चूत के चक्कर में - चूत की कहानी – New Episode
रामलाल घऱ केँ बाहर् बिस्तर बिछा केँ लेट जाता हैं पर्र नींद उसकी आँखों सें कोसोदूर रहती हैं | उसेरह रहकर कजरी कि बुर कि यादआती हैं पऱ वोँ कर भि क्याँ सकता थां कजरी अपनी मम्मी केँ यहाजा चुकी थि | रामलाल अपना ध्यान कजरी सें हटाने कि कोशिश करता हैं तौ उसे ख्याल आता हैं कि उसकीघऱ मे अभि एक् औऱ बुर हैं | पऱ वोँ यह भि सोचने लगता हैं कि अगर उसने रुकसाना केँ संगकोई जबरदस्ती कि तोँ हौ सकता हैं कि वोँ गाँव वालो कों बतादे औऱ उसकी इज्जत मिटटी मे मिलजाए |
इधरघऱ केँ अन्दर रुकसाना कों भि नींद नहि आँ रही थि वोँ सोचरही थि कि रामलाल नें अब तक उसकेसंग सम्बन्ध बनाने कि कोशिश क्यूं नहि कि कहीऐसा तौ नहि वोँ रामलाल केँ बारे मे जैसासोच रही होँ वोँ वैसा नाँ हौ | पर्र सुभह रामलाल कि नजरों नें जैसे उसके जिस्म कों देखा थां उससे तौ ऐसा नहि लगरहा थां | क्याँ रामलाल कों वोँ पसन्द नहि आई क्याँ खराबी थि उसमे अभि वोँ जवान थि | रुकसाना कों यादआने लगा कि उसके शौहर नें भि कई महीनो सें उससे सम्बन्ध नहि बनाये थें औऱ उसके अन्दर कि प्यास जागने लगी | बरबस हि उसका एक् हाथ उसकी सलवार केँ अन्दर होताहुआ उसकी बुर तक जा पंहुचा | रुकसाना केँ शारीर मे एक् अजीब सि तपन उठनेलगी उसकी बुर अब लन्ड मांगरही थि रुकसाना नें अपनी एक् ऊँगली अपनी बुर पे घुमाई तौ उसकेमुह सें हल्की चीख निकल गयीँ, | अब रुकसाना सें रहा नहि गय़ा उसने अपना दूसरा हाथ भि सलवार केँ अन्दर घुसा लिया औऱ अपनी बुर कों एक् हाथ सें फैलाकर वोँ दुसरे हाथ सें अपनी बुर केँ दाने कों कुरेदने लगी | रुकसाना कां शारीर अबकाम अग्नि मे जलनेलगा उसकेहोठ सुखगए औऱ उसके माथे पे पसीना आँ गय़ा |
रुकसाना नें अपनी एक् ऊँगली अपनी बुर मे गुसा दि औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे उसे अन्दर बाहर् करनेलगी | धीरे-धीरे उसके शारीर मे मस्ती चढ़ने लगी उसकेमुह सें सिसकियाँ निकलने लगी | उसनेमन मे रामलाल केँ लन्ड केँ बारे मे सोचकर एक् औऱ ऊँगली अपनी बुर मे घुसाली | अब उसकी बुर भि हलकी हलकी पनिया गयीँ, थि रुकसाना केँ मन मे अब रामलाल कां लन्ड उसकी बुर मे घुस चुका थां औऱ उसकी अन्दर बाहर् होती उंगलियों कि स्थान अब रामलाल कां लन्ड उसकी चुदाई कररहा थां | रुकसाना किसी औऱ हि दुनिया मे खो चुकी थि औऱ अपनी उंगलियों कों औऱ जोर सें अपनी बुर मे अंदर बाहर् कररही थि | धीरे-धीरे धीरे-धीरे रुकसाना केँ शारीर मे तरंगे उठनेलगी औऱ थोड़ी हि देर मे रुकसाना झड गई, | आज बहोत दिनबाद रुकसाना कि बुर नें पानी छोड़ा थां पर्र अब उसनेठान लिया थां कि वोँ अब उंगलियों कि स्थान रामलाल कां लन्ड अपनी बुर मे लेगी |
