~~~~ जानकारी ( Information ) ~~~~ | incest desi sex story – New Episode
Update 17
अगलेदिन सुभह आखिरी अपनेतय वक़्त यानी घड़ी केँ अलार्म बजने सें उठ जाती हें औऱ एक् बार नीलेश कि तरफ देखती हैं जोँ अपनी हि स्थान पर्र लेटा थां। उसकी भि नींद अलार्म बजने सें खुल गई थि।
आखिरी उठकर बाथरूम मे चली जाती हैं औऱ थोड़ी देरबाद आती हैं। रूम मे आकर वोँ एक् गाऊन अपने शरीर पर्र डाल लेती हैं। नीलेश कि तरफ देखती हैं औऱ बोलती हैं कि "भैय्या, आप् भि अपने कपड़े पहनकर अपने कमरे मे जाएं। तब तक मे दक्ष कों उठाकर औऱ उसके विद्यालय जाने कि तैयारी करती हूं। "
फिनउसे कुछयाद आता हैं तोँ वो अपनी अलमारी सें एक् दवाई निकालती हें। फिन वो दक्ष कों उठाकर रसोई मे चली जाती हैं औऱ वोँ दवाई भि लें लेती हैं औऱ अपनेकाम मे लग जाती हैं।
आधे घंटेबाद दक्ष औऱ नीलेश दोनों हि अपनेरूम सें बाहर् आँ जाते हें। आखिरी अपने बेटे कों ब्रेकफास्ट औऱ दूध लाकर देती हैं, फिन अपने औऱ नीलेश केँ लिएगरम चाय बनाती हें।
थोड़ी देरबाद नीलेश औऱ आखिरी हॉल मे बैठकर गरमचाय पीरहे थें। तब नीलेश आखिरी सें पूछता हैं कि "पायल, तुम्हारी तबीयत तोँ ठीक हैं नाँ। "
आखिरी : भैय्या, मुझेकुछ नहि हुआ हैं औऱ आप् ऐसा क्यूं पूछरहे हें ?
नीलेश : वोँ मैंने तुम्हें अलमारी सें कोई दवाई कि गोली निकालते हुए देखा थां, इसलिये पूछरहा हूं। "
आखिरी : भैय्या, वोँ तौ आपके कारण मुझे लेनी पड़ी हैं।
(हंसते हुए.)
नीलेश : मेरे कारण ? (हैरान! होकर)
आखिरी : वोँ.।
तभी दक्ष वहां आँ जाता हैं, इसलिये आखिरी बोलते हुएरुक जाती हैं।
दक्ष : माँ, आज मेरी तबियत कुछठीक नहि लगरही हें।
आखिरी उठकर दक्ष कां माथे पऱ हाथ रखकर देखती हैं।
आखिरी : बेटा, तुम्हें तौ हल्का बुखार हैं। अपनेरूम मे जाकर आरामकरो, फिन थोड़ी देर सें डॉक्टर केँ पास चलेंगे।
दक्ष : जी।
दक्ष अपनेरूम मे चला जाता हैं। नीलेश औऱ आखिरी अपनीगरम चाय समाप्त करते हें।
नीलेश : पायल, तुमने बताया नहि।
आखिरी : भैय्या, आप् भि नाँ, वोँ गर्भ निरोधक गोली थि।
आखिरी कि बात सुनकर नीलेश कों रात कि बातयाद आँ जाती हैं कि उसने आखिरी कों डायनिंग टेबल पर्र चोदते वक़्त अपना वीर्य अंदर हि छोड़ दिया थां।
नीलेश : माफ करना, मुझेउस टाइम ध्यान हि नहि रहा थां।
आखिरी : यहकोई नईबात नहि, ऐसा अक्सर होँ जाता हैं।
अब जाकरनहा लीजिए तब तक मे भि नहाकर आती हूं।
नीलेश : तोँ ऐसा करते हें संग मे हि नहा लेते हें। (एक् मुस्कान केँ संग)
आखिरी : जी, नहि।
आखिरी गरमचाय केँ कप लेकर रसोई मे आती हैं औऱ जैसे हि पलटती हैं। नीलेश उसके सामने खड़ा थां, नीलेश उसे अपनी बाहों मे लेकर होंठो कों चूसने लगता हैं संग हि उसके चूतड़ भि सहलारहा थां। आखिरी उसे रोकती हैं, मगर नीलेश अपनेकाम मे लगा रहता हैं।
थोड़ी देर मे आखिरी भि उसकासंग देने लगती हैं। थोड़ी देर चूमा चाटी करने केँ बाद नीलेश उसे घुमा देता हैं औऱ उसे झुकाता हैं।
आखिरी : भैय्या, यहां नहि कोई आँ जायेगा।
नीलेश : कोई नहि आएगा, बच्चे तौ रूम मे हैं।
आखिरी भि अपने दोनोहाथ रसोई स्टैंड पऱ रखझुक जाती हें। नीलेश अपने लोअर मे सें लन्ड बाहर् निकाल कर आखिरी केँ गाऊन कों ऊपरकमर तक कर देता हैं औऱ अपना लन्ड बुर पऱ लगाकर धक्का देता। फिन दोनों भइया-बेहन कि रसोई मे हि चुदाई शुरुआत हौ जाती हें। लगभगदस मिनट तक दोनों कि चुदाई चली। अब नीलेश झड़ने वाला थां, मगर वोँ बुर मे नहि झड़ सकता थां, इसलिये आखिरी कों बोलता हैं।
नीलेश : पायल, मे झड़ने वाला हूं, अपना वीर्य कहां निकालू ?
