~~~~ जानकारी ( Information ) ~~~~ | incest desi sex story – New Episode
एपसोड केँ लिए पब्लिक परेशान होँ रही हैं भइया आपकी स्टोरी बहोत अच्छी हैं भागऐसे चलोमत करिए अच्छा नहि लगता बार-बार आपको बोलने एपसोड केँ लिए प्लीज भइया जल्दभाग दे दीजिए दे दीजिए भाग केँ लिए पब्लिक परेशान होँ रही हैं आपकायार??????????
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Update 16
आखिरी कुर्सी केँ पासआती हैं। फिन आखिरी अपने भैय्या सें कहती हैं कि मेरी सज़ा सुनने केँ बाद क्याँ पता आपको.। बोलकर वोँ नीलेश कि ऊपर हि बैठ जाती हैं। अब उनकी स्थिती कुछइस तरह कि होँ जाती हैं।
आखिरी नीलेश केँ होंठ पर्र अपने होंठरख कर धीरे धीरे चूमने लगती हें औऱ नीलेश भि उसकासंग देने लगता हैं। दोनों हि होंठो कों पहले बहोत प्रेम सें चूसते हैं औऱ फिन बहोत हि उत्तेजक तरीके सें चूसने औऱ काटने लगते, मानो जैसे एक् दूसरे केँ होंठो कों खा हि जायेंगे।
नीलेश अपने दोनों हाथ आखिरी केँ चूतड़ों पऱ लेँ जाकरउसे सहलाने लगता हैं। नीलेश कां एक् हाथ आखिरी अपने चूतड़ सें हटाकर अपने एक् उभार (मम्मों) पर्र रख देती हैं। नीलेश भि आखिरी कि ख़्वाहिश समझ जाता हैं औऱ उसके उभार कों दबाने औऱ मसलने लगता हैं। कुछदेर दोनों इसीतरह एक् दूसरे कों प्रेम करते रहते हैं।
जैसे हि आखिरी कों नीलेश केँ लन्ड केँ कड़क होने कां एहसास अपने बुर पऱ हुआ। वोँ अपनीकमर हिलाने लगती हैं जिससे नीलेश कां लन्ड आखिरी कि बुर पऱ रगड़खा रहा थां, मगर दोनों नें अभि कपड़े पहनरखे थें।
नीलेश धीरे-धीरे सें आखिरी कां गाऊन उतार देता हैं औऱ उसकी ब्रा भि खोल देता हैं। आखिरी मात्र पैंटी पहने थि, जबकि नीलेश नें पूरे कपड़े पहनरखे थें।
नीलेश उसके एक् उभार कों मुंह मे लेकर चूसने लगता हैं औऱ एक् हाथ सें दूसरे उभार कों सहलारहा थां औऱ दूसरे हाथ सें उसका एक् चूतड़ सहलारहा थां।
आखिरी भि अपने एक् हाथ सें उसकेसिर कों पकड़कर अपने उभार पर्र दबारही थि।
लगभगदस मिनट तक आखिरी केँ स्तनों कों चूसने केँ बाद आखिरी कों वोँ वहीं डायनिंग टेबल पऱ लेटा देता हैं औऱ उसकी पैंटी भि निकाल देता हैं औऱ उसकी बुर पर्र मुंह रखकरउसे चाटने औऱ चूसने लगता हैं। आखिरी कों भि नीलेश केँ द्वारा अपनी बुर चूसने सें मज़ाआने लगा औऱ उसकेमुख सें सिसकारियां निकलने लगीं।
कुछ देर कि चुसाई सें हि आखिरी उत्तेजित होने लगती हैं औऱ नीलेश कों उसकी चुदाई करने कां कहने लगती हैं।
नीलेश भि अब चुदाई करने केँ मूड मे आँ गय़ा। उसने अपनी पैन्ट अंडरवियर केँ सहित नीचेकर दि औऱ अपने लन्ड कों हाथ मे पकड़कर उसे बुर केँ छेद पऱ टिकाकर एक् धक्का लगा देता हैं।
नीलेश आहिस्ता धक्के लगाने लगा औऱ अपनी बेहन कि चुदाई करनेलगा। आखिरी भि अपने भइया कां लन्ड अपनी बुर केँ अंदर तक महसूस कररही थि औऱ उत्तेजनावश अपने उभार कों दबाने औऱ मसलने लगी।
