प्यास जोँ बढ़ती हि जाये – New Episode
मेरे प्यारे रीडर्स,
अब मेरीकथा मे मजाआने लगा हैं नाँ? मे(स्वाति ) नितिन कों सिड्यूस कररही हूं औऱ वोँ भि धीरे धीरे मेरेजाल मे फँसरहा हैं.
अब तक कि अपडेट्स औऱ हॉट-हॉट पिक्चर्स केँ संगकथा आपको कैसीलग रही हैं?
सच-सच बताना.क्याँ स्वाती कि यह नादान-सि सिडक्शन आपको उतना हि गरमकर रही हैं जितना मुझे लिखते टाइम होँ रहा हैं?
क्याँ आपकादिल भि मेरे संग-संग धड़करहा हैं?
मुझे आपके कमेंट्स कां बहोत प्रतीक्षा हैं.बताओ नाँ, कैसीलग रही हैं मेरी किस्सा?
अच्छी लगरही हैं तौ मुझे मोटीवेट करो। ताकि मे औऱ भि ज़्यादा हॉट, सिडक्टिव अपडेट्स दे सकूँ
आपके फीडबैक कां प्रतीक्षा कररही हूं। जल्द-जल्द कमेंट करो नाँ प्लीज
~ स्वाती
प्यास जोँ बढ़ती हि जाये – New Episode
Update 20
नई शुरुआत – स्वाती कि नईभूख
फ्लॅशबैक : स्वाती कि कथा(भाग 4)
कथा सुनाते सुनाते। स्वाति कि चुत लगातार झररही थि
रिया कि भि चुत कां वोँ हि हाल थां, वोँ स्वाति केँ कथा मे खो सि गई, थि
वोँ लगातार स्वाति केँ स्तनों कों सहलारही थि
जब स्वाति कां पॉस थोड़ा लम्बा होँ गय़ा
स्वाति केँ बूब्स मे अपना चेहरा घुसाते हुए, रिया बोलीं
“उम्मम्मम्मम …….स्वाति मैम। आगे बताइये नां”
स्वाति नें उसके हाथोंको अपनीचुत केँ ऊपरला केँ छोड़ दिया
रिया उसकी ख़्वाहिश समझ गयीँ,, औऱ धिरे धीरे-धीरे स्वाति कि क्लीट सहलाने लगी
स्वाती नें रिया कों अपनीगोद मे औऱ कसकर चिपका लिया।
उसकी आवाज़ अब गहरी, धीमी औऱ पूरीतरह कामुक होँ चुकी थि।
“फिन एक् रात। मैंने फैसला कर लिया कि अब औऱ प्रतीक्षा नहि।
रात केँ १०:४५बज रहे थें। माँ सो चुकीथीं। मैंने अपनी सबसे अच्छी ट्रांसपेरेंट नाइटी पहनी।
ऊपर केँ तीनबटन खोलदिए थें। मेरी ब्रेस्ट्स कां क्लीवेज औऱ निप्पल्स कां हल्का उभारसाफ दिखरहा थां।
नाइटी इतनी छोटी थि कि मेरी जाँघों कां बड़ा हिस्सा खुलारह गय़ा थां।
मेरादिल ज़ोर-ज़ोर सें धड़करहा थां। हाथ-पांव ठंडेपड़ रहे थें, मगर मेरी बुर पहले सें हि पूरीतरह भीग चुकी थि।
हरकदम केँ संग मेरी जाँघें एक्-दूसरे कों रगड़रही थीं औऱ मुझे नितिन कि छाती, उसकी मजबूत भुजाएँ औऱ उसकी गर्मी याद आँ रही थि।
मे मन हि मन कल्पना कररही थि। कि जब मे उसके कमरे मे जाऊँगी तोँ वोँ मुझे केसे देखेगा।
मेरीयह ट्रांसपेरेंट नाइटी देखकर उसकी आँखें किसतरह भूख सें भर जाएँगी।
मे सोचरही थि कि वोँ मेरी ब्रेस्ट्स कों घूरते हुए क्याँ सोचेगा। मेरी जाँघों कों छूना चाहेगा। याँ सीधे मुझेबेड पऱ धकेल देगा।
मैंने एक् पुस्तक हाथ मे लें ली (बहाने केँ लिए), मगर मेरामन तौ कुछ औऱ हि चाहरहा थां। मे नितिन केँ कमरे कि तरफबढ़ गई। हरकदम केँ संग मेरी साँसें औऱ भारी होतीजा रहीथीं।
दरवाजे केँ पास पहुँचकर मैंने धीरे-धीरे सें खटखटाया।
“भैया। सोए नहि होँ नाँ? कुछ डाउट्स हें.”
मेरा स्वर जानबूझकर नरम औऱ मादक थां।
अंदर सें जवाबआने कां प्रतीक्षा करतेहुए मेरी बुर औऱ भि गीली हौ रही थि। मे सोचरही थि — आजरात वोँ मुझे मात्र पढ़ाएगा याँ मेरीभूख भि मिटाएगा?
