प्यास जोँ बढ़ती हि जाये – New Episode
Update 24
नई शुरुआत – स्वाती कि नईभूख
फ्लॅशबैक : स्वाती कि कथा(भाग 8)
स्वाती केँ मुँह सें जबयह सुना कि नितिन भैया नें उन्हें पुकारा, रिया एकदम सें उत्तेजित हौ गई। उसकी आँखें चमक उठीं औऱ साँसें भारी हौ गईं।
“अरे वाउमैम.” रिया नें उत्सुकता औऱ कामुकता सें कहा।
उसने स्वाती कों टाइटली हगकर लिया। दोनों कि नंगी देहें एक्-दूसरे सें पूरीतरह चिपकगईं। रिया कि भरी-भरी ब्रेस्ट्स स्वाती कि ब्रेस्ट्स सें दबरही थीं। रिया नें स्वाती कि गर्दन मे अपना चेहरा छिपाया औऱ गहरी साँसली।
“तौ आखिरकार आपके भैया आँ गए.” रिया नें स्वाती कि ब्रेस्ट कों एक् हाथ सें दबाते हुए, भारी आवाज़ मे फुसफुसाया, “मैम.आगे बताइये नां जल्द। मे अब औऱ प्रतीक्षा नहि कर सकती.”
स्वाती मुस्कुराई। उसने रिया केँ बालों मे उँगलियाँ फेरते हुए उसके होंठों कों अपने होंठों सें चूम लिया। एक् लंबा, गहरा औऱ गीलाकिस। फिन स्वाती नें रिया केँ कान मे बहोत धीरे-धीरे, बहोत कामुक आवाज़ मे कहा,
“तुँ अब मेरी बुर कों सहलाती रह रिया। लगातार। आहिस्ता.
क्योंकि जब-जब मुझे नितिन भैया सें पहलीबार मिलने कि यादआती हैं। यह निगोड़ी बहोत कुलबुलाती हैं। बहोत गीली हौ जाती हैं.”
स्वाती नें रिया कि उँगलियों कों अपनी जाँघों केँ बीच लेँ जाकर अपनी भीगी बुर पऱ रख दिया।
“देख। अभि भि फड़करही हैं। बस उनकीयाद आते हि.”
रिया नें स्वाती कि बुर कों धीरे धीरे सहलाना शुरुआत कर दिया, जबकि स्वाती नें आँखें बंद करके पुरानी यादों मे खोतेहुए आगेकथा सुनानी शुरुआत कि.
स्वाती अभि भि अपनी कल्पनाओं कि गहराई मे खोई हुइ थि, जब अचानक कमरे मे एक् गहरी, परिचित औऱ भारी आवाज़ गूँजी —
“मे आँ गय़ा हूं स्वाती.”
स्वाती कां पूराबदन एक् झटके सें सिहरउठा। उसकी आँखें फड़ककर खुलगईं। वो तेजी सें उठकरबैठ गई, जैसेकोई सपना साकार हौ गय़ा हौ।
उसकीनजर कमरे केँ कोने वाले साइड सोफे पर्र गई।
नितिन वहा बैठा थां।
वोँ शर्ट उतारे हुए थां, केवल हल्की ट्रैक पैंट पहनेहुए। उसकी चौड़ी छाती पसीने सें हल्की-हल्की चमकरही थि। कमरे कि नरम रोशनी उसके मजबूत बदन पर्र पड़रही थि। उसकी आँखें स्वाती केँ जिस्म पऱ टिकी हुईँ थीं — उसके भीगे चेहरे पर्र, पसीने सें चिपकी ट्रांसपरेंट नाइटी सें उभरी हुईँ ब्रेस्ट्स पऱ, औऱ चमकती हुइ जाँघों पऱ।
उसकीनजर मे भूख थि, मगर उसमें प्रेम भि थां — गहरा, निषिद्ध औऱ बहोत कोमल प्रेम।
स्वाती एक् लम्हा केँ लिए स्तब्ध रह गई। उसकादिल ज़ोर-ज़ोर सें धड़करहा थां। ये वोँ लम्हा थां जिसकी वो सालों सें कल्पना कररही थि — जब उसका अपना भइया, उसका पहला प्रेम, उसेइस तरहदेख रहा हौ। उसकेगाल लाल होँ गए। लज्जा, उत्तेजना औऱ गहरी भावुकता कां मिला-जुला भाव उसके चेहरे पर्र उभरआया।
वो तेजी सें बैठ गई औऱ अपनी भीगी नाइटी कों छाती पर्र खींचने कि कोशिश करनेलगी। मगर नाइटी इतनी पसीने सें भीगकर जिस्म सें चिपक गई थि कि उसे खींचने पर्र भि उसके निप्पल्स कां उभार औऱ ब्रेस्ट्स कि नाजुक गोलाइयाँ साफदिख रहीथीं।
“भैया। आप्। कबआए?” स्वाती नें लज्जा, प्रेम औऱ थोड़ी काँपती हुई आवाज़ मे पूछा। उसकी आँखें नम हौ गई थीं।
नितिन नें धीरे-धीरे सें मुस्कुराते हुएकहा, “कुछदेर पहले। तुम् सोरही थीं। औऱ बहोत। खूबसूरत सपनादेख रहीथीं लगता हैं। ”
उसकीनजर स्वाती केँ पसीने सें तरबदन पऱ आरामसे ऊपर सें नीचे तक घूम गई। स्वाती कि ट्रांसपरेंट नाइटी उसके निप्पल्स कों साफ उभाररही थि। उसकी जाँघें अभि भि थोड़ी फैली हुई थीं, पसीने सें चमकरही थीं।
स्वाती नें लज्जा सें अपनी जाँघें बंद करने कि कोशिश कि, मगर नितिन कि आँखों मे जोँ नरमभूख औऱ प्रेम थां, वोँ उसे अंदर तक गरम औऱ भावुक कररहा थां।
नितिन धीरे-धीरे सें उठा औऱ उसकेबेड केँ पास आँ गय़ा। उसकी आँखें स्वाती केँ चेहरे पर्र थीं।
