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Update 4
सपना केँ घऱ पर्र पायल औऱ पलक दोनों अपनेरूम मे बैठहुए। अपने - अपनेकाम कररहे हैं। थोड़ी देरबाद घऱ कि घंटी बजती हैं।
पायल : शायद मां आँ गई।
पलक : दिदी, मे जाकर दरवाजा खोलती हूं।
पायल : नहि, पलक तूँ अपनी पढ़ाई कर मे जाती हूं।
पायल : जाकर दरवाजा खोलती हैं। औऱ सामने खड़े शख्स कों देख चोक्क!! जाती हैं।
व्यक्ति : क्याँ हुआ बेटी ?
पायल : कुछ नहि पिताजी। ( दरसअल पायल कों उम्मीद नहि थि, कि दरवाजे पऱ पिताजी हौ सकते हैं इसलिये वोँ चोक्क!! जाती हैं। )
व्यक्ति : अंदरआते हुए, बेटी फिन तुम् ऐसे चोक्क क्यूं गई थि ?
पायल : दरसअल बापू मुझेलगा कि मां आई होगी। औऱ अचानक आप् कों देखा। इसलिये चोक्क!! गई।
व्यक्ति : हंसते हुए.!! अच्छा।
पायल : पिताजी, आप् बैठिए मे आपकेलिए पानी लाती हूं। औऱ रसोई कि आेरचली जाती हैं।
व्यक्ति : सोफे पर्र बैठता हैं औऱ कुछ सोचने लगता हैं।
पायल : पिताजी कों पानी देतेहुए। क्याँ सोचरहे हैं आप् ?
व्यक्ति : कुछ नहि बेटी। आओ बैठो। औऱ फिन दोनों बातें करने लगते हैं।
फिनकुछ देरबाद घऱ कि घंटी बजती हैं।
पायल : जाकर दरवाजा खोलती हैं। माँ केँ संग निखिल कों देखकर थोड़ी हैरान!! होँ जाती हैं।
सपना औऱ निखिल अंदरआते हैं औऱ व्यक्ति केँ पास जाकर खड़े होँ जाते हैं।
निखिल : व्यक्ति केँ पास जाकर उसके पांव छूता हैं।
व्यक्ति : निखिल, इसकीकोई जरूरत नहि हैं, अाओ यहां मेरेपास बैठो। सपना तुम् भि बैठो। पायल बेटा, जाओ अपनी माँ औऱ मामाजी केँ लिए पानी लेकरआओ।
पायल : जी पिताजी।
उधर कमरे बैठीपलक पढ़ाई करतेहुए सोचती हैं। दिदी कों गएहुए काफ़ी वक्त होँ गय़ा हैं, अभि तक वापस नहि आई।
चलो बाहर् जाकर देखती हूं। वैसे भि मेरीआज कि पढ़ाई पूरी होँ गई। औऱ बाहर् चली जाती हैं। औऱ बाहर् आती हैं तौ सबलोग कों देखकर चोक्क!! जाती हैं। ख़ासकर अपने पिताजी औऱ निखिल कों देखकर।
पलक : अपने बापू केँ पास जाकर उनकेगले लग जाती हैं। औऱ बोलती हैं बापू आप् आए औऱ आपने मुझे बताया भि नहि।
व्यक्ति : अरे बेटा, भूल गय़ा। क्षमा करदो।
( व्यक्ति पलक सें बात करते वक़्त ज्यादातर उसे बेटा बोलता हैं इसलिये बेटा लिखा हैं )
पलक : कोईबात नहि पिताजी, पर्र आप् आज जल्द केसे आँ गए ?
सपना : पलक, चुपकर क्यूं बापू कों परेशान कररही हैं ?
व्यक्ति : सपना शांतरहो, मेरी प्यारी बेटी कों क्यूं डाटरही होँ।
पलक : पिताजी, आपने बताया नहि आप् जल्द केसे आँ गए ?