दरवाजा धीरे-धीरे सें खुला।
नितिन सामने खड़ा थां। वोँ मात्र एक् काली ट्रैक पैंट पहनेहुए थां, जोँ उसकेकमर पर्र बहोत नीचे सरकी हुईँ थि।
उसकी छाती पूरीतरह नंगी थि — चौड़ी, मजबूत औऱ मांसल। टेबल लैंप कि नरम सुनहरी रोशनी उसके जिस्म पर्र पड़रही थि, जिससे उसके सिक्स पैक एब्स औऱ छाती केँ उभार औऱ भि आकर्षक लगरहे थें।
उसने गहरी, भारी आवाज़ मे कहा, “आँ जा.”
उसकी आवाज़ सुनकर मेरी बुर मे एक् झनझनाहट सि दौड़ गई।
मे अंदर घुसी। मेरादिल इतनीतेज धड़करहा थां कि मुझेडर लगरहा थां कि वोँ भि सुन लेगा।
मेरी साँसें भारी होँ चुकीथीं।
मे स्टडी टेबल वाली कुर्सी कों जानबूझकर छोड़कर सीधे उसकेबेड पर्र चली गई औऱ बहोत लगभगबैठ गई — इतना लगभग कि मेरी जाँघ करीब-करीब उसकी जाँघ सें सट गई थि।
नितिन भि मेरेबगल मे आकरबैठ गय़ा।
उसकीगरम जाँघ मेरी नंगी जाँघ सें हल्के सें छू गई।
उसकीबदन कि गर्मी मेरी ठंडी त्वचा मे समारही थि।
मे महसूस कररही थि कि उसकी त्वचा कितनी गरम औऱ मांसल हैं। मेरी ट्रांसपेरेंट नाइटी मेरी जाँघों पऱ औऱ भि ऊपरचढ़ गई थि, जिससे मेरी जाँघों कि नरम चिकनाई औऱ उसकी जाँघ केँ बीच केवल हल्का-सां कपड़ा रह गय़ा थां।
मैंने अपनी साँसरोक ली।
उसकी नंगी छाती मेरे बिल्कुल लगभग थि।
मे उसकी मस्कुलर बॉडी कि गर्मी, उसकी मर्दाना खुशबू औऱ उसके जिस्म सें निकलती तपिश कों साफ महसूस कररही थि।
मेरी बुर पहले सें हि भीगी हुइ थि, अब औऱ भि गीली होँ रही थि।
मेरी ब्रेस्ट्स हल्के-हल्के ऊपर-नीचे हौ रहीथीं, औऱ नाइटी केँ पतले कपड़े सें मेरे निप्पल्स साफनजर आँ रहे थें।
नितिन नें मेरीतरफ देखा। उसकी आँखों मे भूख थि।
हम् दोनों केँ बीचअब केवल साँसों कि दूरीरह गई थि.
‘कौन सें सम्स हें?’ नितिन नें गहरी औऱ थोड़ी भारी आवाज़ मे पूछा।
मैंने पुस्तक खोली औऱ एक् प्रॉब्लम कि तरफ इशारा किया।
मगर मेरीनजर बार-बार उसकी नंगी छाती पऱ जारही थि। उसकी चौड़ी छाती, साफ उभरेहुए एब्स, औऱ उसकी ब्लैक ट्रैक पैंट केँ अंदर जोँ उभारसाफ दिखरहा थां। वोँ सभी देखकर मेरी साँसें औऱ भारी हौ रहीथीं।
मेरे अपनेसगे बड़े भइया कां मर्दाना रूप, औऱ वोँ जिसतरह सें अपनी सेक्सी बेहन कि कच्ची जवानी कों नजरो सें पिरहा थां। उम्मम्मम्मम …….मेरेदिल मे कुछकुछ होनेलगा.
