सिसकारियां,,,,, - Hindi Sex Story - Full Story Part 1
किस्सा केँ पात्र
1 ज्योति,,,, (रोहित कि मम्मी)
2रीमा,,,,,,, (रोहित केँ बडी बेहन)
3 रोहित,,,,,
4 कोमल,,, (ज्योति कि जेठानी)
5 कामिनी,,,, (कोमल कि लड़की)
रोहित चल जल्द सें उठजा अभि तक सोरहा हैं तुम को मालूम हैं नाँ आजकौन आने वाला हैं,,, (ज्योति अपने बेटे कों सुभह केँ 6:00 नींद सें उठाते हुए बोलीवैसे तौ रोहित कां उठने कां मन बिल्कुल भि नहि थां मगरजिस तरह सें जब छोड़कर ज्योति उसेउठा रही थि नां चाहते हुए भि उसे नींद सें उठना पड़ा। रोहित धीरे-धीरे सें अपनी आंखों कों खोलकर अपनी मम्मी कि तरफ देखा औऱ आलसीभरे स्वर मे बोला,, )
क्याँ हे मम्मी क्यूं इतनी जल्दउठा रही हौ तुम् तौ जानती होँ कि आज रविवार हैं फिन भि,,,।
मे सभी जानती हूं मगर तेरी भि पता होना चाहिए कि आज रविवार हैं मगरआज कौन आँ रहा हैं,, (अपने बेटे केँ ऊपर सें चादर कों हटाते हुए वो बोलीं)
कौन आँ रहा हैं जौ इतनी सुभह-सुभह नींद खराबकर रही हौ,, औऱ वैसे भि अपनेघऱ पर्र आता हि कौन हैं, ?(नाराज होताहुआ रोहित बोला)
भले हि अपनेघऱ कोई नहि आतामगर आज तेरी बड़ी बेहन रीमा कों देखने वाले आँ रहे हें।
ओहहह,,,,, (एकदम सें हैरान होताहुआ) मे तौ भूल हि गय़ा थां मगर इतनी जल्द थोड़ी नां आँ जाएंगे उन्हें आने मे भि तौ 10:00 बज जाएगा.
मगर तैयारी भि तौ करना हैतो क्यूं नहि समझता जल्द सें उठकर रेडी हौ जाकुछ सामान भि लाना हैं।
ओहहह माँ,,, तुम् तोँ मुझे हि हैरान करती हौ,,,।
तेरे सिवाकोई घऱ मे दूसरा हैं जिससे मे सामान लाने केँ लिएकह सकती हूं कुल मिलाकर हम् औरतों केँ बीच मे एक् तूँ हि मर्द हैं भले हि छोटा हैं मगर तुम्हें जिम्मेदारी भि तोँ उठाना चाहिए बड़ी जिम्मेदारी नहि उठा सकता तौ छोटी-छोटी जिम्मेदारी तोँ उठा लें सामान लाना बाजार जानां मेहमान कों लाना याँ उन्हें पहुंचना इतना तौ तुम्हे आनां चाहिए औऱ इतना तुम्हे करना हि होगा।
ठीक हैं मे सभीकुछ कर लूंगा,,, (अपनी मम्मी कि बात सुनकर पलंग सें नीचे उतरता हुआ रोहित बोला,,,, )
कर लूंगा नहि करना पड़ेगा,,,,,
स्टोरी केँ किरदार आहिस्ता कथा केँ संग जुड़ते चले जाएंगे,,,।
सिसकारियां,,,,, - Hindi Sex Story – New Episode
रोहित कों उठाने केँ बाद ज्योति कुछदेर तक रोहित केँ कमरे मे हि खड़े होकरकुछ सोचने लगीफिन धीरे-धीरे सें उसके कमरे सें बाहर् निकली औऱ रीमा केँ कमरे कि तरफ जानेलगे ज्योति कां दिल बड़े जोरों सें धड़करहा थां ऐसा नहि थां कि आज पहलीबार लड़के वाले रीमा कों देखने आँ रहे थें आज5वीबार कोई रिमा कों देखने वाले आँ रहे थें औऱ ज्योति मन हि मन ईश्वर सें प्रार्थना कररही थि कि इसबार उसका नाता पक्का हौ जाए तोँ गंगा नहाएउसे बहोत चिंता थि,,, पति केँ न् होने कि वजह सें सारी जिम्मेदारी उसकेऊपर हि थि,, जैसे तैसे करके उसने अपने बच्चों कों पढाया लिखाया,,, वैसे तौ ज्योति पति केँ जाने केँ बाद अपनी भाग्य सें समाधान करली थि औऱ अपने बच्चों मे हि अपना सारा जिंदगी झोंक दि थि उसे उतनी तकलीफ़ उनके लालन पोषण करने मे बिल्कुल भि नहि हुइ थि,,, क्योंकि एक् अच्छी सि दफ़्तर मे वो टाइप राइटर कि जॉब पऱ लगी हुइ थि जिसकी तनख्वाह सें उसका गुजारा हौ जाता थां उसकी सबसे बड़ी चिंता थि रीमा केँ शादी कों लेकरचार बार लड़के वाले नां कर चुके थें आज पांचवीं बारकोई लड़के वाले देखने आँ रहे थें।
