काम-पिपासा--New Hindi Sex Stories - Behan Ki Chudai - Complete Kahani Part 1
चालीस कि उम्र
मे अपनी चालीस कि उम्रपार कर चुकी थि। पर्र तन कां सुख मुझेबस चार-पांच साल
हि मिला। मे चौबीस वर्ष कि हि थि कि मेरे पति एक् बस दुर्घटना मे चलबसे थें।
मेरी बेटी कि विवाह मैंने उसके अठारह वर्ष होते हि कर दि थि। अब मुझे बहोत
अकेलापन लगता थां।
पड़ोसी सविता कां जवान लड़का मोनू ज्यादातर मेरेयहा कम्प्यूटर पऱ काम करनेआता
थां। कभीकभी तोँ उसेकाम करते करते बारह तक बज जाते थें। वोँ मेरी बेटी वर्षा केँ
कमरे मे हि काम करता थां। मेरारूम पीछे वाला थां। मे तौ दसबजे हि सोने
चली जाती थि।
एक् बाररात कों सेक्स कि बचैनी केँ कारण मुझे नींद नहीं आँ रही थि वइधरउधर
करवटें बदलरही थि। मैंने अपना पेटीकोट ऊपरकर रखा थां औऱ बुर कों हौले हौले
सहलारही थि। कभीकभी अपने चुचूकों कों भि मसल देती थि। मुझेलगा कि बिना
अंगुली घुसाये सुकून नहि आयेगा। सो मे कमरे सें बाहर् निकलआई।
मोनू अभि तक कम्प्यूटर पऱ कामकर रहा थां। मैंने बसयूं हि जिज्ञासावश खिड़की
सें झांक लिया। मुझे झटका सां लगा। वोँ इन्टरनेट पऱ लड़कियों कि नंगी तस्वीरें
देखरहा थां। मे भि उस वक्तहीट मे थि, मे शान्ति सें खिड़की पर्र खड़ी हौ गई औऱ
उसकी हरकतें देखने लग गई। उसकाहाथ पजामे केँ ऊपर लण्ड पर्र थां औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे उसे
मल रहा थां।
यहसभी देखकर मेरेदिल कि धड़कन बढ़ गई। मेरेहाथ अनायास हि बुर पऱ चलेगये, औऱ
सहलाने लगगये। कुछ हि वक़्त मे उसने पजामा नीचे सरकाकर अपना नंगा लण्ड बाहर्
निकाल लिया औऱ सुपाड़ा खोलकर मुठ मारने लगा। मन कहरहा थां कि तेरी प्यासी
आंटी चुदवाने कों रेडी हैं, मुठ काहे मारता हैं?
तभी उसका वीर्य निकल पड़ा औऱ उसने अपने रूमाल सें लण्ड साफ़कर लिया। अब वोँ
कम्प्यूटर बंद करकेघऱ जाने कि तैयारी कररहा थां। मे फ़ुर्ती सें लपककर अपने
कमरे मे चलीआई। उसनेरूम बन्द किया औऱ बाहर् चला गय़ा।
उसके जाते हि मेरे खालीमन मे सेक्स उभरआया। मेरा शरीर जैसे तड़पने लगा।
मैंने जैसे तैसे बाथरूम मे जाकर बुर मे अंगुली डालकर अपनी अग्नि शान्त
कि। पर्र दिल मे मोनू कां लण्ड मेरी नजरों केँ सामने सें नहि हटपारहा थां। ख्वाब
मे भि मैंने उसके लण्ड कों चूस लिया थां। अब मोनू कों देखकर मेरेमन मे वासना
जागने लगी थि। मुझेलगा कि सोनू कों भि कोई लड़की चोदने केँ लिये नहि मिलरही
हैं, इसीलिये वोँ यहसभी करता हैं। मतलबउसे पटाया जा सकता हैं। सुभह तक उसका लण्ड
मेरेमन मे छायारहा। मैंने सोच लिया थां कि यूं हि जलते रहने सें तौ अच्छा हैं
कि उसे जैसे तैसेपटा कर चुदवा लिया जाये, बस अगर मार्ग खुल गय़ा तौ मजे हि
मजे हें।
मोनू सवेरे हि आँ गय़ा थां। वोँ सीधे कम्प्यूटर पऱ गय़ा औऱ उसनेकुछ किया औऱ जाने
लगा। मैंने उसेगरम चाय केँ लियेरोक लिया। गरम चाय केँ बहाने मैंने उसे अपने सुडौल
वक्ष केँ दर्शन करा दिये। मुझेलगा कि उसकी नजरें मेरे स्तनों पऱ जम सि गई थि।
मैंने उसके सामने अपनेगोल गोल चूतड़ों कों भि घुमाकर उसका ध्यान अपनीओर
खींचने कि कोशिश कि औऱ मुझेलगा कि मुझेउसे आकर्षित मे सफ़लता मिलरही हैं।
मन हि मन मे मे हंसी कि यह लड़के भि कितने फ़िसलपट्टू होते हें। मेरादिल बाग
बाग होँ गय़ा। लगा कि मुझे सफ़लता जल्द हि मिल जायेगी।
मेरा अन्दाजा सही निकला। दिन मे आराम करने केँ वक्त वोँ चुपके सें आँ गय़ा औऱ मेरी
खिड़की सें झांककर देखा। उसकीआहट पाकर मे अपना पेटीकोट पांवों सें ऊपर
जांघों तक खींचकर लेट गई। मेरे चिकने उघाड़े शरीर कों वोँ आंखे फ़ाड़-फ़ाड़ कर
देखता रहा, फिन वोँ कम्प्यूटर केँ कमरे मे आँ गय़ा। यहसभी देखकर मुझेलगा
चिड़िया जाल मे उलझ चुकी हैं, बस फ़न्दा कसना बाकी हैं।
रात कों मे बेसब्री सें उसका इन्तज़ार करतीरही। आशा केँ अनुरूप वोँ जल्द हि आँ
गय़ा। मे कम्प्यूटर केँ पासखाट पऱ यूँ हि उल्टी लेटी हुइ एक् पुस्तक खोलकर
पढने कां बहाने करनेलगी। मैंने पेटीकोट भि पीछे सें जांघो तक उठा दिया थां।
ढीले सें ब्लाऊज मे सें मेरे बूब्ज़ झूलने लगे औऱ उसे साफ़ दिखने लगे। यह सभी करते
हुये मेरादिल धड़क भि रहा थां, पऱ वासना कां जोरमन मे ज्यादा थां।
मैंने देखा उसकामन कम्प्यूटर मे बिलकुल नहि थां, बस मेरे झूलते हुये सुघड़
स्तनों कों ताड़रहा थां। उसका पजामा भि लण्ड केँ तन जाने सें उठ चुका थां। उसके
लण्ड कि उतावलापन साफ़नजर आँ रही थि। उसेगरम जानकर मैंने प्रहार कर हि दिया।
"क्याँ देखरहे होँ मोनू.?"