औऱ इस ख्याल सें हि मेरी बुर मे एक् गरमलहर दौड़ गई।
नितिन आगेझुक गय़ा। अब उसकी बाईं जाँघ पूरीतरह मेरी नंगी जाँघ सें सट चुकी थि।
उसकीगरम त्वचा मेरी ठंडी जाँघों कों जलारही थि। उसकीगरम साँसें मेरेगाल पऱ, कान केँ पास औऱ गर्दन पऱ पड़रही थीं।
हर साँस केँ संग मुझे महसूस हौ रहा थां कि मेरा भइया कितना उत्तेजित हौ रहा हैं।
मैंने जानबूझकर औऱ आगेझुक गई। मेरी ट्रांसपेरेंट नाइटी केँ ऊपरीबटन पहले हि खुलेहुए थें।
इस हरकत सें मेरी कच्ची, नरम चूचियाँ औऱ भि आगे निकलआईं। मेरी भरी-भरी ब्रेस्ट्स हल्की-हल्की हिलरही थीं।
मेरे निप्पल्स पतले कपड़े सें साफ उभरेहुए थें।
मे चाहती थि कि मेरा भइया अपनी बेहन कि मस्त चूचियों कों अच्छे सें देखे।
नितिन कि आवाज़ अचानक थोड़ी रुकी औऱ भारी होँ गई।
उसकी आँखें बार-बार मेरी पुस्तक सें हटकर मेरी खुली ब्रेस्ट्स पऱ जारही थीं। वोँ देखरहा थां।
मेरी चूचियों केँ उभार, उनकेबीच कि गहरीखाई औऱ मेरे सख्त निप्पल्स कों बार-बार देखरहा थां।
मे मन हि मन मुस्कुराई। सस्सस्सस्सस्सस्स …। मेरा अपना भइया। मेरीतरफ इसतरह प्यासी नजरों सें देखरहा हैं……। उफ्फफ्फ्फ़।
इस ख्याल नें मेरी बुर कों औऱ भि गीलाकर दिया।
मैंने अपनी जाँघ कों जानबूझकर उसकी जाँघ सें औऱ जोर सें दबाया। अब हमारे बदन एक्-दूसरे सें करीब-करीब चिपके हुए थें।
कमरे मे मात्र हमारी तेज़ साँसों कि आवाज़ गूंजरही थि।
नितिन कि आवाज़ अब औऱ भि भारी औऱ रुकी-रुकी होँ गई थि।
‘स्वाती। यह इंटीग्रेशन.’ वो कुछ समझाने कि कोशिश कररहा थां, मगर उसके शब्द अधूरे रहजारहे थें।
उसकी आँखें बार-बार मेरी पुस्तक सें हटकर मेरी खुली ब्रेस्ट्स पर्र चली जातीं।
वोँ मेरी भरी-भरी चूचियों कों, उनकेबीच कि गहरीखाई कों औऱ मेरे सख्त निप्पल्स कों देखरहा थां।
मेरा भइया। मेरा अपना नितिन। मेरी चूचियों कों इसतरह देखरहा थां। इस ख्याल नें मेरी बुर कों औऱ भि गीलाकर दिया।
मैंने जानबूझकर अपनी नंगी जाँघ कों उसकी जाँघ पऱ औऱ जोर सें दबा दिया।
हमारी जाँघें अब पूरीतरह सट चुकीथीं।
मेरी रसीले, गरम जाँघ उसकी मजबूत जाँघ सें रगड़खा रही थि।
मे आहिस्ता अपनी जाँघ कों उसकी जाँघ पऱ रगड़ने लगी — बहोत हि धीरे-धीरे, बहोत हि कामुक तरीके सें।
नितिन कां साँस लेना औऱ भारी होँ गय़ा।
फिन उसने धीरे-धीरे सें अपना दायाँ हाथ मेरी जाँघ पर्र रख दिया।
पहले तोँ बस हल्का-सां स्पर्श। जैसे वोँ स्वयं कों रोकरहा होँ।
मगरकुछ पलोंबाद उसकी उँगलियाँ हिलने लगीं। वोँ आहिस्ता मेरी जाँघ कों सहलाने लगा।
उसकीगरम, मोटी उँगलियाँ मेरीनरम जाँघ कि त्वचा पऱ घूमरही थीं — ऊपर सें नीचे, फिन धीरे धीरे मेरी जाँघ केँ अंदरूनी हिस्से कि तरफ बढ़ती जारही थीं।
हर बारजब उसकी उँगलियाँ मेरी जाँघ केँ अंदरूनी हिस्से कों छूतीं, मेरेबदन मे बिजली-सि दौड़ जाती।
मेरी बुर अब बुरीतरह भीग चुकी थि।
मे हल्के सें सिहरउठी औऱ अनजाने मे हि अपनी जाँघें थोड़ी औऱ फैला दि, ताकि उसकी उँगलियों कों औऱ अधिक स्थान मिले।
नितिन अब पुस्तक कों करीबभूल चुका थां। उसकी सारीनजर मेरी ब्रेस्ट्स औऱ अपनी उँगलियों पर्र थीं, जौ मेरी जाँघों कों सहलारही थीं।
हम् दोनों केँ बीचअब केवल साँसों औऱ छूने कि गर्मी रह गई थि.
“उफ्फ.”
मेरे मुँह सें अनियंत्रित सिसकी निकल गई। आवाज़ इतनी मीठी औऱ कामुक थि कि मे स्वयं लज्जा सें भर गई।
नितिन नें जल्दी मेरी जाँघ कों औऱ जोर सें दबाया। उसकीगरम उँगलियाँ मेरीनरम जाँघ कि त्वचा मे धंसगईं।
उसने फुसफुसाते हुए पूछा, “क्याँ हुआ स्वाती? कुछ प्रॉब्लम हैं?”
मे लज्जा सें लाल होँ गई। मेरे गालों पऱ गर्मी छा गई थि। मगर मे हटी नहि। बल्कि अपनी जाँघ कों उसकेहाथ केँ नीचे औऱ दबा दि।
“नं। नहि भैया.” मे काँपते हुए, बहोत नरम स्वर मे बोलि, “बस। बहोत गर्मी लगरही हैं.”
