बहोत प्रेम सें चुंबन बरसारहा थां। स्वाती कि साँसें अभि भि थोड़ी भारीथीं।
नितिन नें स्वाती केँ कान केँ पास मुँह लेँ जाकर बहोत धीरे-धीरे सें उसकाकान चाटा। स्वाती केँ जिस्म मे हल्की सि झुरझुरी दौड़ गई। नितिन नें स्वाती कि गर्दन पर्र भि जीभ फेरते हुए चूमना शुरुआत किया। स्वाती कि साँसें अब पहले सें थोड़ी शांत होँ रहीथीं।
नितिन कां हाथ स्वाती कि कमर सें ऊपर सरकते हुए उसकी ब्रेस्ट्स पर्र आँ गय़ा। उसने स्वाती कि एक् ब्रेस्ट कों बहोत धीरे-धीरे औऱ प्रेम सें दबाया। स्वाती कि साँसें फिन सें थोड़ी भारी हौ गईं। नितिन नें स्वाती कि ब्रेस्ट कों सहलाते हुए उसके निप्पल कों हल्का-हल्का दबाया। स्वाती नें अनजाने मे हि नितिन कि पीठ पर्र हाथरख लिया।
नितिन नें स्वाती केँ गाल पर्र लगे आँसू कि बूँद कों अपनीजीभ सें चाट लिया। स्वाती कि आँखें थोड़ी खुलीं। नितिन नें स्वाती केँ दूसरे गाल पर्र भि जीभ फेरकर आँसूचाट लिया औऱ फुसफुसाया,
“मेरीजान। अब दर्दकम होँ रहा हैं नां.? मे यहा हूं। तुँ मेरी बाहों मे सुरक्षित हैं.”
स्वाती नें केवलसिर हिलाया। नितिन नें स्वाती कि गर्दन कों चूमते हुए उसकी ब्रेस्ट्स कों फिन सें धीरे-धीरे सें दबाया। स्वाती कि साँसें अब औऱ शांत हौ रहीथीं। नितिन कां लन्ड स्वाती कि बुर मे पूरीतरह अंदर थां, इसलिये स्वाती कों महसूस होँ रहा थां कि नितिन कि झांटे (pubic hair) उसकी बुर केँ ऊपर हल्का-हल्का छूरही हैं।
स्वाती नें धीरे-धीरे सें अपना एक् हाथ नीचे लें जाकर नितिन केँ कूल्हे कों छुआ। फिन उसने अपनी उँगलियों सें नितिन केँ लन्ड औऱ अपनी बुर केँ जुड़ाव कों महसूस किया। नितिन कां पूरा लन्ड उसकी बुर केँ अंदर थां। स्वाती केँ मन मे विचार घूमे —
“भैया कां पूरा लन्ड। मेरी बुर केँ अंदर हैं। इतना मोटा औऱ लंबा। मेरी छोटी बुर नें पूरा लेँ लिया। हम्म। मुझे अभि भि दर्द हौ रहा हैं। मगर.यह अहसास। कि मेरा भइया मुझमें हैं. उम्मम्मम्म …। कितना गहरालग रहा हैं.”
स्वाती नें नितिन केँ कूल्हों कों दोनों हाथों सें पकड़ लिया औऱ हल्का सां दबाया, जैसेयह पुष्टि कररही हौ कि नितिन कां पूरा लन्ड उसके अंदर हैं। नितिन नें स्वाती कि इस हरकत कों महसूस किया औऱ उसकेकान मे फुसफुसाया,
“हाँ स्वाती। पूरा अंदर हैं। तेरा भइया पूरीतरह तेरे अंदर हैं.”
स्वाती कि बुर अब पहले सें थोड़ी ढीली होँ रही थि। दर्द आरामसे कम हौ रहा थां। स्वाती नें महसूस किया कि उसकी बुर सें फिन सें रस निकलरहा हैं। नितिन कां लन्ड स्वाती कि बुर मे पूरीतरह भरपूर थां, इसलिये स्वाती कों हर छोटी हरकत मे उसका लन्ड महसूस हौ रहा थां।
स्वाती नें नितिन कि छाती पऱ सिररखा। नितिन नें स्वाती कि पीठ पर्र हाथ फेरते हुए उसकी गर्दन कों चूमना जारीरखा। स्वाती नें नितिन कि गर्दन पऱ मुँह छिपाते हुए बहोत धीरे-धीरे सें कहा,
“भैया। अब। दर्दकम हौ रहा हैं.”
नितिन नें स्वाती केँ बालों मे नाक गाड़कर उनकी खुशबू ली औऱ बहोत प्रेम सें फुसफुसाया,
“बहोत अच्छा। मेरीजान। अब आरामसे ठीक हौ जाएगा। मे अभि हिल नहि रहा.जब तक तुँ पूरीतरह सजधजकर नं हौ जाए.”