"आं। हां। कुछ नहि रीता आण्टी। !" उसके चेहरे पऱ पसीना आँ गय़ा थां।
"झूठ। मुझेपता हैं कि तुम् यह पुस्तक देखरहे थें नाँ.?" उसके चेहरे कि
चमक मे वासना साफ़नजर आँ रही थि।
वोँ कुर्सी सें उठ खड़ाहुआ औऱ मेरेपास पलंग केँ नजदीक आँ गय़ा।
"आण्टी, आप् बहोत अच्छी हें, एक् बात कहूँ ! आप् कों प्रेम करने कां मनकररहा
हैं। " उसके स्वर मे प्रेम भरी वासना थि।
मैंने उसे अपनासर घुमाकर देखा, "आण्टी हूं मे तेरी, कर लेँ प्रेम, इसमे
शर्माना क्याँ."
वोँ धीरे-धीरे सें मेरीपीठ पर्र सवार होँ गय़ा औऱ पीछे सें लिपट पड़ा। उसकीकमर मेरे
नितम्बो सें सट गई। उसका लण्ड मेरे कोमल चूतड़ों मे घुस गय़ा। उसकेहाथ मेरे
सीने पऱ पहुंच गये। पीछे सें हि मेरे गालों कों चूमने लगा। भोला कबूतर जाल मे
उलझकर तड़परहा थां। मुझेलगा कि जैसे मैंने कोईगढ़ जीत लिया हौ।
मैंने अपनी टांगें औऱ चौड़ी करली, उसका लण्ड गाण्ड मे फ़िट करने कि उसे
मनमानी करने मे मदद करनेलगी।
"बसबस, बहोत हौ गय़ा प्रेम। अबहटजा." मेरादिल खुशी सें बागबाग हौ गय़ा
थां।
"नहि रीता आण्टी, बस थोड़ी सि देर औऱ." उसने कुत्ते कि भांति अपने लण्ड कों
औऱ गहराई मे घुसाने कि कोशिश कि। मेरी गाण्ड कां छेद भि उसके लण्ड कों छू गय़ा।
उसकेहाथ मेरी झूलती हुई चूंचियों कों मसलने लगे, उसकी सांसें तेज होँ गई थि।
मेरी सांसे भि धौकनीं कि तरह चलनेलगी थि। दिलजोर जोर सें धड़कने लगा थां। लगा
कि मुझेचोद हि डालेगा।
"बस नां। मोनू.तुँ तौ जाने क्याँ करनेलगा हैं.ऐसेकोई प्रेम किया जाता
हैं क्याँ ?.चलहटअब !" मैंने प्रेम भरी झिड़की दि उसे। वास्तव मे मेरी
ख़्वाहिश थि कि बस वोँ मुझे पर्र ऐसे हि चढ़ारहे औऱ अब मुझेचोद दे। मेरी झिड़की
सुनकर वोँ मेरीपीठ पर्र सें उतर गय़ा। उसके लण्ड कां बुराहाल थां। इधर मेरी
चूंचियां, निपलसब कड़कगये थें, फ़ूलकर कठोर होँ गये थें।
"तूँ तोँ मेरे सें ऐसे लिपट गय़ा कि जैसे मुझे बहोत प्रेम करता हैं ?"
"हांसच आण्टी। बहोत प्रेम करता हूं."
"तौ इतने दिनों तक तूने बताया क्यूं नहि?"
"वोँ मेरी हिम्मत नहि हुई थि."उसने शरमाकर कहा।
"कोई बात नहि। चलअबठीक सें मेरेगाल पऱ प्रेम कर.बस.आजा !" मे
उसे ज़्यादा सोचने कां मौका नहि देना चाहती थि।
उसनेफिन सें मुझे जकड़ सां लिया औऱ मेरे गालों कों चूमने लगा। तभी उसके होंठ
मेरे होठों सें चिपकगये। उसने अपना लण्ड उभारकर मेरी बुर सें चिपका दिया।
मेरेदिल केँ तार झनझना गये। जैसेबाग मे बहार आँ गई। मनडोल उठा। मेरी बुर भि
उभरकर उसके लण्ड कां उभार कों स्पर्श करनेलगी। मैंने उसकी उत्तेजना औऱ बढ़ाने
केँ लियेउसे अबपरे धकेल दिया। वोँ हांफ़ता सां दोकदम दूरहट गय़ा।
मुझे पूर्ण विश्वास थां कि अब वोँ मेरीकैद मे थां।
"मोनू, मे अब सोनेजा रही हूं, तूँ भि अपनाकाम करकेचले जानां !" मैंने उसे
मुस्करा कर देखा औऱ कमरे केँ बाहर् चल दि। इसबार मेरीचाल मे बला कि लचक आँ गई
थि, जोँ जवानी मे हुआ करती थि।
कमरे मे आकर मैंने अपनी दोनों चूंचियाँ दबाई औऱ अहह भरनेलगी। पेटीकोट मे
हाथडाल कर बुर दबाली औऱ लेट गई। तभी मेरे कमरे मे मोनू आँ गय़ा। इसबार वोँ
पूरा नंगा थां। मे झट सें खाट सें उतरी औऱ उसकेपास चलीआई।
"अरे तूने कपड़े क्यूं उतार दिये.?"