आखिरी झट सें घुटनों केँ बलबैठ जाती हैं औऱ नीलेश केँ लन्ड कों मुंह मे लेकर चूसने लगती हें, कुछ हि समय मे आखिरी केँ मुंह कि गर्मी पाकर नीलेश कां लन्ड ठंडा होँ जाता हैं औऱ सारा वीर्य आखिरी केँ मुंह मे उगल देता हैं।
आखिरी भि नीलेश कां वीर्य कों गटक जाती हैं औऱ नीलेश सें बोलती हैं।
आखिरी : आप् अपनीमन कि हि करते हें। (एक् कातिलाना मुस्कान केँ संग)
ऐसी बात हैं तौ फिन एक् मन कि ख़्वाहिश औऱ पूरीकर लेता हूं बोलकर नीलेश उसे खड़ा करता हैं औऱ अपनीगोद मे उठाकर आखिरी केँ रूम मे चला जाता हैं औऱ फिन बाथरूम मे जाकर उसका गाउन उतार देता हैं औऱ अपनीटी शर्ट, लोअर औऱ अंडरवियर भि उतारकर दोनों जन्मजात नंगे होँ जाते हें।
नीलेश शॉवर चालूकर देता हैं औऱ दोनों फिन सें एक्-दूसरे केँ जिस्म कों सहलाते हुए चूमा चाटी करते हैं। फिन दोनों एक्-दूसरे कों नहलाकर बाहर् आते हें।
आखिरी रेडी होती हें। तब तक नीलेश वहीं टॉवेल लपटेकर बैठा रहता हैं। फिन आखिरी कों एक् चुम्बन देकर अपनेरुम मे चला जाता हैं।
साढ़े आठबजे सकीना (नौकरानी) भि आँ जाती हैं। सब केँ लिए ब्रेकफास्ट सजधजकर करती हें।
सब ब्रेकफास्ट करते हें, सिवाय दक्ष केँ वोँ अभि आरामकर रहा थां। ब्रेकफास्ट करने केँ बाद नीलेश हॉस्पिटल चला जाता हैं, आखिरी भि दक्ष कों लेकर अपने फैमिली डॉक्टर केँ पासचली जाती हैं। अवनी औऱ सकीना टेलीविज़न देखते हैं।
अबकुछ दूसरी तरफ भि देख लेते हें कि वहां क्याँ चलरहा हैं।
सपना केँ घऱ पर्र सबलोग हॉल मे बैठे बातें कररहे थें। मतलब कि निखिल, सपना औऱ राजेश।
सपना : राजेश, आज खाने मे क्याँ खानां मनपसंद करोगे ?
राजेश : दिदी, यदि आप् रोज मेरी पसन्द कां खानां बनाकर खिलाएंगी तौ शायद मैंने यहांरुक केँ गलतीकर दि।
सपना : वोँ क्यूं भला ?
राजेश : दिदी, वोँ इसलिये कि रोज मेरी मनपसंद कां खानां खाकर कहीं मेरीआदत नां बिगड़ जाए। फिन बाद मे मुझेयह सभी कहां मिलने वालाफिन तोँ वहीं साधारण भोजन करना पड़ेगा।
सपना : अच्छा, तौ यहबात हैं तोँ फिन जल्द सें कोई अच्छी लड़की सें विवाह करलो। जौ तुम्हें रोज तुम्हारी पसन्द कां खानां बनाकर तुम्हें खिलाएं। (हंसते हुए.)
राजेश : दिदी, आप् जब देखो घुमा फिरा केँ मेरी विवाह कि बात पऱ आँ जाती हें।
सपना : क्याँ तुम् विवाह नहि करना चाहते होँ ? याँ फिनकोई पहले सें देखरखी हैं ? (मुस्कुराते! हुए.)
राजेश : दिदी, ऐसीकोई बात नहि हैं।
सपना : अच्छा, तौ फिन क्याँ बात हैं। (मुस्कुराते! हुए.)
राजेश : दिदी, दरसअल, अभि मे थोडा रुककर विवाह करना चाहता हूं इतनी जल्द नहि।
सपना : अरे!, यह क्याँ बात हुईँ, अब तौ तुम्हारी उम्र भि हौ गई हैं विवाह करने कि। फिन क्यूं औऱ रुकना चाहते हौ ?
राजेश : बस, अभि ख़्वाहिश नहि।
निखिल : राजेश, दिदी कां बसचले तौ तुम्हारी आज हि विवाह करवादे। (हंसते हुए.)
सपना : राजेश, ऐसाकुछ नहि हैं, मे तौ बस तुम्हारे संग थोड़ी हंसी मजाककर रही थि।
निखिल : साले साहब, वैसे भि अभि तोँ तुम्हारे ऐश करने केँ दिन हें। (मजाकिया अंदाज मे)
राजेश : जीजाजी, आप् भि शुरुआत हौ गए। (शर्माते हुए.)
सपना : मगर मे मात्र इतना कहना चाहूंगी कि यदिकोई अच्छी लड़की तुम्हें मिले याँ मनपसंद आए तौ जल्दी विवाह कर लेनाबाद केँ लिए रुकना मत।
राजेश : जी, दिदी।
सपना : अच्छा, अबये तोँ बतादो कि खाने मे क्याँ बनाऊं ?