स्वाती नें नितिन कि छाती पर्र सिर रखतेहुए नितिन केँ होंठों पर्र धीरे-धीरे सें चुंबन किया। नितिन नें भि स्वाती केँ होंठों कों चूसा। दोनों कुछदेर तक ऐसे हि एक्-दूसरे केँ होंठों कों चूमते रहे। स्वाती कि बुर अब नितिन केँ लन्ड कों पहले सें कहीं अधिक आहिस्ता घेररही थि।
स्वाती नें नितिन केँ बालों मे उँगलियाँ फेरते हुए बहोत धीरे-धीरे सें कहा,
“भैया। आपका पूरा। अंदर हैं नां.? मुझे महसूस होँ रहा हैं.”
नितिन नें स्वाती कों औऱ कसकरगले लगा लिया औऱ फुसफुसाया,
“हाँ मेरीजान। पूरा। तेरे अंदर। औऱ मे कहीं नहि जारहा.”
स्वाती नें नितिन कि छाती पऱ सिर रखकर आँखें बंदकर लीं। नितिन कां लन्ड स्वाती कि बुर मे पूरीतरह भराहुआ थां। स्वाती कि बुर सें फिन सें रस टपकने लगा थां। नितिन नें स्वाती कि ब्रेस्ट्स कों बहोत धीरे-धीरे सें दबाते हुए उसकेकान मे फुसफुसाया,
“तूँ मेरी हैं स्वाती। पूरीतरह मेरी.”
स्वाती नें नितिन केँ होंठों पर्र फिन सें एक् लंबा, प्रेम भराकिस किया।
नितिन नें स्वाती कों कुछदेर तक उसी स्थिति मे रखा। उसका पूरा लन्ड स्वाती कि बुर मे भराहुआ थां। स्वाती कि साँसें अब पहले सें बहुत शांत होँ चुकीथीं। नितिन नें स्वाती केँ माथे पऱ एक् लंबा चुंबन किया औऱ बहोत धीरे-धीरे सें बोला,
“मेरीजान। अब मे आरामसे हिलूंगा। अगर दर्द होँ तोँ जल्दी बता देना.”
स्वाती नें केवलसिर हिलाया। नितिन नें स्वाती कि जाँघों कों थोडा औऱ फैलाया औऱ बहोत आरामसे अपना लन्ड बाहर् खींचना शुरुआत किया। स्वाती कि बुर नितिन केँ लन्ड कों कसकर पकड़े हुए थि। जैसे हि नितिन नें अपनाआधा लन्ड बाहर् निकाला, स्वाती कों फिन सें दर्द महसूस हुआ।
“हाय। भैया। हम्म। दर्द.” स्वाती कराहउठी।
नितिन नें जल्दी रुक गय़ा। उसने स्वाती केँ चेहरे कों दोनों हाथों मे लिया औऱ बहोत प्रेम सें फुसफुसाया,
“शश। मेरीजान। मे रुक गय़ा। साँस लेँ। अभि वापस अंदरजा रहा हूं.”
नितिन नें फिन सें बहोत आहिस्ता अपना लन्ड स्वाती कि बुर मे अंदर धकेला। स्वाती कि साँसें फिन सें थोड़ी भारी हौ गईं, मगर अब पहले जितना तेज दर्द नहि थां। नितिन नें स्वाती कि गर्दन पऱ चुंबन किया औऱ फिन सें आरामसे लन्ड बाहर् निकाला — इसबार थोडा औऱ अधिक। स्वाती नें नितिन कि पीठ पर्र हाथरख लिया।
नितिन नें फिन सें रुककर स्वाती कों चूमा औऱ फुसफुसाया,
“बहोत अच्छा कररही हैं स्वाती। अबफिन सें अंदर.”
वो फिन सें आहिस्ता अंदर धकेलने लगा। स्वाती कि बुर अब नितिन केँ लन्ड कों पहले सें थोडा बेहतर तरीके सें घेररही थि। नितिन नें यह प्रक्रिया कईबार दोहराई — हरबार थोडा ज़्यादा बाहर् निकालता औऱ फिन आहिस्ता अंदर धकेलता। हरबार स्वाती केँ मुँह सें हल्की-हल्की सिसकारियाँ निकलरही थीं।
“ऊह्ह। भैया। अह्ह। दर्द। ऊह्ह.मगर। अबकम हौ रहा हैं। अह्ह.”
नितिन नें स्वाती कि ब्रेस्ट्स कों बहोत धीरे-धीरे सें दबाते हुए उसकेकान मे फुसफुसाया,
“देखो। दर्द आरामसे कम हौ रहा हैं नाँ.? अबजब मे अंदर जाऊँगा। तौ तेरी अच्छा भि लगने लगेगा। थोडा औऱ सहलो मेरीजान.”