"आँ.आँ। आण्टी। मुझे औऱ प्रेम करो."
"हांहां, क्यूं नहि। पऱ कपड़े.?"
"आण्टी। प्लीज आप् भि यह ब्लाऊज उतारदो, यह पेटीकोट उतारदो। " उसकी आवाज़
जैसे लड़खड़ा रही थि।
"अरे नहि रे। ऐसे हि प्रेम कर लेँ !"
उसने मेरी बांह पकड़कर मुझे अपनीओर खींच लिया औऱ मुझसे लिपट गय़ा।
"आण्टी। प्लीज। मे आपको। आपको। अह्ह्ह्ह्। चोदना चाहता हूं !"
वोँ अपनेहोश खो बैठा थां।
"मोनू बेटा, क्याँ कहरहा हैं." उसके बावलेपन कां फ़ायदा उठाते हुये मैंने
उसकातना हुआ लण्ड पकड़ लिया।
"अहह रीता आण्टी। मज़ा आँ गय़ा। इसे छोड़ना नहि। कसलो मुठ्ठी मे
इसे."
उसने अपनेहाथ मेरेगले मे डाल दिये औऱ लण्ड कों मेरी तरफ़ उभार दिया।
मैंने उसका कड़क लण्ड पकड़ लिया। मेरेदिल कों बहोत चैनआया। आखिर मैंने
उसे फ़ंसा हि लिया। बस अब उसकी मदमस्त जवानी कां आनंद उठाना थां। बरसों बाद मेरी
सूनी जीवन मे बहारआई थि। मैंने दूसरे हाथ सें अपना पेटीकोट कां नाड़ा ढीला
कर दिया, वो जानेकब नीचेसरक गय़ा। मैंने मोनू कों खाट केँ पास हि खड़ाकर
दिया औऱ स्वयं पलंग पर्र बैठ गई। अब उसका लौड़ा मैंने फिन सें मुठ्ठी मे भरा औऱ
उसेआगे पीछे करकेमुठ मारने लगी। वोँ जैसे चीखने सां लगा। अपना लण्डजोर जोर
सें हाथ मे मारने लगा। तभी मैंने उसे अपनेमुख मे लेँ लिया। उसकी उत्तेजना
बढ़ती गई। मेरेमुख मर्दन औऱ मुठ मारने पर्र उसे बहोत मज़ा आँ रहा थां। तभी उसने
अपना वीर्य उगल दिया। जवानी कां ताजा वीर्य.
सुन्दर लण्ड कां माल। लाल सुपाड़े कां रस। किसे नसीब होता हैं। मेरेमुख
मे पिचकारियां भरनेलगी। पहलीरति क्रिया कां वीर्य। ढेर सारा। मुँह
मे। हायराम। स्वाद भरा.गले मे उतरता चला गय़ा। अन्त मे जोरजोर सें
चूसकर पूरा हि निकाल लिया।
सभी कुछ शान्त हौ गय़ा। उसनेशरम केँ मारे अपना चेहरा हाथों मे छिपा लिया।
मैंने भि यहदेख कर अपना चेहरा भि छुपा लिया।
"आण्टी। सॉरी। मुझे क्षमा कर देना। मुझे जाने क्याँ होँ गय़ा थां। " उसने
प्रेम सें मेरे बालों मे हाथ फ़ेरते हुयेकहा।
मे उसकेपास हि बैठ गई। अपने फ़ांसे हुये शिकार कों प्रेम सें निहारने लगी।
"मोनू, तेरा लण्ड तौ बहोत करारा हैं रे.!"
"आण्टी। फिन आपनेउसे भि प्रेम किया.आई लवयू आण्टी!"
मैंने उसका लण्डफिन सें हाथ मे लेँ लिया।
"बस आंटी, अब मुझे जाने दीजिये। कलफिन आऊंगा" उसेयह सभी करने सें शायद लज्जा
सि लगरही थि।
वोँ उठकर जानेलगा, मे जल्द सें उठ खड़ी हुई औऱ दरवाजे केँ पासजा खड़ी हुईँ औऱ
उसे प्रेम भरी नजरों सें देखने लगी। उसने मेरी बुर औऱ शरीर कों एक् बार निहारा
औऱ कहा, "एक् बार प्रेम करलो। आप् कों यूँ छोड़कर जाने कों मन नहि कररहा !"
मैंने अपनी नजरें झुकाली औऱ पास मे रखा तौलिया अपनेऊपर डाल लिया। उसका
लण्ड एक् बारफिन सें कड़क होनेलगा। वोँ मेरे नजदीक आँ गय़ा औऱ मेरीपीठ सें चिपक
गय़ा। उसका बलिष्ठ लण्ड मेरी चूतड़ कि दरारों मे फ़ंसने लगा। इस बार उसके भारी
लण्ड नें मुझ पर्र असर किया। उसके हाथों नें मेरी चूंचियां सम्भाल ली औऱ उसका
मर्दन करनेलगे। अब वो मुझे एक् पूर्ण मर्द सां नजरआने लगा थां। मेरा तौलिया
छूटकर जमीन पर्र गिर पड़ा।
"क्याँ कररहे होँ मोनू."