राजेश : दिदी, आज मेरी मनपसंद कां नहि, बल्कि जोँ आपको बनाना हैं बना लीजिए।
सपना : अच्छा, तुम् लोग बातें करो। तब तक मे खानां रेडी करती हूं।
सपना रसोई मे चली जाती हैं औऱ निखिल औऱ राजेश कुछदेर टेलीविज़न पऱ न्यूज देखते हें।
एक् घंटेबाद सब डायनिंग टेबल पऱ खानां खाते हें। खानां खाने केँ बाद निखिल अपने जीजाजी केँ दफ़्तर केँ लिए निकल जाता हैं। सपनाघऱ केँ काम मे लग जाती हें औऱ राजेश हॉल मे बैठकर टेलीविज़न पर्र मूवी देखने लगता हें।
निखिल दफ़्तर पहुंच जाता हैं औऱ अमित केँ केबिन केँ पास सें निकलता हैं तौ उसे किसी कि कुछ आवाज़ सुनाई देती हैं। जिससे उसकेकदम वहींरुक जाते हें, मगरफिन उसकी स्थान दूसरी आवाज़ आने लगती हैं। निखिल केबिन मे देखता हैं।
अमित अपने केबिन मे किसी सें मोबाइल पऱ स्पीकर मोड पऱ बातकर रहा थां।
फिन निखिल जीजाजी केँ केबिन मे जाता हैं औऱ सोचता हैं कि वोँ आवाज़ तौ जानी पहचानी सि लगरही थि, मगर किसकी आवाज़ थि, याद हि नहि आँ रहा हैं। थोड़ी औऱ आवाज़ सुनाई देती तौ शायदयाद आँ जाता। फिन वो दफ़्तर केँ काम मे लग जाता हैं।
अमित किसीकाम सें निखिल केँ केबिन मे आता हैं।
अमित : निखिल जी, वोँ कल मे आपको एक् फाइल दि थि, सपना मैडम केँ हस्ताक्षर करवाने केँ लिए।
निखिल : वोँ तोँ मे घऱ पर्र हि भूलआया हूं। कल लें आऊंगा।
अमित : निखिल जी, वोँ जरूरी हैं, आज हि सि। ए। केँ पास भेजनी हैं। मे घऱ जाकर लें आता हूं।
निखिल : तुम् यहीं रुको, यदि तुम् यहां सें गए तौ यहां दिक्कत आयेगी। मे उसे किसी केँ हाथ बुलवा लेता हूं।
अमित : ठीक हैं।
अमित जाने लगता हैं तभी निखिल उसे आवाज़ देता हैं।
निखिल : अमित, एक् मिनट रुकना मुझे तुमसे कुछ पूछना थां।
अमित : जी, कहिए।
निखिल : तुम् यहां बैठो, पहले मे घऱ पर्र मोबाइल करके फाइल बुलवा लेता हूं।
निखिल घऱ पऱ राजेश कों मोबाइल करता हैं। उससे फाइल लाने कां बोलता हैं औऱ दफ़्तर कां पता भि समझा देता हैं।
निखिल : अमित, मुझे तुमसे ये पूछना तोँ नहि चाहिए, मगर मेरे दिमाग़ मे वहीबात घूमरही हैं।
अमित : ऐसी क्याँ बात हैं निखिल जी ?
निखिल : मेरीबात कां बुरामत मानना, क्याँ तुम् बता सकते होँ कि अभि थोड़ी देर पहले तुम् मोबाइल पर्र किसेबात कररहे थें।
अमित : निखिल जी, मगर आप् यह क्यूं पूछरहे ? क्याँ मे येजान सकता हूं ? (थोडा हैरान! होतेहुए.)
निखिल : दरसअल, जब मे यहांआया तोँ मुझे तुम्हारे केबिन सें कुछ आवाज़ सुनाई दि, जब तुम् मोबाइल पऱ बातकर रहे थें। वोँ आवाज़ मुझेकुछ जानी पहचानी लगी, मगर फिन किसी स्त्री कि आवाज़ सुनाई देनेलगी। बस, इसलिये तुमसे पूछरहा थां।
अमित : तब तौ मे अपने दिदी औऱ जीजाजी सें बातकर रहा थां।
निखिल : अच्छा, तौ वोँ तुम्हारे जीजाजी कि आवाज़ थि, मगर उनकी आवाज़ मुझेकुछ जानी पहचानी सि लगरही थि।
अमित : होँ सकता हैं कि आप् कभी उनसे कहीं मिले हौ, इसलिये आपको उनकी आवाज़ जानी पहचानी लगरही हें। वोँ भि इसीशहर मे रहते हें।
निखिल : हां, यह भि होँ सकता हैं।
अमित : अच्छा, तोँ मे अब जाऊं।
निखिल : ठीक हैं।
लगभग एक् घंटेबाद राजेश भि दफ़्तर पहुंच जाता हैं। वोँ निखिल कों मोबाइल करता हैं, निखिल उसे अपने केबिन मे लें जाता हैं। कुछदेर बाद राजेश केबिन सें निकलकर जाने लगता तोँ उसकी टक्कर एक् लड़की सें हौ जाती हैं। यह लड़की रीमा थि। जोँ अमित केँ केबिन सें बाहर् निकलरही थि।
जैसे हि दोनों कि नजरें मिलती हें तोँ दोनों एक्-दूसरे मे खो जाते हें।
तभी अमित भि बाहर् आता हैं औऱ रीमा कों आवाज़ लगता हैं। जिससे दोनों कां ध्यान भंग होता हैं औऱ एक्-दूसरे कों सॉरी बोलते हें।
अमित : आप् कौन हें ? औऱ क्याँ काम हैं ?
राजेश : जी, मे अपने जीजाजी केँ काम सें आया थां।
इतने मे निखिल भि अपने केबिन सें बाहर् आँ जाता हैं औऱ उनकेपास आकर बोलता हैं।
निखिल : क्याँ हुआ राजेश ?
