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Update 21
एक् औऱ जहां निलेश, निखिल, राजेश औऱ सपनासब अनीता कि हालत केँ कारण दुखी थें। वहीं दूसरी तरफइन सभी बातों सें बेखबर निखिल औऱ सपना केँ माता - पिता केँ घऱ पर्र सभीलोग खुश थें, क्योंकि आज सोनम अपने भइया केँ सगाई केँ कार्यकम मे जाने केँ लिए बाजार ढेर सारी खरीदारी करकेघऱ आई औऱ वोँ सब केँ लिएकुछ न् कुछ लेकरआई थि, इसलिये वो सब कों घऱ केँ हॉल मे बैठाकर उन्हें अपने द्वारा खरीदी चीज दिखारही थि। सोनम कों खुशदेख कर वहां मौजूद सबलोग भि खुश थें।
रात कों सबलोग खानां खारहे थें, तभी सोनम केँ ससुरजी जी अचानक कुर्सी सें नीचेगिर पड़े। अचानक सें उनके गिरने सें सबलोग घबरागए, मगर पंकज जोँ अपने पापा केँ पास हि बैठा थां तोँ वो उन्हें उठाने लगा तौ देखा कि उसके पापा बेहोश गए हैं तोँ वो उन्हें सीपीआर देनेलगा।
कुछदेर तक सीपीआर देने केँ बाद उसके पापा होश मे आए। तब जाकरसब नें चेन कि सांसली।
पंकज कि माँ नें अपने पति केँ होश मे आने केँ बाद उन्हें उनकेरूम मे आराम करने केँ लिए जाने कों कहा तौ वोँ बोले "मुझेकुछ नहि हुआ हैं बस थोड़ी सि घबराहट हौ गई थि। " औऱ वोँ कमरे मे जाने सें मना करनेलगे, मगर पंकज कों संदेह थां पिता जी कों कुछ तौ हुआ हैं इसलिये उन्हें डॉक्टर कों दिखाना चाहिए। पंकज नें जल्दी हि अपने फैमिली डॉक्टर कों मोबाइल कर दिया औऱ उसनेबात करने केँ बाद पापा सें बोले "बापू, आप् मेरेसंग डॉक्टर केँ पास चलिए। "
पंकज केँ बापू : बेटा, मुझेकुछ नहि हुआ हैं बस थोड़ी सि घबराहट हौ गई थि।
पंकज : बापू, आप् थोड़ी देर पहले बेहोश हौ गए थें औऱ आप् कहरहे हें कि कुछ नहींहुआ हें। आपको मेरेसंग चलना हि होगा।
पंकज केँ पिताजी : गायत्री, अपनेइस लाड़ले कों समझाओ। जब मे कहरहा हूं कि मुझेकुछ नहि हुआ हैं फिन भि ये डॉक्टर कों दिखाने कि ज़िदकर रहा हैं। मुझे नहि जानां किसी डॉक्टर केँ पासवास।
पंकज : माँ, क्याँ मे कोईगलत बातकर रहा हूं? आप् हि बताइए कि इन्हें डॉक्टर कों दिखाने जानां चाहिए याँ नहि ?
