WOH SUNAHRE DIN (MAUSI KI NANAD KE SAATH RELATIONSHIP KI KAHANI) - Mausi Ki Nanad Ki Beti – New Episode
Part 6
मेरे जिंदगी मे एक् बड़ा बदलाव
मे किचन मे खड़ा थां, उसे पीछे सें पकड़रखा थां। मेरासिर उसके कंधे पऱ थां। वो चपाती बनारही थि। मैंने उसकेबाएं गालपर चुंबन लिया। मेरेहाथ उसकेपेट पर्र थें औऱ मेरीपकड़ मजबूत थि, उसे अपनीओर खींचा। उसने मुझे डाइनिंग टेबल पऱ ठीक सें बैठने औऱ इनसभी चीजों कों रात पर्र छोड़ने केँ लिएकहा। मैंने उसे छोड़ दिया औऱ डाइनिंग टेबल पऱ चला गय़ा। उसनेआकर मुझे ब्रेकफास्ट परोसा।
मैंने अपनी कुर्सी घुमाई औऱ उसे अपने सामने कि गोद मे बैठने कों कहा। वो मुस्कुराते हुएबैठ गयीँ, वो जानती थि कि मे उसे चूमने चाहता थां। मैंने उसे चुंबन करने सें पहले मेरासंग देने केँ लिए शुक्रिया दिया। उसने चुंबन मे मेरासंग देना शुरुआत किया औऱ कहा, "ये केवल तुम्हारे स्वभाव कि वजह सें हुआ हैं। तुम् एक् बहोत अच्छे लड़के हौ। " मैंने उसेफिन सें धन्यवाद बोला, हमारे होंठआपस मे मिले। मैंने उसके होठों कों चखा, कितनाअनोखा स्वाद थां, आज स्वाद अलग थां क्योंकि उसने अभि तक अपने दाँत ब्रश नहि किए थें। मैंने उससेकहा, "मुझेये बतादो कि मे क्याँ छू सकता हूं क्याँ नहि क्यूंकि तुम्ही इससभी कों DECIDE करोगी ?" "जोँ तुम् चाहते होँ वोँ सभी कि लिए तुम्हे वोँ सबसे प्यारे तीन शब्द बोलने पड़ेंगे, " वो येसभी मुझेकिस करतेहुए कहे तौ जब वोँ बोलरही थि तौ किस कां औऱ भि मज़ा आँ रहा थां। इसने मेरे पूरे जिस्म मे एक् सनसनी भर दि। "नं केवल वोँ शब्द बोलने हें, बल्कि तुम्हे उन शब्दों केँ अर्थ कों भि समझने कि ज़रूरत हैं औऱ मात्र अपनी जरूरतों कों पूरा करने केँ लिए नहि, इसलिये बोलोयदि तुम् मुझसे सचमुच प्रेम करते हौ। " मैंने ईमानदारी सें ये स्वीकार किया कि मेरी उसकेलिए जरूरतों नें मुझेउसे छूने केँ लिए उकसाया थां। वो मेरी ईमानदारी औऱ मासूमियत पर्र मुस्कुरा रही थि। वोँ अबउठी औऱ मुझे अपना ब्रेकफास्ट करने कों कहा। मैंने भि घड़ी कि तरफ देखा, मुझेदेर हौ रही थि। इसलिये जल्द सें ब्रेकफास्ट किया औऱ रसोई मे जाकरउसे बाय बोलि, उसने मुझेगले लगाया औऱ मेरे होंठों पऱ हलकी सि किस कि औऱ मुझसे पूछा कि मे दोपहर का खाना मे क्याँ खानां चाहता हूं। मैंने उसेअलु मटर बनाने केँ लिएकहा।
