प्यास जोँ बढ़ती हि जाये – New Episode
Update 22
नई शुरुआत – स्वाती कि नईभूख
फ्लॅशबैक : स्वाती कि स्टोरी (भाग 6)
स्वाती नें रिया कों अपनीगोद मे औऱ भि कसकर चिपका लिया। दोनों कि नंगी देहें एक्-दूसरे सें चिपकी हुईँ थीं। स्वाती कि उँगलियाँ रिया कि भीगी बुर पऱ आरामसे घूमरही थीं, जबकि रिया स्वाती कि भारी ब्रेस्ट कों चूसरही थि।
रिया नें स्वाती कि ब्रेस्ट कां निप्पल मुँह सें निकालते हुए, काँपती हुईँ आवाज़ मे पूछा,
“मैम। जब नितिन भैया कि उँगलियाँ आपकी जाँघों पऱ घूमरही थीं। औऱ फिन आपकी पैंटी केँ ऊपर सें आपकी बुर कों छूरही थीं.तब आपको कैसा महसूस हौ रहा थां?”
स्वाती कि साँसें भारी हौ गईं। उसने रिया कि बुर मे एक् उँगली धीरे-धीरे सें अंदरडाल दि औऱ आरामसे अंदर-बाहर् करनेलगी।
“आआह्ह्हह्ह्ह्ह। मे उस फीलिंग कों शब्दों मे बयां नहि कर सकती, ” स्वाती नें भारी आवाज़ मे कहा। “मेरादिल इतनीतेज धड़करहा थां कि मुझेलग रहा थां वोँ सुन लेगा। मेरी जाँघें काँपरही थीं। जब उसकीगरम उँगलियाँ मेरी जाँघ केँ अंदरूनी हिस्से पऱ घूमरही थीं। तौ मेरी बुर मे एक् अजीब सि गरमलहर उठरही थि।
औऱ जब उसकी उँगली मेरी पैंटी केँ ऊपर सें मेरी बुर कि लाइन पऱ फेरी। तोँ मे सिहर गई। मेरी बुर पूरीतरह भीग चुकी थि। मुझे लज्जा भि आँ रही थि औऱ पागलपन भि छारहा थां। कि मेरा अपना भइया मुझेइस तरहछू रहा हैं। ”
रिया नें स्वाती कि ब्रेस्ट कों जोर सें दबाते हुए कराहकर कहा, “फिन आपने क्याँ किया.?”
स्वाती नें रिया कों औऱ कसकर अपनीगोद मे खींच लिया, अपनी उँगलियाँ रिया कि बुर मे तेजी सें घुमाते हुए बोलि,
“मेरी बन्नो …। जल्द हि तूँ भि वोँ महसूस करेगी…। जब तेरा भइया तुम्हारी तरफऐसे छुएगा.
रिया नें शर्मा केँ स्वाति केँ बूब्स मे अपने चहरे कों छुपाया
स्वाती कि आँखें आधीबंद होँ गईं। उसने रिया केँ कान मे गरम साँस छोड़ते हुए धीरे-धीरे सें कहा,
“औऱ फिन। वोँ सुभह आँ गई जिसका मे इतने दिनों सें बेसब्री सें प्रतीक्षा कररही थि.”
सुभह केँ नौबजरहे थें। मे माँ केँ संग रसोई मे खड़ी थि। नितिन भैया अभि अपने कमरे मे थें। माँ गरमचाय बनारही थीं औऱ मे उनकेबगल मे खड़ी ब्रेड-बटर लगारही थि।
हम् दोनों हल्की-फुल्की बातें कररहे थें।
“माँ, आजकल विद्यालय मे बहोत टेस्ट हौ रहे हें, ” मैंने बात शुरुआत कि। “मैथ्स मे अभि भि कुछ कॉन्सेप्ट्स क्लियर नहि हौ रहे। ”
माँ नें मुस्कुराते हुएकहा, “तोँ नितिन सें पूछ लियाकरो नाँ बेटा। वोँ तौ अच्छा पढ़ाता हैं। ”
मे मन हि मन शरमाई औऱ बोलीं, “हाँ। वोँ तौ अच्छा पढ़ाते हें। मगर कभी-कभी वोँ इतना तेज़ समझाते हें कि मे पीछेछूट जाती हूं। ”
मां हँसी, “अरे, वोँ तोँ तुम्हें बहोत प्रेम करता हैं। कहदो कि आहिस्ता समझाए। ”
मैंने जानबूझकर औऱ बात बढ़ाई, “माँ, नितिन भैया कों इंजीनियरिंग मे कौन-कौन सें सब्जेक्ट्स सबसे अच्छे लगते थें?”
मां नें गरमचाय छानते हुए जवाब दिया, “उसे मैथ्स औऱ फिजिक्स बहोत मनपसंद थें। कहता थां कि इनमें मजबूत बेस होँ तोँ आगेसभी आसान हौ जाता हैं। ”
तभी मां कां मोबाइल बजउठा। स्क्रीन पऱ “भइया” लिखाहुआ थां। माँ नें मोबाइल उठाया। मे उनके बिल्कुल पास खड़ी थि, इसलिये सारीबात साफसुन रही थि।
मामाजी कि आवाज़ परेशान थि। मामीजी कि तबीयत अचानक खराब होँ गई थि। माँ नें चिंता जताई औऱ कुछदेर बात कि। फिन उन्होंने बापू कों फोन लगाया। उन्होंने आवाज़ बहोत धीमीरखी, मगर मे पास हि थि, इसलिये हर शब्दसाफ सुनाई देरहा थां।
“हाँ। मे आजसाम कों चली जाऊँगी। दोदिन मे वापस आँ जाऊँगी। स्वाती औऱ नितिन कों अकेला छोड़कर जानां ठीक नहि लगरहा, मगर मामीजी कि हालत.”
बस इतना सुनते हि मेरादिल जोर सें धड़कउठा।
दोदिन। पूरेदो दिन!
मौका। आखिरकार मौका आँ गय़ा थां!