गायत्री : बेटा, तुम् सहीकह रहे हौ।
पंकज केँ बापू : गायत्री, तुम् भि अपने हि लाड़ले कां पक्ष लेँ रही हौ, मगर तुम् सभीकान खोलकर सुनलो मे किसी भि डॉक्टर कों दिखावाने नहि जाने वाला। (कुर्सी सें उठकर अपने कमरे कि तरफचल देते हैं। )
पंकज : मम्मी, आप् हि पिताजी कों समझा सकती हौ।
गायत्री : अच्छा! बेटा, मे बात करती हूं उनसे, मगर मुझे नहीं लगता हैं कि वोँ मानेंगे। ( बात समाप्त कर वो भि अपने कमरे कि तरफचल देती हैं। )
पंकज : सोनम, मेरे ख़्याल सें बापू कों जल्द हि डॉक्टर कों दिखाया जानां चाहिए। पता नहीं क्यूं मेरादिल बैचेन होँ रहा हें।
सोनम : आप् भि बेवजह परेशान होँ रहे हें, जब पापाजी स्वयं कहरहे हैं कि उन्हें कुछ नहींहुआ हैं बस थोड़ी घबराहट होँ गई थि।
पंकज : तुमने देखा नहीं थां कि अभि बापू बेहोश हौ गए थें, वोँ तोँ शुक्र हैं कि बापूहोश! मे आँ गए।
सोनम : आप् पापाजी कों कितना भि कहलो कि डॉक्टर कों दिखाएं, मगर वोँ तोँ बस अपनेमन कि हि करेगें। अब आप् खाने पर्र ध्यान दीजिए, खानां ठंडा हौ रहा हैं।
पंकज : मेरापेट भर गय़ा। तुम् खालो। (अपनेरुम कि तरफ़चल देता हैं। )
सोनमबस अपने पति कों कमरे मे जातेहुए हि देखती हैं औऱ मन मे सोचती हैं कि यह भि अपने बूढ़े बाप कि बेवजह इतनी फिक्र करते हें। जोँ इनकीबात कभी मानते हि नहि हैं, बस अपनी मर्जी चलाते हें।
सोनमघऱ केँ सबकाम निपटाकर औऱ अपने कमरे मे आती हैं तोँ देखती हैं कि उसका पति बिस्तर पर्र लेटेहुए हें औऱ किसीसोच मे डूबेहुए हें। सोनम केँ कमरे मे आने केँ बाद भि वैसे हि गहरीसोच मे डूबेहुए हें। वो बिस्तर केँ पास जाने केँ आगे बढ़ती हैं तौ उसे अचानक सें एक् काकरोच! नजरआता हैं जौ उसकीतरफ हि आँ रहा थां। ये देखकर वो जोर सें चिल्लाती काकरोच!! सोनम केँ चिल्लाने कि वजह सें पंकज अपनीसोच सें बाहर् आँ जाता हें औऱ उसकीनजर सोनम पर्र जाती हें औऱ उसेडरा देखकर उसे पूछता हैं कि क्याँ हुआ? तुम् इतनीडरी सहमी क्यूं हौ?
( काकरोच! महाशय, तोँ अपनाकाम निपटाकर रफूचक्कर हौ लिए, मगर सोनम कि तौ जैसेजान हि निकल गई थि। )
अपने पति केँ प्रश्न पर्र वो मन मे हि अपने आप् सें कहती"यूं तौ बड़ी बहादुर बनती फिरती हैं औऱ एक् छोटे सें काकरोच! सें डर लगता हें। "
सोनम : कुछ नहि। बस, वोँ काकरोच! देखके डर गई थि।
पंकज : तुम् कबआई ?
सोनम : बस अभि आई औऱ आप् किसीसोच मे डूबेहुए थें?
पंकज : कुछ नहीं, बस बापू कि तबीयत केँ बारे मे सोचरहा थां।
सोनम : आप् अभि तक उसबात कों लेकर बैठे हें।
पंकज : क्याँ तुम्हें पिताजी कि तबीयत कि चिंता नहि हें?
सोनम : मुझे भि उनकी सेहत कि चिंता हैं, मगरजब वोँ स्वयं बोल रहें हें कि वोँ ठीक हैं तौ फिन आप् क्यूं इतना परेशान होँ रहे होँ।
पंकज : नाँ जाने क्यूं? मेरेदिल मे बार-बार उनकी तबियत कों लेकर चिंता होँ रही हें, मगर पिताजी डॉक्टर केँ पास जाने कों सजधजकर हि नहि हैं।
सोनम : आपकोयदि ऐसा लगता हैं कि पापाजी कों डॉक्टर कों दिखाना चाहिए। तोँ कल आप् डॉक्टर कों घऱ पऱ हि बुलाकर पापाजी कों दिखा देना, क्योंकि पापाजी तोँ अपनी मर्जी सें डॉक्टर केँ पास जाने सें रहें।
पंकज : तुम् ठीक कहती होँ। कल सुभह हि अपने फैमिली डॉक्टर कों मोबाइल कर बुला लूंगा।
सोनम : अच्छा, अब आप् पापाजी कि चिंता करनाबंद करें औऱ आपने अभि तक अपने कपड़े बदले नहि?