नीलेश अपने धक्कों कि गति बढ़ा देता हैं औऱ अपनी बेहन कि एक् दमदार चुदाई करता हैं। इससे आखिरी कि बुर अपना पानी छोड़ने लगी औऱ जब नीलेश कों आखिरी कि बुर कां पानी अपने लन्ड पऱ महसूस होता हैं तोँ वो औऱ जोर सें धक्के लगाने लगा। लगभग पांच सें सात मिनटबाद नीलेश केँ लन्ड नें भि जवाबदे दिया औऱ सारा वीर्य बुर मे हि डाल दिया।
दोनों भइया-बेहन इस चुदाई सें पूरे पसीने सें लथपथ हौ गए।
नीलेश वापस कुर्सी पर्र बैठ जाता हैं औऱ आखिरी वहीं डायनिंग टेबल पऱ लेटी रहती हैं। कुछदेर तक दोनों ऐसे हि बैठे औऱ लेटे रहते हैं।
फिन आखिरी अपनी स्थान पऱ हि बैठ जाती हैं औऱ नीलेश कों देखकर कहती हैं कि भैय्या आपकी सज़ाये हैं कि अब आप् मेरेसंग सेक्स वाला प्रेम कभी नहि कर सकते हैं।
आखिरी कि बात सुनकर नीलेश आश्चर्य सें उसे देखने लगता हैं। वोँ सोच भि नहि सकता थां कि आखिरी उसेये सज़ा देगी।
नीलेश : यदि तुम्हें मुझेयही सज़ा देनी थि तोँ तुमने अभि मेरेसंग फिनयह सभी क्यूं किया ?
आखिरी : वोँ तौ आपको मेरीबात मानने कां ईनाम दिया।
नीलेश : पायल, यह तोँ बहोत बड़ी सज़ा हैं।
आखिरी : भैय्या, यह तोँ आपको मेरेसंग वोँ सभी करने सें पहले सोचना चाहिए थां। अब आपकीयही सज़ा हैं।
नीलेश : पायल, कुछ तोँ रहमकरो अपने भइया पर्र, पहले तुमने हि मुझे उसकेलिए उकसाया थां औऱ अबमुझ पर्र बंदिशें लगारही हौ।
आखिरी : भैय्या, मे स्वयं हि आप् पर्र पाबंदी नहि लगाना चाहती हूं, मगर आपको सज़ा देना भि ज़रूरी हैं। वोँ इसलिये पहले मेरेसंग वोँ सभी किया औऱ बाद मे मुझे पूरादिन इंतजार भि करवाया।
नीलेश : पायल, मगर यह सज़ा तोँ इतनी सि बात केँ लिए बहोत ज़्यादा हैं, कुछ तौ रहमकरो।
आखिरी : ठीक हैं, मे आपकी सज़ा कों बदल सकती हूं, मगरयह नई सज़ा आपको माननी हि पड़ेगी। आपको मेरीशपथ हैं कि आप् मेरीनई सज़ा कों मानेंगे।
नीलेश कुछदेर सोचता हैं।
आखिरी : क्याँ हुआ भैय्या आप् किससोच मे पड़गए ?
नीलेश : ठीक हैं।
आखिरी : भैय्या, आपकीनई सज़ाये हैं कि आप् मेरेसंग सेक्स वाला प्रेम बिना मेरी मर्जी केँ नहि कर सकते हें औऱ यदि आपनेकुछ भि मेरी मर्जी केँ बिना किया तोँ मे आपसेकभी भि बात नहि करूंगी। (एक् कातिलाना मुस्कान केँ संग)
आखिरी केँ जाल मे नीलेश पूरीतरह सें फंस गय़ा थां औऱ अब वोँ आखिरी कों इस सज़ा केँ लिएमना भि नहि कर सकता हैं, क्योंकि आखिरी नें उसे अपनीशपथ दि थि।
नीलेश : पायल, तुमने जोँ सज़ा सुनाई हैं वोँ भि मुझे मंजूर नहि, मगर तुम्हारी शपथ कि वजह सें इसमान रहा हूं।
आखिरी : भैय्या, मे यहबात जानती थि कि यह सज़ा भि आप् नहि मानोगे, इसलिये हि मैंने आपकोशपथ दि। (एक् मुस्कान केँ संग)
नीलेश : यह ग़लतबात हैं। (थोडा नाराज़गी जताते हुए। )
आखिरी : भैय्या, नाराज़ होने सें कुछ नहि होने वाला। अब आप् जाइए अपनेरूम मे औऱ सो जाएं। शुभ रात्रि!