नितिन कि उँगलियाँ अब मेरी जाँघ केँ सबसे ऊपरी हिस्से पऱ थीं।
वोँ बहोत आरामसे, जानबूझकर मेरी नाइटी केँ नीचेसरक रहीथीं। हरइंच केँ संग मेरी बुर औऱ भि गीली होतीजा रही थि।
उसका स्पर्श इतना कामुक थां कि मे पागल हौ रही थि।
फिन उसने अपना मुँह मेरेकान केँ बिल्कुल पास लेँ जाकर, बहोत हि धीरे-धीरे, बहोत हि गहरी आवाज़ मे फुसफुसाया:
“स्वाती। तुँ आज बहोत। हॉटलग रही हैं। औऱ तेरीयह जाँघें। उफ्फ्फ्फ्। कितनी चिकनी औऱ रसीले हें। आह्ह्ह्ह ”
उसकीगरम साँसें मेरेकान मे घुसरही थीं। उसके शब्द सुनकर मेरे पूरेबदन मे झुरझुरी दौड़ गई।
मे मन हि मन बहुतखुश हौ रही थि। अपनेबड़े भइया कों मैंने अपने कोमल जिस्म कां दीवाना बना लिया थां
मेरी ब्रेस्ट्स तेज़ी सें ऊपर-नीचे होँ रहीथीं। मेरे निप्पल्स अब पूरीतरह सख्त हौ चुके थें औऱ नाइटी केँ पतले कपड़े सें साफ उभरेहुए थें।
मैंने बिनाकुछ सोचे अपनी जाँघों कों थोडा औऱ फैला दिया। अब मेरी जाँघें करीब पूरीतरह खुल चुकीथीं।
मे चाहती थि कि मेरा भइया औऱ आगे बढ़े। औऱ मेरी भीगी हुइ बुर तक पहुँचे।
नितिन कि उँगलियाँ अब मेरी जाँघ केँ अंदरूनी सबसे नाजुक हिस्से पऱ घूमरही थीं।
बस कुछ हि इंचदूर मेरी भीगी पैंटी थि.
नितिन कि उँगलियाँ अब मेरी जाँघ केँ सबसे ऊपरी हिस्से पऱ पहुँच चुकीथीं।
वोँ हल्का-हल्का दबाव बनाते हुए मेरी पैंटी केँ किनारे कों छूने लगीं।
मे आँखें बंद करके पूरीतरह काँपरही थि।
मेरी साँसें अब पूरीतरह उखड़ चुकीथीं।
हर साँस केँ संग मेरी छाती ऊपर-नीचे हौ रही थि औऱ मेरी ब्रेस्ट्स नाइटी केँ पतले कपड़े मे हिलरही थीं।
“ओह्ह्ह्ह ….भैया। आह्ह्ह.” मे फुसफुसाई, “धीरे-धीरे.”
मेरी आवाज़ स्वयं हि इतनी कामुक औऱ काँपती हुई निकली| मुझे लज्जा भि आई औऱ मज़ा भि आँ रहा थां।
स्सस्सस्सस्सस्सस्स मेरा सपना। मेरा हीरो। मेरा भइया नितिन …… मेरी जाँघें सहलारहा थां…। उम्मम्मम्मम
नितिन नें मेरी जाँघ कों औऱ जोर सें दबाया। उसकीगरम हथेली मेरीनरम जाँघ पर्र पूरीतरह फैल गई। फिन उसने मेरेकान केँ बिल्कुल पास मुँह लगाकर, भारी औऱ भूखी आवाज़ मे फुसफुसाया:
“तुँ मुझे पागलकर रही हैं स्वाती। उफ्फ्फ्.”
उसकीगरम साँसें मेरेकान मे घुसरही थीं। उसके शब्द सुनकर मेरी बुर मे एक् गरमलहर उठी।
वोँ कुछ पलों तक मेरी जाँघ कों प्रेम सें सहलाता रहा — कभी दबाता, कभी अपनी उँगलियों सें नरम-नरम घुमाता।
फिन धीरे धीरे उसकी एक् उँगली मेरी पैंटी केँ ऊपरसरक आई।
औऱ बहोत हि धीरे-धीरे, बहोत हि कामुक तरीके सें उसने अपनी उँगली मेरी बुर कि लाइन पऱ फेर दि।
“उईईईईई …। शःह्ह्ह.”
