गाय कहूं या भैंस ! - Incest bhai behan – New Episode
6
(फिन दोनों हॅसने लगे औऱ जमकर एक् बार औऱ चुदाई कि दोनों नें फिन दोनों सोगए)
अगलेदिन जबमधु सुधिया कि मालिश कररही तब, सुनील फिन कमरे मे आके सुधिया कि नंगे नितम्बों कों देखने लगा। मधु सुधिया केँ पीठ कि मालिश कररही थि औऱ सुनील अपना लन्ड बाहर् निकलकर सुधिया केँ गदराये जिस्म कों देखता हुआमूठ मारने लगा। थोड़ीदेर मे सुधिया कों अपने नितम्बों पऱ गिला सां कुछ गिरता हुआलगा। वोँ पीछे मुड़ी तोँ उसने देखा कि सुनील पूरा नंगा अपने लन्ड कों अपनेहाथ मे लियाहुआ बेशर्मी सें खड़ा थां।
सुधिया: क्याँ हैं यह बेटा? ऐसा नहि करते। मधु तूनेगेट नहि लगाया थां क्याँ?
सुधिया अपने नंगे स्तनों पऱ हाथरखे बातकर रही थि। पर्र उसके मम्मों इतनेबड़े थें कि वोँ एकदम नंगी थि तब। नितम्बों पर्र वीर्य गिराहुआ थां, औऱ उसका मांसल गदराया हुआ शरीर देख-कर सुनील स्वयं कों रोक नहि पाया।
उसने सुधिया कों पीठ केँ बल करके सुधिया केँ ऊपरचढ़ गय़ा औऱ उसके स्तनों कों मुँह मे करके चूसने लगा।
सुधिया: छोड़ो सुनील बेटे, ऐसे नहि करते मां सें। मधु रोकोइसे।
मधु: मां, प्रेम हि तोँ कररहा हैं, अब अपनी मम्मी सें प्रेम नहि करेगा तौ किसी औऱ कि मां सें करेगा क्याँ। (मधु भि अनजान बनके जवाबदे रही थि, जैसे सुधिया अनजान बन जाती थि। ) सुनील मम्मी अच्छी हें नं! बाबूजी कों मां बहोत अच्छे सें प्रेम करती हैं।
सुनील: मेरी सुधिया मुझे भि प्रेम करेगी। क्यूं सुधिया? (ऐसा कहके सुनील सुधिया केँ गालों औऱ होठों कों चाटने लगा। सुधिया कां मांसल शरीरअब सुनील केँ पूरे कब्ज़े मे थां औऱ वोँ उस शरीर कों पूरे ताकत सें अपने जिस्म सें मसलरहा थां। )
सुधिया: बेटेयह सही नहि हैं। छोड़दो मुझे।
सुनील: अच्छा, दिदी केँ सही हैं, औऱ तेरेसंग नहि। आज सें मे तुम्हें भि उतना हि प्रेम करूँगा सुधिया जितना मधु कों करता हूं।
मधु: मुझे तौ थका देता हैं तूँ, पूरे जिस्म मे दर्द होने लगती हैं।
सुनील: मधु तूँ यहींरुक, इसकी भि वैसी हि चुदाई करूँगा। पर्र पहलेइस दूधिया केँ दूध तौ पीलूँ। (सुनील नें फिन सुधिया केँ भारी स्तनों कों मुँह मे लेतेहुए चूसने लगा। )
सुनील सुधिया सें: तुम्हारी तरफ बहुत दिनों सें चोदना चाहता थां। बाबूजी सें हि चिपकी रहती थि तूँ हमेशा। आज तेरीखबर लूँगा मेरी घरेलु दूधिया।
सुधिया: छी! कितना गन्दा हौ गय़ा हैं तूँ, छोड़दे मुझे। (सुधिया जोर सें सुनील कों हिलती, पऱ सुनील नें स्वयं कों ऐसाजकड़ लिया थां कि दोनों एक् संग हि हिलते फिन स्थिर होँ जाते। सुधिया कां भारीबदन थां। सुनील ऊपरचढ़ा हुआ अपने मुँह कों उसके स्तनों केँ बीच मे करके दोनों स्तनों सें अपने गालों पर्र मारने लगा। सुधिया ऐसीलग रही थि जैसे वोँ चुदने केँ लिए बानी होँ)