“तुम्हारा बदन। पूरा पसीने सें तर हैं, ” उसने बहोत गहरी औऱ कोमल आवाज़ मे कहा, “औऱ तुम्। अभि भि इतनी हसीन, इतनी। सिडक्टिव लगरही होँ। ”
स्वाती नें शर्माते हुए नीचेदेख लिया, मगर उसके होंठों पर्र एक् छोटी सि, कोमल मुस्कान आँ गई। उसकादिल प्रेम औऱ पहलीबार केँ रोमांच सें भर गय़ा थां।
ये लम्हा उसकेलिए बहोत कीमती थां — उसका अपना भइया, जिसे वो सालों सें चुपके-चुपके चाहती थि, अब उसके सामने खड़ा थां औऱ उसेइस तरहदेख रहा थां।
नितिन धीरे धीरे स्वाती केँ बेड केँ पासआया। कमरे मे केवल हल्की लैंप कि रोशनी थि। स्वाती बेड पर्र बैठी हुईँ थि, उसकी ट्रांसपरेंट नाइटी पसीने सें भीगकर बदन सें चिपकी हुइ थि। उसकी साँसें तेजचल रहीथीं।
नितिन कुछसमय तक खड़ारहा औऱ स्वाती केँ जिस्म कों घूरता रहा। उसकीनजर स्वाती कि भीगी नाइटी सें चिपकी हुई भारी ब्रेस्ट्स पऱ, उसके हार्ड निप्पल्स पर्र, पसीने सें चमकती गर्दन पऱ, औऱ खुली हुई गोरी जाँघों पऱ टिकी हुई थि।
स्वाती लज्जा सें सिकुड़ गई, मगर उसकी आँखें नितिन सें हट नहि पारही थीं।
नितिन बेड पऱ स्वाती केँ पासबैठ गय़ा। अब दोनों बहोत लगभग थें। स्वाती कि साँसें औऱ तेज हौ गईं। नितिन नें धीरे-धीरे सें अपनाहाथ बढ़ाया औऱ स्वाती केँ गाल कों छुआ। स्वाती सिहरउठी।
“भैया.स्स्स्सस्स्स्स.आःह्हह्हह्हह्ह.” वो फुसफुसाई।
नितिन नें कुछ नहि कहा। वो बस स्वाती केँ जिस्म कों देखरहा थां — जैसे सालों कि दबी हुइ ख़्वाहिश आज बाहर् आने वाली हौ। उसकी आँखें स्वाती कि भीगी नाइटी पर्र घूमरही थीं, जहाँ सें उसकी ब्रेस्ट्स कां पूरा आकार औऱ निप्पल्स साफदिख रहे थें।
स्वाती कां चेहरा गरम होँ गय़ा। उसने शर्माते हुएकहा,
“ओओह्ह भैया। क्याँ कररहे हौ। स्स्स्सस्स्स्स। उम्म्म्मम्म्म्म.मुझे लज्जा आँ रही हैं.”
नितिन नें स्वाती कों अपनी मजबूत बाहों मे औऱ कसकर जकड़ लिया। उसकी आँखों मे प्रेम, भूख औऱ अनुराग कां अनोखा मिश्रण थां। वो स्वाती केँ कान केँ पास मुँह लें गय़ा औऱ बहोत धीमी, गहरी आवाज़ मे फुसफुसाया,
“लज्जा मतकरो स्वाती। आज मे तुम्हें वोँ सभीकुछ बताना चाहता हूं जौ मे सालों सें मन मे रखेहुए थां.”
नितिन नें स्वाती कों थोडा पीछे हटाकर उसके चेहरे कों दोनों हाथों मे लिया। उसकी आँखें स्वाती केँ चेहरे पर्र घूमरही थीं।
“देखो। तुम्हारा चेहरा। कितना नाजुक औऱ सुंदर हैं। यह गुलाबी गाल, यह बड़ी-बड़ी शर्मीली आँखें। जैसेकोई परी होँ। जब तुम् शर्मा जाती होँ, तौ यह आँखें नीचेझुक जाती हें। मुझे पागलकर देती हें। ”
स्वाती कि साँसें भारी होँ गईं।
नितिन नें आगे झुककर स्वाती केँ होंठों पर्र हल्का सां चुंबन किया औऱ बोला,
“तुम्हारे होंठ। इतने पतले, गुलाबी औऱ नरम। जैसेकोई फूल कि पंखुड़ी। जब तुम् शर्मा कर इन्हें काटती हौ, तोँ मुझेबस इन्हें चूसने कां मन करता हैं। ”
उसने स्वाती कि गर्दन पऱ नाक रगड़ी औऱ गहरी साँसली।
“तुम्हारी गर्दन। इतनी नाजुक, इतनी गोरी। जैसेकोई मूर्ति। जब मे इसे चूमता हूं, तोँ लगता हैं पूरा संसार रुक गय़ा हैं। ”
नितिन नें स्वाती कि नाइटी कां कंधा सरकाया औऱ उसके नाजुक कंधे कों चूम लिया।
“तुम्हारे कंधे। इतनेनरम औऱ हसीन। जैसेकोई पहाड़ी कि चोटी। मे इन्हें चूमते-चूमते घंटों बिता सकता हूं। ”
नितिन कि नजर स्वाती कि छाती पर्र फंस गई। स्वाती कि भारी, गोल औऱ परफेक्ट ब्रेस्ट्स पसीने सें चमकरही थीं। ट्रांसपेरेंट नाइटी कां पतला कपड़ा उन पऱ पूरीतरह चिपका हुआ थां, जिससे उसके सख्त निप्पल्स साफनजर आँ रहे थें।
नितिन कि साँसें औऱ भारी हौ गईं। उसकी आवाज़ अब पूरीतरह गहरी औऱ भूखी हौ चुकी थि।
“स्वाती। तुम्हारे मम्मों.” उसने धीरे-धीरे सें कहा, “इतनी परफेक्ट हें। इतनी भारी, इतनीनरम औऱ इतनी गोरी। जैसेदो पूर्ण चाँद। जब यह हिलती हें, तोँ मेरादिल भि उनकेसंग हिलने लगता हैं। मे इन्हें छूना चाहता हूं। चूमना चाहता हूं। इन्हें अपनाबना लेना चाहता हूं। ”
"स्स्स्सस्स्स्स। आःह्हह्हह्हह्ह."
