~~~~ जानकारी ( Information ) ~~~~ | incest desi sex story – New Episode
Update 19
इधर सपना केँ घऱ पऱ सपना रसोई मे कामकर रही थि औऱ राजेश हॉल मे बैठकर टेलीविज़न देखरहा थां।
राजेश टेलीविज़न देखने केँ संगमन मे कुछसोच भि रहा थां। तभीघऱ केँ मोबाइल कि घंटी बजती हैं, जिससे राजेश कां ध्यान भि भंग हौ जाता हैं। थोड़ी देर तक मोबाइल कि घंटी बजती रहती हैं तौ सपना रसोई सें राजेश कों मोबाइल उठाने कों कह देती हें। राजेश मोबाइल उठाता हैं।
राजेश : हैलो!
सामने सें : हैलो!, आपकोकौन बोलरहे हें ?
राजेश : मैडम, आपने मोबाइल किया, पहले आप् बताइए कि आप् कौनबोल रही हें ?
सामने सें : मिस्टर, मुझसे यह पूछने वाले तुम् होँ कौन ? औऱ सपना दिदी कहां हें ? (थोडा तेज स्वर मे)
राजेश : मैडम, आप् दो मिनट रुकिए, मे सपना दिदी कों बुलाता हूं।
राजेश रसोई कि तरफ जाता हैं औऱ सपना सें कहता हैं कि "आपकेलिए किसी स्त्री कां मोबाइल हैं। "
सपना : किसका मोबाइल हैं ?
राजेश : वोँ मैंने पूछा थां, मगर उन्होंने बताया हि नहि। बस, आपकापूछ रही थि।
सपना : उसे बोलो कि दस मिनटबाद मोबाइल करें औऱ उसे उसकानाम पूछ लेना।
राजेश : ठीक हैं।
राजेश फिन सें मोबाइल पऱ बात करता हैं।
राजेश : मैडम, आप् दस मिनट सें मोबाइल कीजिए। अभि सपना दिदी थोडा काम मे व्यस्त हें। वैसे आप् बोलकौन रही हें ? क्याँ मे आपकानाम जान सकता हूं ?
सामने सें : ठीक हैं, मे थोड़ी देर सें मोबाइल करती हूं। (मोबाइल कटकर देती हें। )
राजेश मन मे सोचता हैं कि बड़ी हि अजीब किस्म कि स्त्री थि। मैंने तोँ उसेबस उसकानाम पूछा थां, मगर जवाब देने कि बजाय मोबाइल हि कटकर दिया।
थोड़ी देरबाद.
सपना रसोई सें बाहर् आती हैं औऱ राजेश सें पूछती हैं कि "किसका मोबाइल थां ?"
राजेश : वोँ तौ उसने बताया हि नहि, बाद मे मोबाइल करने कां बोल मोबाइल काट दिया।
सपना : कोई नहि, उसनेफिन सें मोबाइल करने कां बोला हैं तोँ करेंगी।
दोनों बैठकर ऐसेबात करने लगते हें।
थोड़ी देरबाद.
फिन सें मोबाइल आता हैं तोँ सपना मोबाइल उठाती हैं।
सपना : हैलो!, कौन बोलरहा हैं ?
सामने सें : दिदी, मे सोनमबोल रही हूं।
(सपनामन मे आज सोनम नें मोबाइल क्यूं किया ? कहींउसे अनीता कां पता तौ नहि चल गय़ा! मे भि क्याँ सोचरही हूं, उसे केसेपता चलेगा ?)
सपना : सोनम, बड़े दिनों बाद हमारी यादआई।
सोनम : दिदी, ऐसीकोई बात नहि हैं। हम् तौ हमेशा आपकोयाद करते हैं, मगर आप् हि हमेंयाद नहि करती हें।
सपना : अच्छा!, घऱ मे सभीलोग केसे हें ? मां-बापू, पंकज औऱ बच्चे।
सोनम : सभीठीक हैं। मैंने आपकोकुछ बताने केँ लिए मोबाइल किया थां। वैसे अभि थोड़ी देर पहलेकिस बदतमीज नें मोबाइल उठाया थां औऱ वोँ आपको दिदी क्यूं बोलरहा थां ?
सपना : अरे!, वोँ तोँ राजेश थां। मे रसोई मे कामकर रही थि तोँ उसने मोबाइल उठाया थां।
सोनम : कौन राजेश ?