दुकान पऱ मे सोचरहा थां कि क्याँ मे इतनागिर गय़ा हूं? मे हमेशा सेक्स केँ बारे मे सोचता हूं औऱ उसे प्रेम कि जरूरत हैं। मे ऐसा केसेकर सकता हूं। वो मुझे इतना सम्मान भि देती हैं औऱ मे हमेशा उसे वासना सें देखता हूं। मे ऐसा क्यूं कररहा हूं? क्याँ मुझे अपना बर्ताव बदलना चाहिए? एक् औऱ प्रश्न जोँ मुझे चिढ़ा रहा थां, 'क्याँ मे उससे प्रेम करता हूं?' मे येसभी सोचरहा थां जब मोबाइल कि रिंगटोन नें मुझे अपने विचारों सें जगाया, ये मासी थां। उसने मुझे बताया कि मौसाजी कि किडनी मे कुछ समस्या थि औऱ उन्हें अस्पताल मे इलाज कराने कि जरूरत थि औऱ वेकुछ औऱ वक़्त केँ लिए रहने वाले थें। मैंने उससे पूछा कि क्याँ उन्हें मेरी वहां जरूरत हैं। मौसी नें मुझेघऱ पऱ रहने औऱ दुकान औऱ नीती कि देखभाल करने केँ लिएकहा। मैंने कहाठीक हैं औऱ बोला कि हम् साम कों उन्हें देखने आँ रहे हें। मैंने नीती कों मोबाइल किया औऱ उसे बोला, "हम् साम कों मौसाजी कों देखने जारहे हें। उसनेकहा" ठीक हैं मे सजधजकर रहूंगी। "
वो गहरे नीलेरंग केँ टॉप औऱ बैंगनी पैंट मे एक् मॉडल कि तरहलग रही थि। उसने काले चश्मे पहनेहुए थें। हमें गाड़ी लेने केँ लिए 100 मीटर चलना थां क्योंकि मासी कां घऱ एक् तंगगली मे थां। वो मेरेसंग बड़े गर्व सें चलरही थि। मैंने उसेये कहतेहुए चिढ़ाने कि कोशिश कि, "लोग मेरेसंग इतनी हसीन गर्ल फ्रेंड देख केँ जलेंगे। " ये कहतेहुए मैंने उसकाहाथ पकड़ लिया। उसने मेरे कंधे पर्र थप्पड़ मारते हुएकहा, "मे तुम्हारी gf नहि हूं, समझे। " वो जानती थि कि मे मात्र मजाककर रहा हूं औऱ वो भि नाराज नहि थि। हम् दोनों जोर सें हंस पड़े। एक् बुजुर्ग जोड़े नें हमें अजीबढंग सें देखा। उसने शरमाकर मेराहाथ छोड़ दिया।
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Part 6 (b)
Kuchh too shuru हुआ ham dono में
हम् हॉस्पिटल केँ लिए निकलपड़े। वो बहुतचुप थि। मैंने कारण पूछा। बोलि "कुछ भि नहि "। मैंने जोर देकर पूछा तोँ उसने मुझे बताया कि उसे अपनी मम्मी कि याद आँ रही हैं। मैंने उससे पूछा कि क्याँ वो अपने मम्मी बाप कों देखने केँ लिए अपनेघऱ जानां चाहती हैं। उसकाघऱ उसशहर सें केवल 5 6 किमीदूर थां जहाँ मौसाजी एडमिट थें। उसनेकहा, "ठीक हैं हम् चलेंगे"। मासी मौसाजी सें मिलने केँ बाद हम् उसकेघऱ चलेगए। ओह, बहोत दिनों केँ बाद अपनी मम्मी कों देखकर कितनी बुरीतरह सें रोती हें लड़कियाँ। उसके पिता कों छोड़कर परिवार केँ सब सदस्यों नें मेरा स्वागत किया। वे मेरेसंग बड़े रूखेढंग सें पेशआये। उसकी मां नें मेरेलिए तीन सब्जियां बनायीं। उसकी मम्मी नें मुझसे करीब एक् घंटे तक बात कि औऱ मेरे परिवार औऱ पढ़ाई केँ बारे मे पूछा। वे पहले सें हि मेरे बारे मे सभीकुछ जानते थें। मेरा परिवार मेरी शिक्षा मेरी नेचरआदि केँ बारे मे उन्हें थोड़ा बहोत पहले सें पता थां, मगरहर कोई औपचारिकता केँ लिएइन चीजों कों पूछता हि हैं। उन्होंने हमेंरात भर रुकने केँ लिए मजबूर किया।