नीलेश : मेरी प्यारी बेहन, मे तुम्हें अभि औऱ प्रेम करना चाहता हूं।
आखिरी : माफ करना, मगर अभि आपकेलिए कुछ भि नहि कर सकती हूं।
नीलेश : बस, आज एक् बारफिन मे तुम्हें कभी भि इसकेलिए नहि कहूंगा। जब तुम् कहोगी तब हि तुम्हें प्रेम करूंगा औऱ वैसे भि हमारे पासआज कि रात हैं। कल तौ वैभव भि आँ जायेगा।
आखिरी : भैय्या, आपकेलिए तौ जान भि हाजिर हैं, मगर अभि मे ये नहि कर सकती हूं।
नीलेश : ठीक हैं, जैसी तुम्हारी मर्जी, मेरी प्यारी बेहन!
नीलेश कुर्सी सें उठकर अपनी पैंटसही करता हैं औऱ आखिरी केँ पास जाता हैं। उसकेगाल पऱ चूमकर उसेशुभ रात्रि! कहता हैं औऱ अपनेरूम मे जाने लगता हैं।
आखिरी उसे रोकती हैं औऱ उसकेपास जाकर अपने होंठो कों नीलेश केँ होंठो सें भिड़ा देती हैं। दोनों जी भरकर पागलों कि तरह एक् दूसरे केँ होंठ चूसने लगते हैं।
आखिरी चुम्बन केँ संग-संग नीलेश केँ कपड़े भि उतारने लगती हैं। कुछ हि देर मे नीलेश भि पूरा नंगा हौ जाता हैं।
नीलेश केँ नंगा होने केँ बाद आखिरी उसके पूरे जिस्म पऱ चूमने लगती। कभी गले पर्र, कभी कंधे पर्र, कभी सीने पर्र औऱ हर स्थान जहां वोँ खड़े-खड़े चूम सकती थि। लगभगदस सें पंद्रह मिनट तक दोनों सिर्फ एक् दूसरे केँ जिस्म कों चूमते औऱ सहलाते रहे।
फिन नीलेश नें आखिरी कों गोद मे उठाया औऱ अपनेरूम मे जानेलगा तौ आखिरी नें धीरे-धीरे सें उसकेकान मे कुछकहा औऱ मुस्कुराई। नीलेश नें भि उसकीबात मानकर उसेहॉल मे लेँ आया।
कथा कां कुछ किस्सा नीलेश कि जुबानी-
हॉल मे आते हि मे पायल (आखिरी) कों सोफे पऱ लेकरबैठ गय़ा औऱ फिन सें उसके होंठो औऱ जीभ कां रसपान करनेलगे। हम् दोनों होंठो औऱ जीभ कों अच्छी तरह सें बारी-बारी सें चूसरहे थें।
मुझे तोँ अपनी बेहन केँ होंठो कां रस पीने बहोत हि मजा आँ रहा थां। पायल (आखिरी) भि मेरा पूरासंग देरही थि। मैंने उसके एक् बोबे कों पकड़ा औऱ जोर सें दबाने लगा।
पायल (आखिरी) केँ बूब्स कों दबाना, मसलना औऱ चूसना हि मेरी सबसे बड़ी ख्वाहिश थि। मे हमेशा इन्हें अपने हाथों मे पकड़ना चाहता थां औऱ वोँ दिनकल मिल हि गय़ा। कलजब मैंने पहलीबार पायल (आखिरी) केँ बूब्स कों अपने हाथों मे भरा तौ मुझे तोँ जन्नत केँ जैसा महसूस हुआ थां औऱ मेरी मनचाही मुराद भि पूरी हौ गई थि।
मेरे द्वारा पायल (आखिरी) केँ बोबे दबाने सें उसे दर्द होनेलगा पऱ वोँ मेरे होंठो मे अपने होंठ होने सें कुछकह नहि पाई, मगर वोँ मेरी आंखों मे देखरही थि औऱ जैसे मुझे रुकने कां कहरही थि।
मैंने भि उसकीबात मानना हि उचित समझा नहि तोँ फिन सें क्रोध नाँ होँ जाएं, इसलिये मैंने उसके होंठो कों आजादकर दिया औऱ बोबे कों भि धीरे-धीरे सें दबाने औऱ मसलने लगा।
मेरे होंठो सें अपने होंठअलग होते हि पायल(आखिरी) बोलि, " भैय्या, मैंने आपसेकहा थां कि बिना मेरी मर्जी केँ आप् कुछ भि नहि कर सकते हैं, मगरफिन भि आप् अपनी मर्जी कररहे हें। "
वोँ मुझेयाद हि नहि रहा।
"ठीक हैं, मगर दोबारा ऐसा नहि होना चाहिए। आपकोकुछ भि करना हैं तोँ प्रेम सें कीजिए। "
"मे आपकी बेहन हूं, कोई रांड नहि हूं। "
मुझे उसकीबात सहीलगी। वोँ मेरी प्यारी बेहन हैं औऱ मे उसकेसंग एक् रंडी जैसा बर्ताव कररहा थां। कल भि वोँ इसलिये हि मुझ पर्र क्रोध हुईँ थि। बिना उसके बारे मे सोचे केवल अपने हि मर्जी कां मालिक बना बैठा हूं।
" क्याँ सोचने लगे भैय्या ?"