वैसे तौ ज़्यादा चिंता कां विषयकुछ थां नहि रीमा पढ़ी लिखी थि b.ed कर चुकी थि उसे टीचर कि जॉब चाहिए थि जिसके लिए वो अग्रसर थि। वैसे तोँ रीमा पूरीतरह सें समझदार औऱ होशियार लड़की थि मगर ज़्यादा चिंता केँ विषय ज्योति केँ लिए थि उसकी बढ़ती उम्र औऱ हल्का सां सांवला रंग, वो 28 साल कि होँ चुकी थि, शादी कि उम्र निकाली जारही थि, वैसे तोँ हल्का सां सांवला रंगअगर एक् तरफरख दियाजाए तोँ वो बला कि हसीन थि। ऐसा क्याँ नहि थां जौ एक् हसीन लड़की मे होता हैं,,, उसकीतरफ लड़के आकर्षित होते तौ थें मगर जहां शादी कि बातआती थि वहां पऱ दोकदम पीछे हौ जाते थें। इसी समस्या कों लेकर रीमा अंदर हि अंदरटूट चुकी थि वैसे तोँ वो बेहद कड़े मनोबल कि थि मगर अपने शादी कि बातजब आती थि तौ उसकादिल टूट जाता थां क्योंकि वो चारबार अपमान कां घूंटपी चुकी थि इसलिये उसेये सभी रश्मे अच्छी नहि लगती थि। मगर मजबूरन उसेइन सभी बातों कां सामना करना हि पड़ता थां।
ज्योति सीधा अपनी बेटी केँ कमरे मे गई थि। कमरे कां दरवाजा खुलाहुआ थां इसका मतलब सरस्वती वो जागरही थि ज्योति जब कमरे मे दाखिल हुइ तौ वो बैड पऱ बैठी हुइ थि औऱ शायदआज केँ बारे मे हि सोचरही थि,,, कमरे मे दाखिल होते हि वो रीमा सें बोलीं।
क्याँ हुआ बेटा तूँ अभि तक बैठी हैं जल्द सें नहाकर रेडी हौ जा।
माँ मे तुम्हें बहोत लगती हूं, (रीमाउसी तरह सें पलक झपकाए बिना हि खुली हुई खिड़की सें बाहर् देखते हुए बोलीं,,, )
ये कैसी बातें कररही हैं बेटा तूँ,,, (पलंग सें नीचे गिरी चादर कों अपनेहाथ सें उठाकर खाट पऱ रखतेहुए ज्योति बोलि) बेटियां कभीबोझ होती हैं क्याँ,,, !
मात्र कहने कि बात हैं माँ तभी तौ तुम् इतनी जल्दबाजी दिखरही हौ मुझेइस घऱ सें बाहर् भेजने केँ लिए,,,।
ऐसा बिल्कुल भि नहि हैं बेटा,, (प्रेम सें रीमा केँ बगल मे बैठते हुए ज्योति बोलि,,, )
ऐसा हि हैं माँ तभी तोँ तुम् इतनी जल्दबाजी दिखरही होँ चारबार लड़के वाले इनकार कर चुके हें फिन भि। (इससे ज़्यादा रीमा सें बोला नाँ गय़ा ज्योति अपनी बेटी केँ दर्द कों अच्छी तरह सें समझती थि, वो बड़े प्रेम सें रीमा केँ सर पऱ हाथ रखतेहुए उसे प्रेम दिखाते हुए बोलि)
मेराबस चले तोँ तुम्हें जीवनभर अपनेपास रखलु सीने सें लगाकर रखुमगर क्याँ करूं समाज कि रीति रिवाज सें मजबूर हूं लड़कियां वास्तव मे पराया धन हि होती हैं।
मगरइस पराया धन कों किसी कों जरूरत नहि हैं। (रीमा केँ इन शब्दों मे उसका दर्दसाफ दिखाई देरहा थां)
ये कैसी बातें कररही हैं रीमा,,, अंधे हें वो लोग जोँ इतना अनमोल हीरे कों पहचान नहि पारहे हें,,,,
येसभी बातें हें माँ,,, मे कहरही हूं मुझे अभि औऱ पढ़ने दो मुझे टीचरबन जानेदो मुझे अपने पैरों पऱ खड़े होँ जानेदो,,,।
वो तौ तूँ बन हि जाएगी बेटी,,,, इसमें कोईशक नहि हैं मगर शादी भि बहोत जरूरी हैं वक्त रहते शादी होँ जाए तौ बहोत अच्छा होता हैं,,,, तूँ तौ समझदार हैं फिन क्यूं बेवकूफी भरी बातें करती हैं,,,, कल कों तोँ टीचरबन जाएगी तौ क्याँ यहीसभी कुछ सिखाएगी बच्चों कों।
मे तोँ यही सिखाऊंगी कि लड़कियों कों अपनेपेर पऱ हमेशा खड़ा रहना चाहिए।
( अपनी बेटी कि बात सुनकर ज्योति रीमा कि तरफ देखकर मुस्कुराने लगी औऱ रीमा भि मुस्कुरा दि,,,, औऱ धीरे-धीरे सें पलंग सें उठतेहुए ज्योति बोलीं)
मेरी प्यारी बेटी,,,, जल्द सें सजधजकर हौ जा,,,,
मगर येलोग भि इंकार करदिए तौ,,,, !