मुझे एक् कमरे मे ठहराया गय़ा। मे छत कि औऱ देखरहा थां औऱ कुछसोच रहा थां जब नीती पीछे सें आई औऱ अपने हाथों सें मेरी आँखों कों ढँक दिया। उसने पूछा"कौन हैं?"। मे नें कहा, "नीति केँ अलावा औऱ कौन मेरेसंग ऐसाकर सकता हैं। " वो मुस्कुराई औऱ मुझेगले लगाया औऱ मेरे होठों पऱ एक् छोटा सां चुंबन दिया। "स्वीटहार्ट तुम्हे आज अकेले हि सोना पड़ेगा" उसने मुस्कुराते हुएकहा। मैंने कहा,
"मे समझ सकता हूं, जान। " उसनेकहा, "मे, बस एक् घंटे केँ लिए तुम्हारे संग हूं औऱ तब तक तुम् जितनी चाहे उतनीबार मुझेकिस कर सकते होँ। " मेरी आँखों मे आँसु थें जब मैंने उससेये कहा, "मे तुम्हे उन दिनों मे बहोत मिसकर रहा थां जब हम् बात नहि कररहे थें, अब मे ये सोचता हूं कि तुमसे कुछ भि करने सें पहले मेरे अंदर feelings होनी चाहियें। " उसने अपने हाथों सें मेरी आँखों कों पोंछा औऱ कहा, "मे तुमसे कभी भि नाराज़ नहि थि मगर तुम्हे कई चीजें सीखने कि ज़रूरत हैं, प्रेम कि मामले मे तुम् नासमझ होँ औऱ मे तुम्हे सिखाऊंगी कि लड़की सें केसे बर्ताव करना हैं। " इतना कहकर वोँ मेरेऊपर चढ़ गई, औऱ मेरे चेहरे पर्र चुम्बनों कि बौछार कर दि। "लड़कियां कुछ भि कर सकती हें तौ लड़के अपनी मर्जी सें क्यूं नहि कर सकते। " मैंने उससे पूछा। उसने समझाया, "क्योंकि लड़कियां नदियों कि तरह होती हें औऱ अपनी सीमाओं कों जानती हें मगर लड़के तोँ सागर कि तरह होते हें उन्हें सीमाओं सें कोई मतलब नहि होता। " मैंने कुछ नहि कहा। मैंने कहा "मुझेअब एहसास हुआ कि कुछ गहरा होने केँ लिएदो लोगों केँ बीच प्रेम होना चाहिए। " उसने मुस्कुराते हुएकहा, "बिलकुल सही। इसलिये मे तुम्हें पसन्द करती हूं। " उसने मुझसे कहा कि वो मुझे पसन्द करती हैं, जबकि मे उसेये नहि पाया थां। "क्याँ तुम् पूरीरात नहि रह सकती ?" मैंने उसे बहोत कस केँ पकड़रखा थां। "मेरे प्यारे मणिये possible नहि हैं। मगर मे पूरी कोशिश करुँगी कि ज़्यादा सें अधिक वक्त तक तुम्हारे संगरह सकूँ। " अभि भि मेरी आंखों मे आंसू थें। उसने मुझसे पूछा, "जानू तुम् कों क्यूं रोरहे होँ। तुम् मुझे मनपसंद करते हौ नं?" "मे पूरेदिन मात्र तुम्हारे बारे मे हि सोचरहा थां कि मे हमेशा तुम्हे छूने केँ लिए हि सोचता हूं। मैंने अपने बर्ताव केँ लिए स्वयं कों कोसा। मुझे तुम्हारे संग रिलेशनशिप मे आए बिनाये नहि