गाय कहूं या भैंस ! - Incest bhai behan – New Episode
3
रात मे जब राहुल रजनी केँ ऊपरचढ़ा हुआउसे चोदरहा थां तब रजनीहर रोज कि तरह उन्हें एक् दुसरे केँ चिपके चोदते देखरही थि। रजनी नें दोनों केँ लगभगआके राहुल केँ पीठ कों सहलाते बोलीं कि मालिक आपकीगाय तौ बड़ी गदराई हुइ हैं। दिनभर यहगाय अपने मालिक कां इंतज़ार करती हैं दुहने केँ लिए। मधु केँ ऐसे बोलने सें राहुल नें चुदाई कि रफ़्तार बढ़ा दि थि। मधुसमझ गई, कि राहुल कों यहबात अच्छी लगरही हैं औऱ फिनजब भि मौका मिलता राहुल केँ सामने रजनी कों गायबोल केँ राहुल कों उतेज्जित करती थि।
इधर सुनील अपनी पढाई मे व्यस्त थां। उसके श्याम पिता सुधिया जैसी पत्नि पाकरबड़े खुश रहते थें। वोँ एक् नंबर केँ चुड़क्कड़ इंसान थें, उन्ही केँ चोदने सें तौ सुधिया कां यहहाल थां कि उसके स्तनों औऱ नितम्बों कां उभर पूरे मोहल्ले मे सबसे ज़्यादा थां। वोँ पूरे मोहल्ले कि सबसे गदराई स्त्री थि औऱ सबमन हि मनउसे चोदने कि ख्वाइश रखते। सुनील जिन दोस्तों कों घऱ बुलाता थां वोँ सारे सुधिया केँ शरीर कि वजह सें हि आते। सुधिया उन्हें खिलाती-पिलाती औऱ उनका ध्यान रखती, उसे क्याँ पता थां कि उसके बेटे केँ मित्र उसके जिस्म कों हुमच-हुमच केँ छोड़ना चाहते थें।
उसका एक् यार सूरजबड़े दर्जे कां बदमाश थां। वोँ दो-तरफी बातों कां एक्सपर्ट थां। घऱ पे जब भि सुधिया उस-सें गरम चाय-पानी पूछती तौ वोँ हमेशा दूध मांगता थां। वोँ सुनील कों भि उत्तेजित करता रहता थां औऱ हमेशा उसकी किस्सा मे एक् बड़े उम्र कि औरत होती जिसे उसकेघऱ कां हि कोईचोद रहा होता। सुनील अब पहले केँ मुकाबले बहुतकुछ समझता थां। उसे भि सुधिया केँ शरीर मे अबवही बात दिखने लगी जोँ उसके दोस्तों कों दिखती थि।
ऐसे हि वक्तबीत रहा थां। पर्र मधु कां निश्चय कर लिया कि वोँ ऐसे नहि रहेगी, याँ तोँ राहुल उसे पत्नि कि तरह इज्जत देगा याँ फिन वोँ उसेछोड़ देगी। कुछ हि दिनों मे राहुल कां ट्रांसफर होँ गय़ा दिल्ली, उसनेमधु औऱ रजनी कों अपनेसंग दिल्ली चलने कों कहा। यही वक्त थां मधु कों बात करने कां। उनसे राहुल सें सीधीबात कि कि वोँ रजनी केँ संग अपने नाजायज़ नातातोड़ दे। राहुल नें सीधेमना कर दिया। रजनी नें भि राहुल कों छोड़कर मायके वापस जाने कां फैसला कर लिया।
मधु केँ मायके मे श्याम, सुधिया औऱ सुनील तीनों हतप्रभ थें। उनकेलिए यहबड़ी मुसीबत वालीबात थि। एक् तोँ मधु कि विवाह बड़ी मुश्किल सें हुईँ थि औऱ फिन उसने अपने पति तौ तलाक़दे दिया। मगर मधु नें जब राहुल औऱ रजनी केँ रिश्ते केँ बारे मे बताया तौ फिन श्याम औऱ सुधिया जल्दी मानगए। मधु अपनेघऱ मायके वापस आँ गई,। पऱ यहमधु बिलकुल दूसरी थि। पूरे जिस्म मे गठीला कसाव आँ गय़ा थां। सुधिया जैसी हि वोँ गदरा गई, थि औऱ 27 साल कि उम्र केँ हिसाब सें उसका जिस्म ज़्यादा हि भर गय़ा थां।