मे पूरीतरह सिहरउठी। मेरी बुर अब बुरीतरह भीग चुकी थि।
पैंटी कां कपड़ा पूरीतरह गीला होकर मेरी बुर कि शक्ल मे चिपक गय़ा थां।
नितिन कि उँगली केँ स्पर्श सें मेरी बुर फड़कने लगी।
मे अनजाने मे हि अपनी जाँघें औऱ थोड़ी फैला दि, जैसे अपने भइया कों औऱ ज़्यादा आमंत्रित कररही होऊँ।
मेरी साँसें अब इतनी तेज़ हौ चुकीथीं कि कमरे मे केवल हमारी भारी साँसों कि आवाज़ गूंजरही थि।
नितिन कि उँगली मेरी भीगी पैंटी पर्र ऊपर-नीचे घूमरही थि। बहोत धीरे-धीरे। बहोत हि तेज़ी सें मेरी इच्छाओं कों जगाती हुई।
“आह्ह्ह। अय्य्य्य्य्य। भैया। स्सस्स s स्सस्स”
मेरे मुँह सें अनियंत्रित, मीठी औऱ बेहद कामुक कराह निकल गई।
मे अपने भइया केँ सामने इतनी बेशर्मी सें, खुलकर सिसकारियां लेँ रही थि।
तभी बाहर् सें माँ कि आहट सुनाई दि
नितिन नें झटके सें अपनाहाथ मेरी जाँघ सें हटा लिया।
उसके चेहरे पऱ भि उत्तेजना औऱ घबराहट कां मिश्रण थां।
मैंने तेज़ी सें अपनी नाइटी नीचे खींची, जौ अब मेरी भीगी पैंटी पऱ चिपकी हुई थि। मेरी ब्रेस्ट्स अभि भि तेज़ी सें ऊपर-नीचे हौ रहीथीं।
मैंने पुस्तक उठाई औऱ जल्द सें कमरे सें बाहर् निकल गई।
मेरा पूरा जिस्म काँपरहा थां। मेरी जाँघें एक्-दूसरे सें रगड़खा रहीथीं। मेरी बुर इतनी गीली औऱ फड़करही थि कि चलते वक़्त हरकदम पऱ मुझे महसूस होँ रहा थां कि मेरी पैंटी पूरीतरह भीग चुकी हैं।
मेरे नितिन भैया। अभि कुछ हि समय पहले मेरी बुर कों उँगली सें छूरहा थां।
मे अपने कमरे मे आकरबेड पर्र लेट गई। तकिए कों दोनों हाथों सें कसकर छाती सें चिपका लिया। मेरी नाइटी अभि भि अस्त-व्यस्त थि। मेरे होंठों पऱ एक् संतुष्ट, शरारती औऱ जीतभरी मुस्कान थि।
मैंने आँखें बंद करकेमन हि मन सोचा.
“अब। मेरा भइया भि मुझमें फँस चुका हैं। मेरा नितिन। मेरी चूचियों औऱ मेरी बुर केँ लिए पागल होँ रहा हैं। ”
इस ख्याल नें मेरी बुर कों फिन सें एक् जोरदार झटका दिया। मैंने तकिए कों औऱ जोर सें दबाया औऱ धीरे-धीरे सें अपनी जाँघें रगड़ने लगी।
अब यहखेल औऱ भि मजेदार होने वाला थां।
प्यास जोँ बढ़ती हि जाये – New Episode
Update 21
नई शुरुआत – स्वाती कि नईभूख
फ्लॅशबैक : स्वाती कि किस्सा (भाग 5)
स्वाती नें रिया कों अपनीगोद मे औऱ गहराई सें समेट लिया।
रियाअब पूरीतरह स्वाती कि जाँघों पर्र बैठी हुइ थि।
स्वाती कि एक् हाथ रिया कि कमर केँ पीछे थि, जबकि दूसरा हाथ धीरे धीरे उसकीपीठ पर्र सहलाते हुए नीचे कि तरफसरक रहा थां।
स्वाती कि आवाज़ अब पूरीतरह भारी, कामुक औऱ यादों मे डूबी हुईँ थि।
“उसरात केँ बाद मुझे एहसास हौ गय़ा कि अब हम् दोनों एक् हि नाव मे हें। नितिन भि मुझे उतना हि चाहने लगा थां जितना मे उसे। उसके चेहरे पऱ वोँ भूखसाफ दिखने लगी थि। जब भि मे उसके कमरे मे जाती, उसकी नजरें मेरी जाँघों, मेरी ब्रेस्ट्स औऱ मेरे होंठों पर्र रुक जातीं। वोँ अब पहले जितना शांत नहि रह पाता थां। ”
स्वाती नें बात करतेहुए रिया कि गर्दन पऱ हल्के-हल्के चुंबन बरसाना शुरुआत कर दिया।
उसकेगरम होंठ रिया कि नरम गर्दन पर्र रेंगरहे थें।
रिया कि साँसें भारी हौ चुकीथीं।
उसकी बुर अब बुरीतरह गीली हौ गई थि औऱ स्वाती कि जाँघ पर्र गर्मी फैलारही थि।
स्वाती नें रिया कि एक् ब्रेस्ट कों अपनी हथेली मे भर लिया औऱ आहिस्ता दबाते हुएआगे बोलीं,
“मे समझ गई थि, वोँ भि मुझे पूरीतरह पाना चाहता हैं। वोँ भि बेसब्र हौ रहा हैं। मगर समस्या यह थि कि माँ करीब हमेशा घऱ पऱ रहतीथीं। दिन मे भि, साम मे भि। हम् दोनों केँ पासकोई सेफ मौका नहि थां.”
रियाअब पूरीतरह उत्तेजित होँ चुकी थि।
उसने स्वाती कि भारी ब्रेस्ट कों अपनी हथेली मे लेँ लिया औऱ दबाने लगी।
स्वाती नें मुस्कुराते हुए रिया केँ कान मे फुसफुसाया,
“क्याँ हौ रहा हैं रिया? मेरी किस्सा सुनकर तेरी बुर कितनी गीली होँ गई हैं.”
रिया नें जवाब मे स्वाती कि निप्पल कों उँगलियों सें दबाया औऱ काँपती हुइ बोलि, “मैम। आपकी किस्सा। बहोत हॉट हैं.”