मेरे पूरे जिस्म मे एक् बिजली-सि दौड़ गई। दोदिन। पूरेदो दिन! मात्र मे औऱ नितिन। घऱ मे कोई नहि। कोई मां नहि, कोईडर नहि, कोई रुकावट नहि। मे अपने भइया केँ संग अकेली रहूँगी। उसेछू सकूँगी, चूम सकूँगी, उसे पूरीतरह महसूस कर सकूँगी।
मेरी बुर जल्दी गीली होनेलगी। मैंने अपने हाथों कों अपनी जाँघों पऱ दबा लिया ताकि काँपना रुकजाए। अंदर सें मे पागल हौ रही थि — खुशी, बेचैनी, औऱ जंगली कामना कां एक् संग उफान।
मैंने बाहर् सें बिल्कुल सामान्य चेहरा बनाएरखा, मगर अंदर सें मेरे होंठों पर्र एक् गहरी, शरारती मुस्कान खेलरही थि।
अब मे नितिन भैया कों पूरीतरह अपनाबना लूँगी। अबकोई बहाने नहि, कोईडर नहि। मे उसे चूमूँगी, उसके लन्ड कों छूँगी, उसे अपनी बुर मे लूँगी। दोदिन तक हम् दोनों बिना रुके एक्-दूसरे कों चोद सकेंगे।
मगर बाहर् सें मैंने कुछ भि नहि दिखाया। मेरा चेहरा पूरीतरह सामान्य औऱ बेपरवाह बनारहा।
मां नें मोबाइल रखकर गहरी साँसली। मैंने जल्दी चिंतित स्वर मे पूछा,
“माँ, क्याँ हुआ? मामीजी कि तबीयत अधिक खराब हैं क्याँ?”
मां नें थोड़ी परेशान आवाज़ मे कहा, “हाँ बेटा। मामाजी बहोत टेंशन मे थें। मामीजी कों अचानक तेज बुखार औऱ कमजोरी होँ गई हैं। डॉक्टर नें कुछ टेस्ट करवाने कों कहा हैं। मामाजी अकेले हैंडल नहि करपारहे। ”
मैंने सहानुभूति दिखाते हुएकहा, “ओह। बहोत बुराहुआ। मामीजी कों पहले सें हि ब्लड प्रेशर कि प्रॉब्लम थि नाँ? अब क्याँ करोगी?”
माँ नें गरमचाय कां कप उठाते हुए जवाब दिया, “मैंने बापू सें बातकर ली हैं। आजसाम कों मे चली जाऊँगी। दोदिन वहा रहकर देखती हूं। तुम् औऱ नितिन घऱ पर्र अकेले रहना। खानां-पीना ठीक सें खानां, औऱ पढ़ाई पऱ ध्यान देना। ”
मैंने चिंता जताते हुएसिर हिलाया, “हाँ माँ, आप् बिल्कुल टेंशन मतलो। मे औऱ भैया घऱ संभाल लेंगे। आप् मामीजी कि देखभाल करके जल्द सें ठीक करवाकर वापस आँ जानां। ”
माँ नें मेरेसिर पर्र प्रेम सें हाथ फेरा औऱ बोलीं, “मेरी अच्छी बच्ची ….। स्वाती बेटा, जाकर नितिन कों उठादो। कहना कि जल्द सें सजधजकर हौ जाए। ”
“ठीक हैं माँ, ” मैंने नॉर्मल स्वर मे कहा।
मैंने मुड़कर रसोई सें बाहर् निकलते हुए अंदर हि अंदर एक् गहरी, शरारती मुस्कान रोकी। मेरे होंठों पऱ वोँ मुस्कान खेलरही थि जोँ किसी कों दिख नहि रही थि।
दोदिन। पूरेदो दिन मात्र मे औऱ नितिन भैया!
मेरादिल इतनीतेज धड़करहा थां कि मुझेडर लगरहा थां कहीं मां सुन नं लें। मेरी बुर अब बुरीतरह गीली औऱ फड़करही थि। हरकदम केँ संग मेरी जाँघें रगड़खा रहीथीं।
मे नितिन भैया केँ कमरे कि तरफ जातेहुए मन हि मनसोच रही थि.
“आजसाम कों माँ चली जाएँगी। फिनयह घऱ मात्र हम् दोनों कां होगा। अब मे तुम्हें रोक नहि पाऊँगी भैया। औऱ नं तुम् मुझे.
मे नितिन भैया केँ कमरे कि तरफबढ़ रही थि, मगर अचानक एक् विचार मेरे दिमाग़ मे कौंध गय़ा।
यह विचार मुझेउन गरम-गरम इनसेस्ट कहानियों मे सें एक् सें यादआया, जोँ मैंने पढ़ीथीं। उसकथा मे बेहन नें अपने भइया कों चॉकलेट सें सिड्यूस किया थां। बस एक् छोटा-सां किटकैट। औऱ फिन धीरे धीरेसभी कुछ शुरुआत हौ गय़ा थां।
मेरामन एकदम सें उछल पड़ा।
“हाँ। यह आइडिया परफेक्ट हैं। ”
मे जल्दी घूमकर अपने कमरे मे गई। दिल कि धड़कन अब औऱ तेज हौ गई थि। मैंने ड्रेसिंग टेबल केँ दराज सें एक् किटकैट चॉकलेट कां सिंगल फिंगर निकाला। उसेहाथ मे लेकर एक् लम्हा केँ लिए देखा औऱ शरारती मुस्कान आँ गई।
मे कल्पना करनेलगी.