सपना : अरे!, तुम् भूल गई। अनीता केँ छोटे भइया राजेश कों उसी नें मोबाइल उठाया थां। वैसे क्याँ बताने केँ लिए मोबाइल किया थां ?
सोनम : दिदी, वोँ मेरे भइया कि विवाह पक्की होँ गई हें औऱ अगले महीने कि पंद्रह तारीख़ कों उसकी सगाई कां छोटा सां कार्यक्रम रखा हैं तोँ आप् सब कों सगाई मे आनां हैं। (खुश होतेहुए.)
सपना : बधाई होँ!, यह तोँ बड़ी हि अच्छी बात हैं।
सोनम : शुक्रिया! दिदी, आपको मां जी औऱ पिताजी जी भि यादकर रहे थें। पिछली गर्मियों कि छुट्टियों केँ बाद सें आप् एक् बार भि घऱ नहि आए हौ तोँ घऱकब आँ रहें हौ ?
सपना : सोनम, इस बार गर्मियों कि छुट्टियों मे जरूर आऊंगी। (झूठबोल देती हें। )
सोनम : दिदी, आप् मुझे निखिल भैय्या याँ अनीता दिदी कां कोई नंबरदे सकती हें। उनकेघऱ कां जोँ नंबर मेरेपास हैं वोँ तौ बंद हौ चुका हैं।
(सपनामन मे अबइसे क्याँ जवाबदूं ?)
सपना : सोनम, तुम् अनीता कि चिंता मतकरो, उसे मे बोल दूंगी।
सोनम : दिदी, आप् मुझे नंबरदे दीजिए, वरना दिदी कों बुरालग जाएगा कि मैंने उन्हें मोबाइल नहि किया।
सपना : अरे!, मे बोलरही हूं नाँ अनीता कों कुछ भि बुरा नहि लगेगा।
सोनम : दिदी, आप् कह रहें हैं तौ ठीक हैं, मगरबाद मे अनीता दिदी मुझ पऱ नाराज़ नाँ होँ ?
सपना : तुम् ज़्यादा चिंता मतकरो, मे सभी संभाल लूंगी।
सोनम : अच्छा! दिदी, मे बाद मे बात करती हूं।
सपना : ठीक हैं। (मोबाइल कट जाता हें। )
सपना कि बात ख़त्म होने केँ बाद राजेश बोलता हैं। (जोँ अपना औऱ अनीता कां नाम सुनकर बहोत देर सें सोचरहा थां कि सपना दिदी किससे बातकर रही हें। )
राजेश : दिदी, किसका मोबाइल थां ?
सपना : वोँ सोनम कां मोबाइल थां। तुम्हें याद हैं कि नहि ? (मुस्कुराते हुए.)
राजेश : दिदी, याद हें। (मन मे - उसे केसेभूल सकता हूं। ) आप् भि उनकेसंग मिलकर मेरेमजे (मजाक मस्ती) लेती थि।
सपना : अच्छा!, मगर वोँ तौ तुम्हें भूल गई। (मुस्कुराते हुए.)
राजेश : दिदी, सोनम दिदी सें मिले तोँ लगभगछ: साल होँ गए, इसलिये उन्हें याद नहि रहा होगा। वैसे भि अब पहले जैसीबात नहि रहीं।
(राजेश मन मे - दिदी, आपको क्याँ बताऊं कि उस रण्डी केँ कारण हि जीजाजी कों अपनाघऱ छोड़ना पड़ा। वोँ तोँ जीजाजी नें मुझे अनीता दि कि शपथदे रखी हें, इसलिये किसी कों उसके बारे मे बता नहि सकता हूं। फिन भि एक् दिन तौ मे उसकी गान्ड मार केँ हि रहूंगा। )
सपना : पहले जैसीबात नहि रहीं मतलब ?
राजेश : मेरा मतलब थां कि इतनेसाल बीतगए हैं, नां कोईबात हुई औऱ नाँ कोई मिलना जुलना हुआ, इसलिये अब पहले जैसीबात नहि होँ सकती।
सपना : यह तौ सहीबात हैं कि वक्त केँ संग बहोत कुछबदल जाता हैं।
तभीघऱ कि घंटी बजती हैं।
सपना : अभि इस वक्तकौन हौ सकता हैं ?