स्वाती लज्जा सें काँपरही थि। उसका पूराबदन गर्मी औऱ उत्तेजना सें लाल हौ रहा थां। मगर उसने नितिन कों रोका नहि। बल्कि उसकी साँसें औऱ तेज होँ गईं।
नितिन नें धीरे-धीरे सें स्वाती कि नाइटी कां एक् पतला पट्टा अपनी उँगलियों सें पकड़ा औऱ बहोत हि आरामसे उसे उसके कंधे सें सरका दिया। नाइटी कां कपड़ा नीचे खिसक गय़ा, औऱ स्वाती कि एक् पूरी ब्रेस्ट पूरीतरह नंगी हौ गई।
नितिन नें झुककर स्वाती केँ नंगे कंधे पऱ गरम साँसें छोड़ीं औऱ फिन बहोत प्रेम सें, बहोत धीरे-धीरे सें उसकी नाजुक, गोरी त्वचा कों चूम लिया। उसकेगरम होंठ स्वाती केँ कंधे पर्र लगते हि स्वाती सिहरउठी।
“हम्म.” स्वाती केँ मुँह सें अनियंत्रित कराह निकल गई।
नितिन नें धीरे धीरे अपने होंठों कों स्वाती कि ब्रेस्ट कि तरफ लेँ जानां शुरुआत किया। उसने पहले तोँ ब्रेस्ट केँ ऊपरी हिस्से कों चूमा, फिन आरामसे नीचे कि तरफ बढ़ता गय़ा। स्वाती कि भारी ब्रेस्ट उसकेगरम मुँह मे पूरीतरह समा गई।
नितिन नें स्वाती केँ सख्त निप्पल कों अपने होंठों मे लेँ लिया औऱ धीरे धीरे चूसने लगा। उसकीजीभ निप्पल केँ चारों ओरघूम रही थि, कभी हल्का-हल्का काटरही थि, तौ कभीजोर सें चूसरही थि।
स्वाती कि साँसें अब पूरीतरह बेकाबू हौ चुकीथीं। वो अपने भइया केँ सिर कों दोनों हाथों सें दबाएहुए थि औऱ फुसफुसा रही थि,
“भैया। हम्म.स्स्स्सस्स्स्स.आँ.ई.ग। धीरे-धीरे.”
नितिन नें दूसरे कंधे कां पट्टा भि सरका दिया। अब स्वाती कि दोनों ब्रेस्ट्स पूरीतरह नंगी औऱ उसके सामने थीं। वो दोनों ब्रेस्ट्स कों बारी-बारी चूमरहा थां, चूसरहा थां औऱ अपनीजीभ सें सहलारहा थां।
नितिन नें स्वाती कि कमर पऱ हाथ फेरा औऱ बोला,
“तुम्हारी कमर। इतनी पतली औऱ नाजुक। मे इसे दोनों हाथों सें घेरकर तुम्हें अपनीतरफ खींचना चाहता हूं। ”
उसकी उँगलियाँ स्वाती कि जाँघों पऱ सरकीं।
“औऱ यह जाँघें। स्वाती। यह तौ स्वर्ग हें। इतनी चिकनी, गोरी औऱ मोटी.जब यह मेरी जाँघों सें सटती हें, तौ मुझे पूरा काबूखो जाता हैं। मे इन्हें चूमना चाहता हूं। सहलाना चाहता हूं। इन्हें अपने जिस्म सें लिपटाना चाहता हूं। ”
नितिन नें स्वाती कों अपनी छाती सें चिपका लिया औऱ उसकेकान मे फुसफुसाया,
“तुम्। मेरी छोटी बेहन। मेरा पहला औऱ अंतिम प्रेम। आज तुम् मेरे सामने इतनी हसीन, इतनी नाजुक औऱ इतनी प्यारी लगरही हौ। कि मुझे स्वयं पर्र काबू नहि रहरहा हैं। ”
स्वाती कि आँखों मे आँसू आँ गए। वो नितिन कि छाती सें चिपककर फुसफुसाई,
“भैया। मुझे भि। बहोत प्रेम हैं आपसे.”
नितिन नें स्वाती कों अपनी मजबूत बाहों मे औऱ कसकर जकड़ लिया। स्वाती कि साँसें भारी होँ चुकीथीं। नितिन नें धीरे-धीरे सें स्वाती कों बेड पर्र लिटा दिया औऱ स्वयं उसकेऊपर झुक गय़ा।
उसने स्वाती कि भीगी नाइटी केँ बीच वाले हिस्से कों थोडा खींचा औऱ अपना चेहरा उसकी गहरी क्लीवेज मे गाड़ दिया। स्वाती सिहरउठी।
नितिन नें आँखें बंद करके स्वाती कि क्लीवेज मे गहरी, लंबी साँसली। उसकीनाक स्वाती कि नरम, गरम औऱ पसीने सें भीगी स्किन सें सटी हुईँ थि।
“उफ्फ। स्वाती.” नितिन नें गहरी, भारी आवाज़ मे कहा, “तेरी शरीर कि खुशबू। कितनी दिव्य हैं। कितनी सिडक्टिव हैं। दुनिया केँ सबसे महंगे परफ्यूम भि तेरीइस नैचरल खुशबू केँ सामने कुछ नहि हें। यह खुशबू। तेरी स्किन, तेरी ब्रेस्ट्स, तेरी पसीने कि गंध। मुझे पागलकर देती हैं। ”
स्वाती लज्जा औऱ उत्तेजना सें काँपरही थि। उसने नितिन केँ बालों मे उँगलियाँ फेरदीं।
" उफफ्फफफ्फ.स्स्स्सस्स्स्स."
नितिन नें स्वाती कां एक् हाथ उठाया औऱ उसेऊपर किया। स्वाती कि चिकनी, गोरी आर्मपिट पूरीतरह एक्सपोज़ होँ गई। नितिन नें अपनीनाक स्वाती कि आर्मपिट मे गाड़ दि औऱ बहोत गहरी साँसली।
“मम्म। स्वाती। तेरी आर्मपिट कि खुशबू। कितनी नशीली हैं। एकदम ताज़ा … मस्त औऱ थोड़ी सॉल्टी। मुझे तौ दीवाना बना देती हैं। ”
स्वाती सिहरउठी, “भैया। उफ्फ.वहा। बहोत.”