व्यक्ति : बेटा, देखो मुझे आपके मामाजी औऱ माँ सें कुछबात करनी हैं, इसलिये दफ़्तर सें जल्द आँ गय़ा।
पलक : जी बापू।
सपना : पायल औऱ पलक तुम् दोनों अपनेरूम मे जाओ।
पायल : जी मां।
पलक : क्यूं माँ ?
सपना : एक् बार मे समझ मे नहि आता क्याँ ?
व्यक्ति : बेटा, अभि अपनी दिदी केँ संगरूम मे जाओ।
पलक : जी बापू।
पायल औऱ पलक दोनों अपने कमरे मे चली जाती हैं।
व्यक्ति : क्यूं बच्चों पर्र क्रोध कररही होँ ? शांतरहो।
सपना : केसे शांत रहूं, अनिता औऱ अवनी लापता हैं। औऱ आप् बोलरहे शांत रहूं।
व्यक्ति : क्याँ तुम्हारे क्रोध करने सें वोँ मिल जायेंगे ?
निखिल उन लोगों कि बातें सुन अपने आपकोकोश रहा थां। क्यूं मे इन लोगों सें दूररहा, जौ मेरे परिवार सें इतना प्रेम
करते हैं। औऱ उनकी इतनी फ़िक्र करते हैं। औऱ जीजाजी नें अभि तक मुझेकुछ भि नहि कहा। जबकि वोँ जानते हैं कि येसभी मेरीवजह सें हुआ हैं।
सपना : तोँ आप् बोलिए मे क्याँ करूं ? मुझे तौ बस अनिता औऱ अवनी कि चिंता हौ रही हैं।
व्यक्ति : देखो, मे अपने साथी जौ इसशहर केँ बड़े पुलिस अधिकारी हैं। उनसेबात कि हैं औऱ उनको अनिता औऱ अवनी केँ बारे मे बता दिया हैं। औऱ उन्होंने कहा हैं कि वोँ उनका जल्द सें जल्दपता लगा लेंगे।
सपना : ठीक हैं। पर्र उन्हें कुछ भि हुआ, तोँ देख लेना।
( निखिल कि तरफ देखते हुए )
व्यक्ति : अच्छा, चलोअब तुम् भि आरामकर लो। अधिक क्रोध औऱ तनाव कि वजह सें बीमार होँ जाओगी। पहले हि तुम्हें ब्लड प्रेशर कि शिकायत हैं।
सपना : ठीक हैं। औऱ अपनेरूम मे चली जाती हैं।
व्यक्ति : निखिल, तुम् उसकी बातों पऱ ध्यान मतदो। अभि वोँ क्रोध हैं, इसलिये कुछ भि बोल देती हैं।
निखिल : जीजाजी, उनका क्रोध जायज़ हैं। मेरी हि वजह सें अनिता औऱ अवनी लापता हुए हैं। सभी बातों कां मे हि दोषी हूं।
व्यक्ति : अब जोँ हौ गय़ा उसे तोँ बदल नहि सकते। तुम् अधिकइस बारे मे मत सोचो। हम् अनिता औऱ अवनी कां पतालगा लेंगे।
निखिल : पर्र जीजाजी, उन्हें कुछहुआ तोँ मे अपने आपकोकभी माफ नहि कर पाऊंगा।
व्यक्ति : तुम् ऐसा क्यूं सोचते हौ। वोँ दोनों जहां भि होगे, सकुशल होंगे। अब तुम् भि आरामकरो। तब तक मे अपनेकुछ लोगों कों भि उनकापता करने कां बोलता हूं।
निखिल : जीजाजी, पर्र.