उधरघऱ केँ बाहर् रामलाल कि रात बिस्तर पे उलथते पलथते बिटरही थि | गर्मी औऱ उमस सें उसका बुराहाल होँ चुका थां | रामलाल नें अपनी धोती उतार दि औऱ लंगोट मे हि बैड पे पसर गय़ा | थोड़ी हि देर मे उसे नींद आँ गयीँ, |
सुभह रुकसाना कि नींद खुली तौ अभि सूरज नहि उगा थां बस हल्का हल्का उजाला होना शुरुआत हुआ थां | रुकसाना नें सोचा कि बाहर् जा केँ रामलाल कों उठादे कि वोँ घऱ केँ अन्दर आँ जाए | रुकसाना बाहर् निकलकर रामलाल कि बिस्तर केँ पास पहुची तौ रामलाल कों देखते हि उसकी आँखेफटी कि फटीरह गयीँ, | रामलाल कि धोती निकली हुयी थि औऱ उसकी लंगोट भि खुल चुकी थि औऱ उसका लन्ड एकदम कड़क हौ सलामी देरहा थां | रुकसाना कुछदेर वही खड़ी रामलाल केँ लन्ड कों निहारती रही | न् जाने कितने दिनों केँ बाद उसने लन्ड देखा थां रामलाल कां लन्ड उसके पति सें बहुत मोटा औऱ लम्बा थां औऱ किसी काले भुजंग जैसा दिखता थां | रुकसाना कुछदेर बाद रामलाल कों बिना जगाये वापसघऱ मे आँ गयीँ, पऱ अब उसनेदृढ निश्चय किया थां कि वोँ रामलाल कां लन्ड अपनी बुर मे लेके रहेगी |
सुभह रामलाल कि नींद खुलती हैं तोँ सूरजउग चूका होता हैं। रामलाल बैड सें उठता हैं तौ उसे आभास होता हैं कि उसकी लंगोट खुली हुईँ हैं औऱ उसका लन्ड विकराल रूपलिए खड़ा हैं। रामलाल जल्द सें इधरउधर देखते हुए अपनी लंगोट बंधता हैं औऱ धोती लपेट केँ घऱ कि तरफ बढ़ता हैं। घऱ केँ दरवाजे पे पहुँच केँ उसके पाँव ठिठक जाते हें उसेघऱ केँ अंदर सें पानी गिरने कि आवाज़ आती हैं। रामलाल हल्का सां दरवाजे कों धकेलता हैं तौ दरवाजा थोडा सां खुल जाता हैं। रामलाल अंदर झाँक केँ देखता हैं तौ अंदर कां नाज़ारा देख केँ उसका लन्ड फट पड़ने कों होने लगता हैं। अंदर रुकसाना आँगन मे एकदम नग्न अवस्था मे नहारही होती हैं। रुकसाना कां शारीर रामलाल केँ नजरो केँ सामने थां औऱ वोँ बसउसे देखे हि जारहा थां। उसका गेहुआँ रंग, उसकी उभरी हुइ चूचियां, उसके बुर केँ ऊपर केँ कालेबाल सभी रामलाल कों पागलबना रहे थें। तभी उसने सामने पड़ी बाल्टी सें एक् लोटा पानी लिया औऱ अपनेसर केँ ऊपर सें डाल लिया। रामलाल कि नजरें अब रुकसाना केँ शारीर केँ ऊपर सें गुजरती हुईँ पानी कि धार कां पीछा करनेलगी। वोँ धार पहले उसके चेहरे सें होतेहुए उसके सुर्ख लबों कों चूमते हुए उसके सीने पे पड़ती हैं जहाँ पे वोँ दो शाखाओं मे बंट जाती हैं औऱ रुकसाना केँ वक्षो केँ उभारों पे चढ़ती हुई उसकेतने हुइ चूचियों केँ निपल सें उसकेपेट पे गिरती हैं जहाँ पे वे दोनों वापस मिलकर रुकसाना कि बुर कि झाड़ियों मे गुम होँ जाती हैं।