अगरऐसा हैं तौ फिन इसकेबाद जोँ तेरेमन मे आए वो करना मे कुछ नहि कहूंगी,,,,।
(अपनी माँ कि बात सुनकर रीमा मुस्कुराने लगी औऱ ज्योति भि मुस्कुराते हुए कमरे सें बाहर् चली गई,,,,
थोड़ी हि देर मे रोहित नहाकर सजधजकर हौ चुका थां,,,, ज्योति भि अपने कमरे सें बाहर् आकर थोडा बहोत काम मे हाथ बंटारही थि क्योंकि मेहमान कों आने मे अभि बहोत टाइम थां,,, रोहित अपनी मम्मी सें बोला,,,, )
लाओ मुझे सामान कि लिस्ट दो औऱ पैसेदो जोँ भि लाना हैं मे जल्द लेकर आँ जाऊं,,,,,।
रुक मे तेरी लिस्ट बनाकर दे देती हूं जल्द जानां जल्द लेकर आनां।
क्याँ करती हौ मम्मीतुम्हारी अभि तक लिस्ट रेडी नहि हैं औऱ इतनी जल्दबाजी दिखारही हौ, तुम्हारे कहते कहते मे नहाकर रेडी होँ गय़ा।
हांहां मे जानती हूं मेरे पऱ एहसान कर दिया हैं तु,, रुक जा बनाकर देरही हूं।
(इतना कहकर ज्योति किचनघऱ मे गई औऱ सामान कि लिस्ट बनाने लगी औऱ जल्द हि रोहित कों पैसे औऱ थैला देकर वो लिस्ट भि थमा दि,,, जिसे लेकर रोहित घऱ सें बाहर् निकल गय़ा,,,,,,,
1 घंटेबाद पूरी तैयारी होँ चुकी थि। बस थोड़े बहोत पकौड़े तलनेरह गए थें,, पकोड़े तलतेहुए ज्योति बोलीं,, )
दिदी आप् जाकर देखिए नां रीमा सजधजकर हुई कि नहि,,,,।
अरे तुम् चिंता मतकरो मे पकोड़े पाल देता हूं पहले जाकर केँ तुम् सजधजकर होँ जाओ मे शालू कों भेज देतीहुं,,,,, ( इतना कहने केँ संग अपनी बेटी कों आवाज़ लगाते हुए बोलीं,,, )
कामिनी,, अरे वोँ कामिनी,,,, कहां हैं ये लड़की भि नाँ,,, (इतना कहने केँ संग हि वो ज्योति केँ हाथ सें पकोड़े तलने वाली चमची लेली,,,, औऱ धीरे-धीरे सें फिन सें ज्योति सें बोलीं,,, ) तुम् चिंता मतकरो जाओ जल्द जाकर सजधजकर हौ जाओ,,,,
ठीक हैं दिदी,,,,, मे जारही हूं,,,, तुम् संभाल लेना,,, (इतना कहकर ज्योति किचनघऱ सें निकल हि रही थि कि फिन सें पीछे सें आवाज़ लगाती हुई काोमल बोलीं)
सुनो ज्योति जातेहुए थोडा कामिनी कों भेज देना तौ,,,।
ठीक हैं दिदी,,,,।
(कोमल ज्योति कि जेठानी थि जोकी उनकीबगल मे हि रहती थि दोनों कां घर-मकान सटाहुआ थां औऱ कोमल कि एक् हि औलाद थि कामिनी जोकी रोहित कि हम् उम्र थि,,, ज्योति किचनघऱ सें बाहर् आते हि सीढीओ सें ऊपर कि तरफ जानेलगी,,, तभीउसे सीढीओ सें उतरती हुईँ कामिनी दिखाई दि औऱ उसे देखते हि ज्योति बोलि,, )
कामिनी बेटी।
जी चाची,,,,।
किचनघऱ मे जाकर देखो दिदी तुम्हें बुलारही हैं,,,,
ठीक हैं चाची मे जारही हूं,,,,,
औऱ हां भइया साहब नहि आए,,,,।
बापू अभि थोड़ी देर मे आँ जाएंगे,,,
ठीक हैं,,,,।
(कामिनी किचनघऱ मे आई तौ उसकी मम्मी कोमल बोलीं)
कहां घूमरही हैं,,, ?