तुम् ठीक कहती हौ, अब बड़े प्रेम सें सभी करूंगा औऱ जैसा तुम् चाहोगी वैसा हि करूंगा।
"मेरे प्यारे भैय्या, चलोअब अपनी बेहन कों प्रेम करो। "
जोँ हुकुम मेरी बहना!
मैंने फिनउसे सोफे पर्र लेकरलेट गय़ा जिसे वोँ मेरे नीचे औऱ मे उसकेऊपर आँ गय़ा औऱ उसके होंठो कों चूसने लगा। कुछ देर होंठो कों चूसने केँ बाद मे उसके बूब्स कों चूसने लगा। वोँ भि मेरेसिर मे अपने हाथों कों फिराने लगी।
मे उसके बूब्स कों चूसते वक्त उसके निप्पल कों अपने दातों सें दबा भि देता हूं जिसे उसके मुंह सें एक् दर्दभरी "अहह" निकल जाती हैं।
अपनी बेहन केँ बूब्स कों चूसने केँ संगअब एक् हाथ मैंने उसकी बुर पर्र रखा औऱ आरामसे उसको सहलाने लगा। जिससे वोँ बिन पानी मछली कि तरह तड़फाने लगीं औऱ उसके मुंह सें सिसकारियां निकलने लगीं।
मे बड़े प्रेम सें उसके बूब्स कों चूसने मे व्यस्त थां। मेरामन हि नहि कररहा थां कि उनको छोङू, मगर मन मारकर मुझे उन्हें छोड़ना पड़ा।
फिन मैंने पायल (आखिरी) 69 कि अवस्था मे आने कों कहा औऱ फिन मैंने अपनीजीभ सें बुर चाटने औऱ चूसने लगा औऱ बीचबीच मे उसके गान्ड केँ छेद पर्र भि जीभ फिरा देता। कुछ देरबाद पायल (आखिरी) नें भि मेरा लन्ड मुंह मे लेकर चूसने लगी। हम् दोनों एक् दूसरे केँ गुप्तांग कों चूसने लगे।
लगभग पांच मिनट तक चुसाई केँ बाद, मे सोफे पर्र सीधा बैठा औऱ पायल (आखिरी) कों लन्ड चूसने कों कहा तोँ उसने भि मेरीबात मानते हुए, एक् हाथ सें लन्ड कों पकड़उसे मुंह मे लेकर बड़े प्रेम सें चूसने लगी।
लगभग एक् मिनट कि चुसाई केँ बादउसे गोद मे बैठने कों कहा। जब वोँ मेरीगोद मे बैठने लगी तौ मैंने अपने लन्ड कों हाथ मे लिया औऱ उसके बुर केँ छेद पऱ लगा दिया। जैसे हि पायल (आखिरी) मेरीगोद मे बैठी, मेरा पूरा लन्ड उसकी बुर मे समा गय़ा।
वोँ भि मुझ पऱ थोडा सां झुकी औऱ मेरे होंठों कों चूसने लगी। मे भि अपनेहाथ उसके जिस्म पऱ फिराने लगा औऱ वोँ मेरे लन्ड पर्र ऊपर नीचे होनेलगी। हम् दोनों भइया बेहन कां चुदाई कां दूसरा दौर शुरुआत हौ गय़ा।
कुछ मिनटइसी अवस्था मे पायल कों चोदने केँ बाद मैंने उसेकमर मे दोनों हाथ डालकर जकड़ा औऱ उसेऐसी अवस्था मे लेकर सोफे पऱ लेट गय़ा। मेरेऐसा करने सें अब वोँ मेरेऊपर आँ गई औऱ मे उसके नीचे, इस दौरान मेरा लन्ड उसकी बुर मे हि थां। जब मे सोफे पर्र लेटा तोँ मैंने अपनेहाथ उसकीकमर सें हटाकर उसके चूतड़ों कों पकड़ा औऱ पायल (आखिरी) कों ऊपर नीचे करके तेजी सें चोदने लगा।
मेरे तेजी सें चोदने सें पायल (आखिरी) भि जोरजोर सें सिसकियां लेनेलगी औऱ गाली भि देनेलगी।
" ज़ोर औऱ ज़ोर सें आआआआअह्हह्हह….ईईईईईईई…ओह्ह्ह्हह्ह…अई.अई.अई….अई"
" जोर सें चोद बहनचोद!"