व्यक्ति : पर्र वरकुछ नहि। अब तुम् जाके आरामकरो। औऱ पायल कों आवाज़ लगता हैं।
पायल : आई बापू।
पायल : कहिये बापू।
व्यक्ति : बेटी, अपने मामाजी कों गेस्ट रूम मे लें जाओ।
पायल : जी बापू।
पायल औऱ निखिल केँ जाने केँ बाद व्यक्ति किसी कों मोबाइल करता हैं। पर्र लगता नहि हैं। फिन वोँ अपने दफ़्तर मोबाइल करता हैं।
व्यक्ति : हैलो, रीमा।
रीमा : हां, सर।
व्यक्ति : अमित कां फोन नहि लगरहा हैं उसे बोलो कि मुझे मोबाइल करें।
रीमा : जीसर, मे अमित कों बोल देती हूं।
व्यक्ति : ठीक हैं। औऱ मोबाइल कटकर देता हैं।
व्यक्ति फिनकुछ औऱ लोगों मोबाइल करता हैं। औऱ उनसेबात करता हैं।
इधर व्यक्ति केँ दफ़्तर मे रीमा एक् केबिन मे जाती हैं। औऱ बोलती हैं सर सें बातकर लो। तुम्हारा फोन नहि लगरहा हैं।
सपना केँ घऱ पऱ व्यक्ति सोफे पर्र बैठा किसी कां प्रतीक्षा कररहा हैं। फिन थोड़ी देरबाद घऱ कि घंटी बजती हैं।
व्यक्ति उठकर दरवाजा खोलता हैं।
सामने वाला : क्याँ आप् नीलेश जी हैं।
व्यक्ति : हां, मे नीलेश हूं। आप् कौन ?
सामने वाला : मे रवि। औऱ मुझे इंस्पेक्टर साहब नें भेजा हैं।
नीलेश : आइए, अंदरबात करते हैं।
नीलेश औऱ रवि दोनों अंदर आँ जाते हैं।
नीलेश : मुझे तौ इंस्पेक्टर साहब नें कहा थां कि वोँ आँ रहे हैं।
रवि : उन्हें कुछ जरूरी काम सें बाहर् जानां पड़ा। इसलिये उन्हें मुझे आप् सें मिलने भेज दिया।
फिनउन दोनों मे कुछदेर बातें होती हैं। फिनरवि चला जाता हैं। तभी नीलेश कां फोन बजता हैं तौ वोँ देखता हैं, अमित कां मोबाइल हैं।
bhay kahani toh achchi lag rhi h. lekin aesa lag rah abi prologue chl rah h. actual kahani chalu nai hoyi h. Waiting for further updates.
kahani toh acha likh rhe hu bhay. Ab dekhte h police dono ko khoj shauhar h k nai. or ek ldka hospital mai akela h thora bhut uss bechare pe bi kisi kaa dhyaan dilwa do.
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Update 05
नीलेश : हैलो अमित, मे तुम्हारे हि मोबाइल कां प्रतीक्षा कररहा थां।
अमित : हां, सर कहिए।
नीलेश : अमित, तुम्हें आज हि *** शहर मे *** इसपते पऱ जाकर। आप्-पास केँ घऱ केँ लोगों सें पताकरो कि किसी नें दोलोग एक् स्त्री औऱ बच्ची कों देखा हैं क्याँ ? मे उनकी फोटो औऱ बाकी जानकारी तुम्हारे फोन पर्र भेज देता हूं।
अमित : जीसर, मे अभि हि वहां केँ लिए निकल जाता हूं। साम तक पहुंच भि जाऊंगा। औऱ फिन जानकारी प्राप्त कर, आपको मोबाइल करता हूं।
नीलेश : ठीक हैं। (औऱ मोबाइल कटकर देता हैं। )
अमित सें बात करने केँ बाद नीलेश अपनेरूम मे जाता हैं। जहां सपना आरामकर रही हैं। पर्र सोई नहि थि। उसदेख नीलेश, मे तुम्हें आराम करने कों कहा थां।
सपना : आराम हि तोँ कररही हूं।