राजेश : मे जाके देखता हूं।
राजेश उठकर दरवाजा खोलता हैं तौ सामने उसके निखिल खड़ा होता हैं। दोनों वापस अंदरआते हैं। सपना भि निखिल कों देखउसे कुछ पूछने वाली थि, मगरफिन वोँ रुक जाती हें।
राजेश : जीजाजी, आजफिन कुछभूल गए क्याँ ? आपनेआने कि परेशानी क्यूं कि ? मुझे दफ़्तर बुला लेते। (मन मे - इसी बहाने रीमा केँ दर्शन होँ जाते। )
निखिल : अरे! नहि, मे दफ़्तर कां कुछ नहि भुला। मे दूसरे काम केँ सिलसिले मे आया हूं।
सपना भि निखिल सें कुछ पूछना चाहती थि, मगर निखिल सें बात नां करने केँ कारण वोँ उसेकुछ पूछ नहि पारही थि। तभी वोँ दूसरे तरीके सें अपना प्रश्न पूछती हैं।
सपना : राजेश, तुम्हारे जीजाजी कुछ परेशान दिखरहे हैं, क्याँ बात हैं ?
निखिल समझ जाता हैं कि दिदी उससे हि पूछरही हैं।
निखिल : राजेश, तुम् जल्द सें सजधजकर हौ जाओ। हमें अनुज केँ विद्यालय चलना हें।
सपना : अचानक सें अनुज केँ विद्यालय किसलिए जानां हैं ? (चिंतित होतेहुए पूछती हें। )
निखिल : दिदी, वोँ प्रिंसिपल कां मोबाइल आया थां। वोँ अनुज केँ बारे मे कुछबात करना चाहते हें, इसलिये मुझे विद्यालय बुलाया हैं।
सपना : क्याँ बात करना चाहते हें ?
निखिल : वोँ तोँ वहीं जाके हि पता चलेगा कि क्याँ बात हैं!
सपना : मे भि संग मे चलती हूं।
निखिल : दिदी, आप् चिंता मत करिए, मे औऱ राजेश मिलकर आते हें। वैसे भि पलक औऱ पायल भि विद्यालय सें आने वाले हैं तोँ घऱ पऱ कोई होना चाहिए।
सपना : ठीक हैं।
थोड़ी देरबाद निखिल औऱ राजेश दोनों अनुज केँ विद्यालय चले जाते हें।
दूसरी तरफ आखिरी केँ घऱ पर्र आखिरी औऱ सकीना (नौकरानी) दोनों मिलकर अवनी कों समझाने कि कोशिश कररहे थें, मगर अवनी किसी कि बात नहि मानरही थि।
आखिरी : बेटा, आप् तोँ अच्छे बच्चे हौ फिनऐसे जिद नहि करते हैं।
अवनी : मुझे माँ केँ पास जानां हैं। ( रोतेहुए.)
आखिरी : बेटा, ऐसे रोते नहि। मैंने कल तुम्हें पिताजी केँ पास लेँ जाऊंगी। अब जल्द सें रोनाबंद करो।
अवनी : मुझे मेरी माँ केँ पास जानां हैं। (जोर सें रोतेहुए.)
आखिरी : अच्छा, आपकी माँ केँ पास चलते हें, मगर पहले रोनाबंद करो।
आखिरी केँ यह बोलने पर्र अवनी रोनाकम कर देती हें। आखिरी फिन नीलेश कों मोबाइल लगाती हें औऱ उससे अवनी केँ बारे मे बात करती हें। नीलेश सें बात होने केँ बाद आखिरी औऱ अवनी दोनों हॉस्पिटल केँ लिए निकल जाते हें।
दूसरी तरफ निखिल औऱ राजेश अनुज केँ विद्यालय पहुंच जाते हैं औऱ प्रिंसिपल केँ दफ़्तर मे बैठकर उनसे बातचीत कररहे हें।
प्रिंसिपल : निखिल जी, आपको मैंने यहां इसलिये बुलाया हैं, क्योंकि येबात आपको जानना ज़रूरी हैं। यदि भविष्य मे दोबारा ऐसीकोई गलती याँ फिन कहेंऐसी कोई हरकत जिससे अनुज कों कुछ भि होता हैं तोँ उसकेलिए विद्यालय औऱ हॉस्टल प्रबंधन किसी भि प्रकार सें ज़िम्मेदार नहि होगा।
निखिल : आप् क्याँ कहना चाहते हें ? मे कुछसमझ नहि पाया। क्याँ अनुज नें कोई गलती कि याँ कुछ ग़लत किया हैं ?