"आआआआअह्हह्हह जोर सें चोद बेहन केँ लौड़े!"
"बहनचोद!"
पायल (आखिरी) कि ख़्वाहिश कों पूरी करने केँ लिए औऱ जोर सें चोदने लगा औऱ कहनेलगा।
हां, मेरी बेहन लेँ अपने भइया कां लन्ड अपनी बुर मे, क्याँ पताकब यह लन्ड फिन सें तेरी बुर मे जायेगा ?
अपने भइया कां लन्ड अपनी बुर मे लेकर कैसालगा रहा हैं ?
"भैय्या, मन करता हैं कि आप् मुझेइसी तरह चोदते रहे हें। "
अच्छा!, पायल मुझे तुम्हारी गांड़ भि मारनी हैं।
"ठीक हैं, पहले मेरी बुर कि गर्मी कों शांत करिए। "
तौ यहलो कहकर औऱ जोर सें उसे चोदने लगा। लगभगदो सें तीन मिनट मे हि पायल (आखिरी) कि बुर अपनारज (कामरस) छोड़ने लगी। जब पायल (आखिरी) कि बुर अपनाकाम कररही थि तौ मैंने अपनी एक् ऊंगली कों उसके गान्ड केँ छेद मे डालकर अंदर बाहर् कि पायल (आखिरी) भि समझ गई कि अब उसकी गांड़ कि बारी हैं। वोँ मुझेदेख कर मुस्कुराई पऱ कुछकहा नहि।
फिन मैंने बुर सें लन्ड बाहर् निकाला औऱ अपनेहाथ मे पकड़कर पायल (आखिरी) कि गांड़ केँ सुराख पर्र लगाकर एक् धक्का मारा। मेरा लन्ड पहले सें पायल (आखिरी) केँ कामरस मे भीगाहुआ थां तौ पूरा लन्ड उसकी गांड़ मे चला गय़ा।
मैंने पायल (आखिरी) केँ चेहरे कों देखा तौ वो मुझेदेख मुस्कुरा रही थि। उसकी मुस्कान सें मे भि खुश होँ गय़ा औऱ उसकी गांड़ मारने लगा। मेरा लन्ड उसकी गांड़ मे किसी इंजन केँ पिस्टन कि भांति अंदर बाहर् हौ रहा थां।
लगभग पांच मिनट मे हि मेरी हालात पतली होँ गई औऱ मेरे लन्ड नें भि अपने हथियार डालदिए। अपने अंडकोष मे भरा सारा वीर्य बाहर् निकाला दिया। कल रात कि तरहआज भि मेरी बेहन कि गांड़ मेरे वीर्य सें लबालब भर गई थि।
मैंने अपना लन्ड बाहर् नहि निकाला थां औऱ उसी अवस्था मे अपनी बेहन कों अपनी बांहों मे भर लिया।
पायल, तुमने आज भि मुझेखुश कर दिया। अब नाँ जानेकब यहसभी फिन दोबारा करने कों मिलेगा ?