मधु औऱ सुनील एक् कमरे मे पहले भि रहते थें सो दोनों कों एक् रूममिल गय़ा। दुसरे मे श्याम औऱ सुधिया रहते थें। सुनील कों भि यहपता थां कि उसकी दिदी कां पति स्वयं कि मम्मी केँ संग हि सोता थां औऱ फिन दोनों केँ बीच उसने अपनी मां कों चुना। वोँ जब भि मधु कों देखता, उसकी उत्तेजना बढ़ जाती। मधु भि पहले सें अधिक खुली हुईँ थि। उसेडर भि थां क्यूंकि विवाह केँ बाद उसके उम्र मे लोग मायके मे कहां रहते हें, सो कहीं श्याम औऱ सुधिया उसे जाने कों न् बोलदें।
श्याम नें सुधिया केँ अलावा किसी दूसरी महिला कि तरफकभी नहि देखा। पर्र मधु केँ इस गदराये शरीर नें उसे भि उत्तेजित कररखा थां। जब भि मधु उसके आस-पास होती उसका लन्ड तन-नें लगता थां। सुधिया भि यह महसूस कररही थि कि उसकी बेटी उसके पति औऱ बेटे केँ अधिकखुश रहने कां कारण थि। रात मे सुधिया श्याम सें मधु केँ पति औऱ उसकी मम्मी केँ सम्बन्ध कां जिक्र छेड़ देती औऱ फिन दोनों जम केँ एक् दुसरे कों चोदते थें। चोदते वक़्त सुधिया श्याम कों मालिक बुलाती थि औऱ श्याम सुधिया कों गाय। दरअसल श्याम नें सुधिया केँ जिस्म कों देख-कर हि अपने गाँव सें लाया थां। वोँ गाँव केँ एक् गरीब परिवार कि लड़की थि।
सुधिया कों चोदते हुए इतनेसाल होँ गए थें पर्र श्याम अभि भि उसके मांसल जिस्म सें उबा नहि नहि थां। सुधिया कि सेक्स मे निरंतर नएपन लाने कि वजह सें दोनों कि सेक्स लाइफबड़ी जवान थि। सुधिया अभि भि 47 कि उम्र मे पूरे मोहल्ले कि सबसे गदराई स्त्री थि।
उधरमधु भि धीरे-धीरे धीरे-धीरे घऱ मे घुलने-मिलने लगी। वोँ सुनील केँ संग एक् कमरे मे सोती थि औऱ दोनों मे 9 साल कां अंतर होने कि वजह सें उतना खुलापन नहि थां।
दोनों मे sirf एक् भइया-बहिन कां नाता थां। सुनील हमेशा सें मधु कि बड़ी इज्जत करता थां पर्र इसबार उसेमधु बड़ी कामुक लगती थि। वोँ सोचरहा थां कि जोँ स्त्री अपने पति औऱ उसके मां केँ संग पलंग पे सोती होगी वोँ तोँ कुछ भि कर सकती हैं। सुनील जब भि मधु कों देखता उसके जिस्म मे सिरहन पैदा हौ जाती।
पऱ मधु केँ लिए राहुल औऱ रजनी एक् बुरे ख्वाब जैसा थां। उसने सुधिया औऱ श्याम कों दूसरी विवाह केँ लिएबोल दिया थां औऱ वोँ एक् अच्छी जीवन दुबारा सें शुरुआत करना चाहती थि।