सोचना चाहिए थां। मे बुरा हूं। सच मे बहोत बुरा हूं। " "किसने कहा कि तुम् बुरे हौ, तुम् मेरे प्रिय हौ। मे तुम्हें पसन्द करती हूं औऱ जब तुम् किसी कों मनपसंद करते होँ तौ तुम् उस शख्स केँ बारे मे कुछ भि सोच सकते होँ, बल्कि मे ये जानना चाहती हूं कि तुम् क्याँ सपना देखते हौ? मुझे। मुझे डिटेल मे बताओ। "वो मुझेसहज बनारही थि औऱ बहोत शरारती होँ गई थि। "नहि, मे तुम्हारे बारे मे कुछगलत नहि सोचता। " मैंने झूठ बोला। "अपनी भावनाओं कों मेरे बारे मे डिटेल मे बताएं, ये मेरा आर्डर हैं। " उसने केवल मुझे आदेश दिया। "मे सभीकुछ करना चाहता हूं। " मैंने बस इतना हि कहा। "मुझे डिटेल मे बताओ, " उसनेफिन सें आदेश दिया। "मे तुम्हारे संगसभी कुछ करने केँ लिए सजधजकर हूं। मे अपने पूरे जिस्म कों चूमना चाहता हूं। तुम्हारे बदन कि सब अंगों कों छूना चाहता हूं। गहराई सें तुम्हे छूना चाहता हूं। " मे चुप हौ गय़ा। "मणि जारीरखो। मे तुम्हारी फीलिंग्स कां मजा लें रही हूं। " उसकी आँखें नशे मे लाल होँ गईं। "मे तुम्हारे बूब्ज़, तुम्हारी बुर, तुम्हारे होंठ, तुम्हारे हरअंग कों चूसना चाहता हूं औऱ मे तुम्हारे संगकुछ करना चाहता हूं। " मे उस शब्द कों कहने मे संकोच कररहा थां। "प्लीज मणिसभी कुछसाफ़ साफ़ बोलो। " उसने मुझसे अपनी फीलिंग्स बताने कि लिएहर शब्द कां प्रयोग करने कि जरुरत कां अनुरोध किया। "I wanna fuck you निति"
मुझे क्षमा करदो। मे सभीकुछ करना चाहता हूं औऱ मैंने तुम्हारे बारे मे सोचते हुएकई बार हस्तमैथुन किया हैं। "मे अब निडर होकरबोल रहा थां। " ओह so sweet। तुम् सच मे एक् ईमानदार औऱ प्यारे लड़के होँ। मुझेसभी पता हैं, पऱ मे तुम् सें येसभी जानना चाहती थि औऱ मे अब अच्छा महसूस कररही हूं ये जानकार कि तुम् मुझे इतना ज़्यादा पसन्द करते होँ। "वो अभि भि मेरेऊपर लेती हुईँ थि औऱ मुझेबार बार चुंबन कियेजा रही थि। वो उठखड़ी हुइ दरवाजा केँ पास गई, औऱ दरवाजे कों लॉक करके वापिस लौटआयी। मे येसभी बड़ी हैरानी सें देखरहा थां। वो फिन सें मुझ पर्र बैठ गई। "तुम्हे आज औऱ औऱ भि बहोत कुछ मिलेगा" ये कहतेहुए उसने मेरे दोनों हाथों कों पकड़ लिया औऱ अपने बूब्स पऱ रख दिया। "इन्हे दबाओ, मे तुमसे ढेर सारा प्रेम करना चाहती हूं। " "मैंने कहा, " भावनाओ मे न् बहो, नीती, तुम् अपनेहोश मे नहि हौ। हम् कलबात करेंगे। "मे नहि चाहता थां कि वो भावनात्मक रूप सें कुछ भि करे। उसनेकहा, " मे चाहता हूं कि तुम् मेरी खुशी केँ लिएऐसा करो। प्लीज मणिअब मे चाहती हूं तुम् ऐसाकरो। "मैंने उसके बूब्स