प्रिंसिपल : जी, उसने विद्यालय औऱ हॉस्टल केँ नियमों कों तोड़ा हैं, उसने यहां सें भागने कि कोशिश कि थि। अनुज पढ़ने मे होशियार हैं औऱ ये अनुज कि पहली गलती थि, इसलिये उसे विद्यालय सें नहि निकाला जारहा हैं।
प्रिंसिपल कि बात सुनकर निखिल औऱ राजेश दोनों हैरान! रह जाते हें।
निखिल : क्याँ ? अनुज नें यहां सें भागने कि कोशिश कि।
प्रिंसिपल : जी, वोँ तोँ अच्छा हुआ कि एक् प्रोफेसर कि नज़रउस पऱ पड़ गई। वोँ हॉस्टल सें तोँ निकल हि गय़ा थां, मगर विद्यालय कैंपस सें निकलने सें पहलेउसे देख लिया।
निखिल : सर, मगर उसने यहां सें भागने कि कोशिश क्यूं कि ?
प्रिंसिपल : हमनें भि उसेबात कि पऱ उसने हमेंकुछ भि नहि बताया। एक् हफ़्ते सें उसके बर्ताव मे भि परिवर्तन आँ गय़ा हैं औऱ पढ़ाई पर्र भि ध्यान नहि देरहा हैं। सिर्फ यहां सें जाने कि मांगकर रहा हैं।
निखिल : क्याँ मे अनुज सें मिल सकता हूं ?
प्रिंसिपल : जी, मे भि ये चाहता हूं कि आप् एक् बारउसे मिलकर बातकर लें, इसलिये हि मैंने आपको यहां बुलाया थां।
फिन प्रिंसिपल नें अपनी टेबल पर्र रखीबेल बजाई। तभी एक् चपरासी अंदरआता हैं। प्रिंसिपल उसे अनुज कों बुलाकर लाने कों कहता हैं।
थोड़ी देरबाद चपरासी अनुज कों लेकर आँ जाता हें।
अनुज अपने पिताजी औऱ मामाजी कों वहां देखकर आश्चर्यचकित होने केँ संग हि खुश हौ जाता हें औऱ वो दौड़कर अपने बापू केँ पास जानां चाहता थां, मगर प्रिंसिपल सर केँ कारण वोँ ऐसा नहि कर पाया। वोँ अपने पिताजी औऱ मामाजी केँ पास जाकर चुपचाप खड़ा हौ जाता हें।
निखिल भि अनुज कों देख बहोत खुश होता हैं, क्योंकि कई महीनों सें वो अनुज सें नहि मिला थां याँ यूंकहे कि वोँ अपनी हि दुनिया मे व्यस्त थां। लेकिन ऐसा भि नहि थां कि वोँ अपने बच्चों सें प्रेम नहि करता थां। वोँ भि उनसे उतना हि प्रेम करता जितना अनीता याँ दूसरे लोग करते हैैं। यह निखिल कि बदनसीब थि कि वोँ अपने परिवार कों खुशी देने केँ चक्कर मे जुआ खेलने मे व्यस्त होँ गय़ा थां। कईबार ऐसा होता हैं कि बाप अपने बच्चों सें बहोत प्रेम करता हैं, मगरजता (दिखा) नहि पाता हैं।
प्रिंसीपल : अनुज, क्याँ तुम् जानते होँ कि हमनें आपके पिताजी कों यहां किसलिए बुलाया हें ?
अनुज : नहि, सर!
प्रिंसीपल : अनुज, अगर तुम् वोँ बात हमें नहि बताना चाहते हौ तौ अपने बापू कों बता सकते हौ, इसलिये आपके पिताजी कों यहां बुलाया हैं। हम् यही जानना चाहते हैं कि तुमने उसदिन ऐसा क्यूं किया ? औऱ तुम् यहां सें जाने कि जिद्द क्यूं रहे होँ ?