सुनील रात मे मधु केँ शरीर कों छूता थां पर्र ध्यान रखता थां कि मधु कहींजग नाँ जाए। दिन मे भि जब भि मौका मिलता वोँ मधु कों छूने कि कोशिश करता थां। श्याम भि अपनी बेटी केँ भरे जिस्म सें उत्तेजित रहता थां। जब भि मधु उसकेपास उसे खानां देनेआती तौ वोँ अपनी बेटी केँ जिस्म कों आँखों सें पीने कि कोशिश करता। सुधिया कों भि यहबात दिखरही थि क्यूंकि उसेपता थां कि श्याम गदराये शरीर कों कितना मनपसंद करता थां। वोँ भि मधु कों जान-बूझकर श्याम केँ पास बार-बार भेजती। उसकेलिए श्याम कों उतेज्जित किये रखना भि एक् काम थां।
मधु दिन-भर सुधिया कों रसोई मे हाथ बटाँती औऱ फिन सुधिया केँ जिस्म कि मालिश भि करती। सुनील हमेशा सें घऱ मे सुधिया औऱ श्याम कां दुलारा थां। एकलौता बेटे होने कि वजह सें वोँ बड़े प्रेम-दुलार सें बड़ाहुआ थां। सुनील अबमधु कों दिदी कि तरह नहि देखता थां, वोँ हमेशा जुगत मे रहता थां कि केसेमधु कों बाहों मे भर लें। उसकी चाहत तौ सुधिया कों भि चोदने कि थि पऱ वोँ जानता थां कि सुधिया मनकर देगी, पर्र मधु केँ संगउसे कोईबड़ी मुश्किल नहि दिखती। जबकभी श्याम औऱ सुधिया घऱ पे नहि होते, वोँ निक्कर मे हि तने लन्ड केँ संग रहता थां औऱ बराबर मधु केँ इर्द-गिर्द आने कि कोशिश करता। दोनों मे बहोत काम फॉर्मेलिटी वाली बातें होती थि। मधु समझती थि कि सुनील उसके जिस्म केँ लिए उतेज्जित हैं, इसलिये वोँ औऱ भि दूरीबना कर रखती।
एक् दिनजब मधु रसोई मे थि औऱ सुधिया औऱ श्याम बहारगए हुए थें। सुनील रसोई मे आया औऱ मधु कों पीछे सें पकड़ते हुए बोला: दिदी, क्याँ बनारही हौ?
मधु: स्वयं कों छुड़ाते हुए-दाल औऱ सब्ज़ी बनारही हूं, क्यूं? (फिरभी मधु केँ बहोत ज़्यादा रियेक्ट नहि किया पऱ सुनील झेप गय़ा)
सुनील वापस अपने कमरे मे जातेहुए बोला-बन जाए तोँ मुझे बताना। भूकलगी हैं दिदी।
पऱ सुनील अबकभी भि मधु कों बाहों मे करके उसके गालों पे किसकर देता औऱ भाग जाता थां। मधु कों यह अच्छा नहि लगता पर्र उसे इतनेकोई शिकायत नहि थि। पर्र सुनील लगातार बढ़ताजा रहा थां। अब वोँ रात मे मधु कों बाहों मे करकेगाल औऱ होठों पे चूमता फिनमधु बाहों मे कियेहुए हि सो जाता।
उस दिनरोज कि तरहमधु सुधिया केँ जिस्म कि मालिश कररही थि। सुधिया पूरी नंगी होँ जाती औऱ फिन अपनी बेटी सें मालिश करवाती थि। मधु सुधिया केँ शरीर कों मालिश करतेहुए बोलि – मां, सुनील मुझे बहोत तंग करता हैं, बराबर मुझेकिस करना चाहता हैं।
सुधिया: क्याँ हौ गय़ा, एक् हि बहिन हैं तुँ उसकी, तुम्हें प्रेम नहि करेगा तोँ किसे करेगा।
मधु: नहि मां, मे कहीं भि होती वोँ मुझे पीछे सें बाहों मे करके मुझे ‘मेरीमधु’ बुलाते हुएकिस करता हैं।
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सुधिया: तोँ क्याँ होँ गय़ा बेटी, तूँ हैं हि इतनी सुन्दर। सुनील केँ पिता भि कहरहे थें कि तेरा जिस्म बड़ा सुन्दर हौ गय़ा हैं। हम् औरतों कों गर्व होना चाहिए अगर मर्द हमारे शरीर कि तारीफ करें।