कों दबाना शुरुआत कर दिया औऱ कुछ वक्तबाद मैंने उसे अपनीतरफ खींच लिया उसके बूब्ज़ कों चूमने केँ लिए, उसनेकहा कपड़ों पऱ तुम्हारे लार कां असर हौ सकता हैं औऱ इतना कहकर उसने अपनाटॉप उतर दिया उसके दूधिया बूब्स औऱ गुलाबी डोडियों नें मुझे हैरान कर दिया। उसने अपने मम्मों मेरे मुंह पऱ रखदिए औऱ मुझे चूसने केँ लिएकहा। ये मेरेलिए एक् बहोत अलग तजुर्बा थां। मैंने बहोत नरमढंग सें उसके मम्मों चूसना शुरुआत कर दिया क्योंकि मे सोचरहा थां कि उसको कहीं दर्द नं हौ मेरीवजह सें। वो मुस्कुरा रही थि औऱ लगातार मुझे अपने मम्मों चूसते हुएदेख रही थि। मैंने उसके प्यारे औऱ बड़े निपल्स कां मजा लिया औऱ उस पऱ बहोत धीरे-धीरे सें काटने लगा। उसने मेरीटी शर्ट भि खोल दि औऱ मेरे नंगे सीने केँ स्पर्श कों महसूस करना चाहती थि। मे उसके बूब्स कों छोड़ना नहि चाहता थां, मे एक् कुंवारी लड़की केँ बूब्ज़ केँ पहले स्पर्श केँ बाद परमानंद सें भर गय़ा औऱ इसने मुझे करीब बेहोश सां कर दिया। वो भि मजा लेँ रही थि। मैंने उससे नीचेआने कि लिएकहा। अब मे उस पऱ control करना चाहता थां। मैंने उससे पूछा वो मेरे मर्दाना हिस्से कों छू सकती हैं?। मगरये बात सुनकर हि बहोत लज्जा महसूस कररही थि। इसलिये मैंने स्वयं हि अपने लण्ड कों छुआये अचानक हि होँ गय़ा अबये पूरीतरह सें खड़ा थां औऱ जैसे हि मैंने अपने पार्ट कों छुआ उसकाहाथ भि कपड़े केँ माध्यम सें अपनेउस हिस्से पर्र चला गय़ा।
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Part 6 (c)
Dhire dhire pyaar ko badhana h had से guzar jaana h
ये अनायास हि थां, मगर उसने अपना नियंत्रण खो दिया औऱ कपड़े केँ माध्यम सें अपनेहाथ कों अपने हिस्से पऱ छुआ। हम् दोनों जैसे आसमान मे उड़रहे थें। हम् दोनों हि बहोत ज़्यादा मजा महसूस कररहे थें। मे उसके बायें बूब्स कों चूसरहा थां औऱ मेरा बायाँ हाथ उसके दायें वाले कों दबारहा थां। जब वो अपने ऑर्गेज्म तक पहुंची तौ उसके चेहरे कां रंग हि बदल गय़ा औऱ जब वो अपना चरमोत्कर्ष पर्र पहुंची तौ उसका जिस्म एकदम सें शिथिल (ढीला सां ) पड़ गय़ा थां मगर मे अभि भि अपना कामरस पाने केँ लिए संघर्ष कररहा थां। उसने मुझे लिटा दिया औऱ कपड़े केँ ऊपर सें मेरा खड़ा लण्ड पकड़ लिया औऱ हाथ सें इसको हिलने लगी। वो मेरे होंठों औऱ सीने पऱ चुम्बन लिएजा रही थि जिससे मेरे अंदर उत्तेजना अपने चर्म पर्र पहुँच गयीँ, थि। इसवजह सें मे जल्द हि अपने climax पर्र पहुंच गय़ा औऱ लोअर केँ अंदर हि ढेर सारा पानी मेरे लण्ड नें छोड़ दिया!