मधु: तेरी दूधिया तेरे बाबूजी सें बड़े अच्छे सें चुदती हैं। बाबूजी इसेगाय बुलाते हें औऱ यह उनको मालिक। (एक् रातमधु नें उन्दोनो कों चोदते हुएसुन लिया थां। ) इतनेबड़े दूध तोँ बाबूजी नें हि मसलमसल केँ तोँ किये हें।
(सुधिया अचंभित थि पर्र वोँ कुछकर नहि सकती थि। )
सुनील: बाबूजी अब दूसरी गाय लें आएंगे स्वयं केँ लिए। यह गायअब मेरी हैं। इसकादूध केवल मे पिऊंगा। (सुनील नें सुधिया कि आँखों मे देखते हुए बोला- मुझे अपना मालिक बनालो दूधिया। )
सुनील अब सुधिया कों तेज़-तेज़ सें चोदने लगा। मधु अपनी बातों सें उसे लगातार उन्मादित कररही थि। कुछदेर केँ बाद सुधिया भि पूरी गर्म होँ गई, औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे सुनील कां संग देनेलगी। फिन क्याँ थां दोनों हवा कि रफ़्तार सें एक् दुसरे कों धक्का मरनेलगे। 20 मिनट कि धक्का-मुक्की केँ बाद दोनों झड़गए।
मधु केँ लिए भि यह बहुत कामुक अनुभव थां। उसके पति राहुल केँ उसकी मां केँ रिश्ते केँ बाद वोँ स्वयं केँ भइया कों अपनी मां कों चोदते हुए देखा थां उसने। पऱ उसे गर्व थां कि उसका प्लान सहीचल रहा थां।
सुधिया लाज केँ मारेबैड पे हि पड़ीरही औऱ मधु सुनील कों लेकर दुसरे कमरे मे आँ गयीँ,। सुनील अभि भि उतेज्जित थां उसनेमधु कों अपने बाहों मे लेकेकिश करनेलगा औऱ बोला: थैंकयू मधु। तूने मेरी बहोत दिनों कि ख़्वाहिश पूरीकर दि। मे दूधिया कों कबसे चोदने कि सोचरहा थां।
मधु: मेरे प्यारे बेटे केँ लिए मे कुछ भि करुँगी। मेरा सोना प्यारा बेटा।
(दोनों एक् दुसरे कि बाहों मे स्वयं कों डालेसो गए)
रात कों जब श्याम दफ़्तर सें आया तोँ उसनेफिन मधु कों देखते हुए हि पास बुलाया। आज वोँ मधु केँ सामने हि लूंगी बदलने लगा। सुधिया खानां बनारही थि औऱ श्याम अपने बैडरूम मे थां। वहीं सोफे पे बैठ केँ उसनेमधु कों स्वयं केँ जाँघों पे बिठा लिया औऱ उसके गालों कों चाटने लगा। मधु नें स्वयं हि अपनेटॉप केँ कुछबटन खोलदिए औऱ श्याम केँ हाथ खुले स्तनों पऱ रखदिए। श्याम पूरा उतेज्जित होँ चूका थां उसने तनिक भि देर नहि किया औऱ मधु कों बाहों मे भींच केँ मसलने लगा। उसका लन्ड पूराखड़ा होँ चूका थां औऱ लूंगी उसके जाँघों केँ दोनों तरफ हौ चुकी थि। मधु अपने नंगे मांसल जाँघों पर्र श्याम कां लन्ड महसूस कर सकती थि। उसने एक् हाथ सें श्याम केँ लन्ड कों पकड़ लिया औऱ बोलि – बाबूजी, मां कों बुलाऊँ यह तौ पूराखड़ा होँ गय़ा हैं। यहबोल केँ मधु श्याम केँ लन्ड कों धीरे-धीरे धीरे-धीरे सहलाने लगी।
श्याम: बेटी, यह तेरेलिए खड़ा हैं, आज मे तुम को प्रेम करना चाहता हूं। जैसे तुँ राहुल कों प्रेम करती थि वैसे अपने बाबूजी कों करो।
मधु: पर्र बाबूजी, आपकीगाय तौ सुधिया हैं नं (श्याम कां लन्ड नें जोर सें झटका मारागाय सुनते हि)
श्याम: बेटी, तुँ भि तोँ गाय हि हैं। इतनेबड़े थन हें तेरे।
मधु: बाबूजी, पर्र गाय तौ गोरी होती हैं नं! मे तोँ शामली हूं!