मधु: पऱ मम्मी वोँ मेरा छोटा भइया हैं, उसेऐसा नहि करना चाहिए।
सुधिया: तूँ भि नं! तेरा पति राहुल अपनी मम्मी केँ संग हि भाग गय़ा औऱ तोँ जवान भइया कों अपना शरीर नहि छूने देना चाहती। चल, अगर वोँ ज़्यादा बदमाशी करे तोँ बताना।
(मधु केँ तोँ होश हि उड़गए कि उसकी मम्मी चाहती थि कि उसका भइया उसके शरीर केँ संग छेड़-छाड़ करे औऱ उसके बाबूजी भि उसके जिस्म कि तारीफ कररहे थें। )
साम मे श्याम घऱ पे आये तोँ मधु उन्हें खानां देने गयीँ,। मधु अभि हाफ पैंट औऱ टॉप मे थि। श्याम नें मधु कों अपनी गोदी मे बैठते हुए बोला- बेटी मन तौ लगरहा हैं नं! (अपनी गदराई बेटी कों गोदी मे बिठा केँ श्याम कों बहोत अच्छा लगा| बचपन मे वोँ मधु कों गोदी मे बिठाया करते थें पऱ जबसेमधु 18 साल कि हुइ उन्होंने उसे नहि बिठाया थां, पर्र अब श्याम कों भि लगता थां कि वोँ मधु केँ संगओपन हौ सकते थें। )
मधु केँ नंगे बाहों औऱ जाँघों पे हाथ फेरते हुए श्याम नें बोला:पता नहि कैसी स्त्री होगी रजनी जोँ राहुल नें मेरी बेटी कों छोड़ दिया। मेरी बेटी कितनी सुन्दर हैं। बिलकुल अपनी मम्मी पर्र गई, हैं| बेटी मे तुम्हे कोई दिक्कत नहि होने दूंगा यहा। तुम् ख़ुशी सें रहो यहां पर्र। (ऐसा कहतेहुए श्याम नें मधु केँ स्तनों पे हाथरख दिया। मधु उठ गयीँ, औऱ बोलि बाबूजी आप् खानां खाओ। मधु अबसमझ रही थि कि अब उसकेलिए एक् बेटी औऱ दिदी वाली इज्जत पान असंभव थां। सबबस उसके शरीर केँ फेर मे थें)
बहुत दिनों तक यही चलतारहा, रात मे सुनील उसे छेड़ता औऱ दिन मे श्याम। उसेपता थां कि किसीदिन दोनों खुल-कर उसके जिस्म कों भोगेंगे, तौ उसने सोचा क्यूं नहि वोँ स्वयं ऐसा प्लान बनाये कि उसका इंटरेस्ट प्रोटेक्टेड रहे। उसे डर थां कि कहींउसे घऱ न् छोड़ना पड़े। वोँ दूसरी विवाह तोँ करना चाहती थि पर्र संग मे उसेडर थां कि कहीं उसका दूसरा पति भि न् ख़राब निकले सो उसने एक् अच्छी तरकीब बनाई।
रात मे जब सुनील उसेचूम रहा थां तबमधु नें उसके लन्ड कों उसकेहाफ पैंट मे हाथ घुसा केँ पकड़ लिया औऱ बोलि- बहुत दिनों सें तुँ मुझेछेड़ रहा तेरी लज्जा नहि आतीबड़ी दिदी कों छेड़ते हुए।
सुनील: मधु केँ गालों कों चाटते हुए- मे तुम्हे अपनी दिदी नहि मानता, ऐसे शरीर कि औरतें दिदी नहि होती।
मधु: (राहुल केँ लन्ड कों मसलते हुए)ऐसे शरीर कां क्याँ मतलब?
सुनील: मधु केँ स्तनों औऱ चूतड़ों कों पकड़ता हुए बोला- इतनेबड़े चूतड़ औऱ बूब्ज़ किसी दिदी केँ नहि होते।
मधु: अच्छा तुझेही मे क्याँ दिखती हूं?