कहीं तौ नहि माँ यहीं तौ हूं
तुम्हे कुछसमझ मे आता हैं जाकर अपनी बड़ी दिदी कि सहायता कर सजधजकर होने मे,,,
ठीक हैं मां मे जारही हूं,,,,।
(इतना कहकर कामिनी रीमा केँ कमरे कि तरफ जल्दउसे रेडी करने मे सहायता करने केँ लिए,,, औऱ ज्योति अपने कमरे मे सजधजकर होनेलगी नहा तोँ वो कब सें ली थि मगर अभि रेडी नहि हुईँ थि औऱ वो पहनी हुई साड़ी कों उतारने लगी,, वैसे तोँ उसे पेटिकोट उतारते कि कोई जरूरत नहि होती क्योंकि वो साड़ी केँ नीचे हि रहने वाली थि मगर उसका घेराव थोडा अधिक थां इसलिये उसे थोडा अजीबलग रहा थां औऱ वो उसे भि उतार दि औऱ दूसरी पेटिकोट लेकरउसे नीचे सें टांग मे डालने लगी अभि वो अपनी पेटीकोट कों अपनी जांघों तक लाई थि कि,, तभी भड़ाक कि आवाज़ केँ संग एकदम सें दरवाजा खुला औऱ रोहित अपनी माँ केँ कमरे मे दाखिलहुआ औऱ अपनी आंखों केँ सामने जोँ नजारा देखाउसे देखते हुए अपनी आंखों कों दूसरी तरफ घुमा लिया औऱ एकदम सें बोल पड़ा,,,, )
क्याँ मां दरवाजे पर्र कुंडी तौ लगा लिया करो,,, (रोहित दूसरी तरफनजर करके बोला,,,, दरवाजा खुलने कि आवाज़ केँ संग ज्योति एकदम सें घबरा गई थि औऱ जल्दबाजी मे पेटीकोट कों कमर तक ऊपरउठा ली थि मगरतब तक रोहित अपनी माँ कि बड़ी-बड़ी गांड कों देख चुका थां बस एक् झलकमगर उसकेमन मे कोईगलत भावना बिल्कुल भि नहि थि उसे अपनी मम्मी पऱ क्रोध हि आँ रहा थां कि वो दरवाजा बंद क्यूं नहि कि थीऔरइस बात पऱ भि क्रोध थां उसे अपने आप् पऱ कि वो दरवाजा पर्र दस्तक किए बिना क्यूं कमरे मे घुस जाता हैं,,,, पेटिकोट कि डोरी कों बांधते हुए ज्योति अपने बेटे कि तरफ देखे बिना हि बोलि,,, )
जल्दबाजी मे कुंडी लगाना भूल गई मगर क्याँ काम हैं,,,,।
बड़ी मां पूछरही हैं कि मिठाई कां डब्बा कहां हैं,,,,
अरेवही किचनघऱ केँ कबाट मे रखाहुआ हैं,,,,।
ठीक हैं,,, (इतना कहकर रोहित अपनी मम्मी केँ कमरे सें बाहर् निकल गय़ा,,,,, थोड़ी देरबाद हि रोहित केँ बड़े बापू भि वहां पऱ आँ गए,,,, उन्होंने थोडा तैयारी कां जायजा लिया औऱ वही कुर्सी पऱ बैठगए थोड़ी हि देरबाद मेहमान भि घऱ पऱ आँ गए, )
सिसकारियां,,,,, - Hindi Sex Story – New Episode
सारी तैयारी हौ जाने केँ बाद मेहमान भि सही टाइम पर्र आँ चुके थें। परिवार केँ लिए राहत कि बातये थि कि मेहमान नें जरा भि प्रतीक्षा नहि करवाया थां वरना 10:00 बजे कां बोलकर दो बहोत लोगसाम कों पांचछः बजेआते थें। इसबात कि उन्हें संतुष्टि थि कि चलो वक्त पऱ तोँ आए,,,,, मेहमान केँ आते हि, रोहित केँ बड़े पिताजी मेहमान कां स्वागत किया औऱ उन्हें इज्जत सें बैठाया संग मे लड़का भि आयाहुआ थां रोहित केँ बड़े बापू अपने अनुभवी नजर सें उसे लड़के केँ चालचलन कां जायजा लेँ रहे थें,,,, बार-बार