मे इस चॉकलेट कों अपने होंठों केँ बीच रखूँगी। आधा बाहर् लटकता हुआ। औऱ भैया केँ सामने जाऊँगी। वोँ देखते हि समझ जाएगा। फिन वोँ स्वयं-ब-स्वयं मेरेपास आएगा। मेरे होंठों सें चॉकलेट चूसेगा। औऱ आहिस्ता मेरे होंठों कों चूसने लगेगा।
इस ख्याल सें मेरी बुर फिन सें एक् झटके सें गीली हौ गई। मैंने जाँघें कसकर दबाईं।
मैंने चॉकलेट कों अपनी हथेली मे छुपाकर नितिन भैया केँ कमरे कि तरफबढ़ गई। हरकदम केँ संग मेरी साँसें औऱ भारी होतीजा रहीथीं। मेरी नाइटी मेरी जाँघों पऱ चढ़ी हुईँ थि। मेरी ब्रेस्ट्स हल्के-हल्के हिलरही थीं।
मेरादिल इतनीतेज धड़करहा थां कि मुझेलग रहा थां बाहर् सें भि सुनाई देरहा होगा। मगर इसबार डर केँ संग-संग एक् जंगली उत्तेजना भि थि।
“आज मे अपने भइया कों सिड्यूस करने वाली हूं. उसके सामने खड़ी होकर। चॉकलेट अपने होंठों पऱ रखकर। मे उसे आमंत्रित करूँगी। औऱ फिन। जोँ होना हैं, वोँ होगा। ”
मे उनके कमरे केँ दरवाजे केँ पास पहुँच गई। एक् गहरी साँसली, अपने चेहरे पऱ एक् मासूम-सि मुस्कान लाई, औऱ धीरे-धीरे सें दरवाजा खटखटाया।
नितिन अभि भि सोरहा थां। मैंने दरवाजा धीरे-धीरे सें बंद किया औऱ उसकेबेड केँ पास चुपचाप चली गई।
“भैया। उठो नां, ” मैंने बहोत नरम औऱ मीठी आवाज़ मे कहा, “माँ बुलारही हें। ”
नितिन नें आँखें खोलीं। मुझे देखते हि उसकी आँखों मे वही गहरीभूख उभरआई, जोँ अबछुप नहि पारही थि। मैंने शरारती मुस्कान केँ संगकहा, “तुम् फ्रेश होँ जाओ। मे प्रतीक्षा कररही हूं। ”
नितिन बाथरूम चला गय़ा। जब वोँ वापसआया, तोँ मात्र एक् काली ट्रैक पैंट पहनेहुए थां। उसकी छाती पूरीतरह नंगी थि, बाल अभि भि गीले थें, औऱ पानी कि बूँदें उसकी मांसल छाती पऱ चमकरही थीं। वोँ बेहदहॉट औऱ मर्दाना लगरहा थां।
मे पहले सें हि उसकेबेड पऱ आहिस्ता बैठ चुकी थि। मेरी पिंक नाइटी मेरी जाँघों तक ऊपर चढ़ी हुई थि, जिससे मेरी मोटी, चिकनी जाँघें करीब पूरीतरह नंगीदिख रहीथीं।
नितिन मेरे सामने खड़ा हौ गय़ा। उसकी आँखें मेरीतरफ थीं — मेरी जाँघों पर्र, मेरी ब्रेस्ट्स पर्र, औऱ मेरे होंठों पर्र रुकरही थीं।
मैंने धीरे-धीरे सें एक् किटकैट चॉकलेट कां छोटा टुकड़ा उठाया। अपनी आँखों मे शरारत, सरम औऱ गहरी चाहत भरकरउसे देखा। मेरी आवाज़ बहोत नरम, मादक औऱ सिडक्टिव थि:
“नितिन भैया। चॉकलेट खाओगे?”
मैंने बात करतेहुए चॉकलेट कों अपनीनरम, गुलाबी होंठों केँ बीचरख लिया। आधा टुकड़ा मेरे मुँह केँ अंदर थां औऱ आधा बाहर् लटकरहा थां। मे जानबूझकर होंठों कों थोडा सां खोलकर उसे ललचारही थि।
मे मन हि मन कल्पना कररही थि.
काश वोँ आगेआए। मेरे होंठों सें चॉकलेट चूसे। औऱ फिन मेरे होंठों कों चूसने लगे। काश वोँ मुझेबेड पऱ धकेलदे औऱ इस चॉकलेट कि मिठास मेरे पूरे जिस्म पर्र फैलादे.
नितिन कां गलासूख गय़ा। वोँ एक् लम्हा केँ लिए रुका, फिन धीरे धीरे मेरेपास आया औऱ बेड पर्र घुटनों केँ बलबैठ गय़ा। अब हम् दोनों बेहद लगभग थें। उसकीगरम साँसें मेरे चेहरे पर्र पड़रही थीं।
मैंने अपनी आँखें आधेबंद करलीं औऱ चॉकलेट कों होंठों पर्र औऱ थोडा आगे बढ़ा दिया, जैसेउसे आमंत्रित कररही हूं.
वोँ आगे झुका। उसका चेहरा मेरे चेहरे केँ इतना लगभग आँ गय़ा कि मे उसकीगरम साँसें अपने होंठों पऱ महसूस कररही थि। उसने धीरे-धीरे सें अपना मुँहआगे बढ़ाया औऱ चॉकलेट केँ बाहर् वाले हिस्से कों अपने होंठों मे लें लिया।
हमारे होंठ एक्-दूसरे कों हल्का-हल्का छूरहे थें।
नितिन नें धीरे धीरे चॉकलेट चूसना शुरुआत किया। जैसे-जैसे वोँ चॉकलेट खारहा थां, उसके होंठ मेरे होंठों कों भि चूसने लगे। चॉकलेट कि मिठास हमारे दोनों केँ होंठों पर्र फैलरही थि। मैंने अपनी आँखें आधेबंद करलीं औऱ हल्के सें काँप गई।
फिन अचानक.
नितिन नें बाकीबचा चॉकलेट भि अपने मुँह मे लें लिया औऱ मेरे होंठों कों पूराचूस लिया।
उसकाकिस अब बहोत गहरा औऱ भूखा होँ चुका थां। उसकेगरम, नरम होंठ मेरे होंठों कों जोर सें चूसरहे थें। उसकीजीभ मेरे होंठों कि सील कों चीरकर अंदरघुस आई। मेरीजीभ सें टकराई औऱ उसे लिपट गई।
हम् दोनों कि जीभें एक्-दूसरे कों चूसने, घुमाने औऱ चाटने लगीं। चॉकलेट कि मिठास औऱ हमारी लार एक् संगमिल रही थि। किस इतना गहरा, इतना जुनूनी थां कि मेरी साँसें उखड़गईं। मैंने अपने दोनों हाथ उसकेगले मे डालदिए औऱ उसे औऱ लगभग खींच लिया।
नितिन कि एक् मजबूत भुजा मेरीकमर केँ पीछे सें घुस गई औऱ मुझे अपनीतरफ खींच लिया। मेरी छाती उसके सीने सें दब गई। उसके होंठअब मेरे होंठों कों काटरहे थें, चूसरहे थें, औऱ फिन सें प्रेम सें चूमरहे थें।
मे हल्के सें कराहउठी — “म्म्म्म। नितिन.”
