Incest बाप नम्बरी बेटी दस नम्बरी completee Raat Ki Yatra Riya, ek khubsoorat aur seductive ladki, apne pita Ramesh ke saath ek raat ki yatra par nikalti hai. Uske badle ki zaroorat hai, aur wo apne client ke liye taiyar hai. Raat 10 baje, wo apne client ke saath milne jaati hai, aur uske baad kya hota hai, wo ek bhayanak aur kamuk anubhav hai. Riya ki khwahishon ko poora karne ke liye, uske client ko uske aage, peeche, aur upar ki zaroorat hoti hai. Kya Riya apne sapnon ko poora kar payegi? Padhiye is desi kamuk kahani ko aur jaaniye.
Incest बाप नम्बरी बेटी दस नम्बरी completee - Raat Ki Yatra - Complete Kahani All Parts
ये स्टोरी मेरे मित्र रमेश कि हैं। रमेश एक् बिजनेस मैन होने केँ नाते अच्छा खासाकमा लेता थां। मगर जवान लड़कियों कों चोदने कां उसे जबरदस्त शौक थां.
उसकेघऱ मे उसकी सुंदर पत्नि रति औऱ उसकी बेहद हसीन बेटी रिया भि थि। रिया भि अलग बिजनेस करती थि। वो देखने मे बहोत हसीन थि औऱ एकदम श्रद्धा कपूर केँ जैसी दिखती थि.
सुभह केँ नाश्ते केँ बाद एक् दिन रिया औऱ रमेशघऱ सें निकलरहे थें कि रिया कां मोबाइल बज पड़ा.
मोबाइल उठाकर रिया नें कहा-हाँ, कहो रत्न?
उधर सें रत्न नें कुछ बोला.
रिया- तुम्हें मेरारेट पता नहि क्याँ? आगे सें दस हजार।
रत्नफिन कुछ बोला.
रिया- पीछे भि चाहिए तोँ बीस हज़ार औऱ ऊपर फ्री।
रत्न नें फिनकुछ जवाब दिया.
रिया-ओके! रातदस बजे पक्का। बॉय!
इतनाकह कर रिया नें फ़ोनरख दिया.
उसकी मम्मी रति भि यह बातें सुनरही थि.
वोँ बोलि- बेटा ये क्याँ काम करती होँ तुम् जोँ यूँरात- रातभर बाहर् रहना पड़ता हैं तुम्हें?
रिया-ओहो! मम्मी कितनी बार तोँ बताया हैं कि इवेंट ऑर्गेनाइस करती हूं।
रति- वो तोँ ठीक हैं मगरये आगे- पीछे औऱ ऊपर कां क्याँ चक्कर हैं?
रिया- मम्मी आगे कां मतलब हैं सॉफ्ट ड्रिंक्स जौ आगे केँ दरवाज़े सें खुलेआम आँ जा सकें।
रति- अच्छा, फिन पीछे औऱ ऊपर?
रिया- पीछे कां मतलब हैं शराब, जोँ केवल पीछे केँ रास्ते सें छुपाकर आती हैं औऱ ऊपर मतलब खानां।
रति- बेटा येगैर कानूनी हैं। इसमें खतरा हैं तोँ ऐसा क्यूं करती हैं?
रमेश-रति, तुम् भि नाँ बहोत डरपोक हौ। ये मेरी बेटी हैं। इसे अच्छी तरहपता हैं कि बिजनेस केसे किया जाता हैं, येकोई ख़राब काम नहि कररही। देख्ना एक् दिनये अपने बिजनेस मे हमारा नाम जरूर रोशन करेगी।
रिया- थैंकयू डैड। बाय, अब मे चलती हूं। कल सुभह 10 बजे तक आँ जाउँगी।
येबोल कर रियाघऱ सें निकल गयीँ,.