रामलाल यहसभी देख केँ अत्यंत हि उत्तेजित होँ जाता हैं औऱ वोँ अपना लन्ड धोती केँ ऊपर सें हि मसलने लगता हैं। अंदर रुकसाना नें अपनेबदन पर्र साबुन मलना शुरुआत कर दिया होता हैं वोँ साबुन कि टिकिया कों अपने वक्षो पे जोरजोर सें घिसती हैं जिससे वोँ लाल हौ जाते हें फिन वोँ अपनेपेट पे साबुन लगाती हुईँ अपनी टांगो कों फैलाते हुए अपनी बुर पे घिसने लगती हैं। रामलाल सें रहा नहि जाता हैं वोँ अपने लन्ड कों धोती सें बाहर् निकाल केँ हिलाने लगता हैं। अंदर रुकसाना केँ हाथ सें साबुन फिसलके नीचेगिर जाता हैं औऱ वोँ झुक केँ साबुन उठाने लगती हैं जिससे उसकी गांड एकदम सें रामलाल केँ सामने आँ जाती हैं जिसके बीच सें रुकसाना कि बुर झांकते हुयेउसे निमंत्रण देरही होती हैं। रामलाल केँ मष्तिष्क पे हवस सवार होँ जाती हैं औऱ वोँ समाज कि परवाह किये बगैरघऱ केँ अंदरघुस जाता हैं औऱ रुकसाना कों जाके पीछे सें पकड़ लेता हैं।
रुकसाना एकबार केँ लिए चौंक जाती हैं औऱ ऊपर उठने कि कोशिश करती हैं पर्र रामलाल एक् हाथ सें उसकीपीठ पे दबाव डालके उसे औऱ झुका देता हैं। रुकसाना फिन उसकी पकड़ सें छुटने कि कोशिश करती हैं पऱ रामलाल उसे वैसे हि दबाये रखता हैं औऱ अपना लन्ड उसकी बुर पे सेट करके एक् धक्का देता हैं। रुकसाना कि बुर पे लगे साबुन केँ कारण रामलाल कां लन्ड फिसलता हुआआधा उसकी बुर मे घुस जाता हैं। रुकसाना कि बुर नें बहोत दिनबाद लन्ड कां स्वाद चखा थां औऱ उसकीभूख भि बढ़ने लगती हैं। रामलाल हलके हलके अपना लन्ड रुकसाना कि बुर मे अंदर बाहर् करने लगता हैं। रुकसाना कि बुर भि धीरे-धीरे धीरे-धीरे पनियाने लगती हैं रामलाल मौकादेख केँ एक् औऱ धक्का मारता हैं जिससे उसका पूरा लन्ड रुकसाना कि बुर मे समां जाता हैं। रुकसाना केँ मुँह सें हलकी सि चीख निकल जाती हैं। रामलाल धीरे-धीरे धीरे-धीरे रुकसाना कि बुर मे अपना लन्ड अंदर बाहर् करने लगता हैं। रुकसाना कों भि अब आनंदआने लगता हैं उसकी बुर अब औऱ जोर सें पानी छोड़ने लगती हैं। रामलाल अब अपने दोनों हाथों सें रुकसाना कि गांड कों पकड़के अपना लन्ड रुकसाना कि बुर मे पेलने लगता हैं। रुकसाना असीममजा केँ सागर मे गोते लगाने लगती हैं। रामलाल कों भि अब बहोत मज़ाआने लगता हैं औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे वोँ अपनेचरम पे पहुचने लगता हैं। उधर रुकसाना कों भि लगता हैं कि उसका पानी निकलने वाला हैं तौ वोँ भि जोरजोर सें अपनीकमर आगे पीछे करने लगती हैं। दोनों केँ धक्कों कि थाप सें पूराघऱ गूंजने लगता हैं। रामलाल कों लगता हैं जैसे किसी नें उसके अंडकोषों मे आगलगा दि हौ औऱ उसके वीर्य कां उबाल उसके लन्ड सें निकालता हुआ रुकसाना कि बुर कों भरने लगता हैं। रुकसाना कों महसूस होता हैं कि खौलता हुआ वीर्य उसकी बुर मे भररहा हैं तोँ वोँ औऱ उत्तेजित होँ केँ झड़ जाती हैं उसकेपेर जवाबदे देते हैं औऱ वोँ जमीन पे हि पसर जाती हैं। रामलाल अबहोश मे आँ चुका होता हैं औऱ सामने रुकसाना कां हालदेख कर वोँ भयभीत होँ जाता हैं। वोँ जल्द सें अपने कपडेसही करता हैं औऱ घऱ सें बाहर् निकल जाता हैं।