उसकाकिस अब पूरीतरह भूखा औऱ गहरा होँ चुका थां। जैसे वोँ महीनों सें मेरा स्वाद चखना चाहता होँ। हम् दोनों केँ मुँह मे चॉकलेट कि मिठास औऱ हमारी गर्मी घुलमिल गई थि।
मेरी बुर पूरीतरह गीली होँ चुकी थि औऱ मे बस उसके होंठों मे खोतीजा रही थि.
मैंने उसेरोक दिया।
“भैया। अभि नहि.” मैंने काँपते हुए फुसफुसाया, “माँ साम कों बाहर् जारही हें। दोदिन केँ लिए। आज साम केँ बाद। हम् पूरीतरह अकेले होंगे। ”
नितिन कि आँखों मे भूख औऱ बेसब्री थि।
मैंने उठकर उसकी नंगी छाती पर्र गहरा चुंबन किया। फिन जीभ सें उसकी छाती कों चाटा। उसके निप्पल कों हल्का सां काटा।
“रुकजाओ। बसकुछ घंटे.” मैंने उसकेकान मे फुसफुसाया, “फिन मे पूरीतरह तुम्हारी होँ जाऊँगी। ”
नितिन नें मेरीकमर पकड़ली, मगर मैंने उसेरोक दिया। औऱ उसेआँख मारकर कमरे सें बाहर् निकल गई।
मेरा पूरा जिस्म काँपरहा थां। मेरी बुर इतनी गीली थि कि चलते वक्त भि महसूस हौ रहा थां।
मे मन हि मनसोच रही थि — “आजसाम। बसआजसाम.”
स्वाती विद्यालय पहुँचते हि पूरीतरह बेचैन थि।
मां दोपहर मे हि मामाजी केँ घऱचली गई थीं। घऱ मे अब केवल नितिन औऱ स्वाती रहने वाले थें — पूरेदो दिन तक। इस एक् ख्याल नें स्वाती कों अंदर सें पूरीतरह पागलकर रखा थां। उसकामन बार-बार घऱ कि तरफ भागने कों कहरहा थां।
क्लास मे बैठते हि उसकीनजर सबसे पहले घड़ी पऱ गई। सुभह केँ १०:१५बजे थें। अभि साम होने मे बहोत वक़्त बाकी थां। स्वाती नें गहरी साँसली। उसकी जाँघें आपस मे कसकर सिकुड़ गईं।
‘मां चली गई हें। घऱ मे केवल भैया औऱ मे। पूरेदो दिन.’
ये सोचते हि उसके जिस्म मे एक् गरमलहर दौड़ गई। उसकी बुर हल्की-हल्की गीली होनेलगी। वो बार-बार करवटबदल रही थि। टीचरकुछ पढ़ारही थीं, मगर स्वाती केँ कान पऱ कुछ नहि पड़रहा थां।
उसकेमन मे मात्र नितिन घूमरहा थां।
‘अब भैया घऱ पऱ क्याँ कररहे होंगे? क्याँ वोँ भि मेरे बारे मे सोचरहे हें? क्याँ उनकी पैंट मे उभार आँ रहा होगा? क्याँ वोँ मुझेयाद करकेमुठ माररहे होंगे?’
स्वाती कि साँसें तेज होँ गईं। उसने अपनी जाँघें औऱ कसकर दबाईं। क्लास मे बैठे-बैठे हि उसे नितिन कि नंगी छाती, उसकी सेक्सी आर्मपिट्स, उसके मजबूत एब्स औऱ उसकी पैंट केँ अंदर कां मोटा उभारयाद आँ रहा थां।
‘आजसाम। जैसे हि घऱ पहुँचूँगी। मे सीधे उसके कमरे मे जाऊँगी। नाइटी कां ऊपरीबटन खोलकर। फिन देखूँगी केसे वोँ स्वयं पर्र काबू नहि रख पाता.’
स्वाती कि कल्पना मे नितिन उसे दीवार सें सटाकर जोर सें किसकर रहा थां। उसकी उँगलियाँ स्वाती कि जाँघों पर्र सरकरही थीं। स्वाती अनजाने मे हि अपनी जाँघों कों रगड़ने लगी। उसकी बुर अब पूरीतरह गीली होँ चुकी थि।
‘क्याँ वोँ मुझेबेड पऱ धकेल देगा? क्याँ वोँ मेरी नाइटी ऊपर करके मेरी बुर कों चाटेगा? आह। भैया.’
स्वाती नें आँखें बंदकर लीं। उसके निप्पल्स हार्ड हौ चुके थें। वो कल्पना कररही थि कि नितिन उसकेऊपर हैं, उसका मोटा लन्ड उसकी टाइट बुर मे धीरे धीरेघुस रहा हैं।
“स्वाती! क्याँ होँ रहा हैं तुम्हें? ध्यान कहां हैं?”
अंग्रेजी टीचर कि आवाज़ नें उसे चौंका दिया। स्वाती नें झटके सें आँखें खोलीं। पूरा क्लास उसकीतरफ देखरहा थां।
“सॉरीमैम.” स्वाती नें शर्माते हुएकहा, मगर अंदर सें जलरही थि।
बेल बजने कां प्रतीक्षा उसेमार रहा थां। हर मिनट जैसे घंटाबन गय़ा थां। वो बार-बार घड़ीदेख रही थि। उसकी जाँघें आपस मे रगड़रही थीं। उसकी बुर मे अब हल्का-हल्का दर्द सां होँ रहा थां — भइया सें मिलन मे, देरी कां दर्द।
‘जल्द। जल्द। मे घऱ जानां चाहती हूं। नितिन भैया। मे आपकी हूं। आज पूरीतरह आपकी होँ जाऊँगी.’
आखिरकार फाइनल बेलबजी। स्वाती नें बैग उठाया औऱ जैसेजान मे जानआई। वो तेज कदमों सें विद्यालय गेट कि तरफ भागी।
स्वाती तेज कदमों सें क्लास सें बाहर् निकली। उसकादिल जोर-शोर सें धड़करहा थां। माँ केँ जाने केँ बादघऱ मे मात्र नितिन औऱ वो अकेले रहने वाले थें — पूरेदो दिन तक। इस ख्याल नें उसके पूरे जिस्म मे आगलगा रखी थि।
वो विद्यालय गेट कि तरफ भागते हुएसोच रही थि — ‘बसकुछ हि देर.घऱ पहुँचते हि मे नितिन भैया केँ कमरे मे जाऊँगी। इसबार कोई रुकावट नहि होगी.’