स्वाती नें रिया कों औऱ कसकर अपनीगोद मे खींच लिया।
अब दोनों केँ बदन एक्-दूसरे सें पूरीतरह चिपके हुए थें।
स्वाती कि एक् उँगली निचेसरक गई औऱ उसकी भीगी पैंटी केँ ऊपर सें उसकी बुर कों सहलाने लगी।
रिया सिहरउठी औऱ स्वाती कि गर्दन मे मुँह छुपा लिया।
स्वाती मुस्कुराई। उसकी आँखों मे शरारत औऱ पुरानी यादों कि चमक थि। उसने रिया कों अपनीगोद मे औऱ भि कसकर चिपका लिया औऱ अपनी उँगली कों रिया कि भीगी बुर पर्र आहिस्ता गोल-गोल घुमाते हुए, भारी औऱ कामुक आवाज़ मे बोलीं:
“अबहर लम्हा बेचैनी बढ़ती जारही थि.
मे दिनभर मात्र नितिन केँ बारे मे हि सोचती रहती।
क्लास मे बैठे-बैठे भि मेरीनजर बार-बार घड़ी पर्र चली जाती।
हर मिनट …एक् घंटा लगता थां। मन करता कि काश वक़्त तेज़ भागने लगे औऱ मे जल्द सें जल्दघऱ पहुँच जाऊँ। उसके कमरे मे घुस जाऊँ। उसके बहोत लगभगबैठ जाऊँ।
मे कल्पना करती कि केसे मे उसके कमरे मे जाऊँगी, दरवाजा बंद करूँगी औऱ सीधे उसकेपास जाकर खड़ी होँ जाऊँगी।
मेरी नाइटी इतनी छोटी औऱ पारदर्शी होंगी कि मेरी ब्रेस्ट्स औऱ जाँघें करीब-करीब नंगीदिख रही होंगी।
मे उसके सामने खड़ी होकर धीरे-धीरे सें अपनी नाइटी केँ पट्टे खोल देती।
मेरी भरी-भरी चूचियाँ उसके सामने आँ जातीं। फिन मे उसकेगोद मे बैठ जाती, अपनी जाँघें उसके इर्द-गिर्द फैलाकर। मे उसकी मर्दाना खुशबू सूँघती, उसकी नंगी छाती पर्र अपना चेहरा रखती औऱ उसकीगरम त्वचा कों चूमती।
मे कल्पना करती कि वोँ अपनी मजबूत भुजाओं सें मुझे कसकर पकड़ लेगा।
उसकी उँगलियाँ मेरी जाँघों पऱ घूमतीं, फिन धीरे धीरेऊपर चढ़तीं औऱ मेरी भीगी बुर कों सहलाने लगतीं।
मे उसकेकान मे फुसफुसाती, " भैया। मेरे जिस्म कां रोमरोम आपको पुकार रहा हैं। सस्स्सस्स्सस्स्स ……। अपने छोटी बेहन कि प्यास…। बुझादो भैया "
रात केँ अंधेरे मे मे अपनेबेड पर्र लेटी होती।
मेरी आँखें बंद होती, मगर मेरामन पूरीतरह जागरहा होता थां। मे आरामसे ड्रीम्स मे खो जाती थि.
नितिन चुपचाप मेरे कमरे मे आकर मेरेबेड केँ पास खड़ा होँ गय़ा हैं।
कमरे मे केवल बेडसाइड लैंप कि नरम सुनहरी रोशनी फैली हुई हैं।
वोँ मेरीतरफ देखकर धीरे-धीरे सें मुस्कुराता हैं, फिन बहोत धीरे-धीरे सें मेरेपास बेड पर्र बैठ जाता हैं।
उसकी आँखों मे एक् गहरी, भूखी चाहत हैं जौ मुझे पहलेकभी नहि दिखी।
वोँ दोनों हाथों सें मेरे चेहरे कों प्रेम सें थाम लेता हैं।
उसके अँगूठे मेरे गालों पर्र बेहद धीरे धीरेघूम रहे हें।
मेरादिल जोर-शोर सें धड़करहा हैं।
वोँ अपना चेहरा मेरीतरफ लारहा हैं। बहोत हि धीरे-धीरे। इतनी धीमीगति सें कि हर लम्हा करीब-करीब घंटो जैसालग रहा हैं।
उसकीगरम साँसें पहले मेरे होठों कों छूरही हें, फिन मेरीनाक कों, औऱ अब उसके होंठ मेरे होंठों केँ मात्र एक् साँस कि दूरी पऱ हें।
मे आँखें बंदकर लेती हूं।
औऱ फिन। बहोत हि नरम, बहोत हि धीरे-धीरे सें उसकेगरम होंठ मेरे होंठों पऱ टिक जाते हें।
उसका पहलाकिस एक् पंख कि तरह हल्का औऱ कोमल हैं।
वोँ मेरे निचले होंठ कों आरामसे चूसरहा हैं, फिन ऊपरी होंठ कों।
जैसे वोँ मेरे स्वाद कों पूरीतरह महसूस करना चाहता हौ।
मे हल्के सें काँपरही हूं। उसकी गर्म साँसें मेरे मुँह मे घुलरही हें।
धीरे धीरे वोँ किस कों गहराकर रहा हैं।
उसकीजीभ मेरे होंठों कों चीरकर अंदर आँ रही हैं औऱ मेरीजीभ कों बहोत प्रेम सें, बहोत धीरे-धीरे छूरही हैं।
हम् दोनों कि जीभें एक्-दूसरे कों सुलझा रही हें, घुमारही हें, चूसरही हें। किसअब इतना गहरा औऱ भावुक हौ चुका हैं कि मेरी साँसें उखड़रही हें।
उसका एक् हाथ मेरे बालों मे फिसल गय़ा हैं, दूसरे हाथ सें वोँ मेरीकमर कों अपनीतरफ खींचरहा हैं। मे उसके मजबूत सीने सें पूरीतरह चिपक गई हूं।
अब उसकाकिस औऱ भि जुनूनी होँ रहा हैं। वोँ मेरे होंठों कों चूसरहा हैं, हल्का-हल्का काटरहा हैं, फिनफिन सें प्रेम सें चूमरहा हैं। जैसे वोँ मुझे पूरीतरह अपना बनाना चाहता हौ।
मेरे पूरे जिस्म मे बिजली दौड़रही हैं।
मेरी बुर गीली हौ चुकी हैं। औऱ मे पूरीतरह उसके होंठों मे खो चुकी हूं.