सुनील: मेरी चुड़क्कड़ मधु।
मधु: तुम्हे औरतों केँ बूब्ज़ बड़े उतेज्जित करते हें नं! फिन मम्मी केँ मम्मों तौ औऱ भि बड़े हें! वोँ तुम्हें मां दिखती हैं याँ चुड़क्कड़ सुधिया? (मधु नें महसूस किया कि उसने जैसे हि सुधिया कां नाम लिया राहुल कां लन्ड जोर-शोर सें झटके मारने लगा)
सुनील: सुधिया नहि दूधिया! उसकेदूध पिऊंगा मे
मधु: (राहुल केँ लन्ड कों मसलते हुए) 47 साल कि स्वयं कि मम्मी कों चोदने केँ लिएयह तेरा लन्ड बड़ा उतेज्जित होँ रहा हैं। माधरचोद बनेगा तुँ तोँ। वैसे तेरी दूधिया कां शरीरखूब कैसाहुआ हैं, तुम्हारी तरफबड़ा मज़ा आएगा उससे चिपकने मे। पऱ पहले अपनी दिदी कों चोद लेँ।
फिनमधु नें सुनील कों अपनेऊपर चढ़ा केँ स्वयं केँ जिस्म कों जमकर चुदवाया। सुनील केँ जिंदगी कि पहली चुदाई थि यह। औऱ वोँ स्वयं कि हि बड़ी बहिन कि चुदाई कररहा थां। सुभह राहुल खूबखुश थां। सुभह उठने केँ बाद वोँ मधु कों किश करताहुआ बोला- दिदी, तुम् क्याँ माल होँ! पता नहि उस बेवक़ूफ़ राहुल नें तुम्हे केसेछोड़ दिया।
मधु: उसकेपास भि तेरीतरह एक् दूधिया थि।
(औऱ फिन दोनों हॅसने लगे)
दिन मे जबमधु सुधिया कि मालिश करने कों जानेलगी तौ उसने सुनील कों बोला कि वोँ दरवाज़े कों खुला रखेगी औऱ वोँ देख सकता हैं सुधिया कों नंगा।
मधु नें सुधिया कों नंगा करके पलंग पे पेट केँ बल लिटाते हुए उसकेपीठ पर्र तेल लगाकर मालिश करनेलगी।
सुधिया पूरी नंगी थि। उसके विशाल पहाड़ जैसे नितम्ब बहुतऊपर तक उठेहुए थें। उसने अपनासर तकिये पे रखाहुआ थां औऱ मधु केँ उसकेसर केँ ऊपर चादररख दिया थां ताकिउसे कुछ दिखे नहि। सुधिया चुड़क्कड़ तोँ थि पर्र वोँ अनाचारी नहि थि। पत्नि होने केँ नाते वोँ श्याम कों खुश रखना चाहती थि। उसे सुनील केँ मधु कों किश करने सें कोई दिक्कत नहि थि। वोँ दोनों कों भइया-बहिन मानती थि। पऱ उसे क्याँ पता थां कि दोनों भइया-बहिन कलरात एक् दुसरे कों चोद चुके हें।
तभी धीरे-धीरे सें नंगे क़दमों सें सुनील अंदर आँ गय़ा औऱ सुधिया केँ पेर कि तरफआके अपनी मां केँ नंगे पिछवाड़े कों आँखफाड़ केँ देखने लगा।
मधु नें सुधिया केँ चूतड़ों पे हाथ फेरते हुएकहा: मम्मी, तुम्हारे चूतड़ बहोत बड़े हें। बाबूजी बहोत तारीफ करते हें तुम्हारे जिस्म कि। वैसे राहुल कि मम्मी रजनी केँ भि चूतड़ऐसे हैं बड़े थें। सब मर्दों कों बड़े चूतड़ अच्छे लगते हें न् मम्मी!