मगर तभी.
“स्वाती! इधरआओ। ”
मैथ्स टीचरमिस रेनू कि तेज आवाज़ नें उसेरोक लिया।
स्वाती कां चेहरा एकदमउतर गय़ा। उसकी आँखों मे निराशा औऱ बेचैनी छा गई। उसने मुड़कर टीचर कि तरफ देखा, मगर उसका पूराबदन घऱ कि तरफ खिंचा जारहा थां।
“मैम। अभि.?” स्वाती नें अधीर औऱ थोड़ी काँपती हुईँ आवाज़ मे पूछा।
“हाँ बेटा, तुम्हारे पिछले टेस्ट केँ कुछ इम्पोर्टेन्ट सम्स डिसकस करने हें। बस १०-१५ मिनट लगेंगे, ” मिस रेनू नें मुस्कुराते हुएकहा।
स्वाती कों लगा जैसे किसी नें उसकेगले पऱ छुरीरख दि हौ। उसकामन चीखउठा — ‘नहि मैम। प्लीज। मुझेघऱ जानां हैं। नितिन भैया प्रतीक्षा कररहे होंगे.’
मगर बाहर् सें वो जबरन मुस्कुराई औऱ अनमने मन सें टीचर केँ संग स्टाफ रूम कि तरफचल दि।
टीचर लगातार बोलरही थीं — पिछले टेस्ट केँ सम्स, गलतियाँ, कंसेप्ट्स। मगर स्वाती केँ कान मे कुछ नहि जारहा थां। उसका पूरा ध्यान घऱ पर्र थां — नितिन पऱ।
वो बार-बार घड़ीदेख रही थि। हर मिनटउसे घंटे जैसालग रहा थां। उसकेमन मे लगातार एक् हि ख्याल घूमरहा थां:
‘अब कितना वक्त बाकी हैं। भैया घऱ पऱ क्याँ कररहे होंगे? क्याँ वोँ भि मेरे बारे मे सोचरहे हें?
स्वाती कि जाँघें आपस मे कसकर सिकुड़ गईं। उसकी बुर दिनभर सें गीली थि, औऱ अब टीचर केँ संग बैठे-बैठे औऱ भि ज़्यादा पसीजरही थि।
“स्वाती, तुम् आज ध्यान कहां होँ बेटा?” मिस रेनू नें अचानक पूछा।
स्वाती चौंक गई। उसने जबरन मुस्कुराते हुएकहा, “सॉरीमैम। थोडा। घऱ कां ध्यान आँ गय़ा थां। ”
अंदर सें वो जलभून रही थि। हर सेकंड उसेमार रहा थां। उसकी उँगलियाँ कुर्सी कों कसकर पकड़े हुएथीं। उसकी कल्पना मे नितिन उसकेऊपर थां, उसका मोटा लन्ड उसकी टाइट बुर मे धीरे धीरेघुस रहा थां।
“उफ्फ.” वो अनजाने मे हि हल्का सां कराहउठी, फिन जल्दी स्वयं कों संभाला।
आखिरकार १५-२० मिनटबाद मिस रेनू नें कहा, “ठीक हैं, अब तुम् जा सकती होँ। ”
स्वाती जैसेजान मे जानआई। वो तेजी सें उठी, “थैंकयू मैम, ” कहकर स्टाफ रूम सें बाहर् निकली।
वो विद्यालय गेट कि तरफ भागते हुएजा रही थि। उसकी साँसें तेजथीं। उसकी बुर अब इतनी गीली थि कि चलते वक़्त भि उसे महसूस होँ रहा थां।
मगर भाग्य नें फिन धोखा दिया।
“स्वाती! रुक तोँ सही!”
उसकी सबसे अच्छी फ्रेंड प्रिया नें उसे पीछे सें पकड़ लिया।
स्वाती कां चेहरा एकदमउतर गय़ा। उसकादिल जोर सें धड़कउठा। वो मुड़कर प्रिया कि तरफ देखते हुए जबरन मुस्कुराई, मगर अंदर सें उसकामन चीखरहा थां।
“अरेआज तूँ इतनी जल्द क्यूं भागरही हैं? चल नाँ, थोड़ी देर गप्पें मारते हें। कल वाली जश्न कि बात करनी हैं। कौन-कौन आएगा, क्याँ पहनेंगे, सभी डिस्कस करना हैं, ” प्रिया नें कहा औऱ स्वाती कां हाथ पकड़ लिया।
स्वाती कां मनचीख उठा। वो अंदर सें पूरीतरह पागल होँ रही थि।
‘मुझेघऱ जानां हैं। नितिन भैया प्रतीक्षा कररहे होंगे। उनकी छाती। उनकी जाँघें। उनका मोटा लन्ड। मुझे अभि उनकेपास जानां हैं। प्लीज प्रिया, मुझे छोड़दो.’
मगर बाहर् सें वो मुस्कुराई औऱ बोलीं, “हाँ.ठीक हैं। बस५ मिनट.”
प्रिया नें स्वाती कों विद्यालय केँ गेट केँ पास बेंच पर्र बिठा लिया औऱ लगातार बोलने लगी — बर्थडे पार्टी, कपड़े, लड़के, औऱ तरह-तरह कि गप्पें। स्वाती मुस्कुरा रही थि, सिर हिलारही थि, मगर उसका पूरा ध्यान कहीं औऱ थां।
उसकीनजर बार-बार घड़ी पऱ जारही थि। हर मिनटउसे घंटे जैसालग रहा थां। उसकेमन मे लगातार नितिन कि कल्पनाएँ घूमरही थीं — नितिन उसे दीवार सें सटाकर जोर सें किसकर रहा हैं, उसकी स्कर्ट ऊपरकर रहा हैं, उसकी गीली बुर कों उँगलियों सें सहलारहा हैं, उसका मोटा लन्ड उसकी बुर केँ मुंह पऱ रगड़रहा हैं.
स्वाती कि जाँघें आपस मे कसकर सिकुड़ गईं। उसकी बुर पहले सें हि पूरीतरह गीली थि। वो अनजाने मे हि अपनी जाँघें रगड़रही थि। प्रिया कुछबोल रही थि, मगर स्वाती कों कुछ सुनाई नहि देरहा थां।
‘नितिन भैया। अब कितना प्रतीक्षा। मे आँ रही हूं। मेरी बुर आपकी उँगलियों केँ लिएतरस रही हैं.’