"वही जौ ब्ल्यू फ़िल्म मे होता हैं। आपकी गाण्ड मारना चाहता हू। फिन बुर
भि."
"नहि मोनू, मे तेरी आण्टी हू नाँ."
"आण्टी, सच बोलो, आपकामन भि तोँ चुदने कों कररहा हैं नां?"
"क्या बात है रे, केसे कहूँ। जन्मों सें नहि चुदी हूं। पऱ प्लीज आज मुझे छोड़
दे."
"औऱ मेरे लण्ड कां क्याँ होगा। प्लीज " औऱ उसका लण्ड नें मेरी गाण्ड केँ छेद
मे दबावडाल दिया।
"सच मे चोदेगा। ? अरे। रुक तौ। वोँ क्रीम लगादे पहले, वर्ना मेरी
गाण्ड फ़ट जायेगी !"
उसने क्रीम मेरी गाण्ड केँ छेद मे लगा दि औऱ अंगुली गाण्ड मे चलाने लगा।
मुझेतेज खुजली सि हुईँ।
"मारदे नां अब। खुजली हौ रही हैं। "
मोनू नें लण्ड दरार मे घुसाकर छेद तक पहुँचा दिया औऱ मेराछेद उसके लण्ड केँ
दबाव सें खुलने लगा औऱ फ़क सें अन्दर घुस पड़ा।
"अहह मेरे मोनू। गय़ा रे भीतर। अबचोद देबस !"
मोनू नें एक् बारफिन सें मेरे उभरे हुये गोरे गोरे स्तनों कों भींच लिया। मेरे
मुख सें आनन्द भरीचीख निकल गई। मैंने झुककर मेज़ पऱ हाथरख लिया औऱ अपनी
टांगें औऱ चौड़ा दि। मेरी चिकनी गाण्ड केँ बीच उसका लण्ड अन्दर-बाहर् होनेलगा।
चुदना बड़ा आसान सां औऱ मनमोहक सां लगरहा थां। वोँ मेरीकभी चूंचियां निचोड़ता तोँ
कभी मेरी गोरी गोरी गाण्ड पऱ जोरजोर सें हाथ मारता।
उसक सुपाड़ा मेरी गाण्ड केँ छेद कि चमड़ी कों बाहर् तक खींच देता थां औऱ फिन सें
अन्दर घुस जाता थां। वोँ मेरीपीठ कों हाथ सें रगड़ रगड़कर औऱ रोमांचित कररहा थां।
उसका सोलिड लण्ड तेजी सें मेरी गाण्ड माररहा थां। कभी मेरी पनीली बुर मे अपनी
अंगुली घुसा देता थां। मे आनन्द सें निहाल होँ चुकी थि। तभी मुझेलगा कि मोनू
कहींझड़ नं जाये। पऱ एक् बार वोँ झड़ चुका थां, इसलिये उम्मीद थि कि दूसरी बारदेर
सें झड़ेगा, फिन भि मैंने उसे बुर कां मार्ग दिखा दिया।
"मोनू, बस मेरी गाण्ड कों मज़ा गय़ा, अब मेरी बुर मारदो." उसके चहरे पर्र
पसीना छलकआया थां। उसे बहोत मेहनत करनीपड़ रही थि। उसने एक् झटके सें अपना लण्ड
बाहर् खींच लिया। मैंने मुड़कर देखा तौ उसका लण्ड फ़ूलकर लम्बा औऱ मोटा होँ
चुका थां। उसे देखते हि मेरी बुर उसे खाने केँ लिये लपलपा उठी।
"मोनूमार दे मेरी बुर। हाय कितना मदमस्त होँ रहा हैं। दैय्या रे !"
"आन्टी, जरा पकड़कर सेटकर दो." उसकी सांसें जैसे उखड़रही थि, वोँ बुरीतरह
हांफ़ने लगा थां, उसके विपरीत मुझे तोँ बस चुदवाना थां। तभी मेरेमुख सें आनन्द
भरी सीत्कार निकल गई। मेरे बिनासेट किये हि उसका लण्ड बुर मे प्रवेश कर गय़ा
थां। उसने मेरेबाल खींचकर मुझे अपने सें औऱ कसकर चिपटा लिया औऱ मेरी बुर पर्र
लण्डजोर जोर सें मारने लगा। बालों केँ खींचने सें मे दर्द सें बिलबिला उठी। मे
छिटककर उससेअलग हौ गई। उसे मैंने धक्का देकर पलंग पर्र गिरा दिया औऱ उससे
जोंक कि तरहउस पऱ चढ़कर चिपक गई। उसके कड़कते लण्ड कि धार पऱ मैंने अपनी
प्यासी बुर रख दि औऱ जैसे चाकू मेरे जिस्म मे उतरता चला गय़ा। उसकेबाल पकड़कर
मैंने जोर लगाया औऱ उसका लण्ड मेरी बच्चेदानी सें जा टकराया। उसने मदहोशी मे
मेरी चूंचियां जैसे निचोड़ कररख दि। मे दर्द सें एक् बारफिन चीखउठी औऱ बुर
कों उसके लण्ड पर्र बेतहाशा पटकने लगी। मेरी अदम्य वासना प्रचण्ड रूप मे थि।
मेरेहाथ भि उसे नोंच खसोटरहे थें, वोँ आनन्द केँ मारे निहाल होँ रहा थां, अपने
दांत भींचकर अपने चूतड़ ऊपर कि ओर तेज़-तेज़ सें माररहा थां।
"मम्मी शपथ, मोनूचोद मेरे भोसड़े कों। साले कां कीमाबना दे। रण्डी बनादे
मुझे। !"