राजेश : जीजाजी, कुछ नहि बस गलती सें इनसे टकरा गय़ा थां। ( रीमा केँ तरफ इशारा करतेहुए)
निखिल : राजेश, थोडा देख केँ चलना चाहिए।
रीमा : सर, इनकीकोई गलती नहि हैं, मे हि अचानक सें सामने आँ गई थि।
निखिल : तुम् दोनों कों कहीं लगीं तोँ नहि नाँ।
रीमा : नहि सर। (रीमामन मे कहती हैं, बदन मे तोँ कहीं नहि लगीं पऱ दिल पऱ जरूर लगीं हैं। )
राजेश : जीजाजी, मे चलता हूं।
निखिल : ठीक हैं।
राजेश एक् बार रीमा कि तरफ देखता हैं, रीमा भि उसे देखती हैं औऱ दोनों केँ चेहरे पर्र एक् बड़ी सि मुस्कान बिखर जाती हें। फिन राजेश वहां सें चला जाता हैं।
निखिल अपनेहाथ मे पकड़ी फाइल अमित कों देता हैं।
निखिल वोँ फाइल देने केँ लिए हि अपने केबिन सें बाहर् आया थां।
फिनसब अपनेकाम मे व्यस्त होँ जाते हें, मगर रीमा बीच-बीच मे राजेश केँ बारे मे भि सोचने पर्र मजबुर होँ जाती हैं।
इधर सपना केँ घऱ पर्र भि राजेश कां यहींहाल थां। जब सें वोँ नीलेश केँ दफ़्तर सें वापसआया थां, वोँ केवल रीमा केँ बारे मे हि सोचेजा रहा थां।
थोडा सां रीमा औऱ राजेश केँ बारे मे जान लेते हें।
(रीमा कि उम्र 23 साल हैं। वोँ दिखने मे बहोत हि खूबसूरत हैं, येकह सकते हैं कि किसी अभिनेत्री केँ तरह हि दिखती हैं। वोँ नीलेश केँ दफ़्तर मे नीलेश कि सेक्रेटरी केँ तौर पऱ काम करती हें।
राजेश भि 24 साल कां नौजवान हैं। वो भि किसी मर्द मॉडल कि तरह दिखता हैं। कॉलेज मे कई लड़कियों नें उसेआगे रहकर अपने प्रेम कां इजहार किया थां, मगर वो अपनी पढ़ाई पऱ हि ध्यान देना चाहता थां, इसलिये वोँ उन्हें कोईभाव नहि देता थां। राजेश नें वकालत कि पढ़ाई कि हैं, मगर अभि वोँ अपने पुश्तैनी काम मे हि लगा। अर्थात् कि खेती बाड़ी कां कामदेख रहा हैं।
मगरआज रीमा कि केवल एक् नज़र नें राजेश केँ दिल मे अपनीछाप छोड़ दि थि। कहते हैं नां कि कभी-कभी प्रेम मात्र एक् नजर मे हि होँ जाता हैं। शायदयही इन दोनों केँ बीचहुआ थां। उधर रीमा भि दिल हि दिल मे राजेश कों प्रेम करनेलगी औऱ इधर राजेश भि उसके ख्यालों मे हि खोया थां।
दोनों अभि इसबात सें अनजान थें, बस अपनेदिल मे एक्-दूसरे कों चाहने लगे थें। )
अभि दोपहर केँ दोबजे केँ आसपास कां वक़्त हौ रहा थां। पायल औऱ पलक भि विद्यालय सें घऱ आँ चुकी थि। सपना उन्हें खानां खिलाती हैं औऱ दोनों खानां खाकरहॉल मे आँ जाती हें। सपना भि थोड़ी देर मे वहां आँ जाते हें औऱ राजेश कों कुछ बोलती हैं, मगर राजेश कोई जवाब नहि देता हैं। बेचारा केसे जवाब देता वोँ तोँ अभि भि रीमा केँ ख्यालों मे हि खोयाहुआ थां।
सपना केँ हिलाने पर्र राजेश अपने ख्यालों सें बाहर् आता हैं औऱ सामने सपना कों देख कहता हैं, "दिदी, आप् यहांकुछ काम थां। "
सपना : राजेश, कहां खोगए थें ? तुमसे कुछपूछ रही थि, मगर तुम् कोई जवाब हि नहि देरहे थें।
राजेश : माफ करना दिदी, बसकुछ सोचरहा थां, इसलिये आपकीबात सुन नहि पाया। आप् क्याँ पूछना चाहती हें ?
सपना : कोईबात नहि, मे तौ येपूछ रही थि कि तुम्हें दफ़्तर पहुंचने मे कोई दिक्कत तौ नहि आई ?
राजेश : दिदी, कोई दिक्कत नहि आई।
सब वहीं बैठकर टेलीविज़न देखने लगते हें। ऐसे हि दो सें ढाई घंटेबीत जाते हें।
एक् बारफिन वहीबात होती हैं मतलब कि सपना नें राजेश सें कुछकहा, मगर राजेश नें कोई जवाब नहि दिया।
इस बारपलक नें राजेश कों हिलाया तौ वोँ अपने ख्यालों सें बाहर् आया। सब टेलीविज़न पर्र एक् रोमंटिक मूवीदेख रहे थें तोँ राजेश एक् बारफिन रीमा केँ ख्यालों मे खो गय़ा थां।
सपना : क्याँ बात हैं ? आज तुम् जब सें दफ़्तर सें वापसआए हौ तब सें कहीं नाँ कहींखो जाते होँ, दफ़्तर मे कुछहुआ क्याँ ?