प्रिया नें पूछा, “अरे तूँ आज इतनीचुप क्यूं हैं? कुछहुआ हैं क्याँ?”
स्वाती नें जबरन हँसते हुएकहा, “नहि। बस। थोडा थक गई हूं। ”
अंदर सें वो जलरही थि। १० मिनटबीत गए, फिन १५ मिनट। स्वाती केँ लिएयह टाइम सालों जैसालग रहा थां। उसकी बुर मे अब हल्का दर्द होनेलगा थां — भइया केँ लन्ड केँ अहसास कां दर्द।
आखिरकार किसीतरह प्रिया सें छुटकारा पाकर स्वाती विद्यालय गेट सें बाहर् निकली। उसने जल्दी ऑटो पकड़ा औऱ घऱ कां पता बताया।
ऑटो मे बैठकर वो बार-बार घड़ीदेख रही थि। उसकी जाँघें आपस मे तेज़-तेज़ सें रगड़रही थीं। उसकी साँसें भारी होँ गई थीं। वो मन हि मन दोहरा रही थि,
“नितिन भैया। अबबसकुछ देर। मे आँ रही हूं। आज मे आपको पूरीतरह अपनाबना लूँगी। आपकी ख़्वाहिश पूरी करूँगी। मेरी बुर। मेरी ब्रेस्ट्स। मेरी आर्मपिट्स। सभीकुछ आपका हैं आज.”
बहोत-बहोत थैंकयू! आपकायह कामुक कमेंट पढ़कर अच्छा लगा। अभि तौ seduction शुरुआत हुईँ हैं, आगे औऱ भि हॉट एपसोड आने वाला हैं प्रतीक्षा करते रहिए. ~ स्वाती
प्यास जोँ बढ़ती हि जाये – New Episode
Update 23
नई शुरुआत – स्वाती कि नईभूख
फ्लॅशबैक : स्वाती कि स्टोरी (भाग 7)
स्वाती नें ऑटो सें उतरते हि घऱ कि तरफ भागते हुएकदम बढ़ाए। उसकादिल जोर-शोर सें धड़करहा थां। विद्यालय सें निकलने केँ बाद सें उसकी बुर लगातार गीली थि। उसने कल्पना कररखी थि कि जैसे हि घऱ पहुँचेगी, नितिन उसे दरवाजे पऱ हि पकड़ लेगा, दीवार सें सटाएगा औऱ जोर सें किस करेगा।
उसने तेजी सें दरवाजा खोला औऱ अंदर घुसी।
“भैया.!” उसने उत्साह सें आवाज़ लगाई।
मगर घऱ मे सन्नाटा थां।
स्वाती नें चारों तरफ देखा। नितिन कां जूता दरवाजे पऱ नहि थां। लिविंग रूम खाली थां। उसकारूम भि सूना पड़ा थां।
“भैया.?” उसनेफिन सें पुकारा, मगरकोई जवाब नहि आया।
स्वाती कां चेहरा एकदमउतर गय़ा। उसकी साँसें रुकगईं। वो कुछसमय तक वहीं खड़ीरही, जैसे यकीन हि नहि हौ रहा थां।
‘यह क्याँ। माँ गई। औऱ भैया भि नहि हैं? आज कां दिन। जौ मैंने इतने दिनों सें सपना देखा थां.’
उसकामन पूरीतरह टूट गय़ा। उसनेबैग फेंक दिया औऱ सोफे पऱ बैठ गई। उसकी जाँघें अभि भि आपस मे रगड़रही थीं। बुर मे अब दर्द जैसा हौ रहा थां।
‘क्याँ करूँ? उन्हें फोन करूँ याँ नहि? अगरफोन किया तौ वोँ सोचेंगे कि मे कितनी बेसब्र हूं। मगरअगर नहि किया तोँ.’
स्वाती नें कुछदेर तक हाथ मे मोबाइल लिए सोचा। उसकी उँगलियाँ काँपरही थीं। आखिरकार उसने हिम्मत करके नितिन कों कॉलआई कर दिया।
दूसरी घंटी पऱ नितिन नें मोबाइल उठाया।
“हैलो स्वाती.”
“भैया। आप् कहां हें?” स्वाती नें अधीर स्वर मे पूछा।
नितिन नें थोड़ी व्यस्त आवाज़ मे बताया, “मे अभि गवर्मेंट ऑफिशल्स केँ संग हूं। फैक्ट्री केँ पेपरवर्क औऱ परमिशन केँ लिए मीटिंग हैं। बहुत इम्पोर्टेन्ट काम हैं। शायदलेट होँ जाऊँ। तुम् डिनरकर लो औऱ घऱ कों अंदर सें लॉककर लेना। मे खानां उन लोगों केँ संगखा लूँगा। ”
स्वाती कां दिलबैठ गय़ा।
“ओके.” वो धीरे-धीरे सें बोलीं। उसकी आवाज़ मे निराशा साफझलक रही थि।
नितिन नें पूछा, “क्याँ हुआ?सभी ठीक तोँ हैं नां?”
“हाँ.ठीक हैं, ” स्वाती नें जबरनकहा औऱ मोबाइल काट दिया।
वो सोफे पर्र बैठीरही। पूराघऱ सुनसान थां। माँ नहि थीं। नितिन भि नहि थां। वोँ दोदिन जोँ उसने सपनों मे सजाए थें, अचानक सूनेपड़ गए थें।
स्वाती नें आँखें बंदकर लीं। उसकी साँसें भारीथीं। उसकी बुर अभि भि गीली थि, मगरअब निराशा नें उसेघेर लिया थां। वो मन हि मनसोच रही थि,
‘आज कां दिन। जोँ मैंने इतने दिनों सें प्रतीक्षा किया थां। सभी व्यर्थ हौ गय़ा। भैया केँ बिनायह घऱ.यहरात। कितनी सूनीलग रही हैं। मे तौ उनके स्पर्श केँ लिएतरस रही थि। उनकी उँगलियों केँ लिए। उनकीजीभ केँ लिए। उनके मोटे लन्ड केँ लिए.’