इस लड़के कि तरफदेख रहे थें आखिरकार घऱ कि लड़की जौ उसके हाथों मे देना थां। उसे लड़के केँ माँ-बाप औऱ संग मे एक् व्यक्ति औऱ आया थां जौ बाद मे पताचला कि उसे लड़के कां चाचा थां,,, ज्योति नें मेहमान नवाजी मे किसी भि प्रकार कि कसर नहि छोड़ी थि वो अपनेहाथ सें इस रिश्ते कों जाने नहि देना चाहती थि वो अच्छी तरह सें जानती थि कि रीमा 28 साल कि हौ गई हैं दो-तीन साल कि देरी मतलब थां कि रीमा औऱ परिवार केँ लिए मुसीबत। जवान लड़की कि विवाह सही टाइम पऱ नाँ हौ इसकादुख भला माँ-बाप सें अधिक किसको होता हैं,,, उसे यहां तौ रीमा अकेली हि थि इसलिये उसे सबसे ज़्यादा चिंता थि।
दोनों पक्षों मे बातचीत शुरुआत हौ चुकी थि,,,, रोहित केँ बड़े पिताजी हि लड़की कि तरफ कि जिम्मेदारी उठाकर बातचीत कररहे थें।
देखिए लड़की हमारे पढ़ी-लिखी हैं टीचर बनने कि तैयारी मे हैं आज नहि तोँ कल टीचरबन हि जाएगी औऱ अगर टीचरबन गई तोँ आप् लोगों कों हि इसकालाभ मिलेगा खूबसूरत तौ वो हैं हि।
हम् जानते हें तभी तौ हमारे यहां पऱ लड़की देखने केँ लिए ताकि हमें एक् खूबसूरत औऱ सुशील बहूमिल सके,,, (लड़के कि तरफ सें लड़के केँ पिता नें बात कि शुरुआत करतेहुए बोले)
वैसे आपका लड़का करता क्याँ हैं,,, ?(रोहित केँ बड़े पिताजी बोले,,, )
अभि तौ कुछ करता नहि हैं। मगरआज नहि तौ कल जरूरकुछ नां कुछ करने लगेगा वैसे भि हमारे घऱ कां धंधा तोँ हैं हि,,,।
औऱ धंधाकिस चीज कां हैं।
हमारे किराणा कि दुकान हैं,,,,।
(ये सुनकर रोहित केँ बड़े पिता एकदम सें हैरान हौ गए अभि तक वही केवलउन लोगों केँ संग बैठेहुए थें मगर हैरानी केँ भाव उन्होंने अपने चेहरे पर्र आने नहि दिया उन्हें इसबात कि चिंता होनेलगी कि उनकी बेटी इतनी पढ़ी लिखी उसका भविष्य इतना अच्छा हैं औऱ अगर इसकेसंग विवाह हौ गई तोँ उसका तोँ पूरा भविष्य खराब हौ जाएगा लड़का तौ कुछ करता धर्ता हैं नहि पढ़ा लिखा भि नहि लगता औऱ जिस्म सें भि कमजोर हैं,,,, अभि वो यहीसभी सोच हि रहे थें कि तभी ज्योति औऱ उसकी जेठानी कोमल भि वहां पऱ आँ गई वो लोग भि वहीं पर्र बैठगए मगर ज्योति नहि बैठी क्योंकि रोहित केँ बड़े बापू वहां पऱ बैठे थें औऱ रिश्ते मे वो जेठ लगते थें इसलिये जेठ केँ सामने जेठ केँ छोटे भइया कि स्त्री हमेशा घुंघट मे हि रहती थि औऱ जेठ केँ सामने उठती बैठती नहि थि। ज्योति हल्का सां घूंघट लें ली थि,,,, कोमल प्लेट मे मिठाई लेकरआई थि औऱ टेबल पऱ रखतेहुए बड़े हि शालीनता सें बोलि,,, )
लीजिए मिठाई खाईए,,,,,।
जीशुक्रिया,,, (लड़की कि माँ सबसे पहलेहाथ आगे बढ़कर मिठाई उठाते हुए बोलीं औऱ अपनीबात कों आगे बढ़ाते हुए बोलीं,,, ) येसभी तोँ चलते रहेगा बेहनजी लड़कीअगर दिखा देते तोँ मिठाई खाने कां मज़ा हि बढ़ जाता.