अनुजकुछ नहि कहता हैं तोँ निखिल उसे बोलता हैं।
निखिल : बेटा, जोँ भि बात हैं तुम् हमेंबता सकते हौ।
अनुजकुछ नहि कहता हैं औऱ अपनी गर्दन नीचे झुका लेता हैं।
प्रिंसिपल : मुझे लगता हैं कि अनुज वोँ बात हमें नहि बताना चाहता हैं। यदि वोँ नहि चाहता हैं तोँ कोईबात नहि हें।
निखिल : सर, क्याँ मे अनुज सें अकेले मे बातकर सकता हूं ?
प्रिंसिपल : बेशक, होँ सकता हैं कि वोँ अपनेमन कि बात आपकोबता दें!
फिन निखिल औऱ अनुज दोनों प्रिंसिपल केँ दफ़्तर सें बाहर् आँ जाते हें। जैसे हि दोनों बाहर् मैदान मे आते हें अनुज अपने पिताजी सें लिपटकर भावुक होकर रोने लगता हैं। अनुज कों ऐसा रोतादेख निखिल उसेचुप होने केँ लिए बोलता हैं, मगर अनुज रोयेजा रहा थां।
निखिल अपने बेटे केँ आसुंआे कों पोछता हैं।
निखिल : बेटा, ऐसे रोते नहि हैं औऱ तुम् रो क्यूं रहे हौ ?
अनुज : बापू, मुझे आप् सब कि यादआती हैं मेरा यहां पऱ मन नहि लगरहा हैं मुझे आपके, मां औऱ अवनी केँ पास रहना हैं। मुझे अपनेसंग घऱ लेँ चलो। ( रोतेहुए वो अपनीबात कहता हैं। )
अनुज कि बात सें निखिल समझ जाता हें कि उसने यहां सें भागने कि कोशिश क्यूं कि थि।
निखिल भि उसकी परेशानी समझता हैं, क्योंकि वो स्वयं भि परिवार सें दूर रहने कां दर्द समझता हैं। वो कभी भि नहि चाहता थां कि अनुज हॉस्टल मे नाँ रहें, मगर अभि केँ हालात कों देखते हुए वोँ कहता हैं।
निखिल : बेटा, बसयहसाल तुम् यहां पऱ रहकर पढ़ाई करलो, अगलेसाल सें तुम् हम् सभी केँ संग हि घऱ पर्र रहना।
अनुज : नहि पिताजी, मुझे तोँ अभि केँ अभि आपकेसंग चलना हें। (जिद्द करतेहुए)
निखिल : बेटा, कुछ महीनो कि बात हैं तुम्हारी परीक्षा ख़त्म होते हि मैंने स्वयं तुम्हें लेने आउंगा।
अनुज : नहि बापू, मुझेबस घऱ जानां हैं। (फिन सें रोने लगता हैं। )
निखिल : क्याँ बच्चों जैसेफिन सें रोनेलगे। अब तुम् बड़े होँ गए होँ ऐसे जिद्द नहि करते हैं। बसयहसाल तुम् यहां रहकर अपनी पढ़ाई पूरीकर लो। फिन दोबारा तुम्हें मे यहां नहि आने दुंगा। मे तुमसे वादा करता हूं।
अनुज : बापू, पक्का वाला प्रॉमिस।
निखिल : एकदम पक्का वाला प्रॉमिस, मगर तुम्हें भि मेरी एक् बात माननी पड़ेगी कि तुम् मन लगाकर पढ़ाई करोगें औऱ दोबारा कोईऐसी वैसी हरकत नहि करोगे। अब जल्द सें मुस्करा दो।
निखिल कि बात सें अनुज कों विश्वाश हौ जाता हैं कि उसेबस यहसाल किसीतरह यहां निकालना हैं, क्योंकि पिताजी अपना वादा हमेशा पूरा करते हैं। (आजतक निखिल नें अपने बच्चों सें जौ भि वादा किया थां उसे पूरा जरूर किया थां। )
अनुज : बापू, आप् दुनिया केँ सबसे अच्छे पिताजी हैं। ( मुसकुराते हुए अपने बापू सें फिन सें लिपट जाता हैं। )
निखिल भि उसकेसर पऱ हाथ फेरते हुएउसे लाड़ प्रेम करता हैं। फिन अनुज कि एक् बात सें निखिल फिन सें तकलीफ़ मे खड़ी हौ जाती हें। अनुज अपनी मां औऱ अवनी सें मिलना चाहता थां। निखिल कुछ सोचकर उससे कहता हैं कि "बेटा, अभि तौ तुम्हारी माँ औऱ अवनी नहि आँ सकते हैं, मगर जल्द हि तुमसे मिलवाने केँ उन्हें लेकर आऊंगा। "
अनुज : ठीक हैं, मगर आप् जल्द सें जल्द उन्हें लेकर आनां।
निखिल : अच्छा, चलो तुम् अपने मामाजी सें तौ मिले हि नहि उनसे भि मिललो।
फिन निखिल औऱ अनुज वापसआते हैं तोँ प्रिंसीपल केँ दफ़्तर केँ बाहर् हि राजेश मिल जाता हैं। अनुज अपने मामाजी सें मिलता हैं औऱ फिनसब प्रिंसिपल केँ दफ़्तर मे जाते हैं।
कुछदेर बाद अनुज अपनी कक्षा मे चला जाता हें।
प्रिंसीपल : निखिल जी, आपने अनुज सें बात कि उसने आपकोकुछ बताया कि उसने यहां सें भागने कि कोशिश क्यूं कि थि ?