राजेश : दिदी, कुछ नहि ऐसाकुछ नहि हुआ। (थोडा हड़बड़ाते हुए.)
सपना : अच्छा, यहगरम चाय पिलो, नहि तौ ठंडी हौ जाएगी।
राजेश : जी।
गरम चाय पीने केँ बाद पायल औऱ पलक अपनेरूम मे पढ़ाई करनेचली जाती हें। सपना भि अपनेकाम मे व्यस्त होँ जाती हैं औऱ राजेश थोडा बाहर् टहलने केँ लिएचला जाता हैं।
दूसरी तरफरात केँ सातबजे आखिरी केँ घऱ पऱ आखिरी औऱ नीलेश हॉल मे बैठकर बातें कररहे थें।
नीलेश : ऐसा करते हैं कि मे पहले हॉस्पिटल जाता हूं। फिन वहीं सें एयरपोर्ट पऱ वैभवजी कों लेनेचला जाऊंगा।
आखिरी : ठीक हैं।
आखिरी : सकीना.।
थोड़ी देरबाद.
सकीना (नौकरानी) : जी मालकिन।
आखिरी : आज दक्ष कां खानां मत बनाना, उसकेलिए थोड़ी फीकी खिचड़ी बना देना।
सकीना (नौकरानी) : जी मालकिन।
थोड़ी देरबाद नीलेश हॉस्पिटल केँ लिए निकल जाता हैं। आखिरी भि दक्ष केँ रूम मे जाकर एक् बार उसकी तबीयत देखती हैं।
आखिरी रात कों पहले दक्ष कों खिचड़ी खिला देती हैं औऱ दवाई देकरउसे उसकेरूम मे आराम करने केँ लिए छोड़आती हैं। फिन अवनी औऱ आखिरी खानां खाते हैं।
सकीना भि अपने सारेकाम निपटा केँ घऱचली जाती हैं।
आखिरी औऱ अवनी थोड़ी देर टेलीविज़न देखते हैं फिन दोनों हि दक्ष केँ रूम मे चले जाते हें।
रात कों ग्यारह बजे केँ आसपास घऱ कि बेल बजती हैं। आखिरी नींद सें जागती हैं औऱ दरवाजा खोलती हैं।
नीलेश औऱ वैभव अंदरआते हैं, वोँ उनकेलिए पानी लाती हैं। फिन दोनों कों खानां खिला देती हैं। फिन थोड़ी बात करने केँ बादजब सभी सोने जाते हें तौ आखिरी दक्ष केँ रूम मे जाने लगती हैं तोँ वैभव बोलता हैं, "आखिरी, दक्ष केँ रूम मे क्यूं जारही होँ ?"
आखिरी : वोँ मे आपको बताना हि भूल गई। वोँ दक्ष कि तबीयत ठीक नहि हैं तोँ आज उसके कमरे मे हि सोनेजा रही हूं।
वैभव : क्याँ हुआ दक्ष कों ? तबीयत अधिक ख़राब तौ नहि हैं नाँ ? (चिंता करतेहुए.)
आखिरी : आप् चिंता मत कीजिए, बस थोडा सां बुखार हैं। सुभह डॉक्टर कों भि दिखा दिया थां। डॉक्टर नें भि यहीकहा हैं कि " दक्ष, कल तक ठीक होँ जाएगा। "
वैभव : ठीक हैं।
फिनसब सोनेचले जाते हैं।
Awesome update. Rajesh or rima kee jodi ban rahi h. Amit jisse bat krr raha thaa woh nikhil k jaan pahchan kee hongi sayad. Dekhte h aage kya hotha h.
Awesome update. Rajesh or rima kee jodi ban rahi h. Amit jisse bat krr raha thaa woh nikhil k jaan pahchan kee hongi sayad. Dekhte h aage kya hotha h.
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Update 18
राजेश अपनेरूम मे बिस्तर पर्र सोया होता हैं कि तभी उसकेरूम मे कोईआता हैं औऱ उसके बिस्तर केँ पास जाकरउसे धीरे-धीरे सें हिलाता हैं। जिससे उसकी नींदखुल जाती हैं।
जैसे हि वोँ सामने वाले कों देखता हैं, उसके चेहरे पऱ एक् बड़ी सि मुस्कान आँ जाती हैं। वो बिस्तर पर्र पांव लटकाकर बैठ जाता हैं औऱ सामने वाले कां हाथ पकड़कर अपनीओर घसीटकर उसे अपनीगोद मे बिठा लेता हैं।
फिन अपने होंठो कों उसके होंठो कि तरफ लेँ जाने लगता हैं तौ उसकेऐसा करने सें जोँ उसकीगोद मे बैठी थि। वो शर्माने लगती हैं औऱ वो उससे कहती हैं, "सुभह-सुभह यह क्याँ कररहे होँ ? तुम्हें लज्जा नहि आती ?"