उसने अपनी जाँघों कों कसकर दबाया। उसकी आँखों मे पानी आँ गय़ा, मगर वोँ हँस पड़ी।
“क्याँ करूँअब। अकेले-अकेले झड़ जाऊँ? याँ उनकेआने कां प्रतीक्षा करूँ?”
स्वाती उठी, दरवाजा अंदर सें लॉक किया औऱ बेडरूम मे चली गई। उसने नाइटि पहनी, मगर नींद नहि आँ रही थि। वो बेड पर्र लेटकर नितिन केँ बारे मे सोचरही थि — उसकी छाती, उसकी आर्मपिट्स, उसका लन्ड। औऱ प्रतीक्षा कररही थि कि कब वोँ घऱ आएगा।
स्वाती बेडरूम मे बेड पर्र लेटी हुइ थि। घऱ मे सन्नाटा थां। नितिन केँ आने कां प्रतीक्षा उसेमार रहा थां। उसकी बुर अभि भि गीली थि औऱ जिस्म मे एक् अनियंत्रित बेचैनी थि। वो करवटें बदलरही थि, मगर नींद नहि आँ रही थि।
अचानक उसकेमन मे एक् आईडिया कौंधा।
“क्यूं नं मे स्वयं उसे बुलालूँ.”
स्वाती उठकर आईने केँ सामने खड़ी हौ गई। उसने अपनी नाइटी कों थोडा औऱ नीचे खींचा, ताकि क्लीवेज औऱ गहरा दिखे। फिन उसने बालों कों खोलकर कंधों पर्र बिखेर दिया। उसकेगाल अभि भि उत्तेजना सें लाल थें। आँखें नम औऱ भारीथीं। होंठ थोड़े सूजेहुए थें।
वो बेड पऱ वापसबैठ गई, मोबाइल कों सेल्फी मोड़ मे किया औऱ रिकॉर्डिंग शुरुआत कर दि।
उसनेनरम, डरी हुइ मगर सिडक्टिव आवाज़ मे कहा,
“भैया। मे अकेली हूं घऱ पर्र। माँ चली गई हें। मुझे बहोत डरलगरहा हैं.
आप् जल्द सें घऱ आँ जाइए नाँ.
प्लीज। मे अकेले मे बिल्कुल नहि रहपारही हूं। ”
कैमरे मे वो जानबूझकर आगे झुकी, ताकि उसकी ब्रेस्ट्स कां गहरा क्लीवेज साफ दिखे। उसने एक् बार अपनी जाँघ कों हल्का सां सहलाया औऱ फिन फुसफुसाया,
“भैया। जल्दआइए। मे प्रतीक्षा कररही हूं। ”
वीडियो ख़त्म करते हि स्वाती नें उसे नितिन कों भेज दिया।
स्वाती आँखें बंद करकेबेड पर्र लेट गई। उसकी साँसें भारीथीं, उसका पूराबदन अभि भि बेचैनी सें काँपरहा थां। वो आहिस्ता अपनी कल्पनाओं मे खो गई.
नितिन घऱआता हैं। दरवाजा बंद होते हि वो उसकेपास आकर खड़ा हौ जाता हैं। स्वाती कि साँसें रुक जाती हें। नितिन धीरे-धीरे सें उसकी ठोड़ी कों ऊपर उठाता हैं औऱ बहोत प्रेम सें, बहोत गहरेभाव सें उसके होंठों पर्र किस करता हैं।
उसकाकिस इतनानरम, इतना भावुक औऱ इतना प्रेम भरा होता हैं कि स्वाती कि आँखों मे आँसू आँ जाते हें। नितिन उसके होंठों कों धीरे धीरे चूसता हैं, फिन उसके गालों पर्र, आँखों पऱ, माथे पर्र किस बरसाता हैं।
“स्वाती। मे तुम्हें बहोत चाहता हूं.” वो फुसफुसाता हैं।
स्वाती उसेगले लगा लेती हैं। नितिन उसकी गर्दन मे अपना चेहरा छिपा लेता हैं औऱ उसकी गर्दन कि खुशबू कों गहरी साँसों मे अंदर लेता हैं। स्वाती सिहर उठती हैं। नितिन उसके कंधों पऱ हल्के-हल्के चुंबन बरसाता हैं, फिन धीरे-धीरे सें उसकी नाइटी कां एक् कंधा सरकाकर उसके नाजुक कंधे कों चूमता हैं।
स्वाती कि आँखें बंद हौ जाती हें। वो नितिन कि छाती सें चिपक जाती हैं। नितिन उसे अपनी बाहों मे भर लेता हैं। दोनों देर तक एक्-दूसरे कों गले लगाए खड़े रहते हें। नितिन उसके बालों मे नाक गाड़कर उनकी खुशबू लेता हैं। स्वाती उसकी छाती पऱ अपना चेहरा रखकर उसके जिस्म कि मर्दाना महक कों अंदर लेती हैं।
“भैया। आपकी खुशबू। मुझे पागलकर देती हैं, ” वो फुसफुसाती हैं।
नितिन उसेबेड पर्र लें जाता हैं। दोनों एक्-दूसरे कि बाहों मे लेट जाते हें। नितिन उसके कंधे, गर्दन, कान केँ पीछे, औऱ फिन आहिस्ता उसकीपीठ पर्र चुंबनों कि बारिश करता हैं। स्वाती उसकी छाती, उसके मजबूत बाजुओं औऱ उसकी आर्मपिट्स कि मर्दाना खुशबू कों सूँघती हैं।
दोनों एक्-दूसरे केँ जिस्म कि गर्मी, खुशबू औऱ नाजुक स्पर्श मे खो जाते हें। कोई जल्दबाजी नहि, कोई हड़बड़ी नहि — केवल गहरा, कोमल औऱ पहला प्रेम।
स्वाती ख्वाब मे नितिन कि छाती सें चिपकी हुइ फुसफुसाती हैं,
“भैया। मे आपको बहोत प्रेम करती हूं। बहोत दिनों सें.”