निखिल : हां, बस उसका यहांमन नहि लगरहा थां, इसलिये उसने यहां सें भागने कि कोशिश कि थि।
प्रिंसिपल : यदि उसनेफिन सें भागने कि कोशिश कि तौ ?
निखिल : आप् उसकी चिंता नाँ करें, अब दोबारा वोँ ऐसाकुछ नहि करेगा। मेरी उससेबात हौ गई हैं।
प्रिंसिपल : यह तोँ अच्छी बात हैं।
निखिल : अच्छा, अब हम् जाने कि इजाज़त दे।
फिन निखिल औऱ राजेश दोनों घऱ केँ लिए निकल जाते हैं। रास्ते मे राजेश कों निखिल समझा देता हैं कि घऱ पर्र क्याँ कहना हें। वो नहि चाहता थां कि सपना दिदी अनुज कों लेकर परेशान हौ, क्योंकि अनीता कों लेकर वोँ पहले हि परेशान हैं।
yeh sacch h Addiction bhut buri baat h Mere ek male dost ko masturbation or sex kahaniyan kee lat lag gai h woh chhodna chahta h kai baar try kia pr bi chhod nahee pa raha Please madad
bhay.thora abi office k kaam main busy rahta h. iss liye sai say kahani pe dhyaan nahee de pa raha ho.halanki koshish karunga jald say jald nvaa update dene kee.
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Hello Everyone
We are Happy too present too you The annual kahani contest of Xforum "The Ultimate kahani Contest" (USC).
Jaisa की ap sabko maalum h abi pichle hafte he humne USC की announcement की h aur abi कुछ waqt pahle Rules and Queries thread bi open किया h aur Chit chat thread तो pahle से he Hind section में khulla h.
Iske baare main थोड़ा aapko btaadun yeh एक short kahani contest h jisme ap kissi bi prefix की short kahani post krr shaktey hu joo minimum 700 words and maximum 7000 words takk hu taqat h। iss liye mein aapko invitation deta hoon की ap is contest main apne khayaalon ko shabdon ka Rupp देकर ismein apni kahaniyan daalein jisko poora Xforum dekhega yeh एक bohot accha kadam hoga aapke aur aapki kahaniyan ke liye क्योंकि USC kee kahaniyan ko pure Xforum ke readers read kartey haen। aur joo readers likhna नहीं caahtey wo bi is contest main participate krr shaktey haen "Best Readers Award" ke liye aapko bas krna yeh hoga की contest main posted kahaniyan ko read karke unke Uppar apne views dene honge.
Winning Writer's ko well deserved Awards milenge, उसके aalwa aapko अपना thread apne section में sticky karne ka mouka bi milega Taaki aapka thread top पर rahe uss dauraan। iss liye aapsab ke liye yeh एक behtareen mouka h Xforum ke sabhi readers ke Uppar apni chaap chhodne kaa aur apni reach badhaane ka.