चूत के चक्कर में - चूत की कहानी – New Episode
रामलाल तेजी सें कदम बढ़ाता हैं उसकामन पश्चाताप कि अग्नि मे धधकरहा थां न् जाने केसे उसने अपनी भावनाओ कों फिनबह जाने दिया पहले कजरी औऱ अब रुकसाना। रामलाल केँ ह्रदय मे अपनेलिए घृणा उठने लगती हैं वोँ सोच भि नहि पारहा थां कि वोँ आखिरऐसा केसेकर सकता हैं। रामलाल केँ कदमजब रुकते हें तौ नदी केँ किनारे पे खड़ा रहता हैं। रामलाल अपनेमन कों ठंडा करने केँ लिए कपडे उतारनदी मे उतर जाता हैं। नदी कां ठंडा पानी उसको थोड़ी शान्ति प्रदान करता हैं। बहुतदेर तक पानी मे रहने केँ बाद रामलाल नदी सें बाहर् निकालता हैं औऱ पुराने कपडेपहन वही किनारे बैठ सोचने लगता हैं। उसकेमन मे यह विचार उठता हैं कि रुकसाना नें यहबात अगर गाँव वालो कों बता दि तौ क्याँ होगा। भय केँ मारे उसकेहाथ पाँवफूल गए। तरहतरह केँ विचार उसकेमन मे कौंधने लगे। उसकी हिम्मत जवाब देनेलगी गाँव वापस जाने कि।
जमीन पर्र पड़ी रुकसाना अभि भि अपनी चुदाई केँ खुमार सें निकली नहि थि ऐसी चुदाई तौ उसके पति नें भि नहि कि थि। उसकामन औऱ शारीर दोनों तृप्त हौ गय़ा थां। रामलाल केँ लन्ड कां उगलाहुआ वीर्य उसकी बुर सें निकलकर उसकी जांघो पे बहरहा थां। रुकसाना कों ऐसालग रहा थां नं जाने कितने जन्मों कि प्यास आज जाके पूरी हुई हैं। रुकसाना नें सुभहजब रामलाल कां खड़ा लन्ड देखा थां तभी सें उसकी बुर पनियाने लगी थि। वोँ रामलाल केँ उठने कां इंतेज़ार कररही थि। उसने सारी योजना ऐसे बनायीं कि रामलाल उसकेजाल मे फंस जाये। उसनेजान बूझकर घऱ कां दरवाजा खुलारखा औऱ रामलाल कों रिझाना केँ लिए वोँ नंगे होके नाहारही थि जबकि आजतक उसने अपने शौहर केँ सामने भि ऐसा नहि किया। वोँ धीरे-धीरे धीरे-धीरे उठती हैं आज उसके चेहरे पे ख़ुशी दिखरही थि वोँ वापस नहाती हैं औऱ चहकते हुएघऱ केँ कामों मे लग जाती हैं।
रामलाल थोड़ी देरनदी केँ किनारे चहलकदमी करतारहा पर्र उसकेपेट मे उमड़ी भूख औऱ मन मे उमड़ते हुए सवालो नें उसे परेशान कररखा थां। अंततः उसने फैसला किया कि उसने रुकसाना केँ संग जोँ गलत हरकत कि हैं उसकी वोँ उससे माफ़ी मांग लेगा औऱ अगर वोँ उसेदंड दिलवाना चाहती हैं तौ वोँ स्वयं पंचायत केँ सामने अपना गुनाह कबूलकर लेगा। रामलाल अबयहठान केँ अपनेकदम घऱ कि तरफ बढ़ा देता हैं। घऱ पहुचने पर्र वोँ देखता हैं कि घऱ कां दरवाजा खुलाहुआ हैं। वोँ अंदर झांकता हैं तौ उसे दिखाई देता हैं कि रुकसाना गुनगुनाते हुए अपनाकाम कररही हैं जैसे कि सुभहकुछ हुआ हि नहि। रामलाल कों कुछसमझ नहि आता हैं फिन भि वोँ पूरा साहस बटोर केँ घऱ मे दाखिल होता हैं। रुकसाना उसे देखके खुश होतेहुए पूछती हैं " आँ गए हुजूर बोलिये तौ आपका खानां लगादू?"