इसकेबाद हम् लेटगए। वो अपनी एक् बाजु केँ सहारे अधलेटी अवस्था मे मेरी औऱ मुँह करकेलेट गयीँ, औऱ मेरे बालों कों सहलाने लगी। "मे सच मे तुम्हे बहोत प्रेम करता हूं, नीती, " मैंने कहा। "औऱ तुम्हे हमारे पहले संभोग केँ बाद इसकीयाद आयी। " उसने मुझे चिढ़ाते हुए जवाब दिया। "मुझेखेद हैं कि मे इसे पहले नहि कह पाया हालाँकि मे कहना चाहता थां। " ये मेरा जवाब थां ! "हर वक़्त माफ़ी नं माँगा करो। तुम् मेरे होँ। तुम् intelligent हौ, बहोत अच्छे हौ, मेहनती हें औऱ तुम्हारे पास टैलेंट कि कमी नहि हैं औऱ इसके अलावा हम् दोनों एक् दूसरे सें प्रेम करते हें। इसलिये कभी मुझसे सॉरी नं कहना। मे बस तुम्हें चिढ़ा रही थि। " उसने बड़ीआत्मीयता केँ संगकहा। मैंने उससे पूछा कि ये किसका पलंग हैं। उसनेकहा कि उसका भइयाइस पलंग पऱ सोता थां मगर वो अपनी higher studies केँ लिए banglore मे थां। मुझे हंसीआई कि मैंने उसकी बेहन केँ संग उसके हि खाट पऱ सेक्स किया। वोँ भि हंस पड़ी औऱ अब जानां चाहती थि। मैंने पूछा कि क्याँ वो पूरीरात रह सकती हैं, उसनेये कहतेहुए इनकार कर दिया कि उसकी मां उसका इंतज़ार कररही हैं। मे उससे पूछना चाहता थां कि उसके पिता कां बर्ताव मेरेसंग अजीब थां। उसने मुझे बताया कि वो एक् अजीब किस्म कां दुकानदार थां औऱ एक् औऱ बात उसकी बेटी एक् अजनबी केँ संगघऱ पऱ आई जैसे कि वो उसका दामाद थां। ये कहतेहुए उसने हँसी कां फव्वारा छोड़ा। मे भि हंस पड़ा औऱ वोँ अपनी माँ केँ कमरे मे चली गई।
मुझे लगता हैं कि रात कों उसने अपनी मम्मी सें पिता केँ बर्ताव केँ बारे मे बात कि थि इसलिये वो सुभह मेरेसंग बहोत हि प्रेम सें पेश आँ रही थि। शायद उसने मेरे बारे मे अपनी मां कों कई अच्छी बातें बताईथीं। उसने अपना ब्रेकफास्ट मेरेसंग किया औऱ मुझे एक् औऱ परांठा लेने केँ लिए मजबूर किया जबकि मे खा चूका थां। हमें जल्द निकलना थां क्योंकि मे वक़्त पर्र दुकान पऱ पहुँचाना चाहता थां। उसनेकहा, "तुम्हारी इसी समझदारी नें मुझे तुम्हारी ओर आकर्षित किया। तुम् एक् दिन एक् सफल व्यक्ति बनेंगे। " "मे मात्र तुम्हारा व्यक्ति बनना चाहता हूं" मैंने मजाक मे जवाब दिया। "ओह मणिइस गंभीर चर्चा कों मज़ाक मे मत उड़ाओ। " उसने आग्रह किया। "ठीक हैं मैडम, आप् जानती हें कि मे हमेशा आपकीबात मानती हूं। " मे अभि भि हल्के मूड मे थां। "तुमको हमेशा मेरीबात माननी हैं। क्योंकि ये मेरा अधिकार हैं। " उसने मुस्कुराते हुए अपनी बाहें मेरेगले मे डालदीं। मैंने उसे मुझसे दूर होने केँ लिएकहा क्योंकि मे कारचला रहा थां। मैंने उससे दुकान पर्र मेरेसंग रहने कों बोला। उसने अनुरोध स्वीकार कर लिया। मैंने उससे एक् बात पूछी, "आगे क्याँ, " उसने समझामगर मेरे प्रश्न कों दोहराया, "क्याँ, आगे क्याँ?" मे अब झिझकरहा थां औऱ सोचा कि अगर मे सीधे पूछूं तौ वो क्रोध हौ सकती हैं। उसनेफिन मुझसे पूछा, "स्पष्ट करो, जानेमन, " मैंने जवाब दिया, "क्याँ हम् कुछ औऱ भि करेंगे?" उसने मेरे कंधे पऱ एक् मुक्का मारा औऱ कहा, "विवाह केँ बादकुछ औऱ भि करेंगे। " मैंने सिर हिलाया, वो मुस्कुरा रही थि मगरकुछ नहि बोलि। कुछ वक़्त बाद उसनेये कहतेहुए चुप्पी तोड़ी, "औऱ प्लीज मुझेहर रोज़ अपने चर्म तक न् पहुंचना। " "क्यूंकि तुम् अब बहुतखुल चुके हौ। " वो मुस्कुराई। मुझे अपने जिंदगी कां पहला प्रेम मिला औऱ उसेउसी केँ घऱ पऱ औऱ उसके भइया केँ खाट पर्र हि प्रेम किया। कमाल हैं न्। "
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