नितिन नें अपनीगरम, गीलीजीभ निकाली औऱ स्वाती कि आर्मपिट कों लंबे-लंबे स्ट्रोक्स मे चाटना शुरुआत कर दिया। स्वाती कां पूराबदन झुरझुरी सें भर गय़ा।
“आह्ह्ह। भैया। हाय। क्याँ कररहे होँ। आह्ह्ह.” स्वाती कि सिसकी कमरे मे गूँज गई।
नितिन नें स्वाती कि दूसरी आर्मपिट कों भि उसीतरह चाटा। फिन उसने स्वाती कि गर्दन, कंधे, औऱ फिन ब्रेस्ट्स केँ ऊपरी हिस्से कों चाटना शुरुआत किया।
नितिन नें स्वाती कि एक् भारी, गोल ब्रेस्ट कों दोनों हाथों सें थाम लिया। उसकी आँखों मे भूख औऱ प्रेम कां मिश्रण थां। उसने धीरे-धीरे सें अपना मुँह नीचे झुकाया औऱ अपनीगरम, नमजीभ सें स्वाती कि ब्रेस्ट कों लंबे-लंबे स्ट्रोक्स मे चाटना शुरुआत कर दिया।
स्वाती कां पूरा जिस्म सिहरउठा।
“तेरी ब्रेस्ट्स.” नितिन नें स्वाती कि ब्रेस्ट कों चूसते हुए, भारी औऱ कामुक आवाज़ मे कहा, “इतनीनरम। इतनी गोरी। जैसेदो पूर्ण चाँद.”
उसने स्वाती केँ निप्पल कों अपनेगरम मुँह मे लें लिया औऱ धीरे धीरे चूसने लगा। कभी हल्का-हल्का काटता, तोँ कभीजीभ सें घुमाकर चाटता। स्वाती कि ब्रेस्ट उसके मुँह मे पूरीतरह समा गई थि।
“उफ्फ्फ्। स्वाती। यह कितनी मज़ेदार हें। कितनी रसीले। मे इन्हें घंटों चूस सकता हूं.”
नितिन नें दूसरी ब्रेस्ट कों भि हाथ सें मसलते हुएकहा। उसकेथूक औऱ स्वाती कां पसीना दोनों ब्रेस्ट्स पऱ मिलकर चमकरहा थां। स्वाती कि साँसें अब पूरीतरह बेकाबू हौ चुकीथीं। वो अपने भइया केँ सिर कों दोनों हाथों सें दबाएहुए थि, जैसेउसे औऱ गहराई मे खींचरही होँ।
नितिन नें स्वाती कि ब्रेस्ट कों जोर सें चूसते हुए फुसफुसाया,
“यह चाँद। केवल मेरे हें नाँ स्वाती? केवल तेरे भैया केँ.”
स्वाती नें आँखें बंद करके काँपती हुइ आवाज़ मे कहा, “हाँ भैया। यहसभी। केवल आपके हें। जितना चाहो चूसो। काटो। अपनाबना लो.”
नितिन कि जीभ स्वाती कि दोनों ब्रेस्ट्स पऱ बारी-बारी घूमरही थि। कमरे मे केवल उनकी भारी साँसों औऱ चूसने कि गीली आवाजें गूंजरही थीं।
स्वाती कि साँसें अब पूरीतरह भारी होँ चुकीथीं। वो नितिन केँ बालों कों पकड़े हुए कराहरही थि,
“भैया। ऊह्ह। धीरे-धीरे। हाय। मुझे। बहोत अच्छा लगरहा हैं.”
नितिन नें स्वाती कि नाइटी कों औऱ ऊपर सरकाया औऱ उसकेपेट कों चाटा। फिन उसकी नाभि मे जीभ डाली। स्वाती कि कमरउठ गई।
नितिन स्वाती कि जाँघों पऱ आँ गय़ा। उसने स्वाती कि दोनों जाँघों कों चूमते हुए, चाटते हुएकहा,
“तेरी जाँघें। कितनी चिकनी औऱ जूसी हें। मे इन्हें चाटते-चाटते घंटों बिता सकता हूं.”
स्वाती अब पूरीतरह बेसुध हौ चुकी थि। वो नितिन केँ नाम पऱ बार-बार सिसकार रही थि,
“भैया। आह्ह। आप्। मुझे। पागलकर रहे हें। आह्ह्ह.”
नितिन स्वाती केँ पूरे जिस्म कों आरामसे, एक्-एक् हिस्से कों चूमता, चाटता औऱ अपनी खुशबू लेताहुआ आगेबढ़ रहा थां।
नितिन स्वाती कि जाँघों कों चूमता, चाटता हुआ धीरे धीरेऊपर कि तरफबढ़ रहा थां। स्वाती कि जाँघें काँपरही थीं। उसकी साँसें भारी होँ चुकीथीं।
नितिन स्वाती कि जाँघों केँ अंदरूनी हिस्से कों चाटते हुएरुक गय़ा। स्वाती कि ट्रांसपरेंट नाइटी अब पूरीतरह ऊपरसरक चुकी थि। उसकी गीली पैंटी साफदिख रही थि।
नितिन नें स्वाती कि जाँघों कों थोडा औऱ फैला दिया। फिन वो धीरे-धीरे सें झुका औऱ अपना चेहरा स्वाती कि पैंटी केँ ठीकऊपर लेँ गय़ा।
स्वाती लज्जा औऱ उत्तेजना सें काँपउठी।
“भैया। वहा। हम्म.”