"पटक, हरामजादी। बुर पटक। मेरा लौड़ा। अहहरे। आण्टी." मोनू भि
वासना केँ शिकंजे मे जकड़ा हुआ थां। हम् दोनों कि चुदाई रफ़्तार पकड़ चुकी थि।
मेरेबाल मेरे चेहरे पर्र उलझ सें गये थें। मेरी बुर उसके लण्ड कों जैसेखा जानां
चाहती हौ। सालों बाद बुर कों लण्ड मिला थां, भला केसे छोड़ देती !
वोँ भि नीचे सें अपने चूतड़ उछालरहा थां, जबरदस्त ताकत थि उसमें, मेरी बुर मे
जोर कि मिठास भरीजा रही थि। तभी जैसेआग कां भभका सां आया। मैंने अपनी बुर
कां पूराजोर लण्ड पऱ लगा दिया। लण्ड बुर कि गहराई मे जोर सें गड़ने लगा.
तभी बुर कसने औऱ ढीली होनेलगी। लगा मे गई। उधरइस दबाव सें मोनू भि चीख
उठा औऱ उसने भि अपने लण्ड कों जोर सें बुर मे भींच दिया। उसका वीर्य निकल पड़ा
थां। मे भि झड़रही थि। जैसे ठण्डा पानी सां हम् दोनों कों नहला गय़ा। हम् दोनों एक्
दूसरे सें जकड़े हुयेझड़ रहे थें। हम् तेज सांसें भररहे थें। हम् दोनों कां जिस्म
पसीने मे भीग गय़ा थां। उसने मुझे धीरे-धीरे सें साईड मे करके अपने नीचेदबा लिया
औऱ मुझेदबा कर चूमने लगा। मे बेसुध सि टांगें चौड़ी करके उसके चुम्बन कां
जवाबदे रही थि। मेरामन शान्त होँ चुका थां। मे भि प्रेम मे भरकरउसे चूमने
लगी थि। मगरहाय रेरे ! जवानी कां क्याँ दोष। उसका लण्ड जानेकब कड़ा हौ गय़ा
थां औऱ बुर मे घुस गय़ा थां, वोँ फिन सें मुझे चोदने लगा थां।
मे निढाल सि चुदती रही। पता नहि कब वोँ झड़ गय़ा थां। तब तक मेरी उत्तेजना
भि वासना केँ रूप मे मुझछा गई थि। मुझेलगा कि मुझेअब औऱ चुदना चाहिये कि
तभी एक् बारफिन उसका लण्ड मेरी बुर कों चीरता हुआ अन्दर घुस गय़ा। मैंने उसे
आश्चर्य सें देखा औऱ चुदती रही। कुछ देर मे हम् दोनों झड़गये। मुझेअब कमजोरी
आनेलगी थि। मुझ पर्र नींद कां साया मण्डराने लगा थां। आंखें थकान केँ मारेबंद
हुइ जारही थि, कि मुझे बुर मे फिन सें अंगारा सां घुसता महसूस हुआ।
"मोनू, बस अबछो। छोड़दे। कल करेंगे.!" पऱ मुझे नहि पताचला कि उसने
मुझेकब तक चोदा, मे गहरी नींद मे चली गई थि।
सुभहउठी तोँ मेरा शरीर दर्दकर रहा थां। भयानक कमजोरी आनेलगी थि। मे उठकर
बैठ गई, देखा तौ मेरेखाट पऱ वीर्य औऱ खून केँ दाग थें। मेरी बुर पऱ खून कि
पपड़ी जम गई थि। उठते हि बुर मे दर्दहुआ। गाण्ड भि चुदने केँ कारण दर्दकर
रही थि। मोनूखाट पर्र पसराहुआ थां। उसकेबदन पर्र मेरे नाखूनों कि खरोंचे
थि। मे गर्म पानी सें नहाईतब मुझेकुछ ठीकलगा। मैंने एक् एण्टी सेप्टिक क्रीम
बुर औऱ गाण्ड मे मलली।
मैंने रसोई मे आकरदो गिलास दूध पिया औऱ एक् गिलास मोनू केँ लिये लेँ आई।
मेरी काम-पिपासा शान्त हौ चुकी थि, मोनू नें मुझे अच्छी तरहचोद दिया थां। कुछ
हि देर मे मोनूजाग गय़ा, उसको भि बहोत कमजोरी आँ रही थि। मैंने उसेदूध पिला
दिया। उसकेबदन कि खरोंचों पर्र मैंने दवाईलगा दि थि। साम तक उसे बुखार होँ
आया थां। शायद उसनेअति कर दि थि.।
काम-पिपासा--New Hindi Sex Stories - Behan Ki Chudai – New Episode
रेलगाड़ी मे हुआ मिलन
मै रेलगाडी मे मुंबई सें हावडा जारहा थां। मेरे सामने वालीसीट पऱ एक् खूबसूरत
स्त्री बैठी थि। उसने नीली साडी पहनी हुईँ थि। वोँ पतली दुबली थि मगर उसकेदूध
बड़े बड़े थें, ऐसा लगता थां मानो अभि ब्लाउज़ फाड़कर बाहर् आने कों बेताब हें।
उसकारंग भि बिल्कुल दूध कि तरह सफ़ेद थां। उसकीउमर कोई२८ साल कि होगी।
मैने ध्यान दिया कि वोँ मुझे बहोत देर सें देखरही हैं तौ मैने भि उसकी तरफ़देख
कर थोडा मुस्करा दिया। फिन वोँ मुझसे अपनी टिकट दिखाते हुए पूछी कि ज़रा देखो
मेरा रिज़र्वेशन हैं कि नहि? मैने देखा उनका वेटिंग टिकेट थां। मैनेकहा कोई