"भैय्या, आप् चिंता क्यूं करते हैं, आपकी बेहन जल्द हि कोई नाँ कोई तरीका निकाल लेगी। फिन आप् मुझेजी भरकर प्रेम करना, मगर मेरी मर्जी सें। " (मुस्कराते हुए.। )
पायल, अब तोँ तुमसे दूर जाने कां मन हि नहि होँ रहा हैं।
"यदि आप् मेरेपास रहेंगे तोँ भाभी कां क्याँ होगा ?" ( मजाकिया अंदाज मे)
अच्छा!, भाभी कि बड़ी फ़िक्र हौ रही हैं।
"जब भैय्या कि फ़िक्र कर सकती हूं तोँ भाभी कि क्यूं नहि करूं। "
(मुस्कान केँ संग)
"भैय्या, मेरेसंग आपको आनंदआया याँ भाभी केँ संग आनंदआता हैं। " (मजाकिया अंदाज मे)
सपना भि मुझे तुम्हारे जैसा हि मज़ा देती हैं औऱ कुछ अधिक हि, मगरअब पहले जैसीबात नहि रही। वोँ अबबस परिवार कि देखभाल मे हि व्यस्त रहती हैं औऱ कभी-कभार हि मेरेसंग सेक्स करती हें।
"पहले जैसीबात नहि रही सें आपका क्याँ मतलब हैं भैय्या ?"
तुम्हारी भाभी एक् मार्डन ख्यालों वाली लड़की थि। उसे अलग-अलग तरह सें सेक्स करना मनपसंद थां, मगर बच्चों केँ होने केँ बाद वोँ उनकी परवरिश मे हि अपना ध्यान देनेलगी।
"अच्छा!, यानी कि मेरी भाभी नें भि आपको भरपूर प्रेम दिया। "
हां, यह तौ सच हैं। मे खुशनसीब भि हूं जौ सपना जैसी इतनी अच्छी औऱ प्रेम करने वाली पत्नि मुझे मिली, इसलिये हि मे सपना पर्र कभी भि सेक्स करने केँ लिए दबाव नहि बनाता हूं, जब उसकी मर्जी होती हैं वोँ स्वयं हि मेरेसंग सेक्स कर लेती हैं।
"भैय्या, भाभी कों किस प्रकार कां सेक्स करना अच्छा लगता हैं ?"
तुम्हारी भाभी कों मेरेसंग रफ सेक्स करना अच्छा लगता हैं।
"तभी आप् मेरेसंग भि रफ सेक्स करने लगते हें। " (मजाकिया अंदाज मे)
पायल, तुम्हारी मजाक करने कि आदत अभि भि कायम हैं।
कुछदेर बात करने केँ बाद पायल बोलि, "भैय्या, अब हम् रूम मे चलकर सोते हैं, यहांऐसे सो नहि सकते हैं। "
मैंने कहा, "ठीक हैं। "
पायल मेरेऊपर सें उठी तोँ मेरा लन्ड जौ उसकी गांड़ मे थां। बाहर् आँ गय़ा औऱ उस पऱ मेरा वीर्य भि लगा थां।
मेरा लन्ड देख पायल बोलीं, "भैय्या, आप् मेरेरूम मे जाइए औऱ अपने आप् कों साफ कीजिए। मे आती हूं। "
पायल, अब इतनीरात कों क्याँ काम हैं तुम्हें ?
"भैय्या, हमारे कपड़े डायनिंग रूम मे हि पड़े हैं, यदि सुभह दक्ष जल्दउठ गय़ा औऱ उसनेदेख लिया तोँ।
फिन मे पायल (आखिरी) केँ रूम मे गय़ा औऱ बाथरूम मे जाकर अपने लन्ड पर्र लगे वीर्य कों साफ किया। फिन बिस्तर पऱ आकरलेट गय़ा।
थोड़ी देर मे पायल (आखिरी) भि रूम मे आँ गई औऱ सीधे बाथरूम मे चली गई।
बाथरूम सें आकर मुझसे लिपट गई औऱ मेरे होंठों कों चूमा औऱ "शुभ रात्रि!" बोलकर सोनेलगी।
मैंने भि उसके माथे पर्र चूमकर उसेशुभ रात्रि! कहा।
फिन क्याँ पता हम् कब रात्रि केँ आगोश मे समागए।
कलरात कों नेट नहि चलरहा थां, इसलिये एपसोड नहि दिया औऱ gif image लगाना भि बाकी थां।
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दोस्तों, दोदिन सें शॉर्ट कहानी लिखरहा थां, इसलिये इसका एपसोड नहि लिख पाया। कल रात तक भाग देने कि कोशिश करूंगा। तब तक आप् मेरी xforum-ultimate-kahani-contest-2020 केँ लिए लिखी किस्सा "वोँ मुुलाकात" पड़ सकते हैं।
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