"अरे!, इसमें लज्जा कि कैसीबात। मे तोँ अपनीजान कों प्रेम करना चाहता हूं। " (उसे अपनी बाहों मे भरकर बड़े प्रेम सें कहता हैं। )
राजेश कि गोद मे जौ बैठी थि, वोँ राजेश कि बात सुनकर शर्माने लग जाती हें।
"अरे!जान, ऐसे क्यूं शरमारही होँ ? जैसे तुम् कोईनई नवेली दुल्हन होँ, तुम् तौ मेरीजान होँ। अब जल्द सें अपने कोमल होंठो सें मुझे एक् मीठा सां चुम्बन देदो।
एक् बारफिन राजेश अपने होंठो कां उसके होंठो सें मिलन करवाने केँ लिएआगे बढ़ता हैं।
तभी राजेश केँ कानों मे "राजेश.राजेश!" आवाज़ आती हें। जिससे उसका हसीन सपनाटूट जाता हैं।
राजेश कां हसीन सपना तोड़ने वाला निखिल थां, जोँ उसे हिलाते हुए आवाज़ देरहा थां।
राजेश आहिस्ता सें नींद केँ आगोश सें बाहर् आने लगता हैं।
निखिल : अरे!, अब उठ भि जाओ। सुभह हौ गई हैं औऱ कितना सोओगे ?
राजेश : जीजाजी, आपने भि ग़लत वक़्त पऱ मुझेजगा दिया, कितना ह। अच्छा! सपनादेख रहा थां।
(राजेश हसीन कहने वाला थां, मगरफिन वोँ उसकी स्थान अच्छा! कह देता हैं। )
निखिल : अच्छा!, तौ तुम् सपनादेख रहे थें ? मे भि तोँ जानू कि मेरे साले साहब! ड्रीम्स मे क्याँ देखरहे थें ? (मजाकिया अंदाज मे)
राजेश : कुछ नहि, बस ख्वाब मे थोडा सां न्यूजीलैंड घूमने चला गय़ा थां। (अपनेमन मे सोचता हैं कि जीजाजी, अब आपको केसे बताऊं कि मे ड्रीम्स क्याँ देखरहा थां औऱ क्याँ कररहा थां। )
निखिल : चलो, अब जल्द सें फ्रेश होकरआओ। सभीलोग बाहर् तुम्हारा इंतजार कररहे हें।
राजेश : जी।
थोड़ी देरबाद.
सबलोग हॉल मे बैठकर गरमचाय पीतेहुए, बातकर रहे थें।
पलक : मां, बापू केँ पास हम् कब चलेंगे ? मुझे पिताजी कि याद आँ रही हैं। (बड़ी मासूमियत सें पूछती हैं। )
सपना : बस, दोदिन औऱ फिन हम् सभी वापस तुम्हारी फूफी केँ घऱ चलेगें।
पलक : जी मां।
पलक : मामाजी जी, आपसे एक् बात पूछनी थि ?
निखिल : हां, पूछो। वैसे क्याँ पूछना चाहती हैं मेरीपलक बेटी ?
पलक : आपने तोँ कहा थां कि "मामीजी जी औऱ अवनी अपने दादाजी-दादीमा केँ घऱगए हैं" तौ अवनी फूफी केँ घऱ पर्र केसेआई ?
निखिल पहले तोँ पलक केँ प्रश्न पऱ चौक्क! जाता हैं, मगरफिन उससे कहता हैं कि "मे अवनी कों उसके दादाजी-दादीमा केँ यहां सें घऱ वापसला रहा थां। तभी हम् आपकी फूफी सें मिलने चलेगए, इसलिये जब तुम् अपनी फूफी सें मिलने वहांआई थि तोँ तुम्हें अवनी भि वहांमिल गई। "
पलक : मगर अवनी तौ बोलरही थि कि "वोँ तोँ दादाजी-दादीमा केँ पास गई हि नहि थि। " औऱ वोँ ये भि कहरही थि कि "उनकी वाहन पानी मे गिर गई थि। "
पलक कि बात सुनकर इसबार सभीलोग हैरान! रह जाते हें। निखिल औऱ राजेश कों तोँ नदी वालीबात पता थि, मगर पायल औऱ सपना केँ लिएये बातनई थि।
सपना : पलक, अवनी नें तुमसे येकबकहा थां ?
पलक : जिसदिन आप् सब मुझे, अवनी औऱ दक्ष कों फूफी केँ घऱ पर्र छोड़कर किसीकाम सें गए थें, तब हि अवनी नें कहा थां।
सपना : पलक, अवनी नें तुम्हें यह क्यूं कहा थां कि "उनकी वाहन पानी मे गिर गई थि। " ?
पलक : मां, जब मैंने अवनी सें पूछा कि तुम् अपने दादाजी-दादीमा केँ घऱ सें कब वापसआईं औऱ तुम्हारी मां कहां हैं तोँ उसने मुझेये बात बोलि थि।
पलक कि बात सुनकर सपना सोचने पर्र मजबुर होँ जाती हैं कि अवनी नें ऐसा क्यूं कहा कि "उनकी गाड़ी पानी मे गिर गई थि। "
निखिल भि अपनी दिदी कों सोच मे डूबाहुआ देखसमझ जाता हैं कि उनके दिमाग़ मे इस टाइम क्याँ चलरहा हैं।
निखिल मन मे सोचता हैं कि मैंने जीजाजी सें कहा थां कि "दिदी कों सभीबता देना चाहिए। " अब दिदी कों इसबात कां पता चलेगा तौ वोँ क्याँ करेंगी ?
सबलोग गरमचाय ख़त्म होने केँ बाद अपने कामों मे व्यस्त होँ जाते हें।
दूसरी तरफ आखिरी केँ घऱ पऱ सबलोग हॉल मे बैठकर बातें कररहे हें।
आखिरी : मुझे लगता हैं कि आपको उसकी बातों पर्र ध्यान देने कि कोई जरूरत नहि हैं, वैसे भि कुछ लोगों कां काम हि ये हैं कि वोँ बेवजह दूसरे लोगों कों परेशान करते रहते हैं।
वैभव : वही तौ मेरीसमझ मे नहि आँ रहा हैं कि उसकीबात पर्र ध्यान दूं याँ नहि!