बात नहि आप् मेरेसीट मे सो जानां। फिन मैने उसकानाम पूछा तोँ उसने बताया कि
उसकानाम रूपा हैं। रूपा कि हुस्न देखकर मेरे मुंह औऱ लन्ड दोनो हि स्थान सें
पानी निकलरहा थां। मे मन हि मनउसे चोदने कां प्लान बनाने लगा। यह सरदी कि
रात थि इसलिये सबलोग कम्बल ढककरसो रहे थें।
रात कों हम् खानां खाने केँ बाद मैने रूपा सें कहा केँ आप् सोजाओ मे बैठता हूं।
उसनेकहा नहि तुम् भि कम्बल ओढकरसो जाओ। औऱ फिन वोँ ट्रेन कि उस छोटी सि सीट
पऱ इसतरह सें लेटगये कि उसकी गांड मेरी तरफ़ थि औऱ चेहरा दूसरी तरफ़। फिन
मे उसकेसर कि तरफ़पेर कों रखकरलेट गय़ा औऱ मे उसकी गांड कि तरफ़ मुंह
घुमाकर सो गय़ा। अब लन्ड बिल्कुल उसकी गांड कि दरार मे थां उसकीगोल गोल गांड
औऱ मेरा लन्ड एक् दूसरे सें चिपके हुए थें। रूपा केँ गोरे गोरे पांव भि बिल्कुल
मेरे चेहरे केँ सामने थें। मेरे लन्ड कों समझाना अब मुश्किल हौ रहा थां। मैने अपने
हाथ उसके पैरों पर्र रखकर थोडा सहलाना शुरु किया औऱ गर्म गर्म सांसो केँ संग
उसके पैरों कों चूमने लगा।
थोड़ी देरबाद वोँ मेरी तरफ़ मुड़ गयीँ,। अब उसका चेहरा भि मेरे पैरों कि ओर थां।
उसने मेरे पैरों कों ज़ोर सें पकड़ कां अपने बूब्स सें रब करना शुरुकर दिया। फिन
मैने भि उसके पैरों कों सहलाते हुए जांघ तक जाआया औऱ जब मे उसकी बुर पऱ
हाथरखा तोँ ऐसालगा मेराहाथ जल गय़ा। उसकी बुर भट्टी कि तरह गर्म हौ रही थि औऱ
गर्म गर्म बुर बिल्कुल गीली होँ रही थि। मैने उसकी बुर मे अपनी उंगलियां डालनी
शुरुकर दि, उसकी बुर पर्र छोटे छोटेबाल थें जिनको मे अपनी उंगलियों सें सहला
रहा थां। फिन धीरे-धीरे धीरे-धीरे कम्बल केँ अन्दर हि मे अपना मुंह उसके बुर तक लेकर गय़ा
औऱ उसकी बुर कों पीने कि कोशिश करनेलगा। उसने अपने एक् पांव कों उठाकर मेरे
कंधे पर्र रख दिया। अब उसकी चूत बिल्कुल मेरे मुंह मे थि मे अपनीजीभ कों उसके
चूत केँ चारों तरफ़ घुमाना शुरुकर दिया वोँ भि अपनीकमर धीरे-धीरे धीरे-धीरे हिलाना शुरु
कर दि। मैने भि अपनेपेर कों उठाकर अपना लन्ड उसकी तरफ़ बढ़ा दिया। वोँ बड़े
प्रेम सें लन्ड कों चूसने लगी।
हम् अब बिल्कुल ६९ कि पोजिशन मे थें मगरऊपर नीचे नहि थें बल्कि साइडबाइ
साइड थें औऱ हम् जौ भि कररहे थें धीरे-धीरे धीरे-धीरे कररहे थें क्यूं कि ट्रेन मे किसी
कों पता न् चले। वोँ अबकुछ ज़्यादा हि ज़ोर सें अपनेकमर कों उठा कां अपने चूत कों
मेरे मुंह मे रगड़वा रही थि। अचानक उसने मेरेसर कों अपनेहाथ सें अपनी चूत
मे ज़ोर सें दबा दिया औऱ कमर कों मेरे मुंह मे दबा दिया औऱ ढीली पर्र गई,। मे
उसके चूत कि गरमी धीरे-धीरे धीरे-धीरे अपने मुंह सें चाटचाट कर साफ़ किया। वोँ अब भि
मेरे लन्ड कों चूसरही थि। मे भि अबजोर जोर सें अपने लन्ड कों उसके मुंह मे
घुसारहा। मेरे लन्ड कां पानी भि अब बाहर् निकलने वाला थां मे नें ज़ोर सें उसके
चूत मे अपना मुंह घुसा दिया औऱ मेरे लन्ड सें पानी निकलना शुरुहुआ तौ ८-१०
झटके तक निकलता हि रहा। उसने मेरे लन्ड केँ पानी कों पूरा अपनी मुंह मे लेकरपी
गई,।
थोड़ी देर केँ बाद मे उठा औऱ टोइलेट गय़ा। मैने अपनी पैंट उतार दि फिन अपनी
चड्ढी भि उतार दि। अपने लन्ड कों अच्छी तरह सें साफ़ किया औऱ पैंटपहन ली। वापस
आकर मैने अपनी चड्ढी बैग मे डाल दि। फिन वोँ भि टोइलेट जाकरआयी। औऱ मेरी
तरफ़ मुंह करकेसो गयीँ, औऱ कम्बल ढकली। अब उसके बूब्स मेरी छाती सें लगरहे
थें। मैने उसके ब्लाउज़ केँ बटनखोल दिये। वोँ ब्रा नहि पहनी थि। ब्रा कों शायद
टोइलेट मे हि उतारकर आयी थि। मे उसकेगोल गोल बूब्स कों अपनेहाथ सें दबाने
लगा औऱ उसके निप्पल कों मुंह मे लेकर ज़ोर ज़ोर सें चूसने लगा। उसने अपने एक्