नितिन नें आँखें बंद करके स्वाती कि गीली पैंटी पऱ नाकरख दि औऱ बहोत गहरी, लंबी साँसली।
“मम्म्म। स्वाती। तेरी बुर कि खुशबू। कितनी दिव्य हैं। कितनी मीठी, कितनी युवा औऱ कितनी मादक.यह खुशबू। मुझे पागलकर रही हैं। ”
नितिन नें कुछसमय तक स्वाती कि पैंटी पऱ हि नाक रगड़ते हुए उसकी खुशबू ली। स्वाती कि पैंटी पहले सें हि पूरीतरह भीग चुकी थि। नितिन उस गीलेपन कों सूँघरहा थां।
“हम्म। भैया। वहा। लज्जा आँ रही हैं.” स्वाती नें काँपते हुएकहा, मगर उसकी जाँघें अनजाने मे औऱ फैलगईं।
नितिन नें स्वाती कि पैंटी केँ किनारे कों उँगलियों सें पकड़ा औऱ बहोत आरामसे, जानबूझकर उसे नीचे सरकाना शुरुआत किया। स्वाती कि चिकनी, गुलाबी औऱ पूरीतरह गीली बुर आरामसे सामने आई।
नितिन नें पैंटी कों स्वाती कि जाँघों सें निकालकर फेंक दिया। स्वाती अब पूरीतरह नंगी थि।
नितिन कुछसमय तक स्वाती कि बुर कों मात्र देखता रहा। फिन वो झुका औऱ अपनीनाक स्वाती कि गीली बुर पर्र रख दि।
“स्वाती। तेरी बुर। कितनी हसीन, कितनी नाजुक औऱ कितनी गीली हैं। इसकी खुशबू। मुझे दीवाना बनारही हैं। ”
स्वाती लज्जा सें तकिए कों कसकर पकड़ लेती हैं।
नितिन नें अपनीगरम, गीलीजीभ निकाली औऱ स्वाती कि बुर केँ ऊपरी हिस्से सें लेकर नीचे तक एक् लंबा, गहरा चटकारा लिया।
“आआह्ह्ह्ह। भैया.!” स्वाती जोर सें कराह औऱ उसका पूरा जिस्म काँपउठा।
नितिन नें स्वाती कि क्लीट कों अपनीजीभ सें घेर लिया औऱ आहिस्ता चूसने लगा। स्वाती कि जाँघें नितिन केँ सिर केँ चारों तरफकस गईं।
“आह्ह्ह। नितिन भैया। वहा। बहोत। ऊह्ह। प्रेम सें। आह्ह्ह.”
नितिन स्वाती कि बुर कों पूरीतरह चाटरहा थां। उसकीजीभ स्वाती कि क्लीट कों घुमारही थि, कभी-कभी अंदरघुस रही थि। स्वाती कि बुर सें निकलने वालारस नितिन कि जीभ औऱ ठोड़ी पऱ बहरहा थां।
“तेरी बुर। कितनी स्वीट हैं स्वाती। मे इसे घंटों चाट सकता हूं.” नितिन नें बुर चाटते हुएकहा।
स्वाती अब पूरीतरह बेसुध हौ चुकी थि। वो नितिन केँ बालों कों पकड़े हुए कराहरही थि,
"स्स्स्सस्स्स्स।.आःह्हह्हह्हह्ह.आँ.ई.ग।
“भैया। आह। औऱ गहरी। आह्ह्ह। आपकीजीभ। मुझे पागलकर रही हैं। आह्ह्ह। मे। मे झड़ने वाली हूं.”
नितिन नें स्वाती कि क्लीट कों जोर सें चूसना शुरुआत किया औऱ दो उँगलियाँ धीरे-धीरे सें स्वाती कि टाइट बुर मे डालदीं।
स्वाती कां बदन अचानक तन गय़ा।
“आआआह्ह्ह्ह। भैया। मुझे…कुछ होँ रहा हैं ….आँ रही हूं। आह्ह्ह्ह। नितिन भैया। आह्ह्ह्ह.!”
स्वाती जोर सें झड़ गई। उसकी बुर सें गर्मरस कि धार नितिन केँ मुँह मे फूट पड़ी। नितिन नें पूरारस चूस-चूस केँ पी लिया औऱ स्वाती कि बुर कों अंतिम बूँद तक साफ किया।.
स्वाती हाँफते हुएबेड पर्र पसर गई। उसका पूराबदन काँपरहा थां।
नितिन स्वाती केँ ऊपरआया औऱ उसके होंठों पऱ गहराकिस किया। स्वाती नें अपनारस नितिन केँ मुँह सें चाट लिया।
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प्रिय पाठकों
मे हर एपसोड मे इमेजेस (औऱ कभी-कभी GIFs) जरूर शामिल करती हूं, ताकि स्टोरी औऱ भि ज़्यादा हॉट औऱ जीवंत लगे।
मगर अभि कुछ technical issue कि वजह सें इमेजेस लोड होने मे थोडा वक्तलग रहा हैं (खासकर GIFs कों लोड होने मे 2-3 मिनटलग सकते हें)।
कृपया 2-3 मिनट प्रतीक्षा जरूर करें, ताकि सारी इमेजेस पूरीतरह लोड हौ जाएँ। एक् बारलोड होने केँ बाद किस्सा कां मज़ा दोगुना होँ जाता हैं
आपकीराय मेरेलिए बहोत मायने रखती हैं। कमेंट मे जरूर बताइए —किस्सा कैसीलग रही हैं औऱ लगाई गई इमेजेस आपको कितनी हॉटलग रही हें?
आपका फीडबैक मुझे औऱ बेहतर लिखने केँ लिए motivate करता हैं
धैर्य रखने केँ लिए थैंकयू सोमच!
~ स्वाती
प्यास जोँ बढ़ती हि जाये – New Episode
Update 25
नई शुरुआत – स्वाती कि नईभूख
फ्लॅशबैक : स्वाती कि स्टोरी (भाग 9)
दोनों कुछसमय तक एक्-दूसरे कि बाहों मे लेटेरहे।
स्वाती कां सिर नितिन कि चौड़ी, गरम औऱ मजबूत छाती पऱ टिकाहुआ थां।
नितिन कि एक् हाथ स्वाती कि पीठ पर्र थां, दूसरा उसके लंबे बालों मे आहिस्ता घूमरहा थां।
कमरे मे केवल उनकी भारी-भारी साँसों कि आवाज़ औऱ बेडसाइड लैंप कि नरम, गुलाबी रोशनी थि।
स्वाती नें धीरे-धीरे सें सिर उठाया। उसकी आँखों मे प्रेम, लज्जा, सालों कि दबी हुई चाहत औऱ गहरी भावुकता कां मिला-जुला भाव थां।
नितिन नें स्वाती केँ माथे पऱ बहोत प्रेम सें चुंबन किया, फिन उसके दोनों गालों पऱ, औऱ अंत मे उसके होंठों पर्र बहोत नरम, गहरा औऱ भावुक चुंबन दिया। दोनों कि साँसें एक्-दूसरे केँ मुँह मे घुलरही थीं।
दोनों कुछदेर तक छोटी-छोटी बातें करतेरहे — कितना वक्तबीत गय़ा, कितना प्रतीक्षा किया, कितना प्रेम चुपके-चुपके दबाएरखा थां। स्वाती नितिन कि छाती सें चिपकी हुई थि। नितिन नें स्वाती कों औऱ कसकरगले लगा लिया। कुछ लम्हा शांति रही। दोनों एक्-दूसरे कि धड़कनों कों महसूस कररहे थें।
फिन नितिन नें स्वाती केँ कान केँ पास मुँह लेँ जाकर बहोत धीमी, हिचकिचाती हुइ औऱ काँपती हुइ आवाज़ मे कहा,
“स्वाती। मे। मे कुछ कहना चाहता हूं.”