पंकज : वोँ मे पिताजी कि तबीयत केँ बारे मे सोचरहा थां, इसलिये बदले नहि।
सोनम : ठीक हैं, आप् कपड़े बदलेतब तक मे बच्चों कों उनकेरूम मे देखकर आती हूं।
सोनम अपनेरूम सें अपने बच्चों केँ रूम मे आती हें जौ कि उसकेबगल वाला हि रूम थां। जब वोँ रूम मे जाती हें तोँ देखती हैं कि उसके दोनों बच्चे धीरे-धीरे अपने बिस्तर पऱ सोरहे हें। वोँ उनकेपास जाती हैं औऱ उनके माथे कों प्रेम सें चूमती हैं। फिन दोनों केँ ऊपर चादर ओढ़ा देती हें औऱ रूम कि लाईटबंद कर नाइट लैंप जलाकर वापस अपनेरूम मे आती हैं तबतक पंकज अपने कपड़े बदल चुका थां। जब वोँ सोनम कों देखता हैं तोँ उसे पूछता हैं बच्चे सोगए?
सोनम : हां, आज दिनभर सें मस्ती जौ कररहे थें, इसलिये थककर जल्दसो गए।
पंकज : तुम् भि तोँ आज सुभह सें घऱ केँ काम औऱ सगाई केँ कार्यक्रम केँ लिए भागदौड़ कररही हौ, तुम्हें भि थकान महसूस होँ रही होगी।
सोनम : हां, थोड़ी थकान तोँ होँ रही हैं सोचरही हूं एक् बार शॉवर लें लूं। तौ हल्का महसूस होगा।
पंकज : ठीक हैं, यदि आप् चाहें तौ हम् आपकासंग दे सकते हें। ( मुस्कुराते हुए अपनीबात कहता हैं। )
सोनम : कोई जररूत नहि। मे अपनी थकान उतारना चाहती हूं नाकिउसे बढ़ाना। (वो भि अपनीबात मुस्कुराते हुएकह बाथरूम मे चली जाती हें। )
बाथरूम मे आकर वो अपने सारे कपड़े उतारकर शॉवर केँ नीचे खड़े होकर शॉवर चालूकर देती हैं।
जैसे हि उसके जिस्म पर्र पानी कि बूंदे पड़ती हें उसेऐसा लगता हें जैसे तपती गर्मी मे बहोत देर सें पैदलचल रहे आदमी कों जब ठंडी छाया मिलती हैं तौ उसेजिस प्रकार कि अनुभूति होती हें ठीक वैसी हि इस टाइम सोनम कों होँ रही थि।
थोड़ी देरबाद वोँ सोने केँ लिए जैसे हि बिस्तर केँ पास जाती हें पंकजउसे अपनी बाहों मे भर लेता हैं। सोनम नें सोचा थां कि उसका पति सोरहा हैं, मगरजब पंकज नें उसे अपनी बाहों मे भरा तोँ उसनेकहा, "आप् अभि तक जाग रहें हें। "
पंकज : बस, अभि थोड़ी देर पहले हि किसी आवाज़ सें मेरी नींदखुल गई।
(सोनम कों यादआता हैं कि बाथरूम सें निकलकर जब उसने बाथरूम कां गेट थोड़ी ताकत सें बंद किया थां। शायदउसी कि आवाज़ सें इनकी नींदखुल गई। )
पंकज : मेरी अच्छी भाग्य थि कि वो आवाज़ हुई औऱ अपनीजान कों इसरूप मे देखने औऱ बाहों मे लेना कां मौका मिला।
सोनम : अधिक मस्का मारने कि जररूत नहि हैं, मुझे नींद आँ रही हें। सोनेदो औऱ आप् भि सोजाओ।
पंकज : आपका हुकुम सर आंखों पर्र, मगरबस एक् गुड नाईट किसीदे दो।
पंकज अपना चहेरा आगे लाता हैं औऱ सोनम केँ होंठ कों अपने होंठ मे समा लेता हें। कुछदेर तक होंठ कां रसपान कराने केँ बाद सोनम अपने पति सें अलग होती हें औऱ कहती हैं, "अब मुझे सोनेदो, क्योंकि सुभह मुझे जल्द भि उठना हैं। "
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nice kahani.!!