नीलेश : सपना, बिस्तर पर्र लेटकर सोचने कों आराम नहि कहा जाता हैं। चलो, अब सोचना बंदकरो। औऱ जल्द थोडा आरामकर लो।
सपना : आप् केसे मुझे आराम करने कां बोल सकते होँ ? जबकि आप् कों पता हैं कि मे अनिता औऱ अवनी कों लेकर कितनी परेशान हूं। औऱ ऐसे वक्त मे आराम तोँ दूर मुझे सें यहां लेटा भि नहि जारहा, ऐसा लगता हैं कि मे स्वयं हि उनकी तलाश मे निकल जाऊं।
नीलेश : मे जानता हूं तुम् उनसे सें कितना प्रेम करती हौ। औऱ उनको जल्द सें जल्दघऱ लाना चाहती हौ। इसलिये मे अपने लोगों कों भि उनकी तलाश मे लगा दिया हैं औऱ पुलिस भि अपनीतरफ सें कोशिश कररही हैं। वोँ दोनों जल्द हि हमेंमिल जायेंगे। तुम् चिंता नां करो।
सपना : आप् केसे भि करके उनकापता करो।
नीलेश : हम् पताकर लेंगे। चलो, अब तौ आरामकर लो।
सपना : ठीक हैं, आप् भि आरामकर लो औऱ निखिल कों भि बोलदो।
नीलेश : निखिल कों मे गेस्ट रूम मे आराम करनेभेज दिया हैं। मुझे अभि कुछकाम हैं इसलिये तुम् आरामकरो।
औऱ नीलेश रूम सें बाहर् आँ जाता हैं। औऱ अपनेकाम मे लग जाता हैं। औऱ ऐसे हि साम होँ जाती हैं। साम केँ वक़्त सपना, निखिल औऱ नीलेश हॉल मे बैठेबात कररहे थें। निखिल तोँ सिर्फ उनकी बातें सुनरहा थां। बेचारा कुछ बोले भि तोँ क्याँ बोले। कुछ देरबाद पायल औऱ पलक भि अपनेरूम सें निकलहॉल मे आने लगती हैं। पायलउन लोगों कों ऐसेबात करतेदेख कुछ सोचती हैं, औऱ फिन उनकेपास जाकर बोलती हैं।
पायल : पिताजी, आप् लोग दोपहर सें कुछ परेशान लगरहे हैं, क्याँ बात हैं ?
सपना : चलो, तुम् दोनों वापस अपनेरूम मे जाओ।
नीलेश : सपना, कब तक तुम् उनसेबात छुपाकर रखोगी। उन्हें भि बातपता होना चाहिए।
सपना : पर्र वोँ अभि बच्चे हैं।
नीलेश : जानता हूं मगरआज नहि तौ कल बताना हि पड़ेगा।
पायल : बापू, ऐसी क्याँ बात हैं जोँ मां हमसे छुपाने कां बोलरही हैं ?
नीलेश : बेटी, दरसअल बातये हैं कि तुम्हारी अनिता मामीजी औऱ अवनी लापता हैं। औऱ उन्हें केँ कारण हम् सब परेशान हैं।
बापू कि बात सुनकर पायल हैरान!! रह जाती हैं औऱ पलक अभि ज़्यादा समझदार नहि हैं, मगर वोँ दिदी कों परेशान देख वोँ भि दुःखी होँ जाती हैं।
पायल : पिताजी, आप् सब नें अबतकये बात मुझे सें छुपाकर रखी थि।
( दरसअल पायल अनिता कों अपनी मां सें भि अधिक प्रेम करती थि। याँ यूंकहे कि अनिता पायल सें अपने बच्चों सें भि अधिक प्रेम करती थि। )
नीलेश : हमेंपता हैं कि तुम् अपनी मामीजी औऱ अवनी सें कितना प्रेम करती हौ। मगर दोपहर केँ टाइम मे हम् तुम्हें कुछ भि बता नहि सके। इसलिये हि मे तुम्हें येबात बताने कां फैसला किया। यदि तुम्हें बाद मे कहीं औऱ सें पता चलता। तोँ तुम् हम् लोगों सें भि नाराज होँ जाती। कि हमें तुमसे येबात छुपाकर रखी।
पायल : बापू, तौ मामीजी कां कुछपता चला क्याँ ?