उम्मम्मम्म कितना हसीन ख्वाब आते थें मुझे
रात कों बेड पर्र लेटते हि मेरी कल्पनाएँ शुरुआत हौ जातीं।
मे सोचती कि काश मां कहींकुछ दिनों केँ लिएचली जाएँ, तौ घऱ मे मात्र हम् दोनों रह जाएँ।
मे आँखें बंद करके कल्पना करती। कि अचानक नितिन मेरे पीछे सें आकर मुझेजोर सें पकड़ लेगा।
उसकी मजबूत भुजाएँ मेरीकमर कों घेर लेंगी औऱ वोँ मुझे दीवार सें सटाकर चिपका देगा।
उसकी साँसें मेरी गर्दन पर्र गरम-गरम पड़ेंगी। वोँ अपनी उँगलियों सें मेरी नाइटी केँ पट्टे घसीटकर ऊपरकर देगा, मेरी नंगीकमर औऱ जाँघों कों छूतेहुए।
फिन वोँ मुझे औऱ भि जोर सें दीवार सें दबाएगा, अपनी हार्ड लन्ड कों मेरी नितंबों पर्र रगड़ते हुए। औऱ एक् झटके मे मुझे चोदने लगेगा।
मे कल्पना करती कि केसे वोँ मुझे जंगली जानवर कि तरह मुझेपेल रहा हैं, मेरी बुर कों पूरीतरह भरतेहुए। औऱ मे बेसुध होकर केवल आहेंभर रही हूं।
उन दिनों नितिन कां चेहरा अब बिल्कुल बदल चुका थां। जब भि मे उसके कमरे मे पढ़ने जाती, वोँ मेरीतरफ देखकर गहरी, लंबी साँस लेता। उसकी आँखों मे अब केवलभूख नहि, बल्कि जंगली प्यास औऱ गहरी चाहत कि आगजलरही होती। वोँ मुझेऐसे घूरता जैसे मे उसकी सबसे बड़ी तड़प, सबसे गहरी लालसा बन चुकी हूं।
कभी-कभी वोँ हिम्मत जुटाकर मेरी जाँघ पर्र अपनागरम हाथरख देता औऱ आरामसे सहलाने लगता। उसके स्पर्श मे प्रेम थां, मगर उससे कहीं अधिकभूख औऱ बेकरारी थि। फिन भि माँ केँ डर सें वोँ आगे नहि बढ़ पाता। हम् दोनों कि नजरें मिलतीं औऱ एक् समय केँ लिए पूरी दुनिया रुक सि जाती। उन आँखों मे एक् हि पुकार छुपी होती —
‘काशकोई मौकामिल जाए.काश हम् दोनों एक् लम्हा केँ लिए भि पूरीतरह अकेले होँ जाएँ.’
मे रात-दिन यही सोचती रहती — कब आएगा वोँ लम्हा जब मे अपने भइया कि बाहों मे पूरीतरह घुल जाऊँगी? कब वोँ मुझे अपने सीने सें चिपकाकर, मेरे होंठों कों बेरहमी सें चूसते हुए, मेरी चूचियों कों मसलते हुए, मुझे अपनी पूरी मर्दानगी सें चोदेगा?