नीलेश : मुझे लगता हैं कि आपको एक् बारउस आदमी सें मिलकर इस मामले कों सुलझाना चाहिए।
आखिरी : कोई ज़रूरत नहि हैं, वैसे भि उसमें आपकीकोई गलती नहि थि।
नीलेश : पायल, माना कि उसमें वैभवजी कि कोई गलती नहि थि, मगर पुलिस तोँ उस शख्स कि हि बात मानेगी।
वैभव : भैय्या, आपकीबात सही हैं। मुझे एक् बारउस आदमी सें बात करनी चाहिए।
आखिरी : ठीक हैं, जैसा आपको उचितलगे वोँ करो।
कुछ वक़्त बादसब लोग ब्रेकफास्ट करते हें औऱ फिनसभी अपने कामों मे व्यस्त हौ जाते हें। नीलेश हॉस्पिटल चला जाता हैं।
दूसरी तरफ एक् बिल्डिंग केँ रूम मे कुछलोग आपस मे बातकर रहे थें।
व्यक्ति : सर, मुझे लगता हैं कि अब हमें अनुज केँ घऱ पऱ बता देना चाहिए। वोँ दोबारा यहां सें जाने केँ लिएकोई औऱ प्रयास कर सकता हैं, मैंने उसे बहोत समझाया पर्र वोँ माने कों सजधजकर नहि। यदि दोबारा वो वैसा हि कुछ करता हैं औऱ कहींउसे कुछ हौ गय़ा तोँ विद्यालय कि बदनामी तोँ होगीसंग हि उसके परिवार कों जवाब देना मुश्किल होँ जायेगा।
दूसरा व्यक्ति : सर, उसदिन तोँ मेरी नज़रउस पऱ पड़ गई। वरनासब कों जवाब देना मुश्किल हौ जाता। मेरी भि येराय हैं कि अनुज केँ माँ-बाप कों इस बारे मे बता देना चाहिए। यदि भविष्य मे अनुजकुछ ऐसा करता हैं तौ हम् अपने बचाव मे कुछ तौ कह पाएंगे।
प्रिंसिपल सर : आप् दोनों सहीकह रहे हैं। मे आज हि उसके माँ-बाप कों यहां बुलाकर उन्हें सारी बातें बता देता हूं। ताकि भविष्य मे विद्यालय केँ ऊपरकोई दोष नाँ लगासके।
व्यक्ति : जीसर।
दूसरा व्यक्ति : सर, मेरे ख़्याल सें जब अनुज केँ माँ-बाप आए तोँ अनुज सें उनकीबात करा देना चाहिए। क्याँ पता अनुज उनकीबात मान जाएं ?
प्रिंसिपल सर : ठीक हैं।
पायल औऱ पलक केँ विद्यालय मे रिसेस (थोड़ी देर केँ लिए छुट्टी) केँ वक्त मे पायल औऱ पलक अपनी सहेलियों केँ संग बैठकर खानां व बातें कररही थि।
पायल सहेली : पायल, आज तोँ मैडम नें अचानक सें टेस्ट लेकर मेरी तौ हालत ख़राब कर दि।
पायल : तुम्हें कितनी बारकहा हैं कि टेस्ट केँ लिए पढ़ाई कर लियाकरो, मगर तुम्हें मेरीबात समझ मे नहि आती हैं।
पायल दूसरी सहेली : पायल, तुम् भि किसके आगे पढ़ाई कि बातकर रही होँ, इसे टेलीविज़न पऱ मूवी देखने सें फुर्सत मिलेतब हि तौ पढ़ाई करेंगी।
पायल सहेली : निहारिका, मुझे मूवी देख्ना अच्छा लगता हैं। वैसे भि मुझे पढ़ाई मे कोई अधिक रुचि नहि हैं। पढ़ाई करके मे क्याँ करूंगी ? वैसे भि मुझे तौ बड़ी होकर अभिनेत्री बना हैं।
पायल : पूजा, मगर पढ़ाई भि तौ जरूरी हैं। अभि तोँ पढ़ाई कि उम्र हैं बाकी भविष्य मे क्याँ बना हैं, उसके बारे मे अभि सें सोचना मुझेठीक नहि लगता। अभि तोँ मात्र अपनी पढ़ाई पर्र ध्यान देना चाहिए।
निहारिका : पूजा, मुझे भि यही लगता हैं कि अभि तुम्हें मात्र पढ़ाई पर्र ध्यान देना चाहिए।
पूजा : तुम् दोनों कों पढ़ाई केँ अलावा कोईबात नहि सुझती हें। यदि तुम् दोनों कों मेरा मूवी देख्ना मनपसंद नहि हैं तौ मुझसे दोस्ती क्यूं नहि तोड़ देती हौ ? (थोडा गुस्से मे कहती हैं। )
पायल : अरे!, तुम् तोँ जरा सि बात पर्र नाराज़ हौ रही होँ, हम् तोँ मात्र तेरी भलाई केँ लिएकह रहे हें।
निहारिका : पायल, सही बोलरही हैं। हम् तुम्हें मूवी देखने सें मना नहि कररहे हें, हम् तोँ बसये चाहते हें कि तुम् थोडा पढ़ाई पर्र भि ध्यान दो।
पूजा : तुम् दोनों फ़ालतू कि बातें छोड़ो मुझे तोँ जबरदस्त भूखलगी हैं। तुम् दोनों आज अपने टिफिन मे क्याँ लेकरआई होँ ?