मम्मी: हाँ बेटी, सब मर्दों कों गदराई औरतें मनपसंद आती हें, वैसे तुँ भि अच्छी खासी गदरा गई, हैं। तेरे बाबूजी तभी तोँ तुम्हारी तरफ अपनी गोदी मे बिठाना चाहते हें।
मधु सुधिया कि गांड केँ फांक मे हाथ डालते हुए मालिश करनेलगी। सुधिया सीसियाने लगी औऱ बोलीं बेटी तेरीहाथ कि मालिश बहोत मज़ाआता हैं।
मधु: मां कभी सुनील सें भि मालिश करवालो। वोँ भि तुम्हारे शरीर कों पसन्द करता हैं।
सुधिया: धत! अपने बेटे सें नंगे जिस्म कि मालिश? क्याँ कहरही हैं तूँ
मधु: नहि मम्मी, मालिश सें क्याँ होता हैं! वैसे वोँ तेरी बहोत पसन्द करता हैं। रात मे मुझे बाहों मे लेके ‘मेरी सुधिया’ बोल केँ होठों कों किश करता हैं। मे जगी होती हूं पर्र उसे लगता हैं कि मे सोई हुईँ हूं।
(सुनील यहसभी सुनरहा थां औऱ उसे भि उतेजना होँ रही थि)
सुधिया: चुपकर मधु! तूनेगलत सुना होगा नींद मे। मेरा बेटा भला मुझे ‘मेरी सुधिया’ क्यूं बोलेगा। मे उसकी मां हूं।
मधु: अच्छा, मेरीमधु बोले तोँ ठीक मेरी सुधिया बोले तौ तुम्हे विश्वास नहि। वोँ भि जवान हैं। उससे छोटी उम्र सें हि राहुल अपनी मम्मी रजनी केँ जिस्म कों चोदता थां। तुम् तौ रजनी सें भि ज़्यादा गदराई औऱ सुंदर होँ, होँ सकता हैं सुनील तुमसे चिपकना चाहता होँ।
सुधिया: क्याँ बाकेजा रही हैं, मधु।
(औऱ फिन सुधिया नें करवट लेने कों हुईँ, सुनील तब तक चुपके सें कमरे केँ बाहर् चला गय़ा थां। कुछदेर तक सुधिया केँ दूध औऱ पेट कि मालिश करने केँ बादमधु औऱ सुधिया दोनों बारी-बारी सें नहाने लगे)
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5
सुनील बराबर सुधिया कों अपने बाहों मे लें केँ – ‘मेरी प्यारी मम्मी’ कहतेहुए गालों पे किशकर देता थां। पऱ वोँ मां-बेटे वालीबात हि होती थि।
आज कि मालिश केँ बाद सुधिया भि सोच मे थि औऱ उधर सुनील भि। साम मे सुधिया रसोई मे खानां बनारही थि। मधु नें सुनील कों बोलै कि जा जाके अपनी दूधिया कों पकड़ लें।
सुनील नें अपनी मम्मी कों पीछे सें बाहों मे लेके उनके विशाल स्तनों कों हाथों सें धीरे-धीरे धीरे-धीरे मसलते हुए बोला- मां क्याँ बनारही हौ?