स्वाती नें नितिन कि छाती पऱ सिररखे हुए फुसफुसाया, “कहो नाँ भैया। डरोमत.”
नितिन कुछ लम्हा चुपरहा। उसकी साँसें भारीथीं। वो स्वाती कि पीठ पऱ उँगलियाँ फेरता रहा, जैसे हिम्मत जुटारहा होँ। उसकी छाती तेजी सें ऊपर-नीचे होँ रही थि। वो स्वाती कों औऱ कसकरगले लगाएहुए थां, जैसेडर रहा होँ कि अगर उसनेयह बातकही तौ सभीकुछ टूट जाएगा। आखिरकार उसने बहोत काँपती हुईँ, लज्जा औऱ ख़्वाहिश सें भरी आवाज़ मे कहा,
“मे। मे चाहता हूं कि। तुम् भि। मेरेबदन कों। वैसा हि। प्रेम करो। जैसा मैंने तुम्हारा किया.”
स्वाती नें सिर उठाकर नितिन कि आँखों मे देखा। नितिन कि आँखें लज्जा, हिचकिचाहट, अपराधबोध औऱ गहरी, दबी हुईँ ख़्वाहिश सें भरी हुई थीं।
“स्वाती। मे जानता हूं। यहगलत हैं। हम् भइया-बेहन हें। तुम् मेरी छोटी बेहन हौ। मे तुम्हारा भइया हूं। मगर। मे स्वयं कों रोक नहि पारहा। मे चाहता हूं कि मेरी प्यारी छोटी बेहन। मुझे भि। अपने प्रेम सें। छुए। चूमे। मेरे जिस्म कों। अपने होंठों सें। महसूस करे.”
स्वाती कि आँखों मे भि लज्जा औऱ प्रेम कां तूफान थां। वो कुछ लम्हा तक नितिन कों देखती रही। फिन उसने नितिन कि छाती पऱ हाथ रखकर बहोत प्रेम सें कहा,
“भैया। मुझे भि यही चाहिए। मे भि आपको। पूरीतरह। महसूस करना चाहती हूं.”
नितिन नें स्वाती कों औऱ कसकरगले लगा लिया। दोनों केँ बदन एक्-दूसरे सें सटेहुए थें। स्वाती आहिस्ता नितिन केँ ऊपरचढ़ गई।
स्वाती नें नितिन केँ होंठों पर्र फिन सें गहराकिस किया। इस बारकिस पहले सें कहीं अधिक गहरा औऱ भूखा थां। उसने नितिन केँ निचले होंठ कों धीरे-धीरे सें चूसा, फिन ऊपरी होंठ कों भि। दोनों कि साँसें एक्-दूसरे केँ मुँह मे घुलरही थीं। स्वाती कि जीभ धीरे धीरे नितिन केँ मुँह मे घुस गई औऱ उसकीजीभ सें खेलने लगी।
नितिन नें स्वाती कि कमर कों दोनों हाथों सें पकड़ लिया औऱ उसे औऱ कसकर अपनीतरफ खींच लिया। स्वाती कि भारी ब्रेस्ट्स नितिन कि छाती सें दबरही थीं।
“अह्ह। स्वाती.” नितिन कि गहरी कराह निकल गई।
स्वाती नें किस तोड़कर नितिन कि गर्दन पर्र मुँह लेँ जाया। वहा उसने बहोत प्रेम सें, बहोत धीरे धीरे चुंबन बरसाए। पहले हल्के-हल्के, फिन आहिस्ता गहरे होतेगए। वो नितिन कि गर्दन कि मर्दाना खुशबू कों सूँघरही थि। फिन उसने अपनीगरम, नरमजीभ सें नितिन कि गर्दन कों लंबे-लंबे strokes मे चाटा।
“हम्म। स्वाती.” नितिन कराहउठा। उसकी साँसें अब बहोत तेज होँ चुकीथीं।
स्वाती नें नितिन कि गर्दन कों चूसते हुए फुसफुसाया,
“भैया। आपकी गर्दन। कितनी हसीन, कितनी मर्दाना औऱ कितनी कामुक हैं। आपकी स्किन कि खुशबू। मुझे पागलकर रही हैं। मे इसे चाटते-चाटते कभी थकना नहि चाहती.”
नितिन नें स्वाती केँ बालों मे उँगलियाँ फेरदीं औऱ उसकासिर औऱ कसकर अपनी गर्दन पर्र दबा लिया।
स्वाती आहिस्ता नीचे सरकी। उसने नितिन कि चौड़ी, मजबूत छाती पर्र हल्का-हल्का चुंबन किया। फिन दोनों हाथों सें उसकी छाती कों सहलाते हुए बहोत भावुक स्वर मे कहा,
“भैया। आपकी छाती। कितनी हसीन हैं। इतनी चौड़ी, इतनी मजबूत। जैसेकोई पहाड़। मे सालों सें इसे चूमना चाहती थि। आपके जिस्म कों। अपने होंठों सें। महसूस करना चाहती थि.”