Entry thread 7th February ko open hoga matlab ap 7 February से kahani daalna suru krr shaktey haen aur wo thread 21st February takk open rahega is dauraan ap apni kahani daal shakte haen। iss liye ap abi से apni kahani likhna suru kardein तो aapke liye better rahega.
koy bi issue hu तो ap kissi bi staff member ko Message krr shaktey haen.
Regards : XForum Staff.
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Update 20
दुसरी तरफ आखिरी भि अवनी कों लेकर हॉस्पिटल पहुंच जाती हैं। अवनी अपनी मां अनीता केँ पास जाकर उन्हें देखती हैं औऱ उनसेबात करने केँ लिए उन्हें उठाने कि कोशिश करने लगती हें। बहोत बार कोशिशें करने केँ बाद भि जब अनीता नहि उठती हें तौ वो माँ सें चिपक जाती औऱ रोने लगती हें। आखिरी उसेचुप कराने केँ उसकेपास जाती हैं तौ वो आखिरी सें बोलती हैं कि "आंटी, मां उठ क्यूं नहि रही हैं ?" (रोतेहुए)
आखिरी : बेटा, अभि आपकी माँ बीमार हैं, इसलिये वो उठ नहि रही हें।
अवनी : मां अच्छी कब होगी ? (रोतेहुए)
आखिरी : जल्द हि ठीक हौ जायेगी। पहले आप् रोनाबंद करो औऱ यदि आप् ऐसे हि रोते रहेंगी तौ आपकी माँ मुझे डांटेगी।
अवनी : आंटी, मां आपको क्यूं डांटेगी ? ( रोतेहुए)
आखिरी : वोँ इसलिये कि उन्होंने मुझे आपकी देखभाल करने कां बोला हैं औऱ यदि आप् उन्हें रोतेहुए मिलेंगे तोँ वो मुझे डांटेगी, इसलिये कहरही हूं कि आपको रोना नहि चाहिए।
आखिरी कि बात सुनकर अवनी रोनाबंद कर देती हैं।
आखिरी अपने पर्स सें रूमाल निकालकर अवनी केँ आंसूसाफ करती हें।
अवनी : आंटी, जब मां उठेगी तौ मे माँ सें बोल दूंगी कि वो आपको नहि डांटे।
अवनी कि बात सुनकर आखिरी मुस्कुराते हुए अवनी कों अपने सीने सें लगा लेती हैं औऱ उसकेगाल पऱ एक् पप्पी दे देती हैं।
अवनी : आंटी, आपने मुझे पप्पी क्यूं दि ?
आखिरी : वोँ इसलिये कि आप् बहोत प्यारे औऱ अच्छे होँ।
अवनी भि आखिरी केँ गाल पर्र पप्पी देती हें औऱ बोलती हें, "आंटी, आप् भि बहोत अच्छे औऱ प्यारे हौ। "
नीलेश भि आखिरी औऱ अवनी कि बातें सुनकर मुस्कुराने लगता हैं।
थोड़ी देर वहां रुकने केँ बाद आखिरी औऱ अवनी वापसघऱ केँ निकल जाते हें। नीलेश वहीं रहता हैं, क्योंकि साम कों अनीता कि जांच रिपोर्ट आने वाली थि औऱ डाॅक्टर भि अनीता कों देखने आने वाले थें।
एक् वीरान सें पुराने घर-मकान केँ एक् कमरे मे एक् नकाबपोश व्यक्ति कुर्सी पऱ बैठाहुआ थां औऱ उसकेठीक सामने कि कुर्सी पर्र एक् महिला बैठी थि, मगर वो बेहोश थि औऱ उसकेहाथ वपैर रस्सी सें बंधेहुए थें। जैसे हि वो होश मे आती हैं स्वयं कों ऐसी हालत मे देखकर घबरा जाती हैं औऱ सामने बैठे नकाबपोश व्यक्ति सें बोलती हैं, "कौन होँ तुम् ? मुझेऐसे यहां क्यूं बांधरखा हैं ?"
नकाबपोश व्यक्ति अपनी स्थान सें उठता हैं उसके पीछे जाके उसकी गर्दन पऱ चाकू लगाता हैं औऱ किसी कि तरफ देखकर कहता हैं कि "तुमने जौ गुनाह किया हें, उसकी सज़ा तोँ तुम्हें औऱ तुम्हारे परिवार कों मिलकर हि रहेगी। " अपनीबात ख़त्म कर वोँ चाकू स्त्री कि गर्दन पऱ चलाने वाला हि होता हैं तभी किसी व्यक्ति कि बोलने कि आवाज़ आती हैं।
रुकजाओ!, उसने तुम्हारा क्याँ बिगाड़ा हैं?