नीलेश : बेटी, अभि तक तौ कुछ भि पता नहि चला हैं। मगर पुलिस औऱ मेरेलोग उनकी तलाशकर रहे हैं।
पायल : पिताजी, आप् उनका जल्द सें जल्दपता लगाकर, उन्हें घऱ लें आएगा। यदिऐसे नहि हुआ, तौ मे आप् सब सें कभीबात नहि करूंगी। औऱ रोतेहुए। अपनेरूम मे चली जाती हैं।
पलकउन सब केँ बातें सुनरही थि। पर्र उसे अधिककुछ समझ नहि आँ रहा थां। इसलिये वोँ चुपचाप खड़ी उनकीबात सुनरही थि। पऱ पायल कों रोते औऱ अपनेरूम मे जातेदेख, वोँ अपने बापू सें बोलती हैं।
पलक : पिताजी, दिदी ऐसेरो क्यूं रही हैं ?
नीलेश : बेटा, दिदी अभि कुछ परेशान हैं इसलिये वोँ रोरही हैं। अच्छा अब तुम् अपनेरूम मे दिदी केँ पासजाओ।
पलक : जी पिताजी, औऱ मे दिदी कों चुप भि करा दूंगी। जैसे वोँ मुझे कराती हैं।
नीलेश : मेरा अच्छा बेटा।
पलक : औऱ प्यारा भि।
नीलेश औऱ सब उसकीबात सुनहंस देते हैं। पलक केँ जाने केँ बाद नीलेश सपना सें कहता हैं।
सपना : तुम् जाकररात केँ खाने कि तैयारी करो। जबतक मे औऱ निखिल पुलिस स्टेशन होकेआते हैं।
सपना : ठीक हैं।
निखिल : जीजाजी, मे कुछबोल सकता हूं।
नीलेश : हां, यह भि कोई पूछने कि बात हैं।
निखिल : आज दिदी परेशान हैं। तोँ हम् ऐसा करते हैं कि वापसआते वक्तसब कां खानां बाहर् सें लेते आयेंगे।
नीलेश : निखिल, ये तुमने अच्छी बातकही। सपना, तुम् आज रहनेदो। हम् होटल सें खानां पैक करवा लाएंगे।
सपना : कोई जरूरत नहि हैं, मे घऱ मे बना लूंगी।
नीलेश : नहि, हम् बाहर् सें लेँ आयेंगे। इसी बहाने मुझे एक् दिन तौ अच्छा खानां खाने कों मिल जाएगा। (औऱ हसने लगता हैं। )
सपना : क्याँ मे बुरा खानां बनाती हूं ?
नीलेश : निखिल, चलो पुलिस स्टेशन चलते हैं।
(औऱ जाने लगते हैं, दरवाजे केँ पास जाकर नीलेश सपना कि तरफ देखकर बोलता हैं। )
नीलेश : हां, मेरी प्यारी सपना।
सपना : नीलेश कां जवाब सुनकर हंस देती हैं।
औऱ दोनों वाहन सें पुलिस स्टेशन निकल जाते हैं।
इधर पुलिस स्टेशन जाते वक्त नीलेश कां मोबाइल बजता हैं, वोँ मोबाइल उठाकर।
नीलेश : हां, अमितकुछ पताचला क्याँ ?
अमित : सर, मे यहांआस पास केँ कई घरों सें औऱ लोगों सें उनके बारे मे पूछा किसी कों कुछ भि नहि पता हैं। सुभह सें साम तक किसी नें भि उन्हें यहां नहि देखा। औऱ यदि वोँ यहांरात मे आई भि होंगी। तोँ कलरात कि बारिश कि वजह सें कोई उन्हें देख नहि पाया।
नीलेश : ठीक हैं, तुम् वापस आँ जाओ।
अमित : जीसर। (औऱ मोबाइल कटकर देता हैं। )
कुछदेर बाद वोँ लोग पुलिस स्टेशन पहुंच जाते हैं।
अंदर जाकर वोँ रवि सें मिलते हैं, जोँ कि इसकेस कों देखरहा थां।
रवि : उन्हें देखकर। बैठीये।
नीलेश : जी।
निखिल : सर, क्याँ मेरी पत्नि औऱ बच्ची कां कुछपता चला ?