सब्र रखिए बेहनजी लड़की भि आँ जाएगी पहले मुंह तौ मीठा कीजिए पानी पीजिए इतनीदूर सें आए हें तोँ थकान तौ लग हि गई होगी,,, (कोमल मुस्कुराते हुए बोलि तोँ उसकीबात सुनकर लड़के कां चाचा औऱ लड़के केँ पिता भि हाथआगे बढ़ाकर मिठाई खानेलगे तभी लड़के कां पिता लड़के कि तरफ देखकर बोला)
तुम् भि लें लो बेटा,,, ससुराल कि मिठाई कुछ ज़्यादा हि मीठी होती हैं,,, (इतना कहकर वो हंसने लगा औऱ उसकीबात सुनकर उसका बेटा भि धीरे-धीरे सें हाथ बढ़ाकर मिठाई लेँ लिया औऱ खानेलगा मौका देखकर रोहित कि बड़ी मां बोलि)
वैसे बेटा कुछ तोँ करते होंगे आखिरकर विवाह करकेजब हमारी बिटिया कों लेँ जाओगे तोँ कमाना तोँ पड़ेगा हि।
इसे कमाने कि जरूरत नहि हैं बेहनजी आगे चलकरयही हमारी दुकान चलाएगा। (पानी कां गिलास हाथ मे लेतेहुए लड़की कि माँ बोलि तौ उसकीबात सुनकर कोमलबोल पड़ी। )
कुछ अजीब नहि लगेगा बेहनजी कल कों हमारी बिटिया टीचरबन जाएगी विद्यालय मे पढ़ाने लगेगी,,, औऱ उसका पति दुकान चलाएगा।
तोँ इसमें क्याँ होँ गय़ा बेहनजी,,,, पति पत्नि दोनों कमाऐंगे,,,,।
बात तौ सहीकह रही हौ बेहन जी,,,, (बीच मे हि ज्योति बोल पड़ी क्योंकि वो अपनी जेठानी केँ मिजाज कों अच्छी तरह सें समझरही थि उसके बातचीत करने केँ ढंग कों समझरही थि वो जानती थि कि इस रिश्ते मे कुछ उन्हें खचकरहा थां,,, ज्योति कि बात सुनकर लड़की कि मम्मी फिन सें बोलीं)
जल्द सें लड़की दिखा देते तौ,,,,
बस बेहनजी 5 मिनट औऱ,,,,,, (ज्योति फिन सें बोलि उसकीबात सुनकर कोमलबोल पड़ी)
जोँ ज्योति देखो तोँ सही रीमा रेडी हुईँ कि नहि।
ठीक हैं दिदी अभि जारही हूं,,,, (इतना कहकर ज्योति रीमा केँ कमरे मे पहुंच गई, वो रेडी हौ चुकी थि,,, रीमा केँ पास पहुंचते हि उसका सुंदर चेहरा देखकर ज्योति कि आंखों मे आंसू आँ गए औऱ वो दोनों हाथों सें अपनी बेटी कि बलाईयां लेतेहुए बोलीं,, )
किसी कि नजर नाँ लगे मेरी बेटी कों,,,।
चाची कहीं तुम्हारी नजर नां लगजाए,,, मेरी दिदी कों रुको मे स्वयं हल्का सां काला टीकालगा देती हुं,,, (इतना कहकर कामीनी अपनीआंख मे सें हल्का सां काजल उंगली पऱ ली औऱ रीमा केँ माथे पर्र हल्का सां लगा दि जिस कामिनी कि हरकत पर्र रीमा भि हंसने लगीये देखकर ज्योति बोलि,,, )
देख्ना ज्योति अधिकमत केहना जितना पूछाजाए उतना हि जवाब देना,,।
हर बार एक् हि हिदायत देती हौ मम्मी मुझेसभी मालूम हैं तुम् चिंता मतकरो औऱ वैसे भि अगरये नाता नहि हुआ तौ फिनआगे मुझे विवसमत करना,,,,
(रीमा कां इतना कहना थां कि क्रोध दिखाते हुए ज्योति बोलि)
शुभशुभ बोल बेटी,,,, ऐसा नहि कहते,,,।
सच मे माँ तुम् तोँ दिदी कों इसघऱ सें भगाने पर्र उतारू होँ चुकी हौ,,,, (अपनी माँ कि बात सुनकर रोहित भि अपनी बेहन केँ कमरे मे दाखिल होताहुआ बोल तोँ उसकीबात सुनकर रीमा उसकीतरफ देखकर मुस्कुराने लगी औऱ बोलि)
तुँ सचकहरहा हैं रोहित माँ हम् भइया बेहन कां प्रेम देखा नहि सकते इसीलिए जल्द सें जल्दईस घऱ सें निकाल देना चाहती हैं,,,,।
तुम् दोनों भइया बेहनफिन सें शुरुआत पड़गए तुँ रोहित रहनेदे इसेचने केँ झाड़ पर्र चढ़ाने कों,,,, कमीनी तूँ बेटा रीमा केँ संग आँ,,,, औऱ तु रीमागरम चाय कां प्लेट अपनेहाथ मे लेँ लें,,,,, जल्द आनां मे जारही हूं,,, (इतना कहकर ज्योति कमरे सें बाहर् निकल गई औऱ मेहमान केँ पास आँ गई रीमा कों देखकर इसबार ज्योति केँ बड़े बापू बोले,, )
क्याँ हुआबहु बिटिया रेडी हुईँ कि नहि।
होँ गई भइया साहबबस आँ रही हैं,,,,।
(थोड़ी देर मे रीमा माथे पर्र साड़ी कां पल्लू लिएहुए औऱ हाथ मे गरमचाय कां प्लेट लिएहुए अपने कमरे सें बाहर् निकली संग मे रोहित औऱ कामिनी भि थें दोनों रीमा केँ अगल-बगल खड़े थें रीमा बड़े संभाल करआगे बढ़रही थि उसके चेहरे पऱ लज्जा कि लालीछाई हुइ थि उसेइस बात कां डर भि थां कि कहींये लोग भि इंकार करदिए तौ क्याँ होगामगर अभि तक उसने लड़का देखी भि नहि थि थोड़ी हि देर मे वहां टेबल पर्र आकरगरम चाय कां प्लेट रख दि औऱ खड़ी होँ गई हैं देखकर कोमल बोलीं,,, )
अपनेहाथ सें दो रीमा,,,,।