आवाज़ सुनकर स्त्री भि उधर देखती हैं जिधर सें आवाज़ आई थि। जब वो व्यक्ति कों देखती हैं औऱ उससेकुछ कहने वाली हि होती हैं। उसके पहले हि वोँ नकाबपोश व्यक्ति उस व्यक्ति कों एक् बार देखता हैं औऱ वोँ चाकू महिला कि गर्दन पर्र चला देता हैं।
व्यक्ति जोर सें चिल्लाता हैं।
नीलेश एक् दम सें नींद सें जाग जाता हें औऱ अपने आपको हॉस्पिटल केँ रूम मे पाता हैं। वो बहोत हि घबराया हुआ थां उसका पूरा शरीर पसीने सें लथपथ होँ गय़ा थां।
थोड़ी देर तक वोँ वहीं बैठा रहता हैं औऱ बार-बार उसी ड्रीम्स केँ बारे मे सोचता रहता हैं। कुछदेर तक सोचते रहने केँ बाद स्वयं कों दिलासा देता हैं कि येबस एक् बुरा सपना थां औऱ स्वयं कि हालात ठीक करता हैं।
साम कों डॉक्टर एक् नर्स केँ संग अनीता कों देखने आते हैं।
कुछदेर तक अनीता कि हालत कां जायजा लेते हैं औऱ फिन जांच रिपोर्ट देखते हैं। वहीं निलेश मन मे सोचरहा थां कि डॉक्टर रिपोर्ट देखकर कोई अच्छी ख़बरदे।
डॉक्टर : निलेश जी, अच्छी ख़बर हैं, मगर ?
निलेश : मगर क्याँ ? डॉक्टर! ( थोड़ी सहमी आवाज़ मे डॉक्टर कि बात कों काटते हुएबोल देता हैं। )
डॉक्टर : निलेश जी, डरने वालीबात नहि हैं। मे बसयेकह रहा थां कि अनीता जी कि हालत मे सुधार तौ होँ रहा हैं, मगरयह कबहोश मे आएगी। ये कहना फिलहाल थोडा मुश्किल हैं।
डॉक्टर कि बात सुनकर निलेश केँ मन कों थोड़ी राहत मिलती हैं, मगर डॉक्टर कि यहबात कि "यहकबहोश मे आएगी। ये कहना फिलहाल थोडा मुश्किल हैं। " थोडा परेशान कर देती।
निलेश : सर, क्याँ अनीता कों कभीहोश आएगा याँ नहि?
(थोडा डरतेहुए अपनीबात कहता हैं। )
डॉक्टर : निलेश जी, इनकी रिपोर्ट देखकर मे इतना हि कह सकता हूं कि यह पहले सें बेहतर हें औऱ इनकी हालत मे सुधार भि तेजी सें हौ रहा हैं, मगर कोमा कां मरीजकब होश मे आएगायह बताना हमेशा हमारे लिए मुश्किल होता हैं। फिन भि यदि ईश्वर नें चाहा तोँ यह जल्द हि होश मे आँ सकती।
निलेश : जीसर।
डॉक्टर : एक् बात औऱ आप् चाहे तोँ अनीता जी कों यहां सें घऱ लेँ जा सकते हें, मगर आपको इनकी देखभाल केँ लिए एक् नर्स रखनी होगी।
निलेश : जीसर, मगर ?
डॉक्टर : मे जानता हूं कि आप् क्याँ कहनाचाह रहे हें। निलेश जी, हमने हमारी तरफ सें जितना हौ सकता थां वोँ सभीकुछ किया। अब जौ भि हैं वोँ ऊपर वाले केँ हाथ मे हैं, मे उम्मीद करता हूं कि अनीता जी जल्द हि कोमा सें बाहर् आँ जायेगी।
निलेश : जीसर।
फिन डॉक्टर औऱ नर्स वहां सें चले जाते हैं। निलेश वहीं बैठता हैं औऱ अनीता कों देखकर मन मे सोचता हैं कि अनीता कभीहोश! मे आएगी याँ नहि?
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