स्वाती नें नितिन कि छाती पऱ अपना चेहरा रखकर गहरी साँसली। उसकी मर्दाना महक औऱ थोड़ी सॉल्टी पसीने कि खुशबू उसे पूरीतरह नशे मे डालरही थि। फिन उसने अपनीगरम जीभ सें नितिन कि छाती कों धीरे धीरे चाटना शुरुआत किया। एक्-एक् मसल्स कों चूमती, चाटती हुई।
“आह्ह। स्वाती। बहोत अच्छा लगरहा हैं.” नितिन कराहउठा।
स्वाती नें नितिन केँ निप्पल्स कों जीभ सें घुमाया, हल्का-हल्का काटा औऱ फिनजोर सें चूसा। नितिन कि साँसें औऱ तेज होँ गईं। उसने स्वाती केँ बालों कों मुट्ठी मे भर लिया।
“भैया। आपका जिस्म। इतना हसीन हैं। हर हिस्सा। मुझे प्रेम करता हैं। मुझे आपसे बहोत प्रेम हैं। बहोत गहरा प्रेम। बहोत सालों कां प्रेम.” स्वाती नें भावुक स्वर मे कहा।
स्वाती कि साँसें तेज होँ रहीथीं। वो नितिन कि छाती, उसके एब्स औऱ उसकी नाभी कों चूमती, चाटती हुइ नीचेसरक रही थि। हर स्पर्श मे उसका प्रेम, उसकीदबी हुइ ख़्वाहिश औऱ सालों कि दबी हुई भावनाएँ झलकरही थीं।
नितिन कि साँसें अब बहोत भारी होँ चुकीथीं। वो स्वाती केँ बालों मे उँगलियाँ फेररहा थां औऱ बार-बार कराहरहा थां।
“स्वाती। तूँ मुझे पागलकर रही हैं। अह्ह.”
स्वाती नितिन कि छाती पर्र सिररखे हुएकुछ समय तक चुपरही। उसकी साँसें अभि भि भारीथीं। नितिन केँ जिस्म कि मर्दाना खुशबू औऱ सॉल्टी पसीने कि गंध उसकेनाक मे घुलरही थि। वो जितना सूँघरही थि, उतना हि उसके अंदर एक् नई, अजीब सि ख़्वाहिश जागरही थि।
उसकेमन मे एक् ख्याल बार-बार आँ रहा थां — वोँ नितिन कि आर्मपिट्स कि खुशबू लेना चाहती थि। वोँ उसकी बालोभरी, आर्मपिट्स कों सूँघना औऱ चाटना चाहती थि। मगर वोँ लज्जा सें काँपरही थि। वोँ सोचरही थि — “मे भैया सें यह केसे कहूँ? वोँ क्याँ सोचेंगे? मे उनकी छोटी बेहन हूं। वोँ बुरा तोँ नहि मानेगें ?। मगर। मुझे बहोत मनकररहा हैं.”
स्वाती नें नितिन कि छाती पऱ अपना चेहरा औऱ कसकर दबाया। उसकी साँसें नितिन कि स्किन पऱ पड़रही थीं। आखिरकार उसने बहोत धीमी, काँपती हुई औऱ लज्जा सें भरी आवाज़ मे कहा,
“भैया। मे। मे आपकोकुछ कहना चाहती हूं.”
नितिन नें स्वाती केँ बालों मे उँगलियाँ फेरते हुए पूछा, “कहो नां। क्याँ बात हैं?”
स्वाती नें कुछ लम्हा चुपरही। उसका चेहरा नितिन कि छाती मे छिपाहुआ थां। फिन उसने बहोत हिचकिचाते हुए, करीब फुसफुसाते हुएकहा,
“भैया। मे। आपकी। आर्मपिट्स। सूँघना चाहती हूं। औऱ। चाटना भि.”
नितिन कां बदन एक् झटके सें सख्त होँ गय़ा। वो कुछसमय तक चुपरहा। स्वाती नें महसूस किया कि नितिन कि साँसें अचानक औऱ भारी हौ गई हें।
“स्वाती। तूँ। क्याँ कहरही हैं?” नितिन कि आवाज़ काँपरही थि।
स्वाती नें लज्जा सें औऱ कसकर नितिन कि छाती सें चिपकते हुएकहा,
“भैया। मुझेमाफ करदो.मगर। मुझे बहोत मनकररहा हैं। आपकी आर्मपिट्स। आपकी पसीने कि खुशबू। मुझे बहोत अच्छी लगती हैं। मे। मे उसे सूँघना चाहती हूं। औऱ। चाटना भि। आपकी बालोभरी आर्मपिट्स। आपका पसीने भरा शरीर। मुझे पागलकर देता हैं.”
नितिन नें स्वाती कों थोडा पीछे हटाया औऱ उसके चेहरे कों देखा। स्वाती कि आँखें लज्जा, ख़्वाहिश औऱ प्रेम सें भरी हुई थीं। नितिन नें गहरी साँसली औऱ धीरे-धीरे सें बोला,
“स्वाती। तुँ सच मे। यह चाहती हैं?”
स्वाती नें शर्माते हुएमगर आँखों मे चमक केँ संगसिर हिलाया।
“हाँ भैया। बहोत। बहोत मनकररहा हैं.”
नितिन नें स्वाती कों अपनीतरफ खींचा औऱ उसेबेड पर्र लिटा दिया। फिन वो स्वयं स्वाती केँ ऊपर आँ गय़ा। उसने अपना एक् हाथऊपर उठाया, जिससे उसकी आर्मपिट पूरीतरह एक्सपोज्ड होँ गई। बाल हल्के-हल्के गीले थें औऱ पसीने कि गंधसाफ आँ रही थि।
स्वाती कि आँखें चमक उठीं।
नितिन नें स्वाती केँ सिर कों धीरे-धीरे सें अपनी आर्मपिट कि तरफ खींचा। स्वाती नें पहलेनाक सें सूँघा — एक् गहरी, मर्दाना, औऱ नशीली खुशबू। फिन उसने अपनीनाक नितिन कि आर्मपिट मे गाड़ दि औऱ बहोत गहरी साँसली।
“हम्म। भैया। यह खुशबू। मुझे पागलकर देरही हैं.” स्वाती कराहउठी।
उसनेजीभ निकाली औऱ नितिन कि बालोभरी आर्मपिट कों आहिस्ता चाटना शुरुआत किया। नितिन कां सॉल्टी पसीने स्वाती कि जीभ पऱ फैलरहा थां। स्वाती नें आँखें बंदकर लीं औऱ नितिन कि आर्मपिट कों चूसने लगी।
“ऊह्ह। स्वाती। तुँ क्याँ कररही हैं.” नितिन कि आवाज़ भारी हौ गई।
स्वाती नें नितिन कि दूसरी आर्मपिट कों भि उसीतरह सूँघा औऱ चाटा। वो नितिन केँ पसीने कां स्वाद लेँ रही थि औऱ बार-बार कराहरही थि।
“भैया। आपका पसीना। कितना टेस्टी हैं। मे इसे चाटते-चाटते कभी नहि थकूँगी.”