जी मां जी,,,, (इतना कहकर वहांगरम चाय कां कप आरामसे सबको पकड़ाने लगी औऱ जैसे हि वो गरमचाय कां कप अपने होने वाले पति कि तरफआगे बढ़ाई तोँ उसे देखकर तौ रीमा कां होश हि उड़ गय़ा पतला दुबला सां बिल्कुल भि आकर्षक नहि थां ये देखकर उसकादिल बैठाजा रहा थां उसेसमझ मे नहि आँ रहा थां कि वो क्याँ करें,,,, औऱ लड़की देखकर लड़की कि मम्मी बहोत खुशनजर आँ रही थि औऱ यही खुशी बाकी केँ भि चेहरे पर्र साफ दिखाई देरही थि लड़के कां पिता लड़के कां चाचा औऱ स्वयं लड़का भि बहोत खुश थां,,, सबकोगरम चायथमा कर रीमा एक् तरफ खड़ी होँ गई ये देखकर कोमल बोलीं,,, )
देख लीजिए ठीक सें यही हमारी बिटिया रानी हैं औऱ आने वाले दिनों मे टीचरबन जाएगी अच्छे खासेपद पऱ नियुक्त होँ जाएगी,,,,, तुम्हारे घऱ कि शोभा बढ़ाएगी।
लड़की तौ हमें बहोत मनपसंद हैं,,, क्यूं जी,,, (कोहनी सें अपने पति कि तरफमार कर इशारा करतेहुए बोलि औऱ लड़की कां पिता भि एकदम सें बोल पड़ा)
हां हां क्यूं नहि लड़की हमें बहोत मनपसंद हैं,,,,।
कुछ पूछना चाहते हें तौ,,, (रोहित केँ बड़े पिताजी बोले तोँ उसकीबात सुनकर लड़के कां पिता बोल पड़ा)
नहि नहि कुछ पूछना नहि हैं हमें तौ लड़की पहलीनजर मे हि मनपसंद आँ गई हैं,,,,
कुछ दहेज वगैरह,,,,,।
नहि नहि हम् लोग दहेज केँ खिलाफ हें हमे एक् पैसा भि दहेज नहि चाहिए बसये चाहते हें कि जल्द सें जल्द आपकी बेटी हमारे घऱबहू बनकर आँ जाए,,,,
(ये सुनकर तौ ज्योति केँ चेहरे पर्र खुशी केँ भावनजर आनेलगे वो एकदमखुश होँ गई कि नाता एकदम पक्का हौ गय़ा हैं औऱ वो भि बिना किसी लेनदेन केँ,,,, ज्योति बहोत खुशनजर आँ रही थि वो मन हि मन ईश्वर कों शुक्रिया देरही थि। लड़के वाले बहोत खुशनजर आँ रहे थें लड़के केँ मन मे तोँ अभि सें लड्डू फूटरहे थें रीमा कों देखकर,,,, रीमाजब वापस जानेलगी लड़के कि नजर रीमा केँ पिछवाड़े पर्र हि टिकी हुई थि इसबात कां एहसास कोमल कों अच्छी तरह सें हौ गय़ा थां औऱ वो मन हि मनउस लड़के कों गाली भि देरही थि,,,,, रीमा अपने कमरे मे जा चुकी थि औऱ संग मे कामिनी औऱ रोहित भि जा चुके थें तभी लड़के कां पिता बोला,, )
देखो भइया साहब मे चाहता हूं कि ये विवाह जल्द सें जल्द हौ जाए मेरी मानो तौ अगले महीने कि दोनों कि विवाह कर देते हें तुम्हारे भि सर सें बोझउठ जाए,,,, औऱ हमारे भि अरमान पूरे हौ जाए,,,, (इतना सुनते हि रोहित केँ बड़े पिता एकदम सें बोल पड़े)
किसने कह दिया कि हमारी बेटी हमारे सर पर्र बोझ हैं,,,, वो हमारा गर्व हैं,,,,।
देखिए मेराये कहने कां मतलब नहि थां मे अच्छी तरह सें जानता हूं कि जवान लड़कीअगर घऱ मे होँ तौ मम्मी-बाप पर्र कितनी चिंता रहती हैं।
ऐसाकुछ भि नहि हैं हमारी लड़की टीचर बनने वाली हैं औऱ रहीबात इस रिश्ते कि तौ,,,, सही कहूं तौ ये नाता हमें मनपसंद नहि हैं।
ये क्याँ कहरहे हें भइया साहब,,, (लड़के कि माँ एकदम चिंता व्यक्त करतेहुए बोलीं,, )
हम् बिल्कुल ठीककह रहे हें बेहनजी कोईजोर जबरदस्ती नहि हैं हमारी लड़की पढ़ी लिखी हैं ग्रेजुएट हैं टीचर बनने वाली होँ औऱ आपका लड़का मुझे नहि लगता हैं कि 8 सें ज़्यादा पढ़ा होगा,,,।
पढ़ा नहि हैं तोँ क्याँ हुआकमा तोँ सकता हैं नाँ।
अभि तौ वो बिल्कुल भि नहि कमाता,,,
कल कों तोँ काम आएगा नां औऱ वैसे भि विवाह केँ बाद पैसे कि जरूरत पड़ती हैं पढ़ाई कि नहि।
ये केवल आपकीसोच हैं,,,,, जौ हमें मनपसंद नहि हैं,,, सांप शब्दों मे कहूं तौ मुझेये नाता बिल्कुल भि पसन्द नहि हैं हमारी लड़की हमारे सर कां बोझ नहि हैं।
(अपने जेठ कि बातों कों सुनकर ज्योति कां दिलबैठ जारहा थां वो परेशान हौ जारही थि चिंता केँ भाव उसके चेहरे पर्र साफ दिखाई देरहा थां मगर वहीं दूसरी तरफ कोमल निश्चिंत थि लड़के कों देखने केँ बाद वो स्वयं ये नाता नहि चाहती थि मगरकुछ बोल नहि पाई थि मगर अपने पति कों केहना देखकर उसे संतुष्टि होँ रही थि,,,,, रोहित केँ बड़े बापू कि बात सुनकर लड़के वालेसमझ चुके थें कि अब यहां पऱ दाल गलने वाली नहि हैं वो लोग भि अपने लड़के कि काबिलियत सें अच्छी तरह सें वाकिफ थें वो जानते थें कि उनका लड़का पूरीतरह सें अनपढ़ हि थां,,, वो तोँ चाहते थें कि जैसे तैसेये नाता होँ जाए इसीलिए तौ दहेज भि नहि मांगते थें मगर दहेज नं लेने पर्र भि यहां पर्र काम नहि बना थां। इसलिये क्रोध दिखाते हुए लड़की कां पिता अपनी स्थान सें उठकर खड़ा हौ गय़ा औऱ बोला,,, )
ये अच्छा मजाक हैं अगर विवाह करना हि नहि थां तौ यहां पऱ बुलवाया हि क्यूं,,, ?