bhay story nikhil और anita के pyar से suru huyi thi.और nikhil kese anita के sath बुरा behave krta h लेकिन nikhil ye sab majboori mai krr raha h ye बात sirf anita kaa bhay janta h लेकिन nikhil ne kisiko batane से mana किया h.और इस sab के pichhe nikhil के bhay की biwi sonam h.bichare nikhil ko iski wajah से apni anita से dur hnaa pada, apni beti ko wo अपना pyar na de saka और उसका beta bi hostel mai नहीं rehna chahta.लेकिन अब nikhil ko strong बनाना hoga apni anita के liye, apne bachho के liye.और एक बात samajh नहीं aayi की nikhil itna pyar krta h anita से लेकिन phir bi apni behen के sath chala गया apni bachhi ko akela chhod के.mujhe lagta h nikhil के man mai guilt hongi की उसकी wajah से ye sab huwaa h.लेकिन अब nikhil ko firse wo pyar देना hoga anita ko.!! bhay kahani nikhil और anita की thi लेकिन yaha pe aapne ye nilesh और antim ko hi bich mai ghused दिया.nikhil की behen bi usse naraj h joo usse itna pyar krti thi लेकिन usko ptaa नहीं h की nikhil के ayese banane के pichhe uss harami sonam kaa hath h.!! nikhil ko अब apni anita और beti के pas aajana चाहिए.और इस nilesh और antim ne apni fantacy के chalte apne apne partners ko dhoka bi de दिया.!! anita के bhay ko bi nilesh के office mai काम karne wali ldki से pyar hogaya h.!!
bhay अब kahani thodi nikhil pe focus karo.!!
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Update 22
उसीरात कों आखिरी केँ घऱ पर्र -
दक्ष बेटा, तुम् क्याँ कररहे होँ ? आखिरी नें थोडा चिंतित होतेहुए दक्ष केँ कमरे कां दरवाजा खोला।
जब दरवाजा खुला तोँ अवनी नें दरवाजे कि तरफ देखा औऱ फिन सें अपनेकाम मे लग गई।
जब आखिरी आगे बढ़कर देखती हें तौ पाती हैं कि अवनी नें बहोत सारेफूल इकठ्ठे किएहुऐ थें औऱ उन्हें वो एक् थैली मे जमाकर रही थि।
आखिरी : बेटा, यहसभी क्याँ हैं? इतने सारेफूल कहां सें लेकरआए आप् ?
अवनी : बगीचे सें।
आखिरी : आप् कब बगीचे गई ? औऱ किसके संग ?
अवनी : दूसरी आंटी केँ संग गई थि।
आखिरी कों यादआता हैं कि कुछदेर पहले सकीना (नौकरानी) कुछकाम सें बाहर् गई थि तब शायद अवनी भि उसकेसंग चली गई होगी।
आखिरी : अच्छा, मगर इतने सारेफूल किसलिए लेकरआए होँ ?
अवनी : आंटी, मुझेफूल अच्छे लगते हें औऱ इनमें सें खुश्बू भि अच्छी आती हें।
अवनी कि बात सुनकर आखिरी केँ चेहरे पर्र मुस्कान आँ जाती हैं।
आखिरी : अवनी बेटा, दक्ष कहां हैं?
( दरअसल आखिरी दक्ष कों देखने हि उसके कमरे मे आई थि, क्योंकि कईबार उसने दक्ष कों हॉल सें आवाज़ दि थि। जब दक्ष नहींआया औऱ नां कोई जवाब दिया तोँ आखिरी चिंतित होँ गई थि। )
अवनी : छत पऱ गय़ा हैं।
आखिरी : अवनी बेटा, चलोअब यहसभी बाद मे करना। पहले खानां खालो।
अवनी : बस, आंटीदो मिनट मे इन्हें अच्छे सें रखदूं।
आखिरी : अच्छा, तुम् अपनेफूल रखो तबतक मे दक्ष कों बुलाकर लाती हूं।
आखिरी छत पे आती हैं तौ देखती हैं कि दक्षछत पऱ घूमरहा थां।
आखिरी : बेटा, छत पर्र क्याँ कररहे हौ ?
दक्ष अपनी माँ कि आवाज़ सुनकर उनकीतरफ देखता हैं औऱ बोलता हैं, "कुछ नहीं। "
आखिरी अपने बेटे केँ पास जाकरउसे प्रेम सें पूछती, "आजछत पऱ घूमरहे होँ, क्याँ बात ?"