रामलाल कों अभि भि रुकसाना कां व्यवहार कुछसमझ मे नहि आता पऱ वोँ जोँ ठान केँ आया थां वोँ बात वोँ रुकसाना सें कहने केँ लिए अपनामुह खोलता हैं " रुकसाना मुझेआज सुभह जौ हुआ."
रुकसाना बीच मे हि बात काटते हुए " क्याँ हुआ."
रामलाल झेंपते हुए बोला " वही जौ मैंने तुम्हारी बिना मर्जी केँ."
रुकसाना नें फिनबात बीच मे हि काटते हुए " आपसे किसने कहा कि जोँ हुआ वोँ बिना मेरी मर्जी केँ हुआ ?"
रामलाल नें आश्चर्य सें पूछा " मतलब ?"
रुकसाना " हरबात कां मतलब नहि होता हुजूर आप् हाथ मुँह धोले मे खानां लगा देती हूं। "
रामलाल नें भि बातआगे बढ़ाने केँ बजाये उसकीबात मानना उचित समझा।
चूत के चक्कर में - चूत की कहानी – New Episode
रुकसाना रामलाल कां खानां लाकेउसे देती हैं। रामलाल चुपचाप बिस्तर पे बैठ खानां खाने लगता हैं। रुकसाना भि अपना खानां लेके उसके सामने आकेबैठ जाती हैं। रामलाल उसपे ध्यान न् देतेहुए अपने खाने पर्र अपना ध्यान लगा देता हैं। कुछदेर बाद रुकसाना रामलाल सें कहती हैं " सुभह कहां चलेगए थें ?"
रामलाल अब उसके चेहरे कों देखता हैं जिसपे एक् कुटिल मुस्कान तैररही थि। रामलाल बोलता हैं " कहीं नहि बसनदी पे नहाने चला गय़ा थां ?"
रुकसाना " क्यूं घऱ मे भि तोँ नहा सकते थें ?"
रामलाल " घऱ मे तोँ तुम् नहारही थि "
रामलाल कि बात सुनके रुकसाना हँसने लगी औऱ बोलि " तोँ क्याँ हुआसंग मे नहा लेते। "
रामलाल रुकसाना कि बात सुनके झेंप जाता हैं औऱ चुपचाप फिन सें अपना ध्यान खाने पे लगा देता हैं। रामलाल जल्द सें अपना खानां समाप्त करता हैं औऱ बिस्तर उठा केँ बाहर् आराम करने जाने लगता हैं। थोड़ी देरबाद रुकसाना भि अपनाकाम खत्म करके उसकी बिस्तर पऱ आँ जाती हैं औऱ उसका पांव दबाने लगती हैं। रामलाल चौंक जाता हैं औऱ बोलता हैं " यह क्याँ कररही हौ ?"