नितिन नें अब थोडा औऱ तेजी सें लन्ड बाहर् निकालना शुरुआत किया औऱ फिन आहिस्ता अंदर धकेलने लगा। स्वाती कि बुर अब नितिन केँ लन्ड कों बेहतर तरीके सें स्वीकार कररही थि। स्वाती कि साँसें अब दर्द केँ संग-संग हल्की उत्तेजना सें भि भारी होँ रहीथीं।
“आह्ह। भैया। आह.अब.अब दर्दकम हैं। ओह्ह। अच्छा लगरहा हैं। आह्ह.”
नितिन नें स्वाती केँ होंठों पऱ फिन सें गहराकिस किया औऱ धीरे धीरे अपनीगति बढ़ा दि। अब वो स्वाती कि बुर सें लन्ड कों आधे सें ज़्यादा बाहर् निकाल रहा थां औऱ फिन धीरे धीरेमगर लगातार अंदर धकेलरहा थां। स्वाती कि बुर सें निकलने वालारस नितिन केँ लन्ड पऱ चमकरहा थां।
स्वाती नें नितिन कि पीठ पर्र हाथरख लिया। उसकीकमर अब स्वयं-ब-स्वयं हल्की-हल्की उठनेलगी थि।
“हम्म। भैया। ऊह्ह.अब। अब अच्छा लगरहा हैं। उफ्फ। औऱ। औऱ करिए.”
नितिन नें स्वाती कि जाँघों कों कसकर पकड़ा औऱ अपनीगति औऱ बढ़ा दि। अब वो स्वाती कों नियमित रूप सें चोदरहा थां — बाहर् निकालता औऱ अंदर धकेलता। स्वाती कि सिसकारियाँ अब दर्द कि बजाय प्लेजर कि होँ चुकीथीं।
“ऊह्ह। भैया। आह। अच्छा लगरहा हैं। आह। मेरे भइया.हाय। चोदो मुझे। अह्ह.”
नितिन नें स्वाती कि ब्रेस्ट्स कों चूमा औऱ अपनीगति औऱ तेजकर दि। स्वाती कि बुर अब नितिन केँ लन्ड कों पूरीतरह स्वीकार कर चुकी थि। नितिन कां लन्ड स्वाती कि बुर मे आसानी सें अंदर-बाहर् होँ रहा थां। स्वाती कि साँसें अब बहोत तेज हौ चुकीथीं।
“आह्ह। भैया। हाय। औऱ तेज। ओह्ह। मुझे। उफ्फ। अच्छा लगरहा हैं। हाय.”
नितिन नें स्वाती कों औऱ जोर सें चोदना शुरुआत कर दिया। स्वाती कि बुर सें हर धक्के केँ संग गीली आवाजें निकलरही थीं। स्वाती नें नितिन कि पीठ कों कसकर पकड़ लिया। उसका पूराबदन काँपरहा थां।
“आआआह्ह्ह। भैया। आआआह्ह्ह। कुछ हौ रहा हैं। स्स्स्सस्स्स्सस्स्स्सस्स्स्स। भैया। आआआह्ह्ह.”
स्वाती कां बदन अचानक तन गय़ा। उसकी बुर नितिन केँ लन्ड कों जोर सें कसनेलगी। स्वाती नें नितिन कि पीठ पर्र नाखून गाड़दिए।
“आआआआह्ह्ह्ह। भैया। आआआआह्ह्ह्ह। आँ रही हूं। आआआआह्ह्ह्ह.!!”
स्वाती कां पहला असली ऑर्गास्म उसकेबदन मे दौड़ गय़ा। उसकी बुर नितिन केँ लन्ड कों बार-बार कसनेलगी। स्वाती कां पूराबदन झटके खानेलगा। नितिन नें स्वाती कों कसकरगले लगा लिया औऱ धीरे धीरे हिलना बंदकर दिया।
स्वाती हाँफते हुए नितिन कि छाती मे अपना चेहरा छिपाकर लेट गई। उसके जिस्म मे अभि भि छोटी-छोटी झुरझुरियाँ चलरही थीं।
नितिन नें स्वाती कों बहोत कसकरगले लगा लिया। स्वाती कां सिर नितिन कि छाती पऱ टिकाहुआ थां। दोनों अभि भि उसी स्थिति मे लेटेहुए थें — नितिन कां लन्ड स्वाती कि बुर मे अभि भि अंदर थां। स्वाती कां बदन अभि भि छोटी-छोटी झुरझुरियों सें काँपरहा थां। उसका पहला ऑर्गास्म अभि भि उसके जिस्म मे गूँजरहा थां।
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