Incest बाप नम्बरी बेटी दस नम्बरी completee - Raat Ki Yatra – New Episode
रति रमेश सें- आपने तोँ इसेसिर पऱ चढ़ारखा हैं। जब हमारे पास इतना रुपया हैं हि तौ इसेऐसे काम करने कि इसे क्याँ जरूरत हैं? औऱ तुम् भि तौ इसकी पॉकेट मनी नहि बढ़ाते। आखिर वो भि तौ अब बड़ी होँ गयीँ, हैं। उसके खर्चे भि तोँ बढ़गए हें।
रमेश-रति तुम् समझती नहि हौ। मे जानबूझ कर उसकी पॉकेट मनी नहि बढाता। मे चाहता हूं कि वो अपने पैरों पऱ स्वयं खड़ी होँ। आखिर एक् न् एक् दिनये सभीउसी कां तोँ होने वाला हैं औऱ तब उसकाये एक्सपीरियंस काम आएगा।
वोँ मुंहबना कर बोलीं- तुम् भि नं, हमेशा अपनीबात मनवा हि लेते हौ। ठीक हैं जाओ, औऱ हाँरात मे हि आने कि कोशिश करना।
रमेश-बॉय!
रति-बॉय! जल्दआने कि कोशिश करना।
अब रमेश भि घऱ सें निकल गय़ा.
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कुछदेर केँ बाद वो दफ़्तर पहुंच गय़ा। वोँ सीधा अपने केबिन मे गय़ा औऱ जाते हि उसकी सेक्रेटरी रीता जोँ एक् 32 याँ 33 साल कि मगर ज़िस्म सें गदराई हुईँ माल थि, पीछे- पीछे वो भि रमेश केँ केबिन मे घुस गई.
रीता-गुड मॉर्निंग सर!
रमेश-गुड मोर्निंग। सिट् डाउन।
रमेश थोड़ी देर तक फाइल्स केँ पेज पलटने केँ बाद गुस्से मे बोला- रीताआर यू क्रेज़ी?
रीता- क्याँ हुआसर? एनी प्रॉब्लम?
रमेश- प्रॉब्लम क्याँ … ऐसेकाम होता हैं? तुम् तोँ मुझे बर्बाद कर दोगी। ये फाइल्स अब तक क्लियर क्यूं नहि हें?
रीता-सर … वोँ … वोँ …
रमेश- क्याँ वोँ-वोँ लगारखा हैं? पता नहि मैंने तुम्हें काम पर्र किसलिए रखाहुआ हैं!
रमेश केँ गुस्से कों देखते हुए रीताउठी औऱ रमेश केँ पास जाकर खड़ी होँ गई,। उसने अपनी साड़ी कां पल्लू थोडा सरका दिया जिससे वोँ नीचेगिर गय़ा। उसने रमेश कां हाथ पकड़ा औऱ अपने बूब्स पर्र रखवा दिया.
रीता दिमाग़ सें भले हि पैदल थि मगर वो अपनेबदन कि कीमत अच्छी तरह सें जानती थि। इसलिये उसने रमेश कों अपनी बुर केँ जाल मे उलझाकर रखाहुआ थां। यही कारण थां कि रमेश उसकोचाह कर भि काम सें नहि निकाल पारहा थां.
रमेश नें पहले अपनेहाथ सें रीता केँ बूब्स कों जार सें दबाया औऱ फिनउसे अपनीगोद मे खींचकर बैठा दिया। उसके चेहरे कों पकड़कर उसके होंठों पर्र अपने होंठ रखने हि वाला थां कि उसके केबिन कां दरवाजा नॉकहुआ.
द्वार (दरवाज़ा) खुला औऱ रमेश कां मैनेजर राजन अंदरआया।
रमेश-कहो राजन?एनी प्रोब्लम?
राजन-सर वोँ … अब तक रानाएंड संस कि फाइल क्लियर नहि हुइ हैं औऱ वो अपना अकाउंट जल्द क्लियर करने कां प्रेशर बनारहे हें।
रमेश- क्यूं क्लियर नहि हुइ अब तक?
राजन-सर, वो रीता केँ हाथों मे ये सारी बातें हें। अब वो हि बतायेगी कि क्यूं देर हौ रही हैं? मगर जल्द क्लियर नं करने सें हमें बहोत नुकसान होँ सकता हैं क्योंकि आगे वो हमारे संगकाम नहि करना चाहेंगे।
रमेश-आई सि। (मे देखता हूं)। ओकेठीक हैं, तुम् जाओ मे देखता हूं।
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