रुकसाना मुस्कुराते हुये कहती हैं " सुभह सें आपनेखूब काम किया हैं थकगए होंगे आपकेपेर दबारही हूं। "
रामलाल कुछ नहि कहता औऱ आँखेबंद कर लेता हैं। उसेयाद आता हैं कि केसे उसकी पत्नि भि उसकारोज पेर दबाया करती थि। इधर रुकसाना केँ हाथ धीरे-धीरे धीरे-धीरे ऊपर कि तरफ बढ़ने लगते हें। जब वोँ रामलाल कि जांघो कों दबाने लगती हैं तौ रामलाल केँ अंदर कि इक्षायें फिन जागने लगती हैं औऱ उसका लन्ड खड़ा होने लगता हैं। रुकसाना रामलाल केँ खड़े लन्ड कों देखती हैं तौ उसकेमन भि कुछकुछ होने लगता हैं। धीरे-धीरे धीरे-धीरे रामलाल कां लन्ड विकराल रूपधर लेता हैं औऱ उसकी धोती मे तम्बू बना देता हैं। रुकसाना सें रहा नहि जाता वोँ ऊपर सें हि रामलाल केँ लन्ड कों दबा देती हैं। रामलाल कि अब सिसकी निकल जाती हैं औऱ वोँ आंखेखोल रुकसाना कि तरफ देखता हैं वोँ नशीली आँखों सें उसकीतरफ देखती हैं जैसेआगे बढ़ने कि इजाजत मांगरही हौ रामलाल भि अब उसकोमौन सहमति दे देता हैं। रुकसाना झट सें रामलाल कि धोती औऱ लंगोट मे सें उसके लन्ड कों आजादकर देती हैं। रामलाल कां काला भुजंग फड़फड़ा केँ रुकसाना केँ सामने आँ जाता हैं रुकसाना उसेहाथ मे लेके सहलाने लगती हैं रामलाल कि आँखे आनन्द सें बंद होँ जाती हें। रुकसाना रामलाल केँ लन्ड कों देख केँ सम्मोहित सि होँ जाती हैं सुभह कि चुदाई मे उसेयह देखने कां मौका नहि मिला थां वोँ रामलाल केँ लन्ड कों अपने मुँह मे लेके चूसने लगती हैं। रामलाल कों झटका लगता हैं वोँ आँखेखोल केँ देखता हैं तौ रुकसाना इसका लन्ड अपने होठों मे लेकेचूस रही होती हैं। रामलाल केँ संगऐसा पहले किसी नें नहि किया थां वी असीम खुशी केँ सागर मे डूबने लगता हैं। इधर रुकसाना अपनी चुसाई कि रफ़्तार बढ़ा देती हैं औऱ रामलाल केँ अंडकोषों कों हाथ मे लेके कुरेदने लगती हैं। रामलाल कों औऱ आनंदआने लगता हैं औऱ वोँ अपनीकमर उठा केँ अपना पूरा कां पूरा लन्ड रुकसाना केँ मुँह मे घुसा देता हैं। रुकसाना कि साँस हि रुक जाती हैं औऱ वोँ रामलाल कां लन्ड मुँह सें निकाल जोरजोर सें खांसने लगती हैं। रामलाल हक्का बक्का होकेउसे देखने लगता हैं वोँ कहती हैं " बहोत ठरकचढ़ गई, हैं हुजूर कों अभि इसे उतारने कां इंतेजाम करती हूं। "
रुकसाना फिन अपने सारे कपडे उतार नंगी हौ जाती हैं। रामलाल उसके शारीर कों देखता हैं जैसा उसने कल्पना किया थां उससे कहीं ज्यादा सुंदर थि रुकसाना। सुभह वोँ शायद इतनासही सें वोँ देख नहि पाया थां। रामलाल रुकसाना केँ रूप औऱ सौंदर्य मे हि खोयाहुआ थां कि रुकसाना उसकेऊपर आँ जाती हैं औऱ अपनी बुर कों रामलाल केँ लन्ड केँ मुँह पे रख देती हैं। रुकसाना धीरे-धीरे धीरे-धीरे अपनाभार डालती हैं