श्याम: ठीक हैं बेटी, तूँ मेरी भैंस हुइ। (अब श्याम मधु केँ स्तनों कों बेशर्मी सें झिंझोर रहा थां। मधु रम्भाने लगी। श्याम नें मधु केँ सारे कपड़े उतारदिए औऱ स्वयं भि नंगा हौ गय़ा। श्याम नें मधु कों पलंग पे लिटा केँ स्वयं उसकेऊपर चढ़ गय़ा औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे उसकेभरे जिस्म कों मथनेलगा। सुधिया खानां लेकेगेट तक हि आयी थि वोँ रुक गयीँ,। जोँ उसने देखा उसकेलिए अचंभित करने वाला थां। वोँ लज्जा केँ मारेगेट सटा केँ वापस अपने रसोई मे आँ गयीँ,। )
सुनील मधु कों बुलाने श्याम केँ बैडरूम कि तरफ जानेलगा तौ सुधिया नें उसे रोका। (सुधिया नहि चाहती थि कि वोँ मधु कों श्याम सें चुदते हुए देखे। ) उसने अपने छाती कों थोड़ा ऊँचा करतेहुए अपने स्तनों केँ उभर कों सुनील कों दिखते हुएपास आने कां इशारा दिया। ) सुनील एकदम सें सुधिया कों बाहों मे लेके उसके स्तनों कों nighty केँ ऊपर सें हि मसलने लगा।
सुनील: क्यूं रीगाय, दूध ज़्यादा हौ गए हें क्याँ? स्वयं दूध पीने कां इशारा देरही हैं।
सुधिया: मालिक, आपकीगाय कां दूध आपकेलिए हि तोँ हैं। (सुनील कों सुधिया कां ऐसा बोल्ना बहुत उतेज्जित कर गय़ा। )
सुनील नें सुधिया कि nighty केँ हुक्स खोलदिए औऱ सुधिया कों अपनेरूम मे लेकेगेट कों अंदर सें लॉककर दिया। सुधिया कों अकेले मे कमरे मे नंगा करके पलंग पे लिटा दिया औऱ बोला: तेरी मे बाबूजी सें खरीद लूँगा। वोँ कोई औऱ गाय लेँ आएंगे। आज सें तुँ मेरेसंग हि सोयेगी, दूधिया।
सुधिया: हाँ, मालिक, जैसा आप् चाहें। आपके बाबूजी अब मुझे उतना प्रेम भि नहि करते।
सुनील: मे तुम कोखूब प्रेम करूँगा मेरीगाय। तुम्हारी तरफ रात-दिन दुहूँगा।
सुधिया नें सुनील कों अपनेभरे मांसल नंगे शरीर सें चिपका केँ अपने बाहों मे जकड़ लिया। सुनील पूरीतरह सें अपनी मम्मी केँ बाहों केँ गिरफ्त मे थां।
सुधिया: मालिक औऱ मजबूती सें दबाऊं आपको?
सुनील: दूधिया, बाबूजी कों तोँ तुँ थका देती होगी साली। (ऐसा कहतेहुए सुनील नें सुधिया केँ गाल पे जोर सें मारा। उसकेगाल पूरेलाल होँ गए। ) तूँ पैदा हि रंडी हुई थि साली।
ख़त्म
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