सुधिया: क्यूं बेटा (सुधिया हालाँकि असहज थि सुनील केँ स्तनों कों छूने सें पऱ उसनेकुछ बोला नहि)
सुनील: मम्मी, बस यूँही (सुनील नें स्वयं कों औऱ ज़ोर सें सुधिया सें चिपका लिया औऱ अपने बाहों कि गिरफ्त मजबूत करतेहुए उसके स्तनों कों जोर-शोर सें मसलने लगा)
तभी मधु भि रसोई मे आँ गयीँ,
मधु: क्यूं छेड़रहा हैं मम्मी कों, चलइधर आँ जा!देख नहि रहा वोँ कामकर रही हैं।
(फिन सुनील नें वहींमधु कों वैसे हि जकड़ लिया औऱ सुधिया केँ सामने हि मधु केँ स्तनों कों रगड़ने लगा। वोँ मधु केँ गालों कों चुमरहा थां औऱ प्रेम सें उसेमधु बुलारहा थां। )
मधु: मम्मी, देखो न् कितना तंग करता हैं।
(सुधिया बहुत अचंभित थि उसे तौ बसयह भइया-बहिन कां प्रेम लगता थां पर्र उसेशक होनेलगा कि सुनील वकाई उन्दोनो केँ जिस्म कां आशिक हौ चूका थां। पऱ वोँ खुल केँ यहबात भि नहि करना चाहती थि। )
सुधिया: बेटे, रहनेदे अब। बाद मे दिदी कों प्रेम कर लेना।
सुनील: मम्मी, मुझेमधु बहोत अच्छी लगती हैं। फिन सुनील नें मधु कों सीधे करके उसके होठों कों स्वयं केँ होठों सें चूसने लगा। मधु भि सुनील कां संग देनेलगी। दोनों अपने मम्मी केँ सामने हि एक् दुसरे कों चूमने-चाटने लगे। फिन सुनील नें मधु केँ टॉप कों खोलना सुरु किया। तब मधु नें उसे रोका औऱ बोला – चलो अंदर चलते हें मम्मी कों दिक्कत होगी।
(सुधिया पूरेतरह सें घबरा गई, थि अब, उसे पताचल गय़ा थां कि दोनों केँ बीच सभी-कुछ होँ चूका हैं, पऱ उसनेकुछ बोला नहि। )
सुनील: मम्मी, मुझेमधु बहोत अच्छी लगती हैं। फिन सुनील नें मधु कों सीधे करके उसके होठों कों स्वयं केँ होठों सें चूसने लगा। मधु भि सुनील कां संग देनेलगी। दोनों अपने मम्मी केँ सामने हि एक् दुसरे कों चूमने-चाटने लगे। फिन सुनील नें मधु केँ टॉप कों खोलना सुरु किया। तब मधु नें उसे रोका औऱ बोला – चलो अंदर चलते हें मम्मी कों दिक्कत होगी।
(सुधिया पूरेतरह सें घबरा गयीँ, थि अब, उसे पताचल गय़ा थां कि दोनों केँ बीच सभी-कुछ होँ चूका हैं, पऱ उसनेकुछ बोला नहि। )
सुधिया जल्दी उन्दोनो केँ पीछे उनके कमरे तक आयी- अंदर सुनील मधु कों नंगा करके उसकेऊपर चढ़ाहुआ थां औऱ उसके शरीर कि हुमच-हुमच केँ चुदाई कररहा थां। दोनों एक् दुसरे सें चिपके हुए थें। सुनील मधु कों सुधिया बुलारहा थां औऱ मधु सुनील कों बेटा। (सुधिया चौंक गई, यहसुन केँ, उसे बहुत घबराहट होनेलगी, उसे अफ़सोस होँ रहा थां कि उसनेयह टाइम रहते नहि रोका थां सुनील कों)। सुनील नें मधु कों लगभगआधे घंटे तक चोदाफिन दोनों हाँफते हुए एक् दुसरे कि बाहों मे निढाल होँ गए। (सुधिया यहसभी कमरे केँ गेट पर्र खड़ीदेख रही थि औऱ उसे यकीन नहि हौ रहा थां जोँ उसने अभि अभि देखा थां। फिन वोँ वहां सें वापस रसोई आँ गई, औऱ खानां बनाने मे लग गई, )
खानां बनाने केँ बाद सुधिया नें दोनों कों आवाज़ दिया। सुनील मधु कों बाहों मे केसेहुए डाइनिंग चेयर पे बैठ गय़ा। उसनेमधु कों अपने गोदी मे बिठा लिया औऱ उसके स्तनों कों मसलता हुए उसके होठों कों चूसने लगा। सुधिया नें उनके सामने खानां लगाया औऱ फिन सुनील अपने हाथों सें मधु कों खिलाने लगा। सुधिया बिलकुल कमज़ोर महसूस कररही थि स्वयं औऱ वोँ कुछबोल नहि पायी।
मधु: मम्मी, देखो न्! खाने भि नहि देरहा हैं।
सुधिया: दिदी कों खानेदे बेटे, फिन प्रेम कर लेना।
सुनील: मे खिला तौ रहा हूं अपनीमधु कों।
खानां-खाने केँ बाद सुनील मधु कों वापस अपने कमरे मे लें गय़ा औऱ दोनों एक् दुसरे सें चिपके बैड पे लेटगए।
कुछदेर बाद श्याम घऱ आँ गए औऱ घऱआते हि श्याम नें मधु कों आवाज़ दि। सुनील नें मधु कों जाने दिया। मधु नें टॉप औऱ हाफ पैंट डाले श्याम केँ पास आँ गई, औऱ बोलि: बाबूजी आपने बुलाया?