तौ उसकीथूक सें सना रामलाल कां लन्ड फिसलके उसकी बुर मे घुस जाता हैं। अब रुकसाना अपनीकमर उठाउठा केँ रामलाल केँ लन्ड कि सवारी करने लगती हैं। रामलाल कों पहलीबार अपने जिंदगी मे बिनाकुछ किये चुदाई कां ऐसासुख प्राप्त होँ रहा थां वोँ अपने दोनों हाथ रुकसाना कि गांड पे रखके धीरे-धीरे धीरे-धीरे उन्हें मसलने लगता हैं। रुकसाना कि बुर रामलाल केँ लन्ड कों अपने मे लेकेखूब रस छोड़ने लगती हैं औऱ रुकसाना भि आनंदविभोर होके सिस्कारिया लेने लगती हैं। रामलाल अब अपनेऊपर चढ़ी रुकसाना केँ शरीर कों देखता हैं औऱ उसकीतनी हुयी चूचियों कों हाथ मे पकड़कर मसलने लगता हैं। ऐसा करने सें शायद रुकसाना केँ जैसे सब्र कां बाँध कां बाँधटूट जाता हैं औऱ वोँ चीखते हुएझड़ जाती हैं। रुकसाना कां निढाल शारीर रामलाल केँ ऊपरपसर जाता हैं औऱ उसकीतनी हुयी चुचिया उसके सीने मे धंस जाती हैं। रुकसाना धीरे-धीरे धीरे-धीरे अपनी साँसों कों संयमित करने लगती हैं।
इधर रामलाल कां लन्ड अभि भि खड़ा रहता हैं। रामलाल रुकसाना केँ चेहरे कों अपने चेहरे केँ सामने लाता हैं औऱ उसके होठो कों चूसने लगता हैं। फिन रामलाल रुकसाना कों पलट केँ नीचेकर देता हैं औऱ स्वयं उसकेऊपर आँ जाता हैं। वोँ पागलो कि तरह रुकसाना कों चूमने लगता हैं धीरे-धीरे धीरे-धीरे रुकसाना भि उसकासंग देने लगती हैं। रामलाल अपना लन्ड रुकसाना कि बुर केँ मुँह पे लगाता हैं औऱ धक्का देता हैं। रुकसाना कि बुर पहले सें हि झड़ने केँ कारण गीली हौ चुकी थि रामलाल कां लन्ड फिसलते हुए उसकी बुर कि गहराइयों मे उतर जाता हैं। रामलाल अब रुकसाना कि बुर मे धक्के पे धक्के पेलने लगता हैं। धीरे-धीरे धीरे-धीरे रुकसाना कों फिन मज़ाआने लगता हैं वोँ अपने दोनों पाँवउठा केँ रामलाल कि कमर पे रख लेती हैं जिससे रामलाल कां लन्ड उसकी बुर मे औऱ अंदर तक चोट करने लगता हैं। रामलाल कों आभास होता हैं कि जल्द हि वोँ झड़ने वाला हैं तोँ वोँ अपने धक्कों कि रफ़्तार बढ़ा देता हैं। रुकसाना भि नीचे अपनीकमर हिला केँ उसकासंग देने लगती हैं। धीरे-धीरे धीरे-धीरे दोनों एकसाथ अपनेचरम पे पहुँच करझड़ जाते हें।
रामलाल रुकसाना केँ ऊपर सें उतरके उसकेबगल मे लेट जाताहै। जब उसकी साँसे संयमित होती हैं तौ वोँ रुकसाना पे नजर डालता हैं उसकी चूचियां अभि भि ऊपर नीचे होँ रही होती हें। रामलाल उन्हें हाथ मे पकड़के फिन भींच देता हैं। रुकसाना चौकते हुये कहती हैं " क्याँ हुआ हुजूर अभि मन नहि भरा क्याँ ?"
रामलाल उसे खींचकर सीने सें लगा लेता हैं औऱ कहता हैं " अभि नहि। "
चूत के चक्कर में - चूत की कहानी - Aage kya hua? Next part padhiye
Update de दो
nice story
Relavant source : click here