मे कल्पना करती कि केसे वोँ मुझे दीवार सें सटाकर खड़ाकर देगा, मेरी नाइटी कों ऊपर करके अपनी हार्ड लन्ड कों मेरी भीगी बुर पऱ रगड़ेगा। मे सोचती कि केसे वोँ मेरी गर्दन चूमते हुए, मेरेकान मे फुसफुसाएगा — “स्वाती। तूँ मेरी हैं। मेरी बेहन। मेरीजान.” औऱ फिन एक् जोरदार झटके मे मुझेभर देगा।
मे चाहती थि कि वोँ मेरी चूचियों कों चूसता, काटता, निशान बनाता। मे चाहती थि कि वोँ मेरी जाँघें फैलाकर मेरी बुर कों घंटों तक चाटे, अपनीजीभ अंदर डालकर मुझे पागलकर दे। मे कल्पना करती कि केसे वोँ मुझे चारों खानेचित करके, मेरे बालों कों खींचते हुए, मुझे ज़ोर-ज़ोर सें चोदेगा। मे उसके नीचे कराहती हुइ, “भैया। औऱ जोर सें। फाड़दो अपने बेहन कि चुत.” चिल्लाऊँगी।
हररात मे बेचैनी सें करवटें बदलती रहती। आँखों मे नींदनाम कि चीज नहि रह गई थि। मेरी बुर लगातार गीली, फूली हुई औऱ फड़कती रहती। मे दो-दो उँगलियाँ अंदर डालकर जोर-शोर सें रगड़ती, नितिन कां नाम लें-लेकर चीखती, औऱ कईबार झड़ जाती। मगर उससे असलीभूख कभी मिटती नहि।
मुझे अपना भइया चाहिए थां। उसका लन्ड, उसकी गर्मी, उसकीभूख, उसका प्रेम — सभीकुछ।
मे अब मात्र पूरीतरह उसकी होजाने कों तरसरही थि। बिना उसके मेरी बुर, मेराबदन औऱ मेरामन — कुछ भि शांत नहि हौ रहा थां।
नितिन भि अब उतना हि बेचैन हौ चुका थां जितना मे।
जब भि मे उसके कमरे मे जाती, उसकी नजरें मुझे देखते हि बदल जातीं। उसकी आँखों मे मेरे शरीर कों पाने कि चाहतभूख, प्यास औऱ काबू मे रखी हुईँ जंगली कामना साफ झलकती। कईबार तौ मे देखती कि उसकी पैंट केँ अंदर उसका लन्ड सख्त होकर उभारबना चुका होता। वोँ लज्जा सें याँ कोशिश मे अपनी नजरें हटाने कि कोशिश करता, मगर नहि हटा पाता। उसकी आँखें बार-बार मेरी ब्रेस्ट्स, मेरी जाँघों औऱ मेरे होंठों पऱ रुक जातीं।
कभी-कभी वोँ मुझेइस तरह घूरता कि मुझे साँस लेना मुश्किल हौ जाता। फिन वोँ अपनी मुट्ठियाँ जोर सें भींच लेता, जैसे स्वयं कों रोकने कि अंतिम कोशिश कररहा होँ। उसके जबड़े कस जाते, गला हिलता, औऱ वोँ गहरी साँस लेता। मेरा अपना भइया। मेरेलिए इतना पागल हौ रहा थां। इस ख्याल सें मेरी बुर औऱ भि गीली होँ जाती।
हम् दोनों केँ बीचअब एक् अनकही, आगभड़क रही थि।
हम् बातें करते, पढ़ाई कां बहाने करते, किताबें खोलकर बैठते। मगरअसल मे हम् दोनों एक्-दूसरे कों चोदने केँ ख्वाब देखरहे थें। वोँ मेरी नाइटी उतारकर मुझेबेड पर्र दबाने कां सपना देखता होगा, औऱ मे उसके कपड़े फाड़कर उसके सख्त लन्ड कों अपनी बुर मे लेने कां।
हमारी नजरें मिलतीं तोँ एक् लम्हा केँ लिएसभी कुछरुक जाता। उस लम्हा मे हम् दोनों बिना बोले एक्-दूसरे सें वादाकर रहे होते — कि जब मौका मिला, तौ हम् एक्-दूसरे केँ जिस्म कों पूरीतरह नोच-खा लेंगे।
मे मन हि मन सोचती रहती.
‘बस एक् मौका.बस एक् दिनजब मां घऱ पर्र नं हों.फिन मे नितिन भैया कों पूरीतरह अपनाबना लूँगी।
मे उसके कमरे मे जाऊँगी, दरवाजा बंद करूँगी औऱ सीधे उसकेगले लग जाऊँगी। मे उसे चूमूँगी, उसके सीने कों चाटूँगी, उसके लन्ड कों अपने हाथों मे लूँगी औऱ उसे बताऊँगी कि मे कितने दिनों सें उसे चाहती हूं।
फिन वोँ मुझेबेड पर्र पटक देगा। मेरी नाइटी फाड़ देगा। मेरी चूचियों कों जोर-शोर सें चूसेगा, काटेगा। मेरी जाँघें फैलाकर मेरी बुर कों घंटों तक चाटेगा। औऱ आखिरकार। अपनागरम, मोटा लन्ड मेरी भीगी बुर मे पूरा कां पूरा धकेल देगा।
मे अपने भइया कां लन्ड अपनी बुर मे लेतेहुए चीखूँगी। औऱ वोँ मुझे बार-बार चोदेगा।
प्यास जोँ बढ़ती हि जाये - Next part mein bada twist
Swati ji ap aapni MOUJ mai behte raho jise aapke mithe jal ( kahani) kaa aanad lena h woh le lega pr ap aapni MOUJ na chodo. Har ek nadi kaa aapna ek astitva hotha h so keep it up.
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