दक्ष अपनी मां केँ प्रश्न पर्र बस इतना हैं कहता हैं कि " ऐसे हि। "
आखिरी भि अधिक प्रश्न नहीं करती हैं औऱ उससेबस इतना कहती हैं कि " चलो, खानां खाकर वापस आँ जानां। "
दक्ष भि अपनी मां कि बात मानकर उनकेसंग नीचे आँ जाता हें, मगर उसकेमन कोई तौ बातचल रही थि जिसको वो अपने तक हि रखेंहुऐ थां।
सबलोग खानां खारहे थें तभीडोर बेल बजती हैं। सकीना (नौकरानी) जाकर दरवाजा खोलती हैं। दरवाजे पर्र उसके मालिक यानि वैभव खड़ा होता हें। वैभव अंदरआकर अपनेरूम मे जाता हैं औऱ थोड़ी देरबाद रूम सें निकलता हैं।
तब तक आखिरी नें दक्ष औऱ अवनी कों खानां खिला दिया थां।
वोँ दोनो हि छत पऱ चले जाते हें।
आखिरी वही डाइनिंग टेबल पर्र बैठी थि औऱ जैसे हि वैभव कों रूम सें निकलता देखती हें तौ कहती, "आप् तोँ किसी मित्र कि जश्न मे जाने वाले थें। "
वैभव भि आखिरी केँ पासआकर बैठता हैं औऱ सकीना (नौकरानी) सें उसकेलिए खाने कि प्लेट लगाने कां कहता हैं।
सकीना (नौकरानी) अपने मालिक केँ लिए खाने कि प्लेट लगाने लगती हैं तौ आखिरी उसे कहती हैं कि "तुम् रसोई कां काम ख़त्म करलो। इनकी प्लेट मे लगा देती हूं। "
फिन आखिरी अपने औऱ वैभव केँ लिए खाने कि प्लेट रेडी करती हैं। दोनों खानां खारहे थें तभी आखिरी बोलती हें कि "आपने बताया नहीं कि आप् बर्थडे पार्टी मे क्यूं नहि गए ?"
वैभव : वोँ जश्न कैंसल हौ गई।
आखिरी : क्यूं ?
वैभव : मेरे मित्र केँ जीजा कां गाड़ी एक्सीडेंट होँ गय़ा हैं, तौ उसे अपनी जश्न रद्द करनी पड़ी।
आखिरी : यह तोँ बुराहुआ। उसके जीजा कों तोँ कुछ नहि हुआ ?
वैभव : अभि तोँ आईसीयू मे भर्ती हैं। उनकी हालत भि गंभीर हैं, शायद हि बचपाए। याँ फिनकोई करिश्मा हि उनकोबचा सकता हें।
आखिरी : मे तोँ यही प्रार्थना करती हूं कि तुम्हारे साथी केँ जीजाठीक होँ जाएं।
वैभव : हां, इसके अलावा हम् कुछकर भि नहि सकते हैं।
आखिरी : अरे, मे तौ भूल हि गई।
वैभव : क्याँ हुआ ?
आखिरी : निलेश भैय्या कां मोबाइल आया थां कि आज वो हॉस्पिटल मे हि रुकने वाले हैं तोँ उनका खानां लेकर हॉस्पिटल जानां थां।
वैभव : इतनी सि बात। कोई नहि, मे टिफिन लेकरचला जाऊंगा।
आखिरी : आप् अभि तोँ दफ़्तर सें आए हैं। मे चली जाती हूं।
वैभव : अरे, तुम् यहां बच्चों कां ध्यान रखो, मे चला जाऊंगा।
आखिरी : ठीक हैं।
थोड़ी देरबाद वैभव हॉस्पिटल केँ लिए निकल जाता हैं औऱ इसतरह अलग-अलग स्थान सबलोग केँ लिएयह रात भि बाकी रातों कि तरहकट जाती हैं।
आज कि रात कहीं खुशी! मे तौ कहींगम! मे गुजरी थि, मगरयह खुशी औऱ गमकब तक चलेगा ? इसका जवाब तौ भविष्य केँ गर्भ मे लम्हा रहा हें।
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