हम् नहि जानते थें कि आपका लड़का बिल्कुल भि पढ़ा लिखा नहि होगा।
विवाह केँ बाद पढ़ाई नहि रुपया हि कामआता हैं इतनासमझ जानां,,,,, चलोअब अपना यहांकोई काम नहि,,,, (उसके कहने केँ संग हि बाकी केँ लोग भि उठकर खड़े हौ गए औऱ वो लोग भि मुंह बनाकर घऱ सें बाहर् निकलगए,,,, उन लोगों केँ जआते हि ज्योति दुखी होतेहुए बोलीं)
अच्छा नाता तोता भइया साहब एक् पैसा भि दहेज नहि लेँ रहे थें।
किसी बातें कररही हौ बहु हमारी बिटिया क्याँ फेंकी हुईँ हैं उसेदिन केँ लिए पढ़ा लिखाकर ग्रेजुएट किए थें कि किसी केँ भि ऐरे गेरे केँ हाथ मे दे देंगे देख नहि रही हौ लड़का कितना मरियल सां थां कमाता भि नहि हैं औऱ अनपढ़ हैं इस लड़की केँ संग शादी करके क्याँ हमारी बिटिया खुशरह पाएगी।
( ज्योति केँ जेठ कां इतना कहना थां कि तभी कमरे मे सें बाहर् निकलती हुइ उनकी लड़की कामिनी बोल पड़ी,,, )
क्याँ चाची तुम् भि बेवकूफी करनेजा रही होँ,,,, लड़का नां तौ मुझे पसन्द हैं नाँ तौ दिदी कों होना हि रोहित मुझे तोँ समझ मे नहि आता कि तुम्हें केसे मनपसंद आँ गय़ा हैं,,,,
। कामिनी सचकहरही हैं मां सच मे तुम् इतनी बड़ी गलती करनेजा रही थि दिदी कों तौ देखो वो तोँ रोनेलगी थि,,,,।
बहू विवाह शादी केँ जोड़े तौ ऊपर सें हि बनकरतय होते हें हमें तौ मात्र औपचारिकता हि निभानी होती हैं अच्छा नाता स्वयं ब स्वयं अपने आप् हि आँ जाएगा तुम् बिल्कुल भि जल्दबाजी मतकरो मे जानता हूं कि तुम्हें किसबात कि चिंता हैं मगर चिंता कों एक् तरफरख दो अपने बेटी कां भविष्य देखो अच्छे हाथों मे उसे दोगी तौ तुम्हें भि बाद मे संतुष्टि मिलेगी खुशी होगी,,,,,,
कामिनी केँ बापूसच कहरहे हें ज्योति तुम् सच मे जल्दबाजी कररही होँ अगर शायद हम् दोनों नां होते तोँ तुम् इस रिश्ते केँ लिए सजधजकर होँ जाती,,,,,।
(घऱ मे सब लोगों कि राय एक् हि थि सिवाय ज्योति केँ इसलिये उसे भि एहसास होनेलगा कि वो गलतीकर रही थि,,,,,, इसलिये वो कुछबोल नहि पाई,,,,, वो केवल इतना बोलीं,,, )
सच कहूं तोँ मुझेकुछ समझ मे नहि आँ रहा हैं अच्छा हुआ कि आप् लोग मेरेसंग हें।
इसीलिए तोँ हम् लोग तुम्हारे संग हें रीमा केवल तुम्हारी हि बेटी नहि हैं हम् लोगों कि भि बड़ी बेटी हैं। इसलिये हम् लोगसोच समझकर हि फैसला लेंगे औऱ वैसे भि उसे टीचरबन जाने पऱ रिश्तो कि लाइनलग जाएगी तुम् चिंता मत करो,,, (रोहित केँ बड़े पिता उसे समझाते हुए बोले तौ शायदउसे भि ये लगनेलगा कि वो गलती करनेजा रही थि थोडा औऱ प्रतीक्षा कर लेती हैं,,,,,, थोड़ी देर मे रोहित कि बड़ी मां औऱ बड़े पिता केँ संग-संग कामिनी भि जा चुकी थि,,,, रीमा ज्योति केँ कमरे मे गई औऱ ज्योति कि तरफ देखने लगी तौ ज्योति अपनी माँ केँ गलेलग कर रोनेलगी,,,, उसे रोताहुआ देखकर रीमा कां भि कलेजा फटनेलगा वो उसे दिलासा देतेहुए बोलीं)
तुँ बिल्कुल भि चिंता मतकर बेटी अब मे तुम्हारी तरफ विवाह केँ लिए बिल्कुल भि दबाव नहि दूंगी तुँ जोँ बनना चाहती हैं पहले वो बनजाअब सादी तेरी मर्जी सें हि होगी,,,,,।
(अपनी माँ कि बातें सुनकर रीमा एकदम सें अपनी माँ केँ गले सें ओरकस केँ लग गई,,,,, औऱ इतने मे रोहित भि उन लोगों केँ पीछे जाकर पीछे सें उन दोनों केँ कंधे पर्र दोनों तरफ सें अपनाहाथ रखकर खुशी मे शामिल होतेहुए बोला,,, )
इतनी जल्द दिदी तुम्हें जाने थोड़ी नां,, दूंगा,,,, (रोहित एकदम खुशी केँ माराइस तरह सें पीछे सें अपनी मम्मी औऱ अपनी बेहन केँ गलेलगा थां मगर हम् जाने मे भि उसके टांगों केँ बीच कां कड़कपन जौ कि औपचारिक रूप सें अपने आप् हि कड़क होँ चुका थां वो सीधे ज्योति कों अपने नितंबों पर्र महसूस हुआ औऱ वो एकदम सें सिहरउठी,,,, येसभी बिल्कुल सामान्य थां जिसका एहसास रोहित कों बिल्कुल भि नहि हुआ थां मगर इसका एहसास ज्योति कों हुआ थां,,,, इस घटना कों दो-तीन दिन गुजर चुके थें,,,, सबकुछ सामान्य चलरहा थां।
तकरीबन सुभह 5:00 बजे ज्योति कि नींदखुल गई वो खाट पऱ लेटे-लेटे दीवार पऱ टंगी घड़ी कि तरफदेख रही थि दीवार पर्र टंगी घड़ी मे 5:00 बजरहे थें अभि भि उसकेपास टाइम थां इसलिये वो लेटीरही,,,, एकदम शांत,,,,, औऱ कहते हें नां शांत औऱ खालीमन शैतान कां घऱ होता हैं शांतमन मे अधिक हि उथल-पुथल होता हैं औऱ वही उथल-पुथल ज्योति केँ मन मे होनेलगा अचानक हि उसेउसे दिन कि घटनायाद आँ गई जब वो अपने नितंबों पऱ अपने बेटे केँ कड़कपन कां एहसास कि थि।
सिसकारियां,,,,, - Hindi Sex Story - Next part mein bada twist
Relavant source : click here