रवि : अभि तक तौ हमें उनके बारे मे कुछ नहि पताचला हैं। मगर हमारे व्यक्ति जल्द हि उनकापता लगा लेंगे। अभि तोँ हमें सिर्फ इसशहर औऱ वोँ जहां जाने वाली थि उसशहर मे पता किया। मगर सुभह कों हम् उन्हें जिस रास्ते सें वोँ जा याँ आँ रही थि, उस रास्ते केँ अासपास केँ इलाके तलाश करेंगे। औऱ जैसे हि उनका याँ उनके बारे मे हमेंकुछ पता चलता हैं। तोँ आपको सूचित कर देगें।
नीलेश : ठीक हैं।
औऱ फिन नीलेश औऱ निखिल वहां सें निकल रास्ते मे एक् होटल सें खानां पैक करवाकर। घऱ केँ निकलदिए, कुछदेर मे घऱ पहुंच जाते हैं।
सपना : निखिल औऱ नीलेश सें चलो खानां खा लीजिए।
नीलेश : पायल औऱ पलक कों भि बुलालो सबसंग बैठकर खानां खा लेंगे।
सपना : ठीक हैं। ( औऱ पायल केँ रूम मे जाती हैं। )
सपना : पायल, पलक चलो बेटा, खानां खालो।
पलक : माँ, पायल दिदी तोँ सोरही हैं।
सपना : तुम् चलो, मे पायल कों लेकरआती हूं।
सपना : पायल, बेटा उठचल खानां खा लें।
पायल : नींद मे.मां, आप् लोगखा लीजिए। मुझेभूख नहि हैं।
सपना : बेटा, ऐसे नाराज़ नहि होते हैं। मुझेपता हैं तूँ मामीजी कि वजह सें खानां खाने सें मनाकर रही हैं।
पायल : मां, आप् लोगखा लीजिए। मुझेसच मे अभि भूख नहि हैं, बाद मे खा लूंगी।
सपना : अच्छा, फिन मे भि खानां नहि खाती हूं, बाद मे तेरेसंग खा लूंगी।
पायल : माँ, आप् खा लीजिए, आप् भूखेमत रहो।
सपना : अच्छा, बेटा तोँ फिन जल्द सें चलो मेरेसंग।
पायलअब औऱ कुछ नहि बोलती। वोँ जानती थि कि जबतक वोँ मानेगी नहि। तब तक उसकी माँ उसे मनाती रहेगी।
पायल : ठीक हैं, चलो माँ।
फिनसब संग बैठकर खानां खाते हैं। औऱ कुछदेर बात करते हैं। फिन पायल औऱ पलक सोनेचले जाते हैं।
सपना : पुलिस नें क्याँ कहा ?
नीलेश : अभि तौ उन्हें कुछपता नहि चला हैं, मगर जल्द हि पतालगा लेंगे। सुभह वोँ उस रास्ते पऱ तलाश करेंगे, जहां सें अनिता गई थि।
सपना : बस मे तौ ये चाहती हूं कि वोँ सही सलामत मिलजाए।
नीलेश : वोँ मिल जायेंगे। चलोअब सभी सोते हैं। निखिल, तुम् भि जाओ, अपनेरूम मे सोजाओ। सुभह देखते हैं क्याँ होता हैं ?
निखिल : जी।
निखिल, सपना औऱ नीलेश अपनेरूम मे जाकरसो जाते हैं।
सुभह केँ प्रतीक्षा मे क्याँ ये सुभह उनकेलिए खुशी लेकर आएगी ? याँ फिनकुछ औऱ।
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Just a small suggestion, take care of punctuation। You are putting full stop aur purnviranm at many places, where it should be, coma and not ful atop। It may be typo also lekin some care will correct it and improve the reading experience। My suggestion iss when you read a good book aur kahani and I don't mean on this forum, take waqt too look at the construction, how punctuation has been used, how paragraphs are formed। kahani iss more than idea। It iss construction also
Thanks I hope you will not take it otherwise। Nice writing and keep posting
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