नितिन नें स्वाती केँ बालों मे उँगलियाँ फेरदीं औऱ उसकासिर अपनी आर्मपिट पऱ औऱ कसकरदबा लिया।
स्वाती नितिन कि आर्मपिट्स कों चूमती, चाटती औऱ सूँघती रही। वो पूरीतरह नशे मे थि — नितिन केँ जिस्म कि खुशबू, उसके पसीने कां स्वाद, औऱ यह (निषिद्ध) प्रेम उसे दीवाना बनारहा थां।
दोनों अब पूरीतरह थक चुके थें। स्वाती नितिन कि छाती पर्र सिररखे हुए लेटी थि। नितिन कां एक् हाथ स्वाती कि पीठ पऱ थां, दूसरा उसके बालों मे आरामसे घूमरहा थां। कमरे मे अब केवल उनकी साँसों कि आवाज़ औऱ हल्की लैंप कि रोशनी थि।
स्वाती नें नितिन कि छाती पऱ अपना चेहरा रगड़ते हुए बहोत नरम स्वर मे कहा,
“भैया। मुझेआज रात। बहोत अच्छा लगरहा हैं.”
नितिन नें स्वाती केँ बालों मे उँगलियाँ फेरते हुए मुस्कुराया औऱ बोला,
“मुझे भि स्वाती। बहोत अच्छा लगरहा हैं। तुँ मेरी छोटी बेहन हैं। मगरआज। आज तूँ मेरी.कुछ औऱ लगरही हैं.”
स्वाती नें शर्माते हुए नितिन कि छाती पर्र हल्का सां चुंबन किया। नितिन नें स्वाती कों औऱ कसकरगले लगा लिया। दोनों कि नंगी त्वचा एक्-दूसरे सें सटी हुईँ थि। स्वाती कि भारी ब्रेस्ट्स नितिन कि छाती सें दबरही थीं।
नितिन नें स्वाती कि पीठ पऱ आरामसे हाथ फेरा। स्वाती नें भि नितिन कि छाती पऱ उँगलियाँ घुमाते हुएकहा,
“भैया। आपका जिस्म। कितना गरम औऱ मजबूत हैं। मुझे इसमें लिपटकर सोना अच्छा लगरहा हैं.”
नितिन नें स्वाती केँ होंठों पऱ बहोत प्रेम सें चुंबन किया। फिन उसकेगाल पर्र, गर्दन पर्र, औऱ फिन कंधे पर्र। स्वाती नें आँखें बंदकर लीं औऱ मुस्कुरा दि।
“स्वाती। तुँ आजरात। बहोत सुंदर लगरही हैं.” नितिन नें उसकेकान मे फुसफुसाया, “तेरी आँखें। तेरे होंठ। तेरा जिस्म। सभीकुछ। मुझे दीवाना बनारहा हैं.”
स्वाती नें नितिन कि छाती पर्र सिर रखतेहुए धीरे-धीरे सें कहा,
“भैया। मे भि। आपको बहोत चाहती हूं। सालों सें। आजजब आपने मुझे चूमा। चाटा। मुझेलगा जैसे मे ख्वाब मे हूं.”
नितिन नें स्वाती केँ माथे पर्र चुंबन किया औऱ बोला,
“मे भि। तुम्हारी तरफ बहोत चाहता हूं स्वाती। तुँ मेरी छोटी बेहन हैं। मगरआज। आज तूँ मेरी गर्लफ्रेंड लगरही हैं। मेरी। पूरीतरह मेरी.”
स्वाती नें नितिन कि गर्दन पर्र मुँह छिपाते हुए लज्जा सें मुस्कुरा दिया। नितिन नें स्वाती कि कमर पऱ हाथरखा औऱ उसे औऱ कसकर अपनीतरफ खींच लिया। दोनों कि जाँघें एक्-दूसरे सें सटी हुईँ थीं।
स्वाती नें नितिन कि छाती पऱ हल्का सां चुंबन करतेहुए फुसफुसाया,
“भैया। आजरात। मे आपकी हूं। पूरीतरह आपकी.”
नितिन नें स्वाती केँ बालों मे नाक गाड़कर उनकी खुशबू ली औऱ बहोत धीरे-धीरे सें कहा,
“औऱ मे। तेरा हूं स्वाती। आजरात। औऱ हमेशा केँ लिए.”
दोनों फिन सें एक्-दूसरे कि बाहों मे लिपटगए। छोटे-छोटे चुंबन, आहिस्ता हाथों कां घूमना, औऱ एक्-दूसरे कि साँसों कों महसूस करना.बस यहीसभी चलरहा थां। कोई जल्दबाजी नहि थि। केवल प्रेम, आकर्षण औऱ एक् नई, गहरी चाहत।
दोनों अभि भि एक्-दूसरे कि बाहों मे लिपटे हुए थें। स्वाती नितिन कि छाती सें चिपकी हुइ थि। नितिन कां एक् हाथ स्वाती कि पीठ पऱ आहिस्ता घूमरहा थां। कमरे मे मात्र उनकी साँसों कि आवाज़ थि।
नितिन नें स्वाती केँ बालों मे उँगलियाँ फेरते हुए धीरे-धीरे सें मुस्कुराया। फिन उसने स्वाती केँ कान केँ पास मुँह लेँ जाकर बहोत धीमी, कामुक आवाज़ मे पूछा,
“स्वाती। तुमने तौ केवल मेरे ऊपरी जिस्म कों हि प्रेम किया। मेरी छाती, गर्दन, आर्मपिट्स। सभीचूम लिया.मगर। नीचे कां हिस्सा। क्यूं छोड़ दिया?”
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