हाथ सें अपनी साड़ी कों उठाकर कमर केँ ऊपररख लिया। अब उसकीकमर केँ नीचेकुछ भि
नहि थां मेराहाथ उसके मक्खन जैसी जांघों कों तोँ कभी उसके चूत कों प्रेम सें
सहलारहा थां औऱ रुपा अपने हाथों सें मेरे लन्ड कों सहलारही थि। ऐसा काफ़ी देर
तक चलतारहा।
मेरा लन्ड एक् बारफिन सें उसकी चूत कि गहराई कों नापने केँ लिये मचलने लगा थां।
मैने धीरे-धीरे सें रूपा सें पलटकर सोने कों कहा। रुपा धीरे-धीरे सें पलट गई,। अब उसकी
नंगी गांड कि दरार मेरे लन्ड सें चिपकी हुईँ थि। मैने धीरे-धीरे सें अपने लन्ड कों हाथ
सें पकड़कर पीछे सें उसकी गांड केँ छेद मे रखा औऱ एक् हल्का सां धक्का मारा।
मेरा लन्ड उसकी गांड मे आधाघुस गय़ा मगर वोँ दर्द सें कराहउठी। मगर वोँ
चीखी नहि। वोँ जानती थि कि ट्रेन मे सभीसो रहे लोगों कों शक न् हौ जाये।
मैने धीरे-धीरे सें एक् औऱ धक्का मारा औऱ लन्ड पूरा कां पूरा अन्दर घुस गय़ा। फिन मे
एक् हाथ सें उसकी चूचियों कों मसलने लगा। रूपा कि चिकनी चिकनी गांड मेरेपेट सें
रगड़खा रही थि। औऱ मे उसे चोदेजा रहा थां। फिनचार पांच मिनट केँ बाद मैने
अपनी चुदाई कि स्पीड बढ़ा दि। औऱ जोरजोर सें रूपा कों चोदने लगा। रूपा भि अपनी
गांड हिला हिलाकर चुदवा रही थि।
अचानक रूपा अपनी गांड कों मेरे लन्ड पे जोर सें दबाकर रुक गयीँ,। मेरा लन्ड भि
पिचकारी कि तरह पानी छोड़ना शुरुकर दिया। लन्ड औऱ चूत दोनो कां पानीगिर जाने
केँ बाद दोनो शान्त हौ गये। मगर हमारी चुदाई सुभह तक चलतीरही। हमनेरात भर
मे सातबार चुदाई कि। औऱ किसी कों पता भि नहि चला।
फिन सुभह मेरा स्टेशन आँ गय़ा। औऱ मे उतर गय़ा। उसेआगे जानां थां तौ वोँ चली गयीँ,
औऱ जाते जाते अपना मोबाइल नम्बर भि दे गयीँ,।
काम-पिपासा--New Hindi Sex Stories - Behan Ki Chudai – New Episode
प्यासी चाची
दरअसल बात मेरे भाई कि विवाह सें शुरुआत होती हैं जोँ कि जबलपुर मे थि। वैसे तौ मे भोपाल शहर कां रहने वाला हूं। पऱ अपने भइया कि विवाह होने कि वजह सें मे जबलपुर गय़ा थां जहाँ हमारे सारे रिश्तेदार आए थें। जिनमें सें एक् थि सपना चाची। वैसे तौ वोँ मेरीदूर कि रिश्तेदार थि पऱ उनकेसंग मे घुलमिल गय़ा थां।
वोँ दिल्ली कि रहने वाली थि, पर्र उनके पति कां देहांत कई सालों पहले हौ हौ चुका थां। सपना चाची कि उमर लगभग ३०-३२साल हैं। पर्र देखने मे वोँ बला सि सुंदर हें। उनकाबदन देख केँ सारे जिस्म मे कंपकपी होने लगती हैं। उनका फिगर ३६-२४-३६ हैं। औऱ वोँ हमेशा थोडा पतले कपड़े कां बलाउज़ पहनती हें जिसमें सें उनकी ब्रा साफ़ साफ़ दिखती थि।
विवाह कों अभि २दिन बाकी थें औऱ घऱ मे भीड़ होने कि वजह सें कुछ लोगों नें तय किया कि वोँ छत पे सोयेंगे। उन लोगों मे सें मे भि एक् थां। छत पे हम् सिर्फ़ ६लोगसो रहे थें। जबरात केँ २बजे मेरी नींद खुली औऱ मे दूसरी तरफ़ पेशाब करने गय़ा तौ मैंने पाया कि वहां बिस्तर पे कोई महिला सोई हुइ थि जिसका पेटीकोट उसके घुटने केँ ऊपर तक आँ गय़ा थां। उसको देखते हि मेरा लन्ड खड़ा होँ गय़ा औऱ मे ख़ुद कों उस स्त्री केँ पास जाने सें रोक नहि सका। जब मे उसके नजदीक पहुंचा तौ पाया कि वोँ कोई औऱ नहि बल्कि सपना चाची थि। उनको देखते हि मेरा लन्ड मेरे पायजामे मे सें बाहर् आनेलगा थां। मैंने फैसला कर लिया थां कि आज तौ मे इनके शरीर कों छू केँ हि रहूँगा।
मे सबकोदेख करआया कि कहींकोई उठा तौ नहि हैं। पऱ सभी गहरी नींद मे सोरहे थें। शायद सपना चाची भि गहरी नींद मे सोरही थि तौ मेरी हिम्मत औऱ बढ़ गई औऱ मे उनके बिस्तर केँ बाजू मे जाकरबैठ गय़ा औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे उनके पेटीकोट कों ऊपर कि तरफ़ सरकाने लगा। थोड़ी हि देर मे उनका पेटीकोट बिल्कुल ऊपर तक आँ चुका थां। शायदवोह चड्डी नहीं पहनती थीं, जिस कारण उनकी बुर मुझे साफ़ साफ़ दिखाई देरही थि जिस पर्र हलके सें बाल थें।