श्याम: (मधु कों अपनी गोदी मे बिठाते हुए):हाँ बेटी, इधर बैठो।
मधु कों उन्होंने अपने जांघ पर्र बिठाया। श्याम नें लूंगी डाल राखी थि औऱ अंदरकुछ नहि पहनरखा थां। लूंगी कों थोड़ा खोलते हुए उन्होंने मधु कों अपने नंगे jaanghon पे बिठा केँ उसके गालों पे जीभ लगतेहुए बोला: बेटी तुम्हारा mann तोँ लगरहा हैं न् यहा?(फिन श्याम नें मधु केँ टॉप केँ ऊपर केँ दोबटन खोलदिए औऱ बोला कि बेटी हलके कपड़े पहनाकरो, आजकलखूब गर्मी हौ रही हैं। टॉप केँ बटन खोलने सें मधु केँ मम्मों बहुत बाहर् आँ गए थें। फिन श्याम नें उसके स्तनों कों मसलते हुए बोला कि बेटी राहुल तुम्हे अच्छे सें प्रेम नहि करता थां न्! वोँ तौ अपनी मां केँ हि जिस्म सें चिपका रहता होगा। खैर हम् हें हमारी बेटी सें प्रेम करने केँ लिए। क्यूं बेटी?
तभी सुधिया उनकेपास खानां लेतेहुए आयी। श्याम नें मधु केँ हाफ पैंट कों ऊपर तक उठा दिया थां उसके जांघ पूरे नंगे थें औऱ stan वैसे भि आधे बाहर् तक थें। सुधिया यहदेख केँ सहम गई,। पर्र वोँ श्याम कों कुछबोल नहि सकती थि। तोँ उसने अनजान बनाते हुए बोला: क्याँ बात होँ रही हैं बाप बेटी मे, जरा मे भि तोँ सुनूं?
श्याम: सुधिया, मे मधु बेटी सें कहरहा थां कि उसे बहोत प्रेम नहि मिला हैं अभि। पर्र हम् किसलिए हें। बेटी पूछलो अपनी मां सें हम् कितना प्रेम करते हें।
सुधिया: हाँ बेटी, तेरे बाबूजी चाहते हें तूँ खूब ख़ुशी सें रहयहा पे। जाअबअब कमरे मे, बाबूजी कों खानां खा लेनेदे।
मधु जल्दी वहां सें उठ केँ अपने कमरे कों चली गई,। सुनील नें मधु कों देखते हि उसे अपने बाहों मे कस लिया औऱ उसके होठों कों चूसते हुए बोला- बाबूजी केँ पास सुधिया तोँ हैं हि, फिन तुझेही प्रेम करने कि बात क्यूं कहरहे थें।
मधु: क्यूं, वोँ बाबूजी हें, वोँ भि प्रेम कर सकते हें। तुँ भि तौ उनकी सुधिया कों प्रेम करना चाहता हैं, वोँ भि तुम्हारी मधु कों मनपसंद करनेलगे हें।
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Awesome kahani he bhay.bhay aage mummy ko sachme ek gaay kee prakaar gale mai patta daal k puri nangi kutiya kee prakaar. haath perr pe chalate hue tabele mai lejake bandho aur uskah dudh bi doho jese gaay kaa doodoh te he.niche kee tarf khich khich k
yeh story itni hi h isse aage likhi nahee gai thi.yeh story pehli baar mene exbii pr padhi thi.fir say padhke Yaad taaza hu gaye Good job
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