स्वाती अपनी कल्पनाओं कि गहराई मे इतनीखो गई थि कि उसेहोश हि नहि रहा। नितिन कि छाती सें चिपके, उसके चुंबनों औऱ गरम साँसों कि कल्पना मे वो पूरीतरह भीग चुकी थि। अचानक उसे बहोत गर्मी महसूस होनेलगी।
उसकाबदन पसीने सें तर थां।
स्वाती नें धीरे धीरे अपनी भारी पलकें खोलीं।
कमरे मे मात्र बेडसाइड लैंप कि हल्की, गुलाबी-नारंगी रोशनी थि, जोँ उसके जिस्म पर्र एक् सिडक्टिव चमक बिखेर रही थि। एसीबंद थां, इसलिये पूरारूम गरम औऱ उमसभरा हौ चुका थां। हवा मे नमी औऱ उसके नशीले शरीर कि खुशबू कां मिश्रण थां।
स्वाती कां पूराबदन पसीने सें तर-बतर थां।
उसकी ट्रांसपैरंट नाइटी अब पूरीतरह भीग चुकी थि औऱ उसकी गोरी, नाजुक स्किन सें चिपक गई थि। नाइटि कां पतला कपड़ा उसके जिस्म केँ हर कटाव कों बिना किसी रोक-टोक केँ उभाररहा थां। उसके भारी, गोल औऱ युवा बूब्ज़ नाइटी केँ अंदर सें साफदिख रहे थें — निप्पल्स हार्ड होकर कपड़े कों ऊपर कि तरफउभर रहे थें। पसीने कि वजह सें ब्रेस्ट्स कि गोरी स्किन चमकरही थि, औऱ क्लीवेज मे पसीने कि छोटी-छोटी बूँदें चमकरही थीं।
उसकी गर्दन औऱ गाल पसीने सें चमकरहे थें। कुछबाल उसकेगाल औऱ होंठों पऱ चिपकगए थें। उसकी पतलीकमर पऱ नाइटी पूरीतरह चिपकी हुईँ थि, जिससे उसकी नाजुक कटोरी जैसी नाभि भि हल्की-हल्की दिखरही थि।
सबसे सिडक्टिव दृश्य उसकी जाँघों कां थां। नाइटी इतनीऊपर सरक चुकी थि कि उसकी गोरी, मोटी औऱ चिकनी जाँघें करीब पूरीतरह खुली हुईँ थीं। पसीने कि वजह सें जाँघों कि स्किन चमकरही थि, औऱ अंदरूनी हिस्से पऱ पसीने कि छोटी-छोटी धाराएँ बहरही थीं।
स्वाती कि साँसें अभि भि भारीथीं। उसकी आँखें आधीबंद थीं। ख्वाब मे नितिन केँ संग बिताए पलों कि गर्मी अभि भि उसकेबदन मे बाकी थि। उसकी बुर पूरीतरह गीली औऱ फड़करही थि। वो धीरे-धीरे सें करवट बदली, जिससे उसकी नाइटी औऱ ऊपरसरक गई औऱ उसकी जाँघों केँ बीच कां नाजुक हिस्सा औऱ स्पष्ट हौ गय़ा।
वो मन हि मनसोच रही थि,
“भैया। आप् अभि तक नहि आए। मे तोँ आपकेलिए पूरीतरह सजधजकर हूं। मेरी बुर। मेरी चूचिया.मेरा पूरा शरीर.सभी कुछ आपके प्रतीक्षा मे तरसरहा हैं.”
स्वाती नें अपनी जाँघों कों हल्का सां रगड़ा। पसीने कि वजह सें उसकी स्किन चिपचिपी औऱ बेहद सेन्सिटिव हौ गई थि। हर हल्का स्पर्श भि उसे सिहरा रहा थां।
स्वाती कुछसमय तक छत कों देखती रही। उसकेमन मे अभि भि नितिन भैया कि छविघूम रही थि। उसकी साँसें भारीथीं। वो धीरे धीरे बुदबुदाई,
“नितिन भैया। आप् कितने हैंडसम होँ। आपकी चौड़ी छाती। आपकी मजबूत भुजाएँ। आपकी मर्दाना खुशबू। मुझे पागलकर देती हैं.”
उसकी आँखें नम होँ गईं। वो अपनी भीगी नाइटी कों छाती पर्र सें हटाने लगी, जिससे उसकी ब्रेस्ट्स कां पूरा उभार औऱ भि स्पष्ट होँ गय़ा।
“आओ नां भैया। अपनी छोटी बेहन केँ पास। देखो नां। उसका पूरा शरीर। रोम-रोम आपकानाम लेँ रहा हैं। आपकीराह देखरहा हैं.”
स्वाती नें अपनी जाँघों कों हल्का सां सहलाया। पसीने कि वजह सें उसकी स्किन चिपचिपी औऱ बेहद सेन्सिटिव हौ गई थि। हर स्पर्श उसे सिहरा रहा थां।
“भैया। आपकी गर्मी। आपकी छाती कि खुशबू। मुझे कितना तरसाती हैं। मे तोँ बस आपकी हूं। केवल आपकी.”
उसकी साँसें औऱ भारी होँ गईं। वो नितिन कि कल्पना मे खो गई — वोँ उसे अपनी मजबूत बाहों मे भर लेता हैं, उसके माथे पर्र, गालों पर्र, गर्दन पऱ प्रेम भरे चुंबन बरसाता हैं। स्वाती कि आँखें बंद हौ गईं।
“आज। जब आप् आएंगे। मे आपको रोकूँगी नहि। अपनी छोटी बेहन कों अपनी बाहों मे भर लीजिए भैया.
स्वाती अभि भि अपनी कल्पनाओं कि गहराई मे खोई हुई थि, जब अचानक कमरे मे एक् गहरी, परिचित औऱ भारी आवाज़ गूँजी —
“मे आँ गय़ा हूं स्वाती.”
प्यास जोँ बढ़ती हि जाये – New Episode
प्रिय पाठकों
आज मे आपको एक् छोटा सां एपसोड देरही हूं। असल मे कुछ technical issues कि वजह सें इमेजेस अपलोड नहि होँ पारही हें, जिसके लिए मे बहोत sorry हूं
मुझे स्वयं भि अच्छा नहि लगरहा हैं कि इसबार इमेजेस केँ बिनाभाग देनापड़ रहा हैं।
अगलीबार मे पूरी कोशिश करूँगी कि लंबा औऱ अधिकहॉट एपसोड इमेजेस केँ संग हि पोस्ट कर सकूँ।
आप् सबका प्रेम औऱ सपोर्ट बनारहे, यही मेरी ताकत हैं।
धैर्य रखने केँ लिए थैंकयू
~ स्वाती
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