उनकी बुर देखकर मुझसे रहा नहि गय़ा औऱ मैंने उनकी जांघ पे धीरे-धीरे धीरे-धीरे हाथ फेरना शुरुआत कर दिया औऱ उनकेबदन केँ भि रोंगटे खड़े हौ गए थें, थोड़ी हि देर मे उन्होंने करवट लेँ ली औऱ अब उनकी बुर केँ दर्शन मुझको साफ़ तरीके सें होनेलगे थें। तौ मैंने भि देर नां करतेहुए उनके गड्ढे मे अपनी एक् ऊँगली डालना शुरुआत कर दि पर्र उनकी बुर बहोत हि टाईट थि जिसवजह सें मे औऱ पागल होँ चुका थां औऱ थोड़ी देर मे मैंने एक् ऊँगली सें दो उँगलियाँ उनकी बुर मे अन्दर बाहर् करना शुरुआत कर दि।
मे इतनाजोश मे आँ चुका थां कि मे चाची केँ ऊपरचढ़ गय़ा औऱ उनकी मम्मों कों दबाने लगाऊपर सें हि। पर्र तब तक वोँ जाग चुकी थि। उनकीआँख खुली देखकर मे एकदमडर सां गय़ा, चाची नें मुझे एक् चांटा लगाया औऱ फ़िर रोनेलगी औऱ मुझसे चिपक गई, मुझे भि एक् दम सें कुछसमझ नहि आया थां पऱ उनके शरीर कि गर्मी सें मे पागल होँ गय़ा औऱ उनके होंठो कों मैंने चूमना शुरुआत कर दिया। धीरे-धीरे धीरे-धीरे उनकेदूध दबाने लगा औऱ वोँ भि मेरा बराबरी सें संग देनेलगी जिससे हमारे बीच सेक्स कां मजा दोगुना हौ गय़ा।
अब मैंने पेटीकोट कों हटा दिया औऱ उनकी बुर पर्र अपना मुँहरख दिया जिससे चाची परेशान हौ गई औऱ चुदने केँ लिए अपनी चू्त कों उछालने लगी। मे खीर कों धीरे-धीरे धीरे-धीरे खानां चाहता थां, इसवजह सें मैंने उनकेछेद मे अपनीजीभ डाल केँ अन्दर बाहर् करना शुरुआत कर दि औऱ उनके झड़ने कां इंतजार करनेलगा।
जैसे हि चाची झड़ने वाली थि मैंने सभीकुछ एकदम सें रोक दियाजिस वजह सें चाची झड़ नहि पाई औऱ वोँ औऱ भि ज़्यादा गर्म हौ गई औऱ मुझसे कहनेलगी कि आज तक इतना सुखद अनुभव उसकोकभी नहि हुआ, उसके पति केँ जाने केँ बाद सें वोँ प्यासी थि, आज मे उसकी प्यास बुझाऊं।
मैंने भि देरी नाँ करतेहुए अपने९ इंच कां लन्ड चाची केँ हाथ मे दे दिया औऱ चाची नें भि बुद्धिमानी दिखाते हुए मेरे लन्ड कों अपने मुँह मे लेँ लिया औऱ उसे चूसना शुरुआत कर दिया औऱ जब मेरी झड़ने कि बारीआई तोँ चाची नें सभीरोक दिया जैसा कि मैंने उनकेसंग किया थां।
अब बारी थि असलीमजा करने कि। मैंने चाची केँ छेद केँ ऊपर अपना सु्पाड़ा रखा औऱ थोडा सां धक्का लगाया औऱ कुछ हि देर मे मेरा लन्ड उनकी बुर मे समां चुका थां फ़िर मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दि औऱ अन्दर बाहर् करनेलगा। फ़िर थोड़ी देर केँ लिए चाची मेरेऊपर आई औऱ अपनेदूध मेरे मुँह केँ सामने रखदिए तोँ मैंने भि उसकी चुचियों कों अपने दांतों मे रख केँ धीरे-धीरे धीरे-धीरे दबाना शुरुआत कर दिया औऱ अन्दर सें उस पे जीभ फेरना भि शुरुआत कर दिया।
चाची अब पागलों कि तरह मेरे पूरे जिस्म पे हाथ फेरने लगी थि औऱ फ़िर बारीआई चाची कों निढाल करने कि। तौ अब मैंने चाची कों अपनेऊपर चढ़ाया औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे उसेऊपर नीचे होने केँ लिएकहा। औऱ चाची भि एक्सपर्ट थि जैसाकहा बिल्कुल वैसा हि करतीरही औऱ कुछ हि देर मे हम् दोनों संगझड़ गए औऱ एक् दूसरे कि बाहों मे लगभग३० मिनट तक लिपटे रहे औऱ मेरा पूरा वीर्य चाची कि बुर मे हि थां। अब सुभह होने कों थि तौ मे अपने पलंग पे चला गय़ा।
उसकेबाद मुझको चाची केँ संग सेक्स करने कां मौका नहि मिल पाया। पर्र हमारी बात होती रहती हैं औऱ वोँ मेरेसंग औऱ सेक्स करना चाहती हें।
अब मे जून मे दिल्ली जाऊंगा तब चाची कों अपना औऱ करिश्मा दिखाऊंगा।
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