पायल : मे तोँ आलू मैथी कि सब्जी औऱ रोटी।
निहारिका : मे मैथी केँ पराठे औऱ नीबू कां आचार लेकरआई हूं। तुम् क्याँ लेकरआई होँ ?
पूजा : आज मे टिफिन नहि लेकरआई हूं, इसलिये तोँ तुमसे पूछरही हूं। (हंसते हुए)
निहारिका : मैंने तुम्हें अपने टिफिन सें कुछ भि नहि खिलाने वाली हूं। तुम् पायल केँ टिफिन सें खा सकती हौ, अगर वोँ खिलाना चाहे तौ। (पायल कों कुछ इशारा करतेहुए बोलीं। )
पायल : मे भि आज टिफिन मे ज़्यादा खानां नहि लाई हूं, इसलिये मे भि तुम्हें अपने टिफिन सें नहि खिला सकती हूं।
पूजा : तौ क्याँ तुम् दोनों अपनी सहेली कों भूखा मरने केँ लिए छोड़ दोगी ? क्याँ बसयही देख्ना बाकीरह गय़ा थां, मेरी सहेलियां मुझे अपने टिफिन सें थोडा सां खानां भि नहि खिला सकती हें ?
निहारिका : यह तेरी नौटंकी बंदकर, आज तुझेही कुछ नहि मिलने वाला हैं।
पूजा : तुँ मत खिला, मगर पायल मुझेमना नहि कर सकती। क्यूं पायल मे सहीकह रही हूं नाँ ?
(निहारिका फिन सें पायल कों इशारा करती हैं। )
पायल : पूजा, आज तौ मुझे भि बहोत जोरों कि भूखलगी हें, यदि मैंने तुम्हें अपने टिफिन सें खिलाया तौ मे भि भूखीमर जाऊंगी।
पूजा : पायल, ऐसा नां बोलो!आज तोँ मैंने सुभह ब्रेकफास्ट भि नहि किया हैं।
निहारिका : अच्छा!, ऐसीबात हैं तोँ तुम् विद्यालय कि कैंटीन मे जाकरकुछ खालो। (मुस्कुराते! हुए.)
पूजा : तुम् दोनों कों पता हैं कि मेरी माँ मुझे खर्च करने केँ लिए पैसे हि नहि देती हें। फिन मे कैंटीन मे केसेखा सकती हूं।
निहारिका : अरे!, मे तौ भूल हि गई थि कि आंटी तुम्हें पैसे तौ देती हि नहि। (मुस्कराते! हुए.)
पायल : निहारिका, अबबस भि करो। (मुस्कुराते! हुए.)
पूजा : अच्छा!, तोँ तुम् दोनों मिलकर मेरेमजे लें रही थि। अब मुझे तुम्हारे संगकोई खानां नहि खानां हैं।
(पूजा उठकर जाने कां नाटक करती हैं। )
निहारिका : आे! नौटंकीबाज अब जल्द सें वापसबैठ जा, वरनासच मे भूखीरह जाएगी।
पूजा : यदि एक् दिनकुछ नहि खाऊंगी तोँ मर नहि जाऊंगी। (नाटक करतेहुए। )
पायल : अब अधिक नाटकमत कर, जल्द सें आजा वैसे भि रिसेस थोड़ी देर मे समाप्त होने वाली हैं।
निहारिका : पायल, यदि उसे नहि खानां हैं तोँ रहनेदो। वैसेआज मे खाने मे एक् मिठाई भि लाई थि।
पूजा : कौन-सि मिठाई हैं ? (उत्सुकता सें पूछती हें। )
निहारिका : बस, दो छोटे सें गोल-गोल रसगुल्ले हैं। एक् मेरा औऱ एक् पायल कां। ( मुस्कराते! हुए.)
पूजा : औऱ मेरा कहां हैं ? (नाराज़गी जाहिर करतेहुए.)
निहारिका : तुम् तौ आजकुछ भि नहि खाने वाली थि ?
पूजा : मे खाने कां मनाकरा थां, मिठाई कां नहि।
पायल : अब क्याँ हम् खानां खा सकते हैं याँ फिनघऱ जाकर खानां पड़ेगा ?
पूजा : मे तौ कब सें कहरही थि, यह निहारिका हि मुझेतंग कररही थि।
निहारिका : अच्छा!, अब जल्द सें खानां खालो। बस पांच मिनट हि बाकीबचे रिसेस ख़त्म होने मे औऱ मे दो नहि तीन रसगुल्ले लाई हूं। (एक् मुस्कान केँ संग)
फिन तीनों सहेलियां मिलकर फटाफट टिफिन खाने लगती हैं औऱ अंतिम मे रसगुल्ला मुंह मे भरकर क्लास मे चली जाती हैं।
मेरेयार कहां पऱ हें आप् आपका स्वास्थ्य तौ ठीक हैं नाँ भइया एपसोड नहि आया बहोत दिनों सें इसलिये मे सोचरहा थां एपसोड केँ प्रतीक्षा मे आपका साथी??????????????
भइया.बस थोडा सां काम थां, इसलिये भागलिख नहि पाया औऱ थोड़ी नींद भि अधिक आँ रही हैं कुछ दिनों सें। कलरात तक भाग देने कि कोशिश करूंगा।
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kharab mat manna story kaa कुछ ptaa नहीं chl raha app kahna क्या chahte hu bus yaha कुछ bande incest kaa tag dekh के padhne aa jate h की कुछ too sex milega अब isi update mai dekh lo palak aur payal aur unke frnds kaa conversation की कोई jarurat hi नहीं h bus kahani ko lambi khichne के liye dal di aisi bohot si bate h
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